• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

sexsarkar

Member
218
920
94
Update 6 :

दादी मां ने ठान लिया था कि प्राची की शादी उसके पापा से करा देगी। वो अपने बेटे को तड़पता नहीं देख सकती थी । प्राची भी जवानी की दहलीज पे आ ही चुकी थी। ऊपर से उसने तो अपने पापा का लौरा भी देख लिया था।

उस दिन जब पापा घर आए तो दादी ने डिनर खाने के बाद पापा से कहा : बेटा तुमसे कुछ बात करनी है।
पापा: हां मां बोलो ना।
दादी : बेटे मै तेरे लिए बहुत चिंता करती हु। तू अभी 40 का वो भी हुआ है और तेरे ऊपर इतना बड़ा पहाड़ टूट पर है। पत्नी नहीं रही। एक जीवनसाथी के साथ साथ तुमने अपनी ओर खुशियां वी खो दी है।
पापा : अब क्या करूं मा , भगवान ने यही लिखा था मेरे किस्मत में।

दादी : हां बेटा ,लेकिन भगवान इतना निर्दय नहीं है। एक रास्ता बंद करता है तो एक रास्ता खोल भी देता है।
पापा कन्फ्यूज हो रहे थे।

पापा : मा तुम किस बारे में बात कर रही हो।

दादी : बेटे , तुम अभी जवान हो । मै जानती हु जवानी में यौन सुख कितना जरूरी होता है। ओर बहु के जाने के बाद तुम्हारे लिए जिंदगी कितना मुश्किल हो गया है। ये मुझसे देखा नहीं जाता ।

पापा थोड़ा झेप से गए।

दादी : बेटा कल घर में कुछ ऐसा हुआ जिसने मेरे दिमाग में एक अलग विचार का दिया है।

पापा: क्या हुआ है मां।

दादी: बेटा बात ऐसी है कि कल जब तू बहु के अभाव में अपने आप को रात्रि में संतुष्ट कर रहे थे तब प्राची ने वो काम क्रिया देख लिया था।

पापा एकदम आवाक रह गए।
दादी : वो बहुत जिज्ञासा से तेरे उसके बारे में बात कर रही थी। मुझे लगता है वो यौवन के उस दहलीज पे आ गई है कि इन सब बातों से उसका मन रोमांचित हो गया होगा।

पापा एकदम से शर्मिंदा हो गए थे।

पापा: मा, मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है। मुझे ये ध्यान रखना चाहिए थे कि घर में नई नई जवान हुई दो लड़कियां वो है। मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। ये बात आपको वो पता नहीं लगानी चाहिए थी।

दादी: बेटा जो हो गया सो हो गया। मैने प्राची को सारी बाते समझा बुझा के उसके जिज्ञासा को भी शांत कर दिया है। मगर इस बात से मेरे मन में एक विचार आया है।

पापा: क्या विचार मा?

दादी : देख बेटे , मै तेरी मां हु और बच्चियों की दादी , मै हमेशा तुम लोगो के लिए अच्छा चाहती हु। मैं तुझे ऐसे नहीं देख सकती । इसी लिए मैने भी रिश्ता तेरे लिए लाया था ताकि तू अपना जीवन साथी के साथ अपनी आगे का जीवन सुखी से जी सकें। पर अब लग रहा है कि किसी वी बाहर के महिला को घर में लाने से घर बनाने से ज़्यादा बिखर जाने का ज्यादा डर है, पता नहीं वो महिला ,प्रज्ञा के साथ कैसे पेश आएगी। इसलिए कल के बार मेरे मन में विचार आया है कि तेरी जीवन संगनी अगर तुझे घर में ही मिल जाए ओर कोई प्रज्ञा का भी उसके मा के जैसी ही खयाल करे तो कितना अच्छा होगा। वो तुझे यौन सुख भी लेने देगी और घर को भी संभाल लेगी।

पापा: पर मा ये कौन सी लड़की की बात कर रहे है आप।

दादी: बेटा मैने सोचा है कि तू प्राची के साथ लगन कर ले।

पापा का दिमाग ठनक गया : क्या......!! ये क्या कह रही हो मा। जानती हो ना प्राची कौन लगती है मेरी । बेटी है वो। ये पाप मै कैसे कर सकता हु। ये ख्याल आपके मन में आया भी कैसे कि मैं अपनी बेटी से शादी के लूंगा । ये क्या वाहियात बात के दी अपने।

दादी: बेटे ,मै इसके बारे में बहुत सोची । मुझे भी पहले यही लगा कि ये रिश्ता कितना गलत होगा, लेकिन सोच , इस घर का एक महिला के बगैर क्या होगा । तू शराब में लिप्त हो गया है । मूठ मारने लगा है । कमजोर हो जाएगा । तुझे एक औरत की सख़्त जरूरत है और ऐसे में कही तो बाहर किसी रण्डी के चक्कर में पर गया तो लड़कियों का क्या होगा । मैं तो आज हु, कल नहीं। उसके बाद उनका देखभाल कौन करेगा। काम अग्नि बहुत खराब होता है बेटा। वो तुझे ऐसे काम करने पे भी मजबूर कर देगी जो तुमने कभी सोचा नहीं था। तू एक जिम्मेदार बाप है। मैं जानती ही तू अब किसी ऐसी महिला से शादी नहीं करेगा जो प्राची और प्रज्ञा की देखभाल ना कर सके। तुझे उनकी बहुत फिक्र है और मुझे तुम सब की । मै नहीं चाहती कि दोनों लड़कियों का भविष्य अंधकार में चला जाए। प्राची एक सुंदर और जवान लड़की है। अगर वो तेरे जिंदगी में आ गई तो तेरी सारी परेशानी खत्म । ओर ये सोच की अगर वो शादी कर के दूसरे घर गई ओर दोनों लड़कियां की शादी हो गई ओर कल को मै भी ना रही तो तू अपनी जिंदगी कैसे कटेगा। बेटा मै ये सोच के ही डर गई हु। मुझे ये निर्णय बिल्कुल बहुत सोचने के बात लेना परा है।
पापा के लिए ये एकदम सा विस्फोट की तरह था । उनकी खुद की मां उनको अपने ही कुंवारी ओर जवानी के दहलीज पे खड़ी बेटी के साथ शादी करवाना चाहती है। क्या मा ये भी जानती कि शादी के बाद पति पत्नी में क्या होता है। मैं अपनी बेटी के साथ ये सब कैसे कर पाऊंगा ।

पापा: मा तू जो बोल रही है वो बात मै समझ रहा हु। पर मैं ये कैसे कर सकता हु। अपनी ही बेटी के साथ। ना ना , ये गलत होगा मां। शादी के बाद तू जानती है न पति अपने पत्नी के साथ क्या करता है। तू कहती है कि मैं अपनी ही बेटी के साथ सुहागरात मनाऊं। ये मेरे से नहीं हो पाएगा ।

दादी: बेटा तू भूल जा कि वो तेरी बेटी है और तू उसका बाप। वो एक लड़की है और तू एक मर्द । तेरी बेटी प्रज्ञा को एक मां की जरूरत है और उसे अगर उसकी दीदी ही मां के रूप में मिल जाए तो उसके लिए ये कितने किस्मत की बात होगी। प्राची को वो अपने जिज्ञासा पूरा करने का मौका मिल जाएगा। वो तेरे हर अरमान पूरे करेगी। मै जानती हु कि सुहागरात में क्या करना होता है। ओर तू उसके साथ करेगा भी वही। इसीलिए तो तेरी शादी करवा रही हु मै ,की तू यौन सुख से वंचित न रहे आगे की जिंदगी में । ऊपर से याद कर की बहु ने जाते जाते क्या कहा था। उसने कहा था कि प्राची पापा का ख्याल रखना, ओर अपने छोटी बहन के लिए आज से तूही उसकी मां है। उसकी शायद यही इच्छा होगी कि उसका पति खुश रहे , उसकी बेटी खुश रहे । उसका परिवार खुशहाल रहे । और मैं भी वही चाहती हु बेटा। मेरी बात मान ले । इस घर को टूटने से बचा ले। अपनी बेटी को अपना ले

पापा: मा आपकी बाते एक मिनट के लिए मै मान भी गया तो प्राची को ये बात के लिए कैसे मनाओगे। क्या वो अपने ही बाप से शादी करने को तैयार होगी।

दादी : वो तू मुझ पे छोड़ दे बेटा । वो तेरा सामान देख चुकी है । उसके दिल में अरमान जग चुकी है। वो मान जाएगी । मुझ पे भरोसा रख।

पापा शर्माते हुए : ठीक है मा। आप अगर उससे राज़ी नहीं कर पाई तो ये बात यही खत्म कर देना।

दादी : ठीक है बेटा । मै अपने बेटे के लिए इस घर में शहनाई बजावा के ही मानूंगी।

दादी ने ठान लिया था कि वो पापा और बेटी का मिलन करवा के ही मानेगी।
 
Last edited:

sexsarkar

Member
218
920
94
Please keep commenting, or story ke baare me bataye ki kaisi lg rhi hai. Apke comments se hi aage likhne ka motivation milega. Agar apko story pasand nhi aayegi to likhne ka koi fayda nhi. Issliye ye jaruri hai ki app apne vichar sajha kre.

Thank you. Update will come regularly going forward.
 
Last edited:

Curiousbull

Active Member
1,387
2,181
158
Hot. Amazing pace. Please don't stretch unnecessarily in the future.

Very hot.
 
Last edited:

sexsarkar

Member
218
920
94
Update: 7
दादी ने प्राची से बात करने का मन बना लिया था। अगली सुबह पापा अपने काम पे निकल चुके थे । दादी ने मौका देखा और दोनों बहनों के रूम में जा के प्राची को बोला : प्राची बेटा , जरा मेरे रूम में आना ,कुछ बात करनी है।

प्राची : जी दादी अब आई।

प्राची ओर प्रज्ञा दोनों बहने साथ बैठे पढ़ाई हो कर रही थी।

प्राची दादी के पीछे पीछे उनके रूम में पहुंच जाती है ।

दादी : आ बेटा , इधर बैठ।

दादी ने प्राची को अपने बगल में बेड पे बिठा दिया।

प्राची : हां दादी बोलिए क्या बात करना था आपको।

दादी: बाबू, उस दिन जो तुम पापा को रात में करते देखी थी ना उसी बारे में।

प्राची दादी को जिज्ञासा भरी नजरों से देखने लगी: जी दादी बताइए ना।

दादी: बेटी , उस दिन जो पापा कर रहे थे ना वो एक मर्द तब करता है जब उसके लाइफ में कोई औरत नहीं होती। उसके कारण क्या होता है पता है।

प्राची : क्या होता है दादी?

दादी : उसके कारण एक मर्द कमजोर हो जाता है। अगर रोज उस तरह हिलाने की आदत तेरे पापा को लग गई तो ये अच्छी बात नहीं होगी। उसका शरीर खराब हो जाएगा और वो जल्दी बीमार भी पर सकता है।

प्राची घबराना गई: अरे दादी , इसका कुछ तो उपाय होगा।

दादी: हां मेरी बच्ची , इसका उपाय एक ही है, तेरे पापा को एक औरत की जरूरत है। एक औरत का गुप्तांग ही तेरे पापा को राहत दे सकता है।

प्राची : दादी गुप्तांग का मतलब मेरी इससे है क्या( अपने चुत की तरफ इशारा करते हुए बोली)।

दादी: हां बेटी ठीक समझी। तेरे पापा को उसकी की जरूरत है।

प्राची : पर दादी , पापा ने तो शादी करने से हो माना किया है। फिर कैसे मिलेगा उनको ।

दादी: पापा ने तुम लोगों के कारण ही मना किया है पागल । वो तुमलोगो को खुश देखने के लिए शादी नहीं कर रहा , वो बाहरी किसी औरत को नहीं ल सकता , पता नहीं वो तुम दोनों बहनों के साथ क्या सलूक करे। इसलिए मैने एक विचार किया है।

प्राची : हां दादी बोलो ना।

दादी : तेरी ओर पापा की शादी करने का फैसला लिया है मैने बेटा। मैं अपने बेटे के लिए तेरे हाथ मांगती हु।

प्राची : दादी ये आप क्या कह रही है , पापा और मेरी शादी? पापा मुझे शादी कैसे कर सकते है? मैं तो इनको बच्ची हु?
दादी : हां बाबू बच्ची तो हो ही अब उसकी संगनी बन जाओगी। प्रज्ञा की सोच , उसको मां की जरूरत है बेटा। पापा की सोच उसको एक पत्नी की जरूरत है। मुझे भी तो एक प्यारी सी बहु की जरूरत है न बेटी।

प्राची: पर दादी ये कैसे होगा, पापा नहीं मानेंगे , मै मां को धोखा कैसे दे सकती हु। मा पापा की पत्नी थी ना।

दीदी : मा भी तो तेरी यही चाहती थी बेटी की तू प्रज्ञा को मां का प्यार दे , चाहती थी या नहीं?

प्राची : हां दादी, मा ने यही बोला था।

दादी: वो जानती थी कि अब उसका रोल तुझे निभाना है इस घर में । प्रज्ञा का देखभाल तेरी जिम्मेदारी है। पापा का देख भाल भी तुझे ही करना जो। घर तुझे संभालना है बेटा। पापा को पत्नी सुख भी देना है तुझे ।

प्राची बहुत शर्मा गई। उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि दादी उससे कभी ये करने बोलेगी।

प्राची : पर दादी पापा क्या सोचेंगे । मैने तो कही सुना भी नहीं है कि एक बाप ओर बेटी , पति और पत्नी बने है।

दादी: पापा की टेंशन मत ले बेटी, वो मान गया है। उसे तू पसंद है। तेरी हां की जरूरत है।

प्राची अब पूरी लाल हो गई थी। मन में सोचने लगी, क्या सच में पापा को मै पसंद हु। बाप रे ये सब मेरे साथ क्या हो रहा है। मैं अपने की पापा के साथ शादी कर लूंगी। पापा क्या मेरे उसमें अपना लौरा डाल के अंदर-बाहर करेंगे । दादी ये क्या करवा रही है मुझ से ।

प्राची : पर दादी में तो अभी छोटी हु । ऊपर से कॉलेज भी खत्म नहीं हुआ है। अभी शादी कैसे कर पाऊंगी , कैसे निभा पाऊंगी।

दादी: बेटा लड़कियां 16 की उमर से ही इस लायक हो जाती है कि अगर उनके बच्चेदानी में बीज गया मर्द का तो बच्चा धारण कर सकती है, उस हिसाब से तू एक लायक पत्नी बन सकती हो। तेरे मासिक भी आते होंगे ? और अब तो तू ही वो 19 की गई है।

प्राची : हां दादी आते है।

दादी : तो हो गई बात, पढ़ाई तो जारी रख सकती है। बाहर किसी को भी हम नहीं बताएंगे कि घर में कोई शादी भी हुई है। समाज का कोई इन्वॉलमेंट भी नहीं होगा इस शादी में और शादी प्राइवेट होगा। प्रज्ञा को भी मै समझा लूंगी। तू अपने पापा का साथ देना खाली।

प्राची के पास अब कोई रास्ता नहीं बचा था। पापा को भी वो इस हालत में नहीं देख सकती थी ।

प्राची : दादी वो सब तो ठीक है। लेकिन तुम कह रही हो पापा शादी के बाद मेरे उसमें अपना लिंग डालेंगे , मगर दादी मेरा योनि तो बहुत छोटा है अभी। मै कैसे कर पाऊंगी?

दादी हंसने लगी , अरे बेट उसकी टेंशन तू मत ले। सब हो जाता है। तेरे पापा सब कर लेंगे आराम से ,तुझे तो बस पापा का साथ देना पड़ेगा ।

दादी मन ही मन प्राची के नादानी पर मुस्कुरा रही थी कि वो इतनी खुल के ये सब बाते अपनी दादी से कर रही थी।

प्राची: ओके दादी , जैसा आपको ओर पापा को ठीक लगे।

दादी का प्लान कामयाब हुआ। अब पापा ओर बेटी दोनों शादी के लिए राज़ी थे।

उधर प्राची के दिल में आग लगी थी, हाय ये क्या सब हो रहा है मेरे साथ। दादी ने तो मुझे फंसा दिया पापा के साथ मेरी शादी । मुझे अब मम्मी की तरह पापा के साथ उनके रूम में रहना पड़ेगा । वो मेरे साथ, बाप रे, वो तो मेरे साथ चूदाई भी करेंगे । मैं कैसे ले पाउंगी ?दादी तो इतना आसानी से कह रही थी, लेकिन पापा का तो मैंने देखा है ना , बहुत ही बड़ा था। नहीं नहीं, कैसे झेल पाऊंगी मैं?

इधर पापा का हाल भी अजीब था। अपनी बेटी के साथ ही सुहागरात मै कैसे मना पाऊंगा । मा ने तो हद कर दी है। लेकिन सोचे तो कह भी सही रही है। प्रज्ञा को मां तो चाहिए ही। प्राची तो 19 साल की है। मैं ठहरा 40 साल का । मेरा वो सह पाएगी क्या? मै अपने बेटी का ही सील कैसे तोड़ पाऊंगा? वो रोने लगी तो? उसको मेरे बच्चे की मां भी तो बनाना पर जायेगा शादी के बाद? ये कैसे होगा कि एक बाप अपने ही बेटी के कोख में अपना बीज गिराए और उसको प्रेगनेंट कर दे? शादी का मतलब मुझे ये कारण होगा।

पापा का रोम रोम खिल उठा इन ख्यालों को सोच कर । वो दिल से अब शादी का ख़्वाब देखने लगे। बाप ओर बेटी का मिलन होना तय हो गया था।

दादी ने अगले ही दिन , एक दूर के मन्दिर के पंडित से दिन तय करवाने के लिए निकल पड़ी।

मंदिर पहुंच कर दादी ने पण्डित से एक शुभ सा दिन तय करवा लिया। बस पंडित को ये नहीं पता था कि जिसका उसने शादी का मुहुर्त देखा है वो बाप ओर बेटी है।

शादी 3 दिन बाद ही था।
 
Last edited:
Top