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दादी ने प्राची से बात करने का मन बना लिया था। अगली सुबह पापा अपने काम पे निकल चुके थे । दादी ने मौका देखा और दोनों बहनों के रूम में जा के प्राची को बोला : प्राची बेटा , जरा मेरे रूम में आना ,कुछ बात करनी है।
प्राची : जी दादी अब आई।
प्राची ओर प्रज्ञा दोनों बहने साथ बैठे पढ़ाई हो कर रही थी।
प्राची दादी के पीछे पीछे उनके रूम में पहुंच जाती है ।
दादी : आ बेटा , इधर बैठ।
दादी ने प्राची को अपने बगल में बेड पे बिठा दिया।
प्राची : हां दादी बोलिए क्या बात करना था आपको।
दादी: बाबू, उस दिन जो तुम पापा को रात में करते देखी थी ना उसी बारे में।
प्राची दादी को जिज्ञासा भरी नजरों से देखने लगी: जी दादी बताइए ना।
दादी: बेटी , उस दिन जो पापा कर रहे थे ना वो एक मर्द तब करता है जब उसके लाइफ में कोई औरत नहीं होती। उसके कारण क्या होता है पता है।
प्राची : क्या होता है दादी?
दादी : उसके कारण एक मर्द कमजोर हो जाता है। अगर रोज उस तरह हिलाने की आदत तेरे पापा को लग गई तो ये अच्छी बात नहीं होगी। उसका शरीर खराब हो जाएगा और वो जल्दी बीमार भी पर सकता है।
प्राची घबराना गई: अरे दादी , इसका कुछ तो उपाय होगा।
दादी: हां मेरी बच्ची , इसका उपाय एक ही है, तेरे पापा को एक औरत की जरूरत है। एक औरत का गुप्तांग ही तेरे पापा को राहत दे सकता है।
प्राची : दादी गुप्तांग का मतलब मेरी इससे है क्या( अपने चुत की तरफ इशारा करते हुए बोली)।
दादी: हां बेटी ठीक समझी। तेरे पापा को उसकी की जरूरत है।
प्राची : पर दादी , पापा ने तो शादी करने से हो माना किया है। फिर कैसे मिलेगा उनको ।
दादी: पापा ने तुम लोगों के कारण ही मना किया है पागल । वो तुमलोगो को खुश देखने के लिए शादी नहीं कर रहा , वो बाहरी किसी औरत को नहीं ल सकता , पता नहीं वो तुम दोनों बहनों के साथ क्या सलूक करे। इसलिए मैने एक विचार किया है।
प्राची : हां दादी बोलो ना।
दादी : तेरी ओर पापा की शादी करने का फैसला लिया है मैने बेटा। मैं अपने बेटे के लिए तेरे हाथ मांगती हु।
प्राची : दादी ये आप क्या कह रही है , पापा और मेरी शादी? पापा मुझे शादी कैसे कर सकते है? मैं तो इनको बच्ची हु?
दादी : हां बाबू बच्ची तो हो ही अब उसकी संगनी बन जाओगी। प्रज्ञा की सोच , उसको मां की जरूरत है बेटा। पापा की सोच उसको एक पत्नी की जरूरत है। मुझे भी तो एक प्यारी सी बहु की जरूरत है न बेटी।
प्राची: पर दादी ये कैसे होगा, पापा नहीं मानेंगे , मै मां को धोखा कैसे दे सकती हु। मा पापा की पत्नी थी ना।
दीदी : मा भी तो तेरी यही चाहती थी बेटी की तू प्रज्ञा को मां का प्यार दे , चाहती थी या नहीं?
प्राची : हां दादी, मा ने यही बोला था।
दादी: वो जानती थी कि अब उसका रोल तुझे निभाना है इस घर में । प्रज्ञा का देखभाल तेरी जिम्मेदारी है। पापा का देख भाल भी तुझे ही करना जो। घर तुझे संभालना है बेटा। पापा को पत्नी सुख भी देना है तुझे ।
प्राची बहुत शर्मा गई। उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि दादी उससे कभी ये करने बोलेगी।
प्राची : पर दादी पापा क्या सोचेंगे । मैने तो कही सुना भी नहीं है कि एक बाप ओर बेटी , पति और पत्नी बने है।
दादी: पापा की टेंशन मत ले बेटी, वो मान गया है। उसे तू पसंद है। तेरी हां की जरूरत है।
प्राची अब पूरी लाल हो गई थी। मन में सोचने लगी, क्या सच में पापा को मै पसंद हु। बाप रे ये सब मेरे साथ क्या हो रहा है। मैं अपने की पापा के साथ शादी कर लूंगी। पापा क्या मेरे उसमें अपना लौरा डाल के अंदर-बाहर करेंगे । दादी ये क्या करवा रही है मुझ से ।
प्राची : पर दादी में तो अभी छोटी हु । ऊपर से कॉलेज भी खत्म नहीं हुआ है। अभी शादी कैसे कर पाऊंगी , कैसे निभा पाऊंगी।
दादी: बेटा लड़कियां 16 की उमर से ही इस लायक हो जाती है कि अगर उनके बच्चेदानी में बीज गया मर्द का तो बच्चा धारण कर सकती है, उस हिसाब से तू एक लायक पत्नी बन सकती हो। तेरे मासिक भी आते होंगे ? और अब तो तू ही वो 19 की गई है।
प्राची : हां दादी आते है।
दादी : तो हो गई बात, पढ़ाई तो जारी रख सकती है। बाहर किसी को भी हम नहीं बताएंगे कि घर में कोई शादी भी हुई है। समाज का कोई इन्वॉलमेंट भी नहीं होगा इस शादी में और शादी प्राइवेट होगा। प्रज्ञा को भी मै समझा लूंगी। तू अपने पापा का साथ देना खाली।
प्राची के पास अब कोई रास्ता नहीं बचा था। पापा को भी वो इस हालत में नहीं देख सकती थी ।
प्राची : दादी वो सब तो ठीक है। लेकिन तुम कह रही हो पापा शादी के बाद मेरे उसमें अपना लिंग डालेंगे , मगर दादी मेरा योनि तो बहुत छोटा है अभी। मै कैसे कर पाऊंगी?
दादी हंसने लगी , अरे बेट उसकी टेंशन तू मत ले। सब हो जाता है। तेरे पापा सब कर लेंगे आराम से ,तुझे तो बस पापा का साथ देना पड़ेगा ।
दादी मन ही मन प्राची के नादानी पर मुस्कुरा रही थी कि वो इतनी खुल के ये सब बाते अपनी दादी से कर रही थी।
प्राची: ओके दादी , जैसा आपको ओर पापा को ठीक लगे।
दादी का प्लान कामयाब हुआ। अब पापा ओर बेटी दोनों शादी के लिए राज़ी थे।
उधर प्राची के दिल में आग लगी थी, हाय ये क्या सब हो रहा है मेरे साथ। दादी ने तो मुझे फंसा दिया पापा के साथ मेरी शादी । मुझे अब मम्मी की तरह पापा के साथ उनके रूम में रहना पड़ेगा । वो मेरे साथ, बाप रे, वो तो मेरे साथ चूदाई भी करेंगे । मैं कैसे ले पाउंगी ?दादी तो इतना आसानी से कह रही थी, लेकिन पापा का तो मैंने देखा है ना , बहुत ही बड़ा था। नहीं नहीं, कैसे झेल पाऊंगी मैं?
इधर पापा का हाल भी अजीब था। अपनी बेटी के साथ ही सुहागरात मै कैसे मना पाऊंगा । मा ने तो हद कर दी है। लेकिन सोचे तो कह भी सही रही है। प्रज्ञा को मां तो चाहिए ही। प्राची तो 19 साल की है। मैं ठहरा 40 साल का । मेरा वो सह पाएगी क्या? मै अपने बेटी का ही सील कैसे तोड़ पाऊंगा? वो रोने लगी तो? उसको मेरे बच्चे की मां भी तो बनाना पर जायेगा शादी के बाद? ये कैसे होगा कि एक बाप अपने ही बेटी के कोख में अपना बीज गिराए और उसको प्रेगनेंट कर दे? शादी का मतलब मुझे ये कारण होगा।
पापा का रोम रोम खिल उठा इन ख्यालों को सोच कर । वो दिल से अब शादी का ख़्वाब देखने लगे। बाप ओर बेटी का मिलन होना तय हो गया था।
दादी ने अगले ही दिन , एक दूर के मन्दिर के पंडित से दिन तय करवाने के लिए निकल पड़ी।
मंदिर पहुंच कर दादी ने पण्डित से एक शुभ सा दिन तय करवा लिया। बस पंडित को ये नहीं पता था कि जिसका उसने शादी का मुहुर्त देखा है वो बाप ओर बेटी है।
शादी 3 दिन बाद ही था।