भाग ४
मेरा शादी में कोई मन नहीं था।बस दिखाने को शामिल हुई थी। शादी में कई मर्द मुझे ललचाई नज़र से देख रहे थे।
पहले जो में खुद को समेट के रखती थी।अब में भी कोई परवाह नहीं करती थी और करती भी क्यों नहीं?
जब खुद के पति ने मुझे वैश्या समझ लिया था तो अब बचा ही क्या था कि जो मैं अपनी इज्जत बचाती।
बारातियों की भीड़ में, मैं भी ऐसे खड़े रही ,जैसे कोई चालू औरत ,अवसर का फायदा उठाने जाती है। मैने दारू पीए हुए एक दो लड़कों को ,मेरे कान के पास कुछ बोलते भी सुना।
एक लड़का तो इतना ,बेशर्म निकला कि मुझे भीड़ में बोला ।
लड़का: यार अनुज लगता है गांव में दूध की कोई कमी नहीं होगी। बहुत बड़े बड़े थन वाली भाभियां हैं।।
तो दूसरा लड़का ,जो नशे में था मेरे कान के पास बोला धीरे से।
लड़का: अरे भाभी जी थोड़ा ,दूध हमें भी पिला दो।
मैं सुन के अनसुना कर दी। बस हंसी दबा के खड़े रही, और दरवाज़े में होने वाली रस्म देखने का नाटक करने लगी।
मुझे हल्का सा मुस्कुराता देख उसकी हिम्मत बढ़ गई उसकी और तभी ये कह के, वो मेरे लहंगे के ऊपर से दाएं कुल्हे पे ,भीड़ का मौका देख के हाथ फेर दिया।
और मेरे कान में बोला।।
लड़का: वाह भाभी जी ,चड्डी की लास्टिक तो बड़ी मोटी है। कहा से ली?( अपने दोस्त के कंधे पे पीछे से सिर रखे हुए मुझे धीरे से बोल के , चड्डी की कुल्हे वाली लास्टिक को खींच कर।)
उस लड़के की बेबाकी से, मैं हैरान थी। लेकिन अब डर गई।।लेकिन एक अलग सा रोमांच भर आया।लेकिन वो मुझे कोई चालू माल न समझे ,इसलिए मैं वहां से हट गई। मैं एक बार भी उसको नहीं देखी।।
फिर खाना वगैरा खाया।मेरे माता पिता भी शादी में आए थे। पति तो आज बिजी थे। और सच कहूं तो मुझे कोई परवाह भी नहीं थी। बेटा मेरा मेरी मां के पास था।
फिर सबने खाना खाया तो मैं भी खा ली। फिर शादी की रस्म शुरू हुई तो मैने देखा , सूरज वहां खड़ा , लता को देख रहा था।
वो थोड़ा दुखी लग रहा था।मुझे थोडा तरस आ गया उस पे।
तभी वो मुझे देखा। और मुझे घूरने लगा। शायद उस दिन के वजह से। मैं वहां से चले गई।
तभी मैं शादी की रस्म देख रही थी अपने घर की औरतों के साथ तो देखा सूरज मेरे पास आ के खड़ा है।
तभी मेरी छोटी जेठानी उसको बोली।
राधा: ए सूरज,थोड़ा पानी तो पिला दे रे ।( थोड़ा मजाक वाले अंदाज में)
तो सूरज मुस्कुरा के चले गया।और थोड़ी देर बाद 2 ग्लास में पानी लाया और एक ग्लास मुझे दिया।
मैं उसको देखी, और नज़र नीचे करके पानी पीने लगी। मैं लहंगा साड़ी पहने हुई थी। और बहुत खूबसूरत लग रही थी।

पानी पी के में वही पर खड़े हो के अपने जेठानी से बात कर रही थी। सूरज वही पे खड़ा था।मेरा ध्यान बात में कम और सूरज पे ज़्यादा था।
वो बार बार मुझे देखता। दिखने में वो बहुत सुंदर नहीं था।पतला सा मुंह, हल्की दाढ़ी, सांवला सा।
पता नहीं लता को क्या दिखा इस पे । लेकिन उसके ऐसे देखने से मुझे सच में बहुत अजीब लगा।।
एक तो वो लड़के की अश्लील बतौर हरक़त, मेरे दिमाग में घूम रही थी। ऊपर से दो रात से अधूरा मिलन , मुझे सच में अजीब सा होने लगा।
क्योंकि शादी का टेंट हमारे घर के पीछे वाले खेत पर लगा हुआ था। जो घर से बस 200 मीटर दूर पे था।।तभी मुझे हल्का सा पेशाब का प्रेशर लगा। और मैं जेठानी को बोला और घर के ओर बढ़ी।
सब लोग शादी में थे। पति देव का तो पता ही नहीं था। और अधिकतर मर्द दारु पी के सेट हो चुके थे। एक तो रात का 2 बजने वाला था तो बस कुछ गिने चुने लोग ही उठे थे, जो कि शादी में थे।
हमारे घर पे सब बुजुर्ग लोगों ने डेरा जमा लिया था। खेत और घर के बीच के रस्ते में बहुत जायदा लाइट नहीं लगाई थी।लेकिन ऐसा भी नहीं था कि अंधेरा हो।
वैसे लाइट तो गांव के हिसाब से ठीक ठाक ही लगाई गई थी लेकिन शायद गांव के शरारती बच्चों ने बल्ब चोरी कर लिए थे ,इसलिए कही पे लाइट तो कही पे अंधेरा था।
मैं अपनी जेठानी को बोल के , पेशाब करने चले गई। तभी मैने महसूस किया कोई मेरे पीछे पीछे आ रहा है।मैने पीछे मूड के देखा तो ,पाया ये तो सूरज था।
मैं उसको देखी ही थी कि वो मुझे बोला।
सूरज: अरे शहर वाली भाभी कहा जा रहे हो अंधेरे में ??( थोड़ा हंस के, मजाक में)
एक्चुली गांव में हर किसी औरत का नाम रख दिया जाता है।क्योंकि मैं शहर से थी तो मुझे लोग चिढ़ाने को शहर वाली मटकनी कहते थे। क्योंकि मैं बहुत सज धज के रहती थी।
सूरज की बात सुन के मुझे कोई गुस्सा नहीं आय बस में ही हंस के बोल दी उसका इंतेज़ार करते हुए, क्योंकि आगे थोड़ा अंधेरा सा था ,सही कहूं तो डर लग रहा था।
रितु: अरे कहीं नहीं, बस वॉशरूम जा रही हूं!!( हंस कर ,खड़े हो के उसका इंतेज़ार करते हुए,)
वो जल्दी से कदम बढ़ा के मेरे पास आ गया।
सूरज: क्या भाभी आप भी ,इतना बड़ा वॉशरूम है और आप वहा जा रही हो लंका में ??( घर को इशारा करते हुए)
रितु: हां यहां करु ना सबके सामने ? ( आंख दिखा के मजाक में)
सूरज:: अरे क्या हुआ फिर, सब यही तो जाते है। ओह आप तो हुई शहर वाली, खुले में कभी गए नही होगे।??( टोंट मार के)
रितु: हां मैं तो नहीं गई।। जाती होंगी तुम्हारे गांव की भाभियां।।( हंस के, बड़े अदा से)
सूरज: शहर के हो तब भी किसी की मजबूरी नहीं समझते( शिक़ायत भरी आवाज से)
रितु : क्या ? किसकी मजबूरी?( हैरानी से)
सूरज: उस दिन आना जरूरी था? थोड़ी देर बाद ही आ जाते!!( मुझे देख कर मुंह बना कर)
मैं समझ गई वो क्या बात कर रहा है।।
रितु: हममम,,, वो तो मैं आ गई थी । नहीं तो पता चलता तुमको, जब हड्डी टूटती ना। कोई और देख लेता तो ( उसकी आंखों में देख के)
रात के करीब 2:05 बज रहे थे। और मैं अपने घर के पास खड़ी हुई , अपने एक पड़ोस के लड़के से बात कर रही थी।
सच कहूं,ये मुझे शादी से पहले के दिन याद दिला दिया।जब कोचिंग से आने टाइम ,सुनसान गली में, मेरे बॉयफ्रेंड ने कई बार मेरे स्तन निचोड़ थे ,और मैं सलवार के बहार से मेरी योनि से खेला था।
मैं ये सब याद ही कर रही थी कि, कोई आते दिखा तो सूरज मुझे जल्दी से एक आम के पुराने पेड़ के पास खींच कर ले गया।
और मैं कुछ बोल पाती कि वो मेरे मुंह पे हाथ रख दिया। और उन आदमियों को जाने देने लगा।
मुझे आवाज सुनाई दी उन आदमियों की, जो कि एक तो मेरे जेठ की थी। जों हमारे घर के तरफ से आ रहे थे। हम दोनों पेड़ के पीछे खड़े थे। मैं डरी हुईं थी।
जेठ: अरे पप्पू, साला कोई बल्ब निकाल ले गया यार।। अब लाइट वाला भी पता नहीं कहा मर रहा होगा।
( टेंट को जाते हुए)
पप्पू:: अरे रहने दो भाई जी । अब सुबह हो ही जाएगी। ये साले मादरचोद लड़के है ना, बड़े हरामी हैं।( टेंट को जाते हुए)
उन लोगों के जाने के बाद सूरज मेरे मुंह से हाथ हटाया, और इधर उधर देखने लगा।
मैं इतना डर चुकी थी कि मेरी तो आवाज भी नहीं निकल रही थीं। सांस तेज़ होने लगी थी।
ये तो सच था मेरे जेठ अगर मुझे उस टाईम सूरज के साथ बात करते देख लेते तो ,इस घर में मेरा ये आखिरी रात होती।
मैं डरे हुए आवाज से सूरज को डांट कर बोली।
रितु: क्या कर रहे थे? पागल हो? कोई देख लेता तो? जाओ यहां से( थोड़ा गुस्से से,दबे आवाज़ में, खुद को ठीक करते हुए)
सूरज भी थोड़ा गुस्सा गया और बोला।
सु:: हां अभी देख लेता न तुम्हारा जेठ तो पता चलता। खाया पिया कुछ नहीं, ग्लास तोड़ा 4 आना ( गुस्से से मुझे सुना कर)
कह तो वो सही रहा था। मैं थोड़ा नॉर्मल हुई और बोली।
रितु: ठीक है सॉरी, अब तुम जाओ ।कोई देख लेगा।( उसको समझा के आराम से , अपने कपड़े ठीक करते हुए)
तो वो बोला।
सु: क्यों आपको तो पेशाब करने जाना था?( एक दम से बोल कर)
मैं शर्मसार हो गई, उसके ऐसे बोलने से।और बोली।
रि:: पागल हो कुछ भी बोलते हो।। मैं चले जाऊंगी। तुम जाओ ( बहुत शर्म महसूस कर के, इधर उधर देख कर)
तो वो थोड़ा सा मेरे नज़दीक आया और मेरे चूड़ियों से भरे हाथ को पकड़ के बोला।
सु: यही कर लो ना भाभी??( रिक्वेस्ट वाली आवाज से)
मैं हैरान हो गई।और अपने हाथ छुड़ा के बोली।
रि:: चुप।।पागल।।।( हंसते हुए,मुंह पे हाथ रख के नज़र फेर कर )
एक बात तो थी, भले ही दिखने में अच्छा नहीं था ।लेकिन बात बहुत मज़े की करता था , शायद इसीलिए लता इसके चक्कर में फंस गई थी।
सूरज फिर से जोर दे कर बोला।
सु: कर लो ना। वहां अकेले कहा जाओगे? सब शराब पीए हुए हैं। वैसे ही आज बहुत क़ातिल लग रही हो आप। कही कोई पकड़ न ले खोपचे में ।।( आंख मार कर)
उसकी बात सुन के मुझे हंसी आ गई।।और मैं बोली।
रि: अच्छा बच्चू, मस्का।।( हंस के)
तभी किसी के आने की आहट हुई, तो हम दोनों चुप हो गए।जब लोग गए तो वो बोला।
सु: भाभी मेरी बात मानो , उधर खेत में चलते है।वहां कर लेना। फिर में छोड़ दूंगा आपको।।( मेरी आंखों में देख कर)
मैं सच कहूं तो असमंजस में पड़ गई। जाऊ की न जाऊ।।।।
ये तो सच था ,सूरज की बातों ने जादू सा कर दिया था। लेकिन मेरे अंदर की , लेकिन पतिव्रता स्त्री मुझे रोक रही थी।
तो सूरज फिर से जिद किया तो में उसको बोली।
रि: कुछ गलत तो नहीं करोगे न? अकेले में?( अंगुली दिखा के)
सु: करना होता तो यहां भी खड़े खड़े कर देता भाभी अभी तक ।( मुझे ऊपर से नीचे देख कर)
मैं कभी ज़बरदस्ती नहीं करता। उस दिन भी लता ने ही मुझे बुलाया था।
( सिर नीचे करके, भोली आवाज़ से)
मुझे उस पे भरोसा हो गया और मैं उससे सीधा ये बोली।।
रि: कहां पे जाएंगे? कोई देखेगा तो नहीं?( इधर उधर देख कर)
तो वो मेरा हाथ पकड़ा।।और मुझे थोड़ा दूर के खेत के अंदर ले गया, जहां मक्के लगे थे। सूरज आगे आगे चल रहा था ।और में उसके पीछे। वो मेरा हाथ पकड़े था।
मैं पीछे से चलते हुए उसको दिखाने को बोली।
रि: अरे कहा ले जा रहा है मुझे। हाथ छोड़ ना। गिर जाऊंगी मैं ( आवाज दबा कर ,उसके पीछे चलते हुए)
और कुछ ही पल में हम दोनों मक्के के खेत पे आ गए।
मेरा डर से बुरा हाल था ।अब तो पेशाब भी बंद हो गई थी।
वो मुझे बोला।
सु: यहां कर लो भाभी कोई नहीं आएगा।( तेज़ सांस लेते हुए)
मैं एक दम से शर्म से पानी हो गई, वो 20 साल का छोकरा मुझे ,अपने सामने पेशाब करने को बोल रहा था।
मैं एक दम से ,थोड़ा झुलझूला के बोली।
रि: पागल हो क्या? तुम्हारे सामने ? तुम तुम बाहर को जाओ( थोड़ा शर्म और परेशान वाले भाव से , अपने लहंगे को थोड़ा सा ऊपर उठाए हुए)
तो वो बेशर्म लड़का ।मेरे समाने अपनी पेंट की जिप खोल के हाथ अंदर डाला।
चांदनी रात में मुझे सब दिख रहा था। मैं एक दम से हैरान हो गई और लहंगा छोड़ कर , पलट कर अपने चेहरे पर हाथ रख कर बोली , हड़बड़ा कर।
रि: ई ई ई ई,,,,,,,, पागल लड़के।।क्या कर रहे हो? अंदर करो उसको, बेशर्म कहीं के ।।( हड़बड़ा कर,पलट के, हंसते हुए उसकी हरकत पर)
तो वो मुझसे रिक्वेस्ट करने लगा।।
सु: भाभी प्लीज। आप कर लो ना। मेरे सामने।। कसम से आप बहुत अच्छी लगती हो।भाभी उस दिन भी आपके वजह से पूरा नहीं हुआ था । भाभी।।।( अपना लिंग पकड़े हुए )
मैं पलटी और उसको आंख दिखा के बोली।
रि: अच्छा मेरे वजह से नहीं हुआ। चढ़े तो बहुत थे लता के ऊपर, जान निकाल रखी थी उसकी।( भावना में बहते हुए ,बोल दी)
फिर मुझे समझ आया कि मैं क्या बोल दी हूं और में शर्मसार सी हो गई ।।
तो वो एक दम से अपना एक हाथ से मेरा हाथ पकड़ा और दूसरे से हाथ से तेजी से अपना लिंग हिलाते हुए और तेज़ सांस लेते हुए , मेरा हाथ पकड़ के मसल कर बोला।
सु: आह भाभी।।। आह्ला , आप एकबार बोलो तो सही आपकी भी वैसे ही चीख निकाल दूंगा।।आप तो वैसे भी मस्त वाला माल हो। ( दांत भींच कर,मुझे देख कर)
एक बार मूत दो न मेरे सामने।भाभी।।।। आह।।।कभी शहर की लड़की की चूत की आवाज नहीं सुनी भाभी,,,,आहह,,,,,,( मेरे दाएं हाथ को लगभग मसल के, उत्तेजना से)
मैं रात के 2: 15 मिनिट में ,मक्के के खेत में अपने से लगभग 8 साल छोटे लड़के के साथ खड़ी थी। जो मुझे देख के अपना हिला था। और मेरा हाथ पकड़े हुए।मुझसे गंदी भाषा में पेशाब करने की इल्तिज़ा कर रहा था।
मैं भी उसके छूवन और उसके लंबे से लिंग और उसकी बात को देख सुन कर मानो पिघल सी गई। और अपने हाथ को छुड़ा के , मुस्कुरा कर , इधर उधर देख कर, अपने लहंगे को धीरे से ऊपर उठा कर। दोनों हाथ लहंगे के अंदर डाल कर अपनी काली चड्डी की लस्टिक पकड़ी और सर र र र से नीच करते हुए ,बैठ गई थोड़ा सा शर्मा कर।
और नीचे बैठते ही ,मेरी योनि से पानी की तेज़ धार निकल पड़ी।
और सुर र र र र र र र र र र सु सु सु सु सु सु सु सु,,,,,,,, सुर र र सु सु सुर र र सु सु सुर र र सु सु सुर,,,,,,,, की आवाज़ उस मक्के के खेत में गूंज गई।
वही सूरज भी मानो उस आवाज को सुन कर पागल सा हो गया। और मेरे मुंह के सामने ही अपना लंबा लिंग निकाल कर मुठियाने लगा तेजी से अपना मुंह खोल कर ।
मैं भी उसको देख के , मानो भूल चुकी थी कि मैं एक घर की बहू हूँ और अभी एक जवान लड़के के साथ रात के 2 बजे एक सुनसान खेत में उसके सामने बैठ कर , पेशाब कर रही हूं।।
और मैं भी उसको और उत्तेजना दिलाने को सोच कर , जोर लगा कर पेशाब करने लगी। और मेरे मूत्र छिद्र से पेशाब और तेज़ आवाज करके निकलने लगी।
वहीं वो मधुर संगीत सुन कर ,सूरज मानो पागल हो के , आह ह ह,,,, भाभी आह ह कहते हुए तेजी से अपना लिंग हिलाने लगा।
मैं उकड़ू बैठे हुए , मुस्कुरा कर उसको देखते रही जब तक एक एक बूंद उस धरती को गीला नहीं कर दी।
और मुस्कुरा के अदा से ,जैसे ही अपने लहंगे को पकड़ के उठीं, सूरज तेजी से मेरे तरफ़ बढ़ा और मेरे क़मर में अपना बायां हाथ डाल कर, मुझे अपने तरफ खींचा।
और में भी लड़खड़ा कर आउच कहते हुए उसके दुर्बल शरीर से जा लगी।
क्योंकि मेरी काली चड्डी अभी भी मेरे जांघों से नीचे थी ,तो मैं अपने लहंगे को पकड़ के खड़ी थी। मैं डर और उत्तेजना के मिले जुले भाव से उसको देखने लगी।।
मैं कुछ समझ भी पाती,तब तक सूरज ने अपना खड़ा लिंग छोड़ कर ,अपना दाएं हाथ को जल्दी मेरे लहंगे के अंदर डाल दिया।
और सीधा मेरी योनि को अपनी हथेली में भर लिया। और मेरे कान के पास कामुक आवाज़ से बोला।
सु:: बहुत कड़ा माल हो भाभी आप!! आह इतनी सेक्सी आवाज़ तक किसी के चूत की नहीं सुनी, क्या सीटी जैसे बजती है आपकी चूत।( मेरी पूरी योनि को ,अपनी हथेली में भर कर)
मैं कसमसा के और उसकी बात से शर्म से मर कर रह गई, और आगे को झूकने लगी ।ताकि वो अंदर अंगुली ना डाल पाए।।
पहले बार कोई मेरे पति के अलावा मेरे योनि को ऐसे दबोचा था। बॉयफ़्रेंड ने भी सलवार और जींस के बाहर से ही छुआ था।
मैं उसको कसमसा कर दूर करने लगी। लेकिन वो निगोड़ा तब तक मेरे योनि के छेद में अपनी , मध्यम अंगुली अंदर घुसेड़ चुका था । रही सही कसर उसके अंगूठे ने पूरी कर दी, जो कि मेरे भग्नासा के मोटे मटर के दाने को मसलने लगा।
मेरी सांस रुक गई, और मैं सीधा , न न न करके गर्दन को हिला कर, दर्द भरे फेस को ले कर अपने पंजे के बल खड़े हो गई।
और वो दांत पिस कर मेरे गाल को चूम कर बोला।
सु: आह भाभी , आपका नाम गांव की औरतों ने सही रखा है शहर वाली मटकनी, पूरे बाल साफ़ करके रखती हो अपनी चूत के l
आह कितनी गर्म है ये बुर अंदर से। ( योनि में अंगुली से घर्षण करते हुए, दांत पीस कर )
मैने मुश्किल से उसको ,गर्दन ना ना ना करते हुए , दूर करते हुए, तेज़ सांस लेते हुए कहा, उसके हाथबके ऊपर नाखून लगा कर ।
रि:: आअह सूरज, क्या कर रहा है, छोड़ ड ड,,,, कोई आ जाएगा। आह सूरज ज ज,,,,,( उसका दाएं हाथ की कलाई को पकड़ कर, नाखून लगा कर)
लेकिन सूरज तो मानो ,अपनी मन मानी करके ही मानने वाला था।
वो जैसे ही अपनी मध्यम अंगुली को मेरी योनि के अंदर मेरे जी स्पॉट को दबाया और अंगूठे से मेरे भग्नासा को जोर से मसला, सच कहूं मैं उस टाईम दूसरे दुनिया पे पहुंच गई।
और मेरी आंख चढ़ गई, और पंजे के बल खड़े हुए में कामुक सीत्कार भर के मारने लगी, और अपनी कमर को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगी।
रि: आइया मेरी मां,,,,, आह ह ह ह ह ह ह ह ह।।सूरज सी सी सी सी सी सी सी सी सी सी सी सी सी सी सी सी सी सी,,,,,,,,आह।। हाय रे सी सीसी। मत कर ना।। सी सी आह सूरज सी सी, आईया रे।।मत कर र र र र र र। उम्म सी आह।
और सूरज मेरे गले लग कर , अपने होंठ को मेरे गर्दन पे दबा कर चूसने लगा और चाटने लगा और मेरी योनि में अंगुली घुमा गुम कर , कामुक आवाज से बोला।
सु: आअह भाभी,, आह पूरे गांव में तुम्हारे जैसे माल नहीं है। क्या मस्त चूत है। भाभी मेरा भी हिला दो, अपने इन मस्त हाथों से। कसम से मन कर रहा है कि यही चोद दु तुमको ,खेत में लेटा कर जैसे उस दिन लता की चूत मार रहा था।
तो मैं भी वो सीन याद करके , जो और भी कामुक हो चुकी थी उसके हरकतों से , तो मैने अपने चूड़ियों से भरे हाथ से उसके , पतले लेकिन लंबे लिंग को पकड़ कर हिलाने लगी खड़े खड़े।
सच कहूं में उस टाईम इतना चुदासी हो चुकी थी कि अगर मुझे सूरज वहां पे लेटा देता , तो मैं भी माना नहीं कर पाती ,उसके लिंग को अपने योनि के अंदर लेने से। लेकिन शर्म से मैं खुद नहीं बोली।
और न जाने वो भी क्यों नहीं बोला , जबकि उसके पास इससे अच्छा मौका नहीं था। मैं पूरी तरह से गरम थी।
हम दोनों एक दूसरे की जरूरत पूरी करने लगे थे। वो मेरे जी स्पॉट को लागतार छेड़ रहा था। और मेरे भग्नासा को लगातार मसल रहा था। मैं भी अपनी मुट्ठी में उसके लिंग को पकड़ कर हिलाने में लगी थी।
और तभी वो अपने बाएं हाथ से मेरे स्तन को दबाने लगा, ब्लाउज के बाहर से , में और ज़्यादा मस्ती में भर गई और उसके लिंग को तेजी से हिला कर , कामुक आवाज निकलेने लगी ।।
जिसे मेरी चूड़ियां खन खन खन खन खन खन खन खन खन खन कर बजने लगी, उस मक्के के खेत में।
मैं चाहती थी कि वो ब्लाउज को खोल कर मेरे निपल्स को चूसे और उनका दूध पिए। लेकिन वो नहीं किया।
तो वो मेरे गले को चूम कर बोला कामुक आवाज से।
सु: पंकज भाई को पूरी रात चोदते होंगे, तुम्हारे जैसे माल को। ह्म्म?
अपने पति का नाम सुन के , मेरे दिमाग में वो ही शब्द गूंजने लगे। साली रांड़ कितने यार पाल रखे हैं?
तो मैं भी एक वैश्या के तरह अब तेजी से क़मर आगे पीछे करने लगी बिना कुछ बोले होंठों को दबा कर , बस कामुक आवाज और तेज़ होने लगी।।
सु: बाल कब काटे भाभी? सच में तुम्हारे जैसे माल नहीं देखी कसम से। कांटे जैसे चुभ रहे है तुम्हारे बाल। पूरी चूत पे बाल आते है क्या??( चूत को धीरे धीरे मसल कर)
और में मुश्किल से बोली।
रि: आह ह ह ह।। हां आते हैं ।।।सी सी आह ह सी। हाय रे सी सीसी ऊं सी।।एक क,,, क, हफ्ते ते ते पहले,,काटी थी ल,,, सी सी, आह सूरज सी, आह, सी।। मत कर ना ऐसे सी मर जाऊंगी आंह।।।
मैं सही से बोल भी नहीं पा रही थी। बस उखड़ी हुई आवाज़ से बोलने की कोशिश कर रही थी।
सु: क्या न करु मेरी जान?
रि: सी सी उम जो कर र र रहा है।।( कमर हिला कर कामुक आवाज से उसके लिंग को जोर से दबा कर)
सु: आह ह भाभी,, अपनी चूत दे दो मारने को, कसम से ,पंकज भईया को भूल जाओगे। बस एक बार चोदने दे दो।
बोलो दोगी न।चोदने????( अपनी एक और अंगुली मेरे योनि में ठूस कर)
मैं दर्द और मस्ती से पागल हो कर बोल पड़ी।
रि: हां सी सी पर कहां? करोगे? सी सी कोई सी सी देख लेगा।सूरज दी। हाय रे सी। पागल कर देगा रे तू।।सी सी।सी। ऊं सी सी।।
मेरी हां सुन कर वो पागल सा हो गया।और मेरे अंदर अपनी दोनों अंगुली मेरे जी स्पॉट को मोड कर मसल कर बोला दांत भींच कर।
सु: तुम हां बोलो बस ,
और ये कह के मेरे चूत मैं 2 अंगुलियों को ठूस दिया। मैं दर्द और मस्ती से बिलबिला गई । और अपने कुल्हे सिकोड़ कर उस हाथ बाहर खींचने लगी ।।
सु: इतनेजाम करूंगा कुछ! कसम से भाभी , तुम्हें जवानी का ऐसा मजा दूंगा। ज़िन्दगी भर मेरी रान्ड बन के घूमेगी।।( मेरी योनि में तेजी से अपनी अंगुली अंदर बाहर करते हुए)
मुझे उसकी ये गंदी बात का कोई बुरा नहीं लगा। ऐसा लगा जैसे वो मुझे कोई पद दे रहा हो। मैं फिर से उसका पकड़ के निचोड़ने लगी
सु: पूरी रात ,बिना कंडोम के रात भर तुम्हारी ये चूत फाड़नी है। भाभी।
और ये कहते हुए वो फिर से पूरी 2 अंगुली मेरे आखिरी छोर तक पेल दिया। मेरी तो आँखें मानो बाहर निकल गई।
मेरी मुंह खोल के झटके खाने लगी, और उसके लिंग को छोड़ कर उसके हथेली को पकड़ कर रोने वाली आवाज से बोली।
रि: आआ सूरज ज ज ज ज। मां मर गई ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई,,,,,,,,,,, बस स ससस स स।।आह आह।
मेरी योनि से जोर से चप चप चप और पच पच पच पच पच पच पच पच पच पच पच पच पच पच की आवाज आने लगी ।
मेरा खड़ा होना मुश्किल होने लगा। जैसे ही वो आखिरी छोर पर अंगुली ऊपर को मोड़ा। मैं उससे चिपक कर कमर पुरी उसके तरफ करके अपने कुल्हे सिकोड़ ली उसके गाल गले को चूम कर कमर को तेजी से आगे पीछे करते हुए।
और कामुक आवाज से बोली। आईया।।। स स स स स सु सु सु सु रज ज ज।। नाही सी सी सी सी बस कर र र र र।
पहले बार मुझे ऐसा लगा मेरे गर्भ से कुछ निकला। और मैं वही पे गिर गई ज़मीन पर हाथ रख कर। इतनी थकान लगी , मन किया कि यही पर सो जाऊ। एक नशा सा आंखों में था। आंख खुल नहीं रही थी।
वहीं मैंने अधखुली आंख से देखा, सूरज अपने दाएं हाथ की वो दो अंगुली,अपने मुंह में डाल कर चूस रहा था जैसे मेरे चिपचिपा पानी को चाट रहा हो,और अपना साथ में लिंग हिला रहा था, मुझे देख कर।
और आह भाभी तुम्हारी चूत का स्वाद आह।आह कहते हुए ,एक पिचकारी मक्के के फूल के तरफ मारा।
मैं अभी भी गहरी सांस ले रही थीं। और सूरज को देख रही थी।।जो आंख बंद किए स्खलित हो रहा था।
तभी मुझे ध्यान आया कि , हद से ज्यादा देर हो चुकी है।
अब मेरे मन में थोड़ा ग्लानि का भाव आया। और में उठ के अपने चड्डी को ऊपर चढ़ने लगी, उसके तरफ पीठ करते हुए तो वो बोला।
सु: भाभी अपनी पैंटी दे दो ना प्लीज।।( निवेदन करते हुए)
मैं जो थोड़े देर पहले उसके नीचे भी लेटने को तैयार थी, अब शर्म से उससे कुछ बोल नहीं पाई।
समझ नहीं आया कि क्या उसको बोलूं। लेकिन पता नहीं कैसे मैने अपनी चड्डी ऊपर न करके , थोड़ा झुक कर अपने पैरों से नीचे उतर दी, और पहले चड्डी से अपनी चूत को पूछा और फिर पीछे को हाथ करके उसको दे दी, बिना उसको देखे।
जैसे ये उसका इनाम हो।
वो भी गहरी सांस ले कर मेरी चड्डी को सूंघा और आह करते हुए जेब में डाल दिया।
मैं बिना उसको कुछ बोले ,खेत से बाहर को आई।।और बोली धीरे से।
रि: सूरज मुझे घर तक छोड़ देगा? ( परेशान और डर भरे आवाज से)
वो भी हां हां बोल के खेत से बाहर आया।और हम दोनों चलने लगे।
मुझे समझ नहीं आया कि अब क्या उसको बोलूं? मैं एक शादी शुदा औरत की सीमा लांघ चुकी थी। अब क्यूंकि वासना के बदल छठ चुके थे । तो अब समझ में आ रहा था कि यह क्या हुआ था।
मैं डर से बस उसको ये ही बोली रूक कर, उसके तरफ देख कर।
रि: सूरज ,कभी किसी को मत बताना प्लीज़।( निवेदन करते हुए,हाथ जोड़ कर)
वो आगे बढ़ कर मेरे हाथ पकड़ कर बोला।
सु: विश्वास करो भाभी, आप पर आंच भी नहीं आएगी।। ( मुस्करा कर मेरे आंखों में देख कर)
मैं बस उसका धन्यवाद ही कर पाई।
तो वो बोला।
सु: दुबारा मिलोगे? ( संशय में)
मेरे मुंह से निकल पड़ा।
रि: कहां? मैं कही नहीं आ पाऊंगी सूरज( रिक्वेस्ट वाली आवाज से)
सु: रात को मैं आ जाऊंगा अपके पास।( मुझे देख कर)
मैं डर गई और बोली।
रि: नहीं नहीं प्लीज, घर पे नहीं किसी को पता चल जाएगा।( डर से)
सु: अरे मैं लता से मिलने आता था , आपके गौशाला के पीछे। आप टेंशन मत लो, आपको ठीक लगेगा तो आना।
रि: ह्म्म।।( सोच कर)
सु: अच्छा नंबर तो दे दो अपना।( मुस्करा कर,)
मैं कुछ सोची और उसको अपना नंबर दे दो और बोली।
रि: प्लीज तुम मत करना फोन, मैं टाइम होगा तो खुद करूंगी।
सु: ठीक है भाभी।।( मुस्करा कर)
रि: अब मेरी इज़्ज़त तुम्हारे हाथ में है, विश्वास से दिया है सब तुम्हें।
सु: कहा ना,आपको कभी दिक्कत नहीं होगी मेरे तरफ़ से ( मुस्करा कर)
फिर हम दोनों आ गए। मैं अपने कमरे में गई, और अपने को ठीक की, और दूसरी पैंटी पहनी ।
और फिर सूरज मुझे शादी तक छोड़ कर ,अपने घर चले गया।
शादी में गई तो ,मेरी जेठानी इतना देर से आने को बोली तो मैं बहना बना दी।
मैं वह बैठी तो थी लेकिन ध्यान पूरा जो अभी हुआ उस पर था।
मेरी योनि के अंदर अभी भी नदी सी बह रही थी। ऐसा लग रहा था कि मानो सूरज की अंगुली अभी भी मेरी योनि की गहराई नाप रही हो।
जारी रहेगा।।