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Looteraaa

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Badhiya update hai bhai, ab kahani ki parte dheere dheere khul rahi hai
Hnn... Kyunki story sare points cover krte huye apni ending ki or badh rhi h...
क्या बवाल चीज लिखें हो बे📝....

पड़ कर एक अलग सा ही नस्सा छा गया 😵‍💫

वीर और काव्या की स्टोरी थोड़ी हट के 🖋️ लिखी है आपने.

ऐसी कहानी📖 पहली बार कोई xforum पे लिख रहा है.

अब आगे देखना 👁️ है नानाजी और वीर का आमाना सामना कैसे होता है.

और इतने दिनों 🌞 के बाद श्रेया का वीर के पास आना इंट्रेस्टिंग है वो अब वीर को फिर से पाना चाहती है.

और वीर के साफ मना करने की वजह से उसे काव्या से 😡नफ़रत भी हो गई है
जो आगे चल कर काव्या के लिए मुसीबत खड़ी कर सकती है.

रम्भा जी और अशोक जी अपने ही काम मे लगे हुवे है, अब देखना 👁️ है उन की शादी को क्या वीर रिया अपनाते है या नहीं.

I am steel waiting for next update ✍️🩷🩷
Thanks for the detailed review... ❤️
 

vihan27

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Ab update bhi dede yr bhai
 
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Looteraaa

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Update 20




अब तक…


रात, वीर काव्या के सोने के बाद घर से बाहर के लिए निकल गया…


अब आगे…


वीर के इतनी रात में... बाहर जाने की वजह वो ईमेल था जो उसे कल रात रिसीव हुआ…. एक्स ने उसमें मुख्यतः 2 बातों का जिक्र किया था…

१. शैडो वॉरियर की लगातार हो रही मौतें
२. एमएलए नाना का अगला मूव


✨रात 3 बजे :


वीर, नाना के बंगले के बाहर था…. जैसे ही उसे एक्स की तरफ से हरी झंडी/सिग्नल मिला वो दीवार फांदकर अंदर चला गया…. (सभी सीसीटीवी इस समय, हैकर एक्स के कंट्रोल में थे)…

साइलेंट वाकिंग स्किल का यूज़ कर वहां मौजूद गार्ड्स को चकमा देते हुए वीर दीवार के पास जा पहुंचा…. (नाना का कमरा दूसरे फ्लोर पर था)…

वहां मौजूद गार्ड्स हमेशा की तरह बेफिक्र राउंड लगा रहे थे… उन्हें नहीं पता था। आज उनका सतर्क न रहना.... उनकी कितनी बड़ी लापरवाही है !!


घर की एक भी खिड़की खुली... नहीं दिख रही थी, इसलिए वीर अपने टूल्स का उपयोग कर दीवार के सहारे छत पर चला गया… (देख तो वहां का दरवाजा भी अंदर से लॉक था)…

बिना शोर किसी के घर में दाखिल होना….. आसान काम नहीं....


रस्सी बांधकर वीर ने छत से नीचे लटकाई और खिड़की के पास पहुंच गया…क्योंकि स्लाइडिंग विंडो खोलना उसके लिए बाएं हाथ का खेल था..

पर जब उसने विंडो को नजदीक से देखा तो अंदर की तरफ से उसमें ग्रिल लगी हुई थी...

मामला मुश्किल होता जा रहा था…. कि उसे सीढ़ियों पर किसी के चढ़ने की आवाज आई, शायद ऊपर ही छत पर कोई आ रहा था… (वीर वहीं एक... अंधेरे कोने में छिप गया)…

थोड़ी देर बाद उसे हाथ में सिगरेट लिए एक साया नजर आया उस साये पर जैसे ही चांद की रोशनी पड़ी वो स्पष्ट नज़र आने लगा… (ये लकी के बाप राजेश था)…

खैर, वीर मौका पाकर वहां से नीचे चला गया और अपने शांत कदमों का उपयोग कर नाना के कमरे के तक जा पहुंचा...

वहां उसने मास्टर की 🗝️ का उपयोग किया और कमरे के अंदर घुस गया… नाना गहरी नींद में सो रहा था…

वीर के उसके गले पर चाकू और मुंह पर हाथ रखते ही वो हड़बड़ा के उठ गया….

वीर : श्श्श्श... चिल्लाया तो ये चाकू तेरे अंदर डाल दूंगा… (नाना ने आँखें झपकाकर उसे सहमति दी और वीर ने अपना हाथ.... उसके मुंह से हटा लिया)

नाना : क.. कौन हो तुम !!

वीर : तेरी मौत.... (गैंग के होते हुए नाना ने खुद…. कभी रिस्क नहीं लिया इसलिए उसकी आंखों में खौफ का नजर आना लाज़मी था और ये शायद पहली बार था जब नाना... मौत को अपने इतने करीब देख रहा था )

वीर : तुझे पता है… “तू अब तक जिंदा किसलिए था"..???

नाना “ना” में सिर हिलाता है…

वीर : मै बताता हूं… तू जिंदा इसलिए था, क्योंकि तूने अब तक गलत जगह हाथ नहीं डाला था…

नाना अपना हाथ ड्रॉअर की तरफ... बढ़ा ही रहा था कि वीर ने चाकू उसकी हथेली के आर पार कर दिया.... साथ ही उसका मुंह इतनी जोर से दबाया कि चीख उसके गले में ही घुटके रह गई….

वीर (आँख दिखाते हुए) : “बात कर रहा हूं न”… 🤨🤨 (इस रौबदार आवाज से... नाना की सिट्टी पिट्टी गुल हो गई)

वीर : “चिंता मत कर मैं तुझे जान से नहीं मारूंगा”.... (ये सब वो नाना के गाल को थपथपाते हुए बोल रहा था जिससे उसके मन को थोड़ी शांति मिली)…

“पर तू मौत से बचा है, सजा से नहीं” ~ (शांति भंग) और नाना एक बार फिर सहम गया…

वीर : “तूने ताकत के दम पर न जाने कितनी जिंदगियां बर्बाद की है, न जाने कितने घर उजाड़े है…

"आज हिसाब होगा… सबका हिसाब होगा"..

नाना : पर मैंने….… तुम्हारा तो....कुछ नहीं बिगाड़ा ??

वीर : मै कोई भगवान नहीं, जो किसी को उसके कर्मों की सजा देता फिरूं….

(जब से वीर ने लोगों को… मारना बंद किया है, वो “वजह” जरूर बताता है ताकि…. सामने वाला हर पल पश्चाताप की अग्नि में घुट घुटकर जिये)

“तू जिन दो लड़कियों को उठवाने की सोच रहा है, उनमें से एक... मेरी धर्मपत्नी है । तेरे पिल्ले ने जो किया, उसकी सजा उसे मिल चुकी है, अब तेरी बारी है….. खच्च"

वीर ने नाना के मुंह में कपड़ा ठूंसकर उसे दोनों हाथों पैरों से अपाहिज बना दिया और आखिरी कट…… गले में दिया, जिससे आगे भी कोई आवाज न हो

और वो कट इस तरह था जिसे समय पर ट्रीटमेंट न मिले ...तो बन्दा परमानेंटली म्यूट…

नाना का काम निपटाते ही वीर… “जिस रास्ते से आया था उसी रास्ते वापिस चला गया”…



✨ कुछ देर बाद..



सुबह, जैसे ही नाना की बेटी “सुनीता” ने…. अपने प्यारे पापा के रूम का दरवाजा खोला, उसके मुंह से भयानक चीख निकली… और वो बिलख–बिलख कर रोने लगी…

उसकी आवाज सुनकर राजेश, साक्षी और घर के सभी नौकर... उसी ओर भागे…

सफेद बेडशीट, खून से पूरी तरह रंगी हुई थी… राजेश ने नाना की सांसे चेक की.... तो वो अभी भी चल रही थी…

उसने देर न करते हुए पुलिस को कॉल कर घटना की जानकारी दी…

और बस ही थोड़ी देर में “पुलिस और एंबुलेंस” दोनों वहां थी…

नाना को तुरंत.. हॉस्पिटल के लिए रवाना किया गया वहीं पुलिस घटनास्थल की जांच में लग गई, फोटो लिए गए, संदिग्ध वस्तुओं से फिंगरप्रिंट उठाए गए…

घर के सभी सदस्यों और नौकरों आदि से पूंछताछ का ये सिलसिला अभी चल ही रहा था कि…. सीन में एंट्री हुई..डीएसपी की

उसके सबोर्डिनेट ने उसे घटना जानकारी दी... जिससे उसका दिमाग हिल गया… "क्लियर क्लियर… ये किलर नंबर १ का काम है"…

डीएसपी मन ही मन खीझते हुए… किलर नंबर १ तुझे तो मैं पकड़ के ही रहूंगा…


✨ हॉस्पिटल में :


सुनीता रो रही थी, राजेश उसे शांत करा रहा था वहीं साक्षी, उन दोनों से दूर खामोश बैठी थी… थोड़ी देर बाद डॉक्टर्स ने क्लियर किया ये किलर नम्बर १ का ही काम है….

"डायमंड कट टेक्नीक और K~१ का निशान…. इस बार किसी तरह का कोई डाउट नहीं"..

डॉक्टर : “एमएलए सर” कोमा में है… कब ठीक होंगे… कुछ कह नहीं सकते… और उनका वोकल कोड बुरी तरह डैमेज है, तो वो अब कभी बोल नहीं पाएंगे…

ये सुनते ही सुनीता.... और जोर–जोर से रोने लगी..


✨ वीर के घर :


नाना के यहां से आते ही वीर चुपचाप.... वापिस से सो गया… वहीं काव्या हमेशा की तरह सुबह उठते ही तैयार हुई और रिया के साथ नाश्ता बनाने में लग गई…

सभी ने साथ नाश्ता किया पर वीर सोया रहा पूछने पर काव्या ने बताया, आज वो देर से जागेगा !!

खैर, रंभा नाश्ते के तुरंत बाद ही अस्पताल के लिए निकल गई…. वहीं काव्या और रिया आपस में बैठी बातें करने लगी..

रिया : भाभी, भाई को जगाया नहीं… आज

काव्या : दी, मैंने आवाज दी थी.... पर शायद वो और सोना चाहते थे !!

रिया: तो आप, भैया से इतना काम ही क्यूं कराती हो ???

काव्या : मैंने, कब उनसे काम कराया (जल्दबाजी में वो ये कह तो गई, लेकिन रिया के कहने का मतलब उसे तुरंत समझ आ गया, और वो शर्मा गई )

रिया, काव्या से यहां तक की वीर से भी…. उम्र में बड़ी थी इसलिए काव्या उससे कुछ ऐसा–वैसा कहने से झिझकती थी, शायद यही कारण था कि वो अक्सर रिया के सामने द्विअर्थी बात के दूसरे मतलब की तरफ ध्यान नहीं दे पाती थी….

खैर, थोड़ी देर गपशप के बाद काव्या… कॉलेज के लिए रेडी होने कमरे में चली गई…


✨ अस्पताल..


रंभा आज जल्दबाजी में घर से अशोक के साथ आई थी, उसने फटाफट मरीजों का खाना बनाया और अस्पताल से बाहर निकल गई….

अशोक जिसने आज सारा इंतेज़ाम कर रखा था..... बस, रंभा के बाहर आने का वेट कर रहा था…

तभी रंभा आई और सीधा कार में बैठ गई..
अशोक : जान... सारा काम ओके है.... चलें ( आज उसने इसी के लिए लीव ली थी)
रंभा : अशोक जी !! शादी बहुत बड़ा कदम है, आपको नहीं लगता हमें बच्चों से बिना पूछे आगे बढ़ना चाहिए…

अशोक : फिर वही बात… मुझपे भरोसा नहीं क्या तुम्हें... रंभा ??

रंभा : भरोसा ही तो यहां तक लाया है, अशोक जी !!

अशोक : तो फिर तुम्हें उसी भरोसे का वास्ता… रंभा, “ ज़रा अपनी आँखें बंद कर सोचो क्या तुम्हें इस मिलन की जल्दी नहीं”


आँख बंद करते ही, रंभा को रात का... वो मंजर नजर आया... जिसमें वो कामग्नि जल रही थी....

थोड़ी देर बाद जैसे ही उसने अपनी आँखें खोली अशोक ने उसको चूम लिया…

अशोक : मुझे पता है, तुम्हारा जवाब, पर मैं इन लबों से वो बात सुनना चाहता हूं !!

रंभा (शर्माते हुए) : जो आपका समझ रहे हो.... बस वहीं जवाब है… चलिए शादी कर लेते है!!

अशोक : मैने सब प्लान कर रखा है… चलो मैं पहले तुम्हे ब्यूटी पार्लर छोड़ दूं….

रंभा को ब्यूटीपार्लर छोड़ने के बाद अशोक ने पंडित और कैमरामैन को फोन लगाकर आने की टाइमिंग बता दी… और खुद तैयार होने लग गया


✨ घर पर :


काव्या तैयार हो चुकी थी…. तभी उसे यशस्वी की आवाज आई..

यशस्वी : दीईई !! तैयार हुई या नहीं..

काव्या : आ रही हूं, बाबा…. बस 2 मिनिट (वीर जो अभी अभी नहा कर आया था… काव्या उसके गाल को चूमकर बाय करते हुए बाहर निकल गई)

यशस्वी : दी !! आज जीजू नहीं चल रहे क्या छोड़ने ??

काव्या : नहीं, आज वो लेट उठे है…

यशस्वी : ठीक है... पर स्कूटी आज आप चलाओगे…. बोहोत हो गई प्रैक्टिस…

काव्या मना करती रही, पर यशस्वी के आगे उसकी कहां ही चलनी थी… और दोनों निकल पड़ी कॉलेज के लिए…

रास्ते में….

काव्या के पहुंचते ही सिग्नल🚦 खुल गया... इसलिए उसने स्पीड कम नहीं की…. तभी एक बाइक के बगल से निकलते वक्त उसकी हल्की टक्कर से... उस बाइक का मिरर टूट गया….

यशस्वी (धीरे से) : दीदी, भगाओ !! (पर काव्या ने गाड़ी साइड में लगा दी)

काव्या : अंकल, मै… मै अभी अपने हसबैंड को कॉल करती हूं वो आपको इसके.. पैसे दे देंगे (उसकी आवाज थरथरा रही थी वो घबराई हुई सी रोती आवाज में बोली)

आदमी : कोई बात नहीं… बेटा तुम लेट हो रही होगी… जाओ !!

काव्या : थैंक यूं अंकल… आप नंबर दे दो, मैं उनको आपके पास भेज दूंगी !!….(और उस आदमी का नंबर लेकर काव्या और यशस्वी कॉलेज के लिए निकल पड़ी)


✨ नाना के घर :


राजेश और साक्षी साथ घर लौटे पर सुनीता वहीं अपने पिता के पास हॉस्पिटल में रुक गई…

नाना का कमरा पुलिस ने सील कर दिया था… और जांच चल रही थी !!

डीएसपी : सर ! हॉस्पिटल से… आपको पता चल ही गया होगा ये किलर नंबर १ का काम है… पर आप चिंता मत किजिए, मै उसे जल्द ही पकड़ लूंगा !!

राजेश : कोई नयी बात करो, यार... सच तो ये है…वो कैसा दिखता है, तुम आज तक ये भी नहीं पता लगा पाए… ऊपर से इस घटना की वजह से अस्पताल ने उसे एक नया नाम और दे दिया.... “साइलेंट किलर”

डीएसपी (निराश) : सही कहा सर… पिछले केस की वजह हम उसके जेंडर को लेकर तक कन्फ्यूज है !!…. हर बार कुछ नया ही सामने आता है.... "बट डोंट वरी सर आई विल गिव माई 100%"

||इस डीएसपी के अंडर किलर नंबर १ ने किसी की जान नहीं ली… बस यही कारण है, ऊपर से प्रेशर नहीं आया…… पर इस बार अटैक... ऑपोजिशन पार्टी के.... एमएलए पर हुआ है, इसलिए.... डीएसपी थोड़ा टेंशन में है||


✨ दूसरी तरफ :


अशोक और रंभा ने शादी कर ली थी… अब अशोक उसे एक नई जगह ले जा रहा था !!

रंभा : ये… ये किसका घर है !!

अशोक : किसका नहीं हमारा… कल ही खरीदा है !!

रंभा : इसकी… क्या जरूरत थी !!

अशोक : मैं अपनी पत्नी को किराए के घर में थोड़ी रखूंगा… वैसे ये यशस्वी की पसंद है कुछ दिनों बाद लेने वाला था…. सो कल ही ले लिया !!


विधिपूर्वक अशोक ने लौटे में चावल रखकर… रंभा से गृहप्रवेश करवाया

“लाल जोड़े में वो बहुत सुंदर लग रही थी ”…. भले ही ये शादी आनन फानन में हुई लेकिन दोनों जितना ज्यादा से ज्यादा कर सकते....उन्होंने किया !!


थोड़ी देर बाद ….


दूध का गिलास लिए, रंभा... बेड के बीचों बीच बैठी हुई थी….

अशोक : तो तैयार हो रंभा रानी, जिंदगी की नई शुरुआत के लिए…. (उसने हां में सिर हिला दिया)

अशोक घूंघट हटाते ही रंभा के माथे को चूमने वाला था कि उसने उसे.... रोक दिया !!

अशोक : क्या हुआ ???

रंभा : मुंह दिखाई तो दो…. सुहागरात पर मुंह दिखाई देते है पत्नी को, क्या आप मेरे लिए कुछ नहीं लाए ??

अशोक (मन में ) : “अरे ! ये कैसे मिस हो गया”😟


रंभा का मुंह लटकने ही वाला था... कि उसे याद आया.... ये घर उसने उसी के नाम ही तो लिया है, ड्रॉअर से सर्टिफेट निकालकर रंभा को थामते हुए..

अशोक : ये घर मैने तुम्हारे नाम पर ही लिया है, वैसे ये सुहागरात नहीं सुहागदिन है !! जिस दिन सुहागरात होगी न रानी, उस दिन तुम्हे ग्रैंड गिफ्ट दूंगा... "वैसे रानी तुम्हे पसंद तो आई न ये मुंह दिखाई"

रंभा : बहुत पसंद आई🙂🙂..... थैंक यू !!

अशोक : पति को कैसा थैंक यू जान…

रंभा (इमोशनल) : अभी रेंट पर रहते है… उसके पहले बस्ती में झुग्गी ही थी जिसे मैं खुद का घर कहती थी… (और उसकी आंखों में आंसू आ गए)

अशोक : अरे ! अरे ! ऐसे मौके पर रोते नहीं…

रंभा : ज..जी (और उसने दूध का गिलास अशोक की तरफ बढ़ा दिया)

अशोक : अब हमारे पास खुद का घर है.... मेरी जान... (और उसने आधा पीकर दूध का गिलास रंभा को पकड़ा दिया)


फिर जैसे ही रंभा ने दूध खत्म किया अशोक ने उसके चेहरे को दोनों हाथों के बीच थाम लिया… मेरी जान रम्भा….”क्या तुम... तैयार हो”


दोनों एक दूसरे की आंखों में देखते हुए करीब आने लगे… रंभा के सुर्ख लाल होंठो से आती गर्म सांसे अशोक के चेहरे पर पड़ रही थी..


उसने रंभा के लबों पर अपने लब रख दिए और धीरे–धीरे उन्हें चूमने लगा... ये उनका पहला किस नहीं था लेकिन आज इसमें कुछ अलग बात थी !!

तभी रंभा ने अपने होंठों को थोड़ा सा खोल कर थोड़ा सा स्थान दिया… जिससे अशोक उसके होंठो पे लगे लिपस्टिक के फ्लेवर को और भी अच्छे से एंजॉय करने लगा...


आह्ह्ह… रंभा मेरी जान


दोनों किस के दौरान एक दूसरे के बदन से कपड़े अलग कर चुके थे… तभी अशोक ने रंभा को पीछे की ओर धकेल दिया.... और फिर से किस करने लगा…

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“आह्ह्ह रंभा मेरी जान… बहुत प्यार करूंगा तुझे”… उम्मम....श्श्श...

इस दौरान रंभा उसके बालों को सहला रही थी तभी अशोक ने उसकी कमर को ज़ोर से दबा दिया !!

रंभा : आह्ह्ह पतिदेव !!…. दर्द हो रहा है…

अशोक : अभी तुझे असली दर्द दिया कहां है मेरी रानी.….चल अब इस मूसल को तैयार कर …. रंभा समझ गई थी उसे आगे क्या करना है…

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अशोक : आह्ह्ह ऐसे ही चूस….क्या चूसती है तू रंभा...शश्शश... क्या गरम मुंह है तेरा, मेरी रानी आह्ह्ह…. आह्ह्ह , मेरी जान… आह्ह्ह रंभा

अशोक के हाथ रंभा के सिर को सहलाते सहलाते कब उसे दबाने लग गए उसे पता ही नहीं चला…. रंभा लंड.... मुंह से निकलकर ख्वाक् ख्वाककर खांसने लगी…

रंभा : मार ही डालोगे क्या !!

अशोक : अरे ! नहीं मेरी जान, तू इतना अच्छा चूसती है कि मेरा खुद पर से कंट्रोल छूट गया“... चल अब लेट जा... मै तुझे खुश करता हूं…

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रंभा अपनी आँखें बंद कर फुल एंजॉय करने लगी उसे बहुत मजा आ रह था.... वो अशोक के सिर को नीचे की तरफ अपनी चूत पर दबाती और मादक सिसकारियां भरती...

लगभग 10 मिनिट तक अशोक उसकी चूत चाटता रहा और फिर अचानक से उठ गया

….रानी अब वक्त आ गया है… देखते हैं …. “पहले तेरा खेत जूतता है या मेरा बेल थकता है”

उसने रंभा की टांगे चौड़ी की और उनके बीच आकर अपना लंड... उसकी चूत पर मारने लगा…

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रंभा वासना के चरम पर थी… आह्ह्ह अशोक जी... मत तड़पाइए….. आह्ह्ह अब डाल भी दीजिए… आह्ह्ह अशोक जल्दी... (पर वो उसे... अभी और तड़पाना चाहता था)…

अशोक : रानी बताओ न क्या डालना है….और कहां डालना है...

रंभा इस खेल से अच्छी तरह परिचित थी इसीलिए वो फटाक से बोली…. आह अपना लंड मेरी चूत में घुसाइये स्वामी… आह्ह्ह

अशोक ने भी अब और देर नहीं की रंभा के लबों को अपने लबों में भरकर एक ही झटके में पूरा 7 इंच अंदर घुसा दिया…

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आह्ह्ह.. रंभा जोर से चीखना चाहती पर उसकी वह चीख अशोक के मुंह में घुट कर रह गई…..

वहीं अशोक ने अब तेजी धक्के लगाने शुरू कर दिए…

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आह्ह्ह… आह..अशोक जी…. आह्ह्ह अम्म ऐसे ही…उम्मम.. आह्ह्ह... आह्ह्ह

इसके पहले की अशोक... रंभा को उसके चरम तक पहुंचा पाता उसका बैल थक गया…और रंभा के ऊपर से उतर गया..

रंभा ने अशोक को यूं उदास लेटते देखा तो उससे रहा नहीं गया (और उसने उसे गले से लगा लिया)… कोई बात नहीं जी… बहुत दिन बाद किया, एक्साइटमेंट में हो जाता है...

अशोक : वो बात नहीं है जान…. दरअसल मुझे गाली दे देकर…सेक्स करने की आदत है… और जिसने ये आदत लगवाई थी वो तो अपने यार के साथ भाग गई…

रंभा : तो अब आप मुझे गाली दे सकते हो जी… मैने कब मना किया है... वैसे भी मैं अब पूरी तरह से आपकी हो चुकी हूं !!

अशोक : पर रंभा…

रंभा : कोई पर वर नहीं… धीरे धीरे कंट्रोल करना, आदत खुद ब खुद चली जाएगी…


अशोक जनता था ये आदत जाएगी नहीं उल्टा उसे और लग जाएगी…

कुछ देर, बातचीत के बाद... जब दोनों रेडी हुए, तो रंभा ने अशोक से कहा बहुत लेट हो गया ना एक काम करो मुझे अस्पताल छोड़ दो….. अब शाम का खाना बनाने के बाद ही घर जाऊंगी..

अशोक : पर अभी तो दोपहर के 2 बजे है अभी से वहां जाकर क्या करोगी… “एक काम करते हैं, खाना ऑर्डर कर लेते है”…. शाम को घर में कह देना… अस्पताल में फूड इंस्पेक्शन करने वाले आने थे... इसीलिए पूरा दिन लग गया..

रंभा : ठीक है, अशोक जी..


✨ घर :


वीर सुबह नहाने के बाद से कही नहीं गया…. दिनभर लैपटॉप पर काम करता रहा… उसके मन में अभी भी ये सवाल तांडव मचा रहा था…. आखिर कौन… कौन हो सकता है जो शैडो वॉरियर की जान ले रहा है…

तभी उसके रूम का दरवाजा ओपन हुआ… और काव्या अंदर आई…

वीर ने एक नज़र उसकी तरफ देखा और फिर से काम पे लग गया…

काव्या : सुनो... सुनो ना

वीर : हूं… (उसका ध्यान काम पर था)

वो...👉👈 वो मैने गलती से…. एक अंकल की बाइक के साइड मिरर को टक्कर मार दी थी !

वीर : हम्मम🙂.....

🙄 १ मिनट "क्यायाया"😨 !! “तुम्हे कही चोट तो नहीं आई”... (और वो काव्या को यहां–वहां देखने लगा)..
काव्या : अरे बाबा मुझे नहीं आई कहीं चोट… आप बस इस नंबर पर अंकल से बात करके उनका मिरर सही कराने... चले जाओ...

वीर : ठीक है😕…. चला जाऊंगा !!

काव्या उसके हाथ को थामकर… (मासूम चेहरा अटैक).... "अभी जाओ ना"…🥺🥺

वीर : जा रहा हूं… मेरी मां…जा रहा हूं
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धन्यवाद ✨
 
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अब तक…


रात, वीर काव्या के सोने के बाद घर से बाहर के लिए निकल गया…


अब आगे…


वीर के इतनी रात में... बाहर जाने की वजह वो ईमेल था जो उसे कल रात रिसीव हुआ…. एक्स ने उसमें मुख्यतः 2 बातों का जिक्र किया था…

१. शैडो वॉरियर की लगातार हो रही मौतें
२. एमएलए नाना का अगला मूव


✨रात 3 बजे :


वीर, नाना के बंगले के बाहर था…. जैसे ही उसे एक्स की तरफ से हरी झंडी/सिग्नल मिला वो दीवार फांदकर अंदर चला गया…. (सभी सीसीटीवी इस समय, हैकर एक्स के कंट्रोल में थे)…

साइलेंट वाकिंग स्किल का यूज़ कर वहां मौजूद गार्ड्स को चकमा देते हुए वीर दीवार के पास जा पहुंचा…. (नाना का कमरा दूसरे फ्लोर पर था)…

वहां मौजूद गार्ड्स हमेशा की तरह बेफिक्र राउंड लगा रहे थे… उन्हें नहीं पता था। आज उनका सतर्क न रहना.... उनकी कितनी बड़ी लापरवाही है !!


घर की एक भी खिड़की खुली... नहीं दिख रही थी, इसलिए वीर अपने टूल्स का उपयोग कर दीवार के सहारे छत पर चला गया… (देख तो वहां का दरवाजा भी अंदर से लॉक था)…

बिना शोर किसी के घर में दाखिल होना….. आसान काम नहीं....


रस्सी बांधकर वीर ने छत से नीचे लटकाई और खिड़की के पास पहुंच गया…क्योंकि स्लाइडिंग विंडो खोलना उसके लिए बाएं हाथ का खेल था..

पर जब उसने विंडो को नजदीक से देखा तो अंदर की तरफ से उसमें ग्रिल लगी हुई थी...

मामला मुश्किल होता जा रहा था…. कि उसे सीढ़ियों पर किसी के चढ़ने की आवाज आई, शायद ऊपर ही छत पर कोई आ रहा था… (वीर वहीं एक... अंधेरे कोने में छिप गया)…

थोड़ी देर बाद उसे हाथ में सिगरेट लिए एक साया नजर आया उस साये पर जैसे ही चांद की रोशनी पड़ी वो स्पष्ट नज़र आने लगा… (ये लकी के बाप राजेश था)…

खैर, वीर मौका पाकर वहां से नीचे चला गया और अपने शांत कदमों का उपयोग कर नाना के कमरे के तक जा पहुंचा...

वहां उसने मास्टर की 🗝️ का उपयोग किया और कमरे के अंदर घुस गया… नाना गहरी नींद में सो रहा था…

वीर के उसके गले पर चाकू और मुंह पर हाथ रखते ही वो हड़बड़ा के उठ गया….

वीर : श्श्श्श... चिल्लाया तो ये चाकू तेरे अंदर डाल दूंगा… (नाना ने आँखें झपकाकर उसे सहमति दी और वीर ने अपना हाथ.... उसके मुंह से हटा लिया)

नाना : क.. कौन हो तुम !!

वीर : तेरी मौत.... (गैंग के होते हुए नाना ने खुद…. कभी रिस्क नहीं लिया इसलिए उसकी आंखों में खौफ का नजर आना लाज़मी था और ये शायद पहली बार था जब नाना... मौत को अपने इतने करीब देख रहा था )

वीर : तुझे पता है… “तू अब तक जिंदा किसलिए था"..???

नाना “ना” में सिर हिलाता है…

वीर : मै बताता हूं… तू जिंदा इसलिए था, क्योंकि तूने अब तक गलत जगह हाथ नहीं डाला था…

नाना अपना हाथ ड्रॉअर की तरफ... बढ़ा ही रहा था कि वीर ने चाकू उसकी हथेली के आर पार कर दिया.... साथ ही उसका मुंह इतनी जोर से दबाया कि चीख उसके गले में ही घुटके रह गई….

वीर (आँख दिखाते हुए) : “बात कर रहा हूं न”… 🤨🤨 (इस रौबदार आवाज से... नाना की सिट्टी पिट्टी गुल हो गई)

वीर : “चिंता मत कर मैं तुझे जान से नहीं मारूंगा”.... (ये सब वो नाना के गाल को थपथपाते हुए बोल रहा था जिससे उसके मन को थोड़ी शांति मिली)…

“पर तू मौत से बचा है, सजा से नहीं” ~ (शांति भंग) और नाना एक बार फिर सहम गया…

वीर : “तूने ताकत के दम पर न जाने कितनी जिंदगियां बर्बाद की है, न जाने कितने घर उजाड़े है…

"आज हिसाब होगा… सबका हिसाब होगा"..

नाना : पर मैंने….… तुम्हारा तो....कुछ नहीं बिगाड़ा ??

वीर : मै कोई भगवान नहीं, जो किसी को उसके कर्मों की सजा देता फिरूं….

(जब से वीर ने लोगों को… मारना बंद किया है, वो “वजह” जरूर बताता है ताकि…. सामने वाला हर पल पश्चाताप की अग्नि में घुट घुटकर जिये)

“तू जिन दो लड़कियों को उठवाने की सोच रहा है, उनमें से एक... मेरी धर्मपत्नी है । तेरे पिल्ले ने जो किया, उसकी सजा उसे मिल चुकी है, अब तेरी बारी है….. खच्च"

वीर ने नाना के मुंह में कपड़ा ठूंसकर उसे दोनों हाथों पैरों से अपाहिज बना दिया और आखिरी कट…… गले में दिया, जिससे आगे भी कोई आवाज न हो

और वो कट इस तरह था जिसे समय पर ट्रीटमेंट न मिले ...तो बन्दा परमानेंटली म्यूट…

नाना का काम निपटाते ही वीर… “जिस रास्ते से आया था उसी रास्ते वापिस चला गया”…



✨ कुछ देर बाद..



सुबह, जैसे ही नाना की बेटी “सुनीता” ने…. अपने प्यारे पापा के रूम का दरवाजा खोला, उसके मुंह से भयानक चीख निकली… और वो बिलख–बिलख कर रोने लगी…

उसकी आवाज सुनकर राजेश, साक्षी और घर के सभी नौकर... उसी ओर भागे…

सफेद बेडशीट, खून से पूरी तरह रंगी हुई थी… राजेश ने नाना की सांसे चेक की.... तो वो अभी भी चल रही थी…

उसने देर न करते हुए पुलिस को कॉल कर घटना की जानकारी दी…

और बस ही थोड़ी देर में “पुलिस और एंबुलेंस” दोनों वहां थी…

नाना को तुरंत.. हॉस्पिटल के लिए रवाना किया गया वहीं पुलिस घटनास्थल की जांच में लग गई, फोटो लिए गए, संदिग्ध वस्तुओं से फिंगरप्रिंट उठाए गए…

घर के सभी सदस्यों और नौकरों आदि से पूंछताछ का ये सिलसिला अभी चल ही रहा था कि…. सीन में एंट्री हुई..डीएसपी की

उसके सबोर्डिनेट ने उसे घटना जानकारी दी... जिससे उसका दिमाग हिल गया… "क्लियर क्लियर… ये किलर नंबर १ का काम है"…

डीएसपी मन ही मन खीझते हुए… किलर नंबर १ तुझे तो मैं पकड़ के ही रहूंगा…


✨ हॉस्पिटल में :


सुनीता रो रही थी, राजेश उसे शांत करा रहा था वहीं साक्षी, उन दोनों से दूर खामोश बैठी थी… थोड़ी देर बाद डॉक्टर्स ने क्लियर किया ये किलर नम्बर १ का ही काम है….

"डायमंड कट टेक्नीक और K~१ का निशान…. इस बार किसी तरह का कोई डाउट नहीं"..

डॉक्टर : “एमएलए सर” कोमा में है… कब ठीक होंगे… कुछ कह नहीं सकते… और उनका वोकल कोड बुरी तरह डैमेज है, तो वो अब कभी बोल नहीं पाएंगे…

ये सुनते ही सुनीता.... और जोर–जोर से रोने लगी..


✨ वीर के घर :


नाना के यहां से आते ही वीर चुपचाप.... वापिस से सो गया… वहीं काव्या हमेशा की तरह सुबह उठते ही तैयार हुई और रिया के साथ नाश्ता बनाने में लग गई…

सभी ने साथ नाश्ता किया पर वीर सोया रहा पूछने पर काव्या ने बताया, आज वो देर से जागेगा !!

खैर, रंभा नाश्ते के तुरंत बाद ही अस्पताल के लिए निकल गई…. वहीं काव्या और रिया आपस में बैठी बातें करने लगी..

रिया : भाभी, भाई को जगाया नहीं… आज

काव्या : दी, मैंने आवाज दी थी.... पर शायद वो और सोना चाहते थे !!

रिया: तो आप, भैया से इतना काम ही क्यूं कराती हो ???

काव्या : मैंने, कब उनसे काम कराया (जल्दबाजी में वो ये कह तो गई, लेकिन रिया के कहने का मतलब उसे तुरंत समझ आ गया, और वो शर्मा गई )

रिया, काव्या से यहां तक की वीर से भी…. उम्र में बड़ी थी इसलिए काव्या उससे कुछ ऐसा–वैसा कहने से झिझकती थी, शायद यही कारण था कि वो अक्सर रिया के सामने द्विअर्थी बात के दूसरे मतलब की तरफ ध्यान नहीं दे पाती थी….

खैर, थोड़ी देर गपशप के बाद काव्या… कॉलेज के लिए रेडी होने कमरे में चली गई…


✨ अस्पताल..


रंभा आज जल्दबाजी में घर से अशोक के साथ आई थी, उसने फटाफट मरीजों का खाना बनाया और अस्पताल से बाहर निकल गई….

अशोक जिसने आज सारा इंतेज़ाम कर रखा था..... बस, रंभा के बाहर आने का वेट कर रहा था…

तभी रंभा आई और सीधा कार में बैठ गई..
अशोक : जान... सारा काम ओके है.... चलें ( आज उसने इसी के लिए लीव ली थी)
रंभा : अशोक जी !! शादी बहुत बड़ा कदम है, आपको नहीं लगता हमें बच्चों से बिना पूछे आगे बढ़ना चाहिए…

अशोक : फिर वही बात… मुझपे भरोसा नहीं क्या तुम्हें... रंभा ??

रंभा : भरोसा ही तो यहां तक लाया है, अशोक जी !!

अशोक : तो फिर तुम्हें उसी भरोसे का वास्ता… रंभा, “ ज़रा अपनी आँखें बंद कर सोचो क्या तुम्हें इस मिलन की जल्दी नहीं”


आँख बंद करते ही, रंभा को रात का... वो मंजर नजर आया... जिसमें वो कामग्नि जल रही थी....

थोड़ी देर बाद जैसे ही उसने अपनी आँखें खोली अशोक ने उसको चूम लिया…

अशोक : मुझे पता है, तुम्हारा जवाब, पर मैं इन लबों से वो बात सुनना चाहता हूं !!

रंभा (शर्माते हुए) : जो आपका समझ रहे हो.... बस वहीं जवाब है… चलिए शादी कर लेते है!!

अशोक : मैने सब प्लान कर रखा है… चलो मैं पहले तुम्हे ब्यूटी पार्लर छोड़ दूं….

रंभा को ब्यूटीपार्लर छोड़ने के बाद अशोक ने पंडित और कैमरामैन को फोन लगाकर आने की टाइमिंग बता दी… और खुद तैयार होने लग गया


✨ घर पर :


काव्या तैयार हो चुकी थी…. तभी उसे यशस्वी की आवाज आई..

यशस्वी : दीईई !! तैयार हुई या नहीं..

काव्या : आ रही हूं, बाबा…. बस 2 मिनिट (वीर जो अभी अभी नहा कर आया था… काव्या उसके गाल को चूमकर बाय करते हुए बाहर निकल गई)

यशस्वी : दी !! आज जीजू नहीं चल रहे क्या छोड़ने ??

काव्या : नहीं, आज वो लेट उठे है…

यशस्वी : ठीक है... पर स्कूटी आज आप चलाओगे…. बोहोत हो गई प्रैक्टिस…

काव्या मना करती रही, पर यशस्वी के आगे उसकी कहां ही चलनी थी… और दोनों निकल पड़ी कॉलेज के लिए…

रास्ते में….

काव्या के पहुंचते ही सिग्नल🚦 खुल गया... इसलिए उसने स्पीड कम नहीं की…. तभी एक बाइक के बगल से निकलते वक्त उसकी हल्की टक्कर से... उस बाइक का मिरर टूट गया….

यशस्वी (धीरे से) : दीदी, भगाओ !! (पर काव्या ने गाड़ी साइड में लगा दी)

काव्या : अंकल, मै… मै अभी अपने हसबैंड को कॉल करती हूं वो आपको इसके.. पैसे दे देंगे (उसकी आवाज थरथरा रही थी वो घबराई हुई सी रोती आवाज में बोली)

आदमी : कोई बात नहीं… बेटा तुम लेट हो रही होगी… जाओ !!

काव्या : थैंक यूं अंकल… आप नंबर दे दो, मैं उनको आपके पास भेज दूंगी !!….(और उस आदमी का नंबर लेकर काव्या और यशस्वी कॉलेज के लिए निकल पड़ी)


✨ नाना के घर :


राजेश और साक्षी साथ घर लौटे पर सुनीता वहीं अपने पिता के पास हॉस्पिटल में रुक गई…

नाना का कमरा पुलिस ने सील कर दिया था… और जांच चल रही थी !!

डीएसपी : सर ! हॉस्पिटल से… आपको पता चल ही गया होगा ये किलर नंबर १ का काम है… पर आप चिंता मत किजिए, मै उसे जल्द ही पकड़ लूंगा !!

राजेश : कोई नयी बात करो, यार... सच तो ये है…वो कैसा दिखता है, तुम आज तक ये भी नहीं पता लगा पाए… ऊपर से इस घटना की वजह से अस्पताल ने उसे एक नया नाम और दे दिया.... “साइलेंट किलर”

डीएसपी (निराश) : सही कहा सर… पिछले केस की वजह हम उसके जेंडर को लेकर तक कन्फ्यूज है !!…. हर बार कुछ नया ही सामने आता है.... "बट डोंट वरी सर आई विल गिव माई 100%"

||इस डीएसपी के अंडर किलर नंबर १ ने किसी की जान नहीं ली… बस यही कारण है, ऊपर से प्रेशर नहीं आया…… पर इस बार अटैक... ऑपोजिशन पार्टी के.... एमएलए पर हुआ है, इसलिए.... डीएसपी थोड़ा टेंशन में है||


✨ दूसरी तरफ :


अशोक और रंभा ने शादी कर ली थी… अब अशोक उसे एक नई जगह ले जा रहा था !!

रंभा : ये… ये किसका घर है !!

अशोक : किसका नहीं हमारा… कल ही खरीदा है !!

रंभा : इसकी… क्या जरूरत थी !!

अशोक : मैं अपनी पत्नी को किराए के घर में थोड़ी रखूंगा… वैसे ये यशस्वी की पसंद है कुछ दिनों बाद लेने वाला था…. सो कल ही ले लिया !!


विधिपूर्वक अशोक ने लौटे में चावल रखकर… रंभा से गृहप्रवेश करवाया

“लाल जोड़े में वो बहुत सुंदर लग रही थी ”…. भले ही ये शादी आनन फानन में हुई लेकिन दोनों जितना ज्यादा से ज्यादा कर सकते....उन्होंने किया !!


थोड़ी देर बाद ….


दूध का गिलास लिए, रंभा... बेड के बीचों बीच बैठी हुई थी….

अशोक : तो तैयार हो रंभा रानी, जिंदगी की नई शुरुआत के लिए…. (उसने हां में सिर हिला दिया)

अशोक घूंघट हटाते ही रंभा के माथे को चूमने वाला था कि उसने उसे.... रोक दिया !!

अशोक : क्या हुआ ???

रंभा : मुंह दिखाई तो दो…. सुहागरात पर मुंह दिखाई देते है पत्नी को, क्या आप मेरे लिए कुछ नहीं लाए ??

अशोक (मन में ) : “अरे ! ये कैसे मिस हो गया”😟


रंभा का मुंह लटकने ही वाला था... कि उसे याद आया.... ये घर उसने उसी के नाम ही तो लिया है, ड्रॉअर से सर्टिफेट निकालकर रंभा को थामते हुए..

अशोक : ये घर मैने तुम्हारे नाम पर ही लिया है, वैसे ये सुहागरात नहीं सुहागदिन है !! जिस दिन सुहागरात होगी न रानी, उस दिन तुम्हे ग्रैंड गिफ्ट दूंगा... "वैसे रानी तुम्हे पसंद तो आई न ये मुंह दिखाई"

रंभा : बहुत पसंद आई🙂🙂..... थैंक यू !!

अशोक : पति को कैसा थैंक यू जान…

रंभा (इमोशनल) : अभी रेंट पर रहते है… उसके पहले बस्ती में झुग्गी ही थी जिसे मैं खुद का घर कहती थी… (और उसकी आंखों में आंसू आ गए)

अशोक : अरे ! अरे ! ऐसे मौके पर रोते नहीं…

रंभा : ज..जी (और उसने दूध का गिलास अशोक की तरफ बढ़ा दिया)

अशोक : अब हमारे पास खुद का घर है.... मेरी जान... (और उसने आधा पीकर दूध का गिलास रंभा को पकड़ा दिया)


फिर जैसे ही रंभा ने दूध खत्म किया अशोक ने उसके चेहरे को दोनों हाथों के बीच थाम लिया… मेरी जान रम्भा….”क्या तुम... तैयार हो”


दोनों एक दूसरे की आंखों में देखते हुए करीब आने लगे… रंभा के सुर्ख लाल होंठो से आती गर्म सांसे अशोक के चेहरे पर पड़ रही थी..


उसने रंभा के लबों पर अपने लब रख दिए और धीरे–धीरे उन्हें चूमने लगा... ये उनका पहला किस नहीं था लेकिन आज इसमें कुछ अलग बात थी !!

तभी रंभा ने अपने होंठों को थोड़ा सा खोल कर थोड़ा सा स्थान दिया… जिससे अशोक उसके होंठो पे लगे लिपस्टिक के फ्लेवर को और भी अच्छे से एंजॉय करने लगा...


आह्ह्ह… रंभा मेरी जान


दोनों किस के दौरान एक दूसरे के बदन से कपड़े अलग कर चुके थे… तभी अशोक ने रंभा को पीछे की ओर धकेल दिया.... और फिर से किस करने लगा…

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“आह्ह्ह रंभा मेरी जान… बहुत प्यार करूंगा तुझे”… उम्मम....श्श्श...

इस दौरान रंभा उसके बालों को सहला रही थी तभी अशोक ने उसकी कमर को ज़ोर से दबा दिया !!

रंभा : आह्ह्ह पतिदेव !!…. दर्द हो रहा है…

अशोक : अभी तुझे असली दर्द दिया कहां है मेरी रानी.….चल अब इस मूसल को तैयार कर …. रंभा समझ गई थी उसे आगे क्या करना है…

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अशोक : आह्ह्ह ऐसे ही चूस….क्या चूसती है तू रंभा...शश्शश... क्या गरम मुंह है तेरा, मेरी रानी आह्ह्ह…. आह्ह्ह , मेरी जान… आह्ह्ह रंभा

अशोक के हाथ रंभा के सिर को सहलाते सहलाते कब उसे दबाने लग गए उसे पता ही नहीं चला…. रंभा लंड.... मुंह से निकलकर ख्वाक् ख्वाककर खांसने लगी…

रंभा : मार ही डालोगे क्या !!

अशोक : अरे ! नहीं मेरी जान, तू इतना अच्छा चूसती है कि मेरा खुद पर से कंट्रोल छूट गया“... चल अब लेट जा... मै तुझे खुश करता हूं…

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रंभा अपनी आँखें बंद कर फुल एंजॉय करने लगी उसे बहुत मजा आ रह था.... वो अशोक के सिर को नीचे की तरफ अपनी चूत पर दबाती और मादक सिसकारियां भरती...

लगभग 10 मिनिट तक अशोक उसकी चूत चाटता रहा और फिर अचानक से उठ गया

….रानी अब वक्त आ गया है… देखते हैं …. “पहले तेरा खेत जूतता है या मेरा बेल थकता है”

उसने रंभा की टांगे चौड़ी की और उनके बीच आकर अपना लंड... उसकी चूत पर मारने लगा…

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रंभा वासना के चरम पर थी… आह्ह्ह अशोक जी... मत तड़पाइए….. आह्ह्ह अब डाल भी दीजिए… आह्ह्ह अशोक जल्दी... (पर वो उसे... अभी और तड़पाना चाहता था)…

अशोक : रानी बताओ न क्या डालना है….और कहां डालना है...

रंभा इस खेल से अच्छी तरह परिचित थी इसीलिए वो फटाक से बोली…. आह अपना लंड मेरी चूत में घुसाइये स्वामी… आह्ह्ह

अशोक ने भी अब और देर नहीं की रंभा के लबों को अपने लबों में भरकर एक ही झटके में पूरा 7 इंच अंदर घुसा दिया…

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आह्ह्ह.. रंभा जोर से चीखना चाहती पर उसकी वह चीख अशोक के मुंह में घुट कर रह गई…..

वहीं अशोक ने अब तेजी धक्के लगाने शुरू कर दिए…

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आह्ह्ह… आह..अशोक जी…. आह्ह्ह अम्म ऐसे ही…उम्मम.. आह्ह्ह... आह्ह्ह

इसके पहले की अशोक... रंभा को उसके चरम तक पहुंचा पाता उसका बैल थक गया…और रंभा के ऊपर से उतर गया..

रंभा ने अशोक को यूं उदास लेटते देखा तो उससे रहा नहीं गया (और उसने उसे गले से लगा लिया)… कोई बात नहीं जी… बहुत दिन बाद किया, एक्साइटमेंट में हो जाता है...

अशोक : वो बात नहीं है जान…. दरअसल मुझे गाली दे देकर…सेक्स करने की आदत है… और जिसने ये आदत लगवाई थी वो तो अपने यार के साथ भाग गई…

रंभा : तो अब आप मुझे गाली दे सकते हो जी… मैने कब मना किया है... वैसे भी मैं अब पूरी तरह से आपकी हो चुकी हूं !!

अशोक : पर रंभा…

रंभा : कोई पर वर नहीं… धीरे धीरे कंट्रोल करना, आदत खुद ब खुद चली जाएगी…


अशोक जनता था ये आदत जाएगी नहीं उल्टा उसे और लग जाएगी…

कुछ देर, बातचीत के बाद... जब दोनों रेडी हुए, तो रंभा ने अशोक से कहा बहुत लेट हो गया ना एक काम करो मुझे अस्पताल छोड़ दो….. अब शाम का खाना बनाने के बाद ही घर जाऊंगी..

अशोक : पर अभी तो दोपहर के 2 बजे है अभी से वहां जाकर क्या करोगी… “एक काम करते हैं, खाना ऑर्डर कर लेते है”…. शाम को घर में कह देना… अस्पताल में फूड इंस्पेक्शन करने वाले आने थे... इसीलिए पूरा दिन लग गया..

रंभा : ठीक है, अशोक जी..


✨ घर :


वीर सुबह नहाने के बाद से कही नहीं गया…. दिनभर लैपटॉप पर काम करता रहा… उसके मन में अभी भी ये सवाल तांडव मचा रहा था…. आखिर कौन… कौन हो सकता है जो शैडो वॉरियर की जान ले रहा है…

तभी उसके रूम का दरवाजा ओपन हुआ… और काव्या अंदर आई…

वीर ने एक नज़र उसकी तरफ देखा और फिर से काम पे लग गया…

काव्या : सुनो... सुनो ना

वीर : हूं… (उसका ध्यान काम पर था)

वो...👉👈 वो मैने गलती से…. एक अंकल की बाइक के साइड मिरर को टक्कर मार दी थी !

वीर : हम्मम🙂.....

🙄 १ मिनट "क्यायाया"😨 !! “तुम्हे कही चोट तो नहीं आई”... (और वो काव्या को यहां–वहां देखने लगा)..
काव्या : अरे बाबा मुझे नहीं आई कहीं चोट… आप बस इस नंबर पर अंकल से बात करके उनका मिरर सही कराने... चले जाओ...

वीर : ठीक है😕…. चला जाऊंगा !!

काव्या उसके हाथ को थामकर… (मासूम चेहरा अटैक).... "अभी जाओ ना"…🥺🥺

वीर : जा रहा हूं… मेरी मां…जा रहा हूं
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धन्यवाद ✨
Bahut hi badhiya update tha Bhai... Itni achi kahani hai yrr aur tum ho ke update ke liye tarsa dete ho yrrr
 
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Looteraaa

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Bahut hi badhiya update tha Bhai... Itni achi kahani hai yrr aur tum ho ke update ke liye tarsa dete ho yrrr
Sorry for that bro💕
 
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