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Erotica Satisfaction of lust

IMUNISH

जिंदगी झंड बा, फिर भी घमंड बा ..
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Satisfaction of lust
Peta-Jensen-01
 

IMUNISH

जिंदगी झंड बा, फिर भी घमंड बा ..
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सुहागरात में ऐसा ही होता है


आज से १५ साल पहले की बात है, मैं अपने पिता जी और माँ के साथ कानपूर से दूर एक कस्बे नरवाल में रहती थी. मेरा माता पिता दोनों ही तहसील में काम करते थे, में उनकी अकेली बेटी थी

हम लोग कुछ समय पहले ही नरवाल आये थे और वहीँ के एक स्कुल के मैनेजर साहब के घर में रहते थे. मै उसी स्कुल में ही पढ़ती थी. मैनेजर साहब ३७/३८ साल के थे और उनकी पत्नी ३५ साल की थी और उसी स्कुल की प्रिन्सिपल थी. क्यों की हम उन्ही के घर में किरायदार थे इसलिए काफी घुल मिल गए थे . मै उनको चाचा और चाची कहती थी उनके कोई बच्चा नही था इस लिए वो मुझे अपनी बच्ची की तरह ही प्यार करते थे और मेरा ख्याल रखते थे. मै जब स्कुल से लौटती थी तब माँ और पिता जी दफ्तर में ही होते थे इस लिए मेरी ज्यादा वक्त उनके साथ ही गुजरता था.

मेरे इम्तहान चल रहे थे तभी पिता जी के पास खबर आई की शासन से लखनऊ में एक वर्कशॉप लगी है जिसमे मेरे माँ और पिता जी का जाना जरुरी है. मेरे पिता जी परेशान हो गए की कैसे मुझे यहाँ छोड़े, अभी इम्तिहान चल ही रहे थे. पिता जी ने मैनेजर चाचा और उनकी पत्नी को अपनी समस्या बताई तो उन्होंने प्रिंसिपल चाची ने कहा," भाई साहब चिंता की कोई बात नहीं, आप जाये कनिका बिटिया को हम सम्भाल लेंगे, उसका साल खराब नही होने देंगे."

यह बात सुन कर मेरे पिता जी को सकून हुआ और फिर ५ दिन की वर्कशॉप के लिए माँ के साथ लखनऊ चले गये.

मेरा आखरी पेपर था, प्रिंसिपल चाची ने कहा-," आज आखरी पेपर है , भगवान का नाम लेकर पर्चा लिख आओ सब ठीक रहेगा. घर आने के बाद हम बाहर खाने जायेंगे."

मेरा पेपर अच्छा हो गया , बीच बीच में प्रिंसिपल चाची आकर मुझे देख भी जाती थी. स्कुल से लौट के मैंने कपड़े बदले और सो गयी. चाची भी थोड़ी देर बाद स्कुल से लौट आई और मुझे आवाज दी,"कनिका मेरे कमरे में आजाओ मै आगयी हूँ."
मैं चाची के पास लेटी तो चाची ने पूछा." पेपर कैसा रहा?"
मैंने कहा," बहुत बढ़िया!"
तभी चाची ने कहा-,"यह तो सिर्फ कागजी इम्तिहान था , तुम्हें जिंदगी के इम्तिहान के बारे में पता है?"
मैंने कहा," नहीं!"
चाची ने कहा,"माँ ने तुम्हें कुछ नहीं बताया?"
मैंने कहा-,"नही!"
"माहवारी के बारे में माँ ने कुछ बताया?"
"हर महीने में मुझे बहुत तकलीफ होती है, लेकिन माँ ने इसके लिये कुछ भी नहीं बताया।"
"तुम्हारी माँ बहुत व्यस्त रहती हैं, उन्हें पता ही नहीं कि बेटी कब जवान हो गई! लड़की को जीवन में बहुत सारी कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है जो अगर पता न हो तो पूरे जीवन में बहुत तकलीफ उठानी पड़ती है. अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें इसके बारे में आने वाले दो चार दिन में सब कुछ सिखा दूंगी और कोई फ़ीस भी नही लूँगी."

कुछ नया सिखने को मिलेगा, सोच कर मैं झट से मान गई। फिर हम सो गये।

शाम को मैनेजर चाचा घर आये, प्रिंसिपल चाची ने मेरे सामने चाचा से कहा," कनिका सब कुछ सीखना चाहती है, क्यों जी सीखा दे इसको?"
मैनेजर चाचा ने आँखों आँखों में प्रिंसिपल चाची से कुछ कहा तब वो बोली," अरे! तुम कनिका बिटिया से ही पूछ लो! क्यों कनिका, बता अपने चाचा को?"
मुझे चाचा में कुछ हिचकिचाहट दिख रही थी तो मैंने कहा ," चाचा हाँ ! आप दोनों मुझे सिखा दो."
उन्होंने कहा," तुम अपने माँ बाप को इसके बारे में कुछ नहीं बताओगी?"

मैं मान गई। शाम को पाँच बजे चाची मुझे बाज़ार ले गई, वहाँ उन्होंने मेरे लिये शॉपिंग की पर ऐसी शॉपिंग माँ ने कभी नहीं की थी !चाची ने मेरे लिये लाल रंग की सुंदर ब्रा और पैंटी खरीदी, वीट क्रीम और कुछ सौंदर्य प्रसाधन खरीदे। मुझे मेरी पसंद की ढेर सारी चोकलेट भी खरीद कर दी। मैं खुश थी।

छः बजे हम घर पहुँचे। बाहर धूप के कारण घर आकर चाची ने मुझे नहलाया और शरीर की सफाई के बारे में बहुत कुछ सिखाया। शाम सात बजे उन्होंने मुझे कहा,"आगे जाकर मुझे लड़की के सारे काम सीखने पड़ेंगे."

नई ब्रा और पेंटी पहन कर मुझे थोड़ा अटपटा लग रहा था क्योंकि मैंने पहले कभी ब्रा पहनी ही नहीं थी और चूत के बाल साफ करने से थोड़ी खुजली भी हो रही थी। चाची ने एक क्रीम लेकर दी रही और मुझे वहां के बाल साफ़ करने को कहा था.

तब लगभग साढ़े सात बजे चाची ने कहा-,"आज मैं तुम्हें जीवन का सबसे बड़ा पाठ सिखाऊँगी."

बाद में उन्होंने मेरी सुंदर तैयारी की, उनके शादी के खूबसूरत फोटो दिखाये और कहा-,"आज मैं तुम्हें दुल्हन बनाऊँगी."
मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ लेकिन मन में गुदगुदी भी हुयी. कौन ऎसी १५ साल की लड़की होगी जिसे दुलहन का श्रंगार करना अच्छा न लगता हो? मैं भी मान गई.

बाद में उन्होंने मुझे उनका शादी का जोड़ा पहनाया, मेरी फोटो भी खींची, मुझे नजर ना लगे इसलिये काला तिल गाल पर लगाया।

मुझे मजा आ रहा था। बाद में चाची ने मुझे कहा," शादी पहली रात यानि ‘सुहागरात’ सबसे प्यारी होती है. हर लड़की इस रात के लिये तड़पती है. जिंदगी का सबसे बड़ा सुख इस दिन मिलता है."

मुझे चाची की पूरी बात तो नही समझ में आई लेकिन अंदर एक खलबली जरूर मची हुयी थी.

उन्होंने फिर कहा," क्या तुम वो मजा लेना चाहोगी? इसमें थोड़ा दर्द होता है पर मजा भी बहुत आता है. मैंने तो यह मजा तुम्हारी उम्र में ही कई बार चखा था और आज भी हर रात चख रही हूँ."

मैंने तुरंत हाँ कर दी।

सुहागरात में दुल्हन किस तरह बैठती है, कैसे अपने पति को बादाम का दूध पिलाती है, फिर कैसे शर्माती है, ये सब बताया और यह भी कहा," आज इसका प्रैक्टीकल भी तुम से करवाऊँगी."

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था.

फ़िर उन्होंने कमरा सजाया, कमरे में इत्तर छिड़का. शादी के जोड़े में मुझे बड़ी गर्मी लग रही थी लेकिन मैं चुप रही क्योंकि मुझे कुछ नया सीखना था.

बाद में उन्होंने मुझे बेडरूम में पलंग पर घूंघट लेकर बिठाया.

थोडी देर में वहाँ मैनेजर चाचा आ गये, उन्होंने भी नया कुरता पैजामा पहन था. आज वो बहुत ही अलग लग रहे थे. तभी सुंदर नाइटी में उनके साथ कैमरा लेकर चाची भी पहुँची और मुझे बोली," यह तुम्हारी पहली सुहागरात है अपने पति (चाचा) और गुरु (चाची) के पैर छुओ."

मैं कपड़े सम्भाल कर पलंग से नीचे उतरी और चाचा के पैर छुए।

उन्होंने मुझे मुँह दिखाई के तौर पर 100 रुपये दिये. मैं खुश हो गई, फ़िर मैंने चाची के पैर छुए. उन्होंने आशीर्वाद दिया," ऐसी रात तुम्हारी जिंदगी में हर रोज आये!"

फिर आगे बढ़ कर उन्होंने मुझे चुम लिया और मेरे हाथ में तीन गोलियाँ देकर कहा," यह छोटी गोली तुम्हें बड़ी सहायता करेगी, इसे दूध के साथ ले लो और दूसरी गोली तुम्हें गरमाएगी करेगी, तीसरी गोली तुम्हें दर्द नहीं होने देगी."

चाची की दी हुई गोलियाँ मैंने बिना कुछ कहे दूध के साथ ले ली और पलंग पर घूंघट लेकर बैठ गई.

चाचा जी ने फिर मुझे प्यार से सहलाया मेरे बदन में मानो बिजली दौड़ गई. घूंघट के कारण कुछ दिख नहीं रहा था. चाचा चाची बात कर रहे थे, हंस रहे थे," फ़ूल सी गुड़िया है धीरे करना, वैसे मैंने गर्भ निरोधक गोली और पेन किलर भी दे दी है."

चाचा ने अपने कपड़े उतार दिये और वो अंडर वियर में आ गये. धीरे से उन्होंने मेरा घूँघट खोला और उनके मुँह से शब्द निकल पड़े-,"बहुत सुंदर, बिलकुल पारी!"

मैं सहम गई और आंखें बंद कर ली. उन्होंने मुझे बड़े प्यार से चूमा. पहले मेरे गालों को बाद में माथे को. मेरी बिंदी हटा दी, कान के बूंदे और गले का मंगल सूत्र भी निकाल कर रख दिया.

उसके बाद उन्होंने चाची को मेरी नथ निकालने को कहा. वे हंसी और बड़े प्यार से नथ निकाल दी.

धीरे धीरे वो मेरे पूरे बदन को छू रहे थे, मुझे गुदगुदी हो रही थी.

फ़िर उन्होंने मुझे खड़ा किया और मेरा घागरा खोल दिया. घागरा भारी होने से नीचे चला गया। मैंने पकड़ने की कोशिश की पर चाची ने मेरे हाथ पकड़ लिये.

फ़िर उन्होंने मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और मैं थोड़ी चिल्लाई,"चाची ये क्या!"

पर चाची ने कहा," चुप रहो, सुहागरात में ऐसा ही होता है."

अब मैं केवल ब्रा और पेंटी में खड़ी थी और मैने मेरा मुँह हाथ से ढक लिया. मुझे शर्म आ रही थी पर गोली की वजह से उत्तेजना भी हो रही थी.

चाचा ने मुझे बाहों में भर लिया और जोर से दबाया. उससे मेरे चुचूक उनके सीने से रगड़ गये. चाची रसोई से बाऊल में रसगुल्ला ले आई और मेरे मुँह में दे दिया. चाचा ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और एक झटके में मेरी पेंटी निकाल फेंकी.

मैं डर गई.

तभी चाची ने और एक रसगुल्ला मुँह में खिलाते हुए मेरी ब्रा निकाल फेंकी.
मै नंगी होगयी थी .मेरा शरीर काँप रहा था. तभी मुझे महसूस हुआ की मेरी चूत पर कुछ रेंग रहा है. मैंने आँखे खोली तो देखा चाचा मेरी चूत पर अपनी जीभ रखे हुए है . मेरी चूत पर पहली बार ऐसा कुछ हुआ था और ऐसा लगा जैसे सैकड़ो कीड़े मेरी चूत पर रेंग रहे है. मै बेहद घबड़ाई, लेकिन न जाने क्यों मुझे वो एहसास अच्छा लग रहा था. तभी चाची मेरे चुचूक को अपने मुह में लेकर चूसने लगी.

मै दोनों इस तरह के अनजान एहसास को एक साथ पाकर कुनमुनाने लगी.

चाची मेरी चुन्ची को चूमते हुए बोली,"-,"ऐसा ही होता है सुहागरात में! चुप रहो और मजे लो."

चाचा की जीभ मेरी चूत में जाती तो मैं मजे से तड़प उठती. अब चाचा ने मेरे दोनों पैर ऊपर उठाये और चाची ने रसगुल्ले का रस मेरी चूत में डाल दिया.

बहुत गुदगुदी हुई. फिर चाचा ने अपनी जीभ से वो रस चाट चाट कर चूस लिया. बाद में चाची ने दो रसगुल्ले मेरी कड़क चूचियों में फंसा दिये और चाचा ने वो पूरी उत्तेजना से चूस कर खाये. इसमें मेरे चुचूक पर उनके दांत भी गड़ गये.

चाची ने कहा," गोली खाई है तो दर्द कम होगा."

अब चाची ने मुझे नीचे उतार कर बैठने को कहा और चाचा पलंग पर बैठ गये।

अब उन्होंने कहा,"आज मैं तुम्हे लंड चूसना सिखाती हूँ."

मैंने चौक कर चाची की तरफ देखा लेकिन चाची ने मेरी तरफ ध्यान न कर चाचा का अंडरवियर नीचे खीच दिया. जैसे ही उन्होंने ऐसा किया, चाचा का बड़ा सा लंड फ़ुफ़कारता हुआ निकल आया. मै तो उसको देख कर ही हड़बड़ा गयी. मैंने लड़को के लंड इधर उधर सड़क पर पेशाब करते हुए देखा था लेकिन ये तो बिलकुल ही उनसे अलग था. मै लंड देख बुरी तरह घबड़ा गयी थी. अजीब से दहशत दिल में होगयी थी लेकिन उसके साथ मेरी सांस भी भारी चलने लगी.

फिर उन्होंने चाचा जी का लंड अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी.वो उसको ऐसा चूस रही थी जैसे वो आइसक्रीम की बार खा रही हों.फिर उन्होंने मुझसे वैसे ही करने को कहा, लेकिन मैंने मना कर दिया.

तब उन्होंने चाचा के लंड पर ढेर सारा चॉकलेट लगा दिया और कहा," इसे चॉकलेट समझकर चूसो! बड़ा मजा आयेगा."

मैं मान गई क्योंकि मुझे चॉकलेट पसंद थी.

चाची ने चाचा का लंड पाने हाथ से पकड़ के मेरे ओठो पर लगा दिया और चाचा ने जोर लगा कर उसको मेरे मुँह ने डाल दिया. मुझे उनके लंड पर लगे चॉकलेट का स्वाद आरहा था और चाचा लंड को धीरे धीरे मेरे मुँह के अंदर बाहर करने लगे. चूसते-चूसते चोकलेट का स्वाद बदल रहा था. अब वो लंड बहुत बड़ा हो गया था और चाचा मेरे बाल पकड़ कर उसे अंदर तक मेरे गले तक डाल रहे थे. मुझे सांस लेना मुश्किल हो रहा था.

चाची मेरे चूचियाँ और चुचूक चूस रही थी.

तभी चाचा ने कहा," मैं झड़ने वाला हूँ!"

चाची ऊंघती हुयी आवाज में कहा,"अंदर ही झड़ जाओ."

और जोर से कुछ मलाई जैसी चीज मेरे मुँह में भर गई, वो मेरे गले तक पहुँची.मुझे ऐसा लगा कि मैं उलटी कर दूंगी पर चाची जी ने मुझे वो उगलने नहीं दिया और कहा,"यह अमृत है पगली! गिरा मत! पी ले!"

और मेरा मुँह ऊँचा करके ढेर सारा रसगुल्ले का रस मुँह में डाल दिया, मैंने वो रस पूरा निगल लिया.
अब चाची ने मुझे कहा," अब तुम्हारा आखिरी इम्तिहान परीक्षा है. इसमें तुम्हे पास होना ही है, नहीं तो जिंदगी बरबाद है."

तब चाचा फिर से खड़े हुये. वो हंस रहे थे.

चाची ने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरे दोनों पैर दूर-दूर कर दिये. अब उन्होंने भी अपने कपड़े उतार दिये।

अब दोनों पैरों में काफी अंतर था. अब वे मेरे सर की तरफ से आई और कहा," यह आखिरी इम्तिहान है ! इसे जरूर पास करना कनिका!"

और उन्होंने उनके और मेरी चूचियों पर ढेर सारी आईसक्रीम लगा दी और कहा,"- बिटिया., तुम मेरे चुचूक चूसना और मैं तुम्हारे!"

अब यह सिलसिला शुरू होते ही चाचाजी ने अपना लंड मेरी चूत में धकेला, मै दर्द से धर्रा गयी और मैंने चाची के चुचूक को काट लिया।

चाची ने चाचा से कहा," धीरे से बच्ची है!"

और चाची ने भी प्यार से मेरे चुचूक को काट लिया और हंसी, अब चाचा को इशारा किया और उन्होंने मेरे होंठों को अपने होंठों से चिपका दिया.

अब चाचा ने एक जोर का धक्का दिया तो उनका बड़ा लंड मेरी चूत को चीरता हुआ अंदर चला गया.
चाचा ने ४/५ धक्के मार कर मेरी छोटी सी चूत में अपना लंड पूरा डाल दिया और मुझे पुचकारने लगे.

मैं जोर से चिल्लाई पर चाची ने अपने मुँह में मेरी आवाज दबा दी. मैं दर्द से तड़प रही थी.

तभी चाची ने थोड़ी बरफ मेरे शरीर पर रखी और मेरे उरोजों को सहलाने लगी और कहा,' कनिका बिटिया , तुम्हें माहवारी में हर महीने जिस काँटे से तकलीफ होती थी वो काँटा चाचा ने निकाल दिया है. अब तुम्हें कभी तकलीफ नहीं होगी."

और उन्होंने मुझे चादर पर गिरा खून भी दिखाया और कहा," यही वो गंदा खून है जो हर महीने तुम्हें तकलीफ देता था. अब थोड़ा और सह लो, सब ठीक हो जायेगा."

बाद में उन्होंने चाचा के लंड पर ढेर सारी क्रीम लगाई और कहा," इस क्रीम को तुम्हारे अन्दर लगा कर ये तुम्हारा इलाज कर देंगे, चिंता मत करो."।

अब उन्होंने मुझे घोड़ी जैसा बैठने को कहा ताकि मलहम ठीक से लगे.

अब चाचा ने लंड के सुपाड़े से मेरी चूत की आहिस्ता आहिस्ता रगड़ा और फिर धीरे धीरे अपना लंड अंदर डालना शुरू किया. मेरे नीचे लटकी चूचियों को चाची ने भी सहलाना शुरू कर दिया. अब मुझे दर्द तो हो रहा था लेकिन लंड का चूत के अंदर आहिस्ते आना जाना मजा देने लग रहा था. चाचा ने ऐसे ही धीरे धीरे मेरी चूत में ३/४ मिनट तक लंड अंदर बाहर किया और मेरी पीठ सहलाते रहे. मेरे मुह से सिसकी निकलना बंद ही नही हो रही थी. मजा तो आने लगा था लेकिन चाचा का लंड मुझे अभी भी दर्द दे रहा था.

फिर चाचा ने अपना लंड मेरी चूत से निकाल दिया और बिस्तर पर लेट गए और चाची से बोला ," सुनो कनिका धक गयी होगी उसकी टंगे भी मेरा वजन बर्दाश्त नही कर पा रही होगी. इसको ऊपर ही आने दो."

चाची ने मेरी चूंचियां छोड़ दी और मुझे चाचा के ऊपर आने को कहा. मुझे कुछ समझ में नही आया तो चाचा ने मेरी कमर पकड़ के अपने ऊपर लिटा दिया और मुझे चूमने लगे. फिर चाची ने चाचा का लंड पकड़ लिया और मुझे उनके लंड पर बैठाकर ऊपर नीचे होने को कहा. मेरी चूत से चाचा का लंड रगड़ रहा था और मुझे अच्छा भी लग रहा था . चाची अपने हाथ से ही चाचा का लंड मेरी चूत के ऊपर रगड़ा रही थी.

फिर चाचा ने मुझे एक बार लंड चूसने को कहा. इस बार मैं खुद मान गई और लोलीपोप जैसे उनका लंड चूसने लगी. चाची प्यार से मेरे बाल सहला रही थी और अपने पैर से मेरी चूत को भी सहलाने लगी.

चाचा अपनी कमर उठा उठा के मेरे मुह में लंड अंदर बाहर कर रहे थे और बोलते भी जा रहे थे,"कनिका तू बड़ी मस्त है!"
"इतनी जल्दी लंड चूसना सीख गयी."
"तुझे तो दिन रात चोदूंगा."

चाची के पैर का अगूंठा मेरी चूत अंदर खलबली कर रहा था और अनजाने में मै भी कमर हिलाने लगी.
चाची ने जब यह देखा तो बोला,"सुनो कनिका मस्त हो गयी है अब चोद दो इसको."

जैसे ही चाची ने ऐसा कहा , चाचा ने अपना लंड मेरे मुँह से निकल दिया और एक करवट लेकर मुझे बिस्तर पर गिरा दिया. वो खुद तेजी से मेरी टैंगो की तरफ चले गये. उन्होंने मेरी टांगो को फैला दिया. चाची ने तभीकहा,"अरे रुको! कनिका के चूतरो के नीचे पहले तकिया लगा दो, तभी तो कनिका बिटिया की चूत उभर के सामने आएगी और तुम्हारा लंड से मजा लेगी."

खुद चाची ने मेरे चूतरो के नीचे तकिया लगादी और चाचा का लंड पकड़ के मेरी चूत के द्वार पर रख दिया.

इस बार चाचा ने थोड़ा और क्रीम अपने लंड पर लगाया और एक धक्के में पूरा लंड मेरी चूत में समा दिया. मेरे मुँह से "मम्मी मर गयी!' निकल पड़ा. लेकिन चाचा रुके नही वो मेरी चूत में धक्के मारने लगे. उनका लंड कहि अंदर तक मुझे हिला दे रहा था. चाची नंगी मुझसे चिपटी रही और मेरे बदन को चूमते और सहलाते हुए बड़बड़ाने लगी,
" चोद कसके इसको!"
"बहुत दिनों से परेशान था चोदने को करले इच्छा पूरी!"
"क्या कोरी निकली!"

चाचा केवल "हाँ हाँ" बोलते जारहे थे और मुझे चोदते जा रहे थे. मुझे वाकई मजा आने लगा था और मै भी चाचा के लंड का साथ देने लगी.

मेरी चूंचियां फ़ूल गये थे, चूचक नुकीले हो गये थे , मेरे मुँह से "आह!! आह!! आई!!आई!!" की आवाजे निकल रही थी. तभी मुझे लगा जैसे मुझे पेशाब हो जायेगी और न चाहते हुए भी मुझे हो गयी. लगा जैसे मेरी चूत से कुछ निकला और एक नशा सा मुझ पर चढ़ गया. मै पस्त हो गयी , एक धकान सी मेरे शरीर छा गयी. पर चाचा रुकने वाले नहीं थे, उन्होंने अपनी स्पीड बढ़ा कर, कस कस के मुझे चोदने लगे. और चाची से कहा," मेरा निकलने वाला है ! क्या करूँ?"

चाची ने कहा," अंदर छोड़ दो, मैंने गोली दे दी है।"

चाचा का तभी चेहरा तन गया और "आआआआआआह!" कहते हुए मुझसे चिपट कर मेरे ही ऊपर गिर गए. उनके लंड ने गरम गरम वीर्य जोर से मेरे अंदर छोड़ दिया. उनके वीर्य की गर्मी जैसे मेरी चूत के अंदर महसूस हुयी मैं एकदम से अकड़ गई और मुझे अंजाना सा सुख मिला.

हम तीनो ऐसी ही हालत में उसी बिस्तर पर सो गए.

मैं रात भर सोती रही और सवेरे ९ बजे मेरी आँख खुली.देखा चाची मेरे बगल में दूध का ग्लास लेकर बैठी हैं, वो ही मेरा चेहरा सहला रही थी जिससे मेरी आँख खुल गयी थी. उन्होंने मुझे पुचकारते हुए उठाया और दूध का गिलास देते हुए बोली,"कनिका बिटिया कैसी हो? अच्छा लगा?" मै चाची की तरफ देख के शर्मा गयी. लेकिन मुझे अपनी टांगो के बीच अभी दर्द सा महसूस हो रहा था. मैंने चाची से कहा," चाची वहां दर्द है."

उन्होंने मेरा सर सहलाते हुए कहाँ,"पगली पहले ऐसा ही होता है, आज रात तेरे सामने तेरे चाचा मेरे साथ करेंगे और फिर तुम्हरी चूत मारेंगे, तब तुमको ज्यादा मजा आएगा."

मै उनकी बात सुन कर अंदर ही अंदर बहुत रोमांचित हो गयी और रात का बेसब्री से इंतज़ार करने लगी. उस पूरी रात हमलोग नही सोये. कितनी बार मै झड़ी मुझे याद भी नही.

5 दिनों तक मैनेजर चाचा प्रिंसिपल चाची मुझे चोदते रहे और चुदाई सुख देते रहे . फिर मेरे पिता जी और माँ, लखनऊ से वापस आगये. उनके आने के बाद तो इतनी खुली छूट मुझे नही मिली लेकिन जब भी मौका मिलता था चाची किसी बहाने से मुझे अकेले में बुलवा लेती और चाचा मुझे चोद देते थे. एक साल बाद ही मेरे माँ बाप का तबादला हो गया और फिर मै मैनेजर चाचा और प्रिंसिपल चाची से कभी भी नही मिली. लेकिन मुझे आज भी उनकी याद आती है.
 

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जिंदगी झंड बा, फिर भी घमंड बा ..
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बहन को बिंदास बनाया



मित्रो, यह बात कुछ साल पहले की है.. मैं अपने गाँव में अपने परिवार के साथ रहता था.. !! लेकिन, वहां स्कूल के आगे पढाई के लिए कॉलेज नहीं था.. !! इसलिए, पिताजी ने मुझे शहर में पढ़ने के लिए भेज दिया.. !!
शहर में आने के बाद, मुझे यहाँ का असली नज़ारा देखने को मिला।
असल में, अभी तक तो हम यूँ ही केवल घूमने-फिरने आते थे.. !! वह भी, साल दो साल में कोई एक आधी बार.. !! लेकिन, शहर का असली रंग तो मुझे यहाँ आकर ही पता चला.. !!
शहर में रहने के अपने खर्चे भी बहुत हैं.. !! इस कारण, मैं कुछ कमाने के बारे में सोचता रहता था.. !! क्यों की, मैं अपने घर की आर्थिक स्थिति, अच्छी तरह से जानता था.. !! जिस कारण, मैंने सोचा क्यूँ ना मैं भी अपने कुछ दोस्तो की तरह, पार्ट टाइम नौकरी ढूँढ लूँ.. !!

लेकिन, यहाँ बिना जान पहचान के, कोई अच्छी जगह नौकरी नहीं मिल पा रही थी.. !! इस कारण, मैंने पिताजी के एक पुराने दोस्त जिनका की फोटो स्टूडियो था, उनसे मदद माँगी.. !!
तो, वो बोले – यदि, तुम चाहो तो मेरे साथ मेरे फोटो स्टूडियो में हाथ बँटा सकते हो… काम सीखने के साथ-साथ, तुम्हें कुछ पैसों की मदद भी हो जाएगी…
मैं तुरंत ही तैयार हो गया और अगले ही दिन से, उनके यहाँ रोज़ शाम के समय काम के लिए जाने लगा.. !!
यह काम मेरे लिए नया तो था, किंतु इंट्रेस्टिंग होने के साथ-साथ एक नया हुनर भी सीखने को मिलने लगा।
जल्दी ही, मैंने फोटो प्रिंटिंग और डेवेलपमेंट सीख लिया और अंकल ने मुझे अब फोटो खींचने की बारिकयाँ भी सीखना शुरू कर दिया।
अंकल ने अपने स्टूडियो के ऊपर के जो तीन कमरे खाली थे, उनमें मेरे रहने की व्यवस्था कर दी।
हमारा स्टूडियो, शहर के सबसे अच्छे रहवासी एरिया में था.. !! जहाँ पर, अच्छे अच्छे रहिसजादे रहा करते थे और अक्सर, वो हमारे यहाँ फोटो सेशन या पोर्टफोलीयो भी बनवाने आते थे.. !! क्योंकि, अंकल एक समय में शहर के बड़े नामी फोटोग्राफर रह चुके थे और उन्होंने अपने समय में कई बड़ी-बड़ी फोटोग्राफी की प्रतियोगता जीती थीं.. !!
लेकिन, उनका एक ही बेटा था जो की विदेश चला गया था.. !! इस वजह से, अंकल अब कुछ खास नहीं करना चाहते थे.. !!
परंतु ना जाने क्यूँ, मेरे साथ रह कर उनमें कुछ बदलाव आने लगा और वो फिर से नये, लेटेस्ट, आधुनिक, डिजिटल, हाइ-टेक और महँगे कैमरे ले कर आए और साथ ही साथ, आधुनिक कंप्यूटर सिस्टम भी लाए।
उन्होंने, इतना सब पैसा अपने पुराने फोटो के संग्रह को, डिजिटल में बदल कर के ऑनलाइन साइट्स पर बेच-बेच कर इकट्ठा किया।
इसके साथ ही, मेरी रूचि देख कर उन्होंने मुझे एक सेंटर में आधुनिक ट्रैनिंग के लिए भी भेजा.. !! जहाँ पर, मैंने लेटेस्ट टेक्नोलॉजी की मशीन्स के साथ काम करना सीखा.. !!
इधर, मेरे कॉलेज में जीतने भी दोस्त, जान पहचान वाले थे अब वह सभी हमारे यहीं पर अपने फोटो और एल्बम आदि बनवाते थे।
इस कारण, अब हमारा स्टूडियो पहले की तुलना में काफ़ी अच्छा चलने लगा था।

अंकल का एक छोटा सा बंगला भी स्टूडियो के ठीक पीछे था, जो की पीछे से इंटर कनेक्ट भी था।
बंगले में, एक स्विमिंग पूल और छोटा सा जिम भी बना था.. !! जिसमें, मैं रोज़ एक्सर्साइज़ करता था.. !!
घर और स्टूडियो एक होने से, मुझे पढाई का समय भी अच्छा-ख़ासा समय मिल जाता था और इसी कारण, मैंने कॉलेज में अपना पहला साल अच्छे नंबर्स से पास किया।
अब मैंने सोचा, परीक्षा का परिणाम आने के बाद, मैं अपने घर का एक चक्कर ज़रूर लगा आऊंगा.. !! क्योंकि, मुझे घर से आए लगभग एक साल होने आया था और इस बीच मैं केवल फोन से ही अपने घर वालों से जुड़ा हुआ था.. !! लेकिन, पढाई और काम की अधिकता के चलते, मैं नहीं जा पा रहा था.. !!
इधर, पिताजी की तबीयत भी खराब रहने लगी थी.. !! इस कारण, वह अपनी दुकान भी नहीं खोल पा रहे थे.. !!
तब अंकल बोले – जा थोड़े दिन, घर घूम आ…
जब मैं लगभग एक साल के बाद, घर पहुँचा तो मुझे देख कर सभी हैरान हो गये थे.. !! क्योंकि, एक्सर्साइज़ से मेरा बदन काफ़ी गठीला हो गया था और शहर में रहने के कारण, मेरा रहन सहन भी काफ़ी आधुनिक हो गया था.. !!
इधर, मैं भी अपनी बहन को देख कर अचरज में पड़ गया.. !! क्योंकि, उसे मैं बच्ची छोड़ गया था और इस एक साल में, वो पूरी जवान हो गई थी.. !!
उसका मांसल, भरा पूरा बदन देख कर मेरी निगाहें उसके शरीर के नाप तोल में लग गईं.. !! क्योंकि, अब तो मैं एक फोटोग्राफर भी बन गया था.. !! इस कारण, मैं अब उसमें सुंदरता के साथ-साथ, उसका फिगर भी माप रहा था.. !!
जबकि मेरी बहन, इसके उल्टे मुझ पर ही लट्टू हो रही थी और मौका मिलते ही कहने लगी – भैया, शहर में सभी लड़के आपकी तरह ही स्मार्ट होते हैं, क्या… ?? मेरी सारी सहेलियाँ, आपको एक नज़र देखने के लिए मचल रही हैं और मैं खुद आपके साथ-साथ ही, सारा गाँव घूमना चाहती हूँ…
इधर, मेरी बहन का यहाँ स्कूलिंग का आख़िरी साल था और परीक्षा का परिणाम आने को ही था.. !!
इसी कारण, उसे भी अपनी दूसरी सहेलियों की तरह आगे पढाई के लिए शहर में आना पड़ेगा।
जिन सहेलियों के शहर में रिश्तेदार थे, वह तो उनके घरों में रह लेगीं.. !! लेकिन, जिनका कोई नहीं था, वे सभी महँगे हॉस्टल में रह कर पढाई करने वाली थीं.. !!
हमारे घर में माताजी और पिताजी, दोनों ही पढ़े लिखे थे.. !! इस कारण, वह दकियानूसी विचारो के तो नहीं थे.. !!
वैसे तो, उन्हें मेरी बहन के हॉस्टल में रहने में कोई आपत्ति नहीं थी.. !! लेकिन, वह हॉस्टल या कमरे के खर्च को लेकर, ज़्यादा चिंतित थे.. !!
तब मैंने, अंकल से बात की तो वो बोले – पागला है, क्या… ?? अपना इतना बड़ा घर होते हुए, तू अपनी जवान बहन को हॉस्टल में रखना चाहता है… जल्दी से, बहन के साथ घर आजा… यहाँ उसका किसी अच्छे कॉलेज में दाखिला करवाने में भी समय लग जाएगा…
अंकल से बात करने के कुछ ही दिन बाद, मेरी बहन का परीक्षा का परिणाम आ गया और मैं अपनी बहन को साथ लेकर, शहर आ गया।
उसे देखते ही, अंकल बोले – क्या पगले… तूने इस जन्नत की हूर को, अभी तक घर में बैठा रखा था… अरे, यह तो बड़ी हो कर टॉप मॉडल भी बन सकती है… वाह क्या लंबाई है, इसकी… और ऐसा कह कर, उन्होंने उसके रहन सहन आदि में काफ़ी बदलाव लाने की सलाह दे डाली और मुझे कहा – देख, हमें इसको बिल्कुल अपने शहर की लड़की बनाना पड़ेगा… क्योंकि, यदि यह नहीं बदली तो कॉलेज में सभी लोग गँवार, देहाती और ना जाने क्या-क्या कह कर, इसका मज़ाक उड़ायेंगे…
कुछ एक दो दिन बाद ही, अंकल ने सब से पहले तो मुझे और मेरी बहन को उनकी एक स्थाई लेडी ग्राहक की ड्रेस स्टोर पर भेजा, जो की शहर के सबसे बड़े माल में था।
वहाँ सभी जवान लड़के लड़कियों के ड्रेस को देख, मेरी बहन शरमा रही थी और कहने लगी – भैया, यदि यहाँ यही पहनना पड़ा तो मैं वापस भाग कर घर चली जाउंगी…

तो, मैंने कहा – गुड़िया, तू थोड़े दिनों में ही यहाँ के रंग में रंग जाएगी… मुझे देख, मैं क्या भाग कर घर आ गया था…
फिर, कपड़ो की दुकान में उस लेडी ने मेरी बहन को इतने गहरे गले के कपड़े ट्राइयल के लिए दिए की वह शरम के कारण, उन्हें पहन कर ट्राइयल रूम से भी बाहर नहीं आ पा रही थी।
इसके अलावा, उसे कुछ टाइट टी-शर्ट्स, जीन्स, मिनी स्कर्ट्स और घर में पहनने के लिए बड़े गले के लूज़र, स्पोर्ट्स निकर, बनियान और अच्छी किस्म के ब्रा और पैंटी भी दिए।
इन सबका बिल तो हज़ारो में था.. !! लेकिन, उसने हमसे केवल बिल पर साइन करवाए और कहा – जल्दी से, इन सबको पहन डालो… क्योंकि नया कलेक्शन, जल्दी ही आने वाला है…
घर आने पर, अंकल ने मेरी बहन को बोला की अगर वह चाहे तो उनके साथ पीछे बंगले में भी रह सकती है… वैसे भी, वहां उनके अलावा और कोई नहीं रहता… लेकिन, मेरी बहन ने उनको बड़ी सहजता से कहा की थोड़े दिन भैया के साथ रहूंगी और यदि कुछ परेशानी आई तो आप तो हैं ही…
अंकल भी उसके सिर पर हाथ रखे बिना, ना रह सके।

उस रात, हम दोनों भाई बहन नये लाए कपड़े देख रहे थे तो वह उनको दिखाने में भी शरमा रही थी।
उसकी एक टी-शर्ट पर भी बड़े स्टाइल में “मिल्क” लिखा था।
जबकि, वास्तव में मैं खुद भी उसके इतने टाइट टी-शर्ट को देख कर अपनी निगाहें उसके सीने से नहीं हटा पा रहा था। क्योंकि, वह ग़ज़ब की, मांसल देह की लड़की थी।
जब उसने मिनी स्कर्ट पहना तो वह पर्दे से बाहर ही नहीं आना चाह रही थी क्योंकि उसकी सफेद भरी पूरी केले के तने की तरह टांगें, घुटनों के ऊपर तक दिख रही थीं.. !!
जबकि, टाइट जीन्स में उसके कूहलों का आकर देख कर मेरा धेर्य जवाब दे गया और मैं तत्काल बाथरूम का बहाना बना कर, टाय्लेट में जाकर हस्तमैथुन कर बैठा।
ऐसा मैंने पिछले एक बरस में, शायद दो या तीन बार ही करा होगा.. !! जब मैं, अपने ऊपर काबू नहीं रख पाया.. !!
हस्तमैथुन के समय, मैं ना चाहते हुए भी अपनी बहन को ही विचारो में ला रहा था।
मेरा बस अपने पर ही नहीं चल रहा था…
खैर, रात में मेरी बहन तो पलंग पर सो गई और मैं वहीं सामने पुराने सोफे पर पड़ा रहा.. !!
अगले दिन, सुबह रोज़ की तरह जब मेरी आँख खुली तो मैंने देखा की मेरी बहन घर से लाया हुआ पुराना गाउन पहने सोई थी.. !! जो की, उसके घुटनों तक चड़ा हुआ था.. !!
उसकी गोरी-गोरी पिंडलियाँ देख, मेरा मन फिर खराब होने लगा।
लेकिन, मैं अपना मन कड़ा कर उठा और दैनिक काम निपटा कर अंकल के बंगले के पीछे, जिम में चला गया।
लगभग आधे घंटे बाद, जब मैं जिम से बाहर आया तो मेरी निगाह हमारे कमरों की खुली खिड़की पर पड़ी।
मतलब, मेरी बहन जाग चुकी थी।
मैंने अपना स्विम सूट पहना और पूल में कूढ़ पड़ा।
मुझे बार-बार ऐसा लग रहा था मानो कोई, मतलब मेरी बहन चोरी छुपे मुझे खिड़की से चुपचाप देख रही है.. !! लेकिन, मैं उसे देख नहीं पाया.. !!

जब मैं ऊपर पहुँचा तो देखा की मेरी बहन नहा कर तैयार हो चुकी थी और नाश्ता बना रही थी।
मैंने उसे कहा की तेरे आने से अब मुझे खाने पीने की चिंता नहीं करना पड़ेगी… लेकिन, तेरी परेशानी बड जाएगी…
तो वह हंस पड़ी और बोली – भैया, आप मेरे लिए इतना सब कर रहे हैं और क्या मैं अपने भाई को खाना खिला कर, घिस जाउंगी…
दोपहर में, जब मेरी बहन नीचे स्टूडियो में आई तो वहां डिसप्ले में मेरे और अंकल के पीछे लगी, मॉडल लड़कियों के फोटो देख चक्कर में पड़ गई।

तब अंकल बोले की शाम चार बजे वही कल वाली उनकी कस्टमर आएगी जोकि मेरी बहन को ब्यूटी पार्लर ले जाएगी, जहाँ इसका हुलिया बदल दिया जाएगा।
रात लगभग आठ बजे, जब मेरी बहन वापस पार्लर से आई तो मैं उसे पहचान भी नहीं पाया.. !! क्योंकि, उसके बाल बड़ी स्टाइल में कट चुके थे उनपर सुनहरी हेड लाइट हो चुकी थी.. !!
पूरे बदन की वैक्सिंग होने से, वह और अधिक गोरी और चिकनी लगने लगी थी।
वह इतनी ज़्यादा खूबसूरात लग रही थी की मैं सगा भाई होकर, उस पर से निगाह नहीं हटा पा रहा था…
इधर, अंकल की कस्टमर इस बात पर मेरी बहन पर चिढ़ रही थी की मेरी बहन वही घर से लाए हुए कपड़े पहन कर, घूम रही थी.. !! वैसे तो, वह कपड़े भी कोई बुरे नहीं थे.. !!
हमारे गाँव में, शायद वह बेहतरीन हो सकते थे.. !! लेकिन, उनमें मेरी बहन पूरी तरह ढकी हुई थी।
तब उन्होंने कमरे में जाकर, मेरी बहन के सारे पुराने कपड़ों का बेग उठाया और उसे अंकल की स्टोर रूम में पटकवा दिया और कहा की जल्दी से शहरी बन जाओ क्योंकि जब थोड़े दिन बाद कॉलेज जाना पड़ेगा तो वहां तुम्हें सभी गाँव वाली बहन जी, कह कर बुलायेंगें…
अगले दिन से ही, मेरी बहन नये लाए कपड़े पहनने लगी.. !! जिनमें, वह काफ़ी मॉडर्न नज़र आती थी.. !!
टाइट टी-शर्ट पहन कर, मुझसे निगाह मिलने में भी वह शरमा रही थी।
मैंने कहा की यह सब तेरी भलाई के लिए ही है और यहाँ सब घर वाले ही तो है…
तब जाकर, वह कुछ शांत हुई।
अंकल ने अपनी जान पहचान के चलते, शहर के सबसे अच्छे कॉलेज में उसके दाखिले की जोड़ तोड़ शुरू कर दी थी।
इधर, मेरी बहन दोपहर में फ़ुर्सत के समय स्टूडियो में आकर बैठ जाती.. !!
तब कई नई लड़कियाँ जो हमारे यहाँ पोर्टफोलीयो बनवाने आतीं, वह यही पूछतीं की क्या यह भी, कोई मॉडल है… ?? या कोई कहता की इनसे, मॉडेलिंग क्यों नहीं करवाते… ??
नई मॉडल लड़कियों को “बिंदास अंदाज़” में देख, मेरी बहन शरमा जाती.. !! क्योंकि, आउटडोर पर मॉडेल्स हमारे सामने, बंद कमरे में अकेले में, बड़े छोटे आउटफिट्स में रहतीं और कई तो बहुत ही छोटे छोटे कपड़ो में फोटो सेशन करवातीं।
जब उसने हमारे कुछ बड़े ही बोल्ड फोटो सेशन देखे तो उसके मुंह से निकल गया की इन लड़कियों को जब नंगे ही रहना है तो यह कमर के सामने, यह ज़रा सा कपड़ा भी क्यों पहनती हैं… ??
जब अंकल नहीं थे और मैं भी अपने काम में लगा था.. !! तब ना जाने कब, उसने कंप्यूटर सिस्टम में पड़ी कुछ हिडन फाइल्स खोल लीं और उनमें हमारे कुछ कस्टमर्स के पर्सनल फोटोस, जो कि उन्होंने खुद अपने डिजिटल कैमरे से शूट किए थे, उन्हें देख लिए.. !!
यह फोटो, हमारे पास प्रिंटिंग के लिए आते हैं और इन्हें अंकल या मैं खुद पर्सनली डेवेलप करते हैं जो की बड़े विश्वास का काम है और यह काम, शहर के कुछ चुनिंदा लोग ही करते हैं क्योंकि इन पर्सनल फोटोस का यदि कोई मिसयूज़ करे, तो ग़ज़ब हो जाए.. !!
यह सब देख, वह कहने लगी की भैया, कुछ भी कहो… लेकिन, अंकल और तुम्हारे दोनों के शूट किए फोटोस ऐसे लगता है, जैसे किसी विदेशी स्टूडियो का काम है… हाथ में क्या सफाई है… जैसे, यह फोटो अभी बोल पड़ेंगें…
अगले दो तीन दिनों में, मैंने मेरी बहन में काफ़ी बदलाव महसूस किया।
अब वह काफ़ी खुल गई थी और वह अपने नये कपड़ो में ही रहती थी।
एक बात मैंने और यह महसूस की वह अब मेरे सामने गहरे गले की लूज़र या टी-शर्ट मे कंफर्टबल रहती थी.. !! नहीं तो, शुरू-शुरू में उसका एक हाथ अपने गले और सीने पर ही रहता था.. !!
रात में, वह एक नाइट सूट पहनती थी.. !! जिसमें, एक घुटनों के ऊपर तक की निकर और एक बिल्कुल पतले कॉटन के कपड़े का बड़ा ही मुलायम पिंक कलर का छोड़े गले का टी-शर्ट था.. !! जिसके सीने पर “दो दूध की बॉटल्स का स्केच” प्रिंट था.. !!
देखने में, बड़ा अजीब लगता था.. !! लेकिन, यह ड्रेस वह केवल घर में ही पहनती थी.. !!
आज रात में, बड़ी गरमी थी इस कारण मैं तो केवल बनियान और नेकार में सो गया.. !!
बहन को सामने से आता देख, उसके झूलते हुए बड़े-बड़े बूब्स पर निगाह पड़ते ही मैं समझ गया की उसने भी गरमी के कारण, अपनी ब्रा नहीं पहनी है.. !!
थोड़ी देर बाद, जब मैं बाथरूम में गया तो वहां उसकी ब्रा खूंटी पर टंगी देख.. !! मेरा अंदाज़, पक्का हो गया.. !!
मैंने उसकी ब्रा को हाथ में लिया और उसे सूंघने लगा.. !! जिसमें से, उसके बदन की बड़ी ही मादक खुश्बू महसूस हो रही थी.. !!
ब्रा का साइज़ देख, मुझे लगा की इसमें उसके इतने बड़े-बड़े बूब्स कैसे समाते होंगें क्यूंकी वह ब्रा, मुझे छोटे साइज़ की लग रही थी.. !!
जब मैं बाहर आया तो वह आँख बंद किए, पलंग पर चित लेटी थी और मैं टीवी देखने लगा।

लगभग एक घंटे बाद, जब मैं सोने के लिए टीवी बंद कर रहा तो मेरी आँखे मेरी बहन के बदन पर टिक सी गईं.. !! क्योंकि, बिना ब्रा के उसका टी-शर्ट उसके स्तनों पर पसीने के कारण चिपक सा गया था और उसकी निपल्स के उभार, साफ़ दिखाई दे रहे थे.. !!
उसने अपना एक हाथ, अपने टी-शर्ट में डाल रखा था.. !! जिससे, उसका मक्खन सा गोरा पेट नज़र आ रहा था.. !!
यह देख, मैं पागल सा हो गया और मैं लाइट बंद कर अपने लिंग को हाथ से सहलाते हुए सो गया।
लेकिन, मेरे मन में अजीब सी बेचैनी बनी रही और मेरी बहन के बारे में ना जाने कैसे कैसे विचार, मेरे मन में आते रहे।
रोज़ की तरह, सुबह जब मैं उठा तो मैंने पाया की मेरी बहन का टी-शर्ट पूरा उठा हुआ है और उसका गोरा पेट, लगभग सीने तक दिखाई पड़ रहा था।
झुक कर देखने पर, उसके मांसल स्तनों के उभार भी दिखाई पड़ रहे थे।
उसने अपनी दोनों टाँगों को इतना फैला रखा था की चाहे तो निकर में से, उसकी जांगों के जोड़ दिखाई पड़ जाएँ।
जब मैं, टाय्लेट से बाहर आया तो उसने मेरे लिए चाय तैयार कर रखी थी और जब वह मुझे चाय देने के लिए झुकी तो मुझे उसकी “छोड़े गले वाले टी-शर्ट” में से उसके गोरे-गोरे मादक स्तनों का बड़ा ही मज़ेदार नज़ारा देखने को मिला।
जब मैं जिम से बाहर आया तो मैंने देखा की मेरी बहन भी स्विमिंग पूल के पास खड़ी है।
उसको सामने पाकर, मैं थोड़ा हिचकिचा सा गया.. !! क्योंकि, आज तक मैं कभी उसके सामने केवल स्विमिंग कॉस्ट्यूम में नहीं आया था और जब मैं पसीना सूखने का इंतज़ार कर रहा तो वह बोली की भैया तुम्हारी पीठ पर बहुत सा तेल लगा है… यदि, तुम चाहो तो मैं इसे साफ़ कर देती हूँ… और ऐसा कह, वह मेरी पीठ को तोलिये से पोछने लगी और बोली – भैया, आपके जैसे मर्द को पाने के लिए, लड़कियाँ अपना सब कुछ दाँव पर लगा दें…
वह बड़े बिंदास अंदाज़ में, मेरी पीठ पर हाथ फेरती हुए मेरे सीने पर भी अपना हाथ चलाने लगी।
जिम से आने के कारण, मेरे चेस्ट बहुत ही साफ़ उभार लिए हुए थे.. !! जिनको, वह घुरे जा रही थी.. !!
जब वह आगे आकर, मेरे सीने का पसीना पोंछ रही थी तब मुझे फिर से उसके सीने के उभारों का दीदार हो रहा था।
मुझे लगा की शायद वह जानमुझ कर, अपना फिगर मुझे दिखा रही थी और जब मैं स्विमिंग करने पानी में कूदा तो उसने भी अपने पैरों को पूल में लटका लिया और कहने लगी की भैया, मुझे भी तैरना सीखना है…
मैंने कहा – क्यूँ नहीं… चाहे तो, अभी से आजा…
तो, वह बोली – आपके सामने मुझे शर्म आएगी और ना ही, मेरे पास कोई स्विम सूट है…
इस पर, मैं बोला – लेडीज प्रशिक्षक तो बहुत महँगा पड़ेगा और बिकनी तो ढेर सारी स्टूडियो में पड़ीं हैं… (क्योंकि, मॉडेल्स के फोटो सेशन के लिए रखना पड़ती हैं।)
वह बोली की उन बिकनियों को तो मैं सात जन्म में भी ना पहनूं… वो केवल कपड़े की चिंदी भर है… कोई भला, अपने भाई के सामने भी इतना बेशर्म हो सकता है…
तो मैं हंस पड़ा और मैंने उसका एक हाथ खींच कर, उसको पानी में खींच लिया।
वह चिल्लाती रह गई और मैंने उसे पूरा भीगा दिया।

भीगने से उसका टी-शर्ट उसके बदन पर चिपक सा गया और उसके स्तनों का आकर, साफ़ झलकने लगा।
वह खुद भी, इस बात को महसूस करने लगी।
लेकिन, पूल में खड़े रहने के लिए उसने अपने दोनों हाथो से पाइप पकड़ रखा था।
खैर, वह मेरे ऊपर चिल्लाती हुई बाहर आ गई।
लेकिन, बाद में बोली की चलो, एस बहाने मेरा थोड़ा डर तो कम हुआ…

दिन में, अंकल और उनकी कस्टमर ने कहा की कॉलेज शुरू होने से पहले क्यों ना हम मेरी बहन का एक नॉर्मल फोटो सेशन करें… जिससे, की बहन का आत्म विश्वास डेवेलप हो सके…
मुझे भी यह बात कुछ जँची और हमने, मेरी बहन को तैयार होने के लिए कहा।
पहला टेस्ट फोटो सेशन देख कर, हम सभी का हौसला बड़ा.. !! क्योंकि, उसका चेहरा बड़ा ही “फोटुजेनिक” था और एक मीठी सी मुस्कान, उसके चेहरे पर बड़ी खिल रही थी.. !!
हमने उसके और कई फोटो शूट किए, जिनमें वह अलग अलग ऑउटफिट्स में थी।
इन में से कुछ में, उसके बदन के भूगोल की थोड़ी सी झलक भी दिखाई पड़ रही थी.. !! जिसके लिए, मेरे कहने पर वह बड़ी मुश्किल से राज़ी हुए थी.. !!
हमारे प्रोफेशन में, इसे “आउटर शूट” कहते हैं।
अंकल ने सभी फोटो का मुआयना करने के बाद, कहा की एक बात तो है, लड़की में बहुत संभावना है… थोड़ी मेहनत करे, तो बस मज़ा आ जाएगा…
जिन फोटोस में उसका बदन दिखाई पड़ रहा था, उन्हें बारीकी से अपनी अनुभवी आँखों से देख, उन्होंने मुझे बताया की उसके बदन में कहाँ कहाँ एक्सट्रा चर्बी है और कहाँ कहाँ, उसका फिगर सही नहीं है। यदि, अभी से वह यह सब सुधरे तो वास्तव में लड़की कमाल कर सकती है… भगवान ने, उसे रंग रूप और हुस्न से नवाज़ा है और अब बस उसे केवल थोड़ी मेहनत कर अपनी बॉडी को सही लाइन लेंथ में लाना होगा… टोन उप, करना होगा… और कहा की इस सबके लिए उसे कोई खर्चा भी नहीं करना होगा… तुम उसके सगे भाई हो, तुम से बढ़कर उसे और कौन गाइड करेगा… उसे अपने बंगले के पीछे जिम में ले जाकर, वर्कआउट कराओ… स्विमिंग भी, उसके किए बड़ी मददगार रहेगी…
यह सब बात, जब मैंने अपनी बहन को बतलाई तो वह अपनी सुंदरता की तारीफ सुन, एक आम लड़की की तरह बड़ी खुश हुई और जब उसने, अपने थोड़े ओपन फोटो देखे तो कहने लगी की मैंने तो इतने ओपन फोटो नहीं खिंचवाए…
तो मैंने, उसे समझाया की किस तरह कैमरे के लेनस को हम एडजस्ट कर, केवल उसी चीज़ को दिखाते हैं जो की ज़रूरी है और इस तरह बाकी शरीर बैक ग्राउंड की तरह प्रतीत होता है।
मैंने पाया की फोटो देखने के बाद, उसका आत्म विश्वास कैसे बड़ा महसूस हो रहा था.. !!
जब अगले दिन, हम दोनों भाई बहन जिम में पहुंचे तो उसने मेरे कहे अनुसार वर्कआउट शुरू किया और मैंने उसे पहली बार, अपने इतनी पास महसूस किया।
लेकिन, उसके टी-शर्ट पहनने के कारण मुझे उसके शरीर के मसल्स में होने वाले बदलाव पता नहीं पड़ रहे थे.. !! इसलिए, हम दोनों उसी दिन माल जाकर अंकल की कस्टमर के शोरुम से, कुछ बढ़िया किस्म की स्पोर्ट्स ड्रेसस ले आए.. !!
तब उन्होंने मेरी बहन को स्विमिंग कॉस्ट्यूम्स भी दे दी.. !! जिन्हें, देखकर मेरी बहन ने उन्हें पहनने से, साफ़ मना कर दिया.. !!
मैंने उससे कहा की ले तो लो… बाद में, काम आएँगीं…
अगले दिन, जिम में मेरी बहन बड़ी शरमा रही थी तो मैं बोला की देख, यदि जीवन में कुछ बनाना है तो यह शर्म तो तुझे छोड़नी पड़ेगी… क्योंकि, अभी तो यहाँ मैं तुझे गाइड करने वाला, तेरा भाई हूँ… जिसके, आगे तू छोटी से बड़ी हुए है… नहीं तो, आम मॉडेल्स को अजनबियों के बीच जाकर, यह सब ट्रैनिंग लेनी होती है… और वहां, यह सब नहीं चलता… यह शरम संकोच छोड़ और बोल्ड बन… क्योंकि, जिसने की शरम उसके फूटे करम… यहाँ, तेरे मेरे सिवा कोई नहीं आने वाला… क्योंकि, अंकल तो सुबह जल्दी ही अपने दोस्तों के साथ क्लब चले जाते हैं और वापस टेनिस खेलकर, लगभग दस बजे वापस आते हैं… उन्हें तो, यहाँ पर आए, महीनों बीत जाते हैं और यहाँ कोई अड़ोसी पड़ोस भी नहीं है… क्योंकि, केवल अपने रूम ही दो मंज़िला बने हुए हैं बाकी आस पास, सभी बंगले सिंगल फ्लोर के है…
आज, मेरी बहन जिम में एक स्पोर्ट्स ब्रा पहने हुए थी.. !! जिसका, गला बड़ा ही छोटा था और उसमें से उसके मांसल उभार बड़ी खूबसूरती के साथ, बाहर झलक रहे थे.. !!
बाहों के नीचे से, उसका आधे से ज़्यादा स्तन बाहर आने को मालूम पड़ रहा था.. !!
उसका गोरा पेट भी पूरा दिखाई पड़ रहा था और नीचे निकर उसकी नाभि से लगभग चार इंच नीचे बँधी थी.. !! जिस कारण, उसका पेट का काफ़ी बड़ा हिस्सा, साफ़ झलक रहा था.. !!
निकर भी बड़ी टाइट थी.. !! उसके कूल्हों के उभारों से, मेरी निगाहें हटने का नाम ही नहीं ले रही थीं.. !!
नीचे लंबी मांसल गोरी टाँगें, बस कयामत ही लग रही थीं.. !!
मैं भी स्पोर्ट्स निकर में था.. !! जिसमें से, मेरा तना हुआ लिंग साफ़ झलक रहा था और शायद वह यह समझ चुकी थी.. !! क्योंकि, उसकी निगाहें भी चोरी छुपे मेरे लिंग की तरफ चली ही जाती थीं.. !!
जब वह झुककर, वर्क आउट करती तो उसके उभार आधे से ज़्यादा बाहर आने को बेताब होते और कई बार मुझे उसे सही एंगल समझाने के लिए, उसके पीछे से चिपक कर उसे बताना पड़ता।
इस पोज़िशन में, मेरा उत्तेजित लिंग अपनी सग़ी बहन की गांद की दरार में घुसने को मचलता।
बाहर आकर, जब हम पूल पर आए तो मेरी बहन बहुत शरमाने लगी।
स्विमिंग कॉस्ट्यूम, कोई इतनी भी छोटी नहीं थी जितनी की, हमारे स्टूडियो में थी.. !! लेकिन, एक घरेलू लड़की के लिए बिकनी पहनना, बहुत बड़ी बात थी.. !!
खैर, हिम्मत कर वह बिकनी पहन आई.. !! लेकिन, उसने अपने ऊपर से तोलिया नहीं हटाया।
तब बड़ी मुश्किल से, उसे समझा कर मैं उसे पूल में लाया और धीरे-धीरे उसे तैरना सिखाया।
इस समय, मैंने किस तरह अपनी भावनाओं को काबू में रखा यह सिर्फ़ मैं ही समझ सकता हूँ।
इस तरह, यह अब हमारा डेली का शेड्यूल बन गया था…

इस बीच, मैंने मेरी बहन के कई सारे फोटो शूट किए और अब तो वह खुद खुलकर, अपने मांसल शरीर का नज़ारा पेश करती थी।
साथ ही साथ, अब उसके कॉलेज की पढाई भी चल रही थी।
अंकल ने जब उसके यह सब पोज़ देखे तो उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं.. !!
कुछ फोटो तो हमने, उसकी बड़ी ही बोल्ड शूट कीं.. !! जो की, शायद अश्लील की श्रेणी में आतीं.. !! लेकिन, अब मेरी बहन मुझसे काफ़ी खुल चुकी थी.. !! एसलिए, उसने ऐसा प्रोफेशनलिज्म दिया और बड़े ही बिंदास, फोटोशूट करवाए.. !!
अंकल बोले की ऐसी ही प्रैक्टिस चालू रखो और अच्छा समय आने दो… जब हम इसको, बाक़ायदा मॉडलिंग की दुनिया में उतारेंगें… तब तक, इसकी कॉलेज एजुकेशन चलने दो…
उसकी कई सारी सहेलियाँ भी अब मेरे पास आकर, अपना पोर्टफोलीयो बनवा चुकी थीं।
उसकी दो तीन सहेलियाँ, जो की हॉस्टल में थी वो तो मेरे ऊपर लट्टू थीं।
जब भी वो आतीं, बस मुझसे चिपकने की बहाना ढूंढ़ती.. !! वह मेरे सामने, कई बार बहुत ज़्यादा खुलकर एक्सपोज़ वाले फोटो शूट का कह चुकी थीं.. !! लेकिन, मैं खुद उनसे दूरी बनाए रखना चाहता था.. !!
तभी पता चला की वे लड़कियाँ किसी ग़लत संगत में पड़ गई हैं और यह बात मेरी बहन भी जानती थी की उन लड़कियों का मिलना जुलना, ग़लत लड़कों के साथ था।
दो लड़कियों ने तो बाक़ायदा मुझसे अपने बहुत ही गंदे गंदे फोटो डेवेलप करवाए.. !! जिनके बारे में, मैंने अपनी बहन को नहीं बताया.. !! लेकिन, उन्होंने खुद मेरी बहन को झूठ कह कर फोटो दिखाए और कहा की यह फोटो मैंने शूट करे.. !!
परंतु, बाद में मैं ने अपनी बहन को सारा मामला समझाया।
इस बीच, पापा की तबीयत खराब रहने लगी और हमें अपने घर भी पैसे भेजने पड़ते थे.. !!

इधर, अंकल का जो लड़का विदेश में था.. !! उसने, कोई लफड़ा कर दिया और अंकल को भाग कर वहां जाना पड़ा और वहां पर उनका पैसा पानी की तरह बहाना पड़ा… जो की, हमें यहाँ से भेजना पड़ा.. !! जिस कारण, हमें यहाँ पर बड़ी परेशानी होने लगी.. !!
थोड़े दिनों की बात होती तो ठीक था। लेकिन, ऐसा होते-होते महीनो बीत गये।
तब एक दिन, मेरी परेशानी को देख मेरी बहन बोली की भैया, मैं इस मुसीबत के समय आपकी क्या मदद कर सकती हूँ…
तो मैंने उसे कहा की तू अभी पढाई कर रही है और ऐसे समय में तेरा कुछ काम करना, तेरी पूरी एजुकेशन को डिस्टर्ब कर सकता है… अंकल के ना होने से, मैं भी अकेला पड़ गया हूँ… ऊपर से यहाँ शहर में रहने, स्टूडियो, बंगले का रख रखाव आदि सब के खर्चे के बाद, हमें अपने घर और माताजी पिताजी के खर्चे के लिए भी पैसा भेजना पड़ रहा है… जो, अब हमारे लिए बहुत मुश्किल होता जा रहा है…
उस रात में, मेरी बहन बोली की भैया, क्यों ना मैं अब मॉडेलिंग करना शुरू कर दूं… अंकल भी यही चाहते थे… चाहे, फिर कुछ समय पहले ही क्यों नहीं…
इस बात पर, मैंने काफ़ी विचार करके उसे कहा की देख, यह सब करने के लिए हमें किसी ढंग की एड एजेन्सी से संपर्क करना पड़ेगा… फिर, भी शुरूवात में हमें तो नाम मात्र का ही पैसा मिलेगा और सारा क्रेडिट साले एड एजेन्सी वाले, ले जाएँगें…
कुछ ही दिन बाद, अचानक एक दिन मेरे एक दोस्त ने बताया की यू एस ए की एक पॉर्न साइट वालों को कुछ असली इंडियन लड़कियों के फोटो चाहिए.. !! जिनका की वह बहुत बढ़िया पेमेंट दे रहे हैं.. !! लेकिन, फोटो असली, नयी और देसी होना चाहिए.. !!
मैंने उनको ई मेल के ज़रिए, संपर्क किया और मुझे उनका ऑफर पसंद आया।
मैंने भी एक शर्त रखी की फोटो तो मैं आपको ढेर सारे दे दूँगा… लेकिन, एक शर्त है की उनमें चेहरा नहीं दिखेगा… क्योंकि, हमारे इंडिया में ऐसा करना संभव ही नहीं है और यदि जो करती है तो यह पक्का है की वह एक कॉल गर्ल होगी…
मेरी इस बात से सहमत हो कर, उन्होंने मुझे बिना पहचान वाले फोटो भेजने को काम सौपा और बिना माँगे ही मुझे एडवांस में एक बड़ी अमाउंट, ऑनलाइन भेज दी।
अब मुझे जल्द से जल्द, कुछ फोटो भेजना थे.. !! एसलिए, मैंने हमारे संग्रह में से बहुत से फोटो ढूँढे.. !! लेकिन, मुझे कुछ मज़ा नहीं आ रहा था…
एक बड़ी समस्या, यह थी की ऐसा करना मतलब अपने क्लाइंट्स के पर्सनल फोटो को बिना उनकी अनुमति के ऑनलाइन बेचना। उनका मिस यूज़, करना।
ऐसा करना, हमारे प्रोफेशन में अपराध है.. !! लेकिन, कहते है ना की मजबूरी सब कुछ करवा देती है.. !!
मैंने कुछ ज़्यादा एक्सपोज़ वाले फोटोस के चेहरों में एडिटिंग कर दी और पहचान मिटा दी और उन्हें ऑनलाइन भेज दिया और आप मनोगे नहीं की अगले सात दिनों में, उस साइट पर उन फोटो की इतनी ज़्यादा माँग रही की उन्होंने मुझे फिर से एक अच्छी अमाउंट ऑफर करी.. !!
इस बार, मैंने अपनी बहन का फोटो जो की हमने ट्राइयल के लिए शूट किया था, वह पहचान छुपा कर भेजा और उन लोगों ने इसी मॉडल के और ज़्यादा फोटो भेजने का प्रेशर बना दिया।
अब मेरे पास इसका कोई हल नहीं था.. !! तभी, मेरे दिमाग़ में एक आइडिया आया और मैंने सबसे छोटे साइज़ के कैमरे को कमरे में लाकर छुपा दिया।

रात में, जब मेरी बहन रोज़ की तरह अपना नाइट सूट पहन कर सोई तो मैंने आधी रात में, उस कैमरे से उसकी कुछ फोटो सोते में ही शूट कर लिए।
इसके अलावा, अगले दिन सुबह मैं तबीयत खराब होने का बहाना बना कर जिम और स्विमिंग के लिए नहीं गया और कमरे में से ही अपनी बहन के स्विमिंग ड्रेस में कुछ अश्लील वाले फोटो, शूट किए.. !! लेकिन, सही एंगल और इफ़ेक्ट आदि नहीं होने से, मुझे कुछ मज़ा नहीं आया.. !!
तब मैंने हिम्मत कर के, अपनी बहन को सचाई बता दी और उसे कहा की यह सब मैंने केवल मजबूरी वश किया।
थोड़ी नाराज़गी के बाद, वह भी मेरी बात से राज़ी हो गई और जब मैंने उसे मिलने वाले अमाउंट का हिसाब बताया तो वह ना चाहते हुए भी, इसके लिए तैयार हो गई।
फिर उसने कहा की एक काम करते हैं, भैया… तुम मेरे कुछ अश्लील फोटो शूट करो.. !! जिनमें, मेरा चेहरा नहीं आना चाहिए और यह बात केवल आपके और मेरे बीच रहेगी… क्योंकि, मेरी जिन दो सहेलियों ने आपसे अपने गंदे गंदे फोटो डेवेलप करवाए थे, उन दोनों को उनके बॉयफ्रेंड्स ने वो फोटो सार्वजनिक कर दिए और आज वही, सब फोटो सभी लड़को के मोबाइल्स में आम हैं… इसलिए, आप थोड़ी सावधानी रखना…
इसके बाद, उसी दिन से हमने शूटिंग शुरू कर दी।
वैसे, यह सब करना.. !! वह भी, अपनी बहन के साथ.. !! मुझे अपराध बोध, करवाता था.. !! लेकिन, मजबूरी ही ऐसी थी, जिसका इससे बेहतर और कोई हल हो ही नहीं सकता था.. !!
मेरी बहन का कहना था की यदि मन में ग़लत भावना नहीं हो तो कोई ग़लत कम भी, ग़लत नहीं होता.. !!
मेरी बहन ने बड़ी मुश्किल से मेरे आगे खुद को इतना ज़्यादा एक्सपोज़ करने की कोशिश की.. !! लेकिन, हमारे संस्कार आड़े आ जाते.. !!
तब वह खुद ही बोली की भैया, यह मुझसे नहीं होगा…
तो मैंने कहा की तू हमारे बीच का यह भाई बहन का रिश्ता भूल जा और केवल प्रोफेशनल सोच रख या एक काम तू यह कर, की हमें नेचुरल फोटो चाहिए एसलिए तू अपने जीतने भी निजी काम होते हैं जैसे नहाना, कपड़े बदलना, और सारे काम, वह सभी बिना दरवाजा बंद किए करा कर… जिससे, मैं हाथों हाथ तेरे नेचुरल पिक्चर, शूट कर सकूँ…
इसके बाद, उसने मन कड़ा कर कैमरे के सामने ही अपने जीन्स और टी-शर्ट को चेंज करके, नाइट सूट पहना।
इस बीच, वह मेरे सामने केवल ब्रा पैंटी में भले ही कुछ समय रही, पर उसने अपने बदन के उभारो को मुझसे छुपाए रखा।
तब मैंने परेशान होकर कहा की तू रोज़ की तरह, अपनी ब्रा क्यूँ नहीं खोलती…
अब वह शरमा कर, आश्चर्य में पड़ गई और बोली की आपको कैसे मालूम, भैया… ??
मैंने थोड़ा झेंपते हुए कहा की तेरी ब्रा, रोज़ाना रात में बाथरूम में जो टंगी रहती है…
अब, वह हंस पड़ी… … …
जब, मुझे अब माहौल थोड़ा हल्का और खुशनुमा लगा तब मैंने उसे कहा की एक काम कर, आज मेरी यह सफेद बनियान पहन ले…
उस बनियान के गहरे गले में से, उसके चेस्ट पूरे बाहर आने को मचल रहे थे और उसके चेस्ट की भूरी भूरी चुचियाँ जो की उत्तेजित होकर बड़ी फूली हुई थीं.. !! वह भी साफ़ दिखाई पड़ने लगीं.. !!
वह हंसते हुए, बोली – भैया, एक बात तो है की जेंट्स को बनियान में बड़ा खुला खुला महसूस होता होगा… हम लड़कियों के कपड़े तो सब और से बंद रहते है, खास कर के अपने घर वाले पुराने कपड़े…
मैंने कहा की यहाँ पर फिलहाल कोई देखने वाला तो है, नहीं… तू चाहे तो घर में अपनी पसंद के कपड़े पहना कर… और फिर आँख मारते हुए, मैंने कहा – अगर तेरा दिल ना चाहे या गरमी बहुत लगे तो कुछ भी मत पहना कर… अब तेरे मेरे बीच में शर्म वाली, कोई बात तो नहीं रहना चाहिए… तभी तो, मजेदार फोटो शूट होगे…
वह खिलखाकर हंस पड़ी और हंसते हुए, मेरी और अपना टॉप फेंक के मार दिया…
अगली सुबह, जब वह उठी और जिम पहुँची तो मैंने वहां उसके कुछ फोटो ऐसे लिए, जिसमें उसके चेस्ट बनियान में से बाहर आते लग रहे थे।
उसके बाद, उसने सफेद बनियान में स्विमिंग पूल के कुछ इतने सेक्सी शॉट दिए की उन में मेरी बहन का मादक बदन देख, मुझे तुरंत बाथरूम में जाकर हस्तमैथुन का सहारा लेना पड़ा.. !! तब जाकर, मेरे बदन को कुछ ठंडक महसूस हुई.. !!
इसके अलावा, घरेलू काम करते हुए झुके हुए भी उसके बहुत से फोटो शूट किए.. !! जिनमें, मैंने बड़ी सफाई से ऐसा एंगल सेलेक्ट किया की किसी भी फोटो में उसका चेहरा दिख ही नहीं रहा था और दिख रहा तो पहचान में नहीं आता था.. !!
इन फोटोस के बदले में, हमें लगभग बीस हज़ार रुपए मिले.. !! जिन्हें, तत्काल हमें अपने पिताजी के बेहतर ट्रीटमेंट के लिए भेजना पड़े.. !!
अगले दो दिनों, में उस साइट से मेल आया की यदि मैं इसी इंडियन लड़की की कुछ और ओपन मतलब “न्यूड फोटो” भेजू तो वह हमें इसके लिए, बहुत ज़्यादा अमाउंट भेज सकते हैं.. !!
इधर धीरे धीरे, मेरी बहन भी मेरे साथ अब कुछ ज़्यादा ही बिंदास रहने लगी थी।
अब वह कई बार, मेरे सामने ही अपने कपड़े बदल लेती।
कभी कभी, तो कहती की भैया क्या मुझे ऐसे हाल में (ब्रा और पेंटी में।) देख कर आपको कुछ महसूस नहीं होता… तो मैं कहता की मैं तुझमें अपनी कस्टमर महसूस करता हूँ.. !! लेकिन, फिर भी मैं भी इंसान हूँ और मेरी भी भावनाएँ हैं… जिनको की मुझे वश में करना पड़ता है…
यह सब सुन, वह मंद-मंद मुस्कुराने लगी।
अगले दिन, सनडे था और बहुत जोरों से बारिश होने लगी। तब उसकी एक सहेली का हॉस्टल से फोन आया की वह हॉस्टल में बोर हो रही है और उससे मिलने आने वाली है।
तब मेरी बहन ने एक प्लान बनाया और कहने लगी की भैया, तुम अपना कैमरा तैयार रखो… मेरी जो सहेली यहाँ आने वाली है, उसका फिगर भी मेरी तरह बड़ा ही लाजवाब है… मैं उसे कहूँगी की घर पर कोई नहीं है और मस्ती मस्ती में, उसके कपड़े खुलवा लूँगी… तुम छुपकर तैयार रहना और मेरे और उसके, कुछ “अश्लील फोटो” शूट कर लेना…
मैं अपनी बहन के “शैतानी दिमाग़” की दाद दे गया.. !!
जब, मेरी बहन की सहेली आई तो वह बारिश में बहुत भीग चुकी थी.. !! इसलिए आते ही, मेरी बहन ने उसे मेरी बनियान और लूँगी दे दी.. !!
जिन्हें पहनने में, पहले तो वह आनाकानी करने लगी… लेकिन, जब उसे पता चला की पूरे घर और पीछे बंगले में कोई नहीं है तो वह चेंज करने के लिए, तैयार हो गई और बाथरूम में जाने लगी…
तो मेरी बहन ने उसे छेड़ते हुए रोका और कहा की क्यों शरमाती है… अपनी जवानी का, थोड़ा सा नज़ारा हमें भी दिख ला दे… आप दोनों के पास, एक ही चीज़ तो है…
फिर, उसने हंसते हुए वहीं रूम में अपने कपड़े खोलकर मेरी संडो बनियान और लूँगी, पहन ली.. !! जोकि, आगे से खुली हुई थी.. !!
मेरी नटखट बहन ने उसकी ब्रा भी खुलवा दी थी। जिस कारण, उसकी मोटी मोटी सफेद चुचियों बार बार दिख जाती थी।
बनियान में से, उसके चेस्ट ऐसे दिख रहे थे मानो, ठूस ठूस कर भरे हों।
उसके साथ ही, मेरी बहन ने भी एक छोटी सी कमर तक की सफेद इनर वेअर (समीज़) पहन रखी थी, जिसमें से उसकी काली ब्रा की स्ट्रेप बाहर आ रही थी और नीचे सफेद वाइट कॉटन की पैंटी थी, जिसमें से झुकने पर उसके मांसल कूल्हे बाहर आ रहे थे…
उसने मेरी बहन को कहा की क्या तू घर में ऐसे ही घूमती है… ?? तेरे साथ तो तेरा वह सेक्सी और हैंडसम भाई भी तो रहता है, जिस पर अपनी सभी सहेलियाँ मरती हैं… तो, मेरी बहन बोली की मेरा भाई बहुत ओपन है और उसे लड़कियों का खुलापन बहुत पसंद है… वह तो कहता है की जैसे चाहे, वैसे रहो… यह लूंगी और बनियान उसी की है और मैं पूरी रात, यही पहन कर सोती हूँ…

वह बड़ी खुश हुई और बोली की वाह यार, तेरे तो ऐश हैं… इतनी आज़ादी तो हमें हॉस्टल में भी नहीं है… तू किस्मत वाली है, जो तुझे ऐसा सेक्सी भाई मिला…
इधर, यह सोच कर की वह अकेली है, बड़े ही बेफ़िक्र अंदाज़ में बैठी थी।
और मैं चुप कर अपने इंपोर्टेड कैमरे से, उसकी और मेरी बहन की बड़ी ही बेहतरीन फोटो शूट कर रहा था।
वह दोनों बड़ी बेशर्मी से एक दूसरे के अंगों और उभारों पर हाथ रख, मस्ती करती जा रही थीं और बड़े ही बेशरम अंदाज़ में, भद्दे जोक्स और अश्लील बातें कर रही थीं।
मेरी बहन भी ऐसा नाटक कर रही थी, मानो मैं वहां हूँ ही नहीं।
या वो सच में भूल गई थी.. !!
या वो सच में भूल गई थी.. !! क्यूंकी, उसने एक बार भी मेरी तरफ नहीं देखा और ना ही किसी अश्लील हरकत से कोई पेरहेज़ ही की.. !!
नाश्ते पानी के दौर के बीच, मेरी बहन ने बड़ी सफाई से एक नाश्ते की प्लेट मेरी तरफ सरका दी.. !! जिसका, उसकी फ्रेंड को पता ही नहीं चला.. !!
मेरे इशारा करने पर उसने रूम की सभी लाइट्स चालू कर दी.. !! क्योंकि, बाहर तेज़ बारिश और बादलों के कारण रूम में शूटिंग के लिए लाइट कम पड़ रही थी.. !!
तभी, मेरी बहन की सहेली बोली की चल बाहर बारिश में भिगते हैं… और मेरी बहन और उसकी सहेली, तुरंत बारिश में दौड़ पड़ीं।
पानी में भीगते ही, उन दोनों को मस्ती ऐसी चड़ी की एक दूसरे के कपड़े उतारने लगीं।
मेरी बहन ने उसकी लूँगी उतार फेंकी और वह पैंटी और बनियान में, अपना पूरा मादक जिस्म दिखाती, मस्ती करती रही।
मेरी बहन की भी इनरवेअर भीगने से, उसकी काली ब्रा ग़ज़ब ढा रही थी।
दोनों लड़कियों को इस तरह अधनंगी हालत में देख, मैं ऊपर रूम की खिड़की मे एक हाथ से फोटो शूट कर रहा था और दूसरे से अपने मस्त लण्ड को मसल रहा था।
लगभग आधे घंटे बाद, वे दोनों वापस रूम में आई तो मेरी बहन की सहेली कपड़े खोलकर, पूरी नंगी हो गई.. !! .. !!
मैंने जीवन में पहली बार, किसी लड़की को इस तरह पूरी नंगी देखा तो मेरे होश उड़ गये… …
इसके बाद, तो वे दोनों आपस में ही गुत्थम गुत्था होकर, एक दूसरे के अंगो को चूसती और सहलाती रहीं।
मेरी बहन मेरे सामने, उसकी फूली हुई चूत को अपने होंठों से चाट चाट कर उसका रस पी गई.. !! लेकिन, हाँ उसने खुद ने अपनी पैंटी और ब्रा नहीं खोली.. !!
जब, उसकी सहेली थक कर नंगी ही सो गई तो मेरी बहन ने मुझे पास बुलाकर उसकी चूत को फैला फैला कर के, उसके नंगे फोटो शूट करवाए।
जब शाम, वह अपने हॉस्टल चली गई तो मेरी बहन आँख मारते हुए बोली – भैया, कहो, कैसी रही… ??
तो मैंने कहा की लाजवाब… मैं सपने में भी तेरे बारे में, ऐसी कल्पना नहीं कर सकता था…
वह हंसते हुए बोली की क्या भैया, आप भी… चलो, आज पार्टी हो जाए…
और हम दोनों बाइक पर बैठ कर होटल में खाना खाने गये।
मैंने गौर किया की वहाँ मेरी बहन मुझसे एस तरह व्यवहार कर रही थी, मानो मैं उसका भाई ना होकर, उसका कोई बॉयफ्रेंड हूँ…
मिनी स्कर्ट और स्पोर्ट्स बनियान पहन कर, वह मुझसे ऐसी चिपक कर बैठी थी की उसके पपीते के समान उरेज की रगड़ से, मैं बहुत ज़्यादा उत्तेजित हो गया।
सभी जगह, लोग सिर्फ़ हम दोनों को ही देख रहे थे।
वापिस लोटे तो रास्ते में फिर तेज़ बारिश होने लगी।
घर आते आते, हम दोनों पूरी तरह भीग चुके थे।
घर में आते ही, मैं कपड़े चेंज करने के लिए हमेशा की तरह रूम में जाने लगा तो मेरी बहन बोली – अरे भैया, अब आप भी थोड़ा बोल्ड बानिए… और उसने मेरे सामने ही, अपने कपड़े खोल दिए और केवल पैंटी पहनी, तुरंत बिस्तर में घुस गई।
सिर्फ़ एक पल को ही उसके नंगे वक्ष देख, मेरे होश फकता हो गये।
फिर मैंने भी अपने कपड़े उतारे और वी शेप अंडरवेअर में, उसी पलंग पर लेट गया।
हम आज दिन भर के बीते घटना क्रम पर चर्चा कर रहे थे.. !! तभी, मेरी बहन ने मेरा हाथ अपने हाथों में लेकर सहलाना शुरू कर दिया और फिर धीरे से मेरा हाथ अपने दोनों स्तनों के बीच रख कर, सामान्य रूप से बातें करने लगी.. !!
उसके बड़े बड़े वक्ष की नरमी और गर्माहट को महसूस कर, मैंने धीरे से हिम्मत कर अपनी हथेली को उसके स्तनों पर फेर दिया तो उसके मुंह से एक हल्की सी सिसकारी निकल पड़ी – उनमह…
मैंने उसके निपल्स में कठोरता महसूस की और अपने एक हाथ को उसके मांसल बदन के सभी उभारों पर फिरना चालू कर दिया।
अभी दो पल भी ना हुए होंगे की तभी उसने मेरा दूसरा हाथ पकड़ कर, अपनी पैंटी में घुसा दिया जहाँ गीलापन तथा गर्माहट इतनी अधिक थी की मैं सकपका गया और उसने मेरे होंठों को अपने होठों से मुंह में भर कर लगभग चबा लिया.. !!
इसके बाद तो हम दोनों, कब एक दूसरे में समा गये पता ही नहीं चला।
अब हम दोनों का रिश्ता और मजबूत होता चला गया।
मेरी बहन अब ना सिर्फ़ मेरी मॉडल थी.. !! बल्कि, उसने अपनी कई सहेलियों को जो की खुद भी अपना खर्चा चलाने के लिए पैसा कामना चाहती थीं, उन सभी को हमारे इस प्लान में शामिल करवाया.. !!
उसकी सहेलियो को एक तो, हम पर विश्वास था.. !! दूसरा, यह कोई जिस्म फ़रोशी का धंधा तो था नहीं.. !!
इन लड़कियों को केवल सामान्य काम जैसे नहाना, कपड़े बदलना वगेरह की फोटो शूट हम करते और उनकी खुद की पर्मिशन पर उसे साइट पर भेजते। मिलने वाले पैसे का, आधा आधा हम बांटते।
इसमें उन लड़कियों की कोई पहचान भी नहीं रहती थी।
लेकिन, एस सब में मैं काफ़ी फायदे में था.. !! क्योंकि, मेरी बहन की कई सहेलियों ने मेरे सामने पूरी तरह न्यूड फोटोशूट करवाने के अलावा मुझसे अपने शारीरिक संबंध भी रखे, जिनका पता मेरी बहन को भी था.. !!
कई बार तो वह, हमारे साथ शामिल भी हो जाती थी।
यह मेरी सच्ची कहानी है और मुझे पूरी आशा है की आप सभी को, पसंद आई होगी।
 

IMUNISH

जिंदगी झंड बा, फिर भी घमंड बा ..
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पति का दोस्त

ये बात उन दिनों की है, जब मेरी शादी हुई थी..
उस वक़्त मेरी उम्र, लगभग 20 और मेरे पति की उम्र 25 थी..
मेरे पति निर्मल ने, हमारे हनिमून जाने का प्लान स्थगित कर दिया था क्यों के शादी के खर्चे काफ़ी होने की वजह से संभव नहीं था..
हम मिडिल क्लास परिवार से हैं सो ये सब होता रहता है..
उनके, एक दोस्त हैं – विनय..
एक दिन, वो घर पर आए..

उन्हें, जब ये बात पता चला के हनिमून स्थगित कर दिया है तो उन्होंने मेरे पति को प्यार से फटकारा और कहा – ऐसा मत करो, यार.. !! यही टाइम है, मस्ती करने का.. !!
विनय – निर्मल क्या कर रहे हो, यार.. !! अगर पैसों की चकलस है तो मुझसे कहो, मैं कुछ मदद करता हूँ.. !!
निर्मल – हाँ यार.. !! इतना खर्चा हो गया है के अब और खर्चा नहीं करना चाहता.. !! वैसे भी मैं और लोन नहीं ले सकता क्यों के ऑलरेडी काफ़ी लोगों का क़र्ज़ हो गया है.. !! तू तो जानता है, सब मुझे ही करना है क्यूंकी कहीं से कोई सहारा नहीं है.. !!
विनय – ठीक है भाई, मैं समझ गया लेकिन मैं तुझसे तुरंत थोड़े ही मागुंगा.. !! फिर कभी जब भी होंगे, तब लौटा देना.. !!
निर्मल – नहीं यार.. !! पर हाँ धन्यवाद, पूछने के लिए.. !!
मैं किचन में चाय बनाते बनाते, उनकी बातें सुन रही थी..
जी तो कर रहा था के बाहर आकर कह दूँ के ले लो ना पैसे, बाद में हम लौटा देंगे.. !! पर, मैंने ऐसा नहीं किया..
थोड़ी देर में, मैं चाय लेकर बाहर आई..
उस दिन मैंने, नीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी..
(यहाँ पर मैं अपने जिस्म का विवरण दे देती हूँ.. दूध सा गोरा रंग, 32-28-34 का मेरा फिगर है.. गोल और सुडोल दूध और गाण्ड और भूरे रंग के छोटे से निप्पल हैं.. मुझे यकीन है पढ़ कर, आपके मुँह में पानी ज़रूर आ गया होगा..)
चाय लेकर, मैं हॉल में आई..
विनय और मेरे पति को चाय दी और मैं भी सोफे पर, पति के साथ बैठ गई..
विनय, बहुत ही डीसेंट आदमी है..
उम्र होगी, लगभग 24 – 25 के आस पास..
उसकी शादी को 2 साल हो गये थे पर उसका कोई बच्चा नहीं था, अब तक..
विनय – देखिए ना भाभीजी.. !! आप ही कुछ कहिए, निर्मल को.. !! ऐसा थोड़े ही होता है.. !! अपने आपको मेरा अच्छा दोस्त कहता है और खुशी के मौके पर, मुझसे मदद नहीं लेता.. !!
मैं – माफ़ कीजिएगा, विनयजी.. !! मैं निर्मल के हर फ़ैसले की इज़्ज़त करती हूँ और उनके खिलाफ, कुछ बोल नहीं सकती.. !!
निर्मल – ऐसी बात नहीं है, विनय.. !! तू ही बता, पैसे लेकर करूँ भी क्या.. !! मेरे पास कोई प्लान भी तो नहीं है.. !!
विनय – अरे भाई, ये भी कोई बात हुई.. !! वैसे मेरी पत्नी रश्मि भी काफ़ी दिनों से घूमने जाने की बात कर रही है तो क्यों ने हम दोनों जोड़े ही साथ मे जाएँ, घूमने के लिए.. !! तुम्हारा पहला हनिमून होगा और मेरा दूसरा.. !!
निर्मल और विनय, हँसने लगे और मैंने भी स्माइल दे दी..
निर्मल – अगर ऐसा है, तो ठीक है.. !!
विनय – ये हुई ना बात.. !! तो ठीक है, निर्मल.. !! और हाँ भाभी जी, आपको शादी की बहुत बहुत मुबारकबाद..
मैं – भैया, मुझे भाभी मत कहिए.. !! मैं आपसे छोटी हूँ इसलिए बस आपके लिए मैं हूँ – प्रिया शुक्ला.. !!
विनय – तो ठीक है, मिसेस प्रिया शुक्ला.. !! निर्मल, आज मैं रश्मि से बात करता हूँ और हम चारों की जाने की बुकिंग कर देता हूँ.. !!

तभी, निर्मल का मोबाइल रिंग हुआ..
दफ़्तर से फोन था और घर में सिग्नल नहीं आ रहा था तो वो गैलरी में जाकर, बात करने लगे..
अब पहली बार, विनय और मैं आमने सामने बैठे थे..
मैंने विनय की तरफ देखा और विनय ने मेरी तरफ..
विनय को अब मौका मिल चुका था मेरे जिस्म को निहारने का, जो के निर्मल के रहते संभव नहीं था..
मैंने अपने होंठ हिलाकर बहुत धीरे से, विनय को धन्यवाद कहा..
उसने स्माइल दी और कोई बात नहीं कहा..
मैं उठकर उनके पास गई और चाय का कप लेने के लिए झुक गई..
मैंने देखा उसकी सीधे नज़र, मेरे बूब्स पर थी..
दोनों मम्मो के बीच की दरार, उसने साफ देख ली..
बिना किसी भाव के, मैं मुड़कर किचन की तरफ जाने लगी..
मुझे पूरा यकीन है जब मैं किचन में गई, उसने पीछे से मेरी गाण्ड ज़रूर देखी थी..
फिर निर्मल से मिलकर, वो भी घर चला गया..
शाम को उसका कॉल आया के जोधपुर जाने का डिसाइड किया है, रश्मि ने..
हमने भी जोधपुर के लिए, हाँ कर दी..
मेरे पास कुछ पैसे थे सो मैंने, अपने पति से कह दिया के खरीददारी के लिए और छोटी मोटी चीज़ो के लिए हम तैयार हैं..
उस दिन रात को 10 बजे, निर्मल मेरे ऊपर आ गये और 2-5 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद, वो ठंडे हो गये..
सब कुछ होने के बाद वो सो गये, करवट बदल कर पर मैं जाग रही थी..

विनय की कामुक नज़रें और मेरी गीली रांड़ चूत मुझे सोने नहीं दे रही थी..
वैसे भी मैं, कोई शरीफ पति व्रता पत्नी तो थी नहीं शादी के पहले ना जाने मैंने कितने लण्ड खाए थे और तो और कई बार पैसे और छोटे मोटे खर्चो के लिए रंडीबाजी भी की थी..
सच बात तो ये है की शादी का आधे से ज़्यादा खर्चा, मेरी चुदाई के पैसों से ही हुआ था..
खैर, अगले दिन विनय की पत्नी रश्मि हमारे घर आई..
मैंने उसको चाय नाश्ता करवाया..
निर्मल भी, घर पर ही थे..
ऑफीस से, 15 दिन की छुट्टी पर जो थे..
रश्मि ने कहा – प्रिया, ट्रेन का रिज़र्वेशन हो गया है.. !! वैसे अभी, टिकेट्स वेटिंग लिस्ट में हैं.. !! और हाँ इंटरनेट से होटल भी बुक कर दिया था, विनय ने.. !!.
हमारा टूर, पूरे 8 दिन का था..
जोधपुर, पुष्कर और आगरा जाकर, हम लोग वापस देहरादून आने वाले थे..
रश्मि दिखने में, मीडियम बिल्ड की थी..
सांवला रंग था पर हाँ, दूध मुझसे काफ़ी बड़े थे शायद 36 के होगें..
जिस दिन हमें जाना था, हम लोग बैग पैक करके देहरादून स्टेशन पहुँच गये..
शाम की ट्रेन थी..
हमारे टिकेट्स वैट लिस्ट से अब कन्फर्म हो गये थे..
मेरी सीट 3 नंबर कोच में कन्फर्म थी, जब के बाकी तीनों की सीट्स 10 नंबर बोगी में थीं..
रश्मि 3 नंबर की बोगी में जाने को तैयार हो गई पर मैंने ज़िद की के आप लोग साथ रहें और मैं 3 नंबर की बोगी में चली जाउंगी.. पर मेरे पति ज़ोर देकर, खुद ही 3 नंबर बोगी में चले गये और फिर 10 नंबर बोगी में विनय, रश्मि और मैं थे..
हमने कुछ देर बातें करके, फिर डिनर कर लिया..
मैंने उस वक़्त, काले रंग की साड़ी और काला ब्लाउज पहना था..
बातें करते वक़्त, विनय मेरे जिस्म को चुपके से घूर भी रहे थे..
मैंने कई बार नोटीस किया पर इग्नोर कर दिया..
मुझे उसकी नज़रें, अपने जिस्म पर बहुत अच्छी लग रहीं थीं और भागती ट्रेन में मेरी चूत गीली हो चुकी थी..
रात के 10 बजे होंगे..
बोगी के सब लोग सोने की तैयारी करने लगे और हमने भी अपनी बर्थ को खोल दिया..
रश्मि, मिडिल बर्थ पर सो गई..

मैं ऊपर बर्थ पर चढ़ने की कोशिश करने लगी, तब ऊपर चढ़ने मे विनय ने मेरी मदद की..
मदद क्या की बस मौका मार लिया, मुझे छूने का..
अब अप्पर बर्थ पर मैं थी और ठीक सामने वाली अप्पर बर्थ पर, विनय भी आ गये..
मैं लेटी हुई थी और वो भी..
वो मुझे देखकर, स्माइल दे रहे थे और मैं भी..
मेरी स्माइल से उसकी हिम्मत बढ़ गई थी सो उसने अब मुझे आँख मारना शुरू किया..
उसने 3 बार, मुझे आँख मारी..
छीनाल तो मैं भी खानदानी थी, सो मैंने भी स्माइल करके उसको एक आँख मार दी..
फिर तो उसकी हिम्मत और बढ़ गई और वो मुझे फ्लाइयिंग किस भेजने लगा..
मैंने शरमाने का नाटक किया और आँखें नीचे कर लीं..
जब भी मैं उसे देखती, वो मुझे आँख मारता या किस भेजता..
काफ़ी देर तक, ऐसे ही चलता रहा..
फिर उसने मुझे अपने साड़ी का पल्लू हटाने के लिए, इशारे से कहा..
पर मैंने, मना कर दिया और सो गई..
वो काफ़ी देर मेरा इंतेज़ार कर रहा था पर मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई..

रांड़ का मतलब ये तो नहीं है ना की पहली बार में ही चलती ट्रेन में, इतने लोगों के सामने अपना पल्लू गिरा दूँ..
अब हज़ारों के दूध, फ्री में थोड़ी ना इतने लोगों को दिखा देती..
अगले दिन सुबह सुबह, हम लोग जोधपुर पहुँच गये..
होटल पहले से बुक थे, सो हम होटल गये और फ्रेश हो गये..
रूम में जाते ही, मेरे पति ने मुझे पकड़ लिया और किस करने लगे..
मुझे गुस्सा तो बहुत आया पर मैंने संयम रखते हुए कहा – थोडा तो इंतेज़ार कीजिए.. !!
फिर मैं नहाने के लिए, बाथरूम में गई..
वो भी कुत्ते की तरह, पीछे पीछे आ गये..
मज़बूरी में हम दोनों ने साथ में स्नान किया और एक चुदाई का दौर भी चला..
दिन भर आराम करके, शाम के वक़्त जोधपुर घूमने के लिए हम सब बाहर गये और खूब मस्ती की और डिनर भी बाहर ही लिया..
रश्मि ने प्लान बनाया के कल सुबह आमेर फ़ोर्ट जाएँगे और उसके अगले दिन, पुष्कर जाएँगे..
इस सब के दौरान, विनय की नज़र अक्सर मुझ पर ही रहती थी पर अफ़सोस निर्मल के होने की वजह से उसे कोई मौका ही नहीं मिला.
इस पूरे ट्रिप पर विनय ने ही खर्च किया था, ये बात रश्मि को नहीं मालूम थी..
निर्मल भी इसी वजह से हर बात में, हाँ में हाँ मिला रहे थे..
फिर अगले दिन, हम लोग आमेर फ़ोर्ट के लिए निकल गये.
आमेर फ़ोर्ट, जोधपुर से 11 किलो मीटर दूर है.
हम वहाँ की सिटी बस से गये..
11 नंबर की बस, हमने सिटी पैलेस से ली..
फ़ोर्ट काफ़ी बड़ा, खूबसूरत और रोनाकदार था..
हम लोग अपने अपने साथी का हाथ, हाथ में लेकर ऊपर चढ़ रहे थे..
विनय और निर्मल, बीच बीच में हँसी मज़ाक कर रहे थे और मैं और रश्मि काफ़ी हंस रहे थे..
रश्मि भी अब तक, निर्मल से काफ़ी घुल मिल गई थी..
वो दोनों बातें कर रहे थे और मैं और विनय एक दूसरे को मौका देख कर, ताड़ रहे थे..

उस दिन मैंने, गुलाबी रंग का टी शर्ट और काले रंग का लंबा स्कर्ट पहना हुआ था..
आधा फ़ोर्ट चढ़ने के बाद, बीच में आमेर फ़ोर्ट में काफ़ी अच्छी दुकानें थीं और नज़ारा भी काफ़ी अच्छा था इसलिए रश्मि ने कहा के और ऊपर नहीं जाना है यहीं रुक जाते हैं..
रश्मि – हेलो!! अब यहीं रुक जाते हैं.. !! काफ़ी थक गई हूँ, मैं.. !!
निर्मल – हाँ यार, मैं भी काफ़ी थक गया हूँ.. !!
मैं – नहीं ना, चलते हैं ना.. !! सबसे ऊपर जाएँगे.. !!
विनय – हाँ, मुझे भी अच्छा लग रहा है.. !! चलो, चलते हैं.. !!
रश्मि – तो फिर एक काम करो, प्रिया और तुम चले जाओ.. !! निर्मल और मैं, यहीं रुकते हैं.. !! थोड़ी देर आराम करने के बाद, हम भी आ जाएँगें.. !!
निर्मल – हाँ, तुम दोनों चले जाओ.. !!
विनय – ठीक है.. !! प्रिया, चलो चलते हैं.. !! मज़ा आएगा.. !!
मैं – ठीक है तो रश्मि, हम जाते हैं.. !! पर आप लोग, जल्दी आ जाना.. !!
रश्मि और निर्मल, वहीं पर नज़ारा देखते बैठ गये..
विनय और मैं, ऊपर की तरफ जाने लगे..
विनय का चेहरा तो ऐसे खिल गया था, मानो उसे जन्नत मिल गई हो..
हो भी क्यों ना, क्यों के वो इसी बात का इंतेज़ार कर रहा था..
असल में, इसलिए तो उसने इतने पैसे खर्च किए थे..
मेरा “छरहरा बदन” ताड़ने के लिए..
थोड़ी दूर ऊपर जाने के बाद, हमने नीचे देखा तो रश्मि और निर्मल वहीं पर बैठे बातें करते नज़र आ रहे थे..
हम भी निश्चिंत हो गये, और ऊपर जाने लगे..

विनय – प्रिया, मैं तुमसे एक बात कहना चाहता हूँ.. !!
मैं – हाँ विनयजी.. !! बोलिए ना.. !!
विनय – तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा ना.. !!
मैं समझ चुकी थी के वो क्या कहना चाहता है पर मैंने उसे सताने का फ़ैसला कर लिया..
मैं – अगर बात बुरी है तो बुरा लगेगा और उसकी सज़ा भी मिलेगी.. !! ही ही ही.. !!
विनय – तो ठीक है, रहने दो.. !! मैं नहीं बताता.. !!
मैं – चलो भी, बताओ भी.. !! चलो अब, बुरा नहीं मानूँगी.. !! कहो ना.. !!
विनय – तुम बहुत ज़्यादा खूबसूरत हो.. !!
मैंने स्माइल दे दी और धन्यवाद कहा..
मैं – सच में.. !! बहुत बहुत, धन्यवाद.. !! पर बस, इतना ही.. !!
विनय – वैसे कहने को तो बहुत कुछ है, पर.. !!
मैं – पर, क्या.. !!
विनय – कुछ नहीं.. !!
इतने में सीडियों से मेरा पैर फिसलने लगा.. उतने में उसने, मुझे गिरने से बचा लिया..

मैंने उसे फिर से धन्यवाद कहा..
मैं – शुक्रिया, विनय.. !!
विनय – शुक्रिया नहीं, भाभी जी.. !! कुछ इनाम चाहिए.. !!
मैं – ठीक है.. !! अच्छा बोलो, क्या चाहिए.. !!
विनय – तुम नहीं दे सकती.. !!
मैं – अब कहो भी, क्या चाहिए.. !!
विनय – क्या मैं तुम्हें, छू सकता हूँ.. !!
मैं 2 मिनट के लिए, खामोश हो गई..
मैंने जवाब ही नहीं दिया..
वो भी थोडा चिंतित हो गया की कहीं उसने ज़्यादा जल्दी तो नहीं कर दी..

अब उसे क्या पता था की मुझ जैसे रांड़ तो तभी स्कर्ट उठा कर और पैंटी सरका कर, इतने लोगों के बीच ही उसके लण्ड पर कूद सकती थी..
पर आप लोग तो जानते ही हैं की शरीफ हो या रांड़, इतनी आसानी से अपनी नहीं देती..
विनय – कोई बात नहीं, मिसेस प्रिया शुक्ला.. !! मैं तुम्हें फोर्स नहीं करना चाहता.. !! बस तुम खूबसूरत ही इतनी हो के मेरा दिल तुम्हें बार बार छूने को करता है.. !! चलो, अब छोड़ो ये सब.. !! भूल जाओ, सब कुछ.. !!
बात बिगड़ी देख, मैंने आजू बाजू में देखा..
कोई भी आस पास नहीं था..
हम लोग, काफ़ी ऊपर आ चुके थे..
अब तो वो दोनों भी नहीं दिख रहे थे..
मैंने मौका देख कर, अपने हाथ में उनका हाथ ले लिया और कहा – अब हाथ तो पकड़ ही सकते हो.. !! कहीं मैं, फिर से गिर ना जाऊं..
वो काफ़ी खुश हो गया..
अब हम हाथ में हाथ लिए, पति पत्नी की तरह ऊपर जा रहे थे..
कुछ अच्छे सीन दिख रहे तो हम प्रकृति की तारीफ़ भी कर रहे थे..
वैसे सबको यहीं कहना चाहूँगी के इंडिया में वाकई में आमेर का फ़ोर्ट, सबसे प्यारा और अच्छा फ़ोर्ट है..
(यक़ीनन, खजुराहो के बाद..)
उनकी ठंडी ठंडी उंगलियाँ और मेरी गरम गरम उंगलियाँ, एक दूसरे से चिपक गई थीं..
मेरी धड़कन भी काफ़ी बढ़ गई थी..
काफ़ी दिनों से अपने पति का “सूखा और उजाड़ लण्ड” लेते लेते, मैं भी बोर हो गई थी..
धीरे धीरे, मैं सामान्य हो गई..
वैसे, विनय बहुत ही डीसेंट आदमी है..
वो काफ़ी प्यार से बात कर रहे थे..
मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था..
बात करते करते, हम लोग अब सबसे ऊपर पहुँच गये थे..
वहाँ का नज़ारा, वाकई में काफ़ी खूबसूरत था..

काफ़ी लोग थे पर सब अंजान थे, सिवाए विनय के..
हमने वहाँ रुक कर स्लाइस पिया और कुछ देर बैठने के बाद.. ..
विनय – प्रिया वो देखो, वहाँ पर जो कमान है वहाँ चलते हैं.. !! वहाँ से नज़ारा और अच्छा दिखेगा.. !!
वहाँ पर सब तरफ सीडियां थीं और दूर पर एक कमान थी पर वहाँ कोई नहीं था..
मैं – सच में.. !! मस्त आइडिया है पर वहाँ तो कोई नज़र नहीं आ रहा.. !! वैसे भी रश्मि और निर्मल भी ऊपर आ रहे होंगे.. !! हमें यहीं रुकना चाहिए.. !!
विनय – अरे, अब चलो भी.. !! उन्हें भी वहीं बुला लेंगे.. !!
मैं – ठीक है.. !! फिर, चलो जल्दी.. !!
हम वहाँ के लिए, निकल गये..
रास्ते में विनय ने अपना हाथ अब मेरे हाथ की जगह, मेरे कंधे पर रख दिया..
मैंने भी कुछ नहीं कहा..
फिर थोड़ी देर बाद, उसने मेरे कमर पर अपना हाथ रख दिया..
अब भी मैंने, कुछ नहीं कहा..
कुछ ही देर में, हम वहाँ पहुँच गये..
कमान के ऊपर से नज़ारा, काफ़ी अच्छा लग रहा था..
वो ऐसी जगह थी, जहाँ से हम सबको देख सकते थे पर कोई भी हमें देख नहीं सकता था..
मैं इतने उँचाई से बाहर का नज़ारा देखने में बिज़ी थी..
इतने में विनय कमर से धीरे धीरे अपना हाथ, अब मेरी गाण्ड पर ले गया..
उसका हाथ, मुझे अपनी नरम गाण्ड पर महसूस होने लगा..
मुझे बहुत अच्छा लग रहा था..
चूत में मीठी सी चुभन चालू हो चुकी थी और चूत के होंठ खुलने चालू हो गये थे..
मैंने उसकी तरफ देखा..
मैंने भी बड़ी बेशर्मी से उसे मादक स्माइल दी और उसने भी..
लगभग, 1-2 मिनट वैसे ही अपना हाथ मेरी गाण्ड पर रखने के बाद उसने मेरी स्माइल मिलते ही, अब मेरी गाण्ड सहलाना शुरू कर दिया..
वो स्कर्ट के ऊपर से ही, मेरी गाण्ड को सहला रहा था..
उसे मेरी पैंटी भी महसूस हो रही थी..
इधर, हम अभी भी बड़ी सामान्य बातें कर रहे थे..
जैसे की कितना अच्छा व्यू है.. !! कितनी खूबसूरत जगह है.. !!
दोनों ऐसे व्यवहार कर रहे थे, जैसे कुछ अनोखा या अलग हो ही ना रहा हो..
कुछ देर मेरी गाण्ड सहलाने के बाद, वो मेरे पीछे आ गया और मुझे पीछे से पकड़ लिया..
उनका लण्ड, अब ठीक मेरी गाण्ड पर मुझे महसूस हो रहा था और वो मेरी गर्दन पर मुझे किस करने लगा..
मैं – प्लीज़ विनयजी.. !! मुझे छोड़ दीजिए.. !! कोई देख लेगा.. !!
विनय – डरो मत, प्रिया.. !! कोई नहीं है.. !!
फिर हम लोग, एक साइड में दीवार के पीछे गये और मैंने कहा – विनय, यहाँ करते हैं.. !! वहाँ कोई भी देख लेता, यार.. !!
विनय काफ़ी खुश हो गया और बोला – मुझे ऐसी औरतें बहुत पसंद है जो ज़्यादा नखरे ना करें.. !! पर आप तो ऐसे मान गईं, जैसे कोई रांड़ अपने ग्राहक के इंतेज़ार में बैठी हो.. !!
मुझे महसूस हुआ की मैंने बहुत जल्दी कर दी पर नखरे नौटंकी का वक़्त भी तो नहीं था..
निर्मल और रश्मि, कभी भी आ सकते थे..
खैर, अब विनय ने भी मेरी असलियत को समझ लिया और उसने अपने होंठ मेरे होंठ पर लगा दिए और बड़ी बेदर्दी से किस करने लगा..
अबकी बार वो सामने था इसलिए उसका लण्ड, मेरी चूत पर टकरा रहा था और उसके हाथ, मेरी गाण्ड को सहला रहे थे..
मैं उसके बालों को पकड़ कर, उसे किस कर रही थी..
किस करने के बाद, उसने मेरी टी शर्ट के अंदर हाथ डालकर मेरे मम्मों को सहलाना शुरू किया..
उसके एक हाथ में, मेरा एक संतरा आ गया..
अब मैं भी उसका साथ अच्छे से देने लगी और अपने हाथ उसके हाथ पर रख कर, अपने बूब्स उससे ज़ोर ज़ोर से दबवाने लगी..
धीरे धीरे उसका एक हाथ, अब मेरा स्कर्ट उठाने लगा लेकिन मैंने तुरंत उसे रोक दिया..

मैं – नहीं.. !! प्लीज़ नहीं.. !! ये सही जगह नहीं है.. !!
विनय – प्लीज़ प्रिया.. !! अब और इंतेज़ार नहीं होता.. !! कितने नरम दूध और गाण्ड है, तुम्हारे.. !! जी तो चाह रहा है, अभी तुम्हारे कपड़े फाड़ दूँ और तुम्हें पटक पटक कर चोद डालूं.. !! माँ चुदाए, निर्मल और रश्मि.. !!
मैं – अगर ऐसा है तो हट जाओ.. !! मुझे नहीं करना, तुम्हारे साथ अब कुछ.. !!
विनय, थोडा होश में आ गया..
विनय – ठीक है.. !! माफ़ करना, मैं बहुत ज़्यादा उतेज्ज़ित हो गया था.. !! पर फिर, कब करेंगे हम.. !!
मैं – ये टूर ख़तम होने के बाद.. !! देहरादून में.. !!
विनय – ठीक है.. !!
फिर कुछ देर तक हम हाथ में हाथ लिए, वहाँ पर बैठ गये..
बातें करते करते, वो मुझे सहला भी रहा था..
कुछ देर बाद, वो बोला..
विनय – मिसेस शुक्ला.. !! प्लीज़ कुछ प्लान बनाओ, यार.. !! इसी टूर पे मुझे तुम्हें चोदना है.. !!
मैं – मैं भी तुमसे चुदने के लिए बेताब हूँ पर बात को समझो.. !! मैं नहीं चाहती की कोई प्राब्लम हो.. !!
मैं तो शुरू से ही, विनय पर मेहरबान हो गई थी..
रांड़ तो मैं थी ही, अब तक समझ चुकी थी की विनय का बैंक बैलेंस काफ़ी अच्छा था..
उसके पिता एक होटेल के मलिक थे और मैं ताड़ चुकी थी के उससे मुझे काफ़ी फायदा होगा..
वैसे भी वो काफ़ी स्मार्ट था..
मैंने काफ़ी देर तक उसको सहलाने दिया.. फिर, हम लोग उठ गये और वापस सेंटर फ़ोर्ट पर आ गये..

अभी तक रश्मि और निर्मल, ऊपर नहीं आए थे..
फिर हम नीचे गये, उन्हें देखने पर वो वहाँ पर भी नहीं थे..
विनय और मैं, फिर उन दोनों को ढूंढने लगे..
उस वक़्त, निर्मल और रश्मि के मोबाइल्स भी नहीं लग रहे थे..
काफ़ी ढूंढने के बाद, विनय वापस वहीं पर आकर सोफे टाइप पठार पर बैठ गये..
फिर, मैं उन्हें ढूंढने के लिए दूसरे साइड में गई..
भूल भुलिया में एक जगह कॉर्नर पर, मुझे वो दोनों दिखाई दिए..
मैं दीवार के पीछे छुपकर, उन दोनों को देखने लगी..
निर्मल ने रश्मि की गाण्ड पर हाथ रखा हुआ था और रश्मि भी स्माइल दे देकर, उससे बात कर रही थी..
मुझे समझने में देर नहीं लगी के मामला क्या है..

मुझे बड़ा हल्का महसूस हुआ क्यूंकी मैं सोचती थी कि इतने शरीफ आदमी की शादी, मुझ जैसी “छमिया” से हो गई..
रश्मि की गाण्ड पे निर्मल के हाथ ने सच में, मेरे दिल का बोझ हल्का कर दिया था..
मैंने उन्हें डिस्टर्ब नहीं किया और वापस आकर, विनय के साथ बैठ गई..
थोड़ी देर में, वो दोनों आए..
विनय – कहाँ गये थे, आप लोग.. !! ?? हम ऊपर जाकर, वापस आ गये पर आप लोग ऊपर नहीं आए.. !! ??
रश्मि – मेरे पैरों में काफ़ी दर्द हो रहा है इसलिए मैंने ही निर्मल को कहा के ऊपर नहीं जाते हैं.. !! मुझे प्यास भी लगी थी इसलिए हम लोग स्प्राइट पीने, यहीं पर बाजू के स्टॉल पर गये थे.. !!
विनय – चलो, ठीक है.. !! अब काफ़ी देर हो गई है.. !! वापस चलते हैं क्यों के अभी एक और फ़ोर्ट पर भी जाना है.. !!
फिर हम दूसरे फ़ोर्ट से, सीधे होटल में आ गये..
मैं अपने पति निर्मल को काफ़ी अब्ज़र्व कर रही थी, उस दूसरे फ़ोर्ट पर..
वो और रश्मि, काफ़ी आँख मिचोली खेल रहे थे..
जैसा मैंने बताया की मैं भी खुश थी..
ऐसे भी, निर्मल अगर रश्मि में बिज़ी रहेगा तो मुझे विनय के साथ मौका मिल जाए..
अगले दिन, पुष्कर जाने का प्लान था..
पुष्कर, जोधपुर से लगभग 200-220 किलोमीटर पर होगा..
सुबह के 6 बजे, मैं उठ गई और निर्मल को उठाने लगी..
मैं – निर्मल, उठो अब.. !! मैं तो तैयार भी हो चुकी हूँ.. !! पुष्कर मंदिर के दर्शन के लिए जाना है.. !! उठो ना.. !!
निर्मल – मेरी तबीयत ठीक नहीं है.. !! पैर काफ़ी दर्द दे रहे हैं.. !! मैं नहीं जा पाउँगा.. !! प्लीज़, तुम उनके साथ चली जाना.. !!
मैं – नहीं, उठो जल्दी.. !! तुम्हें भी आना होगा.. !!
इतने में, डोर बेल बजी..
विनय आए थे..
वो अंदर आ गये..
मैं – देखो ना.. विनयजी.. !! ये उठ नहीं रहे.. !! काफ़ी देर हो चुकी है.. !! कहते हैं के पैरों में दर्द है.. !!
विनय ज़ोर से, हँसने लगे..
विनय – यही हाल, रश्मि का भी है.. !! उसकी भी तबीयत खराब हो गई है.. !! वो भी नहीं आना चाहती.. !!
विनय काफ़ी खुश लग रहा था, ये सब सुनकर क्यों के वो भी मेरे साथ अकेले वक़्त गुज़रना चाहता था..

मैं समझ चुकी थी के निर्मल और रश्मि ने कल ही मिलकर, ये प्लान बनाया होगा के तबीयत खराब होने का नाटक करके, इन दोनों को पुष्कर भेजेंगे और यहाँ होटल में दिन भर चुदाई करेंगे.. ..
मुझे शरारत सूझी और मैंने निर्मल की शराफ़त का एक बार और इम्तहान लेने का सोचा..
मैं – तो ठीक है.. !! आज का प्रोग्राम कैंसिल कर देते हैं.. !! हम सब कल, पुष्कर जाएँगे.. !! ठीक है, निर्मल.. !!
निर्मल के अंदर, एकदम होश आ गया..
उसका तो चेहरा ही लटक गया..
निर्मल – नहीं नहीं.. !! तुम हमारे वजह से, प्रोग्राम कैंसिल मत करो.. !! तुम दोनों पुष्कर, जाकर आओ.. !! वैसे भी मंदिर जाने का प्रोग्राम कैंसिल करोगे तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा.. !!
इस बात पर, विनय काफ़ी खुश हुआ..
मैंने मन ही मन सोचा – चूतिए साले.. !! जितनी तेरी उम्र है, उससे ज़्यादा लंड में अपनी चूत में निचोड़ चुकी हूँ.. !!

खैर,
विनय – हाँ.. !! ये ठीक है.. !! मैं और प्रिया मंदिर जाकर आते हैं.. !! आप दोनों यहीं आराम करो.. !! वैसे भी हमारे टूर में पुष्कर के लिए, एक दिन ही है.. !! कल का तो रिज़र्वेशन है, आगरा के लिए.. !! अगर आज नहीं गये तो पुष्कर मिस हो जाएगा.. !!
मैं – फिर भी मैं एक बार, रश्मि को पूछ कर आती हूँ.. !!
मैं रश्मि के रूम में गई..
उसने भी यही कहा के आप दोनों हो आओ.. उसका आना नहीं होगा..
मैं भी मन ही मन में, हंस पड़ी..

यहाँ मैं रात भर सोच रही थी के विनय के साथ चुदाई करने का प्लान कैसे बन पाएगा और यहाँ तो रश्मि और निर्मल ने ही हमारा चुदाई का प्रोग्राम सेट कर दिया था..
जितना मैं निर्मल को सीधा और शरीफ सा बंदा समझ कर खुद को शादी के बाद से कोस रही थी, वो तो हरामी, विनय से भी आगे निकला..
कुत्ते के मूत, मेरे पति निर्मल को ज़रा भी आइडिया नहीं था के उसकी छमिया पत्नी पुष्कर में विनय से चुदने वाली है..
असल में तो विनय को भी अंदाज़ा नहीं था के यहाँ जोधपुर में उसकी पत्नी निर्मल से चुदवाने वाली है..
और तो और, रश्मि भी नहीं जानती थी के पुष्कर में उसके पति विनय मेरी चूत पर सवार होने वाले हैं..
मैं ही ऐसी एकलौती “रांड़ बुद्धि” थी, जो ये ताड़ चुकी थी के यहाँ हर कोई एक दूसरे के पार्ट्नर के साथ स्वैप कर रहा था..
बिचारे, रश्मि और निर्मल ये सोच रहे थे के वो विनय और मुझे बेवकूफ़ बना कर, दिनभर जोधपुर के इस आलीशान होटल में चुदाई करने वाले हैं..
जबकि हक़ीक़त ये थी के उनसे ज़्यादा मज़ा, अब विनय और मैं पुष्कर में करने वाले थे..
आख़िरकार, सेट हो गया के विनय और मैं पुष्कर मंदिर में दर्शन के लिए जाएँगे..
सुबह लगभग 8 बजे, हम दोनों बस से निकल गये.
मैंने नारंगी रंग की साड़ी और उसी रंग का ब्लाउज पहना था..
विनय, काफ़ी खुश था..
वो मेरा हाथ, हाथ में लेकर बस मे मेरे से चिपक कर ऐसे बैठा था जैसे के मैं उसकी पत्नी हूँ..
आस पास के लोग भी यहीं सोच रहे होंगे के हम पति पत्नी ही हैं..

असल बात तो यह थी की मैं भी विनय जैसे ही स्मार्ट, हैंडसम, अमीर और मेरे हमउम्र लड़के से प्रेम विवाह करना चाहती थी पर मेरी माँ ने निर्मल जैसे चूतिए, मिडिल क्लास और बेकार से बोरिंग आदमी से मेरी शादी करा दी थी..
निर्मल मुझे तो फूटी आँख नहीं सुहाता था पता नहीं रश्मि को उसमें ऐसा क्या दिखा..
वैसे तो रश्मि का मुझे बहुत बहुत धन्यवाद करना चाहिए क्यूंकी उसने मेरे मन से “पछाताप की भावना” को ख़तम कर दिया था, जो मेरे मन में निर्मल को शरीफ और सीधा समझ कर आती थी..
रास्ते में मैंने मेरे पति, निर्मल को कॉल किया..
मैं – हेलो!! मैं प्रिया बोल रही हूँ.. !! हम लोग, अब 5-10 मिनट में पुष्कर पहुँचने ही वाले हैं.. !!
निर्मल – हाँ ठीक है!! आते आते, हम दोनों के लिए प्रसाद भी ले आना.. !!
मैं – ठीक है, बाइ.. !! अब मैं फोन रखती हूँ.. !! बाद में, बात करते हैं.. !!
ये कहकर, मैं चुप हो गई पर फोन डिसकनेक्ट नहीं किया..
निर्मल ने भी फोन डिसकनेक्ट नहीं किया.. शायद, ये सोचकर के मैंने कर दिया है..
फोन चालू था..
मैं उस कमरे में जो कुछ बातें हो रही है सॉफ तो नहीं पर कुछ कुछ सुन पा रही थी..
फोन पर –
निर्मल – उफ़ रश्मि.. !! तुम कितना अच्छा लण्ड चूसती हो.. !! उन्ह आअहह.. !! कितना मज़ा आ रहा है.. !! माँ की लौड़ी, प्रिया तो हाथ में लेने से भी शरमाती है.. !! कितना मज़ा आ रहा है.. !! नाटक तो ऐसा करती है, जैसे कभी लंड देखा भी ना हो और चूत इतनी बड़ी हो रखी थी पहली ही रात को की मेरा लंड क्या, मैं पूरा का पूरा घुस जाता उसकी चूत में.. !! साली, कुतिया ने ढोंग करने में तो डिग्री ले रखी है.. !!
रश्मि – उउम्म्म्ममम.. !! तुमने जो पागल कुत्ते की तरह मुझे चोदा है, ऐसी चुदाई तो वो विनय करता ही नहीं.. !! उसे तो अपने बिज़नेस से ही फ़ुर्सत नहीं है.. !! बस हमेंशा पैसा कमाने में लगा रहता है.. !! ना जाने क्या करेगा, इतने पैसे का.. !! अब तो निर्मल मैं तुम्हारी रंडी बनकर रहूंगी.. !! तुम्हें मैं पैसे दूँगी और तुम मुझे इसी तरफ चुदाई का मज़ा देना.. !! जितने पैसे कहोगे, उतने दूँगी.. !! बस, मुझे ऐसे ही चोदना.. !!
अब मैंने फोन बंद कर दिया..
मेरा पति भडुआ बन चुका था और इधर, विनय मेरे तरफ देख स्माइल दे रहा था..
मैं उसकी तरफ देख कर हंस रही थी पर उसे लगा के मैं स्माइल दे रही हूँ.. !!.
दिल कर रहा था के विनय को बता दूं के तुम मेरे साथ हो और निर्मल, रश्मि को पागल कुत्ते की तरह चोद रहा है और तो और, रश्मि उसका लण्ड भी चूस रही है..

लेकिन जाहिर है, मैंने ऐसा कुछ नहीं किया..

पुष्कर पहुँच कर, हम दोनों सीधे एक होटल में गये..
अंदर जाते ही, विनय ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मेरे बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा..
विनय – आज तो पूरा दिन, तुम्हारी चूत में लण्ड डालकर ही रखूँगा.. !! पूरी नंगी करके, चोदूंगा तुम्हें.. !!
मैं – नहीं विनय, पहले हम वो काम करेंगे जिसके लिए पुष्कर आए हैं.. !! उसके बाद, ये सब.. !!
वो भी अच्छे बालक की तरह मान गया..
वैसे भी हम जैसे लोग, भगवान से बहुत डरते हैं..

खैर, हम दोनों फ्रेश होकर मंदिर के लिए निकले..
मंदिर दर्शन के बाद प्रसाद लिया और फिर मैंने मंदिर में नीचे पूरा झुक कर विनय के पैर छुए..
विनय, काफ़ी भावुक हो गया..
उसने मुझे प्यार से कंधे पर हाथ रख कर उठाया और गले से लगा लिया..
आस पास के लोगों को लग रहा था के ये दोनों “पति पत्नी” हैं.. !!

काश, ये सच होता..
मेरे पैर छूने से, विनय काफ़ी भावुक हो चुका था..
उसने भी सिंदूर लिया और मेरी माँग में भर दिया..
अब अंजाने में ही सही, मैं उसकी पत्नी बन चुकी थी..
हम दोनों वापस, होटल में लौट आए..
रूम में आते ही, मैंने प्रसाद वगेरह अपने बैग में रख दिया..
विनय के फिर से पैर छुए और एक आदर्श पत्नी की तरह, उसका आशीर्वाद लिया..
उसने मुझे उठाकर, अपनी बाहों में ले लिया..
अब वो होने वाला था, जिसका इंतेज़ार हम दोनों ही पिछले 4 दिन से कर रहे थे..
विनय ने मेरी गाण्ड को, साड़ी के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया..

वो मुझे प्यार से हर जगह किस करते जा रहा था..
2-5 मिनट किस करने के बाद, उसने मेरी साड़ी का पल्लू गिरा दिया..
बड़े ही अच्छे से, उसने मेरी पूरी साड़ी उतार दी और अब मेरी साड़ी फर्श पर थी..
फिर उसने मुझे अपनी बाहों में उठाकर बिस्तर पर लेटा दिया और मेरे ऊपर आ गया..
उसने फिर, अपने कपड़े भी उतार दिए..
शर्ट, जीन्स और फिर बनियान भी..
अब वो सिर्फ़, जौकी में था..
दुबले पतले निर्मल के उलट, उसका गठीला बदन मुझे बहुत पसंद आ रहा था..
मैं उसकी पीठ सहला रही थी और वो मेरे जिस्म पर कभी इधर, कभी उधर किस किए जा रहा था..
धीरे धीरे नीचे आकर, उसने अपना हाथ मेरे पेटिकोट के अंदर डाल दिया और अंदर मेरी जांघों को किस करने लगा..
कुछ देर बाद, बाहर आकर उसने मेरे ब्लाउज के हुक खोल दिए..
पेटिकोट का नाडा भी खोल दिया और उसे फ्लोर पर फेंक दिया..
अब मैं सिर्फ़, ब्रा और पैंटी में थी..
ब्रा और पैंटी, काले रंग की ही थी..
उसने मेरी दूध से सफेद रंग का जिस्म देखा और देख कर उसके मुँह में पानी आ गया..
अब उसने मेरी ब्रा निकाल दी और मेरे “नारंगी जैसे दूध” अब उसके सामने थे..

कुछ देर मेरे गोल चुचे निहारने के बाद, वो एक मम्मे को मुंह मे लेकर चूसने लगा और दूसरे को हाथ में लेकर दबाने लगा..
बीच बीच में वो मेरे भूरे, छोटे से निप्पल को काट भी रहा था..
मेरे मुंह से – अन्म आह इस्स.. !! आह आह अहहहाहा आह अह आ आ अहहा.. !! इयै याया आ आ या अय हेया.. !! आह आह अहहाहा हहाहा आइ इह इयाः आह.. !! s s s s s.. !! आ आ आ आ स स स स स स स स स.. !! इनहया याः इया या या या या या ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह.. !! उई माआअ.. !! की आवाज़ें आ रही थीं..
मुझे “मोनिंग” करने में, काफ़ी मज़ा आ रहा था..
मैं तो चिल्ला चिल्ला कर, चुदवाना चाहती थी पर यहाँ मेरी सिसकारियों से विनय में भी कामुकता बढ़ रही थी..

मेरे बूब्स दिल भर के पूरे मज़े से चूसने के बाद, विनय नीचे आया और मेरी पैंटी उतार दी..
पैंटी उतार कर वो फ़ौरन बिस्तर से थोड़ा दूर खड़ा गया और उसने कहा – प्रिया, प्लीज़ अपनी टाँगें खोल दो.. !! मैं देखना चाहता हूँ, तुम्हारी चूत कैसी है.. !!
मैं भी बेशर्म हो चुकी थी.. असल में, मैं तो थी ही बेशर्म..
मैंने फ़ौरन एक “बाज़ारु छीनाल” की तरह, अपनी दोनों टांगें खोल दी..
अब मेरी “नंगी चिकनी चूत” बिल्कुल उसके सामने थी..
मैं पूरी तरह से “नंगी” थी..
टाँगें खोलने के बाद तो वो पागल सा हो गया..
ऐसा छरहरा बदन और गुलाबी रंग की सफ़ाचट चूत, शायद ही उसने पहले देखी हो..
उसने, अपना अंडरवेअर निकाल दिया..
उसका “लंबा, मोटा और तगड़ा लण्ड” सनसानता हुआ बाहर आया..
उसका लण्ड, मेरे पति के लण्ड से लंबा था और बेहद मोटा..
वो मेरे करीब आ गया और 69 के पोज़िशन में आ कर लेट गया..
अब उसका लण्ड मेरे हाथ में था और मेरी चूत उसके..
वो मेरी चूत में उंगली डालकर, अंदर बाहर कर रहा था और मैं उसके लण्ड और उसके छोटे छोटे टट्टो को सहला रही थी..
वो काफ़ी डीसेंट था, अगर कोई और होता तो अब तक लण्ड मेरे मुंह मे दे देता और शायद मैं ले भी लेती पर वो चूत मे उंगली करने मे ही तलीन था..
कुछ पल के बाद, वो फिर से सीधा हो गया..
मुझे उल्टा कर दिया और मेरी गाण्ड को सूंघने और किस करने लगा..
मुझे बहुत मज़ा आ रहा था..

विनय – वाह!! प्रिया तुम्हारी गाण्ड बहुत ही खूबसूरत है.. इतनी गोल और आकर्षक गाण्ड, मैंने आज तक नहीं देखी.. एकदम चिकनी और सुंदर.. !! मज़ा आ गया.. !!
मैं – विनय, अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा.. !! जल्दी से डालो, मेरी चूत में.. !!
विनय ने अब, मेरी गाण्ड पर 2-3 थप्पड़ मार दिए..
उसके मर्द के कड़क हाथ, गाण्ड पर पड़ने से मेरी सफेद गोरी चमड़ी, लाल हो गई..
दर्द हुआ पर ये “जंगलीपना” मुझे बहुत पसंद था, जो विनय ने किया था..
मुझे बहुत अच्छा लगा..
फिर उसने मुझे सीधा करके, अपना लण्ड मेरी चूत पर रख दिया..
उसने एक ज़ोर का धक्का दिया..
मैं तो पूरी गीली हो चुकी थी पर फिर भी लण्ड जाने में थोड़ी तकलीफ़ मुझे हुई..
मेरी मुंह से – s s s s s s s s s.. !! आह आँह.. !! फूह यान्ह.. !! आ आ आ आ आ आ आ आ उंह.. !! इयान्ह ह ह ह ह ह आह आ आ आ आह ह हा.. !! उफ्फ मा ह उंह आह.. !! आराम से.. !! निकल गया..
फिर 2-3 धक्कों में, उसका पूरा लण्ड मेरी चूत में अंदर तक चला गया..
धीरे धीरे, वो मुझे चोदने लगा..

मैं भी अपनी गाण्ड उठा उठा कर उससे चुदवाने लगी..
वो मेरे बूब्स को चूस रहा था और मुझे “भकाभक” चोद रहा था..
मैंने अपने नाख़ून, उसके पीठ में घुसा दिए..
उसे खरोंचने लगी..
शायद, उसे दर्द हो रहा होगा पर वो तो मुझे चोदने में ही मस्त था..
उसका घोड़े के साइज़ का लण्ड, अंदर लेने में मुझे बहुत ज़्यादा ही मज़ा आ रहा था..
पहली बार, ऐसा हुआ था के मैं सिर्फ़ चुद नहीं रही थी बल्कि मैं प्यार से चुदवा रही थी..
अपनी चूत उसके लंड के लिए, निसार कर चुकी थी..
अपनी जवानी का मालिक उसे बना चुकी थी और दिल ही दिल में, उसे अपना “असली पति” मान चुकी थी..

कुछ देर ऐसे ही चोदने के बाद, उसने पोज़िशन चेंज की..
उसने मुझे उल्टा किया और पीछे से मेरी चूत में अपना मूसल सा लंड ठूंस दिया..
इस स्टाइल को “डॉगी स्टाइल” कहते हैं..
चूत में लण्ड डालने के पहले, उसने मेरी गाण्ड पर 2-3 थप्पड़ और मारे जो मुझे पहले की तरह काफ़ी पसंद आए..
उसका रफ हाथ जब भी मेरी गाण्ड पर पड़ता, मैं सिहर उठती..
पीछे से चोदने में शायद उसे महारत हासिल थी क्यों के उसके स्ट्रोक्स अब तेज हो गये थे..
काफ़ी ज़ोर ज़ोर से चोद रहा था, वो मुझे..
कुछ देर चोदने के बाद, उसका निकल गया..
मेरी चूत के अंदर ही, उसने अपनी बेहद गाढ़ी क्रीम निकाल दी..
फिर कुछ देर, लण्ड अंदर ही रखा..
मुझे वैसी ही पोज़िशन में रहना अच्छा लगा क्यों के धीरे धीरे, उसके लण्ड का पानी रिस रिस के मेरे अंदर आ रहा था..
लण्ड बाहर निकाल कर, वो मेरे बगल में सो गया..
मैं भी उसके चौड़े सीने पर अपना सिर रख कर सो गई..
उसी तरह 1 या 2 घंटे सोने के बाद, मैं उठी..
वो कमरे में नहीं था..
रूम में, मैं अकेले ही थी.. वो बाहर गया था..
मैंने बाथरूम में जाकर नहा लिया और रूम में आकर, कपड़े पहन लिए..
वो आया और उसके साथ एक वेटर भी था..

स्पेशल लंच का बंदोबस्त किया था, उसने..
वेटर ने लंच डेकोरेट किया और विनय ने उसे टिप दी..
फिर हमने, साथ में लंच किया..
लंच करते समय –
विनय – धन्यवाद, प्रिया.. !! तुम बहुत खूबसूरत हो.. !! तुम्हारे दूध और गाण्ड का तो मैं दीवाना हो गया हूँ.. !! अब मैं हमेंशा तुम्हारे साथ रहूँगा.. !!
मैं – तुमने भी आज मुझे, मेरे लोडू पति से ज़्यादा मज़ा दिया है.. !! लेकिन अब हमें हर कदम, बड़े संभाल कर रखना होगा.. !!
विनय – तुम जैसा कहोगी, मैं वैसा करूँगा…
मैं – तुम मुझे कभी भी मैसेज नहीं करोगे और ना ही कॉल करोगे… जब मैं मिस कॉल दूँगी तभी कॉल करोगे… देहरादून में मेरे काफ़ी रिश्तेदार आते जाते हैं घर पर, इसलिए घर पर मिलना मुश्किल है… हम बाहर ही मिला करेंगे…

विनय मेरी बातें सुनकर काफ़ी खुश हो गया क्यों के उसे इतनी होशियार लड़की जो मिल गई थी, एक्सटर्नल अफेयर करने के लिए..
वैसे भी रश्मि इतनी खूबसूरत नहीं थी और शायद, उसे मैं कुछ ज़्यादा ही पसंद आ गई थी..
मैंने भी अपनी बातों, अदा, जलवों और नखरों से उसे दीवाना बनाने की पूरी कोशिश की थी और काफ़ी हद तक उसमे सफल भी रही थी..
लंच करने के बाद, उसने कहा के अब निकलते हैं…
4 बज चुके थे और हमें जोधपुर वापस लौटना था..
पर इधर, मेरे दिमाग़ में कुछ और ही चल रहा था..
मैं – विनय, मैं आपके लिए कुछ करना चाहती हूँ क्यों के इतना अच्छा सेफ टाइम और प्लेस शायद ही, हमें दुबारा मिले…
विनय – हाँ हाँ कहो… क्या करना चाहती हो…
मैं – विनय, हमेशा से मेरी तमन्ना थी के मैं किसी मर्द के सामने खुद नंगी होऊं पर हमेशा से ही निर्मल मेरे कपड़े उतारते हैं जबकि मुझे अपने कपड़े उतारने का मौका नहीं मिला… मैं तुम्हें बहुत चाहती हूँ इसलिए तुम्हारे सामने मैं तुम्हारे लिए, खुद नंगी होना चाहती हूँ…
विनय मेरी बात सुन कर, काफ़ी खुश हो गया..
वो बेड पर बैठ गये और मैं उनके सामने थी.
विनय ने मुझे मीठी सी स्माइल दी और मैंने “नंगी होने का खेल” शुरू कर दिया..
मैंने साड़ी खोलना शुरू कर दिया और उसका लण्ड फिर से जीन्स में खड़ा होने लगा..
साड़ी के बाद, मैंने अपने ब्लाउज के हुक खोले और धीरे धीरे ब्लाउज उतार दिया..
फिर, पेटिकोट खोल दिया..
इसके बाद, ब्रा पीछे से खोलकर मैंने अपने 32 साइज़ के बूब्स के जलवे दिखाए..
वो मेरे दूध को, प्यार और लालच से देख रहा था..
अब मैंने बेहद अदा से, पैंटी को उतार दिया..
अब तक, मैं पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी..
मैंने उसे एक टाँग उठा कर, अपनी चूत दिखाई और फिर पलटकर अपनी गाण्ड आगे कर दी और विनय को थप्पड़ मारने को कहा..
उसने 3-4 फटके, मेरी गाण्ड पर मार के मेरी लाल कर दी..
मैं – आ ह आ ह आ ह आ ह ऊ ऊ ऊ ऊ… आ ह आ ह आ आ आअशह इश् इस्स इयाः म्म ह ह ह ह ह स स स स स… करके चिल्ला रही थी..
नंगी होने में जो मज़ा मुझे आया वो तो विनय के साथ, सेक्स करने में भी नहीं आया..
अब मैं वो करने वाली थी जो अब तक मैंने, गिने चुने मर्दों के साथ ही किया था..
मेरे पति भी इससे अछूते थे..
शादी से पहले, अपने ग्राहक से तो मैं इसके लिए अलग से पैसे लिया करती थी..
मैंने उसकी जीन्स खोल कर, चड्डी नीचे कर दी..
उसका लण्ड मेरे सामने आ गया..
मैंने उसे हाथ में लेकर सहलाया और सीधे मुंह में लेकर चूसने लगी..
विनय तो बस पागल हो चुका था..
अब मोनिंग करने की उसकी बारी थी..
उसने कभी सोचा ही नहीं था के मैं ऐसा उसके लिए करूँगी..
विनय – प्रिया ह ह ह ह ह… आज पहली बार कोई औरत मेरा लण्ड चूस रही है… कितना मज़ा आ रहा है…
फिर मैंने उसे बेड पर लेटने को कहा और उसके ऊपर चढ़ गई..
अपने हाथों से मैंने उसका लण्ड पकड़ कर अपनी चूत में डाला और चुदवाने लगी..
इस पोज़िशन को “राइडिंग” कहते हैं..
अब वो नीचे लेटकर मेरे बूब्स मसल रहा था और मैं उसका लण्ड उछाल उछाल कर अंदर बाहर कर रही थी..
जब तक उसका पानी नहीं निकल गया तब तक मैंने उसे उसी पोज़िशन मे रखा और चूत मरवाती रही..
फिर निढाल होकर, उसका लण्ड मेरी चूत में ही रखकर उसके ऊपर ही सो गई..
कुछ देर सोने के बाद, उसने कहा – प्रिया ये चुदाई मेरी जिंदगी की अब तक की सबसे मस्त चुदाई थी… आज से तुम, मेरी “असल पत्नी” हो…
मैंने कहा – मुझे पत्नी नहीं, बल्कि तुम्हारी “रखैल” बना कर रखो… जब भी तुम्हारा दिल करे, बस चोदने के लिए ही याद करो… तुम मेरी ज़रूरत पूरी करो और मैं तुम्हारी…
इतने सुनते ही, उसने भी हाँ कहा और अपनी जीन्स उठाकर पर्स निकाला और अपना एक कार्ड मुझे दिया और कहा – ये एक्सट्रा कार्ड है, मेरे पास… ये तुम रखो… जब भी तुम्हें किसी भी चीज़ की ज़रूरत पड़े, पैसे निकाल लेना और इसके लिए मुझसे पूछने की भी ज़रूरत नहीं है… ठीक है…
उसने कार्ड और पिन नंबर, मुझे दे दिया..
फिर, हम दोनों एक साथ बाथरूम में नहाने गये..
पूरा वक़्त, मैं उसके साथ नंगी ही रही..
आख़िर, हम तैयार होकर वापस बस पकड़कर जोधपुर आ गये..
जोधपुर पहुँचने से पहले, मैंने निर्मल को कॉल करके कहा था के हम लोग पहुँचने वाले हैं इसलिए उसे भी टाइम मिल गया रश्मि से स्पेस लेने मे..
हमारा ट्रिप पूरा करके, हम देहरादून वापस आ गये..
आज भी मैं विनयजी से अपनी चूत और गाण्ड मरवाती हूँ और उसका कार्ड इस्तेमाल करती हूँ..
रश्मि और निर्मल कभी भी जान नहीं पाए के पुष्कर में क्या हुआ था और विनय भी कभी जान नहीं पाया के रश्मि और निर्मल ने जोधपुर के होटल में क्या क्या किया..
ट्रिप से लौटने के 2-3 दिन के बाद, मैंने कार्ड इस्तेमाल करके देखा..
बैलेंस चेक किया तो मैं हैरान रह गई..
उसमे बैलेंस था – 8, 55, 516 रुपए..
मेरी खुशी का अंदाज़ा, आप खुद ही लगा सकते हैं..
शादी से पहले, इतना पैसा तो ना जाने कितनों से कितनी बार चुदवा के भी, मैं नहीं कमा पाई थी..

समाप्त… …
 
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Lutgaya

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A erotic housewife

Hi friends, how r u all? Avinash sharma (changed name) is back. Ab aap log to mere bare me jaan hi gaye honge. Aap logon ne to meri pichhli story “shilpa & kristina” “mauja hi mauja….with sexy shilpa” jarur padhi hogi. Mujhe aap logon ke bahut se mail aaye….mujhe is baat par bahut khushi huyi. Aap sabhi boys, gals, bhabhis and housewifes sabhi ke mails aaye…aur meri story ki sarahna ki….thanks 4 all this. Thanks u all gals, bhabhis and housewifes who requested me to have some fun….don’t worry…..right time will come soon and we will have some great moment………..maine aap logo ko kaha tha ki main aap logo ko kuchh meri zindagi ki aur story bataunga…to main aap logo ka jyada samay na lete huye apni story par aata hoon…….yadi story ke presentation me galti ho to sorry…….

To dosto main shilpa aur kristina ke sath maze karne ke baad mujhe apne city raipur jana tha…mera reservation utkal train me tha jo ki haridwar se puri jati hai…ye train mere city nahi jati kyonki is train ka route different hai…jo ki bilaspur station se kat jati hai….aur bilaspur se raipur 115 k.m. dur hain…raipur is a capital of chhattisgarh. Mujhe raipur route ki kisi bhi train me seat nahi mili…isiliye mujhe bilaspur route se hi jana pada….

Utkal train delhi se dophar me 12:50 pm par chalti hai aur morning me 11:15 a.m. ko bilaspur pahunchati hain…mera reservation ac2 me tha…main 12 baje hi nizamuddin station pahunch gaya tha…kyonki main late hona nahi chahta tha…kyonki bad ki kisi bhi train me reservation nahi milta…main station me hi train ka wait karta raha…aur cold drinks bhi pi raha tha kyonki us samay delhi me bahut hi jyada garmi thi……

12:30 pm ko train aa gayi….pata nahi aaj train kaise apne right time par aayi…mera seat number 3 tha..main apne seat par jakar baith gaya…aur magazine padh raha tha…main jis compartment me baitha tha vaha par 4 seats thi…thode der bad ek parivar vaha aaya…vo log 3 the…socha shayad inhi 3 ka seat hai…unme 1 lagbhag 28 saal ki housewife thi , kyonki usne sadi pahni thi use jana, 1 32-33 sal ke bhaiya honge aur unke sath ek 19-20 saal ki ladki thi…main magazine hi padh raha tha….

Baad me main jaan paya ki sandhya (housewife) vijay (bhaiya) ki bibi (wife) hain aur neha unki bhatiji hai….means vijay bhaiya ki bade bhai ki beti hai neha…train ki horn baji….means train chalne ko taiyar thi….vijay bhaiya ne kaha…hello mr. Apka nam kya hai? Maine kaha…avinash…unhone puchha kaha ja rahe ho? Maine kaha main bilaspur jar aha hoon…bilaspur ke baad raipur jana hai…unhone kaha dekho bhai…inka khyal rakhna….inko bhi bilaspur jana hai….ye ladies log hain inko kisi kisi chiz ki jarurat padti rahti hain……maine kaha ok…par aap nahi ja rahe hain kya? Unhone kaha ki jana to mujhe bhi tha lekin kuchh kam pad gaya……isiliye nahi ja pa raha hoon……….

Unhone kaha ki reservation to mera bhi hai….lekin main cancel nahi karwa raha hoon…tum 3 tin log hi jao……pata nahi choutha kaun aayega…….train chalne lagi unhone kaha ok bye…….main bich bich me ph karta rahunga……vo train se niche utar gaye…. Aur train chal padi……sandhya ji kya sundar thi….sath me neha bhi kam sundar nahi thi….bhaiya ke jane ke bad maine un dono ko gaur se dekha….sandhya sadi me thi aur neha salwar suit me thi…………dono ki dono kayamat thi……..

Main magazine padh raha tha aur tirchhi nigahoon se undono ko dekh raha tha …..ve dono mere samne wali seat par baithi thi……mera land to khada huye ja raha tha…sexy ladkiyon ko dekhkar mera lund khada hi ho jata hai….kyonki pichhli 2-3dino se main sex hi to kar raha tha…….thode der baad sandhya ne kaha…..aapka nam? Maine kaha avinash…ve dono ne bhi apna nam bataya….mere sath baithne par unke chehre par jara sib hi udashi nahi thi………

Sandhya ne puchha aap bhi bilaspur ja rahe hain…maine kaha haan….sandhya ki aawaj bahut hi mithi thi….maine puchha kya aap log bilaspur me rehte hain? Sandhya ne kaha…..nahi hum log main aur vijay delhi me rehte hain…vijay delhi me service karte hain isiliye delhi me rehte hain…vaise to hum log bilaspur ke hain…..mane kaha ok……

Maine neha ki or ishara kar kaha ki aap? Neha ne kaha ki main bilaspur ki hoon aur bilaspur me study karti hoon…….kuchh din ke liye main chacha-chachi ke pas delhi aayi thi ghumne ke liye….maine kaha thik hai…….neha ki aawaj bhi bahut mithi thi…..dono ki aawaje man ko chhu rahi thi…….in logo ke sath bhi sex karne ka man kar raha tha……

Sandhya ne puchha aap kya karte hain….maine kaha main mbbs kar raha hoon…..undono ne puchha kaha? Maine kaha moscow (russia) me…….unhono ne kaha achchha videsh me….maine haan kah kar sir hila diya…..sandhya ne puchha kis year me padhte ho? Maine kaha….4th year me….neha ne kaha achchha to doctor hain……aap ko sab kuchh ata hai? Maine puchha matlab? Sandhya ne kaha means doctori ke bare me…….maine kaha kyon nahi……sab aata hai…….

Aise hi humlog bate karte rahe…..2 ghante baad mathura aa gaya…main train se bahar jane laga…maine unlogo se puchha…aap logo ko kuchh chahiye? Unhono kaha nahi…..bas pani wale ko bol dijiye ki pani le aaye aur tea bhi…..main fir station me utar gaya…thoda station me ghumne ke baad wapas train me chadh gaya…..main pani wale ko dhundh raha tha…lekin pani wala sleeper class ki kisi bogi me chala gaya tha…..main station se hi pani aur tea undono ke liye le aaya…..

Unlogo ne puchha pani aur tea wala nahi mila kya train me…maine kaha nahi mila…main station se hi tea aur pani lekar aaya hoon….sandhya ne purse se paise nikale aur mujhe de rahi thi……maine kaha nahi…..iski koi jarurat nahi…tea hi to hai…fir unhone paise wapas rakh liya…..sandhya ne 1 tea mujhe diya aur 1 apne paas rakh liya……maine kaha main aap logo ke liye hi to tea laya tha fir aap log mujhe kyon de rahe ho? Neha ne kaha humdono 1 me hi pi lenge please ye 1 aap le lijiye…..maine tea le liya fir hum log tea pine lage……….

Thode der baad sandhya ke husband ka phone aaya….sandhya unse bate karne lagi….kuchh romantic ho rahi thi sandhya…jaanu…etc words ka use kar rahi thi…..aap mere sath nahi chal rahe ho…miss kar rahi hoon etc……….neha mere taraf dekhne lagi…..main bhi neha ki taraf dekhne laga…hum dono ektak ek dusre ko dekh rahe the…..fir usne achanak nazren chura li……..kyonki sandhya bhi apne husband se baten karna band kar chuki thi………

Fir hum log gap sab karne lage…..sandhya aur neha mere bare me, mere parivar ke bare me puchhne lage…aur vo log bhi apne bare me batane lage..bich me chips wala aaya …chips bhi kha rahe the..baten karte karte sham ko 7 baj gaye the…andhera hone laga tha….waqt kaise gujar gaya…pata hi nahi chala…fir neha bathroom chali gayi…compartment me bas main aur sandhya the….sandhya ne kaha….tum to doctori kar rahe ho….aur main bhi open mind ki hoon……ab to tumhe sharam nahi hogi……..main puchhungi uska jawab saf- saaf doge kya?

Maine kaha haan….kyon nahi…usne puchha koi girlfriend hai kya? Maine kaha haan hai…usne fir puchha kitni hai? Maine kaha 2-3 hai? Usne fir puchha kabhi enjoy kiya hai? Maine kaha means? Sandhya ne kaha kabhi sex kiya hai……maine kaha haan kitni baar……..maine sandhya ke muh se aisi baten sunkar bhaunchakka rah gaya…….main samajh hi nahi paya ye kya ho raha hai…….aur sandhya sawal pe sawal kiye ja rahi thi……..maine kisi housewife ko aisi baten karte pahli bar hi suna tha…….

Sandhya ki in bato se mera lund to khada huye jar aha tha…sandhya ne kaha ki mera figure kaisa hai? Maine kaha bahut hi badhiya…….ekdum mast….usne fir puchha kya tumhari kisi gf ki body, boobs and ass meri tarah hai……maine kaha nahi……..kyonki main uski tariff karna chahta tha……..kyonki thodi vo bhi exite ho rahi thi….baten karte usne na jane kya –kya puchh liya…….main to man hi man khush ho raha tha…….ki shayad ye mujhe chodne ko mil jaye..lekin uske sath me neha bhi to thi………..

Hamari bate hoti rahi….thode der baad usne kaha avinash meri boobs to check karo kaisa hai…..main to ektak use dekhta raha…..usne fir kaha check karo na….maine fir apne dono hatho me uske boobs ke uske blouse ke upar se hi pakda………sach batau dosto uske boobs mere hatho me nahi sama rahe the…………maine fir uske boobs ko daba diya…….usne dhire se ahhhhhh uuuhhhhhhhhh kiya……maine sandhya se puchha ki kya tumhari koi boyfriend tha shadi ke pahle? Sandhya ne kaha haan bahut se the lekin 2 ke sath hi sex kiya tha…………

Uske muh se aisa sunkar to mera lund khada ho gaya tha puri tarah se……usne isko mere pant ke upar se dekh liya…….usne kaha khada ho gaya kya? Main haan kaha dhire se…..fir maine puchha ki shadi ke baad kisi aur ke sath sex nahi kiya hai? Usne kaha kiya hai…….vijay ke 2 dosto ke sathh…usne kaha ki vijay mujhe puri tarah satisfy nahi kar pata…..isiliye shadi ke bad bhi tadpati hoon…….

Uski in baton ko sunkar to mera lund phunkar mar raha tha……..maine kaha tumne mera lund to khada karwa diya….ab to muth hi marni padegi……sandhya ne kaha muth mat maro…..main rat me tumhe surprise dungi……maine kaha thik hai….maine socha shayad mujhse rat me chudegi……..lekin ekaek dhyan aaya ki neha bhi to hai fir kaise chudegi…..maine use puchhne hi wala tha ki neha bathroom se aa gayi….fir mai bolte –bolte ruk gaya…..

Neha aayi aur samne ki seat par baith gayi…….sandhya bh samne ki seat par baithi huyi thi…humlog fir normal baten karne lage……mujhe to raha hi nahi jar aha tha……thode der me bad khane ka order lene panty-car wale aaye aur humlogo ne (tino ne) khane ka order diya….hamari batchit chalti rahi….waqt gujarta gaya…..aur main tadap raha tha sandhya ki chut ka maza lene ke liye…..rat ko kariban 9 baje khana wala khana lekar aaya. Fir humlog muh –hath dhokar aaye aur khana khane lage…..khane ke baad fir hum logo me gap sap fir suru ho gayi……………..

Maine is baar paisa diya khane ka aur khana wala chala gaya…sandhya bol rahi thi tumne aisa kyon kiya….maine kaha ab to aap logo se meri jaan pahchan ho gayi hai…….aur vijay bhaiya ne bhi aap logo ka khyal rakhne ko bola tha…..to fir main aap logo ka khyal kyon na rakhoon…….rat ke kariban 10:30 baj gaye the…..vijay bhaiya ka phone aaya aur sandhya unse 10-15 minute tak baten karti rahi.aur unhone vijay bhaiya ko good night kah diya……isi bich main neha ko bhi dekh raha tha…….vo bhi mujhe dekh rahi thi…….neha ki bhi kya katilana nigahen thi…..thodi der bad rat ko kariban 11:00 baje maine kaha main thoda aaram karna chahta hoon………..

Aur main apne seat par let gaya….light sandhya ne band kar di…….lagbhag pura andhera tha……sandhya ne neha se kaha ki neha tum upar wale seat par so jao….main niche soti hoon….aur saman ko bhi dekhti rahungi……neha upar wali seat par jakar so gayi…..hum sab sone lage…….main sonch raha tha ki sandhya mujhe to surprise dene wali thi lekin diya nahi……aur main so gaya……..

Raat ko kariban 2-3 baj rahe honge tabhi achanak mere sharer ki niche hisse me hal chal si hone lagi…..maine dekha to…….kya dekhta hoon dosto sandhya mera lund chuse ja rahi thi…….main uth gaya……ab sandhya ko bhi pata chal gya ki main uth gaya hoon……vo mera lund cuse ja rahi thi….mera lund to phunkar mar raha tha………sandhya ne mere pant aur underwear ko halka se niche kar diya tha……….main to nashe me pagal sa ho raha tha………..

Aadhe ghante ke chusne ke bad mera jhad gaya aur sandhya ne mera sara sperm apne muh me le liya……aur nigal gayi….aur mere kan ke pas apna muh lakar dhire se kahi………mila surprise…….main to uske chusne ka pagal sa ho gaya tha…….vo kya chusti thi…….mano sara sansar ka experience usme samaya ho…..usme experience to tha hi…….usne bhi to bahuto se lund pelvaya tha……..

Ab maine sandhya ki blouse aur bra khol di…….kya boobs the hathon me bhi nahi aa rahe the…maine uski boobs ko bahut dabaya…..aur halki halki aawaje nikal rah thi……main use mana kiye jar aha tha ki awaje mat nikalo varna neha jag jayegi……..vo man hi nahi rahi thi……..vo bol rahi thi apni fellings ko kaise chhupau……..use bahut hi maza a raha tha……ab maine uske nipples ko dabana aur chusna suru kar diya……ab vo aur mast ho gayi thi……….madmast thi vo aur madmast aurat bhi…..

Chuste chuste uska mera lund bhi fir khada ho gaya…..main chuse jar aha tha…..usne kaha avinash mera jhad gaya…..ab main uski chut ka pani pine chala gaya….namkin……mast tha……..uski chut ekdum gili ho gayi thi………chus raha tha uski chut ko…….uski sadi ko upar chadha diya tha…..aur panty ko niche khaska diya tha……..ab vo exite hone lagi……..jab maine apni tongue ko uski clitoris se touch kiya mano uski sharer me aag lag gayi ho………vo aur josh me aa gayi aur bolne lagi………..raja ab aur sahan nahi hota…………mere raja ab meri chut me apna lund dal hi do……..

Maine uski chut par apna lund rakha aur jor se dhakka mara…….jisse mera pura ka pura lund uski chut me sama gaya…….aur sandhya sihar uthi………maine sandhya se puchha dard ho raha hai……….sandhya ne kaha mere raja is dard me bhi maza hai……..karo na……….aur maine chudai dhire-dhire start kar di…………vo madmast huye ja rahi thi…….aur apne sharer ko uchhal uchhal kar mera sath dene lagi………

Kuchh samay bad shayad vo pura exited ho gayi thi………aur bol rahi thi mere raza jo jor se chodo na………fir maine apni speed badha di……..aur jor jor se chodne laga………..ajeeb ajeeb si vo aawaje nikal rahi thi…………..lekin dhire-dhire……….mujhe laga shayad vo apni feeling ko chhupa rahi thi……..chodne raha……..kuch samay bad sandhya jhad gayi…….10 minute bad main bhi uski chut me hi jhad gaya…….fir vo shant ho gayi……….lekin main to shant nahi hua tha………

Main use apne seat par leta diya aur main bhi uske sath let gaya aur kariban 1 ghante tak use chedta raha…..iske baad usne mera lund chusna fir suru kar diya…….chus chus kar 25 minute me usne mera jhada diya…….iske bad mai aur vo apne apne seat par jakar so gaye……….

Main subah 7 baje utha…..neha uth gayi thi……lekin sandhya abhi tak so rahi thi……shayad rat ko kuchh jyada hi thak gayi thi…..main uth kar fresh hokar aa gaya lekin sandhya abhi tak so rahi thi…..main apne seat par baith gaya……aur neha ko bhi bola ki apki chichi to so rahi hain……ap yahan par aakar baith jaiye…….vo aakar baith gayi aur hum log bate karne lage……15-20 minute bad neha ne kaha ki aap log raat me jo kar rahe the use maine bhi dekhi……..lekin bas sone ka natak kar rahi thi……….chachi ki sexy aawaje sunkar uth gayi…….aur aap logo ke sex ka halki ujale me aanand le rahi thi……………..

Maine use puchha sahi me dekha hai…….usne haan kaha….maine kaha kya kya karte dekha hai…..neha ne kaha vahi jo mera boyfriend mere sath karta hai……..achcha tum bhi chudti ho…maine puchha? Usne haan kaha…………maine kaha jo maine tumhare chachi ke sath kiya use kisi ko nahi bataogi na………usne kaha nahi bataungi………kyonki main na to chichi ki bat kisi ko batati hoon aur na hi chachi meri baat kisi ko batati hain……………..

Maine kaha mere sath sex karogi? Usne kaha haan….kyonki tumhari chudai se agar chichi chinkh padi to main bhi tumhare lund ka swad chakhna chahti hoon…….maine kaha kyon nahi……..fir hum logo me aise hi batein hoti rahi….thodi der me sandhya bhi uth gayi…….vo fresh hokar aayi….hum logo ne tea piya……nasta kiya……sandhya ke husband ka phone aaya….aur sandhya ne bate ki…..fir hum log baten karte rahe…thodi der me bilaspur station aane wala tha….neha ne mujhe apna bilaspur ka mobile number diya sath hi sandhya ne bhi apna mobile number diya…….

Bilaspur station aa gaya aur un logo ko lene ke liye unke parivar wale aaye the……………haan to dosto aap logo ko meri story kaise lagi….jarur bataiyega,,,,,,,
 

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Hello everyone.

We are Happy to present to you The annual story contest of XForum


"The Ultimate Story Contest" (USC).

Jaisa ki aap sabko maloom hai abhi pichhle hafte hi humne USC ki announcement ki hai or abhi kuch time pehle Rules and Queries thread bhi open kiya hai or Chit Chat thread toh pehle se hi Hind section mein khula hai.

Well iske baare mein thoda aapko bata dun ye ek short story contest hai jisme aap kisi bhi prefix ki short story post kar sakte ho, jo minimum 700 words and maximum 7000 words (Story ke words count karne ke liye is tool ka use kare — Characters Tool) . Isliye main aapko invitation deta hun ki aap is contest mein apne khayaalon ko shabdon kaa roop dekar isme apni stories daalein jisko poora XForum dekhega, Ye ek bahot accha kadam hoga aapke or aapki stories ke liye kyunki USC ki stories ko poore XForum ke readers read karte hain.. Aap XForum ke sarvashreshth lekhakon mein se ek hain. aur aapki kahani bhi bahut acchi chal rahi hai. Isliye hum aapse USC ke liye ek chhoti kahani likhne ka anurodh karte hain. hum jaante hain ki aapke paas samay ki kami hai lekin iske bawajood hum ye bhi jaante hain ki aapke liye kuch bhi asambhav nahi hai.

Aur jo readers likhna nahi chahte woh bhi is contest mein participate kar sakte hain "Best Readers Award" ke liye. Aapko bas karna ye hoga ki contest mein posted stories ko read karke unke upar apne views dene honge.

Winning Writer's ko well deserved Awards milenge, uske alawa aapko apna thread apne section mein sticky karne ka mouka bhi milega taaki aapka thread top par rahe uss dauraan. Isliye aapsab ke liye ye ek behtareen mouka hai XForum ke sabhi readers ke upar apni chhaap chhodne ka or apni reach badhaane kaa.. Ye aap sabhi ke liye ek bahut hi sunehra avsar hai apni kalpanao ko shabdon ka raasta dikha ke yahan pesh karne ka. Isliye aage badhe aur apni kalpanao ko shabdon mein likhkar duniya ko dikha de.

Entry thread 7th February ko open hoga matlab aap 7 February se story daalna shuru kar sakte hain or woh thread 25th February tak open rahega is dauraan aap apni story post kar sakte hain. Isliye aap abhi se apni Kahaani likhna shuru kardein toh aapke liye better rahega.

Aur haan! Kahani ko sirf ek hi post mein post kiya jaana chahiye. Kyunki ye ek short story contest hai jiska matlab hai ki hum kewal chhoti kahaniyon ki ummeed kar rahe hain. Isliye apni kahani ko kayi post / bhaagon mein post karne ki anumati nahi hai. Agar koi bhi issue ho toh aap kisi bhi staff member ko Message kar sakte hain.



Story se related koi doubt hai to iske liye is thread ka use kare — Chit Chat Thread

Kisi bhi story par apna review post karne ke liye is thread ka use kare — Review Thread

Rules check karne ke liye is thread ko dekho — Rules & Queries Thread

Apni story post karne ke liye is thread ka use kare — Entry Thread

Prizes
Position Benifits
Winner 1500 Rupees + Award + 30 days sticky Thread (Stories)
1st Runner-Up 500 Rupees + Award + 2500 Likes + 15 day Sticky thread (Stories)
2nd Runner-UP 5000 Likes + 7 Days Sticky Thread (Stories) + 2 Months Prime Membership
Best Supporting Reader Award + 1000 Likes+ 2 Months Prime Membership
Members reporting CnP Stories with Valid Proof 200 Likes for each report



Regards :- XForum Staff
 
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