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Adultery Adventure of sam and neha

malikarman

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मैंने लिफ्ट का बटन बहुत जल्दी-जल्दी दबाया, बार-बार, जैसे कोई और सेकंड बर्दाश्त न हो।मुझे वेट नहीं हो पा रहा था, इम्पेशेंटली नेहा का हाथ थामे खड़ा था, उसकी हथेली मेरी पसीने से गीली हो रही थी, लेकिन वो मुस्कुरा रही थी—एक नरम, शरारती स्माइल, जैसे वो मेरी इस बेचैनी का मजा ले रही हो।


उसने कभी मुझे इतना ईगर नहीं देखा था, उसकी आँखों में चमक थी, जैसे वो जानती हो कि मेरे अंदर क्या तूफान चल रहा है।रूम चौथी मंजिल पर था, और मैं सारे सीन से थक चुका था—लॉबी के वो घूरते चेहरे, वो गॉसिप, वो विंक—सब कुछ मेरे दिमाग में घूम रहा था, लेकिन अब सिर्फ एक ही चीज चाहिए थी: नेहा को अकेले पकड़ना।


लिफ्ट अभी भी नहीं आई, और मैं सोचने लगा—क्या इंतजार करूँ या नेहा को हाथ पकड़कर सीढ़ियों से भाग जाऊँ?मेरा दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि सीढ़ियाँ चढ़ने की थकान भी महसूस नहीं हो रही थी, बस वो इच्छा थी कि जितनी जल्दी हो सके, दरवाजा बंद करूँ और उसकी साँसों की गर्मी महसूस करूँ।


नेहा ने मेरी उँगलियों को हल्का सा दबाया, जैसे कह रही हो—“जल्दी करो, मैं भी तैयार हूँ।”मैंने फैसला कर लिया—लिफ्ट का इंतजार नहीं, सीढ़ियाँ ही सही, और नेहा का हाथ थामे मैं तेज़ कदमों से सीढ़ियों की तरफ बढ़ा .

हम लिफ्ट के पास खड़े रहे, मैंने सीढ़ियों का प्लान छोड़ दिया क्योंकि लिफ्ट तीसरी मंजिल पर रुकी हुई थी और अब नीचे की तरफ मूव करना शुरू कर दी थी।मैंने फैसला किया कि वेट कर लूँ, नेहा का हाथ अभी भी मेरी मुट्ठी में था, उसकी उँगलियाँ हल्के-हल्के मेरी हथेली पर खेल रही थीं, जैसे वो मेरी बेचैनी को और बढ़ा रही हो।

तभी रिसेप्शन से एक जोरदार “हायyyyy” की आवाज़ आई, इतनी तेज़ और चंचल कि मेरी नज़र खुद-ब-खुद वहाँ चली गई।एक बहुत अट्रैक्टिव यंग लड़की, करीब 25 की उम्र की, हाई हील्स में तेज़ कदमों से आ रही थी—बहुत छोटी स्कर्ट, जो हर स्टेप पर ऊपर सरक रही थी, और टाइट टैंक टॉप जो उसके कर्व्स को परफेक्टली हाइलाइट कर रहा था, उसके बाल खुले, होंठों पर ब्राइट लिपस्टिक, और वो कॉन्फिडेंस जो हवा में महसूस हो रहा था।
वो उसी बूढ़े आदमी की तरफ जा रही थी जिसने पहले नेहा से बात की थी, दोनों हाथ मिलाने वाले थे, उसकी स्माइल में कुछ शरारत थी, जैसे कोई पुराना खेल फिर शुरू होने वाला हो।मैं एक सेकंड के लिए रुक गया, वो लड़की का ग्लिम्प्स लेने की कोशिश कर रहा था—उसकी स्कर्ट का हेम, टैंक टॉप से झलकती स्किन, हाई हील्स की क्लिक-क्लिक—लेकिन तभी लिफ्ट का “टिंग” हुआ, दरवाज़ा खुल गया।

मेरा दिमाग दो हिस्सों में बँट गया—एक तरफ वो सेक्सी गर्ल का सीन देखने की इच्छा, दूसरी तरफ नेहा को रूम में ले जाकर सब कुछ अनलीश करने की जलन।मैंने नेहा का हाथ और सख्ती से पकड़ा, उसकी तरफ देखा—उसकी आँखों में वही चमक थी, जैसे वो कह रही हो “चलो, अब बस रूम ही चाहिए”—और मैंने वो ग्लिम्प्स छोड़ दिया, लिफ्ट में घुस गया।

लिफ्ट ऊपर चढ़ रही थी, मेरी साँसें अभी भी तेज़, नेहा मेरे बगल में खड़ी थी, उसकी बॉडी की गर्मी मुझे छू रही थी।चौथी मंजिल पर दरवाज़ा खुला, मैंने नेहा को अंदर खींचा, चाबी लगाई, और दरवाज़ा बंद करते ही वो सारी दुनिया बाहर रह गई—अब सिर्फ हम दोनों, और वो तनाव जो अब फूटने को तैयार था।

रूम में घुसते ही मैंने चारों तरफ नज़र दौड़ाई, हर कोने को स्कैन करते हुए—क्या कोई ट्रेस है?वेटर ने क्या किया होगा? नेहा की यूज़्ड ब्रा और पैंटी कहाँ रखी होगी? शायद छिपाकर, या खेल-खेल में कुछ किया होगा... लेकिन सब कुछ परफेक्टली नीट एंड क्लीन था, जैसे हम पहली बार किसी फ्रेश रूम में एंटर कर रहे हों।


बेडशीट्स क्रिस्प, तौलिए फोल्डेड, फ्लोर स्पॉटलेस—कुछ भी सस्पिशियस नहीं, कोई गंध नहीं, कोई निशान नहीं।मुझे रिलीव्ड होना चाहिए था, खुश होना चाहिए था... लेकिन इसके बजाय एक हल्की सी डिसअपॉइंटमेंट महसूस हुई, जैसे कोई उम्मीद टूट गई हो।


मैं इतना ईगर था रूम में आने का—नेहा के कपड़े फाड़कर उतारने का, आज लव नहीं, हार्ड फक करने का प्लान था, रफ, इंटेंस, बिना रुकावट के।लेकिन अब वो सारी एक्साइटमेंट जैसे हवा में उड़ गई, बॉडी में वो आग ठंडी पड़ रही थी, साँसें अभी भी तेज़ लेकिन वो जलन कम हो गई।


नेहा ने दरवाज़ा बंद किया, मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में अभी भी वही चमक थी।मैं बिस्तर पर बैठ गया, हाथों में सिर थामे—क्या हुआ? वो सारे सीन, वो घूरती नज़रें, वो गॉसिप... सब कुछ बाहर रह गया, और अब ये खाली, परफेक्ट रूम मुझे और खाली सा लगा।


फिर भी, नेहा मेरे पास आई, उसने मेरी कमर पर हाथ रखा, धीरे से मेरे कान में फुसफुसाई—“क्या हुआ? अभी भी उतना ही गर्म हो?”उसकी साँस मेरे गले पर लगी


नेहा ने धीरे से अपना हाथ मेरे क्रॉच एरिया पर रखा, उँगलियाँ हल्के से दबाकर मेरे लुंड की हार्डनेस चेक करने लगी... लेकिन वो सॉफ्ट था, पूरी तरह ढीला।उसने मुझे हैरानी से देखा, आँखें थोड़ी बड़ी हो गईं, जैसे कोई अनजाना सवाल उसके मन में आ गया हो।


"ये तो पब्लिक में इतना हार्ड था... लोग देख भी सकते थे... इतना टाइट... कार में भी, लॉबी में भी... अब क्या हो गया?"उसकी आवाज़ में मिक्स्ड सरप्राइज और थोड़ी चिंता थी, लेकिन आँखों में अभी भी वो शरारती चमक बाकी थी।


मैंने कुछ नहीं कहा, बस चुपचाप कंधे उचकाए, चेहरा बनाया जैसे मुझे खुद नहीं पता क्या हुआ।दिमाग में वो सारे सीन घूम रहे थे—घूरती नज़रें, गॉसिप, वो विंक—लेकिन अब वो आग कहीं ठंडी पड़ गई थी, जैसे सब कुछ बाहर ही रह गया।


नेहा ने हल्के से मुस्कुराया, फिर कहा, "इट्स ओके... मैं इसे फिर से हार्ड कर दूँगी।"उसने पहले मेरी जींस का बटन खोला, ज़िप नीचे की, और एक झटके में जींस और अंडरवियर दोनों को नीचे सरका दिया—मेरा लुंड हवा में बाहर आ गया, एवरेज साइज़, एवरेज मोटाई का, नॉर्मल, जैसा मैं जानता हूँ कि बहुत से लड़कों के पास इम्प्रेसिव साइज़ होते हैं, लेकिन मेरा बस एवरेज है, जैसा मैंने रियल लाइफ में देखा है।


वो मेरे सामने घुटनों पर बैठ गई, उसकी साँसें मेरे लुंड पर लग रही थीं, गर्म और नरम।उसने धीरे से हाथ में लिया, हल्के से सहलाया, जैसे कह रही हो—अभी सब ठीक हो जाएगा, बस थोड़ा टाइम दो।

मैं बेड पर बैठा था, पीठ तकिए से टिकी हुई, और नेहा मेरे सामने घुटनों पर थी—उसने धीरे से अपना टॉप उतारा, एक झटके में ऊपर से निकाला और ज़मीन पर फेंक दिया।वो लाल ब्रा में खड़ी थी, जैसे कोई देवी—उसकी स्किन की चमक, ब्रा के लेस से झलकते उभार, और वो कॉन्फिडेंट लुक जो मुझे हमेशा पागल कर देता था।


मैंने कॉलेज में कुछ अफेयर्स किए थे, लेकिन नेहा जैसी औरत कभी नहीं देखी—वो कभी हिचकिचाती नहीं, ब्लोजॉब देने में बिल्कुल नेचुरल, जैसे ये उसकी आदत हो।पहली बार से ही, वो वर्जिन थी या नहीं, मैं नहीं जानता, लेकिन उसने कभी नहीं बताया कि इतना अच्छा कैसे सक्शन करती है—बस करती रहती है, और मैं बस देखता रह जाता हूँ।


उसने मेरे लुंड को हाथ में लिया, पहले नाक से पास ले जाकर सूँघा, गहरी साँस खींची।"आह्ह... मैं तुम्हारी ये खुशबू बहुत पसंद करती हूँ," उसने कहा, आँखें बंद करके, "सिगरेट जला ... बस लेट जाओ और किंग की तरह एंजॉय करो।"


उसकी साँसें मेरे लुंड पर गर्म-गर्म लग रही थीं, वो धीरे-धीरे जीभ से टिप को छू रही थी, हल्के-हल्के चाटते हुए।मेरा लुंड अब फिर से सख्त होने लगा, वो सॉफ्टनेस धीरे-धीरे गायब हो रही थी—नेहा की आवाज़, उसकी खुशबू, उसका टच सब कुछ वापस जगा रहा था।

उत्तेजना में मेरा लुंड उसके मुँह में गहराई तक चला गया, एक झटके में, जैसे कोई रोक-टोक न हो।एक हाथ में लाइट सिगरेट थी, धुआँ हवा में घुल रहा था, और दूसरे हाथ से मैंने उसके बाल पकड़कर सख्ती से खींचे, उसे और गहराई तक धकेलते हुए—डीप, और डीप, बिना सोचे कि वो कितनी असहज हो रही होगी।


ये पहली बार था... मैं इतना सेल्फिश था, शादी के इस छोटे से समय में पहली बार।मैंने उसकी असुविधा पर ध्यान नहीं दिया, बस अपना प्लेजर, अपना कंट्रोल—उसे फोर्स कर रहा था, जैसे वो मेरी प्रॉपर्टी हो।


लेकिन नेहा ने कोई हिचक नहीं दिखाई, कोई विरोध नहीं।वो रियल स्लेव की तरह एक्ट कर रही थी—आँखें बंद, मुँह पूरी तरह भरा हुआ, मेरी हर पुश को बिना रुके सहन करते हुए, जैसे ये उसकी ड्यूटी हो।


मेरा लुंड उसके गले तक पहुँच गया था, उसकी नाक मेरे लोअर एब्डोमेन को छू रही थी, साँसें तेज़ और गर्म।मैंने नीचे देखा—उसके चेहरे पर वो एक्सप्रेशन, वो सरेंडर—और अचानक बोला, "आँखें खोलो... और मुझे देखो।"


ये मेरे लिए भी शॉक था।हम कभी सेक्स के दौरान इतने वोकल नहीं थे, कभी कमांड नहीं दी, कभी ऑर्डर नहीं—लेकिन आज कुछ अलग था, जैसे वो सारी रोक-टोक टूट गई हो।


नेहा ने धीरे से आँखें खोलीं, उसकी पुतलियाँ मेरी तरफ उठीं—वो नज़रें, वो वेटिंग, वो सबमिशन।उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन कोई शिकायत नहीं—बस एक गहरा, साइलेंट "आई एम युअर्स"।


मैंने सिगरेट का एक कश लिया, धुआँ उसके चेहरे पर छोड़ा, और फिर बाल खींचकर उसे और गहराई में धकेला।वो चोक हुई, लेकिन रुकी नहीं—बस मेरी आँखों में देखती रही, जैसे कह रही हो कि जितना चाहो, उतना कर लो।


अब वो पुरानी वाली आग फिर से भड़क रही थी, और ज्यादा इंटेंस, ज्यादा रफ।मैं जानता था कि आज रात ये सिर्फ शुरुआत है—बाकी सब कुछ और गहरा, और ज्यादा वाइल्ड होने वाला था।


जब मैंने उसे छोड़ा, तो नेहा गहरी-गहरी साँसें ले रही थी, खाँसते हुए, गले से वो कर्कश आवाज़ निकल रही थी।मैंने उसके बाल नहीं छोड़े, अभी भी मुट्ठी में जकड़े हुए थे—उसकी साँसें तेज़, चेहरा लाल, आँखें नम।


30 सेकंड में वो फिर से होश में आई, धीरे से सिर उठाया और मेरी आँखों में देखने लगी—वो नज़रें, वो सरेंडर, वो गहराई।मैंने सिगरेट उसके होंठों के पास ले जाकर रखी, वो कभी-कभी स्मोक करती थी, लेकिन हमेशा असहज लगती थी, जैसे मजबूरी में।


मुझे नहीं पता स्मोकिंग से औरतें और अट्रैक्टिव क्यों लगती हैं, लेकिन मैं कभी-कभी उसे फोर्स करता था एक-दो ड्रैग लेने को—वो ले लेती, लेकिन कभी कम्फर्टेबल नहीं दिखती।इस बार उसने बिना कुछ कहे सिगरेट ले ली, आँखें मेरी हीं में टिकी हुईं—एक गहरी कश ली, धुआँ फेफड़ों में भरकर धीरे-धीरे बाहर छोड़ा।


इस बार वो इतनी नेचुरल, इतनी कम्फर्टेबल लग रही थी—जैसे पहले वो बस एक्टिंग कर रही थी, और अब असली वाली नेहा सामने है।उसका चेहरा, होंठों पर धुएँ की हल्की सी लेयर, वो सेक्सी लुक—दमदार, गॉडडैम सेक्सी।


उसने फिर मेरे लुंड की तरफ देखा—वो अब पूरी तरह गीला था, उसके थूक से कोटेड, टिप से लेकर बॉल्स तक चमक रहा था।वो और पास आई, नाक मेरे लुंड की बेस पर छू गई, और फिर जीभ से मेरी बॉल्स को क्लीन करने लगी—धीरे-धीरे, चाटते हुए, जैसे वो उनका स्वाद ले रही हो।


मैं स्वर्ग में था—उसकी गर्म जीभ, वो गीली सनसनी, उसके बाल अभी भी मेरे हाथ में, सिगरेट का धुआँ हवा में तैर रहा था।हर टच, हर चाट मेरी बॉडी में बिजली दौड़ा रही थी—अब वो पुरानी आग फिर से भड़क चुकी थी, और ज्यादा तेज़, ज्यादा डीप।


नेहा ने एक बार ऊपर देखा, आँखों में वो चमक, होंठों पर हल्की स्माइल—जैसे कह रही हो, “अभी तो बस शुरुआत है।”मैंने उसके बाल और सख्ती से पकड़े, और उसे फिर से ऊपर खींचा—रात अभी लंबी थी, और मैं जानता था कि आज सब कुछ और वाइल्ड होने वाला है।
Nice update
Aapke likhne ka tarika thoda alag hai
Hot pics bhi add kijiye
 

Life_is_Short

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ओह्ह... नेहा मुझे ऐसे थ्रिल्स दे रही थी जो उसने कभी नहीं दिए थे।

मैं बस उसकी आँखों में देखता रहा, जबकि वो मेरी बॉल्स को चाट रही थी—धीरे-धीरे, जीभ से हर हिस्से को साफ करते हुए, जैसे कोई बिच अपनी मालिक की खुशबू सूँघ रही हो और चाट रही हो।

उसकी आँखें मेरी तरफ उठी हुई थीं, पूरी तरह सरेंडर, पूरी तरह सबमिसिव—वो नज़रें कह रही थीं कि वो मेरी है, सिर्फ मेरी, और जितना चाहूँ उतना यूज़ कर सकता हूँ।

उसकी जीभ गीली, गर्म, मेरी स्किन पर स्लाइड कर रही थी, थूक से चमकते हुए, और हर लिक के साथ मेरी बॉडी में बिजली दौड़ रही थी।

"आआह्ह... इसे अच्छे से क्लीन करो," मैंने उत्तेजना में चिल्लाकर कहा, आवाज़ भारी हो गई थी।

मैंने उसके बाल और सख्ती से पकड़े, सिर को थोड़ा नीचे दबाया—वो और गहराई में चली गई, नाक मेरे बेस पर दब गई, जीभ बॉल्स के नीचे से ऊपर तक घुमा रही थी, जैसे वो हर ड्रॉप को सोख लेना चाहती हो।

उसकी साँसें तेज़ हो गईं, लेकिन वो रुकी नहीं—बस चाटती रही, सूँघती रही, मेरी हर कमांड का पालन करती हुई।

मैंने सिगरेट का एक और कश लिया, धुआँ उसके चेहरे पर फेंका, और देखता रहा—वो कितनी सेक्सी लग रही थी, कितनी वाइल्ड, कितनी मेरी।

अब मेरा लुंड फिर से पूरी तरह हार्ड हो चुका था, पल्स कर रहा था, तैयार था अगले लेवल के लिए।

नेहा ने एक बार ऊपर देखा, होंठ गीले, आँखें चमकती हुईं—जैसे कह रही हो, “अभी और चाहिए? जितना चाहो, उतना लो।”

मैंने उसके बालों को और जोर से पकड़ा, जैसे कोई रस्सी हो जिसे खींचकर मैं उसे कंट्रोल कर रहा हूँ।

नेहा की सिर ऊपर-नीचे होने की रफ्तार बढ़ गई—तेज, गीली, गर्म आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।

मेरा लुंड अब पूरी तरह फड़क रहा था, टिप से प्रीकम लगातार टपक रहा था।

हर बार जब वो नीचे जाती, उसका माथा मेरे पेट से टकराता, और प्रीकम की बूंदें उसके गालों पर, नाक के नीचे, आँखों के ठीक नीचे गिर रही थीं।

वो बूंदें चमक रही थीं, जैसे कोई हीरे की तरह उसके चेहरे पर सजा हो।

उसकी डार्क ब्राउन आँखें मेरी तरफ टिकी हुई थीं—पूरी तरह खुली, पूरी तरह भूखी, पूरी तरह मेरी।

मैंने कभी उसे इतना एक्साइटेड नहीं देखा था।

उसकी पुतलियाँ फैली हुई थीं, साँसें तेज, होंठ सूजे हुए और गीले।

वो बस देखती रही, बिना पलक झपकाए, जैसे मेरी आँखों में ही उसकी सारी दुनिया सिमटी हो।

"आह्ह... नेहा... तू आज कितनी गंदी हो गई है..." मैंने भारी आवाज में कहा, और एक और कश सिगरेट का लिया।

धुआँ उसके चेहरे पर फेंका—वो थोड़ा सा सिकुड़ गई, लेकिन रुकी नहीं।

बल्कि और जोश से मेरी बॉल्स को चाटने लगी, जीभ नीचे से ऊपर तक घुमाती हुई, जैसे हर इंच को अपना बना रही हो।

मेरा क्लाइमेक्स अब कंट्रोल से बाहर होने वाला था।

सुबह तो मैंने सोचा था कि आज लंबा खेलूँगा, उसे घंटों तक तड़पाऊँगा... लेकिन ये नेहा... आज कुछ और ही थी।

उसकी आँखें, उसकी जीभ, उसका सरेंडर—सब कुछ मुझे पागल कर रहा था।

मैंने उसका सिर और तेजी से ऊपर-नीचे किया।

"और तेज... हाँ... ऐसे ही... अपनी जीभ निकालकर पूरा साफ कर..."


वो गुर्राई जैसी आवाज निकाल रही थी—नाक से, गले से—लेकिन मेरी हर बात मान रही थी।

मेरा लुंड अब उसके मुंह में आधा घुस चुका था, टिप उसके गले को छू रही थी, और प्रीकम उसकी जीभ पर फैल रहा था।

अचानक मैंने उसके बाल छोड़े, दोनों हाथों से उसके गाल पकड़े।

उसका चेहरा ऊपर उठाया—उसकी आँखें फिर मेरी आँखों में।

प्रीकम उसकी आँखों के नीचे चमक रहा था, होंठ लाल, गाल गीले।

"देख... कितनी सेक्सी लग रही है तू..." मैंने फुसफुसाते हुए कहा।

नेहा ने अचानक मेरी आँखों में देखा—उसकी डार्क ब्राउन आँखें अब और भी गहरी, और भी भूखी लग रही थीं।

वो धीरे से बोली, आवाज़ में एक अलग सी मिठास और कमांड मिली हुई,

"टी-शर्ट उतारो ।"

मैंने बिना सोचे एक सेकंड भी नहीं लगाया। टी-शर्ट उतारी और फेंक दी।

मेरा चेस्ट हेयरलेस था—साफ, चिकना, और हल्के से मैन बूब्स जैसा थोड़ा उभरा हुआ।

नेहा ने मुझे देखा, होंठों पर हल्की सी मुस्कान आई, जैसे कोई नया खिलौना मिल गया हो।

वो मेरे पास आई, दोनों हाथ मेरी कमर पर रखे, और सीधे मेरे निप्पल्स पर झुक गई।

उसकी जीभ पहले दाएँ निप्पल को छुई—धीरे से चक्कर लगाया, फिर हल्का सा काटा।

"आह्ह..." मेरी मुंह से निकल गई आवाज़।

आज सब कुछ नया लग रहा था—उसकी जीभ गीली, गर्म, और इतनी सॉफ्ट कि मेरी बॉडी में कंपकंपी दौड़ गई।

वो बारी-बारी दोनों निप्पल्स को चूसने लगी, जैसे कोई औरत को चूस रही हो।

एक हाथ से वो मेरे लुंड को सहला रही थी—धीरे-धीरे ऊपर-नीचे, दूसरा हाथ बॉल्स को मसल रहा था, हल्के से दबा रही थी।

मैं बस सिर पीछे करके, आँखें बंद करके महसूस कर रहा था।

उसकी साँसें मेरे चेस्ट पर पड़ रही थीं, गर्म, तेज।

वो अच्छे 4-5 मिनट तक यहीं रुकी रही—एक निप्पल को चूसती, दूसरा उँगलियों से खेलती, फिर स्विच।

मेरा लुंड अब इतना हार्ड था कि दर्द होने लगा था, प्रीकम लगातार टपक रहा था उसके हाथ पर।

फिर वो रुकी, ऊपर उठी, मेरी आँखों में देखा।

मैंने सिगरेट उसके होंठों के पास ले जाकर रखी।

उसने गहरा कश लिया—धुआँ अंदर खींचा, गाल अंदर धँस गए, फिर मेरे कान के पास आई।

धुआँ मेरे कान में छोड़ते हुए फुसफुसाई,

"कहाँ झड़ना चाहते हो...?"

मेरा दिल धड़क गया।

मैंने पहले भी कई बार उसके मुँह में लिया था, लेकिन ज्यादातर हम सेक्स करते थे और मैं उसके अंदर ही झड़ जाता था।

या फिर आखिरी पल में निकालकर फर्श पर... लेकिन ये... ये सवाल, ये तरीका...

ये कभी नहीं हुआ था।

वो मुझे चॉइस दे रही थी—और वो भी इतनी कैजुअली, इतनी सेक्सी तरीके से।

मैंने उसकी कमर पकड़ी, उसे और करीब खींचा।

उसकी साँसें अभी भी धुएँ से भरी थीं, होंठ गीले।

मैंने भारी आवाज में कहा,

"पहले तो मैं सोच रहा था... तेरे मुँह में... लेकिन अब..."

नेहा ने हल्के से हँसी, फिर मेरे होंठ चूमे—धीरे, गहराई से।

फिर कान में फिर से फुसफुसाई,

"बताओ ना... मैं सब कुछ करूँगी... आज सिर्फ तुम्हारी मर्ज़ी।"

मेरा दिमाग घूम रहा था।

कहाँ झड़ूँ? उसके मुँह में? उसके चेहरे पर? उसके चेस्ट पर? या कहीं और?

उसकी आँखें इंतज़ार कर रही थीं—पूरी तरह मेरी, पूरी तरह तैयार।

मैंने उसकी आँखों में देखते हुए, भारी साँसों के बीच कहा,

"मैं तेरे मुँह में झड़ना चाहता हूँ... सब कुछ... अंदर।"

नेहा ने बस मुस्कुराई—एक गहरी, सेक्सी, विजयी वाली मुस्कान।

फिर धीरे-धीरे नीचे सरकी, मेरे बदन को हर इंच पर किस करते हुए।

पेट पर, नाभि के पास, फिर नीचे... मेरे लुंड की जड़ तक।

हर किस गीली, गर्म, और इतनी धीमी कि मेरी बॉडी काँप रही थी।

अंत में वो फिर से मेरे लुंड के सामने थी।

मैंने उसके बाल फिर से सख्ती से पकड़े—इस बार जैसे वो मेरा खिलौना हो, मेरी पसंद की गुड़िया।

उसका चेहरा अब मेरे कंट्रोल में था।

मैंने उसे गहराई तक धकेला—एक झटके में, पूरा लुंड उसके गले तक।

"घोक... घोक... घोक..."

कमरा सिर्फ इसी आवाज़ से भर गया।

वो भाग नहीं रही थी—बल्कि हिस्सा ले रही थी।

उसकी जीभ मेरे नीचे घूम रही थी, गले से दबाव दे रही थी, जैसे मुझे और गहरा खींच रही हो।

मैं अपनी कमर ऊपर उठा रहा था, रिदम मैच करने के लिए—हर थ्रस्ट में और जोर, और गहराई।

उसकी आँखें चौड़ी हो गई थीं—पानी से भरी, लेकिन बंद नहीं।

वो अभी भी मुझे देख रही थी, जैसे कह रही हो, "और दो... सब कुछ दो।"

मेरा क्लाइमेक्स अब बिल्कुल किनारे पर था।

दिल की धड़कन कान में गूंज रही थी।

अचानक मैंने ग्रिप ढीली की।

खड़ा हो गया।

नेहा घुटनों पर थी, नीचे ज़मीन पर, मुँह पूरी तरह खुला, जीभ थोड़ी बाहर, इंतज़ार में।

उसकी आँखें ऊपर मेरी तरफ—भूखी, तैयार, मेरी।

3... 2... 1...

मैंने झटका दिया।

पहली फुहार—जोर से निकली, आधी उसके चेहरे पर गिरी (गालों पर, होंठों के किनारे), आधी सीधे उसके मुँह में।

फिर बाकी सब—परफेक्टली टारगेटेड, उसके खुले मुँह में।

एक के बाद एक, गाढ़ी, गर्म धारें।

वो सब सोख रही थी—बिना एक बूंद गिराए, जीभ से सब चाटते हुए।

मैं साँसें लेते हुए नीचे देख रहा था।

उसका चेहरा—प्रीकम और अब मेरा कम से चमकता हुआ।

होंठ सूजे, आँखें अभी भी मेरी तरफ।

जैसे ही आखिरी फुहार निकली, मैंने जोर से चिल्लाया—आवाज़ काँप रही थी, लेकिन साफ और कमांडिंग,

"स्वॉलो मत करना... पहले मुझे दिखा... रुक जा!"

नेहा ने तुरंत मान लिया।

वो एकदम स्टैच्यू की तरह फ्रीज हो गई—घुटनों पर बैठी, सिर थोड़ा पीछे, ठोड़ी ऊपर उठाई हुई, मुँह पूरी तरह खुला।

उसकी आँखें मेरी तरफ टिकी हुईं—बड़ी, चमकती, आज्ञाकारी।

मैं नीचे झुका, करीब से देखा।

उसके मुँह में सफेद, गाढ़ा तरल भरा हुआ था—मेरा सब कुछ, अभी-अभी निकला हुआ।

वो हिल नहीं रही थी, साँसें धीमी, लेकिन कंट्रोल में।

जीभ थोड़ी सी बाहर, जैसे वो मुझे दिखा रही हो कि सब कितना है, कितना गाढ़ा, कितना गर्म।

कुछ बूंदें उसके होंठों के किनारे से नीचे सरक रही थीं, लेकिन वो उन्हें चाट नहीं रही थी—बस इंतज़ार कर रही थी।

मैंने हाथ बढ़ाकर उसके गाल पर हल्के से थपकी दी, जैसे कोई अच्छी लड़की को इनाम दे रहा हो।

"बहुत अच्छी... देख कितना भर लिया तूने।"

मैंने अपनी उँगली उसके होंठ के पास ले जाकर एक बूंद उठाई, फिर उसे अपने होंठों पर लगाया—स्वाद लिया।

नेहा अभी भी वैसी ही थी—मुँह खुला, ठोड़ी ऊपर, आँखें मेरी आँखों में।

उसकी साँसें अब और गर्म लग रही थीं, नाक से हल्की-हल्की फड़फड़ाहट।

वो बिना बोले कह रही थी—अब क्या? क्या करूँ?

मैंने धीरे से कहा, आवाज़ अब थोड़ी नरम, लेकिन अभी भी मालिक वाली,

"अब... धीरे-धीरे घूँट ले... मुझे दिखाते हुए।"

उसने पलकें झपकाई—एक बार, जैसे हामी भरी।

फिर धीरे-धीरे गला हिलाया।

मैंने देखा—वो तरल उसके गले से नीचे उतर रहा था, एक-एक बूंद।

उसके होंठ हिल रहे थे, जीभ अंदर-बाहर हो रही थी, जैसे वो हर स्वाद को एंजॉय कर रही हो।

आखिरी घूँट के साथ उसने होंठ चाटे, फिर जीभ निकालकर दिखाया—साफ, चमकती।

"सब... अंदर चला गया," वो फुसफुसाई, आवाज़ रसीली, थकी हुई, लेकिन खुश।

फिर मुस्कुराई—एक छोटी, शरारती सी मुस्कान।

"अब... और कुछ चाहिए?"

मैं बस उसकी तरफ देखता रहा—पसीने से तर, चेहरा अभी भी मेरे निशानों से चमकता हुआ।

कमरा अब शांत था, सिर्फ हमारी साँसें और हल्की-हल्की खुशबू।

मैं बस उसे देखता रहा—घुटनों पर बैठी हुई नेहा, चेहरा अभी भी मेरे निशानों से चमकता हुआ, होंठ सूजे हुए, आँखें डार्क ब्राउन और इतनी गहरी कि उनमें डूब जाने का मन कर रहा था।

वो कभी इतनी एक्सी, इतनी इरोटिक नहीं लगी थी जितनी आज लग रही थी।

उसका पूरा बदन पसीने से तर, बाल बिखरे हुए, साँसें अभी भी तेज़—लेकिन उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी, जैसे वो अभी-अभी कोई बड़ा काम पूरा करके बहुत संतुष्ट हो।

वो फिर से मुँह खोला—धीरे से, ठोड़ी ऊपर करके।

अंदर सब साफ था, कोई बूंद नहीं बची।

उसने जीभ निकालकर दिखाया—चमकती, गीली, साफ।

फिर एक छोटी, शरारती सी मुस्कान दी—जैसे कह रही हो, "देखो... सब खत्म कर दिया... तुम्हारा सब कुछ अंदर।"

फिर उसकी नज़र नीचे गई—मेरे लुंड पर, जो अब थोड़ा सॉफ्ट हो रहा था, लेकिन टिप पर अभी भी कुछ बूंदें चमक रही थीं।

बिना एक सेकंड भी वेस्ट किए, वो आगे बढ़ी।

उसकी जीभ पहले टिप को छुई—धीरे से, जैसे कोई कीमती चीज़ को साफ कर रही हो।

फिर पूरी तरह लपेट लिया—जीभ से चारों तरफ घुमाकर, हर बूंद को चाट लिया।

वो साफ-साफ कर रही थी, जैसे ये उसका फाइनल रिचुअल हो।

हर लिक के साथ हल्की-हल्की सक्शन, जैसे आखिरी स्वाद को भी एंजॉय करना चाहती हो।

मैंने सिर पीछे करके आह भरी—"आह्ह... नेहा... तू आज क्या कर रही है..."

मेरा हाथ उसके बालों में फिर से चला गया, लेकिन इस बार सॉफ्टली, बस सहलाते हुए।

वो जारी रही—धीरे-धीरे, प्यार से, मेरे लुंड को पूरी तरह क्लीन करती हुई।

टिप से लेकर बेस तक, बॉल्स तक—सब कुछ।

उसकी जीभ गर्म, नरम, और इतनी स्किलफुल कि मेरी बॉडी में फिर से हल्की कंपकंपी दौड़ने लगी।

आखिर में वो रुकी, ऊपर देखा—होंठ गीले, चेहरा अब और भी ग्लो कर रहा था।

"सब क्लीन... अब बिल्कुल तैयार," वो फुसफुसाई, आवाज़ में एक अलग सी मिठास।

फिर मेरे पेट पर एक हल्का किस किया, जैसे थैंक यू कह रही हो।

मैंने उसे ऊपर खींचा—अपनी बाहों में लिया, दोनों एक-दूसरे से चिपक गए।

उसका बदन गर्म, नरम, और अभी भी काँप रहा था।

मैंने उसके कान में कहा,

"तू आज कुछ और ही लग रही है... जैसे पहली बार हो।"

नेहा ने मेरी छाती पर सिर रखा, हल्के से हँसी।

"शायद... आज मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ... पूरी तरह।"

कमरा अब शांत था—सिर्फ हमारी साँसें, और हल्की-हल्की खुशबू।

लेकिन मैं जानता था... ये अभी खत्म नहीं हुआ।
 

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नेहा ने क्लीनिंग का काम खत्म किया, धीरे से उठी—टॉपलेस, बदन पसीने से चमकता हुआ, स्तन अभी भी भारी-भरकम साँसों के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे।

उसकी आँखें मेरी तरफ—वो आज पावरहाउस थी, जैसे कोई आग लगी हो अंदर।

मैं बस उसे देखता रहा—1.5 घंटे बीत चुके थे, 7:30 से 9 बज गए, और हमारा ये "शो" अभी भी चल रहा था।

आमतौर पर तो आधे घंटे में खत्म हो जाता था—पहले ड्रिंक, फिर कम्फर्टेबल होकर सीधे सेक्स।

लेकिन आज कुछ और था।

मैं जानता था मैं क्यों इतना एक्साइटेड था—लेकिन नेहा? वो आज अलग लेवल पर थी।

मैंने खुद को रोक नहीं पाया।

उसके पास गया, दोनों हाथों से उसके चेहरे को पकड़ा और गहरा किस किया।

हमारी जीभें मिलीं—तेज़, भूखी, लड़ती हुई।

मैं अपने ही कम का स्वाद महसूस कर रहा था उसके मुँह में—नमकीन, गाढ़ा, गर्म—लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।

बल्कि और जोश आ रहा था।

एक हाथ उसकी गांड पर—कसकर दबाया, मसलता हुआ, दूसरा हाथ उसकी जींस के क्रॉच पर गया।

उँगलियाँ बाहर से ही रगड़ने लगीं—धीरे-धीरे, फिर जोर से।

उसकी जींस गीली हो चुकी थी वहाँ, गर्माहट महसूस हो रही थी।

मैंने जींस का बटन खोलने की कोशिश की—उँगलियाँ अंदर डालकर ज़िप नीचे करने लगा।

तभी नेहा ने किस तोड़ा।

पीछे हटी, मेरी आँखों में देखा—होंठ सूजे, साँसें तेज़।

"बेबी... वेट..." वो फुसफुसाई, आवाज़ में थकान और मुस्कान दोनों।

"मैं भूखी हूँ... और कुछ बियर चाहिए।"

मैंने हल्के से हँसा,

लेकिन अंदर से सोच रहा था—अब मेरी बारी है।

उसने मुझे इतना दिया है, अब मुझे उसे ऑर्गेज़्म देना है।

उसे तड़पाना है, चिल्लाना है, मेरे नाम से पुकारना है।

नेहा ने मेरी सोच पढ़ ली जैसे।

वो मुस्कुराई, मेरे सीने पर हाथ रखा, और बोली,

"मैं अभी-अभी तुम्हें ब्लो करके खत्म कर चुकी हूँ... अब मुझे रिलैक्स होने दे।"

फिर मेरी कमर में हाथ डाला, मुझे बेड की तरफ खींचा।

"बियर लाओ... साथ में कुछ खाने को।

फिर... जो करना है, वो धीरे-धीरे करेंगे।

आज रात अभी लंबी है।"

मैंने उसे देखा—वो अभी भी टॉपलेस थी, जींस का बटन खुला हुआ, आँखों में वही भूख।

मैंने रिसेप्शन पर कॉल किया और ऑर्डर दे दिया—कुछ स्नैक्स, दो कोल्ड बियर
15 मिनट बाद दरवाज़े पर नॉक हुई।

मैं अभी भी बेड के पास खड़ा था, नेहा बेड पर लेटी हुई—टॉपलेस, स्तन अभी भी हल्के से ऊपर-नीचे हो रहे थे, चेहरा पसीने और मेरे निशानों से चमकता हुआ।

सब कुछ फिर से फ्लैश हो गया मेरे दिमाग में—सुबह वाला वेटर, जो नेहा को देखकर थोड़ा अटपटा हो गया था।

क्या वही आएगा?

मेरा दिल धड़कने लगा।

मैंने नेहा की तरफ देखा, घबराते हुए कहा,

"कोई दरवाज़े पर है... कुछ पहन ले ना!"

नेहा ने बस मुस्कुराई—एक शरारती, तेज़ मुस्कान।

उठकर बैठ गई, दोनों हाथ पीछे करके बेड पर टिकाए, स्तन और भी उभर आए।

"बेबी... मैं ऐसे ही दरवाज़ा खोल सकती हूँ... क्या प्रॉब्लम है?"

फिर आँख मारकर, टॉन्ग बाहर निकालकर चाटते हुए बोली, "देखना चाहता है क्या वो कैसे रिएक्ट करता है?"

मेरा लिम्प डिक एकदम जाग गया—फिर से हल्का सा खड़ा होने लगा।

वो उठी, धीरे-धीरे दरवाज़े की तरफ बढ़ने लगी—टॉपलेस, जींस का बटन अभी भी खुला हुआ, कमर नंगी।

हर कदम के साथ उसके स्तन हिल रहे थे, और मेरी साँसें रुक रही थीं।

क्या ये सच में हो रहा है?

मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था—एक्साइटमेंट, डर, और जोश का मिक्स।

तभी नेहा रुकी, मुड़ी, मुझे देखकर हँसी—एक पूरी तरह मास्टर वाली हँसी।

फिर तेज़ी से बाथरूम की तरफ दौड़ी, दरवाज़ा बंद करते हुए आखिरी शब्द बोले,

"जा... खोल दे बेबी!"

दरवाज़ा बंद हो गया।

मैं अकेला खड़ा था—नंगा, दिल धड़कता हुआ, और डिक फिर से हल्का सा पल्स कर रहा था।

दरवाज़े पर फिर नॉक हुई—"साब... ऑर्डर..."

मैंने जल्दी से एक टॉवल लपेटा कमर पर, साँसें संभालीं, और दरवाज़ा खोला।

वही वेटर था—सुबह वाला।

उसने ट्रे आगे बढ़ाई, लेकिन नज़रें मेरे पीछे कमरे में घूम रही थीं—शायद नेहा को ढूँढ रहा था।

मैंने ट्रे ली, टिप दी, और जल्दी से दरवाज़ा बंद कर दिया।

अंदर मुड़ा तो बाथरूम का दरवाज़ा खुला था।

नेहा बाहर आई—अभी भी टॉपलेस, लेकिन अब एक छोटा सा टॉवल लपेटा कमर पर।

वो हँसते हुए मेरे पास आई, ट्रे से बियर की बोतल उठाई, और मेरे होंठों पर चूम लिया।

"डर गए थे ना?" वो फुसफुसाई, "लेकिन देखा... मैं कितनी शरारती हूँ आज।"

मैंने उसे बाहों में खींचा, बियर की बोतल उसके हाथ से छीनी, और कहा,

"तू आज पागल कर रही है मुझे... लेकिन अब बारी मेरी है।

बियर पी... खा... क्योंकि उसके बाद तुझे चिल्लाने का मौका मिलेगा।"

नेहा ने बियर का एक घूँट लिया, ठंडक महसूस करते हुए आँखें बंद कीं।

फिर मेरी तरफ देखा—आँखों में वही भूख।

"तो आओ... शुरू करो।

मैं तैयार हूँ... पूरी तरह।"

हम दोनों अब टॉवल में लिपटे हुए थे—मैंने कमर पर एक, नेहा ने भी छोटा सा टॉवल लपेटा हुआ था, जो मुश्किल से उसकी जांघों तक ढक रहा था।

टीवी ऑन था—कोई सॉफ्ट म्यूजिक चल रहा था, लाइट्स डिम, कमरा अभी भी हमारी गर्मी और बियर की ठंडक से भरा हुआ।

मैंने बेड पर बैठकर बियर की बोतल उठाई, एक घूँट लिया, ठंडक गले से नीचे उतरी।

नेहा मेरे बगल में बैठ गई, अपनी बोतल मेरे होंठों पर रखी—मैंने पीया, फिर उसने।

हम दोनों हँसते हुए एक-दूसरे को देख रहे थे।

फिर बिना कुछ कहे, मैंने उसे खींचकर किस करना शुरू किया।

धीरे-धीरे, गहराई से—हमारी जीभें फिर से लड़ने लगीं, बियर का स्वाद मिला हुआ।

मेरा एक हाथ उसके टॉवल के ऊपर से उसके स्तनों पर गया—नरम, गर्म, अभी भी थोड़े सूजे हुए।

मैंने हल्के से मसला, निप्पल्स को उँगलियों से घुमाया।

नेहा ने आह भरी, सिर पीछे करके—उसकी साँसें तेज़ हो गईं।

अचानक वो शरारत से हँसी, बोतल उठाई, और थोड़ा सा बियर अपने स्तनों पर डाल दिया।

ठंडी बूंदें उसके निप्पल्स से नीचे सरकने लगीं—चमकती हुई, सेक्सी।

वो मेरी तरफ देखकर बोली,

"क्या कर सकते हो... चाटोगे?"

मैंने बिना जवाब दिए झुक गया।

जीभ से पहले निप्पल को छुआ—ठंडा बियर और उसकी गर्म स्किन का मिक्स।

फिर पूरी तरह चाटने लगा—एक स्तन से दूसरा, बूंद-बूंद चाटते हुए।

नेहा की हँसी अब आहों में बदल गई—वो मेरे बालों में उँगलियाँ फेर रही थी, सिर दबा रही थी।

मैं नीचे सरकता गया—बियर की बूंदें उसके पेट तक पहुँच गई थीं।

उसकी नाभि गहरी थी—मैंने जीभ डालकर वहाँ से पी लिया, जैसे कोई कीमती शराब हो।

नेहा हँस पड़ी—प्लेफुल, शरारती हँसी।

"और नीचे... देखो क्या हो रहा है।"

उसने फिर बोतल उठाई, थोड़ा और बियर डाला—इस बार सीधे अपने पेट से नीचे, टॉवल के किनारे तक।

बूंदें उसकी जांघों पर सरक रही थीं, और अब उसकी पुसी तक पहुँच रही थीं—गीली, चमकती।

मैं नीचे झुका, टॉवल थोड़ा सा हटाया।

उसकी पुसी पहले से ही गीली थी—बियर की बूंदों से और भी चमक रही थी।

मैंने जीभ से चाटना शुरू किया—धीरे से, बियर का स्वाद, उसकी अपनी खुशबू का मिक्स।

नेहा अब जोर से हँस रही थी—प्लेफुल, लेकिन एक्साइटेड।

"आह्ह... बेबी... ऐसे ही... चाटो... सब पी लो..."

वो एक हाथ से सिगरेट जला रही थी—एक कश लिया, धुआँ ऊपर फेंका, दूसरा हाथ मेरे सिर पर।

दूसरी तरफ से वो उठाकर खा रही थी—मुँह में डालती, चबाती, और बीच-बीच में आहें भरती।

स्मोकिंग, ड्रिंकिंग, ईटिंग—और मैं उसके नीचे, उसकी पुसी को चाटता हुआ।

मेरा लुंड अब पूरी तरह हार्ड हो चुका था—टॉवल के नीचे फड़क रहा था।

नेहा ने नीचे देखा, मुस्कुराई।

" फिर तैयार हो गया... लेकिन पहले मुझे... मुझे जीभ से ही ..."

वो पैर फैलाकर लेट गई—बियर की बोतल साइड में, सिगरेट होंठों पर, आँखें मेरी तरफ।


नेहा के पैरों को और फैलाया, उसकी पुसी अब पूरी तरह मेरे सामने—गीली, गर्म, बियर की बूंदों और अपनी एक्साइटमेंट से चमकती हुई।

मैंने पहले जीभ से शुरू किया—क्लिटोरिस पर हल्के सर्कल बनाते हुए, धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई।

नेहा की बॉडी तुरंत रिएक्ट कर गई, कमर ऊपर उठी।

"आह्ह... सैम... हाँ... ऐसे ही..." वो मॉन करने लगी, मेरा नाम लेते हुए—सैम।

उसकी आवाज़ में हमेशा वाली इज्ज़त थी—कभी "तू" नहीं, हमेशा "तुम" या "आप"।

मैंने जीभ को और गहरा किया, लेकिन अब एक उँगली भी जोड़ी—धीरे से अंदर डाली।

उसकी पुसी इतनी गीली थी कि उँगली आसानी से सरक गई।

मैंने अंदर-बाहर करना शुरू किया—धीरे, लेकिन उँगली को कर्व करके उस स्पॉट को टच करते हुए।

नेहा ने तुरंत महसूस किया।

"सैम... हाँ... थोड़ा दायें... स्लाइट राइट... ओह्ह... येस... वो स्पॉट... ठीक वही..."

मैंने उसकी बात मानी—उँगली को थोड़ा दायें शिफ्ट किया, प्रेशर बढ़ाया।

जीभ अभी भी क्लिट पर काम कर रही थी—तेज़ फ्लिक्स, सर्कल्स, और कभी-कभी हल्का सक्शन।

नेहा के मॉन्स अब और जोरदार हो गए।

"सैम... अब दो उँगलियाँ... प्लीज़... दो... गू डीप..."

मैंने दूसरी उँगली भी डाली—दोनों साथ में, धीरे से अंदर-बाहर।

उसकी पुसी ने उन्हें टाइटली पकड़ लिया, गर्म और गीली।

मैंने स्पीड बढ़ाई—उँगलियाँ अब तेज़ी से मूव कर रही थीं, कर्व्ड करके G-स्पॉट को बार-बार हिट करते हुए।

जीभ क्लिट पर फिक्स—तेज़, कंसिस्टेंट।

नेहा अब बिस्तर की चादर पकड़कर चिल्ला रही थी—मेरा नाम जोर-जोर से, लेकिन इज्ज़त से।

"सैम... ओह्ह फक... सैम... गू डीप... हाँ... येस... ठीक वैसा ही... मत रुकना... फास्टर... सैम... मैं... आ रही हूँ..."

उसकी कमर अब पूरी तरह ऊपर उठ चुकी थी, पैर काँप रहे थे।

मैंने उँगलियों की स्पीड और प्रेशर और बढ़ाया—दोनों उँगलियाँ अंदर तक, बाहर निकालते हुए क्लिट को जीभ से साथ में।

नेहा की साँसें रुक गईं, बॉडी टाइट हो गई।

"सैम... येस... येस... सैम... आह्ह्ह्ह...!"

वो जोर से झड़ गई—इंटेंस, लंबा ऑर्गेज़्म।

उसकी पुसी मेरी उँगलियों पर पल्स कर रही थी, गर्म तरल निकल रहा था—मैंने उँगलियाँ अंदर रखीं, धीरे-धीरे मूव करते हुए उसे पूरा एक्सपीरियंस देने के लिए।

जीभ अभी भी हल्के से क्लिट को छू रही थी, ओवरसेंसिटिव लेकिन एक्स्ट्रा प्लेज़र के लिए।

नेहा की बॉडी हिल रही थी, आँखें बंद, मुँह खुला, साँसें तेज़-तेज़।

कई सेकंड बाद वो धीरे-धीरे नीचे आई।

आँखें खोलीं—पानी से भरी, चमकती हुई।

मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई, आवाज़ काँपती हुई लेकिन खुश।

"सैम... आपने... मुझे आज तोड़ दिया... इतना इंटेंस... दो उँगलियाँ... जीभ... सब कुछ... परफेक्ट..."

नेहा मुझे ऊपर खींचकर चूम रही थी, उसकी जीभ मेरी जीभ से लड़ रही थी—गहरा, गीला किस।

मैं उसके ऊपर लेटा हुआ था, टॉवल अभी भी कमर पर लिपटा हुआ, लेकिन मेरा लुंड अब पूरी तरह हार्ड, उसके पेट से टकरा रहा था।

उसने मेरे कान में फुसफुसाया, आवाज़ में वही इज्ज़त और शरारत मिली हुई,

"सैम... आप बताइए... अब क्या करना चाहते हैं? मैं तैयार हूँ... पूरी तरह आपकी।"

मैंने उसके होंठ फिर से चूमे, लेकिन दिमाग में एक विचार बार-बार आ रहा था—वो वेटर।

सुबह वाला वही लड़का, जो दरवाज़ा खोलते ही नेहा को टॉपलेस देखकर थोड़ा हक्का-बक्का हो गया था।

अब अगर वो बाहर खड़ा हो... अगर वो किसी तरह झाँक रहा हो... या कल्पना कर रहा हो कि अंदर क्या हो रहा है...

ये विचार मेरे अंदर एक अलग ही आग लगा रहा था।

क्या होगा अगर वो सुन रहा हो? हमारी आहें, नेहा का मेरा नाम पुकारना...

ये सोचते ही मेरा लुंड और सख्त हो गया, और मैंने नेहा को और जोर से दबाया।

"नेहा... अगर वो वेटर अभी भी बाहर हो... और सोच रहा हो कि हम क्या कर रहे हैं..." मैंने उसके कान में कहा, आवाज़ भारी।

नेहा ने हल्के से हँसी, आँखें चमकती हुईं।

"सैम... आप भी ना... वो सोचे तो सोचे... इससे क्या फर्क पड़ता है? बल्कि... इससे और मज़ा आएगा ना?"

वो मेरी कमर पर पैर लपेटकर मुझे और करीब खींच रही थी।

मैंने टॉवल हटाया—दोनों के।

अब हम दोनों पूरी तरह नंगे, एक-दूसरे से चिपके।

मैंने अपना लुंड उसके पुसी के ऊपर रखा—धीरे से रगड़ा, लेकिन अंदर नहीं डाला अभी।

नेहा की साँसें तेज़ हो गईं।

"सैम... प्लीज़... अंदर डालिए..."

मैंने धीरे से धक्का दिया—पहला इंच अंदर गया, वो टाइट, गर्म, गीली।

नेहा ने आह भरी—"आह्ह... सैम... हाँ... धीरे..."

मैंने और गहराई तक धकेला—पूरा अंदर।

हम दोनों एक साथ आह भरे।

फिर मैंने मूवमेंट शुरू किया—धीरे-धीरे, लेकिन गहराई से।

हर थ्रस्ट के साथ दिमाग में वही विचार—अगर वो वेटर बाहर हो... अगर वो सुन रहा हो...

ये सोच मेरे जोश को दोगुना कर रही थी।

मैं तेज़ हो गया—जोर-जोर से, नेहा की कमर पकड़कर।

नेहा अब मॉन कर रही थी—"सैम... ओह्ह... सैम... और जोर से... हाँ..."

मैंने उसके स्तनों को मसलते हुए कहा,

"नेहा... सोचो... अगर वो देख रहा हो... हम दोनों को... ऐसे..."

नेहा ने आँखें बंद कीं, मुस्कुराई—"तो देखने दो... इससे मुझे और अच्छा लग रहा है... सैम... आप और तेज़..."

मैंने स्पीड बढ़ाई—कमरा सिर्फ हमारी साँसों, थप्पड़ जैसी आवाज़ों, और नेहा के मॉन्स से भर गया।

वो विचार—वेटर का सोचना—मुझे और एक्साइटेड कर रहा था, और नेहा को और ज़्यादा प्लेज़र दे रहा था।

मैंने नेहा के बालों को धीरे से, लेकिन मजबूती से पकड़ा—सॉफ्टली, जैसे कोई प्यार भरी कमांड हो।

वो मेरी तरफ देख रही थी—आँखों में सवाल था, लेकिन विरोध बिल्कुल नहीं।

उसने बस हल्के से मुस्कुराई, जैसे कह रही हो, "जो आप चाहें, सैम... मैं आपकी हूँ।"

मैंने उसे खींचकर दरवाज़े की तरफ ले गया—दोनों पूरी तरह नंगे, कमरे की डिम लाइट में हमारी बॉडीज़ चमक रही थीं।

उसके कदम मेरे साथ चल रहे थे, बिना किसी रुकावट के।

दरवाज़े के ठीक सामने पहुँचकर मैंने उसे झुकाया—उसके गाल ठंडे दरवाज़े से रगड़ रहे थे, साँसें तेज़ हो गईं।

मैंने उसके बालों को अपनी मुट्ठी में और सख्त किया, लेकिन दर्द नहीं—बस कंट्रोल।

मैंने अपना लुंड उसके पुसी पर टच किया—वो पहले से ही गीली, गर्म।

नेहा ने खुद अपने पैर थोड़े फैलाए—बिना कुछ कहे, बस मुझे इनवाइट करने के लिए।

एक झटके में मैंने पूरा अंदर डाल दिया।

"आआआह्ह्ह..."

हम दोनों की एक साथ आह निकली—उसकी आवाज़ ऊँची, मेरी भारी।

उसकी पुसी ने मुझे टाइटली पकड़ लिया, जैसे कभी छोड़ना ही न हो।

फिर रिदम शुरू हुआ—धीरे-धीरे, लेकिन गहराई से।

हर थ्रस्ट के साथ उसका सिर हल्का-हल्का दरवाज़े से टकरा रहा था—नरम, लेकिन रिदम में।

"आह्ह... सैम... ओह्ह..." वो मॉन कर रही थी, नाम लेते हुए, इज्ज़त से।

"आप... और गहरा... प्लीज़..."

मैं तेज़ हो गया—जोर-जोर से धक्के, कमर पकड़कर।

दरवाज़ा हल्का-हल्का हिल रहा था, बाहर से सुनाई दे रहा होगा।

मेरा दिमाग फिर उसी विचार में चला गया—वो वेटर... या कोई और... बाहर खड़ा हो... सुन रहा हो हमारी हर आवाज़।

नेहा की आहें, मेरी साँसें, थप्पड़ जैसी आवाज़ जब मेरा लुंड अंदर-बाहर हो रहा था।

क्या वो कल्पना कर रहा होगा कि हम दोनों यहाँ... ऐसे... दरवाज़े के ठीक पीछे?

ये सोचते ही मेरा जोश दोगुना हो गया।

मैंने उसके बाल और सख्त पकड़े, सिर थोड़ा पीछे खींचा—उसकी गर्दन एक्सपोज़ हो गई।

मैंने उसके कान में फुसफुसाया,

"नेहा... सोचो... अगर कोई बाहर हो... सुन रहा हो... हम दोनों को..."

नेहा ने आँखें बंद कीं, होंठ काटे, फिर मुस्कुराई—आवाज़ काँपती हुई,

"सैम... तो सुनने दीजिए... इससे मुझे और अच्छा लग रहा है... आप और जोर से... प्लीज़..."

मैंने स्पीड बढ़ाई—अब हर थ्रस्ट में पूरा बल।

उसका गाल दरवाज़े से रगड़ रहा था, सिर हल्का-हल्का टकरा रहा था, आहें अब और ऊँची।

"सैम... आह्ह... सैम... हाँ... ऐसे ही... मत रुकिए..."

मैं बाहर की तरफ सोच रहा था—अगर कोई सच में सुन रहा है... तो सुन ले... ये हमारा पल है।

ये विचार मुझे और एक्साइटेड कर रहा था—और नेहा को भी।

उसकी पुसी अब और टाइट हो रही थी, जैसे ऑर्गेज़्म की तरफ बढ़ रही हो।

मैंने एक हाथ उसके क्लिट पर रखा—उँगलियों से रगड़ते हुए, जबकि लुंड अंदर-बाहर।

नेहा चिल्लाई—"सैम... ओह्ह... मैं... फिर से... आ रही हूँ..."

हम दोनों तेज़ी से क्लाइमेक्स की तरफ बढ़ रहे थे—दरवाज़े के ठीक पीछे, पूरी तरह एक्सपोज़्ड फीलिंग के साथ।

XXXXXX

दूसरी बार, सिर्फ़ पिछले 2 घंटों में... मैंने इतनी जल्दी दोबारा झड़ना कभी नहीं देखा था।

पहले तो कभी-कभी घंटों लग जाते थे रिकवर होने में, लेकिन आज... नेहा की वो खूबसूरती, उसकी हरकतें, वो सरेंडर, वो दरवाज़े के पास वाली पोज़िशन—सब कुछ मिलकर मुझे पागल कर रहा था।

या शायद वो वेटर का विचार... वो सोच कि कोई बाहर खड़ा सुन रहा है, कल्पना कर रहा है कि हम क्या कर रहे हैं... वो एक्साइटमेंट मेरे अंदर आग की तरह फैल रहा था।

मैं नहीं जानता क्या था असली वजह—नेहा की खूबसूरती, उसकी आज की वाइल्डनेस, या वो फैंटसी कि कोई और हमारी प्राइवेसी में झाँक रहा है।

लेकिन जो भी था, वो कमाल का था।

अब घड़ी में 11 बज चुके थे।

नेहा फ्रेश होकर आई—बाथरूम से निकलकर, हल्के से गीले बाल, बॉडी पर सिर्फ़ एक पतला टॉवल लपेटा हुआ, जो मुश्किल से ढक रहा था।

वो बेड पर आई, मेरे पास लेट गई, मुझे टाइटली हग किया।

उसकी साँसें मेरी गर्दन पर पड़ीं—गर्म, थकी हुई, लेकिन संतुष्ट।

उसने गहरी साँस ली और फुसफुसाई,

"आई लव इट, बेबी... आज सब कुछ... परफेक्ट था।"

कुछ ही मिनटों में उसकी साँसें गहरी और रेगुलर हो गईं।

वो गहरी नींद में सो गई—चेहरा शांत, होंठ हल्के खुले, एक हाथ मेरी छाती पर।

लेकिन मेरी आँखों से नींद दूर थी।

मैं छत की तरफ देखता रहा, दिमाग में वही विचार घूम रहे थे।

वो वेटर...

जब हम बाहर गए थे, या जब नेहा शावर ले रही थी... क्या वो कमरे में अकेला था?

क्या उसने नेहा के अंडरगारमेंट्स को छुआ?

उसकी ब्रा, पैंटी—जो बेड पर पड़ी थीं, गंध लेने के लिए, या शायद और कुछ...

कितनी बार उसने हाथ में लिया होगा, कितनी बार उसने खुद को सहलाया होगा, नेहा की ब्रा को सूँघते हुए, या कल्पना करते हुए कि वो नेहा के स्तनों को छू रहा है।

उसकी वो डार्क ब्राउन आँखें, वो गाल, वो होंठ... क्या वो सोच रहा होगा कि नेहा के निप्पल्स कितने सॉफ्ट होंगे?

और कितने लोगों को बताया होगा उसने?

अपने दोस्तों को, या रिसेप्शन पर बैठे दूसरे स्टाफ को—

"यार, आज एक जोड़ा आया... औरत की बॉडी... उफ्फ... उसके बूब्स... इतने परफेक्ट..."

शायद वो हँसते हुए डिटेल्स दे रहा हो—नेहा का टॉपलेस होना

शायद वो कल्पना कर रहा हो कि नेहा उसके सामने घुटनों पर बैठी हो, या दरवाज़े के पीछे हमारी हर आवाज़ सुनकर वो खुद को छू रहा हो।

ये सब सोचते-सोचते मेरा लुंड फिर से हल्का सा पल्स करने लगा।

नींद नहीं आ रही थी—बल्कि एक अजीब सा जोश था।

नेहा सो रही थी, लेकिन मेरा दिमाग अभी भी उस फैंटसी में डूबा हुआ था।

क्या कल सुबह वो वेटर फिर आएगा?

क्या वो नेहा को देखकर मुस्कुराएगा, या शरमाएगा?

या शायद वो कुछ और प्लान कर रहा हो...

मैंने नेहा को और करीब खींचा—उसकी गर्म बॉडी मेरे से चिपकी हुई।

 

malikarman

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नेहा ने क्लीनिंग का काम खत्म किया, धीरे से उठी—टॉपलेस, बदन पसीने से चमकता हुआ, स्तन अभी भी भारी-भरकम साँसों के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे।

उसकी आँखें मेरी तरफ—वो आज पावरहाउस थी, जैसे कोई आग लगी हो अंदर।

मैं बस उसे देखता रहा—1.5 घंटे बीत चुके थे, 7:30 से 9 बज गए, और हमारा ये "शो" अभी भी चल रहा था।

आमतौर पर तो आधे घंटे में खत्म हो जाता था—पहले ड्रिंक, फिर कम्फर्टेबल होकर सीधे सेक्स।

लेकिन आज कुछ और था।

मैं जानता था मैं क्यों इतना एक्साइटेड था—लेकिन नेहा? वो आज अलग लेवल पर थी।

मैंने खुद को रोक नहीं पाया।

उसके पास गया, दोनों हाथों से उसके चेहरे को पकड़ा और गहरा किस किया।

हमारी जीभें मिलीं—तेज़, भूखी, लड़ती हुई।

मैं अपने ही कम का स्वाद महसूस कर रहा था उसके मुँह में—नमकीन, गाढ़ा, गर्म—लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।

बल्कि और जोश आ रहा था।

एक हाथ उसकी गांड पर—कसकर दबाया, मसलता हुआ, दूसरा हाथ उसकी जींस के क्रॉच पर गया।

उँगलियाँ बाहर से ही रगड़ने लगीं—धीरे-धीरे, फिर जोर से।

उसकी जींस गीली हो चुकी थी वहाँ, गर्माहट महसूस हो रही थी।

मैंने जींस का बटन खोलने की कोशिश की—उँगलियाँ अंदर डालकर ज़िप नीचे करने लगा।

तभी नेहा ने किस तोड़ा।

पीछे हटी, मेरी आँखों में देखा—होंठ सूजे, साँसें तेज़।

"बेबी... वेट..." वो फुसफुसाई, आवाज़ में थकान और मुस्कान दोनों।

"मैं भूखी हूँ... और कुछ बियर चाहिए।"

मैंने हल्के से हँसा,

लेकिन अंदर से सोच रहा था—अब मेरी बारी है।

उसने मुझे इतना दिया है, अब मुझे उसे ऑर्गेज़्म देना है।

उसे तड़पाना है, चिल्लाना है, मेरे नाम से पुकारना है।

नेहा ने मेरी सोच पढ़ ली जैसे।

वो मुस्कुराई, मेरे सीने पर हाथ रखा, और बोली,

"मैं अभी-अभी तुम्हें ब्लो करके खत्म कर चुकी हूँ... अब मुझे रिलैक्स होने दे।"

फिर मेरी कमर में हाथ डाला, मुझे बेड की तरफ खींचा।

"बियर लाओ... साथ में कुछ खाने को।

फिर... जो करना है, वो धीरे-धीरे करेंगे।

आज रात अभी लंबी है।"

मैंने उसे देखा—वो अभी भी टॉपलेस थी, जींस का बटन खुला हुआ, आँखों में वही भूख।

मैंने रिसेप्शन पर कॉल किया और ऑर्डर दे दिया—कुछ स्नैक्स, दो कोल्ड बियर
15 मिनट बाद दरवाज़े पर नॉक हुई।

मैं अभी भी बेड के पास खड़ा था, नेहा बेड पर लेटी हुई—टॉपलेस, स्तन अभी भी हल्के से ऊपर-नीचे हो रहे थे, चेहरा पसीने और मेरे निशानों से चमकता हुआ।

सब कुछ फिर से फ्लैश हो गया मेरे दिमाग में—सुबह वाला वेटर, जो नेहा को देखकर थोड़ा अटपटा हो गया था।

क्या वही आएगा?

मेरा दिल धड़कने लगा।

मैंने नेहा की तरफ देखा, घबराते हुए कहा,

"कोई दरवाज़े पर है... कुछ पहन ले ना!"

नेहा ने बस मुस्कुराई—एक शरारती, तेज़ मुस्कान।

उठकर बैठ गई, दोनों हाथ पीछे करके बेड पर टिकाए, स्तन और भी उभर आए।

"बेबी... मैं ऐसे ही दरवाज़ा खोल सकती हूँ... क्या प्रॉब्लम है?"

फिर आँख मारकर, टॉन्ग बाहर निकालकर चाटते हुए बोली, "देखना चाहता है क्या वो कैसे रिएक्ट करता है?"

मेरा लिम्प डिक एकदम जाग गया—फिर से हल्का सा खड़ा होने लगा।

वो उठी, धीरे-धीरे दरवाज़े की तरफ बढ़ने लगी—टॉपलेस, जींस का बटन अभी भी खुला हुआ, कमर नंगी।

हर कदम के साथ उसके स्तन हिल रहे थे, और मेरी साँसें रुक रही थीं।

क्या ये सच में हो रहा है?

मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था—एक्साइटमेंट, डर, और जोश का मिक्स।

तभी नेहा रुकी, मुड़ी, मुझे देखकर हँसी—एक पूरी तरह मास्टर वाली हँसी।

फिर तेज़ी से बाथरूम की तरफ दौड़ी, दरवाज़ा बंद करते हुए आखिरी शब्द बोले,

"जा... खोल दे बेबी!"

दरवाज़ा बंद हो गया।

मैं अकेला खड़ा था—नंगा, दिल धड़कता हुआ, और डिक फिर से हल्का सा पल्स कर रहा था।

दरवाज़े पर फिर नॉक हुई—"साब... ऑर्डर..."

मैंने जल्दी से एक टॉवल लपेटा कमर पर, साँसें संभालीं, और दरवाज़ा खोला।

वही वेटर था—सुबह वाला।

उसने ट्रे आगे बढ़ाई, लेकिन नज़रें मेरे पीछे कमरे में घूम रही थीं—शायद नेहा को ढूँढ रहा था।

मैंने ट्रे ली, टिप दी, और जल्दी से दरवाज़ा बंद कर दिया।

अंदर मुड़ा तो बाथरूम का दरवाज़ा खुला था।

नेहा बाहर आई—अभी भी टॉपलेस, लेकिन अब एक छोटा सा टॉवल लपेटा कमर पर।

वो हँसते हुए मेरे पास आई, ट्रे से बियर की बोतल उठाई, और मेरे होंठों पर चूम लिया।

"डर गए थे ना?" वो फुसफुसाई, "लेकिन देखा... मैं कितनी शरारती हूँ आज।"

मैंने उसे बाहों में खींचा, बियर की बोतल उसके हाथ से छीनी, और कहा,

"तू आज पागल कर रही है मुझे... लेकिन अब बारी मेरी है।

बियर पी... खा... क्योंकि उसके बाद तुझे चिल्लाने का मौका मिलेगा।"

नेहा ने बियर का एक घूँट लिया, ठंडक महसूस करते हुए आँखें बंद कीं।

फिर मेरी तरफ देखा—आँखों में वही भूख।

"तो आओ... शुरू करो।

मैं तैयार हूँ... पूरी तरह।"

हम दोनों अब टॉवल में लिपटे हुए थे—मैंने कमर पर एक, नेहा ने भी छोटा सा टॉवल लपेटा हुआ था, जो मुश्किल से उसकी जांघों तक ढक रहा था।

टीवी ऑन था—कोई सॉफ्ट म्यूजिक चल रहा था, लाइट्स डिम, कमरा अभी भी हमारी गर्मी और बियर की ठंडक से भरा हुआ।

मैंने बेड पर बैठकर बियर की बोतल उठाई, एक घूँट लिया, ठंडक गले से नीचे उतरी।

नेहा मेरे बगल में बैठ गई, अपनी बोतल मेरे होंठों पर रखी—मैंने पीया, फिर उसने।

हम दोनों हँसते हुए एक-दूसरे को देख रहे थे।

फिर बिना कुछ कहे, मैंने उसे खींचकर किस करना शुरू किया।

धीरे-धीरे, गहराई से—हमारी जीभें फिर से लड़ने लगीं, बियर का स्वाद मिला हुआ।

मेरा एक हाथ उसके टॉवल के ऊपर से उसके स्तनों पर गया—नरम, गर्म, अभी भी थोड़े सूजे हुए।

मैंने हल्के से मसला, निप्पल्स को उँगलियों से घुमाया।

नेहा ने आह भरी, सिर पीछे करके—उसकी साँसें तेज़ हो गईं।

अचानक वो शरारत से हँसी, बोतल उठाई, और थोड़ा सा बियर अपने स्तनों पर डाल दिया।

ठंडी बूंदें उसके निप्पल्स से नीचे सरकने लगीं—चमकती हुई, सेक्सी।

वो मेरी तरफ देखकर बोली,

"क्या कर सकते हो... चाटोगे?"

मैंने बिना जवाब दिए झुक गया।

जीभ से पहले निप्पल को छुआ—ठंडा बियर और उसकी गर्म स्किन का मिक्स।

फिर पूरी तरह चाटने लगा—एक स्तन से दूसरा, बूंद-बूंद चाटते हुए।

नेहा की हँसी अब आहों में बदल गई—वो मेरे बालों में उँगलियाँ फेर रही थी, सिर दबा रही थी।

मैं नीचे सरकता गया—बियर की बूंदें उसके पेट तक पहुँच गई थीं।

उसकी नाभि गहरी थी—मैंने जीभ डालकर वहाँ से पी लिया, जैसे कोई कीमती शराब हो।

नेहा हँस पड़ी—प्लेफुल, शरारती हँसी।

"और नीचे... देखो क्या हो रहा है।"

उसने फिर बोतल उठाई, थोड़ा और बियर डाला—इस बार सीधे अपने पेट से नीचे, टॉवल के किनारे तक।

बूंदें उसकी जांघों पर सरक रही थीं, और अब उसकी पुसी तक पहुँच रही थीं—गीली, चमकती।

मैं नीचे झुका, टॉवल थोड़ा सा हटाया।

उसकी पुसी पहले से ही गीली थी—बियर की बूंदों से और भी चमक रही थी।

मैंने जीभ से चाटना शुरू किया—धीरे से, बियर का स्वाद, उसकी अपनी खुशबू का मिक्स।

नेहा अब जोर से हँस रही थी—प्लेफुल, लेकिन एक्साइटेड।

"आह्ह... बेबी... ऐसे ही... चाटो... सब पी लो..."

वो एक हाथ से सिगरेट जला रही थी—एक कश लिया, धुआँ ऊपर फेंका, दूसरा हाथ मेरे सिर पर।

दूसरी तरफ से वो उठाकर खा रही थी—मुँह में डालती, चबाती, और बीच-बीच में आहें भरती।

स्मोकिंग, ड्रिंकिंग, ईटिंग—और मैं उसके नीचे, उसकी पुसी को चाटता हुआ।

मेरा लुंड अब पूरी तरह हार्ड हो चुका था—टॉवल के नीचे फड़क रहा था।

नेहा ने नीचे देखा, मुस्कुराई।

" फिर तैयार हो गया... लेकिन पहले मुझे... मुझे जीभ से ही ..."

वो पैर फैलाकर लेट गई—बियर की बोतल साइड में, सिगरेट होंठों पर, आँखें मेरी तरफ।


नेहा के पैरों को और फैलाया, उसकी पुसी अब पूरी तरह मेरे सामने—गीली, गर्म, बियर की बूंदों और अपनी एक्साइटमेंट से चमकती हुई।

मैंने पहले जीभ से शुरू किया—क्लिटोरिस पर हल्के सर्कल बनाते हुए, धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई।

नेहा की बॉडी तुरंत रिएक्ट कर गई, कमर ऊपर उठी।

"आह्ह... सैम... हाँ... ऐसे ही..." वो मॉन करने लगी, मेरा नाम लेते हुए—सैम।

उसकी आवाज़ में हमेशा वाली इज्ज़त थी—कभी "तू" नहीं, हमेशा "तुम" या "आप"।

मैंने जीभ को और गहरा किया, लेकिन अब एक उँगली भी जोड़ी—धीरे से अंदर डाली।

उसकी पुसी इतनी गीली थी कि उँगली आसानी से सरक गई।

मैंने अंदर-बाहर करना शुरू किया—धीरे, लेकिन उँगली को कर्व करके उस स्पॉट को टच करते हुए।

नेहा ने तुरंत महसूस किया।

"सैम... हाँ... थोड़ा दायें... स्लाइट राइट... ओह्ह... येस... वो स्पॉट... ठीक वही..."

मैंने उसकी बात मानी—उँगली को थोड़ा दायें शिफ्ट किया, प्रेशर बढ़ाया।

जीभ अभी भी क्लिट पर काम कर रही थी—तेज़ फ्लिक्स, सर्कल्स, और कभी-कभी हल्का सक्शन।

नेहा के मॉन्स अब और जोरदार हो गए।

"सैम... अब दो उँगलियाँ... प्लीज़... दो... गू डीप..."

मैंने दूसरी उँगली भी डाली—दोनों साथ में, धीरे से अंदर-बाहर।

उसकी पुसी ने उन्हें टाइटली पकड़ लिया, गर्म और गीली।

मैंने स्पीड बढ़ाई—उँगलियाँ अब तेज़ी से मूव कर रही थीं, कर्व्ड करके G-स्पॉट को बार-बार हिट करते हुए।

जीभ क्लिट पर फिक्स—तेज़, कंसिस्टेंट।

नेहा अब बिस्तर की चादर पकड़कर चिल्ला रही थी—मेरा नाम जोर-जोर से, लेकिन इज्ज़त से।

"सैम... ओह्ह फक... सैम... गू डीप... हाँ... येस... ठीक वैसा ही... मत रुकना... फास्टर... सैम... मैं... आ रही हूँ..."

उसकी कमर अब पूरी तरह ऊपर उठ चुकी थी, पैर काँप रहे थे।

मैंने उँगलियों की स्पीड और प्रेशर और बढ़ाया—दोनों उँगलियाँ अंदर तक, बाहर निकालते हुए क्लिट को जीभ से साथ में।

नेहा की साँसें रुक गईं, बॉडी टाइट हो गई।

"सैम... येस... येस... सैम... आह्ह्ह्ह...!"

वो जोर से झड़ गई—इंटेंस, लंबा ऑर्गेज़्म।

उसकी पुसी मेरी उँगलियों पर पल्स कर रही थी, गर्म तरल निकल रहा था—मैंने उँगलियाँ अंदर रखीं, धीरे-धीरे मूव करते हुए उसे पूरा एक्सपीरियंस देने के लिए।

जीभ अभी भी हल्के से क्लिट को छू रही थी, ओवरसेंसिटिव लेकिन एक्स्ट्रा प्लेज़र के लिए।

नेहा की बॉडी हिल रही थी, आँखें बंद, मुँह खुला, साँसें तेज़-तेज़।

कई सेकंड बाद वो धीरे-धीरे नीचे आई।

आँखें खोलीं—पानी से भरी, चमकती हुई।

मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई, आवाज़ काँपती हुई लेकिन खुश।

"सैम... आपने... मुझे आज तोड़ दिया... इतना इंटेंस... दो उँगलियाँ... जीभ... सब कुछ... परफेक्ट..."

नेहा मुझे ऊपर खींचकर चूम रही थी, उसकी जीभ मेरी जीभ से लड़ रही थी—गहरा, गीला किस।

मैं उसके ऊपर लेटा हुआ था, टॉवल अभी भी कमर पर लिपटा हुआ, लेकिन मेरा लुंड अब पूरी तरह हार्ड, उसके पेट से टकरा रहा था।

उसने मेरे कान में फुसफुसाया, आवाज़ में वही इज्ज़त और शरारत मिली हुई,

"सैम... आप बताइए... अब क्या करना चाहते हैं? मैं तैयार हूँ... पूरी तरह आपकी।"

मैंने उसके होंठ फिर से चूमे, लेकिन दिमाग में एक विचार बार-बार आ रहा था—वो वेटर।

सुबह वाला वही लड़का, जो दरवाज़ा खोलते ही नेहा को टॉपलेस देखकर थोड़ा हक्का-बक्का हो गया था।

अब अगर वो बाहर खड़ा हो... अगर वो किसी तरह झाँक रहा हो... या कल्पना कर रहा हो कि अंदर क्या हो रहा है...

ये विचार मेरे अंदर एक अलग ही आग लगा रहा था।

क्या होगा अगर वो सुन रहा हो? हमारी आहें, नेहा का मेरा नाम पुकारना...

ये सोचते ही मेरा लुंड और सख्त हो गया, और मैंने नेहा को और जोर से दबाया।

"नेहा... अगर वो वेटर अभी भी बाहर हो... और सोच रहा हो कि हम क्या कर रहे हैं..." मैंने उसके कान में कहा, आवाज़ भारी।

नेहा ने हल्के से हँसी, आँखें चमकती हुईं।

"सैम... आप भी ना... वो सोचे तो सोचे... इससे क्या फर्क पड़ता है? बल्कि... इससे और मज़ा आएगा ना?"

वो मेरी कमर पर पैर लपेटकर मुझे और करीब खींच रही थी।

मैंने टॉवल हटाया—दोनों के।

अब हम दोनों पूरी तरह नंगे, एक-दूसरे से चिपके।

मैंने अपना लुंड उसके पुसी के ऊपर रखा—धीरे से रगड़ा, लेकिन अंदर नहीं डाला अभी।

नेहा की साँसें तेज़ हो गईं।

"सैम... प्लीज़... अंदर डालिए..."

मैंने धीरे से धक्का दिया—पहला इंच अंदर गया, वो टाइट, गर्म, गीली।

नेहा ने आह भरी—"आह्ह... सैम... हाँ... धीरे..."

मैंने और गहराई तक धकेला—पूरा अंदर।

हम दोनों एक साथ आह भरे।

फिर मैंने मूवमेंट शुरू किया—धीरे-धीरे, लेकिन गहराई से।

हर थ्रस्ट के साथ दिमाग में वही विचार—अगर वो वेटर बाहर हो... अगर वो सुन रहा हो...

ये सोच मेरे जोश को दोगुना कर रही थी।

मैं तेज़ हो गया—जोर-जोर से, नेहा की कमर पकड़कर।

नेहा अब मॉन कर रही थी—"सैम... ओह्ह... सैम... और जोर से... हाँ..."

मैंने उसके स्तनों को मसलते हुए कहा,

"नेहा... सोचो... अगर वो देख रहा हो... हम दोनों को... ऐसे..."

नेहा ने आँखें बंद कीं, मुस्कुराई—"तो देखने दो... इससे मुझे और अच्छा लग रहा है... सैम... आप और तेज़..."

मैंने स्पीड बढ़ाई—कमरा सिर्फ हमारी साँसों, थप्पड़ जैसी आवाज़ों, और नेहा के मॉन्स से भर गया।

वो विचार—वेटर का सोचना—मुझे और एक्साइटेड कर रहा था, और नेहा को और ज़्यादा प्लेज़र दे रहा था।

मैंने नेहा के बालों को धीरे से, लेकिन मजबूती से पकड़ा—सॉफ्टली, जैसे कोई प्यार भरी कमांड हो।

वो मेरी तरफ देख रही थी—आँखों में सवाल था, लेकिन विरोध बिल्कुल नहीं।

उसने बस हल्के से मुस्कुराई, जैसे कह रही हो, "जो आप चाहें, सैम... मैं आपकी हूँ।"

मैंने उसे खींचकर दरवाज़े की तरफ ले गया—दोनों पूरी तरह नंगे, कमरे की डिम लाइट में हमारी बॉडीज़ चमक रही थीं।

उसके कदम मेरे साथ चल रहे थे, बिना किसी रुकावट के।

दरवाज़े के ठीक सामने पहुँचकर मैंने उसे झुकाया—उसके गाल ठंडे दरवाज़े से रगड़ रहे थे, साँसें तेज़ हो गईं।

मैंने उसके बालों को अपनी मुट्ठी में और सख्त किया, लेकिन दर्द नहीं—बस कंट्रोल।

मैंने अपना लुंड उसके पुसी पर टच किया—वो पहले से ही गीली, गर्म।

नेहा ने खुद अपने पैर थोड़े फैलाए—बिना कुछ कहे, बस मुझे इनवाइट करने के लिए।

एक झटके में मैंने पूरा अंदर डाल दिया।

"आआआह्ह्ह..."

हम दोनों की एक साथ आह निकली—उसकी आवाज़ ऊँची, मेरी भारी।

उसकी पुसी ने मुझे टाइटली पकड़ लिया, जैसे कभी छोड़ना ही न हो।

फिर रिदम शुरू हुआ—धीरे-धीरे, लेकिन गहराई से।

हर थ्रस्ट के साथ उसका सिर हल्का-हल्का दरवाज़े से टकरा रहा था—नरम, लेकिन रिदम में।

"आह्ह... सैम... ओह्ह..." वो मॉन कर रही थी, नाम लेते हुए, इज्ज़त से।

"आप... और गहरा... प्लीज़..."

मैं तेज़ हो गया—जोर-जोर से धक्के, कमर पकड़कर।

दरवाज़ा हल्का-हल्का हिल रहा था, बाहर से सुनाई दे रहा होगा।

मेरा दिमाग फिर उसी विचार में चला गया—वो वेटर... या कोई और... बाहर खड़ा हो... सुन रहा हो हमारी हर आवाज़।

नेहा की आहें, मेरी साँसें, थप्पड़ जैसी आवाज़ जब मेरा लुंड अंदर-बाहर हो रहा था।

क्या वो कल्पना कर रहा होगा कि हम दोनों यहाँ... ऐसे... दरवाज़े के ठीक पीछे?

ये सोचते ही मेरा जोश दोगुना हो गया।

मैंने उसके बाल और सख्त पकड़े, सिर थोड़ा पीछे खींचा—उसकी गर्दन एक्सपोज़ हो गई।

मैंने उसके कान में फुसफुसाया,

"नेहा... सोचो... अगर कोई बाहर हो... सुन रहा हो... हम दोनों को..."

नेहा ने आँखें बंद कीं, होंठ काटे, फिर मुस्कुराई—आवाज़ काँपती हुई,

"सैम... तो सुनने दीजिए... इससे मुझे और अच्छा लग रहा है... आप और जोर से... प्लीज़..."

मैंने स्पीड बढ़ाई—अब हर थ्रस्ट में पूरा बल।

उसका गाल दरवाज़े से रगड़ रहा था, सिर हल्का-हल्का टकरा रहा था, आहें अब और ऊँची।

"सैम... आह्ह... सैम... हाँ... ऐसे ही... मत रुकिए..."

मैं बाहर की तरफ सोच रहा था—अगर कोई सच में सुन रहा है... तो सुन ले... ये हमारा पल है।

ये विचार मुझे और एक्साइटेड कर रहा था—और नेहा को भी।

उसकी पुसी अब और टाइट हो रही थी, जैसे ऑर्गेज़्म की तरफ बढ़ रही हो।

मैंने एक हाथ उसके क्लिट पर रखा—उँगलियों से रगड़ते हुए, जबकि लुंड अंदर-बाहर।

नेहा चिल्लाई—"सैम... ओह्ह... मैं... फिर से... आ रही हूँ..."

हम दोनों तेज़ी से क्लाइमेक्स की तरफ बढ़ रहे थे—दरवाज़े के ठीक पीछे, पूरी तरह एक्सपोज़्ड फीलिंग के साथ।

XXXXXX

दूसरी बार, सिर्फ़ पिछले 2 घंटों में... मैंने इतनी जल्दी दोबारा झड़ना कभी नहीं देखा था।

पहले तो कभी-कभी घंटों लग जाते थे रिकवर होने में, लेकिन आज... नेहा की वो खूबसूरती, उसकी हरकतें, वो सरेंडर, वो दरवाज़े के पास वाली पोज़िशन—सब कुछ मिलकर मुझे पागल कर रहा था।

या शायद वो वेटर का विचार... वो सोच कि कोई बाहर खड़ा सुन रहा है, कल्पना कर रहा है कि हम क्या कर रहे हैं... वो एक्साइटमेंट मेरे अंदर आग की तरह फैल रहा था।

मैं नहीं जानता क्या था असली वजह—नेहा की खूबसूरती, उसकी आज की वाइल्डनेस, या वो फैंटसी कि कोई और हमारी प्राइवेसी में झाँक रहा है।

लेकिन जो भी था, वो कमाल का था।

अब घड़ी में 11 बज चुके थे।

नेहा फ्रेश होकर आई—बाथरूम से निकलकर, हल्के से गीले बाल, बॉडी पर सिर्फ़ एक पतला टॉवल लपेटा हुआ, जो मुश्किल से ढक रहा था।

वो बेड पर आई, मेरे पास लेट गई, मुझे टाइटली हग किया।

उसकी साँसें मेरी गर्दन पर पड़ीं—गर्म, थकी हुई, लेकिन संतुष्ट।

उसने गहरी साँस ली और फुसफुसाई,

"आई लव इट, बेबी... आज सब कुछ... परफेक्ट था।"

कुछ ही मिनटों में उसकी साँसें गहरी और रेगुलर हो गईं।

वो गहरी नींद में सो गई—चेहरा शांत, होंठ हल्के खुले, एक हाथ मेरी छाती पर।

लेकिन मेरी आँखों से नींद दूर थी।

मैं छत की तरफ देखता रहा, दिमाग में वही विचार घूम रहे थे।

वो वेटर...

जब हम बाहर गए थे, या जब नेहा शावर ले रही थी... क्या वो कमरे में अकेला था?

क्या उसने नेहा के अंडरगारमेंट्स को छुआ?

उसकी ब्रा, पैंटी—जो बेड पर पड़ी थीं, गंध लेने के लिए, या शायद और कुछ...

कितनी बार उसने हाथ में लिया होगा, कितनी बार उसने खुद को सहलाया होगा, नेहा की ब्रा को सूँघते हुए, या कल्पना करते हुए कि वो नेहा के स्तनों को छू रहा है।

उसकी वो डार्क ब्राउन आँखें, वो गाल, वो होंठ... क्या वो सोच रहा होगा कि नेहा के निप्पल्स कितने सॉफ्ट होंगे?

और कितने लोगों को बताया होगा उसने?

अपने दोस्तों को, या रिसेप्शन पर बैठे दूसरे स्टाफ को—

"यार, आज एक जोड़ा आया... औरत की बॉडी... उफ्फ... उसके बूब्स... इतने परफेक्ट..."

शायद वो हँसते हुए डिटेल्स दे रहा हो—नेहा का टॉपलेस होना

शायद वो कल्पना कर रहा हो कि नेहा उसके सामने घुटनों पर बैठी हो, या दरवाज़े के पीछे हमारी हर आवाज़ सुनकर वो खुद को छू रहा हो।

ये सब सोचते-सोचते मेरा लुंड फिर से हल्का सा पल्स करने लगा।

नींद नहीं आ रही थी—बल्कि एक अजीब सा जोश था।

नेहा सो रही थी, लेकिन मेरा दिमाग अभी भी उस फैंटसी में डूबा हुआ था।

क्या कल सुबह वो वेटर फिर आएगा?

क्या वो नेहा को देखकर मुस्कुराएगा, या शरमाएगा?

या शायद वो कुछ और प्लान कर रहा हो...

मैंने नेहा को और करीब खींचा—उसकी गर्म बॉडी मेरे से चिपकी हुई।

Super update 🥰
 

Life_is_Short

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अब रात के 12 बज चुके थे।

मैं आधी नींद में था—दिमाग में वही विचार घूम रहे थे: वेटर, नेहा के अंडरगारमेंट्स, उसकी ब्रा की खुशबू, और वो सब कल्पनाएँ जो मुझे सोने नहीं दे रही थीं।

अचानक एक जोरदार म्यूजिक की आवाज़ आई—बेस हेवी, पार्टी वाला।

शायद बगल वाले कमरे से... या ऊपर से।

वीकेंड था, और ऐसे रिसॉर्ट में लोग गेटअवे के लिए आते हैं—पार्टी, ड्रिंक्स, लेट नाइट।

मैं तो सोचता हूँ कि अगर कोई डिस्टर्ब हो रहा है तो क्या फर्क पड़ता है... हम खुद भी तो अभी-अभी सोए हैं, लेकिन ये म्यूजिक ने मुझे पूरी तरह जगा दिया।

मैंने धीरे से नेहा को अपने से अलग किया—वो गहरी नींद में थी, सिर मेरी छाती पर टिका हुआ, एक हाथ मेरी कमर पर।

मैं नहीं चाहता था कि वो जागे।

धीरे-धीरे बिस्तर से उतरा, अभी भी नंगा।

वॉशरूम गया, एक लूज नाइट गाउन पहना—वो पतला वाला, जो मुश्किल से ढकता है।

सिगरेट का पैकेट उठाया और बालकनी की तरफ चला गया।

बाहर ठंडी हवा चल रही थी—रात की साइलेंस, सड़क पर बहुत कम गाड़ियाँ।

कूल ब्रिज़ ने मेरे चेहरे को छुआ, अच्छा लगा।

मैंने सिगरेट जलाई, एक गहरा कश लिया, धुआँ ऊपर की तरफ छोड़ा।

म्यूजिक अब और तेज़ लग रहा था—साफ-साफ सुनाई दे रहा था कि सोर्स कहाँ से आ रहा है।

बगल वाली बालकनी से।

उनका दरवाज़ा खुला हुआ था—लाइट्स ऑन, और अंदर से म्यूजिक और हँसी की आवाज़ें।

मैंने झुककर देखा।

वो आदमी वहाँ खड़ा था—वही, जो रिसेप्शन पर नेहा से बात करने की कोशिश कर रहा था।

लंबा, डार्क स्किन, सफेद बाल, लेट 50s में।

एक हाथ में ड्रिंक का ग्लास, दूसरे में सिगरेट।

वो बालकनी की रेलिंग पर टिका हुआ था, अकेला लग रहा था, लेकिन म्यूजिक उसके कमरे से आ रहा था—शायद अंदर कोई और भी हों।

वो मेरी तरफ देखा—एक सेकंड के लिए आँखें मिलीं।

उसने हल्के से सिर हिलाया, जैसे "हैलो" कह रहा हो, या शायद पहचान गया हो।

मैंने सिगरेट का एक और कश लिया, धुआँ उसके कमरे की तरफ फेंका।

दिमाग में फिर वही विचार घूमने लगा—ये आदमी... रिसेप्शन पर नेहा को देखकर कितनी देर तक घूर रहा था।

उसकी आँखें नेहा के चेहरे से नीचे सरक रही थीं—स्तनों पर, कमर पर।

शायद वो सोच रहा होगा कि नेहा जैसी औरत उसके साथ होती तो क्या होता।

या शायद वो अब भी कल्पना कर रहा हो—हमारे कमरे की आवाज़ें सुनकर, या नेहा के बारे में सोचकर।

मैंने सोचा—अगर वो जानता कि अभी कुछ घंटे पहले नेहा मेरे लुंड को चाट रही थी, मुँह में ले रही थी, दरवाज़े के पास झुककर मुझे अंदर ले रही थी... तो क्या करता?

शायद वो भी सिगरेट पीते हुए सोच रहा हो—नेहा की वो डार्क ब्राउन आँखें, वो होंठ, वो बॉडी।

वो आदमी अभी भी वहाँ था—अब उसने ग्लास उठाकर मेरी तरफ देखा, जैसे टोस्ट कर रहा हो।

मैंने बस मुस्कुरा दिया—एक छोटी सी, लेकिन मतलब वाली मुस्कान।

"हाउ आर यू, यंग मैन?" उसने कहा, आवाज़ में वो पुरानी वाली दोस्ताना लेकिन थोड़ी शरारती टोन।

हमारी बालकनियाँ अडजॉइनिंग थीं, लेकिन इतनी करीब नहीं—4th फ्लोर पर, बीच में एक छोटी सी गैप, हवा में ठंडी हवा बह रही थी।

मैंने सिगरेट का एक और कश लिया, धुआँ ऊपर फेंका, और मुस्कुराकर जवाब दिया,

"गुड... गुड।"

"सो व्हेयर आर यू फ्रॉम?"

"पुणे।"

"यू?"

"नागपुर।"

"गुड... एंजॉयिंग विद फ्रेंड्स?"

मैं जानता था वो अकेला नहीं था—रिसेप्शन पर मैंने देखा था, उसके साथ दो और आदमी थे। शायद अंदर बैठे होंगे, म्यूजिक सुनते हुए।

"यस," मैंने हल्के से कहा।

"व्हेयर आर योर ड्रिंक्स, यंग मैन?"

"ओवर हो गई... मैं सोने वाला था।"

"टू सून... दैट्स नॉट फेयर।"

उसने एक झटके में ग्लास उठाया, फिर मेरी तरफ देखकर विंक किया—बिना किसी शर्म के, बिल्कुल अपोलोजेटिक।

"यू हैव ब्यूटीफुल कंपनी... आई वुड हैव बीन अप ऑल नाइट अगर मैं तुम्हारी जगह होता।"

उसकी बात सुनकर मेरे अंदर एक अजीब सा जोश आया।

मैं रूड नहीं होना चाहता था किसी स्ट्रेंजर से, लेकिन एक तरफ से मुझे अच्छा लग रहा था—जब लोग नेहा को देखकर जलते हैं, उसकी खूबसूरती पर जलन महसूस करते हैं, और वो जलन उनके चेहरे पर साफ दिखती है।

ये मुझे पावरफुल फील कराता है।

नेहा मेरी है, और वो सब बस देख सकते हैं।

"व्हाट टू डू... बार क्लोज़्ड है, और ड्रिंक ओवर," मैंने कहा।

"व्हाट यू वर हैविंग?"

"बीयर।"

वो हँसा—एक गहरी, थकी हुई लेकिन खुश वाली हँसी।

"वेट..."

वो अंदर चला गया।

मैं बालकनी पर टिका रहा, सिगरेट खत्म करते हुए।

कुछ सेकंड बाद वो वापस आया—हाथ में एक फ्रेश कोल्ड बियर की बोतल।

उसने उसे मेरी तरफ बढ़ाया।

"हैव इट, यंग मैन।"

"नो, इट्स ओके..."

"नो नो... हैव इट।"

उसने फिर हँसा, "वी हैव गोडाउन," और जोर से हँसा—जैसे वो खुद को बहुत कूल फील कर रहा हो।

मैंने बोतल ली—ठंडी, ओस से भरी हुई।

हम दोनों ने बोतलें हवा में उठाईं—"चियर्स!"

मैंने एक घूँट लिया, ठंडी बीयर गले से नीचे उतरी।

वो भी पीया, फिर मुस्कुराकर बोला,

"आई एम अलोक, बाय द वे।"

"सैम," मैंने कहा।

"व्हाट यू डू, सैम?"

"आई एम इन आईटी।"

"ओह्ह... सो वीकेंड गेटअवे विद योर ब्यूटीफुल वाइफ।"

"यस," मैंने हल्के से कहा, मुस्कुराते हुए।

उसकी बातें बार-बार नेहा पर आ रही थीं—कैजुअली, बिना किसी डिसरिस्पेक्ट के।

जैसे कोई सामान्य बात कर रहा हो, लेकिन आँखों में वो चमक थी जो कह रही थी कि वो नेहा को अच्छे से नोटिस कर चुका है।

मुझे अच्छा लग रहा था—एक अजीब सा पावर फील, कि कोई और मेरी वाइफ की तारीफ कर रहा है, जल रहा है, लेकिन मुझे छू नहीं सकता।

"व्हाट यू गाइज़ डूइंग हियर?" मैंने पूछा, बात को आगे बढ़ाते हुए।

अलोक ने हँसा—एक गहरी, थकी हुई लेकिन मजेदार हँसी।

"हेहे... व्हाट ओल्ड गाइज़ डू विद फ्रेंड्स... दारू, बिरयानी एंड लड़की," उसने कैजुअली कहा, जैसे ये सबसे नॉर्मल बात हो।

उसके शब्द सुनते ही मेरे दिमाग में वो सीन फ्लैश हो गया—जो मैंने पहले नोटिस किया था लेकिन इग्नोर कर दिया था।

रिसेप्शन पर वो "Hiii" वाली आवाज़—यंग, अट्रैक्टिव, थोड़ी प्लेफुल।

मैंने सोचा था शायद कोई होटल स्टाफ है, या कोई और गेस्ट।

लेकिन अब... अलोक की बात सुनकर क्यूरियॉसिटी बढ़ गई।

क्या उसके साथ कोई लड़की है?

कितनी यंग? कितनी अट्रैक्टिव?

और वो "लड़की" का मतलब क्या है—कोई फ्रेंड, या कुछ और?

मैंने बीयर का एक और घूँट लिया, बालकनी की रेलिंग पर टिका रहा।

"सो... वो लड़की... तुम्हारे साथ है?" मैंने कैजुअली पूछा, जैसे बस बात चल रही हो।

अलोक ने ग्लास घुमाया, मुस्कुराया—एक शरारती वाली मुस्कान।

अलोक ने ग्लास घुमाते हुए कहा,

"यस... वो लड़की हमारे साथ है। बर्थडे प्रेजेंट है मेरे फ्रेंड्स ने दिया।"

"बर्थडे प्रेजेंट?" मैंने थोड़ा कन्फ्यूज होकर पूछा।

उसने खुद की तरफ इशारा किया—एक शरारती मुस्कान के साथ।

मैं समझ गया।

"ओह्ह... हैप्पी बर्थडे!" मैंने हँसते हुए कहा।

हम दोनों ने बोतलें उठाईं—बॉटम्स अप।

ठंडी बीयर गले से नीचे उतरी, और वो ठंडक अब मेरे दिमाग में भी फैल रही थी।

"सो... हाउ ओल्ड आर यू?" मैंने पूछा।

"58," उसने कैजुअली कहा, जैसे कोई बड़ी बात नहीं।

मैंने मन ही मन सोचा—ये तो मेरे पापा की उम्र के आसपास है।

लेकिन उसके चेहरे पर कोई थकान नहीं—बल्कि एक एनर्जी थी, वो जो पार्टी और ड्रिंक्स से आती है।

"थैंक्स फॉर द बियर," मैंने कहा, बोतल खत्म करते हुए।

अलोक ने फिर मुस्कुराया—वो वाली मुस्कान जो कुछ छुपा रही हो।

"यू कैन कम टू आवर रूम फॉर मोर बियर... द नाइट इज स्टिल यंग।"

"हम्म... लेकिन मेरी वाइफ सो गई है," मैंने कहा।

उसने कंधे उचकाए, फिर विंक किया—बिना किसी शर्म के।

"तो क्या हुआ... मैं तो उसे बुला नहीं रहा। वैसे भी हमारे कमरे में जो चल रहा है, वो किसी अच्छी-खासी औरत के देखने लायक नहीं है।"
उसकी ये बात सुनकर मेरी उत्सुकता और बढ़ गई।

अंदर क्या हो रहा होगा?

वो लड़की कौन है?

क्या सच में कुछ गर्मागर्म चल रहा है?

मेरा दिमाग अब तेज़ी से सोचने लगा।कितनी यंग? क्या वो सच में "प्रेजेंट" जैसी है—जैसे कोई एस्कॉर्ट, या कोई फ्रेंड जो पार्टी में एक्स्ट्रा मज़ा दे रही हो?

और "नॉट अप्रोप्रिएट फॉर डीसेंट लेडी"—मतलब क्या?

डांस? स्ट्रिप? या कुछ और... इंटेंस?

मेरा दिमाग अब तेज़ी से चल रहा था।

नेहा सो रही थी—शांत, अनजान।

मैं बालकनी पर खड़ा था, दिमाग में दो आवाज़ें लड़ रही थीं।

एक तरफ ब्रेन चिल्ला रहा था—ये गलत है, नेहा जाग गई तो क्या सोचेगी? कहाँ गया ये आदमी रात के 12 बजे? मैं कह दूँगा कि नींद नहीं आ रही थी, बाहर टहलने गया था... या बार में... या कुछ भी। लेकिन नेहा को शक हो सकता है।

दूसरी तरफ... मेरा लुंड।

तीसरी बार रात में हार्ड हो रहा था—ये मेरे लिए खुद का वर्ल्ड रिकॉर्ड था।

आज रात तक जो भी मज़ा मिला है—नेहा के साथ वो सब—वो मेरे दिमाग की वजह से नहीं, मेरे लुंड की वजह से मिला।

दिमाग तो वेटर को पीट-पीटकर वीकेंड खराब कर देता, लेकिन लुंड... लुंड जानता है कि मज़ा कहाँ है।

अलोक अभी भी बालकनी पर खड़ा था, मेरे जवाब का इंतज़ार कर रहा था।

उसकी आँखों में वो चमक थी—जैसे वो पहले से जानता हो कि मैं क्या सोच रहा हूँ।

मैंने साँस ली, और बोल दिया,

"ओके... तुम्हारा रूम नंबर क्या है?"

"411," उसने मुस्कुराकर कहा।

"ओके... वेट, मैं 15 मिनट में आता हूँ।"

मैं कमरे में वापस आया।

नेहा गहरी नींद में थी—नंगी, चादर थोड़ी सरकी हुई, स्तन हल्के से ऊपर-नीचे हो रहे थे साँसों के साथ।

मैंने धीरे से चादर ठीक की, उसे अच्छे से कवर किया ताकि वो कोज़ी रहे।

उसके माथे पर हल्का किस किया—वो सोते हुए भी हल्का सा मुस्कुराई।

फिर धीरे-धीरे मैंने मेन डोर खोला।

हाथ काँप रहे थे।

दरवाज़ा बंद किया, कॉरिडोर में निकला।

रात का सन्नाटा, सिर्फ़ एसी की हल्की आवाज़।

411 का दरवाज़ा ठीक बगल में था।

मैंने शेकिंग हैंड से डोरबेल दबाई।

अलोक ने तुरंत दरवाज़ा खोला।

अंदर से जोरदार म्यूजिक आ रहा था—धब चिक... धब चिक... बेस इतना हेवी कि सीने में महसूस हो रहा था।

और उसके साथ... लाउड मॉन्स।

एक औरत की आवाज़—ऊँची, रसीली, "आह्ह... हाँ... और जोर से..."

मेरा लुंड तुरंत ट्विच कर गया—एकदम सख्त।

अलोक ने मुझे अंदर आने का इशारा किया, मुस्कुराकर।

"आ गए यंग मैन... कम इन।"

मैं कदम रखा।

दरवाज़ा बंद हुआ।

और जैसे ही मैंने अंदर देखा... मेरी आँखें चौड़ी हो गईं।

शॉक में साँस रुक गई।

कमरे में ब्राइट लाइट थी—कोई डिम नहीं, फुल ऑन लाइट्स।

जैसे कोई स्टेज हो, और सब कुछ साफ-साफ दिख रहा हो।

बेड पर वो लड़की—बहुत यंग, बहुत अट्रैक्टिव, पूरी तरह नंगी।

वो चारों हाथ-पैरों पर थी—ऑन हर फोर्स।

उसके पीछे एक ब्राउन स्किन वाला पतला लड़का—शायद 45-46 का—जोर-जोर से धक्के दे रहा था।

हर थ्रस्ट के साथ उसकी बॉडी हिल रही थी, आहें निकल रही थीं।

सामने एक छोटा कद का आदमी—पेट बहुत बड़ा, पॉट जैसा—खड़ा था।

उसका लुंड हार्ड था, वो बस उसे लड़की के क्यूट फेस पर टैप कर रहा था—टिप से प्रीकम निकल रहा था, उसके गालों, होंठों पर फैला रहा था।

उसके हाथ में व्हिस्की का ग्लास था।

और पीछे वाला लड़का—जिसका लुंड अंदर था—उसने अपना व्हिस्की ग्लास लड़की की गांड पर रख दिया था।

ग्लास बैलेंस हो रहा था उसके मूवमेंट्स के साथ, जैसे कोई ट्रिक हो।

मैं अंदर घुसा।

सबने मुझे देखा।

आँखें मिलीं।

लेकिन कोई शॉक नहीं, कोई शर्म नहीं।

जैसे वो लोग सिर्फ़ कॉफी पी रहे हों, या टीवी देख रहे हों—न कि किसी लड़की को चोद रहे हों, जो उम्र में उनकी बेटी जितनी हो सकती है।

पीछे वाला लड़का—जिसका लुंड अंदर था—उसने ग्लास उठाया, मेरी तरफ देखकर बोला,

"दैट्स विशाल," और ग्लास फिर से लड़की की गांड पर रख दिया।

सामने वाला—पॉट वाला—मुझे देखकर बस भौंहें उठाईं, जैसे "हाय" कह रहा हो।

उसका फोकस लड़की के चेहरे पर था—अपने प्रीकम से उसके होंठों को पेंट कर रहा था।

फिर अलोक ने लड़की की तरफ देखकर कहा,

"और ये... क्या नाम बताया था Bhenchod इसने?"

विशाल ने हँसते हुए कहा,

"सैंडी... हेहे।"

"हाँ सैंडी... पता नहीं असली नाम है या आज रात का," अलोक ने कहा।

तब तक मुझे समझ आ गया—ये लड़की प्रॉस्टिट्यूट है।

पेड, पार्टी के लिए बुलाई गई।

बर्थडे गिफ्ट।

अलोक के फ्रेंड्स ने उसे दिया होगा—या शायद ग्रुप में शेयर कर रहे हैं।

सैंडी ने मुझे देखा—आँखें मिलीं।

उसकी आँखें थकी हुई लेकिन प्रोफेशनल थीं—कोई शर्म नहीं, बस काम कर रही थी।

वो मुस्कुराई हल्के से, जैसे कह रही हो "जॉइन कर लो"।

मेरा लुंड अब दर्द कर रहा था—तीसरी बार, और अब ये सब देखकर और भी सख्त।

दिमाग में नेहा का विचार आया—वो सो रही है, अनजान।

लेकिन यहाँ... यहाँ कुछ और चल रहा था।

अलोक ने मेरे कंधे पर हाथ रखा।

"बीयर ले लो, सैम। बैठो। एंजॉय करो।"

मैं बेड के पास वाली टेबल तक पहुँचा—जहाँ सारी बीयर की बोतलें रखी हुई थीं।

लेकिन मेरी आँखें एक सेकंड के लिए भी उस लड़की से हट नहीं रही थीं।

वो इतनी सेक्सी थी... इतनी... परफेक्ट।

फुल प्रोपोर्शनेट जिम बॉडी—कमर पतली, हिप्स चौड़े, लेकिन सब बैलेंस्ड।

वो चारों हाथ-पैरों पर थी, इसलिए उसके स्तन नीचे लटक रहे थे—भारी, गोल, निप्पल्स हार्ड और गुलाबी।

मिल्की व्हाइट स्किन—जैसे दूध में डूबी हो, लेकिन अब पूरी तरह रेड मार्क्स से भरी हुई।

हिक्कीज़—गले पर, कंधों पर, स्तनों के ऊपर—लाल-नीले निशान।

कंधों और गर्दन पर दाँतों के निशान—किसी ने जोर से काटा था।

उसका मेकअप पूरी तरह बिगड़ चुका था—काजल आँखों से बहकर गालों पर काली लाइनें बना रहा था, जो उसे और भी वाइल्ड और अट्रैक्टिव बना रहा था।

चेहरे पर कम के ट्रेस—सफेद लाइनें, कुछ सूख चुकी थीं, कुछ अभी गीली।

गालों पर, होंठों के किनारे, ठोड़ी पर—सब जगह फैली हुई।

वो पोज़िशन मेंटेन करना मुश्किल था—पीछे से धक्के, सामने से लुंड फेस पर टैप—लेकिन वो बैलेंस कर रही थी।

दोनों तरफ से दो लुंड—एक अंदर, एक मुँह के पास।

विशाल (पीछे वाला) ने फिर धक्का दिया—जोर से।

सैंडी की बॉडी हिली, स्तन लटके हुए हिले, एक आह निकली—"आह्ह... हाँ... फाड़ दो..."
डेविड (पॉट वाला) ने अपना लुंड उसके होंठों पर रगड़ा, प्रीकम फैलाते हुए।

"ओपन कर... और चूस।"

"ले लो, सैम। बैठ जाओ। अच्छा शो चल रहा है ना?"

मैंने बोतल ली, लेकिन बैठा नहीं।

बस खड़ा रहा—आँखें सैंडी पर।

उसकी स्किन पर पसीना चमक रहा था, बाल बिखरे हुए, साँसें तेज़।

वो मुझे देख रही थी—आँखें मिलीं, एक सेकंड के लिए।

उसकी आँखों में कोई शर्म नहीं—बस काम, और शायद थोड़ा सा प्लेज़र।

मेरा लुंड अब दर्द कर रहा था—नाइट गाउन के नीचे फड़क रहा था।

तीसरी बार...

विशाल ने ग्लास फिर से उसकी गांड पर रखा—बैलेंस करते हुए धक्के जारी।

मैं बीयर की बोतल हाथ में लेकर सोफे की तरफ चला गया।

अलोक मेरे साथ था—अब वो सिर्फ़ अंडरवियर में था।

उसका टेंट बहुत बड़ा था—बाहर से ही साफ़ दिख रहा था कि वो पूरी तरह हार्ड है।

मैंने सोफे पर होकर बीयर का एक घूँट लिया।

फिर बोतल को अपने पेल्विस पर रख दिया—जैसे ठंडक महसूस हो रही हो।

अचानक अलोक का हाथ मेरी क्रॉच की तरफ बढ़ा।

मैं एकदम अलर्ट हो गया—दिल धड़कने लगा।

लेकिन अगले ही सेकंड राहत हुई—उसने मेरी बीयर पकड़ ली।

"सैम... ये ठंडी नहीं रही... छोड़ दे," उसने कहा।

मैं इतना सैंडी को देखने में खोया हुआ था कि बीयर की टेम्परेचर का तो मुझे कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था।

"इट्स ओके... चलो शॉट्स लेते हैं," मैंने कहा।

"नो नो... मैंने आज काफी पी ली है," मैंने मना किया।

"नहीं यार... ये मेरा बर्थडे है... मैं इंसिस्ट करता हूँ," अलोक ने कहा।

मैंने कुछ नहीं कहा—ना हाँ, ना ना।

बस चुप रहा।

"सैंडी... हमारे लिए कुछ शॉट्स बना!" अलोक ने जोर से चिल्लाया।

सैंडी तुरंत अलर्ट हो गई—वो अभी भी चारों हाथ-पैरों पर थी।

"अरे यार... मत कर... मैं तो मज़े में था bhenchod," डेविड ने शिकायत की।

"अरे यार... पूरी रात तेरी है... अगर तुझे पसंद आए तो मैं कल पूरे दिन के लिए उसे अकेले बुक कर दूँगा," अलोक ने कहा।

डेविड ने निराशा से सैंडी को छोड़ा—उसका लुंड अभी भी हार्ड, प्रीकम टपक रहा था।

वो और विशाल दोनों सोफे की तरफ आए।

सैंडी उठी—नंगी, बॉडी पर सारे निशान, चेहरा मेकअप से बिगड़ा हुआ, काजल बहा हुआ।

वो मिनी बार की तरफ गई।

इस बार मैंने उनके लुंड्स को अच्छे से नोटिस किया।

विशाल का—ब्राउन, अच्छा साइज़ लेकिन पतला, उसके बॉडी टाइप जैसा।

डेविड का—डार्क ब्लैक, पर्पल हेड वाला, मोटा और भारी, दोनों से प्रीकम लीक हो रहा था।

दोनों 2-सीटर सोफे पर बैठ गए—मेरे ठीक सामने।

मैं और अलोक दूसरे सोफे पर थे।

अचानक वो मेरे ठीक सामने आ खड़ी हुई—पूरी तरह नंगी।

मैं सोफे पर बैठा था, वो खड़ी—इसलिए उसकी चूत मेरे चेहरे के ठीक सामने, इतनी करीब कि उसकी गंध सीधे मेरी नाक में आ रही थी। गर्म, नमकीन, औरत की वो खास खुशबू—जो आज रात की मेहनत से और भी तेज़ हो गई थी।

इससे पहले मैंने ज़िंदगी में सिर्फ़ दो चूतें रियल लाइफ में देखी थीं—पहली अपनी कॉलेज गर्लफ्रेंड की, और दूसरी नेहा की।

दोनों के लिए मुझे बहुत स्ट्रगल करना पड़ा था—घंटों कोर्टिंग, इमोशनल गेम, प्यार का नाटक, और फिर भी बहुत मेहनत के बाद ही वो पल आया था।

लेकिन सैंडी की चूत... ये तो बस शीयर लक थी।

कोई मेहनत नहीं, कोई स्ट्रगल नहीं।

बस कमरे में घुसा, और वो मेरे सामने—नंगी, तैयार, खुशबू फैलाती हुई।

जैसे कोई गिफ्ट मिल गया हो—बिना किसी कोशिश के।

मैं बस उसे देखता रहा—यंग, हेयरलेस, गुलाबी, अभी भी गीली और चमकती हुई।

क्लिट थोड़ा बाहर निकला हुआ, जैसे अभी-अभी बहुत काम हुआ हो।

मेरा लुंड नाइट गाउन के नीचे फड़क रहा था—दर्द करने लगा था।

"सर... शॉट्स," उसने फिर धीरे से कहा।

मैंने ऊपर देखा—उसका सपाट पेट, पतली कमर, 36 साइज़ के भारी स्तन लटकते हुए, निप्पल्स हार्ड।

चेहरा—मुस्कान के साथ, लेकिन काजल बहा हुआ, होंठ सूजे, कम के निशान।

वो चेहरा... कहीं जाना-पहचाना लग रहा था, लेकिन नशे में याद नहीं आ रहा था।

मैं ट्रे की तरफ हाथ बढ़ाने ही वाला था कि पीछे से ज़ोरदार थप्पड़—फट्ट! सैंडी की गांड पर।

"ये तरीका है गेस्ट को ऑफर करने का? लेमन कहाँ है?" अलोक ने कहा।

"सॉरी... सॉरी," वो जल्दी से बोली।

ट्रे टेबल पर रखी, लेमन लेने बार एरिया गई।

उसकी गांड हिलती हुई—रेड मार्क्स से भरी, डांस करती हुई।

वो जल्दी लौटी, लेमन हाथ में।

उसने ग्लास उठाया।

मैंने हाथ बढ़ाया, लेकिन वो बोली,

"नो नो सर... जस्ट रिलैक्स।"

वो झुकी—स्तन मेरे चेहरे के सामने लटक आए।

ग्लास मेरे होंठों पर—शॉट गले में गया, जलन हुई।

फिर लेमन उसके मुँह में।

वो और झुकी—होंठ मेरे होंठों से मिले।

लेमन दबाया—खट्टा रस मेरे मुँह में।

और फिर गहरा किस।

हमारी जीभें लड़ रही थीं—लेमन के रस के साथ, उसके होंठों का स्वाद, कम का नमकीन।

मैंने उसके होंठ चूसे, जीभ अंदर डाली—जैसे लड़ रहे हों।

किस खत्म हुआ।

वो पीछे हटी, मुस्कुराई।

"अच्छा लगा सर?"

अलोक हँसा,

"देखा... सैंडी अच्छी सर्विस देती है।"

विशाल और डेविड भी हँसे।

सैंडी अब सामने खड़ी—इंतज़ार में।

मेरा लुंड अब फटने को तैयार।

नेहा कमरे में सो रही है...

और मैं यहाँ...
 

malikarman

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अब रात के 12 बज चुके थे।

मैं आधी नींद में था—दिमाग में वही विचार घूम रहे थे: वेटर, नेहा के अंडरगारमेंट्स, उसकी ब्रा की खुशबू, और वो सब कल्पनाएँ जो मुझे सोने नहीं दे रही थीं।

अचानक एक जोरदार म्यूजिक की आवाज़ आई—बेस हेवी, पार्टी वाला।

शायद बगल वाले कमरे से... या ऊपर से।

वीकेंड था, और ऐसे रिसॉर्ट में लोग गेटअवे के लिए आते हैं—पार्टी, ड्रिंक्स, लेट नाइट।

मैं तो सोचता हूँ कि अगर कोई डिस्टर्ब हो रहा है तो क्या फर्क पड़ता है... हम खुद भी तो अभी-अभी सोए हैं, लेकिन ये म्यूजिक ने मुझे पूरी तरह जगा दिया।

मैंने धीरे से नेहा को अपने से अलग किया—वो गहरी नींद में थी, सिर मेरी छाती पर टिका हुआ, एक हाथ मेरी कमर पर।

मैं नहीं चाहता था कि वो जागे।

धीरे-धीरे बिस्तर से उतरा, अभी भी नंगा।

वॉशरूम गया, एक लूज नाइट गाउन पहना—वो पतला वाला, जो मुश्किल से ढकता है।

सिगरेट का पैकेट उठाया और बालकनी की तरफ चला गया।

बाहर ठंडी हवा चल रही थी—रात की साइलेंस, सड़क पर बहुत कम गाड़ियाँ।

कूल ब्रिज़ ने मेरे चेहरे को छुआ, अच्छा लगा।

मैंने सिगरेट जलाई, एक गहरा कश लिया, धुआँ ऊपर की तरफ छोड़ा।

म्यूजिक अब और तेज़ लग रहा था—साफ-साफ सुनाई दे रहा था कि सोर्स कहाँ से आ रहा है।

बगल वाली बालकनी से।

उनका दरवाज़ा खुला हुआ था—लाइट्स ऑन, और अंदर से म्यूजिक और हँसी की आवाज़ें।

मैंने झुककर देखा।

वो आदमी वहाँ खड़ा था—वही, जो रिसेप्शन पर नेहा से बात करने की कोशिश कर रहा था।

लंबा, डार्क स्किन, सफेद बाल, लेट 50s में।

एक हाथ में ड्रिंक का ग्लास, दूसरे में सिगरेट।

वो बालकनी की रेलिंग पर टिका हुआ था, अकेला लग रहा था, लेकिन म्यूजिक उसके कमरे से आ रहा था—शायद अंदर कोई और भी हों।

वो मेरी तरफ देखा—एक सेकंड के लिए आँखें मिलीं।

उसने हल्के से सिर हिलाया, जैसे "हैलो" कह रहा हो, या शायद पहचान गया हो।

मैंने सिगरेट का एक और कश लिया, धुआँ उसके कमरे की तरफ फेंका।

दिमाग में फिर वही विचार घूमने लगा—ये आदमी... रिसेप्शन पर नेहा को देखकर कितनी देर तक घूर रहा था।

उसकी आँखें नेहा के चेहरे से नीचे सरक रही थीं—स्तनों पर, कमर पर।

शायद वो सोच रहा होगा कि नेहा जैसी औरत उसके साथ होती तो क्या होता।

या शायद वो अब भी कल्पना कर रहा हो—हमारे कमरे की आवाज़ें सुनकर, या नेहा के बारे में सोचकर।

मैंने सोचा—अगर वो जानता कि अभी कुछ घंटे पहले नेहा मेरे लुंड को चाट रही थी, मुँह में ले रही थी, दरवाज़े के पास झुककर मुझे अंदर ले रही थी... तो क्या करता?

शायद वो भी सिगरेट पीते हुए सोच रहा हो—नेहा की वो डार्क ब्राउन आँखें, वो होंठ, वो बॉडी।

वो आदमी अभी भी वहाँ था—अब उसने ग्लास उठाकर मेरी तरफ देखा, जैसे टोस्ट कर रहा हो।

मैंने बस मुस्कुरा दिया—एक छोटी सी, लेकिन मतलब वाली मुस्कान।

"हाउ आर यू, यंग मैन?" उसने कहा, आवाज़ में वो पुरानी वाली दोस्ताना लेकिन थोड़ी शरारती टोन।

हमारी बालकनियाँ अडजॉइनिंग थीं, लेकिन इतनी करीब नहीं—4th फ्लोर पर, बीच में एक छोटी सी गैप, हवा में ठंडी हवा बह रही थी।

मैंने सिगरेट का एक और कश लिया, धुआँ ऊपर फेंका, और मुस्कुराकर जवाब दिया,

"गुड... गुड।"

"सो व्हेयर आर यू फ्रॉम?"

"पुणे।"

"यू?"

"नागपुर।"

"गुड... एंजॉयिंग विद फ्रेंड्स?"

मैं जानता था वो अकेला नहीं था—रिसेप्शन पर मैंने देखा था, उसके साथ दो और आदमी थे। शायद अंदर बैठे होंगे, म्यूजिक सुनते हुए।

"यस," मैंने हल्के से कहा।

"व्हेयर आर योर ड्रिंक्स, यंग मैन?"

"ओवर हो गई... मैं सोने वाला था।"

"टू सून... दैट्स नॉट फेयर।"

उसने एक झटके में ग्लास उठाया, फिर मेरी तरफ देखकर विंक किया—बिना किसी शर्म के, बिल्कुल अपोलोजेटिक।

"यू हैव ब्यूटीफुल कंपनी... आई वुड हैव बीन अप ऑल नाइट अगर मैं तुम्हारी जगह होता।"

उसकी बात सुनकर मेरे अंदर एक अजीब सा जोश आया।

मैं रूड नहीं होना चाहता था किसी स्ट्रेंजर से, लेकिन एक तरफ से मुझे अच्छा लग रहा था—जब लोग नेहा को देखकर जलते हैं, उसकी खूबसूरती पर जलन महसूस करते हैं, और वो जलन उनके चेहरे पर साफ दिखती है।

ये मुझे पावरफुल फील कराता है।

नेहा मेरी है, और वो सब बस देख सकते हैं।

"व्हाट टू डू... बार क्लोज़्ड है, और ड्रिंक ओवर," मैंने कहा।

"व्हाट यू वर हैविंग?"

"बीयर।"

वो हँसा—एक गहरी, थकी हुई लेकिन खुश वाली हँसी।

"वेट..."

वो अंदर चला गया।

मैं बालकनी पर टिका रहा, सिगरेट खत्म करते हुए।

कुछ सेकंड बाद वो वापस आया—हाथ में एक फ्रेश कोल्ड बियर की बोतल।

उसने उसे मेरी तरफ बढ़ाया।

"हैव इट, यंग मैन।"

"नो, इट्स ओके..."

"नो नो... हैव इट।"

उसने फिर हँसा, "वी हैव गोडाउन," और जोर से हँसा—जैसे वो खुद को बहुत कूल फील कर रहा हो।

मैंने बोतल ली—ठंडी, ओस से भरी हुई।

हम दोनों ने बोतलें हवा में उठाईं—"चियर्स!"

मैंने एक घूँट लिया, ठंडी बीयर गले से नीचे उतरी।

वो भी पीया, फिर मुस्कुराकर बोला,

"आई एम अलोक, बाय द वे।"

"सैम," मैंने कहा।

"व्हाट यू डू, सैम?"

"आई एम इन आईटी।"

"ओह्ह... सो वीकेंड गेटअवे विद योर ब्यूटीफुल वाइफ।"

"यस," मैंने हल्के से कहा, मुस्कुराते हुए।

उसकी बातें बार-बार नेहा पर आ रही थीं—कैजुअली, बिना किसी डिसरिस्पेक्ट के।

जैसे कोई सामान्य बात कर रहा हो, लेकिन आँखों में वो चमक थी जो कह रही थी कि वो नेहा को अच्छे से नोटिस कर चुका है।

मुझे अच्छा लग रहा था—एक अजीब सा पावर फील, कि कोई और मेरी वाइफ की तारीफ कर रहा है, जल रहा है, लेकिन मुझे छू नहीं सकता।

"व्हाट यू गाइज़ डूइंग हियर?" मैंने पूछा, बात को आगे बढ़ाते हुए।

अलोक ने हँसा—एक गहरी, थकी हुई लेकिन मजेदार हँसी।

"हेहे... व्हाट ओल्ड गाइज़ डू विद फ्रेंड्स... दारू, बिरयानी एंड लड़की," उसने कैजुअली कहा, जैसे ये सबसे नॉर्मल बात हो।

उसके शब्द सुनते ही मेरे दिमाग में वो सीन फ्लैश हो गया—जो मैंने पहले नोटिस किया था लेकिन इग्नोर कर दिया था।

रिसेप्शन पर वो "Hiii" वाली आवाज़—यंग, अट्रैक्टिव, थोड़ी प्लेफुल।

मैंने सोचा था शायद कोई होटल स्टाफ है, या कोई और गेस्ट।

लेकिन अब... अलोक की बात सुनकर क्यूरियॉसिटी बढ़ गई।

क्या उसके साथ कोई लड़की है?

कितनी यंग? कितनी अट्रैक्टिव?

और वो "लड़की" का मतलब क्या है—कोई फ्रेंड, या कुछ और?

मैंने बीयर का एक और घूँट लिया, बालकनी की रेलिंग पर टिका रहा।

"सो... वो लड़की... तुम्हारे साथ है?" मैंने कैजुअली पूछा, जैसे बस बात चल रही हो।

अलोक ने ग्लास घुमाया, मुस्कुराया—एक शरारती वाली मुस्कान।

अलोक ने ग्लास घुमाते हुए कहा,

"यस... वो लड़की हमारे साथ है। बर्थडे प्रेजेंट है मेरे फ्रेंड्स ने दिया।"

"बर्थडे प्रेजेंट?" मैंने थोड़ा कन्फ्यूज होकर पूछा।

उसने खुद की तरफ इशारा किया—एक शरारती मुस्कान के साथ।

मैं समझ गया।

"ओह्ह... हैप्पी बर्थडे!" मैंने हँसते हुए कहा।

हम दोनों ने बोतलें उठाईं—बॉटम्स अप।

ठंडी बीयर गले से नीचे उतरी, और वो ठंडक अब मेरे दिमाग में भी फैल रही थी।

"सो... हाउ ओल्ड आर यू?" मैंने पूछा।

"58," उसने कैजुअली कहा, जैसे कोई बड़ी बात नहीं।

मैंने मन ही मन सोचा—ये तो मेरे पापा की उम्र के आसपास है।

लेकिन उसके चेहरे पर कोई थकान नहीं—बल्कि एक एनर्जी थी, वो जो पार्टी और ड्रिंक्स से आती है।

"थैंक्स फॉर द बियर," मैंने कहा, बोतल खत्म करते हुए।

अलोक ने फिर मुस्कुराया—वो वाली मुस्कान जो कुछ छुपा रही हो।

"यू कैन कम टू आवर रूम फॉर मोर बियर... द नाइट इज स्टिल यंग।"

"हम्म... लेकिन मेरी वाइफ सो गई है," मैंने कहा।

उसने कंधे उचकाए, फिर विंक किया—बिना किसी शर्म के।

"तो क्या हुआ... मैं तो उसे बुला नहीं रहा। वैसे भी हमारे कमरे में जो चल रहा है, वो किसी अच्छी-खासी औरत के देखने लायक नहीं है।"
उसकी ये बात सुनकर मेरी उत्सुकता और बढ़ गई।

अंदर क्या हो रहा होगा?

वो लड़की कौन है?

क्या सच में कुछ गर्मागर्म चल रहा है?

मेरा दिमाग अब तेज़ी से सोचने लगा।कितनी यंग? क्या वो सच में "प्रेजेंट" जैसी है—जैसे कोई एस्कॉर्ट, या कोई फ्रेंड जो पार्टी में एक्स्ट्रा मज़ा दे रही हो?

और "नॉट अप्रोप्रिएट फॉर डीसेंट लेडी"—मतलब क्या?

डांस? स्ट्रिप? या कुछ और... इंटेंस?

मेरा दिमाग अब तेज़ी से चल रहा था।

नेहा सो रही थी—शांत, अनजान।

मैं बालकनी पर खड़ा था, दिमाग में दो आवाज़ें लड़ रही थीं।

एक तरफ ब्रेन चिल्ला रहा था—ये गलत है, नेहा जाग गई तो क्या सोचेगी? कहाँ गया ये आदमी रात के 12 बजे? मैं कह दूँगा कि नींद नहीं आ रही थी, बाहर टहलने गया था... या बार में... या कुछ भी। लेकिन नेहा को शक हो सकता है।

दूसरी तरफ... मेरा लुंड।

तीसरी बार रात में हार्ड हो रहा था—ये मेरे लिए खुद का वर्ल्ड रिकॉर्ड था।

आज रात तक जो भी मज़ा मिला है—नेहा के साथ वो सब—वो मेरे दिमाग की वजह से नहीं, मेरे लुंड की वजह से मिला।

दिमाग तो वेटर को पीट-पीटकर वीकेंड खराब कर देता, लेकिन लुंड... लुंड जानता है कि मज़ा कहाँ है।

अलोक अभी भी बालकनी पर खड़ा था, मेरे जवाब का इंतज़ार कर रहा था।

उसकी आँखों में वो चमक थी—जैसे वो पहले से जानता हो कि मैं क्या सोच रहा हूँ।

मैंने साँस ली, और बोल दिया,

"ओके... तुम्हारा रूम नंबर क्या है?"

"411," उसने मुस्कुराकर कहा।

"ओके... वेट, मैं 15 मिनट में आता हूँ।"

मैं कमरे में वापस आया।

नेहा गहरी नींद में थी—नंगी, चादर थोड़ी सरकी हुई, स्तन हल्के से ऊपर-नीचे हो रहे थे साँसों के साथ।

मैंने धीरे से चादर ठीक की, उसे अच्छे से कवर किया ताकि वो कोज़ी रहे।

उसके माथे पर हल्का किस किया—वो सोते हुए भी हल्का सा मुस्कुराई।

फिर धीरे-धीरे मैंने मेन डोर खोला।

हाथ काँप रहे थे।

दरवाज़ा बंद किया, कॉरिडोर में निकला।

रात का सन्नाटा, सिर्फ़ एसी की हल्की आवाज़।

411 का दरवाज़ा ठीक बगल में था।

मैंने शेकिंग हैंड से डोरबेल दबाई।

अलोक ने तुरंत दरवाज़ा खोला।

अंदर से जोरदार म्यूजिक आ रहा था—धब चिक... धब चिक... बेस इतना हेवी कि सीने में महसूस हो रहा था।

और उसके साथ... लाउड मॉन्स।

एक औरत की आवाज़—ऊँची, रसीली, "आह्ह... हाँ... और जोर से..."

मेरा लुंड तुरंत ट्विच कर गया—एकदम सख्त।

अलोक ने मुझे अंदर आने का इशारा किया, मुस्कुराकर।

"आ गए यंग मैन... कम इन।"

मैं कदम रखा।

दरवाज़ा बंद हुआ।

और जैसे ही मैंने अंदर देखा... मेरी आँखें चौड़ी हो गईं।

शॉक में साँस रुक गई।

कमरे में ब्राइट लाइट थी—कोई डिम नहीं, फुल ऑन लाइट्स।

जैसे कोई स्टेज हो, और सब कुछ साफ-साफ दिख रहा हो।

बेड पर वो लड़की—बहुत यंग, बहुत अट्रैक्टिव, पूरी तरह नंगी।

वो चारों हाथ-पैरों पर थी—ऑन हर फोर्स।

उसके पीछे एक ब्राउन स्किन वाला पतला लड़का—शायद 45-46 का—जोर-जोर से धक्के दे रहा था।

हर थ्रस्ट के साथ उसकी बॉडी हिल रही थी, आहें निकल रही थीं।

सामने एक छोटा कद का आदमी—पेट बहुत बड़ा, पॉट जैसा—खड़ा था।

उसका लुंड हार्ड था, वो बस उसे लड़की के क्यूट फेस पर टैप कर रहा था—टिप से प्रीकम निकल रहा था, उसके गालों, होंठों पर फैला रहा था।

उसके हाथ में व्हिस्की का ग्लास था।

और पीछे वाला लड़का—जिसका लुंड अंदर था—उसने अपना व्हिस्की ग्लास लड़की की गांड पर रख दिया था।

ग्लास बैलेंस हो रहा था उसके मूवमेंट्स के साथ, जैसे कोई ट्रिक हो।

मैं अंदर घुसा।

सबने मुझे देखा।

आँखें मिलीं।

लेकिन कोई शॉक नहीं, कोई शर्म नहीं।

जैसे वो लोग सिर्फ़ कॉफी पी रहे हों, या टीवी देख रहे हों—न कि किसी लड़की को चोद रहे हों, जो उम्र में उनकी बेटी जितनी हो सकती है।

पीछे वाला लड़का—जिसका लुंड अंदर था—उसने ग्लास उठाया, मेरी तरफ देखकर बोला,

"दैट्स विशाल," और ग्लास फिर से लड़की की गांड पर रख दिया।

सामने वाला—पॉट वाला—मुझे देखकर बस भौंहें उठाईं, जैसे "हाय" कह रहा हो।

उसका फोकस लड़की के चेहरे पर था—अपने प्रीकम से उसके होंठों को पेंट कर रहा था।

फिर अलोक ने लड़की की तरफ देखकर कहा,

"और ये... क्या नाम बताया था Bhenchod इसने?"

विशाल ने हँसते हुए कहा,

"सैंडी... हेहे।"

"हाँ सैंडी... पता नहीं असली नाम है या आज रात का," अलोक ने कहा।

तब तक मुझे समझ आ गया—ये लड़की प्रॉस्टिट्यूट है।

पेड, पार्टी के लिए बुलाई गई।

बर्थडे गिफ्ट।

अलोक के फ्रेंड्स ने उसे दिया होगा—या शायद ग्रुप में शेयर कर रहे हैं।

सैंडी ने मुझे देखा—आँखें मिलीं।

उसकी आँखें थकी हुई लेकिन प्रोफेशनल थीं—कोई शर्म नहीं, बस काम कर रही थी।

वो मुस्कुराई हल्के से, जैसे कह रही हो "जॉइन कर लो"।

मेरा लुंड अब दर्द कर रहा था—तीसरी बार, और अब ये सब देखकर और भी सख्त।

दिमाग में नेहा का विचार आया—वो सो रही है, अनजान।

लेकिन यहाँ... यहाँ कुछ और चल रहा था।

अलोक ने मेरे कंधे पर हाथ रखा।

"बीयर ले लो, सैम। बैठो। एंजॉय करो।"

मैं बेड के पास वाली टेबल तक पहुँचा—जहाँ सारी बीयर की बोतलें रखी हुई थीं।

लेकिन मेरी आँखें एक सेकंड के लिए भी उस लड़की से हट नहीं रही थीं।

वो इतनी सेक्सी थी... इतनी... परफेक्ट।

फुल प्रोपोर्शनेट जिम बॉडी—कमर पतली, हिप्स चौड़े, लेकिन सब बैलेंस्ड।

वो चारों हाथ-पैरों पर थी, इसलिए उसके स्तन नीचे लटक रहे थे—भारी, गोल, निप्पल्स हार्ड और गुलाबी।

मिल्की व्हाइट स्किन—जैसे दूध में डूबी हो, लेकिन अब पूरी तरह रेड मार्क्स से भरी हुई।

हिक्कीज़—गले पर, कंधों पर, स्तनों के ऊपर—लाल-नीले निशान।

कंधों और गर्दन पर दाँतों के निशान—किसी ने जोर से काटा था।

उसका मेकअप पूरी तरह बिगड़ चुका था—काजल आँखों से बहकर गालों पर काली लाइनें बना रहा था, जो उसे और भी वाइल्ड और अट्रैक्टिव बना रहा था।

चेहरे पर कम के ट्रेस—सफेद लाइनें, कुछ सूख चुकी थीं, कुछ अभी गीली।

गालों पर, होंठों के किनारे, ठोड़ी पर—सब जगह फैली हुई।

वो पोज़िशन मेंटेन करना मुश्किल था—पीछे से धक्के, सामने से लुंड फेस पर टैप—लेकिन वो बैलेंस कर रही थी।

दोनों तरफ से दो लुंड—एक अंदर, एक मुँह के पास।

विशाल (पीछे वाला) ने फिर धक्का दिया—जोर से।

सैंडी की बॉडी हिली, स्तन लटके हुए हिले, एक आह निकली—"आह्ह... हाँ... फाड़ दो..."
डेविड (पॉट वाला) ने अपना लुंड उसके होंठों पर रगड़ा, प्रीकम फैलाते हुए।

"ओपन कर... और चूस।"

"ले लो, सैम। बैठ जाओ। अच्छा शो चल रहा है ना?"

मैंने बोतल ली, लेकिन बैठा नहीं।

बस खड़ा रहा—आँखें सैंडी पर।

उसकी स्किन पर पसीना चमक रहा था, बाल बिखरे हुए, साँसें तेज़।

वो मुझे देख रही थी—आँखें मिलीं, एक सेकंड के लिए।

उसकी आँखों में कोई शर्म नहीं—बस काम, और शायद थोड़ा सा प्लेज़र।

मेरा लुंड अब दर्द कर रहा था—नाइट गाउन के नीचे फड़क रहा था।

तीसरी बार...

विशाल ने ग्लास फिर से उसकी गांड पर रखा—बैलेंस करते हुए धक्के जारी।

मैं बीयर की बोतल हाथ में लेकर सोफे की तरफ चला गया।

अलोक मेरे साथ था—अब वो सिर्फ़ अंडरवियर में था।

उसका टेंट बहुत बड़ा था—बाहर से ही साफ़ दिख रहा था कि वो पूरी तरह हार्ड है।

मैंने सोफे पर होकर बीयर का एक घूँट लिया।

फिर बोतल को अपने पेल्विस पर रख दिया—जैसे ठंडक महसूस हो रही हो।

अचानक अलोक का हाथ मेरी क्रॉच की तरफ बढ़ा।

मैं एकदम अलर्ट हो गया—दिल धड़कने लगा।

लेकिन अगले ही सेकंड राहत हुई—उसने मेरी बीयर पकड़ ली।

"सैम... ये ठंडी नहीं रही... छोड़ दे," उसने कहा।

मैं इतना सैंडी को देखने में खोया हुआ था कि बीयर की टेम्परेचर का तो मुझे कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था।

"इट्स ओके... चलो शॉट्स लेते हैं," मैंने कहा।

"नो नो... मैंने आज काफी पी ली है," मैंने मना किया।

"नहीं यार... ये मेरा बर्थडे है... मैं इंसिस्ट करता हूँ," अलोक ने कहा।

मैंने कुछ नहीं कहा—ना हाँ, ना ना।

बस चुप रहा।

"सैंडी... हमारे लिए कुछ शॉट्स बना!" अलोक ने जोर से चिल्लाया।

सैंडी तुरंत अलर्ट हो गई—वो अभी भी चारों हाथ-पैरों पर थी।

"अरे यार... मत कर... मैं तो मज़े में था bhenchod," डेविड ने शिकायत की।

"अरे यार... पूरी रात तेरी है... अगर तुझे पसंद आए तो मैं कल पूरे दिन के लिए उसे अकेले बुक कर दूँगा," अलोक ने कहा।

डेविड ने निराशा से सैंडी को छोड़ा—उसका लुंड अभी भी हार्ड, प्रीकम टपक रहा था।

वो और विशाल दोनों सोफे की तरफ आए।

सैंडी उठी—नंगी, बॉडी पर सारे निशान, चेहरा मेकअप से बिगड़ा हुआ, काजल बहा हुआ।

वो मिनी बार की तरफ गई।

इस बार मैंने उनके लुंड्स को अच्छे से नोटिस किया।

विशाल का—ब्राउन, अच्छा साइज़ लेकिन पतला, उसके बॉडी टाइप जैसा।

डेविड का—डार्क ब्लैक, पर्पल हेड वाला, मोटा और भारी, दोनों से प्रीकम लीक हो रहा था।

दोनों 2-सीटर सोफे पर बैठ गए—मेरे ठीक सामने।

मैं और अलोक दूसरे सोफे पर थे।

अचानक वो मेरे ठीक सामने आ खड़ी हुई—पूरी तरह नंगी।

मैं सोफे पर बैठा था, वो खड़ी—इसलिए उसकी चूत मेरे चेहरे के ठीक सामने, इतनी करीब कि उसकी गंध सीधे मेरी नाक में आ रही थी। गर्म, नमकीन, औरत की वो खास खुशबू—जो आज रात की मेहनत से और भी तेज़ हो गई थी।

इससे पहले मैंने ज़िंदगी में सिर्फ़ दो चूतें रियल लाइफ में देखी थीं—पहली अपनी कॉलेज गर्लफ्रेंड की, और दूसरी नेहा की।

दोनों के लिए मुझे बहुत स्ट्रगल करना पड़ा था—घंटों कोर्टिंग, इमोशनल गेम, प्यार का नाटक, और फिर भी बहुत मेहनत के बाद ही वो पल आया था।

लेकिन सैंडी की चूत... ये तो बस शीयर लक थी।

कोई मेहनत नहीं, कोई स्ट्रगल नहीं।

बस कमरे में घुसा, और वो मेरे सामने—नंगी, तैयार, खुशबू फैलाती हुई।

जैसे कोई गिफ्ट मिल गया हो—बिना किसी कोशिश के।

मैं बस उसे देखता रहा—यंग, हेयरलेस, गुलाबी, अभी भी गीली और चमकती हुई।

क्लिट थोड़ा बाहर निकला हुआ, जैसे अभी-अभी बहुत काम हुआ हो।

मेरा लुंड नाइट गाउन के नीचे फड़क रहा था—दर्द करने लगा था।

"सर... शॉट्स," उसने फिर धीरे से कहा।

मैंने ऊपर देखा—उसका सपाट पेट, पतली कमर, 36 साइज़ के भारी स्तन लटकते हुए, निप्पल्स हार्ड।

चेहरा—मुस्कान के साथ, लेकिन काजल बहा हुआ, होंठ सूजे, कम के निशान।

वो चेहरा... कहीं जाना-पहचाना लग रहा था, लेकिन नशे में याद नहीं आ रहा था।

मैं ट्रे की तरफ हाथ बढ़ाने ही वाला था कि पीछे से ज़ोरदार थप्पड़—फट्ट! सैंडी की गांड पर।

"ये तरीका है गेस्ट को ऑफर करने का? लेमन कहाँ है?" अलोक ने कहा।

"सॉरी... सॉरी," वो जल्दी से बोली।

ट्रे टेबल पर रखी, लेमन लेने बार एरिया गई।

उसकी गांड हिलती हुई—रेड मार्क्स से भरी, डांस करती हुई।

वो जल्दी लौटी, लेमन हाथ में।

उसने ग्लास उठाया।

मैंने हाथ बढ़ाया, लेकिन वो बोली,

"नो नो सर... जस्ट रिलैक्स।"

वो झुकी—स्तन मेरे चेहरे के सामने लटक आए।

ग्लास मेरे होंठों पर—शॉट गले में गया, जलन हुई।

फिर लेमन उसके मुँह में।

वो और झुकी—होंठ मेरे होंठों से मिले।

लेमन दबाया—खट्टा रस मेरे मुँह में।

और फिर गहरा किस।

हमारी जीभें लड़ रही थीं—लेमन के रस के साथ, उसके होंठों का स्वाद, कम का नमकीन।

मैंने उसके होंठ चूसे, जीभ अंदर डाली—जैसे लड़ रहे हों।

किस खत्म हुआ।

वो पीछे हटी, मुस्कुराई।

"अच्छा लगा सर?"

अलोक हँसा,

"देखा... सैंडी अच्छी सर्विस देती है।"

विशाल और डेविड भी हँसे।

सैंडी अब सामने खड़ी—इंतज़ार में।

मेरा लुंड अब फटने को तैयार।

नेहा कमरे में सो रही है...

और मैं यहाँ...
Good update ☺️
 
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I initially posted this in English but did not receive any response. Therefore, I rewrote it in Hindi with the help of a translation tool, so there might be some errors.
Thank you for your understanding.
 
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सैंडी ने मुझे देखा—मेरी आँखें आधी बंद, आधी खुली।

उसके होंठों का स्वाद अभी भी मेरे मुँह में था—नया स्वाद, नया टच, नई एनर्जी।

मैं हाई फील कर रहा था... शायद वो शॉट बहुत स्ट्रॉन्ग था, शायद ये कमरे का माहौल, या शायद दोनों।

एक सेकंड के लिए लगा—ये सच नहीं हो सकता।

मैं सपना देख रहा हूँ।

मैंने खुद को चुटकी काटी—दर्द हुआ।

सब मुझे देख रहे थे।

अलोक ने मेरे कंधे पर थपकी दी।

"यू आर नॉट ड्रीमिंग, यंग मैन," वो हँसते हुए बोला।

विशाल और डेविड—अभी भी हँस रहे थे, अपने लुंड हाथ में पकड़े हुए, जैसे कोई कॉमन जोक हो।

सैंडी अब मेरे पास से हट गई।

मुझे लगा जैसे मेरा फेवरेट खिलौना बस मेरे हाथ से दूर जा रहा है।

मुझे नहीं पता था कि मेरा उस पर कितना अधिकार है... या बिल्कुल भी है कि नहीं।

सब कुछ इतनी अचानक हो रहा था—एक पल पहले वो मेरे होंठों पर थी, लेमन का रस मेरे मुँह में छोड़कर, और अब वो अलोक की तरफ जा रही थी।

मैं बस देखता रहा।

कम से कम... मैंने सोचा... अगर वो थोड़ा और रुकती तो मैं उसके 36 साइज़ के परफेक्ट स्तनों को छू लेता।

उसकी स्किन इतनी सॉफ्ट, इतनी गर्म, इतनी चिकनी लग रही थी—बस एक बार टच करके महसूस कर लेता कि सच में वैसी ही है जैसी दिख रही है।

उसके निप्पल्स हार्ड थे, गुलाबी, जैसे अभी-अभी किसी ने उन्हें चूसा हो।

वो अलोक के सामने चली गई।

एक शॉट हाथ में लिया।

फिर धीरे से सोफे पर घुटनों के बल बैठ गई—अपनी मजबूत जांघें सोफे पर रखकर, बैलेंस बनाते हुए।

पहले अलोक को शॉट दिया—उसके होंठों पर ग्लास टिल्ट किया।

फिर लेमन उसके मुँह में रखा।

फिर किस—गहरा, लंबा।

लेकिन अब सैंडी का हाथ अलोक के अंडरवियर के अंदर सरक गया।

उसने धीरे से लुंड बाहर निकाला—हार्ड, गर्म, हवा में खड़ा।

उसने स्ट्रोक करना शुरू किया—धीरे-धीरे, ऊपर-नीचे।

और अलोक के दो उँगलियाँ उसकी चूत में गायब हो गईं।

मैं देख रहा था—उसकी चूत गर्म, गीली, उँगलियाँ अंदर-बाहर हो रही थीं।

वो महसूस कर रहा था—उसकी आँखें बंद, सिर पीछे।

किस 5 मिनट तक चला—लंबा, गहरा।

सैंडी का हाथ स्ट्रोक कर रहा था, अलोक की उँगलियाँ फिंगरिंग कर रही थीं।

गीली आवाज़ें—चप... चप...

फिर विशाल बोला,

"माय टर्न... माय टर्न!"

किस टूटा।

सैंडी उठी।

अलोक ने उँगलियाँ बाहर निकालीं—चमकती हुई, गीली।

उसने मुझे दिखाया—उँगलियाँ पर सैंडी का रस चमक रहा था।

फिर उसी उँगली को सैंडी की तरफ दिखाया।

सैंडी समझ गई।

वो झुकी, उँगली मुँह में ली।

चाटी, साफ की—जीभ से हर बूंद सोखते हुए।

फिर अलोक ने वही गीली उँगली उसके स्तनों पर रगड़ी—जैसे कोई टॉवल हो।

सैंडी खुशी से कर रही थी—स्तन आगे करके, जैसे एंजॉय कर रही हो।

मैं बस देखता रहा।


सैंडी अब विशाल के सामने चली गई।

दोनों सोफे पर घुटनों के बल बैठे—वो उसके सामने, जैसे पहले अलोक के साथ किया था।

शॉट पहले—विशाल के होंठों पर ग्लास टिल्ट किया।

फिर लेमन उसके मुँह में रखा।

फिर किस—गहरा, लंबा, जीभें लड़ती हुई।

हर बार ये सीन एक जैसा लगता था, लेकिन हर बार नया महसूस होता था।

सैंडी की गिगलिंग—वो हल्की, प्लेफुल हँसी—हर बार अलग लगती थी।

जैसे वो सच में एंजॉय कर रही हो।

कोई फीलिंग नहीं आ रही थी कि ये सिर्फ़ पैसे के लिए है, जैसे "कस्टमर को खुश करना है"।

नहीं... वो इस जॉब को लव करती लग रही थी।

उसकी आँखों में, उसके होंठों की मुस्कान में, उसके हाथों की मूवमेंट में—सबमें एक तरह की खुशी थी।

इस बार विशाल ने उँगली नहीं इस्तेमाल की।

उसने अपना लुंड—पतला लेकिन लंबा, ब्राउन—सीधे उसकी चूत पर रखा।

एक झटके में, बिना ऊपर-नीचे किए, बिना फकिंग जैसा कुछ—बस पूरा अंदर।

एक स्विफ्ट मोशन में, जैसे अंदर का टेम्परेचर चेक कर रहा हो।

सैंडी की आँखें एक सेकंड के लिए बंद हुईं, फिर खुलीं—एक छोटी सी आह निकली, लेकिन वो किस जारी रख रही थी।

वो दोनों किस कर रहे थे—जीभें मिली हुईं, लेमन का रस अभी भी मिक्स हो रहा था।

विशाल का लुंड अंदर गहरा, स्टिल—बस महसूस कर रहा था उसकी गर्मी, उसकी टाइटनेस।

सैंडी का हाथ उसके कंधे पर, दूसरे से उसकी कमर पकड़ी हुई।

मैं बिना पलक झपकाए देख रहा था।

हर डिटेल—उसकी चूत में लुंड का अंदर जाना, उसके स्तनों का हल्का हिलना, उसके गालों पर बहता काजल, उसके होंठों पर लेमन का रस।

अलोक ने मुझे देखकर पूछा,

"हाउ इज इट? हाउ इज योर किस, बॉय?"

मैं जैसे होश में आया।

"गुड... इट्स गुड," मैंने धीरे से कहा।

अब दिमाग में एक ही सवाल घूम रहा था—"व्हाय मी?"

ये सब इतना अच्छा लग रहा था कि "टू गुड टू बी ट्रू" वाली फीलिंग आ गई।

क्या मैं सच में यहाँ हूँ?

क्या ये सब हो रहा है?

मैंने अलोक की तरफ देखा, और बोल दिया—जैसे कुछ और जानना चाहता हूँ,

"सर... आप सच में अच्छी चॉइस वाली औरतें चुनते हैं।"

अलोक ने जोर से हँसा।

"हाहा... ये औरतें नहीं हैं... ये टॉयज़ हैं।"

मैंने एक साँस ली, और एक साँस में बोल दिया,

"तो फिर आप बहुत अमीर होंगे... इतने अच्छे टॉयज़ लेने के लिए... और इतने हम्बल भी कि फ्रेंड्स और स्ट्रेंजर के साथ शेयर कर रहे हैं।"

अलोक ने मेरी तरफ देखा, शॉट का ग्लास हाथ में घुमाते हुए, और पूछा,

"डू यू नो द मीनिंग ऑफ 'अडल्ट मनी बॉय'?"

अब वो मुझे "यंग मैन" की जगह "बॉय" कहने लगा था।

शायद वो किस के बाद से उसे लगने लगा कि उसका कुछ अथॉरिटी है मुझ पर।

या शायद ये मेरी कल्पना थी—नशे में सब कुछ बड़ा लगता है।

मैंने सिर हिलाकर "नो" में जवाब दिया—धीरे से, बिना कुछ बोले।

मेरा सिर भारी था।

आज बहुत पी ली थी—मेरी कैपेसिटी से ज्यादा।

सुबह से नेहा के साथ जो मेहनत की थी—वो थकान अभी भी बॉडी में थी।

शाम को वो पहाड़ी चढ़ी थी सनसेट देखने के लिए—पैरों में हल्का दर्द, सिर में हल्की घूम।

हैलुसिनेशन जैसा फील हो रहा था—कभी लगता सब सच है, कभी लगता ये सपना है।

अलोक ने ग्लास टेबल पर रखा, फिर मेरी तरफ देखकर बोला—आवाज़ में अब वो पुरानी वाली दोस्ताना टोन नहीं थी, बल्कि एक तरह की गहराई थी, जैसे वो अपनी ज़िंदगी की कोई पुरानी बात बता रहा हो।

"अडल्ट मनी बॉय... मतलब वो पैसा जो तुम्हें तब मिलता है जब तुम मेच्योर हो जाते हो।"

वो रुका, एक लंबी साँस ली।

"जब तुम यंग थे... कॉलेज में, 20-25 की उम्र में... तब पैसा नहीं था।

फ्यूचर बनाने में बिज़ी थे—पढ़ाई, जॉब, करियर, EMI, फैमिली।

टाइम भी नहीं था, और पैसा भी नहीं था अपनी हर ख्वाहिश पूरी करने का।

'दिल चाहता है' वाली उम्र में—गोवा ट्रिप, लड़कियाँ, पार्टी, फ्रीडम—सब सपने थे, लेकिन पॉकेट खाली।

फिर साल बीतते गए... 30, 35, 40... मेहनत की, कमाया, लेकिन तब तक ज़िंदगी ने ढेर सारे रोल्स दे दिए—शादी, बच्चे, रिस्पॉन्सिबिलिटी।

और अब... 50 के आसपास... अचानक पैसा आ गया।

अडल्ट मनी।

वो पैसा जो अब 'अफोर्डेबल' लगता है।

अब जो चाहो खरीद सकते हो—ट्रिप्स, टॉयज़, एक्सपीरियंस।

इसलिए 50 साल के लोग गोवा जाते हैं—क्योंकि वो 'दिल चाहता है' वाली उम्र में नहीं जा सके थे।

इसलिए 50 साल के लोग प्लेस्टेशन खरीदते हैं—क्योंकि बचपन में नहीं खरीद पाए थे।

और मैं... मैं लकी हूँ।

मुझे इतना पैसा मिला कि अब 'अनलिमिटेड सप्लाई' जैसा फील होता है।

तो मैं टॉयज़ ले सकता हूँ... जैसे सैंडी।"

उसने सैंडी की तरफ देखा—वो अभी भी मुस्कुरा रही थी, जैसे ये सब उसकी रोज़ की बात हो।

"ये टॉय नहीं हैं... ये एक्सपीरियंस हैं।

जो मैं यंग में नहीं कर पाया... अब कर रहा हूँ।

और शेयर कर रहा हूँ—फ्रेंड्स के साथ, स्ट्रेंजर्स के साथ... क्योंकि अब पैसा है, टाइम है, और सबसे ज़रूरी—कोई रोक-टोक नहीं।"

वो फिर हँसा—एक थकी लेकिन संतुष्ट वाली हँसी।

अलोक की बातें सुनकर मुझे लगा जैसे कोई फिलॉसफी हो रही है—एक तरह की ज़िंदगी की सच्चाई, जो 50 साल की उम्र में ही समझ आती है।

वो बातें इतनी गहरी लग रही थीं कि मेरी आँखें उस पर टिक गईं।

वो सच में अमीर लग रहा था—न सिर्फ़ पैसों से, बल्कि उसकी बात करने के तरीके से।

आवाज़ में कॉन्फिडेंस, शब्दों में वो आराम जो सिर्फ़ वो लोग बोलते हैं जिन्हें अब कुछ साबित करने की ज़रूरत नहीं रहती।

मैंने उसकी कलाई पर नज़र डाली—वो घड़ी... शायद रोलैक्स या ओमेगा, ब्लैक डायल, गोल्ड बेज़ल, जो लाइट में चमक रही थी।

ऐसी घड़ी जो लाखों में आती है, और वो इसे कैजुअली पहने हुए था जैसे कोई 500 की कैसियो हो।

फिर मेरी नज़र नीचे गई।

उसका लुंड... अभी भी बाहर था, हवा में खड़ा।

मैंने पहले नोटिस नहीं किया था—नशे में, सैंडी के किस में, सब कुछ धुंधला था।

लेकिन अब... वो मासिव था।

मोटा, लंबा, नसों से भरा, हेड गहरा गुलाबी।

अभी भी हल्का सा पल्स कर रहा था, जैसे अभी-अभी इस्तेमाल हुआ हो।

और वो सब कुछ इतने कैजुअली बैठा था—जैसे कपड़े उतारना या लुंड बाहर रखना कोई बड़ी बात नहीं।

मैंने खुद को रोका नहीं—एक "वाह..." मेरे होंठों से निकल गया।

बस एक छोटी सी आवाज़, लेकिन वो इतनी सच्ची थी कि सबने सुन ली।

विशाल और डेविड हँस पड़े।

सैंडी ने मुस्कुराकर मुझे देखा—जैसे कह रही हो "देखा ना?"

अलोक ने मेरी तरफ देखा, फिर हल्के से हँसा।

"क्या हुआ बॉय? इम्प्रेस हो गया?"

मैंने शर्म से सिर झुका लिया, लेकिन मुस्कान नहीं रोक पाया।

"सॉरी... बस... वो... अच्छा है," मैंने बड़बड़ाया।

अलोक ने कंधे उचकाए।

"अरे कोई बात नहीं।

ये भी तो 'अडल्ट मनी' का हिस्सा है—जो चाहो, वो दिखा सकते हो, बिना किसी शर्म के।

अलोक ने फिर से बात शुरू की—इस बार उसकी आवाज़ में कोई शो-ऑफ नहीं था, बस एक पुरानी याद जैसी सादगी।

वो सोफे पर पीछे टिका हुआ था, ग्लास हाथ में घुमाते हुए, जैसे कोई पुरानी किताब खोल रहा हो।

"मैंने जवानी में बहुत मेहनत की थी... लेबर वाला काम।

कंस्ट्रक्शन साइट्स पर, धूप में, बारिश में।

हाथ देख..."

उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया—कठोर, रफ, उंगलियों पर पुराने घावों के निशान, पाम पर मोटी-मोटी चमड़ी।

"ये हाथ कभी-कभी बस में औरतों के नाक बंद करने का कारण बनते थे।

मेरा पसीने की बदबू... वो दूर से ही साफ़ महसूस हो जाती थी।

कोई पास नहीं आना चाहता था।"

वो रुका, एक लंबी साँस ली।

"फिर शादी हुई।

पर वो जो मैं चाहता था... वो कभी नहीं मिला।

मेरी बीवी... गरीबी में पली-बढ़ी थी, वो भी थकी हुई लगती थी।

बच्चों को जन्म दिया, घर चलाया, लेकिन वो 'प्लेज़र' वाला हिस्सा... बस ड्यूटी जैसा रह गया।

मैंने भी बच्चों को पाला, घर चलाया, लेकिन ज़िंदगी का वो मज़ा... लगभग भूल ही गया था।"

उसकी आँखें दूर कहीं टिक गईं।

"फिर 25 साल की मेहनत के बाद... रियल एस्टेट से पैसा आया।

अचानक बहुत।

बच्चे विदेश चले गए—अमेरिका, कनाडा।

बीवी... अब भगवान के पास।

अब मैं फ्री था।

एक दिन विदेश में... मैं एक स्ट्रिप क्लब के सामने से गुज़रा।

बस देखने के लिए गया—क्या होता है अंदर।

एक रशियन औरत ने मेरा लुंड देखा और बोली... 'इट्स स्टिल स्ट्रॉन्ग एंड प्लेज़रेबल।'

मैंने पहली बार महसूस किया—सच में?

मेरी बीवी के साथ कभी इतना नहीं हुआ था।

धीरे-धीरे मैं उन प्रीमियम क्लब्स में घुसा—जहाँ ऐसी 'टॉयज़' मिलती हैं जो कुछ भी करने को तैयार रहती हैं।

कोई रोक-टोक नहीं, कोई जजमेंट नहीं।

बस... जो मैं जवानी में नहीं कर पाया... अब कर रहा हूँ।"

सैंडी अब डेविड के पास चली गई—वो ब्लैक बियर जैसा, बड़ा पेट वाला, पूरी तरह नंगा, पसीने से तर।

वो तीनों में सबसे रफ था—कोई नरमी नहीं, कोई कोमलता नहीं।

वो सैंडी को अपनी गोद में खींच लिया।

उसके हाथों ने तुरंत उसके निप्पल्स पकड़े—जोर से पिंच किया, इतना जोर से कि सैंडी की बॉडी झटकी।

उसकी आहें अब पहले से भी कम, गहरी और दबी हुई निकल रही थीं—जैसे दर्द और प्लेज़र का मिक्स।

"आह्ह... डेविड... हाँ..."

डेविड किस नहीं कर रहा था।

वो उसके होंठ काट रहा था—सच में काट रहा था।

नीचे होंठ को दाँतों से दबाया, खींचा, फिर ऊपर वाले को।

सैंडी की आँखें बंद हो गईं, लेकिन वो विरोध नहीं कर रही थी—बल्कि उसकी जांघें और फैल रही थीं, जैसे वो ये रफनेस एंजॉय कर रही हो।

मैं सोफे पर बैठा था, बीयर हाथ में, लेकिन आँखें सैंडी पर टिकी हुईं।

अलोक की फिलॉसफी वाली बातें मेरे कान में अभी भी गूंज रही थीं—हर शब्द ध्यान से सुन रहा था, "अडल्ट मनी", "टॉयज़", "जवानी में नहीं मिला"।

लेकिन सामने का सीन... वो डिस्ट्रैक्ट कर रहा था।

सैंडी की चूत अब डेविड के लुंड से भरी हुई—वो मोटा, ब्लैक, पर्पल हेड वाला लुंड अंदर-बाहर हो रहा था, जोरदार थ्रस्ट्स में।

हर धक्के के साथ सैंडी की बॉडी हिल रही थी, स्तन उछल रहे थे, और उसके निप्पल्स अब लाल हो चुके थे—पिंच से।

डेविड ने एक हाथ से उसकी गर्दन पकड़ी—जोर से नहीं, लेकिन कंट्रोल में।

दूसरे हाथ से उसकी गांड मसल रहा था, उँगलियाँ अंदर सरकाती हुई।

सैंडी की आहें अब और गहरी—"उफ्फ... हाँ... और जोर से..."

मैं बिना पलक झपकाए देख रहा था।

अलोक ने मेरी तरफ देखा, मुस्कुराकर कहा,

"देख रहा है बॉय? डेविड रफ है... लेकिन सैंडी को पसंद है।

अलोक ने ग्लास साइड में रखा, फिर मेरी तरफ देखकर धीरे से बोला—आवाज़ में अब एक पुरानी, थकी हुई लेकिन सच्ची वाली टोन थी।

"औरतें रफ पसंद करती हैं... लेकिन सिर्फ़ यंग वाली।"

वो रुका, सैंडी की तरफ देखा—जो अभी भी डेविड के साथ थी, उसकी आहें अब और गहरी, दबी हुई।

डेविड उसे रफ तरीके से पकड़े हुए था—निप्पल्स पिंच कर रहा था, होंठ काट रहा था, धक्के जोरदार लेकिन कंट्रोल्ड।

"यंग बटरफ्लाई... वो फ्रेशनेस, वो एनर्जी, वो टाइटनेस... वो सब कुछ नया लगता है।

उनकी स्किन पर वो ग्लो, वो खुशबू जो अभी-अभी खिली हो।

रफनेस उन्हें एक्साइट करती है क्योंकि वो अभी एक्सप्लोर कर रही होती हैं—दर्द और प्लेज़र का मिक्स उन्हें नया लगता है।

लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है... वो फ्रेशनेस ख़त्म हो जाती है।

फिर वो नरमी चाहती हैं, प्यार, केयर... वो रफनेस अब दर्द लगने लगती है।"

अलोक ने फिर से ग्लास उठाया, एक घूँट लिया, और मेरी तरफ देखकर बोला—इस बार उसकी आवाज़ में एक अलग ही गहराई थी, जैसे वो कोई राज़ खोलने वाला हो।

"मेरे कॉन्टैक्ट्स हमेशा मुझे इसी तरह की औरतें देते हैं—यंग, फ्रेश, बटरफ्लाई जैसी।

मैं इन्हें कुतिया की तरह ट्रीट करता हूँ... लेकिन वो कुतिया जो यंग लड़के डेट करना चाहते हैं।

मैं उन्हें स्पेशल फील करवाता हूँ—ऐसा स्पेशल कि वो उन सॉफ्ट, रोमांटिक लड़कों के पास कभी वापस नहीं जाना चाहतीं।

मैं उन्हें बताता हूँ—तुम्हें अब 'बॉय' नहीं चाहिए, तुम्हें मर्द चाहिए।

मर्द वो जो तुम्हें पकड़े, तुम्हें कंट्रोल करे, तुम्हें रफ तरीके से इस्तेमाल करे... और तुम्हें वो प्लेज़र दे जो तुमने कभी सोचा भी नहीं था।

ये सॉफ्ट बॉयज... वो शादी कर लेंगे, घर बसाएंगे, लेकिन रात में जब वो अकेली होंगी... उन्हें याद आएगा कि असली मर्द के साथ क्या होता है।

वो सेटल तो हो जाएंगी... लेकिन दिल में हमेशा वो खालीपन रहेगा—क्योंकि वो जानती हैं कि असली मर्द क्या होता है।"

वो मुस्कुराया, फिर मेरी तरफ झुका और आँख मारकर बोला,

"लेकिन मैं तुम्हें एक बात बताना चाहता हूँ... अगर तुम ऑफेंड नहीं होगे।"

मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

क्या कहना चाहता है ये?

क्या नेहा के बारे में कुछ? या मेरे बारे में?

मैंने सिर हिलाया—हाँ में।

"बताओ..."

अलोक ने एक लंबी साँस ली, फिर मुस्कुराकर बोला,

"तुम जानते हो... हर चीज़ पैसे से नहीं खरीदी जा सकती।

जैसे ज़िंदगी... जैसे तुम्हारे पास जो है।

तुम्हें 'अडल्ट मनी' की ज़रूरत नहीं पड़ेगी प्लेज़र के लिए... लेट इन लाइफ।

क्योंकि तुम्हारे पास पहले से ही वो है—तुम्हारी बीवी।

यंग, खूबसूरत तितली।"

मैं चुप रहा।

दिल अभी भी तेज़ धड़क रहा था।

उसकी बातें सही लग रही थीं—बहुत सही।

नेहा मेरी तितली है।

तभी सामने का सीन बदल गया।

सैंडी अब पीठ के बल लेटी हुई थी—बेड पर।

उसका सिर विशाल की गोद में था।

विशाल बैठा हुआ था, उसके लुंड को उसके गाल से रगड़ रहा था—धीरे-धीरे, ब्रशिंग करते हुए।

उसके बालों में उँगलियाँ फेर रहा था, कभी-कभी उँगली उसके मुँह में डालकर चूसवा रहा था।

डेविड ने उसके पैर फैलाए—जोर से।

फिर अपना मोटा, काला लुंड अंदर डाला—वाइल्ड तरीके से।

जोर-जोर से धक्के दे रहा था, हर थ्रस्ट में सैंडी की बॉडी हिल रही थी।

उसकी आहें अब ऊँची और तेज़—"आह्ह... डेविड... और... फाड़ दो..."

विशाल उसके चेहरे पर अपना लुंड रगड़ रहा था—गालों पर, होंठों पर।

उसकी उँगली उसके मुँह में अंदर-बाहर हो रही थी।

अलोक ने मेरी आँखों में देखा, फिर धीरे से मुस्कुराकर बोला—जैसे कोई पुराना राज़ खोल रहा हो।

"मैं तुम्हें एक बात बताऊँ... अगर तुम्हें बुरा न लगे।"

मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।

क्या कहने वाला है ये?

क्या नेहा के बारे में कुछ?

मैंने सिर हिलाया—हाँ में।

"बताओ..."

वो थोड़ा आगे झुका, आवाज़ और नीची कर ली।

"सुबह जब हम रिसेप्शन पर थे... और नेहा वहाँ खड़ी थी...

मैंने उसे देखा तो सबसे पहले यही लगा कि एजेंसी ने हमें यही भेजा है।

तुम नहीं जानते... कितनी खुशी हुई थी मुझे।

मैं हमेशा यंग मैरिड वाली को पसंद करता हूँ।

मैंने उसकी पायल देखी, चूड़ियाँ देखीं, मंगलसूत्र... सब कुछ।

दिल में एक अलग ही एक्साइटमेंट हो गया।

इसलिए मैंने उससे पूछा था—'क्या आप एजेंसी से आई हैं?'"

"फक... फक... फक..."

मेरा दिमाग एकदम घूम गया।

सुबह वाला सीन फ्लैश हो गया—अलोक नेहा के पास गया था, बात करने की कोशिश की थी, और नेहा ने बस मुस्कुराकर इग्नोर किया था।

अब सब क्लियर हो गया।

ये बूढ़ा आदमी... नेहा को... प्रॉस्टिट्यूट समझ रहा था।

एक नाइट का टॉय।

एक कुतिया जो पैसे के लिए सब कुछ करे।

यंग मैरिड, मंगलसूत्र वाली... लेकिन एजेंसी की लड़की।

मेरा दिमाग तुरंत इमेजिन करने लगा।

सैंडी की जगह नेहा।

नेहा विशाल की गोद में—उसका लुंड उसके गाल पर रगड़ रहा हो।

डेविड उसके पैर फैलाकर रफ तरीके से चोद रहा हो—जोर-जोर से धक्के, निप्पल्स पिंच कर रहा हो, होंठ काट रहा हो।

उसके बदन पर सारे बाइट मार्क्स, हिक्कीज़, दाँतों के निशान।

शॉट उसके मुँह में... लेमन उसके होंठों से... किस... सब कुछ।

बिना सोचे मेरा हाथ अपने लुंड पर चला गया।

वो रॉक हार्ड था—फड़क रहा था, दर्द कर रहा था।

मुझे गुस्सा आना चाहिए था।

बहुत गुस्सा।

इस बूढ़े को मारना चाहिए था।

उसे नेहा के बारे में ऐसा सोचने के लिए... उसे नेहा को कुतिया समझने के लिए...

लेकिन...

मेरा लुंड...

मेरा शरीर...

क्यों एक्साइट हो रहा था?

क्या हो रहा है मुझे?

क्यों ये इमेजिनेशन... मुझे और हार्ड कर रहा है?
 
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