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समय का पहिया चलता है , दिन ढलता हैSachmuch Sona ke dhokhe se Rohan ke liye dukh hua. Khair Rohan ko apna pyar kahin aur khojna chahiye. Romanchak. Pratiksha gle rasprad update ki
Thanks broBahut hi jbrdast update babli se leke Purnima tak
Last wala dukhdayi raha
Intezar rahega agle update ka
Thanks broSuperb Update
अपडेट अच्छी थी भाई पहले तो दुख हुआ कि इतने जबर्दस्त थ्रीसम के बीच रोहन को कुछ नहीं मिला, उधर प्रकाश भी खूब चूत के मज़े ले रहा है बस रोहन ही सूखा घूम रहा है, पर अंत में उसका सूखा खत्म हुआ और पूर्णिम मिली, आखिरी में हार्ट ब्रेक हुआ पर रोहन अच्छे से सोचे तो जो सोना ने किया वो ही उसने भी किया पूर्णिमा के साथ, या बबली या चांदनी के साथ, तो धोखा तो दोनों तरफ से ही हुआ न, ये सिर्फ मेरा मत है, बाकी लेखक को अधिक पता होगा। आगे का इंतजार है कि इस घटना के बाद रोहन की। विचारधारा पर क्या असर पड़ेगा।UPDATE 025
MEGA UPDATE
रात गहरा रही थी और मेरी वासना भी
लंड को संभाल पाना अब मुश्किल हुआ जा रहा था ।
तभी मैने चांदनी को बबली से कुछ फुसफुसा कर कहते सुना और वो मुस्कुराई
एक नजर उसने दरवाजे पर टेक लगाए खड़े अमर को देखा जो वापस से अपना हथियार तैयार कर रहा था ।
फिर बबली उठी और अमर के सीने पर उंगली फ़िराती हुई उसका लंड पकड़ कर उसको कमरे में खींचती चल दी , फिर चांदनी वही खड़ी होकर अपनी पेटीकोट का नाडा खोलकर अपना पेटीकोट दरवाजे पर छोड़ कर सिर्फ पैंटी में अपने चर्बीदार चूतड़ों को लहराते हुए कमरे में जाने लगी
अब मेरी भीतर की बेचैनी अलग ही रूप ले रही थी , चीजें नियंत्रण से बाहर हो रही थी
तभी मुझे बबली दीदी कमरे में टहलती हुई बाथरूम में जाती दिखी और फिर बाहर एक तौलिया लपेटे हुए मुस्कुराते हुए निकली । फिर हाल की ओर आने लगी
वो मेरी ओर बढ़ रही थी , मै सोने का नाटक करने लगा और जब वो मेरे पास आई
: रोहन , चल आराम से सो जा , कम्बल दे दूं ?
मैने उनकी कलाई पकड़ ली और अपनी गोद में खींच लिया
: अह्ह्ह्ह्ह बदमाश तू जाग रहा है
: इतनी तेज चीखोगी तो किसे नीद आएगी
: आह्ह्ह्ह छोड़ पागल , तेरे जीजू अंदर है
: तो क्या हुआ , मुझे भी चाहिए ( मैने उन्हें चूचे पकड़ लिए तौलिए के ऊपर से और वो सिसक पड़ी )
: अह्ह्ह्ह पागल मत बन , मै तेरी बहन हूं वो नहीं दे सकती , सीईईई कितना कड़ा कर रखा है ( दीदी मेरे लंड के कड़कपन को अपने चूतड़ों पर महसूस कर बोली ) हिला कर निकाल ले न भाई अह्ह्ह्ह्ह
: सारी रात आप लोग मस्ती करो और मै बस हिलाऊँ ( मैने भी नखरा गाया)
: अरे नहीं पागल हम लोग भी बस सोने जा रहे है
: अच्छा चलो फिर मै भी आप सभी के साथ सोऊंगा
दीदी थोड़ी देर चुप रही फिर मुझे रुकने को कहा
भागी भागी वो कमरे में गई और फिर दरवाजे पर खड़ी होकर मुझे आवाज दी
मै अपना लंड सेट कर नीद का नाटक करता है कमरे में आया
देखा तो चांदनी और अमर अलग कम्बल में घुसे है ।
सबसे किनारे अमर फिर थोड़ी जगह और बेड के बीच में चांदनी थी
: बेबी थोड़ा एडजस्ट करना , रोहन भी सोएगा
मैने दीदी का मुंह बनता देखा
: मै कहा सोऊ
: इधर आओ इस तरफ रोहन ( चांदनी ने मुझे अपने पास बुलाया और बबली को देखकर आंख मार दी )
मै समझ रहा था कि इनका खेल अभी खत्म नहीं होगा जारी रहेगा ।
फिर दीदी तौलिए में ही थोड़ी भागा दौड़ी कर कमरे की बत्ती बुझा कर दूसरे तरफ से चांदनी और अमर के बीच आ गई
मैने भी बिस्तर में घुसने से पहले अपनी पैंट निकाल दी थी , थोड़ा आराम के लिए
थोड़ी ही देर में चांदनी के हाथों की हरकत शुरू हो गई और उसके हाथ मेरे लंड को अंडरवीयर के ऊपर से मसलने लगे
वही बिस्तर से दूसरी तरफ भी कुछ उफनाती सांसों की फ़रफराहट उठने लगी थी
: वो लोग किस कर रहे है
चांदनी हल्के से फुसफुसाई और अंडरवियर के ऊपर से ही मेरे तने हुए लंड को पकड़ कर खींचने लगी । मुझसे भी रहा नहीं गया मैने भी करवट होकर उसकी नंगी चूचियों को पकड़ लिया और सहलाने लगा
उसकी सांसे भी बेचैन होने लगी ।
: ओह्ह्ह आराम से रोहन
: तुम गलत रास्ते पर जा रही हो
: मतलब ( वो हल्के से बोली )
: हमारा प्लान था दीदी के साथ तुम अमर के सामने मस्ती जारी रखो , ताकि वो मजबूरन तुम्हे दीदी के सामने
: ओके ओके , अभी देखो क्या करती हूं
फिर एकदम से उसने मेरा लंड छोड़ दिया और करवट होकर थोड़ी देर रही
फिर मुझे कुछ चुपड़ चुपड़ सी आवाज महसूस हुई अपने बगल में
पता चला कि बबली और चांदनी की जबरदस्त किसिंग चालू थी
मै भी अपने हाथ आगे बढ़ा कर उसके गुदाज चर्बीदार चूतड़ों को छूने लगा उसकी पैंटी के ऊपर से
मै उन्हें टटोल रहा था कि वो मेरी उंगलियों से दूर जा रहे थे , जैसे वो वो थोड़ी दूर जा रही थी
मै उसकी ओर सरका और उसके चूतड़ों पर पंजे जमाए हुए उसकी स्थिति का अनुमान लगाया तो पता चला कि वो बबली दीदी के ऊपर अपनी एक टांग फेक चुकी है
फिर दीदी की मादक सीसीकिया उठने लगी
मन में दोहरी कल्पना उठ रही थी कि क्या हो रहा होगा
चांदनी दीदी की चूचियां चूस रही है या बुर भी सहला रही है
या फिर अमर और चांदनी मिल कर दीदी की दोनों चूचियों चूस रहे ।
तभी चीजे क्लियर हो गई जब दीदी ने घूटती हुई सिसकी में अमर को पुकारा : सीई ओह बेबी सीई ओह्ह्ह्ह सक इट यश उम्मम ओह्ह्ह्ह गॉड चांदनी सीईईई पी जाओ मेरे दूध को दोनो उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई फक्क ओह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह ओह्ह्ह
बिस्तर पर दीदी की उठापटक होने लगी थी और मै अपना लंड बाहर निकाल कर सहला रहा था । मेरा दूसरा हाथ अब चांदनी के पैंटी में घुस कर उसके चूतड़ों के दरारों में उंगली कर चूत तक जाने की कोशिश कर रहा था और वो अपने चूतड़ों के दरारों को कसने लगी ताकि मेरी उंगलियों को पहुंचने से रोक सके ।
कमरे में दीदी की सिसकिया तेज हो रही थी
: ओह्ह्ह यश यश बेबी और और फक्क फक्क उम्मम डालो और डालो
शायद अमर ने दीदी की बुर में उंगली पेल दी थी
: ओह्ह्ह जान मुझे चाहिए
: क्या चाहिए मेरी जान ( चांदनी ने कहा )
: ओह्ह्ह्ह लंड मेरी जान का मोटा सा अपनी बुर में
: और मेरी बुर का क्या ? ( चांदनी बोली )
: इधर आ उम्ममम सीईईई उम्मम
बिस्तर में कुछ हरकत हुई और चांदनी के चूतड़ मेरे पहुंच से दूर निकल गए , शायद बबली ने उसे अपने ऊपर खींच लिए थे ।
: सीई ओह बबली उम्मम चूस और उम्मम अह्ह्ह्ह्ह पी जा मेरे मम्मे उम्मम
अब तो दोनों बेफिक्र हो गए
: जान
: हम्ममम ( अमर थोड़ा कुनमुनाया )
: नीचे जाकर डालो न
जल्द ही दोनों की चुम्बन और चांदनी के सिसकियों के साथ साथ बबली की सिसकियां फिर से उठने लगी
अमर ने अपना लंड उसकी बुर ने उतार दिया था
बिस्तर पर भयंकर हलचल मची थी ।
: ओह्ह्ह्ह यशस्स बेबी हार्ड और अंदर उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह और कस के पेलो उम्मम ओह बेबी सीई ओह्ह्ह्ह उम्ममम फक्क मीईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम मम्ममम
जल्द ही बबली की सिसकिया घुटने लगी शायद चांदनी ने उसके ऊपर चढ़ कर अपने होठ उसके होठों से जोड़ दिए थे
लेकिन जल्द ही चांदनी की मादक सीसीकिया उठने लगी
: ओह अमर तुम ये क्या कर रहे हो
: क्या हुआ ( बबली मचलती हुई मादक सीसीकिया लेते हुए बोली )
: वो मेरी चूत को सहला रहा है ओह्ह्ह्ह बबली उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम अमर नहीं बहुत मोटा है ओह्ह्ह जल रहा है नहीं
: सीईईई शांत हो जा , कुछ नहीं होगा
बबली के शब्दों से साफ था कि उसे चांदनी के बुर में अमर के लंड जाने से कोई दिक्कत नहीं थी
वो तो चांदनी को तैयार कर रही थी
: ओह्ह्ह बबली बहुत टाइट है ओह्ह्ह्ह उम्ममम सीईईई कितना जल रहा है ओह्ह्ह्ह अमर रुक जाओ उम्मम ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह
थोड़ी ही देर में वापस बिस्तर हिलना
शुरू हो गया और चांदनी की सिसकिया उठने लगी
: ओह्ह्ह्ह बबली उम्ममम सीईईई अह्ह्ह्ह बहुत मोटा है अमर का लंड उम्ममम
: सीई आराम से ओह्ह्ह्ह उम्ममम ( फिर बबली ने अमर को आवाज दी ) बेबी ??
: हा जान ( अमर ने उखड़ते हुई लहजे में कहा जैसे उसका लंड कितनी जन्नत में ही )
: हाऊज योर गिफ्ट बेबी
: सो सॉफ्ट एंड जूसी ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह
: फक्क हर हार्ड ओह्ह्ह्ह यशस्स डिप उम्मम
: ओह्ह्ह्ह बबली और अंदर जा रहा है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह कितना बड़ा है अमर तुम्हारा ओह्ह्ह उम्ममम फक्क मीईई अमर ओह्ह्ह उम्ममम
थोड़ी देर तक अमर छेद बदलता रहा और बारी बारी से चांदनी और बबली की सिसकिया उठती रही
जल्द ही तीनो शांत हो गए और ठंडे हो गए । एक और दौर शांत हो गया ।
लेकिन मेरी बेचैनी को विजुअल्स चाहिए थे और अंधेरे में कुछ भी पॉसिबल नहीं था ।
: सो कैसा लगा जान ( दीदी बोली )
: बहुत मजेदार और चांदनी तो उम्मम
: अह्ह्ह्ह्ह हीहीही छोड़ों न ओह्ह्ह आराम से अमर उम्ममम ( चांदनी खिलखिलाई )
तीनों के आवाज से अंदाजा लग गया था कि अमर अभी भी बिस्तर के दूसरी तरफ था , उसके बाद चांदनी और फिर दीदी मेरे पास आ गई
: जान कहा हो आओ न ( अमर ने कहा )
: उम्हू पागल मत बनो , रोहन सोया है
चलो किसी को मेरी याद तो आई , लंड को सहलाना जारी था
: डोंट वरी जान , उसकी ड्रिंक में मैने गोली डाल दी थी
ओह बेटे मेरे साथ चालाकी
लेकिन चांदनी जान रही थी शायद और मै इस काबिल बच गया कि नीद वाली गोली ड्रिंक नहीं मिली मुझे । जान तो दीदी भी रही थी
: नहीं कुछ नहीं अब सो जाओ सब के सब ( दीदी ने मेरे तरफ मुंह किया और फुसफुसाई ) तू भी , समझा
उन्हें पता था कि मै जाग रहा हूं
: दीदी निकाल दो न ( मै बुदबुदाया )
और थोड़ी ही देर में दीदी बिस्तर पर टटोलती हुई मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में भर ली।
एक गहरी सांस ली मैने
थोड़ी थोड़ी देर में चांदनी और अमर की फुसफुसाहट और खिलखिलाहट तो कभी चांदनी की हल्की सी सिसकारी सुनाई दे रही थी
इधर दीदी हौले हौले मेरा लंड हिला रही थी
: चूस दो न
थोड़ी बिस्तर में हलचल होने लगी और फिर दीदी के रसीले गिले होठों का अहसास होने लगा
मेरे पैर अकड़ने लगे और आड़ फुलने लगे
दीदी लगातार चूस रही थी
तभी एकदम से चांदनी की सिसकी आई
: ओह्ह्ह आराम से यार उम्मम एक बार में ही डाल दोगे क्या ओह्ह्ह्ह मम्मीई कितना बड़ा है तुम्हारा
: और कितनी टाइट है तुम्हारी ( अमर बोला )
: क्या अह्ह्ह्ह सीईईई
: बुर मेरी जान ओह्ह्ह्ह मक्खन सी हो रही है ओह्ह्ह्ह ( अमर बोला )
फिर बिस्तर हिलने लगा और इधर दीदी लगाते मेरा लंड चूसने लगी
थोड़ी ही देर में चांदनी ने वापस दीदी को टटोला
: बबली कहा है
दीदी ने झट से मेरा लंड अधूरा छोड़ लेट गई और सरक गई चांदनी की ओर
फिर उनकी चुम्मिया शुरू हो गई
लंड और फौलादी होगया ये सोच कर कि चांदनी ने भी मेरे लंड का स्वाद लिया होगा और मै दीदी के पीछे हो गया उनकी चर्बीदार चूतड़ों के बीच अपना लंड का टोपा घुसाने लगा
दीदी अपने चूतड़ हिला कर , पीछे धकेल कर मुझे दूर कर रही थी
लेकिन मै भी मान रहा था
मैने अपना कमर चलाना जारी रखा और जल्द ही मेरा गिला लंड उनकी मोटी चर्बीदार चूतड़ों के सकरे दरारों से होकर उनकी गाड़ के सुराख पर ठोकर देने लगा
: सीईईई क्या हुआ चाहिए क्या ? ( चांदनी ने शायद दीदी की बेकाबू सांसे महसूस की होगी )
: हम्ममम
: अमर इसके बुर में डालो ने
मै झट से पीछे हो गया और फिर बिस्तर में हलचल हुई
और दीदी की सिसकिया उठने लगी
: ओह्ह्ह्ह मेरी जान और डालो उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई और कस के चोदो मुझे फक्क मीईई हार्ड बेबी
: ले मेरी जान और ले, आज तो मजा ही आ गया चोद कर तुझे । यकीन नहीं हो रहा है कि तुझे तेरे भाई के बगल में चोद रहा हूं ओह्ह्ह्ह गॉड कितनी चुदक्कड है तू मेरी जान
: हा मेरे राजा तुम्हारे लिए कुछ भी बन जाऊंगी ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई
उनकी बाते सुनकर मेरा लंड अकड़ गया था और सुपाड़ा मुंह खोल चुका था
: तुम्हे पसंद आया न मुझे मेरे भाई के सामने चोद कर
: ओह्ह्ह बहुत ज्यादा मेरी जान सीईईई ओह्ह्ह ऐसा नशा कभी नहीं हुआ ओह्ह्ह्ह
तभी मुझे वापस से दीदी की हाथों का स्पर्श मेरी जांघों पर हुआ, समझ गया वो क्या खोज रही थी
जल्द ही मेरा लंड उनकी गिरफ्त में था
फिर उनकी गंदी बातें खास कर मेरे सामने चोदने को लेकर एक अलग ही उत्तेजना दे रही थी और चांदनी भी तेजी से अपनी बुर सहला रही थी सिसकते हुए , फिर वो समय आया जब मेरे सुपाड़े की नसे फुट पड़ी
एक के बाद एक मोटी थक्केदार पिचकारियां छूटने लगी और दीदी ने जरा भी हाथ नहीं खींचा
अंत तक जबतक मेरे लंड की नसों ने झटके देना नहीं छोड़ा , उन्होंने लंड नहीं छोड़ा
फिर अमर भी झड़ गया और मै कब सो गया पता नहीं चला ।
सुबह 09 बजे आंख खुली
किसी ने मुझे नहीं उठाया और फ्रेश होकर मै हाल में आया तो पता चला कि अमर निकल गया था ।
चांदनी और बबली बस थे , लेकिन उन दोनों के सामने एक साथ मै रात की कहानी नहीं दोहरा सकता था ।
खाने के बाद मै निकल गया अपने रूम पर और बची खुची नीद पूरी करने के लिए सो गया ।
शाम को सोना का कॉल आया तो उसने कल रात के डिनर के बारे ने पूछा । थोड़ी बात चित हुई और काल कट गया ।
डिनर से याद आया कि मंडी से सब्जी लेनी थी और मै मंडी की ओर बढ़ गया ।
लेकिन मुझे क्या पता था कि मंडी के बिकने के लिए खुद पूर्णिमा अपना सौदा सजा कर खड़ी होगी ।
सूती ब्लाउज में ठुसे हुए चूचे , और साड़ी में उठे हुए बड़े हौद सी गाड़
देखते ही ठीठक जाए इंसान
आसपास देखा कि प्रकाश और अनिता तो नहीं , मै भी उसी दुकान पर चला
: अरे रोहन सर , आप यहां
मैने भी मजाक में ही बात शुरू की
: सच सच बताओ पूर्णिमा जी , आप मेरा पीछा तो नहीं कर रही उम्मम
थोड़ी तारीफ कर दो वो गदगद हो जाती थी और उसके गाल गुलाबी
अंग अंग खिल उठता था उसका
: वैसे क्या ले रही है आप ? और आपकी सहेली अनिता जी कहा है ?
: वो दूसरी तरफ गई है प्रकाश सर के साथ मच्छी मंडी की ओर
: अच्छा अच्छा , आप नहीं खाती ?
: उम्हू बिल्कुल नहीं और आप
: ना बाबा ना , गंध बर्दाश्त नहीं मुझे
: हा लेकिन मुझे तो करना पड़ेगा न
: अरे तो करना ही क्यों है, मेरे यहां चलिए , मशरूम की सब्जी बनाता हूं मस्त
पता नहीं लेकिन कैसे मै बोल गया उस पल , मै ही जानता हूं
: अच्छा , आपको आती है
: एकदम , एक बार खाएंगी बार बार आयेगी
फिर हम दोनो हसने लगे और तभी अनीता और प्रकाश भी आ गए
फिर बातों ही बातों में पूर्णिमा ने कह दिया कि वो मेरे साथ जा रही है डिनर के लिए
प्रकाश और अनिता आपस में मुस्कुराए और मै भी हैरत में था कि कही कुछ गड़बड़ तो नहीं होगा ।
लेकिन अब ऑफर दे दिया था तो पीछे हटने का सवाल नहीं था ।
वो मेरे साथ चल दी मेरे रूम की ओर और अनिता प्रकाश अपने लाज की ओर चल दिए ।
हम दोनो रूम पर आए
पहले तो मैने उसकी आवभगत की और नाश्ता चाय कराया। उसने मेरे फ्लैट की तारीफ की और फिर मै चेंज करने के लिए अपने कमरे में चला गया
तभी मुझे फोन की रिंग सुनाई दी जो पूर्णिमा की थी और उसने कॉल पिक किया
वो थोड़ी शर्मा रही थी और हस रही थी
" हट कुत्ती, मार खाएगी समझी । रास्ता तो तेरा आसान किया है मैने और मुझे बोल रही है उम्मम , हा हा चल देखती हूं , रख अब , तेरी तो चांदी है न , हा बाय "
मैने थोड़ा बहुत सुना और पैंट निकाल कर लोवर में आ गया ।
एक नजर मैने उसे किचन स्लैब के पास सब्जी निकालते देखा
उफ्फ बड़ी तबेले जैसी गाड़ थी एकदम टाइट और गोल मटोल, लंड सेट कर उसकी के बढ़ गया मै
फिर किचन में हम बातें करते हुए काम करने लगे
वो मुझे अपने घर की हालत के बारे बताने लगी , कि उसके शराबी पति की वजह से उसके इकलौते बेटे को बहुत दिक्कत होती है । मैने भी थोड़ी बहुत अपने परिवार के बारे में जानकारी दी ।
फिर मेरी शादी को लेकर बात होने लगी
: कर कीजिए सर , आराम होगा आपको
: कर लूंगा तो फिर मुझे आपके हाथों की सेवई कौन खिलाएगा , सच में बहुत अच्छी महक है पूर्णिमा जी
: क्या सर , थैंक्यू और आप भी कम उस्ताद नहीं है हीही
: बातों का ?
वो हंसते हुए झेप गई
: नहीं मेरा मतलब ... हीही
फिर हमने खाना खाया और थोड़ी देर बालकनी में खड़े बातें की
: थैंक्यू सर
: क्यों ?
: बस ऐसे ही , मैने जितना सोचा था आप उसे कही ज्यादा अच्छे है ।
: अरे क्या कह रही है आप ? सच कहूं तो आप बहुत फ्रेंडली है और आपसे बात करके मुझे अच्छा लगा , एक दोस्त का साथ होना अच्छा है ।
कुछ देर वो चुप रही और मैने जब उसकी ओर देखा तो उसकी आंखों के आंसू थे
: अरे पूर्णिमा जी आप ये ?
: सॉरी रोहन सर
: क्या हुआ
: मेरा अतीत बहुत अच्छा नहीं है , मैने बहुत गलत नियत से आपसे नजदीकी बढ़ाई थी , सोचा था कि आपको मना कर थोड़ी छुट्टी मिल जाएगी तो घर पर देख लूंगी । बच्चे की इस साल बोर्ड परीक्षा है
: आपके नजदीकी बढ़ाने का मतलब ?
: वो ... कुछ नहीं छोड़िए न रोहन सर अब
: अरे मै तो अब आपको अपना दोस्त मान चुका हूं , अब तो कहिए
वो थोड़ा शर्मा कर थोड़ा हिचक कर बोली : दरअसल मैने सरकारी तंत्र का एक बहुत बुरा पहलू देख रखा है रोहन सर और पिछली कई पोस्टिंग पर मै उसी तरह से मैनेज करती आई हूं और मुझे लगा कि शायद आपको भी वैसे ही ???? सॉरी
: अरे आप फिर से ( मै उसके पास ही गया और उसकी पीठ पर हाथ रख कर )
: लेकिन मेरी छुट्टी ?
: ठीक है थोड़ा आप मैनेज करना और थोड़ा मै भी कर लूंगा ( मेरे हाथ सरक पर अब उसकी कमर तक आ गया था )
और वो भी महसूस कर रही थी लेकिन मैने ऐसे जताया जैसे कुछ हुआ ही न हो , वो मुस्कुराई
: अच्छा एक बात पूछू
: जी सर कहिए
: ये अनीता और प्रकाश का क्या चक्कर है
वो हस कर मुझे देखी और मै मुस्कुरा कर उसे देखा , मेरे हाथ अभी भी उसके कमर पर थे
: अरे फर्क दिखता है भाई, बताओ न मुझे गॉसिप सुनने का बड़ा शौक है
: प्रकाश सर बहुत तेज है
: और अनिता ( मुस्कुरा कर मैने कहा और मेरे पंजे उसके कूल्हे ही की बढ़ने लगे )
: हीहीही , देखा जाए तो दोनों एक जैसे ही है
: तो आज उनका कोई खास प्रोग्राम है क्यों ?
पूर्णिमा ने मुस्कुरा कर मुझे देखा
: हा उनलोगो को ड्रिंक करना था और मै इनसब से दूर रहती हूं , आप करते सर?
: क्या ड्रिंक ? नहीं बाबा नहीं
: और कोई तलब ?
: उम्हू , पापा को भनक लगेगी तो टांगें टूटेगी
: अच्छा और कोई गर्लफ्रेंड
: उम्मम अभी तो नहीं मिली कोई ऐसी जिसे गर्लफ्रेंड कह सकूं ... ( ना जाने क्यों ऐसे मोमेंट पर अपनी सोना को छिपाना ही प्रेफर करता हूं , एक इंसटेंट आती है अंदर से ) हा आज एक दोस्त जरूर मिली है मुझे
ये कह कर मैने साड़ी के ऊपर से ही उसके नायाब उठे हुए कूल्हे सहला दिए
: वैसे आपका कोई बॉयफ्रेंड पूर्णिमा जी , ओह सॉरी आप तो शादीशुदा है न हाहाहाहाहा
: अरे नहीं ऐसी कोई बात नहीं है , मेरे भी कई दोस्त रहे है ... खास कोई नहीं रहा अब तक
जैसे जैसे मेरे पंजे ऊंचे गुदाज चर्बीदार कूल्हे पर रेंग रहे लोवर में लंड अकड़ा जा रहा था । जान रहा था कि अगर मैने खुल कर पूर्णिमा के चूतड़ मसल भी दिए तो भी वो मुझे रोकेगी नहीं
: तो मै किस कैटेगिरी में हूं
: बताना मुश्किल है ( वो मुस्कुरा कर बोली )
: क्यों ?
: इससे पहले इतनी कम उम्र का कोई दोस्त नहीं मिला मुझे
: फिर तो मै खास हुआ आपके लिए
: हा जरूर
उसने मेरी आंखों में देखा और मैने भी
एक नशा आ चढ़ रहा था अब मुझे
: तो ये दोस्ती कैसी है , सिंपल वाली या फ्रेंड विथ बेनिफिट वाली
मैने आंखे नचा कर कहा और मुस्कुराया
: और कैसा बेनिफिट चाहिए आपको
उसका इशारा मेरे पंजे पर था जो सरक कर उसके चूतड़ों पर आ गए थे
मैने अपने होठ हल्के से सिकोड़ और नाखून हल्के से गाड़ दिए
: अह्ह्ह्ह
वो सिसकी और मुस्कुराई
मैने उसको अपने करीब कर लिया, लंड लोवर में बड़ा सा तंबू बनाए हुए था और मेरी हवस भरी नजरे उसकी आंखों में देख रही थी
: सर !!
: हम्ममम ( मेरी धड़कने बेकाबू हो रही थी )
: हम बालकनी में है
: तो ? ( मै उसकी ओर झुकने लगा था )
: किसी ने देख लिया तो ?
एक लंबी गहरी सांस और मैने आंखे बंद कर ली फिर उससे अलग हो गया ,मुस्कुराता हुआ कि मै क्या करने जा रहा था ।
वो भी मुस्कुराती हुई नीचे देखने लगी , ढलती रात में कालोनी के हर फ्लोर पर रोशनी ही रोशनी थी
: मेरे ख्याल से मुझे जाना चाहिए
मै कुछ नहीं बोल सका , वापस से मेरी मर्यादा ने मुझे घेर लिया ।
वो कमरे में आई और अपना पर्स लिया और जाने लगी।
दरवाजा खुला , मै चाहता था कि एक बार वो पलट कर वापस आ जाए
आंखे बंद कर मैने एक गहरी आह भरी और वो मेरे सामने अपने चूतड़ हिलाती हुई निकल गई, एक बार फिर मैने मौका गवा दिया
बिस्तर पर आकर खुद को थोड़ा कोशा और फिर पूर्णिमा के नाम की मूठ लगाई और सो गया ।
अगली सुबह को ड्यूटी के लिए निकल कर जैसे ही गाड़ी खोली
मेरी आँखें बड़ी हो गई
आज पूर्णिमा ने कुर्ती लेगिंग्स पहनी थी । उसके गुदाज चर्बीदार मोटी मोटी जांघों और गुलगुले कूल्हे का स्पर्श मेरे भीतर वासना की तरंगें उठा रहा था ।
आज अनिता और प्रकाश के चेहरे पर मुस्कुराहट अलग थी , मन था कि एक बार पूर्णिमा से पहल कर लूं लेकिन वक्त सही नहीं था ।
ऑफिस आने के बाद समय देखकर लंच से पहले ही मैने पूर्णिमा को मैसेज करके बुलाया अपने पास
जब वो आई तो उसके फूल बॉडी फिगर को लेगिंग्स और कुर्ती में देख कर मेरा पैंट कसने लगा ।
वो आई और मेरे पास खड़ी हो गई , उसकी गदराई जांघों को छूने का दिल रहा हो गया था , उसके मोटे चर्बीदार चूतड़ों का उभार साफ नजर आ रहा था कुर्ती के साइड कट से
जी कर रहा था भर कर मसल ही डालू
: क्या हुआ कल
वो मेरी बात समझ गई और मुस्कराने लगी
: बताओ न
: क्या सर छोड़िए न
वो शर्मा रही थी
: अरे यार बताओं न
यार शब्द सुनके वो थोड़ा आंखे बड़ी कर मुझे देखी और मैने आंखों से उसको रिक्वेस्ट किया
: मुझे तो कल आपके यहां ही रुक जाना चाहिए था
: क्यों ?
वो एक नजर बाहर देखी कि कही उन दोनों में से कोई पास तो नहीं फिर बोली
: वही हुआ जिसके लिए दोनों परेशान थे
: आपने देखा क्या ?
वो थोड़ी शरमाई
: उम्हू , बस सुना
: सुना मतलब ?
: हीहीही , रात देर तक उनकी आवाज बाहर आ रही थी
: तब तो और भी लोगों ने सुना होगा ( मुझे शॉक्ड हुआ )
: नहीं मतलब , मै दरवाजे के पास खड़ी होकर ( वो शर्मा कर चुप हो गई )
: उम्ममम वैसे भी क्या कर रहे थे दोनो
: जीने से पास थे , क्या बताऊं सर दोनों एक जैसे है । बस मौका मिल जाए हीही
: तो क्यों न मौका देख देखा जाए
: मतलब ( वो थोड़ी उलझी हुई बोली )
: मतलब अभी बताता हूं
मैने ऑफिस के सभी स्टाफ को एक टिप की चेकिंग के लिए भेज दिया । अब ऑफिस में सिर्फ 04 ही स्टाफ थे ,
मैंने पूर्णिमा को छत पर जाने को कह दिया थोड़ी देर के लिए और प्रकाश को कहा कि वो और अनिता ऑफिस का ख्याल रखे ।
मै अभी आता हूं एक जरूरी वीसी है तो बाग में रहूंगा ।
योजना रंग लाई
अनिता और प्रकाश को लगा कि दूसरे स्टाफ के साथ शायद पूर्णिमा भी चली गई है और मैने जानबूझ कर वीसी के कहा क्योंकि प्रकाश को पता था कि अधिकारियों की वीसी सुनने के लिए मुझे शांत और एकांत जगह चाहिए
ऑफिस में भी में नहीं रुकता
10 मिनट बाद मैने पूर्णिमा को काल कर नीचे मेरे ऑफिस में देखने को कहा और उसकी हल्की शर्माती मुस्कुराहट की खनक से मै समझ गया कि मामला शुरू हो गया है
मै भी दबे पाव अंदर आ गया और पूर्णिमा के पास सट कर खड़ा हो गया
: क्या हुआ ( मैने उससे इशारे से हल्की आवाज ने उसके कंधे थपथपा कर कहा )
वो मुझे देख कर थोड़ा हिचक रही थीं फिर मुस्कुराई
मैने ऑफिस में खिड़की से झांका तो आंखे बड़ी हो गई
सामने प्रकाश अनिता को मेरी ऑफिस की टेबल पर लिटा कर उसकी साड़ी उठाए हुए उसकी चूत चूस रहा था
एकदम से मेरा लंड आकार लेने लगा
मै तो पुर्णिमा के पास सट कर थोड़ा सा उसके कूल्हे से लग कर खड़ा था जैसे उसने मेरे लंड में हुए विस्तार को महसूस के लिया
एक नजर मूड कर उसने मेरी पेट पर देखा , हम दोनो की नजरे मिली और हम मुस्कुराए
वो हटने लगी तो मैने उसकी बाजू पकड़ कर रोक लिया वही
अंदर प्रकाश अनिता की साड़ी उठाए मुंह उसकी बुर में लगाए हुए था
चूस वो रहा था और गला मेरा सूखने लगा
और अनिता की सिसकियां मेरे ऑफिस में गूंज रही थी
मेरी धड़कने तेज हो रही थी और शायद पूर्णिमा की भी ।
रहा नहीं गया और मैने उसकी कुर्ती ऊपर कर उसके मुलायम चूतड़ों को सहलाया , उसने आंखे बंद कर ली और मैने अपने सुपाड़े की नोख को उसके चूतड़ों में चुभोया
मेरे पंजे उसके कूल्हे और बड़े बड़े रसीले भड़कीली चर्बीदार गाड़ पर रेंग रहे थे । जल्द ही मेरे पंजे कुर्ती के नीचे जा चुके थे और लेगिंग्स के ऊपर से उसके चूतड़ पहले से ज्यादा नर्म महसूस होने लगे
: सर
: हम्ममम
: कोई आ जाएगा
: तुम बस नजर रखो बाहर
: बाहर ? क्यों ?
वो कुछ कहती इससे पहले ही मै नीचे एड़ियों के बल बैठ गया और दोनों हाथों से उसके बड़े बड़े रसीले चर्बीदार मोटे चूतड़ों को सहलाते हुए नथुनों में सांस भर कर उनकी गंध ली और पूर्णिमा मचल उठी ।
फिर मैने अपने चेहरे को उसके गद्देदार चूतड़ों पर लेगिंग्स के ऊपर से सहलाया और वो अपनी चूतड़ों को टाइट कर हल्की सी सिसकी
: उम्ममम सर
: बहुत सॉफ्ट हो तुम पूर्णिमा अह्ह्ह्ह कितनी मुलायम गाड़ है
मेरे शब्दों से वो थरथरा उठी और मैने मुंह खोलकर उसके गाड़ को उसकी लेगिंग्स के ऊपर से काटने लगा
उसने अपने पैर टाइट कर दिए और खिड़की का सहारा ले ली
अंदर से अनिता की सिसकियां तेज हो रही थी और मैने पूर्णिमा की लेगिंग्स खींचने लगा
एक झूठा सा विरोध भरा लहजा , जिसमें सहमति ज्यादा थी
: अह्ह्ह्ह नहीं सर प्लीज
मैने नहीं सुनी और उसकी लेगिंग्स खींचने लगा और पूरे चूतड़ों से उतार कर देखा तो एक पतली सी पैंटी में उसने बड़ा सा खजाना छिपा रखा था
मैने हौले से उसके चूतड़ों को थामा और पैंटी के बाहर दिख रहे चूतड़ों के मुलायम हिस्से पर किस किया
वो पूरी तरह गिनगिना गई , मैने होठ खोले और चूसने लगा । फिर जीभ से चाटने लगा , उसके पैरो में असंतुलन सा होने लगा
: अंदर क्या हो रहा है ( मैने हल्के से बोला )
: वो लोग कर रहे है
: क्या ?
मैने अपने नथुने पैंटी के ऊपर से उसके गाड़ के दरारों पर रख कर उन्हें सूंघा और वो कांपने लगी
: बताओं न
: स सेक्स!!!!
मैने भी चूम लिया कस कर और खड़ा हो गया , उसने झट से अपनी लैगिंग्स खींच ली
मैने एक नजर अंदर देखा तो नजारा बदल चुका था
अनिता को उसी पोजीशन में थी और प्रकाश अपना लंड निकाल कर पेले जा रहा था ।
पूर्णिमा ने मुझे देखा और इस बार मैने उसकी कमर में हाथ डाल कर अपनी ओर खींचा और चूम लिया उसके होठों को
न वो हिचकी न मै
लंबा गहरा चुम्बन
मेरे पंजे अभी भी उसके चूतड़ों को नोच रहे थे ।
: आज आजाओ न
: नहीं इन्हें शक हो जाएगा
: फिर ?
: कुछ दिन बाद जब अनिता घर जाएगी तब , मैने सुना हैं कि प्रकाश उसको छोड़ने जायेगा ।
: तबतक मेरा क्या होगा
: मै रखूंगी न आपका ख्याल
मैने वापस से उसके लिप्स चूसने लगा और उसके बड़े बड़े चूतड़ों को सहला कर हट गया
थोड़ी देर तक हमने बाहर बाग में टाइम पास किया और फिर वो दोनों निकले
कुछ कुछ उन्हें भी शंका थी कि हमने एकदम से उन्हें अकेला छोड़ दिया था लेकिन खुल कर कोई नहीं बोला ।
शाम हुई और फिर हम लोग निकल गए
रात की राह मै देख रहा था
पूर्णिमा के साथ text से बात हो रही थी । सोना के साथ मुझे कोई ताजगी महसूस नहीं हो रही थी तो आज मैने खुद जल्दी सोने का बोल कर उसे गुड नाइट कह दिया था
रात के 11 बजे पूर्णिमा का कॉल आया
: क्या हुआ गई वो
: हीही , हा अभी जस्ट ( पूर्णिमा फुसफुसाकर बोली )
: चलो सही है हमें थोड़ा वक्त मिलेगा
: क्या सर आप भी
: क्यों तुमने ही कहा था कि मेरा ख्याल रखेगी
वो चुप हो गई
: हैलो , प्लान बदला तो नहीं न
: अरे नहीं हीही , बस समझ नहीं आ रहा कहा से शुरु करूं
: कहा से मतलब
: आपको पसंद क्या है ?
: तुम !! और तुम्हारे वो बड़े बड़े ओह्ह्ह्ह सोच कर ही तन रहा है अब तो
: अपनी स्पीड पर थोड़ा ब्रेक लगाइए हीही
: अरे बोलने दो न , आज तो कयामत लग रही थी , लेगिंग्स में तुम्हारे चूतड़ ओह्ह्ह कितना मुलायम और गद्देदार था ।
: इतना पसंद आया आपको !!
: अच्छा सुनो न कल कुछ हल्का पहन के आना
: क्यों ? ( उसने इतरा कर कहा )
: अरे थोड़ा ढीला रहे और हा पैंटी नहीं
: तो क्या पहन के आऊं आप ही बताओ
: ऐसा कुछ जिसमें मै आराम से हाथ डाल कर छू सकू , ऊपर नीचे सब जगह
: ओह्ह्ह फिर तो एक ऐसी चीज है मेरे पास ?
: क्या !! ( मेरा लंड अकड़ने लगा )
: टॉप और लॉन्ग कॉटन स्कर्ट
आंखे बंद कर एक पल के लिए वो पल सोचने लगा , जब टॉप और स्कर्ट में पूर्णिमा मेरे पास होगी , अंदर बिना पैंटी के
फिर नीचे बैठ कर उसकी बुर और गाड़ चाटने में अह्ह्ह्ह्ह लंड एकदम फौलादी हो गया
: उफ्फ मजा आ जाएगा , लेकिन मेरी हालात खराब कर दोगी
: हीही अब सब कुछ तो नहीं दे सकती न सर
: एक बात पूछू पूर्णिमा
: हा कहिए न सर
: तुम्हे चूत चटवाने में कैसा लगता है ?
वो थोड़ी देर शांत रही और मै अपने सवाल उठा कर अपना लंड सहला रहा था
: उम्मम बोलो न
: बहुत पहले मेरे एक सीनियर ने किया था ,वो ज्यादा उम्र के थे 60 के आस पास रिटायरमेट के करीब , अधूरा छोड़ दिया था मुझे
: उफ्फ कोई बात नहीं कल मै पूरा करके छोडूंगा
: ओह्ह्ह्ह सर
: क्या हुआ
: उम्ममम मन कर रहा है
: क्या ?
: कल मिलिए फिर बताती हूं
: यार पूर्णिमा अपनी नंगी फोटो दो न देख कर हिलाने का मन कर रहा है प्लीज
: फोटो क्यों लाइव देख लो न सर , मै तो कपड़े निकाल कर ही सोती हूं
: क्या सच में , और अनीता के साथ भी
: हा उसमें बुरा ही क्या है ? अक्सर हम लोग बिना कपड़ो के होते है , कभी कभी तो रात में एक दूसरे से चिपक भी जाते है हीही
कही न कही मेरे जहन में उनके लेस्बो होने की संभावना बन रही थी , लेकिन मैने उस फैंटेसी को वही रोकने का प्रयास किया और वीडियो काल घुमा दिया
वो एक चादर ओढ़े हुई थी उसके कंधे नंगे थे और मोटी मोटी चूचियो का उभार साफ नजर आ रहा था
मेरा लंड अकड़ रहा था
: दिखाओ न
उसने मुस्कुरा कर हौले से चादर हटाई
उफ्फ कितने गोरे और मोटे मोटे चूचे थे उसके और वो भूरे बड़े अंगूर जैसे निप्पल लंड एकदम फड़फड़ाने लगा
: ओह्ह्ह पूर्णिमा तुम कितनी सेक्सी ओह्ह्ह देखो क्या हाल कर रखा है तुमने
मैने वीडियो काल पर अपना लंड सामने लाते हुए उसे दिखाया और उसकी आंखों की चमक बढ़ गई
: उफ्फ रोहन सर ये तो बहुत उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई कुछ करो न
: क्या करूं
: डाल दो !! अह्ह्ह्ह सीईईईईई
: कहा डाल दूं ( वीडियो काल पर उसको अपना लंड दिखाते हुए मै बोला )
: यहां सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह उम्ममम ( एकदम से उसने अपनी जांघें फैला कर मोबाइल को अपनी चूत के आगे के गई
ओह्ह्ह एकदम गुलाबी जांघों के बीच लंबी फॉक वाली गुलाबी फूली हुई चूत रस छोड़ रही थी और पूर्णिमा उसे मसल रही थी
मै उसकी लाल होती बुर को देख कर तेजी से लंड हिलाने लगा
: ओह्ह्ह पूर्णिमा तुम्हारी बुर बहुत साफ और मस्त है ,कितना रस बह रहा है मन कर रहा है अभी चाट जाऊ ओह्ह्ह्ह गॉड कितनी लंबी चूत है ओह्ह्ह्ह
: हा सर आजाओ न चाट लो , मुझे भी चटवाना है ओह्ह्ह और अपना वो डाल देना इसमें ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई और नहीं रहा जा रहा है सर प्लीज डालो न
: हा लेलो , लो खोल दिया ओह्ह्ह्ह
: ओह गॉड फक्क मीईई ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह सर मेरा हो रहा है ओह्ह्ह सीई ओह्ह्ह सर हो रहा है मेरा उम्ममम उम्ममम फक्क मीईई फक्क मीईई ओह्ह्ह्ह
मै उसकी चूत के फांकों से झड़ते रस के छींटे और उसकी उत्तेजना से चरम पर आ गया तेजी से अपना लंड हिलाने लगा
: ओह्ह्ह उम्ममम मेरा भी आ गया उफ्फ बहुत सेक्सी हो तुम ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह गॉड कितनी सेक्स.....
झड़ने के बाद हांफने लगा था मै और फिर थोड़ी बातचीत के बाद हम दोनो सो गए ।
अगली सुबह फिर से वही रूटीन
पूर्णिमा वादे के मुताबिक एक मोटे कपड़े वाले टीशर्ट और स्कर्ट में आई थी , अनिता ने भी आज अपना लुक बदला था , वो भी पहली बार एक लॉन्ग टॉप और जींस में थी
: ओहो आज लग रहा है कही बाहर का प्लान है ( पूर्णिमा के पास बैठता हुआ बोला )
: हा सर प्लान तो है , लेकिन मेरा नहीं प्रकाश सर और अनिता का
मैने अनिता की ओर देखा वो शर्मा रही थी
: अरे नहीं सर , वो मुझे कुछ शॉपिंग के लिए जाना है , लेकिन अभी भी लंच के बाद और मै आपको कहने वाली थी । प्रकाश सर को भी कुछ समान लेना था ।
मै मामला समझ रहा था और फिर हम लोग आ गए ऑफिस
जब भी मुझे मौका मिलता या पूर्णिमा अकेली होती
मै उसके चूतड़ों को मसल देता , स्कर्ट में हाथ डाल कर सहला देता । उसने वादे के अनुसार पैंटी नहीं पहनी थी
मैने उसकी बुर को भी सहलाया
लेकिन किस्मत उतनी अच्छी नहीं थी ।
दिन गुजरने लगे
हर रोज अब पूर्णिमा के साथ रात में वीडियो काल पर देर रात अनिता के जाने के बाद गंदी बातें होती और हर रोज वो मेरे पसंद के कपड़े पहनती ।
ऑफिस टाइम में हम बस एक दूसरे को छू कर, मिज मसल कर काम चला रहे थे । कभी मुझे उसकी बुर की फांकों को चाटने का मौका मिल जाता , तो कभी उसे मेरे लंड थोड़ा सा चुभलाने का ।
सोना के साथ अब मैने सेक्सुअल बाते करनी बंद ही कर दी थी , मेरी जरूरत अब पूर्णिमा देख ले रही थी
वही उसी हफ्ते पता चला कि चांदनी ने अमर के साथ अकेले में मस्ती कर ली , उसने साथ में नंगी तस्वीरें भेजी थी ।
फिर वो दिन आ ही गया जब अपने घर के लिए जाने वाली थी , हमारी बातें तय हो गई थी । प्रकाश उसको छोड़ने जायेगा ये भी तय था ।
शाम को उस रोज ऑफिस से आते वक्त ही पूर्णिमा मेरे साथ उत्तर गई ।
हम लोग कमरे पर आ गए
मैने उसको आते ही दबोच लिया
उसके रसीले होठ मुझमें में जोश भर रहे थे और कामुकता का वेग बढ़ता ही जा रहा था
मैने अपने पंजे उसके कूल्हे पर रख कर उसे अपनी ओर खींच लिया । साड़ी में उसके भड़कीले चूतड़ों को सहलाने का मजा ही अलग था
मै आगे बढ़ने लगा उसको अपनी बाहों में भर कर उसके गाल फिर गर्दन और हाथ आगे कर ब्लाउज के ऊपर से उसकी मोटी छातियां दबाते हुए उसके सीने को चूमने लगा
: अह्ह्ह्ह बस
: क्यों ?
: पहले थोड़ा डिनर का देख लें
मै मुस्कुरा पड़ा , घड़ी देखी तो वक्त अभी 06 बजने को हो रहा था ।
मैने उससे चिपकना और उसके चूतड़ों को मसलना जारी रखा ।
जबतक कि एक अंजान फोन कॉल ने मेरे मोबाइल पर दस्तक नहीं दी
मै हाथ में मोबाइल पकड़े नंबर देख रहा था
: कौन है ?
: पता नहीं , तुम सब्जियां काटो मै देखता हूं
: ओके ( वो बोली और काम में लग गई )
मैने काल पिक किया और सामने से एक जोशीले और दोस्ताना मिजाज में ग्रिट हुआ
: हे रोहन , कैसे हो ? पहचाना
आवाज थोड़ी तो जानी पहचानी लगी लेकिन चेहरा याद नहीं
: सॉरी !! कौन ( मै बोला )
: यार अमर ?
इसने क्यों कॉल किया होगा ! दीदी ने इसको मेरा नंबर क्यों दिया और बताया भी नहीं
: ओह हाय अमर , कैसे हो आप !!
: मस्त हूं और तुम बताओ
उसकी बातों से साफ जाहिर था कि वो मुझसे जबरन अपनी दोस्ती बढ़ाना चाहता था, लेकिन पूर्णिमा की वजह से मै बहुत इसमें पड़ना नहीं चाहता था ।
: यार सॉरी उस रात के लिए , सुबह भी मुझे एक काम से निकलना पड़ गया था
: हा , दरअसल मुझे जल्दी नीद आ गई थी और शायद वाइन का असर था हाहाहा कि देर से उठा
मैने पूरी कोशिश की कि कही से भी अमर के दिमाग में ये ख्याल न आए कि मै जाग रहा था । लेकिन मेरा बेवजह सफाई देना ही भारी पड़ गया
: हाहाहा तुम्हे बहुत कुछ सिखाना पड़ेगा रोहन
: जैसे कि ?
: जैसे कि झूठ कैसे बोला जाता है । मै भी एक मर्द हूं रोहन और मर्दों की सेंस के बारे में अच्छे से पता है कि कब वो क्या सोच रहे होते है ।
मै समझ गया था कि अमर ने मेरी चोरी पकड़ ली थी और मै थोड़ा असहज होने लगा था , लेकिन अमर ने ही मेरा मन हलका किया
: ओह कमान यार इतना भी मत सोचो , जवान हो और नई उम्र है तुम्हे अभी बहुत दुनिया देखनी है ।
: हम्म्म ( मै क्या ही बोलता उसको कि मै ये सोच कर अपना लंड हिला रहा था कि उसने मेरे सामने मेरी बहन को चोदा)
: वैसे हम लोग कब मिल सकते है ? यार थोड़ा मस्ती करेंगे , बॉयज वाली लंबी बात चीत... तुम समझ रहे हो न
उसका इशारा मै समझ गया था , यानी कि उसने पार्टी नाइट में वो सब बातें नशे में नहीं कही थी ।
मैने एक नजर किचन में खड़ी पूर्णिमा को देखा और उसी समय मेरी सोना का कॉल आ रहा था
मै सोच रहा था कि पिक कर लूं लेकिन फिर उसका मैसेज आया कि वो घर के लिए बस में बैठ गई है रात में बात करेगी ।
: हैलो रोहन , क्या हुआ ?
: नहीं कुछ नहीं
: उम्मम आज थर्सडे है ...कल का प्रोग्राम रखते है ? क्या कहते हो ।
: जैसा आपको सही लगे ( मै मुस्कुरा कर बोला )
: हा वही ठीक रहेगा ? तो कहा मिल सकते है !! मेरे घर या तुम्हारे ?
: जहा आप कहिए ....
: चलो तुम मेरे मेहमान रहोगे तो पहली मीटिंग मेरे यहां ही कर लेते है , एड्रेस तुम्हे सैंड कर दूंगा बाय
: हा बाय
कॉल कट हो गई और मोबाइल की बैटरी भी घटने लगी थी, फिर ऑफ हो गई
मैने एक नजर वापस किचन में देखा और अब कोई डिस्टर्ब न करें इसके लिए मैंने मोबाइल चार्ज लगा कर किचन में चला गया और पीछे से पूर्णिमा को पकड़ कर अपनी बाहों में भर लिया
: उम्मम सर , अरे छोड़िए न ओह्ह्ह्ह क्या कर रहे है
: वही जिसके लिए तुम यहां हो
: पहले खाना फिर कुछ समझे आप
: अच्छा थोड़ा सा किस
वो आंखे बंद कर मेरी ओर अपना चेहरा घुमा दी उसे लगा मै उसके होठों की बात कर रहा था लेकिन मै वापस सरक कर नीचे आ गया और उसकी साड़ी उठाने लगा
: अरे हीहीही नहीं ये तो चिटिंग है उम्मम रुकिए न सर
: बस थोड़ा सा
मैने साड़ी पेटीकोट समेत उपर चढ़ा दी और
उसके पैंटी वाले नंगे चूतड़ों को चूमने लगा , मेरे होठों का अहसास होते ही वो सिहर उठी, उसने किचन स्लैब को पकड़ लिया
: उम्ममम सर सीईईई ओह्ह्ह उफ्फफ
: क्या हुआ
: कुछ नहीं , ऑफिस में अच्छे से चीखने को नहीं मिलता था
: अच्छा ऐसा है क्या ( फिर मै खड़ा होके उसके नंगे चूतड़ों को हाथों से सहलाते हुए चट्ट से अपना पंजा जड़ दिया )
: ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई वो तेज आवाज में सिसकी
: और चिल्लाओ यहां कोई सुनने वाला नहीं
: उफ्फ सर ओह्ह्ह्ह उम्ममम रुकिए न सब्जी जल जाएगी
: उम्हू तुम रहने दो वो मै देख रहा हूं , तुम्हारे लिए दूसरा काम है मेरे पास
: वो क्या ?
उसने मेरी ओर देखा और मैने अपना पैंट खोल कर अपना लंड बाहर निकाल कर उसके सामने झुलाने लगा
वो आंखे फाड़ कर देख रही थी , ऑफिस में कितनी बार उसने इसे देखा था और छुआ भी लेकिन एकांत का मजा न उसे मिला न मुझे
उसने थूक गटक कर मेरी ओर देखा और मैने उसके नीचे बिठा दिया
वो घुटने फोल्ड कर नीचे हो गई और मेरे लंड को हाथों के लेकर थामा दोनों हाथों से
उसके गुदाज मुलायम हथेली का स्पर्श पाते ही मेरे लंड की कसावट बढ़ने लगी और आकार लेने लगी
उसकी गर्मी का अहसास पाते ही पूर्णिमा गिनगिना गई और उसने दोनों हाथों से मेरे लंड की चमड़ी पीछे कर सुपाड़े को खोला
: ओह्ह्ह सीईईई चूसो इसे
वो नजरे उठा कर मुझे देख रही थी और मै उसके रसीले होठ और गीली जीभ के स्पर्श के लिए खुद को तैयार कर रहा था, मेरे हाथ उसके सर पर थे और उसे आगे बढ़ा रहे थे लंड की ओर
उसने लंड को आगे कर अपनी जीभ की टिप से मेरे सुपाड़े के होल को छुआ और मै पूरी तरह हिल गया
फिर उसने लंड को ऊपर कर नीचे मेरे आड़ के पास होठ लगा कर उसके जड़ से चूमना शुरू किया
एकदम नया अहसास और मेरे लंड की नसे फूलने लगी
उसने नीचे लंड की जड़ से ऊपर सुपाड़े की गांठ तक अपनी गीली जीभ को नीचे से ऊपर फिराया और फिर पूरे सुपाड़े पर जीभ को नचाया
सुपाड़े पर उसकी सॉफ्ट गीली जीभ का स्पर्श मुझे में कंपकंपी ले आया और लंड एकदम फड़फड़ाने लगा
फिर उसने अपने होठों से उसे चुभलाया और 4 इंच तक मेरा लंड मुंह में लेकर बाहर निकाला
सुपाड़े से 2 इंच नीचे से मेरा लंड उसकी लार से चमकने लगे
उसने प्रकिया दोहराई और मैने आंखे बंद कर उस पल का मजा लिया
उसने भी आंखे बंद कर लंड को और गहराई में ले गई कि उसके गले की घुंडी मेरे सुपाड़े पर चुभने लगी
वो धीरे धीरे अपनी स्पीड बढ़ा रही थी
: सीईईई यश मेरी जान ओह्ह्ह्ह उम्ममम और लो उफ्फ तुम तो मास्टर हो इसमें उफ्फ सक इट ओह्ह्ह गॉड उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई यश बेबी हार्ड ओह्ह्ह्ह यशस्स डिप उम्मम
वो मेरे शब्दों के हिसाब से चलने लगी थी और लंड को गले तक उतारती फिर तेजी से उन्हें हिलाती
फिर उसने मेरे आड़ को जीभ से छेड़ना शुरू किया और बॉल्ड को मुंह में लेने लगी
साफ था उसने लंड तैयार करने की अच्छी ट्रेनिंग की थी ।
मैने उसको उसकी थुड़ी पकड़ कर खड़ा किया और उसके लिप्स चूसने लगा
उसका जोश बढ़ चुका था
मैने उसकी साड़ी खींच कर उतार दी और उसको वापस अपनी बाहों में भर लिया
हाथ बढ़ा कर चूल्हे को बंद कर दिया और उसको लेकर बेडरूम में बढ़ गया
वो अपनी ब्लाउज खोल रही थी और मै अपना शर्ट
जबसे हमारी सेक्सुअल लाइफ शुरू हुई थी , मैने उसको ब्रा पहनने से और उसने मुझे अंडरवीयर पहनने से रोक रखा था
जल्द मै उसके आगे नंगा खड़ा था और उसकी रसीली छातियां मेरे सामने
मैने उसको वापस अपनी बाहों में भर कर उसके होठ चूसने लगा
इस बार उसका हाथ मेरे लंड को भींच रहा था और मेरे लिप्स उसके लिप्स को
मै उसको पीछे धकेलते हुए ले गया और बिस्तर पर लिटा कर ऊपर चढ़ गया
उसकी पेटीकोट सरक कर जांघों तक चली गई और मै उसकी जांघों के बीच जाकर सीधा उसके बड़े बड़े रसीले मम्में पर टूट पड़ा
: ओह्ह्ह सीईईई चूसो सर उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह यशस्स उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह
मै उसकी दोनों मोटी मोटी चूचियां पकड़ कर उन्हें मसल मसल कर उसके निप्पल खींच रहा था और वो मेरे सर को अपनी छातियों में दबा रही थी
नीचे मेरा लंड उसके पेटीकोट के गैप से चूत के पास ठोकरें से रहा था
मैने उसकी चूचियों को घुलाते हुए उसके पेट को चूमना शुरू किया फिर पेटीकोट का नाडा खोल कर उसे नाभि के नीचे कर उसकी नाभि चाटने लगा
वो पूरी तरह से अकड़ने लगी , उसकी सिसकिया तेज होने लगी
पेटीकोट सिमट कर उसके पेडू तक आ गई थी और मुझे उसके रसाती बुर की मादक गंध आई
मैने उसकी जांघें फैला कर थोड़ा नीचे हुआ
गुलाबी लंबी फांक
रहा नहीं गया मुझसे और मैने उसकी बजबजाई बुर पर अपनी जीभ चलाई
कुछ हल्के नमक जैसा लेकिन गाढ़ा स्टार्च जैसा अनुभव हुआ
लेकिन मेरी इस हरकत से वो अपने कूल्हे हवा में उठा कर पटक दी : ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क ओह्ह्ह सीईईई चाटीए न सर प्लीज ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क मीईई ओह्ह्ह्ह यशस्स उम्ममम
मैने पोर्न फिल्मों की तरह तेजी से अपनी जीभ को उसके बुर के फांकों के चलाने लगा और वो अपने कमर झटकती कूल्हे हवा में उठाती गिराती रही
उसकी सिसकिया तेज ही रहे थी
मैने उसकी जांघें कस ली और उसके बुर के फांकों को मुंह में लेक चूसने लगा
: उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह यशस्स सर उम्मम पूरा अच्छे से ओह्ह्ह आपकी जीभ उम्ममम कितनी मुलायम है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह मुझे चाहिए ओह्ह्ह्ह मुझे पेल दो न सर ओह्ह्ह्ह
मैने उसकी गदराई जांघों को फैला कर हवा में उठा दिया और नीचे से ऊपर तक जीभ से चाटते हुए उसके बुर के फांकों को खींचने लगा , उसने लंड की मांग दोहरानी शुरू कर दी
मेरा भी सब्र टूट रहा था और मैने घुटने के बल होके अपने सुपाड़े पर थूक लगाया और उसकी बुर पर रख कर बिना हिचक कर एक करारे झटके में उसकी बुर में उतार दिया
: ओह्ह्ह्ह गॉड कितना मोटा है ओह्ह्ह सीई ओह्ह्ह्ह सर फट जायेगा
मै अब आगे बढ़ चुका था और पीछे हटने का सवाल नहीं था एक और तेज झटके के साथ 80 फीसदी लंड अंदर घुसा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया
उसकी टांगे हवा में थी और मै उसके ऊपर
: क्या हुआ निकाल दूं ( मैने हौले हौले अपना लंड उसकी चूत में सरकाना शुरू किया )
: नहीइ ( वो मुस्कुराई)
मैं उसके होठ चूसने शुरू कर दिए और नीचे कमर चलाने की स्पीड बढ़ा दी
जल्द ही मेरा बियर की कैन जैसा मोटा लंबा लंड उसकी लंबी गहरी चूत में अपनी जगह बना चुका था और मै मानो जन्नत की सैर पर था
उसके चूत की दीवारें मानो अंदर से पसीज रही थी , लंड का फ्रिक्शन कम पड़ने लगा था और उसकी चूत पूरी फूल गई थी
जगह भरपूर थी और मैने बचा हुआ लंड भी अब उसकी चूत में उतार दिया
: अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह सर कितना अंदर उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई अह्ह्ह्ह मम्मीइई फक्क मीईई हार्ड ओह्ह्ह्ह यशस्स
अब मै तेजी से उसके बुर में अंदर बाहर कर रहा था
उसने मुझे कस लिया और अपने पैर मेरे कूल्हे पर रख दिए
उसकी बुर की दीवारें मेरे लंड को कसने लगी थी और जैसे अंदर ही अंदर उसे चूसना चाहती हो
ये एक बेहद ही अनोखा अनुभव था मेरे लिए, अब समझ आ रहा था कि चूत को सब निचला होठ क्यों कहते है
उसने अपनी जांघों को कस कर मेरे लंड को निचोड़ने पर लगी थी और मै पूरी ताकत से फचर फचर पेलने में
वो फिर से थकने लगी और मै उसके ऊपरी चूचों पर टूट पड़ा
: यश यश उम्मम चूसिए न सर ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह फक्क बहुत मस्त लंड है आपका ओह्ह्ह्ह मै झड़ रही हूं ओह्ह्ह गॉड फक्क मीईई हार्ड प्लीज़ज्ज्ज डोंट स्टॉप
स्टॉप !!! हाहा सवाल ही नहीं था रुकने का जब ऐसी गद्देदार रसीली चूत मिली हो
पेलते जाओ बस यही मजा है
उसकी जांघों में दर्द होने लगा था और पेट पर वो मेरा वजन महसूस कर रही थी
मैने उसकी जांघों को घुमा कर एक तरफ कर उसको बाई करवट घुमा दिया और लंड को चूतड़ों के तरफ से बुर में उतारने लगा
एकदम से उसकी चूत की कसावट बढ़ गई और पूर्णिमा को भी मजा आने लगा
मै आगे झुक कर अब पूरी तरह से अपनी क्षमता का प्रयोग करने लगा
पूरे कमर में मेरे पेडू और उसके चूतड़ों के टकराने से थप थप की आवाज उठने लगी थी ।
पूर्णिमा की चूत अब तेजी से खींच रही थी और उसकी चीखे पूरे पिक पर
: यश यश और उम्मम फक्क मीईई हार्ड सर ओह्ह्ह्ह फिर से आएगा सर ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह डिप और अंदर ओह
मैने उसकी मांग पूरी करते हुए लंड को उसकी बुर की और गहराई में ले जाने लगा
जल्द ही एक बार फिर उसकी चूत ने मेरे लंड को सुरकना शुरू कर दिया
इस बार का दवाब कुछ ज्यादा ही था
सुपाड़े पर अब दबाव बढ़ने लगा था , पूरे बदन का खून मानो मेरे लंड में आकर भरने लगा हो
नंथुने फूलने लगे थे और लंड एकदम जलने लगा था और एकदम से अपना लंड निकाल कर हिलाने लगा ।
उसने वापस जांघें खोल दी और मै उसके पेट चूत और चूचियों तक लंबी पिचकारी छोड़ने लगा
: ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई माय सेक्सी बीच उफ्फफ उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह यश उम्मम अह्ह्ह्ह्ह
मै झड़ते हुए बड़बड़ाया और आंखे खोली तो देखा पूर्णिमा का पूरा पेट और छातियां मेरे वीर्य से नहा चुकी थी
वो आंखे फाड़े मुझे देख रही थी
बेडशीट तक गीली हो गई थी इतना ज्यादा वीर्य निकला था
मै उसको देख कर हंसा और वो मुस्कुराने लगी
फिर मैं उठ कर उसको एक तौलिया फेंका और उसने अच्छे से उसको पोछा, फिर उठ कर जाने लगी तो मैने उसको पकड़ कर खींच लिया और लिप्स चूसने लगा
: मै वाश करके आती हूं
वो मुझसे अलग होकर बोली और फिर अपने चूतड़ों को पेटीकोट में लहराती हुई बाथरूम में चली गई और मै उसकी राह देखने लगा
तभी मेरी नजर बिस्तर रखे हुए उसके मोबाइल पर गई
जिसपर बार बार कुछ मैसेज आ रहे थे
मैने उसको चेक किया तो देखा कि अनीता अपने सफर की सेल्फ़ी उसको भेज रही
कुछ में तो उसके चूचे भी नंगे थे
गहरे भूरे मुनक्के जैसे मोटे दाने और गोल मटोल चूचे
और मेरा लंड अकड़ने लगा
तभी मुझे अपनी नंगी पीठ पर पूर्णिमा के गुदाज चर्बीदार चूचियों का अहसास हुआ
: क्या हुआ ( वो थोड़ी खुमारी में मुझसे लिपटती हुई बोली )
उससे शायद अपनी छातियां भी धुली थी इसलिए मेरी गर्म पीठ को ठंडक और थोड़ा पानी के चिपचिपाने का अहसास हुआ
मैने झट से उसको उसके मोबाइल पर आए अनिता की तस्वीरें दिखाई
: कही आप अनिता से भी तो
मैंने उसको घुमा कर अपनी ओर कर दिया और फिर बिस्तर बिठा कर उसके दोनों रसीले मम्में को हाथों में के भर : मुझे ये ज्यादा पसंद है बजाय उसके
फिर मै उसकी रसीली छातियां को चूसने लगा उन्हें मिजने लगा , दोनो चूचों को मुंह में भरने लगा
: सीईईई ओह्ह्ह सर अभी रोटी बनानी है सीई ओह्ह्ह कुछ खा लेते है न पहले
मैने उसको धकेल कर बिस्तर पर कर दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसकी नंगी चूचियों को टूट पड़ा और उन्हें मसल मसल कर मिजते हुए जीभ से उसके बड़े बड़े अंगूर जैसे निप्पल को चूसने और खींचने लगा : खा तो रहा हूं , आज तो इन्हीं से अपनी भूख मिटाना है उम्ममम
: सीईईई ओह्ह्ह सर इतना जल्दी फिर से
: तुम्हे ऐसे देख कर रहा नहीं जा रहा है ओह्ह्ह्ह ये देखो कैसे टाइट हो रहा है
मै उसके पास आकर उसके सामने अपना लंड उसके चूचों पर पटकने लगा
: ओह्ह्ह्ह उम्ममम सर सीईईई अह्ह्ह्ह लग रहा है
मै अपने लंड के सुपाड़े को उसके तने हुए निप्पल पर पटक रहा था और वो पूरी तरह से झनझना गई
मैने अपना लंड एक तरफ छाती पर रख उसमें धंसाते हुए आगे झुक कर उसकी दूसरी छाती को पकड़ कर मुंह में भरने लगा
वो पूरी तरह अकड़ गई
: ओह्ह्ह्ह सर उफ्फफ खा जाओ उम्मम ओह्ह्ह्ह उम्ममम काट लो ओह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह यशस्स
मैने उठ कर अपना लंड का सुपाड़ा खोलकर कर उसके होठों पर लगाने लगा
उसने जीभ निकाल कर मेरे सूखे सुपाड़े को चाटने लगी , मै उसके होठों पर अपना लंड घिसने लगा
: उन्ह्ह चाट लो मेरी जान उम्मम
जैसे जैसे उसकी जीभ मेरे सुपाड़े को चाट रही थी मै वैसे वैसे उसकी चूचियों को गिज रहा था और उन्हें नोच रहा था और फिर उसने मुंह खोल दिया तो मै घुटने के बल उसके सामने आ गया और लंड को उसके मुंह में भरने लगा
: ओह्ह्ह यश उम्मम चूसो और लो मेरी जान घोट लो पूरा ओह्ह्ह्ह यशस्स माय सेक्सी बीच उफ्फफ कितनी चुदासी हो तुम यार ओह्ह्ह चूस लो
वो मेरे लंड को पूरा मुंह ने लेने लगी और मै खुद उसके मुंह में पेलने लगा
लेकिन जगह ऐसा था कि मै पूरी तरह से मजे नहीं ले पा रहा था
फिर मैने उसके मुंह से लंड खींच कर उसकी पकड़ कर बिस्तर के एक किनारे खींच लाया और उसकी गर्दन को बिस्तर से लटका कर वापस से अपना लंड उसके मुंह में डाल कर पेलने लगा
: ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह ये हुई न बात ओह्ह्ह उम्ममम सीईईई मजा आ रहा है ओह बेबी चूसो ओह्ह्ह्ह यशस्स तुम्हारी चूचियां कितनी मुलायम है ओह्ह्ह्ह मन कर रहा है इन्हीं पर फिर से झड़ जाऊ
वो मेरी बातों से गर्म हो रही थी और मै उसके मुंह में पेले जा रहा था उसकी चूचियों को मसल रहा था और उसके हाथ अपनी बुर को सहलाने लगे थे
: क्या हुआ खुजली हो रही है ,लाओ मै कर देता हु
मै आगे बढ़ कर अपने हाथ को उसकी चूत तक ले गया और उसके बुर के दाने को तेजी से उंगलियों से सहलाने लगा , नतीजा मेरा लंड उसके गले में उतर गया था गहरे और मजा और दुगना हो गया , लंड उसके मुंह में फूल था और मै अपने मुंह की लार लेकर उसकी चूत को गिल करने लगा
: आजाओ अजाओ
मैने उसको अपनी ओर बुलाया और फिर वापस उसकी जांघों को खोल कर उसकी बुर में अपना लंड उतार दिया
: ओह्ह्ह्ह सर उफ्फफ फक्क मीईई हार्ड प्लीज़ज्ज्ज ओह्ह्ह यश उम्मम और अंदर उफ्फ चोदो मुझे और तेज ओह्ह्ह उम्ममम सीईईई
मै ताबड़तोड़ उसकी बुर में तेजी से लंड डाल रहा था और वो तेज से चीख रही थी
: लो मेरी जान और लो उम्मम और अंदर चाहिए न रुको अह्ह्ह्ह्ह
फिर मैने उसकी एक जांघ को उठा कर अपने कंधे पर ले आया और पैर को क्रॉस कर उसकी दूसरी जांघ पर बैठ कर उसकी चूत में पेलने लगा
लंड अब उसकी चूत की दीवारों पर चोट करने लगा
एक नया अहसास मुझे भी हुआ और उसे भी
उसकी सांसे चढ़ने लगी और चीखे पूरे कमरे में गूंजने लगी
: यश यश सर ओह्ह्ह वही हा हा वही उफ्फफ मजा रहा है और पेलीये उफ्फ फक्क मीईई हार्ड प्लीज़ज्ज्ज डोंट स्टॉप डोंट ओह्ह्ह गॉड इईईईईई उम्ममम उम्ममम यश यश अह्ह्ह्ह आ रहा है मेरा ओह्ह्ह्ह
मै ताबड़तोड़ उसकी जांघों को खींचे हुए पेल रहा था और वो झटके कहा रही थी
फिर वो सुस्त होने लगी थी मैने अपना लंड खींचा और उसकी जांघों को एक तरफ करते हुए चूतड़ों को घुमाने लगा वो समझ गई
उफ्फ उसके बड़े बड़े रसीले चर्बीदार चूतड़
नर्म और थुलथुले , मैने उसकी गदराई जांघों के पास चूमने लगा , उसके चूतड़ मेरे आंखों के सामने पहाड़ जैसे ऊंचे , मैने अपना मुंह उसके गाड़ के दरारों के रख कर हिलाया और वो हसने लगी
फिर मैने जीभ से उसकी बुर की लंबी चिकनी फांकों चाटते हुए उसके गाड़ के सुराख फिर जीभ नचाई
वो मचल कर आगे भागने लगी : उम्ममम सर ये क्या उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई
मैने उसके चर्बीदार चूतड़ों को पंजों में भरते हुए बुर के दाने से फांकों को चाटते हुए उसके गाड़ के सुराख जाने लगा
वो मचल रही थी अकड़ रही थी और फिर एकदम से अपना लंड उसकी बुर उतार दिया
और उसके मोटे मोटे गद्देदार चूतड़ों को पकड़ कर पीछे से ताकत लगा पेलने लगा
: ओह्ह्ह सर टाइट है बहुत
लंड मेरा उसकी चूत की जड़ तक पहुंच रहा था और मै खूब हचक कर उसको पेल रहा था
उसकी मोटी गाड़ मेरे लंड को खूब उछाल रही थी और तभी मेरी नजर उसके काले खुले बालों पर गई
एक पल में मै आगे झुक कर उसको पकड़ा और खींचते हुए लंड को डालने लगा उसकी बुर
: ओह्ह्ह्ह मम्मी ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह सर आराम से उफ्फफ फक्क मीईई हार्ड ओह्ह्ह ऐसे ही रुकिए में उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई
: ओह्ह्ह मेरी जान कितनी मुलायम बुर है तुम्हारी ओह्ह्ह्ह कितनी मोटी गद्देदार गाड़ है ओह्ह्ह उम्ममम फक्क यू मेरी चुदक.... अह्ह्ह्ह
: उम्मम बोल दो न सर
: क्या
: वही जो आप कहना चाहते है , जो मै हूं , आपकी चुदक्कड़ माल आपकी चुदासी जान आपकी ओह्ह्ह्ह रन.....अह्ह्ह्हडीीईईईई
एकदम से उसने मेरे भीतर उत्तेजना का वेग बढ़ा दिया था और मै उसके बालों को खींच कर ताबड़तोड़ पेलाई करने लगा
लंड अपने जोश पर था
: ले मेरी रंडी मेरी चुदक्कड जान ओह्ह्ह्ह तेजी चूत उफ्फ कितना मजा आ रहा है ओह्ह्ह तू कमाल की चुदासी औरत है ओह्ह्ह्ह चोद चोद कर तेजी बुर फाड़ दूंगा ओह्ह्ह उम्ममम ओह्ह्ह बहनचोद आ रहा है मेरा ओह ओह्ह्ह आजा ले ले पी ले मेरी जान ओह्ह्ह उम्ममम मेरी रंडी अजा मेरी चुदक्कड जान ओह्ह्ह्ह ले ले
मै उसके पर आ गया और वो घूम गई फिर मै उसके मुंह पर झड़ने लगा
एक के बाद एक मोटी थक्केदार पिचकारियां छूटने लगी वो उसका पूरा चेहरा वीर्य से सन गया था
मै हाफ रहा था और फिर पलट कर बगल में सुस्ताने लगा
फिर मेरी आंखे बंद होने लगी थी
फिर रात में कब पूर्णिमा ने उठ कर डिनर तैयार किया और कब हमने खाया मुझे बहुत याद नहीं
दोहरी चुदाई ने मेरी नसों को दूह लिया था ।
जब मै फ्रेश होने गया तो पूर्णिमा ने दूसरी बेडशीट लगाई और फिर हम दोनो आपस में नंगे चिपक कर सो गए
अगली सुबह मेरी नीद खुली उसकी बाहों में , मेरा चेहरे उसकी गुदाज चर्बीदार चूचों से लगा था
एक मादक गंध उसके देह से निकल रही थी और मैने उसके निप्पल लेकर चुबलाना शुरू किया
वो भी जल्द उठ गई और मुस्कुरा कर मुझे किस किया
सुबह सुबह मेरा लंड अकड़ गया था , मै उसके जिस्म में सुबह की नर्माहट महसूस कर रहा था
फिर वो फ्रेश होने चली
और थोड़ी देर बाद कपड़े पहन कर निकल गई रूम की ओर , उसे वापस ड्यूटी आना था और मै भी नहाने चला गया।
नहाने के बाद मैने अपना फोन तलाशा
याद आया कि मैने तो चार्ज लगाया था
फिर मैने झट से उसे निकाला तो मेरी नजर घड़ी पर गई , 09 बजने वाले थे और मुझे मेरी सोना की फिकर हुई
जल्दी जल्दी मैने उसका पावर ऑन किया
धीरे धीरे मै एक अपराध भाव की ओर बढ़ रहा था
एक हड़बड़ाहट एक फिकर
मन में एक डर कही उसके साथ गलत तो नहीं किया मैं
मोबाइल ऑन हो गया , नेटवर्क सर्च हो रहा था
मै लगातार उसको नेटवर्क में आने का इंतजार कर रहा था और एकदम से text मैसेज पॉप होने लगे
सारे मैसेज मेरी सोना के थे
" You have 29 misscall from +91........
ओह बहनचोद , तू तो गया बेटे
जल्दी जल्दी मैने उसके मैसेज खोले
Inbox खोलते ही टोटल 09 unread messages पड़े थे
"Babu apko kuch batana hai "
"Kaha ho aap .... "
"Miss you plzzz baat kar lo "
"Babu plzz mobile on kro "
"Maine kuch bheja hai whatsaap par "
"Sorry"
" Plzz mujhe maaf kar Dena "
"Hiii "
मैसेज देखते ही चीजें मुझे असहज करने लगी
एक बेचैनी और सोना का यू मुझसे माफी मांगना और आखिर क्या भेजा होगा उसने
क्या बताना चाह रही होगी वो ।
किसी अनहोनी की आशंका प्रबल होने लगी मेरे मन में
धड़कने तेज होने लगी ।
जल्दी जल्दी मैने डाटा ऑन किया
तमाम मैसेज के साथ सोना के मैसेज का भी नोटिफिकेशन आया
एक लंबी गहरी सांस लेकर मैने खुद को तैयार किया , लेकिन मन की बेचैनी अभी भी बरकरार थी ।
कुछ 25+ मैसेजों के उसने एक कहानी लिख भेजी थी
Babu plzzz mujhe maaf kr dena
Mai Vishal ke sath relationship me hun
Maine usko kiss kiya aur sex bhi
Mai us laayak nhi hun ki aap mujhe apna pyaar do
Kayi dino se mai aapko batana chaahti thi ....
आगे और भी मैसेज पड़े थे लेकिन मैने जो भी पढ़ा मेरे पैरों के नीचे से जमीन सरक गई हो
मै धक्क सा होकर वही दिवाल से लग कर चिपक गया और अपना सर पकड़ कर बैठ गया
दिमाग एकदम सुन्न हो गया था
सांसे अजीब तरह से थम रही थी , मानो किसी ने मेरी रूह मुझसे छीन ली हो ... आंखे भरने लगी , नथुने गर्म होने लगे , धड़कने बेकाबू तरीके से तेज हो रही थी
समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं
बार बार वो शुरू के दो मैसेज पढ़ कर मै पागल हुआ जा रहा था
एक धोखे एक बेवफाई का अहसास
जो आपकी आत्मा तक को छलनी कर दे ...
मै अपने बाल खींच कर चीख पड़ा ,पूरे गले की ऊर्जा से मोबाइल को झटक कर फेक दिया फर्श पर जो दूर तक सरकता हुआ सामने की दिवाल से जा लगा .. अंधेरा और नाउम्मीदी ने मुझे घर कर लिया था
एक न उभर पाने वाले गहरे सदमे की खाई की ओर मेरा दिल टूट कर दूर जा रहा था और वो कमजोरी अंदर ही अंदर महसूस हो रही थी ... और शायद मै उस रोज क्या कर गुजरता अगर ....
जारी रहेगी
( उम्मीद करता हूं देर सबेर के लिए माफ करेंगे ... क्योंकि इतने बड़े अपडेट को पोस्ट करने में ही आधा दिन चला गया उसपर से gif और इमेज ... समय लग गया । पढ़ कर लाइक कमेंट जरूर करेंगे यही आशा रहेगी )


Bhai where u get ai gif
Mast update
Wah DREAMBOY40 Bhai Wah
Kya gazab ki update post ki he.........
Sach me purnima ne to puri raat char chand laga diye rohan ki jindagi me.......
Upar se awesome gifs, sama hi bandh diya he bhai
Ab rohan ki sona ne use dhokha de diya he.............
Mujhe lagta he vo ye jaan bujh kar rahi he, ya to uski shadi ho chuki he ya fir koi aur hi family matter he
Agali dhamakedar update ki pratiksha rahegi Bhai
what a upate .............................. boss ........................................
maza aa gaya .......
aur aaj ka update bi BADA tha .......
last main SONA ka confession ..... apne HERO ko hila diya ..... but koi bat nahi ..... aap hai sambhalne wale ..... to hum readers ko kya problem hai ....![]()
Bhut shandaar update.... pahle to iss chutiya par hasi aayi... bahanchod 2 jawaan hot ladkiyon ke hote huye bhi मुट्ठी Maar ke aa गया....
ladkiyon
Bhala ho पूर्णिमा का.. Jo इसको chut de di.. warna ye bahanchod to kuwara hi mar jata
Excellent update
Mast update
awesome
Mast update
Sachmuch Sona ke dhokhe se Rohan ke liye dukh hua. Khair Rohan ko apna pyar kahin aur khojna chahiye. Romanchak. Pratiksha gle rasprad update ki
Bahut hi jbrdast update babli se leke Purnima tak
Last wala dukhdayi raha
Intezar rahega agle update ka
Superb update bro.
NEW UPDATE IS POSTEDSuperb Update