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"न नही ऐसा न करो पैसे पता नही कहा गए मुझे नही पता सच मे।"
"सुधा की उम्र 48 है अभी इसको जो जो चोदना चाहता है चोद सकता है।
"बॉस मज़ाक कर रहे हो? रंगा और बिल्ला से चुदने के बाद भगोने में चमची कौन चलाएगा ?"
"हा हा हा हा हा हा हा हा हा"
"रंगा जब तक संतोष पैसे नही देता सुधा तुम दोनो की"
"नही नही रुक जाओ मैं सच में नही जानता पैसे के बारे में।"
" बाकी खेल कल होगा फ़ज़ल सैफ तुम लोग के साथ कल खेलूंगा।"
"संतोष को बांध दो " "सुधा को ले जाओ जितना मर्ज़ी करो "
सुधा के फेस पे एक स्माइल थी वो किस चीज़ की थी ये सिर्फ सुधा जानती थी।
रंगा सुधा को पकड़ ले गया ।सुधा खुद चली गयी ऐसा लगा।
अगली सुबह सैफ की बारी थी सैफ को इसी बात की टेंशन थी कि क्या होगा कैसे बच सकते है।सुबह तक सब परेशान थे।
सुबह बॉस आये साथ मे मंतशा भी थी 2 लड़कियों के साथ घिरी हुई।
"मंतशा को छोड़ दो मैं पूरा पैसा दे दूंगा हम सबको जाने दो हम आपके समधी है अब"
"अच्छा समधी जी फ़ज़ल साहब की बेटियों से शादी इसलिए करवाई ताकि वो पूरी ज़िंदगी मेरे बेटों से चुदे। बाकी तुमसे पैसे ले के भी तुमको मार दूंगा।"
तभी रेहाना और हिना को ले के दोनों बेटे भाई जी के आते है भाई जी के पैर छू के दोनों बहु उनसे बोलती है
"पापा जी मेरे अब्बू ने जो किया वो बहुत गलत और शर्म नाक है मैं आपसे आंख नही मिला पा रही हु शर्म से।आपने मुझे अपनी बहू बना लिया आप चाहते तो हमारे अब्बू के साथ हमे भी मार देते या कुछ भी कर सकते थे।इससे पता चलता है आप कितने अच्छे हो।
"हाँ पापा जी आपको जो करना है मेरे अब्बू के साथ आप कर सकते हो मगर क्या हम एक बार उनसे बात कर सकती है?"
"वो तुम्हारे पिता है जाओ उनसे मिलो और बात कर लो।"
वो दोनो अपने पिता के पास जाती है और बोलती है "अब्बू क्या मिला आपको उनका परिवार ख़त्म कर के क्या आप सुखी हो गए?क्या उन पैसों से आपने अम्मी को ज़िन्दा कर लिया? क्या आप हमें अपनी बेटी कहने के लायक हो ?"
"मुझे माफ़ कर दो बेटी मैं उस वक़्त केवल पैसे का भूखा हो गया था।"
"पैसों के।भूखे हो गए थे तो आपकी भूख मिट गई ?"खा लिया पैसा आपने ?""अरे आपने तो उनकी बीवी तक कि इज़्ज़त लूट ली आप इंसान ही नही हो।मुझे शर्म आ रही है आप पे।"
फ़ज़ल बहुत रोता है टूट जाता है अंदर से। भाई जी से हिना बोलती है"पापा जी अब्बू से हमे ये उम्मीद नही थी हम आपकी बेटी है अब ।"
"पापा जी आपको जो करना हो इनके साथ करो हम जा रही है अपने पति के साथ अगर आप कहोगे तो हम कुछ भी करेंगी आप के लिए।"
"जाओ बेटी अंदर जाओ"
"पापा जी एक बात पूछनी थी "जब सलमान मुझे होटल में मिलने आया था तो उसके कौनसे मा बाप मर गए थे जो वो मुझे छोड़ के चला गया था।"रेहाना
"हा हा हा हा हा बेटी उसका नाम सलमान नही संजीव है उसने अभी तक अपना नाम भी नही बताया ? उसको मैने कॉल किया था कि तुम मेरी बहु बनोगी क्यों के तुमसे प्यार करने लगा था तुमको देख के , तो मैंने कहा था तुरंत हटो वहां से कुछ करना नही है। मगर ये तुमसे मुझे ही मर गया बता के चला गया।"
"पापा जी शाहरूख का क्या नाम है? हिना
"उसका नाम रॉबिन है।"
दोनो अपने पति के साथ चली जाती है अंदर।
फिर मंतशा की तरफ मुड़ के भाई जी बोले "तो मंतशा आपके आशिक़ को बुलाऊ?"
"मेरा कोई आशिक़ नही है।"
"अच्छा मगर मेरे पास है।"
ताली बजाते ही एक औरत सामने से आयी दिखती है।जो साड़ी पहने थी।सैफ देख के बोलता है "आरती ?"
"आरती नही जाधव" वो बोला।
"तू आरती समझ के मुझे घर के काम बताता था मैं तेरी बीवी को चोदता था।"
"क्या बकवास है।"
"भरोसा नही तुझे?""ले ये देख वीडियो"
वीडियो स्टार्ट होता है एक दीवार में स्क्रीन पे। जिसमे मंतशा किचन में काम कर रही होती है। पीछे से आरती जाती है और उसको छेड़ने लगती है"क्या बात है मैडम आप बहुत सेक्सी हो "
"चल कैसी बात कर रही है तू आरती"
"सच ही कह रही हूं"
" अब कहाँ मैं सेक्सी रह गयी आरती "
"अरे कैसी बात कर रही हो ये कमर ये बुब्बे उफ़्फ़फ़ पीछे ये गोल गोल गदराई गाँड़"
"हाए अल्लाह बड़ी बेशर्म हो कैसे बोल रही हो।"
"क्यों क्या बोल दिया मैने?"
"बुब्बे गाँड़ मैं तो बोलने में भी शर्म आ जाये "
"वैसे आपके मुह से सुनने में अच्छा लग रहा है ।"
"चल बेशर्म".
"बेशर्मी अभी की कहाँ है?"
"तो अब क्या करेगी बेशर्मी के लिए?"
"मन हो रहा है आपको पकड़ के आपकी फुद्दी चाट लू"
"उफ़्फ़फ़ खुदा क्या तू मीठी है ?"
"नही मीठी नही हु मैं भूखी हु खाना न मिले तो जो अच्छा दिखे उसको खा लो।"
"मतलब तेरा पति तुझे चोदता नही है।"
"वाह मैं बेशर्म खुद बोलो चोदता तो वो बेशर्मी नही हुई।"
"नही चोदता "उदास मुह के साथ।
"चल कोई बात नही "
इतना सुनते ही आरती मंतशा से चिपक जाती है और उसको किस करने लगती है।मंतशा भी भूखी बिल्ली की तरह लिपट के किस करने लगती है।
अब आरती मंतशा की गाँड़ मसलने लगती है दोनो हाथ से और किस की इंटेंसिटी भी बढ़ जाती है। फिर अचानक से मंतशा की कुर्ती उतार देती है और बड़े चूचे पकड़ के मसलते हुए गर्दन में किस करने लगती है जिससे मंतशा कि चूत का पानी उसको नीचे आता महसूस होता है।तभी ब्रा को खींच के ऊपर से उतार देती है और चूचे को चूसते हुए मज़ा दिलाने लगती है ।आरती अपनी साड़ी उतार देती है और मंतशा कि लेग्गिंग्स भी उतार देती है और उसको किचन के बीच मे लगी मेज में बिठा के लिटा देती है और उसकी पैंटी उतार के चूत चाटने लगती है जिसे मंतशा गरम हो जाती है।
उसका मुह अपनी चूत पे चिपका लेती है।जिससे आरती और कस के चाटने लगती है। मंतशा कहती है "आरती कुछ कर न कुछ कर न "
"क्या करूँ बताओ"
"आग लगी हुई है मुई में जल रही है बुझा दे।"
"पक्का बुझा दु?"
"हाअह कुछ भी कर मगर बुझा।"
इतना सुनते ही आरती ने अपना पेटीकोट उतार के चड्डी उतारी जिससे उसका बड़ा लण्ड बाहर आ गया। 7 इंच लंबा और 4 इंच मोटा
जिसको देर न करते हुए अचानक से मंतशा की चूत की गहराई में उतार देती है।
"आह ये क्या डाल दिया तूने इतना मोटा ?""इतना मोटा कभी नही झेल पाउंगी "उफ़्फ़फ़फ़"
"अम्म्मआआस "
6 7 धक्के मार के पूरा जड तक ठंस जाता है लण्ड।
"आहहद मर्र्रर्रर गईईई मैं।" "क्या है ये उफ़्फ़फ़ अल्लाह इस्सस"
पूरी गहराई उतर के फिर लण्ड ने खेलना शुरू किया।चूत की गहराई से बाहर निकल के फिर जड़ तक पूरा अंदर अचानक से उसको उठा के गोद मे ले के ताबड़तोड़ 15 20 धक्के मार दिए जिससे मंतशा को चरमसुख मिलने लगा उसने आरती को कस के पकड़ लिया और अकड़ के झड़ने लगी। फिर आरती ने कहा घोड़ी बन जल्दी वो तुरंत घोड़ी बन गयी किचन की जमीन में और आरती ने तुरंत चूत में फसा के धक्के देने लगा।
"आह आरती क्या कर दिया तूने ये उफ़्फ़फ़ मुझे ऐसे कभी किसी ने नही झाड़ा"
"साली तू कितनो से चुदी है जो किसी ने नही झाड़ा तुझे बोल रही है "
"सैफ के अलावा 5 और लोगो से तुम 7 हो गए ।"
"वाह मादरचोद रंडी खूब चुदी है तू भी मगर चूत एकदम टाइट है तेरी।"
"हाए अल्लाह गाली दे रहे हो "
"गाली देने में मज़ा आता है सेक्स में मुझे "
"आहहद धीरे चोद मार देगा क्या "
"हां मार दूंगा फाड़ दूंगा तेरी चूत"
"हाअह तो फाड़ दे ना बहनचोद""धीरे क्यों चोद रहा है।"
"साली छिनार ले चुद फिर मुझे कह रही हाय अल्लाह गाली दे रहे हो खुद क्या बोल रही हो क़ुरआन के मिश्ररे "
चोदते हुए 15 मिनट हो गया और फिर झड़ गया साथ ही मंतशा भी झड़ने लगी और कस के पकड़ लिया और पैर अकड़ के सीधे हो गए। फिर तूफान रुकने के बाद उठी और बोली तू तो आदमी है फिर औरत क्यों बना है।?"
"सुधा की उम्र 48 है अभी इसको जो जो चोदना चाहता है चोद सकता है।
"बॉस मज़ाक कर रहे हो? रंगा और बिल्ला से चुदने के बाद भगोने में चमची कौन चलाएगा ?"
"हा हा हा हा हा हा हा हा हा"
"रंगा जब तक संतोष पैसे नही देता सुधा तुम दोनो की"
"नही नही रुक जाओ मैं सच में नही जानता पैसे के बारे में।"
" बाकी खेल कल होगा फ़ज़ल सैफ तुम लोग के साथ कल खेलूंगा।"
"संतोष को बांध दो " "सुधा को ले जाओ जितना मर्ज़ी करो "
सुधा के फेस पे एक स्माइल थी वो किस चीज़ की थी ये सिर्फ सुधा जानती थी।
रंगा सुधा को पकड़ ले गया ।सुधा खुद चली गयी ऐसा लगा।
अगली सुबह सैफ की बारी थी सैफ को इसी बात की टेंशन थी कि क्या होगा कैसे बच सकते है।सुबह तक सब परेशान थे।
सुबह बॉस आये साथ मे मंतशा भी थी 2 लड़कियों के साथ घिरी हुई।
"मंतशा को छोड़ दो मैं पूरा पैसा दे दूंगा हम सबको जाने दो हम आपके समधी है अब"
"अच्छा समधी जी फ़ज़ल साहब की बेटियों से शादी इसलिए करवाई ताकि वो पूरी ज़िंदगी मेरे बेटों से चुदे। बाकी तुमसे पैसे ले के भी तुमको मार दूंगा।"
तभी रेहाना और हिना को ले के दोनों बेटे भाई जी के आते है भाई जी के पैर छू के दोनों बहु उनसे बोलती है
"पापा जी मेरे अब्बू ने जो किया वो बहुत गलत और शर्म नाक है मैं आपसे आंख नही मिला पा रही हु शर्म से।आपने मुझे अपनी बहू बना लिया आप चाहते तो हमारे अब्बू के साथ हमे भी मार देते या कुछ भी कर सकते थे।इससे पता चलता है आप कितने अच्छे हो।
"हाँ पापा जी आपको जो करना है मेरे अब्बू के साथ आप कर सकते हो मगर क्या हम एक बार उनसे बात कर सकती है?"
"वो तुम्हारे पिता है जाओ उनसे मिलो और बात कर लो।"
वो दोनो अपने पिता के पास जाती है और बोलती है "अब्बू क्या मिला आपको उनका परिवार ख़त्म कर के क्या आप सुखी हो गए?क्या उन पैसों से आपने अम्मी को ज़िन्दा कर लिया? क्या आप हमें अपनी बेटी कहने के लायक हो ?"
"मुझे माफ़ कर दो बेटी मैं उस वक़्त केवल पैसे का भूखा हो गया था।"
"पैसों के।भूखे हो गए थे तो आपकी भूख मिट गई ?"खा लिया पैसा आपने ?""अरे आपने तो उनकी बीवी तक कि इज़्ज़त लूट ली आप इंसान ही नही हो।मुझे शर्म आ रही है आप पे।"
फ़ज़ल बहुत रोता है टूट जाता है अंदर से। भाई जी से हिना बोलती है"पापा जी अब्बू से हमे ये उम्मीद नही थी हम आपकी बेटी है अब ।"
"पापा जी आपको जो करना हो इनके साथ करो हम जा रही है अपने पति के साथ अगर आप कहोगे तो हम कुछ भी करेंगी आप के लिए।"
"जाओ बेटी अंदर जाओ"
"पापा जी एक बात पूछनी थी "जब सलमान मुझे होटल में मिलने आया था तो उसके कौनसे मा बाप मर गए थे जो वो मुझे छोड़ के चला गया था।"रेहाना
"हा हा हा हा हा बेटी उसका नाम सलमान नही संजीव है उसने अभी तक अपना नाम भी नही बताया ? उसको मैने कॉल किया था कि तुम मेरी बहु बनोगी क्यों के तुमसे प्यार करने लगा था तुमको देख के , तो मैंने कहा था तुरंत हटो वहां से कुछ करना नही है। मगर ये तुमसे मुझे ही मर गया बता के चला गया।"
"पापा जी शाहरूख का क्या नाम है? हिना
"उसका नाम रॉबिन है।"
दोनो अपने पति के साथ चली जाती है अंदर।
फिर मंतशा की तरफ मुड़ के भाई जी बोले "तो मंतशा आपके आशिक़ को बुलाऊ?"
"मेरा कोई आशिक़ नही है।"
"अच्छा मगर मेरे पास है।"
ताली बजाते ही एक औरत सामने से आयी दिखती है।जो साड़ी पहने थी।सैफ देख के बोलता है "आरती ?"
"आरती नही जाधव" वो बोला।
"तू आरती समझ के मुझे घर के काम बताता था मैं तेरी बीवी को चोदता था।"
"क्या बकवास है।"
"भरोसा नही तुझे?""ले ये देख वीडियो"
वीडियो स्टार्ट होता है एक दीवार में स्क्रीन पे। जिसमे मंतशा किचन में काम कर रही होती है। पीछे से आरती जाती है और उसको छेड़ने लगती है"क्या बात है मैडम आप बहुत सेक्सी हो "
"चल कैसी बात कर रही है तू आरती"
"सच ही कह रही हूं"
" अब कहाँ मैं सेक्सी रह गयी आरती "
"अरे कैसी बात कर रही हो ये कमर ये बुब्बे उफ़्फ़फ़ पीछे ये गोल गोल गदराई गाँड़"
"हाए अल्लाह बड़ी बेशर्म हो कैसे बोल रही हो।"
"क्यों क्या बोल दिया मैने?"
"बुब्बे गाँड़ मैं तो बोलने में भी शर्म आ जाये "
"वैसे आपके मुह से सुनने में अच्छा लग रहा है ।"
"चल बेशर्म".
"बेशर्मी अभी की कहाँ है?"
"तो अब क्या करेगी बेशर्मी के लिए?"
"मन हो रहा है आपको पकड़ के आपकी फुद्दी चाट लू"
"उफ़्फ़फ़ खुदा क्या तू मीठी है ?"
"नही मीठी नही हु मैं भूखी हु खाना न मिले तो जो अच्छा दिखे उसको खा लो।"
"मतलब तेरा पति तुझे चोदता नही है।"
"वाह मैं बेशर्म खुद बोलो चोदता तो वो बेशर्मी नही हुई।"
"नही चोदता "उदास मुह के साथ।
"चल कोई बात नही "
इतना सुनते ही आरती मंतशा से चिपक जाती है और उसको किस करने लगती है।मंतशा भी भूखी बिल्ली की तरह लिपट के किस करने लगती है।
अब आरती मंतशा की गाँड़ मसलने लगती है दोनो हाथ से और किस की इंटेंसिटी भी बढ़ जाती है। फिर अचानक से मंतशा की कुर्ती उतार देती है और बड़े चूचे पकड़ के मसलते हुए गर्दन में किस करने लगती है जिससे मंतशा कि चूत का पानी उसको नीचे आता महसूस होता है।तभी ब्रा को खींच के ऊपर से उतार देती है और चूचे को चूसते हुए मज़ा दिलाने लगती है ।आरती अपनी साड़ी उतार देती है और मंतशा कि लेग्गिंग्स भी उतार देती है और उसको किचन के बीच मे लगी मेज में बिठा के लिटा देती है और उसकी पैंटी उतार के चूत चाटने लगती है जिसे मंतशा गरम हो जाती है।
उसका मुह अपनी चूत पे चिपका लेती है।जिससे आरती और कस के चाटने लगती है। मंतशा कहती है "आरती कुछ कर न कुछ कर न "
"क्या करूँ बताओ"
"आग लगी हुई है मुई में जल रही है बुझा दे।"
"पक्का बुझा दु?"
"हाअह कुछ भी कर मगर बुझा।"
इतना सुनते ही आरती ने अपना पेटीकोट उतार के चड्डी उतारी जिससे उसका बड़ा लण्ड बाहर आ गया। 7 इंच लंबा और 4 इंच मोटा
जिसको देर न करते हुए अचानक से मंतशा की चूत की गहराई में उतार देती है।
"आह ये क्या डाल दिया तूने इतना मोटा ?""इतना मोटा कभी नही झेल पाउंगी "उफ़्फ़फ़फ़"
"अम्म्मआआस "
6 7 धक्के मार के पूरा जड तक ठंस जाता है लण्ड।
"आहहद मर्र्रर्रर गईईई मैं।" "क्या है ये उफ़्फ़फ़ अल्लाह इस्सस"
पूरी गहराई उतर के फिर लण्ड ने खेलना शुरू किया।चूत की गहराई से बाहर निकल के फिर जड़ तक पूरा अंदर अचानक से उसको उठा के गोद मे ले के ताबड़तोड़ 15 20 धक्के मार दिए जिससे मंतशा को चरमसुख मिलने लगा उसने आरती को कस के पकड़ लिया और अकड़ के झड़ने लगी। फिर आरती ने कहा घोड़ी बन जल्दी वो तुरंत घोड़ी बन गयी किचन की जमीन में और आरती ने तुरंत चूत में फसा के धक्के देने लगा।
"आह आरती क्या कर दिया तूने ये उफ़्फ़फ़ मुझे ऐसे कभी किसी ने नही झाड़ा"
"साली तू कितनो से चुदी है जो किसी ने नही झाड़ा तुझे बोल रही है "
"सैफ के अलावा 5 और लोगो से तुम 7 हो गए ।"
"वाह मादरचोद रंडी खूब चुदी है तू भी मगर चूत एकदम टाइट है तेरी।"
"हाए अल्लाह गाली दे रहे हो "
"गाली देने में मज़ा आता है सेक्स में मुझे "
"आहहद धीरे चोद मार देगा क्या "
"हां मार दूंगा फाड़ दूंगा तेरी चूत"
"हाअह तो फाड़ दे ना बहनचोद""धीरे क्यों चोद रहा है।"
"साली छिनार ले चुद फिर मुझे कह रही हाय अल्लाह गाली दे रहे हो खुद क्या बोल रही हो क़ुरआन के मिश्ररे "
चोदते हुए 15 मिनट हो गया और फिर झड़ गया साथ ही मंतशा भी झड़ने लगी और कस के पकड़ लिया और पैर अकड़ के सीधे हो गए। फिर तूफान रुकने के बाद उठी और बोली तू तो आदमी है फिर औरत क्यों बना है।?"