,, रोहन धीरे-धीरे अपने ल** को सहला रहा था,,, अपनी मम्मी से बात करके उसे बहुत मजा आ रहा था,, उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसे इस तरह का मजा उसकी मम्मी ही देगी,,,

रोहन:- मम्मी बहुत अच्छा लग रहा है,,, काश आप मुझे पहले ही यह बता देती,,,
सरोज:- बेटा यह सब बातें मम्मी,,, से नहीं पूछते,,
रोहन :- मुझे मालूम है मम्मी लेकिन मैं किस मालूम करूं मेरा तो कोई है भी नहीं अपना,,,
सरोज:- अपने दोस्तों से मालूम किया कर वह बताएंगे तुझे,,, और उसे दिन तेरा दोस्त बता तो रहा था तुझे,,,
रोहन:- मम्मी उसे दिन की बातें अपने फोन पर सुन ली थी ना,,,
सरोज:- हां बहुत ही गंदी बातें करता है तेरा दोस्त,, लेकिन जो वह बता रहा था ऐसे ही कर लिया कर बेटा तुझे शांति मिल जाएगी,,,
,,, यह सुनकर रोहन अपने लिंग को और तेज-टेक हिलने लगता है,, उसे मालूम था कि उसकी मम्मी मुट्ठी मारने के बारे में कह रही है,, कि तुम मुट्ठी मार के निकाल दिया कर तुझे शांति मिल जाएगी,,, और दूसरी तरफ सरोज सोच रही थी कि,, हे भगवान तूने मुझे किसी मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है,, अपने ही बेटे को उसकी ताकत कम करने के लिए बोल रही हूं,, लेकिन कर भी क्या सकती हूं जब उसकी ताकत ही उसकी जान की दुश्मन बनी हुई है,,,

रोहन:- और तेज तेज अपने लिंग को सहलाने लगता है,, कैसे शांति मिलेगी मम्मी, क्या कर लिया करो मम्मी आप बताओ ना वह तो बहुत गंदा दोस्त है मैं उससे बात नहीं करना चाहता हमेशा झूठ बोलता है,,, आप बताओगे तो मैं कर लिया करूंगा मम्मी प्लीज बताओ ना,,
,, सरोज को बहुत शर्माने लगी थी वह कुछ टेंशन में थी,, अब यह बोलते हुए उसकी मम्मी को बहुत शर्म आ रही थी कि तू अपने हाथ से ही मुट्ठी मार लिया कर,, और अपना पानी निकाल कर अपने आप को शांत कर लिया कर,,,

,, सरोज अपने सर पर हाथ रखकर सोने लगते हैं कि अब अपने बेटे को कैसे बताएं,, मगर न जाने क्यों उसके अंदर अब इतनी हिम्मत आ गई थी कि वह अपने बेटे का दुख दूर करना चाहती थी रात का माहौल देखकर उसकी शर्म भी थोड़ी कम होती जा रही थी,, उसे तो अब यह भी एहसास खत्म हो गया था की योनि के अंदर लिंग जाता तो है तो कैसा महसूस होता है,, काफी साल गुजर गए थे उसने अब इस बात का सोचना भी बंद कर दिया था कि उसे कभी इस तरह का एहसास होगा,, उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि अपने बेटे के लिए वह इस तरह की मदद कर पाएगी,,, सरोज कुछ बोल नहीं पा रही थी कि तभी रोहन की कर आई हुई आवाज आती है,,

रोहन:- रोते हुए कहता है,, बताओ ना मम्मी प्लीज बताओ ना क्या करूं बहुत दर्द हो रहा है अब इसमें,,, आप चुप क्यों हो मम्मी बोल ना???
,, अपने बेटे की रोती हुई आवाज सुनकर सरोज का दिल फंस ही जाता है वह किसी भी तरह अपने बेटे की मदद करना चाहती थी इसलिए अभी मत करके कहती है,,,

सरोज :- रो मत बेटा परेशान मत हो,, देख तू मेरा बहादुर बेटा है ना मैं तुझे अपनी जान से भी ज्यादा चाहती हूं,, तुझे इस तरह दर्द में तड़पता देखकर मुझे भी दर्द होता है मेरे लाल,,, मगर तू समझदार है एक मां अपने बेटे के लिए इस काम में कोई हेल्प नहीं कर सकती,,, वह तुझे तेरे दोस्त ने बताया था ना हास्य कर लिया कर,, वही कर ले हाथ से,,
रोहन:- इसलिए तो मालूम कर रहा हूं मम्मी क्या कर लूं हाथ से यह तो बात ही सकती हो आप कौन सा मेरे पास हो जो मेरी हेल्प कर रही हो फोन पर तो बात ही सकती हो मम्मी फिर कभी नहीं पूछूंगा,,,,
,, रोहन रोते हुए कहता है ना जाने क्यों उसके आंसू निकल आए थे वह अब अपने जिस्म की गर्मी को संभाल नहीं पा रहा था,, दर्द से करते हुए देखा सरोज को और भी तकलीफ होती है फिर वह हिम्मत करके अपने बेटे से कहती है,,,
सरोज:- बेटा वह.... तू हाथ से मुट्ठी मार लिया करना मेरे लाल....
,, एक मां अपने बेटे को यह शब्द कभी नहीं बोल सकती लेकिन सरोज ने हिम्मत करके अपने बेटे की तकलीफ कम करने के लिए बोल दिया था,, अपने दिल पर हाथ रखकर सरोज को बहुत ही शर्म आ रही थी इसलिए वह मन ही मन भगवान से माफी भी मांग रही थी,, शायद तुझे वह बहुत बड़ा अनर्थ कर रही है लेकिन न जाने क्यों उसे अपने बेटे की तकलीफ देखी नहीं जा रही थी,,,

,, रोहन अपनी मां के मुंह से यह शब्द सुनकर,, लंबी सिसकारी भरते हैं और भी तेज तेज अपने लिंग को हिलाने लगता है,,

रोहन:- मम्मी मुझे नहीं मालूम मम्मी मुट्ठी कैसे मारी जाती है,, मैं तो बस इस शहर आ रहा हूं मम्मी कसम से मुझे नहीं मालूम मम्मी मुट्ठी कैसे मारी जाती है,,,
,, यह कहकर रोहन फिर से एक बार रोने लगता है और कर रहती हुई आवाज में अपनी मम्मी से कहता है,, जिसे सुनकर सरोज का दिल फिर से हिल जाता है और अब उसकी आंखों से आंसू बहने लगते हैं,,, अपने बेटे का दर्द वह सुन भी नहीं पा रही थी और उसकी आंखें नम होने लगी,,

,,, आंखें नम होते हुए वह कुछ सोच रही थी,, कितना नादान है उसका बेटा उसे यह भी नहीं मालूम,, नहीं तो आजकल के बच्चे सब जानते हैं,,, शायद मैं खुशनसीब हूं जो मुझे मेरा ऐसा बेटा मिला,, जो भी हो मैं अपने बेटे को तकलीफ में नहीं देख सकती भगवान बस जल्दी से मेरे बेटे की शादी कर दे,,, जिससे उसकी यह तकलीफ दूर हो जाए और मैं खुशी-खुशी जिंदगी बिता सकूं,,,, क्या करूं भगवान अपने बेटे को मजबूर होकर यह सब बताना पड़ रहा है,, नहीं तो वह डॉक्टर की दी हुई दवाई खाएगा जिससे उसे कमजोरी और नपुंसकता हो सकती है,, अगर उसे यह सब हो गया तो मेरा वंश आगे कैसे चलेगा उसकी शादी होगी तो बच्चे कैसे होंगे कैसे मैं बेटे के पुत्र का मुंह देख पाऊंगी,,, फिर वह सहजसत्ता से अपने बेटे से,,
सरोज:- रो मत मेरे लाल बस धीरे-धीरे ऐसे ही करता रहे,, इसी को हास्य करने के लिए कहते हैं बेटा तुझे शांति मिल जाएगी कुछ देर में,,,,
,,, देखते ही देखे काफी समय बीत गया था और सुबह के 6:00 बजने वाले थे उन दोनों को अंदाजा भी नहीं था कि वह रात के 12:00 से बात कर रहे हैं और सुबह के 6:00 बजने वाले हैं,, गांव में सभी जल्दी उठ जाते हैं उजाला होते ही रोहन की नई और नाना की आंख खुल जाती है,,, लेकिन एक मां अपने बेटे की तकलीफ कम करने के लिए इस बात का ध्यान नहीं देती कि वह आज पूरी रात नहीं सोई है,, लगातार अपने लिंग को रगड़ते हुए रोहन को काफी टाइम हो गया था अब उसे उसकी नसों में दर्द महसूस होने लगा था लेकिन अभी भी उसका वीर्य नहीं निकला था,, क्योंकि वह एक ताकतवर पुरुष था ना जाने क्यों उसे ऊपर वाले ने इतनी शक्ति दी थी कि इतनी देर बात करने की और सहलाने के बाद भी उसके लिंग से वीर्य नहीं निकला था,,, फिर वह रोटी और कर रहते हुए अपनी मां से कहता है,,,
रोहन:- कुछ नहीं हो रहा मम्मी बहुत दर्द हो रहा है मैं क्या करूं कुछ नहीं हो रहा,,,,
सरोज :- कुछ देर और मेरे लाल हो जाएगा कुछ देर और बस सावरकर हो जाएगा,,,,
रोहन:- निराश होकर अपनी मम्मी से कहता है,,, ठीक है मम्मी आप फोन रख दो मैं रखता हूं फोन,, अब और दर्द बर्दाश्त नहीं होता,,, मुझे यह सब करना नहीं आता,, मैं तो जवाब के बारे में सोचता हूं आपका चेहरा याद आता है तो इतनी,, इच्छा होती है कि यह बहुत टाइट होने लगता है,,, अब इसमें बहुत दर्द हो रहा है मम्मी बहुत लाल हो गया है मैं यह दर्द बर्दाश्त नहीं कर पा रहा,, अब मुझे और हाथ से नहीं हो रहा,,
,, सरोज अब मन में सोचने लगी थी कि अब वह अपने बेटे के लिए क्या करें,, मैं सोच रही थी कि शायद उसका बेटा तेज तेजी से अपने लिंग को रगड़ रहा है जिसकी वजह से दर्द होने लगा है,, रोहन ने फोन काट दिया था,,, उजाला हो चुका था लेकिन जब रोहन की नानी ने सरोज को आवाज दी तब उसे होश आया कि दिन निकल गया है,,,
नानी:- सरोज बेटा दिन निकल गया है उठ जा,,,
सरोज:- हां मम्मी आ रही हो,,,,
,, सरोज मन में सोच रही थी,, कितनी तकलीफ में है मेरा बेटा फिर भी फोन काट दिया लेकिन,, उसका वीर्य निकल क्यों नहीं इतनी देर तक तो इसके पापा तो 5 मिनट भी नहीं रुकते थे हाथ से मैं झाड़ देती थी,, कई बार मैंने उनकी मुट्ठी मारी है वह तो एकदम झड़ जाते थे,, इतने टाइम तक नहीं निकला कहीं मेरे बेटे के अंदर कुछ कमी तो नहीं है,,, यह सब सो कर उसकी आंखों से आंसू और निकल जाते हैं,,

,, आज सरोज पूरी रात सो भी नहीं पाई थी वह रसोई में जाती है और नाश्ता बनाने लगती है,, लेकिन उसके दिमाग में उसके बेटे की हर आहा गूंज रही थी कितने दर्द में है उसका बेटा यही सोच रही थी वह है,,

,, दिमाग काम में नहीं था लेकिन हाथ पर केवल काम कर रहे थे मैन केवल अपने बेटे के पास ही था,, फिर वह सोचती है कि क्यों ना इस बारे में किसी से बात कर ली जाए,, हो सकता है उसके बेटे को कोई दिक्कत हो वह समझा दे,,, या कोई उपाय बता दे इसलिए वह घर का सारा काम करती है और,, पास में ही बढ़े हुए, पशुओं को भी चार डालकर,, जिसकी लड़की को एक लड़के ने छेड़ा था,, गांव की इस महिला के घर जाती है,,, उसके दिमाग में केवल उसके बेटे की समस्या ही चल रही थी इसलिए वह उसे औरत से मिलती है और,,
गांव की महिला:- अरे सरोज तुम आओ बैठो,,
सरोज:- दीदी मैं यह पूछने आई थी कि आजकल के लड़के तो हाथ से भी कर लेते हैं,,, फिर अपनी आग बुझाने के लिए है यह गंदी निगाह क्यों रखते हैं,,
गांव की महिला:- आज तो कैसी बातें कर रही है पहले तो कभी नहीं करती थी यह बातें,, और मैं कुछ बोलती थी तब चीड़ जाती थी,,
नहीं दीदी मैं तो यह सोच रही थी कि आपकी लड़की को उसे लड़के ने छेड़ा,,
गांव की महिला:- उसे कमीन की याद मत दिला उसका तो सर काटने का मन कर रहा है मेरा,,
सरोज:- अच्छा बताओ ना दीदी आप भी हाथ से कर देती हो क्या अपने पति का,,,
गांव की महिला सरोज के चेहरे को गौर से देखते हुए,,
गांव की महिला:- हां जब मेरा महीना चलता है तब करवाते हैं तो कर देती हो,,, लेकिन तू यह सब क्यों पूछ रही है तूने कभी अपने पति की मुट्ठी नहीं मारी थी क्या,,
सरोज :- हां मुझे भी करवाते थे जब मेरा महीना चलता था,,,
गांव की महिला:- तो फिर मुझसे क्यों पूछ रही है जब सब जानती है,,
,, सरोज कुछ शर्मा जाती है उसे शर्म भी आ रही थी यह सब बातें करते हुए क्योंकि उसने पहले कभी इस तरह की बातें गांव में नहीं की थी किसी भी महिला के साथ,,,
सरोज:- नहीं दीदी बस मैं तो ऐसे ही मालूम कर रही थी,, अच्छा आपके पति कितनी देर में झड़ जाते हैं मुट्ठी मारने से,,
गांव की महिला सरोज के चेहरे को फिर ध्यान से देखते हुए मुस्कुरा कर कहती है,,
गांव की महिला:- अरे अब तो उम्र आ गई है जल्दी ही झड़ जाते हैं,, लेकिन जब पहले जवान थे नई-नई शादी हुई थी तो काफी टाइम लगता था उनको झाड़ने में,,
सरोज:- दो-तीन घंटे या 5 घंटे???
गांव की महिला:-- अरे नहीं इतनी ताकत कहां है,, ऐसा पुरुष तो भाग्यशाली होता है जिसे इतनी देर टिकने का टाइम मिले,,
सरोज:- ऐसे भी पुरुष होते हैं जिनको इतना टाइम लगता है,,,
गांव की महिला:- हां होते हैं जिनको इतना भी टाइम लगता है वह बहुत ही ताकतवर होते हैं अच्छा तो यह बता तेरा बेटा घर पर ही है या चला गया,,
सरोज :- वह तो चला गया दीदी अब दीपावली पर ही आएगा अगर कोई उसके लिए रिश्ता हो तो मुझे बताना मैं बहुत चिंतित हूं उसकी शादी को लेकर,,,
गांव की महिला:- देख मैं आज ही इसके बापू से बात करती हूं अगर कोई लड़की होगी तो बताएंगे,, अब तो तेरा बेटा दीपावली पर ही आएगा ना अगर कोई लड़की होगी तो उसे बुला लेना मैं बता दूंगी,,, लेकिन आज तो इस तरह की बातें क्यों पूछ रही है,,
सरोज :- कुछ नहीं दीदी बस ऐसे ही मालूम कर रही थी,, मैंने इसके बापू से सुना था कि,, लड़के मुट्ठी मार कर अपनी आंख शांत कर लेते हैं तो फिर गांव की लड़कियों को पकड़ने की क्या जरूरत है इसलिए यह पूछ रही थी,,
गांव की महिला:- चल ठीक है रहने दे उसे कमीन की याद मत दिल नहीं तो उसका सर काटने का मन करता है मेरा,,, अच्छा तू चाय लगी क्या??
सरोज:- नहीं दीदी मैं चलती हूं आप घर का कम कीजिए मुझे भी घर का काम """
,, कुछ और बातें कर कर सरोज घर को चली जाती है और मन में विचार करती है कि,, उसका बेटा बाकी सबसे अलग है कि भगवान ने उसे इतनी शक्ति दी है और उसके दिमाग की परेशानी कम हो गई थी,, जब उसने महिला से सुना कि ऐसे भी पुरुष होते हैं जिनको इतना टाइम लगता है हो सकता है उनमें से ही उसका बेटा हो,,, बहुत भाग्यशाली है जिसने यह ऐसे मर्द को जन्म दिया,, वह मन ही मन खुश होती है फिर एक बार सोच कर अपने मन में चिंता करने लगती है कि अगर उसके बेटे की गर्मी शांत नहीं हुई तो कहीं वह दवाई ना खाने लगे डॉक्टर की दी हुई,, क्योंकि जो ऊपर वाले ने उसे शक्ति दी है अगर वह दवाई खाएगा तो उस काम हो जाएगी,,, इसलिए वह कुछ देर चिंता करने के बाद घर का काम निपटाती है और फिर से रोहन को फोन लगाती है,,,
,, रोहन इस समय कंपनी में काम कर रहा था वह फोन नहीं उठाता और वह थोड़ा गुस्सा भी था,, रोहन ने मन में सोच लिया था कि अगर मम्मी का कॉल उठाऊंगा तो फिर से वही इच्छा होगी इसलिए वह फोन नहीं उठाता,,, अब वह मन ही मन अपनी मम्मी के फोन को देखकर विचार कर रहा था कि अब मैं बात नहीं करूंगा कभी भी,, बस जब घर जाऊंगा तभी बात किया करूंगा मम्मी से नहीं तो कुछ ना कुछ मुझसे ही अनर्थ हो जाएगा,, जोकि इस समाज के लिए बहुत ही गलत है अपनी मां पर ऐसी निगाह रखना मेरे लिए सही नहीं है,,, धीरे-धीरे समय बीतता रहता है और सरोज हर रोज रोहन को फोन करती है लेकिन रोहन फोन नहीं उठाता,,, जब एक हफ्ता बीत जाता है तो वह चिंता करने लगती है कि उसका बेटा फोन क्यों नहीं उठा रहा,,, एक सप्ताह बीतने के बाद सरोज कंपनी के ही नंबर पर कॉल करती है और,, रिसेप्शन पर कंपनी की एक लड़की फोन उठाती है,,
कंपनी की लड़की:- हेलो जी बोलिए कि से बात करनी है आपको,,
सरोज:- जी मुझे अपने बेटे रोहन से बात करनी है वह कंपनी में है मुझे उससे बहुत जरूरी बात करनी है???
कंपनी की लड़की:- जी नमस्कार आंटी जी मैं अभी आपकी बात करती हूं रोहन सब कंपनी में ही है,,,
,, सरोज के दिल को थोड़ी तसल्ली मिलती है और वह खुश होकर लड़की को कहती है
सरोज:- जी बहुत-बहुत धन्यवाद आपका मेरे बेटे से बात कर दीजिए,,,
,, कुछ समय बाद वह लड़की रोहन को बुला देती है और कंपनी के नंबर पर बात करने के लिए कहती है,,,
रोहन:- नमस्ते मम्मी बोल क्या बात है???
सरोज: बेटा तो ठीक तो है ना फोन क्यों नहीं उठा रहा है एक हफ्ता हो गया मुझे कितनी चिंता हो रही है तेरी,,
रोहन:- मैं ठीक हूं मम्मी चिंता ना करें आप आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है जो भी समस्या होगी मैं सुलझा लूंगा,,
सरोज: तू बार-बार ऐसी बातें क्यों करता है मेरे लाल???
रोहन:- आप मेरी मम्मी हो आपसे तो मम्मी की तरह ही बात करूंगा,, ठीक है मम्मी में रखता हूं
सरोज:- रुको बेटा मैं तुम्हें रात को कॉल करूंगी एक बार फोन उठा लेना जरूर,,
रोहन:- फिर से मुझे दर्द में तड़पते हुए देखना चाहती हो क्या???
सरोज:- नहीं बेटा ऐसी बात नहीं है मुझे तुझसे बात करनी है बस इसलिए मेरा बिलाल है ना तो तेरी चिंता तो होती है मेरे बच्चे,,,
रोहन :-- तो फिर एक ही शर्त पर बात करूंगा,,, अगर आप मेरी बात मानोगी तो,,
सरोज अपने मन में कुछ देर विचार करते हुए,,
सरोज :- हां बोल मेरे बच्चे क्या बात है तेरी मां तेरी बात मानेगी,,,
,, पास में ही कंपनी का स्टाफ खड़ा था और वह रिसेप्शन वाली लड़की भी खड़ी हुई थी इसलिए रोहन अपनी मम्मी को कहता है,,
रोहन:- ठीक है आप मेरे नंबर पर फोन करो मैं तब बताऊंगा,,,