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Update 14
कल “दोस्ती के नकाब के पीछे छिपा चेहरा”.... जब काव्या के सामने आया, तो वह टूट गई थी..... पर आज उसके लिए एक नई सुबह थी_
उम्मअह्ह... अंगड़ाई लेते हुए वो नींद से बाहर आई…. पर आज उसके सामने वीर का चेहरा नहीं था..
वह टेबल पर रखी “अपनी और वीर की तस्वीर” को देख, मुस्कुराती है और उठाकर चूमते हुए..... “कब आओगे आप" ??
“जैसी उसकी रात बीती थी, उस हिसाब से उसे बहुत ही फ्रेश महसूस हो रहा था.… वह इस समय वीर के साथ होना चाहती थी”
काव्या (
वीर, सुबह-सुबह ही ध्यानवस्था से बाहर आया...... रात इन्टरव्यू की टैंशन ने उसे जल्दी सोने नहीं दिया.... और अब नींद भी जल्दी खुल गई........ कल तक इसको लेकर वह इतना परेशान नहीं था लेकिन जैसे–जैसे साक्षात्कार की घड़ियां पास आती जा रही थी...... उसके अंदर एक अजीब सी मनोस्थिति ने जन्म ले लिया था….
जिसकी वजह से.... कभी वो ध्यान लगता तो कभी कुछ और करता, ताकि…..उसका मन शांत बना रहे !!
यही होता है, जब आप बार–बार साक्षात्कार तक पहुंच के भी अपना सिलेक्शन न ले पाएं..…. वीर अपनी मानोदशा सुधारने के लिए इंटरनेट से अच्छे–अच्छे उद्धरण निकलके पढ़ने लगा (उद्धरण~कोट्स)
थोड़ी देर बाद जब उसका मूड फ्रेश हुआ.…… तो वह काव्या की तस्वीरें देखने लगा..... 'काव्या का ब्राइडल लुक' आज भी उसके मन में बसा हुआ था….. .ऐसे ही स्क्रॉल करते करते उसे काव्या की एक काफी पुरानी तस्वीर दिखाई दी...
ये उसने तब खींची थी ......जब वह काव्या के बर्थडे पर, किरण से मिलने से मिलने गया था....
वीर के गिफ्ट को देख कितनी खुश हुई थी काव्या...... उसे सब याद आने लगा !!
खैर, उसका मन अब काफी हल्का हो चुका था.... इसलिए नाश्ता करने बाहर निकल गया…... सुबह-सुबह पोहा जलेबी खाना उसे बहुत पसंद था..... ये आदत, उसे इंदौर आने के बाद लगी थी..
भोपाल~
काव्या अब, ध्यान से बाहर आ चुकी थी साथ ही उसने स्नान भी कर लिया था....
रिया : क्या बात है, भाभी आज बहुत खुश लग रही हो ??
काव्या : हां दी ! आज बहुत ही हल्का महसूस हो रहा है..
रिया : लाओ भाभी, इसे मै कर देती हूं.......(और वो नाश्ता बनाने में काव्या की मदद करने लगी)
जब सभी नाश्ता कर चुके थे…... काव्या अपने रूम में, कॉलेज के लिए तैयार होने चली गई...... तभी उसका फोन बजने लगा..
काव्या : हेलो
कीर्ति : हां, भाभी ! कैसे हो ??
काव्या : मै तो बढ़िया हूं.....लेकिन तुम कहां बिजी रहती हो.....रूही तो कॉल करती रहती है, .......तुम्हारा ही कहीं पता नहीं चलता...
कीर्ति : भाभी !! ऐसा बिल्कुल नहीं है, बल्कि आप ही...... मुझे कभी याद नहीं करती ... जबसे भोपाल गई हो एक बार भी कॉल किया आपने…
काव्या : ठीक है, बाबा ! मेरी गलती ....... मां जी कैसी है ??
कीर्ति : यहां सब ठीक है, भाभी..... भैया यहां है, नहीं तो जैक भाई ही घर का सारा काम सम्हालते है....
डिंग डांग..
कीर्ति, कॉलेज के लिए लेट हो जाएगा ....मै तुम्हे बाद में कॉल करती हूं....
रिया ने दरवाजा खोल दिया था तो..... यशस्वी चहकते हुए काव्या के रूम में घुस गई…..
यशस्वी : क्या बात है....आज तो पार्टी बहुत खुश लग रही है?
काव्या : पार्टी ? कौन सी पार्टी ??
यशस्वी : अरे, आप दी ! और कौन.....
काव्या (
यशस्वी : लेकिन दी ! मुझे तो 5 ही मिनिट लगते है, किसी का भी मूड…… ठीक करने में .....
देखो आपको हंसा दिया ना...... ऐसी ही गोल मोल बाते करते हुए यशस्वी… काव्या को तैयार होते देखती है..
और थोड़ी ही देर बाद.....दोनों निकल पड़ी कॉलेज ......आज भी वही गाड़ी उनका पीछा कर रही थी !!
यशस्वी : दी ! याद है ना आपको ........ आज….. अकेले कहीं भी नहीं जाना ???
काव्या : याद है बाबा ! अगर जाऊंगी भी...... तो पहले तुम्हे कॉल करूंगी !!
यशस्वी (
काव्या : ठीक है !....ठीक है, मेरी मां....अब तू क्लास में जा..
~~~
वहीं इंदौर में, वीर भी.….. बढ़िया से तैयार होके निकल गया........ इंटरव्यू के लिए, आज..... उसे एक अलग ही फीलिंग आ रही थी.... कलाई पे बंधे धागे को उसने चूमा और भगवान को याद कर
~~~
क्लास पहुंचते ही, काव्या को वही सेम....कल वाला शो देखने मिला, जिसमें लकी और जानवी एक बेंच पर बैठे..... बातें कर रहे थे..
काव्या जाकर अपने डिबेट पार्टनर की, पीछे वाली बेंच पर बैठ गई.... और उससे टॉपिक संबंधी बातें करने लगी.….. तभी लकी जानवी के कान में कुछ बोल कर चला गया....... जानवी उठी और काव्या के पास पहुंच गई..
जानवी : यार ! काव्या काफी दिन हो गए....इससे पहले कि वो आगे कुछ बोल पाती....
काव्या : अभी नहीं यार बिजी हूं…... और फिर से टॉपिक पर डिसकशन करने लगी !
जानवी : अरे ! काव्या सुन तो
काव्या :
जानवी : अरे ! भड़क क्यों रही है, चल ब्रेक में बाहर घूम के आते है
काव्या : नहीं...
जानवी : अरे ! सनसेट व्यूपॉइंट तक ही चल ले ना....
काव्या : फिर तू अकेली ही चली जा, वैसे वहां जाके करेगी क्या ?
मजाक उड़ाए जाने पे जानवी को बहुत गुस्सा आया .....लेकिन वो कर ही क्या सकती थी.... चुपचाप जाके अपनी बेंच पर बैठ गई...
जलन~ दोस्तों, एक ऐसी चीज है जो व्यक्ति को कहां से कहां पहुंचा देती है....... अगर प्रेरणा के रूप में काम में लिया जाए तो अर्श पर ...…..नहीं तो फर्श पर...
लकी के ब्लैकमैल करने... मात्र से जानवी इतने आगे नहीं बढ़ी बल्कि इसके पीछे और भी बोहोत सारी वजहें थी..... जैसे मार्क्स, काव्या के मार्क्स हमेशा ही जानवी से अच्छे आते थे (हालांकि वह टॉपर नहीं थी)
काव्या के पास अक्सर ही पैसे खत्म हो जाया करते, लेकिन जानवी......... जब भी उसे देखती, खुश ही देखती (अब उसे कौन बताए? जो टॉर्चर काव्या के साथ घर में सुबह–शाम होता था..... बाहर आना तो उसके लिए स्वर्ग जैसा था)......
और जानवी के पास जब भी कोई लड़का आता या उससे बातें करता….. उसमें काव्या का ही जिक्र होता….. कई बार तो वो….. उससे बात ही इसलिए करते थे, क्योंकि……. वो काव्या की दोस्त थी…
जानवी ने इन छोटी–छोटी बातों को इतनी तवज्जो दी कि ........आज वह उसके लिए नफरत का सबब बन गई...... अब उसे काव्या की खुशियां एक पल भी नहीं सुहाती...
थोड़ी देर बाद जानवी, काव्या के पास फिर से गई ..... और उससे साथ बैठने के लिए कहा, तो काव्या ने…… डिबेट डिसकशन का वास्ता देकर उसे वापिस भेजना चाहा... पर जानवी
जानवी : अरे ! क्लास का टाइम हो गया है, अब क्या ही बातें हो पाएगी चल न वहां साथ बैठते है…
काव्या : नहीं...
जानवी (
| आज की ये सारी बातें कोई और भी...... बहुत ही करीब से नोटिस कर रहा था |
जैसे~जैसे क्लासेस चलती रहीं, जानवी का गुस्सा बढ़ता गया...... और जब ब्रेक हुआ....... काव्या उठके सीधे निकल गई, यशस्वी के पास...... वो भी इतनी जल्दी कि .....जानवी उसे रोक ही नहीं पाई ।।.....
काव्या के आते ही यशस्वी.... दी !!
यशस्वी : तो दी, कैसा रहा आज ?......मजा आया या नहीं ?
काव्या : अरे ! बहुत मजा आया.....पहले कुछ ऑर्डर करलें, फिर खाते खाते बताती हूं….
यशस्वी ने ऑर्डर दिया ही था कि जानवी वहां पहुंच गई...
तू मुझे इग्नोर क्यों कर रही है ?
काव्या : नहीं तो, मैने ऐसा कुछ नहीं किया ??
जानवी : देख काव्या, सुबह से देख रही हूं, अब बस,,,,,, बहुत हो गया तेरा...
काव्या (
मन ही मन दोनो तरफ के मजे लेते हुए यशस्वी
काव्या : बता ना ! आखिर मुझे भी तो पता चले....... मैने क्या गलती कर दी?
जानवी (गुस्से से) : ज्यादा नाटक मत कर ......
इस बार वो थोड़ा, ज़ोर से बोल गई…... आसपास के लोग सब उसे ही देखने लगे.... तो वो कैंटीन से ही बाहर निकल गई...
यशस्वी : ये हुई न मेरी दी ! वाली बात.... मजा ही आ गया
काव्या : हम्मम.... पर मैने उसे कुछ ज्यादा ही ......गुस्सा दिला दिया ???
यशस्वी (मिमिक) : ऊके गुस्सा होने से कोन्हों फरक पड़ता है का ??.....
वहीं कैंटीन से बाहर आते ही जानवी को लकी मिल गया.....क्या हुआ, मान गई ??
जानवी : मुंडी हिलाते हुए, नहीं !....
लकी : रण्डी तुझसे एक काम ढंग से नहीं होता, ....साली तू उसकी दोस्त है, भी या नहीं ?......
जानवी : पता नहीं ! उसे क्या हो गया है ? मेरी एक बात नहीं सुन रही..... कही ऐसा तो नहीं उसे हमारे प्लान के बारे में पता लग गया हो..
लकी : इस बारे में तेरे अलावा किसी और को कहां पता था, कुतिया... कहीं तूने ही तो..
जानवी : नहीं ! नहीं ! मैने किसी को कुछ नहीं बताया… "वैसे भी मैं सबसे ज्यादा नफरत…. उससे ही तो करती हूं "
तभी पीछे से आते हुए, सोनू : क्या बात है ! भाई, नहीं आ रही क्या वो??
जानवी : तो तुमने ! इसे भी बता दिया ??
लकी : वो मेरा दोस्त है, कुतिया ....जो मैं खाता वो भी वही खाता है, शुक्र मना उसे, तुझमें जरा भी दिलचस्पी नहीं…..
सोनू : लेकिन भाई ! अब मेरा मूड बदल रहा है, क्यों न इसे भी चख ही लूं
लकी : जब भी चाहिए हो.... कॉल कर देना, ये रण्डी दौड़ी चली आएगी...
जानवी : न..नहीं, मै नहीं जाऊंगी ?
लकी (
सोनू : समझ गई न रानी, चल अब...... निकल यहां से !!
जानवी पेड़ के नीचे, एक बेंच पर जाके बैठ गई...... और सोचने लगी,
सुबह से लेकर अब तक, जो कुछ भी उसके साथ हुआ...... उसे सोच सोचकर उसका गुस्सा बढ़ता ही जा रहा था.... काव्या की बच्ची
तभी उसके पास से यशस्वी और काव्या निकली..... तो उसने उन्हें रोक लिया...
जानवी : हो क्या गया है तुझे ?.... अब तू कैंटीन जाने लगी है, मुझसे ठीक से बात नहीं करती, पैसों का घमंड आ गया है क्या ?......
भूल मत, जब भी तुझे पैसों की जरूरत पड़ती थी….. मै हमेशा तेरे काम आती थी….
यशस्वी : और वो पैसे कितने होते थे?
जानवी : ये ! तू चुप रह.... मै काव्या से बात कर रही हूं !
यशस्वी : हां हां सौ–पचास का ताना देने में शर्म तो आ नहीं रही होगी..
काव्या : अरे ! यशु तू रुक.......तो तुम्हें और क्या चाहिए ?...... जितने दिनों के लिए मै पैसे उधार लेती थी...... उससे ज्यादा तो तुम्हारी पढ़ाई में मदद करती थी..
जानवी : तू ना बोहोत बदल गई है, काव्या.... अब इस जैसी लड़कियों के साथ रहेगी तो...... ऐसा ही होगा…..
यशस्वी (
काव्या को दिखाते हुए
जानवी : हंस लो जितना हंसना है, फिर आगे से कभी मेरी मदद मांगने मत आना...
तो यशस्वी काव्या की तरफ देख….. फिर से जोर–जोर हंसने लगी....
जानवी : बहुत हो गया काव्या, आखिर बार पूंछ रही हूं, छुट्टी के बाद मेरे साथ चलेगी या नहीं?
यशस्वी:
और दोनों जोर जोर से हंसने लगीं....
जानवी गुस्से से लाल पीली होके.... वहां से चली गई....दूर खड़ा एक लड़का ये सब नोटिस कर रहा था...साथ ही किसी और की नज़रे भी काव्या पर थी !
कीर्ति, रूही और मम्मी आपस में गप्पे लड़ा रही थी..
रूही : मम्मी ! मै परसों भाभी के पास जा रही हूं तीन दिनों के लिए....
मम्मी : हां–हां चली जाना....और कीर्ति तू जाएगी या नहीं?
कीर्ति : नहीं मम्मी मेरे बोर्ड्स है.... और अगर मैं वहां चली गई तो यहां आपकी मदद कौन करेगा??...तभी बाहर से आते हुए..
जैक: ये छुटकी मै हूं न.... तुझे जाना है तो बिंदास जा
कीर्ति : अरे ! मेरे भाई...मै कही नहीं जा रही..... वैसे भी भाभी की छुटियां तो, अगले महीने होंगी ही... तब मेरी भी छुटियां रहेगी..... तो सारी मस्ती यहीं कर लेंगे...
रूही : लेकिन, मै तो जाऊंगी...... वहां भाभी की एक छोटी बहन भी है, उसके साथ घूमूंगी, मस्ती करूंगी और रिया दी से भी मिले काफी समय हो गया...... तो उनसे भी मिल लुंगी
मम्मी : ठीक है !..ठीक है !... जिसको जाना है, जा सकता है..
क्लासेस खत्म होते ही एक बार फिर काव्या और जानवी का आमना सामना हुआ.... काव्या नॉर्मल रही पर जानवी ने उसे खा जाने वाली नजरों से देखा..... वो समझ नहीं पा रही थी... कल तक तो सब ठीक था.... आखिर ऐसा क्या हो गया ??? जो काव्या उसकी बातों को इग्नोर करने लगी...
सोनू : क्या हुआ ?.......नहीं मना पाई, चल अब तू कुछ मत कर...... आगे हम सम्हाल लेंगे........ तू बस इस संडे आके मुझे खुश कर दे... (और हंसते–हंसते उसके बगल से निकल गया)..
यशस्वी : चले
काव्या : हम्मम !........और दोनों निकल पड़ी घर की ओर....(वह गाड़ी भी हमेशा की तरह उनका पीछा कर रही थी)...
यशस्वी : दी ! क्या हुआ ? .... सब ठीक तो है न... आप इतनी चुप क्यों हो??
काव्या: हम्मम…… सब ठीक है, लेकिन तुमने मुझे वो रिकॉर्डिंग न सुनाई होती, तो.. (यशस्वी बीच में ही)..... तो भी आपको कुछ नहीं होता, ज्यादा फालतू सोचने की जरूरत नहीं…....चिल करो !!....और गाड़ी एक कैफे की तरफ मोड दी…....
काव्या : अरे ! अरे !!.... यहां क्यू ले आई?
यशस्वी : यहीं तो मजा है.….. जल्दी आओ, बैठो यहां पे .......(और दो एस्प्रेसो के साथ वेज सैंडविच ऑर्डर कर दिया)
काव्या : अरे ! इसकी क्या जरूरत थी..
यशस्वी : मैने बोला न.... चिल !!
काव्या : ठीक है, ठीक है..
काव्या : कल, क्लासेस खत्म होने के बाद .... मेरी एक डिबेट है, तो क्या...
यशस्वी : अरे ! अरे ! बिल्कुल.... मै भी आपकी डिबेट सुन लूंगी...... तभी काव्या का मोबाईल रिंग करने लगा..
यशस्वी : अरे जल्दी उठाओ न .....मुझे भी तो सुनना है.....
काव्या : कॉल पिक करते ही~हेलो !
वीर :अरे ! कहां हो वाइफी ?....पीछे से म्यूजिक की आवाज आ रही है..
काव्या : कही नहीं, बस कैफे आई थी..
वीर : ठीक है, फिर एंजॉय करो..
काव्या : अरे ! अरे ! ...रखना मत, आपका इंटरव्यू कैसा रहा ??
वीर : बाद में बताता हूं, तुम एंजॉय करो और डिबेट की प्रिपरेशन भी
काव्या : पर आपको डिबेट के बारे में.... कैसे पता ??
वीर : वो..वो ! मुझे रिया दी ने बताया था...... ठीक है तुम एंजॉय करो मै रखता हूं.....और कॉल काट दिया..
यशस्वी.... जो कान लगाए बैठी थी.... “इस म्यूजिक ने सब बिगाड़ दिया,
काव्या (
यशस्वी : अरे ! दी,
काव्या: फिर उन्हें कैसे पता....मेरी डिबेट के बारे में…
यशस्वी : अरे ! दी चिल ना.... इससे तो यही लगता है,जीजू को आपकी बहुत फिक्र है…
काव्या (शर्माते हुए ): हम्म... सही कहा !!
....और दोनों, ऐसे ही थोड़ी देर बातचीत कर…. घर के लिए निकल गई……. (काली गाड़ी ने इस बार भी उन्हें घर तक फॉलो किया)
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वीर : अरे ! बच गया !!.......
वीर : हां, संकलित...... " तो उसने आज घटित सारी घटना की कहानी संक्षेप में, वीर को सुनाई " .... (संकलित वही लड़का है, जिसे वीर कॉलेज के पहले दिन गेट पर मिला साथ ही उससे काव्या का ध्यान रखने के लिए कहा...)
संकलित : हां !! भैया..... मैंने पार्किंग में भी देखा, भाभी ने उससे बात तक नहीं की.........
वीर : जरूर कुछ हुआ होगा, उनके बीच....(
वीर : ठीक है ! डिबेट पूरी तैयारी से जाना, हारना मत !.... मैं रखता हूं...
संकलित : जी भैया !.... और कॉल कट गया (यही है, काव्या का डिबेट पार्टनर~ संकलित)
तभी वीर के पास उसका दोस्त आ गया, दरअसल इंटरव्यू के, तुरंत बाद ही वो वीर को मॉल ले आया था..
फ्रेंड : हां भाई ! क्या बात हुई भाभी से ??
वीर : अबे ! हट न यार.... कबसे कपड़े सिलेक्ट नहीं कर पा रहा और अब……. जब अंडरवेयर लेने गया तो इतनी देर लगा दी !!
फ्रेंड : अरे ! वो सेक्शन ढूंढने में ही बहुत टाइम लग गया.... लेकिन तू टॉपिक चेंज मत कर..... बता ना भाभी ने क्या कहा......
वीर : कह रहीं थी... फालतू दोस्तों से दूर रहना..... (और तू, तेरी गर्लफ्रेंड है तो सही....उससे बात क्यू नहीं करता ??)
फ्रेंड : ठीक है ! ठीक है !..... मै तो ये जानना चाहता था...... मैरिड कपल आखिर बात.... क्या करते है??
वीर: कुछ नहीं करते.... तू चल चुपचाप
ओए, वीरू?....वीर ने अगल बगल देखा... “अरे ! सुमित, क्या हाल है, भाई के” ??
सुमित : सब बढ़िया भाई ! तू बता ....यहां कैसे ??
वीर : बस यार ! इंटरव्यू था, आज..
सुमित : तो कैसा रहा, हो तो जाएगा न इस बार
वीर : हम्मम.... उम्मीद तो पूरी है !!
सुमित : वैसे यहां कहां, रुका है??..... वीर अपने फ्रेंड की ओर इशारा करते हुए..... इसके साथ रुका हूं, हम साथ ही तैयारी करते थे.... अब ये यही कोचिंग में पढ़ता है ?..
सुमित : बढ़िया भाई बढ़िया.....वैसे तूने अपना नंबर बदल दिया क्या??
वीर : हा, मेरे पास तेरा नंबर है.... रुक मै कॉल करता हूं, सेव करले....
वीर और उसका फ्रेंड...... दोनो खाना बना रहे थे.... “यार तेरे इंटरव्यू के चक्कर में हमने ज्यादा बाते नहीं की”
वीर : हम्म….. तुझे तो पता ही है, ऐसी सिचुएशन में.... मैं ज्यादा बातें नहीं करता !!
फ्रेंड : चलो, आखिर तेरे एकांत रहने का कीड़ा..... तो शांत हुआ !!
वीर : अबे यार, तू फिर शुरू हो गया, बोला ना तुझे......केवल कल के लिए ही, मुझे एकांत चाहिए था...
फ्रेंड : ठीक है, ठीक है....वैसे तूने शादी के बाद इंदौर क्यूँ छोड़ दिया...... यहीं ले आता भाभी को !!
वीर : अबे ऐसा नहीं है..... मैने पहले ही सोच रखा था, शादी के बाद बाद घर में ही रहूंगा…... वहीं से एग्जाम्स दूंगा, हुआ तो ठीक ....नहीं तो कोई बिज़नेस डाल लेंगे….
फ्रेंड : ठीक है ! चल खाना खाते हैं.... (और दोनों रात्रिभोज करने लगे)
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रात में काव्या, आज जो कुछ भी हुआ...... उसके बारे में ही सोच रही थी...... साथ ही.... डिबेट को लेकर भी चिंता में थी.....
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वहीं वीर, खाने के बाद लेटे~लेटे अपने कॉलेज के दिनों में चला गया.... वजह थी सुमित, जो आज यूं ही अचानक से टकरा गया.......
स्कूल लाइफ खत्म हो जाने के बाद भी वो कॉलेज के शुरुआती दिनों में..... उन यादों से बाहर नहीं आ पाया और अपने स्कूल लव को याद करता रहा........
फिर किरण आई और वीर के चेहरे पे मुस्कान खिल गई (
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