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बहुत बहुत धन्यवादअपडेट अच्छी थी भाई पहले तो दुख हुआ कि इतने जबर्दस्त थ्रीसम के बीच रोहन को कुछ नहीं मिला, उधर प्रकाश भी खूब चूत के मज़े ले रहा है बस रोहन ही सूखा घूम रहा है, पर अंत में उसका सूखा खत्म हुआ और पूर्णिम मिली, आखिरी में हार्ट ब्रेक हुआ पर रोहन अच्छे से सोचे तो जो सोना ने किया वो ही उसने भी किया पूर्णिमा के साथ, या बबली या चांदनी के साथ, तो धोखा तो दोनों तरफ से ही हुआ न, ये सिर्फ मेरा मत है, बाकी लेखक को अधिक पता होगा। आगे का इंतजार है कि इस घटना के बाद रोहन की। विचारधारा पर क्या असर पड़ेगा।
Nice updateTHE NEW JOURNEY
( UPDATE 026 - ? )
UPDATE 026
कभी-कभी ज़िंदगी बहुत शांत होकर चलती है।
इतनी शांत कि लगता है अब तूफ़ान का दौर खत्म हो गया।
सब कुछ अपनी जगह पर बैठने लगा है — रिश्ते, काम, उम्मीदें…दिल और शायद उसकी हसरतें भी।
मुझे भी ऐसा ही लगने लगा था।
लंबे इंतज़ार, टूटन और बेचैन रातों के बाद “सोना” फिर मेरी ज़िंदगी में लौटी थी।
वो दिन आज भी याद था — जब मैने विधाता से कहा था,
"बस एक बार उसे लौटा दो… उसे किसी कीमत पर जाने नहीं दूँगा।"
विधाता ने मेरी पुकार सुन ली थी।
वो लौटी।
हंसी लौटी।
सपने लौटे।
मैने हर डर को, अतीत के हर सवाल को , हर पुराने घाव को दिल के किसी कोने में बंद कर दिया , महज इस शर्त पर कि सोना की वापसी ही मेरे प्रार्थनाओं और विरह के लंबे इंतजार का प्रसाद है ।
लेकिन ज़िंदगी का एक अजीब सा नियम है —
जब सब ठीक लगने लगता है, तभी अतीत चुपके से दरवाज़ा खटखटाता है और कभी-कभी वो हिसाब ब्याज समेत मांगता है। उन छोटे हिसाबों का लेखा जोखा रखना हम बहुत जरूरी नहीं समझते लेकिन असल में उनका भी सूद महंगा पड़ता है ।
एक शाम, जैसे कोई पत्थर शांत झील में गिरता है,
वैसे ही एक सच मेरे दिल में गिरा।
बेवफाई .... वो चुभन जैसा दर्द जो आपके दिल समेत आत्मा में सुराख कर दे , ऐसी न रुकने वाली असहनीय पीड़ा , जिसमें एक बोझ होता है जो आप कभी स्वीकारना नहीं चाहते और उस बोझ का वजन आपको अंदर ही अंदर कुचल देता है
उसका वो आखिरी मैसेज…
"मम्मी ने फोन देख लिया था… इसलिए बात नहीं कर पाऊँगी…"
वो झूठ था।
असल सच्चाई यह थी कि उसने किसी और को — विशाल — को चुन लिया था।
और ये फैसला उसने अकेले नहीं लिया था, दोस्तों की सलाह, उनके बहकावे, उनकी हँसी-मज़ाक के बीच।
मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि —
कैसे कोई अपने प्यार को “फ्रेंड्स की राय” पर तौल सकता है?
कैसे कोई उन प्रार्थनाओं को भूल सकता है, जिनमें किसी ने उसे पाने के लिए रातें जागी थीं?
दिल मानने को तैयार नहीं था।
वो हर पल को दोहरा रहा था —
वो हँसी, वो वादे, वो कसमें।
लेकिन सच का वजन इतना भारी था कि उम्मीद की साँसें घुटने लगीं।
मैने महसूस किया —
शायद ये वही अधूरा हिसाब था,
जो कभी किसी मोड़ पर छूट गया था।
अब ज़िंदगी उसे सामने रखकर कह रही थी —
"लो, अब इसे भी चुकाओ।"
आँखों में नमी थी,
पर भीतर कहीं एक अजीब सी स्थिरता भी। लेकिन सवाल नहीं रुक रहे थे , वो गूंज रहे थे मेरे दिमाग में , फटकार रहे थे मुझे , मेरी नाकामयाबी पर , मेरी हस्ती पर , कैसे कोई मुझे धोखे में रख कर खेलता रहा मेरे जज्बातों से।
इसके बाद मेरा टूटा मन मुझे एक गहरे और न खत्म होने वाले अंधेरे की ओर ले रहा जा रहा था ... एक ऐसी दहलीज की तरफ जहां अंततः मौत ही उसे इनसब से बाहर निकालने का अंतिम रास्ता नजर आती है
लेकिन तभी मेरा मोबाइल तेज घरघराहट से बज उठता है , वो मोबाइल जिसको मैंने दूर फर्श पर दूसरी तरफ की दिवाल की ओर फेंका था
कमरे के सन्नाटे को चीरती हुई रिंगटोन थोड़ा मुझे इरिटेट कर रही थी , न चाहते हुए भी उठ कर उस तरफ गया और मोबाइल पर आ रही कॉलर आईडी को देखकर अपनी आंखे बंद कर भौंहें सिकोड़ ली, एक लंबी गहरी सांस
: ये क्या किया मैने !!
एक अपराध भाव
खुद से ना खत्म होने वाली घृणा की भावना
जिन्दगी मेरे सामने अतीत और मेरे कर्मों का एक और हिसाब लिए खड़ी थी
उन पन्नों की फड़फड़ाहट की गूंज मेरे दिमाग में नया तूफान ला खड़ी कर चुकी थी
वो रिंग टोन की धुन किसी तीखी चुभन से मेरे मन को और कोंच रहे थे
मैने कॉल पिक किया
: हाय सर , मै निकल रही हूं आयेंगे आप भी ( ये पूर्णिमा की आवाज थी )
मै ठहरा , समझ नहीं आया कि क्या करूं । पूर्णिमा के जाने के 2 घंटे तक तो मै ऐसे ही था एक जगह
: अह नहीं ( एक लंबी गहरी सांस ) तुम जाओ मै थोड़ा रुक कर आऊंगा
: ओके सर , एम वेटिंग हीही ( उसकी खनक भरी रिप्लाई का कारण जान रहा था )
मैने कॉल कट कर दिया लेकिन मेरी दिमाग में वो गूंज अब और बड़ा आकार ले रही थी , उसमें शामिल पूर्णिमा की वो कामुक चीखे जो उसने मेरे ही बिस्तर में बीते रात ली थी मेरे साथ ,
अब तो मै खुद की नजरो में गिर गया था
निशा ने तो कम से कम मुझसे अपनी बेवफाई का इकरार तो किया , क्या मुझमें वो हिम्मत है कि मै उसे कह सकूं ।
कमरे में सन्नाटा फिर अपने पैर पसारने लगा था
लेकिन भीतर जो शोर उठ चुका था, वो रुकने का नाम नहीं ले रहा था।
मै दीवार से टिक कर खड़ा रह गया।
हाथ में मोबाइल था… और हथेली पसीने से भीगी हुई।
निशा की बेवफाई ने मुझे तोड़ा था,
लेकिन पूर्णिमा की खिलखिलाहट ने मुझे मेरे ही सामने नग्न कर दिया था —
चरित्र के आईने में।
बीती रात…
वो बस एक क्षणिक भागना था,
एक खोखली जीत,
एक घायल अहंकार की सस्ती मरहम।
सोचा था कि वो खुद को साबित कर दूंगा
कि मै कमजोर नहीं हूं
लेकिन सुबह हुई और वासना का अंधेरा छटना शुरू हुआ फिर समझ आया —
मै आगे नहीं बढ़ा था…
मै गिरा था।
मेरे मन में पूर्णिमा की आवाज़ गूंज रही थी,
उसकी हँसी, उसका छेड़ना…
लेकिन उस सबके पीछे एक और आवाज़ थी —
मेरी अपनी अंतरात्मा की।
“निशा ने कम से कम सच कबूल किया…
क्या मैं कर सकता हूँ?”
मैने खुद से पूछा —
क्या मैं निशा को फोन कर सकता हूं और कह सकता हूं कि
“तुमने बेवफाई की… लेकिन मैं भी उतना ही दोषी हूँ”?
कमरे की खिड़की से आती हल्की हवा में परदे हिल रहे थे।
मैने महसूस किया —
मौत एक पल की खामोशी दे सकती है,
लेकिन जवाब नहीं दे सकती।
जो दहलीज मुझे खींच रही थी,
वो दरअसल भागने की दहलीज थी।
मै धीरे से फर्श पर बैठ गया।
आँखें बंद कीं।
अचानक एहसास हुआ —
दर्द सिर्फ निशा के जाने का नहीं है,
दर्द ये है कि मैने अपने ही वादों को तोड़ दिया।
उन शब्दों को…
“किसी भी हालत में उसे जाने नहीं दूँगा।”
मै उसे रोक नहीं पाया,
और खुद को भी नहीं।
मोबाइल फिर हाथ में था।
स्क्रीन पर दो नाम थे —
निशा…
और पूर्णिमा।
दोनों के बीच मै खुद था —
एक टूटा हुआ, उलझा हुआ इंसान।
वक्त कैसे बीत रहा था पता नहीं चला
आज का ऑफिस स्किप हो गया
पूर्णिमा का वापस कॉल आया तो मैने बहाना कर दिया कि दीदी के यहां जाना है और रात में भी खाली नहीं रहूंगा । तो पूर्णिमा के कहा फिर वो भी दो दिन के लिए घर चली जा रही है ... मैने उसे रोका नहीं और छुटी दे दी ।
फिर देर शाम तक वापस अमर का कॉल आया , वो घर पर बुला रहा था लेकिन मूड कुछ सही था नहीं तो मैने उसे भी संडे को आने का बोल कर मना कर दिया ।
शाम गहरा रही थी और आज मैने निशा को कॉल तक नहीं किया
न कोई मैसेज न रिप्लाई
रात के 08 बजे उसका मैसेज आया hii का
न कुछ खास अहसास
न कुछ उत्साह
बस एक खामोशी एक चुप्पी
जो मै महसूस कर सकता था अपने भीतर उसके एक शब्द के मैसेज में
05 मिनट बाद व्हाट्सअप पर भी मैसेज आया
: Hyy
मै शांत रहा मैसेज सीन किया
: sorry Babu( उसने वापस मैसेज किया )
उसका मैसेज पढ़ते ही और Sorry Babu, देखते ही मेरा दिल भर आया और फफक पड़ा मै
आंखे , मन , आत्मा सब एक साथ सिसक पड़े , मानो पूरी कायनात मेरे मन की पीड़ा को महसूस कर रही हो ।
मै :its ok
निशा : kuch khaye ap ?
ध्यान ही नहीं रहा कि भूख जैसी कोई चीज महसूस हो रही थी अबतक
उसका पूछना और ख्याल आना कि कल रात के बाद से एक निवाला नहीं गया पेट में ... जल्द ही मरोड़ उठने लगी
मै : Nhi !! Aur ap ?
निशा : kuch kha lo n ap plzz
मै : hmm ok , aap v khaa lo.
महसूस हो रहा था कि वो भी बिन कुछ खाए पिए होगी । सुबह तो जैसे निकल गई होगी , दिन में ड्यूटी पर भी नहीं खाई होगी , लेकिन घर पर कैसे नहीं खाएगी । मम्मी के सामने क्या बहाना रह जाएगा उसके पास , और इतना सब होने के बाद भी उसने मुझे पूछा वही काफी था मेरे लिए
इतना सब कुछ कहने बाद भी वो जिस हिम्मत से मुझसे बाते कर रही थी वो महसूस करा रहा था कि मेरी मुहब्बत की क्या जगह है उसके दिल में ।
: kya bnaoge? ( उसका मैसेज आया )
: order karunga ( मैने रिप्लाई किया )
: ok , kha kar msg karo
: hmmm ok
मैने रिप्लाई किया और शांत हो गया
थोड़ी देर बाद 09 बजे वापस उसका मैसेज आया ।
: call kru
: ha kro ( मैने रिप्लाई किया )
फिर वो voice call करने लगी
मैने पिक किया
: हाय ( उसका गला खराब था साफ पता चल रहा था , आवाज बैठी थी , नाक के सुरकने की आहट , समझ गया कि उसने भी बहुत आंसू बहाए होंगे )
: हाय ( मै फीकी आवाज में बोला )
: कैसे हो बाबू ( वो थोड़ा फफक कर खुद को संभालते हुए बोली )
मै शांत रहा , क्या जवाब देता उसको कि क्या हालत है मेरी , शायद वो ही मुझे ज्यादा समझती थी।
: सॉरी ( उसके सिसकने की आवाज आई और रोने की भी ) मुझे माफ कर देना प्लीज
वो रोने लगी लगातार , मै शांत रहा थोड़ी देर तक
: बात भी नहीं करोगे न मुझसे अब ( वो बोली )
मानो उसने मान लिया हो कि मैने ये रिश्ता खत्म करने का फैसला कर लिया था
: नहीं ( आधी अधूरी आवाज में बोला और गले को खराश कर ) उम्हू ऐसा तो नहीं कहा मैने
: कुछ पूछोगे नहीं
: क्या ? ( मै बोला )
: वही जो आपके मन में चल रहा होगा , मैने क्यों किया ?
: उससे क्या बदल जाएगा ( मैने कहा )
: कुछ नहीं
: फिर ? ( मैं बोला )
: सॉरी
: हम्मम कोई बात नहीं
: आई लव यू ( वो फफक कर बोली )
मानो आत्मा रोने लगी हो मेरी , मै भी अंदर से फूट कर रोना चाहता था उसके सामने और कहना चाहता था कि कितना चाहता हूं मै उसे , भले उसने जो कुछ किया मेरे साथ । मगर भीतर कुछ तो था जो रोक रहा था मुझे , कुछ तो था जो मेरी बाह पकड़ कर रोक रहा था कि रुक जा अभी .... ऐसा लग रहा था कि रुका नहीं तो कह जाऊंगा कुछ ऐसा जो इस रिश्ते भी अंतिम डोर को भी तोड़ दे
: मै आपको उसी दिन बताना चाहती थी जब आप मंदिर पर देखा था । लेकिन फिर
: फिर क्या ?
: आपने मुझे भगवान जी मांगा था और डर रही थी कि कही आपको हर्ट न हो ।
: फिर आज क्यों बताया ( मेरे भीतर जिज्ञासा बढ़ने लगी )
: थक गई थी मै उसके साथ ... घुटन होती थी उसके साथ रह कर । हर पल मुझपर शक करना , बार बार फिजिकल होने के कहता था । जब मै आपको कहती थी न कि मैसेज मत करना व्हाट्सअप पर या मोबाइल खराब है बनाने के लिए दी हूं तो मेरा व्हाट्सअप अपने मोबाइल में लॉगइन करता था चेक करने के लिए। उसे हमेशा लगता था कि मेरे दिल में आप हमेशा से हो ।
मै शांत होकर उसको सुनने लगा
: एक बात कहूं यकीन करोगे
: हम्म्म कहो न ( मै बोला )
: उस रोज मंदिर पर मैने भी कुछ मांगा था
: क्या ? ( मेरा दिल धड़क रहा था )
: आपको ( वो सिसक कर बोली रोती हुई )
आंखे छलक पड़ी मेरी भी
: हार चुकी थी मै , इसीलिए इस संडे को मैने उसको बता दिया कि मै आपसे बात करती हूं
: हम्म्म ( मेरी दिलचस्पी बढ़ रही थी )
: वो कहता था कि वो ही मेरी नियति है और मुझे वापस उसके पास ही आना है हर बार , मतलब हमारा कई बार ब्रेकअप हुआ लड़ाई हुई थी फिजिकल होने के लिए। हर बार मुझे आपके न होने का खालीपन महसूस होता लेकिन किस मुंह से आती आपसे नजरे मिलाने ।
: हम्ममम ( मैने एक गहरी लंबी सांस ली )
: इस बार संडे को मै उससे मिलने गई थी , जीजू को छोड़ने नहीं । ( वो थोड़ा रुक कर बोली और मै बीती सभी बाते समझ गया जब वो मुझसे मिलने से मना करती थी और बहाने गढ़ती थी ) सॉरी ...
: कोई बात नहीं ... बोलो
: मैने उससे बताया कि मै आपसे बात करती हूं और आज भी आप मुझसे प्यार करते हो तो उसने मुझसे कहा कि एक बार ये भी बता कर देखो कि हम लोग सेक्स कर चुके और फिर भी वो तुम्हे अपना ले तो चली जाना मै कुछ नहीं कहूंगा और कभी मैसेज कॉल नहीं करूंगा ।
मै चुप हो गया इस लिए नहीं कि उसने उसके साथ सेक्स करने की बात कबूली बल्कि इसीलिए कि इतना कुछ कहने के बाद भी उसने मुझपर इतना विश्वास दिखाया कि मै उसे हर कीमत पर अपना लूंगा
: मै जानती थी कि आपके लिए भी आसान नहीं होगा , लेकिन मैने उससे साफ साफ कह दिया कि मै आपको सब बताऊंगी भले आप मुझे एक्सेप्ट करो या नहीं । लेकिन उस हरामी आदमी से छुटकारा चाहिए मुझे , जिसने मेरी जिन्दंगी नर्क बना दी थी। क्या नहीं किया मैने उस घटिया इंसान के लिए ... मुझसे कहता कि अगर सच में उसको भूल गई हो तो फिजिकल क्यों नहीं होती मेरे साथ , तुम बस टाईमपास करती हो मेरे साथ । उसको यकीन हो इसके लिए मै उसके साथ फिजिकल होने को तैयार हो गई , लेकिन उसने कभी अपनी आदत नहीं बदली। सॉरी बेबी... मै बहक गई थी अपने दोस्तों के कहने पर
: कोई बात नहीं
: आपको बुरा नहीं लगता, गुस्सा नहीं आता , मुझे थप्पड़ मारो , मुझपर चिल्लाओ , गाली दो मुझे ( रो रो कर बोल रही थी ) शायद तब मै मेरे दिल को समझा सकूं कि आप मुझे माफ कर सकते हो
" थप्पड़ मारू , गाली दूं " , ये ख्याल कभी आ नहीं सकता था ।
उस वक्त मेरे जहन में एक बात उठी
"अगर कोई तुमसे मुहब्बत
लेने आए
तो उसे मुहब्बत ही देना ,
मुहब्बत सिखाने ना लग जाना " ~ बानो कुदसिया
कभी कभी महसूस होता है जिन्दंगी से आपको छोटे छोटे शब्दों में बड़ी सीख परोस देती है आज , इंस्टा पर देखी एक छोटी सी पोस्ट मुझे राह दिखा रही थी ।
: नहीं बाबू कभी नहीं , आपकी भी मजबूरी थी । कभी कभी जिन्दंगी हमें ऐसे रिश्ते की ओर ले जाती है जिधर जाना नहीं चाहते हम और जबरन उन्हें निभाना पड़ता है । मुझे तो आपकी गलती नहीं दिखती । आपने उसके बुरे समय में उसका हाथ थामा और उसने आपका इस्तेमाल सिर्फ अपनी फिजिकल नीड के लिए किया
( मैसेज में निशा ने बताया था कि विशाल का जब ब्रेकअप हुआ था तो उन दिनों उसकी खराब होती हालात और दोस्तों के कहने पर बस एक टेंपररी रिश्ता रखने के लिए वो तैयार हुई थी और आगे जाकर उसे मजबूरन विशाल के इमोशनल ब्लैकमेल करने पर वो मुझे छोड़ दी , क्योंकि विशाल उससे सच में प्यार करने लगा और उसे पसंद नहीं आ रहा था कि निशा मुझसे रिश्ता रखे और शराब पीने लगा था । दोस्तों के कहने पर निशा ने आखिर विशाल के लिए मुझे छोड़ दिया था )
वो लगातार सुबक रही और आंसू मेरे भी बह रहे थे
: बाबू ?? ( उसने बड़े लाड में मुझे पुकारा )
: हम्म्म ( मै बोला )
: आई लव यू सो मच , प्लीज हग कर लो
: आजाओ मेरी जान ( मेरी आँखें लगातार बह रही थी ) लव यू सो मच मेरा सुकून
वो लगातार रोए जा रही थी और मै उसको शांत करता था ।
देर रात तक वो मुझसे अतीत की सभी बातों से जुड़ी एक एक कहानी बताई , चाहे वो उसके जीजू और दीदी को लेकर बहाना करना हो या वीडियो कॉल पर रोमांटिक होना हो । उसने बताया कि क्यों वो मुझसे रोमांटिक होने से बच रही थी क्योंकि उसे असल में ये सब मेरे साथ करना था लेकिन जब मैं उसको रोमांटिक करता तो कही न कही इसका फायदा विशाल को मिलता था, क्योंकि संडे को वो उससे मिलने जाती थी ।
उसकी बातों को सुनने के बाद अचानक से मेरे जहन नीतू भाभी की कही हुई एक सीख याद आई , जब होली पर हमारा अधूरा मिलन हुआ था और निशा ने उसी समय कॉल कर दिया था । इकलौती शख्स जिसको मेरी सोना के बारे में बता था ।
उसने कहा कि " जबतक मिलने का समय फिक्स न हो उसके जज्बातों को ट्रिगर मत करो "
असल में उस वक्त मै नीतू भाभी को समझ नहीं पाया था लेकिन उन्होंने कहा था कि वक्त आने पर मै समझ जाऊंगा । आज सच में मै समझ गया था कि वो मुझे क्या समझाना चाह रही थी ।
मन ही मन चाह उठने लगी कि अब अपनी सेक्सुअल गुरु से बात करनी पड़ेगी । शायद वो हमारे इस रिश्ते को लेकर सही दिशा दे सके मुझे ।
थोड़ी देर बाद मैने निशा को सुला दिया और मै भी सो गया
सुबह का आया तूफान देर रात में शांत हो गया था और अगली सुबह कुछ नई उम्मीद से शुरू हुई थी
निशा ने कॉल किया । उसके भीतर जो उम्मीद उठी एक नई ताजगी एक नई ऊर्जा वो मै उसकी बातों में महसूस कर रहा था ।
वो निकल रही थी ऑफिस के लिए और मै भी नहा धो कर फ्रेश हुआ और बाहर नाश्ता करने के लिए निकल गया
दुकान पर व्हाट्सअप स्टेटस देखते हुए मेरी नजर नीतू भाभी के स्टेटस पर देखा जो किसी घर पर हुई पूजा पाठ के वो शामिल थी और वहा की औरतों के साथ सेल्फी ली थी ।
मैने मैसेज किया
: so beautiful bhabhi ji
थोड़ी देर बाद ही उनका रिप्लाई आया
: thank you dewar ji ,aajkal bhul gaye hai ap ?
: nahi to
: yaad nhi krate dekh rahi hun
: are duty par time nhi milta
मैं मैसेज करता हुआ वापस अपने रूम पर जाने लगा था
थोड़ी हाल चल चलती रही
: itna fikar hoti meri to call krte , kabse msg kar rhe hain
मैं उनका मैसेज पढ़ कर मुस्कुराया और अपने रूम का लॉक खोलते हुए व्हाट्सअप पर ही वीडियो घुमा दिया
इस बात से बेखबर कि सामने वीडियो काल उठ भी गया होगा
जब मैने मोबाइल स्क्रीन पर देखा तो आंखे बड़ी हो गई
सामने नीतू भाभी अपनी बड़ी बड़ी मोटी मोटी चूचियों पर पेटीकोट चढ़ाए हुए थी और पेटीकोट की गांठ सीधे उनके दोनों छातियों पर थी जिसकी गैप से बड़ा ही कामुक नजारा दिख रहा था , उनकी दोनों रसीली छातियो के चर्बीदार हिस्से
देखते ही गले में पानी आ गया
: अरे आप तो नहाने जा रही है
: हम्मम बस उसी तैयारी में थी , फिर देखा देवर जी मैसेज कर रहे हैं।
ना जाने क्यों उनकी खुशमिजाजी से दिल एकदम गदगद हो गया था
: और घर के क्या हाल चाल है
: किसके ? मेरे या आपके ? ( वो बोली )
: अरे आपके भी और हो सके तो मेरे भी , होली के बाद से तो समय ही नहीं मिल कि घर पर बात कर पाऊं
: मेरे यहां भी सब ठीक , अरे वो आपके घर के पास में है न किरण चाची ( नीतू भाभी समझाती हुई बोली , जिस किरण चाची के बारे में वो बता रही थी , उनका घर मेरे घर से बस थोड़ा ही दूर है । व्यव्हार में वो मेरी बड़ी मम्मी लगती थी )
: हा हा , क्या हुआ
: अरे कल रात उनके पति का एक एक्सीडेंट हो गया । आपके पापा , आपके भैया ( नीतू भाभी के हसबैंड) और दूसरे लोग उन्हें लेकर मेडिकल गए है रात में ही
: ओह्ह्ह लेकिन हुआ कैसे ?
फिर वो बताने लगी कि कैसे ड्रिंक करने के बाद बाइक लेकर वो गिर गए
: अच्छा मै नहा लूं फिर बात करती हूं या फिर मोबाइल रख दूं ऐसे ही
मै समझ गया कि वो खुला ऑफर देर रही थी वीडियो ऐप उन्हें नहाते हुए देखने का लेकिन मै ही शर्मा गया और मैने मना कर दिया ।
फिर कॉल कट गया
मुझे थोड़ी बड़ी मम्मी किरण की फिकर हुई और काफी समय से घर पर भी हालचाल नहीं किया था तो सोचा बात कर लूं
मैं मम्मी के फोन पर कॉल किया
3 4 रिंग के बाद कॉल पिक हुआ
मै कुछ बोलना चाहु उससे पहले ही मम्मी की कुछ आवाज आई
"हीही नहीं पागल मत बनो , सीई चुप रोहन का फोन है "
: हा बेटा बोल
: नमस्ते मम्मी
: खुश रहो बेटा और कहो , तू तो भूल ही गया है अपनी मां को
: क्या मम्मी आप भी , और बताओ कैसी हो आप
: अच्छी हूं तू बता
: मै भी ठीक हूं और क्या हो रहा है
: कुछ नहीं बस यही झाड़ बर्तन हो गया है और नहाने जा रही हूं ( मम्मी की बातों में कुछ खनक भरी खिलखिलाहट साफ समझ आ रही थी )
: कोई है क्या आपके पास ?
: नहीं तो .. तेरे पापा है और कौन रहेगा हीही
" पापा ? " , लेकिन वो तो हॉस्पिटल गए थे तो कैसे इतना जल्दी । मैने मम्मी से आगे कुछ पूछना सही नहीं समझा , क्योंकि अगर पापा के बारे में या बड़ी मम्मी किरण के हसबैंड के बारे में कुछ सवाल करता तो वो जरूर सवाल जवाब करती कि मुझे कैसे पता एंड ऑल , मुझे उम्मीद थी कि मम्मी खुद मुझे अपने से बताएंगी किरण ताई के बारे में।
बस चुप रहा और थोड़ी देर बाद इधर उधर की बात कर काल कट कर दिया ।
थोड़ी देर बाद वापस नीतू भाभी का काल आया
वो वीडियो काल पर थी
गिले बाल और देह पर तौलिया लपेटे हुए
: घर पर कोई है नहीं है क्या ?
: नहीं न , अम्मा ( विमला काकी ) भी वही किरण चाची के यहां गई है और आपके भैया भी अभी तक नहीं आए हैं वहां से
एकदम से मेरा माथा ठनका कि अगर नीतू भाभी के पति नहीं आए तो इसका मतलब पापा भी नहीं आए होंगे तो फिर मम्मी ने क्यों कहा कि पापा घर पर है ? चीजें मुझे उलझा रही थी
फिर इधर नीतू भाभी वीडियो से गायब थी और वापस आई तो ब्लाउज पेटीकोट में , ब्लाउज में उनके बड़े बड़े रसीले मम्में खूब टाइट और फुले हुए ।
: और देवर जी क्या हाल चाल है मेरी देवरानी के उम्मम
निशा का जिक्र आते ही मेरे चेहरे पर उदासी उभर आई और मुस्कुराहट फीकी पड़ने लगी
: सब ठीक ही है
: हम्ममम देख कर तो नहीं लग रहा है , कही सामने से तो मना नहीं कर दिया देने से हीही ( हस कर मेरे मजे लेने लगी लेकिन मेरे मन की उदासी ने उसपर रिएक्ट करना सही नहीं समझा )
: क्या बात है रोहन बाबू , कुछ बात है कोई टेंशन
: ना
: झूठ मत बोलो , चेहरा बता रहा है आपका
पढ़ ली थी वो मेरे दुख और पीड़ा को और अपने गुरु से क्या ही छिपाना । साझा तो उनसे अपने मन की पीड़ा करने आया था ।
: नहीं कुछ नहीं
: क्या !! बात नहीं हो रही है क्या देवरानी से
: नहीं हो रही है , बस ( मै उदास सा बोला , आंखे मेरी पनियाने लगी )
: फिर क्या बात , अरे रो क्यों रहे हो , बाबू ?? क्या हुआ बेटा
" बेटा " , जैसे उनकी ममता ने मुझे पुकारा हो , कितनी लाड कितनी फिकर कितना अपनापन था उस शब्द में और मै पिघल गया । आंसू जो जम कर चुभ रहे थे मेरी आंखों में बह पड़े और मै उन्हें रोक भी नहीं पाया
: सॉरी
: क्या हुआ बोलो न , तुम अब डरा रहे हो मुझे , सच बताओ
: आप सही थी
: किस बारे में
: वही जो आपने कहा कि मुझे उसके जज्बातों को ट्रिगर नहीं करना चाहिए
वो शांत हो गई और मै सुबकता था वीडियो काल पर
उन्होंने साड़ी पहनना छोड़ कर एक जगह बैठ गई मोबाइल लेकर
: मतलब वो किसी और से ?
: हा मतलब , काफी समय से था उन दोनों का
फिर मैने शुरू से कल रात की सारी कहानी बताई उन्हें अपनी और निशा की
कैसे उसने झूठ बोलकर मुझे छोड़ा और विशाल को अपना कर मुझे अंधेरे में रखा और उसके साथ सेक्स की । फिर वापस मेरे पास आई और मुझसे सब बताया
: ओह्ह्ह , हिम्मत रखो बाबू , जानती हूं ऐसे समय में संभलना आसान नहीं है लेकिन एक बात कहूं
: क्या ?
: आपने सच्चा मर्द होने का फर्ज निभाया है ( उनके चेहरे पर मुस्कुराहट थी )
: मतलब ?
: आपने साबित किया आप उनसे सच्चा प्रेम करते हो और आपने उनकी नाउम्मीदी में भी उनका हाथ नहीं छोड़ा इतना सब होने के बाद भी उनको अपना लिया , ये हर किसी के बस का नहीं होता ।
: कैसे छोड़ दूं भाभी उसे मै , उसने मेरी मुहब्बत के बल पर ही तो हौसला दिखाया था और मै ना करता तो वो कहा जाती । कही कुछ कर लेती तो ... मै रिस्क नहीं ले सकता था ( मैने मेरे भीतर की बात कही )
: सही किया , लेकिन आप इतने कमजोर क्यों बन रहे हो
: बस थोड़ा इमोशनल हो गया था , सॉरी
: कोई बात नहीं और वैसे भी आपकी पसंद बहुत अच्छी है । देखना उसके नजर में आपके लिए प्यार और इज्जत बहुत ज्यादा हो जाएगी ।
: लेकिन भाभी मै ये नहीं चाहता कि वो इसको किसी अहसान की तरह ले , भले ही उससे गलती हुई लेकिन वो मुझे उसी हक की नजर से देखे जैसे पहले देखती थी
: ओहो मेरे प्यारे भोले रोहन बाबू , बात तो आपकी बहुत ही सुंदर है लेकिन क्या है एक दिक्कत है हम लड़कियों के साथ
मै बड़े गौर से उनको सुनने लगा
: पता है लड़कियां बहुत भावुक होती है और आपके केस में तो मेरी देवरानी जी कुछ ज्यादा ही इमोशनल है। तो इसकी फिकर न करो कि वो किस तरह से पेश आ रही है ... बस आप अपना स्वभाव बनाए रखो अपना प्रेम बनाए रखो । यकीन करो मेरा कभी वो आपसे जुदा नहीं हो पाएगी ।
मन एकदम हल्का हो गया था और मन ही मन कही इच्छा थी कि भाभी को पूर्णिमा के बारे में भी बताऊं
: भाभी एक और बात थी
: हा हा कहो न
: वो दरअसल ऑफिस पर मेरी एक स्टाफ के साथ मै भी फिजिकल हो गया था और उसकी सुबह ही ये सब हुआ । क्या मुझे उसे बताता देना चाहिए
: अरे बहिनचोद , मुझसे गद्दारी उम्मम, किसी और से सील तुड़वा लिए हां ( वो आंखे महीन कर झूठ मूठ का गुस्सा कर बोली और मुझे हसी आने लगी और सबसे बढ़ कर उनके मुंह से बहिनचोद वाली गाली )
: अरे यार इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम किसके साथ फिजिकल हो रहे है , प्रेम और वासना दोनो अलग अलग चीजें है । आप दोनों अलग अलग तरीके से बहके । देवरानी जी इमोशनल ब्लैकमेल का शिकार हुई , जैसा कि ज्यादातर लड़कियां ऐसे ही सेक्स के लिए पहली बार तैयार होती है और आप बहके अपने हसरतों के बहाव में , जब अपनी पसंद की मंजिल नहीं मिलती और बार बार निराशा होती है तो लड़के अक्सर ऐसे ही बहक जाते है । दोनों अलग अलग चीजें हैं ये जितना जल्दी समझ जाओ उतना ही अच्छा है ।
: तो मतलब मै उसको पूर्णिमा के बारे में बता सकता हूं
: नहीं यार पागल हो क्या ? आप न एक नंबर के बुद्धू हो । लड़कियां हमेशा बेहतर की तलाश में रहती है और देवरानी जी भले ही उस लड़के के साथ फिजिकल हुई लेकिन हमेशा से उनको लगा कि आप हर मायने में उससे बेहतर है और वो वापस उसको छोड़ कर आपके पास आई । लेकिन आप ऐसे करोगे तो आप भी उसकी नजर में उस लड़के के जैसे हो जाओगे , आज भले ही वो आपको इन शर्तों पर अपना लेगी लेकिन शक की निगाह से जीवन भर देखेगी ।
: फिर ? ( मै उलझा हुआ बोला )
: समझ जाओगे , बस अभी कुछ चीजें छिपाने में ही भलाई है और अगर भविष्य में आपको पूर्णिमा से रिश्ता न रखो और आपका मन बहुत छटपटाए तो बता देना । अभी बस रुक जाओ । जो चल रहा है उसे धीरे धीरे संभलने का मौका दो ।
नीतू भाभी ने बहुत अच्छे से मुझे समझाया , बहुत कुछ समझ नहीं आया लेकिन इतना समझ आ गया था कि ठहर जाने में भलाई है ।
फिर हमने थोड़ी बातें की और फोन कट गया
आज मूड अच्छा था और मैने खुद से ही अमर को फोन घुमा दिया
: हाय सर
: अरे भाई क्या बात है ? अच्छे मूड में लग रहे हो
मै मुस्कुराया
: हा मतलब ठीक ही है सब, थोड़ा फ्री हुआ तो सोचा कि आपसे बात कर लूं
: अरे तो घर पर आओ यार
: हीहीही मुझे लगा आज सैटरडे है तो आप दीदी के पास ( मै बोल कर चुप हो गया )
: हाहाहा अरे आज वो किसी क्लाइंट को अटेंड करने के लिए आउट ऑफ टाऊन गई है
: ओह फिर मिलते है शाम को
: हा ठीक है , इंतजार रहेगा ।
फिर मैने भी लंच बनाया और दुपहर में निशा से थोड़ी बात हुई और मैने कहा कि आज रात मै अपने एक दोस्त के यहां जा रहा हूं ।
: ओके मिस्सी मिस्सी करूंगी आपका
( वो बड़े दुलार में बोली )
: मै भी करूंगा जान उम्माह लव यू ( मुस्कुरा कर मै बोला)
: बाबू सुनो न
: हा बोलो न सोना
: कब मिलेंगे हम लोग
ये उसकी ओर से किया गया पहल था और सुनते ही मन में एक ऊर्जा उठने लगी , लेकिन मन में एक ही बात घूम रही थी , वो सबक जो मेरी सेक्सोलॉजिस्ट नीतू भाभी ने कही थी " ठहर जाने में ही भलाई है "
: नेक्स्ट वीक प्लान करते है बेबी
: ओके ( थोड़ा उदास सी बोली वो )
: अरे सैड न हो न सोना , नेक्स्ट वीक मतलब किसी दिन आप ऑफिस स्किप कर लेना हीहीही
वो एकदम से खुश हो गई और हसने लगी ।
शाम होते ही मै निकल गया अमर के घर की ओर
जारी रहेगी
( पढ़ कर लाइक कमेंट जरूर करें और हो सके तो रोहन के लिए फैसले पर अपनी राय जरूर रखें ... इंतजार रहेगा )
THE NEW JOURNEY
( UPDATE 026 - ? )
UPDATE 026
कभी-कभी ज़िंदगी बहुत शांत होकर चलती है।
इतनी शांत कि लगता है अब तूफ़ान का दौर खत्म हो गया।
सब कुछ अपनी जगह पर बैठने लगा है — रिश्ते, काम, उम्मीदें…दिल और शायद उसकी हसरतें भी।
मुझे भी ऐसा ही लगने लगा था।
लंबे इंतज़ार, टूटन और बेचैन रातों के बाद “सोना” फिर मेरी ज़िंदगी में लौटी थी।
वो दिन आज भी याद था — जब मैने विधाता से कहा था,
"बस एक बार उसे लौटा दो… उसे किसी कीमत पर जाने नहीं दूँगा।"
विधाता ने मेरी पुकार सुन ली थी।
वो लौटी।
हंसी लौटी।
सपने लौटे।
मैने हर डर को, अतीत के हर सवाल को , हर पुराने घाव को दिल के किसी कोने में बंद कर दिया , महज इस शर्त पर कि सोना की वापसी ही मेरे प्रार्थनाओं और विरह के लंबे इंतजार का प्रसाद है ।
लेकिन ज़िंदगी का एक अजीब सा नियम है —
जब सब ठीक लगने लगता है, तभी अतीत चुपके से दरवाज़ा खटखटाता है और कभी-कभी वो हिसाब ब्याज समेत मांगता है। उन छोटे हिसाबों का लेखा जोखा रखना हम बहुत जरूरी नहीं समझते लेकिन असल में उनका भी सूद महंगा पड़ता है ।
एक शाम, जैसे कोई पत्थर शांत झील में गिरता है,
वैसे ही एक सच मेरे दिल में गिरा।
बेवफाई .... वो चुभन जैसा दर्द जो आपके दिल समेत आत्मा में सुराख कर दे , ऐसी न रुकने वाली असहनीय पीड़ा , जिसमें एक बोझ होता है जो आप कभी स्वीकारना नहीं चाहते और उस बोझ का वजन आपको अंदर ही अंदर कुचल देता है
उसका वो आखिरी मैसेज…
"मम्मी ने फोन देख लिया था… इसलिए बात नहीं कर पाऊँगी…"
वो झूठ था।
असल सच्चाई यह थी कि उसने किसी और को — विशाल — को चुन लिया था।
और ये फैसला उसने अकेले नहीं लिया था, दोस्तों की सलाह, उनके बहकावे, उनकी हँसी-मज़ाक के बीच।
मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि —
कैसे कोई अपने प्यार को “फ्रेंड्स की राय” पर तौल सकता है?
कैसे कोई उन प्रार्थनाओं को भूल सकता है, जिनमें किसी ने उसे पाने के लिए रातें जागी थीं?
दिल मानने को तैयार नहीं था।
वो हर पल को दोहरा रहा था —
वो हँसी, वो वादे, वो कसमें।
लेकिन सच का वजन इतना भारी था कि उम्मीद की साँसें घुटने लगीं।
मैने महसूस किया —
शायद ये वही अधूरा हिसाब था,
जो कभी किसी मोड़ पर छूट गया था।
अब ज़िंदगी उसे सामने रखकर कह रही थी —
"लो, अब इसे भी चुकाओ।"
आँखों में नमी थी,
पर भीतर कहीं एक अजीब सी स्थिरता भी। लेकिन सवाल नहीं रुक रहे थे , वो गूंज रहे थे मेरे दिमाग में , फटकार रहे थे मुझे , मेरी नाकामयाबी पर , मेरी हस्ती पर , कैसे कोई मुझे धोखे में रख कर खेलता रहा मेरे जज्बातों से।
इसके बाद मेरा टूटा मन मुझे एक गहरे और न खत्म होने वाले अंधेरे की ओर ले रहा जा रहा था ... एक ऐसी दहलीज की तरफ जहां अंततः मौत ही उसे इनसब से बाहर निकालने का अंतिम रास्ता नजर आती है
लेकिन तभी मेरा मोबाइल तेज घरघराहट से बज उठता है , वो मोबाइल जिसको मैंने दूर फर्श पर दूसरी तरफ की दिवाल की ओर फेंका था
कमरे के सन्नाटे को चीरती हुई रिंगटोन थोड़ा मुझे इरिटेट कर रही थी , न चाहते हुए भी उठ कर उस तरफ गया और मोबाइल पर आ रही कॉलर आईडी को देखकर अपनी आंखे बंद कर भौंहें सिकोड़ ली, एक लंबी गहरी सांस
: ये क्या किया मैने !!
एक अपराध भाव
खुद से ना खत्म होने वाली घृणा की भावना
जिन्दगी मेरे सामने अतीत और मेरे कर्मों का एक और हिसाब लिए खड़ी थी
उन पन्नों की फड़फड़ाहट की गूंज मेरे दिमाग में नया तूफान ला खड़ी कर चुकी थी
वो रिंग टोन की धुन किसी तीखी चुभन से मेरे मन को और कोंच रहे थे
मैने कॉल पिक किया
: हाय सर , मै निकल रही हूं आयेंगे आप भी ( ये पूर्णिमा की आवाज थी )
मै ठहरा , समझ नहीं आया कि क्या करूं । पूर्णिमा के जाने के 2 घंटे तक तो मै ऐसे ही था एक जगह
: अह नहीं ( एक लंबी गहरी सांस ) तुम जाओ मै थोड़ा रुक कर आऊंगा
: ओके सर , एम वेटिंग हीही ( उसकी खनक भरी रिप्लाई का कारण जान रहा था )
मैने कॉल कट कर दिया लेकिन मेरी दिमाग में वो गूंज अब और बड़ा आकार ले रही थी , उसमें शामिल पूर्णिमा की वो कामुक चीखे जो उसने मेरे ही बिस्तर में बीते रात ली थी मेरे साथ ,
अब तो मै खुद की नजरो में गिर गया था
निशा ने तो कम से कम मुझसे अपनी बेवफाई का इकरार तो किया , क्या मुझमें वो हिम्मत है कि मै उसे कह सकूं ।
कमरे में सन्नाटा फिर अपने पैर पसारने लगा था
लेकिन भीतर जो शोर उठ चुका था, वो रुकने का नाम नहीं ले रहा था।
मै दीवार से टिक कर खड़ा रह गया।
हाथ में मोबाइल था… और हथेली पसीने से भीगी हुई।
निशा की बेवफाई ने मुझे तोड़ा था,
लेकिन पूर्णिमा की खिलखिलाहट ने मुझे मेरे ही सामने नग्न कर दिया था —
चरित्र के आईने में।
बीती रात…
वो बस एक क्षणिक भागना था,
एक खोखली जीत,
एक घायल अहंकार की सस्ती मरहम।
सोचा था कि वो खुद को साबित कर दूंगा
कि मै कमजोर नहीं हूं
लेकिन सुबह हुई और वासना का अंधेरा छटना शुरू हुआ फिर समझ आया —
मै आगे नहीं बढ़ा था…
मै गिरा था।
मेरे मन में पूर्णिमा की आवाज़ गूंज रही थी,
उसकी हँसी, उसका छेड़ना…
लेकिन उस सबके पीछे एक और आवाज़ थी —
मेरी अपनी अंतरात्मा की।
“निशा ने कम से कम सच कबूल किया…
क्या मैं कर सकता हूँ?”
मैने खुद से पूछा —
क्या मैं निशा को फोन कर सकता हूं और कह सकता हूं कि
“तुमने बेवफाई की… लेकिन मैं भी उतना ही दोषी हूँ”?
कमरे की खिड़की से आती हल्की हवा में परदे हिल रहे थे।
मैने महसूस किया —
मौत एक पल की खामोशी दे सकती है,
लेकिन जवाब नहीं दे सकती।
जो दहलीज मुझे खींच रही थी,
वो दरअसल भागने की दहलीज थी।
मै धीरे से फर्श पर बैठ गया।
आँखें बंद कीं।
अचानक एहसास हुआ —
दर्द सिर्फ निशा के जाने का नहीं है,
दर्द ये है कि मैने अपने ही वादों को तोड़ दिया।
उन शब्दों को…
“किसी भी हालत में उसे जाने नहीं दूँगा।”
मै उसे रोक नहीं पाया,
और खुद को भी नहीं।
मोबाइल फिर हाथ में था।
स्क्रीन पर दो नाम थे —
निशा…
और पूर्णिमा।
दोनों के बीच मै खुद था —
एक टूटा हुआ, उलझा हुआ इंसान।
वक्त कैसे बीत रहा था पता नहीं चला
आज का ऑफिस स्किप हो गया
पूर्णिमा का वापस कॉल आया तो मैने बहाना कर दिया कि दीदी के यहां जाना है और रात में भी खाली नहीं रहूंगा । तो पूर्णिमा के कहा फिर वो भी दो दिन के लिए घर चली जा रही है ... मैने उसे रोका नहीं और छुटी दे दी ।
फिर देर शाम तक वापस अमर का कॉल आया , वो घर पर बुला रहा था लेकिन मूड कुछ सही था नहीं तो मैने उसे भी संडे को आने का बोल कर मना कर दिया ।
शाम गहरा रही थी और आज मैने निशा को कॉल तक नहीं किया
न कोई मैसेज न रिप्लाई
रात के 08 बजे उसका मैसेज आया hii का
न कुछ खास अहसास
न कुछ उत्साह
बस एक खामोशी एक चुप्पी
जो मै महसूस कर सकता था अपने भीतर उसके एक शब्द के मैसेज में
05 मिनट बाद व्हाट्सअप पर भी मैसेज आया
: Hyy
मै शांत रहा मैसेज सीन किया
: sorry Babu( उसने वापस मैसेज किया )
उसका मैसेज पढ़ते ही और Sorry Babu, देखते ही मेरा दिल भर आया और फफक पड़ा मै
आंखे , मन , आत्मा सब एक साथ सिसक पड़े , मानो पूरी कायनात मेरे मन की पीड़ा को महसूस कर रही हो ।
मै :its ok
निशा : kuch khaye ap ?
ध्यान ही नहीं रहा कि भूख जैसी कोई चीज महसूस हो रही थी अबतक
उसका पूछना और ख्याल आना कि कल रात के बाद से एक निवाला नहीं गया पेट में ... जल्द ही मरोड़ उठने लगी
मै : Nhi !! Aur ap ?
निशा : kuch kha lo n ap plzz
मै : hmm ok , aap v khaa lo.
महसूस हो रहा था कि वो भी बिन कुछ खाए पिए होगी । सुबह तो जैसे निकल गई होगी , दिन में ड्यूटी पर भी नहीं खाई होगी , लेकिन घर पर कैसे नहीं खाएगी । मम्मी के सामने क्या बहाना रह जाएगा उसके पास , और इतना सब होने के बाद भी उसने मुझे पूछा वही काफी था मेरे लिए
इतना सब कुछ कहने बाद भी वो जिस हिम्मत से मुझसे बाते कर रही थी वो महसूस करा रहा था कि मेरी मुहब्बत की क्या जगह है उसके दिल में ।
: kya bnaoge? ( उसका मैसेज आया )
: order karunga ( मैने रिप्लाई किया )
: ok , kha kar msg karo
: hmmm ok
मैने रिप्लाई किया और शांत हो गया
थोड़ी देर बाद 09 बजे वापस उसका मैसेज आया ।
: call kru
: ha kro ( मैने रिप्लाई किया )
फिर वो voice call करने लगी
मैने पिक किया
: हाय ( उसका गला खराब था साफ पता चल रहा था , आवाज बैठी थी , नाक के सुरकने की आहट , समझ गया कि उसने भी बहुत आंसू बहाए होंगे )
: हाय ( मै फीकी आवाज में बोला )
: कैसे हो बाबू ( वो थोड़ा फफक कर खुद को संभालते हुए बोली )
मै शांत रहा , क्या जवाब देता उसको कि क्या हालत है मेरी , शायद वो ही मुझे ज्यादा समझती थी।
: सॉरी ( उसके सिसकने की आवाज आई और रोने की भी ) मुझे माफ कर देना प्लीज
वो रोने लगी लगातार , मै शांत रहा थोड़ी देर तक
: बात भी नहीं करोगे न मुझसे अब ( वो बोली )
मानो उसने मान लिया हो कि मैने ये रिश्ता खत्म करने का फैसला कर लिया था
: नहीं ( आधी अधूरी आवाज में बोला और गले को खराश कर ) उम्हू ऐसा तो नहीं कहा मैने
: कुछ पूछोगे नहीं
: क्या ? ( मै बोला )
: वही जो आपके मन में चल रहा होगा , मैने क्यों किया ?
: उससे क्या बदल जाएगा ( मैने कहा )
: कुछ नहीं
: फिर ? ( मैं बोला )
: सॉरी
: हम्मम कोई बात नहीं
: आई लव यू ( वो फफक कर बोली )
मानो आत्मा रोने लगी हो मेरी , मै भी अंदर से फूट कर रोना चाहता था उसके सामने और कहना चाहता था कि कितना चाहता हूं मै उसे , भले उसने जो कुछ किया मेरे साथ । मगर भीतर कुछ तो था जो रोक रहा था मुझे , कुछ तो था जो मेरी बाह पकड़ कर रोक रहा था कि रुक जा अभी .... ऐसा लग रहा था कि रुका नहीं तो कह जाऊंगा कुछ ऐसा जो इस रिश्ते भी अंतिम डोर को भी तोड़ दे
: मै आपको उसी दिन बताना चाहती थी जब आप मंदिर पर देखा था । लेकिन फिर
: फिर क्या ?
: आपने मुझे भगवान जी मांगा था और डर रही थी कि कही आपको हर्ट न हो ।
: फिर आज क्यों बताया ( मेरे भीतर जिज्ञासा बढ़ने लगी )
: थक गई थी मै उसके साथ ... घुटन होती थी उसके साथ रह कर । हर पल मुझपर शक करना , बार बार फिजिकल होने के कहता था । जब मै आपको कहती थी न कि मैसेज मत करना व्हाट्सअप पर या मोबाइल खराब है बनाने के लिए दी हूं तो मेरा व्हाट्सअप अपने मोबाइल में लॉगइन करता था चेक करने के लिए। उसे हमेशा लगता था कि मेरे दिल में आप हमेशा से हो ।
मै शांत होकर उसको सुनने लगा
: एक बात कहूं यकीन करोगे
: हम्म्म कहो न ( मै बोला )
: उस रोज मंदिर पर मैने भी कुछ मांगा था
: क्या ? ( मेरा दिल धड़क रहा था )
: आपको ( वो सिसक कर बोली रोती हुई )
आंखे छलक पड़ी मेरी भी
: हार चुकी थी मै , इसीलिए इस संडे को मैने उसको बता दिया कि मै आपसे बात करती हूं
: हम्म्म ( मेरी दिलचस्पी बढ़ रही थी )
: वो कहता था कि वो ही मेरी नियति है और मुझे वापस उसके पास ही आना है हर बार , मतलब हमारा कई बार ब्रेकअप हुआ लड़ाई हुई थी फिजिकल होने के लिए। हर बार मुझे आपके न होने का खालीपन महसूस होता लेकिन किस मुंह से आती आपसे नजरे मिलाने ।
: हम्ममम ( मैने एक गहरी लंबी सांस ली )
: इस बार संडे को मै उससे मिलने गई थी , जीजू को छोड़ने नहीं । ( वो थोड़ा रुक कर बोली और मै बीती सभी बाते समझ गया जब वो मुझसे मिलने से मना करती थी और बहाने गढ़ती थी ) सॉरी ...
: कोई बात नहीं ... बोलो
: मैने उससे बताया कि मै आपसे बात करती हूं और आज भी आप मुझसे प्यार करते हो तो उसने मुझसे कहा कि एक बार ये भी बता कर देखो कि हम लोग सेक्स कर चुके और फिर भी वो तुम्हे अपना ले तो चली जाना मै कुछ नहीं कहूंगा और कभी मैसेज कॉल नहीं करूंगा ।
मै चुप हो गया इस लिए नहीं कि उसने उसके साथ सेक्स करने की बात कबूली बल्कि इसीलिए कि इतना कुछ कहने के बाद भी उसने मुझपर इतना विश्वास दिखाया कि मै उसे हर कीमत पर अपना लूंगा
: मै जानती थी कि आपके लिए भी आसान नहीं होगा , लेकिन मैने उससे साफ साफ कह दिया कि मै आपको सब बताऊंगी भले आप मुझे एक्सेप्ट करो या नहीं । लेकिन उस हरामी आदमी से छुटकारा चाहिए मुझे , जिसने मेरी जिन्दंगी नर्क बना दी थी। क्या नहीं किया मैने उस घटिया इंसान के लिए ... मुझसे कहता कि अगर सच में उसको भूल गई हो तो फिजिकल क्यों नहीं होती मेरे साथ , तुम बस टाईमपास करती हो मेरे साथ । उसको यकीन हो इसके लिए मै उसके साथ फिजिकल होने को तैयार हो गई , लेकिन उसने कभी अपनी आदत नहीं बदली। सॉरी बेबी... मै बहक गई थी अपने दोस्तों के कहने पर
: कोई बात नहीं
: आपको बुरा नहीं लगता, गुस्सा नहीं आता , मुझे थप्पड़ मारो , मुझपर चिल्लाओ , गाली दो मुझे ( रो रो कर बोल रही थी ) शायद तब मै मेरे दिल को समझा सकूं कि आप मुझे माफ कर सकते हो
" थप्पड़ मारू , गाली दूं " , ये ख्याल कभी आ नहीं सकता था ।
उस वक्त मेरे जहन में एक बात उठी
"अगर कोई तुमसे मुहब्बत
लेने आए
तो उसे मुहब्बत ही देना ,
मुहब्बत सिखाने ना लग जाना " ~ बानो कुदसिया
कभी कभी महसूस होता है जिन्दंगी से आपको छोटे छोटे शब्दों में बड़ी सीख परोस देती है आज , इंस्टा पर देखी एक छोटी सी पोस्ट मुझे राह दिखा रही थी ।
: नहीं बाबू कभी नहीं , आपकी भी मजबूरी थी । कभी कभी जिन्दंगी हमें ऐसे रिश्ते की ओर ले जाती है जिधर जाना नहीं चाहते हम और जबरन उन्हें निभाना पड़ता है । मुझे तो आपकी गलती नहीं दिखती । आपने उसके बुरे समय में उसका हाथ थामा और उसने आपका इस्तेमाल सिर्फ अपनी फिजिकल नीड के लिए किया
( मैसेज में निशा ने बताया था कि विशाल का जब ब्रेकअप हुआ था तो उन दिनों उसकी खराब होती हालात और दोस्तों के कहने पर बस एक टेंपररी रिश्ता रखने के लिए वो तैयार हुई थी और आगे जाकर उसे मजबूरन विशाल के इमोशनल ब्लैकमेल करने पर वो मुझे छोड़ दी , क्योंकि विशाल उससे सच में प्यार करने लगा और उसे पसंद नहीं आ रहा था कि निशा मुझसे रिश्ता रखे और शराब पीने लगा था । दोस्तों के कहने पर निशा ने आखिर विशाल के लिए मुझे छोड़ दिया था )
वो लगातार सुबक रही और आंसू मेरे भी बह रहे थे
: बाबू ?? ( उसने बड़े लाड में मुझे पुकारा )
: हम्म्म ( मै बोला )
: आई लव यू सो मच , प्लीज हग कर लो
: आजाओ मेरी जान ( मेरी आँखें लगातार बह रही थी ) लव यू सो मच मेरा सुकून
वो लगातार रोए जा रही थी और मै उसको शांत करता था ।
देर रात तक वो मुझसे अतीत की सभी बातों से जुड़ी एक एक कहानी बताई , चाहे वो उसके जीजू और दीदी को लेकर बहाना करना हो या वीडियो कॉल पर रोमांटिक होना हो । उसने बताया कि क्यों वो मुझसे रोमांटिक होने से बच रही थी क्योंकि उसे असल में ये सब मेरे साथ करना था लेकिन जब मैं उसको रोमांटिक करता तो कही न कही इसका फायदा विशाल को मिलता था, क्योंकि संडे को वो उससे मिलने जाती थी ।
उसकी बातों को सुनने के बाद अचानक से मेरे जहन नीतू भाभी की कही हुई एक सीख याद आई , जब होली पर हमारा अधूरा मिलन हुआ था और निशा ने उसी समय कॉल कर दिया था । इकलौती शख्स जिसको मेरी सोना के बारे में बता था ।
उसने कहा कि " जबतक मिलने का समय फिक्स न हो उसके जज्बातों को ट्रिगर मत करो "
असल में उस वक्त मै नीतू भाभी को समझ नहीं पाया था लेकिन उन्होंने कहा था कि वक्त आने पर मै समझ जाऊंगा । आज सच में मै समझ गया था कि वो मुझे क्या समझाना चाह रही थी ।
मन ही मन चाह उठने लगी कि अब अपनी सेक्सुअल गुरु से बात करनी पड़ेगी । शायद वो हमारे इस रिश्ते को लेकर सही दिशा दे सके मुझे ।
थोड़ी देर बाद मैने निशा को सुला दिया और मै भी सो गया
सुबह का आया तूफान देर रात में शांत हो गया था और अगली सुबह कुछ नई उम्मीद से शुरू हुई थी
निशा ने कॉल किया । उसके भीतर जो उम्मीद उठी एक नई ताजगी एक नई ऊर्जा वो मै उसकी बातों में महसूस कर रहा था ।
वो निकल रही थी ऑफिस के लिए और मै भी नहा धो कर फ्रेश हुआ और बाहर नाश्ता करने के लिए निकल गया
दुकान पर व्हाट्सअप स्टेटस देखते हुए मेरी नजर नीतू भाभी के स्टेटस पर देखा जो किसी घर पर हुई पूजा पाठ के वो शामिल थी और वहा की औरतों के साथ सेल्फी ली थी ।
मैने मैसेज किया
: so beautiful bhabhi ji
थोड़ी देर बाद ही उनका रिप्लाई आया
: thank you dewar ji ,aajkal bhul gaye hai ap ?
: nahi to
: yaad nhi krate dekh rahi hun
: are duty par time nhi milta
मैं मैसेज करता हुआ वापस अपने रूम पर जाने लगा था
थोड़ी हाल चल चलती रही
: itna fikar hoti meri to call krte , kabse msg kar rhe hain
मैं उनका मैसेज पढ़ कर मुस्कुराया और अपने रूम का लॉक खोलते हुए व्हाट्सअप पर ही वीडियो घुमा दिया
इस बात से बेखबर कि सामने वीडियो काल उठ भी गया होगा
जब मैने मोबाइल स्क्रीन पर देखा तो आंखे बड़ी हो गई
सामने नीतू भाभी अपनी बड़ी बड़ी मोटी मोटी चूचियों पर पेटीकोट चढ़ाए हुए थी और पेटीकोट की गांठ सीधे उनके दोनों छातियों पर थी जिसकी गैप से बड़ा ही कामुक नजारा दिख रहा था , उनकी दोनों रसीली छातियो के चर्बीदार हिस्से
देखते ही गले में पानी आ गया
: अरे आप तो नहाने जा रही है
: हम्मम बस उसी तैयारी में थी , फिर देखा देवर जी मैसेज कर रहे हैं।
ना जाने क्यों उनकी खुशमिजाजी से दिल एकदम गदगद हो गया था
: और घर के क्या हाल चाल है
: किसके ? मेरे या आपके ? ( वो बोली )
: अरे आपके भी और हो सके तो मेरे भी , होली के बाद से तो समय ही नहीं मिल कि घर पर बात कर पाऊं
: मेरे यहां भी सब ठीक , अरे वो आपके घर के पास में है न किरण चाची ( नीतू भाभी समझाती हुई बोली , जिस किरण चाची के बारे में वो बता रही थी , उनका घर मेरे घर से बस थोड़ा ही दूर है । व्यव्हार में वो मेरी बड़ी मम्मी लगती थी )
: हा हा , क्या हुआ
: अरे कल रात उनके पति का एक एक्सीडेंट हो गया । आपके पापा , आपके भैया ( नीतू भाभी के हसबैंड) और दूसरे लोग उन्हें लेकर मेडिकल गए है रात में ही
: ओह्ह्ह लेकिन हुआ कैसे ?
फिर वो बताने लगी कि कैसे ड्रिंक करने के बाद बाइक लेकर वो गिर गए
: अच्छा मै नहा लूं फिर बात करती हूं या फिर मोबाइल रख दूं ऐसे ही
मै समझ गया कि वो खुला ऑफर देर रही थी वीडियो ऐप उन्हें नहाते हुए देखने का लेकिन मै ही शर्मा गया और मैने मना कर दिया ।
फिर कॉल कट गया
मुझे थोड़ी बड़ी मम्मी किरण की फिकर हुई और काफी समय से घर पर भी हालचाल नहीं किया था तो सोचा बात कर लूं
मैं मम्मी के फोन पर कॉल किया
3 4 रिंग के बाद कॉल पिक हुआ
मै कुछ बोलना चाहु उससे पहले ही मम्मी की कुछ आवाज आई
"हीही नहीं पागल मत बनो , सीई चुप रोहन का फोन है "
: हा बेटा बोल
: नमस्ते मम्मी
: खुश रहो बेटा और कहो , तू तो भूल ही गया है अपनी मां को
: क्या मम्मी आप भी , और बताओ कैसी हो आप
: अच्छी हूं तू बता
: मै भी ठीक हूं और क्या हो रहा है
: कुछ नहीं बस यही झाड़ बर्तन हो गया है और नहाने जा रही हूं ( मम्मी की बातों में कुछ खनक भरी खिलखिलाहट साफ समझ आ रही थी )
: कोई है क्या आपके पास ?
: नहीं तो .. तेरे पापा है और कौन रहेगा हीही
" पापा ? " , लेकिन वो तो हॉस्पिटल गए थे तो कैसे इतना जल्दी । मैने मम्मी से आगे कुछ पूछना सही नहीं समझा , क्योंकि अगर पापा के बारे में या बड़ी मम्मी किरण के हसबैंड के बारे में कुछ सवाल करता तो वो जरूर सवाल जवाब करती कि मुझे कैसे पता एंड ऑल , मुझे उम्मीद थी कि मम्मी खुद मुझे अपने से बताएंगी किरण ताई के बारे में।
बस चुप रहा और थोड़ी देर बाद इधर उधर की बात कर काल कट कर दिया ।
थोड़ी देर बाद वापस नीतू भाभी का काल आया
वो वीडियो काल पर थी
गिले बाल और देह पर तौलिया लपेटे हुए
: घर पर कोई है नहीं है क्या ?
: नहीं न , अम्मा ( विमला काकी ) भी वही किरण चाची के यहां गई है और आपके भैया भी अभी तक नहीं आए हैं वहां से
एकदम से मेरा माथा ठनका कि अगर नीतू भाभी के पति नहीं आए तो इसका मतलब पापा भी नहीं आए होंगे तो फिर मम्मी ने क्यों कहा कि पापा घर पर है ? चीजें मुझे उलझा रही थी
फिर इधर नीतू भाभी वीडियो से गायब थी और वापस आई तो ब्लाउज पेटीकोट में , ब्लाउज में उनके बड़े बड़े रसीले मम्में खूब टाइट और फुले हुए ।
: और देवर जी क्या हाल चाल है मेरी देवरानी के उम्मम
निशा का जिक्र आते ही मेरे चेहरे पर उदासी उभर आई और मुस्कुराहट फीकी पड़ने लगी
: सब ठीक ही है
: हम्ममम देख कर तो नहीं लग रहा है , कही सामने से तो मना नहीं कर दिया देने से हीही ( हस कर मेरे मजे लेने लगी लेकिन मेरे मन की उदासी ने उसपर रिएक्ट करना सही नहीं समझा )
: क्या बात है रोहन बाबू , कुछ बात है कोई टेंशन
: ना
: झूठ मत बोलो , चेहरा बता रहा है आपका
पढ़ ली थी वो मेरे दुख और पीड़ा को और अपने गुरु से क्या ही छिपाना । साझा तो उनसे अपने मन की पीड़ा करने आया था ।
: नहीं कुछ नहीं
: क्या !! बात नहीं हो रही है क्या देवरानी से
: नहीं हो रही है , बस ( मै उदास सा बोला , आंखे मेरी पनियाने लगी )
: फिर क्या बात , अरे रो क्यों रहे हो , बाबू ?? क्या हुआ बेटा
" बेटा " , जैसे उनकी ममता ने मुझे पुकारा हो , कितनी लाड कितनी फिकर कितना अपनापन था उस शब्द में और मै पिघल गया । आंसू जो जम कर चुभ रहे थे मेरी आंखों में बह पड़े और मै उन्हें रोक भी नहीं पाया
: सॉरी
: क्या हुआ बोलो न , तुम अब डरा रहे हो मुझे , सच बताओ
: आप सही थी
: किस बारे में
: वही जो आपने कहा कि मुझे उसके जज्बातों को ट्रिगर नहीं करना चाहिए
वो शांत हो गई और मै सुबकता था वीडियो काल पर
उन्होंने साड़ी पहनना छोड़ कर एक जगह बैठ गई मोबाइल लेकर
: मतलब वो किसी और से ?
: हा मतलब , काफी समय से था उन दोनों का
फिर मैने शुरू से कल रात की सारी कहानी बताई उन्हें अपनी और निशा की
कैसे उसने झूठ बोलकर मुझे छोड़ा और विशाल को अपना कर मुझे अंधेरे में रखा और उसके साथ सेक्स की । फिर वापस मेरे पास आई और मुझसे सब बताया
: ओह्ह्ह , हिम्मत रखो बाबू , जानती हूं ऐसे समय में संभलना आसान नहीं है लेकिन एक बात कहूं
: क्या ?
: आपने सच्चा मर्द होने का फर्ज निभाया है ( उनके चेहरे पर मुस्कुराहट थी )
: मतलब ?
: आपने साबित किया आप उनसे सच्चा प्रेम करते हो और आपने उनकी नाउम्मीदी में भी उनका हाथ नहीं छोड़ा इतना सब होने के बाद भी उनको अपना लिया , ये हर किसी के बस का नहीं होता ।
: कैसे छोड़ दूं भाभी उसे मै , उसने मेरी मुहब्बत के बल पर ही तो हौसला दिखाया था और मै ना करता तो वो कहा जाती । कही कुछ कर लेती तो ... मै रिस्क नहीं ले सकता था ( मैने मेरे भीतर की बात कही )
: सही किया , लेकिन आप इतने कमजोर क्यों बन रहे हो
: बस थोड़ा इमोशनल हो गया था , सॉरी
: कोई बात नहीं और वैसे भी आपकी पसंद बहुत अच्छी है । देखना उसके नजर में आपके लिए प्यार और इज्जत बहुत ज्यादा हो जाएगी ।
: लेकिन भाभी मै ये नहीं चाहता कि वो इसको किसी अहसान की तरह ले , भले ही उससे गलती हुई लेकिन वो मुझे उसी हक की नजर से देखे जैसे पहले देखती थी
: ओहो मेरे प्यारे भोले रोहन बाबू , बात तो आपकी बहुत ही सुंदर है लेकिन क्या है एक दिक्कत है हम लड़कियों के साथ
मै बड़े गौर से उनको सुनने लगा
: पता है लड़कियां बहुत भावुक होती है और आपके केस में तो मेरी देवरानी जी कुछ ज्यादा ही इमोशनल है। तो इसकी फिकर न करो कि वो किस तरह से पेश आ रही है ... बस आप अपना स्वभाव बनाए रखो अपना प्रेम बनाए रखो । यकीन करो मेरा कभी वो आपसे जुदा नहीं हो पाएगी ।
मन एकदम हल्का हो गया था और मन ही मन कही इच्छा थी कि भाभी को पूर्णिमा के बारे में भी बताऊं
: भाभी एक और बात थी
: हा हा कहो न
: वो दरअसल ऑफिस पर मेरी एक स्टाफ के साथ मै भी फिजिकल हो गया था और उसकी सुबह ही ये सब हुआ । क्या मुझे उसे बताता देना चाहिए
: अरे बहिनचोद , मुझसे गद्दारी उम्मम, किसी और से सील तुड़वा लिए हां ( वो आंखे महीन कर झूठ मूठ का गुस्सा कर बोली और मुझे हसी आने लगी और सबसे बढ़ कर उनके मुंह से बहिनचोद वाली गाली )
: अरे यार इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम किसके साथ फिजिकल हो रहे है , प्रेम और वासना दोनो अलग अलग चीजें है । आप दोनों अलग अलग तरीके से बहके । देवरानी जी इमोशनल ब्लैकमेल का शिकार हुई , जैसा कि ज्यादातर लड़कियां ऐसे ही सेक्स के लिए पहली बार तैयार होती है और आप बहके अपने हसरतों के बहाव में , जब अपनी पसंद की मंजिल नहीं मिलती और बार बार निराशा होती है तो लड़के अक्सर ऐसे ही बहक जाते है । दोनों अलग अलग चीजें हैं ये जितना जल्दी समझ जाओ उतना ही अच्छा है ।
: तो मतलब मै उसको पूर्णिमा के बारे में बता सकता हूं
: नहीं यार पागल हो क्या ? आप न एक नंबर के बुद्धू हो । लड़कियां हमेशा बेहतर की तलाश में रहती है और देवरानी जी भले ही उस लड़के के साथ फिजिकल हुई लेकिन हमेशा से उनको लगा कि आप हर मायने में उससे बेहतर है और वो वापस उसको छोड़ कर आपके पास आई । लेकिन आप ऐसे करोगे तो आप भी उसकी नजर में उस लड़के के जैसे हो जाओगे , आज भले ही वो आपको इन शर्तों पर अपना लेगी लेकिन शक की निगाह से जीवन भर देखेगी ।
: फिर ? ( मै उलझा हुआ बोला )
: समझ जाओगे , बस अभी कुछ चीजें छिपाने में ही भलाई है और अगर भविष्य में आपको पूर्णिमा से रिश्ता न रखो और आपका मन बहुत छटपटाए तो बता देना । अभी बस रुक जाओ । जो चल रहा है उसे धीरे धीरे संभलने का मौका दो ।
नीतू भाभी ने बहुत अच्छे से मुझे समझाया , बहुत कुछ समझ नहीं आया लेकिन इतना समझ आ गया था कि ठहर जाने में भलाई है ।
फिर हमने थोड़ी बातें की और फोन कट गया
आज मूड अच्छा था और मैने खुद से ही अमर को फोन घुमा दिया
: हाय सर
: अरे भाई क्या बात है ? अच्छे मूड में लग रहे हो
मै मुस्कुराया
: हा मतलब ठीक ही है सब, थोड़ा फ्री हुआ तो सोचा कि आपसे बात कर लूं
: अरे तो घर पर आओ यार
: हीहीही मुझे लगा आज सैटरडे है तो आप दीदी के पास ( मै बोल कर चुप हो गया )
: हाहाहा अरे आज वो किसी क्लाइंट को अटेंड करने के लिए आउट ऑफ टाऊन गई है
: ओह फिर मिलते है शाम को
: हा ठीक है , इंतजार रहेगा ।
फिर मैने भी लंच बनाया और दुपहर में निशा से थोड़ी बात हुई और मैने कहा कि आज रात मै अपने एक दोस्त के यहां जा रहा हूं ।
: ओके मिस्सी मिस्सी करूंगी आपका
( वो बड़े दुलार में बोली )
: मै भी करूंगा जान उम्माह लव यू ( मुस्कुरा कर मै बोला)
: बाबू सुनो न
: हा बोलो न सोना
: कब मिलेंगे हम लोग
ये उसकी ओर से किया गया पहल था और सुनते ही मन में एक ऊर्जा उठने लगी , लेकिन मन में एक ही बात घूम रही थी , वो सबक जो मेरी सेक्सोलॉजिस्ट नीतू भाभी ने कही थी " ठहर जाने में ही भलाई है "
: नेक्स्ट वीक प्लान करते है बेबी
: ओके ( थोड़ा उदास सी बोली वो )
: अरे सैड न हो न सोना , नेक्स्ट वीक मतलब किसी दिन आप ऑफिस स्किप कर लेना हीहीही
वो एकदम से खुश हो गई और हसने लगी ।
शाम होते ही मै निकल गया अमर के घर की ओर
जारी रहेगी
( पढ़ कर लाइक कमेंट जरूर करें और हो सके तो रोहन के लिए फैसले पर अपनी राय जरूर रखें ... इंतजार रहेगा )
Awesome updateTHE NEW JOURNEY
( UPDATE 026 - ? )
UPDATE 026
कभी-कभी ज़िंदगी बहुत शांत होकर चलती है।
इतनी शांत कि लगता है अब तूफ़ान का दौर खत्म हो गया।
सब कुछ अपनी जगह पर बैठने लगा है — रिश्ते, काम, उम्मीदें…दिल और शायद उसकी हसरतें भी।
मुझे भी ऐसा ही लगने लगा था।
लंबे इंतज़ार, टूटन और बेचैन रातों के बाद “सोना” फिर मेरी ज़िंदगी में लौटी थी।
वो दिन आज भी याद था — जब मैने विधाता से कहा था,
"बस एक बार उसे लौटा दो… उसे किसी कीमत पर जाने नहीं दूँगा।"
विधाता ने मेरी पुकार सुन ली थी।
वो लौटी।
हंसी लौटी।
सपने लौटे।
मैने हर डर को, अतीत के हर सवाल को , हर पुराने घाव को दिल के किसी कोने में बंद कर दिया , महज इस शर्त पर कि सोना की वापसी ही मेरे प्रार्थनाओं और विरह के लंबे इंतजार का प्रसाद है ।
लेकिन ज़िंदगी का एक अजीब सा नियम है —
जब सब ठीक लगने लगता है, तभी अतीत चुपके से दरवाज़ा खटखटाता है और कभी-कभी वो हिसाब ब्याज समेत मांगता है। उन छोटे हिसाबों का लेखा जोखा रखना हम बहुत जरूरी नहीं समझते लेकिन असल में उनका भी सूद महंगा पड़ता है ।
एक शाम, जैसे कोई पत्थर शांत झील में गिरता है,
वैसे ही एक सच मेरे दिल में गिरा।
बेवफाई .... वो चुभन जैसा दर्द जो आपके दिल समेत आत्मा में सुराख कर दे , ऐसी न रुकने वाली असहनीय पीड़ा , जिसमें एक बोझ होता है जो आप कभी स्वीकारना नहीं चाहते और उस बोझ का वजन आपको अंदर ही अंदर कुचल देता है
उसका वो आखिरी मैसेज…
"मम्मी ने फोन देख लिया था… इसलिए बात नहीं कर पाऊँगी…"
वो झूठ था।
असल सच्चाई यह थी कि उसने किसी और को — विशाल — को चुन लिया था।
और ये फैसला उसने अकेले नहीं लिया था, दोस्तों की सलाह, उनके बहकावे, उनकी हँसी-मज़ाक के बीच।
मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि —
कैसे कोई अपने प्यार को “फ्रेंड्स की राय” पर तौल सकता है?
कैसे कोई उन प्रार्थनाओं को भूल सकता है, जिनमें किसी ने उसे पाने के लिए रातें जागी थीं?
दिल मानने को तैयार नहीं था।
वो हर पल को दोहरा रहा था —
वो हँसी, वो वादे, वो कसमें।
लेकिन सच का वजन इतना भारी था कि उम्मीद की साँसें घुटने लगीं।
मैने महसूस किया —
शायद ये वही अधूरा हिसाब था,
जो कभी किसी मोड़ पर छूट गया था।
अब ज़िंदगी उसे सामने रखकर कह रही थी —
"लो, अब इसे भी चुकाओ।"
आँखों में नमी थी,
पर भीतर कहीं एक अजीब सी स्थिरता भी। लेकिन सवाल नहीं रुक रहे थे , वो गूंज रहे थे मेरे दिमाग में , फटकार रहे थे मुझे , मेरी नाकामयाबी पर , मेरी हस्ती पर , कैसे कोई मुझे धोखे में रख कर खेलता रहा मेरे जज्बातों से।
इसके बाद मेरा टूटा मन मुझे एक गहरे और न खत्म होने वाले अंधेरे की ओर ले रहा जा रहा था ... एक ऐसी दहलीज की तरफ जहां अंततः मौत ही उसे इनसब से बाहर निकालने का अंतिम रास्ता नजर आती है
लेकिन तभी मेरा मोबाइल तेज घरघराहट से बज उठता है , वो मोबाइल जिसको मैंने दूर फर्श पर दूसरी तरफ की दिवाल की ओर फेंका था
कमरे के सन्नाटे को चीरती हुई रिंगटोन थोड़ा मुझे इरिटेट कर रही थी , न चाहते हुए भी उठ कर उस तरफ गया और मोबाइल पर आ रही कॉलर आईडी को देखकर अपनी आंखे बंद कर भौंहें सिकोड़ ली, एक लंबी गहरी सांस
: ये क्या किया मैने !!
एक अपराध भाव
खुद से ना खत्म होने वाली घृणा की भावना
जिन्दगी मेरे सामने अतीत और मेरे कर्मों का एक और हिसाब लिए खड़ी थी
उन पन्नों की फड़फड़ाहट की गूंज मेरे दिमाग में नया तूफान ला खड़ी कर चुकी थी
वो रिंग टोन की धुन किसी तीखी चुभन से मेरे मन को और कोंच रहे थे
मैने कॉल पिक किया
: हाय सर , मै निकल रही हूं आयेंगे आप भी ( ये पूर्णिमा की आवाज थी )
मै ठहरा , समझ नहीं आया कि क्या करूं । पूर्णिमा के जाने के 2 घंटे तक तो मै ऐसे ही था एक जगह
: अह नहीं ( एक लंबी गहरी सांस ) तुम जाओ मै थोड़ा रुक कर आऊंगा
: ओके सर , एम वेटिंग हीही ( उसकी खनक भरी रिप्लाई का कारण जान रहा था )
मैने कॉल कट कर दिया लेकिन मेरी दिमाग में वो गूंज अब और बड़ा आकार ले रही थी , उसमें शामिल पूर्णिमा की वो कामुक चीखे जो उसने मेरे ही बिस्तर में बीते रात ली थी मेरे साथ ,
अब तो मै खुद की नजरो में गिर गया था
निशा ने तो कम से कम मुझसे अपनी बेवफाई का इकरार तो किया , क्या मुझमें वो हिम्मत है कि मै उसे कह सकूं ।
कमरे में सन्नाटा फिर अपने पैर पसारने लगा था
लेकिन भीतर जो शोर उठ चुका था, वो रुकने का नाम नहीं ले रहा था।
मै दीवार से टिक कर खड़ा रह गया।
हाथ में मोबाइल था… और हथेली पसीने से भीगी हुई।
निशा की बेवफाई ने मुझे तोड़ा था,
लेकिन पूर्णिमा की खिलखिलाहट ने मुझे मेरे ही सामने नग्न कर दिया था —
चरित्र के आईने में।
बीती रात…
वो बस एक क्षणिक भागना था,
एक खोखली जीत,
एक घायल अहंकार की सस्ती मरहम।
सोचा था कि वो खुद को साबित कर दूंगा
कि मै कमजोर नहीं हूं
लेकिन सुबह हुई और वासना का अंधेरा छटना शुरू हुआ फिर समझ आया —
मै आगे नहीं बढ़ा था…
मै गिरा था।
मेरे मन में पूर्णिमा की आवाज़ गूंज रही थी,
उसकी हँसी, उसका छेड़ना…
लेकिन उस सबके पीछे एक और आवाज़ थी —
मेरी अपनी अंतरात्मा की।
“निशा ने कम से कम सच कबूल किया…
क्या मैं कर सकता हूँ?”
मैने खुद से पूछा —
क्या मैं निशा को फोन कर सकता हूं और कह सकता हूं कि
“तुमने बेवफाई की… लेकिन मैं भी उतना ही दोषी हूँ”?
कमरे की खिड़की से आती हल्की हवा में परदे हिल रहे थे।
मैने महसूस किया —
मौत एक पल की खामोशी दे सकती है,
लेकिन जवाब नहीं दे सकती।
जो दहलीज मुझे खींच रही थी,
वो दरअसल भागने की दहलीज थी।
मै धीरे से फर्श पर बैठ गया।
आँखें बंद कीं।
अचानक एहसास हुआ —
दर्द सिर्फ निशा के जाने का नहीं है,
दर्द ये है कि मैने अपने ही वादों को तोड़ दिया।
उन शब्दों को…
“किसी भी हालत में उसे जाने नहीं दूँगा।”
मै उसे रोक नहीं पाया,
और खुद को भी नहीं।
मोबाइल फिर हाथ में था।
स्क्रीन पर दो नाम थे —
निशा…
और पूर्णिमा।
दोनों के बीच मै खुद था —
एक टूटा हुआ, उलझा हुआ इंसान।
वक्त कैसे बीत रहा था पता नहीं चला
आज का ऑफिस स्किप हो गया
पूर्णिमा का वापस कॉल आया तो मैने बहाना कर दिया कि दीदी के यहां जाना है और रात में भी खाली नहीं रहूंगा । तो पूर्णिमा के कहा फिर वो भी दो दिन के लिए घर चली जा रही है ... मैने उसे रोका नहीं और छुटी दे दी ।
फिर देर शाम तक वापस अमर का कॉल आया , वो घर पर बुला रहा था लेकिन मूड कुछ सही था नहीं तो मैने उसे भी संडे को आने का बोल कर मना कर दिया ।
शाम गहरा रही थी और आज मैने निशा को कॉल तक नहीं किया
न कोई मैसेज न रिप्लाई
रात के 08 बजे उसका मैसेज आया hii का
न कुछ खास अहसास
न कुछ उत्साह
बस एक खामोशी एक चुप्पी
जो मै महसूस कर सकता था अपने भीतर उसके एक शब्द के मैसेज में
05 मिनट बाद व्हाट्सअप पर भी मैसेज आया
: Hyy
मै शांत रहा मैसेज सीन किया
: sorry Babu( उसने वापस मैसेज किया )
उसका मैसेज पढ़ते ही और Sorry Babu, देखते ही मेरा दिल भर आया और फफक पड़ा मै
आंखे , मन , आत्मा सब एक साथ सिसक पड़े , मानो पूरी कायनात मेरे मन की पीड़ा को महसूस कर रही हो ।
मै :its ok
निशा : kuch khaye ap ?
ध्यान ही नहीं रहा कि भूख जैसी कोई चीज महसूस हो रही थी अबतक
उसका पूछना और ख्याल आना कि कल रात के बाद से एक निवाला नहीं गया पेट में ... जल्द ही मरोड़ उठने लगी
मै : Nhi !! Aur ap ?
निशा : kuch kha lo n ap plzz
मै : hmm ok , aap v khaa lo.
महसूस हो रहा था कि वो भी बिन कुछ खाए पिए होगी । सुबह तो जैसे निकल गई होगी , दिन में ड्यूटी पर भी नहीं खाई होगी , लेकिन घर पर कैसे नहीं खाएगी । मम्मी के सामने क्या बहाना रह जाएगा उसके पास , और इतना सब होने के बाद भी उसने मुझे पूछा वही काफी था मेरे लिए
इतना सब कुछ कहने बाद भी वो जिस हिम्मत से मुझसे बाते कर रही थी वो महसूस करा रहा था कि मेरी मुहब्बत की क्या जगह है उसके दिल में ।
: kya bnaoge? ( उसका मैसेज आया )
: order karunga ( मैने रिप्लाई किया )
: ok , kha kar msg karo
: hmmm ok
मैने रिप्लाई किया और शांत हो गया
थोड़ी देर बाद 09 बजे वापस उसका मैसेज आया ।
: call kru
: ha kro ( मैने रिप्लाई किया )
फिर वो voice call करने लगी
मैने पिक किया
: हाय ( उसका गला खराब था साफ पता चल रहा था , आवाज बैठी थी , नाक के सुरकने की आहट , समझ गया कि उसने भी बहुत आंसू बहाए होंगे )
: हाय ( मै फीकी आवाज में बोला )
: कैसे हो बाबू ( वो थोड़ा फफक कर खुद को संभालते हुए बोली )
मै शांत रहा , क्या जवाब देता उसको कि क्या हालत है मेरी , शायद वो ही मुझे ज्यादा समझती थी।
: सॉरी ( उसके सिसकने की आवाज आई और रोने की भी ) मुझे माफ कर देना प्लीज
वो रोने लगी लगातार , मै शांत रहा थोड़ी देर तक
: बात भी नहीं करोगे न मुझसे अब ( वो बोली )
मानो उसने मान लिया हो कि मैने ये रिश्ता खत्म करने का फैसला कर लिया था
: नहीं ( आधी अधूरी आवाज में बोला और गले को खराश कर ) उम्हू ऐसा तो नहीं कहा मैने
: कुछ पूछोगे नहीं
: क्या ? ( मै बोला )
: वही जो आपके मन में चल रहा होगा , मैने क्यों किया ?
: उससे क्या बदल जाएगा ( मैने कहा )
: कुछ नहीं
: फिर ? ( मैं बोला )
: सॉरी
: हम्मम कोई बात नहीं
: आई लव यू ( वो फफक कर बोली )
मानो आत्मा रोने लगी हो मेरी , मै भी अंदर से फूट कर रोना चाहता था उसके सामने और कहना चाहता था कि कितना चाहता हूं मै उसे , भले उसने जो कुछ किया मेरे साथ । मगर भीतर कुछ तो था जो रोक रहा था मुझे , कुछ तो था जो मेरी बाह पकड़ कर रोक रहा था कि रुक जा अभी .... ऐसा लग रहा था कि रुका नहीं तो कह जाऊंगा कुछ ऐसा जो इस रिश्ते भी अंतिम डोर को भी तोड़ दे
: मै आपको उसी दिन बताना चाहती थी जब आप मंदिर पर देखा था । लेकिन फिर
: फिर क्या ?
: आपने मुझे भगवान जी मांगा था और डर रही थी कि कही आपको हर्ट न हो ।
: फिर आज क्यों बताया ( मेरे भीतर जिज्ञासा बढ़ने लगी )
: थक गई थी मै उसके साथ ... घुटन होती थी उसके साथ रह कर । हर पल मुझपर शक करना , बार बार फिजिकल होने के कहता था । जब मै आपको कहती थी न कि मैसेज मत करना व्हाट्सअप पर या मोबाइल खराब है बनाने के लिए दी हूं तो मेरा व्हाट्सअप अपने मोबाइल में लॉगइन करता था चेक करने के लिए। उसे हमेशा लगता था कि मेरे दिल में आप हमेशा से हो ।
मै शांत होकर उसको सुनने लगा
: एक बात कहूं यकीन करोगे
: हम्म्म कहो न ( मै बोला )
: उस रोज मंदिर पर मैने भी कुछ मांगा था
: क्या ? ( मेरा दिल धड़क रहा था )
: आपको ( वो सिसक कर बोली रोती हुई )
आंखे छलक पड़ी मेरी भी
: हार चुकी थी मै , इसीलिए इस संडे को मैने उसको बता दिया कि मै आपसे बात करती हूं
: हम्म्म ( मेरी दिलचस्पी बढ़ रही थी )
: वो कहता था कि वो ही मेरी नियति है और मुझे वापस उसके पास ही आना है हर बार , मतलब हमारा कई बार ब्रेकअप हुआ लड़ाई हुई थी फिजिकल होने के लिए। हर बार मुझे आपके न होने का खालीपन महसूस होता लेकिन किस मुंह से आती आपसे नजरे मिलाने ।
: हम्ममम ( मैने एक गहरी लंबी सांस ली )
: इस बार संडे को मै उससे मिलने गई थी , जीजू को छोड़ने नहीं । ( वो थोड़ा रुक कर बोली और मै बीती सभी बाते समझ गया जब वो मुझसे मिलने से मना करती थी और बहाने गढ़ती थी ) सॉरी ...
: कोई बात नहीं ... बोलो
: मैने उससे बताया कि मै आपसे बात करती हूं और आज भी आप मुझसे प्यार करते हो तो उसने मुझसे कहा कि एक बार ये भी बता कर देखो कि हम लोग सेक्स कर चुके और फिर भी वो तुम्हे अपना ले तो चली जाना मै कुछ नहीं कहूंगा और कभी मैसेज कॉल नहीं करूंगा ।
मै चुप हो गया इस लिए नहीं कि उसने उसके साथ सेक्स करने की बात कबूली बल्कि इसीलिए कि इतना कुछ कहने के बाद भी उसने मुझपर इतना विश्वास दिखाया कि मै उसे हर कीमत पर अपना लूंगा
: मै जानती थी कि आपके लिए भी आसान नहीं होगा , लेकिन मैने उससे साफ साफ कह दिया कि मै आपको सब बताऊंगी भले आप मुझे एक्सेप्ट करो या नहीं । लेकिन उस हरामी आदमी से छुटकारा चाहिए मुझे , जिसने मेरी जिन्दंगी नर्क बना दी थी। क्या नहीं किया मैने उस घटिया इंसान के लिए ... मुझसे कहता कि अगर सच में उसको भूल गई हो तो फिजिकल क्यों नहीं होती मेरे साथ , तुम बस टाईमपास करती हो मेरे साथ । उसको यकीन हो इसके लिए मै उसके साथ फिजिकल होने को तैयार हो गई , लेकिन उसने कभी अपनी आदत नहीं बदली। सॉरी बेबी... मै बहक गई थी अपने दोस्तों के कहने पर
: कोई बात नहीं
: आपको बुरा नहीं लगता, गुस्सा नहीं आता , मुझे थप्पड़ मारो , मुझपर चिल्लाओ , गाली दो मुझे ( रो रो कर बोल रही थी ) शायद तब मै मेरे दिल को समझा सकूं कि आप मुझे माफ कर सकते हो
" थप्पड़ मारू , गाली दूं " , ये ख्याल कभी आ नहीं सकता था ।
उस वक्त मेरे जहन में एक बात उठी
"अगर कोई तुमसे मुहब्बत
लेने आए
तो उसे मुहब्बत ही देना ,
मुहब्बत सिखाने ना लग जाना " ~ बानो कुदसिया
कभी कभी महसूस होता है जिन्दंगी से आपको छोटे छोटे शब्दों में बड़ी सीख परोस देती है आज , इंस्टा पर देखी एक छोटी सी पोस्ट मुझे राह दिखा रही थी ।
: नहीं बाबू कभी नहीं , आपकी भी मजबूरी थी । कभी कभी जिन्दंगी हमें ऐसे रिश्ते की ओर ले जाती है जिधर जाना नहीं चाहते हम और जबरन उन्हें निभाना पड़ता है । मुझे तो आपकी गलती नहीं दिखती । आपने उसके बुरे समय में उसका हाथ थामा और उसने आपका इस्तेमाल सिर्फ अपनी फिजिकल नीड के लिए किया
( मैसेज में निशा ने बताया था कि विशाल का जब ब्रेकअप हुआ था तो उन दिनों उसकी खराब होती हालात और दोस्तों के कहने पर बस एक टेंपररी रिश्ता रखने के लिए वो तैयार हुई थी और आगे जाकर उसे मजबूरन विशाल के इमोशनल ब्लैकमेल करने पर वो मुझे छोड़ दी , क्योंकि विशाल उससे सच में प्यार करने लगा और उसे पसंद नहीं आ रहा था कि निशा मुझसे रिश्ता रखे और शराब पीने लगा था । दोस्तों के कहने पर निशा ने आखिर विशाल के लिए मुझे छोड़ दिया था )
वो लगातार सुबक रही और आंसू मेरे भी बह रहे थे
: बाबू ?? ( उसने बड़े लाड में मुझे पुकारा )
: हम्म्म ( मै बोला )
: आई लव यू सो मच , प्लीज हग कर लो
: आजाओ मेरी जान ( मेरी आँखें लगातार बह रही थी ) लव यू सो मच मेरा सुकून
वो लगातार रोए जा रही थी और मै उसको शांत करता था ।
देर रात तक वो मुझसे अतीत की सभी बातों से जुड़ी एक एक कहानी बताई , चाहे वो उसके जीजू और दीदी को लेकर बहाना करना हो या वीडियो कॉल पर रोमांटिक होना हो । उसने बताया कि क्यों वो मुझसे रोमांटिक होने से बच रही थी क्योंकि उसे असल में ये सब मेरे साथ करना था लेकिन जब मैं उसको रोमांटिक करता तो कही न कही इसका फायदा विशाल को मिलता था, क्योंकि संडे को वो उससे मिलने जाती थी ।
उसकी बातों को सुनने के बाद अचानक से मेरे जहन नीतू भाभी की कही हुई एक सीख याद आई , जब होली पर हमारा अधूरा मिलन हुआ था और निशा ने उसी समय कॉल कर दिया था । इकलौती शख्स जिसको मेरी सोना के बारे में बता था ।
उसने कहा कि " जबतक मिलने का समय फिक्स न हो उसके जज्बातों को ट्रिगर मत करो "
असल में उस वक्त मै नीतू भाभी को समझ नहीं पाया था लेकिन उन्होंने कहा था कि वक्त आने पर मै समझ जाऊंगा । आज सच में मै समझ गया था कि वो मुझे क्या समझाना चाह रही थी ।
मन ही मन चाह उठने लगी कि अब अपनी सेक्सुअल गुरु से बात करनी पड़ेगी । शायद वो हमारे इस रिश्ते को लेकर सही दिशा दे सके मुझे ।
थोड़ी देर बाद मैने निशा को सुला दिया और मै भी सो गया
सुबह का आया तूफान देर रात में शांत हो गया था और अगली सुबह कुछ नई उम्मीद से शुरू हुई थी
निशा ने कॉल किया । उसके भीतर जो उम्मीद उठी एक नई ताजगी एक नई ऊर्जा वो मै उसकी बातों में महसूस कर रहा था ।
वो निकल रही थी ऑफिस के लिए और मै भी नहा धो कर फ्रेश हुआ और बाहर नाश्ता करने के लिए निकल गया
दुकान पर व्हाट्सअप स्टेटस देखते हुए मेरी नजर नीतू भाभी के स्टेटस पर देखा जो किसी घर पर हुई पूजा पाठ के वो शामिल थी और वहा की औरतों के साथ सेल्फी ली थी ।
मैने मैसेज किया
: so beautiful bhabhi ji
थोड़ी देर बाद ही उनका रिप्लाई आया
: thank you dewar ji ,aajkal bhul gaye hai ap ?
: nahi to
: yaad nhi krate dekh rahi hun
: are duty par time nhi milta
मैं मैसेज करता हुआ वापस अपने रूम पर जाने लगा था
थोड़ी हाल चल चलती रही
: itna fikar hoti meri to call krte , kabse msg kar rhe hain
मैं उनका मैसेज पढ़ कर मुस्कुराया और अपने रूम का लॉक खोलते हुए व्हाट्सअप पर ही वीडियो घुमा दिया
इस बात से बेखबर कि सामने वीडियो काल उठ भी गया होगा
जब मैने मोबाइल स्क्रीन पर देखा तो आंखे बड़ी हो गई
सामने नीतू भाभी अपनी बड़ी बड़ी मोटी मोटी चूचियों पर पेटीकोट चढ़ाए हुए थी और पेटीकोट की गांठ सीधे उनके दोनों छातियों पर थी जिसकी गैप से बड़ा ही कामुक नजारा दिख रहा था , उनकी दोनों रसीली छातियो के चर्बीदार हिस्से
देखते ही गले में पानी आ गया
: अरे आप तो नहाने जा रही है
: हम्मम बस उसी तैयारी में थी , फिर देखा देवर जी मैसेज कर रहे हैं।
ना जाने क्यों उनकी खुशमिजाजी से दिल एकदम गदगद हो गया था
: और घर के क्या हाल चाल है
: किसके ? मेरे या आपके ? ( वो बोली )
: अरे आपके भी और हो सके तो मेरे भी , होली के बाद से तो समय ही नहीं मिल कि घर पर बात कर पाऊं
: मेरे यहां भी सब ठीक , अरे वो आपके घर के पास में है न किरण चाची ( नीतू भाभी समझाती हुई बोली , जिस किरण चाची के बारे में वो बता रही थी , उनका घर मेरे घर से बस थोड़ा ही दूर है । व्यव्हार में वो मेरी बड़ी मम्मी लगती थी )
: हा हा , क्या हुआ
: अरे कल रात उनके पति का एक एक्सीडेंट हो गया । आपके पापा , आपके भैया ( नीतू भाभी के हसबैंड) और दूसरे लोग उन्हें लेकर मेडिकल गए है रात में ही
: ओह्ह्ह लेकिन हुआ कैसे ?
फिर वो बताने लगी कि कैसे ड्रिंक करने के बाद बाइक लेकर वो गिर गए
: अच्छा मै नहा लूं फिर बात करती हूं या फिर मोबाइल रख दूं ऐसे ही
मै समझ गया कि वो खुला ऑफर देर रही थी वीडियो ऐप उन्हें नहाते हुए देखने का लेकिन मै ही शर्मा गया और मैने मना कर दिया ।
फिर कॉल कट गया
मुझे थोड़ी बड़ी मम्मी किरण की फिकर हुई और काफी समय से घर पर भी हालचाल नहीं किया था तो सोचा बात कर लूं
मैं मम्मी के फोन पर कॉल किया
3 4 रिंग के बाद कॉल पिक हुआ
मै कुछ बोलना चाहु उससे पहले ही मम्मी की कुछ आवाज आई
"हीही नहीं पागल मत बनो , सीई चुप रोहन का फोन है "
: हा बेटा बोल
: नमस्ते मम्मी
: खुश रहो बेटा और कहो , तू तो भूल ही गया है अपनी मां को
: क्या मम्मी आप भी , और बताओ कैसी हो आप
: अच्छी हूं तू बता
: मै भी ठीक हूं और क्या हो रहा है
: कुछ नहीं बस यही झाड़ बर्तन हो गया है और नहाने जा रही हूं ( मम्मी की बातों में कुछ खनक भरी खिलखिलाहट साफ समझ आ रही थी )
: कोई है क्या आपके पास ?
: नहीं तो .. तेरे पापा है और कौन रहेगा हीही
" पापा ? " , लेकिन वो तो हॉस्पिटल गए थे तो कैसे इतना जल्दी । मैने मम्मी से आगे कुछ पूछना सही नहीं समझा , क्योंकि अगर पापा के बारे में या बड़ी मम्मी किरण के हसबैंड के बारे में कुछ सवाल करता तो वो जरूर सवाल जवाब करती कि मुझे कैसे पता एंड ऑल , मुझे उम्मीद थी कि मम्मी खुद मुझे अपने से बताएंगी किरण ताई के बारे में।
बस चुप रहा और थोड़ी देर बाद इधर उधर की बात कर काल कट कर दिया ।
थोड़ी देर बाद वापस नीतू भाभी का काल आया
वो वीडियो काल पर थी
गिले बाल और देह पर तौलिया लपेटे हुए
: घर पर कोई है नहीं है क्या ?
: नहीं न , अम्मा ( विमला काकी ) भी वही किरण चाची के यहां गई है और आपके भैया भी अभी तक नहीं आए हैं वहां से
एकदम से मेरा माथा ठनका कि अगर नीतू भाभी के पति नहीं आए तो इसका मतलब पापा भी नहीं आए होंगे तो फिर मम्मी ने क्यों कहा कि पापा घर पर है ? चीजें मुझे उलझा रही थी
फिर इधर नीतू भाभी वीडियो से गायब थी और वापस आई तो ब्लाउज पेटीकोट में , ब्लाउज में उनके बड़े बड़े रसीले मम्में खूब टाइट और फुले हुए ।
: और देवर जी क्या हाल चाल है मेरी देवरानी के उम्मम
निशा का जिक्र आते ही मेरे चेहरे पर उदासी उभर आई और मुस्कुराहट फीकी पड़ने लगी
: सब ठीक ही है
: हम्ममम देख कर तो नहीं लग रहा है , कही सामने से तो मना नहीं कर दिया देने से हीही ( हस कर मेरे मजे लेने लगी लेकिन मेरे मन की उदासी ने उसपर रिएक्ट करना सही नहीं समझा )
: क्या बात है रोहन बाबू , कुछ बात है कोई टेंशन
: ना
: झूठ मत बोलो , चेहरा बता रहा है आपका
पढ़ ली थी वो मेरे दुख और पीड़ा को और अपने गुरु से क्या ही छिपाना । साझा तो उनसे अपने मन की पीड़ा करने आया था ।
: नहीं कुछ नहीं
: क्या !! बात नहीं हो रही है क्या देवरानी से
: नहीं हो रही है , बस ( मै उदास सा बोला , आंखे मेरी पनियाने लगी )
: फिर क्या बात , अरे रो क्यों रहे हो , बाबू ?? क्या हुआ बेटा
" बेटा " , जैसे उनकी ममता ने मुझे पुकारा हो , कितनी लाड कितनी फिकर कितना अपनापन था उस शब्द में और मै पिघल गया । आंसू जो जम कर चुभ रहे थे मेरी आंखों में बह पड़े और मै उन्हें रोक भी नहीं पाया
: सॉरी
: क्या हुआ बोलो न , तुम अब डरा रहे हो मुझे , सच बताओ
: आप सही थी
: किस बारे में
: वही जो आपने कहा कि मुझे उसके जज्बातों को ट्रिगर नहीं करना चाहिए
वो शांत हो गई और मै सुबकता था वीडियो काल पर
उन्होंने साड़ी पहनना छोड़ कर एक जगह बैठ गई मोबाइल लेकर
: मतलब वो किसी और से ?
: हा मतलब , काफी समय से था उन दोनों का
फिर मैने शुरू से कल रात की सारी कहानी बताई उन्हें अपनी और निशा की
कैसे उसने झूठ बोलकर मुझे छोड़ा और विशाल को अपना कर मुझे अंधेरे में रखा और उसके साथ सेक्स की । फिर वापस मेरे पास आई और मुझसे सब बताया
: ओह्ह्ह , हिम्मत रखो बाबू , जानती हूं ऐसे समय में संभलना आसान नहीं है लेकिन एक बात कहूं
: क्या ?
: आपने सच्चा मर्द होने का फर्ज निभाया है ( उनके चेहरे पर मुस्कुराहट थी )
: मतलब ?
: आपने साबित किया आप उनसे सच्चा प्रेम करते हो और आपने उनकी नाउम्मीदी में भी उनका हाथ नहीं छोड़ा इतना सब होने के बाद भी उनको अपना लिया , ये हर किसी के बस का नहीं होता ।
: कैसे छोड़ दूं भाभी उसे मै , उसने मेरी मुहब्बत के बल पर ही तो हौसला दिखाया था और मै ना करता तो वो कहा जाती । कही कुछ कर लेती तो ... मै रिस्क नहीं ले सकता था ( मैने मेरे भीतर की बात कही )
: सही किया , लेकिन आप इतने कमजोर क्यों बन रहे हो
: बस थोड़ा इमोशनल हो गया था , सॉरी
: कोई बात नहीं और वैसे भी आपकी पसंद बहुत अच्छी है । देखना उसके नजर में आपके लिए प्यार और इज्जत बहुत ज्यादा हो जाएगी ।
: लेकिन भाभी मै ये नहीं चाहता कि वो इसको किसी अहसान की तरह ले , भले ही उससे गलती हुई लेकिन वो मुझे उसी हक की नजर से देखे जैसे पहले देखती थी
: ओहो मेरे प्यारे भोले रोहन बाबू , बात तो आपकी बहुत ही सुंदर है लेकिन क्या है एक दिक्कत है हम लड़कियों के साथ
मै बड़े गौर से उनको सुनने लगा
: पता है लड़कियां बहुत भावुक होती है और आपके केस में तो मेरी देवरानी जी कुछ ज्यादा ही इमोशनल है। तो इसकी फिकर न करो कि वो किस तरह से पेश आ रही है ... बस आप अपना स्वभाव बनाए रखो अपना प्रेम बनाए रखो । यकीन करो मेरा कभी वो आपसे जुदा नहीं हो पाएगी ।
मन एकदम हल्का हो गया था और मन ही मन कही इच्छा थी कि भाभी को पूर्णिमा के बारे में भी बताऊं
: भाभी एक और बात थी
: हा हा कहो न
: वो दरअसल ऑफिस पर मेरी एक स्टाफ के साथ मै भी फिजिकल हो गया था और उसकी सुबह ही ये सब हुआ । क्या मुझे उसे बताता देना चाहिए
: अरे बहिनचोद , मुझसे गद्दारी उम्मम, किसी और से सील तुड़वा लिए हां ( वो आंखे महीन कर झूठ मूठ का गुस्सा कर बोली और मुझे हसी आने लगी और सबसे बढ़ कर उनके मुंह से बहिनचोद वाली गाली )
: अरे यार इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम किसके साथ फिजिकल हो रहे है , प्रेम और वासना दोनो अलग अलग चीजें है । आप दोनों अलग अलग तरीके से बहके । देवरानी जी इमोशनल ब्लैकमेल का शिकार हुई , जैसा कि ज्यादातर लड़कियां ऐसे ही सेक्स के लिए पहली बार तैयार होती है और आप बहके अपने हसरतों के बहाव में , जब अपनी पसंद की मंजिल नहीं मिलती और बार बार निराशा होती है तो लड़के अक्सर ऐसे ही बहक जाते है । दोनों अलग अलग चीजें हैं ये जितना जल्दी समझ जाओ उतना ही अच्छा है ।
: तो मतलब मै उसको पूर्णिमा के बारे में बता सकता हूं
: नहीं यार पागल हो क्या ? आप न एक नंबर के बुद्धू हो । लड़कियां हमेशा बेहतर की तलाश में रहती है और देवरानी जी भले ही उस लड़के के साथ फिजिकल हुई लेकिन हमेशा से उनको लगा कि आप हर मायने में उससे बेहतर है और वो वापस उसको छोड़ कर आपके पास आई । लेकिन आप ऐसे करोगे तो आप भी उसकी नजर में उस लड़के के जैसे हो जाओगे , आज भले ही वो आपको इन शर्तों पर अपना लेगी लेकिन शक की निगाह से जीवन भर देखेगी ।
: फिर ? ( मै उलझा हुआ बोला )
: समझ जाओगे , बस अभी कुछ चीजें छिपाने में ही भलाई है और अगर भविष्य में आपको पूर्णिमा से रिश्ता न रखो और आपका मन बहुत छटपटाए तो बता देना । अभी बस रुक जाओ । जो चल रहा है उसे धीरे धीरे संभलने का मौका दो ।
नीतू भाभी ने बहुत अच्छे से मुझे समझाया , बहुत कुछ समझ नहीं आया लेकिन इतना समझ आ गया था कि ठहर जाने में भलाई है ।
फिर हमने थोड़ी बातें की और फोन कट गया
आज मूड अच्छा था और मैने खुद से ही अमर को फोन घुमा दिया
: हाय सर
: अरे भाई क्या बात है ? अच्छे मूड में लग रहे हो
मै मुस्कुराया
: हा मतलब ठीक ही है सब, थोड़ा फ्री हुआ तो सोचा कि आपसे बात कर लूं
: अरे तो घर पर आओ यार
: हीहीही मुझे लगा आज सैटरडे है तो आप दीदी के पास ( मै बोल कर चुप हो गया )
: हाहाहा अरे आज वो किसी क्लाइंट को अटेंड करने के लिए आउट ऑफ टाऊन गई है
: ओह फिर मिलते है शाम को
: हा ठीक है , इंतजार रहेगा ।
फिर मैने भी लंच बनाया और दुपहर में निशा से थोड़ी बात हुई और मैने कहा कि आज रात मै अपने एक दोस्त के यहां जा रहा हूं ।
: ओके मिस्सी मिस्सी करूंगी आपका
( वो बड़े दुलार में बोली )
: मै भी करूंगा जान उम्माह लव यू ( मुस्कुरा कर मै बोला)
: बाबू सुनो न
: हा बोलो न सोना
: कब मिलेंगे हम लोग
ये उसकी ओर से किया गया पहल था और सुनते ही मन में एक ऊर्जा उठने लगी , लेकिन मन में एक ही बात घूम रही थी , वो सबक जो मेरी सेक्सोलॉजिस्ट नीतू भाभी ने कही थी " ठहर जाने में ही भलाई है "
: नेक्स्ट वीक प्लान करते है बेबी
: ओके ( थोड़ा उदास सी बोली वो )
: अरे सैड न हो न सोना , नेक्स्ट वीक मतलब किसी दिन आप ऑफिस स्किप कर लेना हीहीही
वो एकदम से खुश हो गई और हसने लगी ।
शाम होते ही मै निकल गया अमर के घर की ओर
जारी रहेगी
( पढ़ कर लाइक कमेंट जरूर करें और हो सके तो रोहन के लिए फैसले पर अपनी राय जरूर रखें ... इंतजार रहेगा )