Nice updateUpdate 2
अभी ठीक से आंख भी नहीं लगी थी कि मां मुझे बुलाने लगी। मां की आवाज नीचे हॉल से आ रही थी।
दोस्तों, आगे बढ़ने से पहले मैं आपको अपने घर की बनावट के बारे में बता देता हूँ। मेरा घर एक मंजिला है। जैसे ही अंदर प्रवेश करते हैं, सामने एक हॉल है, और उसमें एक कोने में डाइनिंग टेबल लगा हुआ है। हॉल के दाईं/राइट तरफ सबसे पहले पूजा रूम है, उसके ठीक बगल में किचन फिर उसके बाद माँ का कमरा आता है और अंतिम में सीढ़ियाँ हैं जिसके नीचे बाथरूम है, इन्हीं सीढ़ियों से फर्स्ट फ्लोर पर जाया जा सकता है। फर्स्ट फ्लोर पर सबसे पहले मेरा कमरा है जिसमें अटैच बाथरूम भी है, उसके बाद एक स्टोर रूम है, और बाकी पूरा हिस्सा खुला है, यानी खुली छत है।
दोस्तो आप सोच रहे होंगे एक बैंक मैनेजर का घर इतना छोटा तो मैं आपको बता दु कि घर पे कोई रहने वाला नहीं है इसलिए मैने अपने घर को ज्यादा बड़ा नहीं बनवाया।
नीचे हॉल ने पहुंचा तो पाया कि वहां मां अकेली सोफे पे बैठी हुई है। मां ने मुझे अपने पास सोफे पे बैठने को कहा। सोफे पे बैठने के बाद मां से इधर उधर की बात हो ही रही थी कि रानी खीर से भरी दो कटोरियां ले आई । शायद कोई रसम होती है। मैने और मां दोनों ने खीर की कटोरी अपने अपने हाथों में ली और रानी के हाथ की बनी खीर चकने लगे। मगर जैसे ही मैने खीर अपने मुंह में डाला वैसे ही मैने खीर फर्श पे उगल दिया। और उगलता भी क्यों नहीं वो खीर कम चाशनी ज्यादा लग रही थी। शायद रानी ने पूरा का पूरा चीनी का डिब्बा ही खीर में डाल दिया था। मां का रिएक्शन भी कुछ कुछ मेरे जैसा ही था। मेरी मां जब भी गुस्सा होती थी बिना कुछ बोले पूजा रूम में घुस जाती थी। आज भी उन्होंने ऐसा ही किया। मगर मैं वही बैठा रानी को देखता रहा। रानी के चेहरे से साफ पता चल रहा था कि वो कितनी डरी हुई है। जबकि अबतक मैने उससे डांटना तो दूर की बात है कुछ बोला भी नहीं था। मगर रानी के डर ने मेरे मन में एक उमंग की लहर ला दी थी। ऐसा नहीं है कि मुझे किसी को डरा देखना से खुशी मिलती है। मगर रानी का डरना मेरे लिए एक संकेत था कि मैं इससे अपनी सारी ख्वाहिशों को पूरा करवा सकता हूं। मगर अपना दबदबा रानी पे बनाने के लिए डरना और डांटना तो जरूरी ही था। सो मैने उससे डांटना शुरू किया "तुम्हे खाना बनाना नहीं आता। पता नहीं पूरी जिंदगी में तुम्हारे साथ कैसे रहूंगा। मां ने भी पता नहीं क्या देख कर तुमसे मेरी शादी करवा दी। इससे बढ़िया तो मैं कुंवारा ही था। पता नहीं मेरा क्या होगा अब" वगैरा वगैरा। अब तक रानी के आंखों से आंसू की नदिया बहने लगी थी। रानी ने जैसे ही कुछ बोलने के लिए मुंह खोल मैने चट से एक थप्पड़ रानी के गाल पे रसीद दिया। और चल दिया अपने कमरे की ओर। जबतक मैं सीढ़ियां चढ़ता रहा अंदर ही अंदर मुझे ग्लानि भी हो रही थी कही मैने ज्यादा तो नहीं कर दिया? मगर अंतिम सीढ़ी तक पहुंचते पहुंचते मेरी ग्लानि अब खुशी में बदल चुकी थी। अब मुझे पूर्ण विश्वास हो चुका था कि मैं रानी को अपने शर्तों पर नचा सकता हूँ। साथ ही साथ उसके साथ अपनी ख्वाहिशों को पूरा भी कर सकता हूं। मगर फिर भी मुझे रानी का पूर्ण समर्पण खटक रहा था। मैं नहीं चाहता था कि मैं रानी के साथ कुछ भी जबरदस्ती करूं। बल्कि जो भी करूं उसमें रानी की भी सहमति हो। बिना सहमति के सेक्स सेक्स नहीं बल्कि बलात्कार होता है। इसी अन्तर्द्वन्द में मै छत पर टहलता रहा और सोचने लगा। अब आगे क्या करूं कैसे रानी से अपने मन की बात कहूँ कैसे उससे BDSM सेक्स जो मुझे पसंद था के लिए तैयार करु। मुझे इतना तो पता था रानी को BDSM सेक्स के बारे में कुछ भी पता नहीं होगा। अब कैसे मैं उससे इसके लिए मानूंगा।
शेष अगले भाग में, आपको ये update कैसा लगा हमें बताए? और भाई लोग और उनकी दीदियों update अच्छा लगे तो Like कर देना।
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