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Romance फ़िर से [चित्रमय]

avsji

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दोस्तों - इस अपडेट सूची को स्टिकी पोस्ट बना रहा हूँ!
लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि केवल पढ़ कर निकल लें। यह केवल आपकी सुविधा के लिए है। चर्चा बंद नहीं होनी चाहिए :)

अपडेट 1; अपडेट 2; अपडेट 3; अपडेट 4; अपडेट 5; अपडेट 6; अपडेट 7; अपडेट 8; अपडेट 9; अपडेट 10; अपडेट 11; अपडेट 12; अपडेट 13; अपडेट 14; अपडेट 15; अपडेट 16; अपडेट 17; अपडेट 18; अपडेट 19; अपडेट 20; अपडेट 21; अपडेट 22; अपडेट 23; अपडेट 24; अपडेट 25; अपडेट 26; अपडेट 27; अपडेट 28; अपडेट 29; अपडेट 30; अपडेट 31; अपडेट 32; अपडेट 33; अपडेट 34; अपडेट 35; अपडेट 36; अपडेट 37; अपडेट 38; अपडेट 39; अपडेट 40; अपडेट 41; अपडेट 42; अपडेट 43; अपडेट 44; अपडेट 45; अपडेट 46; अपडेट 47; अपडेट 48; अपडेट 49; अपडेट 50; अपडेट 51; अपडेट 52; अपडेट 53; अपडेट 54; अपडेट 55; अपडेट 56; अपडेट 57; अपडेट 58; अपडेट 59; अपडेट 60; अपडेट 61; अपडेट 62; अपडेट 63; अपडेट 64; अपडेट 65; अपडेट 66; अपडेट 67; अपडेट 68; अपडेट 69; अपडेट 70; अपडेट 71; अपडेट 72; अपडेट 73; अपडेट 74; अपडेट 75; अपडेट 76; अपडेट 77; अपडेट 78; अपडेट 79; अपडेट 80; अपडेट 81; अपडेट 82; अपडेट 83; अपडेट 84;
 
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parkas

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हॉगवर्ट्स :

त्यौहार के बाद कॉलेज खुल गए थे, लेकिन अभी भी सारे स्टूडेंट्स वापस नहीं आये थे। दोपहर का समय था, और इस समय लंच ब्रेक चल रहा था। सूरज की हल्की गर्मी और पेड़ों की छाँव में कॉलेज का माहौल शांत था। ‘कमल और माया’ की शादी के कार्ड छप कर आ गए थे। कमल और अजय, दोनों ही अपने शिक्षकों और प्रिंसिपल को विवाह का निमंत्रण पत्र देने के लिए प्रिंसिपल के ऑफिस की ओर बढ़ रहे थे। कमल के हाथ में सुंदर, सुनहरे और लाल रंग से सजे निमंत्रण पत्रों का एक पुलिंदा था, जिस पर माया और कमल के नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखे थे।

अजय इस समय उत्साह से भरा हुआ था, लेकिन कमल के चेहरे पर हल्की घबराहट थी।

कमल, हल्के से मुस्कुराते हुए बोला, “अज्जू, यार मुझे थोड़ा डर लग रहा है। प्रिंसिपल सर और बाकी टीचर्स क्या कहेंगे? चक्कू सर! ... यार कहीं वो ये न कह दें कि मैं बहुत छोटा हूँ शादी के लिए।”

अजय हँसते हुए बोला, “अरे जीजू, आप टेंशन मत लो! यू आर ऐन एडल्ट! कोई बच्चा थोड़े ही हैं!”

बातें करते हुए दोनों प्रिंसिपल के ऑफिस के बाहर पहुँचे। ऑफिस के अंदर प्रिंसिपल शर्मा अपने टेबल पर कुछ कागजात देख रहे थे। शर्मा सर की छवि एक सख़्त मिज़ाज़ वाले टीचर की थी, लेकिन थे वो बहुत दयालु स्वभाव के व्यक्ति। उनके साथ कमल के दो पसंदीदा शिक्षक, शशि मैम (गणित की शिक्षिका) और चक्कू सर (इंग्लिश के शिक्षक), एक अन्य शिक्षिका, रेखा मैम (हाई स्कूल में उन्होंने हिंदी पढ़ाया था) भी मौजूद थे।

कमल ने दरवाजा खटखटाया।

प्रिंसिपल शर्मा ने अंदर से ही गंभीर स्वर में कहा, “कम इन!”

कमल, थोड़ा घबराते हुए बोला, “सर, आई ऍम कमल... और ही इस अजय। व्ही वॉन्टेड अ फ्यू मिनट्स ऑफ़ योर टाइम,”

चक्कू सर ने दोनों को देखा तो मुस्कुराते हुए आश्चर्यजनक रूप से हिंदी में बोले, “अरे कमल! तूम यहाँ? और अजय, तूम भी? व्हाट आर माय टू फ़ेवरिट मस्कटीयर्स डूइंग? आल वेल?”

कमल ने चक्कू सर के ‘एक्सेंट’ पर हल्के से हँसते हुए कहा, “ऑल इस वेल सर!” फिर निमंत्रण पत्र आगे बढ़ाते हुए बोला, “दिस इस द इनविटेशन ऑफ़ माय वेडिंग… आई वुड लव इफ यू कुड बिकम अ पार्ट ऑफ़ दिस मोस्ट इम्पोर्टेन्ट डे ऑफ़ माय लाइफ,”

रेखा मैम ने आश्चर्य से कहा, “शादी? कमल, तुम तो अभी पढ़ ही रहे हो! इतनी जल्दी शादी? कितने साल के हो तुम?”

कमल ने आत्मविश्वास से कहा, “मैम, मैं उन्नीस साल का हूँ।”

प्रिंसिपल शर्मा ने त्योरियाँ चढ़ाते हुए कहा, “उन्नीस साल? कमल, ये उम्र शादी करने की नहीं, पढ़ाई करने और अपना कैरियर बनाने की है। तुम इतनी जल्दी इतना बड़ा फैसला कैसे ले सकते हो? तुमने इसके बारे में अच्छे से सोचा है?”

चक्कू सर ने भी सहमति में सर हिलाते हुए कहा, “बिल्कुल ठीक कह रहे हैं प्रिंसिपल सर! कमल बेटे… इन द पास्ट फ़्यू मंथ्स आई हैव सीन अमेजिंग चेंजेस इन यू! पढ़ने लिखने में तुम्हारा खूब मन लग रहा है। इन फैक्ट, गोईंग बाय योर परफॉरमेंस, यू आर अमंग आवर मेरिटोरियस स्टूडेंट्स! तुम्हें अपने इंटरमीडिएट की पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। शादी तो बाद में भी हो सकती है। शादी कर के तुम्हारी जिम्मेदारियाँ बढ़ जाएंगी।”

कमल ने गहरी साँस लेते हुए कहा, “सर, मैम, मैं आपकी बात समझता हूँ। और मैं ये भी मानता हूँ कि मैं उम्र में छोटा हो सकता हूँ। लेकिन माया... वो मेरे लिए सिर्फ मेरी होने वाली पत्नी ही नहीं, बल्कि मेरी ताकत है। हम दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं। शी इस वैरी वाइस एंड रेस्पोंसिबल! वो मुझे कभी मेरे रास्ते से भटकने नहीं देंगी। और मेरे अंदर जो बदलाव हैं, वो उन्ही की बदौलत हैं। उनके ही कारण मुझको ढंग से पढ़ने लिखने की इंस्पिरेशन मिलती है!”

रेखा मैम ने उत्सुकता से कहा, “बहुत अच्छी लड़की प्रतीत होती है तुम्हारी माया!”

कमल ने मुस्कुराते हुए कहा, “बहुत अच्छी हैं! और बहुत समझदार भी। वो हमेशा मुझे मेहनत करने के लिए प्रेरित करती हैं। वो चाहती है कि मैं इंटरमीडिएट में अच्छे नंबरों से… अगर हो सके तो डिस्टिंक्शन से, पास होऊँ। उनके साथ होने से मुझे एक मकसद मिला है। वो मेरे लिए एक पॉजिटिव फोर्स हैं।”

शशि मैम ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा, “ये तो बहुत अच्छी बात है, कमल। लेकिन शादी एक बहुत बड़ा कदम है। तुम्हारी उम्र में इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी लेना आसान काम नहीं है। मेरी खुद की शादी अभी हाल ही में हुई है। इट इस चैलेंजिंग!”

अजय, इतनी देर में पहली बार सबकी बात काटते हुए बोला, “मैम, माया दीदी मेरी बड़ी बहन है। मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि हम दोनों के परिवारों ने इस शादी को पूरी तरह से एक्सेप्ट किया है। कमल और माया दीदी एक-दूसरे के लिए बने हैं। और कमल सही कह रहे हैं… माया दीदी इनको हमेशा सही रास्ते पर रखेंगी!”

शर्मा सर ने गंभीर स्वर में कहा, “फिर भी कमल, उन्नीस साल की उम्र में शादी करना मुझे ठीक नहीं लगता। मैं चाहूँ तो इसकी शिकायत पुलिस में भी कर सकता हूँ। ये चाइल्ड मैरिज के दायरे में आ सकता है।”

अजय, थोड़ा गुस्से भरे लेकिन शांत स्वर में बोला, “सॉरी सर, लेकिन कमल कोई बच्चा नहीं है। ही इस ऐन एडल्ट, नाइनटीन इयर्स ओल्ड! फ़ॉर मेन, द ऐज कुड बी ट्वेंटी वन, लेकिन आप इस बेसिस पर पुलिस और कानून की धमकी नहीं दे सकते। ... कमल और माया दोनों एडल्ट्स हैं और उन दोनों की शादी के लिए हमारे परिवारों की पूरी रज़ामंदी है। अगर आप पुलिस में शिकायत करेंगे, तो आप इस खूबसूरत इवेंट में केवल खटास ही डालेंगे। इससे ज्यादा आपको कुछ हासिल नहीं होगा।”

कमल ने अजय का हाथ पकड़ते हुए शांत स्वर में कहा, “अजय, शांत।” फिर प्रिंसिपल सर की ओर देखते हुए बोला, “सर, मैं समझता हूँ कि आप मेरे भले के लिए चिंतित हैं। लेकिन मैं आपसे विनती करता हूँ कि आप हमें अपना आशीर्वाद दें। माया और मैं एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। हमने शादी करने का फैसला बहुत सोच-समझकर लिया है।”

रेखा मैम ने बहुत भावुक हो कर कहा, “कमल, तुम्हारी बातों में सच्चाई और प्रेम झलक रहा है। मैं माया को नहीं जानती, लेकिन तुम्हारे शब्दों से लगता है कि वो बहुत खास लड़की है। … अगर तुम्हारे अंदर आए हुए बदलाव माया के कारण हैं, तो तुम दोनों बच्चों को तुम्हारी शादी पर आशीर्वाद देने मैं ज़रूर आऊँगी!”

शशि मैम ने भी हँसते हुए कहा, “हाँ, कमल। अगर तुम्हारी पत्नी के कारण तुम्हें गणित में डिस्टिंक्शन आती है, तो मैं भी इस शादी का पूरा सपोर्ट करूँगी! बट यू मस्ट प्रॉमिस कि तुम शादी के बाद अपनी पढ़ाई लिखाई में कोई कमी नहीं आने दोगे।”

कमल ने हाथ जोड़ते हुए कहा, “मैम, आई प्रॉमिस! और मैं आप सबको हमारी शादी में देखना चाहता हूँ।”

शर्मा सर ने लंबी साँस लेते हुए कहा, “ठीक है, कमल। आई ऍम इम्प्रेस्सड! मैं तुम्हें और माया को आशीर्वाद देने ज़रूर आऊँगा। लेकिन याद रखना, शादी के बाद जिम्मेदारियाँ बढ़ जाती हैं। तुम्हें अपने कैरियर और परिवार दोनों को सम्हालना होगा।”

अजय मुस्कुराते हुए बोला, “सर, आप चिंता न करें। माया दीदी और कमल मिलकर सब सम्हाल लेंगे। और हाँ, आप सबको पूरी फ़ैमिली के साथ शादी में आना है।”

रेखा मैम ने हँसते हुए कहा, “अजय हम ज़रूर आएँगे। कमल, हो सके तो माया को कॉलेज लाओ! मैं उससे मिलना चाहूँगी।”

शशि मैम भी बोलीं, “हाँ… मैं भी!”

शर्मा सर ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ, और कमल, अगर तुम इंटरमीडिएट में कॉलेज के टॉप फ़िफ़्टीन स्टूडेंट्स में आए, तो मैं तुम्हें और माया को कॉलेज की तरफ से एक ख़ास तोहफ़ा दूँगा।”

कमल ने बेहद खुश हो कर कहा, “थैंक यू सो मच सर! थैंक यू मैम! आप सबका आशीर्वाद हमारे लिए बहुत मायने रखता है।”

अजय ने उत्साह से कहा, “थैंक यू सर… मैम… ये रहा मेरी बड़ी बहन, माया और कमल की शादी का कार्ड... और ये मेरे बड़े भाई, प्रशांत की शादी का कार्ड!”

“ओह वाओ! थैंक यू कमल! मैनी मैनी हैप्पी न्यूज़ फॉर यू एंड योर फैमिलीज़,”

“यस सर! व्ही विल टेक योर लीव... बाकी दोस्तों को भी इन्वाइट करना है।”

दोनों ने प्रिंसिपल और शिक्षकों को इनविटेशन कार्ड्स दिए और उनके आशीर्वाद लेकर ऑफिस से बाहर निकल आये। कमल के चेहरे पर अब आत्मविश्वास और ख़ुशी के भाव थे। समाज के सामने अपने सम्बन्ध को स्वीकार करना और उसको डिफ़ेंड करने का कमल का पहला अनुभव था।

अजय ने कमल के कंधे पर हाथ रखा और कहा, “देखा न जीजू, मैंने कहा था ना, सब ठीक रहेगा!”



*



अजय की रिपोर्ट्स के बारे में बातें करने के लिए अजय और अशोक जी दोनों साथ में वानप्रस्थ हॉस्पिटल गए। किरण जी भी साथ आना चाहती थीं, लेकिन अजय ने ही उनको मना कर दिया यह कह कर कि उसी दिन डॉक्टर ने बताया कि परेशान होने वाली कोई बात नहीं है, और रिपोर्ट में भी वही बात आएगी। मन मसोस कर किरण जी घर में ही रह गईं।

डॉक्टर देशपाण्डे से मुलाक़ात हुई तो बड़ी गर्मजोशी से हुई। उनको देख कर अशोक जी भी समझ गए कि अजय को कोई परेशानी नहीं है - कम से कम कोई ऐसी परेशानी, जिससे उसको ख़तरा हो। उनको रागिनी के बारे में अच्छी तरह से पता था और उनको यह भी समझ में आ रहा था कि अजय की बेहोशी का ट्रिगर रागिनी से उसकी मुलाकात ही थी। लेकिन शायद वो बस एक शॉक ही रहा हो। यही बातें डॉक्टर देशपाण्डे ने भी बताईं - स्कैन में कोई अनहोनी बात नहीं दिखी। अजय का सारा न्यूरल सिस्टम सुचारु रूप से चल रहा था।

उन्होंने फिर से अजय के साथ ‘कोलैबोरेशन’ की बात दोहराई। उस पर अजय ने कहा कि उसको जो भी पता रहेगा, वो उनके साथ ज़रूर शेयर करेगा। इसी अवसर पर अशोक जी ने डॉक्टर देशपाण्डे को माया और प्रशांत के विवाह उत्सवों में सपरिवार आमंत्रित भी किया। उन्होंने कहा कि वो ज़रूर आएँगे और नव विवाहित जोड़ों को आशीर्वाद भी देंगे।

**
Bahut hi badhiya update diya hai avsji bhai....
Nice and beautiful update....
 
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नवम्बर के पहले सप्ताह में प्रशांत और पैट्रिशिया, पैट्रिशिया के माता पिता, लिंडा और पीटर के संग दिल्ली आए।

चूँकि माया और प्रशांत की शादी में केवल दो ही दिनों का अंतर था, इसलिए ऐसा करने से वो अधिक समय के लिए भारत में रह सकते थे। अजय के अकस्मात् अचेत होने की बात सुन कर प्रशांत भी बहुत घबरा गया था और भारत पहले ही आ जाना चाहता था। लेकिन किरण जी ने ही उसको मना कर दिया था यह कह कर कि चिंता की कोई बात नहीं थी और वो पैट्रिशिया के साथ ही यहाँ आए - अकेले नहीं। वैसे भी प्रशांत को ले कर किरण जी का बहुत धूम धमाका करने का कोई इरादा नहीं था।

सच कहें, तो किरण जी उससे थोड़ी निराश थीं - उनका मन था कि प्रशांत यहीं भारत में ही रह कर अपना कैरियर बनाए या फिर अगर हो सके, तो अशोक की उसके बिज़नेस में मदद करे। लेकिन प्रशांत निहायत ही स्वकेन्द्रित किस्म का लड़का निकला। ऐसे में अजय ने उनके पुत्र का स्थान लिया और उनको माँ वाला मान सम्मान दिया। वो अजय से भी यही चाहती थीं कि वो यहीं भारत में ही रहे। और अजय ने उनसे वायदा किया था कि वो यहीं रहेगा - भले ही पढ़ने के लिए वो विदेश चला जाए, लेकिन वापस अवश्य आएगा।

चूँकि यह घर शादी विवाह वाला था, इसलिए वहाँ इतने सारे लोगों के रहने योग्य लिए पर्याप्त स्थान नहीं था - इसलिए उन तीनों के रुकने के लिए पास ही में एक तीन सितारा होटल में व्यवस्था करी गई। वह होटल इनके बंगले से कोई पाँच सात मिनट की पैदल दूरी पर था। प्रशांत, पैट्रिशिया और उसके परिवार का बड़ी ही गर्मजोशी और बड़े ही उत्साह से स्वागत किया गया। फ़ोटो में ठीक से पता नहीं चल रहा था, लेकिन सम्मुख देखने पर पैट्रिशिया बहुत ही सुन्दर लड़की थी। दोनों हम उम्र थे, और साथ में बड़े ख़ूबसूरत लगते थे।

पैट्रिशिया को देख कर किरण जी प्रशांत को ले कर अपने सारे गिले शिक़वे भूल गईं।

शायद माँ का दिल ही ऐसा होता है! फ़ोन पर अनेकों बार उन दोनों की बात चीत होती रही थी, लेकिन सम्मुख पा कर उससे बात करना, अलग ही अनुभव होता है। पैट्रिशिया को भारतीय परम्पराओं का ठीक से ज्ञान नहीं था - पहले तो उसने अपनी परंपरा के अनुसार किरण जी से गले मिल कर उनके दोनों गालों को चूमा, फिर उसको याद आया कि पैर भी छूने होते हैं। उसकी इस प्यारी सी हरकत से किरण जी निहाल हो गईं और लपक कर उसको अपने गले से लगा लीं। पैट्रिशिया से मिल कर किरण जी को ऐसा लगा कि मानो यह लड़की उनके ही घर की बहू बनने के लिए बनी हुई हो। वो अशोक जी से भी उसी प्रकार मिली। अजय ने बारी बारी से उन चारों के ही पैर छू कर आशीर्वाद लिया, और माया ने सभी से गले लग कर। अचानक से ही घर में हँसी ख़ुशी का माहौल बन गया।

उस दिन देर तक सभी बैठ कर प्रशांत और पैट्रिशिया के और उनके काम के बारे में बातचीत करते रहे। जो बातें फ़ोन पर खुल कर नहीं हो सकतीं, वो सामने बैठ कर इतने आराम से हो जाती हैं कि बयान करना कठिन है। कुछ देर के बाद बातों ही बातों में पैट्रिशिया ने स्पष्ट कह दिया कि वो आज से ले कर हमेशा इसी घर में रुकेगी - भले ही उसके माता पिता होटल में रहें। उसकी बात सुन कर सभी को बहुत ख़ुशी हुई।

“हाँ भाभी,” माया बोली, “आज आप मेरे कमरे में सो जाओ… कल आपका रूम रेडी कर दिया जायेगा,”

“ओह माया, थैंक यू सो मच! यू आर ऐन एंजेल,”

“हाँ - याद रखना ये बात!” माया ने हँसते हुए कहा।

थोड़े हँसी मज़ाक के बाद माहौल थोड़ा गंभीर हो गया। कुछ समय किसी ने कुछ नहीं कहा।

“माँ... काका...” प्रशांत ने कहना शुरू किया, “एक्चुअली, बात ये है कि… हम… मतलब पैट्रिशिया और मैं, शादी के बाद यहीं इंडिया में ही सेटल होना चाहते हैं!”

“क्या?” इस खुलासे पर न केवल किरण जी ही, बल्कि पूरा परिवार ही चौंक गया।

[पैट्रिशिया, अँग्रेज़ी बोलने वाले देशी या अन्य विदेशियों के साथ होने वाले वार्तालाप अधिकतर हिंदी में ही लिखे जाएँगे… कभी कभी अँग्रेज़ी में भी]

“यस माँ,” पैट्रिशिया बोली, “प्रशांत की फर्म बॉम्बे में ऑफ़िस खोल रही है। एंड व्ही थॉट दिस इस अ ग्रेट टाइम टू बी हियर… विद ऑल ऑफ़ यू… विद आवर फैमिली,”

“बेटे ये तो बहोत अच्छी बात है,” अशोक जी बोले, “कब होगा ये?”

“काका,” प्रशांत बोला, “कुछ महीने लगेंगे! मैंने अपना नाम दिया था और उन्होंने मुझे सेलेक्ट भी कर लिया है! आई विल बी डिप्टी वाईस प्रेसिडेंट… हमारी फॉउन्डिंग टीम होगी, और हमको ही सारा बिज़नेस बैठाना होगा - यह सब काम रहेगा अभी तो!”

“वाह बेटे, खुश कर दिया तुम दोनों ने,”

“और तुम, पैट्रिशिया बेटे?” किरण जी ने पूछा।

“माँ, मेरे लिए सबसे इज़ी रहेगा अगर मैं अमेरिकन एम्बेसी के साथ काम करूँ! एस अ फॉरेनर, मुझको यहाँ काम नहीं मिलेगा। इसलिए वहाँ सबसे सही रहेगा।”

“हाँ माँ,” प्रशांत ने बताया, “हमारा ऑफिस बी. के. सी. में होगा, और होने वाले ऑफिस के पास ही में अमेरिकन एम्बेसी भी है,”

“बहुत बढ़िया,” अशोक जी ने कहा, “भाभी - अच्छा है न! दिल्ली से बॉम्बे है ही कितना दूर? ढाई घण्टे - बस!”

“हाँ वो तो है,” किरण जी वाक़ई बहुत खुश हो गई थीं - अचानक से जब खुशियाँ यूँ अपनी झोली में आ गिरती हैं, तो अच्छा लगता ही है।

“फिर भी, कब तक आने का प्लान है?”

“काका, मेरा शिकागो का फ्लैट सेल करने और सब कुछ रैप अप करने में कोई सिक्स टू ऐट मंथ्स लग सकते हैं,”

“हम्म्म, नॉट बैड,” अशोक जी बोले, “अच्छी बात है!”

लिंडा और पीटर बहुत बातें नहीं कर रहे थे - वो बस नपी तुली बातें कर रहे थे। ऐसा नहीं था कि उनको सब कुछ पसंद नहीं आ रहा था। बहुत पसंद आ रहा था - लेकिन अपरिचित माहौल में तुरंत खुल पाना सभी के लिए संभव नहीं होता। उनको इस बात का अफ़सोस ज़रूर हो रहा था कि उनकी एकलौती बेटी अपने देश से इतनी दूर आकर रहना चाहती थी, लेकिन इस बात की ख़ुशी भी थी कि वो एक ऐसे परिवार में जा रही है जिसमें एकता है और बहुत प्यार है।

लड़की के माँ बाप को चिंता तो रहती ही है, लेकिन अगर परिवार ऐसा हो, तो चिंताएँ कम हो जाती हैं।

*
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नवम्बर के पहले सप्ताह में प्रशांत और पैट्रिशिया, पैट्रिशिया के माता पिता, लिंडा और पीटर के संग दिल्ली आए।

चूँकि माया और प्रशांत की शादी में केवल दो ही दिनों का अंतर था, इसलिए ऐसा करने से वो अधिक समय के लिए भारत में रह सकते थे। अजय के अकस्मात् अचेत होने की बात सुन कर प्रशांत भी बहुत घबरा गया था और भारत पहले ही आ जाना चाहता था। लेकिन किरण जी ने ही उसको मना कर दिया था यह कह कर कि चिंता की कोई बात नहीं थी और वो पैट्रिशिया के साथ ही यहाँ आए - अकेले नहीं। वैसे भी प्रशांत को ले कर किरण जी का बहुत धूम धमाका करने का कोई इरादा नहीं था।

सच कहें, तो किरण जी उससे थोड़ी निराश थीं - उनका मन था कि प्रशांत यहीं भारत में ही रह कर अपना कैरियर बनाए या फिर अगर हो सके, तो अशोक की उसके बिज़नेस में मदद करे। लेकिन प्रशांत निहायत ही स्वकेन्द्रित किस्म का लड़का निकला। ऐसे में अजय ने उनके पुत्र का स्थान लिया और उनको माँ वाला मान सम्मान दिया। वो अजय से भी यही चाहती थीं कि वो यहीं भारत में ही रहे। और अजय ने उनसे वायदा किया था कि वो यहीं रहेगा - भले ही पढ़ने के लिए वो विदेश चला जाए, लेकिन वापस अवश्य आएगा।

चूँकि यह घर शादी विवाह वाला था, इसलिए वहाँ इतने सारे लोगों के रहने योग्य लिए पर्याप्त स्थान नहीं था - इसलिए उन तीनों के रुकने के लिए पास ही में एक तीन सितारा होटल में व्यवस्था करी गई। वह होटल इनके बंगले से कोई पाँच सात मिनट की पैदल दूरी पर था। प्रशांत, पैट्रिशिया और उसके परिवार का बड़ी ही गर्मजोशी और बड़े ही उत्साह से स्वागत किया गया। फ़ोटो में ठीक से पता नहीं चल रहा था, लेकिन सम्मुख देखने पर पैट्रिशिया बहुत ही सुन्दर लड़की थी। दोनों हम उम्र थे, और साथ में बड़े ख़ूबसूरत लगते थे।

पैट्रिशिया को देख कर किरण जी प्रशांत को ले कर अपने सारे गिले शिक़वे भूल गईं।

शायद माँ का दिल ही ऐसा होता है! फ़ोन पर अनेकों बार उन दोनों की बात चीत होती रही थी, लेकिन सम्मुख पा कर उससे बात करना, अलग ही अनुभव होता है। पैट्रिशिया को भारतीय परम्पराओं का ठीक से ज्ञान नहीं था - पहले तो उसने अपनी परंपरा के अनुसार किरण जी से गले मिल कर उनके दोनों गालों को चूमा, फिर उसको याद आया कि पैर भी छूने होते हैं। उसकी इस प्यारी सी हरकत से किरण जी निहाल हो गईं और लपक कर उसको अपने गले से लगा लीं। पैट्रिशिया से मिल कर किरण जी को ऐसा लगा कि मानो यह लड़की उनके ही घर की बहू बनने के लिए बनी हुई हो। वो अशोक जी से भी उसी प्रकार मिली। अजय ने बारी बारी से उन चारों के ही पैर छू कर आशीर्वाद लिया, और माया ने सभी से गले लग कर। अचानक से ही घर में हँसी ख़ुशी का माहौल बन गया।

उस दिन देर तक सभी बैठ कर प्रशांत और पैट्रिशिया के और उनके काम के बारे में बातचीत करते रहे। जो बातें फ़ोन पर खुल कर नहीं हो सकतीं, वो सामने बैठ कर इतने आराम से हो जाती हैं कि बयान करना कठिन है। कुछ देर के बाद बातों ही बातों में पैट्रिशिया ने स्पष्ट कह दिया कि वो आज से ले कर हमेशा इसी घर में रुकेगी - भले ही उसके माता पिता होटल में रहें। उसकी बात सुन कर सभी को बहुत ख़ुशी हुई।

“हाँ भाभी,” माया बोली, “आज आप मेरे कमरे में सो जाओ… कल आपका रूम रेडी कर दिया जायेगा,”

“ओह माया, थैंक यू सो मच! यू आर ऐन एंजेल,”

“हाँ - याद रखना ये बात!” माया ने हँसते हुए कहा।

थोड़े हँसी मज़ाक के बाद माहौल थोड़ा गंभीर हो गया। कुछ समय किसी ने कुछ नहीं कहा।

“माँ... काका...” प्रशांत ने कहना शुरू किया, “एक्चुअली, बात ये है कि… हम… मतलब पैट्रिशिया और मैं, शादी के बाद यहीं इंडिया में ही सेटल होना चाहते हैं!”

“क्या?” इस खुलासे पर न केवल किरण जी ही, बल्कि पूरा परिवार ही चौंक गया।

[पैट्रिशिया, अँग्रेज़ी बोलने वाले देशी या अन्य विदेशियों के साथ होने वाले वार्तालाप अधिकतर हिंदी में ही लिखे जाएँगे… कभी कभी अँग्रेज़ी में भी]

“यस माँ,” पैट्रिशिया बोली, “प्रशांत की फर्म बॉम्बे में ऑफ़िस खोल रही है। एंड व्ही थॉट दिस इस अ ग्रेट टाइम टू बी हियर… विद ऑल ऑफ़ यू… विद आवर फैमिली,”

“बेटे ये तो बहोत अच्छी बात है,” अशोक जी बोले, “कब होगा ये?”

“काका,” प्रशांत बोला, “कुछ महीने लगेंगे! मैंने अपना नाम दिया था और उन्होंने मुझे सेलेक्ट भी कर लिया है! आई विल बी डिप्टी वाईस प्रेसिडेंट… हमारी फॉउन्डिंग टीम होगी, और हमको ही सारा बिज़नेस बैठाना होगा - यह सब काम रहेगा अभी तो!”

“वाह बेटे, खुश कर दिया तुम दोनों ने,”

“और तुम, पैट्रिशिया बेटे?” किरण जी ने पूछा।

“माँ, मेरे लिए सबसे इज़ी रहेगा अगर मैं अमेरिकन एम्बेसी के साथ काम करूँ! एस अ फॉरेनर, मुझको यहाँ काम नहीं मिलेगा। इसलिए वहाँ सबसे सही रहेगा।”

“हाँ माँ,” प्रशांत ने बताया, “हमारा ऑफिस बी. के. सी. में होगा, और होने वाले ऑफिस के पास ही में अमेरिकन एम्बेसी भी है,”

“बहुत बढ़िया,” अशोक जी ने कहा, “भाभी - अच्छा है न! दिल्ली से बॉम्बे है ही कितना दूर? ढाई घण्टे - बस!”

“हाँ वो तो है,” किरण जी वाक़ई बहुत खुश हो गई थीं - अचानक से जब खुशियाँ यूँ अपनी झोली में आ गिरती हैं, तो अच्छा लगता ही है।

“फिर भी, कब तक आने का प्लान है?”

“काका, मेरा शिकागो का फ्लैट सेल करने और सब कुछ रैप अप करने में कोई सिक्स टू ऐट मंथ्स लग सकते हैं,”

“हम्म्म, नॉट बैड,” अशोक जी बोले, “अच्छी बात है!”

लिंडा और पीटर बहुत बातें नहीं कर रहे थे - वो बस नपी तुली बातें कर रहे थे। ऐसा नहीं था कि उनको सब कुछ पसंद नहीं आ रहा था। बहुत पसंद आ रहा था - लेकिन अपरिचित माहौल में तुरंत खुल पाना सभी के लिए संभव नहीं होता। उनको इस बात का अफ़सोस ज़रूर हो रहा था कि उनकी एकलौती बेटी अपने देश से इतनी दूर आकर रहना चाहती थी, लेकिन इस बात की ख़ुशी भी थी कि वो एक ऐसे परिवार में जा रही है जिसमें एकता है और बहुत प्यार है।

लड़की के माँ बाप को चिंता तो रहती ही है, लेकिन अगर परिवार ऐसा हो, तो चिंताएँ कम हो जाती हैं।

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Bahut hi shaandar update diya hai avsji bhai....
Nice and lovely update....
 
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अपडेट 69


माया और कमल की शादी का दिन बहुत सुबह शुरू हो गया। अनेकों रस्में करनी थीं।

दोनों परिवारों ने इस विवाह को एक अविस्मरणीय उत्सव बनाने के लिए दिन-रात एक मेहनत कर दी थी। दिल्ली के बड़े से मैरिज लॉन को रंग-बिरंगे फूलों की मालाओं, आम के पत्तों, और रंगोली से सजाया गया था। खुला हुआ लॉन था, लेकिन प्रत्येक उसका कोना, प्रत्येक वृक्ष बिजली की जगमगाती लड़ियों से सजा हुआ था। विवाह मण्डप, जो आज रात के विवाह समारोह का केंद्र था, हर तरफ़ से गुलाब, चमेली और गेंदे के फूलों से सजा था। मण्डप के बीच में एक हवन कुण्ड स्थापित किया गया था, जिसके चारों ओर रंग-बिरंगे कपड़े और फूलों की सजावट थी।

हाँलाकि नवम्बर का पहला सप्ताह था, लेकिन अभी भी वैसी हाड़ कंपाऊ ठण्डक नहीं पड़ रही थी। गुलाबी ठंडक थी। वैसे भी अतिथियों के बैठने की जगह को रंगीन शामियाने से तैयार किया गया था। और वो जगह ढँकी हुई थी, इसलिए बैठने में आराम था। दिन भर अगरबत्ती और चंदन सुलगाए गए थे, जिनकी सुगंध वातावरण को और भी पवित्र और शांत बना रही थीं।

विवाह की रस्में हल्दी लगाने से शुरू हुईं। माया को घर के आँगन में एक कुर्सी पर बैठा कर किरण जी, पैट्रिशिया, रूचि, और अन्य रिश्तेदार महिलाओं ने हल्दी, दूध, और गुलाब जल के मिश्रण को माया के चेहरे, हाथों, और पैरों पर लगाया। इस अवसर पर माया की सहेलियाँ भी उपस्थित थीं। सभी ने इस दौरान पारंपरिक गीत गाए, और नाच-गाना भी हुआ। हमेशा सयानी गंभीर रहने वाली माया भी इस रस्म के दौरान खिलखिलाती रही।

माया की एक सहेली ने माया के गालों पर हल्दी लगाते हुए मज़ाक में कहा, “प्यारी बहना, तुमको हल्दी चन्दन की क्या ज़रुरत है… तुम तो ऐसे ही चमक रही हो… महक रही हो!”

दूसरी इस बात पर बोली, “सच में! बहुत सुन्दर लग रही हो माया आज! पूरी माया! जादू चलेगा आज जीजू पर!”

रूचि ने भी इस चुहल में शामिल होते हुए कहा, “जादू नहीं, भाभी बिजलियाँ गिराने वाली हैं भैया पर!”

इस बात पर वहाँ उपस्थित स्त्रियों के ठहाके गूँज उठे।

पैट्रिशिया ने हँसते हुए माया को छेड़ा, “बिजली की चमक तो ऐसी होनी चाहिए कि कमल की आँखें चौंधिया जाएँ,”

“भैया की आँखें चौंधियाने के लिए बहुत कुछ है भाभी के पास, भाभी,” रूचि ने पैट्रिशिया को छेड़ते हुए का, “... जैसे परसों आप करने वाली हैं,”

माया लज्जा के मारे लाल हो गई, और वो लालिमा हल्दी के रंग से और भी चमक उठी। लेकिन इस प्रकार के हल्के-फुल्के मज़ाक और छेड़खानी ने माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया।

उधर कमल के घर में भी हल्दी की रस्म उत्साह के साथ मनाई जा रही थी। राणा परिवार के प्रत्येक सदस्य ने कमल को हल्दी लगाई। फिर वर और वधू दोनों को स्नान कराया गया। माया को घर में स्नान-कक्ष में ले जा कर किरण जी और अन्य वरिष्ठ महिलाओं की देख रेख में रस्म पूरी की गई। उसके बाद माया ने पीले रंग का आरामदायक सलवार सूट पहना और बालों को खुला छोड़ दिया, जो उसकी सादगी और सुंदरता को और बढ़ा रहा था। गाजे बाते से माहौल बड़ा उत्सवमय हो गया। कमल के लिए भी स्नान की रस्म आयोजित की गई। उसके बाद कमल कुर्ता-पायजामा पहन कर तैयार हुआ। दिन भर ऐसे ही अनेकों रस्में होती रहीं।

अति-धनाढ्य होने के बावज़ूद राणा परिवार को दिखावों और फ़िज़ूलख़र्ची से बहुत अधिक परहेज़ था। इसलिए उनकी बारात भी दिखावों से दूर ही रही। पूरा खानदान पारम्परिक राजस्थानी वेश भूषा पहने हुए थे। सभी बड़ी शालीनता से एक साथ लॉन में पहुँचे, और फिर वहाँ पर पारम्परिक ढोल-नगाड़े और तुरही बजाने वालों के संग पूरे उत्साह से नाचने लगे। बारात का नाच गाना देर तक चला। बीच बीच में रंग-बिरंगी आतिशबाजियों ने माहौल को और भी उत्सवमय बना दिया। कमल अभी भी कार के अंदर ही आराम से बैठा हुआ था। गर्भावस्था के कारण सरिता जी ने बस दो मिनट तक ही हल्का फुल्का नृत्य किया, फिर वो भी आ कर कमल के संग बैठ गईं। कमल ने एक सुनहरे रंग का रेशमी कुर्ता पहना हुआ था, जिस पर अनेकों रंगों के रेशमी धागों से कढ़ाई करी गई थी। उसके सर पर लाल रंग की पगड़ी थी और नीचे पारम्परिक ढंग से बाँधी हुई सुनहरे रंग की रेशमी धोती! पैरों में उसके पारम्परिक मोजारी जूतियाँ थीं। हाथ में उसने अपने खानदान की एक पारम्परिक तलवार पकड़ी हुई थी, जो अनेकों रंगों से अलंकृत म्यान में थी। इस पारम्परिक परिधान में उसकी शख्सियत में और भी निखार आ गया था। बारात में अजय और कमल के दोस्त भी शामिल थे, जो पूरे उत्साह के साथ नाच रहे थे। दो घण्टे के नाच के बाद जब सभी के पैर जवाब दे गए, तब लॉन के ‘द्वार’ पर बारात का भव्य स्वागत किया गया। किरण जी ने समधियों की और फिर कमल की आरती उतारी और उसके माथे पर तिलक लगाया। बारातियों का स्वागत फूलों और इत्र की वर्षा, मिठाइयों और शर्बत से किया गया।

कमल को मण्डप तक ले जाया गया, जहाँ विवाह की रस्में शुरू की गईं। कमल के साथ देर तक रस्में पूरी करने के बाद, लॉन में माया प्रविष्ट हुई। माया एक बहुत गहरे लाल और सुनहरे रंग की भारी कढ़ाई वाला घाघरा, उसी से मिलती चोली, और सर पर ओढ़नी (चुनरी) डाली हुई थी। भारी पारम्परिक आभूषणों में उसकी सज्जा अत्यंत शोभनीय थी। सच में - वो किसी राजवाड़ी से कम नहीं लग रही थी। आज भी माया ने कोई ख़ास मेकअप नहीं किया हुआ था - उसके मेकअप आर्टिस्ट ने बस हल्का सा टचअप ही किया था। लेकिन उसका प्राकृतिक सौंदर्य ही उसकी असली सज्जा थी!

कमल माया को अपनी तरफ़ आते देख कर मंत्रमुग्ध हो गया था। जिस प्रेम को इतने समय से वो बस दूर दूर से ही पालता आया था, आज वो मूर्त रूप में उसके सम्मुख था। जब दोनों की आँखें एक-दूसरे से मिलीं, तो उस पल में दोनों के अनकहे प्रेम और विश्वास का बंधन स्पष्ट था। मण्डप से इतर एक स्टेज पर जयमाल की रस्म शुरू हुई। ढोल-नगाड़ों की थाप और तुरही की ध्वनि पर माया और कमल ने एक-दूसरे को फूलों की भारी मालाएँ पहनाई। इस दौरान, दोनों पक्षों के रिश्तेदारों ने हंसी मज़ाक के बीच एक दूसरे को छेड़ा।

एक संछिप्त पूजा पाठ को छोड़ कर, शादी की बाकी रस्में माया के घर पर होनी थीं। इसलिए फिलहाल सभी मेहमानों को भोजन के लिए आमंत्रित किया गया। यह भी पारम्परिक अंदाज़ में ही किया गया। सभी मेहमानों को खाने की टेबलों पर सम्मानपूर्वक बैठा कर, भोजन परोस परोस कर, बड़े आग्रहपूर्वक खिलाया गया... गिद्ध भोज नहीं कराया गया।

रात साढ़े दस बजते बजते सभी मेहमान जा चुके थे और केवल वो ही शेष थे जिनको वाक़ई कमल और माया के विवाह में कोई रूचि थी, या कोई सरोकार था। विवाह की असल रस्में मध्य रात्रि के आस पास ही शुरू हो पाईं। माया का कन्यादान अशोक जी और किरण जी ने किया। अशोक जी ने माया का हाथ कमल के हाथ में रखा और मंत्रों के बीच, अपनी बेटी को कमल के साथ जीवन बिताने का आशीर्वाद दिया। किरण जी की आंखें नम थीं, क्योंकि माया उनके लिए केवल एक बेटी नहीं, बल्कि उनके घर की रौनक भी थी। सभी ने दोनों के लिए प्रार्थना की कि उनका वैवाहिक जीवन सुखमय और समृद्ध हो। कन्यादान के बाद पाणिग्रहण की रस्म हुई।

अजय ने कमल को छेड़ते हुए कहा, “जीजू, दीदी का हाथ मज़बूती से पकड़ो… और पकड़े रहना,”

तो कमल ने भी माया का हाथ अपने हाथ में कोमल मज़बूती से पकड़ लिया, और मन ही मन उसको वचन दिया कि वो हमेशा उसकी रक्षा करेगा, उसका सम्मान करेगा, और उसके हर सुख-दुख में साथ रहेगा। कमोवेश ऐसे ही वचन माया ने भी कमल को दिए। फेरों के समय प्रशांत ने माया और कमल के हाथों पर खील छोड़ कर हमेशा समृद्ध रहने का आशीर्वाद दिया। अंत में कमल ने माया को मंगलसूत्र पहनाया और उसकी मांग में सिन्दूर भरा। इस पल में किरण और अशोक जी की आँखें नम हो गईं, क्योंकि इस क्षण से माया के नए जीवन की शुरुआत हो गई थी।
 

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अजय के मन में जो चल रहा था, उसको ठीक से बयान कर पाना कठिन है। चार महीने पहले ‘वापस’ आने पर, जो सबसे पहला काम उसने किया था, वो था कमल और माया का विवाह सुनिश्चित करने का! उसको अपने घर में सभी की फ़िक्र थी - लेकिन स्वयं उसको आश्चर्य इस बात का था कि उसने सबसे पहले माया के जीवन को सही दिशा दी थी, और कमल को उसके प्यार से मिलाया था। उस काम को अपने सामने मूर्त होते देख कर वो न केवल बहुत ख़ुश था बल्कि बहुत भावुक भी! ज़िन्दगी में एक काम भी अगर सही कर सको, तो जीवन सार्थक हो जाता है। अजय के हिसाब से अगर आज उसके प्राण भी निकल जाएँ तो उसको की दुःख नहीं होगा। माया दीदी अब वैसी ज़िन्दगी जी सकेंगी, जिसकी वो हमेशा से हक़दार रही थीं।

कमल ने माया के पैरों में सोने की बिछिया पहनाई - जो उसकी पायल से ही मैचिंग सेट का था। बिछिया एक विवाहित स्त्री की पहचान और उसके सौभाग्य का प्रतीक है। माया ने बिछिया पहनते समय कमल की ओर देखा और एक हल्की मुस्कान के साथ उसका आभार व्यक्त किया। विवाह की रस्में पूरी होने के बाद, कमल और माया ने मण्डप में उपस्थित सभी बड़ों के चरण स्पर्श किए। सभी ने उन दोनों को अपना आशीर्वाद दिया।

माया के इशारे पर कमल और माया अजय के पास आए। माया ने एक अप्रत्याशित सा काम किया - माया अजय के पैर छूने को हुई कि अजय ने उसको पकड़ कर अपने आलिंगन में भर लिया,

“क्या कर रही हो दीदी? पाप लगवाओगी अपने बाबू को?” अजय ने भावुक होते हुए कहा।

“क्या गलत कर रही हूँ बाबू?” माया की आँखें छलक आईं, “... तुमने इतना कुछ किया है मेरे लिए… कुछ तो अच्छे काम किये होंगे मैंने बाबू, कि इतनी ख़ुशियाँ मिली हैं मुझे! तुम्हारा आशीर्वाद लेने में क्या शर्म?”

अजय ने मन में सोचा, ‘अब क्या बताऊँ तुमको दीदी कि तुमने क्या क्या किया, और क्या क्या नहीं सहा! तुमसे कोई गलत काम हो ही नहीं सकता!’

प्रत्यक्ष वो बोला, “क्या किया है मैंने दीदी? अपनी बहन के लिए तो सभी भाई सब कुछ करते हैं! वैसे भी, देने का काम तो तुम्हारा है… लेने वाला नहीं! मेरी बड़ी दीदी हो तुम… तुमने तो मुझे अपने छोटे भाई की तरह नहीं, बल्कि अपने बच्चे की तरह पाला है!”

यह सुन कर माया की आँखों से आँसू ढलकने लगे।

“न दीदी... अब तुमको रोना नहीं है! तुमको तो बहुत सी ख़ुशियाँ मिलनी हैं!” अजय कह रहा था, “... बस अब बड़ी ख़ुशी से तुम दोनों अपनी ज़िन्दगी जियो।” फिर कमल का हाथ पकड़ कर बोला, “ये मेरा दोस्त… मेरा भाई… तुमको बहुत खुश रखेगा! देख लेना तुम!”

“कोई शक़ मेरे भाई,” कमल ने कहा और अजय को अपने गले से लगा लिया।

“कोई शक़ नहीं यार! कोई शक़ नहीं!”

पैट्रिशिया के माता-पिता, लिंडा और पीटर, ने भी कमल और माया को आशीर्वाद दिया।

लिंडा ने मुस्कुराते हुए कहा, “कमल… माया, हमारी संस्कृति भले ही अलग हो, लेकिन प्यार और विश्वास की भाषा हर जगह एक जैसी होती है। मैं बस एक सलाह दूँगी, और वो यह कि कभी भी एक-दूसरे से नाराज़ होकर मत सोना। चाहे कुछ भी हो, अपने मन की बात एक-दूसरे से ज़रूर कहना। ... शादी में कोई भी समस्या ऐसी नहीं होती, जो आपसी बातचीत से न सुलझ सके। खूब प्यार से रहो दोनों!”

पीटर ने हँसते हुए जोड़ा, “और हाँ, एक-दूसरे को हमेशा हँसाने की कोशिश करना। ऐसे हँसते खेलते, प्यार से ज़िन्दगी की हर मुश्किल आसान हो जाती है।”

कमल और माया ने उनकी बातों को ध्यान से सुना और उनकी सलाह को अपने दिल में उतार लिया।

सबसे बाद दोनों ने राणा परिवार के सबसे वरिष्ठ सदस्य, किशोर जी के ताऊ जी, श्रीराम राणा जी, से आशीर्वाद लिया। वो लगभग नब्बे साल के थे और व्हीलचेयर पर बैठे थे। उन्होंने कमल और माया को आशीर्वाद देते हुए एक भावनात्मक और प्रेरणादायक उपदेश दिया।

श्रीराम राणा जी ने गंभीर और स्नेहपूर्ण स्वर में आशीर्वाद देते हुए कहा, “बच्चों… तुम दोनों आज से अपने जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत कर रहे हो। शास्त्रों में कहा गया है, ‘अर्धं भार्या मनुष्यस्य, भार्या श्रेष्ठतमः सखा… भार्या मूलं त्रिवर्गस्य, भार्या मित्रं मरिष्यतः’ … मतलब पत्नी न केवल अपने पति की अर्धांगिनी होती है, बल्कि उसकी बेस्ट फ्रेंड, और - मतलब धर्म, अर्थ, और काम की आधार होती है। इस संसार सागर को पार लगाने वाली पत्नी ही मुख्य साधन है। पत्नी ही गृहस्थ आश्रम की लक्ष्मी है।”

फिर उन्होंने माया को देख कर कहा, “माया बिटिया, तुम कमल की शक्ति बनना… उसकी प्रेरणा बनना। ‘न गृहं गृहमित्याहुर्गृहिणी गृहमुच्यते… गृहं तु गृहिणीहीनम अरण्यसदृशं मतम्’ … मतलब बिना गृहिणी के घर नहीं होता। मकान होता है, लेकिन घर नहीं। बिना पत्नी के घर जंगल के समान रह जाता है। उसमें कोई व्यवस्था नहीं होती, उसमें कोई संस्कृति नहीं जन्म लेती! … बिटिया अब तुम इस घर की आत्मा हो, और तुम्हारी उपस्थिति ही इस घर को सुखमय बनाएगी। … और कमल बेटे, तुम माया की रक्षा और सम्मान के ज़िम्मेदार हो। एक दूसरे के बिना तुम दोनों अधूरे हो!”

उनके स्नेहमय उपदेश को सुन कर न केवल वो दोनों, बल्कि सभी विवाहित जोड़े भावुक हो गए।

उन्होंने आगे कहा, “एक और बात है बच्चों। हर व्यक्ति पर तीन तरह के ऋण होते हैं - देव-ऋण, ऋषि-ऋण, और पितृ-ऋण! देव-ऋण को चुकाने के लिए अच्छे कर्म करो, दान-धर्म का पालन करो, और ईश्वर का सम्मान करो। ऋषि-ऋण को चुकाने के लिए अपने गुरुओं और शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करो, जिन्होंने तुम्हें ज्ञान दिया और जीवन जीने का सही मार्गदर्शन किया। पितृ-ऋण चुकाया जाता है संतानों से। क्योंकि संतान ही पितरों का उद्धार करती है। इसलिए घर में बच्चे होना आवश्यक है। और सुनो बच्चों… विवाह से मनुष्य अपनी स्वच्छंदता पर नियंत्रण स्थापित करता है, और एक सार्थक जीवन की ओर बढ़ता है। … तो तुम दोनों भी साथ में एक सार्थक जीवन जियो… ख़ूब प्रसन्न रहो!”

श्रीराम राणा जी के उपदेश ने सभी को गहराई से प्रभावित किया। कमल और माया ने उनके चरण स्पर्श किए और उनके आशीर्वाद को स्वीकार किया। उसके बाद का समय विदाई की तैयारियों का आयोजन करने में बीत गया।

सुबह, कोई सात बजे माया की विदाई का समय आया। किरण जी, जो अब तक खुद को बहुत सम्हाले हुए थीं, इस पल में पूरी तरह से भावुक हो गईं और रोने लगीं। उन्होंने माया को गले से लगाया और सुबकते बिलखते हुए कहा, “मेरी बच्ची… मेरी लाडली… कमल बेटे के साथ खूब सुखी रहो!”

माया भी खुद को रोक न सकी और वो भी बिलख बिलख कर रोने लगी।

अशोक जी ने कुछ कहा नहीं, बस माया और कमल को अपने आलिंगन में भर कर बारी बारी से चूमा। प्रशांत और पैट्रिशिया ने भी माया और कमल को बड़े प्रेम से विदा किया। उसको माया से भी बड़ा स्नेह था और अजय से भी। लेकिन माया से विशेष प्रेम था, क्योंकि माया ने उसके एक ‘छोटी बहन’ की चाह को पूरा किया था। वो तो पिछले समयकाल में कणिका ने सब रिश्तों का गुड़ गोबर कर दिया था। प्रशांत जोरू का गुलाम टाइप आदमी ज़रूर था, लेकिन मन से ख़राब नहीं था।

अंत में अजय ने पहले माया को गले लगाया, फिर कमल को।

माया ने मुस्कुराने की असफल कोशिश करते हुए अजय के माथे को चूमा और बड़ी कोमलता से कहा, “मेरा वीरन… मेरा हीरो… मेरा बाबू!”

“लव यू दीदी,” वो मुस्कुराया।

‘अब दीदी की लाइफ सेट हो गई,’ इस विचार से वो बहुत संतुष्ट था।

सभी लोग गाड़ी में बैठे और राणा परिवार के घर की तरफ़ निकल लिए। रूचि और अन्य महत्वपूर्ण मेहमान भी अपने घरों को निकल लिए।

पीछे अशोक जी, किरण जी, प्रशांत, पैट्रिशिया, उसके माता पिता, और अजय रह गए। उनको प्रशांत और पैट्रिशिया की शादी की व्यवस्था भी करनी थी, जो बस अगले ही दिन थी।

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माया का कमल के घर में गृहप्रवेश भी पूरे पारम्परिक धूमधाम से हुआ। सरिता जी और राणा परिवार की वरिष्ठ महिलाओं ने माया की आरती उतारी और आशीर्वाद दिए। माया इतनी बार इस घर में आ चुकी थी, लेकिन आज एक अलग ही तरह का अपनापन, एक अधिकार-बोध महसूस हो रहा था उसको। घर के अंदरूनी द्वार पर अन्न से भरा एक बड़ा सा कलश रखा गया था, जिसे माया ने हल्के से अपने पैर से स्पर्श कर के अंदर की तरफ़ ठेल दिया। फिर आलता से भरे परात में पैर रख कर, अपने पैरों के चिन्ह बनाती हुई अंदर आ गई।

एक बार फिर से सभी बड़ों का आशीर्वाद लेने का उपक्रम शुरू हुआ। राणा परिवार ने माया का स्वागत पूरे स्नेह और उत्साह के साथ किया। इस दौरान उन दोनों को कई पारंपरिक खेल भी खिलाए गए, जैसे दूध में अंगूठी ढूंढने का खेल। जाहिर सी बात है कि माया ने इस खेल में जीत हासिल की, और सभी ने तालियाँ बजाकर उसका उत्साह बढ़ाया।

सरिता जी समझ रही थीं कि दोनों थक गए होंगे - वो स्वयं भी थक गई थीं। उन्होंने दोनों को सबसे पहले खाना खिलाया, और फिर बँगले की दूसरी मंज़िल पर, कमल के कमरे से अलग एक बड़े कमरे में जाने को कहा।

यह वही कमरा था जहाँ माया हर बार रूकती थी।

“बच्चों, आराम कर लो। नीचे आने की कोई जल्दी नहीं है। वैसे भी रिसेप्शन परसों है। कल भी देर तक जागना पड़ेगा (क्योंकि प्रशांत और पैट्रिशिया की शादी थी), इसलिए आराम कर लो, जब भी मौका मिले!”

उन्होंने दोनों को समझाया, और कमरे से बाहर जाते समय उन्होंने दरवाज़ा भी लगा दिया। कमल ने अंदर से उसको ‘लॉक’ भी कर लिया कि कोई अवाँछित व्यक्ति उन दोनों के अंतरंग समय में चला न आए।

“ओह गॉड, फाइनली!” कमल हँसते हुए बोला, “सभी के पैर छूते छूते कमर टेढ़ी हो गई,”

माया उनके कमरे की साज-सज्जा देख कर आह्लादित और आश्चर्यचकित हो गई थी।

‘कमल और माया’ का कमरा विशेष रूप से सजाया गया था।

पूरा कमरा गुलाब और चमेली के फूल-मालाओं से सजा हुआ था। पलंग पर सुनहरे रंग की रेशमी चादर बिछी हुई थी, और उसके बीचों बीच गुलाब की पंखुड़ियों से दिल के आकार की सजावट करी गई थी। एक कोने में ‘मूड लाइट’ वाला टेबल लैंप था। चूँकि कमरे की खिड़कियों पर पर्दे खिंचे हुए थे, इसलिए कमरे में रौशनी फिलहाल उस मूड लाइट के कारण ही हो रही थी। और उसकी मंद मंद रोशनी में बढ़िया मूड बन रहा था। कमरे में फूलों की सुगंध भरी हुई थी।

“वाओ,” माया ने कहा, “कितना सुन्दर सजाया है!”

“हा हा हा! हाँ - सारे कज़िन्स ने मिल कर यह किया है। हमको देखने भी नहीं दिया।” कमल ने मुस्कुरा कर कहा, “आपको पसंद आया?”

“बहुत! रेड… गोल्ड… ये तो हमारे फ़ेवरिट कलर्स हैं,”

कमल ने मुस्कुराते हुए कहा, “आपको पसंद आया, अच्छा है फिर!”

“हमको लगा था कि आपके कमरे में रहेंगे,”

“माँ ने कहा कि बहूरानी के लिए बड़ा कमरा चाहिए... ये मेरे कमरे से बड़ा है… इसमें बड़ी अलमारी है, बड़ी खिड़कियाँ हैं, और बड़ा एनसुईट भी है,”

“और आपका कमरा?”

“उसको हम स्टडी की तरह यूज़ करेंगे,”

“हम्म्म...”

“आप थक गई हैं?” कमल ने पूछा।

माया ने मुस्कुराते हुए कमल के होंठों को चूमा, और फिर ‘न’ में सर हिला कर बोली, “आपके मन में क्या है?”

कमल ने लाल और सुनहरे रंग के भारी लहँगे को पहनी हुई माया को देखा - दुल्हन की साज सज्जा में वो इतनी सुन्दर लग रही थी कि क्या कहें! उसकी माँग में नारँगी रंग का सिन्दूर चमक रहा था और गले में मंगलसूत्र! ये दोनों माया के सुहागिन होने की गवाही दे रहे थे! उसकी कलाइयों में लाल चूड़ियाँ खनक रही थीं, और पैरों में सोने की पायल के छोटे छोटे घुँघरू के गुच्छे मधुर आवाज़ कर रहे थे। माया का चेहरा हल्की शर्म और उत्साह के मिश्रण से दमक रहा था।

उस समय माया कमल के लिए इस दुनिया की सबसे सुंदर स्त्री थी!

माया का साँवला रंग आज और भी निखर गया था और इस समय दमक रहा था। ज़रूर ही वो थक गई थी, लेकिन आगे आने वाली ज़िन्दगी को लेकर उसका उत्साह देखने योग्य था। उसकी बड़ी-बड़ी मासूम आँखें... जिसमें कमल को अपने लिए प्यार दिख रहा था। कमल को हमेशा से ही माया की आँखें अपनी ओर खींचती हुई महसूस होती थीं। उसकी लंबी, घनी पलकें और उनमें छिपी कोमल नजरें कमल के दिल को हमेशा ही छू लेती थीं। माया के होंठों पर गहरे लाल रंग की लिपस्टिक लगी हुई थी।

माया एक अप्सरा जैसी सुन्दर थी और ये अप्सरा अब उसकी अपनी थी।

कमल मुस्कुराया, “शरारतें,”

“मेरी जान... आज से हम पूरी तरह से आपके हैं! आपके मन में जो भी शरारतें हैं, कीजिए!”

“सच में?”

माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाया - लेकिन वो बहुत शरमा भी गई।

माया का शरीर सुडौल और संतुलित था - उसकी कमर पतली थी, लेकिन उसकी भारी भरकम पोशाक में उसके शरीर के कटाव ठीक से दिख नहीं रहे थे।

“आपको याद है? हमने आपसे एक बार एक रिक्वेस्ट करी थी?”

“क्या?”

“यही कि आप नंगू नंगू बहुत सुन्दर लगती हैं?”

“ओह!” माया को याद आया, “... तो आज से हमारा कपड़े पहनना बंद?”

कमल शरारत से मुस्कुराया, “हमारे सामने!”

“अच्छा जी!”

“आपने प्रॉमिस किया था,” कमल ने याद दिलाया।

“हाँ! किया तो था!” माया ने एक पल सोचा, “आप उतारेंगे, या हम?”

“हम उतार दें?”

“सुहागरात... आई मीन, सुहाग‘दिन’ में तो पतिदेव ही सब करते हैं!” माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाते हुए, लेकिन थोड़ा शरारती अंदाज़ में कहा।

कमल माया की हरी झंडी पा कर उत्साह में आ गया। उसने तेजी से माया को निर्वस्त्र करना शुरू कर दिया। लेकिन यह सब इतना आसान नहीं था - भारी वस्त्रों को अपने स्थान पर बनाए रखने के लिए बहुत से सेफ्टीपिन लगाए गए थे। उन सब को सावधानी से निकाल कर, माया के कपड़े उतारने में कमल को चार पाँच मिनट लग गए।

माया ने सफ़ेद रंग की, लेस के काम की हुई ब्रा और पैंटीज़ पहनी हुई थी। यह अन्य, साधारण अधोवस्त्रों से अलग थे - सेक्सी और आकर्षक! ऊपर से नई दुल्हन वाली साज सज्जा के कारण, वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी।

“ये कब लिए?” कमल ने अचंभित होते हुए पूछा।

“उस दिन...”, माया ने शर्माते हुए बताया, “रूचि और रागिनी के साथ,”

“इनको उतारने का मन नहीं हो रहा है,”

“क्यों?” माया ने विनोदपूर्वक पूछा।

“आप बहुत सेक्सी लग रही हैं ऐसे,”

“बिना कपड़ों के सेक्सी नहीं लगते हम आपको?”

“तब तो और भी सेक्सी लगती हैं,”

“फिर?”

माया ने एक तरह से कमल को कह दिया था कि वो उसको पूरी तरह से नंगा कर दे। तो कमल ने उसकी इच्छा का अनुपालन किया, और उसकी ब्रा और चड्ढी भी उतार दी। अब माया पूरी तरह से निर्वस्त्र थी, लेकिन उसके शरीर पर नई नवेली दुल्हन वाले अन्य सभी चिन्ह थे। उसके शरीर पर अभी भी सारे गहने थे - तो उसको देख कर कमल को खजुराहो की मूर्तियों में उकेरी सुंदरियों की याद आ जाती है!

“ओह गॉड,” माया के नितांत नग्न सौंदर्य का आस्वादन करते हुए कमल बोला, “हाऊ ब्यूटीफुल यू आर!”

माया अभी भी शरमा रही थी, लेकिन वो अदा से मुस्कुराई।

अपने पति की सुरक्षा में, उसके सामने, अपनी सुंदरता प्रदर्शित कर के उसको गज़ब का आत्मविश्वास महसूस हो रहा था।
 

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उधर कमल ने अभी तक जितनी भी बार माया को नग्न देखा था, उसने उसकी योनि को बालों से ढँका हुआ ही देखा था। लेकिन आज उसकी योनि पर से बाल नदारद थे! पूरी तरह से चिकनी योनि! वाह!

“‘इसको’ शेव किया है आपने?” उसने आश्चर्य में आ कर पूछा।

माया ने ‘न’ में सर हिलाया और कमल का हाथ पकड़ कर अपनी चिकनी सी योनि पर फिराया, “मेरे भोले साजन, आप इसको ‘बुर’ या ‘पूसी’ कह सकते हैं...”

“ओह... ले...”

वो कुछ कहने को हुआ उससे पहले माया ने उसको काटते हुए कहा, “हाँ... लेकिन अगर आप इसको कोई और नाम देना हो, तो हमको बता दीजिए,”

“नहीं... बुर या पुसी ठीक है... शार्ट एंड स्वीट!” उसने माया की योनि को सहलाते हुए उसके चीरे में भीतर तक उँगली डालते हुए पूछा, “बिलकुल इसी की तरह... स्माल एंड स्वीट!”

“हा हा हा!” माया दबे स्वर में हँसी।

“अगर शेव नहीं किया, तो इतनी चिकनी कैसे है?”

माया की योनि उत्तेजनाजन्य कामरस से पूरी तरह से भीगी हुई थी - कमल की उंगली उसकी योनि के भीतर बड़ी आसानी से प्रविष्ट हो गई। उस क्षण माया की आँखें बंद हो गईं और उसके नथुने बड़े ही कामुक अंदाज़ में फड़कने लगे।

कमल अब तक समझ गया था कि अब उसका अपनी प्रेमिका-पत्नी से मिलन अवश्यम्भावी है। माया स्वयं यह चाहती है और वो उसको रोकेगी नहीं।

“वैक्सिंग कराई है... माँ जी ने भी करवाने को कहा था, और माँ ने भी!” माया ने शरमाते हुए, बड़ी कठिनाई से अपने ऊपर नियंत्रण करते हुए बताया।

“हम्म्म... बहुत ही अच्छा आईडिया है ये तो!” कमल ने शरारती अंदाज़ में बोला, “थैंक यू मम्मीज़,”

उसने कहा और माया को अपनी बाँहों में उठा लिया।

“अरे रे रे, क्या कर रहे हैं आप?”

“हमारे दिल की रानी को प्यार!”

माया ने मारे शर्म के अपना सर कमल के सीने में छुपा लिया।

कमल कुछ डग भरते हुए बिस्तर तक आया और उसने सावधानीपूर्वक माया को बिस्तर पर लिटा दिया।

“सुनिए जी?” माया ने झिझकते हुए कहा।

“हम्म?” कमल उसके सौंदर्य का आस्वादन करते हुए कहा।

“हमें भी आपको नंगू नंगू देखना है,”

“हम आपकी तरह सेक्सी सेक्सी थोड़े ही हैं,”

“आप हमारे लिए सबसे सेक्सी हैं,” माया शरमाते हुए बोली, “और वो काफी है,”

कमल एक पल मुस्कुराया, और फिर तेजी से अपने कपड़े उतारने लगा। दो मिनटों के अंदर वो भी पूरी तरह से नग्न हो कर माया के सामने खड़ा था। उसका लिंग उत्तेजना में सामने की ओर अपनी पूरी क्षमता में उभरा हुआ था।

माया ने कमल से झूठ नहीं कहा था। उसके लिए भी कमल भी किसी राजकुमार से कम नहीं था। जब से अजय ने माया और कमल की शादी की बात चलाई थी, तब से ले कर आज तक प्रति-क्षण कमल उसके दिल में अपनी जगह बनाता चला गया। वो भविष्य के लिए सपने नहीं देखती थी - लेकिन कमल सचमुच में उसके सपनों का राजकुमार बन गया था। वो अच्छे स्वस्थ शरीर वाला लड़का था और आकर्षक भी! सबसे अच्छी बात यह थी कि वो माया को बेहद सुंदर भी लगता था। कमल की सादगी और उसका आत्मविश्वास माया को हमेशा से आकर्षित करता था। उसकी आँखें, जो माया को देखते समय हमेशा प्रेम और सम्मान से भरी होती थीं, माया के दिल को पिघला देती थीं।

उसको पूर्ण नग्न देख कर माया का दिल तेजी से धड़कने लगा।

उसके मन में उनके आसन्न मिलन के समय के मीठे और कोमल विचार उमड़ने लगे! वो कमल के लिए अपने गहरे प्रेम और उसके संग बिताए जाने वाले समय की प्रत्याशा और उत्सुकता से अभिभूत थी।

“जानू?” माया ने कमल को पुकारा।

“हम्म?”

“आप हमारे साथ सेक्स करेंगे न?” माया ने झिझकते हुए, लेकिन बड़ी उम्मीद से पूछा।

“आप चाहती हैं?”

“हर लड़की चाहती है कि सुहागरात में उसका पति उसके साथ सेक्स करे।” माया कोमलता से बोली, “... और वैसे भी, जब तक आप हमें अपने रस से सींच नहीं देते, तब तक हम सही मायनों में परिणीता नहीं हो सकती हैं,”

यह सुन कर कमल का लिंग उत्तेजनावश झटके खाने लगता है।

“मतलब... इस नन्हे बदमाश को... आपकी बुर में डालने का टाइम हो गया?”

“हाँ मेरे भोले साजन,” माया लगभग हँसने लगी, “आपको इस नॉट सो नन्हे बदमाश को हमारी बुर में केवल डालना ही नहीं है, बल्कि आपको हमारे साथ सेक्स करना है,”

“आप बताएँगी कि कैसे?”

माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाते हुए कहा, “माँ जी ने हमको जो सब समझाया है और जो हमको पता है, हम आपको वो सब बताएँगे,”

“ओके,”

माया बिस्तर पर लेट गई, और थोड़ा झिझकते हुए उसने अपनी दोनों जाँघें थोड़ी खोल दीं। लज्जा के मारे उसने आँखें बंद कर लीं। लेकिन जब कुछ देर तक कुछ भी नहीं हुआ, तो उसने आँखें खोल कर कमल की तरफ़ देखा। कमल को इस तरह अपनी योनि को टकटकी लगाए देखते हुए देख कर वो शरमा जाती है।

“जानू...” वो मनुहार करती हुई बोली, “क्या देख रहे हैं आप?”

“आपकी बुर... कितनी फ़ैसिनेटिंग है! जी चाहता है कि इसको देखता रहूँ!”

“आपका जब भी मन करे, इसको देख लीजिएगा... अब तो हम पूरी तरह से आपके हैं!” माया ने बाहें फ़ैला कर उसको अपने आलिंगन में आमंत्रित किया, “लेकिन पहले आप हमको पूरी तरह से अपना बना लीजिए,”

माया अभी भी शरमा रही थी, लेकिन कमल के साथ सन्निद्ध मिलन की उत्तेजना ने उसको अपने वश में कर लिया था। उसके कारण उसकी झिझक भी थोड़ी कम हो गई थी।

“कैसे... करना है?”

माया मुस्कुराई, “आपका... आपका नन्हा बदमाश मेरे लिए बड़ा है... इसलिए जितना हो सके, आप इसको खोल दीजिए और उसको इसके अंदर डाल दीजिए,”

“मतलब... आपकी बुर को खोल कर... अपना लं... नन्हा बदमाश उसमें डालना है?”

माया कमल की बात पर हँसने लगी।

“जानू... हम आपकी पत्नी हैं! ... आपको हमसे पर्दा करने की ज़रुरत नहीं... आप उसको लण्ड कहना चाहते हैं तो कह लीजिए... लेकिन वो शब्द सुन कर हमको गाली जैसा लगता है... ठीक वैसे ही जैसे चूत सुन कर लगता है,” माया बोली, “ये शब्द हमने केवल शोहदे और सड़क-छाप लड़कों के मुँह से सुने हैं... और आप वैसे नहीं हैं!”

कमल थोड़ा शरमा कर बोला, “सॉरी,”

“नहीं जानू... इसमें सॉरी वाली कोई बात नहीं है। सेक्स करना बहुत पवित्र काम है न... इसलिए गंदे शब्द सुन कर मन खराब होता है... और कुछ नहीं!”

“समझ गया,”

“और एक बात कहें आप से?”

“जी... कहिए न! आपको भी हमसे फॉर्मल कोने की कोई ज़रुरत नहीं है,” कमल बोला।

“आप हमको हमारे नाम से बुलाया करिए... हमको बहुत अच्छा लगेगा!”

“पहले हम आपको पूरी तरह से अपनी बना लें?”

माया मुस्कुराई, और उसने ‘हाँ’ में सर हिलाया।

कमल ने अपनी तर्जनी और अँगूठे से उसकी योनि के होंठों को फैलाया। होंठ तो फ़ैले, लेकिन अंदर कोई अतिरिक्त जगह नहीं बनी - कम से कम कमल को तो वैसा नहीं लगा। फिर वो अपना लिंग उसकी योनि में डालने का प्रयास करने लगा। लेकिन अभी भी माया की टाँगें पूरी तरह से नहीं खुली थीं, इसलिए अंदर प्रविष्ट हो पाना सफल नहीं हो रहा था। कुछ देर जद्दोजहद करने के बाद कमल ने थोड़ा कल्पना-चतुर होते हुए माया के दोनों जाँघों को अपने हाथों से पकड़ कर हौले से फ़ैला दिया। अब उसे माया की योनि साफ़ खुली दिखाई देने लगी। अब अधिक स्थान दिखने लगा।

अब वो अपनी कमर को माया की जाँघों के बीच ले जा कर अपने लिंग को उसकी योनि पर फिराता है। कमल के लिंग का अपनी योनि पर स्पर्श पाते ही माया के दिल की धड़कन तेज हो जाती है।

“जानू... धीरे से...” उसने फुसफुसाते हुए कहा।

उधर कमल भी बहुत उत्साहित था और बहुत उत्तेजित भी! कब से सोची हुई इच्छा पूरी होने वाली थी आज - उसकी माया आज पूरी तरह से उसकी होने वाली थी! वो थोड़ा दबाव डाल कर एक हल्का सा धक्का देता है। एकदम से उसका लिंग माया की योनि के भीतर चला जाता है। अपने पति के लिंग को अपने भीतर महसूस करते ही माया के मुँह से दर्द भरी आह निकल जाती है।

कमल रुकने लगता है तो माया उसको वैसा करने से रोक कर कहती है,

“रुकिए नहीं... रुकिए नहीं... बस जैसे अभी आपने धक्का लगाया है न, वैसे ही मेरे अंदर बाहर धक्का लगाते रहिए,”

कमल ने समझते हुए फिर से धक्का लगाया। माया फिर से दर्द से कराह उठी। दो तीन धक्कों में उसका लिंग आधे से अधिक माया के भीतर प्रविष्ट हो गया। माया को तकलीफ़ हो रही थी और वो कराह रही थी; बड़बड़ा रही थी, लेकिन वो कमल को बराबर बोल भी रही थी कि वो न रुके,

“आह्ह... उई माँ!”

“आप रुकिएगा नहीं!”

“मर गई... माँऽऽऽ...”

माया के लिए केयर और अपनी चाहत दोनों के मिले जुले प्रभाव से कब कमल उसकी योनि के भीतर यथासंभव गहराई तक जाने लगा, उसको भी पता नहीं चला। यह अद्भुत एहसास था - माया की योनि की चिकनी, रपटीली सुरंग ने उसके लिंग की पूरी लम्बाई को मज़बूती से पकड़ रखा था, लेकिन फिर भी धक्के लगाने में कोई कठिनाई नहीं हो रही थी।

उधर माया को मज़ा आना शुरू तो हुआ, लेकिन वैसा नहीं जैसा उसने किरण जी या सरिता जी के मुँह से सुना था। उसको मज़े की अपेक्षा दर्द अधिक महसूस हो रहा था। माया के मुँह से दर्द की कराह निकल जाती है,

“आईईई... अम्माऽऽ...”

कमल चिंता के कारण रुकने लगता है।

“नहीं... आप रुकिए नहीं! मेरे आँसुओं पर न जाईये... आज नहीं,”

न जाने कौन सी प्रेरणा कमल के मन में आई। उसने माया को अपने आलिंगन में भर के उसके होंठों को चूम लिया और उसी के साथ अपनी कमर को हल्के हल्के हिलाते हुए माया को भोगने लगता है।

जब कमल के होंठ माया के होंठों को छोड़ते हैं, तो माया हाँफते हुए कहती है,

“निपल को... निपल को भी...”

माया के स्तन कमल को हमेशा ही आकर्षित करते रहे। उसने थोड़ा झुकते हुए माया के बाएँ चूचक को अपने मुँह में भर लिया और उसे ज़ोर से चूसने लगा। दाहिने स्तन को वो अपने स्वतंत्र हाथ से दबाने मसलने लगा। इस दौरान उसका धक्के लगाना रुका नहीं।

इतनी देर बाद अब कहीं जा कर माया को अपने प्रथम सम्भोग का आनंद आया। उसकी योनि और उसके चूचकों से हो कर कामुक गुदगुदी की तरंगें उसके पूरे शरीर में फ़ैल रही थीं। माया की योनि के रस से गीला हो कर उसका लिंग और भी अधिक कठोर हो गया था, और वो माया को अपनी बाँहों में भर कर बलपूर्वक उसको भोगने लगता है।

माया के गले से अभी भी आहें निकल रही थीं, लेकिन अब उनकी तासीर बदल गई थी।

“आहह आह्ह... अम्मा...” माया बोल रही थी, “हाँ... ऐसे ही! ... उई अम्मा... ओफ़्फ़,”

माया के मुँह से निकलने वाली कामुक आहों और कराहों से कमल और भी उत्तेजित हो रहा था, और वो पूरी मस्ती में आ कर माया के साथ सम्भोग करने लगा। दोनों की आँखें आनंदातिरेक में आ कर बंद हो गई थीं, और दोनों एक दूसरे के आलिंगन में बँध गए थे। माया ने भी कमल को अपनी बाँहों में पकड़ लिया था। कुछ देर तक इसी तरह से सम्भोग चला। माया की कराहें, आहें अब कम हो गई थीं। कमल ने आँखें खोल कर देखना चाहा कि उसको कैसा लग रहा था। उसने देखा कि माया तड़प तड़प कर अपना सर कभी दाहिने, तो कभी बाएँ हिला रही थी; उसकी आँखें अभी भी बंद थीं, होंठ भी भिंचे हुए थे; और नथुने फड़क रहे थे। कभी कभी बंद होंठों से कूजन जैसी आह निकल रही थी।

स्पष्ट था कि उसको भी सम्भोग का आनंद आ रहा था।

अचानक से ही कमल को अपने लिंग में एक परिचित दबाव महसूस होने लगता है। वो समझ जाता है कि उसका वीर्य निकलने ही वाला है।

“जान,” उसने माया से कहा।

“हम्म्म? क्या हुआ?” माया ने आँखें खोलीं।

“नि... निकलने वाला है,”

माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाते हुए कहा, “अंदर ही... इसको मेरे अंदर ही निकाल दीजिए,”

कमल के धक्कों की गति थोड़ी बढ़ गई। माया भी उसके जोश का साथ देती हुई उसको अपने आलिंगन में भींच लेती है।

उसी समय वीर्य के छोटे छोटे गोले उसके लिंग से निकल कर माया की कोख में समाने लगते हैं। माया को कमल के लिंग की गर्मी के अतिरिक्त भी अलग तरह के गर्म पदार्थ की छुवन अपनी योनि के भीतर महसूस होती है। वो समझ जाती है कि उन दोनों का मिलन अब पूरा हो गया था। दो तीन और धक्के लगाने के बाद कमल को अचानक से बहुत थकावट सी महसूस होने लगती है और उसका लिंग जो बस दो क्षणों पहले ही लकड़ी जैसा ठोस था, अब वो शिथिल हो कर माया की योनि से बाहर निकल आता है।
 
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