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Looteraaa

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Looteraaa

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Update ane wala tha n kal brother
Hmm thodi der baad .... Bas kuchh kaam baaki hai......aur mai din me thoda confuse ho gaya tha to time par complete nahi kar paya actually sunday ko hi ana tha update
 
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Looteraaa

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Update 12



अब तक :

सुबह–सुबह वीर, जेसियन द्वारा भेजे गए ईमेल के बारे में सोच रहा था..🤔


अब आगे :

वीर, काव्या के लिए ऐसा माहौल चाहता था, जिसमें वह बेफिक्र होके अपनी पढ़ाई कर सके, लेकिन जेसियन द्वारा भेजे गए मेल ने… उसे असमंजस में डाल दिया…

उस मेल में लकी की सारी करम–कुंडली थी, वो अय्याशियां….. जो वो सबसे छिपाकर करता, जैसे लड़कियों को फंसाना और उन्हें ब्लैकमेल कर दूसरी लड़कियों को भी अपने नीचे ले आना..

इसमें सबसे बड़ी, चिंता की बात थी “जानवी” ..….. जो लकी के चक्कर में फंस चुकी थी और अब वो….. काव्या को उसके नीचे लाना चाहती थी..

वीर के पास दो ही रास्ते थे….. “या तो वो काव्या को सब कुछ बता कर सतर्क कर दे या फिर लकी को हमेशा-हमेशा के लिए रास्ते से हटाकर मैटर ही खत्म क.….

पर परसों ही उसका इंटरव्यू था, जिसको लेकर वह बिलकुल भी सीरियस नहीं था क्योंकि पहले भी 2 बार फुल तैयारी के बावजूद….. वो बाहर गया, लेकिन मन में काव्या की वजह से ये जरूर था…… इस बार निकल गया तो काफी चीज़ें सुलझ जाएंगी !!

अंत में वीर ने कुछ समय के लिए बीच का रास्ता निकालते हुए उसे सिक्रेटली प्रोटेक्ट करने का निर्णय लिया…… क्योंकि वह ये सब बताकर उसे फालतू टेंशन नहीं देना चाहता था !!

अभी वो इन्हीं ख्यालों में खोया ही था, कि…… उसके गालों को चूमते हुए……

काव्या: “मॉर्निंग हबी“….. 😊

वीर भी रिटर्न किस करते हुए “गुड मॉर्निंग वाइफी” !!

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सुबह–सुबह फ्रेश होने के बाद काव्या जल्दी से किचन में जाके चाय बनाने लगी... तभी वीर

उसे देखकर …… "अरे ! मेरी बिल्ली तो पीछे से भी सेक्सी है" और …..“ उसे वहीं हग कर लिया”

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काव्या : छोड़ो न !!… कोई आ जाएगा

वीर : आ जाने दो !

काव्या : प्लीज़ न…..🥺

वीर : नहीं, अभी मेरा मन नहीं भरा.... तभी किसी के आने की आहट हुई..

रिया : अरे ! बेटू तू किचन में क्या कर रहा है ? बाहर बैठ न….. मैं वही चाय लाती हूं और काव्या से……. “भाभी मुझे भी कुछ बनाना सिखाओ ना जो सबसे आसान हो”

काव्या : हम्म….. ”और दोनो गप्पे लड़ाते हुए नाश्ता बनाने लगी ”


✨थोड़ी देर बाद :

जब सभी नाश्ता कर चुके थे...... काव्या, कॉलेज के लिए तैयार होते हुए 🤔.... “जानवी को मैंने अब तक नही बताया”….. अब मैं हॉस्टल में नहीं रहूंगी... ऊपर से फोन पे लड़ाई भी कर ली 🙄 हम्म….. पता नहीं इसपर वो कैसे रिएक्ट करेगी ??

यशस्वी तैयार होके आते है, जीजू ! दी कहां है, क्या वो तैयार हो गई ?

वीर : हां, बस आती ही होगी..

“तभी काव्या बाहर आई”……. जिसे कॉलेज ड्रेस में देख, वीर अपनी ही जगह पे खड़ा हो गया….. और उसकी नजरें काव्या पे टिक गई !!

यशस्वी (मन) : वाओ ! क्या सीन है ?….सो रोमेंटिक !!

तभी काव्या वीर का हाथ पकड़कर, चलें !....... और तीनों कार में बैठ कर कालेज के लिए निकल पड़े !!


✨एक्सीलेंस कॉलेज :

वीर, काव्या को बाहर, ही छोड़कर.….. उसे अंदर जाते हुए….. देखता रहा, तभी यशस्वी……

“ दी ! जीजू की नज़रे तो आपसे हट, ही नहीं रही….. देखो अभी तक आपको देखे रहे है ”

काव्या उसकी बातों पर ध्यान न देते हुए, हम्म्म....

यशस्वी : दी ! वैसे जीजू बहुत अच्छे है ना....सबकी मदद करते है !

काव्या (🤔) : नहीं, ऐसा बिलकुल नहीं है, असल में तो वो बोहोत ही गुस्सैल, चिड़चिड़े और खडूस है !!...कभी कभी तो लगता है…… किस पगलेट के मत्थे बांध गई..

यशस्वी(🙄) : लेकिन मुझे तो ऐसा नहीं लगता…

काव्या (मन) : वो तो मुझे भी पता है चुड़ैल…… ”पर तेरी नियत खराब है ना उन पर”

यशस्वी (👋) अरे दी ! कहां खो गई??

काव्या : हम्म्म.....क..कही नहीं... चलो तुम अपनी क्लास में जाओ….. तो यशस्वी उससे…… ब्रेक में, कैंटीन आने का बोलके अपनी क्लास के लिए निकल गई…..


✨ दूसरी तरफ :

“समझ गए ना ! भाभी का ध्यान रखना और कुछ भी जरूरत हो तो बेझिझक…. बता देना”

“वीर एक लड़के से कहते हुए........ जो काव्या के साथ ही पढ़ता था”

लड़का : जी भैया.... “इसका बड़ा भाई वीर के अंडर काम करता है” !!


✨वहीं कॉलेज के अंदर :

जानवी : अरे, काव्या तू !!.... क्या हो गया था तुझे? इतने दिन हॉस्पिटल में क्यूं रहना पड़ा?

"काव्या भी फोन पे हुई लड़ाई भूल उसके गले लग गई".... और…..”मैं ठीक हूं, मुझे कुछ नही हुआ, तू बता…… तू कैसी है?

जानवी : फर्स्ट क्लास, एकदम चकाचक….

काव्या : वो तो दिख रहा है, कही टांका भिड़ा लिया क्या??

जानवी : अरे नही बाबा ! मेरी, ऐसी किस्मत कहां .....एक तू है जिसके पीछे लकी पड़ा है……. और तू उसे इग्नोर कर रही है, पर सच कहूं….तो ……. मैंने उसकी आंखो में तेरे लिए सच्चा वाला प्यार देखा है !!

काव्या(🤨): मना किया न तुझे... फिर समझती क्यूं नही…. मैं अब शादीशुदा हूं !!

जानवी : जरा, एक बार पीछे तो देख..... काव्या ने जैसे ही पीछे देखा….

| लकी स्टाइलिश तरीके से वॉक करते हुए आ रहा था, बालों की एक लट उसके माथे पर थी, वेल शेप्ड बॉडी और राइट पॉश्चर “एकदम किसी मूवी के हीरो की तरह” |

काव्या को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा….. बल्कि वो जानवी से और नाराज हो गई इसीलिए चुपचाप अपनी क्लास में चली गई !!

वहीं लकी (मन) : मुझे इग्नोर करके….. पता नही खुद को क्या समझती है…. “एकदिन इसको… इसकी औकात दिखाकर रहूंगा, रांड बनाऊंगा साली को और इतना चोदूंगा…. “ तभी उसके कंधे पर किसी ने हाथ रखा…... अरे ! भाई, यूं ही देखते रहोगे? या कुछ करोगे भी….

लकी : ठीक कह रहा है, बे.....अब ये शराफ़त छोड़, थोड़ी छेड़–छाड़ करनी ही पड़ेगी.... “साली बोहोत नखरे दिखाती है”..

सोनू : नहीं भाई, कॉलेज के अंदर पंगा नहीं.......सभी जगह कैमरा है !

लकी : सभी जगह नही है बे, और वैसे भी मेरा कोई क्या ही उखाड़ लेगा..

सोनू : हां, लेकिन फिर भी सम्हल के…

लकी : तू ज्यादा मत सोच भोसड़ी के.... प्यार से नही मान रही ना “अब इसको दूसरी भाषा में समझाऊंगा“ !!

वहीं जानवी खुन्नस लिए, मन ही मन काव्या को गालियां दे रही थी… क्लास में जाकर वो उससे से बात करने की कोशिश भी करती है लेकिन काव्या ने उसे उसका कोई जवाब नही दिया बस पेन से कॉपी को गोदती रही, जैसे उस पर गुस्सा निकाल रही हो…..

जानवी : सॉरी काव्या ! लेकिन….. क्या, तू सच में लकी को ऐसे ही जाने देगी, वो भी अपनी उस….. “जबरदस्ती हुई शादी के लिए, उस बेकार से हसबैंड के लिए”…..

काव्या (😠) : चुप कर तू ! कुछ भी बके जा रही है... जब उन्हे जानती नहीं तो फालतू मत बोल, और कौन लकी, क्या लकी ? मैं तो उसे ठीक से जानती भी नही !

जानवी : लेकि....

काव्या : अभी मेरी बात, खत्म नहीं हुई..… मैं अपने पति से बोहोत प्यार करती हूं, आगे से तूने किसी और का इस तरह जिक्र किया तो मुझसे बुरा कोई नही होगा…

बेल बस बजने ही वाली थी इसीलिए क्लास बच्चों की संख्या बढ़ने लगी…. “जानवी अंदर से तो गालियां बक रही थी….. लेकिन सामने से उसे मनाने में लगी हुई थी ”….

अब थी तो दोनो, बेस्टफ्रेंड ही,….. ऐसे में काव्या उससे ज्यादा देर नाराज कैसे रहती…. इसीलिए उसने गुस्सा थूक दिया….तभी क्लास में प्रोफेसर आ गए…

और लगातार 3 क्लासेस के बाद, जब ब्रेक हुआ…. तो काव्या जल्दी से कैंटीन के लिए निकल पड़ी…. (जानवी उसे रोकते हुए)… अरे ! कहां चली ?

काव्या : कैंटीन.... (और तेजी से निकल गई)..

जानवी (मन) : ये कैंटीन क्यूं जा रही है, इसने तो कभी कैंटीन में पैर तक नहीं रखा, 🤔हम्म्म….जरूर पैसे आ गए होंगे..

जानवी फटाफट उसका पीछा कर, रोकते हुए उसके साथ चलने लगी और जैसे ही दोनों कैंटीन पहुंची उन्हें आवाज आई !!

दी !....यहां–यहां, तो काव्या जाके यशस्वी के पास बैठ गई, अब ….”जानवी और यशस्वी एक–दूसरे को घूर रही थी”.... तभी काव्या, ये है मेरी बेस्टफ्रेंड जानवी और जानवी ये है अपनी जू..

यशस्वी (तपाक से) : मैं हूं, “इनकी छोटी बहन” और आपकी जूनियर यशस्वी…

यशस्वी ने सभी के लिए पेटिस ऑर्डर किए..…... तभी जानवी, काव्या तूने "अपनी इस बहन" के बारे में कभी बताया नहीं ?

काव्या : दरअसल हम दोनो नेबर्स है, और अब मैं इसी के साथ कॉलेज आया करूंगी…

जानवी : म..मतलब तुम अब हॉस्टल में नहीं रहोगी ?

काव्या : नही..

जानवी : तूने…. पहले क्यू नही बताया ... अब मेरा क्या होगा ?...... (मन) "अब लकी मुझे नहीं छोड़ेगा”

काव्या : कोई बात नही जानू, वैसे भी हम कॉलेज में…… तो मिलते ही है, अब अगर मैं…… “मेरी ननद और माजी” के होते हुए भी हॉस्टल में रहती तो उन्हें बुरा लगता ना !

तीनों उठी, और जैसे ही यशस्वी पे करने गई तो, काव्या ने उसे रोक दिया और खुद ही बैग से फोन निकल कर पेमेंट कर दी.... तभी जानवी

ये..ये...आइफोन तुम्हारे पास कहां से आया ?

काव्या : उन्होंने दिया है...(और मन ही मन खुश हो गई)

तीनों कैंटीन से बाहर आई, तो यशस्वी को उसकी फ्रेंड मिल गई, जो उसे प्रोजेक्ट रिगार्डिंग बात करने के लिए अपने साथ ले गई.….. वहीं काव्या, जानवी को लेकर एक पेड़ के नीचे बेंच पर बैठ गई !

जानवी : पहले तो….. “ये ही नहीं बताया, कि तू”…… हॉस्टल में नहीं रहेगी और अब ये आईफोन..... सच–सच बता ऐसा क्या–क्या है, जो तूने मुझसे छिपा रखा है ??

काव्या : मैं यहां दिखावा करने थोड़ी आई हूं.... जो सबको फोन दिखाती फिरूं…..

जानवी : देख, अगर तू इस शादी से खुश नहीं….. तो जाने दे, आगे तेरी पूरी जिंदगी पड़ी है.

काव्या : फिर वही बकवास…

जानवी : इसमें बकवास क्या है ? तेरा हसबैंड है ही….. इतना बड़ा…… तुझे तोफे दे–देकर खुश कर रहा है, मानती हूं तेरे परिवार के पास पैसे नहीं लेकिन तू सिर्फ पैसों के लिए ही उसके साथ है,……”पता नहीं कैसा दिखता होगा” ??

काव्या (😠) : बस जानवी !...... कब से बकवास किए जा रही है, और रही बात…. कैसा दिखता होगा ?? तो ले... देख ले, अपने मोबाइल में वीर की फोटो दिखाते हुए...... आगे से मेरे पति के बारे में इत्तू सा भी बुरा बोला, तो तू देखना..

मुझे तुझसे ऐसी उम्मीद नहीं थी, जानू... जब मुझे कोई परेशानी नहीं तो तू क्यूँ "वही बात बार–बार कर रही है".... शुरू से ही हम दोनो रूममेट रहे और हर मुसीबत में एक दूसरे का साथ दिया….

मैंने तेरे अलावा किसी को दोस्त भी नही बनाया लेकिन आगे से तूने मेरे हसबैंड के लिए कुछ भी गलत बोला तो सच कह रही हूं.... "कभी बात नही करूंगी" तभी उनके पास लकी आ गया

लकी : अरे जानवी ! यहां क्यों बैठी हो? चलो कैंटीन चलते है "ये सब वो काव्या की तरफ देख कर बोल रहा था"... जानवी नहीं, “अभी हम वहीं से तो आए है” ।

लकी (🤨) : अरे ! चलो ना यार "एक काफी ही पी लेना".…. तो जानवी काव्या का हाथ पकड़ उसे उठाते हुए चल अब गुस्सा थूक दे !!

काव्या : नही मुझे नही जाना…. और वो हाथ छुड़ाकर अपनी क्लास की ओर जाने लगी, तभी लकी ने उसका हाथ पकड़ लिया और अपने पास खींचने लगा, पर……. काव्या जोर लगा कर अपना हाथ छुड़ाते हुए….

“तुम अपनी हद में रहो, आइंदा मेरा हाथ पकड़ने की कोशिश की तो मुझसे बुरा कोई नही होगा और वो वहां से चली गई”..…

लकी (मन) : साली रांड एकबार बस एकबार तू मेरे नीचे आजा, तेरे सारे नखरे उतार दूंगा और जानवी से...... लगता है तू ठीक से अपना काम नहीं कर रही !!

जानवी : "अब वो हॉस्टल में नही रहती, और तो और उसका हसबैंड काफी पैसे वाला लगता है…. उसे लेटेस्ट आईफोन दिया है"

लकी : बकवास बंद कर, तुझे क्या लगता है मैं आईफोन नही ले सकता..... "अगर तू मेरा काम कर दे तो तुझे आईफोन भी ला दूंगा और तेरे सारे विडियोज भी डिलीट कर दूंगा" चल जा अब, ठीक से अपना काम कर….

वहीं वाशरूम में, काव्या अपने हाथ धो रही थी,,, तभी उसे याद आया,,,, लकी ने उसका हाथ पकड़ लिया था….. तो वो और भी ज्यादा घिस–घिस कर उन्हें धोने लगी और फिर अपनी क्लास के लिए निकली ही थी के….. रास्ते में यशस्वी मिल गई

यशस्वी : दी ! क्या हुआ आपको ?... आपने मुंह क्यूँ लटकाया है ?

काव्या : कुछ नहीं….

यशस्वी : दी ! अगर कोई परेशानी हो… तो आपकी छोटी बहन है न..... वैसे अगर जीजू की वजह से ऐसा है तो मैं आपके बोहोत काम आ सकती हूं..... ये सुनते ही काव्या ने, अभी की बात का गुस्सा यशस्वी पे निकल दिया…

तू क्यूं पड़ी है, उनके पीछे "एक तरफ तो दीदी–दीदी करती रहती है और दूसरी तरफ अपनी ही बहन के पति पर डोरे डालते हुए तुझे शर्म नही आती"

यशस्वी : दी !... ये क्या कह रही हो मेरे मन मैं जीजू के लिए ऐसा–वैसा कुछ नही है "मैं तो बस यही चाहती हू कि उनके जैसा ही मुझे भी कोई मिल जाए"

काव्या : उनके जैसा नहीं ....बल्कि तू तो ये चाहती है कि वो ही तुझे मिल जाए मैने देखा था मॉल में कैसे हाथ पकड़ रखा था तूने और जिस तरह से तू उनको देखती है….. आगे से देखा तो तेरी ये आंखे नोच लूंगी !!

यशस्वी (😄): अरे ! मेरे बहन तो अपने पति के लिए कुछ ज्यादा ही पॉसेसिव है.... "लेकिन दी ! मैं जीजू को आपसे क्यूं ही छीनूगी"

आपने कुछ ज्यादा ही सोच लिया, मैं सिर्फ उनको नही बल्कि आप दोनो को देखती हूं और रही बात मॉल की….. तो उन्होंने मेरी मदद की थी... वो मेरे हीरो है

आप ज्यादा मत सोचो ...... भला मैं अपने ही हीरो की जिंदगी में इंटरफेयर क्यूं करूंगी ? और वैसे भी मैं तो आपकी छोटी बहन हूं न, तो साली होने के नाते थोड़ी बोहोत छेड़–छाड़ कर भी लूंगी तो क्या ?

और काव्या के हाथो को अपने हाथो में पकड़ते हुए…..दी ! आपको मेरे ऊपर विश्वास तो है न, तभी वहां से एक लड़का गुजरा जिसे यशस्वी घूरने लगी……… काव्या उसे ऐसा करते देख

काव्या : तू क्या, सभी को ऐसे ही घूरती है ?.....

यशस्वी : "अरे, नही दी ! मैं तो बस उसकी बॉडी देख रही थी, हएए !!क्या फिटनेस है बंदे की……. दी ! मेरे रूम में न मैने इससे भी अच्छी बॉडी वाले मेल मॉडल्स की फोटोज लगा रखीं है”

काव्या(🤔) : तो इसका मतलब तुझे.... लडको से नहीं उनकी बॉडी से ऑब्सेशन है….

यशस्वी : हां तो ..... वैसे, जीजू ! की बॉडी भी बड़ी मस्त है…. ,(😊)

काव्या : ज्यादा मुस्कुरा मत और दोनो ही हंसने लगी 😄😆.....

काव्या (🤔) : वीर जी सही कह रहे थे, मेरा छोटा सा दिमाग सच में कुछ ज्यादा ही उल्टी सीधी बाते सोचता है और दोनो ही क्लास के लिए निकल गई …

👉क्लासेस खत्म होने के बाद तीनों ही बाहर आई, जहां पहली बार जानवी वीर को देखकर, लड़का तो सच में अच्छा है...... (वही दूर खड़े लकी ने भी पहली बार, वीर को देखा)..... आज की घटना का वीर को पता था लेकिन वो अभी के लिए सब नजरंदाज करता है क्योंकि काव्या ने उसे वार्निंग देकर छोड़ दिया था !!

यशस्वी : जीजू ! कही घूमाने चलो न.......

वीर ने काव्या की ओर देखा, तो वो… “हां ले चलो ना”.....

वो दोनो को "लेकव्यू" ले गया, जहां पानी के ऊपर से आती हवा जब-जब शरीर को छूती, सिहरन पैदा हो जाती है और जब नाक से अंदर जाती…. तो एक अजीब सी ताजगी का एहसास कराती…... वहा की हवा को महसूस करना बोहोत ही ज्यादा रोमांचक रहा तीनों ने वही सड़क किनारे लगे स्टाल्स से स्नैक्स लिया और एंजॉय करने लगे....

थोड़ी देर बाद वीर ने कहा, अब बताओ….. और कहां जाना है,,,,

यशस्वी : न्यू मार्केट….. तो वीर उन्हें वहा भी ले गया, जहां उन दोनो ने खूब सारी शॉपिंग की… (काव्या ने वीर के लिए भी कपड़े लिए और एक खूबसूरत सा ब्रेसलेट लेकर उसके हाथ में पहना दिया)

वीर ने, रिया को कॉल करके बता दिया, वो तीनो लेट हो जाएंगे तो चिंता न करे और रात का डिनर भी न बनाए......


✨और तीनों निकल पड़े रेस्टोरेंट की ओर –

रिया, यशस्वी के पापा को सब बताकर उन्हें घर पे डिनर के लिए इन्वाइट करती है….. और जब अशोक डिनर के लिए आया तो रंभा ने गेट खोला, अशोक तो बस उसे देखते ही रह ग.... “जी..जी मैं यशस्वी का पापा”…… रंभा ने उन्हें बैठने के लिए कहा….

अशोक (🤔) : "यही वो महिला है, जिसका गुणगान मेरी बेटी करती रहती है”

तभी खाना लग गया… तो, दूसरी ओर..... डिनर के बाद आइसक्रीम देते हुए….

वीर : घर में खा लेना.... "जल्दी बैठो, यशस्वी के पापा चिंता कर रहे होंगे "

जैसे ही यहां…. ये तीनों खाना खत्म करते है, बाहर डोरबेल बजी और जब रिया ने गेट खोला तो….. काव्या ,यशस्वी और वीर तीनों अंदर आ गए.... काव्या शॉपिंग बैग्स दूर रखते हुए रिया को आइसक्रीम पकड़ा देती है .... तभी

यशस्वी : अरे पापा ! आप .…. (वीर और काव्या ने उन्हें नमस्ते किया)....

अशोक की नजर जैसे ही काव्या पर पड़ी थोड़ी देर के लिए वो किसी की यादों में चला गया, खैर….. थोड़ी देर बातचीत के बाद उसने, सबसे विदा ली और यशस्वी के साथ घर चला गया..


✨छत पर :

“हां यही काम है और मुझे तुम्हारी जरूरत है”

लड़की : 10 लाख

वीर : ठीक है !

लड़की : ओके डन !!

||🤔अब ये नई लड़की कौन है ? और वो लड़का कौन था ??जिसे वीर ने काव्या का ध्यान रखने के लिए कहा था ||

खैर, वीर नीचे आया और बेडरूम पहुंचा, तो काव्या बाथरूम में थी…….

जैसे ही वो बाहर आई वीर ने उसे दीवार से लगाते हुए, “सुबह,,,, जबसे तुम्हें कॉलेज ड्रेस में देखा है, तबसे इसी पल का इंतेज़ार था”…..

ऊपर से ये नाईटी... बस..... अब और नहीं !!

काव्या को किस करने के साथ ही उसने नाइटी की डोरी खींच कर उसे अलग दिया..... वीर…”वोअह्ह्” !! काव्या अब उसके सामने ब्लैक ब्रा और पैंटी में थी…… “बोहोत खूबसूरत”….. उसके गोरे बदन पे ये काली ब्रा चार चांद लगा रही थी........ वीर ने घुटनो पर बैठ, सीधे ही अपना मुंह उसकी पेंटी पर रख दिया…. काव्या, उम्म्म... स्सस...करती हुई आहें भरने लगी……

वीर ने जब उसकी…..पेंटी पर किस करते हुए उसे उतारा तो काव्या ने फट से अपनी टांगे सिकोड़ ली…… पर वीर उसकी जांघें सहलाते हुए उन्हे अलग कर….. उसकी चूत चाटने लगा…

वहीं काव्या आउच.... अअह्ह्ह्ह... अम्म्म करते हुए उसके सिर को अपनी चूत पर जोर से दबाने लगी….. अअह्ह्ह.. अम्म..आईसास्स.... उम्म्म….. और थोड़ी ही देर में वीर की लार से उसकी चूत चमकने लगी…

अब वीर ने उसके गोरे बदन से ब्रा को अलग कर उसके बूब्स को चूसना चालू किया काव्या, अह्ह्ह्ह... अह्ह्ह्ह... आइस्स्स उसके सिर को अपने बूब्स पर दबाती....

वीर : कब्बू तुम्हारे बब्बू तो बोहोत छोटे है…

काव्या : आपको अच्छे नहीं लगे क्या…..

वीर : नहीं, बोहोत अच्छे लगे….. देखना मैं कुछ ही दिनों में इन्हें कैसे बड़ा करता हूं…. काव्या, हम्ममम…. तो कर दीजिए न…आह्ह्ह्ह् ….

वीर ने सिर पे हाथ रख…. उसे नीचे दबाया तो वो घुटनों पे आ गई और वीर के लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी…..


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जैसे ही वो थोड़ा चिकना हुआ, वीर उसका मुंह चोदने लगा...... काव्या अग्ग्घह..... अग्ग्घ.... अर्रर करती रही…. पर वीर तब तक नहीं रुका जब तक काव्या ने उसकी जांघ पर हाथ नहीं मारे…..

वीर ने लंड बाहर निकाला तो ….. काव्या के मुंह से, एक लार की डोरी जैसी संरचना बाहर झूल रही थी और वो तेजी से सांसे भरके खुद को नॉर्मल करने लगी....

जब वह शांत हुई, तो वीर ने उसे खड़ा किया और एक टांग को अपने हाथ में पकड़, उठा के,,,,,, लंड उसकी चूत में टिका दिया…..

काव्या, अह्ज्ज नहीं मैं गिर जाऊंगी.... पर वीर ने उसकी एक नही सुनी और अपने लंड को एक ही झटके में अंदर घुसेड़ दिया.....

काव्या अज्झ....अह्ह्ह.... थोड़ा....आआ आह्ह्ह्ह् धीरे पर वीर ने उसकी गर्दन पर अपने दूसरे हाथ की ग्रिप टाइट करते हुए एक और धक्का लगा दिया जिससे पूरा का पूरा लंड उसके अंदर चला गया..... काव्या, आह्ह्ह्ह् करके उसके कंधे पर अपने दांत गड़ा दी और थोड़ा रुकने को कहा…..

थोड़ी देर में जैसे ही काव्या का दर्द कम हुआ, वीर ने तेजी से धक्के लगाने शुरू किए


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काव्या अअह्ह्ह्ह....अम्ममम्म आह्ह और जज्ज जोर से ........ अह्ह्ह मज़ा आआ आह्ह्ह्ह रहा है.... आह्ह्ह्ह... अःह्ह्ह्ह... उम्मम्म.... आऊच..... ओ....बाबा ..... रे.. अःह्ह्ह..... हम्म्म आह्ह्ह्ह् प.... अबब्ब.. बेड पर....चलो.. न., अह्ह्ह्ह अब अअह्ह्ह्ह और खड़ा.... नन्नाही रहा जज्जज...ता ….आह्ह..

तो वीर ने उसे दोनों हाथों से उठाकर टेबल के सहारे लगा दिया और पीछे आते ही उसकी गांड पर चार–पांच थप्पड़ जड़ दिए.….. फिर पीठ पर दांत गड़ाते हुए, अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा !!

इससे काव्या काफी गरम हो गई और उससे डालने की रिक्वेस्ट करने लगी ….जिसके बाद घमासान चुदाई का एक दौर चला..... काव्या अब थक चुकी थी.... बस अब और नहीं.. आह्ह्ह्ह्….रुको...

वीर थोड़ी देर तो रुका रहा…... पर फिर उसके पिछवाड़े पे थप्पड़ मार टेबल पे झुका दिया और अपना लंड उसकी गांड़ पर सेट करते हुए एक जोरदार धक्का लगाया.... अभी भी काव्या की गांड बहुत टाइट थी इसलिए लंड केवल 2 इंच ही अंदर गया और काव्या अअह्ह्ह..... आह्ह्ह्ह् ..जोर से चिल्लाई

वीर ने आगे की तरफ झुकते हुए उसके कंधों को पकड़ फिर से एक जोरदार झटका दिया तो लंड 4 इंच और अंदर चला गया…..

काव्या अःह्ह्ह... न्नन नही बेइबी….बब्ब... बस कक्क...करो दर्द हो ...र्रार रहा है पर वीर का लंड अभी भी 2.5 इंच बाहर था, वह उसे उतने में ही अंदर बाहर करने लगा...


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काव्या अह्ह्ह्ह..... अह्ह्ह्ह....... अम्म्म….. आह्ह्ह्ह् वीर को लगा अब काव्या को मजा आने लगा है, इसलिए एक आखिरी जोरदार धक्का लगाकर पूरा का पूरा लंड काव्या के अंदर.... कर दिया…. वो बोहोत जोर से चिल्लाई अह्ह्ह्ह.... और अपने हाथों को टेबल पर पटकने लगी.….

वीर ने उसके बालो को पकड़ तेजी से धक्के लगाना शुरू किया....

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काव्या अह्ह्ह्ह ... अह्ह्ह अम्म आह्ह्ह्ह् ओन्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह् ..... धध्ध...धीरे ....धीरे…. आह्ह्ह्ह् अब वीर झड़ने के करीब था...

वही रंभा कमरे से बाहर पानी लेने आई तो उसे हल्की सिसकियों की आवाज सुनाई दी…… वो मुस्कुराते हुए ये बच्चे भी न……

यहां वीर झड़ने के करीब था, इसीलिए तेजी से धक्के लगाने लगा और झड़ने के बाद काव्या की पीठ पर गिरकर हांफने लगा .....जब दोनो थोड़ा शांत हुए तो वीर ने उसे लाकर बिस्तर पर लिटा दिया…

काव्या उससे चिपकती हुई “लव यू हबी”....& दोनो एक दूसरे को गले लगाकर सो गए

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✨ धन्यवाद !
 
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Sanket1025

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अब तक :


वीर सुबह सुबह जेसियन द्वारा भेजे गए ईमेल के बारे में ही सोच रहा था..




अब आगे :


वीर काव्या को ऐसा वातावरण देना चाहता था जिसमे वह बेफिक्र होके अपनी पढ़ाई कर सके लेकिन जेसियन द्वारा भेजे गए मेल ने उसे असमंजस में डाल दिया था


मेल से वीर को लकी की काफी सारी बाते पता चली, जिसमें ......उसकी अय्याशी जो वो लोगों से छिपाकर करता है और लड़कियों को फंसा कर उनको ब्लैकमेल कर दूसरी लड़कियों को भी अपने झांसे में कैसे लेता है सब था..


पर इसमें सबसे बड़ी चिंता की बात ये थी कि..... जानवी भी इसी चक्कर में फंस चुकी थी और अब वो काव्या को लकी के लिए सेट करना चाहती थी


वीर के मन में दो तरीके के विचार आ रहे थे.....या तो वो काव्या को सब कुछ सच बता दे या फिर लकी को हमेशा - हमेशा के लिए रास्ते से हटा दे


लेकिन परसों ही उसका इंटरव्यू भी था जिसे वह उतना सीरियस नहीं ले रहा था क्योंकि पहले ही वो 2 बार इंटरव्यू से बाहर हो चुका था,
अंत में वीर बीच का रास्ता निकालते हुए उसे सिक्रेटली प्रोटेक्ट करने का निर्णय लेता है


अभी वीर ख्यालों में ही खोया था.. कि काव्या नींद से जगती है, और उठते ही वीर के गालों पर मॉर्निग किस चिपका देती है
काव्या : मॉर्निंग .. हबी
वीर (रिटर्न किस करते हुए) : गुड मॉर्निंग वाइफी!!



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सुबह सुबह फ्रेश होने के बाद काव्या जल्दी से किचन में जाकर चाय बनाने लगती है... तभी वीर पीछे से आता है और काव्या को देखते हुए मन में
" अरे! मेरी बिल्ली तो पीछे से भी सेक्सी लगती है" और उसे पकड़ लेता है......
काव्या : छोड़ो !! कोई आ जाएगा
वीर : आ जाने दो

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काव्या : प्लीज़ न 🥺
वीर : नहीं, अभी मेरा मन नहीं भरा.... तभी किसी के आने की आहट होती है
रिया : अरे! बेटू तू यहां किचन में क्या कर रहा है?....बाहर बैठ, मैं वही चाय लेके आती हूं और भाभी मुझे तो कुछ भी बनाना नहीं आता इसीलिए आप सब सिखा देना ......चलिए मैं आपकी नाश्ता बनाने में आपकी मदद करती हूं !


थोड़ी देर बाद :


सभी नाश्ता कर चुके थे ...... वहीं काव्या तैयार हो रही थी कॉलेज के लिए और मन में सोचती है.... जानवी को मैंने अब तक नही बताया कि मैं अब हॉस्टल में नहीं रहूंगी ...ऊपर से मैंने तो उससे फोन पर भी लड़ाई कर ली थी पता नहीं आज कैसे रिएक्ट करेगी यही सब सोचते हुए वो तैयार हो जाती है



वही यशस्वी तैयार होके आ चुकी थी और आते है, जीजू!! क्या दीदी तैयार हो गई?
वीर : हां, बस आती ही होगी..
तभी काव्या नीचे आती है... और वीर उसे कॉलेज ड्रेस में देखते ही अपनी जगह पर खड़ा हो जाता है और उसकी नजरें तो काव्या से हट ही नहीं रही थी!!


यशस्वी (मन में) : वाओ! क्या सीन है?
तभी काव्या वीर का हाथ पकड़ लेती है और कहती है चले!....... फिर तीनों कार में बैठ कर कालेज के लिए निकल जाते है!!



एक्सीलेंस कॉलेज, भोपाल :


वीर, काव्या को बाहर ही छोड़कर ...उसे अंदर जाते हुए देखता है तभी यशस्वी कहती है दीदी!! जीजू की नज़रे तो आपसे हट ही नहीं रही ....देखो अभी तक इसी तरफ देख रहे है!
काव्या (ध्यान न देते हुए) : हम्म्म....
यशस्वी : दीदी, वैसे जीजू कितने अच्छे है न....सबकी मदद करते है!
काव्या (कुछ सोचते हुए) : नहीं बिलकुल नहीं, असल में तो वो बोहोत ही गुस्सैल, चिड़चिड़े और खडूस है !!...कभी कभी तो लगता है किस पगलेट के मत्थे बांध गई..
यशस्वी : लेकिन ऐसा लगता तो नही है
काव्या (मन में) : वो तो मुझे भी पता है.... लेकिन चुड़ैल तेरी नियत मुझे कुछ ठीक नही लगती!!


तभी यशस्वी अरे! दीदी कहां खो गई??
काव्या : हम्म्म.....क..कही नहीं...चलो चलते है! यशस्वी : दीदी ब्रेक में आप कैंटीन आ जाना और बाय बोलकर वो भी क्लास के लिए अपने रस्ते निकल जाती है



दूसरी तरफ :

वीर : समझ गए ना! भाभी का ध्यान रखना और कुछ भी जरूरत पड़े तो बता देना,वीर एक लड़के से कहता है........जो काव्या के साथ ही पढ़ता है और उसका बड़ा भाई वीर के अंडर काम करता है!!
लड़का : जी बड़े भैया....



वहीं कॉलेज के अंदर :



जानवी अरे! काव्या तू!!!!.... क्या हो गया था तुझे? इतने दिन हॉस्पिटल में क्यूं रहना पड़ा? अब "काव्या भी फोन पे हुई लड़ाई की बात भूलते हुए उसके गले लग जाती है".... और कहती है मैं ठीक हूं, और कुछ नही हुआ मुझे, अपना बता तू कैसी है?

जानवी : फर्स्ट क्लास, एकदम चकाचक
काव्या : वो तो दिख ही रहा है, कही कोई मिल 😉तो नही गया??
जानवी : अरे नही बाबा! मेरी ऐसी किस्मत कहां .....एक तू है जिसके पीछे लकी जैसा लड़का पड़ा है और तू उसे इग्नोर कर रही है..... पर सच कहूं तो लकी कहता नही है, लेकिन उसकी आंखो में मैंने तेरे लिए सच्चा प्यार देखा है!!


काव्या (चिल्लाते हुए) : जानवी !! मना किया न तुझे ...फिर भी समझती क्यूं नही मेरी शादी हो चुकी है!!
जानवी : 😁एक बार जरा पीछे तो देख..... काव्या जैसे ही पीछे देखती है "लकी स्वैग से एंट्री ले रहा था"

काव्या उसे नजरंदाज कर देती है और अब तो वो जानवी से भी नाराज हो चुकी थी इसीलिए चुपचाप अपनी क्लास में चली जाती है!!!



वहीं लकी मन में मुझे इग्नोर करके ...खुद को पता नही क्या समझती है, इसको तो इसकी औकात दिखाकर रहूंगा.... रांड बनूंगा साली को
सोनू : अरे! भाई,कब तक यूं ही बस देखते रहोगे? कभी तो आगे बढ़ो
लकी : ठीक कह रहा है बे.....अब थोड़ा छेड़ छाड़ करनी ही पड़ेगी ....साली बोहोत नखरे दिखाती है..


सोनू : नहीं भाई, कॉलेज के अंदर पंगा मत करना.......सभी जगह कैमरा है!!
लकी : सभी जगह नही है.. बे और वैसे भी मेरा कोई क्या ही उखाड़ लेगा..
सोनू : हां लेकिन फिर भी सम्हाल के
लकी : तू ज्यादा मत सोच भोसड़ी के.... प्यार से नही मान रही तो अब इसको दूसरी भाषा में समझाऊंगा!!


यहां जानवी भी खुन्नस लिए मन ही मन काव्या को गालियां दे रही थी और क्लास में जाती है... काव्या के पास बैठ कर उससे बात करने की कोशिश करती है लेकिन काव्या उसे कोई जवाब नही देती बस पेन से कॉपी को ही गोदे जा रही थी और अपना गुस्सा उस पर निकाल रही थी


जानवी : सॉरी काव्या!... लेकिन क्या तू सच में लकी जैसे लड़के को ऐसे ही जाने देगी, वो भी अपने उस हसबैंड के लिए..
काव्या (भड़कते हुए) : चुप कर तू! कुछ भी बके जा रही है... जब उन्हे जानती नहीं तो फालतू मत बोल, और लकी कौन लकी?? मैं तो उसे ठीक से जानती भी नही!



जानवी : लेकिन..
काव्या : अभी मेरी बात खत्म हो जाने दे...मैं अपने पति से बोहोत प्यार करती हूं और अगर किसी और का जिक्र भी मेरे सामने किया तो मुझसे बुरा कोई नही होगा



तो जानवी मन में गालियां बकते हुए, उससे माफी मांगने का नाटक करने लगती है....अब काव्या और जानवी थीं तो दोनो बेस्टफ्रेंड ही .....और हॉस्टल में रूममेट होने की वजह से दोनो एक दूसरे के काफी क्लोज भी थी
"इसी वजह से काव्या ज्यादा देर तक कैसे नाराज रह सकती थी?? इसीलिए वो उसे माफ कर देती है"


तभी क्लास में टीचर की एंट्री होती है और जब क्लास खत्म होती है तो काव्या जल्दी से कैंटीन के लिए निकल पड़ती है, तभी जानवी उसे रोकती है अरे! कहां चली?
काव्या : कैंटीन....और तेजी से जाने को होती है


जानवी सोच रही थी कि ये कैंटीन क्यूं जा रही है, इसने तो कभी कैंटीन में पैर तक नहीं रखा हम्म्म 🤔लगता है....अब पैसे आ गए है तो वो उसे रोक लेती है और साथ लेकर चलने को कहती है जैसे ही दोनों कैंटीन पहुंचती है उन्हें आवाज आती है!!


दीदी ....यहां यहां!! तो काव्या जाकर यशस्वी के साथ बैठ जाती है, अब जानवी और यशस्वी एक दूसरे को ही देखे जा रही थी कि ये है कौन.... तभी काव्या कहती है ये है मेरी बेस्टफ्रेंड जानवी और जानवी ये है अपनी जू ......यशस्वी तपाक से "मैं हूं इनकी छोटी बहन और आपकी जूनियर यशस्वी😊"


फिर यशस्वी सभी के लिए पेटिस ऑर्डर करती है …... तभी जानवी कहती है; काव्या! तुमने कभी "अपनी इस बहन" के बारे में क्यों नहीं बताया???तो काव्या उसे बताती है कि वो दोनो अच्छे नेबर्स है, और अब वो इसी के साथ ही कॉलेज आया करेगी


जानवी : म..मतलब अब तुम हॉस्टल में नहीं रहोगी
काव्या : नही..
जानवी : तुमने पहले क्यू नही बताया ... अब मेरा क्या होगा?...... (मन में "इससे तो मेरे सारे प्लान पर पानी फिर जाएगा)
काव्या : कोई बात नही जानू, वैसे भी हम कॉलेज में तो मिलते ही रहेंगे... लेकिन अगर मेरी ननद और माजी के होते हुए मैं हॉस्टल में रही तो उन्हें बुरा जरूर लगेगा !


फिर तीनों उठते और जैसे ही यशस्वी पे करने जाती है तो काव्या उसे रोक देती है और खुद ही बैग से फोन निकल कर पेमेंट कर देती है....तभी जानवी
काव्या ये..ये...आइफोन कहां से आया तुम्हारे पास ??
काव्या : मेरे🫣 हबी ने दिया है...और मन ही मन खुश हो जाती है


तीनों कैंटीन से बाहर आती है तभी यशस्वी को उसकी फ्रेंड मिल जाती है जो उसे प्रोजेक्ट के रिगार्डिंग बात करने के लिए अपने साथ ले जाती है.... वहीं काव्या, जानवी को लेकर पेड़ के नीचे बेंच पर बैठ जाती है...


जानवी : पहले तो तूने ये नही बताया कि अब तू हॉस्टल में नहीं रहेगी
और अब ये आईफोन .....सच सच बता!! और क्या क्या छुपा रखा है मुझसे??
काव्या : मैं यहां किसी को दिखावा करने थोड़ी ना आई थी.... जो उन्हे फोन दिखाते फिरती
जानवी : देख काव्या अगर तू शादी से खुश नहीं है तो जाने दे अभी तेरी पूरी जिंदगी बाकी है
काव्या : फिर वही बकवास


जानवी : इसमें बकवास क्या है? तेरा हसबैंड उम्र में तुझसे इतना बड़ा है कि तुझे तोफे दे दे कर खुश कर रहा है, मानती हूं के तेरे परिवार के पास पैसे नहीं है लेकिन तू सिर्फ पैसों के लिए उसके साथ क्यों है पता नहीं कैसा दिखता होगा ??


काव्या : बस जानवी🤯...... मैं कब से तेरे मुंह से बकवास सुने जा रही हूं, और तू क्या कह रही कैसा दिखता होगा?? तो ले... देख ले "काव्या अपने मोबाइल में वीर की फोटो दिखाती है"...... आगे से मेरे पति के बारे में इत्तू सा भी बुरा मत बोलना


मुझे तुझसे ऐसी उम्मीद नहीं थी, जानू... जब मुझे कोई परेशानी नहीं है तो क्यों? "वही बात बार बार कर रही है".... शुरू से ही हम दोनो रूममेट रहे और हर मुसीबत में एक दूसरे का साथ दिया है, मैंने तेरे अलावा किसी को दोस्त भी नही बनाया लेकिन आगे से अगर तूने मेरे हसबैंड के लिए कुछ भी गलत बोला तो सच कह रही हूं.... "कभी बात नही करूंगी" तभी उनके पास लकी आता है


लकी : अरे जानवी! यहां क्यों बैठी हो? चलो कैंटीन चलते है "ये सब वो काव्या की तरफ देख कर ही बोल रहा था"... तभी जानवी कहती है नही हम अभी ही तो वहा से आए है


लकी (जानवी को घूरते हुए): अरे चलो ना यार "एक काफी और पी लेना" ... तो जानवी को हां कहना ही पड़ता है.... और वो काव्या का हाथ पकड़ कर उसे उठाने लगती है और कहती है, चल अब गुस्सा थूक दे !!


काव्या : नही मुझे नही जाना और वो हाथ छुड़ाकर अपनी क्लास की ओर जाने लगती है लेकिन लकी उसका हाथ पकड़ लेता है और अपने पास खींचता है लेकिन काव्या भी जोर लगा देती है और अपना हाथ छुड़ाते हुए!!



काव्या : तुम अपनी हद में रहो और आइंदा मेरा हाथ पकड़ने की कोशिश की तो मुझसे बुरा कोई नही होगा और वो वहां से चली जाती है!!


लकी : साली रांड, एक बार बस एकबार तू मेरे नीचे आजा तेरे सारे नखरे उतार दूंगा और जानवी से कहता है..... लगता है तू ठीक से अपना काम नहीं कर रही


तो जानवी उसे बताती है कि "अब वो हॉस्टल में नही रहेगी और तो और उसका हसबैंड काफी पैसे वाला लगता है उसने उसे लेटेस्ट आईफोन दिया है"


लकी : बंद कर अपनी ये बकवास और तुझे क्या लगता है मैं आईफोन नही ले सकता .....

"अगर तू मेरा काम कर दे तो तुझे आईफोन भी ला दूंगा और तेरे सारे विडियोज भी डिलीट कर दूंगा" चल जा अब और सही से अपना काम कर


यहां वाशरूम में "काव्या मिरर में देखते हुए अपने हाथों को धो रही थी, तभी उसे याद याद आता है कि लकी ने उसका हाथ पकड़ लिया था तो वो उसे और भी ज्यादा घिस घिस कर धोने लगती है" और फिर अपनी क्लास के लिए निकल जाती है तभी उसे रास्ते में यशस्वी मिल जाती है


यशस्वी : दीदी क्या हुआ आपको?... आपने मुंह क्यों लटकाया हुआ है
काव्या : कुछ नहीं
यशस्वी : दीदी अगर कोई परेशानी हो तो आपकी छोटी बहन है न..... वैसे अगर जीजू की वजह से ऐसा है तो मैं आपके बोहोत काम आ सकती हूं.....ये सुनते ही "काव्या अभी की बात का गुस्सा यशस्वी पे निकल देती है और कहती है"


तू क्यूं पड़ी है वीर जी के पीछे "एक तरफ तो दीदी दीदी कहती है और दूसरी तरफ अपनी ही बहन के पति पर डोरे डालती है, तुझे शर्म नही आती"
यशस्वी : दीदी... ये क्या कह रही हो मेरे मन मैं जीजू के लिए ऐसा वैसा कुछ नही है "मैं तो बस यही चाहती हू कि उनके जैसा ही मुझे भी कोई मिल जाए"



काव्या🤯 : उनके जैसा नहीं ....बल्कि तू तो यही चाहती है की वो ही तुझे मिल जाए मैने मॉल में देखा था कैसे हाथ पकड़ा था तूने और जिस तरह से तू उनको देखती है अगर आगे से देखा तो तेरी ये आंखे नोच लूंगी!!


यशस्वी (हंसते हुए): अरे! मेरे बहन तो अपने पति को लेकर कुछ ज्यादा ही पॉसेसिव है.... "लेकिन दीदी मैं जीजू को आपसे क्यूं छीनूगी"
आपने कुछ ज्यादा ही सोच लिया, मैं सिर्फ उनको नही बल्कि आप दोनो को देखती हूं और मॉल में उन्होंने मेरी मदद की थी... तो वो मेरे हीरो है


आप ज्यादा मत सोचो ...... भला मैं अपने ही हीरो की जिंदगी बरबाद क्यूं करूंगी? और वैसे भी मैं तो आपकी छोटी बहन जैसी हूं न, तो साली होने के नाते थोड़ी बोहोत छेड़ छाड़ तो कर ही सकती हूं
यशस्वी, काव्या के हाथो को अपने हाथो में पकड़ते कहती है..दीदी आपको मेरे ऊपर विश्वास तो है न तभी वहां से एक लड़का गुजरता है जिसे यशस्वी घूरने लगती और काव्या उसे नोटिस कर लेती है


काव्या : तू क्या सभी को ऐसे ही घूरती है.....
तो यशस्वी कहती है "अरे नही दीदी मैं तो उसकी बॉडी देख रही थी हए!🫣 क्या फिटनेस है बंदे की, दीदी आपको नही पता मेरे रूम में कितने सारे मेल मॉडल्स की फोटोज लगी है"
तो काव्या इसका मतलब तुझे.... लडको से नहीं उनकी बॉडी से ऑब्सेशन है



यशस्वी : हां तो ..... और जीजू की बॉडी भी मस्त है और सोचते हुए मुस्कुरा देती है
काव्या : ज्यादा मुस्कुरा मत और दोनो ही हंसने लगती है.....और काव्या सोचती है वीर जी सही कह रहे थे मेरा छोटा सा दिमाग सच में उल्टी सीधी बाते सोचता है और दोनो ही क्लास के लिए निकल जाती है


क्लासेस खत्म होने के बाद तीनों ही बाहर आती जहां पहली बार जानवी वीर को देखती और सोचने लगती लड़का तो सच में अच्छा है ......वही दूर खड़ा लकी भी पहली बार वीर को देख रहा था .....
वीर को आज की घटना का भी पता था लेकिन वो अभी के लिए सब नजरंदाज कर देता है क्योंकि काव्या ने उसे वार्निंग देकर छोड़ दिया था!!


यशस्वी : जीजू! कही घूमाने ले चलो न.......
वीर काव्या की और देखता है तो वो कहती है हां ले चलो ना.....
वीर दोनो को लेकर पहुंचता "लेकव्यू" जहां पानी के ऊपर से हवा बहते हुए आती है और जब-जब वो शरीर को छूती है तो सिहरन सी पैदा हो जाती है और हवा जब नाक से अंदर जाती है तो ताजगी का एहसास कराती है... वहा की हवा को महसूस करना बोहोत ही ज्यादा रोमांचक था!


फिर तीनों वही सड़क किनारे लगे स्टाल्स में से स्नैक्स लेकर खाते हुए एंजॉय करते है....
थोड़ी देर बाद वीर कहता अब बताओ और कहा जाना है, तब यशस्वी कहती है न्यू मार्केट तो वीर उन्हें वहा ले जाता है और वो दोनो काफी सारी शॉपिंग करती है जिसमें काव्या वीर के लिए शर्ट लेती है और एक खूबसूरत सा ब्रेसलेट भी उसे पहना देती है


यहां वीर रिया को कॉल करके बता देता है कि वो तीनो लेट हो जाएंगे तो चिंता न करे और रात का डिनर भी वो बाहर करने वाले है...... और तीनों ही डिनर के लिए रेस्टोरेंट निकल जाते है


यहां रिया यशस्वी के पापा को सब बताती है और उन्हें घर पर डिनर के लिए इन्वाइट करती है जब अशोक डिनर के लिए आता है तो रंभा गेट खोलती है अशोक तो बस उसे देखते ही रह जाता है.... जी..जी मैं यशस्वी का पापा "रंभा उन्हें अंदर आकर बैठने को बोलती है"


यहां अशोक सोच रहा था कि "ये है वो महिला जिसका गुणगान मेरी बेटी करती रहती है और तभी खाना लग जाता है"
वही दूसरी ओर..... काव्या डिनर के बाद आइसक्रीम के लिए कहती है तो वीर उसे लाकर देता है और कहता है गाड़ी में ही खा लेना.... "चलो जल्दी बैठो यशस्वी के पापा चिंता कर रहे होंगे !!"



यहां ये तीनों खाना खत्म करते है तभी डोरबेल बजती है और जब रिया गेट खोलती है तो काव्या ,यशस्वी और वीर अंदर आ जाते है....
काव्या शॉपिंग बैग्स को दूर रखते हुए रिया को आइसक्रीम पकड़ती है .... तभी यशस्वी "अरे पापा आप यहां"...
वीर: नमस्ते अंकल.....और काव्या भी उन्हें नमस्ते करती है..
थोड़ी देर बातचीत के बाद अशोक उनसे विदा लेता है और वीर छत पर चला जाता है



वीर :.... हां यही काम है और मुझे तुम्हारी जरूरत है!!
लड़की : 10 लाख
वीर : ठीक है
लड़की : ओके डन!!
(अब ये नई लड़की कौन है?? और वो लड़का कौन था??जिसे वीर ने काव्या का ध्यान रखने के लिए कहा था सब आगे ...)


फिर वीर नीचे आता और बेडरूम में पहुंचता है तो काव्या बाथरूम में थी जैसे ही वो बाहर आती है, वीर उसे दीवार से लगा देता है और कहता है....सुबह, जब से तुम्हे कॉलेज ड्रेस में देखा है कंट्रोल किए हुए हूं, उपर से अब ये नाईटी...... बस..... अब और नहीं!!


वीर उसे जोरों से किस करने लगता है साथ ही नाइटी की डोरी खींचते हुए उसे खोल देता है ..... वीर जैसे ही काव्या के बूब्स को तेजी से दबाता है काव्या आआह्ह करके वीर को जोर से भींच लेती है जिससे वीर उसे और तेजी से किस करने लगता है और उसके गले पर छाती पर बोहोत सारे लव बाइट देता है !


फिर वीर जैसे ही पूरी नाईटी अलग करता है वोअह्ह्!! काव्या उसके सामने ब्लैक ब्रा और पैंटी में थी, बोहोत खूबसूरत उसके गोरे बदन पे ये काली ब्रा उसपर चार चांद लगा रही थी........वीर घुटनो पर बैठता है और सीधा अपना मुंह पेटी के ऊपर रख देता है; काव्या उम्म्म... स्सस...करती है, और वीर किस करते हुए पेंटी उतार देता है, काव्या तो अपनी टांगे सिकोड़ लेती है लेकिन वीर उसकी जांघों को सहलाते हुए उन्हे अलग करता है और चूत चाटने लगता है काव्या आउच.... अअह्ह्ह्ह... अम्म्म करते हुए उसके सिर को जोर से अपनी चूत पर दबाने लगती है अअह्ह्ह....आईसास्स.... उम्म्म थोड़ी ही देर में वीर की लार से उसकी चूत चमकने लगती है और वीर उठते हुए उसके गोरे बदन से ब्रा को अलग कर देता है और उसके बूब्स चूसने और काटने लगता है


काव्या अह्ह्ह्ह... अह्ह्ह्ह... आइस्स्स और उसके सिर को जोरों से अपने बूब्स पर दबाती है.... जब वीर उसके सिर पर हाथ रखते हुए उसे दबाता है तो वो नीचे बैठ जाती है और वीर के लंड को चूसने लगती है जैसे ही लंड थोड़ा सा चिकना होता है वीर उसके मुंह को ही चोदने लगता है..... काव्या अग्ग्घह..... अग्ग्घ.... अर्रर करती है और वीर तब तक नहीं रुकता जब तक काव्या उसकी जांघ पर हाथ नही मारने लगती



वीर जैसे ही लंड को बाहर निकलता काव्या के मुंह से एक लार की डोरी जैसी संरचना बाहर आती है और वो तेजी से सांस लेने लगती है....
जब वह शांत हो जाती है तो वीर उसे खड़ा करता है और उसकी एक टांग को अपने हाथ में उठा लेता है... काव्या अह्ज्ज मैं गिर जाऊंगी .... पर वीर उसकी एक नही सुनता और अपना लंड उसकी चूत पर लगा देता है फिर एक ही झटके में आधा लंड अंदर और..... काव्या अज्झ....अह्ह्ह... अज्जज... थोड़ा....आआ धीरे लेकिन वीर उसकी गर्दन पर अपने दूसरे हाथ की ग्रिप टाइट करते हुए एक और धक्का लगाता है तो उसका पूरा का पूरा लंड अंदर हो जाता है .....
काव्या उसके कंधे पर दांत गडा कर अपने आपको शांत करती है और उसे थोड़ा रुकने को कहती है



थोड़ी ही देर में वीर तेजी से धक्के लगाने लगता है और काव्या अअह्ह्ह्ह....अम्ममम्म और जज्ज जोर से ........ अह्ह्ह मज़ा आआ आह्ह्ह्ह रहा है.... आह्ह्ह्ह... अःह्ह्ह्ह... उम्मम्म.... आऊच..... ओ....बाबा ..... रे.. अःह्ह्ह..... हम्म्म प्लीज़.... बब्ब.. बेड पर....चलो..., अह्ह्ह्ह अब अअह्ह्ह्ह और खड़ा.... नन्नाही रहा जज्जज...ता



तो वीर उसे उठाकर टेबल के सहारे लगा देता है और उसके पीछे आते ही उसकी गांड पर दो चार थप्पड़ मारता है ....फिर उसकी पीठ पर अपने दांत गडा देता है और अपने लंड को पीछे से उसकी चूत पर रगड़ने लगता है और जब काव्या काफी गरम होके उसे डालने को कहती है तो एक और चुदाई का घमासान राउंड चलता है..... काव्या तो अब थक चुकी थी ....तो वो कहती है बस अब नहीं.... वीर थोड़ी देर रुकता है.... लेकिन फिर से उसकी गांड़ पर थप्पड़ मारते हुए उसे टेबल पर झुका देता है और अपना लंड काव्या की गांड पर सेट करते हुए एक धक्का लगाता है ....अभी भी काव्या की गांड का छेद काफी टाइट था इसलिए लंड केवल 2 इंच अंदर जाता है और काव्या अअह्ह्ह..... जोर से चिल्लाती है
वीर आगे की तरफ झुकते हुए उसके कंधों को पकड़ कर फिर से एक जोर का झटका देता है तो लंड 4 इंच और अंदर चला जाता




काव्या अःह्ह्ह... न्नन....नही बब्ब... बस कक्क...करो दर्द हो ...र्रार रहा है लेकिन अभी भी वीर का लंड 2.5 बाहर था लेकिन वह उतने से अंदर बाहर करने लगता है ... अब काव्या अह्ह्ह्ह..... अह्ह्ह्ह....... अम्म्म करने लगती है वीर जैसे ही देखता है काव्या को मजा आने लगा है तो एक आखिरी धक्का लगाता है और पूरा का पूरा लंड अंदर.... काव्या बोहोत जोर से चिल्लाती है अह्ह्ह्ह.... और अपने हाथों को टेबल पर पटकने लगती है....
वीर उसके बालो को पकड़ कर तेजी से धक्के लगाना शुरू करता है और काव्या अह्ह्ह्ह ... अह्ह्ह साथ ही उसे गांड पर थप्पड़ भी पड़ रहे थे जिससे वह और भी चिल्ला रही थी अह्ह्ह्ह..... धध्ध...धीरे ....धीरे
अब वीर झड़ने के करीब था...


वही रंभा कमरे के बाहर पानी लेने आई थी तो उसे हल्की सी सिसकी सुनाई देती है
तो वो मुस्कुराते हुए कहती है ये बच्चे भी न और अंदर चली जाती है.....


यहां वीर झड़ने के करीब था इसीलिए और तेजी से धक्के लगाता है और फिर उसकी पीठ पर गिरकर हांफने लगता है .....जब दोनो थोड़ा शांत होते है तो वीर उसे लाकर बिस्तर पर लिटा देता है


काव्या उससे चिपक जाती है और बोलती लव यू हबी....और दोनो एक दूसरे को गले लगाकर सो जाते है



Aage ki kahani jaanne ke liye bane rahiye
Thank you ❣️
Badiya update tha
 
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