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ये कहानी एक रंडीखान से शुरू होती है , एक औरत जिसका नामे रेखा था जो ज्यादा पैसे के लालच मे बिना कोंडोम से चुदवाती रही , आन्ततः वही हुआ जिस डर था , वो पेट से हो गई वहाँ के मालिक थी वो बोली की बच्चा गिरा दो । पर रेखा बच्चे को जन्म देना चाहती थी और हुआ भी यही 9 महीने पेट मे रखी फिर बच्चे को जन्म दी और उसका नाम मोहन रखी , फिर से जिंदगी पहले के तरह ही चलने लागि ,
धंधा फिर से सुरू कर दी थी ये सब उसका रोज का था पर वो अपने बच्चे को अच्छी जिंदगी देना चाहती थी पर वो करे भी तो क्या वो नहीं चाहती थी उसका बेटा जाने उसकी माँ क्या करती है पर कोई भी मोहन को नाम से ना बुलाकर रंडी का बेटा बुलाते थी , ये रेखा को बहुत खराब लगती थी फिर किसी ने उससे बोला पास मे एक अनाथालय है वह डाल दे , ओर रेखा को ये सही लगा अपने से दूर करना नहीं चाहती थी पर एक अच्छे भविष्य के लिए करना पड़ा ।
मोहन 18 साल तक वही अनाथालय मे ही रहा अपनी 12 वी तक की पढ़ाई भी अनाथालय वाले ने ही कारवाई वो यही जनता था की उसका इस दुनिया मे कोई नहीं है । 18 साल होते ही अनाथालय वालों ने उसे फ्री कर दिया काही भी जा सकता है वो एक आच्छा लड़का था पढ़ाई लिखाई , खेल कूद , खान पीना किसी भी तरह का कोई गलत काम नहीं करता था , खेल कूद के कारण उसका सरीर काफी कठोर ओर कद काठी भी अच्छी थी 5 फुट 9 इंच और उसका लंड जो 9 इंच का था ।

अनाथालय से बाहर निकलने के बाद एक छोटा सा गोदाम मे काम मिली जहां 10 आदमी थे जो बोरी को गाड़ी मे चढ़ना ओर उतारने का काम करते the और 6 औरते थी जो झाड़ू पोंछा खान पीना का ध्यान रखती थी रहने का भी वही व्यवस्था था 2 रूम बड़े बड़े एक रूम मे मर्द रहते थे दूसरे मे औरते हगने मूतने के लिए एक छोटा सा रूम बना हुआ था पर दरवाजे के जगह एक सारी का पर्दा बनाया हुआ था जो इतना पतला था की अंदर कोन बैठा है क्या कर रहा है सब दिखता था सिर्फ नाम का पर्दा था हल्की सी हवा मे भी उरते रहता था ।

गोदाम चारों तरफ से ऊंची दीवाल से घिरा हुआ था , मै भी वही काम करने लगा 9 से 5 बजे तक दिन मे बोरी उतरता ओर रात मे 8 बजे खाने के बाद 10 बजे तक पढ़ाई करता और फिर सो जाता । पर और सब लोग देर से खान खाते थे दारू सब भी पीते थे ।
धीरे धीरे मै भी वहाँ घुल मिल गया सभी मर्द से जो उम्र मे मेरे से ज्यादा थे 35 से 45 तक के थे हसी मजाक, गली गलोज, दारू पीना , चुदाई की बातें करना ये सब अब यहाँ पे आम बातें हो गई थी सभी मजदूर बाहर के रहने वाले थे अपने बीबी बच्चे से दूर महीने के आखरी मे पैसा भेज देते थे ।
और वह की औरते से भी घुल मिल गया था ये सब औरते भी कुछ कम नहीं थी गंदी गंदी बातें करना किसी को भी कुछ भी बोल देती थी जब बैठती थी तो दोनों पैर फैला के ओर थोड़ा मोर के बैठ जाती ये भी नहीं सोचती सामने कोण है मर्द तो सभी आँखें सेकते थे ओर मै भी भला देखता क्यू नहीं झांट से भारी हुई कला स भोंसड़ा जो दिखता था ।

कुछ मर्द तो वही सब के सामने ही लंड निकाल के हिलाने लगते थी और ये सब देख के औरते और भी खुश होती ओर गली भी देती सारी ऊपर कर के अपना बुर भी दिखती बोलती "ले देख ले अपनी माँ का भोंसड़ा मधारचोद रंडी के औलाद इस बार छुट्टी मे जाएगा तो माँ का बुर चोद के आना " ये सब तो दिन भर का था । एसही दिन कटता गया अब मै भी ज्यादा खुल गया था ।
एक दिन की बात मै सुबह 5 बजे उठा मुझे पेशाब लगी थी जब मै बाथरूम मे पास गया तो सारी के परदे से देखा तो कोई अंदर था मै ज्यादा ध्यान नहीं दिया ओर वही एक तरफ बैठ गया निकलने का इंतजार करने लगा । 5 मिनट बैठा ही था की किसी की सिसकियाँ की आवाज़ें आने लगी थी जब मै ध्यान दिया तो बाथरूम से आ रही थी मै धीरे धीरे दबे पाव आगे गया ओर थोड़ी सी पर्दा हटाया की मेरे मुह के सामने ही एक औरत का मुह थी ओर उसने मुझे देख लिया जब मै ध्यान से देखा तो पता चल औरत खड़ी थी पैर फैले हुए थे और सारी कमर तक उठी हुई थी एक आदमी जो औरत के पीछे था वो कमर हिल रहा था ।

औरत मुझे देखते ही बोली - तू यहाँ क्या कर रहा है ओर सिसकियाँ लेती रही ।
मै - मै तो पेशाब करने आया था आप यह क्या कर रही हो और ये चाचा पीछे क्या कर रहे है इतनी छोटी सी बाथरूम में ।
पीछे से मर्द - अरे बेटा आया तो मै भी पेशाब करने ही था पर ये साली अपनी गंड खोल के हग रही थी इतनी बड़ी गंड देख के रहा नहीं गया ओर साली के बुर मे लोड़ा पेल दिया
ये सब सुन के ओर देख के मेरा भी लोड खड़ा हो गया था ओर तोलिया से बाहर आ गया
औरत मेरा लंड देख के - देख इस मधारचोद का भी खड़ा हो गया
पीछे से मर्द- इसका भी चूस ले रंडी , बेटा देख क्या रहा है मुह मे पेल रंडी को
मै इतना सुनते ही अपना लंड उसके मुह मे घुस दिया ओर आगे पीछे करने लगा 5 मिनट मुह चोदने के पीछे वाला आदमी सीधा खड़ा हुआ ओर बोल आ बेटा अब तू चोद ले इसको
फिर मै पीछे गया ओर औरत की बुर देखा उसकी बुर पूरा खुला हुआ था ओर उसमे से चाचा ओर औरते का माल निकाल रहा था मै उसके माल निकलने भी नहीं दिया उसके बुर मे अपना लंड घुस दिया सट से घुस गया ओर अपना 9 इंच के लंड से औरत को पेलने लगा ओर वो औरत मर्द का लाँड़ चूसने लागि


औरत - सिसकियाँ लेते हुए देख केसे अपनी माँ की उम्र की औरत चोद रहा है ।
मै - मेरी माँ नहीं है ।
मर्द- आर बेटा सब तेरी माँ ही है सब को माँ समझ ।
औरत - हा बेटा माँ ही समझ
मै - कौन बेटा अपनी माँ चोदता होगा ।
मर्द - बेटा चोदना तो सभी चाहते पर समाज के डर से नहीं चोद पाते, मै खुद अपनी माँ को खेत मे जबरदस्ती चोदता था ओर गंड भी मारता था पहले माना करती थी फिर उछाल उछाल के मरवाती थी।
मै - आपको डर नहीं लगता था खेत में कोई देख लेता तो
मर्द- देख लेता तो देख लेता गाँव मे ये सब आम बातें है । देख माँ की बातें करते ही लंड खड़ा हो गया ।
बेटा थोड़ा रुक
फिर मै लोड़ा बुर से निकाल के खड़ा हो गया चाचा औरत को गोद मे उठाया ओर बुर मे लंड पेल दिया ओर बोले तू भी घुस दे ।
मै - कहाँ घुसाऊ बुर मे तो आपने पेल दिया ।
मर्द - अरे एक और छेद नहीं दिख रहा क्या वहाँ घुसा ओर भी मज़ा आएगा ।
औरत - हाँ बेटा घुसा दे बहुत दिन हो गए 2 लंड से एक साथ नही चुदी ।
मै उसकी गांड की छेद पे लंड लगाया ओर एक झटके मे पूरा लंड अंदर चला गया फिर मै औरत को बोला - माँ तेरी तो गंड भी ढीली है

औरत - बेटा रोज ही तो चुदवाती हु ढीला तो होगा ही ।
मै - कब चुदवाती हो मै भी तो यही रहता हु
औरत - तेरे सोने के बाद दसों मर्द हम 6 औरते को बुर गंड मुहँ सब चोदते है
मर्द - हाँ बेटा तेरे सोने के बाद यहाँ चुदाई का खेल चलता है तभी तो हुमए बीबी की कमी महसूस नहीं होती ।
औरत - देख तेरी 6 माओ का बुर का भोंसड़ा ओर गंड का गोदाम बना दिया है इन कमीनों ने ।

मर्द - बेटा तू भी चोद 6 माँ यानि 12 छेद है चोद जिसे चोदना है ।
मै - हाँ माँ रोज चोदूँगा ओर इतनी कामुक बात होने के बाद मेरा ओर चाचा का माल निकाल जाता है । फिर हम तीनों कपड़े ठीक कर के वापस रूम मे चले जाते है ।

फिर वही दिनचर्या चलता है
आगे की कहानी दूसरे दिन ......
धंधा फिर से सुरू कर दी थी ये सब उसका रोज का था पर वो अपने बच्चे को अच्छी जिंदगी देना चाहती थी पर वो करे भी तो क्या वो नहीं चाहती थी उसका बेटा जाने उसकी माँ क्या करती है पर कोई भी मोहन को नाम से ना बुलाकर रंडी का बेटा बुलाते थी , ये रेखा को बहुत खराब लगती थी फिर किसी ने उससे बोला पास मे एक अनाथालय है वह डाल दे , ओर रेखा को ये सही लगा अपने से दूर करना नहीं चाहती थी पर एक अच्छे भविष्य के लिए करना पड़ा ।
मोहन 18 साल तक वही अनाथालय मे ही रहा अपनी 12 वी तक की पढ़ाई भी अनाथालय वाले ने ही कारवाई वो यही जनता था की उसका इस दुनिया मे कोई नहीं है । 18 साल होते ही अनाथालय वालों ने उसे फ्री कर दिया काही भी जा सकता है वो एक आच्छा लड़का था पढ़ाई लिखाई , खेल कूद , खान पीना किसी भी तरह का कोई गलत काम नहीं करता था , खेल कूद के कारण उसका सरीर काफी कठोर ओर कद काठी भी अच्छी थी 5 फुट 9 इंच और उसका लंड जो 9 इंच का था ।

अनाथालय से बाहर निकलने के बाद एक छोटा सा गोदाम मे काम मिली जहां 10 आदमी थे जो बोरी को गाड़ी मे चढ़ना ओर उतारने का काम करते the और 6 औरते थी जो झाड़ू पोंछा खान पीना का ध्यान रखती थी रहने का भी वही व्यवस्था था 2 रूम बड़े बड़े एक रूम मे मर्द रहते थे दूसरे मे औरते हगने मूतने के लिए एक छोटा सा रूम बना हुआ था पर दरवाजे के जगह एक सारी का पर्दा बनाया हुआ था जो इतना पतला था की अंदर कोन बैठा है क्या कर रहा है सब दिखता था सिर्फ नाम का पर्दा था हल्की सी हवा मे भी उरते रहता था ।

गोदाम चारों तरफ से ऊंची दीवाल से घिरा हुआ था , मै भी वही काम करने लगा 9 से 5 बजे तक दिन मे बोरी उतरता ओर रात मे 8 बजे खाने के बाद 10 बजे तक पढ़ाई करता और फिर सो जाता । पर और सब लोग देर से खान खाते थे दारू सब भी पीते थे ।
धीरे धीरे मै भी वहाँ घुल मिल गया सभी मर्द से जो उम्र मे मेरे से ज्यादा थे 35 से 45 तक के थे हसी मजाक, गली गलोज, दारू पीना , चुदाई की बातें करना ये सब अब यहाँ पे आम बातें हो गई थी सभी मजदूर बाहर के रहने वाले थे अपने बीबी बच्चे से दूर महीने के आखरी मे पैसा भेज देते थे ।
और वह की औरते से भी घुल मिल गया था ये सब औरते भी कुछ कम नहीं थी गंदी गंदी बातें करना किसी को भी कुछ भी बोल देती थी जब बैठती थी तो दोनों पैर फैला के ओर थोड़ा मोर के बैठ जाती ये भी नहीं सोचती सामने कोण है मर्द तो सभी आँखें सेकते थे ओर मै भी भला देखता क्यू नहीं झांट से भारी हुई कला स भोंसड़ा जो दिखता था ।

कुछ मर्द तो वही सब के सामने ही लंड निकाल के हिलाने लगते थी और ये सब देख के औरते और भी खुश होती ओर गली भी देती सारी ऊपर कर के अपना बुर भी दिखती बोलती "ले देख ले अपनी माँ का भोंसड़ा मधारचोद रंडी के औलाद इस बार छुट्टी मे जाएगा तो माँ का बुर चोद के आना " ये सब तो दिन भर का था । एसही दिन कटता गया अब मै भी ज्यादा खुल गया था ।
एक दिन की बात मै सुबह 5 बजे उठा मुझे पेशाब लगी थी जब मै बाथरूम मे पास गया तो सारी के परदे से देखा तो कोई अंदर था मै ज्यादा ध्यान नहीं दिया ओर वही एक तरफ बैठ गया निकलने का इंतजार करने लगा । 5 मिनट बैठा ही था की किसी की सिसकियाँ की आवाज़ें आने लगी थी जब मै ध्यान दिया तो बाथरूम से आ रही थी मै धीरे धीरे दबे पाव आगे गया ओर थोड़ी सी पर्दा हटाया की मेरे मुह के सामने ही एक औरत का मुह थी ओर उसने मुझे देख लिया जब मै ध्यान से देखा तो पता चल औरत खड़ी थी पैर फैले हुए थे और सारी कमर तक उठी हुई थी एक आदमी जो औरत के पीछे था वो कमर हिल रहा था ।

औरत मुझे देखते ही बोली - तू यहाँ क्या कर रहा है ओर सिसकियाँ लेती रही ।
मै - मै तो पेशाब करने आया था आप यह क्या कर रही हो और ये चाचा पीछे क्या कर रहे है इतनी छोटी सी बाथरूम में ।
पीछे से मर्द - अरे बेटा आया तो मै भी पेशाब करने ही था पर ये साली अपनी गंड खोल के हग रही थी इतनी बड़ी गंड देख के रहा नहीं गया ओर साली के बुर मे लोड़ा पेल दिया
ये सब सुन के ओर देख के मेरा भी लोड खड़ा हो गया था ओर तोलिया से बाहर आ गया
औरत मेरा लंड देख के - देख इस मधारचोद का भी खड़ा हो गया
पीछे से मर्द- इसका भी चूस ले रंडी , बेटा देख क्या रहा है मुह मे पेल रंडी को
मै इतना सुनते ही अपना लंड उसके मुह मे घुस दिया ओर आगे पीछे करने लगा 5 मिनट मुह चोदने के पीछे वाला आदमी सीधा खड़ा हुआ ओर बोल आ बेटा अब तू चोद ले इसको
फिर मै पीछे गया ओर औरत की बुर देखा उसकी बुर पूरा खुला हुआ था ओर उसमे से चाचा ओर औरते का माल निकाल रहा था मै उसके माल निकलने भी नहीं दिया उसके बुर मे अपना लंड घुस दिया सट से घुस गया ओर अपना 9 इंच के लंड से औरत को पेलने लगा ओर वो औरत मर्द का लाँड़ चूसने लागि


औरत - सिसकियाँ लेते हुए देख केसे अपनी माँ की उम्र की औरत चोद रहा है ।
मै - मेरी माँ नहीं है ।
मर्द- आर बेटा सब तेरी माँ ही है सब को माँ समझ ।
औरत - हा बेटा माँ ही समझ
मै - कौन बेटा अपनी माँ चोदता होगा ।
मर्द - बेटा चोदना तो सभी चाहते पर समाज के डर से नहीं चोद पाते, मै खुद अपनी माँ को खेत मे जबरदस्ती चोदता था ओर गंड भी मारता था पहले माना करती थी फिर उछाल उछाल के मरवाती थी।
मै - आपको डर नहीं लगता था खेत में कोई देख लेता तो
मर्द- देख लेता तो देख लेता गाँव मे ये सब आम बातें है । देख माँ की बातें करते ही लंड खड़ा हो गया ।
बेटा थोड़ा रुक
फिर मै लोड़ा बुर से निकाल के खड़ा हो गया चाचा औरत को गोद मे उठाया ओर बुर मे लंड पेल दिया ओर बोले तू भी घुस दे ।
मै - कहाँ घुसाऊ बुर मे तो आपने पेल दिया ।
मर्द - अरे एक और छेद नहीं दिख रहा क्या वहाँ घुसा ओर भी मज़ा आएगा ।
औरत - हाँ बेटा घुसा दे बहुत दिन हो गए 2 लंड से एक साथ नही चुदी ।
मै उसकी गांड की छेद पे लंड लगाया ओर एक झटके मे पूरा लंड अंदर चला गया फिर मै औरत को बोला - माँ तेरी तो गंड भी ढीली है

औरत - बेटा रोज ही तो चुदवाती हु ढीला तो होगा ही ।
मै - कब चुदवाती हो मै भी तो यही रहता हु
औरत - तेरे सोने के बाद दसों मर्द हम 6 औरते को बुर गंड मुहँ सब चोदते है
मर्द - हाँ बेटा तेरे सोने के बाद यहाँ चुदाई का खेल चलता है तभी तो हुमए बीबी की कमी महसूस नहीं होती ।
औरत - देख तेरी 6 माओ का बुर का भोंसड़ा ओर गंड का गोदाम बना दिया है इन कमीनों ने ।

मर्द - बेटा तू भी चोद 6 माँ यानि 12 छेद है चोद जिसे चोदना है ।
मै - हाँ माँ रोज चोदूँगा ओर इतनी कामुक बात होने के बाद मेरा ओर चाचा का माल निकाल जाता है । फिर हम तीनों कपड़े ठीक कर के वापस रूम मे चले जाते है ।

फिर वही दिनचर्या चलता है
आगे की कहानी दूसरे दिन ......
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