Update -2
शांता ने आंसुओ से भीगा हुआ अपना चेहरा उपर उठाया और बोली:" बस कर बेटी, मैं गरीब और कमजोर कहां तुम्हारे पति के स्टैंडर्ड के बराबर हूं , पता नहीं भगवान बुढ़ापे में मेरी और कितनी बेइज्जती कराएगा।
रूबी:" बस कीजिए ताई, आप उनकी बातो को दिल से मत लगाए, उनका तो काम हैं उल्टी सीधी बात करना।
शांता:" बेटी मैं जानती हूं कि तुम ये सब सिर्फ मुझे तसल्ली देने के लिए कह रही हो।
रूबी शांता की बाते सुनकर आहत हुई लेकिन बोली:"
" ताई आपने तो आज पहली बार ये सब झेला हैं और मुझे देखो मैं तो रोज इससे ज्यादा बर्दाश्त करती हूं, बस करो ताई आओ चलो खाना खाते हैं।
शांता को एहसास हुआ कि रूबी सच बोल रही है क्योंकि वो सच में अनूप से सबसे ज्यादा परेशान हैं इसलिए उसका गुस्सा कुछ कम हुआ और बोली:"
" बेटी अगर अनूप की मा को मैंने अपनी आखिरी सांसें तक इस घर में रहने का वचन ना दिया होता तो मैं कब का ये घर छोड़कर चली गई होती।
रूबी:" बस करो ताई, अगर आपकी सगी बेटी होती तो क्या आप उसे भी छोड़कर चली जाती?
शांता की आंखो के आगे अपनी बेटी का मासूम सा चेहरा याद अा गया और उसे रूबी में उसकी बेटी नजर आईं और शांता भावुक होते हुए बोली:"
" जरूर चली जाती अगर वो भी मुझे तेरी तरह ताई कहकर बुलाती!!
आखिर कार आज शांता का दर्द शब्द बनकर उसकी जुबान पर आ गया और रूबी शांता की बात सुनकर तेजी से दौड़ती हुई उसके गले लग गई और बोली:"
" मा मुझे माफ़ कर दो, मा मैं आज तक आपके प्यार को नहीं समझ पाई, आज के बाद मैं आपको कभी ताई कहकर नहीं बुलाऊंगी।
शांता ने रूबी को अपने गले लगा लिया और बोली:"
" बस कर मेरी बच्ची तू तो वैसे ही इतना रोटी हैं और कितना रोएगी, चल अा जा दोनो खाना खाते हैं।
उसके बाद दोनो कमरे में चली गई और एक दूसरे को खाना खिलाने लगी।
रूबी:"मा आप आज शाम से आराम करना क्योंकि आज साहिल अा जाएगा और आप तो जानती ही हैं कि उसे मेरे हाथ से बना खाना कितना पसंद हैं
शांता:" ठीक है बेटी जैसे तुझे ठीक लगे, लेकिन बेटी ध्यान रखना कि कहीं साहिल भी अपने बाप पर ना चला जाए क्योंकि उसकी रगो में भी उसका ही खून हैं रूबी।
रूबी को शांता की बाते सुनकर एक पल के लिए चिंता हुई लेकिन अगले ही पल वो आत्म विश्वास के साथ बोली:"
" मा बेशक उसकी रगो में अनूप का खून हैं लेकिन उसने मेरा दूध भी तो पिया हैं और मुझे यकीन हैं कि मेरा दूध उसके खून पर जरूर भारी पड़ेगा।
शांता :" भगवान करे ऐसा ही हो बेटी, तेरा बेटा तुझ पर ही जाए।
शांता ने रूबी का खूबसूरत चेहरा अपने हाथों में भर लिया और उसका माथा चूम कर बोली:"
" अच्छा बेटी मैं चलती हूं अगर कोई जरूरत पड़े तो मुझे आवाज लगा देना मैं नीचे से अा जाऊंगी
रूबी :" ठीक हैं मा, आप आराम कीजिए।
शांता धीरे धीरे चलती हुई नीचे चली गई घर के सामने पड़ी हुई जगह में बने हुए सर्वेंट क्वार्टर में घुस गई।
अनूप का घर काफी अच्छा बना हुआ था और आस पास कॉलोनी में ऐसा घर नहीं था। बाहर एक बड़ा सा घास का मैदान जिसके एक तरफ से अंदर घर की तरह जाता हुआ रास्ता, रास्ते के दोनो ओर लगे हुए खुबसुरत फूल , घर के ठीक बाहर रखे हुए विदेशी गमले घर के अंदर की गरिमा को बाहर से ही बयान कर रहे थे।
एक बड़ा सा गेट जो 316 स्टेनलेस स्टील से बना हुआ, अंदर घुसते ही एक बड़ा सा हॉल जिसमे एक बेहतरीन डिजाइन का डबल बेड, सामने पड़े हुए सोफे और हॉल की खिड़कियों पर पड़े हुए सुंदर पर्दे मानो खींच खींच कर खुद ही अपनी उच्च गुणवत्ता की दास्तां कह रहे थे। हॉल में सामने लगी हुई एक 48 इंच की एलईडी, हॉल से जुड़े हुए अलग अलग तीन कमरे जो बहुत ही सुन्दर बने हुए थे। हॉल में उपर की तरफ जाती सीढ़ियां जो फर्स्ट फ्लोर पर जा रही थी। उपर बने हुए चार कमरे, जिनमें एक दोनो का बेडरूम और बीच में सुंदर सी गैलरी जिसके आखिर में अंतिम कमरा बना हुआ था जो साहिल के लिए था जिसके बाद बाथरूम बना हुआ था।
कमरों के सामने ही किचेन बना हुआ था। किचेन के पास से उपर सेकंड फ्लोर पर जाने के लिए सीढ़ियां और छत पर बना एक छोटा सा कमरा । छत के चारो तरफ ऊंची ऊंची दीवार।
कुल मिलाकर रहने के लिए जन्नत से कम नहीं लेकिन अनूप ने अपनी बेवकूफी की वजह से इसे किसी नरक में तब्दील कर दिया था
शाम हो चुकी थी इसलिए रूबी अपने बेटे साहिल के लिए खाना बनाने के लिए किचेन में घुस गई और उसकी पसंद की चीज़े बनाने में जुट गई। जल्दी ही उसने आलू बनाए और फिर बरतन उठाकर रायते की तैयारी में लग गई।
रायता बनने में ज्यादा देर नहीं लगी और उसने सलाद के लिए सभी सामान जैसे मूली, खीर, प्याज , नींबू सब निकाल कर एक प्लेट में रख दिया ताकि साहिल के आने के बाद ताजा सलाद काट सके।
सभी सामान तैयार हो गया था बस पूड़ी और सलाद उसने ताजा ही बनाना था। उसने अपने बेटे का नंबर डायल किया और उधर से साहिल ने फोन पिक किया और बोला:"
" जी अम्मी कैसी हैं आप ? मैं रास्ते में हूं। आपके बताए अनुसार पहले मै सड़क पर कुत्तों को खाना खिलाऊंगा, फिर अनाथ आश्रम में जाकर आपके पैसे उधर दूंगा, उसके बाद मंदिर में पूजा करने के बाद करीब 30 मिनट बाद घर अा जाऊंगा।
रूबी की हंसी छूट गई और बोली:" बेटा तुमने तो सब कुछ जैसे याद कर लिया हैं।
साहिल:" मम्मी आप जो भी मुझे सिखाती हैं वो मेरे लिए एक गाइड लाइन की तरह से होता हैं जिस पर मुझे अपनी ज़िन्दगी बितानी हैं
रूबी के होंठो पर स्माइल आ गई और बोली:" सच में बेटा तुम दुनिया के सबसे प्यारे बेटे हो, अपनी मा की सभी बाते मानते हो साहिल।
साहिल अपनी तारीफ सुनकर खुश हुआ और बोला:"
" मम्मी आप भी तो मुझे सब कुछ सही से समझाती हैं, मुझे खुशी होती हैं कि मैं आपका बेटा हूं।
साहिल ने ये बात दिल से कहीं थी और उसकी ये बात रूबी के दिल को छू गई और बोली:"
" मेरा बेटा आजकल बहुत बड़ी बड़ी बाते करने लगा हैं। लगता हैं जरूरत से ज्यादा समझदार हो गया हैं वक़्त से पहले ही।
साहिल:" मम्मी बिल्कुल आप पर ही तो गया हू मैं, सब कुछ आपसे ही सीखा हैं।
रूबी:" अच्छा चल चल ठीक हैं, जल्दी से आ अब सारे काम खत्म करके मैं तेरा इंतजार कर रही हूं।
इतना कहकर रूबी ने कॉल कट कर दिया और सोचने लगी कि उसका बेटा बिल्कुल अपने बाप पर नहीं गया हैं। रूबी को खुशी हुई कि वो अपने मकसद में कामयाब हो रही है और उसका बेटा एक घमंडी नहीं बल्कि अच्छा इंसान बन रहा हैं ।
साहिल अनाथ आश्रम में गया और उसने सभी बच्चो को चॉकलेट बांटी और फिर आश्रम मालिक को पैसे दिए जो कि हर हफ्ते उसकी मम्मी उसके ही हाथ से दिलाया करती थी।
थोड़ी देर बाद साहिल मंदिर में भगवान की मूर्ति के आगे दोनो हाथ जोड़कर आंखे बंद किए हुए खड़ा था। उसके मन में अपार श्रद्धा थी और मन ही मन बोला:"
" है भगवान, आपने मुझे सब कुछ दिया हैं और मेरी मम्मी गरीबों की इतनी मदद करती हैं, आपसे बस ये ही प्रार्थना हैं कि मैं भी अपनी मम्मी के नक्शे कदम पर चलू और आप मेरी मम्मी की ज़िन्दगी से सब दुख दर्द दूर कर दो है भगवान।
इतना कहकर उसने अपना सिर झुकाया और घर की तरफ चल दिया। जल्दी ही वो घर पहुंच गया और रूबी को देखते ही उसने अपनी मम्मी को प्रणाम किया और उनके पैर छुए! रूबी ने उसे आशीर्वाद दिया और अपने गले लगा लिया।
साहिल अपनी मम्मी की बांहों में समा गया और रूबी अपने बेटे को प्यार से दुलारने लगी।
रूबी:" देख कितना कमजोर सा हो गया है एक हफ्ते के अंदर ही, बेटे तुम वहां ठीक से खाना नहीं खाते हो क्या ?
साहिल उसके सीने से लगे हुए ही बोला :" मम्मी खाता तो हूं लेकिन जो स्वाद और ताकत मा के हाथ के खाने में होती हैं वो बाहर कहां मिलेगी, अब दो दिन तक सिर्फ आपके हाथ का बना खाना खाऊंगा।
रूबी उसके गाल को खींचते हुए बोली:" दो दिन में तू कितना खा जाएगा बेटा, मेरे साथ अच्छी मजाक करता हैं।
साहिल भी स्माइल करते हुए बोला:" मम्मी जितना कमजोर पिछले पांच दिन में हुआ हू इतना तो खा ही सकता हूं।
रूबी अपनी आंखे नचाती हुई बोली:" अच्छा मेरी बात मुझ पर ही मार रहा हैं तू, बड़ा तेज हो गया हैं।
साहिल:" मम्मी देखो ना मैं कहां से कमजोर हू, अच्छा खासा तो दिखता हू, फिर भी आप हर बार ये ही उलाहना देती हो मुझे।
रूबी:" बेटा मा की नजर अपने बेटे को दुनिया का सबसे ताकतवर बेटा बनते हुए देखना चाहती हैं, और मै भी चाहती हूं कि मेरा शक्तिशाली बने।
साहिल समझ गया कि वो बहस में अपनी मा से नहीं जीत सकता इसलिए बोला:"
" ठीक हैं मम्मी, आप खिलाओ मुझे मैं सब खा जाऊंगा।
रूबी खुश हो गई और बोली:"
" ऐसे कैसे खा जाओगे, जाओ पहले नहाकर आ जाओ, इतना तक मैं सलाद काट देती हूं। तुझे पता हैं मैंने क्या बनाया हैं आज ?
साहिल का चेहरा खुशी से चमक उठा और बोला:"
" मेरा पसंदीदा आलू पूड़ी और रायता। बस मैं अभी गया और अभी नहा कर आया।
साहिल ने अपने कपड़े और बाथरूम में घुस गया। थोड़ी देर बाद ही फ्रेश होकर आ गया और देखा कि रूबी सलाद काट रही हैं तो बोला:
" लाओ मम्मी मैं आपकी मदद कर दू
तो रूबी हंसते हुए हुए बोली
" बड़ी जल्दी नहाकर आ गए हैं लगता हैं बहुत भूख लगी हैं, जाओ तुम टेबल पर बैठो, मैं गर्म गर्म पूड़ी लेकर आती हूं।
साहिल सामने ही कमरे में रखी डाइनिंग टेबल पर बैठ गया और रूबी रायता और आलू की सब्जी के साथ सलाद लेकर आ गई और रायता के भिगोने का ढक्कन हटाकर देखने लगी।
रायता से बहुत अच्छी खुशबू आ रही थी तो सूंघती हुई बोली:"
" वाव कितनी अच्छी खुशबू आ रही है साहिल,
रूबी के बाल उसके खूबसूरत चेहरे के दोनो तरफ बिखरे हुए थे और वो बहुत खूबसूरत लग रही थी। साहिल बोला:"
" मेरी मम्मी बनाएगी तो टेस्टी तो बनेगा ही ना
रूबी अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गई और गर्म हो चुके तेल में पुड़िया तलने लगी। उसने गर्म गर्म पूड़ी साहिल को खिलानी शुरू कर दी तो साहिल एक के बाद एक पूड़ी खाता गया और रूबी खुशी खुशी पूड़ी बनाती गई।