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Haiwaan

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भाग १:

गर्मी की दोपहर थी। बस की खिड़की से धूल भरी हवा अंदर आ रही थी और बाहर दूर-दूर तक सूखे खेत फैले हुए थे। आर्यन बस की पिछली सीट पर बैठा था, उसका सिर खिड़की से टिका हुआ। दस साल। पूरे दस साल बाद वह अपने गांव लौट रहा था।शहर ने उसे बहुत कुछ दिया था – अच्छी पढ़ाई, डिग्री, नौकरी की उम्मीदें – लेकिन उसका मन हमेशा उस पुराने पुश्तैनी मकान की ओर खिंचा चला जाता था। वो बड़ा-सा आंगन, नीम का पेड़, कुएं की ठंडी हवा, और सबसे ज्यादा... उसकी मां, छोटी बहन और चाची।आर्यन की उम्र अब छब्बीस साल थी। लंबा, गोरा, कसरती बदन – शहर की जिम और अच्छा खाना उसे ऐसा बना गया था। उसके कंधे पर एक बड़ा बैग लटका था, जिसमें उसकी सारी दुनिया समाई थी – कपड़े, लैपटॉप, कुछ किताबें, और थोड़ी-सी बचत। उसने सोचा था कि गांव पहुंचकर सबको सरप्राइज देगा। मां को नई साड़ी, बहन रिया को शहर का मोबाइल, और चाची को... चाची को वो हमेशा से कुछ खास महसूस करता था, हालांकि कभी जुबान पर नहीं लाया।बस झटके खाते आगे बढ़ रही थी। गांव का रास्ता अब भी वैसा ही कच्चा और टूटा-फूटा था। आर्यन की आंखें धीरे-धीरे बंद होने लगीं। रात भर की ट्रेन जर्नी और फिर ये बस – थकान हावी हो गई। उसने बैग को सीट के नीचे पैरों से दबाया और आंखें बंद कर ली।नींद गहरी थी। सपने में उसे वो पुराना घर दिख रहा था। मां की गोद, रिया का हंसना, और चाची का वो मुस्कुराता चेहरा... अचानक बस रुकी। ब्रेक की चीख से आर्यन की आंख खुली। स्टेशन आ गया था – उसका गांव वाला छोटा-सा बस अड्डा। लोग उतर रहे थे। आर्यन ने झपकते हुए नीचे देखा और उसका दिल धक से रह गया।बैग गायब था।सीट के नीचे खाली जगह। उसने इधर-उधर देखा, आसपास के यात्रियों से पूछा, लेकिन किसी ने कुछ नहीं देखा। बस ड्राइवर ने कंधे उचकाए – "भाई साहब, यहां रोज ऐसा होता है। सामान संभालकर रखना चाहिए था।"आर्यन पुलिस चौकी गया। वहां का पुराना सिपाही चाय पीते हुए बोला, "कंप्लेंट लिखवा लो बाबू, लेकिन मिलने वाला नहीं। यहां से तो चोरी का माल सीधा शहर के बाजार में पहुंच जाता है।"आर्यन के पास अब कुछ नहीं था – न कपड़े, न पैसा, न फोन। सिर्फ जेब में कुछ सिक्के और वो पुराना पता जो दस साल से उसके दिल में लिखा था।शाम ढल चुकी थी जब वह पैदल अपने गांव की ओर चला। धूल भरी पगडंडी, दूर से दिखता नीम का पेड़, और फिर... वो लोहे का बड़ा-सा गेट। पुश्तैनी मकान का गेट।आर्यन गेट के सामने खड़ा हो गया। उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। दस साल बाद। कोई सामान नहीं, सिर्फ खुद।उसने गहरी सांस ली और गेट का हैंडल पकड़ा
Nice start bro 👍
 

Haiwaan

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भाग २:

आर्यन ने गेट का हैंडल घुमाया। पुराना लोहा चरमराया और गेट धीरे से खुल गया। आंगन में शाम की मद्धम रोशनी फैली थी। नीम का पेड़ अब और बड़ा हो गया था, उसकी छांव पूरे आंगन पर छा रही थी। घर का मुख्य दरवाजा खुला था, अंदर से हल्की-हल्की बातें और बर्तनों की खनखन सुनाई दे रही थी।आर्यन ने कदम बढ़ाया और दरवाजे पर खड़ा हो गया। उसकी सांसें तेज थीं। वह बस चुपचाप खड़ा रहा, देखता रहा।अंदर रसोई में तीन औरतें थीं।सबसे पहले उसकी नजर अपनी मां पर पड़ी – सुमित्रा। उम्र करीब ४८ साल। दस साल पहले भी सुंदर थीं, अब भी वैसी ही लग रही थीं। गोरा रंग, लंबे काले बाल जो अब भी कमर तक थे, लेकिन अब कुछ चांदी के धागे मिले हुए थे। साड़ी में लिपटा उनका बदन अभी भी भरा-भरा और आकर्षक था – चौड़े कूल्हे, भारी स्तन जो साड़ी के ब्लाउज में मुश्किल से समा रहे थे, और कमर जो अब भी पतली थी। चेहरे पर वही ममता भरी मुस्कान। वह सब्जी काट रही थीं।उसके बगल में खड़ी थीं उसकी छोटी बहन रिया। अब वह २१ साल की हो चुकी थी। दस साल पहले की वो दुबली-पतली लड़की अब एक जवान औरत बन चुकी थी। लंबाई आर्यन जितनी ही, गोरा रंग, लंबे घने बाल जो उसने खुला छोड़ा था। उसका फिगर एकदम घंटाघर जैसा – पतली कमर, चौड़े कूल्हे और ऊपर से भरे हुए स्तन जो टाइट कुर्ती में साफ उभरे हुए थे। वह मां से कुछ पूछ रही थी, हंसते हुए।और फिर... चाची। नेहा चाची। ४२ साल। आर्यन की चाची, उसके पिता के छोटे भाई की विधवा। गांव में सबसे सुंदर औरत मानी जाती थीं। गजब का रंग – दूध जैसा गोरा। साड़ी हमेशा कम ही पहनती थीं, पेट हमेशा थोड़ा सा दिखता। पेट एकदम चपटा, कमर पतली, लेकिन नीचे से कूल्हे इतने भरे और गोल कि साड़ी में लहराते हुए चलती थीं तो नजर हटती नहीं थी। स्तन भारी और ऊंचे, ब्लाउज हमेशा टाइट। चेहरा इतना खूबसूरत कि शहर की मॉडल भी फीकी लगे। वह चाय छान रही थीं।अचानक रिया की नजर दरवाजे पर पड़ी। उसने चम्मच हाथ से छोड़ दिया।"भैया...?"उसकी आवाज कांपी। फिर चीख पड़ी – "भैया!!!"वह दौड़कर आई और आर्यन से ऐसे लिपट गई जैसे कभी अलग न होना चाहती हो। उसके नरम, भरे हुए स्तन आर्यन की छाती से दब गए। गर्मी और सुगंध उसकी सांसों में घुल गई।"भैया... तुम सच में आ गए... मैं सपना तो नहीं देख रही?"आर्यन ने उसे गले लगाया, उसकी पीठ पर हाथ फेरा। "नहीं रिया, सपना नहीं। मैं आ गया।"पीछे से सुमित्रा दौड़ी आईं। उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने आर्यन का चेहरा दोनों हाथों में लिया, रोते हुए बोलीं, "मेरा बेटा... मेरा राजा... दस साल... दस साल बाद..."वह उसे सीने से लगाकर रोने लगीं। उनके भारी स्तन आर्यन की छाती पर दबे, साड़ी का पल्लू सरक गया। आर्यन ने मां की पीठ सहलाई, उनकी गर्मी महसूस की।फिर नेहा चाची धीरे-धीरे आईं। उनकी आंखें भी नम थीं, लेकिन मुस्कान गजब की थी। वह आर्यन के सामने रुकीं, फिर बिना कुछ बोले उसे गले लगा लिया। उनका बदन आर्यन से पूरी तरह सटा। भारी स्तन, नरम पेट, चौड़े कूल्हे – सब कुछ महसूस हुआ। उनकी सांसें आर्यन की गर्दन पर गर्म लग रही थीं।"आर्यन... बेटा... कितना बड़ा हो गया है तू..." उनकी आवाज में मिठास और कुछ और था। वह पीछे हटीं, लेकिन हाथ अभी भी आर्यन के कंधे पर थे। उनकी नजर आर्यन के चेहरे से नीचे तक गई – उसके चौड़े कंधे, मजबूत सीना, फिर वापस आंखों में।सुमित्रा ने पीछे हटकर आर्यन को ऊपर से नीचे तक देखा। "अरे, ये क्या हालत बना रखी है? कपड़े गंदे, सामान कहां है? और इतना थका हुआ क्यों लग रहा है?"आर्यन ने मुस्कुराकर कहा, "मां, बस में सोते हुए बैग चोरी हो गया। सब कुछ गया – फोन, पैसे, कपड़े... सब।"तीनों एक साथ चिंतित हो गईं।रिया: "क्या?! भैया, सब कुछ? फिर तुम पैदल आए?"नेहा चाची ने आर्यन का हाथ पकड़ा, "चल अंदर आ, पहले नहा-धो, कपड़े बदल। मैं तेरे पुराने कपड़े निकालती हूं। अभी भी अलमारी में रखे हैं।"सुमित्रा: "हां बेटा, पहले आराम कर। खाना गरम कर रही हूं। आज तेरी पसंद की सारी चीजें बनाई हैं – आलू परवल, दाल, चिकन... सब।"आर्यन मुस्कुराया। घर की खुशबू, औरतों की गर्मजोशी, उनके बदनों की महक – सब कुछ उसे घर लौटने का अहसास दे रहा था।रिया ने उसका हाथ पकड़कर अंदर खींचा। "चलो भैया, मैं तुम्हें अपना कमरा दिखाती हूं। मैंने सजाया है सब।"नेहा चाची पीछे-पीछे आईं, उनकी साड़ी की लहरें चलते वक्त कूल्हों पर नाच रही थीं।आर्यन ने सोचा – दस साल बाद घर लौटा हूं... और ये घर अब पहले से कहीं ज्यादा... गर्म लग रहा है।
Shandaar update
 

Haiwaan

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भाग ३:

आर्यन रिया के साथ सीढ़ियां चढ़कर ऊपरी मंजिल पर अपने पुराने कमरे में पहुंचा। दरवाजा खोलते ही उसे लगा जैसे समय ठहर गया हो। कमरा बिल्कुल वैसा का वैसा था – वही पुरानी लकड़ी की अलमारी, वही छोटा-सा बिस्तर, दीवार पर उसकी बचपन की तस्वीरें, और खिड़की से नीम के पेड़ की वही छांव।मां और चाची ने इसे साफ-सुथरा रखा था। बिस्तर पर नई चादर बिछी थी, तकिए पर नई कवर। हवा में हल्की अगरबत्ती की खुशबू।"देख भैया, मैं हर हफ्ते यहां झाड़ू-पोंछा करती थी। सब कुछ वैसा ही रखा है जैसा तुम छोड़कर गए थे," रिया ने मुस्कुराते हुए कहा और अलमारी खोल दी।अंदर उसके दस-पंद्रह साल पुराने कपड़े लटके थे – स्कूल की यूनिफॉर्म, कुछ टी-शर्ट, शॉर्ट्स, और दो-तीन कुर्ते-पायजामे।नेहा चाची ने एक तौलिया निकालकर आर्यन की ओर बढ़ाया। "ले बेटा, पहले नहा ले। गीजर ऑन कर दिया है। मैं नीचे खाना गरम करती हूं।"आर्यन ने तौलिया लिया। चाची के हाथ की गर्मी तौलिये में बाकी रह गई। "थैंक्स चाची।"वह बाथरूम में गया। पुराना बाथरूम, लेकिन साफ। गीजर से गरम पानी की भाप फैल रही थी। आर्यन ने अपने गंदे कपड़े उतारे और शावर के नीचे खड़ा हो गया। गरम पानी की बौछारें उसके मजबूत कंधों, चौड़ी छाती और पेट की मांसपेशियों पर गिर रही थीं। दस साल की जिम और मेहनत ने उसे एकदम फिट बना दिया था – चौड़ा सीना, मजबूत बाजू, और नीचे... वो हिस्सा जो अब जवान मर्द का था।नहाते हुए उसने सोचा – आज सब कितना खुश हैं। मां, रिया, चाची... जैसे कोई बोझ उतर गया हो उनके दिल से। लेकिन एक बात सब भूल गए थे – दस साल में वो बच्चा नहीं रहा। वो अब एक पूरा मर्द था।नहाकर वह तौलिया लपेटकर कमरे में लौटा। अलमारी से सबसे बड़ा कुर्ता-पायजामा निकाला। पहले पायजामा पहनने की कोशिश की। कमर में तो आ गया, लेकिन जांघें इतनी मोटी हो चुकी थीं कि कपड़ा खींच गया। सबसे मुश्किल हुई अंडरवियर। पुरानी वाली छोटी अंडरवियर उसकी जांघों में फंस गई ही नहीं। उसका मर्दाना अंग अब इतना बड़ा और भारी था कि वो छोटी-सी अंडरवियर में समा ही नहीं रहा था। आर्यन ने कोशिश की, खींचा, लेकिन रबर टाइट होकर दर्द करने लगा।फिर कुर्ता। कंधों पर तो फिट हो गया, लेकिन सीना इतना चौड़ा था कि बटन बंद होते-होते दो बटन उछलकर अलग हो गए। पायजामा भी घुटनों तक ही पहुंच रहा था, जैसे कैप्रि बन गया हो।आर्यन आईने के सामने खड़ा हो गया। तौलिया अभी भी कमर पर लिपटा था, क्योंकि कुछ भी ठीक से फिट नहीं हो रहा था। उसका बदन चमक रहा था – चौड़ी छाती, सिक्स-पैक एब्स, मजबूत जांघें। तौलिया नीचे से थोड़ा उभरा हुआ था, क्योंकि अंदर कुछ भी नहीं था।"अब क्या करूं?" उसने खुद से बुदबुदाया। नीचे जाना तो है, खाना खाना है, सबके साथ बैठना है... लेकिन ऐसे हालत में?वह दरवाजे की ओर बढ़ा, फिर रुक गया। अगर ऐसे ही नीचे चला गया तो... सब देख लेंगी। मां, रिया, चाची... सबकी नजर वहां जाएगी।बस यही सोचते हुए वह बिस्तर पर बैठ गया, तौलिया कसकर लपेटे हुए, और सोचने लगा कि अब क्या किया जाए।दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई।"भैया... कपड़े बदल लिए?" रिया की आवाज आई।आर्यन का दिल धड़का। "हां... बस... एक मिनट रिया।"लेकिन दरवाजा धीरे से खुल गया।
Fantastic update
 
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भाग ३:

आर्यन रिया के साथ सीढ़ियां चढ़कर ऊपरी मंजिल पर अपने पुराने कमरे में पहुंचा। दरवाजा खोलते ही उसे लगा जैसे समय ठहर गया हो। कमरा बिल्कुल वैसा का वैसा था – वही पुरानी लकड़ी की अलमारी, वही छोटा-सा बिस्तर, दीवार पर उसकी बचपन की तस्वीरें, और खिड़की से नीम के पेड़ की वही छांव।मां और चाची ने इसे साफ-सुथरा रखा था। बिस्तर पर नई चादर बिछी थी, तकिए पर नई कवर। हवा में हल्की अगरबत्ती की खुशबू।"देख भैया, मैं हर हफ्ते यहां झाड़ू-पोंछा करती थी। सब कुछ वैसा ही रखा है जैसा तुम छोड़कर गए थे," रिया ने मुस्कुराते हुए कहा और अलमारी खोल दी।अंदर उसके दस-पंद्रह साल पुराने कपड़े लटके थे – स्कूल की यूनिफॉर्म, कुछ टी-शर्ट, शॉर्ट्स, और दो-तीन कुर्ते-पायजामे।नेहा चाची ने एक तौलिया निकालकर आर्यन की ओर बढ़ाया। "ले बेटा, पहले नहा ले। गीजर ऑन कर दिया है। मैं नीचे खाना गरम करती हूं।"आर्यन ने तौलिया लिया। चाची के हाथ की गर्मी तौलिये में बाकी रह गई। "थैंक्स चाची।"वह बाथरूम में गया। पुराना बाथरूम, लेकिन साफ। गीजर से गरम पानी की भाप फैल रही थी। आर्यन ने अपने गंदे कपड़े उतारे और शावर के नीचे खड़ा हो गया। गरम पानी की बौछारें उसके मजबूत कंधों, चौड़ी छाती और पेट की मांसपेशियों पर गिर रही थीं। दस साल की जिम और मेहनत ने उसे एकदम फिट बना दिया था – चौड़ा सीना, मजबूत बाजू, और नीचे... वो हिस्सा जो अब जवान मर्द का था।नहाते हुए उसने सोचा – आज सब कितना खुश हैं। मां, रिया, चाची... जैसे कोई बोझ उतर गया हो उनके दिल से। लेकिन एक बात सब भूल गए थे – दस साल में वो बच्चा नहीं रहा। वो अब एक पूरा मर्द था।नहाकर वह तौलिया लपेटकर कमरे में लौटा। अलमारी से सबसे बड़ा कुर्ता-पायजामा निकाला। पहले पायजामा पहनने की कोशिश की। कमर में तो आ गया, लेकिन जांघें इतनी मोटी हो चुकी थीं कि कपड़ा खींच गया। सबसे मुश्किल हुई अंडरवियर। पुरानी वाली छोटी अंडरवियर उसकी जांघों में फंस गई ही नहीं। उसका मर्दाना अंग अब इतना बड़ा और भारी था कि वो छोटी-सी अंडरवियर में समा ही नहीं रहा था। आर्यन ने कोशिश की, खींचा, लेकिन रबर टाइट होकर दर्द करने लगा।फिर कुर्ता। कंधों पर तो फिट हो गया, लेकिन सीना इतना चौड़ा था कि बटन बंद होते-होते दो बटन उछलकर अलग हो गए। पायजामा भी घुटनों तक ही पहुंच रहा था, जैसे कैप्रि बन गया हो।आर्यन आईने के सामने खड़ा हो गया। तौलिया अभी भी कमर पर लिपटा था, क्योंकि कुछ भी ठीक से फिट नहीं हो रहा था। उसका बदन चमक रहा था – चौड़ी छाती, सिक्स-पैक एब्स, मजबूत जांघें। तौलिया नीचे से थोड़ा उभरा हुआ था, क्योंकि अंदर कुछ भी नहीं था।"अब क्या करूं?" उसने खुद से बुदबुदाया। नीचे जाना तो है, खाना खाना है, सबके साथ बैठना है... लेकिन ऐसे हालत में?वह दरवाजे की ओर बढ़ा, फिर रुक गया। अगर ऐसे ही नीचे चला गया तो... सब देख लेंगी। मां, रिया, चाची... सबकी नजर वहां जाएगी।बस यही सोचते हुए वह बिस्तर पर बैठ गया, तौलिया कसकर लपेटे हुए, और सोचने लगा कि अब क्या किया जाए।दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई।"भैया... कपड़े बदल लिए?" रिया की आवाज आई।आर्यन का दिल धड़का। "हां... बस... एक मिनट रिया।"लेकिन दरवाजा धीरे से खुल गया।
Nice start
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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304
भाग ३:

आर्यन रिया के साथ सीढ़ियां चढ़कर ऊपरी मंजिल पर अपने पुराने कमरे में पहुंचा। दरवाजा खोलते ही उसे लगा जैसे समय ठहर गया हो। कमरा बिल्कुल वैसा का वैसा था – वही पुरानी लकड़ी की अलमारी, वही छोटा-सा बिस्तर, दीवार पर उसकी बचपन की तस्वीरें, और खिड़की से नीम के पेड़ की वही छांव।मां और चाची ने इसे साफ-सुथरा रखा था। बिस्तर पर नई चादर बिछी थी, तकिए पर नई कवर। हवा में हल्की अगरबत्ती की खुशबू।"देख भैया, मैं हर हफ्ते यहां झाड़ू-पोंछा करती थी। सब कुछ वैसा ही रखा है जैसा तुम छोड़कर गए थे," रिया ने मुस्कुराते हुए कहा और अलमारी खोल दी।अंदर उसके दस-पंद्रह साल पुराने कपड़े लटके थे – स्कूल की यूनिफॉर्म, कुछ टी-शर्ट, शॉर्ट्स, और दो-तीन कुर्ते-पायजामे।नेहा चाची ने एक तौलिया निकालकर आर्यन की ओर बढ़ाया। "ले बेटा, पहले नहा ले। गीजर ऑन कर दिया है। मैं नीचे खाना गरम करती हूं।"आर्यन ने तौलिया लिया। चाची के हाथ की गर्मी तौलिये में बाकी रह गई। "थैंक्स चाची।"वह बाथरूम में गया। पुराना बाथरूम, लेकिन साफ। गीजर से गरम पानी की भाप फैल रही थी। आर्यन ने अपने गंदे कपड़े उतारे और शावर के नीचे खड़ा हो गया। गरम पानी की बौछारें उसके मजबूत कंधों, चौड़ी छाती और पेट की मांसपेशियों पर गिर रही थीं। दस साल की जिम और मेहनत ने उसे एकदम फिट बना दिया था – चौड़ा सीना, मजबूत बाजू, और नीचे... वो हिस्सा जो अब जवान मर्द का था।नहाते हुए उसने सोचा – आज सब कितना खुश हैं। मां, रिया, चाची... जैसे कोई बोझ उतर गया हो उनके दिल से। लेकिन एक बात सब भूल गए थे – दस साल में वो बच्चा नहीं रहा। वो अब एक पूरा मर्द था।नहाकर वह तौलिया लपेटकर कमरे में लौटा। अलमारी से सबसे बड़ा कुर्ता-पायजामा निकाला। पहले पायजामा पहनने की कोशिश की। कमर में तो आ गया, लेकिन जांघें इतनी मोटी हो चुकी थीं कि कपड़ा खींच गया। सबसे मुश्किल हुई अंडरवियर। पुरानी वाली छोटी अंडरवियर उसकी जांघों में फंस गई ही नहीं। उसका मर्दाना अंग अब इतना बड़ा और भारी था कि वो छोटी-सी अंडरवियर में समा ही नहीं रहा था। आर्यन ने कोशिश की, खींचा, लेकिन रबर टाइट होकर दर्द करने लगा।फिर कुर्ता। कंधों पर तो फिट हो गया, लेकिन सीना इतना चौड़ा था कि बटन बंद होते-होते दो बटन उछलकर अलग हो गए। पायजामा भी घुटनों तक ही पहुंच रहा था, जैसे कैप्रि बन गया हो।आर्यन आईने के सामने खड़ा हो गया। तौलिया अभी भी कमर पर लिपटा था, क्योंकि कुछ भी ठीक से फिट नहीं हो रहा था। उसका बदन चमक रहा था – चौड़ी छाती, सिक्स-पैक एब्स, मजबूत जांघें। तौलिया नीचे से थोड़ा उभरा हुआ था, क्योंकि अंदर कुछ भी नहीं था।"अब क्या करूं?" उसने खुद से बुदबुदाया। नीचे जाना तो है, खाना खाना है, सबके साथ बैठना है... लेकिन ऐसे हालत में?वह दरवाजे की ओर बढ़ा, फिर रुक गया। अगर ऐसे ही नीचे चला गया तो... सब देख लेंगी। मां, रिया, चाची... सबकी नजर वहां जाएगी।बस यही सोचते हुए वह बिस्तर पर बैठ गया, तौलिया कसकर लपेटे हुए, और सोचने लगा कि अब क्या किया जाए।दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई।"भैया... कपड़े बदल लिए?" रिया की आवाज आई।आर्यन का दिल धड़का। "हां... बस... एक मिनट रिया।"लेकिन दरवाजा धीरे से खुल गया।
Nice Start
 

kingkhankar

Multiverse is real!
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Congratulations for the new story.
 
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