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भाग 4
अब शेखर के जीवन में आमूल चूल बदलाव आ चुका था ! उसकी तलाश खत्म हो चुकी थी !! उसकी प्राची और बरखा से घनिष्ठता काफी बढ़ गई थी !
इतने दिनों में उसने प्राची के माता-पिता से भी अच्छा परिचय प्राप्त कर लिया था! उन्हें आने में थोड़ा समय लग गया था क्योंकि जब प्राची का भाई बिल्कुल ही ठीक हो गया था तभी वे वापस आए थे !!
जब वे दिल्ली से लौटकर आए और उन्हें पूरी घटना पता चली तो उन्होंने शेखर को अपने यहां बुलवाया और उसका काफी आभार व्यक्त किया था .....अपने घर उसकी दावत भी की थी और बड़े आग्रह से कहा था कि " बेटा आते-जाते रहा करना ". इस प्रकार से शेखर का उनके यहां आना-जाना काफी बढ़ गया था !
धीरे-धीरे काफी समय बीत गया शेखर को लग रहा था कि उसे उसका प्यार मिल गया था !! वास्तव में प्यार करने वाले आधे पागल होते हैं !! उनके मन में जो फीलिंग्स होती हैं तो उन्हें लगता है कि सारी दुनिया वही सोच रही है!!
हालांकि यह उसका कहना था कि मेरा प्यार मुझे मिल गया है ... पर विनय की राय उसकी राय से एकदम उलट थी !!!
उसका कहना था कि उस लड़की ने तो यह तक नहीं बताया कि उसके मन में क्या है ?......और तू कहता है ....मेरा प्यार मिल गया !! यह तो तू ख्वाब पाले हुए है !!
लेकिन वह प्यार उसकी निगाह में ही था अभी तक बरखा ने ऐसा कोई भी संकेत नहीं दिया था जिससे यह मालूम पड़ता कि उसके मन में शेखर के प्रति फीलिंग्स क्या हैं ?
कुछ भी हो मगर शेखर बहुत खुश था ! वो खुश मिजाज हरफनमौला अपने ही ढंग का इंसान था!!
उसका सोचना था कि अपने अंदर दृढ़ विश्वास होना चाहिए तो फिर सामने वाला तो सामने वाला रहा .....जब हौसला है तो आदमी आसमान तक को झुका सकता है !!!
उस के जुनून को देखकर उसका दोस्त विनय उसे अक्सर समझाया करता कि अपने मन में ही हवाई महल बनाना सही नहीं है ! बरखा की फीलिंग्स भी तो जानो !!
कहीं ऐसा ना हो .... कि तुम यह खूबसूरत भ्रम अपने मन में पाले रहो रहो .....बाद में पता चले कि वह टूट -टूट कर बिखर गया ! खूबसूरत हसीनाएं अक्सर धोखेबाज होती हैं .....याद रखो कहीं ऐसा ना हो कि बाद में यह भी खूबसूरत छलावा निकले.... धोखा मिले तुमको. !!!
आज सवेरे -सवेरे शेखर उठा नाश्ता करके फटाफट तैयार हो रहा था..... बाहर निकलने की तैयारी में ही था तब तक विनय भी आ गया !!
उसे देख कर विनय बोला :--"कि ऐसे सज-संवर कर कहां चले ? क्या बुलावा आया है ?"
शेखर मुस्कुराते हुए बोला :--"है तो कुछ ऐसी ही बात !"विनय उसे अनुभवी, तजुर्बेकार बुजुर्ग की तरह समझाते हुए बोला:--" बात तो जो भी हो.......जैसी भी हो ......मगर अपनी बात भी सामने रखो !!!
लड़की के मन का भी पता चलना चाहिए !!मुझे पता है कि तू इन दिनों बरखा को खूब हर जगह घुमा रहा है और अपने पैसे दोनों हाथों से लुटा रहा है ...इतने दिनों तक जो तूने रुपए एक-एक करके जोड़े हैं...... उन्हें पानी की तरह बहा रहा है !!
आज उससे साफ साफ बात कर ले और तू पूछ ही ले नहीं तो पता चले .....पीछे - पीछे लंगूर बनकर पूरी जिंदगी भर घूमता रहा !! बाद में क्या हाथ लगा ?? खाली हाथ झाड़ कर चला आया !!
विनय की यही बात शेखर को अच्छी नहीं लगती है !! वह कुछ नहीं कह रहा है तो उसका मतलब ये थोड़ी है कि जो चाहे बोलो !
वह थोड़ा रूखे स्वर में बोला :-"बरखा ऐसी लड़की नहीं है ! न तो उसने मुझसे कहीं घुमाने के लिए कहा है और न ही उसने मुझसे कभी रुपए मांगे .....न ही उसने मुझसे किसी चीज की मांग की है !
मैं ही उसे जबरदस्ती ...…. कहीं जाने के लिए तैयार करता हूं .....तो बड़ी मुश्किल से वह जाने के लिए तैयार होती है !!
विनय समझ गया कि इस समय वह बरखा के खिलाफ एक शब्द भी नहीं सुनेगा ....इसलिए वह थोड़ा नरम सुर में बोला :"मैं यही कह रहा था कि कोई भी ख्वाब पालने से...... या उसकी दुनिया में कदम रखने से पहले उसकी फीलिंग्स जान लेना जरूरी है !!!"
"मुझे जानना जरूरी नहीं है ! मैं इतना ही जनता हूँ कि ....आई.लव हर ,,एंड मरते दम तक करता रहूंगा !!"
"ठीक है ! शाम को मिलते हैं !! ऐसा कहकर वह आगे बढ़ गया !!
विनय थोड़ी देर तक तो उसे जाते हुए देखता रहा !!! उसे शेखर की चिंता लगी हुई थी !! वह फील कर रहा था कि अब शेखर बदलने लगा है !! जब उसे समझाता है तो वह रूखे स्वर में बात करता है !!
फिर वह भी अपने रास्ते पर चल पड़ा आज उसके पास फोन आया था!!
प्राची ने उसे बुलाया था और कहा था आज घूमने चलते हैं और तुम्हें तो इन चीजों इन जगहों का खूब घूमने का तजुर्बा है ....तो थोड़ी आसानी रहेगी !"!
यह सुनकर शेखर बहुत खुश हो गया था और वह चल पड़ा !! बरखा के यहां पहुंचा तो नाश्ते की खाने- पीने की चीजें टेबल पर सजी हुई थी !!
और सब उसी का इंतजार कर रहे थे!










शाम को सूरज ने अस्ताचल की ओर अपना मुख मोड़ दिया था !!एक चट्टान पर बरखा और शेखर बैठे हुए थे पेड़ों के साए लंबे हो चले थे उन पेड़ों की लंबी होती परछाइयों की तरफ बरखा चुपचाप देख रही थी .....तभी दूर कहीं कोई चिड़िया टहूकी.... इससे मौन भंग हो गया .....शेखर ने बरखा के चेहरे की तरफ देखा !!
आज बरखा शेखर के साथ घूमने आई थी तो प्राची जानबूझकर नहीं आई! इससे शेखर को भी मौका मिल गया था कि वह बरखा से खुलकर बात कर ले .....अभी तक तो बरखा ने बातचीत करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी !!
जब -जब उसने बात करने का प्रयत्न किया तो वह व्यस्त होने का बहाना करने लगी ..अब इस समय थोड़ा मौका जान कर शेखर ने पूछा --
"क्या सोच रही हो बरखा ?"
"कुछ नहीं ! सोच रही हूं कि क्या जो इंसान सोचता है उसे मिल जाता है ? या ऐसे ही सोचते- सोचते एक दिन निराश हो जाता है !!
बातचीत का सूत्र शेखर के हाथों में आ गया था!! उसने बड़े ही प्यार से पूछा --
"बरसा तुम्हारे मन में क्या है ? तुम क्या चाहती हो?"
"क्या चाहती हो क्या मतलब ?"
"मतलब है तुम्हारा क्या इरादा है ? .....शादी करो तो जीवन साथी कैसा हो?"
" शादी ??" शादी करूंगी तो एक-दो साल में करुंगी!! जीवन साथी ऐसा होना चाहिए कि उसके पास गाड़ी हो... बंगला हो.. ढेर सारा पैसा हो ..और सुंदर भी हो ...!!!
फिर शेखर की तरफ देखकर हंसते हुए बोली :--'तुम्हारी तरह सुंदर!! तुम बिलकुल मेरे जीवनसाथी की इमेजिन से मैच करते हो!!
यह सुनकर शेखर को ऐसा लगा जैसे उसका दिल उछल कर हलक से बाहर आ जाएगा !!"
" में तुम्हें अच्छा लगता हूं ?"
"बहुत अच्छे लगते हो ? प्रकाश !! अगर तुम पैसे वाले भी होते हैं तो मैं निश्चित रूप से तुम्हीं से शादी करती !!!
फिर उसकी सितारों जैसी आंखें अंतरिक्ष में ठहर कर जैसे शून्य में कुछ खोजने लगीं!! वास्तव में उसका मन अपने सपनों का पीछा करते -करते कल्पना जगत में ही भटक रहा था !!"
"सोचती हूं कि मेरा जीवन साथी ऐसा हो ही ......पैसे वाला भी खूब...... ताकि वह मुझे जीवन की सारी सुख -सुविधाएं दे सके!!
वह बोलती जा रही थी :-- विदेशों में घूमने का बड़ा शौक है मैं !!अपने सपनों को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हूं!!!
ऐसा कहते -कहते उसकी आंखें चमकने लगी !! शेखर ने उसकी आंखों की तरफ देखा और उसके सपनों की चमक को झेल नहीं सका !! वह उसकी नजरों की ताव नहीं ला सका !!
उसकी अभिलाषा और इच्छा सुनकर शेखर .....जैसे एक- एक शब्द पर उसका दिल टूट रहा था ....और एक- एक शब्द उसके मन पर हथौड़े की तरह बरस रहा था !!
बरखा की अभिलाषाएं बहुत ऊंची थी और उसमें शेखर कहीं भी नहीं था !!!! हकीकत यही थी!!
" वह बोली :-"मैं अपने सपनों को पूरा करने के लिए कुछ भी कर सकती हूं .......कुछ भी !!!
"चलो ,अच्छा!! अब रात हो रही है !! कहते हुए शेखर उठ खड़ा हुआ आ बरखा भी उठ खड़ी हुई !! दोनों अपनी -अपनी सोच में गुम थे !! उदास होकर घर लौट आए !



दूसरे दिन शेखर बरखा के यहां गया उसे कई बातें कहनी थी और उसे कुछ समझाना भी था!! उसने सोचा था कि वह अपने तरीके से बरखा को समझाएगा ! जब वहां पहुंचा तो यह देखकर सन्नाटे में रह गया कि दरवाजे पर तो ताला पड़ा हुआ है!!!
.. और वहां किसी का भी पता नहीं!!! उसने चारों तरफ ढूंढ कर बरखा को पुकारा लेकिन कहीं कोई नहीं था
वहां से बहुत दूर पर एक झोंपड़ी थी !!वहां पर पहुंच कर उसने उसने एक महिला से पूछा :-ये लोग कहां गए ?"
वह बोली:--' वे तो यहां से चले गए हैं !!। मुझे पता नहीं कहां गए हैं !"
और शेखर के मन में विनय की बातें गूंजने लगी ....और उसके कहे हुए शब्द उसके दिमाग पर हथौड़े की तरह बजने लगे---
"'खूबसूरत छलावा !!
"धोखेबाज !!"
"तो क्या यह बात सही थी ?"
तो क्या वह मुझे धोखा देकर निकल गई ...... क्या सचमुच। वह धोखेबाज थी ??"
"विनय ने तो उसे आगाह कर दिया था !!अब उसके दिमाग पर शब्द बराबर ठोकर मार रहे थे!! खूबसूरत धोखेबाज!! धोखेबाज खूबसूरत
अब शेखर के जीवन में आमूल चूल बदलाव आ चुका था ! उसकी तलाश खत्म हो चुकी थी !! उसकी प्राची और बरखा से घनिष्ठता काफी बढ़ गई थी !
इतने दिनों में उसने प्राची के माता-पिता से भी अच्छा परिचय प्राप्त कर लिया था! उन्हें आने में थोड़ा समय लग गया था क्योंकि जब प्राची का भाई बिल्कुल ही ठीक हो गया था तभी वे वापस आए थे !!
जब वे दिल्ली से लौटकर आए और उन्हें पूरी घटना पता चली तो उन्होंने शेखर को अपने यहां बुलवाया और उसका काफी आभार व्यक्त किया था .....अपने घर उसकी दावत भी की थी और बड़े आग्रह से कहा था कि " बेटा आते-जाते रहा करना ". इस प्रकार से शेखर का उनके यहां आना-जाना काफी बढ़ गया था !
धीरे-धीरे काफी समय बीत गया शेखर को लग रहा था कि उसे उसका प्यार मिल गया था !! वास्तव में प्यार करने वाले आधे पागल होते हैं !! उनके मन में जो फीलिंग्स होती हैं तो उन्हें लगता है कि सारी दुनिया वही सोच रही है!!
हालांकि यह उसका कहना था कि मेरा प्यार मुझे मिल गया है ... पर विनय की राय उसकी राय से एकदम उलट थी !!!
उसका कहना था कि उस लड़की ने तो यह तक नहीं बताया कि उसके मन में क्या है ?......और तू कहता है ....मेरा प्यार मिल गया !! यह तो तू ख्वाब पाले हुए है !!
लेकिन वह प्यार उसकी निगाह में ही था अभी तक बरखा ने ऐसा कोई भी संकेत नहीं दिया था जिससे यह मालूम पड़ता कि उसके मन में शेखर के प्रति फीलिंग्स क्या हैं ?
कुछ भी हो मगर शेखर बहुत खुश था ! वो खुश मिजाज हरफनमौला अपने ही ढंग का इंसान था!!
उसका सोचना था कि अपने अंदर दृढ़ विश्वास होना चाहिए तो फिर सामने वाला तो सामने वाला रहा .....जब हौसला है तो आदमी आसमान तक को झुका सकता है !!!
उस के जुनून को देखकर उसका दोस्त विनय उसे अक्सर समझाया करता कि अपने मन में ही हवाई महल बनाना सही नहीं है ! बरखा की फीलिंग्स भी तो जानो !!
कहीं ऐसा ना हो .... कि तुम यह खूबसूरत भ्रम अपने मन में पाले रहो रहो .....बाद में पता चले कि वह टूट -टूट कर बिखर गया ! खूबसूरत हसीनाएं अक्सर धोखेबाज होती हैं .....याद रखो कहीं ऐसा ना हो कि बाद में यह भी खूबसूरत छलावा निकले.... धोखा मिले तुमको. !!!
आज सवेरे -सवेरे शेखर उठा नाश्ता करके फटाफट तैयार हो रहा था..... बाहर निकलने की तैयारी में ही था तब तक विनय भी आ गया !!
उसे देख कर विनय बोला :--"कि ऐसे सज-संवर कर कहां चले ? क्या बुलावा आया है ?"
शेखर मुस्कुराते हुए बोला :--"है तो कुछ ऐसी ही बात !"विनय उसे अनुभवी, तजुर्बेकार बुजुर्ग की तरह समझाते हुए बोला:--" बात तो जो भी हो.......जैसी भी हो ......मगर अपनी बात भी सामने रखो !!!
लड़की के मन का भी पता चलना चाहिए !!मुझे पता है कि तू इन दिनों बरखा को खूब हर जगह घुमा रहा है और अपने पैसे दोनों हाथों से लुटा रहा है ...इतने दिनों तक जो तूने रुपए एक-एक करके जोड़े हैं...... उन्हें पानी की तरह बहा रहा है !!
आज उससे साफ साफ बात कर ले और तू पूछ ही ले नहीं तो पता चले .....पीछे - पीछे लंगूर बनकर पूरी जिंदगी भर घूमता रहा !! बाद में क्या हाथ लगा ?? खाली हाथ झाड़ कर चला आया !!
विनय की यही बात शेखर को अच्छी नहीं लगती है !! वह कुछ नहीं कह रहा है तो उसका मतलब ये थोड़ी है कि जो चाहे बोलो !
वह थोड़ा रूखे स्वर में बोला :-"बरखा ऐसी लड़की नहीं है ! न तो उसने मुझसे कहीं घुमाने के लिए कहा है और न ही उसने मुझसे कभी रुपए मांगे .....न ही उसने मुझसे किसी चीज की मांग की है !
मैं ही उसे जबरदस्ती ...…. कहीं जाने के लिए तैयार करता हूं .....तो बड़ी मुश्किल से वह जाने के लिए तैयार होती है !!
विनय समझ गया कि इस समय वह बरखा के खिलाफ एक शब्द भी नहीं सुनेगा ....इसलिए वह थोड़ा नरम सुर में बोला :"मैं यही कह रहा था कि कोई भी ख्वाब पालने से...... या उसकी दुनिया में कदम रखने से पहले उसकी फीलिंग्स जान लेना जरूरी है !!!"
"मुझे जानना जरूरी नहीं है ! मैं इतना ही जनता हूँ कि ....आई.लव हर ,,एंड मरते दम तक करता रहूंगा !!"
"ठीक है ! शाम को मिलते हैं !! ऐसा कहकर वह आगे बढ़ गया !!
विनय थोड़ी देर तक तो उसे जाते हुए देखता रहा !!! उसे शेखर की चिंता लगी हुई थी !! वह फील कर रहा था कि अब शेखर बदलने लगा है !! जब उसे समझाता है तो वह रूखे स्वर में बात करता है !!
फिर वह भी अपने रास्ते पर चल पड़ा आज उसके पास फोन आया था!!
प्राची ने उसे बुलाया था और कहा था आज घूमने चलते हैं और तुम्हें तो इन चीजों इन जगहों का खूब घूमने का तजुर्बा है ....तो थोड़ी आसानी रहेगी !"!
यह सुनकर शेखर बहुत खुश हो गया था और वह चल पड़ा !! बरखा के यहां पहुंचा तो नाश्ते की खाने- पीने की चीजें टेबल पर सजी हुई थी !!
और सब उसी का इंतजार कर रहे थे!
शाम को सूरज ने अस्ताचल की ओर अपना मुख मोड़ दिया था !!एक चट्टान पर बरखा और शेखर बैठे हुए थे पेड़ों के साए लंबे हो चले थे उन पेड़ों की लंबी होती परछाइयों की तरफ बरखा चुपचाप देख रही थी .....तभी दूर कहीं कोई चिड़िया टहूकी.... इससे मौन भंग हो गया .....शेखर ने बरखा के चेहरे की तरफ देखा !!
आज बरखा शेखर के साथ घूमने आई थी तो प्राची जानबूझकर नहीं आई! इससे शेखर को भी मौका मिल गया था कि वह बरखा से खुलकर बात कर ले .....अभी तक तो बरखा ने बातचीत करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी !!
जब -जब उसने बात करने का प्रयत्न किया तो वह व्यस्त होने का बहाना करने लगी ..अब इस समय थोड़ा मौका जान कर शेखर ने पूछा --
"क्या सोच रही हो बरखा ?"
"कुछ नहीं ! सोच रही हूं कि क्या जो इंसान सोचता है उसे मिल जाता है ? या ऐसे ही सोचते- सोचते एक दिन निराश हो जाता है !!
बातचीत का सूत्र शेखर के हाथों में आ गया था!! उसने बड़े ही प्यार से पूछा --
"बरसा तुम्हारे मन में क्या है ? तुम क्या चाहती हो?"
"क्या चाहती हो क्या मतलब ?"
"मतलब है तुम्हारा क्या इरादा है ? .....शादी करो तो जीवन साथी कैसा हो?"
" शादी ??" शादी करूंगी तो एक-दो साल में करुंगी!! जीवन साथी ऐसा होना चाहिए कि उसके पास गाड़ी हो... बंगला हो.. ढेर सारा पैसा हो ..और सुंदर भी हो ...!!!
फिर शेखर की तरफ देखकर हंसते हुए बोली :--'तुम्हारी तरह सुंदर!! तुम बिलकुल मेरे जीवनसाथी की इमेजिन से मैच करते हो!!
यह सुनकर शेखर को ऐसा लगा जैसे उसका दिल उछल कर हलक से बाहर आ जाएगा !!"
" में तुम्हें अच्छा लगता हूं ?"
"बहुत अच्छे लगते हो ? प्रकाश !! अगर तुम पैसे वाले भी होते हैं तो मैं निश्चित रूप से तुम्हीं से शादी करती !!!
फिर उसकी सितारों जैसी आंखें अंतरिक्ष में ठहर कर जैसे शून्य में कुछ खोजने लगीं!! वास्तव में उसका मन अपने सपनों का पीछा करते -करते कल्पना जगत में ही भटक रहा था !!"
"सोचती हूं कि मेरा जीवन साथी ऐसा हो ही ......पैसे वाला भी खूब...... ताकि वह मुझे जीवन की सारी सुख -सुविधाएं दे सके!!
वह बोलती जा रही थी :-- विदेशों में घूमने का बड़ा शौक है मैं !!अपने सपनों को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हूं!!!
ऐसा कहते -कहते उसकी आंखें चमकने लगी !! शेखर ने उसकी आंखों की तरफ देखा और उसके सपनों की चमक को झेल नहीं सका !! वह उसकी नजरों की ताव नहीं ला सका !!
उसकी अभिलाषा और इच्छा सुनकर शेखर .....जैसे एक- एक शब्द पर उसका दिल टूट रहा था ....और एक- एक शब्द उसके मन पर हथौड़े की तरह बरस रहा था !!
बरखा की अभिलाषाएं बहुत ऊंची थी और उसमें शेखर कहीं भी नहीं था !!!! हकीकत यही थी!!
" वह बोली :-"मैं अपने सपनों को पूरा करने के लिए कुछ भी कर सकती हूं .......कुछ भी !!!
"चलो ,अच्छा!! अब रात हो रही है !! कहते हुए शेखर उठ खड़ा हुआ आ बरखा भी उठ खड़ी हुई !! दोनों अपनी -अपनी सोच में गुम थे !! उदास होकर घर लौट आए !
दूसरे दिन शेखर बरखा के यहां गया उसे कई बातें कहनी थी और उसे कुछ समझाना भी था!! उसने सोचा था कि वह अपने तरीके से बरखा को समझाएगा ! जब वहां पहुंचा तो यह देखकर सन्नाटे में रह गया कि दरवाजे पर तो ताला पड़ा हुआ है!!!
.. और वहां किसी का भी पता नहीं!!! उसने चारों तरफ ढूंढ कर बरखा को पुकारा लेकिन कहीं कोई नहीं था
वहां से बहुत दूर पर एक झोंपड़ी थी !!वहां पर पहुंच कर उसने उसने एक महिला से पूछा :-ये लोग कहां गए ?"
वह बोली:--' वे तो यहां से चले गए हैं !!। मुझे पता नहीं कहां गए हैं !"
और शेखर के मन में विनय की बातें गूंजने लगी ....और उसके कहे हुए शब्द उसके दिमाग पर हथौड़े की तरह बजने लगे---
"'खूबसूरत छलावा !!
"धोखेबाज !!"
"तो क्या यह बात सही थी ?"
तो क्या वह मुझे धोखा देकर निकल गई ...... क्या सचमुच। वह धोखेबाज थी ??"
"विनय ने तो उसे आगाह कर दिया था !!अब उसके दिमाग पर शब्द बराबर ठोकर मार रहे थे!! खूबसूरत धोखेबाज!! धोखेबाज खूबसूरत
