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sam21003

Mirtyu hi satya hai
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UPDATE 23

गीता देवी – क्या तूने अभय को बताई ये बात

राज – नही मां हवेली का नाम लेते ही वो ऐसा भड़का मानो साप की पूछ पर पैर मार दिया हो मैने वो कुछ सुनने को राजी नही है मां क्या करू मैं

गीता देवी – ऐसी क्या बात थी जिसके वजह से ये बात करने लगे तुम दोनो

राज – कुछ नही मां वो...वो...

गीता देवी – अब तू बहाने बनाने लगा है मुझसे

राज – नही मां वो बात ये थी (फिर राज ने गीता देवी को खंडर वाली बात बताई जिसे सुन के)

गीता देवी – तुम दोनो लड़को का दिमाग कुछ ज्यादा ही खराब हो गया है अगर अभय को नही पता उस खंडर के बारे में लेकिन तू तो जनता है ना माना कर देता तू

राज – मैने बोला मां उसे लेकिन फिर उसने उस रात के बारे में बताया जब वो घर से भाग गया था उसकी ये बात सुन के मुझे भी शक सा हुआ अब तुम ही बताओ क्या करू मैं वो एक बात सुनने को राजी नही उपर से आज रात वो अकेले जाने वाला है खंडर में

गीता देवी – (बात सुन आंखे बड़ी करके) उसे रोक राज रोक ले उसे खंडर में जाने से वर्ना अनर्थ हो जाएगा

राज – (शौक से) क्या हुआ मां तुम्हे तुम ऐसी बाते क्यों की रही हो

गीता देवी – तुझे नही पता लेकिन जो वहा गया लौट के कभी नहीं आया वहा से पड़ोस के गांव के 2 लोग पिछले 2 साल से गायब है आखरी बार उनको खंडर के रास्ते पर जाते देखा गया था उसके बाद आज तक नही दिखे दोनो

राज – मैं बात करता हू उससे मां तुम परेशान मत हो

राज से बात करने के बाद अभय निकल गया हॉस्टल की तरफ रास्ते किसी ने अभय को आवाज दी...

पायल – कहा जा रहे हो

अभय – (पलट के देख के) कैसी हो तुम

पायल – अच्छी हू तू कहा जा रहा है

अभय – हॉस्टल जा रहा हू , और तू कहा जा रही है

पायल – अपनी दोस्त से मिल के आ रही हूं घर चल ना मेरे मां और बाबा तुझे देख के खुश हो जाएंगे

अभय – पायल इस बारे में कुछ मत बोल किसी को भी

पायल – लेकिन क्यों ऐसा क्यों बोल रहा है तू

अभय – सब समझा दुगा तुझे बस अभी के लिए बात मान मेरी

पायल – आखिर तू इतने वक्त तक था कहा पर क्यों चला गया था घर से

अभय – मैं जहा भी था लेकिन अब तेरे साथ हू और तेरे साथ रहूंगा हमेशा

पायल – बात को टाल क्यों रहा है तू बताता क्यों नही

अभय – बताऊंगा सब बताऊंगा थोड़ा सब्र कर

पायल – जैसे तेरी मर्जी , कहा से आ रहा है तू

अभय – घूम रहा था खेतो में चल चलते है साथ में वही जहा घूमते थे हम साथ में

पायल – (मुस्कुरा के) अभी नही फिर किसी दिन अभी मां बाबा इंतजार कर रहे होगे घर में मेरा वैसे अगले महीने मेला लगने वाला है याद है ना तुझे

अभय – हा याद है

पायल – इस बार कुल देवी की पूजा साथ में करेगा ना मेरे

अभय – बिल्कुल करूंगा

पायल – चल ठीक है शाम को मिलेगा बगीचे में साथ में घूमेंगे

अभय – तू बोले मैं ना आऊं ऐसा हो सकता है भला आऊंगा पक्का

पायल – ठीक है शाम को मिलते है

इतना बोल के पायल निकल गई अपने घर और अभय निकल गया हॉस्टल की तरफ जबकि एक तरफ संध्या , चांदनी और शनाया गांव घूम के वापस जा रहे थे तभी रास्ते में कार का टायर पंचर हो गया कार रोक दी संध्या ने....

चांदनी – क्या हुआ ठकुराइन कार क्यों रोक दी

संध्या – शायद टायर पंचर हो गया है रुको देखती हू

बोल के संध्या कार से बाहर निकली देखा सच में टायर पंचर था तब संध्या तुरंत किसी को कॉल करने लगी लेकिन कॉल कोई रिसीव नहीं कर रहा था तब संध्या कार में वापस बैठ गई बोली...

संध्या – टायर पंचर हो गया है और ये मकैनिक कॉल नही उठा रहा है

चांदनी – आस पास कोई मकैनिक नहीं है यहां पर

संध्या – है लेकिन काफी दूर है यहां से

शनाया – कोई गांव का बंदा आस पास हो उससे मदद लेते है

तभी संध्या की कार के पीछे से कोई आ रहा होता है उनकी कार के बगल से निकल जाता है जिसे देख शनाया बोलती है...

शनाया – अरे वो देखिए कोई जा रहा है उसे बात करिए

शनाया की बात सुन संध्या तुरंत कार से निकलती है आगे जा रहे लड़के को आवाज देती है...

संध्या – अरे सुनो जरा मदद कर दो हमारी

आवाज सुन के जैसे ही लड़का पीछे देखता है तभी दोनो का सामना होता आपस में...

अभय – क्या बात है हवेली की इतनी बड़ी ठकुराइन को आज मदद की जरूरत पड़ रही है क्यों भला

संध्या –(अभय की बात चुप चाप सुन के धीरे से बोली) वो कार का टायर पंचर हो गया तो...

अभय – (बीच में) ओह इतनी बड़ी कार चलानी सीखी लेकिन एक टायर बदलना नही सीखा अरे मैं भी किसे बोल रहा हू ये बात जो खुद नकल कर के पास हुई हो , खेर मकैनिक को बुला लीजिए मैं खाली नहीं हू...

बोल के अभय जाने लगा तभी पीछे से किसी से आवाज लगाई जिसे सुन अभय हैरान हो गया...

शनाया – सुनो अभय रुक जाओ

अभय – (आवाज सुन के हैरान होके धीरे से पीछे मुड़ा सामने शनाया को देख के बोला) आप यहां पर

शनाया – तुम यहां पर

दोनो ने एक दूसरे को देख एक साथ बोला तब चांदनी भी निकल आई कार से बाहर...

चांदनी – आप जानते हो एक दूसरे के

चांदनी की बात सुन अभय ने जैसे ही चांदनी को देख कुछ बोलने जा रहा था तीन चांदनी ने डायर से सिर ना में हिला दिया जिस समझ के अभय बोला...

अभय – जी हम एक ही स्कूल में थे मैडम टीचर थी मैं स्टूडेंट , आप कॉन

चांदनी – मैं टीचर हू यहां के कॉलेज की अभी नई आई हू

अभय – जी

शनाया – अभय प्लीज मदद कर दो थोड़ी कार का टायर पंचर हो गया है

शनाया की बात मान कर अभय कार की डिक्की से स्टेपनी और जैक निकल के थोड़ी देर में टायर बदल देता है...

शनाया – कहा जा रहे हो तुम

अभय – हॉस्टल जा रहा हू

संध्या –(बीच में बोल पड़ती है) हम उसी रास्ते से जा रहे है हमारे साथ चलो छोड़ देती हू

शनाया – हा अभय इतनी धूप में पैदल जाने से अच्छा हमारे साथ चलो...

अपना मन मार कर मजबूरी में अभय हा कहना पड़ता है इससे पहले अभय कार में बैठने जाता शनाया पीछे बैठ गई और साथ में चांदनी भी बैठ गई पीछे मजबूरी में अभय को संध्या के साथ आगे बैठना पड़ता है जिस कारण संध्या हल्का मुस्कुरा देती है अभय को अपने साथ बैठा देख के कार आगे बड़ जाति है जब तक हॉस्टल आए तब तक संध्या सिर्फ अभय को देखती रहती है तिरछी नजरों से इस बात को अभय के इलावा चांदनी भी देख के मुस्कुराती है लेकिन अभय अपनी दीदी और शनाया मैडम की वजह से चुप चाप इंतजार करता है हॉस्टल के आने का...

हॉस्टल आते ही अभय कार से निकल के बोलता है...

अभय – अच्छा शुक्रिया आपका लिफ्ट के लिए मैं चलता हूं

शनाया –(बीच में बोल देती है) अभय इतनी भी जल्दी क्या है अपना हॉस्टल नही दिखाओगे हमे

अभय –(बे मन से मुस्कुरा के (मन में – क्या मुसीबत है यार ये भी) हा आइए

अभय हॉस्टल में लेके जाता है तीनों को अभय ने रूम में आते ही पंखा चालू कर दिया जिसके बाद शनाया बोली....

शनाया – अभय कितनी गर्मी है कमरे में तुम यहां पर कैसे रहते हो और कैसे सोते हो इससे अच्छा तो तुम अपनी आंटी के घर में सही थे

अभय –(मुस्कुरा के) आदत आदत की बात है मैडम (संध्या को देख के) वैसे भी आलीशान कमरे की आदत नही है मुझे मै भले जमीन में सोता हू कुछ पल की गर्माहट जरूर देता है लेकिन नीद सुकून की देती है ये जमीन , खेर मेरी तो आदत है मैडम आप बताए कब आए आप यहां पर

शनाया – मेरा प्रमोशन हो गया कॉलेज उसके बाद इंटरव्यू हुआ और मैं सिलेक्ट हो गई अब यहां तुम्हारे सामने हू यहां के कॉलेज की प्रिंसिपल बन के आई हू

अभय – ये तो बहुत खुशी की बात है मैडम , आप कहा पर रुकी है

शनाया – मैं हवेली में रुकी हू जब तक रूम तयार हो जाए टीचर्स के लिए

अभय – हा जितनी जल्दी बन जाय रूम उतना अच्छा होगा

शनाया – क्या मतलब

अभय – वो...मेरा मतलब है की रूम बन जाएगी तब तो आप पास में ही रहोगे हमारे हॉस्टल के रोज रोज इतनी दूर से आने जाने में दिक्कत नहीं होगी तब आपको

शनाया – हा बिलकुल...

संध्या –अगर आपको दिक्कत ना हो तो आप हवेली में रुक जाइए जब तक...

अभय –(बीच में) ऐशो आराम का ना तो शौक है और ना ही जरूरत है मुझे , यही सबसे ज्यादा सुखी हू मै

इस जवाब से संध्या इसके आगे बोलने की हिम्मत ना कर पाई लेकिन चांदनी ने बीच में बोल दिया...

चांदनी – (हल्के गुस्से में) शायद मैडम सिर्फ इतना कहना चाहती थी जब तक हॉस्टल में बाकी स्टूडेंट्स नही आ जाते तब तक आप हवेली में रह जाओ , रही ऐशो आराम की बात तो आदत जबरदस्ती नही बनती बल्कि बनाने से बनती है

अभय – (अपनी दीदी की बात समझ शांत मन से संध्या से बोला) मुझे पढ़ाई के लिए इससे अच्छी एकांत जगह नहीं मिल सकती आपने पूछा उसके लिए शुक्रिया...

संध्या कुछ बोलती उससे पहले चांदनी ने आखों से संध्या को इशारा कर निकल गए तीनों अपनी कार की तरफ कार में बैठते ही चांदनी बोली...

चांदनी – एक मिनट ठकुराइन मैं अपना बैग कमरे में भूल गई हू अभी लेके आती हू...

बोल के चांदनी तुरंत चली गई अभय के कमरे में जैसे ही अभय ने अपनी दीदी को आते देखा बोला...

अभय – क्या हुआ दीदी आप...

चांदनी –(बीच में बात को काट के) देख अभय ठकुराइन से तेरी जो प्रोब्लम है उसे अपने तक रख इस तरह किसी के भी सामने तुझे कोई हक नही बनता किसी की बेइजती करने का समझा

अभय – लेकिन दीदी आप जानते हो...

चांदनी – (बीच में) हा जानती हू इसका मतलब ये नही मैं अपनी इंसानियत भूल जाऊ...

बोल कर चांदनी अपना बैग लेके चली गई पीछे अभय चुप चाप अपनी दीदी को जाते हुए देखता रहा और मन में बोला....

अभय –(मन में–सही तो के रही है दीदी तुझे कोई मतलब नहीं है उस औरत से तू जिस काम के लिए आया है उसमे ध्यान दे इन हरकतों के कारण कही सच में तेरी दीदी नाराज ना हो जाए क्या बोलेगा मां को क्यों नाराज हुए दीदी तेरे से इसीलिए अपनी पढ़ाई और अपने काम से मतलब रख तू)

अपने मन में सोच रहा था अभय तभी सायरा ने आवाज दी..

सायरा – किस सोच में डूबे हो आईटी आई देर से आवाज दे रही हू सब ठीक तो है ना

अभय – हा सब ठीक है आप इस वक्त

सायरा – लगता है बहुत गहरी सोच में डूबे हुए थे खाना खाना भी याद नहीं है तुम्हे

अभय –अब आप हो ही इतनी सुंदर कोई खाना तो क्या सोना तक भूल जाए

सायरा – अच्छा ऐसा है तो सोचना छोड़ दो इतना ऐसे ही हाथ लगने वाली चीज नही हू मै समझे मिस्टर

अभय – तो आप ही बता दो कैसे हाथ लगोगे आप

सायरा – (मुस्कुरा के) ये सोचना तुम्हे है मुझे नहीं

अभय – (मुस्कुरा के) चलो एक काम करते है आज से अब से मैं और आप दोस्त बन जाते है सिर्फ अच्छे दोस्त ये ठीक है ना

सायरा – सिर्फ अच्छे दोस्त तो ठीक है इससे आगे(मुस्कुरा के)

अभय – हा इससे आगे क्यों सोचे दोस्त बन के ही काम चलाते है

सायरा – मतलब मानोगे नही दोस्ती कर के ही रहोगे

अभय – अगर आपको एतराज है तो रहने दो

सायरा – मुझे कोई एतराज नही (अभय से हाथ मिला के) आज से हम दोस्त हुए अब खुश

अभय – बहुत खुश

सायरा – चलो खाना खा लो पहले मुझे जाना है चांदनी ने बुलाया है काम के लिए

अभय – ठीक है...

दोनो ने खाना खाया साथ में सायरा चली गई शाम को आने क्या बोल के जबकि अभय बेड में लेट गया शाम को सायरा के जागने से अभय की नीद खुली उठते ही...

अभय – (नीद से जागते ही) वक्त क्या हुआ है

सायरा – वैसे तो शाम के 7:30 हो रहे है लेकिन तुम्हारे लिए बहुत बुरा है

अभय – बहुत बुरा मेरे लिए वो भला क्यों

सायरा – तुमने पायल से मिलने का वादा किया था भूल गए

अभय –(अपने सिर में हाथ रख के) अरे ये क्या हो गया मैं भूल कैसे गया यार अब तो नाराज हो जाएगी पायल

सायरा –(हस्ते हुए) घबराओ मत ऐसा कुछ नही होगा मैं मिल कर आई हू पायल से उसके घर में उसकी मां की तबियत ठीक नहीं है इसीलिए पायल नही निकली घर से अपने

अभय – क्या काकी की तबियत ठीक नहीं है लेकिन तुम क्यों गई थी पायल के घर

सायरा – याद है न मैं 2 साल पहले आई हू इस गांव में तब से सबसे मिल कर रहती आई हू कभी कभी मिलती रहती हू गांव की औरतों से छोटे छोटे काम के बहाने

अभय –(सायरा की बात सुन के) आखिर किस काम के लिए आई हो तुम यहां क्यों 2 साल से हवेली में नौकर बनी हुई हो

सायरा – अभय कुछ बाते ऐसी है मैं चाह के भी बता नही सकती तुम्हे और प्लीज ये बात मत पूछना दोबारा चांदनी ने मना किया है जब चांदनी को सही लगेगा तब वो तुम्हे खुद बता देगी भरोसा रखो चांदनी पर

अभय – (हल्का हस के) अपने आप से ज्यादा भरोसा है दीदी पर खेर तुम मत सोचो ज्यादा इस बारे में मन में आया इसीलिए पूछ लिया तुमसे

सायरा – (चाय देते हुए) ठीक है अब जल्दी से ये चाय पियो मैं खाना बना देती हू रात के लिए ठीक है

अभय – ठीक है

रात का खाना बना के सायरा चली गई अभय कुछ वक्त के बाद खाना खा के तयार बैठा था खंडर जाने के लिए रात के 12 बजते ही अभय निकल गया खंडर की तरफ अंधेरी रात के सन्नाटे में अभय अकेला चलते चलते आ जाता है खंडर के सामने


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चारो तरफ देखते हुए अभय धीरे धीरे चला जाता है खंडर में जहा सिवाय घनघोर सन्नाटे और अमावस्या की काले अंधेरे के सिवा कुछ नहीं था वहा पर चारों तरफ की दीवारें झाड़ियों से ढकी हुई थी


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तो कही टूटी फूटी दीवारे थी अभय ने पॉकेट से मिनी टॉर्च निकल के जैसे ही जलाने को हुआ था की तभी किसी आहट सुनाई दी अभय को जिसे सुन अभय एक दीवार के पीछे छिप गया वो आहट धीरे धीरे अभय के करीब आते हुए महसूस हो रही थी तभी अभय फुर्ती से दीवार की पीछे से निकल के उस शक्श के सामने आके हमला करने वाला था तभी उस शख्स को देख अभय ने टार्च से उसका चेहरा देख रुक गया और बोला...

अभय – राज तू यहां पर , साले अभी मारने वाला था तुझे , जब आना था तो बता देता मुझे साथ में आते हम

राज – (गुस्से में) ज्यादा बकवास मत कर तू , एक तो बिना बात करे चला गया उपर से मुझे सुना रहा है , मुझे पहले पता था तू यहां जरूर आएगा इसीलिए मैं भी आ गया तेरे पीछे

अभय – लेकिन बड़ी मां ने तुझे आने कैसे दिया

राज – मैं बोल के आया हू आज तेरे साथ सोओंगा हॉस्टल में

अभय – और बड़ी मां मान भी गई

राज – हा मान गई चल छोड़ ये बता कुछ पता चला यहां पर तुझे

अभय – अभी आया हू मै यार यहां

राज – मैं भी यार , चल साथ में देखते है



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दोनो मिल कर साथ में आगे बड़ गए सिवाय खंडर पड़ी दीवारों के कुछ दिख नहीं रहा था दोनो को तब राज बोला...

राज – यार यहां तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है और ये साला अजीब सी ठंडक जाने कहा से आने लगी है यार

अभय – हा यार मुझे भी लग रही है ठंड ऐसा लगता है जैसे मैं आ चुका हू पहले भी यहां पर

राज – किसके साथ आया था तू

अभय – याद नही आ रहा है यार अगर मैं सही हू तो आगे एक हॉल भी होना चाहिए

दोनो जैसे ही आगे बड़े सच में हाल में आ गए जिसके बाद राज बोला...

राज – तू सही कह रहा था यार यहां सच में हाल है

अभय – लल्ला ने बोला था बनवारी चाचा का बेटा आया था खंडर की तरफ जो अगले रोज बावली हालत में मिला था तो क्या वो सच में इतना अन्दर आया होगा या इससे भी आगे क्योंकि यहां तक तो ऐसा कुछ नही हुआ हमारे साथ

राज – तो चल आगे चल के देखते है ऐसा क्या देखा था बनवारी चाचा के बेटे ने

बोल के दोनो आगे बड़ने लगते है तभी ठंड पहले से ज्यादा लगने लगती है दोनो को...

राज – यार अब तो ठंड सी लगने लगी है अभय

अभय – नही राज ये ठंड नही ये ए सी की ठंडक है

राज – तुझे कैसे पता , यहां हाल में ए सी लगा हुआ है , लेकिन दिख नही रहा है कहा होगा

अभय – शालिनी आंटी के घर मैं ए सी में रहता था वही ठंडक है यहां पे भी एक काम कर राज हाल के चारो तरफ कमरे में दरवाजे लगे है तू उस तरफ़ दोनो दरवाजे देख मैं इस तरफ के दोनो दरवाजे देखता हू...

दोनो तरफ देखने के बाद...

अभय – यहां तो कुछ भी नही है यार तुझे कुछ मिला

राज –नही यार या भी कुछ नही है फिर इतनी ठंडक कहा से आ रही है यहां पर , (तभी राज ने एक तरफ देख बोला) अभय वो सामने देख कोने में एक और दरवाजे जैसा दिख रहा है...

उस तरफ देखते ही दोनो आगे बड़ गए देखने के लिए वहा पर जैसे ही वहा पहुंचे वैसे ही अभय बोला...

अभय – ठंडक यहां से आ रही है राज चले क्या अन्दर

राज – जब इतना आगे आ गए है तो चलते है देखा जाएगा जो होगा...

जैसे ही अन्दर गए दोनो अपने सामने वाले नजरे को देख कर दोनो की आखें बड़ी हो गई डर से क्योंकि जमीन पर एक आदमी का कटा हुआ सिर था राज हिम्मत कर के आगे गया जैसे ही राज ने सिर पर हाथ रखा...


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राज –(हस्ते हुए) अबे ये तो पत्थर का बना हुआ है भाई

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अभय – ओह तेरी की मुझे लगा साला किसका सिर आ गया यहां पर

राज ने इस पत्थर के सिर को उठा के एक मूर्ति पे लगा के..


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राज – भाई ये है इस मूर्ति का सिर है (हसने लगा) जिसके देख हमारी फट के चार हो गई थी😂😂

अभय – (कुछ सोच के) कही इसे देख कर ही तो बनवारी चाचा के बेटे की हालत वैसी तो नही हुई

राज – हो सकता है भाई यहां की हालत ऐसी है देख कर ही लग रहा है कोई भूत बंगला हो जैसे मुझे समझ में नहीं आ रहा है आखिर इस वीरान खंडर के अन्दर कोई कर क्या रहा होगा और अब तो ठंडक भी नही लग रही है यहां पर , भाई कसम से बोल रहा हू डर से मेरी फट रही है यहां पे

अभय –( कुछ सोचते हुए बोला) मुझे याद आ गया राज

राज – (चौक के) क्या याद आ गया तुझे

अभय – मैने कहा था ना कि ये जगह में आ चुका हू मै पहले

राज – हा कहा था लेकिन कब आया था तू यहां पर

अभय – यहां नहीं आया था मैं लेकिन ये जगह बिल्कुल हवेली की तरह है हर कमरा हर वो जगह जहा से हम आए है सब कुछ हवेली की तरह है यहां पे भी

राज – तू कहना चाहता है की दादा ठाकुर ने एक जैसे दो हवेली बनवाई थी

अभय – हा राज यहीं मुझे लग रहा है अगर मैं सही हू तो आगे इस दीवार की पीछे एक बड़ी सी गली बनी हुई है जहा बीचों बीच एक छोटा सा बगीचा बना हुआ है उसमे पानी और फूल होगे

जैसे ही दोनो आगे गए वहा का नजारा अलग था क्योंकि वहा पर तहखाना बना हुआ था...

राज – अबे यहां पर तहखाना का रास्ता बना हुआ है

अभय – (चारो तरफ देखता फिर उपर देख के बोला) वो देख राज छत खुली हुई है (बगल की सीडी से चढ़ के देख बोला) राज यह आके देख

राज – (सीडियो से उपर चढ के देख बोला) ये सामने तो रास्ता है कच्चा वाला

अभय – हा यही वो रास्ता है जिससे मैं निकला था तब यही से मुझे वो रोशनी आई थी इसका मतलब समझ रहा हैं तू

राज – हा समझ गया मेरे भाई हम बिल्कुल सही जगह पर आए है लेकिन यहां कहा से रोशनी आई होगी देख के भी समझ नही आ रहा है यार

अभय – तो चले तहखाने को देखने क्या बोलता है

राज – जैसे मैने पहले भी बोला फिर बोलता हू चल चलते है जो होगा निपट लेंगे साथ में यार....

बोल के जैसे ही आगे बढते है तभी दोनो को किसी की आवाज आती है जिसे सुन के दोनो एक साइड छुप जाते है लेकिन आवाज किसी की सही से समझ नही आती दोनो को...

राज –(धीरे से) ये आवाज कैसे थी यार

अभय –(धीरे से) पता नही भाई...

जब आवाज आना बंद हो गई तब दोनो अपनी जगह से निकल के बाहर आए कोई नही दिखा दोनो को जैसे ही आगे बड़े तभी अचानक से उनके सामने कोई आ गया जिसे देख दोनो की हवा टाइट हो गई अपने सामने उस आकृति को देख डर से आखें बड़ी हो गए जोर से चिल्ला के भागे दोनो....


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राज और अभय –(चिल्ला के भागते हुए) BBBBBBHHHHHOOOOOOOOOOOTTTTTTTT AAAABBBBBEEEEE BBBBBBAAAAAAAHHHHHHGGGGGOOOOOOOO

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चिल्लाते हुए इतने तेज भागे दोनो जैसे उनके पीछे किसी ने चीते को छोड़ दिया हो भागते भागते दोनो सीधे खंडर के बाहर निकल आए सीधे जाके अभय के हॉस्टल में रुके दोनो...
.
.
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जारी रहेगा..✍️✍️✍️
Darr ke aage jeet hai.
 

sam21003

Mirtyu hi satya hai
1,807
1,213
144
UPDATE 44


ENTER THE KING 👑


अलीता – कैसे हो ठाकुर अभय सिंह....

अभय –(चौक के) अलीता तुम मेरा मतलब आप यहां पर....

अलीता –(मुस्कुरा के) क्यों नहीं होना चाहिए था मुझे यहां पे....

अभय –आ...वो... एसी बात नहीं है आपको अचानक यहां देख सरप्राइस हो गया मै....

अलीता –(मुस्कुरा के) अच्छी बात है इनसे मिलो (एक लड़की की तरफ इशारा करके) ये है सोनिया....

अभय –(सोनिया से) हैलो सोनिया....

सोनिया –हैलो मिस्टर अभय....

अलीता – तुमने कहा था ना कोई एक्सपर्ट चाहिए तुम्हे जो हर काम में माहिर हो....

अभय – तो क्या ये वो एक्सपर्ट जो किसी का भी ट्रीटमेंट कर सकती है....

अलीता – (आंख मार के) हा हर काम में एक्सपर्ट है ये जैसी तुम्हे चाहिए....

अभय – (अलीता के आंख मारने से हैरान होके) ओह ठीक है लेकिन आपने बताया नहीं आप आ रहे हो....

अलीता – (हॉस्टल के अन्दर जाते हुए) कोई बात नहीं अब पता चल गया ना तुम्हे....

अभय –(अलीता के पीछे जाते हुए) लेकिन आप अंदर कहा जा रहे हो ये बॉयज हॉस्टल है यहां पर तो....

अलीता – (बीच में) पता है ये बॉयज हॉस्टल है और यहां पर तुम्हारे इलावा कोई नहीं रहता और कुछ ऐसा है जो मैं नहीं जानती....

अभय –(चौक के) हे अ...तो क्या आप यही रहोगे....

अलीता – (मुस्कुरा के) सिर्फ मै नहीं सोनिया भी यही रहेगी....

अभय –लेकिन मैने तो कमरा भी साफ नहीं करवाया है....

अलीता –(मुस्कुरा के) डोंट वरी हो जाएगा वो सब अब तुम घूमने बाद में जाना पहले जाके मेरे लिए अच्छा सा खाना लेके आओ बहुत जोर की भूख लगी है पर हा एक AC भी लेते आना साथ मिस्त्री को ले आना AC फिट करने के लिए तब तक हम फ्रेश हो जाते है....

बोल के तुरंत कमरे में चली गई अलीता पीछे से अभय और राज मू खोले खड़े रह गए....

राज – अबे ये कौन है बे हुकुम तो ऐसे चला रही जैसे हम इसके नौकर हो....

अभय –यार मैं क्या बोलूं अब इस बारे में....

राज – क्यों बे तू क्यों नहीं बोलेगा....

अभय – अरे यार समझा कर लड़की है वो ऐसे कैसे जवाब दे सकता हू भला मै....

राज – अच्छा तेरा मतलब वो जो कहेगी वो मानना पड़ेगा तुझे....

अभय –(अपना सर खुजा के) यार ये सब छोड़ चल चल के AC और खाने को लेके आते है कुछ....

राज – (अभय के सर में टपली मार के) अबे मै तुझे समझा रहा हु और तू मुझे भी अपने साथ नौकरों वाले काम करने को बोल रहा है....

अभय – अबे तेरे को नौकर कौन बना रहा है बे....

राज – अबे तू तो उसका नौकर बन गया मुझे भी साथ में घसीट रहा है और बोल रहा है नौकर कहा बना रहा हु....

अभय –(हाथ जोड़ के) बस कर मेरे भाई बस कर मेरी गलती चल पहले ये काम निपटा देते है फिर इस बारे में कुछ करता हू मै....

राज –अबे कुछ करता हु नहीं कर ले वर्ना नौकर बना देंगी ये तुझे....

दोनो निकल गए मार्केट की तरफ जबकि इस तरफ आज सुबह हवेली में चांदनी कालेज नहीं गई संध्या के साथ थी कल से सुबह नाश्ते के बाद....

संध्या – (चांदनी से) तू क्यों परेशान हो रही है चली जाती ना कॉलेज आज....

चांदनी – हा जाऊंगी पहले आप ठीक हो जाओ फिर....

संध्या – हवेली में और भी लोग है चांदनी....

चांदनी – अच्छा ये सब छोड़िए मौसी आप ये बताए आपकी लव मैरिज थी या अरेंज....

संध्या –आज अचानक से ये सवाल क्यों....

चांदनी – मन तो काफी दिनों से था सोचा आज पूछ लूं....

संध्या – (मुस्कुरा के) लव मैरिज थी....

चांदनी – और रमन की....

संध्या – अरेंज....

चांदनी –और प्रेम जी की....

संध्या –उनकी भी अरेंज थी , लेकिन बात क्या है बता तो....

चांदनी – बात कोई नहीं है मौसी जब एक आप ठीक नहीं होते आपके साथ हर वक्त रहना है मुझे तो इसी तरह टाइम पास होगा आपका भी और मेरा भी तो बताइए जरा कुछ बाकी की फैमिली के बारे में....

संध्या –जिसके लिए भी पूछ बताती हूँ....

चांदनी – सबसे पहले ये बताइए आपने कल मां से बोला था कमल ठाकुर के बारे में वो कैसे थे उनका बेटा उनकी बीवी के बारे मे कुछ....

संध्या – कमल ठाकुर बहुत ही सच्चे और अच्छे इंसान थे दौलत की कोई कमी नहीं थी उनके पास प्यार करने वाली एक सुंदर सुशील बीवी उनका नाम सुनंदा ठाकुर कमल ठाकुर की तरह सुनंदा दुनिया में अकेली थी कोई नहीं था उसका कमल ठाकुर से उनकी मुलाक़ात हमारे कुलदेवी के मंदिर में हुई थी मुलाक़ात बढ़ती गई दोनो प्यार हुआ और फिर दोनों ने एक दूसरे को जीवन साथी के रूप में अपना लिया कुछ समय बाद जनम हुआ अर्जुन का कमल ठाकुर कभी शहर में रहते तो कभी गांव में रहते मनन ठाकुर से इनकी दोस्ती शुरुवात से थी स्कूल और कॉलेज दोनो ने अलग अलग किया था मनन से मेरी मुलाक़ात कॉलेज के पहले साल में हुई थी उसके बाद कमल ठाकुर ने ही मेरे मां बाप को मनाया था मनन ठाकुर के साथ शादी के लिए उस वक्त कमल ठाकुर ने मनन के साथ रमन का रिश्ता भी करवाना चाहते थे मेरी बहन शनाया के साथ लेकिन शनाया किसी और से प्यार करती थी वो जानती थी मां बाप नहीं मानेंगे इसीलिए एक रात वो भाग गई घर से उसके बाद मेरे मां बाप बहुत परेशान थे गांव में बदनामी ना हो जाय जिस वजह से मेरी शादी ना टूटे तो उन्होंने कमल ठाकुर को ये बात बताई बात का पता चलते ही उन्होंने जल्दी से बड़े ठाकुर को स्थिति बताई और तुरंत ही मनन और मेरी शादी करवादी शादी के बाद जब हवेली में आई मै तब मेरी सास ने पहली बार सुनंदा जी से मुलाक़ात कराई मेरी कुछ वक्त के बाद हमारी अच्छी बनने लगी फिर रमन की शादी हुई और ललिता हमारे घर में आई सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था शादी के साल भर के बाद अभय आया फिर कुछ 15 से 20 दिन बाद ललिता को जुड़वां बच्चे हुए दिन खुशी से बीतने लगे हमारे कमल , सुनंदा और अर्जुन होली हो दीवाली हो हर त्यौहार हमारे संग मनाते थे अर्जुन तो जब भी हवेली आता था तो अभय को गोद में लेके घूमा करता था (हस्ते हुए) बोलता था चाची ये मेरा प्यार गुड्डा है कई बार अभय को गले लगाए सो जाता था अर्जुन को इस तरह अभय के साथ देख सब मुस्कुराते थे....

मुस्कुरा के इन सारी बात को बताते बताते संध्या अपनी हसी रोक एकदम चुप हो गई चांदनी इन बात को सुन मुस्कुरा रहे थी संध्या की चुप्पी को देख बोली....

चांदनी – क्या हुआ मौसी आप चुप क्यों होगए बताइए आगे क्या हुआ....

संध्या –(चांदनी के पूछने से अपने आप में वापस आके) फिर जाने किसकी नजर लग गई पहले बड़े ठाकुर फिर मनन , कमल और सुनंदा वक्त की आंधी के साथ ये भी चले गए दूर हम सबसे....

चांदनी – मौसी क्या आपने अर्जुन का और सुनैना का पता लगाया....

संध्या – बहुत कोशिश की मैने लेकिन मेरी सास और अर्जुन का कही कोई पता नहीं चला कभी....

चांदनी –चलिए कोई बात नहीं अब तो आप जानती हो ना अर्जुन के बारे में....

संध्या –हा शालिनी ने बताया मुझे जाने अब कैसा दिखता होगा अर्जुन....

चांदनी – जाने दीजिए मौसी जैसे अर्जुन का पता चल गया है वैसे ही सुनैना का पता चल जाएगा एक दिन....

संध्या – आज तक मुझे यही बात खटक रही है आखिर मेरी सास अचानक से क्यों गायब हो गई वो क्या वजह थी जिस वजह से ये सब हुआ....

चांदनी – आप परेशान मत हो मौसी सब कुछ पता चलेगा जल्द ही....

संध्या – चांदनी एक बात सच सच बताओगी मुझे....

चांदनी – हा मौसी आप पूछो तो सही....

संध्या – तुझे सच में ऐसा लगता है अभय हवेली वापस आएगा रहने हमेशा के लिए....

चांदनी –(मुस्कुरा के) मौसी इंसान को उम्मीद कभी हारनी नहीं चाहिए क्योंकि उम्मीद से ही ये दुनिया कायम है चलिए अब खाने का वक्त हो गया है खाना खा के दावा लीजिए आराम कीजिए फिर शाम को टहलने चलते है हम....

बोल के चांदनी व्हील चेयर से संध्या को टेबिल तक ले गई जहां सबने मिल के खाना खाया फिर सब अपने कमरे में जाके आराम करने लगे इस तरफ अभय और राज बाजार से सारा सामान लेके जब हॉस्टल वापस आय तो देख हॉस्टल के बाहर एक गाड़ी खड़ी है जो दिखने में एक दम नई लग रही थी हॉस्टल के अन्दर कमरे में आते ही दरवाजा खटखटाया....

अलीता –(कमरे का दरवाजा खोल सामने अभय को देख) अरे आ गए तुम समान लाए....

अभय – हा ले आया हु लेकिन बाहर वो गाड़ी किसकी है....


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अलीता –(मुस्कुरा के) क्यों अच्छी नहीं है क्या....

अभय – नहीं अच्छी नहीं बहुत अच्छी है लेकिन किसकी है कोई आया है क्या यहां पे....

अलीता –(मुस्कुरा के) यहां कोई नहीं आया है वो गाड़ी तुम्हारे लिए है....

अभय –(चौक के) क्या मेरे लिए लेकिन क्यों....

अलीता –(मुस्कुरा के) वो क्या है ना कि अब बाइक में हम तीन लोग एक साथ बैठ नहीं सकते लेकिन उस गाड़ी में बैठ सकते है हम इसीलिए मैंने मंगवाई तुम्हारे लिए ताकि जब भी हमें कही जाना होगा तो तुम लें जाना हमें साथ अपने , चलो आओ खाना खा लो तुम भी हमारे साथ....

अभय –नहीं आप खाओ खाना मुझे अभी भूख नहीं है....

बोल के अभय और राज निकल गए हॉस्टल के बाहर अभय को इस तरह भागता हुआ देख अलीता जोर जोर से हसने लगी इधर अभय और राज हॉस्टल के बाहर आके....

राज – देखा नौकर बना दिया तुझे उसने....

अभय – अबे तू क्या बात बोल रहा है जरा सोच तो सही गांव में कहा जाएगी वो ज्यादा से ज्यादा एक या दो बार घूमने को बोलेगी बस वैसे भी उनके मतलब का कुछ है भी गांव में (फिर चुप होके बोला) या शायद कुछ हो भी सकता है....

राज – अबे तु खुद कन्फर्म नहीं है अपनी बात से चल राउंड मार के आते है इसका मस्त गाड़ी है यार....

अभय – हा यार गाड़ी तो मस्त है ये लेकिन अभी धूप में कहा राउंड मारेगा यार शाम को चलते है....

राज – चल ठीक है मै घर जा रहा हु तब तक कर तू नौकरी उसकी....

बोल के हस्ते हुए राज घर चल गया इधर अभय हॉस्टल के अन्दर जाके मिला....

अभय – सोनिया आपसे एक काम है....

सोनिया – हा बताए....

अभय – मेरे कमरे में आइए कुछ दिखाता हूँ आपको....

कमरे में ले जाके जहा मुनीम और शंकर थे....

अभय –(बेड में लेते मुनीम को देख) इसकी एक टांग तोड़ी है मैने ठीक कैसे होगा ये....

सोनिया – (मुस्कुरा के) ठीक होके फिर से तोड़ना है क्या....

अभय – सोचा कुछ ऐसा ही है....

सोनिया – मुझे इसके लिए अपने कुछ सामान और मंगवाने पड़ेंगे और साथ एक रूम चाहिए अलग से ट्रीटमेंट के लिए लोगो के....

अभय – इस हॉस्टल में सभी कमरे खाली है आपको जो चाहिए ले सकते हो आप....

सोनिया – कमरे आज खाली है हमेशा तो नहीं रहेंगे ना....

अभय –(कुछ सोच के) आप उसकी फिकर बिल्कुल ना करे जल्द ही एक नई जगह बन जाएगी आपके काम के लिए अभी के लिए यही से काम चला लीजिए....

सोनिया – ठीक है....

बोल के मुनीम को एक इंजेक्शन दे दिया.....

सोनिया – इससे थोड़ी तकलीफ होगी इसे लेकिन आराम मिल जाएगा....

अभय – अच्छी बात है होने दीजिए तकलीफ इसे....

सोनिया – लगता है काफी नफरत है आपको इससे....

अभय –बचपन की नफरत है ये , खेर मैने इसी के लिए आपको बुलाया है बाकी तो आप समझ गए होगे....

बोल के अभय अपने कमरे में निकल गया इस तरफ....

रंजीत सिन्हा –(अपने आदमियों से) तुमलोग समझ गए ना क्या करना है....

आदमी – समझ गए सर....

रंजीत सिन्हा –(बाकी के आदमियों से) और तुम सब मेरे इशारे का इंतजार करना अगर कोई गड़बड़ हुई मैं इशारा करूंगा तुम लोगो को समझे....

आदमी – समझ गए....

रंजीत सिन्हा – बस आज काम पूरा हो जाए तो मैं तुम सब की लाइफ बना दूंगा....

शाम हो गई नई गाड़ी पर राउंड मारने के लिए राज आ गया हॉस्टल में अभय की तरफ जबकि हॉस्टल में अभय शाम को उठ के तयार हुआ था कि तभी....

अलीता –(अभय के कमरे का दरवाजा खटखटा के) अभय....

अभय –(कमरे का दरवाजा खोल अपने सामने अलीता को देख) आप क्या हुआ....

अलीता –(मुस्कुरा के) कुछ खास नहीं मन हुआ थोड़ा गांव घूम लू मै इसीलिए तुम्हे बुलाने आ गई चलो आज तुम मुझे गांव घुमाओ जरा....

अभय –(चौक के) मै आज लेकिन फिर कभी चलते है आज रहने दो ना....

अलीता – क्यों आज क्या है ऐसा....

इससे पहले अभय कुछ बोलता....

राज –(हॉस्टल में बोलते बोलते आ गया) चल अभय गांव घूमने चलते है....

इतने में अपने सामने अभय और अलीता को देख चुप हो गया....

अलीता –(मुस्कुरा के) अच्छा हुआ तुम आ गए मै भी अभय को यही बोल रही थी गांव घुमने को चलो जल्दी से घूम के आते है गांव....

बोल के अलीता और सोनिया बाहर चली गई पीछे से....

राज – अबे ये क्या है बे घूमने का प्लान अपना था अब ये कहा से आ गई....

अभय – अबे ये पहले से बोल रही थी मैं मना कर रहा था लेकिन तू बीच में आ गया गांव घूमने की बात बोलते हुए....

राज – मैने पहले बोला था ये नौकर बना देगी तुझे अब तो ड्राइवर बना देगी अपना....

अभय –अब क्या फायदा बोलने का चल घूम ले तू भी साथ में गांव....

बोल के बाहर आ गए जहां अलीता गाड़ी में आगे बैठी हुई थी जिसे देख....

अलीता –(गाड़ी में अन्दर बैठे के) चले अभय....

अभय –(राज को देख) हा चलते है....

बोल के राज गाड़ी में पीछे बैठ गया सोनिया के साथ और अभय ड्राइव करने लगा निकल गए गांव घूमने चारो जबकि हवेली में शाम होते ही चांदनी , संध्या , ललिता , मालती , निधि और शनाया हवेली और मैं गेट के बीच बने बगीचे में टहल रहे थे सभी बाते करते हुए इस तरफ रंजीत अपने लोगो के साथ गाड़ियों में निकल गया हवेली की तरफ संध्या का अपहरण करने के लिए इस तरफ अभय गाड़ी से घूमा रहा था अलीता और सोनिया को गांव तभी....

अलीता –(कुछ गाड़ियों को देख जिसमें कई लोग थे जो हथियार छुपा के बैठे थे उनपे नजर पड़ते ही) अभय ये इतनी सारी गाड़िया कहा जा रही है....

अभय –(गाड़ियों पे ध्यान न देते हुए) पता नहीं आय होगे गांव घूमने ये लोग भी....

अलीता –अच्छा गांव घूमने आए हथियारों के साथ....

राज –(बात सुन के) क्या हथियारों के साथ....

बोल के राज ने पीछे मूड के देखा....

राज – अभय ये गाड़िया तो हवेली की तरफ जा रही है....

अभय –(राज की बात सुन गाड़ी में ब्रेक लगा के) क्या बोल रहा है तू....

राज – सच में यार ये गाड़िया हवेली के रस्ते में जा रही है कही ये खंडर वाला कांड....

राज की बात सुन अभय ने तुरंत गाड़ी को मोड़ के तेजी से जाने लगा हवेली की तरफ जबकि कुछ ही समय में रंजीत अपने लोगो के साथ हवेली के बाहर आके चुपके से देखा जहा गेट के पास बने बगीचे में संध्या , चांदनी , ललिता , मालती , शनाया और निधि टहलते हुए बात कर रहे थे तभी रंजीत ने इशारा किया अपने लोगो को ग्रेनेड फेका जो बगीचे में टहल रहे लोगो के पास गिरा था तभी उसमें से गैस निकलने लगी जिसकी महक से सभी को कुछ समझने का मौका मिले बगैर बेहोश हो गए ये नजारा देख रंजीत अपने लोगो के साथ चलते हुए है बगीचे में आया संध्या की तरफ तभी अभय गाड़ी से हवेली के गेट से अन्दर आ गया....

अभय –(अलीता और सोनिया से) आप गाड़ी में बैठो मैं अभी आता हु....

बोल के राज और अभय गाड़ी से निकल पड़े बाहर....

रंजीत सिन्हा –(अभय को आता देख) अरे आओ आओ बेटा कैसे हो तुम सोच ही रहा था मैं तुम्हारे बारे में....

अभय –(रंजीत को देख चौक के) तुम यहां गांव में क्या कर रहे हो....

राज –(हैरानी से) तू इसे जनता है कौन है ये....

रंजीत सिन्हा –(मुस्कुरा के) मै हूँ रंजीत सिन्हा , चांदनी का पिता और शालिनी का पति....

अभय –(गुस्से में) मैने पूछा क्यों आया है तू यहां पर....

रंजीत सिन्हा – अपना अधूरा काम पूरा करने....

अभय – कौन सा अधूरा काम....

रंजीत सिन्हा – वही जो मुनीम नहीं कर पाया खंडर में....

अभय –(चौक के) मतलब तू भी शामिल था मुनीम के साथ....

रंजीत सिन्हा – (हस्ते हुए) बच्चे मै शामिल नहीं मै ही था शुरुवात से शामिल तो मुनीम को मैने किया था अपने साथ (अपने आदमियों से) खड़े क्या हो पकड़ के बांध दो अच्छे से दोनो को....

रंजीत की बात सुन चारो तरफ से आदमियों ने अभय और राज को घेर लिया और तभी अभय और राज ने चारो तरफ से एक साथ मारना शुरू किया लोगो को....


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अपने लोगो को मार खाता देख तुरंत ही रंजीत ने अभय और राज के सामने आके हाथ की मुट्ठी को खोल के फूक मारी जिससे हल्का सा पाउडर राज और अभय की तरफ आया जिसकी महक से दोनो एक पल के लिए हिल गए तभी अभय ने रंजीत का कॉलर पकड़ के....

अभय – (गुस्से में) मां के खातिर चुप था मैं वर्ना तुझे उसी दिन सबक सिखा देता लेकिन अब....

बोलते बोलते जाने कैसे अभय का सिर घूमने लगा कुछ बोल भी नहीं पा रहा था यही राज के साथ हो रहा था इससे पहले अभय जमीन में गिरता तभी पीछे से शालिनी और उसके साथ 2 हवलदारों आ गए तब शालिनी ने तुरंत अभय को पकड़ हवलदार ने राज को पकड़ लिया जमीन में गिरने से....

शालिनी –(अभय को देख जो बेहोश हो गया था) अभय अभय क्या हुआ तुझे उठ बेटा मै आ गई हु उठ जा....

रंजीत सिन्हा –(शालिनी को यहां देख चौक के) तुम यहां पे तुम तो चली गई थी आज सुबह ही वापस....

शालिनी –(गुस्से में अपनी बंदूक की गोलियां चलाई जिससे रंजीत के साथ खड़े 2 आदमी मारे गए) हा चली गई थी लेकिन सिर्फ दिखावे के लिए ताकि तू सामने आ जाय....

रंजीत सिन्हा –(हस के) उससे क्या होगा अब क्या करेगी तू और क्या करेगी तेरे ये 2 हवलदार....

बोलते ही रंजीत ने दोनो हवलदारों के सीने में गोली मार दी....

रंजीत सिन्हा –(हस्ते हुए) मैने भी बेकार में इतनी मेहनत की जो इतने लोगों को ले आया यहां सोचा कही (अभय की तरफ इशारा करके) ये पिल्ला हमारे बीच में ना आ जाएं लेकिन ये तो फूस हो गया एक बार में , अब तू किसे संभालेगी अपने इस पिल्ले को या ठकुराइन को....

शालिनी –(गुस्से में चिल्ला के) रंजीत सिन्हा जिसे तू पिल्ला बोल रहा है ये कोई मामूली लड़का नहीं ठाकुर अभय सिंह है इस हवेली का वारिस....

रंजीत सिन्हा – हा अच्छे से जनता हूँ इसे और इसकी मा को भी , लेकिन तुझे बीच में आने का बड़ा शौक है ना क्यों वापस आई तू....

शालिनी – (हस्ते हुए) तुझे क्या लगता है मैं यहां खुद आई हू , नहीं रंजीत सिन्हा मै यहां खुद नहीं आई बल्कि बुलाया गया है मुझे जनता है किसने बुलाया मुझे....

रंजीत सिन्हा – किसने बुलाया तुझे....

शालिनी – चांदनी ने बुलाया है मुझे यहां पर जनता है चांदनी को पहले ही शक हो गया था तुझपे सबके कॉल की सारी जानकारी निकाल और रिकॉर्डिंग भी जिसमें तेरी आवाज साफ सुनी तेरी बेटी ने अब समझ आया तुझे....

रंजीत सिन्हा –(हैरानी से) ये झूठ है ऐसा नहीं जो सकता कभी....

शालिनी –(हस्ते हुए) भूल मत रंजीत ये कोई मामूली लड़की नहीं चांदनी सिन्हा है CBI OFFICER बहुत हल्के में ले लिया तूने अपनी बेटी को....

रंजीत सिन्हा – (गुस्से में) ये सब इस पिल्ले की वजह से हो रहा है आज मैं इसे जिंदा नहीं छोडूंगा....

बोल के रंजीत अपनी बंदूक बेहोश पड़े अभय पे तान के....

शालिनी –(गुस्से में) तू इसे मारेगा हिम्मत है तेरे में उससे पहले वो तुझे मिटा देगा....

रंजीत सिन्हा –(हस्ते हुए) कौन मिटाएगा मुझे ये पिल्ला जो बेहोश पड़ा है तेरी गोद में....

शालिनी – (हस्ते हुए) तुझे क्या लगता है मैं इसके लिए बोल रही हू....

इस तरफ एक लड़का बाइक को तेजी से चलाते हुए गांव की तरफ बढ़ रहा था....


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शालिनी – (हस्ते हुए) नहीं रंजीत वो जहां भी जाता मौत की आंधी साथ लेके चलता है वो....
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और तभी वो लड़का अपनी बाइक में लगे ग्रेनेड की पिन हटा के कूद जाता है बाइक से हवा में उछाल के बाइक जाके टकराती है जीप से एक तेज धमके के साथ...

शालीन –(दूर से धमाके के आवाज सुन) सुन लिया ये धमाका (हस्ते हुए) आ गया वो....

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इस तरफ वो लड़का गुंडों के सामने आके चाकू से मारने लगता है सबको...
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अपने साथी को मरता देख कुछ आदमी बाइक से आने लगते है उस लड़के के पास....
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वो लड़का अपने चाकू को छोड़ उन सभी को उनके ही हथियार से मारने लगता है....
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कभी पीछे आके मरता तो कभी सामने आके मरता GIF-20241024-083637-439
तो कभी उनकी बंदूक से उन्हें मरता तो कभी उन्हीं की तलवार से मारता जाता सबको
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तभी कुछ लोग जीप में बैठ के हथियार लिए उस लड़के के पास आने लगते है GIF-20241024-083909-928
उनकी मशीन गन से उन्हीं पे गोलियां बरसता हुआ सबको मार के जीप में धमाका कर देता वो लड़का....

शालिनी –(हस्ते हुए धमाकों की आवाज सुन के) क्यों कही डर तो नहीं लग रहा तुझे....

रंजीत सिन्हा –(हैरानी से बेहोश अभय को देख) ये पिल्ला यहां है तो ये सब कौन कर रहा है....

शालिनी –(रंजीत के चेहरे पर डर देख हस्ते हुए) घबरा मत तू उसे अच्छे से जनता है , उसे देखे बगैर तू मारेगा नहीं रंजीत....

GIF-20241024-084520-129 तभी हवेली की तरफ वो लड़का गुंडों को मारते हुए आने लगता है सबके सामने आखों में चश्मा मू पे स्कार्फ लगाएGIF-20241024-084624-645
सभी को मारते हुए सामने आके खड़ा हो गया वो लड़का रंजीत के....

रंजीत सिन्हा –(मौत का ये नजारा सामने देख डर से) कौन हो तुम....

लड़का अपनी आखों से चश्मा हटा मू से स्कार्फ निकाल जैसे ही रंजीत उस लड़के की शकल देखता है....

रंजीत सिन्हा –(आंखे बड़ी करके डर और हैरानी से) KING 👑

इसके साथ रंजीत बुत की तरह खड़ा रह जाता है...

KING 👑– (रंजीत को देख के) ठाकुर का दुश्मन मेरा भी दुश्मन है (शालिनी से) आप ठीक है

शालिनी – (KING 👑 से) हा लेकिन ये रंजीत को क्या हुआ....

KING 👑 – देर हो चुकी है शालिनी जी रंजीत कब का मर चुका है....

शालिनी – (हैरानी से) क्या अब कैसे पता चलेगा हमे....

KING 👑 –(बीच में बात काट के) सब कुछ बाद में पहले (BOYS)....

शालिनी के साथ आय हुए हवलदार की वर्दी पहने जिसे रंजीत ने मारा था वो खड़े हो बॉडी से बुलेटप्रूफ जैकेट हटा के....

आदमी –जी सर....

KING 👑 – अपने लोगो को बुला के इन सारी बॉडीज को डिस्पोज कर दो (सोनिया से) इन सबको होश में लाओ....

सोनिया ने एक एक करके सबको होश में लाती गई आखिर में राज को फिर अभय को....

अभय –(होश में आते ही अपने आप को शालिनी की गोद में लेटा पा के) मां आप यहां , आप तो....

शालिनी –(मुस्कुरा के बात के बीच में) तू ठीक है ना....

अभय और राज एक साथ खड़े होके सामने का नजारा देख....


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अभय – (हैरानी से) मां ये सब किसने किया....

शालिनी – (एक तरफ इशारा करके) उसने किया है ये सब....

अभय –(अपने सामने KING 👑 को देख) तुम यहां पर....

KING 👑 – (मुस्कुरा के) कैसा है मेरा प्यार गुड्डा....

अभय –क्या गुड्डा कौन गुड्डा....

संध्या – (गुड्डा सुन KING 👑 को देख के बोली) अर्जुन....

KING 👑 –(मुस्कुरा के) हा चाची ARJUN THAKUR SON OF KAMAL THAKUR
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जारी रहेगा✍️✍️
Surprise surprise
What a pleasant surprise 🫢
 
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