• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Horror Katil Haseena

Guffy

Well-Known Member
2,069
2,177
159
भाग 4



अब शेखर के जीवन में आमूल चूल बदलाव आ चुका था ! उसकी तलाश खत्म हो चुकी थी !! उसकी प्राची और बरखा से घनिष्ठता काफी बढ़ गई थी !

इतने दिनों में उसने प्राची के माता-पिता से भी अच्छा परिचय प्राप्त कर लिया था! उन्हें आने में थोड़ा समय लग गया था क्योंकि जब प्राची का भाई बिल्कुल ही ठीक हो गया था तभी वे वापस आए थे !!


जब वे दिल्ली से लौटकर आए और उन्हें पूरी घटना पता चली तो उन्होंने शेखर को अपने यहां बुलवाया और उसका काफी आभार व्यक्त किया था .....अपने घर उसकी दावत भी की थी और बड़े आग्रह से कहा था कि " बेटा आते-जाते रहा करना ". इस प्रकार से शेखर का उनके यहां आना-जाना काफी बढ़ गया था !

धीरे-धीरे काफी समय बीत गया शेखर को लग रहा था कि उसे उसका प्यार मिल गया था !! वास्तव में प्यार करने वाले आधे पागल होते हैं !! उनके मन में जो फीलिंग्स होती हैं तो उन्हें लगता है कि सारी दुनिया वही सोच रही है!!

हालांकि यह उसका कहना था कि मेरा प्यार मुझे मिल गया है ... पर विनय की राय उसकी राय से एकदम उलट थी !!!

उसका कहना था कि उस लड़की ने तो यह तक नहीं बताया कि उसके मन में क्या है ?......और तू कहता है ....मेरा प्यार मिल गया !! यह तो तू ख्वाब पाले हुए है !!

लेकिन वह प्यार उसकी निगाह में ही था अभी तक बरखा ने ऐसा कोई भी संकेत नहीं दिया था जिससे यह मालूम पड़ता कि उसके मन में शेखर के प्रति फीलिंग्स क्या हैं ?

कुछ भी हो मगर शेखर बहुत खुश था ! वो खुश मिजाज हरफनमौला अपने ही ढंग का इंसान था!!

उसका सोचना था कि अपने अंदर दृढ़ विश्वास होना चाहिए तो फिर सामने वाला तो सामने वाला रहा .....जब हौसला है तो आदमी आसमान तक को झुका सकता है !!!

उस के जुनून को देखकर उसका दोस्त विनय उसे अक्सर समझाया करता कि अपने मन में ही हवाई महल बनाना सही नहीं है ! बरखा की फीलिंग्स भी तो जानो !!

कहीं ऐसा ना हो .... कि तुम यह खूबसूरत भ्रम अपने मन में पाले रहो रहो .....बाद में पता चले कि वह टूट -टूट कर बिखर गया ! खूबसूरत हसीनाएं अक्सर धोखेबाज होती हैं .....याद रखो कहीं ऐसा ना हो कि बाद में यह भी खूबसूरत छलावा निकले.... धोखा मिले तुमको. !!!

आज सवेरे -सवेरे शेखर उठा नाश्ता करके फटाफट तैयार हो रहा था..... बाहर निकलने की तैयारी में ही था तब तक विनय भी आ गया !!

उसे देख कर विनय बोला :--"कि ऐसे सज-संवर कर कहां चले ? क्या बुलावा आया है ?"

शेखर मुस्कुराते हुए बोला :--"है तो कुछ ऐसी ही बात !"विनय उसे अनुभवी, तजुर्बेकार बुजुर्ग की तरह समझाते हुए बोला:--" बात तो जो भी हो.......जैसी भी हो ......मगर अपनी बात भी सामने रखो !!!

लड़की के मन का भी पता चलना चाहिए !!मुझे पता है कि तू इन दिनों बरखा को खूब हर जगह घुमा रहा है और अपने पैसे दोनों हाथों से लुटा रहा है ...इतने दिनों तक जो तूने रुपए एक-एक करके जोड़े हैं...... उन्हें पानी की तरह बहा रहा है !!

आज उससे साफ साफ बात कर ले और तू पूछ ही ले नहीं तो पता चले .....पीछे - पीछे लंगूर बनकर पूरी जिंदगी भर घूमता रहा !! बाद में क्या हाथ लगा ?? खाली हाथ झाड़ कर चला आया !!

विनय की यही बात शेखर को अच्छी नहीं लगती है !! वह कुछ नहीं कह रहा है तो उसका मतलब ये थोड़ी है कि जो चाहे बोलो !

वह थोड़ा रूखे स्वर में बोला :-"बरखा ऐसी लड़की नहीं है ! न तो उसने मुझसे कहीं घुमाने के लिए कहा है और न ही उसने मुझसे कभी रुपए मांगे .....न ही उसने मुझसे किसी चीज की मांग की है !

मैं ही उसे जबरदस्ती ...…. कहीं जाने के लिए तैयार करता हूं .....तो बड़ी मुश्किल से वह जाने के लिए तैयार होती है !!


विनय समझ गया कि इस समय वह बरखा के खिलाफ एक शब्द भी नहीं सुनेगा ....इसलिए वह थोड़ा नरम सुर में बोला :"मैं यही कह रहा था कि कोई भी ख्वाब पालने से...... या उसकी दुनिया में कदम रखने से पहले उसकी फीलिंग्स जान लेना जरूरी है !!!"

"मुझे जानना जरूरी नहीं है ! मैं इतना ही जनता हूँ कि ....आई.लव हर ,,एंड मरते दम तक करता रहूंगा !!"

"ठीक है ! शाम को मिलते हैं !! ऐसा कहकर वह आगे बढ़ गया !!


विनय थोड़ी देर तक तो उसे जाते हुए देखता रहा !!! उसे शेखर की चिंता लगी हुई थी !! वह फील कर रहा था कि अब शेखर बदलने लगा है !! जब उसे समझाता है तो वह रूखे स्वर में बात करता है !!
फिर वह भी अपने रास्ते पर चल पड़ा आज उसके पास फोन आया था!!

प्राची ने उसे बुलाया था और कहा था आज घूमने चलते हैं और तुम्हें तो इन चीजों इन जगहों का खूब घूमने का तजुर्बा है ....तो थोड़ी आसानी रहेगी !"!

यह सुनकर शेखर बहुत खुश हो गया था और वह चल पड़ा !! बरखा के यहां पहुंचा तो नाश्ते की खाने- पीने की चीजें टेबल पर सजी हुई थी !!

और सब उसी का इंतजार कर रहे थे!



☘️☘️☘️☘️☘️☘️

☘️☘️☘️☘️☘️


शाम को सूरज ने अस्ताचल की ओर अपना मुख मोड़ दिया था !!एक चट्टान पर बरखा और शेखर बैठे हुए थे पेड़ों के साए लंबे हो चले थे उन पेड़ों की लंबी होती परछाइयों की तरफ बरखा चुपचाप देख रही थी .....तभी दूर कहीं कोई चिड़िया टहूकी.... इससे मौन भंग हो गया .....शेखर ने बरखा के चेहरे की तरफ देखा !!


आज बरखा शेखर के साथ घूमने आई थी तो प्राची जानबूझकर नहीं आई! इससे शेखर को भी मौका मिल गया था कि वह बरखा से खुलकर बात कर ले .....अभी तक तो बरखा ने बातचीत करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी !!

जब -जब उसने बात करने का प्रयत्न किया तो वह व्यस्त होने का बहाना करने लगी ..अब इस समय थोड़ा मौका जान कर शेखर ने पूछा --

"क्या सोच रही हो बरखा ?"

"कुछ नहीं ! सोच रही हूं कि क्या जो इंसान सोचता है उसे मिल जाता है ? या ऐसे ही सोचते- सोचते एक दिन निराश हो जाता है !!

बातचीत का सूत्र शेखर के हाथों में आ गया था!! उसने बड़े ही प्यार से पूछा --

"बरसा तुम्हारे मन में क्या है ? तुम क्या चाहती हो?"

"क्या चाहती हो क्या मतलब ?"

"मतलब है तुम्हारा क्या इरादा है ? .....शादी करो तो जीवन साथी कैसा हो?"

" शादी ??" शादी करूंगी तो एक-दो साल में करुंगी!! जीवन साथी ऐसा होना चाहिए कि उसके पास गाड़ी हो... बंगला हो.. ढेर सारा पैसा हो ..और सुंदर भी हो ...!!!

फिर शेखर की तरफ देखकर हंसते हुए बोली :--'तुम्हारी तरह सुंदर!! तुम बिलकुल मेरे जीवनसाथी की इमेजिन से मैच करते हो!!

यह सुनकर शेखर को ऐसा लगा जैसे उसका दिल उछल कर हलक से बाहर आ जाएगा !!"

" में तुम्हें अच्छा लगता हूं ?"

"बहुत अच्छे लगते हो ? प्रकाश !! अगर तुम पैसे वाले भी होते हैं तो मैं निश्चित रूप से तुम्हीं से शादी करती !!!

फिर उसकी सितारों जैसी आंखें अंतरिक्ष में ठहर कर जैसे शून्य में कुछ खोजने लगीं!! वास्तव में उसका मन अपने सपनों का पीछा करते -करते कल्पना जगत में ही भटक रहा था !!"

"सोचती हूं कि मेरा जीवन साथी ऐसा हो ही ......पैसे वाला भी खूब...... ताकि वह मुझे जीवन की सारी सुख -सुविधाएं दे सके!!


वह बोलती जा रही थी :-- विदेशों में घूमने का बड़ा शौक है मैं !!अपने सपनों को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हूं!!!

ऐसा कहते -कहते उसकी आंखें चमकने लगी !! शेखर ने उसकी आंखों की तरफ देखा और उसके सपनों की चमक को झेल नहीं सका !! वह उसकी नजरों की ताव नहीं ला सका !!

उसकी अभिलाषा और इच्छा सुनकर शेखर .....जैसे एक- एक शब्द पर उसका दिल टूट रहा था ....और एक- एक शब्द उसके मन पर हथौड़े की तरह बरस रहा था !!

बरखा की अभिलाषाएं बहुत ऊंची थी और उसमें शेखर कहीं भी नहीं था !!!! हकीकत यही थी!!

" वह बोली :-"मैं अपने सपनों को पूरा करने के लिए कुछ भी कर सकती हूं .......कुछ भी !!!

"चलो ,अच्छा!! अब रात हो रही है !! कहते हुए शेखर उठ खड़ा हुआ आ बरखा भी उठ खड़ी हुई !! दोनों अपनी -अपनी सोच में गुम थे !! उदास होकर घर लौट आए !

☘️☘️☘️☘️

दूसरे दिन शेखर बरखा के यहां गया उसे कई बातें कहनी थी और उसे कुछ समझाना भी था!! उसने सोचा था कि वह अपने तरीके से बरखा को समझाएगा ! जब वहां पहुंचा तो यह देखकर सन्नाटे में रह गया कि दरवाजे पर तो ताला पड़ा हुआ है!!!

.. और वहां किसी का भी पता नहीं!!! उसने चारों तरफ ढूंढ कर बरखा को पुकारा लेकिन कहीं कोई नहीं था

वहां से बहुत दूर पर एक झोंपड़ी थी !!वहां पर पहुंच कर उसने उसने एक महिला से पूछा :-ये लोग कहां गए ?"

वह बोली:--' वे तो यहां से चले गए हैं !!। मुझे पता नहीं कहां गए हैं !"

और शेखर के मन में विनय की बातें गूंजने लगी ....और उसके कहे हुए शब्द उसके दिमाग पर हथौड़े की तरह बजने लगे---

"'खूबसूरत छलावा !!

"धोखेबाज !!"

"तो क्या यह बात सही थी ?"

तो क्या वह मुझे धोखा देकर निकल गई ...... क्या सचमुच। वह धोखेबाज थी ??"

"विनय ने तो उसे आगाह कर दिया था !!अब उसके दिमाग पर शब्द बराबर ठोकर मार रहे थे!! खूबसूरत धोखेबाज!! धोखेबाज खूबसूरत
 

Mr.X796

Well-Known Member
10,204
6,273
228
  • Like
Reactions: Aakash.

Guffy

Well-Known Member
2,069
2,177
159
भाग 5

शेखर को बरखा के बारे में कुछ भी पता नहीं चल पाया ! वह बहुत ही ज्यादा बेचैन था! अचानक उसे ऐसा लगा कि जैसे ये खिलते हुए फूल उस पर हंस रहे हैं ! यह जो सुखदाई हवा थी वह एकाएक तंग हो गई और उसकी सांस घुटने लगी है !!

चारों ओर जो नैसर्गिक सुंदरता बिखरी पड़ी थी... उसमें कोई रंग नहीं रह गए हैं.... सब बेरंग फीके नजारे.... उदासी के रंग में डूबे हुए जैसे विलाप कर रहे हैं..... सिर धुन रहे हैं !!

उससे अब यहां एक मिनट भी खड़ा नहीं रहा गया और वह धीरे धीरे वहां से लगभग लड़खड़ाते हुए कदमों से लौट आया !! उसका मन हो रहा था कि अपने बालों को नोच डाले ।

उसे बहुत गुस्सा आ रहा था .....लेकिन किस पर आ रहा था यह तो वह नहीं जानता था..... अगले ही पल उसका मन ऐसा हो रहा था कि वह जोर से फूट-फूटकर रोए !!

अपने घर पर आकर वह निढाल होकर पड़ गया । उसकी मां ने खाने- पीने के लिए आकर पूछा तो उन्हें भी डांट दिया झुंझला कर बोल पड़ा :--"नहीं चाहिए मुझे कुछ खाना- पीना!!"


उसकी यह मुद्रा देख और तेवर देखकर वह कुछ समझी नहीं ! लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा !


आज उसे पहली बार अपने दिमागी दिवालियापन पर क्रोध आ रहा था !! आखिरकार इतने दिन हो गए ....उसने यह भी नहीं पूछा था कि वह करती क्या है ?"

उसके मां-बाप क्या करते हैं ?"

कहां रहते हैं ?....और प्राची के मां बाप से वह मिला था..... वे सब लोग उसे बहुत पसंद करते थे !! स्वयं प्राची की आंखों में वह अपने लिए चाहत का भाव देख चुका था ...और वही भाव उसके मां-बाप के चेहरे पर भी उसे दिखाई दिया था!!

लेकिन उसने इस बात को कोई महत्व नहीं दिया था.... या यूं कहो कि जानबूझकर इग्नोर कर दिया था !! शायद वे लोग भी यह बात समझ रहे होंगे.... जानते होंगे..... तभी उन्होंने सोचा होगा.... कि लो !! चलो.... तुम बरखा को ज्यादा महत्व दे रहे हो.... तो हम भी क्यों परेशान हों ????.......जो तुमको किसी बात को सूचना दें !!


इस प्रकार की सैकड़ों बातें उसके मन में आ- जा रहीं थीं.... जिनका ना कोई सिरा था न कोई छोर था...... न कोई ठीक ठिकाना था !!!

वह सोच रहा था कि वे भी उसके साथ चले गए ....उसे बताया भी नहीं ???......इतनी घनिष्ठता भी थी .....लेकिन कभी भी बरखा के परिवार के बारे में ज्यादा नहीं बताया था .....और जब-जब स्वयं उसने बरखा से चर्चा की थी.....उसके परिवार के बारे में जानने के लिए.!!! अब सब उसे ध्यान आ रहा था...... कि वह बड़ी सफाई से बात को गोल करके यह कह देती थी__

" तुम्हें मुझ से मतलब है कि मेरे पूरे खानदान से मतलब है ?...तुम मुझसे बात कर रहे हो तो मुझको देखो !!"

तब उसकी बात पर वो निरुत्तर रह जाता था ।उसे कोई जवाब नहीं आता था और सच बात तो यह है कि उस समय वह उसके चेहरे की सुंदरता में खोया.... केवल उसको ही देखना चाहता था ....और कोई बात उसे याद आती ही नहीं थी !!

हद से ज्यादा उस पर विश्वास था और यह तो बात कभी उसके मन में आई ही नहीं थी कि वह इस प्रकार से छोड़कर कहीं जा भी सकती है ! वह तो उसे हमेशा अपना मान कर चला था ।

अपने दिल दिमाग का एक हिस्सा ही मानता था । वो ऐसा धोखा देगी यह कभी नहीं सोचा था !! शेखर सब बातें सोच रहा था... लेकिन यह नहीं सोच रहा था ....कि अगर बरखा को वास्तव में उससे लगाव होता तो उसे कुछ सूचना देती... या उसे कुछ समझती !!

यह बात वह मानने को ही तैयार नहीं था !! वह शाम तक उठा ही नहीं.... ऐसे ही पड़ा रहा!!

शाम को विनय उसको देखने के लिए आया ! शायद उसकी मां ने जाकर विनय को सब हाल- चाल बताया था !!

उसने विनय को आते हुए देखा तो मन ही मन में बोला :-- अब यह मुझको बड़े- बूढ़ों की तरह लेक्चर देगा!! उपदेश देकर समझाएगा..... कि मैं तो तुझको पहले ही मना करता रहा !!"

क्योंकि इसने तो सबसे ज्यादा सावधान किया था !!

उसे विनय का आना इस समय अच्छा नहीं लगा ! लेकिन विनय भी उसका पक्का दोस्त था !! और वह दोस्त ही क्या जो दोस्त के दिल की बात को ना समझे ?

विनय समझ गया था कि शेखर इस समय क्या सोच रहा है ?... वह यह भी जान गया था कि उसका आना इस समय शेखर को अच्छा नहीं लग रहा !! उसके मन के उठते हुए भावों को विनय के दिल ने कैच कर लिया था !!

वह उसके पास आकर बैठ गया और धीरे से बोला :--"क्या तबीयत ठीक नहीं है ?"

" तबीयत तो ठीक है!! फीके स्वर में शेखर ने जवाब दिया !!

विनय को अंदाजा तो लग ही गया था कि क्या हुआ होगा?... इसलिए उसने किसी बात की कोई चर्चा नहीं की और धीरे से उसकी पीठ को थपथपाते हुए बोला :--"ज्यादा दुख मत कर !! धीरे-धीरे सब सही हो जाएगा !!"


अब तो आश्चर्य ही हो गया!!विनय ने उसने कुछ पूछा भी नहीं... और जिक्र भी नहीं किया.!! पर शेखर उसे अपना सब हाल बताना चाहता था!! कहां तो वह बच रहा था कि वह पूछेगा तो बताएगा नहीं..... और कहां उसका यह हाल होने लगा ....कि मन में घुमड़ते हुए सब दुखों को उसे बता डालें !! अपने दिल का हाल बता कर अपना मन हल्का कर डाले !!

विनय ने उसकी बात को समझते हुए कहा :--"चल थोड़ा सा बाहर घूम आएं !! वह मां के सामने इन बातों को नहीं लाना चाहता था !

धीरे से उसने उसे उठाया और बोला :--" चल !! दो मिनट के लिए कहीं चलते हैं ! सिर दर्द होता होगा ..सही हो जाएगा !

जब बाहर आ गया तो उसने देखा कि दूर- दूर तक कोई नहीं है ।।।तो उसने शेखर से धीरे से पूछा :-वह तुझे चकमा देकर चली गई है ना!!"

जैसे दिल के छालों को किसी ने फोड़ दिया हो ।।।।इस बार वह अपने को रोक नहीं पाया और उसके कंधे पर सिर को रखकर फूट-फूटकर रो पड़ा .....उसकी ऐसी हालत को देखकर विनय हक्का- बक्का रह गया ! शेखर बरखा को दिलो जान से चाहता है.. यह तो वह जानता था और यह भी.....कि वह बहुत परेशान है ....,लेकिन यह नहीं जानता था कि वह इस कदर परेशान है !! उसे उसकी बेवकूफी पर क्रोध भी आया और इस पर झुंझलाहट भी हुई कि बेकार में ही वह एक परछाई का पीछा कर रहा है !! लेकिन आखिरकार वह उसका दोस्त था ....तो उसको संभालना उसका फर्ज था !!


☘️☘️☘️☘️☘️☘️


विनय ने यह बात नोट की थी कि अब शेखर का मन काम में बिल्कुल नहीं लगता था .....और वैसे भी जब सीजन ऑफ होती थी तो वह लोग बाहर कहीं न कहीं नौकरी कर लेते थे ! सीजन भी ऑफ होने को थी..... इसीलिए विनय ने शेखर से कहा--

" चलो ! क्यों न चल कर दूसरी जगह काम- धाम देखें !"

इस बात पर शेखर झट से राजी हो गया !! "लेकिन एक बात है यार !! मां की देखभाल कौन करेगा ?" उसने अपनी उलझन बताई!!

विनय ने कहा :--" मां की देखभाल की यह बात है कि अभी हम चलते हैं ! किराए पर मकान ले लेंगे और सब सामान -- व्यवस्था ठीक करके फिर वापस आकर मां को ले जायेंगे !"

जब तक इतने दिन तक हम ....वहां यह सब काम करेंगे ...तब तक मां हमारे यहां रहेंगी!"

यह सुनकर शेखर निश्चिंत हो गया .....आखिरकार दोनों परिवारों में दांतकाटी रोटी का संबंध थाआ इसलिए उसने कोई एतराज नहीं किया !

"हां यह ठीक है !"

मां ने भी हंसी -खुशी इस प्रस्ताव को तुरंत ही स्वीकार कर लिया है क्योंकि वह शुरू से आखिर तक सब मामला देखती आ रही थी और सब जानती थी !!

आखिर उससे कैसे छुपा रह सकता था और अब उसके प्यारे बेटे की जो दशा हो रही थी .....उसको देखकर वह बहुत ही दुखी रहती थी !! जैसे ही उन्हें यह बात पता चली.... वह बहुत खुश हो गई!!!


"चलो ठीक है !! जगह बदलेगी थोड़ा मौहाल बदलेगा तो फिर से मेरा शेखर पहले जैसे हो जाएगा !! समय बड़े -बड़े घाव को भर देता है ....इस बात को वह बखूबी जानती थी!!

उन दोनों ने इस बार दिल्ली जाने का निश्चय किया था !! विनय और शेखर आज सुबह से अपनी जाने की तैयारी कर रहे थे !!बैग और जरूरी सामान तैयार करके मां के चरण छू कर घर से बाहर निकले और दिल्ली का रुख किया !!


क्रमशः************************
 

Guffy

Well-Known Member
2,069
2,177
159
भाग 6



दिल्ली दिलवालों का शहर कही जाती है !! जाने कितने ही शासक आए और चले गए..... जाने कितने ही वंशों के उत्थान- पतन की साक्षी बनी है दिल्ली !!!

इसके रूप बने- बिगड़े ....पर अपनी अलग ही और निराली शान में इठलाती हुई दिल्ली..... सुदूर प्रांतों के सुदूर ग्रामों के जाने कितने ही नवयुवकों को आश्रय देती दिल्ली.... आज भी अपनी आन -बान और शान के साथ जगमगाती है!!

अनगिनत अधूरे सपने दिल्ली में परवाज पाकर अपनी मंजिल पूरी करते हैं !! यहां सब के लिए जगह है.... करोड़पति से लेकर मजदूर तक के लिए .....तभी तो दिल वाली है दिल्ली!!

विनय और... टूटे दिल.. के साथ शेखर ने दिल्ली के रेलवे स्टेशन पर कदम रखा ! अब उन्हें अपना नया ठिकाना तलाशना था !! उनका एक परिचित दिल्ली में रहता था दो तीन पते।और भी थे !!

उन दोनों ने सोचा... कि हर जगह जाकर ट्राई करेंगे !! मकसद अगर केवल रहना होता ....तो कहीं भी रह लेते ...लेकिन यहां मतलब तो जॉब से है !!

अगर अच्छी जॉब मिलेगी... तो आस-पास ही कहीं रहने के लिए तलाश करेंगे.... लेकिन अगर अच्छी जगह जॉब मिली तो वहां मकान मिलना मुश्किल हो जाएगा !!

इन दोनों को मालूम ही था कि इतनी अच्छी जॉब एकदम से नहीं लग जाएगी.... इसलिए महंगे मकान भी रहना उनके लिए असंभव हो जाएगा !!... तो रहने के लिए आउटर इलाके में कहीं सस्ता सा मकान ढूंढना होगा !!

इसी उधेड़बुन में दोनों ने बाहर आकर करोल बाग के लिए बस पकड़ी बस के बाद फिर ऑटो से अपने परिचित के यहां आ गए !! उसने फ्लैट का थर्ड फ्लोर ले रखा था और विद फैमिली रहता था!!

उसने पहले से ही दोनों के लिए कई जगह बात कर रखी थी !! अरुण नाम का यह परिचित बचपन में उनके साथ ही रहा था!! उसके बाद कुछ समय पहले यहां चला आया था !!

उसे जॉब मिल गई थी !! फिर उसने धीरे -धीरे यहीं रहते हुए अपनी सुख सुविधा के सभी साधन जुटा लिये थे... और सुना शादी भी यहीं कर ली थी!!

एक्चुअली यह उनकी लव मैरिज थी ... अरुण की पत्नी गौरी भी उसी के ऑफिस में काम करती थी !!उसकी पत्नी भी जॉब करती थी !!

यही बात उसने विनय और शेखर को बता रखी थी ....कि ज्यादा नहीं तो अपनी गुजर-बसर भर के लिए तो आराम से पैसे कमा सकते हो.... कंप्यूटर चलाने में दक्ष होना चाहिए!! इस मामले में विनय उससे आगे निकल गया!!

उस दिन अरुण ने छुट्टी ले ली.... और उनको कई कंपनियों में लेकर गया!! एक जगह विनय को अकाउंटेंट की जॉब मिल गई .....मगर शेखर को नही मिल पाई।!

शेखर के लिए स्टोर कीपर की नौकरी मिल गई ! इस नौकरी से वह खुश तो नहीं था इसमें जिम्मेदारी भी अधिक थी और जिम्मेदारी ही वह निभाना नहीं चाहता था !!

लेकिन फिलहाल टिकने के लिए जरूरी थी.... इसलिए उससे अरुण ने कहा "भाई तब तक नौकरी करते रहो और मैं तुम्हारे लिए कई जगह और भी देखता रहूंगा और तुम भी देखते रहना !!

यहां पर लग जाओ उसके बाद तो सब सही हो जाएगा ...फिर नौकरी चेंज कर सकते हो !!

यह बात उन दोनों को पसंद आ गई l.अब बात रही थी रहने की तो रहने के लिए उन्होंने कहा कि "हमें तो कोई सस्ता सा ठिकाना चाहिए "..तो अरुण ने कहा कि यहां इतना सस्ता नहीं मिल पाएगा.!!

इसके लिए तो तुमको दूरदराज की किसी नई बसी हुई कॉलोनी में मकान लेना पड़ेगा !! चलो देखते हैं ....!!

फिर भाग दौड़ शुरू हुई !! शेखर और विनय साथ ही रहना चाहते थे उन्होंने तय किया था कि दो कमरों का सेपरेट पोर्शन विद किचन,,बाथरूम, हम ले लेंगे !!

शेखर की मां को भी बाद में ले आएंगे !! एक साथ ही रहेंगे तो मकान का किराया आधा-आधा कर लेंगे ...और खाना -पीना आदि सभी का खर्चा सब आधा-आधा करेंगे !! इससे दोनों लोगों को सहूलियत हो जाएगी और कुछ बच भी जाएगा !

इस समय दोनों लोग अरुण के यहां से ड्यूटी कर रहे थे!! गौरी सवेरे जल्दीउठती थी ....जल्दी उठ कर नाश्ता पानी बना लेती!! उन दोनों के भी लंच बॉक्स तैयार कर देती ....और अपने दोनों लोगों के लिए लंच बॉक्स पैक करके चली जाती !!

तीसरे दिन संडे था !! संडे वाले दिन तीनों ही मकान की खोज में निकले !! कई जगह मकान देखें दो-तीन जगह पसंद भी आया फिर एक सबसे ज्यादा पसंद आया !! नौकरी वाली जगह से बहुत दूर नहीं था ....और जैसा चाहते थे वैसा मिल गया!! दोनों वहीं शिफ्ट हो गए और ड्यूटी करने लगे थे!!

विनय ने अपने घर पर फोन करके सारा हाल-चाल विस्तारपूर्वक बता दिया था !! शेखर ने भी अपनी मां को पूरा हालचाल सुनाया था उसकी मां भी बहुत खुश थी ....और शेखर ने आश्वासन दे रखा था कि यह महीना पूरे होते हीजैसे ही पहली सैलरी मिलेगी वह आकर मां को ले जाएगा !!

कहते हैं कि तिनका- तिनका जोड़ने में बहुत समय लगता है...पर लिखने बिखरने में देर नहीं लगती !! इतने परिश्रम से दोनों ने जॉब ढूंढी .....फिर मकान ढूंढा और इतना समय लगाया ....अपने हिसाब से सब कुछ सेट किया...... मगर भाग्य को तो कोई नहीं जान सकता है कि क्या होने वाला है ??"

तो शेखर भी अपने भाग्य के बारे में कैसे जान सकता था कि उसके जीवन में क्या आने वाला है !! बरखा से मिलना ....यह तो उसके साथ दुर्भाग्यों की और उथल-पुथल की शुरुआत भर थी !!अभी तो पूरे कांड बाकी थे !!








शुरुआत में शेखर को यहां बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा!! नया शहर ...नए लोग .नई जगह.... नया मकान ....नए पड़ोसी सब कुछ नया ही नया था .!!! परिचित के नाम पर शाम को उसे विनय का चेहरा देखने को मिलता !! तब उसकी सांस में सांस आती!! दोनों मिलकर अपने दिन- भर के किस्से एक दूसरे को सुनाते !! साथ -साथ खाना बनाते और बैठ कर खाते- पीते !!

उसके दिन बहुत ही कठिनाई से बीत रहे थे ...और वह बहुत ही उदास रहता था रहता था!! पर धीरे-धीरे उसे अपने ऑफिस का काम रास आने लगा था!!

धीरे धीरे नए अनजाने चेहरे परिचित होने लगे थे !! अब ऑफिस में उसका खूब मन लगने लगा था ! अपने काम को वह बहुत ही ईमानदारी से करता था ....औरअच्छा व्यवहार करने में तो ......पब्लिक डीलिंग करने के तजुर्बे के कारण....महारत हासिल थी उसे !!!

वह गाइड था ...तो कई -कई लोगों से बातचीत करने का तजुर्बा था वही मृदु व्यवहार उसका यहां भी काम आ रहा था !! उसके स्वभाव से सभी लोग प्रसन्न थे.... कह सकते हैं... कि वहां उसकी निंदा करने वाला कोई नहीं था..... फालतू बात किसी से करता ही नहीं था !!! अकड़ नाम की चीज उसमें थी ही नहीं ।।कोई भी उससे किसी काम के लिए कहता वह कर देता था !!

कह सकते हैं कि बहुत हद तक उसका जीवन ढर्रे पर आ गया था तभी अचानक एक दिन...........!!!

आज उसे थोड़ी देरी हो गई थी !! इसलिए वह जल्दी जल्दी आ रहा था ! बहुत ही हड़बड़ी में वह थर्ड फ्लोर पर जाने के लिए लिफ्ट के पास आया !!! तभी लिफ्ट आकर रुकी और उसमें से जो लड़की निकल कर गई उसे देखकर वह लिफ्ट को भूल गया और उसके पीछे -पीछे दौड़ा !! उसका दिमाग चीख- चीख कर कह रहा था-- "बरखा !!! बरखा !!!! यह बरखा ही है!!



क्रमशः**********************
 
Last edited:

Guffy

Well-Known Member
2,069
2,177
159
भाग 7


शेखर को पूरा यकीन था कि वह बरखा ही थी !! वह उसके पीछे दौड़ा! उसका दिल खुशी से जोर से धड़क रहा था आखिरकार उसकी बरखा उसे मिल ही गई ! वह तो हमेशा तो हमेशा से कहता देर है अंधेर नहीं एक न एक दिन बरखा से जरूर मिलेगी बड़ी जल्दी वह उस के पास पहुंच गया और उस लड़की के कंधे पर हाथ रखकर कर बोला--

" बरखा तुम यहां ?"

वह लड़की पलटी ! शेखर ने आश्चर्य से देखा !! थी तो बरखा ही...!! पर उसका पूरा गेटअप बदला हुआ था ! वह पीले रंग का टॉप और काली जींस पहने थी !! कंधे पर पर्स टंगा हुआ था और हाथ में कोई फाइल थामें थी !!

आंखों पर काला चश्मा लगा हुआ था कानों में टॉप से मैच करते इयररिंग्स थे और खूब गहरा मेकअप किए हुए थी! पहले से उसका रंग और भी निखर गया था !! शरीर पहले से भर गया था !

सेहत अच्छी हो गई थी कुल मिलाकर वह पहले से स्वस्थ थी और ज्यादा सुंदर थी ! इस निखरे रंग और सेहत में और इस ड्रेस खिली-खिली सी वह .... गजब ढा रही थी .....गजब की सुंदर लग रही थी ...ऐसा लग रहा था कि जैसे. बरखा पर किसी ने जादू की छड़ी फिरा दी है और उसका रूप ही बदल गया है

सुर्ख रंग की लिपिस्टिक से लाल होंठों को गोलाकार आकृति में करते हुए बोली--

"हू आर यू ??"

शेखर को जैसे झटका लगा!! बरखा ऐसा क्यों कर रही है!!

पहले तो उसने सोचा शायद बरखा ने पहचाना नहीं है!

वह शिकायती लहजे में बोला --

:क्या ??" ऐसा क्यों कह रही हो बरखा तुमने मुझे पहचाना नहीं है??""

इतनी जल्दी कोई किसी को भूल जाता है क्या? और यह क्या ?? तुम वहां से बिना बताए चली आईं मैंने तुमको कितना ढूंढा?

कितना मैं परेशान हुआ था तुम्हारे लिए ?

तुम्हें कम से कम बता कर तो आना चाहिए था !!...और प्राची कहां है ? अंकल आंटी कहां है ?"एक ही सांस में वह इतनी सारी बातें पूछ गया !

सबसे बड़े आश्चर्य वाली बात तो यह थी कि अभी तक वह उसको ,,धोखेबाज ,,,छलावा बता रहा था ....और उसके लिए अपने मन में इतना क्रोध भरे बैठा था ...कि अगर वह सामने आ जाए तो वो उसकी गर�
 

Guffy

Well-Known Member
2,069
2,177
159
Part 7


शेखर को पूरा यकीन था कि वह बरखा ही थी !! वह उसके पीछे दौड़ा! उसका दिल खुशी से जोर से धड़क रहा था आखिरकार उसकी बरखा उसे मिल ही गई ! वह तो हमेशा तो हमेशा से कहता देर है अंधेर नहीं एक न एक दिन बरखा से जरूर मिलेगी बड़ी जल्दी वह उस के पास पहुंच गया और उस लड़की के कंधे पर हाथ रखकर कर बोला--

" बरखा तुम यहां ?"

वह लड़की पलटी ! शेखर ने आश्चर्य से देखा !! थी तो बरखा ही...!! पर उसका पूरा गेटअप बदला हुआ था ! वह पीले रंग का टॉप और काली जींस पहने थी !! कंधे पर पर्स टंगा हुआ था और हाथ में कोई फाइल थामें थी !!

आंखों पर काला चश्मा लगा हुआ था कानों में टॉप से मैच करते इयररिंग्स थे और खूब गहरा मेकअप किए हुए थी! पहले से उसका रंग और भी निखर गया था !! शरीर पहले से भर गया था !

सेहत अच्छी हो गई थी कुल मिलाकर वह पहले से स्वस्थ थी और ज्यादा सुंदर थी ! इस निखरे रंग और सेहत में और इस ड्रेस खिली-खिली सी वह .... गजब ढा रही थी .....गजब की सुंदर लग रही थी ...ऐसा लग रहा था कि जैसे. बरखा पर किसी ने जादू की छड़ी फिरा दी है और उसका रूप ही बदल गया है

सुर्ख रंग की लिपिस्टिक से लाल होंठों को गोलाकार आकृति में करते हुए बोली--

"हू आर यू ??"

शेखर को जैसे झटका लगा!! बरखा ऐसा क्यों कर रही है!!

पहले तो उसने सोचा शायद बरखा ने पहचाना नहीं है!

वह शिकायती लहजे में बोला --

:क्या ??" ऐसा क्यों कह रही हो बरखा तुमने मुझे पहचाना नहीं है??""

इतनी जल्दी कोई किसी को भूल जाता है क्या? और यह क्या ?? तुम वहां से बिना बताए चली आईं मैंने तुमको कितना ढूंढा?

कितना मैं परेशान हुआ था तुम्हारे लिए ?

तुम्हें कम से कम बता कर तो आना चाहिए था !!...और प्राची कहां है ? अंकल आंटी कहां है ?"एक ही सांस में वह इतनी सारी बातें पूछ गया !

सबसे बड़े आश्चर्य वाली बात तो यह थी कि अभी तक वह उसको ,,धोखेबाज ,,,छलावा बता रहा था ....और उसके लिए अपने मन में इतना क्रोध भरे बैठा था ...कि अगर वह सामने आ जाए तो वो उसकी गर्दन ही दबा देगा ...और उसकी धोखेबाजी की सजा देगा !!

पर उसके सामने पड़ते ही उसके सारे गिले-शिकवे नफरत और क्रोध सब कपूर के धुएं की भांति उड़ गया !!

उसने आश्चर्य से देखा कि बरखा ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और जो उसने जवाब दिया उससे शेखर सकते में रह गया !

उस लड़की की आंखों में आश्चर्य भरा हुआ था और वह कह रही थी!! पता नहीं तुम क्या- क्या कहे जा रहे हो ?.

और तुम मुझे बार-बार बरखा क्यों कर रहे हो ?..मैं बरखा नहीं हूं ......और न ही मैं किसी बरखा को जानती हूं !!! तुम पता नहीं कौन सी बकवास किए जा रहे हो ?"

शेखर यह बात कैसे मान ले... कि वह बरखा नहीं है !! वह बरखा से अनुनय मेरे स्वर में बोला --

"प्लीज बरखा ! ऐसा मत कहो ! अगर तुम गुस्सा हो तो ...
जो भी कहना है.... हमसे कह लो ....और मेरी तुमसे कोई बात भी तो नहीं हुई थी !!

तुम तो बिना बताए जाने कहां चली गई थी ?.... और अब क्यों नाराज हो बताओ तो सही!!" ऐसा कहकर उसने बरखा को मनाने के लिए उसका हाथ पकड़ना चाहा... तो बरखा ने जोर से हाथ झटककर कहा --

"तुम चुप रहो तुम!! और ज्यादा बकवास मत करो !! नहीं तो मैं शोर मचाकर सभी को बुलाती हूं !! एक बार कह दिया तो तुम्हें सुनाई नहीं देता ! मैं बरखा नहीं हूं !!"

अब शेखर को भी गुस्सा आ गया ! वह पुनः अपनी पुरानी धारणा पर लौट गया,,कि बरखा धोखेबाज है !!

उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह इतना झूठ क्यों बोल रही थी?" अब उसे भी क्रोध आने लगा ! तो बरखा से बोला --

"अच्छा !! अगर तुम बरखा नहीं हो तो फिर कौन हो ?"

"क्यों बताऊं मैं तुम्हें अपना नाम ? ..मैं कोई मजबूर नहीं हूँ... लेकिन फिर भी बता रही हूं मेरा नाम है ,,,,शालिनी !!!

ऐसा कहकर उसने माथे पर झुक आये कटे बालों को बड़ी अदा से संवारा और शेखर के दिल को रौंदते हुए आगे बढ़ गई!

शेखर ठगा सा वहीं खड़ा उसे जाता हुआ देखता रहा!! पहले तो बरखा बिना बताए चली गई थी...तो वह कन्फ्यूज़्ड था...कि पता नहीं बरखा कैसे गई ??? क्यों गई??

अब तो कोई मजबूरी या ऐसी कोई बात नहीं थी!! शेखर के सामने ही कैसे गिरगिट की तरह रंग बदल रही थी ?? बेशर्मी की तो तब हद हो गई जब उसने अपना नाम ही बदल दिया अपनी पहचान ही बदल दी और जबकि बिल्कुल सामने खड़ी है !!

उसके बाद भी किसी दूसरे इंसान की एक्टिंग कर रही है!! अब तो शक की कोई गुंजाइश ही नहीं थी ! तभी उसके कंधे पर किसी ने हाथ रखा ! उसने मुड़कर देखा तो यह उसके ऑफिस का ही प्रभात था!

" क्या बात है ! भाई !! क्या चक्कर है ? मैं बहुत देर से खड़ा- खड़ा देख रहा हूं !"

मैंने सोचा तुम्हारी कोई परिचित होगी ...और वह तुमसे मिलकर चली गईa !! क्या तुम से जानते हो ?"


"नहीं प्रभात !! मैं उसे नहीं जानता !


"बहुत पहुंची हुई चीज है"यार !! भेद भरे स्वर में उसे प्रभात ने बताया !

"अच्छा!"

" हां सच में ऐसा ही है! "

" अभी तुम देखना !! यहां से आएगी !! जाते समय तुम देखना!

कहने को तो यह ऐसे प्रभात ने कहा था... लेकिन यह इच्छा तो शेखर के मन में भी जोर मार रही थी कि इस बात का पता लगाना चाहिए !!

अब जो उसके पेट में खलबली मची थी तो वह ऐसे शांत होने वाली नहीं थी !! वह इस बात का पता लगाकर ही छोड़ेगा कि आखिर बात है ? क्या चक्कर.चल रहा है ?

शेखर ने उससे पूछा:: तुम इसके बारे में क्या जानते हो ?और उसका क्या नाम है ?"

"अरे यार ! इसका नाम तो शालिनी है... मगर यह हमारे मैनेजर साहब की चहेती है !"

"क्या ! शेखर का आश्चर्य से मुंह खुला का खुला रह गया !



"जी !" और प्रभात उसके और पास आकर खुसरूपुर भरे स्वर में बोला :--"कहने वाले तो यहां तक कहते हैं कि मालिक के साथ भी इसका अफेयर चल रहा है !! "

"क्या?????

"हाँ!!!

शेखर ऐसी धमाकेदार खबरें सुन कर आश्चर्यचकित था!

" क्या कहते हो तुम!"

"सच कहता हूं भाई!! ऐसा ही है जी !बीच-बीच में ये हमारे मैनेजर बाबू से मिलने आती रहती है !!


करीब एक घंटे बाद शेखर अपने काम में व्यस्त था ...तभी प्रभात ने आकर उसे खबर दी ! चलो जल्दी से चल कर देखो !!

प्रभात और शेखर दोनों बाहर आए उन्होंने देखा कि बरखा वहां से निकल कर गई और सड़क पर एक गाड़ी खड़ी थी !!

वह गाड़ी में बैठ गई !! कार को चलाने वाले का चेहरा तो नहीं दिखाई दिया ! लेकिन जब उसने कार से उतर का दरवाजा खोला तो शेखर ने देखा कि वह एक बेहद खूबसूरत युवक था!!!

दोनों गाड़ी में बैठ गए और गाड़ी वहां से चली गई !!!!!
 

Guffy

Well-Known Member
2,069
2,177
159
Part 8



बरखा और शालिनी की यह पहेली शेखर की समझ में नहीं आ रही थी । और वह यह भी नहीं समझ पा रहा था कि आखिर वह ऐसा क्यों कर रही है ?

शालिनी तो चली गई थी ! शेखर कब तक खड़ा रहता ? वह भी ऑफिस में आ गया और अनमने ढंग से अपना काम करने लगा । इतने दिनों के बाद बरखा को देखकर उसकी याद फिर से ताजा हो गई और उसके दिल के जख्म फिर से रिसने लगे ।

उसे बरखा का वह रूप याद आया ...जब वह कुदरत की खूबसूरत हरी मखमली गोद में चट्टान पर किसी शहजादी की तरह बैठी हुई थी वायलिन की मधुर धुन से पूरी फिजा को मधुरता से भर रही थी!! तब वह उसे मोहब्बत की जिंदा मूर्ति लगी थी और उसके दिल को उसने अपनी मुट्ठी में कर लिया था!!

उसकी वह मूर्ति शेखर के मन में सदा मुस्कुराती थी!!पर आज की यह शालिनी तो उस मूर्ति के आस -पास दूर- दूर तक नहीं है!!

पर वह क्या करें ? वह तो अपने दिल के हाथों मजबूर है। मन तो मानता ही नहीं । अब इससे ज्यादा ठोकर क्या होगी ? उसने तो शेखर को पहचानने से मना कर दिया !!

उसका दिमाग कह रहा था कि "वह फरेबी है" उसका पीछा छोड़ ! नहीं तो तू बर्बाद हो जाएगा !!"

दिल की पुकार थी :--"ऐसा क्यों सोचता है ? तेरी मोहब्बत सच्ची है तो तुझे जरूर मिलेगी ! मोहब्बत इम्तहान से होकर गुजरती है और कुर्बानी मांगती है । जो सोच समझ कर,,फायदा देखकर ,,मतलब के लिए प्यार किया,,,,वह प्यार नहीं व्यापार है !!

सच्ची मोहब्बत का यही तकादा है कि मर जा ...मिट जा ..पर अपनी मोहब्बत को साबित करके दिखा दे कि मोहब्बत क्या होती है ?

सुनते हैं कि सच्ची मोहब्बत के आगे कायनात झुक जाती है तो यह बरखा क्या चीज है ...तो जो भी हो इसे तेरी सच्ची मोहब्बत के आगे झुकना ही पड़ेगा!!

दिमाग ने चेताया:--"ऐसा भूल कर भी मत करना ! वह पता नहीं क्या खेल खेल रही है? ऐसे जाने कितने मजनू ऐसी हसीनाओं के जाल में फंसे और मिट गए !! "

शेखर के माथे पर पसीना छलक आया !! उसका दिल जोर-जोर से धड़कने लगा !! उसके मन में विचारों की आंधी चल रही थी,,..सही और गलत ...दिल और दिमाग के बीच में फंसा... अंतर्द्वंद में वह परेशान हो उठा!!

अचानक उसे ऐसा लगा जैसे वह गिर पड़ेगा! उसे चक्कर आया तभी उसके पास आ रहे प्रभात ने उसे दूर से देखा!! वह भाग कर उसके पास आया और जल्दी से उसको संभाल लिया नहीं तो वह फर्श पर गिरता और उसके बहुत ही चोट आती !

प्रभात ने उसे धीरे से कुर्सी पर बैठाया और एक गिलास पानी लाकर उसे पिलाया !! फिर चिंतित होकर पूछा :-तुम्हें क्या हुआ ? क्या बात है ?

"क्या तबीयत ठीक नहीं है ? शेखर थोड़ा संभल गया था!!

"मैं अब ठीक हूं !!" शेखर ने बताया !!

"मुझे नहीं लगता है कि तुम इतनी जल्दी ठीक हो गए हो ! ऐसा करो तुम घर चले जाओ ! छुट्टी ले लो ! और मैं देख रहा हूं कि जब से तुमने शालिनी को देखा है तब से तुम्हारा यह हाल हो गया है !!

"क्या तुम उसे जानते हो ? क्या बात है ?सब ठीक है ?"

यार ! कुछ बात नहीं है तुमको ऐसा लगता ही है ! उसकी शक्ल की एक लड़की थी जो कहीं खो गई ..मैंने सोचा वही होगी ...पर यह कोई दूसरी थी !!"

"ऐसा हो जाता है कभी-कभी !! मिलते जुलते चेहरे कई मिल जाते हैं! खैर जाने दो तुम इन बातों को !! दिल पर ना लो ! अब तुम ठीक हो बिल्कुल!"

"हां अब मैं बिल्कुल ठीक हूं ! बुझे मन से शेखर बोला !! फिर धीरे से उठ खड़ा हुआ और अपने काम में लग गया !!


???????????



शेखर और विनय ने जो मकान किराए पर लिया था वह मकान का एक पोर्शन था ! दूसरा पोर्शन मकान मालिक मिस्टर लालचंद के पास था !! उसमें मकान मालिक उसकी पत्नी, बेटा और बेटी रहते थे !! मकान के दो पोर्शन जरूर थे ! लेकिन पार्टीशन की वजह से बिल्कुल अलग अलग- अलग मकान हो गए थे !!

जैसा तय हुआ था विनय गांव जाकर शेखर की मां जानकी को ले आया था!! इसलिए अब उन लोगों को आराम हो गई थी ! खाना- पीना नहीं बनाना पड़ता था !!

मिस्टर और मिसेज लालचंद लगभग 50 और 45 की उम्र में थे। उनका एक बेटा एमबीए कर रहा था और उससे छोटी बेटी अभी बी.एस.सी. थर्ड ईयर में थी !! उसका नाम छाया था !!

छाया बेहद साधारण रूप की सांवले रंग थी ! कद दरमियाना था !!हल्की सी मोटी थी !! पर चेहरे में गजब की कशिश थी जो लोगों का ध्यान बरबस ही अपनी तरफ खींच लेती थी!! जानकी भी शीघ्र ही इस फैमिली में अच्छी तरीके से घुलमिल गई थी इसीलिए उसे कोई ज्यादा तकलीफ नहीं हुई ! उसका समय अच्छी तरीके से बीत रहा था ! अब वह बहुत ही प्रसन्न रहती थी ....बल्कि यह कहें कि वह गांव में इतनी ज्यादा खुश नहीं थी जितनी यहां खुश थी !!

शेखर और विनय से मिस्टर लालचंद फैमिली बहुत ही प्रसन्न रहती थी !! शेखर बहुत ही उदास रहा करता था !! उसकी उदासी को वे लोग गंभीरता समझते थे!!



न किसी से हंसना न बोलना !! बस चुपचाप अपने काम पर जाना और चुपचाप वापस चले आना ही उसकी दिनचर्या थी !! उसके स्वभाव से मिस्टर लालचंद बहुत ही खुश थे और अपनी पत्नी से कहा करते थे कि "देखो आजकल ऐसे लड़के नहीं होते है !"
उनकी पत्नी का भी यही मत था और उसकी तुलना हमेशा अपने बेटे से किया करती थी !!

इसी वजह से कई बार जब कोई अच्छी चीज बनती तो वे इन दोनों के लिए भी भेज दिया करती थी... या कोई फंक्शन ,कोई त्यौहार वगैरह होता , तो भी इन लोगों को खिला दिया करती थी!!

इधर जानकी जब कभी पहाड़ी व्यंजन बनाती थी तो वह लालचंद फैमिली को जरूर इनवाइट करती थी ...उन्हें खिलाती थी ...उसके पाककला में दक्ष हाथों के पकवान खाकर वे लोग उंगलियां चाटते रह जाते ... और शत-शत कंठों से तारीफ करते थे !!

जानकी की इस पाककला की दक्षता ने ....उसे किसी आकस्मिक मेहमान आगमन ,,उत्सव,,या छोटी मोटी ,,.... में मिसेज लालचंद के किचन का कर्ता-धर्ता बना दिया था!! जब भी कोई आयोजन होता था... तो वह सवेरे से ही उन्हें बुला ले जाती थी और उनके निर्देश पर इंतजाम करती थी ! उनके बनाए हुए कई पकवान मेहमानों की रसना को कृतार्थ करते थे !!

शेखर और विनय भी इन लोंगो के... जो भी काम होते थे ...कर दिया करते थे इस तरह से इन लोगों में सौहार्द बन गया था ...जो धीरे-धीरे बढ़ रहा था ...और छाया इस गुमसुम से और अपने आप में ही खोए रहने वाले शेखर के प्रति बड़ी हमदर्दी महसूस करती थी!!"

एक दिन बातों ही बातों में मिसेजलालचंद ने कहा कि एग्जाम आने वाले हैं और छाया को कोई कोचिंग की मदद नहीं मिल पा रही है ! तो शेखर ने कहा :-" विनय हेल्प कर सकता है!!"

मिसेज लालचंद खुश होकर बोली :--"यह तो ठीक रहा !

अब विनयअक्सर छाया के नोट्स बनाने में और उसकी पढ़ाई में, हेल्प कर दिया करता था !! विनय और शेखर दोनों ही ड्यूटी करते थे इसलिए या तो सुबह का समय मिलता था या शाम को !!

सुबह का समय ज्यादा व्यस्त था इसलिए शाम को ही थोड़ा बहुत पूछ लिया करती थी !! ऐसे ही एक दिन शाम का टाइम था ! विनय बैठा हुआ था तभी उसने देखा की छाया मुस्कुराती हुई आई!! उसके साथ एक और लड़की थी!! और उस लड़की को देखते ही विनय चौक पड़ा.... क्योंकि यह तो प्राची थी!!!!

उसे देखते ही विनय उठ खड़ा हुआ और बोला:--" प्राची तुम यहां??"

प्राची भी उसे देखकर चौंक पड़ी थी !! वह हैरानी भरे स्वर में बोली--" कितना आश्चर्य है ? "

मैंने तुम्हें यहां देखने की उम्मीद नहीं की थी !!"

विनय भी बहुत खुश था !! "मुझे भी तुम्हें यहां देखने की उम्मीद नहीं थी !!"

"और अंकल आंटी सब सही है?"

"हां और हम सब लोग यहां से थोड़ी ही दूरी पर रहते हैं!!"

"प्राची मुझे तुमसे बहुत सारी बातें करनी है !" शेखर के बारे में तुम्हें बताना है !!और बरखा क्या तुम्हारे साथ ही रहती है ?"

वह थोड़ा दुख से थोड़ा गुस्से से बोली:--"वह मेरे साथ नहीं रहती!! वह तो उसी दिन अलग चली गई थी !!जिस दिन हम लोग यहां आए थे !"

विनय बेसब्री से बोला:--" लेकिन तुम लोग अचानक चले क्यों गए थे ?"

"तुम मेरे घर पर कल छाया के साथ आना !!मैं तुम्हें सारी बातें बताऊंगी !! ठीक है!! अभी मैं घर पर बोलकर नहीं आई हूं मुझे जल्दी जाना भी है इतना कहकर प्राची वहां से चली गई!!


?????????????


शेखर मन में सोच रहा था कि इस बरखा वाली बात के बारे में विनय को बताये कि नहीं ?

लेकिन बताने में बताने में समस्या एक थीकी विनय शेखर को लेकर सेंसिटिव ज्यादा ही हो जाता था ,,,,और उसकी बातें धीरे-धीरे उपदेश भरी हो जाती थी ...जो उसे भी झेल नहीं मिलती थीं.... !! उसे गुस्सा भी आ जाता था इसलिए शेखर ने विनय को बरखा के बारे में कुछ भी नहीं बताया था ...लेकिन इस बीच में फैसला कर चुका था कि वह बरखा के बारे में सोचना बंद नहीं करेगा!!

वह उसे भूल ही नहीं सकता लेकिन उसके बारे में पता जरूर लगाएगा कि मामला है क्या ?"

वह अभी सोच रहा था कि मोबाइल की घंटी बज उठी... नंबर उसने देखा तो वह आश्चर्य से उछल पड़ा :--"यह तो बरखा का नंबर था !!

एक लंबे अरसे के बाद बरखा उसे फोन कर रही थी!! उसने फोन उठाया :-"हेलो !! उधर बरखा थी !!

बोली :-"शेखर मैं तुम्हें कुछ बताना चाहती हूं!! तुमसे कुछ बात करना चाहती हूं !! वह तुम अपने ऑफिस के बाहर जो सामने कॉफी हाउस है वहां पर मुझे कल सवेरे मिलो !!"

शेखर के लिए इतना ही काफी था कि बरखा ने उसे फोन किया था!! खुशी से काँपती आवाज में बोला :--" ठीक है !!
 
Last edited:

Guffy

Well-Known Member
2,069
2,177
159
Part 9


अपनी ड्यूटी कर के विनय लौटा तो जानकी आकर बोली ....बेटा हाथ मुंह धो कर चाय पी लो !!!..फिर ....

"हां ! फिर ?? फिर क्या ? "विनय ने पूछा!!

"कुछ नहीं ! पहले हाथ मुंह धो कर आओ !चाय पियो फिर बताती हूँ !!"

विनय गया और फ्रेश होकर जल्दी ही आ गया!! जानकी देवी उसके लिए चाय ले आई और वह चाय पीने लगा ! जानकी देवी उसके सामने खड़ी हो गई .....उन्हें देखकर लगा जैसे वह कुछ कहना चाह रही हों !

विनय बोला :-"बताइए चाची जी !! आप क्या कहना चाह रही हैं ?"


जानकी उसके पास आई और बोली :--" छाया दो बार आ चुकी है! प्राची के पास जाना है ! !"

विनय आश्चर्य के साथ जानकी का चेहरा देखने लगा और उसने हैरत के साथ पूछा:-"तुम प्राची के बारे में दिलचस्पी ले रही हो ?" तुम्हें कैसे पता ?"

"मुझे सब पता है !! शेखर के पिताजी के जाने के बाद कितनी ही मुसीबतें आईं...... कितने ही संघर्षों का सामना हमने किया ...हमने हंसते-हंसते सब झेल लिया !!

अब मेरा बेटा ही मेरी आंखों के सामने मिट रहा है !! पल पल घुट रहा है !! मैं यह कैसे सहन कर लूं?" कहते-कहते जानकी की आंखों में आंसू भर आए !

वह रुंधे गले से बोली :--"मेरा कैसा हंसता- खेलता बेटा था !! पता नहीं वह कौन सी मनहूस घड़ी थी जब वह उस लड़की से मिला !!

मैं इस बुढ़ापे में अब सुकून और आराम चाहती हूं ! मेरी भी इच्छा है ...कि घर में बहू और पोते -पोतियाँ हों !! विनय तुम्हीं कुछ करो !! समझाओ उसे ...तो मैं उसकी शादी करूं!!"

विनय खेदपूर्ण स्वर में बोला :--"चाची ! मुझे तो अब वह कुछ बताता भी नहीं ! पर मैं अब जरूर कुछ करूंगा!!"

चाय पीकर विनय ने कप मेज पर रख दिया .... और छाया को बुलाने चल दिया !! थोड़ी ही देर में दोनों के प्राची के घर पर थे यह भी महज संयोग नहीं था... कि प्राची का भी उधर ही घर था.. जिधर इन लोगों ने किराए पर लिया था।

क्योंकि यह नई बसी कॉलोनी थी ..ऐसी कॉलोनी जो अतिशीघ्र कुकुमुत्ते की तरह नई- नई उग आती हैं !! वहां न लाइट होती है और न ही पानी ! जब कोई सुविधा ही नहीं होती तो फिर किराए भी सस्ते होते हैं !!यहां सस्ते किराए पर घर आसानी से मिल जाते हैं!!

ऐसे ही मकान में प्राची के पेरेंट्स रह रहे थे!! वैसे तो वे अपने पैतृक गांव में ही रहते थे पर वहां भी इनकम कोई खास नहीं थी !! गांव से दूर खेतों में झोपड़ी वाले मकान बना रखे थे, वहीं रहते थे और अपनी फसल की रखवाली करते थे !वहीं पर शेखर की बरखा से दूसरी बार मुलाकात हुई थी ! विनय छाया के साथ अंदर गया !!

घर न बहुत ज्यादा अच्छा था और न ही खराब !!

सामान्य रहन-सहन था ! प्राची के पैरेंट्स ने विनय और छाया का दिल खोलकर स्वागत किया ! प्राची ने विनय , छाया को बिठाया और स्वयं उसके लिए नाश्ते का प्रबंध करने चली गई !

थोड़ी ही देर बाद टेबल पर नाश्ता लगा हुआ था और सभी लोग नाश्ता कर रहे थे !


प्राची की मां बोली:-- जब हम लोग वहां गाँव में थे तो हमने शेखर को लेकर कुछ सोचा था.....लेकिन सब अरमान अचानक बिखर गए!!

जब हम वहाँ से दिल्ली आए थे... तो हमने सोचा कि तुम्हे इनफॉर्म कर दूं ....पर बरखा ने ऐसा नहीं करने दिया!!!!!

प्राची की मां ने प्राची से कहा:- " जाओ खाने पीने का प्रबंध करो.... मैं उन्हें सारी बात बताती हूं!!!!

प्राची किचन में चली गई प्राची!!! की मां ने कहानी शुरू की!!!!.

बेटा कुछ बातें ऐसी होती है... कि जिनसे हम जुड़े होते हैं... तो उनके सुख-दुख के साथ ही साथ उनके दोषों की सजा भी हमें भुगतनी होती है!!!! चाहे वह काम हमने किया हो.... चाहे ना किया हो... प्राची के पापा और बरखा के पापा सगे भाई हैं!!!!

हमारा पैतृक गांव तो हिमाचल प्रदेश में ही था !!
बरखा के पापा हरिशचंद्र की पढ़ लिख कर नौकरी लग गई थी!!!! अच्छी पोस्ट थी.... अतः वे दिल्ली में ही बस गए थे!!! उन्होंने वहां मकान भी खूब आलीशान बनवाया था!!!!

हम लोग यहीं रहते रहे !!!


फिर कुछ समय का ऐसा फेर हुआ कि एक दुर्घटना में हरिश्चंद्र कई दिनों तक बीमार रहने के बाद चल बसे!!! बरखा शुरू से ही अमीरी में पलीं थीं जिस कारण उसकी आदतें वैसी ही हो गई थीं!!!

पर परिस्थिति बदल गई... इधर हम लोग गांव में रहते हैं!!! एक बेटा है जो यहीं दिल्ली में पढ़ रहा है... जो हमने शेखर को देखा... तो निश्चय किया कि हम प्राची की शादी शेखर से कर देंगे!!!!

जब यह बात हमने रात में प्राची के पापा से कही तो बरखा भड़क उठी.. कि तुम प्राची की शादी शेखर से नहीं कर सकती!!!! बरखा उस समय छुट्टियां बिताने घूमने के लिए हमारे यहां आई थी... हमने फिर ज्यादा बहस नहीं की!!!!



उसी रात वह गायब हो गई... तो हम घबरा गए उसको ढूंढने के लिए हम भी यहां आए!!!! हमने भी यहीं रहने का निश्चय किया... क्योंकि यहां आने प्रोग्राम तो हम बहुत दिनों का बना लिया था!!!

हमें बरखा के बारे में पता चल गया वह सकुशल अपने घर पर है!!! उसके बाद से फिर हमने उससे कोई मतलब नहीं रखा!!!! क्योंकि उसके हाव-भाव मेरी समझ में नहीं आ रहे हैं.... मुझे तो लगता है कि वह मानसिक रोगी है!!!!

शुरू से अमीरी लालन-पालन फिर गरीबी उसके बाद पिता की मौत.... इन सब घटनाओं ने उसके मन पर गलत असर साल है !!उसके अंदर असुरक्षा की भावना है... तो वह कुछ अजीबोगरीब हरकतें करती रहती है!!!वह अपनी उलझन में है!!!

और वैसे भी जब तक उसके पापा रहे.... तब तक मतलब रहा…. उसकी मम्मी ज्यादा मतलब नहीं रखतीं!! तो तुम्हें इसलिए बुलवाया था... कि अब हमें अपनी बेटी की चिंता है..... तुम शेखर की मां से कहना कि अगर उन्हें पसंद हो..….. तो मैं प्राची की शेखर से शादी की बात करूं!!!

यह सुनकर विनय मन ही मन बहुत खुश हो उठा उसने कहा ठीक है मैं जा कर बताऊंगा!!!!!

???????????????


शेखर काफी हाउस पहुंचा...तो उसने देखा कि बरखा वहाँ पहले से ही मौजूद थी.....
 

Guffy

Well-Known Member
2,069
2,177
159
Part 10



शेखर ने घड़ी में समय देखा तो अभी 8:00 बजे थे ऑफिस खुलने मैं अभी एक घंटा था !! और शेखर का तो यह हाल था ...कि एक घंटा क्या वह तो ऐसे सौ घंटे उस पर न्यौछावर कर सकता था!!

एक्चुअली.... सच बात तो यह है कि वह तो उसके लिए ऑफिस भी छोड़ सकता था .....तो थोड़े से समय की क्या बात है ??"

शेखर को देखते ही बरखा ने मुस्कुरा कर विश किया बस शेखर का गुस्सा फेन की तरह बैठता चला गया ।

इतने दिन की उसकी बेरुखी .... न पहचानने का अभिनय करना... सब कुछ वह पल भर में ही भूल गया !! धन्य है यह इश्क का रोग और धन्य है इसके रोगी ....जो अच्छे भले इंसान को पागल बना देता है ....और इंसान क्या से क्या हो जाता है ?

इसी मनःस्थिति से इस समय शेखर गुजर रहा था !! पिछला अपमान, धोखा और सारी बातें वह भूल गया और बरखा को निहारता ही रह गया ।

बरखा उसके पास आई और उसका हाथ पकड़ कर उससे सटते हुए बोली :--"यहां बैठना थोड़ा अजीब सा लगता है !! चलो ! किसी पार्क में चल कर बैठेंगे ! एक्चुअली मुझे तुमसे जरुरी बातें करनी थी!! इसीलिए मैंने तुम्हें बुलाया था !"

शेखर ने उसकी तरफ देखा जैसे मन ही मन भांपने की कोशिश कर रहा था कि उसके मन में क्या चल रहा है ??

पर वह कुछ भी समझने में नाकाम रहा ! ताजे खिले गुलाब के फूल की तरह प्रफुल्लित ,बरखा का चेहरा बहुत ही खूबसूरत और प्यारा लग रहा था !! बड़ी-बड़ी भंवरे की तरह काली आंखों में गजब का सम्मोहन था !! आमंत्रण देते गुलाब की पंखुड़ी की तरह उसके होंठ शेखर के मन में एक नशा सा भर रहे थे !!

"क्या सोच रहे हो शेखर ??" आओ चलो!!"

" हां ! शेखर चौंक कर बोला .... पल भर के लिए वह किसी सपने में खो गया था बरखा के पुकारने से जैसे वह नींद से जागा... और अपने सपने से बाहर आया!!

" चलो !!"

दोनों पार्क की तरफ चल दिए !

जीवन की गहमागहमी शुरू हो गई थी ! सड़क पर सवेरे- सवेरे की जल्दी में वाहनों की दौड़ शुरू थी ! हर कोई जल्दी में था ...और जल्दी के कारण ऐसा लग रहा था कि ....जैसे हर कोई हर किसी से रेस लगा रहा है.!!

दुकानदार दुकान खोलने की जल्दी में थे ...दुकानें खोल रहे थे विद्यार्थी अपने स्कूल के लिए जल्दी में थे..... ऑफिस जाने वाले लोग अपनी जल्दी में थे.... .इसके लिए हर कोई भाग दौड़ में था.... हर कोई जल्दी में था !!

पार्क में इस समय इक्का-दुक्का लोग ही थे मॉर्निंग वॉक..... एक्सरसाइज करने वाले बच्चे अपने स्कूल ,कालेजों के लिए अपने अपने समय के अनुसार निकल चुके थे !!

एक दो बुजुर्ग अपनी एक्सरसाइज वगैरह कर रहे थे!!

बरखा ने शेखर से कहा :-बैठो!! कहते -कहते वह स्वयं भी एक बेंच पर बैठ गई !!! शेखर उसके बोलने के लहजे पर बहुत हैरान था!!! ऐसा लग रहा था जैसे कुछ हुआ ही नहीं!!!

शेखर भी बैठ गया .... फिर बरखा की तरफ देखते हुए उसने कहा:- " क्यों बुलाया था तुमने मुझे बरखा ,और तो और तुमने मुझे तो पहचानने से भी इंकार कर दिया था "!!!

बरखा ने मुस्कुराते हुए कहा:- " रुको एक मिनट! मेरी बात भी सुनोगे... या कहते ही जाओगे"!!!

शेखर बोला:- " मैं सब बातें सुन लूंगा पर पहले यह बताओ कि तुमने मुझे धोखा क्यों दिया ?? "

बरखा गंभीर होकर बोली:- " पहले तो तुम यही बताओ कि मैंने तुमसे कब कहा था कि मैं तुमसे प्यार करती हूं??

शेखर सब बीती बातें याद करने लगा पर उसे कोई भी ऐसी बात याद नहीं आई.... जिसमें बरखा ने कहा था... कि वह उससे प्यार करती थी!!!

बरखा के कहा :- " मैंने जब तुमसे प्यार का इजहार किया ही नहीं तो मैंने धोखा कब दिया??? तुमने मेरी जान बचाई थी... यह मुझ पर बहुत बड़ा एहसान था!!!! एक्चुअली तुमने मेरी ही नहीं बल्कि मेरी मां की जान भी बचाई !!! क्योंकि मेरी मां हार्ट पेशेंट है... मेरे मरते ही वह तुरंत मर जाती!!!

"मेरी कहानी बहुत ही दुख भरी है... हम लोग यानी मेरी मम्मी- पापा और मैं सभी लोग बहुत ही आराम से रहते थे!!! तभी पापा का एक्सीडेंट हो गया...उनकी जान बचाने के लिए अच्छे से अच्छे हॉस्पिटल में इलाज कराया!!! बहुत रुपया लगा... पर वह नहीं बचे!!!" ,

"बस हमारे बुरे दिन आ गए... हमारे गांव की संपत्ति भी चाचा ने हड़प ली... और मम्मी उनका कुछ नहीं कर सकी!! मेरी मम्मी भी उस दिन आई थी ...उस दिन बेईमानी पर झगड़ा हुआ... और हम दोनों तुरंत ही वहां से चले गए!!!",

" रास्ते में मम्मी की हालत खराब हो गई... फिर उन सभी को आना पड़ा !!! शेखर धोखा तो मेरे साथ किस्मत ने किया है... और फिर चाचा ने ...."!! कहते ही बरखा रोने लगी!!!

उसकी बातें शेखर चुपचाप सुन रहा था!!! उसकी हर बात पर उसको शॉक लग रहा था..... वह तो बरखा को जाने क्या-क्या कह रहा था.... और बरखा बेचारी इतने गम झेल रही थी.!




"प्राची और उसकी मम्मी मुझे पागल बताते घूम रही है!!!! बताओ क्या मैं पागल लगती हूं????

शेखर ये बात सुनकर हैरान भी था... और दुखी भी!!!!

प्राची और उसके पेरेंट्स भी यही रह रहे हैं...जहां तुम रहते हो!!!

शेखर चौका..." तुम्हें कैसे पता चला कि मैं कहां रह रहा हूं???"

आंसू पोछते-पोछते बरखा ने बताया :- " मैंने तुम्हारे ऑफिस से पता किया तो पता चला कि तुम उसी कॉलोनी में रह रहे हो ...जहां प्राची रह रही है!!!!

प्राची का तो मुझे पहले से ही पता था!! वह जहां पर रहती है!!! "

शेखर ने सोचते हुए कहा :- पर तुमने उस दिन मुझे पहचाना क्यों नहीं??? "

" क्योंकि मैं मजबूर थी... तुम जानते हो पापा के गुजरने के बाद साहिल ने हमारे घर का जिम्मा संभाल लिया ! मम्मी का इलाज कराया और पापा के इलाज में भी बहुत रुपया लगाया !! पापा के साथ लगातार रहा था उसने उनकी सेवा भी बहुत की !!

"अब यह साहिल कौन है ??" शेखर ने पूछा ! पूछते- पूछते उसे याद आया कि प्रभात ने उसे जब.... बरखा को जाते हुए दिखाया था ....तो उसने कार के पास जिस युवक को देखा था शायद वही साहिल था !!

"मेरे पापा के दोस्त का बेटा.... जो एक कंपनी में मैनेजर है! शेखर के कानों में प्रभात की बातें गूँजने लगी कि ""मैनेजर बाबू से इसकी सांठगांठ है" !!

" पर मेरी कंपनी के मैनेजर तो अभिलाष बाबू है !! शेखर बोला !

" तो ? तुम्हारी कंपनी के मैनेजर का नाम अभिलाष बाबू है ...यह तो मुझे भी पता है ....तो मैं इसमें क्या करूं ??..? तुम्हारी कंपनी के मैनेजर से मुझे क्या लेना देना ??" मैं तो साहिल की बात कर रही हूं !"

"पर मेरी कंपनी के मैनेजर से तुम्हारी सांठगांठ है !! उससे तुम्हारा अफेयर चल रहा है !! यह प्रभात बता रहा था !!

"यह वह गलत बोल रहा था शेखर !! है भगवान!! कैसी कैसी बातें सुनने को मिल रही है??

" मैं जानती थी कि तुम मुझसे बहुत प्यार करते हो ! उस दिन ऑफिस में तुम यह सबके सामने जाहिर कर देते !! इतना समय नहीं था कि मैं तुम्हें अपनी सिचुएशन बताती ! तो मुझे तुरंत जो सही लगा मैंने वही किया ! आई एम वेरी सॉरी !!!! पर मैं क्या करती ?"

"तो अगर सबको पता चल जाता कि मैं तुमसे प्यार करता हूं तो कौन सा पहाड़ फट पड़ता?" अब शेखर को फिर से क्रोध आने लगा था !

"पहले पूरी बात तो सुन लो !" बरखा की आंखें फिर बरसने लगी थी !
पापा ने मेरी शादी साहिल से तय की थी !! पापा के बाद जब साहिल ने इतनी मदद की ...रुपया लगाया तब मम्मी ने भी यही तय किया कि मैं जल्द से जल्द शादी कर लूं तो मकान नहीं बेचना पड़ेगा !

अब तुम ही सोचो !! जब पूरे ऑफिस में बात पता चल जाती कि तुम मुझसे प्यार करते हो तो साहिल तो यह बात सुनते ही रिश्ता तोड़ देगा और मेरी शादी टूटते ही मम्मी की सांसों की डोर टूटते देर नहीं लगेगी !! हालांकि मैं अपने पैरों पर खड़ी हूं उस दिन मैनेजर के पास अपनी कंपनी के काम से आई थी !! अब सुनती हूं कि मेरा उससे भी चक्कर है!!"

मेरे साथ यही सब होता है !! यह मेरी कहानी है शेखर ! अकेली लड़की का तो जीना ही मुश्किल है !! उस पर यह हालात हैं !!अगर मैं उससे शादी नहीं करूंगी तो मुझे उसका सारा रुपया लौटाना पड़ेगा !!!

बताओ !! मैं कहां से लाऊंगी इतने रुपए ??

शेखर तुम्हारी चाहत में खोट नहीं पर मैं तुम्हारा हाथ थाम लूं तो इतना सारा रुपया तुरंत कहां से ...और कैसे चुकाऊंगी ??

दूसरी बात मम्मी बात मानने के लिए तैयार नहीं होंगी !! और मैं नहीं चाहती हूं कि मैं उनकी मौत का कारण बनूँ!!!

मान लो ,कल को यही पोजीशन तुम्हारे सामने आ जाए कि.... एक तरफ तुम्हारा सुखचैन हो और दूसरी तुम्हारी मां ....तो क्या तुम अपनी मां की मौत का कारण बनोगे??

" नहीं ! हरगिज़ नहीं ! शेखर ने कड़े शब्दों में कहा :--"तो यही मेरी मजबूरी है !अब मैंने तुम्हें पूरी सब बात बता दी है.... तुम ही फैसला करो !!!

हालांकि मैं जानती हूं कि मुझे तुम से अच्छा जीवन साथी कहीं नहीं मिलेगा !! पर इन विकट परिस्थितियों से मैं पार कैसे पाऊंगी तुम ही बताओ ??

लगभग दस लाख का कर्जा हम लोगों पर है ! अगर तुम यह निपटाने में समर्थ हो तो मैं उस से रिश्ता तोड़ दूंगी मैं तुमसे शादी कर लूंगी !! मुझे खूब सोच कर बताना !!"

सभी बातें बताने के लिए मैंने बुलाया था!! हम अच्छे दोस्त बने रह सकते हैं इस बात के लिए हामी भर दो इसी में हम सबकी भलाई है!!

तुम्हारे लिए दोनों रास्ते खुले हैं!!

जो चाहे चुन लो!

पर अब कभी मुझे दोष मत देना!!

कल मुझे सोच समझ कर यहीं आकर बताना!!

या तो तुम मुझसे शादी करो,,,या फिर हमेशा के लिए दोस्त बन जाओ, और मुझे भी चैन से रहने दो!!

ठीक है कल यहीं इसी समय बात करेंगे कहते हुए वह उठ खड़ी हुई !!
 

kamdev99008

FoX - Federation of Xossipians
10,226
38,864
259
लगभग दस लाख का कर्जा हम लोगों पर है ! अगर तुम यह निपटाने में समर्थ हो तो मैं उस से रिश्ता तोड़ दूंगी मैं तुमसे शादी कर लूंगी !! मुझे खूब सोच कर बताना !!"
Ye bat sabhi bhi ho sakti hai... Lekin, iske shabd aur kahne ka tareeka.... Sab barkha ko abla nahi dhokebaj aur lalchi sabit karta hai...
 
  • Like
Reactions: Aakash.
Top