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Erotica Pardesi sex (completed)

Yamraaj

Put your Attitude on my Dick......
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परदेशी भाग - 15





इसलिए ये सब किया। वादा करो बॉबी से इसका जिक्र नहीं करोगे।
जी मैं उससे कुछ नहीं कहूंगा। मगर आप फिर ऐसा कभी मत करना।
अरे पागल, मैं तो तुम्हारी परीक्षा ले रही थी और अब मुझे भरोसा है। फिर ऐसा क्यों करुंगी। यह कहकर वह चलने के लिए पलटी, मगर फिर घूमकर बोली,
और हां तुम कहीं नहीं जा रहे हो, यहीं रहोगे। समझे।
कमल ने केवल हां में सिर हिला दिया। मधु वहां से चली गई। उसके जाने के बाद कमल ने चैन की सांस ली। वह कुछ देर बिस्तर पर बैठा रहा, फिर बाहर निकल गया।


अगले दिन कमल कॉलेज पहुंचा तो पाया बॉबी मेन गेट पर ही उसका इंतजार कर रही थी। बॉबी को देखते ही कमल खिल उठा और मुस्कुरा दिया। बॉबी ने भी मुस्कुरा कर कमल का स्वागत किया।

वह इस बात से अनजान थी कि रंजीत और विनोद अपनी मंडली के साथ तब से ही उसके आसपास न सिर्फ मंडरा भी रहे थे बल्कि उस पर फब्तियां भी कस रहे थे, जब से वह वहां आई थी। बॉबी कमल के खयालों में इतनी खोई थी कि उसे उन लोगों का अहसास भी नहीं था।


कमल के आते ही बॉबी ने उसका हाथ पकड़ लिया और यह देखकर रंजीत और विनोद दोनों जलभुनकर खाक हो गए। रंजीत ने विनोद से कहा,
देख रहा है, हमें देखकर ये और इसकी मां कैसे उछल रही थी और अब सरेआम एक लड़के का हाथ पकड़कर घूम रही है।


घूमने दे रंजीत। इसको साली को एक दिन सबक जरूर सिखाएंगे। इस मादरचोद की गांड और चूत दोनों में लौड़ा न पेला तो मेरा नाम विनोद नहीं।


तू सही कहता है और यह गांव का छोकरा, इसकी साले की गांड में तो मूसल डालूंगा। मादरचोद को आए देर नहीं हुई और कॉलेज की पटाखा को पटा लिया।

वे इस तरह की बातें करते रह गए और कमल का हाथ पकड़े-पकड़े ही बॉबी कॉलेज में दाखिल हुई और प्रिंसिपल के कमरे तक छोड़ दिया। रास्ते भर वह कमल को कॉलेज की खूबियां गिनाती रही। कमल केवल हां-हूं में जवाब देता रहा। वह तो बॉबी का साथ पाकर ही इतना खुश था कि उसे होश ही कहां था दूसरी ओर देखे।

एक तरफ कॉलेज के लड़के कमल के भाग्य से ईष्र्या कर रहे थे और दूसरी ओर लड़कियां कमल का सादगी भरा रूप और उसके आकर्षक व्यक्तित्व पर मर मिटी थीं। वे समझ नहीं पा रही थीं कि गांव से आए इस छोकरे से बॉबी पहले ही दिन इतनी बेतकल्लुफ कैसे हो गई। उन लड़कियों में कुछ बॉबी की स्कूल टाइम की सहेलियां भी थीं, जो बॉबी की तुनकमिजाजी को अच्छे से जानती थीं और यह भी जानती थीं कि बॉबी किसी लड़के को तो मुंह लगा ही नहीं सकती।



ये लड़कियां बॉबी की कमल के साथ बेतकल्लुफी पर हैरत में भी थीं और जल भी रहीं थीं। वे सोच रही थीं कि काश वे बॉबी के स्थान पर होती तो कमल का हाथ पकड़कर प्रिंसिपल के कमरे तक नहीं ले जा रही होती, बल्कि किसी एकांत स्थान पर ले गई होती और वहां बैठकर प्यार की बातें कर रही होती। उन लड़कियों को क्या पता था कि बॉबी और कमल प्यार की उस सीमा को भी पार कर चुके हैं जो वे सोच भी नहीं रही थीं और वह भी पहली ही मुलाकात में।


कमल प्रिंसिपल के सामने बैठा था और बॉबी बेसब्री से बाहर उसका इंतजार कर रही थी। तभी मधु वहां आ पहुंची। उसने आते ही बॉबी को गले लगा लिया और पूछा,
यहां क्या कर रही है? क्लास में नहीं चलना क्या?
कमल सर के कमरे में गया है, उसका ही इंतजार कर रही हूं।


अरे वाह मेरी बन्नो, इतना प्यार। लैला-मजनू को फेल कर दिया तुम दोनों ने तो।
बॉबी केवल मुस्कुरा दी, मगर उसकी मुस्कान में भी एक अलग तरह का गर्व झलक रहा था। अचानक मधु बोली,
बॉबी संभलकर रहना, ये लड़के जो होते हैं न बड़े ही हरामी होते हैं। नई लड़की देखकर इनके मुंह में पानी आ जाता है। उसकी चूंची और चूत से जीभर खेलते हैं और फिर कोई और लड़़की मिलते ही छोड़ देते हैं।


मेरा कमल ऐसा नहीं है, मधु। बॉबी ने गर्दन ऊंची कर घमंड से कहा।
हर लड़का ऐसा ही होता है, बॉबी। मैं अच्छे से इनकी जात जानती हूं। जहां नई चूत देखी नहीं कि जीभ निकालकर दुम हिलाने लगते हैं।
तू कुछ भी कह मधु, मगर मुझे कमल पर पूरा भरोसा है।

और अगर यह भरोसा मैं तोड़ दूं तो? मधु ने पूछा।
कैसे? बॉबी ने उसकी तरफ मुंह घुमाकर कहा।

देख बॉबी तू तो मुझे जानती ही है। मुझे एक लड़के साथ कभी संतुष्टि नहीं मिली। मैं कपड़ों की तरह उन्हें बदलती हूं। तू कहे तो मैं कमल पर लाइन मारती हूं। अगर वह दूसरे लड़कों की तरह हुआ तो जीभ निकालते हुए मेरे पास चला आएगा, नहीं तो मुझे बड़़ी खुशी होगी कि मेरी सहेली को एक सच्चा प्रेमी मिल गया।
तुझे जो करना है कर ले मधु, मुझे भरोसा है कि कमल तेरा नंगा जिस्म देखकर भी नहीं पिघलेगा।


मधु, बॉबी के क्या बताती कि पिछली रात कुछ ऐसा हो चुका है, जब कमल ने उसका नंगा जिस्म ठुकरा दिया था। मगर वह एक चांस और लेना चाहती थी। इस बार बॉबी को इसलिए बता रही थी कि कहीं कमल उसे बता दे तो उसके पास यह बहाना रहेगा कि दोनों उसकी परीक्षा ले रही थीं। प्रकट में वह बोली,
मैं आज से ही उसे भाव देना शुरू कर देती हूं। तू देख लेना दो दिन बाद वह मेरे बिस्तर पर होगा और मेरी चूत चाट रहा होगा।


तू वहम में है मधु। माना तू बहुत खूबसूरत है, मगर वह कमल है। तेरी जैसी हजार लड़कियां भी चुत खोलकर खड़ी हो जाएं तो भी वह मेरा ही रहेगा।

तो लगी शर्त, मधु ने हाथ बढ़ाकर कहा।
लग गई। बॉबी ने उसके हाथ पर हाथ मारकर कहा।

शर्त जीत गई तो क्या मिलेगा। मधु ने पूछा।
जो तू कहेगी। बॉबी ने आत्मविश्वास भरे लहजे में जवाब दिया।

मधु ने सोच लिया कि यदि कमल उसकी खूबसूरती के जाल में फंस जाता है तो वह बॉबी को रंजीत और विनोद के साथ चूत-लंड का खेल खेलने के लिए राजी कर लेगी। दोनों कई बार उसे बॉबी की चूत दिलवाने की गुजारिश कर चुके थे, मगर हर बार वह अपनी भोली सहेली का पक्ष लेती। कमल के आने के बाद उसी भोली सहेली से वह जलने लगी थी और अब वह उससे पता नहीं किस बात का बदला लेना चाहती थी।
तभी कमल प्रिंसिपल के कमरे से बाहर आ गया और दोनों की बातचीत बंद हो गई। मधु ने मुस्कुराकर कमल का अभिवादन किया और पूछा,

जब एक ही कॉलेज आना था तो रुक नहीं सकते थे। दोनों साथ आते।


जी मुझे सुबह जल्दी उठने और निकलने की आदत है। पैदल-पैदल यहां तक चला आया। फिर प्रिंसिपल सर से मिलकर आवेदन भी भरना था।
मधु कुछ कहती इसके पहले बॉबी बोल पड़ी, हो गया दाखिला।
हां हो गया और सर ने कहा मैं आज से ही क्लास में बैठ सकता हूं।


तो चलो। बॉबी ने फिर से उसका हाथ पकड़ते हुए कहा, देर किस बात की है। क्लास शुरू हो चुकी है।
तीनों क्लास की तरफ चल दिए।
 

Lutgaya

Well-Known Member
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कहानी का तारतम्य अच्छा है आगे के लिए अच्छा प्लाट बन चुका है लगे रहो
 
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Yamraaj

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परदेशी प्यार भाग -16






कुछ दिन ऐसे ही कॉलेज की मस्ती में गुजर गए। बॉबी कॉलेज में या तो मधु के साथ होती थी या कमल के। विनोद और रंजीत बॉबी की खूबसूरती के दीवाने थे और किसी भी तरह उसे चोदने की प्लानिंग किया करते थे।

मधु को कई बार उन्होंने जाल में फंसाने की कोशिश की कि वह बॉबी को एक बार फंसाकर शहर के बाहर खंडहर में ले आए, मगर मधु उनकी बातों के जाल में नहीं आई। कमल को लेकर उसकी दीवानगी भी बढ़ती जा रही थी।

वह बॉबी से जलने लगी थी, मगर उसे धोखा भी नहीं देना चाहती थी। इधर रंजीत और विनोद ने बॉबी और कमल के संबंधों को लेकर कॉलेज में अफवाहें फैलाना शुरू कर दीं। बॉबी ने इसकी कोई परवाह नहीं की।

वह क्लास में, बगीचे में यहां तक कि लाईब्रेरी में भी कमल के साथ ही नजर आती थी। इसके बाद भी दोनों को उसका मौका नहीं मिल पा रहा था, जिसके कारण दोनों में नजदीकियां बढ़ीं थीं। चाहकर भी वे जिस्म की प्यास नहीं बुझा पा रहे थे। खुजली बॉबी की चूत में भी होती और कमल का लंड भी बॉबी को देखते ही खड़ा हो जाता, पर क्या करें मजबूर थे दोनों।

ऐसी कोई जगह ही नहीं थी जहां वे जाकर एक दूसरे को मजा दे सकें। मधु के घर कमल के कमरे पर एक बार मौका मिला था, लेकिन अब मधु के माता-पिता के आ जाने से बॉबी वहां भी नहीं जा सकती थी। दोनों इसी उहापोह में थे कि करें तो करें क्या? एक-दो बार बॉबी ने कमल से कहा कि शहर के बाहर खंडहर में जाकर वे मस्ती कर सकते हैं, मगर कमल ने यह कहकर मना कर दिया कि सुरक्षित नहीं है। और एक दिन एक ही क्लास के बाद कमल ने खुद ही बॉबी से कहा,


बॉबी आज तुम्हें मेरे साथ चलना है।
कहां, बॉबी ने पूछा।
यहीं एक बगीचा है, वहां चलना है।
मगर अभी तो एक ही क्लास हुई है।
तो क्या हुआ, आज हम दूसरा ही पाठ पढ़ेंगे।


क्या बात है, बगीचे में ले जाकर मुझे चोदोगे क्या? बॉबी शरारत से बोली।
कुछ ऐसा ही समझ लो। कमल ने मुस्कुराते हुए कहा।

देखो कमल यह मत सोचना कि मैं बगीचे में खुल्लम-खुल्ला तुमसे चुदवाने को तैयार हो जाऊंगी। मैं उस तरह की लड़की नहीं हूं।

अरे बाबा तुम चलो तो सही। फिर कहना।
ठीक है तुम कहते हो तो चलती हूं।
इतना कहकर बॉबी मधु को इशारा कर क्लास से निकल गई। कमल भी उसके पीछे ही था। सबसे पीछे बैठे रंजीत ने विनोद को कोहनी मारते हुए कहा,

गुरू दाल में कुछ काला है। चिडिय़ा कहीं जा रही है और पीछे लल्लू भी है।
विनोद भी बॉबी और कमल को जाते देख चुका था। उसने कहा तो इंतजार किस बात का है। हम भी इनके पीछे चलते हैं। आज तो इसको चोदकर रहेंगे।
विनोद और रंजीत भी क्लास से निकल गए।

इधर कमल, बॉबी को साइकिल पर बैठाकर जा चुका था। विनोद और रंजीत जब तक अपनी साइकिलें उठाते दोनों जा चुके थे। रंजीत ने कहा,
गुरू चिडिय़ा तो उड़ गई।
उड़कर जाएगी कहां। प्रेमियों के मिलन का एक ही तो स्थान है इस शहर में। बाहर किले का खंडहर। दोनों जरूर वहीं गए होंगे।
तुम ठीक कहते हो गुरू, तो हम भी वहीं चलें।

हां, मगर अपने चेलों को भी साथ ले लो।

क्यों गुरू उसका भंडारा करना है क्या?
अरे नहीं, उसकी चूत तो हम ही मारेंगे। वे साले चोद नहीं पाएंगे तो क्या इसकी चूत देखकर ही तमन्ना पूरी कर लेंगे। वो साला लल्लू हाथ-पैर मारेगा तो उन्हें तोडऩे को भी कोई चाहिए।

रंजीत ने अपने जैसे कुछ और लड़कों को लिया और सभी पुराने किले की तरफ चल दिए।

इधर कमल बॉबी को लेकर शहर के बाहर तरफ बने एक बगीचे में पहुंचा, जो किले से थोड़ी दूर था। वह बॉबी को लेकर सीधे चौकीदार के कमरे पर गया। उन्हें देखते ही चौकीदार बाहर आया और चला गया। कमल, बॉबी को अंदर ले आया। आखिर बॉबी ने पूछा,
यह कहां ले आए।

ये मेरे ही गांव का है, यहां चौकीदारी करता है। उसे मैने मना लिया कि दो घंटों के लिए कमरा हमें दे दे। दो रुपये में ही तैयार हो गया। अब दो घंटे तक हम जो चाहे कर सकते हैं।


बॉबी ने मुस्कुराकर बांहें फैला दी। कमल ने उसे बांहों में समेट लिया और गोद में उठाकर वहीं पड़ी चारपाई पर लेटा दिया। इसके बाद एक-एक कपड़े बॉबी के तन से अलग होते गए। बॉबी टुकुर-टुकुर कमल को निहारती रही। कमल ने अपने भी कपड़े उतारे और बॉबी के पास लेट गया। दो नंगे जिस्म एक ही चारपाई पर एक-दूसरे के तन की आग बुझाने को बेताब थे।


कमल ने धीरे से बॉबी के होंठों को चूम लिया और उसका हाथ उसकी चूंचियों पर था। बॉबी भी कमल के तने लंड को थाम चुकी थी और बड़े ही प्यार से उसे सहला रही थी। कमल ने होंठों के बाद बॉबी की चूंचियों को बारी-बारी चूसा और उसकी चिकनी सफाचट चूत को सहलाता रहा। बॉबी कमल के बालों में उंगलियां फिरा रही थी। बॉबी की चूंचियों पर अपने होंठों की मोहर लगाने के बाद कमल नीचे सरका और उसकी चूत पर होंठ टिका दिए। बॉबी के मुंह से सिसकारी सी निकल गई…

ओ…ह….कमल….कितने दिनों बाद मेरी चूत को तुमने चू…मा….है….सी….सी…आ…ह….
कमल ने उसकी तरफ कनखियों से देखा, बॉबी का आंखें आनंद से बंद हो चुकी थीं। वह धीरे-धीरे उसकी चूत को चाटने लगा और जीभ से फांकों के बीच कुरदने लगा। बॉबी आनंद से सिसरियां ले रही थी। कुछ देर कमल उसकी चूत को चाटता और चूसता रहा, फिर बॉबी बोली,

ब…स…. अब और नहीं सह पाउंगी, जल्दी से लंड मेरी चूत में डाल दो।
कमल ने उसकी चूत से मुंह हटाया और कहा आज दूसरे तरीके से। आज बारी तुम्हारी है। बॉबी उसके इशारे के समझ गई और उठ गई। कमल चारपाई पर चित लेट गया। उसका तना लंड छत को निहार रहा था। बॉबी ने पहले तो उसके लंड को प्यार से सहलाया और मुंह में लेकर चूसने लगी। थूक से लंड को पूरी तरह गीला करने के बाद बॉबी अपनी टांगे कमल की कमर के दोनों तरफ फैलाकर बैठ गई। कमल का लंड उसकी चूत को चूम रहा था। बॉबी ने अपने हाथ से उसके लंड को चूत के छेद पर लगाया और थोड़ा ऊपर होकर एकदम से बैठ गई। एक ही झटके में कमल का लंड उसकी चूत में जड़ तक घुस गया। बॉबी जोर से कराही,
आ…
ह…..हाय….मैं….म….र….गई….सी….ई….ई…..
क्या हुआ, कमल ने कहा।
आ…ह…. कमल कितने दिनों बाद चूत की प्यास बुझी है।
यह कहकर वह जोर-जोर से कमल की कमर पर कूदने लगी। कमल का लंड उसकी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। कमल ने सिर उठाकर बॉबी की चूंची को मुंह में ले लिया और बॉबी की गति में अजब की तेजी आती जा रही थी, मानो वह कई दिनों की भूखी हो और अब खाना मिला तो सब एक साथ खा जाना चाहती है।

बॉबी के हर धक्के के साथ कमल भी अपनी कमर उछाल रहा था। आखिर दस मिनिट में बॉबी पस्त हो गई उसके मुंह से तेज सिसकारी निकली…
ओ…ह….कमल…आ…ह….सी…सी….
और इधर कमल के लंड ने भी वीर्य की पिचकारी छोड़ दी। बॉबी ने कसकर उसे अपनी चूत में भींच लिया मानो उसकी एक-एक बंूद को निचोड़ लेना चाहती हो। बॉबी यूं ही कमल के ऊपर लेट गई। कुछ देर बाद कमल ने कहा,
बॉबी उठकर नाली में पेशाब कर लो।
क्यों बॉबी ने पूछा।

ऐसा करने से वीर्य तुम्हारी चूत से निकल आएगा और तुम गर्भवती नहीं होओगी।
ठीक है।

बॉबी ने कहा और उठकर नाली पर बैठ गई। कमल उसे यूं ही देखता रहा। बॉबी की चूत से पानी की धार छूटी और नाली में गिरने लगी। कमल उसे एकटक ऐसे ही निहारता रहा और बॉबी पेशाब करते हुए मुस्कुराती रही। इसके बाद वह उठी और कमल के पास लेट गई। तब तक कमल का लंड फिर से अंगड़ाई लेने लगा था। बॉबी ने उसे फिर से थाम लिया। चौकीदार के आने तक कमल तीन बार बॉबी की चुदाई कर चुका था। चौकीदार के आने के पहले ही दोनों कपड़े पहन चुके थे।

उन्हें बस उसके आने का इंतजार था। चौकीदार के आते ही कमल ने उसे दो रुपये थमाए और बॉबी को लेकर निकल गया।
 
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