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Thanks brotherवाह, बहुत बढ़िया जा रहे हो...
Keep it up!![]()

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Bechara lalchandBhut hi badhiya update Bhai
Aur bechara lalchand yaha pighal gaya

Bilkul bhai, or wo is liye ki uski jaan khatre me thi.Bhut hi shandar update bhai
Chandan ko bhut saste me nipta diya
Ragini pahle somya ki problem solve karne me lag gayi hai


#18
मेरी बात सुनकर सौम्या ने सहमति में अपनी गर्दन हिलाई और गाड़ी को आगे बढ़ा दिया।
अभी गाड़ी कुछ ही मीटर आगे बढ़ी थी कि एक साथ दो गाड़िया ठीक हमारे सामने आकर रुकी और उसमे से तकरीबन सात आठ लोग उतरकर हमारी गाड़ी की ओर बढ़े।
इतने लोगो को अपनी गाड़ी की तरफ आते हुए देखकर सौम्या के चेहरे पर भय के चिन्ह साफ देखे जा
सकते थे। लेकिन मेरी पिस्टल पर मेरी उंगलियां कस चुकी थी।
उनमे से एक लड़के ने आकर हमारी गाड़ी के शीशे पर खटखट की। सौम्या अभी भी भयभीत नजरो से उन लड़कों की ओर देख रही थी।
मैंने सौम्या की ड्राइविंग सीट पर ही बैठे रहने का इशारा किया और खुद दरवाजा खोलकर गाड़ी से बाहर आ गई।
"क्या तकलीफ है" मैंने उस लड़के की आँखों मे आँखे डाल कर पूछा।
"इतनी खूबसूरत लडकिया कभी इस इलाके में देखी नही थी, इसलिए रोकने का दिल कर गया" उसने बदतमीजी से मेरी तरफ अपने हाथ को बढ़ाकर मुझे छूने की कोशिश की, लेकिन मैं पलक झपकते ही उसकी पहुंच से दूर हो गई।
"सच बोलो ! किसके कहने पर हमे रोका है, नही तो एक भी बन्दा अपने पैरों पर वापिस नही जाएगा" मैंने उनकी तरफ देखते हुए बोला तो वो सब बाहुबली दांत चियार कर हँसने लगे थे।
शायद एक लड़की के मुंह से ऐसे शब्द उन शोहदों ने पहली बार सुने थे, लेकिन मुझे वे लोग शोहदे नही लग रहे थे, शोहदे दो गाड़ियों में इस तरह से लड़कियों को छेड़ने के लिये नही निकलते है।
आसानी से वे लोग मुझे बताने वाले लग नही रहे थे। उनसे कुछ उगलवाने के लिए उनकी खाल में भूसा भरना जरूरी था।
"बहुत हँसी आ रही हैं, मैने कोई जोक सुनाया था क्या" ये बोलकर मेरा एक पाँव हवा में लहराया और उस छपरी को अपने साथ लपेटते हुए सामने वाली दीवार से चिपका दिया।
इस वक़्त वो बन्दा दीवार से चिपका हुआ था और मेरा पाँव उसकी गर्दन पर था। ये मेरा पसंदीदा दांव था, लेकिन दिल्ली जैसे शहर में आजमाने का मौका कम ही मिलता था।
अपने साथी की ऐसी हालत हो जाने का तो बाकी लोगो को सपने में भी गुमान नही था।
तभी दो लड़कों ने एक साथ मुझ पर अपने हाथों के मुक्के बनाकर मेरी ओर चलाये, मेरी पाँव की फ्लाइंग किक अब उस बन्दे की गर्दन का त्याग करके उन दोनो लड़को की ओर घूमी, और यकीन मानिये पूरे डेढ़ सौ किलोमीटर की रफ्तार से वो किक उन दोनों को एक साथ अपने साथ बहाकर ले गई।
वो सभी छिछोरे मेरी तरफ ऐसे देख रहे थे की मानो उनकी जिंदगी में कोई जलजला आ गया हो, अब एक साथ उन पांचों लड़को ने मुझें घेर लिया था, लेकिन तब तक सौम्या भी अपनी गाड़ी से बाहर निकल आई थी, और अपने बैग से अपनी पिस्टल निकाल कर उन लड़कों पर तान चुकी थी।
"सौम्या अभी इन्हें गोली मत मारना, ये साले सिर्फ लातो में ही अभी ढेर हो जायेगे" मेरे ये बोलते ही जैसे वहां कोई बिजली कौंधी हो।
मैंने अपने हाथ मे अपनी पॉकेट से निकाल कर पेन ले लिया था, और इस वक़्त मेरे पांव ही नही मेरे हाथ भी सिर्फ घुमते हुए नजर आ रहे थे, लेकिन उन्हें कोई देख नही पा रहा था, महज तीन मिनट में उन लोगो के चेहरों पर अनगनित निशान उस पेन से कटने की वजह से बन गए थे और वे सभी अपने चेहरों को अपने हाथों से छुपाए हुए दर्द से कराहते हुए जमीन पर लोट लगा रहे थे।
तभी मैंने उनमे से एक बन्दे को उसकी गिरेबान पकड़ कर उठाया और अपनी दो उंगलियों को उसकी आँखों के पास लहराया।
"अब दो सेकेण्ड में बता की किसके कहने पर यहां आए थे, नही तो तेरी दोनो आंखे अभी हमेशा के लिए बुझ जायेगी और तू अंधा होकर घूमेगा" मैंने बर्फ से भी सर्द स्वर में उसे बोला। तब तक सौम्या भी मेरे करीब आकर खड़ी हो चुकी थी।
"हमारे पास तो चंदन भाई का फोन आया था, की इस मकान में कोई भी आये तो उन्हें पकड़ कर उनसे पूछताछ करना कि वो यहां क्यो आये है" उस लड़के की अंधा होने के नाम से ही उसके पिछवाड़े से हवा निकल चुकी थी, इसलिए वो बिना रुके बोल रहा था।
"ये चंदन कौन है" मैंने उससे अगला सवाल किया।
"नांगलोई में रहता है जी, नजफगढ़ रोड पर एक कॉलोनी है, उसमे रहता है" उस लड़के ने फिर जवाब दिया।
"उसका पता ठिकाना बोल और वो नंबर बता जिस नंबर से उसका फोन आया था" उसने फोरन से पेश्तर मेरे इस सवाल का भी जवाब दिया।
"लेकिन इन लोगो को ऐसे छोड़कर जाएंगे तो ये पहले से ही उस चंदन को खबर कर देंगे" सौम्या मेरी ओर देखकर बोली।
"इस बात का जवाब मै गाड़ी में बैठकर दूँगी, अभी हम जिस काम के लिए जा रहे थे, वो काम ज्यादा जरूरी है, इन टटपुंजियो से तो कभी भी निबट लेंगे" मैने सौम्या को जवाब दिया।
"हॉं तो भाई लोगो ! तुम लोगो की इतनी सेवा ही काफी है या अभी और सेवा पानी करूँ तुम्हारी" मैं एक बार फिर से उन सभी की ओर मुखातिब हुई।
वे सभी इस तरह से बेदम पड़े थे, की बिना पानी पिलाये वे लोग होश में नही आने वाले थे।
"तुम्हारी गाड़ियों में पानी तो होगा न, इन्हे लाकर पिला दे, नही तो रागिनी के हाथ से मार ख़ाया हुआ इंसान चार घँटे से पहले होश में नही आता" मैंने उस लड़के को बोला, जो मेरे सवालो का जवाब दे रहा था, उसके बाद मैं गाड़ी की ओर बढ़ गई।
सौम्या भी फोरन से पेश्तर मेरे पीछे लपकी।
"अब जवाब दो ! इन लोगो को ऐसे ही क्यो छोड़ दिया" सौम्या ने एक बार फिर से ड्राइविंग सीट सम्हालते हुए पूछा।
"अगर ये हरामखोर एक दो होते तो इन्हे बांधकर डिक्की में भी डाल लेते, लेकिन इन आठ लोगो को एक साथ कैसे सम्हालते, इसलिए उनको यही छोड़ना ठीक लगा, अब ये अपने बाप को बोलेंगे की एक लड़की ने उनकी क्या हालत की है तो, अब वो फिर से ऐसी टुच्ची हरकत करनें से बाज आएंगे, दूसरी बात या तो देविका के मकान की निगरानी की जा रही है, या फिर हमारा पीछा किया जा रहा है, अब मैं सेंट्रल जेल के रास्ते तक ये देखना चाहती हूँ कि हमारे पीछे कौन आ रहा है" मैने एक साथ सारे कारण सौम्या को समझा दिए थे।
सौम्या मुरीद नजरो से मेरी ओर देखते हुए मुस्करा दी।
"तुम्हारे हाथ पांव ही नही बल्कि दिमाग भी तेज चलता है" सौम्या ने मुरीद स्वर में ही बोला।
"एक बात समझ नही आई कि ये साले कैसे बदमाश थे, जिनके पास न हथियार थे, न कुछ" सौम्या एक बार फिर से बोली।
"साइक्लोजिकल उन्होंने सोचा होगा कि दो लड़कियां ही तो है, आठ लड़के तो दो लड़कियों को चुटकियों में काबू कर लेंगे, इसलिए या तो वे हथियार लाये नही होंगे, और अगर लाये भी होंगे तो उन्हें मार खाते हुए साँस लेने की फुरसत तो मिल नही रही थी, हथियार निकालने की कहाँ से मिलती"
मेरी बात सुनते ही सौम्या की एक जोरदार खिलखिलाती हुई हँसी उस गाड़ी में गूँजी। लेकिन मेरी नजर अपने साइड मिरर में अपने पीछे आती हुई गाड़ी को ही ढूंढने की कोशिश कर रही थी।
सेंट्रल जेल तक पहुंचने में तकरीबन एक घन्टा लग गया था। राजीव बंसल के मुलाकातियों का डाटा निकलवाने के मेरे पास दो तरीक़े थे, एक तरीका था एक बार फिर से मैं एसीपी शर्मा जी को परेशान करती, जो कि मुझें इस बार गवांरा नही हुआ।
दूसरा रास्ता था कि मैं मुलाकाती कक्ष में जाकर गुरू की स्टाइल में कुछ चक्कर चलाऊँ और अपना काम निकाल लूं। इस समय मुझे गुरु की स्टाइल में इस काम को अंजाम देना सही लगा।
मैं सौम्या के साथ जेल के उस मुलाकाती कक्ष में पहुंची। वहाँ इस वक़्त उस दिन के मुलाकातियों का
तांता लगा हुआ था।
मेरी नजर किसी ऐसे काम के बन्दे को ढूंढ रही थी, जो मेरे काम को दिलचस्पी लेकर कर दे।
तभी एक सिपाही एक रजिस्टर को हाथ में थामे हुए मेरी बगल में से गुजरा। मैं पता नही क्या सोचकर उस सिपाही के पीछे चल पड़ी।
वो सिपाही कुछ लोगो के पास जाकर खड़ा हुआ, उन लोगो मे से एक बन्दे ने उस सिपाही का हाथ अपने हाथ मे पकड़ा और उसकी हथेली में एक नोट फंसाकर उसकी हथेली को बन्द करने लगा।
वो सिपाही गर्दन भले ही न में हिला रहा हो, लेकिन उसकी मुट्ठी लगातार उस नोट को भींचने में लगी हुई थी।
जिस प्रकार के बन्दे को मैं तलाश रही थी, वो मेरी नजर के सामने था, थोड़ी सी न नुकर का ड्रामा करके उस सिपाही ने उस नोट को अपनी जेब के हवाले किया और उन लोगो को कुछ बोलकर वापिस हमारी और ही आने लगा था।
जैसे ही वो मेरे पास से गुजरा, मैने उसकी पट्टिका पर लिखा हुआ नाम पढ़ा। जिस पर मोटे अक्षर में लालचंद लिखा हुआ था।
"लालचंद जी" उसका नाम पढ़ते ही मैने उसे आवाज लगा दी थी। जैसे ही उसके नाम की आवाज उसके कानों में पड़ी, उसके कदम जहाँ के तहाँ रुक गए।
उसने पलट कर हमारी और देखा, मैंने उसके देखते ही एक मतलबी मुस्कान उसकी तरफ फेंकी। उसने भी अपने पांव उलटे खिंचने में पल भर की भी देरी नही लगाई।
"जी मैडम!आपने ही मुझे पुकारा था" लालचंद ने अपने स्वर में मिश्री घोलते हुए कहा, जिसकी आमतौर पर पुलिसियो से अपेक्षा नही की जाती थी, क्यो कि वर्दी पहनते ही एक आम पुलिसिये की चाल में और आवाज में एक अजीब सा अक्खड़पन आ जाता है।
लेकिन इस वक़्त मेरा उस मिश्री जैसी आवाज का जवाब अपने स्वर में गुड़ की देशी मिठास घोलकर देना जरूरी थी।
"जी ! आपसे एक काम है, दो मिनट के लिए आपसे बात कर सकते है" मैने लालचंद को बोला।
"जी बोलये मैडम, मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ" लालचंद अभी तक मिश्री की डली ही बना हुआ था।
"कही बैठकर बात हो सकती है क्या आपसे" मैंने अब दो मिनट से ज्यादा का कार्यक्रम उसे समझाया।
"मैडम मैं अभी पांच मिनट में एक आर्डर की कॉपी अपने साहब को देकर अभी हाजिर होता हूँ, फिर बात करते है" लालचंद ये बोलकर वहां रुका नही क्यो की अभी शायद उसी आर्डर के पहिये उन लोगो ने लगाए थे, जिनके पास से अभी नोट अपनी जेब मे डालकर आया था।
हमे कोई दस मिनट के बाद लालचंद ने ले जाकर एक कमरे में बैठा दिया और खुद भी एक कुर्सी खींचकर हमारे पास ही बैठ गया।
"बोलिये मैडम, क्या काम है आपको" लालचंद ने पूछा।
"एक उम्र कैदी की पिछले दो साल की जानकारी चाहिये कि उससे किस किस ने जेल में आकर मुलाकात की" मैंने बिना कोई भूमिका बनाये हुए ही सीधा बोला।
"आप कौन हो मैडम, ऐसा काम करने के लिए हमे आज पहली बार किसी ने बोला है" लालचंद ने असमंजस से मेरी ओर देखा।
"काम भले ही किसी ने पहली बार बोला है, लेकिन काम इतना मुश्किल भी नही है, तुम्हे बस दो साल के रजिस्टर ही चेक करने होंगे" मैंने लालचंद को बोला।
"अब रजिस्टर नही चेक करना पड़ता, सब कम्प्यूटर में चेक करना पड़ता है" लालचंद ने बिना पूछे ही बताया।
"ये तो और भी आसान है लालचंद जी, और इस आसान से काम के मै आपको पांच हजार रु दे सकती हूँ" मैंने उसके आगे चुग्गा फेंका।
"लेकिन आपने अभी तक नही बताया कि आप हो कौन" लालचंद को फिर से अपना पुराना सवाल याद आ गया था।
"मैं एक प्राइवेट डिटेक्टिव हूँ, मुझे एक केस के सिलसिले में उस कैदी की डिटेल चाहिए" मैंने अपना वास्तविक परिचय दिया।
"केस क्या है" लालचंद को पूरी कहानी जाननी थी।
"यार तुम आम खाओ न, गुठलियां गिनने के चक्कर में क्यो पड़े हो" मैंने इस बार उसे हल्का सा हड़काया।
"मैंने अगर ये काम किया तो, जिंदगी में पहली बार ऐसा काम करूँगा, मैं ये जानना चाहता हूँ कि इस काम से मेरी नौकरी को तो कोई खतरा नही हैं" लालचंद को अपनी नौकरी के बारे में फिक्रमंद होना भी लाजिमी था।
"ये जो मैडम मेरे साथ बैठी है, इनके पति है वे, जिनकी डिटेल हमे निकलवानी है, वो एक मर्डर के केस में उम्रकैद की सजा पा चुके है, मैडम उनसे तलाक लेकर अपना घर फिर से बसाना चाहती है, अब तुम्ही बताओ एक क़ातिल की बीवी बनकर कैसे रहेगी ये मैडम समाज मे, क्या इसे अपनी जिंदगी जीने का अधिकार नही है, क्या इसे अपनी नई दुनिया बसाने का अधिकार नही है" मैंने एक भावपूर्ण कहानी उसे सुनाई।
मेरे बोलने के दौरान वो एकटक सौम्या की ओर ही देख रहा था, तभी सौम्या ने उसके हाथ पर अपना हाथ रखा।
जारी रहेगा_____![]()
Mostly wahi kar raha apan, aur abhi to aur bhi manage karna mushkil ho jayega kyoki shadi ke bandhan me bandhne wala hai apan![]()
#19
"लालचंद जी कर दीजिए न हमारी मदद, बड़ी मेहरबानी होगी आपकी, आपके इस एहसान को जिंदगी भर नही भूलेंगे हम, उस राक्षस से हमारा पीछा छूट जाएगा, आपकी कृप्या से" सौम्या ने गजब तरीक़े से लालचन्द को अपने मोहपाश में फांस लिया था।
"ठीक है मैडम आप कैदी का नाम बताइये मै पहले उसका रिकॉर्ड चेक करके आता हूँ, फिर आता हूँ आपके पास, तब तक आप यही इंतजार कीजिये" लालचन्द के ये बोलते ही सौम्या ने उसे राजीव बंसल की पूरी डिटेल लिखवा दी।
डिटेल लेकर लालचन्द अंदर की तरफ जाकर हमारी नजरो से ओझल हो गया। लालचन्द के जाते ही सौम्या ने एक कुटिल मुस्कान के साथ मेरी तरफ देखा।
मै भी उसकी मुस्कान का मतलब समझ कर मुस्करा पड़ी थी।
कोई बीस मिनट के इंतजार के बाद लालचन्द अपने चेहरे पर हल्की सी मुस्कान बिखेरे हमारे पास आया।
"मैडम आप तो बहुत बड़ी हस्ती हो, और इतने बड़े काम को सिर्फ पांच हजार में करवाना चाहती हो" लालचन्द का लालच अब उसकी जुबान से टपक रहा था।
"काम हो जाएगा न" मैंने सौम्या की जगह जवाब दिया।
"सौ प्रतिशत हो जायेगा, लेकिन पांच नही पंद्रह हजार देने होंगे, क्यो कि पांच मुझे कंप्यूटर वाले लड़के को देने होंगे" लालचन्द ने ईमानदारी से अपने हिस्सेदार का भी नाम बताया।
"ठीक है दिए पंद्रह हजार, ये बताओ डिटेल कितनी देर में मिल जाएगी" मैंने एक पल की भी उसकी बात को मानने में देरी नही की।
"आप एक घन्टा कैंटीन में बैठिये, मैं डिटेल लेकर वही आता हूँ" लालचन्द ने चमकते हुए चेहरे के साथ कहा।
उसकी बात सुनकर हम उस कमरे से बाहर कैंटीन की ओर चल दिये। वैसे भी लंच टाइम होने वाला था।
एक घँटे से पहले ही लालचन्द हमारे सामने हाजिर हो चुका था और एक प्रिंट आउट उसने मेरे हाथ मे रख दिया था।
प्रिंट आउट को खोलकर एक सरसरी नजर से उसे देखा, और एक नाम पर नजर पड़ते ही मेरे होठो पर सहसा मुस्कान खिल उठी।
मैंने उस प्रिंट आउट को अपनी जेब के हवाले किया।
"मैडम पैसे आप उस कैंटीन वाले को दे दो" लालचन्द ने सेफ साइड खेलते हुए बोला। मुझे कैंटीन वाले को भी देने में कोई परेशानी नही थी।
मैंने काउंटर पर जाकर उस कैंटीन वाले को अपने खाने के पैसो के साथ ही अपने खाने के बिल का भी भुगतान किया और कैंटीन से बाहर आकर अपनी गाड़ी की ओर बढ़ गए।
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उधर चंदन का भी खून हो चुका था। ओर वो भी तब जब अपनी रागिनी मैडम ने उसे धर लिया था, ओर उसकी खातिरदरी करने के बाद उसे थाने लेकर जा रही थी।
रागिनी और सौम्या इस वक़्त दोनो ही लोकल पुलिस थाने में बैठे हुए थे। चंदन की लाश को पुलिस पोस्टमार्टम के लिए भिजवा चुकी थी।
सभी खाना पूर्ति करने के बाद रागिनी और सौम्या भी लोकल थाने के एसआई दिलबाग चौधरी के साथ थाने में आ चुकी थी।
"तो आप एक प्राइवेट डिटेक्टिव है और आप एक केस के सिलसिले में चंदन से पूछताछ करने के लिए उसके घर पर आई थी, और जब आप पूछताछ पूरी करने के बाद उन्हें उसे उस केस से संबंधित थाने में ले जा रहे थे, तब उसकी किसी अज्ञात बाइक सवार ने गोली मारकर हत्या कर दी" दिलबाग सिंह ने अपनी नजर दोनो के ऊपर जमाते हुए बोला।
"जी हुआ तो कुछ ऐसा ही है, वैसे भी चंदन काफी डरा हुआ सा था, की अगर उसने मुंह खोला तो उसके साथी ही उसे मार डालेंगे, और उसकी आशंका घर से निकलते ही सच भी हो गई" मैंने दिलबाग सिंह की बात का जवाब दिया।
"उस केस के बारे में मुझें डिटेल से बताओ, जिस केस में आप उससे पूछताछ करनें के लिये आई थी" दिलबाग सिंह ने बोला।
"ये सौम्या बंसल है, बंसल इंडस्ट्रीज़ की मालकिन है, तीन साल पहले से इनके पति राजीव बंसल अपने पिता और सौतेली माँ की हत्या के जुर्म में जेल में अपनी उम्रकैद की सजा काट रहे है, उसी राजीव बंसल ने धीरज बवानिया नाम के एक गैंगस्टर को इन्हे मारने के लिए, जेल में रहते हुए सुपारी दी थी, इन्हे मारने की प्लानिंग को सिरे चढ़ाने के लिये ही चंदन जो कि धीरज बवानिया के गिरोह में काम करता था, कई बार जेल में जाकर राजीव बंसल से पिछले छह महीने में जाकर मिला था, उसी सिलसिले में हम लोग चंदन से पूछताछ करने आये थे" मैंने दिलबाग सिंह को बताया।
"ये बात कुछ अजीब नही लगती की जिस महिला को मारने के लिए जिस गैंग ने सुपारी ली हुई है, तुम उस महिला को उसी गैंग के गुर्गों के पास लेकर घूम रही हो" दिलबाग सिंह ने सही बात पकड़ी थी।
"इन्हे साथ मे लेकर घूमना मेरी मजबूरी है, क्यो कि जिन लोगो ने इन्हें मारने की सुपारी ली है, वे लोग इनके आफिस और घर पर इनकी घात लगाए बैठे है, इस बारे में चंदन ने भी हमे बताया था, और इत्तेफाक से ये सुपारी वाली बात भी हमे चंदन ने ही बताई थी" मैंने सफाई दी।
"ओह्ह, इस बात की कोई शिकायत आपने पुलिस में दर्ज करवाई है" इस बार दिलबाग सिंह सौम्या से मुखातिब हुआ।
"जी ! मेरी जान को खतरे की आशंका है, इसकी एक सूचना मेरे घर और आफिस के लोकल थाने में दर्ज है, और मेरे पर्सनल सुरक्षाकर्मी भी मेरे साथ रहते है, लेकिन मुझें उनसे भी ज्यादा भरोसा इन पर है इसलिए मैं इनके साथ रहती हूँ, मैंने इन्हें अपने लिए हायर किया हुआ है" सौम्या ने वक़्त के मुताबिक जवाब दिया।
"इस वक़्त आपके सुरक्षाकर्मी आपके साथ नही है" दिलबाग सिंह पता नही क्यो बेफिजूल के सवाल किए जा रहा था।
"वे मुझे घर से लेकर आफिस तक एस्कॉर्ट करते है, अभी तीन दिन से मैं इनके साथ हूँ, इसलिये वे लोग घर पर ही ड्यूटी कर रहे है" सौम्या ने फिर से जवाब दिया।
"जनाब! हम चंदन के साथ उसकी हत्या के समय क्यो साथ मे थे, इसके बारे में आपको बता दिया हैं, बाकी चंदन आपके इलाके का एक हिस्ट्री शीटर बदमाश था, और जांच में ये बात भी साबित हो जाएगी कि वो गैंगस्टर धीरज बवानिया के गिरोह के लिए काम भी करता था, तो अब हमे जाने की इजाजत मिल सकती है, क्यो कि अभी तक मैडम की जान के ऊपर से खतरा टला नही है, जब वे लोग दिन दहाड़े अपने साथी को मार सकते है तो, मैडम पर या मुझ पर गोलिया चलाने में क्या देर लगायेगे" मैंने दिलबाग सिंह के सवालो से उकताकर बोला।
"ठीक है आप अपना बयान दर्ज करवाकर जा सकती है, आगे की जांच में जब भी आपकी जरूरत पड़ेगी, हमारे बुलावे पर आपको आना पड़ेगा" ये बोलकर दिलबाग सिंह ने अपने एक हवलदार को आवाज लगा कर बुलाया और हमारा बयान दर्ज करने के लिये बोला।
थाने से बाहर निकलने में हमे एक घँटे से भी ज्यादा का समय लग गया था। सौम्या सहमी हुई सी इधर उधर नजर दौड़ाती हुई गाड़ी की तरफ बढ रही थी। कुछ ही पल में हम दोनो गाड़ी में समा चुके थे।
"इतनी डरी सहमी हुई क्यो हो" मैंने सौम्या के चेहरे पर नजर डालते हुए कहा।
"तुम्हारी बात याद करके डर लग रहा हैं, तुमने बोला है न कि वो जब चंदन को इस तरह से दिनदहाड़े गोली मार सकते है तो, फिर मुझे भी तो मार सकते है" सौम्या ने डरे हुए स्वर में बोला।
"अरे यार! उन लोगो को कोई सपना आ रहा है कि इस तरह से तुम दिल्ली की किस सड़क पर ऐसे घूम रही हो, इसके लिए वे लोग तुम्हे तुम्हारे घर से तुम्हे वाच करते, लेकिन अगर हमारे पीछे कोई नही हैं, तो इसका मतलब है कि वे लोग अभी तक तुम्हारे आफिस पर ही नजर रखे हुए है" मैंने सौम्या को दिलासा देते हुए बोला।
"इस प्रकार से तो मैं कभी आफिस ही नही जा पाऊंगी" सौम्या की चिंता भी वाजिब थी।
"मतलब, गुरु से पहले मुझे तुम्हारी समस्या को हल करना पड़ेगा" मैंने सौम्या कि तरफ देखते हुए बोला।
"मतलब" सौम्या की समझ मे मेरी बात नही आई थी।
"मतलब! पहले तुम्हारी आगवानी के इंतजार में खड़े उन टपोरियों की आवभगत हमे जाकर करनी पड़ेगी, इससे पहले की वो तुम पर कहीं कोई हमला करें, हमे उन्हें पहले ही ठिकाने लगाना होगा" मैने उसे अपनी बात का मतलब समझाया।
"ये तरीका ही सही रहेगा, क्या पता उन लोगो के जरिये ही हम लोग धीरज बवानिया और फिर देविका और मेघना तक भी पहुंच जाए" सौम्या को मेरा प्लान पसंद आया था।
तभी मेरे फोन पर मेरे प्यारे खबरी का नंबर चमकने लगा। मैंने तत्काल खबरी के फोन को उठाया।
"संध्या की फैमिली तो अभी गांव में ही रहती है, लेकिन संध्या दो साल से दिल्ली में ही रहती है और वही रहकर कोई कोर्स कर रही थी" खबरी फोन उठाते ही बिना किसी भूमिका के मुद्दे की बात पर आ गया था।
"संध्या के उस गांव वाले आशिक के बारे में ही पता चला" मैने पूछा।
"संध्या के आशिक और अपने गुरु का नाम एक ही है, इस गांव के सरपंच के लड़के का नाम भी रोमेश ही है, लेकिन वो बन्दा अपने गुरु की तरह से ही दिलफेंक निकला और गांव में इश्क संध्या से लड़ाता रहा और फरार किसी और लड़की के साथ हो गया, उसी की याद में संध्या अपनी डायरी के पेज काले करती थी" खबरी ने जो बोला था, उसी बात का मुझे अंदेशा मुझे भी था।
"संध्या के घरवालों को पता चल चुका है क्या की संध्या का कत्ल हो चुका है" मैने खबरी से पूछा।
"जी ! उन्हें पता चल चुका है और उनके कुछ परिवार वाले दिल्ली गए हुए है" खबरी ने बताया।
"ठीक है, अब तुम चाहो तो वापिस आ सकते हो, लेकिन आने से पहले संध्या और उसके आशिक के बीच के इश्क का कुछ प्रूफ लेते आना, जिससे मैं उसकी डायरी में मौजूद गुरु के नाम की क्लेरिफिकेशन यहाँ की पुलिस को दे सकूं" ये बोलकर मैने फोन काट दिया और सौम्या को गाड़ी उसके आफिस की तरफ ले जाने के लिए बोल दिया।
"अभी छह बजने वाले हैं, क्या अभी तक धीरज बवानिया के गुर्गे तुम्हारा इंतजार कर रहे होंगे" मै सौम्या की ओर देखकर बोली।
"लेकिन जिस तरह से तुम जा रही हो, ऐसे तो वो देखते ही मुझे शूट कर देंगे" सौम्या ने मेरी ओर देखकर बोला।
"तुम चिंता मत करो, तुम्हे कुछ नही होगा, तुम फोन करके अपने आफिस में सिर्फ इतना बोलो की आज 8 बजे से पहले कोई जाएगा नही, तुम ऑफिस आ रही हो" मैंने सौम्या को बोला।
"उससे क्या होगा" सौम्या असमंजस से बोली।
"मैं इस आपरेशन को अकेली नही करना चाहती हूँ, मैं दिल्ली पुलिस के साथ इस आपरेशन को करूँगी, मैं अभी एसीपी शर्मा जी से बात करने वाली हूँ, इस पूरे आपरेशन की तैयारी में कम से कम दो घँटे का वक़्त चाहिए, तुम जो खबर अपने आफिस में दोगी, वो खबर उन गुर्गो तक भी जरूर पहुंचेगी" मैंने सौम्या को बोला।
"क्या सच मे, आफिस का ही कोई आदमी इस खबर को उन लोगो तक पहुंचा देगा" सौम्या ने परेशानी भरे स्वर में बोला।
"तुम्हारे आफिस के उस मुखबिर के बारे में हम बाद में पता लगा लेंगे, अभी तुम वक़्त बर्बाद मत करो, जो बोला है उतना काम करो" मैंने सौम्या को बोला।
सौम्या मेरी बात सुनते ही आफिस में फोन करने लगी थी।
इधर मैं शर्मा जी को फोन लगा चुकी थी। शर्मा जी ने मेरा फोन चार पांच बेल जाने के बाद उठाया था।
"कहो रागिनी ! कैसे याद किया! माफी चाहता हूँ कि मैं रोमेश की ज्यादा मदद नही कर पा रहा हूँ, लेकिन मैंने रोमेश से बात की थी, अगर वो निर्दोष है तो उसे कुछ नही होगा" शर्मा जी बिना कुछ कहे ही रोमेश के बारे में सफाई देने में जुट गए थे।
"सर! आप रोमेश की तरफ से बेफिक्र हो जाइये, रोमेश तो कल उस केस से फ्री हो जाएगा, मुझे अभी आपकी मदद एक गैंगस्टर के खिलाफ एक पुलिस आपरेशन के लिए चाहिए" मैने शर्मा जी को बोला।
"बोलो कौन सा गैंगस्टर है, और क्या मामला है" शर्मा जी ने गंभीरता से पूछा।
शर्मा जी के पूछते ही मैं सौम्या का पूरा मामला बताती चली गई, मैंने आज सुबह जेल से राजीव के मुलाकातियों से लिस्ट निकलवाने से लेकर धीरज बवानिया के गुर्गे चंदन की पूरी बात शर्मा जी को बता दी।
"मैं समझ गया रागिनी, मैं अभी डिपार्टमेंट में बात करके, स्पेशल ब्रांच से एक टीम वहां भेजता हूँ, उन लोगो की देखरेख में जो भी संभव हो वो तुम कर सकती हो, मैं अभी पंद्रह मिनट में कालबैक कर रहा हूँ" शर्मा जी ने मुझे आश्वासन दिया।
उसके बाद मैंने फोन काट दिया। तब तक सौम्या भी आफिस में अपने आने की खबर दे चुकी थी।
जारी रहेगा_____![]()
Matlab ju ne bhi suni hai?Wah Bhai Raj_sharma Wah
Ragini ne to in gundo ki ragni bana di (haryanavi ragni vo dada lakhmi chand ki)
Waise Ragini to hero nikli, Romesh se tagda kaam to ye kar rahi haiAisi maar padi he ki zindgai bhar yaad rahegi........
Ab laal chand se puri detail nikal legi ye dono........
Keep rocking bro

Dhoom dhadaka to pakka hai mitraBahut hi shandar update he Raj_sharma Bhai
Jaisa socha tha vaisa hi hua, chandan ka bhi chandan ghis diya gaya............
Sandhya ki diary ko ek perfect plan ke tehat plant kiya gaya tha.........
Ab saumya ke office me bhi dhum dhadaka hone wala he........
Keep rocking bro
Thank you very much for your wonderful review and support bhai, sath bane rahiye 
Bhai miyan 47 ki umar ho gayi he par upnyas 5 sal ki umar se padh rahe hen...