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Incest Mrs Gupta

kahani kaunsi language mein likhu


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iamvidisha

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"ये जानना चाहता है? हां बहुत ज़्यादा..." ज्योति ने कहा। "बहुत ही कामुक था और मुझे तो हद से भी ज्यादा मजा आया" ज्योति ने स्माइल दी, अमित भी मुस्कुरा रहा था, लेकिन जब उसे पहले पैंट एडजस्ट करनी पड़ी तो ज्योति जोर जोर से हंसने लगी। अमित उसे गुस्से में देखने लगा. "क्या?" अमित ने पूछा जब ज्योति का हसना कम हुआ तब। ज्योति तो जल्दी जल्दी बिस्तर पर गिर गई थी। अमित को ये देख फिर गुस्सा चढ़ने लगा "क्यूं कर रही है ज्योति?" अमित ने डराते हुए पूछा. ज्योति बिस्तर पर बैठ गई, तब अमित को उसकी चूत की झलक मिल गई। उसका लंड तो झटके मारने लगा. ज्योति उसे देख अभी भी दांत दिखा कर रही थी।

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"तेरा खड़ा है ना? भाई, मुझे पता है। वो फिर से हंसने लगी। अमित भी अब सीधा बैठ गया। उसने अपना खड़ा लंड छुपाने की कोशिश बंद कर दी। "तुझे मज़ाक सूझ रहा है" अमित ने ज्योति की तरफ देखा, उसकी चूची जो अब ड्रेस के नीचे आने से पहले खुलेगी। ज्योति ने अमित को अपना चूची देखा तो ड्रेस पूरी नीचे कर दी। डोनो चूचियां पूरी नंगी थी अमित के सामने। ज्योति ने जान बुझकर उसे चूची दिखाई तो अमित बहुत उत्साहित हो गया। उसने ज्योति का चेहरा देखा, वो अब नहीं रही थी। "क्या ये मेरी वजह से खड़ा है भाई?" ज्योति ने आला पेंट को देखा। अमित भी मुस्कुराता है पीछे को झुका और पूरा पेंट का उभार दिखाने लगा अपनी बहन को।

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"हां थोड़ा थोड़ा। बाकी तेरी और श्वेता का किसिंग सुन कर। एक दम हॉट लगेगा दो सेक्सी लड़कियों को किस करता देख" अमित ज्योति को हिंट दे रहा था, ज्योति भी समझ गई। "भाई तू मुझे और श्वेता को एक साथ देखना चाहता है? ये बहुत ही अश्लील बात है भाई। अशलील भी हॉट भी" ज्योति ने फिर से उसे पेंट को देखा। अमित ने उसे अपने हौंट कांट ते देखा। ज्योति ने फिर अमित को देखा "ठीक है। मैं उसे पूछूंगी, शायद वो मान जाए तो कुछ हो सकता है। लेकिन पहले... पहले मुझे तेरा देखना है" ज्योति की छठी जोर जोर से ऊपर नीचे हो रही थी। अमित के चेहरे पर ये सुनते ही मुस्कुराहट आ गई। "बस इतनी सी बात। हाँ तू देख सकती है। लेकिन सिर्फ देखना चाहती है?" अमित ने भारी कामुक आवाज में कहा। ज्योति ने स्माइल पास की.


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"देखते हैं। पहले देखूंगी। फिर सोचूंगी। पहले कभी देखा नहीं असली में" ज्योति ने धीरे से कहा। अमित खड़ा हुआ और अपनी पेंट उतार दी। ज्योति को अंडरवियर के अन्दर उभार और भी बड़ा लग रहा था। ज्योति ने फ़िर से ऊपर उसके चेहरे को देखा, फ़िर अंडरवियर को देखा जब उसने उसका उपयोग किया, और उसका लंड उछाल कर उसके सामने था। पूरा कड़क था !!!! ज्योति ने अनुमान लगाया कि 8 इंच का होगा और मोटा भी लग रहा था। पॉर्न में देखा वैसा मोटा था। अमित का लंड झूलने लगा जब वो आगे आया ज्योति के करीब। "यूज़ छूना चाहती है?" अमित ने हिम्मत करके बात की. यूज़ यकिन नहीं हो रहा था कि ये रियल में हो रहा है। डर था कि ज्योति का हाथ लगेगा उसका लंड मोटा पड़ेगा। ज्योति ने कहा मुझे सर हिलाया, अपने सामने जो दृश्य था, उसने उसे सम्मोहित कर दिया था। अमित ने देखा ज्योति ने धीरे से दोनों हाथ आगे बढ़ाये और अपने हाथ की हथेली में उसका लंड थाम लिया। लंड को ज्योति का स्पर्श लगता ही सलामी में उछल पड़ा। तो ज्योति ने मुझे सरप्राइज दिया, हाथ पीछे कर लिया। अमित का चेहरा देख मुस्कुराने लगी।
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"एक दम गरम है भाई। मेरे छूटे ही उछलने लगा। तुमसे कंट्रोल होगा?" ज्योति ने फिर से हाथ आगे बढ़ाया और दोनो हाथ में लंड थाम लिया। अमित की आआआआअह्हह्हह्ह निकल गयी. ज्योति ने अमित की आँखों में देखा "अच्छा लग रहा है? मेरा स्पर्श?" ज्योति ने धीरे धीरे हाथ को लंड की चामड़ी पर घुमाया और लंड को उछलता हुआ महसूस किया। अमित की आअहह सूरज कर ज्योति के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। कुछ पल के कंट्रोल के बाद अमित कुछ बोल पाया। "हां मैं कंट्रोल कर सकता हूं। लेकिन जब मैं झड़ता हूं तब मुझसे कोई कंट्रोल नहीं होता। आह्ह्ह्ह। हाँ। बहुत अच्छा लग रहा है। तेरे हाथ का जादू है।" अमित की कबूलात सुन कर ज्योति को खुद पर गर्व महसूस हुआ। "सच में। तुमको अच्छा लग रहा है!!!" ज्योति ने फिर अपने हाथ में लंड घुमाया और उसका सुपाड़ा का रंग देखा। ज्योति की भी आअहह निकल गई जब उसका सुपाड़ा बराबर जूस की 1 बूँद में देखा। उसने अमित की और देखा "क्या ये तुम्हारा माल निकला है?" अमित हसने लगा ये सुन कर
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"नहीं रे। ये माल नहीं। जब मेरा माल निकलेगा, तुझे पता चल जाएगा। तू मेरा पानी निकालना चाहती है? " अमित ने नीचे देखा ज़मीन पर बैठी अपनी गुड़िया सी बहन को। ज्योति ने कहा मुझे सर हिलाया। "क्या निकलनेवाला है?" ज्योति ने लंड का सुपाड़ा ध्यान से देखा। वो उसका माल निकलते हुए देखना चाहती थी। "मममम। वैसे तो मुझे टाइम लगता है लेकिन आज कुछ अलग ही असर तेरा मुझ पर" अमित को अपने घोटो में प्रेशर फील हुआ।
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"सच में!! मेरी वजह से? हाँस्स भाई। झड़ो। निकालो अपना पानी अपनी बहन के लिए। मुझे देखना है" ज्योति तेज़ तेज़ हाथ घुमाने लगी लंड पर। अमित भी हाथ की गति के साथ अपनी कमर हिलाने लगा। उसके अंदर सैलाब फतने वाला था। "उम्म्मम्म उह्ह्ह फक्ककक .... माई अयाआ ... आर्ग्ग्ग्ग" अमित ने आआह्ह्ह्ह के साथ कमर को आगे ढकेला। ज्योति उसकी घुराहट से समझ गई उसका भाई का पानी निकलनेवाला है, उसने और तेज़ हाथ चलाने लगी। और लंड को निहारती रही. फिर आई पहली धार कन्या की जो सीधी गिरी उसके चेहरे पर, और थोड़ा गया उसके खुले मुंह के अंदर।
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ज्योति इतना दबाव का अंदाज़ा नहीं था जब दूसरी धार उसके चेहरे और मुँह पर पड़ी। उसको अपनी जीभ पर वीर्य का स्वाद पहले बार मिला। ज्योति का मुंह बंद हुआ तो तीसरी धार उसकी चीन पर गिरी। ज्योति एक-ए-एक खादी होगी तो अगली धार उसकी छत पर पड़ी। Uski chut me bijli daud gi jab uske apne choti aur pet par अपने भाई का गरम अमृत बीज महसूस हुआ।
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"उह्ह्ह्ह। इतना सारा" ज्योति ने अचरज से देखा जब अमित का लंड अभी भी बहुत ज्यादा चोद रहा था जो उसके पेट पर और उसकी चूत के बाल पर गिरी। आखिरी कुछ बुंदे लंड पर चिपकी हुई थी, जो अब शांत हो गया था। अपने मुँह में माल का स्वाद उपयोग नमकीन लगा, अच्छा लगा और वो उपयोग निगल गई। फिर उसने अमित को देखा जो उसे देख कर मुस्कुरा रहा था। अमित: चोदो मजा आ गया. पर तू तो पूरी गंदी हो गई है ज्योति। जा, बाथरूम में जाकर साफ कर ले. तभी दोनों ने सुना, मुख्य दरवाजे किसी ने जोर से बंद किया


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"yeh janna chahta hai? haan bohot jyada ...... " Jyoti ne kaha. "bahut hi kamuk tha and mujhe toh hadd se bhi jyada maza aaya" Jyoti ne smile di, Amit bhi muskura raha tha, lekin jab use firse pant adjust karni padi toh Jyoti jor jor se hasne lagi. Amit use gusse mei dekhne laga.
"kya?" amit ne pucha jab Jyoti ka hasna kam hua tab. Jyoti toh haste haste bed par gir gayi thi. Amit ko yeh dekh fir gussa chadhne laga "kyu has rahi hai Jyoti?" Amit ne darate hue pucha. Jyoti bed par baith gayi, tab Amit ko uski chut ki jhalak mil gayi. Uska lund toh jhatke marne laga. Jyoti uske dekh abhi bhi daant dikha kar has rahi thi.

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"tera khada hai na? bhai, mujhe pata hai. woh fir se hasne lagi. Amit bhi ab sidha baith gaya. usne apna khada lund chupane ki koshish band kar di.
"tujhe mazaak sujh raha hai" Amit ne Jyoti ki taraf dekha, uski chuchi jo ab dress ke niche aane aadhe khule the samne. Jyoti ne Amit ko apna chuchi dekhte dekha toh dress puri niche kardi. dono chuchiyan puri nangi thi Amit ke samne. Jyoti ne jan bujhkar use chuchi dikhai toh Amit bahut uttejit ho gaya. Usne Jyoti ka chehra dekha, woh ab nahi has rahi thi.
"kya yeh meri wajah se khada hai bhai?" Jyoti ne niche pent ko dekha. Amit bhi smile deta pichhe ko jhuka aur pura pent ka ubhaar dikhane laga apni behen ko.
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"haan thoda thoda. baaki teri aur shweta ka kissing ka sun kar. ek dum hot lagega do sexy ladkiyon ko kiss kartaa dekh" Amit jyoti ko hint de raha tha, Jyoti bhi samaj gayi.
"bhai tu mujhe aur shweta ko ek saath dekhna chahta hai? yeh bohot hi ashleel baat hai bhai. ashleel bhi hot bhi" Jyoti ne fir se uske pent ko dekha. Amit ne use apni honth kaant te dekha. Jyoti ne fir Amit ko dekhte kaha
"thik hai. mai use puchungi, shayad woh maan jaye toh kuch ho sakta hai. lekin pehle ... pehle mujhe tera dekhna hai" Jyoti ki chhati jor jor se upar niche ho rahi thi. Amit ke chehre pe yeh sunte hi smile aa gayi.
"bas itni si baat. haan tu dekh sakti hai. lekin sirf dekhna chahti hai?" Amit ne bhari kamuk awaaz me kaha. Jyoti ne smile pass ki.



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"dekhte hai. pehle dekhungi. fir sochungi. pehle kabhi dekha nahi real mei" Jyoti ne dheere se kaha. Amit khada hua aur apni pent utar di. Jyoti ko underwear ke andar ubhaar aaur bhi bada lag raha tha. Jyoti ne fir se upar uske chehre ko dekha, fir underwear ko dekha jab usne use niche kiya, aur uska lund uchhal kar uske saamne tha. pura kadak tha !!!!
Jyoti ne guess kiya 8 inch ka hoga aur mota bhi lag raha tha. porn me dekhe the waisa mota tha. Amit ka lund jhulne laga jab woh aage aaya Jyoti ke kareeb.
"use chhuna chahti hai?" Amit ne himmat karke baat ki. Use yakeen nahi ho raha tha ki yeh real me ho raha hai. Use dar tha ki Jyoti ka haath lagne uska lund fat padega. Jyoti ne haan me sir hilaya, apne saamne jo drishya tha, usne use sammoheet kar diya tha.
Amit ne dekha Jyoti ne dheere se dono haath aage kiye aur apni haath ki hatheli me uska lund thaam liya. lund ko Jyoti ka sparsh lagte hi salaami me uchhal pada. toh Jyothi ne surprise me haath pichhe kar liye. Amit ka chehra dekh smile karne lagi.
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"ek dum garam hai bhai. mere chhute hi uchhalne laga. tumse control hoga?" Jyoti ne firse haath aage kiye aur dono hath me lund thaam liya. Amit ki aaaaaahhhhhhhhh nikal gayi. Jyoti ne Amit ki aankhon me dekha "achchha lag raha hai? mera sparsh?" Jyoti ne dheere dheere hath ko lund ki chamdi par ghumaya aur lund ko uchhalta mehsus kiya. Amit ki aaahhhh sun kar Jyoti ke chehre par smile aa gayi. kuch pal ke control baad Amit kuch bol paya.
"haan mai control kar sakta hu. lekin jab mai jhadta hu tab mujhse koi control nahi hota. aahhhhh. yessss. bohot achchha lag raha hai. tere haath ka jaadu hai." Amit ki kabulaat sun kar Jyoti ko khud par garv feel hua.
"sach me. tumko achchha lag raha hai !!! " Jyoti ne fir apne haath lund par ghumaye aur uska supada ka rang dekhte bana. Jyoti ki bhi aahhhh nikal gayi jab usne supada par juice ki 1 bund dekhi. usne Amit ki aur dekha
"kya yeh tumhara maal nikala hai? " Amit hasne laga yeh sun kar
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"nahi re. yeh maal nahi. jab mera maal nikalega, tujhe pata chal jayega. tu mera pani nikalna chahti hai? " Amit ne niche dekha zameen par baithi apni gudiya si behen ko. Jyoti ne haan me sir hilaya.
"kya nikalnewala hai? " Jyoti ne lund ka supada dhyaan se dekha. woh uska maal nikalte hue dekhna chahti thi.
"mmmmm. waise toh mujhe time lagta hai lekin aaj kuch alag hi asar tera mujh par" Amit ko apne ghoto me pressure feel hua.

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"sach me!! meri wajah se? yessss bhai. jhado. nikalo apna pani apni behen ke liye. mujhe dekhna hai" Jyoti tez tez haath ghumane lagi lund par. Amit bhi haath ki gati ke sath apni kamar hilane laga. uske andar sailaab fatne wala tha.
"ummmmmm uhhhhhh fuckkkkk .... mai aayaaaaa... arggggggg" Amit ne aaahhhh ke sath kamar ko aage dhakela.
Jyoti usski ghurahat se samaj gayi uska bhai ka pani nikalnewala hai, usne aaur tez haath chalane lagi. aur lund ko nihaarti rahi. fir aayi pehli dhaar virya ki jo sidha giri uske chehre par, aur thoda gaya uske khule muh ke andar.
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Jyoti itna pressure ka andaza nahi tha jab dusri dhaar uske chehre aur muh par padi. usko apni jeebh par virya ka taste pehle baar mila. Jyoti ka muh band hua toh tisri dhaar uski chin par giri. Jyoti ek-a-ek khadi hogayi toh agli dhaar uski chhati par padi. Uski chut me bijli daud gayi jab use apne chhati aur pet par apne bhai ka garam amrit beej feel hua.
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"uhhhhhh. itna sara" Jyoti ne acharaj se dekha jab Amit ka lund abhi bhi dhaar chhod raha tha jo uske pet par aur uski chut ke baal par giri. aakhri kuch bunde lund par chipki hui thi, jo ab shant ho gaya tha. apne muh me maal ka taste use salty laga, achchha laga aur woh use nigal gayi. fir usne Amit ko dekha jo use dekh kar muskura raha tha.
Amit: fuck maza aa gaya. par tu toh puri gandi ho gayi hai Jyoti. jaa, bathroom me jakar saaf kar le.
tabhi dono ne suna, main door kisi ne jor se band kiya

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ज्योति ने खुद को देखा, वीर्य से सानी हुई। "अब क्या करूंगी?" मैं हॉल में जाऊंगा बिना बाथरूम में नहीं जा सकती अमित: ये तेरा तौलिया लपेट कर जल्दी अपने कमरे में घुस जा। वो सबसे पहले पानी पीते हैं किचन में जाकर तो उनकी नज़र तेरे ऊपर नहीं पड़ेगी। जल्दी जा, इसे पहले कि वो हमें ढूंढते हुए यहां आ जाए। ज्योति, तू पूरी नंगी है और मेरे वीर्य से नहा रही है, जल्दी जा अपने कमरे में!!! अमित ने धीरे से चिल्ला कर कहा जब ज्योति हिल नहीं रही थी। ज्योति ने तौलिया और मम्मी की फटी हुई ड्रेस उठाई जो जमीन पर पड़े थे, धीरे से दरवाजा खोला, 4-5 फीट की भागी और अपने कमरे में घुस गई। अपने कमरे के दरवाज़ा बंद कर अपनी सांसें संभाली, तब उसके भाई का वीर्य उसके पेट से बेहटा हुआ उसकी चूत के बाल में जा पाहुंचा।
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ज्योति ने मुस्कुरा तौलिया से साफ करने लगी, तभी उसे वीर्य का स्वाद याद आया। उसने हाथ में चूची और पेट के ऊपर से वीर्य लिया, और नाक के पास लाकर गंध कीया। बड़ी कामुक और तेज़ गंध थी भैया के वीर्य की। वो उसे जिभ निकल कर चैट गई। उसने फिर उंगली में चेहरे पर लगा सारा माल लिया और उसे भी चाट गई। पचा हुआ माल उसने अपनी त्वचा पर रगड़ा, वो बहुत ज्यादा चिप चिपी और नॉटी फील कर रही थी। वो अपने बिस्तर में लेट गई, और उसने अपनी चूत के बालों में लगा वीर्य को उंगली में ले लिया और अपनी चूत पर मसलने लगी। दाना रगड़ने लगी. उसके मन में अपने भाई के साथ जो हुआ और उसे पहले मम्मी के साथ जो हुआ वो घना घूम रही थी। उसकी चूत पूरी गिली थी और वो झड़ने के करीब थी। इतना इस्तेमाल करें तो यकीन था कि अब वह पुरानी जिंदगी में वापस नहीं जा सकती। "क्या मुझे दोनों एक साथ मिलेंगे? ह्म्म्म्म। शायद.... माई मम्मी से अपनी चूत चटवाउ जब माई भाई का लंड चूस रही हूँ। शायद श्वेता भी जुड़ें हमें.... " ज्योति के अरमान तेजी से आगे बढ़ रहे थे, और उसकी तेज़ तेज़ चूत में अंदर बाहर हो रही थी। वो आजसे पहले इतना जोर से कभी नहीं झड़ी थी।
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Jyoti ne khud ko dekha, virya se sani hui. "ab kya karungi mai?" mai hall me jaye bina bathroom me nahi jaa sakti
amit: yeh tera towel lapet kar jaldi apne kamre me ghus ja. woh sabse pehle pani pite hai kitchen me jakar toh unki nazar tere upar nahi padegi. jaldi jaa, isse pehle ki woh hume dhundte hue yaha aa jaye. Jyoti, tu puri nangi hai aur mere virya se nahayi hai, jaldi jaa apne room me !!!
amit ne dheere se chilla kar kaha jab Jyoti hil nahi rahi thi. Jyoti ne towel aur mummy ki fati hui dress uthayi jo zameen par pade the, dheere se door open kiya, 4-5 feet bhaagi aur apne room me ghus gayi. apne room ke darwaza band kar apni saansein sambhali, tab uske bhai ka virya uske pet se behata hua uski chut ke baal me ja pahuncha.
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jyoti ne muskura towel se saaf karne lagi, tabhi use virya ka taste yaad aaya. usne hath me chuchi aur pet ke upar se virya liya, aur nose ke paas lakar smell kiya. badi kamuk and strong smell thi bhaiya ke virya ki. woh use jeebh nikal kar chat gayi. usne fir ungli me chehre par laga sara maal liya aur use bhi chaat gayi. pacha hua maal usne apni skin pe rub kiya, woh bohot jyada chip chipi aur naughty feel kar rahi thi.
woh apne bistar me let gayi, aur usne chut ke baalon me laga virya ko ungli me liya aur apni chut par masalne lagi. dana ragadne lagi. uske man me apne bhai ke saath jo hua aur usse pehle mummy ke sath jo hua woh ghatna ghum rahi thi. uski chut puri gili thi aur woh jhadne ke kareeb thi. use itna toh yakeen tha ki ab woh purani life me wapis nahi ja sakti.
"kya mujhe dono ek saath milenge? hmmmmm. shayad .... mai mummy se apni chut chatwau jab mai bhai ka lund chus rahi hu. shayad shweta bhi join kare hame..... " jyoti ke armaan tezi se aage badh rahe the, aur uski tez tez chut me andar bahar ho rahi thi. woh aajse pehle itna jor se kabhi nahi jhadi thi.
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Amit ab dono maa beti ko pelega
 

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जैसे ही मीरा बिस्तर पर लेटी, उसने अपने आंसुओं पर काबू पा लिया और उसे आश्चर्य भी हुआ कि वह क्यों रो रही थी। फिर वह क्रोधित होने लगी, यहां तक कि क्रोधित भी हुई कि उसके बेटे ने उसे इस तरह से शर्मिंदा किया है। उसने जो किया उसे करने की उसकी हिम्मत कैसे हुई? उसने उसे अपने शरीर को देखने या इस तरह से व्यवहार करने की अनुमति नहीं दी थी। फिर उसे अपनी त्वचा में झुनझुनी महसूस हुई जब उसने उसके चेहरे के भाव के बारे में सोचा जब उसने उसे नग्न देखा था। उसने उस वासना को देखा था जो कुछ सेकंड के लिए थी। तब मीरा को आश्चर्य हुआ कि यदि परिस्थितियाँ उलट गई होतीं तो अमित कैसा दिखता। उसने बिना सोचे-समझे धीरे-धीरे अपने शरीर पर हाथ फिराना शुरू कर दिया क्योंकि उसे याद आया कि उसकी पोशाक गिरने के बाद वह रसोई में कितनी मुश्किल से साँस ले रही थी। लेकिन फिर उसे फिर से याद आया कि वह कितनी शर्मिंदा थी? और अमित ने ही यह लांछन लगाया था! मीरा ने गुस्से में आकर अपने निप्पल को कुछ ज्यादा ही जोर से भींच लिया, जिससे उसकी दर्द भरी चीख निकल गई। "ओह बकवास!" मीरा ने बुदबुदाते हुए कंबल को पीछे धकेला और बिस्तर पर बैठ गई। "वह बकवास अमित? वह मेरे घर में रहता है और मैं उसे खाना खिलाता हूं, कपड़े पहनाता हूं, मैं उसकी स्कूली शिक्षा का खर्च उठाता हूं और वह मुझे कैसे धन्यवाद देता है? वह मेरे अच्छे कपड़े फाड़ देता है और मेरा अपमान करता है!" मीरा ने जोर से कहा क्योंकि उसे लगा कि उसका दिल तेजी से धड़क रहा है और वह खुद को दूसरे गुस्से में ला रही है। लेकिन अब वह जितनी पागल हो गई थी, मीरा अभी भी वह रूप नहीं पा सकी जो उसने उसे थोड़े समय के लिए दिया था? बिल्कुल वैसा ही जैसा ज्योति ने उसे पहले दिया था? "अरेघ? मुझे शांत होने की जरूरत है।" मीरा ने खड़े होते हुए कहा और अपने बालों में हाथ फिराते हुए अपनी सांसों और खुद को शांत करने की कोशिश की। लड़के तो लड़के ही रहेंगे, उसने मन में सोचा जब वह शौचालय का उपयोग करने के लिए बाथरूम में गई। जब वह वहाँ बैठकर पेशाब कर रही थी तो उसने देखा कि ज्योति ने टब में पानी वहीं छोड़ दिया है। ओह ठीक है, मुझे लगता है कि लड़कियाँ भुलक्कड़ होंगी, उसने सोचते हुए आगे बढ़कर टब का प्लग उठाया। फिर उसने स्वयं स्नान करने के बारे में सोचा...केवल इसे एक बहुत गर्म, शांत स्नान बनाने के बारे में। मीरा मन ही मन मुस्कुराई?.हाँ, यह बहुत अच्छा होगा, उसने सोचा। उसने गर्म पानी चालू किया और पुराना पानी निकल जाने के बाद टब को भरने दिया। मीरा ने खुद से कहा, बस थोड़ी मात्रा में ठंडे पानी का उपयोग करने से, टब में पानी लगभग ख़राब हो गया था, बस उसे इसकी ज़रूरत थी। मीरा ने पानी में कदम रखा और तुरंत हांफने लगी? यह वास्तव में गर्म था। जब वह अपने पैर और फिर अपने शरीर को टब में डालती थी तो हर कुछ इंच पर वह हांफने लगती थी। जब उसके नितंब ने पहली बार पानी को चूमा तो वह लगभग टब से बाहर कूद गई, लेकिन फिर उसने डुबकी लगाने का फैसला किया?...और मीरा ने अपने शरीर को पूरी तरह से पानी में गिरने दिया। "वाह! गरम, गरम, गरम! ओह?.ऊह? आह्ह्ह।" जैसे-जैसे वह गर्म पानी की आदी होती गई, वह कराहने लगी और फिर उसने अपने शरीर को नीचे सरकाया और अपने कंधों और यहां तक कि अपने सिर और बालों को भी पानी में डुबो दिया। तो ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उसके कान पानी के अंदर थे, उसे पता ही नहीं चला कि उसका पति घर में घुस आया है। जब जयदेव घर में दाखिल हुआ और लिविंग रूम में चला गया, तो आसपास कोई नहीं था, और वह फ्रिज से पानी पीने के लिए रसोई में चला गया। वह एक गिलास में पानी डाल ही रहा था कि तभी उसे एक दरवाजे के तेजी से खुलने और फिर बंद होने की आवाज सुनाई दी। उसने लिविंग रूम के सामने वाले हॉल में नज़र डाली, लेकिन कुछ भी नहीं देखा और उसे लगा कि उसका एक बच्चा उनके कमरे में इधर-उधर बेवकूफी कर रहा है। तब उसे थोड़ा अजीब लगा कि किसी ने उसका स्वागत नहीं किया और अपनी प्यास बुझाने के बाद वह अपनी पत्नी की तलाश में चला गया। उसने रसोई से बाहर परिवार के कमरे की ओर देखा और वह खाली था। फिर उसने अपने शयनकक्ष का दरवाज़ा खोला और पानी की आवाज़ सुनी, और उसे लगा कि मीरा स्नान कर रही है। वह बाथरूम में चला गया और अपनी पत्नी की ओर देखा। मीरा टब में लेटी हुई थी, उसका सिर उसकी ठुड्डी तक डूबा हुआ था और वह गर्म पानी का आनंद ले रही थी। उसने महसूस किया कि उसके शरीर से मांसपेशियां और तनाव कम होने लगा है क्योंकि गर्म स्नान ने अपना जादू दिखाना शुरू कर दिया है। उसने अपनी आँखें थोड़ी सी खोलीं और देखा कि एक छाया उसके और टब के पार घूम रही है। वह थोड़ा चौंकी, चौंकी, पहले तो उसे समझ नहीं आया कि यह कौन है। फिर उसने देखा कि यह उसका पति था जब वह टब के करीब गया और टब के पास घुटनों के बल बैठ गया। "यार, पानी सचमुच गर्म लग रहा है? और तुम्हारे शरीर में सचमुच लाल शहद हो रहा है। क्या काम के दौरान तुम्हारा दिन ख़राब रहा या कुछ और?" जयदेव ने पूछा, यह जानते हुए कि वह आमतौर पर केवल मांसपेशियों में खिंचाव को कम करने के लिए या स्कूल में उसका दिन खराब होने के लिए गर्म स्नान करती है। आमतौर पर उसे ठंडे पानी से नहाना पसंद है, अगर वह सिर्फ नहाना चाहती है तो उसने कहा कि इससे उसे ताजगी मिलेगी। मीरा टब में वापस लेट गई, लेकिन उसने पीछे मुड़कर देखा। "आप कह सकते हैं कि मेरा दिन ख़राब था? यह थोड़ा तनावपूर्ण था।" मीरा ने ज्योति द्वारा पैदा किए गए तनाव और तनाव के बारे में सोचते हुए कहा? हालांकि बाद में सेक्स और अमित के साथ हुई घटना के दौरान यह काफी हद तक ठीक हो गया था। वास्तव में मीरा को लगा कि उसका दिल फिर से तेजी से धड़कने लगा है क्योंकि वह फिर से क्रोधित हो गई थी। वह अपने पति को यह नहीं बताने वाली थी कि क्या हुआ था? मीरा अमित की हरकतों पर उसकी प्रतिक्रिया का अनुमान लगा सकती थी? वह अमित को बाहर ले जाएगा और जीवित गंदगी को बाहर निकाल देगा, और मीरा यह देखना नहीं चाहती थी या पता है कि उसने अपने बेटे के साथ ऐसा व्यवहार करवाया था। इसलिए मीरा ने उन दिनों की घटनाओं को गुप्त रखने का फैसला किया, हालाँकि वह अभी भी अपने गुस्से को अपने चेहरे पर दिखने से नहीं रोक सकी। "वाह, कुछ नस में चोट लग गई? तुम ऐसी दिखती हो जैसे तुम सिर्फ एक नज़र से दूध को खट्टा कर सकती हो प्रिये।" जयदेव ने उसकी ओर देखते हुए कहा, उसके होठों पर हल्की सी मुस्कान थी, मीरा ने पीछे मुड़कर देखा, उसे 'भाड़ में जाओ?' देखो और अपना हाथ उठाया, उस पर एक पक्षी को गोली मार दी। लेकिन यह सब मजाक में था और वह यह जानता था, क्योंकि वह जानती थी कि वह केवल अपने आचरण से खेल रहा था। "यह बस एक निराशाजनक दिन रहा है, और नहीं? मैं इसके बारे में बात नहीं करना चाहता।" मीरा ने पीछे मुड़कर अपने पति की ओर देखते हुए कहा और उसने अपना हाथ उसके कंधे पर रख दिया। उसने अपना हाथ उसके हाथ पर रखा और उसे दबाया। "अरे आप नहाते समय कंधे की मालिश चाहते हैं?" जयदेव ने उसके पीछे जाते हुए पूछा, यह उम्मीद करते हुए कि उसे उसका उत्तर पता होगा। जब वह पानी से थोड़ा ऊपर उठी तो वह मुस्कुराई, वह टब के सामने वापस आ गया और उसने उसके हाथों को अपने कंधों पर महसूस किया। "हाँ बिल्कुल।" उसने मन ही मन मुस्कुराते हुए कहा. जैसे ही उसने महसूस किया कि वह अपनी मालिश शुरू कर रहा है, वह कराहने लगी। वह जानती थी कि वह दुनिया में सबसे अच्छा मालिश करने वाला नहीं था, सबसे अच्छी बात तो यह थी कि वह उसे खुश करने के लिए काफी अच्छा था, उसने सोचा कि उसकी उंगलियों ने कुछ गांठें ठीक करने में मदद की जो पानी ने नहीं की थीं। "मम्म्म, यह अच्छा लग रहा है डार्लिंग? कृपया इसे जारी रखो।" मीरा कराहने लगी क्योंकि उसे वास्तव में आराम मिलने लगा और उसने महसूस किया कि मालिश और गर्म पानी से उसे नींद आने लगी थी। कुछ मिनटों के बाद वह पूरी तरह बेहोश हो रही थी और उसने ध्यान नहीं दिया कि जयदेव ने उसके शरीर के अन्य हिस्सों की मालिश करना शुरू कर दिया था। जैसे ही जयदेव ने उसके कंधों की मालिश की, वह उसे देखता रहा और काफी उत्तेजित होने लगा। शादी के कई वर्षों के बाद भी वह आसानी से अपनी पत्नी द्वारा उत्तेजित हो गया था, और जैसे ही वह टब में कामुकता से हिलने लगी, वह उत्तेजित हो गया और मुस्कुराने लगा। उसने देखा कि वह नींद में लग रही थी, और उसके मन में उसे सुखद तरीके से जगाने का विचार आया। उसने उसके कंधों के सामने और नीचे रगड़ना शुरू कर दिया और जल्द ही उसके हाथ उसके स्तनों के किनारों को सहलाने और मालिश करने लगे। मीरा जोर-जोर से कराह रही थी, लेकिन अभी भी पूरी तरह से जाग नहीं रही थी, लेकिन होश में आ रही थी और बाहर जा रही थी। इसके बाद जयदेव ने अपने हाथ उसके स्तनों पर फिराए, लेकिन तुरंत ही उन्हें नीचे ले जाना शुरू कर दिया। अपने अंगूठे को उसके निपल्स पर फिराने लगा, जिससे उसकी पत्नी की ओर से एक और नरम कराह निकली। वह आगे बढ़ा और अपने हाथ उसके पेट पर फिराने लगा। मीरा मोटापे से कोसों दूर थी, हालाँकि उसका पेट मांसल था, जो जयदेव को पसंद था। वह कभी भी अत्यधिक तंग शरीर वाली महिलाओं को पसंद नहीं करता था और सोचता था कि महिलाओं के मामले में उसकी पसंद उसकी पत्नी के लिए बिल्कुल उपयुक्त है। जयदेव ने अपने हाथों को नीचे की ओर घुमाया और मालिश करते हुए उसकी पत्नी के मुँह से धीमी-धीमी म्याऊँ की आवाजें आने लगीं। जब उसकी उँगलियाँ उसके कमर के क्षेत्र में जाने लगीं, तो उसने देखा कि उसकी पलकें थोड़ी-सी खुल गई थीं और उसका सिर थोड़ा उसकी ओर मुड़ गया था और उसके होंठों पर एक छोटी सी मुस्कान आ गई थी। "क्या कर रहे हो जयदेव?" मीरा ने बहुत धीरे से पूछा? लगभग म्याऊँ, बिल्ली जैसे स्वर में। "मैं बस यह सुनिश्चित करना चाहता था कि आप तनावमुक्त रहें और मैं आपकी पूरी मालिश कर रहा हूँ।" जैसे ही उसकी उंगलियाँ उसके जघन के बालों के शीर्ष को छू गईं, जयदेव ने मुस्कुराते हुए कहा। उसने उसकी हल्की सी चीख सुनी और देखा कि उसका मुँह एक छोटा सा 'ओ' बना रहा है। फिर वह मुस्कुराई और उसका सिर फिर से पानी में समा गया। "मम्म, इसे जारी रखो? मुझे लगता है कि तुम अद्भुत काम कर रहे हो।" उसने फिर से अपनी आँखें बंद करते हुए रेशमी आवाज़ में कहा, हालाँकि इस बार उसे सोने में संदेह था। बिल्कुल विपरीत... इस बार उसकी साँसें तेज़ होने लगीं और उसके स्तन तेजी से ऊपर-नीचे होने लगे। जैसे-जैसे जयदेव की उंगलियाँ उसके बालों में गहराई तक घुसती गईं, मीरा हर कुछ सेकंड में हांफने लगती थी, गर्म पानी ने उसकी त्वचा को स्पर्श के प्रति बहुत संवेदनशील बना दिया था। आख़िरकार, जब उसकी उँगलियाँ उसकी चूत के ऊपरी हिस्से से मिलीं और उसकी भगनासा को छुआ, तो मीरा पानी से थोड़ा बाहर निकली और काफ़ी ज़ोर से हाँफने लगी। जब वह वापस पानी में बैठी तो वह धीरे से मुस्कुराई, उसके निपल्स चट्टानों की तरह सख्त थे, ठंडी हवा के संपर्क में थे। जयदेव ने यह देखा और टब के चारों ओर घूम गया, और अपना मुँह एक के ऊपर रखा और उसे अपने मुँह में ले लिया। उसके ऐसा करते ही मीरा जोर से कराह उठी और अपना हाथ उसके सिर के ऊपर रखकर उसे पकड़ लिया। "मम्म्म, यह बहुत अच्छा लग रहा है जय!" मीरा ने धीरे से कहा और अपने कूल्हों को उसकी उंगलियों की ओर झुकाना शुरू कर दिया। जयदेव ने इस मौके का फायदा उठाते हुए अपनी बीच वाली उंगली उसकी चूत के होंठों में घुसा दी, जिससे मीरा की आंखें खुल गईं और वह हांफने लगी, फिर उसे देखकर मुस्कुराई। "हे भगवान? यह निश्चित रूप से अच्छा लगता है!" उसने मुस्कुराते हुए कहा और उसके सिर को अपनी छाती से और भी कसकर पकड़ लिया। फिर उसने अपना हाथ उसकी दरार पर ऊपर-नीचे रगड़ना शुरू कर दिया, जिससे वह हर हरकत के साथ कराहने लगी। "तुम्हें वह पसंद है हुह? अच्छा यह कैसा रहेगा?" जयदेव ने नीचे रगड़ते हुए पूछा? फिर पहली तीन उंगलियाँ उसकी चूत में डालीं और उन्हें ऊपर की ओर दबाया। मीरा बहुत जोर से हांफने लगी क्योंकि उसका शरीर झटके से पानी से बाहर आ गया। "अरे बाप रे!" उसने अपने पति की ओर देखते हुए कहा और उसकी ओर देखकर मुस्कुराई। फिर वह आगे की ओर झुकी और उसे जमकर चूमा, उसका खून अब पानी से भी अधिक गर्म हो गया था और उसने अपनी जीभ से उसके मुंह पर हमला किया। जब उनकी जीभें एक-दूसरे के चारों ओर घूम रही थीं तो वे दोनों कराहने लगे और जयदेव ने अपनी उंगली उसकी चूत में और गहराई तक सरका दी। उसने तुरंत देखा कि वह काफी खुली हुई थी, जिसका आमतौर पर मतलब होता था कि उसने अभी-अभी सेक्स किया था या कम से कम बहुत कामुक थी। उसने चुंबन तोड़ा और चेहरे पर उत्सुक मुस्कान के साथ उसकी ओर देखा। "प्रिय, तुम आज बहुत खुले हो? क्या आज किसी बात ने तुम्हें उत्तेजित और परेशान कर दिया है? मेरे बगल में। क्या तुम फिर से अपने छात्रों को चिढ़ा रहे हो?" जयदेव ने कहा, यह याद करते हुए कि कभी-कभी उनकी पत्नी यह सोचकर बहुत गर्म हो जाती थी कि उनके पुरुष छात्र उन्हें देख रहे हैं। उसने उसे यह भी बताया था कि कुछ बार उसने अपने छात्रों को पागल करने के लिए सेक्सी पोशाकें पहनी थीं। मीरा पहले तो उसके सवाल से थोड़ा पीछे हट गई, उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या जवाब दे। लेकिन उसने सोचा कि इसे सरल रखा जाए और जो कुछ हुआ उस पर उसे अपना निर्णय लेने दिया जाए। "मम्म ठीक है, हाँ? आज कुछ चीज़ें हुईं, लेकिन मुझे कुछ चीज़ों पर गुस्सा भी आया इसलिए यह बहुत निराशाजनक था।" मीरा ने यथासंभव सर्वोत्तम उत्तर देते हुए कहा, उम्मीद है कि वह नहीं चाहेगा कि वह विस्तार से बताए। "लेकिन अभी मत रुको जय? मेरी चूत को अपनी उंगलियों से चोदो!" उसने गुर्राते हुए उसकी बांह पकड़ ली और उसकी उंगलियों को अपने अंदर और भी अंदर तक घुसाने की कोशिश की। जयदेव मुस्कुराया, उसे वास्तव में चिंता नहीं थी कि उसकी पत्नी कैसे उत्तेजित हो गई थी, बस वह अब हो गई थी। उसने अपनी उंगलियों को उसके अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया, जिससे वह गहरी कराहने लगी क्योंकि उसने उसे अपने हाथ से चोदा। जयदेव नीचे पहुंचे और अपनी बेल्ट खोल दी और अपनी पैंट को अपनी कमर से नीचे गिरा दिया। फिर उसने अपना अंडरवियर नीचे खींच लिया और अपना दूसरा हाथ अपने धड़कते हुए लंड पर लपेट लिया और अपनी पत्नी को उसकी हरकतों पर तड़पते और कराहते हुए देखा। मीरा ने उसकी हरकतें देखीं और उसके चेहरे की ओर देखा। "हे भगवान जय? मुझे अपना लंड लेने दो!" मीरा ने कहा और वह टब के किनारे पर झुक गई और जयदेव करीब आ गया और मीरा ने उसका लंड अपने मुँह में ले लिया और उसके लंड पर अपना सिर हिलाने लगी, जिससे उसकी उत्तेजना बढ़ गई, जो उसकी उंगलियों से पैदा हो रही थी।
 
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"ओह मीरा? इसे चूसो!" जयदेव ने उसे अपना लंड निगलते हुए नीचे देखते हुए कहा। उसने सोचा कि वह बहुत उत्साहित होगी, उसने सोचा, क्योंकि वह उसे बहुत बार नहीं चूसती है और शायद ही कभी इतनी तीव्रता से चूसती है। उसने अपनी उंगलियाँ उसकी चूत में और तेज़ी से डालना शुरू कर दिया और उसे उसकी बढ़ी हुई कराहें सुनाई देने लगीं क्योंकि उसे पता था कि वह कमिंग के करीब पहुँच रही थी। वे दोनों उछल पड़े जब उन्होंने अपने शयनकक्ष से जोरदार आवाज सुनी और जयदेव ने पीछे मुड़कर देखा तो अमित वहां खड़ा था और उन दोनों को बाथरूम में देख रहा था। "मैं भगवान हूँ?मुझे क्षमा करें पिताजी!" अमित ने अपने सामने दृश्य लेते हुए कहा और मीरा ने उसकी आवाज सुनकर जयदेव के सदस्य को छोड़ दिया और खुद को ढकने के लिए तौलिया पकड़कर टब से बाहर कूद गई। जयदेव उठ खड़ा हुआ, लेकिन अपने बेटे को घूरते हुए उसे अपने नग्न शरीर की कोई चिंता नहीं थी। "अमित? आख़िर तुम यहाँ क्या कर रहे हो!" जयदेव ने गुस्से में कहा और अपने शयनकक्ष में जाकर अपने बेटे की ओर देखा। अमित को समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहे, वह अपने पिता की ओर नहीं देख पा रहा था और उसने नीचे देखने की कोशिश की, लेकिन उसने पाया कि इसका मतलब अपने पिता के लटकते हुए सदस्य को घूरना है, इसलिए उसने अपना सिर घुमाया और दीवार की ओर देखा। "धत् अमित, जब मैं तुमसे बात करूँ तो मेरी ओर देखो!" जयदेव ने थोड़ा ऊंचे स्वर में कहा। अमित ने अपना सिर इधर-उधर घुमाया और अपने पिता की ओर देखा। "मुझे खेद है पिताजी? मैं? मैं सिर्फ नमस्ते कहने के लिए आ रहा था? मेरा ऐसा इरादा नहीं था। आप जानते हैं। मुझे क्षमा करें पिताजी? माँ।" अमित ने अपने पिता की ओर देखते हुए कहा। जयदेव ने गुस्से में गुर्राते हुए कहा और अपने बेटे के पास से एक जोड़ी लाउंजिंग पैंट लेने के लिए अपनी अलमारी की ओर चले गए, क्योंकि जब मीरा टब से बाहर निकली थी तो उनकी वर्क पैंट भीग गई थी। जब वह अमित के पास से गुजरा तो अमित ने अपनी मां की ओर देखा और मुस्कुरा दिया। "मुझे हर चीज़ के लिए सचमुच खेद है माँ।" अमित ने उसे आँख मारते हुए कहा। उसने अपनी माँ की प्रतिक्रिया देखी और जान गया कि उसे छेड़ना एक बुरा विचार था। "तुम बकवास!" मीरा ने कहा जैसे ही वह नीचे पहुंची और उसने अपना स्नान स्पंज उठाया और उसे अपने बेटे पर फेंक दिया, जब तक वह कमरे से भाग नहीं गया, तब तक वह बमुश्किल उसे देख पाया। वह जानती थी कि उसका बेटा किस बात का जिक्र कर रहा था और वह देख सकती थी कि उसने पहले जो किया था उस पर उसे थोड़ा पछतावा था। जयदेव ने पीछे मुड़कर उसकी ओर देखा, फिर शयनकक्ष से पीछे हटते हुए अपने बेटे की ओर देखा। "आखिर मीरा के बारे में ऐसा क्या था?" जयदेव ने कुछ नई पैंट लेते हुए पूछा और वापस उसके पास आ गया, जब वह उसे पहनने लगी। वह बता सकता था कि वह अपने बेटे से नाराज़ थी और उसने यह नहीं सोचा था कि यह सिर्फ इसलिए था क्योंकि उसने उन्हें थोड़ा सेक्स करने से रोका था। "अरे कुछ नहीं?.वह?मैं?बस अपने बेटे पर नाराज़ हूँ।" मीरा ने पहले जो हुआ उसके बारे में कुछ न कहने के बारे में सोचते हुए कहा। वह नहीं चाहती थी कि उसका पति वास्तव में अमित पर क्रोधित हो, लेकिन वह क्रोधित थी। फर्क यह है कि अगर वह नाराज होती तो अमित को कोई नुकसान नहीं होता। लेकिन उसे जयदेव को कुछ बताना था? वह जानता था कि कुछ गड़बड़ है। "ओह, अमित आज घर आने के बाद सचमुच बहुत बकवास कर रहा था। वह बहुत अभद्र व्यवहार कर रहा था और इसने मुझे और उसे परेशान कर दिया... हमें बीच में रोकने से मैं वास्तव में पागल हो गया। उसने उसकी ओर देखा, उसकी आंशिक सच्चाई से संतुष्ट लग रहा था . "मुझे लगता है कि मुझे उस लड़के से गंभीरता से बात करने की ज़रूरत है।" जयदेव ने उस दरवाजे की ओर देखते हुए कहा, जहां से अमित निकला था। "नहीं प्रिये?नहीं?यह ठीक रहेगा। मैंने इससे निपट लिया?मैं?मैंने बस हमें उसके द्वारा बाधित होने दिया, मेरे पास आओ। यह वास्तव में निराशाजनक दिन रहा है!" उसने बिस्तर के किनारे पर बैठते हुए कहा। जयदेव उसके बगल में बैठ गया और झुककर उसके होठों को चूम लिया। तभी मीरा को महसूस हुआ कि उसकी उंगलियाँ उसके पैर के ऊपर चलने लगी हैं और उसने चुंबन तोड़ दिया और अपना हाथ उसके पैर पर रख दिया। "नहीं जय? मुझे खेद है, लेकिन मैं अभी मूड में नहीं हूँ। मुझे क्षमा करें।" मीरा ने उसके कंधे पर अपना सिर झुकाते हुए कहा और उसके सामने देखने लगी। उसने उसके सिर के शीर्ष को चूमा। "तुम्हें यकीन है कि मुझे उसके साथ अच्छी बातचीत नहीं करनी चाहिए... इससे कुछ फायदा हो सकता है।" जयदेव ने उसके बालों को सहलाते हुए कहा। उसने अपना सिर हिलाया। "उसके मोटे सिर के साथ?मुझे इसमें संदेह है। नहीं, यह ठीक रहेगा। अगर कुछ और होता है?मैं इससे निपट लूंगा प्रिये।" मीरा ने यह कहते हुए कहा कि वह आज अपने बेटे के रवैये को वापस पाने के लिए क्या करना चाहिए, इस पर विचार कर रही थी। वह उस पर बहुत क्रोधित थी, लेकिन जानती थी कि वह शारीरिक रूप से उसे दंडित करने में असमर्थ थी, और वह नहीं चाहती थी कि जय ऐसा करे?... वह बहुत दूर तक जा सकता है, उसने सोचा। उसने आह भरी, यह सोचकर कि उसके पास कुछ आएगा। जब अमित उनके कमरे से बाहर निकला, तो उसके चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान थी। वह वास्तव में अपने पिता को नमस्ते कहने के लिए उनके कमरे में गया था, लेकिन यह भी देखने के लिए कि क्या उसकी माँ उसे बताएगी कि पहले क्या हुआ था। जब उसने शयनकक्ष का दरवाज़ा खुला पाया और अंदर चला गया, तो उसने सेक्स की स्पष्ट आवाज़ें सुनीं और जहाँ भी वह उन्हें देख सकता था, वहाँ पहुँच गया। वह अपनी माँ को ओले पॉप तलवार का मुँह देखने के लिए ठीक समय पर वहाँ पहुँच गया। अमित को स्वीकार करना पड़ा, उसके पिता के पास एक अच्छा था, यह उसके अपने से थोड़ा बड़ा था, लेकिन अमित ने इतना नहीं सोचा था। उसने बेहतर एंगल पाने के लिए थोड़ा पीछे जाने की कोशिश की थी, तभी वह अपनी मां के ड्रेसर से टकरा गया, जिससे उस पर कुछ गिरा और एक बड़ा रैकेट खड़ा हो गया। उसे एक पल के लिए चिंता हुई कि उसके पिता उसे मारेंगे, वह बहुत गुस्से में लग रहा था, अमित ने सोचा। अमित जानता था कि उसे अपनी माँ से यह टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी, वह वास्तव में इसके लायक नहीं थी, लेकिन अमित ने इसे जाहिर कर दिया और इसे वापस नहीं ले सका। अमित कुछ मिनटों के लिए अपने कमरे में बैठा रहा, यह सुनिश्चित करते हुए कि उसके पिता उसे उसके कार्यों के लिए दंडित नहीं करने जा रहे हैं। अमित सोचने लगा कि उसकी माँ ने जयदेव को सब कुछ नहीं बताया, हालाँकि उसे आश्चर्य हुआ कि क्यों। अमित वापस बिस्तर पर लेट गया और एक मिनट तक सोचता रहा। या तो वह इस बारे में पिताजी से बात करने में बहुत शर्मिंदा है, या शायद वह नहीं चाहती कि पिताजी इस बारे में मुझ पर झपटें, अमित ने मन में सोचा। किसी भी तरह से तट साफ लग रहा है, उसने खुद से कहा। तभी अमित ने अपनी बहन का दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ सुनी और उसे पता चल गया कि वह अब साफ़ हो चुकी है। जब उसे अपने कमरे में वीर्य से लथपथ उसकी याद आई तो वह मुस्कुराया। मुझे वह फिर से प्रयास करना होगा, उसने सोचा। अपने बिस्तर पर कुछ देर लेटने के बाद, ज्योति ने तुरंत अपने तौलिये का उपयोग करके अपने वीर्य को पोंछ लिया था। अमित की तरह उसे भी यह जानने की जल्दी थी कि उसकी माँ उसके पिता से क्या कहेगी। ज्योति भी सोच रही थी कि क्या उसे अपनी माँ से कुछ कहना चाहिए कि उसके और अमित के बीच क्या हुआ था। उसने अभी तक निर्णय नहीं लिया था, लेकिन वह अपनी माँ को बताना चाहती थी कि वह कितनी शरारती थी, ताकि उसकी माँ उसे फिर से सज़ा दे सके। शायद मैं उसे कल स्कूल से पहले बताऊंगी, पापा और अमित के चले जाने के बाद, उसने चेहरे पर मुस्कान के साथ सोचा। ज्योति ने अपने कपड़े पहने और दरवाज़ा खोला, उसके चेहरे पर मुस्कान थी और उसने अपनी माँ के साथ अगले सत्र की कल्पना की। "हाय डैडी, आपका दिन शुभ हो?" ज्योति ने अपने पिता को शयनकक्ष से बाहर आते हुए देखकर कहा। जयदेव ने अपनी बेटी की ओर देखा और मुस्कुराते हुए उसके पास आई और उसे गले लगा लिया। घर में गले मिलना असामान्य नहीं था, लेकिन आम तौर पर सिर्फ घर आने के लिए नहीं। "अच्छा, आज तुम खुश हो?...आज कुछ अच्छा होगा?" जयदेव ने उसे गले लगाते हुए पूछा, फिर अलग हो गया और उसकी ओर देखा। "कोई कारण नहीं पिताजी, मुझे लगता है मैं खुश हूँ। आपका दिन ठीक है?" ज्योति ने फिर से पूछा और अलमारी के पास जाकर एक गिलास ले आई और पेय डालने के लिए फ्रिज खोला। उसके पिता ने वही गिलास उठाया जो उन्होंने पानी के लिए इस्तेमाल किया था और अपना गिलास उसके पास रख दिया। "मुझे ऐसा लगता है, लेकिन काम पर कुछ खास नहीं हुआ। स्कूल में आपका क्या हाल है?" जयदेव ने वास्तविक जिज्ञासा से अधिक शिष्टाचारवश पूछा। "वही पुराना वही पुराना डैडी।" ज्योति ने कहा और उसने पलट कर देखा तो उसकी माँ अपने पीछे का दरवाज़ा बंद करके शयनकक्ष से बाहर आ रही थी। "मैं और माँ स्कूल से घर आने के बाद से ही साथ-साथ घूम रहे हैं।" ज्योति ने अपने पिता के पीछे अपनी माँ की ओर देखते हुए अपने चेहरे पर एक दुष्ट मुस्कान के साथ कहा। मीरा ने उसकी ओर देखा और खुद ही मुस्कुरा दी, हालाँकि उसके चेहरे पर हल्की सी शरमा थी। "तो फिर यह अच्छा है। मुझे पता है कि तुम दोनों को अपनी माँ की कक्षा में होने से कुछ समस्याएँ हो रही हैं। क्या तब यह अपने आप ठीक हो गया?" जयदेव ने ब्रेड बॉक्स से नाश्ता निकालते हुए पूछा और उनकी ओर देखा, मीरा ज्योति के बगल में खड़ी थी लेकिन जब उसने फ्रिज में देखा तो उसकी पीठ अपने पति से दूर हो गई थी। "हाँ, जय, आज हमारे बीच सहमति बन गई है, इसलिए मुझे लगता है कि अब हमारे बीच कोई मतभेद नहीं होगा।" मीरा ने फ्रिज बंद करते हुए कहा और अपनी बेटी का गिलास लेकर एक घूंट पिया और फिर उसे वापस दे दिया। ज्योति ने अपनी माँ की इस छोटी सी हरकत पर हँसने की कोशिश नहीं की, लेकिन उसके लिए और भी कठिन समय था जब उसकी माँ ने अपना हाथ उसके पीछे रख दिया, जैसे उसने उसे काउंटर पर रखा हो। तब ज्योति ने महसूस किया कि उसकी माँ की उंगलियाँ उसकी गांड के ऊपर रगड़ रही थीं और उसके पिता उन्हें देखकर मुस्कुरा रहे थे। "तो फिर अच्छा। खैर मैं थोड़ा आराम करने जा रहा हूँ।" जयदेव ने अपना नाश्ता खत्म करते हुए कहा और अपना गिलास अपने साथ लेकर लिविंग रूम में चला गया और टीवी चालू कर दिया। मीरा ने ज्योति की ओर देखा और ज्योति ने पलटकर देखा। वे दोनों बहुत चुपचाप हँसे, और मीरा ने बाहर लिविंग रूम में देखा और देखा कि उसका पति रसोई से दूर बैठा था। फिर वह वापस ज्योति के पास गई और उसके सामने खड़ी हो गई। "क्या आप बेहतर महसूस कर रही हैं माँ?" जब मीरा सुनने के लिए उसके करीब झुकी तो ज्योति ने अपनी माँ से फुसफुसाया। मीरा फिर पीछे हट गई, न जाने उसका क्या मतलब था, और फिर उसे याद आया कि उसकी बेटी ने उसे कंबल के नीचे रोते हुए देखा था, और मीरा को तब पता चला कि उसने क्यों पूछा था। "मैं अब ठीक हूँ; मैं बस किसी चीज़ से अचंभित हो गया था।" मीरा ने कहा, निश्चित नहीं कि ज्योति को पता था कि वह क्यों परेशान थी। लेकिन ज्योति ने उसकी ओर देखा और और भी करीब झुक गयी। "मुझे पता है कि अमित ने क्या किया माँ? जिस तरह से आपने व्यवहार किया, उससे मुझे लगा कि उसने कुछ किया है। मेरे चिल्लाने के बाद उसने मुझे बताया कि उसने क्या किया।" ज्योति ने संक्षेप में कहा कि नीचे क्या हुआ था? उसने सोचा कि वह बाद में अधिक खुलकर बात कर सकती है जब उसके पिता और अमित आसपास नहीं होंगे। मीरा ने उसे देखकर आह भरी और फिर उसे गले लगा लिया। "वह एक बकवास है, भले ही वह मेरा बेटा हो। और अगर वह सोचता है कि उसने जो किया उसके बाद वह बच गया है, तो वह दुखद रूप से गलत है।" मीरा ने कहा, उसकी आँखों में आग जल रही थी, जिसे ज्योति ने पहले देखा था? ठीक उससे पहले जब उसने और उसकी माँ ने मूर्ख बनाया था। ज्योति ने पाया कि वह उत्तेजित हो रही है और जब उसने अपनी माँ की ओर देखा तो उसे महसूस हुआ कि उसकी चूत गीली होने लगी है। "माँ? आप मुझे गीला कर रही हैं, मुझे लगता है कि आपको शांत होने की ज़रूरत है।" ज्योति ने अपनी माँ को मुस्कुराने की कोशिश करते हुए कहा, जो उसने किया। "मेरी, मेरी कितनी शरारती बेटी है, मुझे लगता है कि तुम्हें सज़ा देने की ज़रूरत है?.लेकिन बाद में।" मीरा ने अपनी बेटी की ओर मुस्कुराते हुए कहा और जल्दी से उसे गले लगा लिया। "लेकिन अभी चलो तुम्हारे पिता के साथ अंदर चलते हैं, इससे पहले कि उन्हें जिज्ञासा हो कि हम यहाँ क्या कर रहे हैं।" मीरा ने अपनी बेटी से कहा और हटने लगी. लेकिन ज्योति ने झट से उसे पकड़ लिया और उसके होठों को चूम लिया और फिर मुस्कुरा दी। मीरा भी मुस्कुराई और वे दोनों लिविंग रूम में आ गए और सोफे पर एक साथ बैठ गए। जब वे कमरे में आए तो जयदेव अपने आरामकुर्सी पर बैठे थे और जब वे आगे बढ़े और बैठ गए तो उन्होंने बस उन्हें देखा। अमित अपने कमरे में बैठकर अपनी कई कक्षाओं का होमवर्क करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वह ध्यान केंद्रित नहीं कर सका। उसका मन बार-बार अपनी बहन को देखने के बारे में सोचता रहा, जबकि वह उसके आने पर उसके सामने घुटनों के बल बैठी थी। माँ के अद्भुत शरीर की तस्वीर भी उसके दिमाग में घूम गई, वह उसके भागने से पहले उसका डरा हुआ व्यवहार और घबराहट देख सकता था। अमित ने अपनी किताबें बंद कर दीं और निराश होकर खड़ा हो गया। उसने सोचा, आज रात होमवर्क के लिए बहुत कुछ है। वह अपने कंप्यूटर के पास गया और कुछ सर्फ करने का फैसला किया... शायद पोर्न साइटें ढूंढी। उसने सोचा, शायद उसे अपनी माँ और बहन से अपना ध्यान हटाने के लिए झटके की ज़रूरत है। हालाँकि अमित को जल्द ही समय का पता नहीं चला और उसके दरवाजे पर दस्तक हुई। "हां वह क्या है?" अमित ने जल्दी से अपना शॉर्ट्स वापस सरकाते हुए पूछा, कहीं उसने दरवाज़ा बंद न कर दिया हो। "अमित, माँ कहती है कि रात का खाना तैयार है।" अमित ने अपनी बहन को यह कहते हुए सुना और उसने उसे दरवाज़ा खोलने की कोशिश करते हुए भी सुना। वह मन ही मन मुस्कुराया? उसने सोचा, मुझे लगता है कि मैंने इसे बंद कर दिया है। वह इसे खोलने के लिए उठा, और सोच रहा था कि क्या वह कुछ और चाहती है, उसने मुस्कुराते हुए सोचा। लेकिन अमित ने दरवाज़ा खोला और देखा कि उसकी बहन पहले ही जा चुकी थी और उसने बाहर देखा तो वह लगभग रसोई में थी। दरवाज़ा बंद करते ही उसने भौंहें चढ़ा लीं और अपनी कमीज़ पकड़ ली।
 
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“जी मिसेज गुप्ता।” रवि ने अपने अध्यापक से कहा। श्रीमती गुप्ता ने उसकी ओर देखा और हल्के से मुस्कुरायीं।"ठीक है रवि, लेकिन अगर तुम्हें कोई और समस्या हो तो मुझे बताओ" मिसेज गुप्ता ने रवि से कहा। श्रीमती गुप्ता या मीरा गुप्ता, जैसा कि वह स्कूल के बाहर जानी जाती थीं, 12वीं कक्षा की भारतीय इतिहास की शिक्षिका थीं। वह कॉलेज के बाद से अपने पूरे वयस्क जीवन में, पिछले सात वर्षों से इसी स्कूल और ग्रेड में पढ़ा रही थी। मीरा ने अपने पति जयदेव के साथ ख़ुशी-ख़ुशी शादी कर ली थी और वह तीन बच्चों की माँ थी।

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सबसे बड़ी बेटी लीला कॉलेज के तीसरे वर्ष में थी और अब घर से बहुत दूर थी। अमित उनका दूसरा सबसे बड़ा और इकलौता बेटा था, वह एक स्थानीय कॉलेज के पहले वर्ष में था और अभी भी घर पर रहता था। मीरा अक्सर सोचती थी कि वह घर पर रहता है क्योंकि वह जानता था कि वह न तो खाना बना सकता है और न ही साफ़-सफ़ाई कर सकता है। और फिर उसकी सबसे छोटी, ज्योति थी।



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इस नए स्कूल वर्ष की शुरुआत के बाद से पिछले कुछ हफ्तों में यह थोड़ी समस्या थी। ज्योति अब अपनी माँ की कक्षा में थी और स्कूल के समय में मीरा को यह भूलने में कठिनाई हो रही थी कि वह उसकी बेटी है।जब उन्हें पता चला कि वे एक ही कक्षा में होंगे, तो मीरा इस निर्णय पर पहुँची थीं कि ज्योति को स्कूल में रहते हुए किसी भी शिक्षक की तरह उसे संबोधित करना होगा और उसके प्रति व्यवहार करना होगा, सिवाय तब जब वह बिल्कुल अकेली हो। ज्योति को यह कठिन लगा, मुख्यतः इस तथ्य के कारण कि, जैसा कि मीरा ने इसे कहा था; वह कुछ-कुछ माँ की बिगड़ैल लड़की थी। मीरा को अच्छा लगा कि वह अब भी उसे डियरमॉमा कहकर बुलाती है,


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लेकिन स्कूल के माहौल में होने के कारण, मीरा को पता था कि अगर वह ज्योति को उसे "डियरमॉमा" कहने देगी तो उसे बहुत चिढ़ाया जाएगा। इस बात का ज़िक्र करने की ज़रूरत नहीं है कि वह स्वयं अपने साथी शिक्षकों से चिढ़ती थी। इसलिए स्कूल के लिए वह अपने सभी छात्रों के लिए "मिसेज गुप्ता" थीं।"ठीक है, क्या किसी और के पास भारत पर प्रभुत्व के कारणों के बारे में कोई प्रश्न है? यदि नहीं, तो कृपया अपनी किताबें पृष्ठ 54 पर खोलें और कक्षा के अंत तक लगभग पृष्ठ 60 तक चुपचाप पढ़ें।" मीरा ने अपनी कक्षा को बताया, उसकी आँखें कमरे को स्कैन कर रही थीं जैसा कि वह अक्सर किसी भी भ्रम की स्थिति को खोजने की कोशिश करती थी। मीरा अपने क्लास प्लानर को देखने और संभावित होमवर्क की जांच करने ही वाली थी कि तभी उसने देखा कि उसकी बेटी चुपचाप उसके सामने वाले लड़के से बात कर रही है। उसका नाम जावेद था और मीरा ने देखा था कि उसकी बेटी पिछले कुछ दिनों से उससे कुछ ज्यादा ही बात कर रही थी। मीरा ने यह भी देखा था कि वे कई मौकों पर एक-दूसरे को प्यार से देख रहे थे।


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मीरा ने आह भरी, उसे ज्योति पर कूदने से नफरत थी, लेकिन वह अपनी कक्षा में किसी अन्य छात्र से बात करने के लिए कहती थी जैसा कि ज्योति अब कर रही थी।"ज्योति, जावेद; क्या आपको भारतीय इतिहास के बारे में कक्षा के साथ कोई बात साझा करनी है क्योंकि ऐसा लगता है कि आप दोनों बात करना चाहते हैं?" मीरा ने दोनों किशोरों से पूछा तो वे दोनों तेजी से ऊपर देखने लगे और लाल हो गए। जावेद हकलाया, फिर सिर हिला दिया। मीरा ने अपनी बेटी की ओर देखा।"माँ?..मेरा मतलब है मिसेज गुप्ता नहीं?.हम?हम बस बात कर रहे थे।" ज्योति शर्मिंदगी से हकलाते हुए बोली। ज्योति को विश्वास नहीं हो रहा था कि उसकी माँ ने उसे इस तरह शर्मिंदा किया है और उसके चेहरे से यह पता चलता है।"ठीक है भविष्य में ज्योति कृपया मेरी कक्षा में रहते हुए केवल कक्षा के विषयों पर ही बातचीत जारी रखें। क्या यह समझ में आया? आप दोनों।" मीरा ने उन दोनों से कहा, लेकिन शब्दों का उच्चारण करने के बाद, उसे पता चला कि वह लगभग पूरी तरह से अपनी बेटी से बात कर रही थी। मीरा को अब थोड़ा दोषी महसूस हुआ, खासकर यह देखकर कि अब उसकी बेटी की आँखों से आँसू बहने लगे हैं क्योंकि उसने अपना सिर नीचे झुका लिया था।"हाँ...हाँ...मिसेज गुप्ता, मैं (वह) समझ गयी।" ज्योति अपनी मेज की ओर देखते हुए चुपचाप हकलाती रही। कुछ अन्य छात्र धीरे से हँसे, लेकिन मीरा द्वारा कमरे पर नज़र डालने के बाद वे रुक गए या छिप गए। मीरा की नज़र लड़के जावेद पर पड़ी, जिससे वह फिर से लाल हो गया और अपनी मेज की ओर देखने लगा। अपने प्लानर को फिर से देखने के बाद, मीरा को आश्चर्य हुआ कि क्या वह बहुत दूर चली गई है। उसे संदेह था कि वह किसी अन्य छात्र के साथ इतनी दूर गई होगी। आमतौर पर वह अत्याचारी नहीं थी, लेकिन आजकल उसकी बेटी के बारे में कुछ बात उसे चिंतित कर रही थी।मीरा ने एक मिनट के लिए सोचा और अनुमान लगाया कि शायद उसे डर था कि उसकी "छोटी" लड़की बड़ी हो रही है। मीरा ने सोचा, वह अब बड़ी हो गई है। मीरा अच्छी तरह जानती थी कि ज्योति का शरीर लगभग उसके जैसा ही विकसित था। और वह बिल्कुल भी अनाकर्षक नहीं थी. मीरा के स्तन अच्छे बड़े थे और उसका बाकी शरीर अच्छे आकार में था, उसकी कमर और कूल्हों पर केवल थोड़ी मात्रा में चर्बी थी। लेकिन अपने बड़े स्तनों के साथ, मीरा को पता था कि एक साथ यह सब खुद पर फिट बैठता है। वह यह भी जानती थी कि दूसरों को उसका रूप पसंद आता है। उसके कई साथी पुरुष शिक्षक अक्सर उस पर नज़र रखते थे, जिसे उसने देखा था। स्कूल में अनगिनत युवकों का ज़िक्र करने की ज़रूरत नहीं है, उसने उसे चोरी-छिपे घूरते हुए पकड़ा था।मीरा ने कभी-कभी अपने पुरुष छात्रों को बहुत सारे क्लीवेज वाले ब्लाउज या छोटी स्कर्ट पहनकर चिढ़ाया भी था। मीरा मुस्कुराई और लगभग ज़ोर से हँसने लगी जब उसने पिछले साल के बारे में सोचा जब उसने एक मिनी स्कर्ट पहनी थी और बहुत झुकने की कोशिश की थी और फिर अपने कंधे पर नज़र डालकर देखा कि कौन से पुरुष छात्र (और कुछ महिलाएँ) घूर रहे थे उसकी जांघें. फिर उसने उनमें से कुछ को मौखिक प्रश्नों के उत्तर लिखने के लिए बोर्ड पर बुलाया जब उसे लगा कि उनमें से कुछ के पास कठिन प्रश्न थे। मीरा को यह भी याद आया कि उसने उसे कितना कामुक बना दिया था।


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bohot hi sundar introductory episode.....
 
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mira ne upar dekha, bahut laal aur kaamuk mehsus kar rahi thi, phir se us samay ko yaad kar rahi thi jab vah apane students ke saath sharaarati thi. usne apni beti ki aur dekha, jo is samay padh rahi thi, aur sachamuch usaki or dekha. mira ko ehasaas hua ki usaki beti bahut sundar hai aur usane apani beti ke stanon ko dekha aur khud soch mein pad gai ki jyoti ke stan kaise dikhate honge, ya ve kaise mahasus hote hain. unake viparit unki badi beti leela ko meera ke "pratibhaashaali" stan viraasat mein nahin mile the, kyonki vah bahut dubli-patli thi aur uske stan chhote the. lekin jyoti ke stan usake jitane hi bade the; meera ne dekha aur mahasus kiya ki usake andar ek sexy lahar chal rahi hai, achaanak use apani beti ke stan dekhne ki ichchha hui. yah sochate hue mira lagabhag jor se haamphane lagi. usane khud se puchha, main kya soch rahi hun?


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mira ne apana sir hilaaya aur apane students ke homework ke baare mein sochane ki koshish ki, lekin kisi kaaran se usaki beti ke sharir ki chhavi usake dimaag mein ghumati rahi. jab ghanti baji, to usaki class samaapt ho gai aur ghanti bajane ke saath hi school ka din bhi samaapt ho gaya, mira apani seat se uth gai. jaise hi students uchhalakar daravaaje ki or badhane lage, vah bhi kuchh bhramit mahasus karate hue khadi ho gai. "umm? achchha thik hai, mujhe lagata hai?.bas homework ke lie shesh adhyaay padhen?.aur ham kal kaksha mein is par charcha karenge. thik hai sabko alavida." mira ne apani beti ki or dekha, jo usase bachane aur daravaaje ki or jaane ki koshish kar rahi thi. haalaanki mira ko laga ki usaki beti ki bhaavanaen hurt ho sakati hain, vah yah bhi jaanati thi ki jyoti usaki kaar mein usake saath school aati jaati thi, aur use laga ki usaki beti thoda idiot vyavahaar kar rahi hai. mira ne apana gala saaf kiya aur jab jyoti ne apani aankhen usaki or uthain, to mira ne apani ungali se use apane office mein chalane ka ishaara kiya. jyoti usake pichhe gai aur apane pichhe daravaaja band kar liya.

"jyoti, mujhe maaf kar do meri beti. main class rum mein tichar aur maan ke bich santulan banaane ki bahut koshish kar rahi hun." mira ne saantvana bhare svar mein apani beti se kaha. lekin maafi maangate hi jyoti naaraaz ho gai."maa? aap? aap nishpaksh nahin thin. main bas kuchh javaab de rahi thi jo jaaved ne mujhase puchha tha ki bas itana hi hai? aur aapane mujhe daanta. aap dusare bachchon ke saath aisa nahin karate." jyoti ne apani maan se kaha aur usaki aankhon mein aansu aa gae. jab mira apani beti ko gale lagaane ke lie aage badhi to jyoti ne dusari or dekha aur jyoti ne apana sir apani maan ke kandhe mein daba liya. mira ko bura laga ki usane apani beti ko rulaaya. lekin kuchh second ke lie jyoti ko pakadane ke baad use phir se apani beti ke stan dikhai die, jo usake stan se dabe hue the aur mira ko jhunajhuni mahasus hui.

mira ne aalingan todate hue vichaar ko pichhe dhakel diya aur jyoti ka sir uthaaya. aisa lag raha tha jaise vah rone hi vaali thi."kya tum thik ho meri bachchi? agar main apani baat vaapas le sakti? to main aisa karti. mujhe dukh hai ki main itana kathor thi. kya tum thik ho jaogi?" mira ne apani beti se puchha. jyoti ne sir hilaaya. "haan? main ek second mein thik ho jaungi. mujhe ek minute mein vahaan vaapas jaana hoga, shveta class ke baahar mera intazaar kar rahi thi. kya main rone se bahut bura lag rahi hun?" jyoti ne apani maa se puchha. meera gambhir rup se muskurai, jyoti ki aankhon ke aasapaas ki sujan kam hone mein thoda samay lagega, meera jaanati thi."umm? behatar hoga ki ek minut ruko , hamen jaane se pahale kuchh sheets ki jaanch karani hai. baahar jaane se pahale ek minat apani aankhen band kar lo." meera ne sujhaav diya aur uski beti ne apana sir hilaaya aur apani maa ke office mein dusari kursi par baith gai.

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Meera ka mann behek raha hai.. wo ab maa aur teacher se aagey badhna chah rahi hai...
 
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AHHHHHHHHhhhhhh !!!! yeh mujhe kya hogaya hai. Aaj kaam me bhi dhyaan nahi lag rha. Fir woh uth khadi hui aur saman lekar jane ki tayyari karne lagi. "Jyoti ko lekar ghar hi jaati hu"

woh class se bahar nikli and aur apni beti ko khojne lagi. hall senikali aur sab jagah dekha, car tak bhi gayi parking me lekin Jyoti nahi dikhi. Mrs. Gupta ka para chadh raha tha, ek aise vichar man me ghum rahe the. woh bas ghar jana chahti thi. woh apni beti ko khojne lagi. kuch minute baad building ke pichhe pahunchi, waha se awaze aa rahi thi. school ka yeh hissa abhi pura sunsaan tha. students sab bahar ja chuke the. woh dheere se awaaz kiye bina pichhe ke side me bane store room ki taraf jane lagi.

"mmmmmm. achha lag raha hai. mmmmmm. ek kiss ne pura kharab din sahi kar diya. mmmmmmmmmmmmm" andar se aawaaz aayi

"no problem my girl.. mmmmuaaaaaaahhhhhhhhh. mujhe bhi tujhe yaha laakar achchha laga. main toh tujhe jab se dekha tab se kiss karna chaha......kal raat ki slumber party ka intezaar nahi ho raha. aur kissing karenge fir ...." meera yeh awaaz pehchaan gayi aur stabdh reh gayi.



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"fir?"

"fir dekhenge kya hota hai my girl". Meere chakeet thi ki andar store room me uski Beti jyoti aur uski friend shweta hai aur kissing kar rahe hai. kal raat ko party ke baare me Mrs Gupta ko pata tha aur use samaj nahi aa raha tha ki kya kare. woh dabe pau waha se ulta laut gayi aur car ke pass jakar hi ruki.

Mrs. Gupta ko jara bhi andaza nahi tha ki uski beti gay hai. use itna jarur malum tha ki jyoti bohot sharmili thi aur ladko ke sath toh kabhi bahar ghumne nahi gayi. Mrs Gupta ghadi me baith gayi aur sochne lagi ki apni beti se kya baat karegi woh ya fir use koi baat karni bhi chahiye ya nahi? Yeh jyoti ki marzi thi agar woh ek ladki se pyaar karti hai ya sambandh rakhti hai uski chouice.


thodi der me Jyoti aur shweta car ki taraf aane lage.


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zabardast twist....
 
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