parkas
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"ओके फाइन।" राजवीर ने जैसे निर्णायक भाव से कहा──"अभी हमारे पास पूरा दिन पड़ा है। इस लिए उसको खोजने से पहले हम सबको फ्रेश हो लेना चाहिए और साथ ही कुछ खा पी लेना चाहिए। उसके बाद ही हम उसकी खोज में निकलेंगे।"
राजवीर की बात से सब सहमत हो गए।
अतः सब के सब फ्रेश होने के लिए चल पड़े।
इस बात से बेख़बर कि दूर एक पेड़ के पीछे से दो आँखें उन सबको बारी बारी से देख रहीं थी।
Bahut hi badhiya update diya hai TheBlackBlood bhai....Update ~ 15
दोपहर से शाम होते होते पांचों ने टापू का कई चक्कर लगा लिया मगर उन्हें वो इंसान कहीं न मिला जिसे नील ने देखा था।
सब बुरी तरह थक चुके थे।
हालत खस्ता हो चुकी थी।
दिव्या ने तो पहले ही हाथ खड़े कर दिए थे कि उससे अब और नहीं चला जाएगा इस लिए नागेश ही उसे सहारा दे कर चलता रहा था।
राजवीर के कहने पर सब किसी तरह समंदर के उस किनारे पर आ गए थे जिस तरफ पेट की भूख मिटाने के लिए केले, खजूर और नारियल के पेड़ थे।
समंदर किनारे रेतीली ज़मीन पर सब के सब ढेर से हो कर पड़ गए थे।
सबकी सांसें उखड़ी हुईं थी।
जाने कितनी ही देर तक सब आँखें बंद किए लेटे रहे।
"हमने बेकार में ही इतनी मेहनत की राजवीर।" नितिन एकाएक अपने पीछे एक पेड़ से पीठ टिका कर बोल पड़ा──"उस इंसान की हमें कहीं झलक तक नहीं मिली जिसे नील ने देखने का दावा किया था।"
"आश्चर्य की बात है कि इस छोटे से टापू का हमने कई बार चक्कर लगाया।" राजवीर भी उठ कर एक पेड़ से अपनी पीठ टिका कर बोला──"अपनी समझ में हमने ऐसी हर उस जगह का मुआयना किया जहां पर उसके होने की सम्भावना हो सकती थी लेकिन हाथ कुछ न लगा। समझ में नहीं आ रहा कि उसे ज़मीन खा गई या आसमान निगल गया?"
"हो सकता है कि मेरी बात नील को बुरी लगे।" नितिन ने रेत पर आँखें बंद किए पड़े नील को देखने के बाद कहा──"मगर अब तो यही लगता है कि नील को सुबह के वक्त सच में किसी इंसान के होने का वहम हुआ था।"
"इतनी खोजबीन के बाद भी किसी इंसान की झलक तक न मिलना तो यही ज़ाहिर करता है।" दिव्या हौले से उठ कर कमज़ोर सी आवाज़ में बोली──"मुझे भी अब यही लगता है कि नील को उस टाइम भ्रम हुआ था।"
"तुम लोग मानो या न मानो।" नील एक झटके में उठ कर तथा झुंझलाते हुए बोला──"मगर सच यही है कि मैंने अपनी आंखों से एक इंसान को झाड़ियों के पीछे खड़े देखा था। मुझे कोई वहम नहीं हुआ था। मैं पागल नहीं हूं जो ऐसा बोल कर तुम सबको परेशान करने का सोचूंगा।"
"अगर वो सच में तुम्हारा वहम नहीं था और तुमने किसी इंसान को ही देखा था।" राजवीर ने कहा──"तो फिर इतना खोजने के बाद भी हमें उसकी झलक तक क्यों नहीं मिली? हमने एक बार नहीं बल्कि तीन तीन बार पूरा टापू घूम लिया और हर उस जगह की तलाशी ली जहां पर उसके होने की उम्मीद थी मगर तुमने देखा न कि कोई भी इंसानी जीव नहीं दिखा हमें?"
"हां देखा मैंने।" नील बेबस भाव से बोला──"मैं खुद हैरान हूं कि ऐसा कैसे हो सकता है? लेकिन मैं क़सम खा कर कहता हूं कि मैंने सच में एक इंसान को देखा था। मुझे क़सम से कोई वहम नहीं हुआ था, प्लीज़ ट्रस्ट मी।"
"मैं ट्रस्ट करना चाहता हूं नील।" राजवीर ने कहा──"लेकिन तुम भी जानते हो कि अंधा ट्रस्ट भला कब तक कर सकता है कोई? हम जिस सिचुएशन में हैं उसमें हर बात का, हर चीज़ का सबूत चाहिए। हमने पूरे टापू का तीन बार चक्कर लगा किया मगर कोई फ़ायदा न हुआ। अरे! कम से कम हमें उसकी झलक ही मिल जाती तो ट्रस्ट करने का एक आधार होता हमारे पास।"
"सही कहा।" नितिन ने सिर हिलाया──"बिना किसी ठोस आधार के भला कब तक कोई किसी बात को सच मान के बैठा रहेगा?"
"अब क्या बोलूं मैं?" नील जैसे हताश हो गया──"जब तुम्हें मुझ पर...यानि अपने दोस्त पर ही यकीन नहीं है तो क्या बोलूं अब? तुम्हें जो ठीक लगे करो, तुम्हें जिस नतीजे पर पहुंचना है पहुंच जाओ।"
"इसमें नाराज़ होने वाली बात नहीं है भाई।" राजवीर ने कहा──"समझने की कोशिश करो। खुद सोचो कि ऐसे हालात में हम आख़िर यही तो सोचेंगे न। अगर तुम हमारी जगह होते तो क्या तुम भी यही नहीं सोचते?"
"मैं नाराज़ नहीं हो रहा राजवीर।" नील ने कहा──"मैं बस हताश हूं...इस लिए कि अपनी बात को साबित करने के लिए मेरे पास कोई सबूत नहीं है। काश! तुम लोगों की भी उस टाइम उस नामुराद पर नज़र पड़ गई होती तो ये नौबत ही नहीं आती।"
थोड़ी देर और इसी संबंध में बातें हुईं उसके बाद राजवीर के ये कहने पर सब उठ गए कि शाम होने वाली है इस लिए रात के खाने के लिए खाने का सामान जल्द से जल्द इकट्ठा कर लिया जाए।
[][][][][]
रात के साढ़े नौ बज रहे थे।
नील, नागेश और दिव्या किले के दूसरे हिस्से वाले कमरों में सोने जा चुके थे जबकि राजवीर और नितिन पहले वाले हिस्से में अभी भी आग के पास बैठे बातें कर रहे थे।
"क्या लगता है तुम्हें?" नितिन ने अपने सामने आग के उस पार एक चौकोर पत्थर पर बैठे राजवीर से कहा──"क्या सच में नील ने किसी इंसान को देखा रहा होगा या ऐसे किसी इंसान का ज़िक्र कर के उसने हमें उलझाने की कोशिश की है?"
"कुछ समझ नहीं आ रहा।" राजवीर ने एक सूखी लकड़ी आग में रखते हुए कहा──"दिमाग़ दो हिस्सों में बंट गया है। एक मन कहता है कि उसने सच में किसी इंसान को देखा होगा और दूसरा मन कहता है कहीं वो हम सबको उलझा तो नहीं रहा?"
"मतलब तुम्हें भी कहीं न कहीं ये लगता है कि वो हमें उलझाने की कोशिश कर रहा है?"
"हां।"
"ऐसा भला क्यों करेगा वो?"
"अगर वो खूनी है तो उसकी कोशिश हमें उलझाने की ही तो होगी।" राजवीर ने कहा──"मत भूलो कि पिछली रात जो कुछ हुआ है उसके चलते उस पर और नागेश पर ये इल्ज़ाम लगा कि उन दोनों की वजह से वैभव का खून हुआ। हमने खुल कर भले ही नहीं कहा लेकिन वो तो यही समझे होंगे कि वैभव की इस तरह हुई हत्या से हम उन्हें ही खूनी समझ बैठे होंगे। ऐसे में खूनी होने से खुद को बचाने के लिए वो ऐसी कोई तरकीब निकाल कर हमें ये समझाने की कोशिश तो करेंगे ही कि खूनी वो नहीं बल्कि कोई और ही है।"
"बात तो ठीक है तुम्हारी।" नितिन ने कहा──"लेकिन नील ही क्यों? मेरा मतलब है कि क्या नील ही खूनी हो सकता है जबकि मेरा शक नागेश पर ज़्यादा है।"
"नागेश पर क्यों?"
"क्योंकि वो अकेला नहीं है बल्कि उसके साथ उसकी होने वाली हमसफ़र दिव्या भी है।" नितिन ने जैसे स्पष्ट कहा──"जो उसके हर काम में बराबर की शरीक है। एक बात विशेष रूप से ध्यान देने वाली है कि अब तक जो कुछ भी हुआ है और जिसने भी किया है वो सब किसी एक के बस का तो हर्गिज़ नहीं हो सकता। यानि खूनी अकेला नहीं है बल्कि उसका एक और साथी उसके साथ है। अब अगर वाकई में खूनी हम में से ही कोई है तो वो नागेश ही हो सकता है जिसके पास उसका अपना एक साथी है।"
"समझ गया।" राजवीर ने कहा──"लेकिन सोचने वाली बात है कि अगर वो दोनों ही इस सबके कर्ता धर्ता हैं तो फिर हमारी नज़रों के सामने उन्होंने कप्तान की लाश को कैसे ग़ायब किया होगा, शिप में लीकेज कैसे किया होगा?"
"इन वाहियात पॉइंट्स की बात मत करो यार।" नितिन ने बुरा सा मुंह बना लिया──"इनकी वजह से दिमाग़ अब तक चकरघिन्नी बना हुआ है। मुझे यकीन हो चुका है कि इसका जवाब हम खुद नहीं तलाश कर सकते बल्कि खूनी के बताने पर ही पता चलेगा। ख़ैर, इस वक्त अगर वैभव के खून वाले मामले पर सोचें तो नागेश और दिव्या ही खूनी समझ आते हैं।"
"वो कैसे?"
"ये तो मानते हो न कि वो दोनों एक दूसरे के खिलाफ़ नहीं जा सकते?"
"हां बिल्कुल।"
"ये भी कि दिव्या वही करेगी जो नागेश उसे करने को कहेगा?"
"हां संभव है।"
"तो क्या ये संभव नहीं है कि नागेश के कहने पर दिव्या ने वैभव का खून कर दिया हो?"
"उसने ऐसा कैसे किया होगा?" राजवीर के चेहरे पर हैरानी के साथ साथ सोचने वाले भाव भी उभर आए──"जबकि वैभव से थोड़ी ही दूरी पर नील बैठा था? एक पल के लिए ये मान किया जाए कि नागेश ने किसी के आने जाने पर जान बूझ कर अनभिज्ञता ज़ाहिर की लेकिन नील तो ऐसा नहीं करता न। मतलब वो तो स्पष्ट बता देता कि उसने दिव्या को ऐसा करते हुए देखा था।"
"यार ऐसा तो वो तब कहता जब सच में उसे कोई नज़र आता।" नितिन ने कहा──"अगर खूनी नागेश और दिव्या ही हैं तो वो भला ये कैसे भान करवा सकते थे कि उनमें से किसी को नील ऐसा कुछ करते देख ले?"
"तो फिर वैभव का खून किया कैसे गया होगा?"
"मुझे लगता है दोनों ने पहले ही प्लान बना लिया था।" नितिन ने कहा──"कप्तान और शेखर का खून उन्होंने चाकू से किया था लेकिन अब चाकू से उनके लिए खून करना आसान नहीं था। क्योंकि अब हम सब सतर्क हो चुके थे। इस लिए इस बार उन्होंने ज़हर से अपने शिकार को ख़त्म करने का प्लान बना लिया रहा होगा। नागेश ने दिव्या को समझाया रहा होगा कि अगर किसी दिन पहरा देने की ऐसी सिचुएशन बनती है तो उसे ही काम को अंजाम देना होगा। ऐसा ही हुआ, यानि पिछली रात ऐसी ही सिचुएशन बनी जिसमें नील और वैभव के साथ वो खुद पहरे पर था, जबकि दिव्या हम दोनों की तरह कमरे में। प्लान के अनुसार दिव्या को नील या वैभव में से किसी एक का खून करना था। पिछली रात जब उसने नील को नागेश के साथ बातें करते और वैभव को थोड़ी दूरी पर खंभे से पीठ टिकाए सोते देखा तो उसे लगा वैभव को ख़त्म करना ज़्यादा आसान है। अतः उसने अपने कमरे के अंदर ही दरवाज़े के पास खड़े हो कर ज़हर से बुझी सूई को किसी माध्यम से वैभव पर निशाना लगा कर फेंक दिया। सुई सीधा वैभव की गर्दन में चुभी और ज़हर उसके अंदर चला गया। सुई के चुभने पर यकीनन वैभव को थोड़ा बहुत दर्द हुआ होगा लेकिन क्योंकि वो गहरी नींद में था इस लिए वो जाग न सका और उधर ख़तरनाक ज़हर के असर से वो नींद में ही हमेशा के लिए सो गया। इधर दिव्या अपना काम कर के चुपचाप वापस दरवाज़ा बंद कर के सोने चली गई। उधर नागेश से बात करते नील को भनक तक न लगी होगी कि थोड़े समय में किसने क्या कांड कर दिया है। जबकि नागेश पहले से ही सब जानता था, आख़िर प्लान तो उसी का था। उसे तो अब बस इतना ही करना था कि जब नील को वैभव की मौत का पता चले तो वो भी उसके साथ वैसा ही बिहेव करे जैसा नील करे। अगर नील किसी बात की अनभिज्ञता ज़ाहिर करे तो वो भी यही करे।"
"इंट्रेस्टिंग।" राजवीर ने गहरी सांस ली──"वैभव के खूनी को और उसके प्लान को काफी अच्छे से एक्सप्लेन किया है तुमने। अब सवाल ये है कि क्या वास्तव में यही सच है?"
"क्या तुम्हें अब भी यकीन नहीं हो रहा?" नितिन के चेहरे पर हैरत के भाव उभर आए।
"मेरे यकीन कर लेने से क्या होगा?" राजवीर ने कहा──"इस तरह तो वो लोग भी हमारे बारे में ऐसी ही बातें और ऐसी ही संभावनाएं व्यक्त कर रहे होंगे। बातें बना लेने से और संभावनाएं व्यक्त कर लेने से कोई खूनी साबित नहीं हो जाएगा दोस्त। साबित तब होगा जब या तो खूनी रंगे हाथों पकड़ा जाए या फिर हमारे हाथ उसके खिलाफ़ कोई ठोस सबूत लगे। बाकी तुमने जो थ्योरी व्यक्त की है वैसी बात मेरे ज़हन में पहले ही आ चुकी थी। तभी तो सुबह उस टाइम मैंने सबको अपना अपना बैग चेक करवाने की बात कही थी और बैग चेक भी किए गए थे। मकसद यही था कि अगर वाकई में खूनी हम में से ही कोई है और उसने किसी माध्यम से वैभव को ज़हर दे कर मारा है तो उसके पास इस तरह का ज़हर अथवा औजार ज़रूर होगा। ये अलग बात है कि बैगों की तलाशी में भी हमें कुछ नहीं मिला था। ज़ाहिर है खूनी जो कोई भी था उसने अपने पास से वो जानलेवा हथियार गधे के सींग की तरह ग़ायब कर दिया था।"
"यानि नागेश और दिव्या पर तुम्हें भी शक हुआ था?"
"हां।" राजवीर ने कहा──"और सबूत के लिए ही बैग चेक करवाया था मगर नाकाम रहा।"
"एक बात तो 101% पक्की है कि वैभव का खूनी पिछली रात यहीं पर था।" नितिन ने कहा──"और ये भी पक्की बात है कि वो बाहर से वैभव का खून करने के लिए नहीं आया था। मतलब जो भी हुआ था यहीं पर हुआ था और उतने ही लोगों में से किसी ने किया था।"
"और आज जो नील ने किसी इंसान को देखा उसका क्या?"
"मुझे बिल्कुल भी यकीन नहीं है कि ऐसा कोई व्यक्ति उसे दिखा था।" नितिन ने जैसे स्पष्ट भाव से कहा──"या तो वो झूठ बोल रहा है या फिर सच में उसे वहम हुआ था। खुद सोचो कि खूनी अगर हम में से कोई और होता तो जब वो वैभव का खून करने किले के लिए अंदर इस हिस्से में आता तो क्या वो नील और नागेश को साफ साफ नहीं देखता? यकीनन दिखाई दे जाता राजवीर लेकिन ऐसा नहीं हुआ था। दोनों ने ऐसे किसी व्यक्ति की उस वक्त अनभिज्ञता ही ज़ाहिर की थी। मतलब साफ है कि बाहर का कोई नहीं था, बल्कि अंदर का ही था और वो नागेश और दिव्या ही हो सकते हैं, दैट्स इट।"
छोड़ो, जब तक हमारे हाथ कोई ठोस सबूत नहीं लगता तब तक कुछ नहीं हो सकता।" राजवीर ने गहरी सांस ली──"ख़ैर, चलो अब सोने चला जाए।"
दोनों एक दूसरे को गुड नाइट बोल कर अपने अपने कमरे में सोने चले गए।
To be continued...
Nice update....Update ~ 15
दोपहर से शाम होते होते पांचों ने टापू का कई चक्कर लगा लिया मगर उन्हें वो इंसान कहीं न मिला जिसे नील ने देखा था।
सब बुरी तरह थक चुके थे।
हालत खस्ता हो चुकी थी।
दिव्या ने तो पहले ही हाथ खड़े कर दिए थे कि उससे अब और नहीं चला जाएगा इस लिए नागेश ही उसे सहारा दे कर चलता रहा था।
राजवीर के कहने पर सब किसी तरह समंदर के उस किनारे पर आ गए थे जिस तरफ पेट की भूख मिटाने के लिए केले, खजूर और नारियल के पेड़ थे।
समंदर किनारे रेतीली ज़मीन पर सब के सब ढेर से हो कर पड़ गए थे।
सबकी सांसें उखड़ी हुईं थी।
जाने कितनी ही देर तक सब आँखें बंद किए लेटे रहे।
"हमने बेकार में ही इतनी मेहनत की राजवीर।" नितिन एकाएक अपने पीछे एक पेड़ से पीठ टिका कर बोल पड़ा──"उस इंसान की हमें कहीं झलक तक नहीं मिली जिसे नील ने देखने का दावा किया था।"
"आश्चर्य की बात है कि इस छोटे से टापू का हमने कई बार चक्कर लगाया।" राजवीर भी उठ कर एक पेड़ से अपनी पीठ टिका कर बोला──"अपनी समझ में हमने ऐसी हर उस जगह का मुआयना किया जहां पर उसके होने की सम्भावना हो सकती थी लेकिन हाथ कुछ न लगा। समझ में नहीं आ रहा कि उसे ज़मीन खा गई या आसमान निगल गया?"
"हो सकता है कि मेरी बात नील को बुरी लगे।" नितिन ने रेत पर आँखें बंद किए पड़े नील को देखने के बाद कहा──"मगर अब तो यही लगता है कि नील को सुबह के वक्त सच में किसी इंसान के होने का वहम हुआ था।"
"इतनी खोजबीन के बाद भी किसी इंसान की झलक तक न मिलना तो यही ज़ाहिर करता है।" दिव्या हौले से उठ कर कमज़ोर सी आवाज़ में बोली──"मुझे भी अब यही लगता है कि नील को उस टाइम भ्रम हुआ था।"
"तुम लोग मानो या न मानो।" नील एक झटके में उठ कर तथा झुंझलाते हुए बोला──"मगर सच यही है कि मैंने अपनी आंखों से एक इंसान को झाड़ियों के पीछे खड़े देखा था। मुझे कोई वहम नहीं हुआ था। मैं पागल नहीं हूं जो ऐसा बोल कर तुम सबको परेशान करने का सोचूंगा।"
"अगर वो सच में तुम्हारा वहम नहीं था और तुमने किसी इंसान को ही देखा था।" राजवीर ने कहा──"तो फिर इतना खोजने के बाद भी हमें उसकी झलक तक क्यों नहीं मिली? हमने एक बार नहीं बल्कि तीन तीन बार पूरा टापू घूम लिया और हर उस जगह की तलाशी ली जहां पर उसके होने की उम्मीद थी मगर तुमने देखा न कि कोई भी इंसानी जीव नहीं दिखा हमें?"
"हां देखा मैंने।" नील बेबस भाव से बोला──"मैं खुद हैरान हूं कि ऐसा कैसे हो सकता है? लेकिन मैं क़सम खा कर कहता हूं कि मैंने सच में एक इंसान को देखा था। मुझे क़सम से कोई वहम नहीं हुआ था, प्लीज़ ट्रस्ट मी।"
"मैं ट्रस्ट करना चाहता हूं नील।" राजवीर ने कहा──"लेकिन तुम भी जानते हो कि अंधा ट्रस्ट भला कब तक कर सकता है कोई? हम जिस सिचुएशन में हैं उसमें हर बात का, हर चीज़ का सबूत चाहिए। हमने पूरे टापू का तीन बार चक्कर लगा किया मगर कोई फ़ायदा न हुआ। अरे! कम से कम हमें उसकी झलक ही मिल जाती तो ट्रस्ट करने का एक आधार होता हमारे पास।"
"सही कहा।" नितिन ने सिर हिलाया──"बिना किसी ठोस आधार के भला कब तक कोई किसी बात को सच मान के बैठा रहेगा?"
"अब क्या बोलूं मैं?" नील जैसे हताश हो गया──"जब तुम्हें मुझ पर...यानि अपने दोस्त पर ही यकीन नहीं है तो क्या बोलूं अब? तुम्हें जो ठीक लगे करो, तुम्हें जिस नतीजे पर पहुंचना है पहुंच जाओ।"
"इसमें नाराज़ होने वाली बात नहीं है भाई।" राजवीर ने कहा──"समझने की कोशिश करो। खुद सोचो कि ऐसे हालात में हम आख़िर यही तो सोचेंगे न। अगर तुम हमारी जगह होते तो क्या तुम भी यही नहीं सोचते?"
"मैं नाराज़ नहीं हो रहा राजवीर।" नील ने कहा──"मैं बस हताश हूं...इस लिए कि अपनी बात को साबित करने के लिए मेरे पास कोई सबूत नहीं है। काश! तुम लोगों की भी उस टाइम उस नामुराद पर नज़र पड़ गई होती तो ये नौबत ही नहीं आती।"
थोड़ी देर और इसी संबंध में बातें हुईं उसके बाद राजवीर के ये कहने पर सब उठ गए कि शाम होने वाली है इस लिए रात के खाने के लिए खाने का सामान जल्द से जल्द इकट्ठा कर लिया जाए।
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रात के साढ़े नौ बज रहे थे।
नील, नागेश और दिव्या किले के दूसरे हिस्से वाले कमरों में सोने जा चुके थे जबकि राजवीर और नितिन पहले वाले हिस्से में अभी भी आग के पास बैठे बातें कर रहे थे।
"क्या लगता है तुम्हें?" नितिन ने अपने सामने आग के उस पार एक चौकोर पत्थर पर बैठे राजवीर से कहा──"क्या सच में नील ने किसी इंसान को देखा रहा होगा या ऐसे किसी इंसान का ज़िक्र कर के उसने हमें उलझाने की कोशिश की है?"
"कुछ समझ नहीं आ रहा।" राजवीर ने एक सूखी लकड़ी आग में रखते हुए कहा──"दिमाग़ दो हिस्सों में बंट गया है। एक मन कहता है कि उसने सच में किसी इंसान को देखा होगा और दूसरा मन कहता है कहीं वो हम सबको उलझा तो नहीं रहा?"
"मतलब तुम्हें भी कहीं न कहीं ये लगता है कि वो हमें उलझाने की कोशिश कर रहा है?"
"हां।"
"ऐसा भला क्यों करेगा वो?"
"अगर वो खूनी है तो उसकी कोशिश हमें उलझाने की ही तो होगी।" राजवीर ने कहा──"मत भूलो कि पिछली रात जो कुछ हुआ है उसके चलते उस पर और नागेश पर ये इल्ज़ाम लगा कि उन दोनों की वजह से वैभव का खून हुआ। हमने खुल कर भले ही नहीं कहा लेकिन वो तो यही समझे होंगे कि वैभव की इस तरह हुई हत्या से हम उन्हें ही खूनी समझ बैठे होंगे। ऐसे में खूनी होने से खुद को बचाने के लिए वो ऐसी कोई तरकीब निकाल कर हमें ये समझाने की कोशिश तो करेंगे ही कि खूनी वो नहीं बल्कि कोई और ही है।"
"बात तो ठीक है तुम्हारी।" नितिन ने कहा──"लेकिन नील ही क्यों? मेरा मतलब है कि क्या नील ही खूनी हो सकता है जबकि मेरा शक नागेश पर ज़्यादा है।"
"नागेश पर क्यों?"
"क्योंकि वो अकेला नहीं है बल्कि उसके साथ उसकी होने वाली हमसफ़र दिव्या भी है।" नितिन ने जैसे स्पष्ट कहा──"जो उसके हर काम में बराबर की शरीक है। एक बात विशेष रूप से ध्यान देने वाली है कि अब तक जो कुछ भी हुआ है और जिसने भी किया है वो सब किसी एक के बस का तो हर्गिज़ नहीं हो सकता। यानि खूनी अकेला नहीं है बल्कि उसका एक और साथी उसके साथ है। अब अगर वाकई में खूनी हम में से ही कोई है तो वो नागेश ही हो सकता है जिसके पास उसका अपना एक साथी है।"
"समझ गया।" राजवीर ने कहा──"लेकिन सोचने वाली बात है कि अगर वो दोनों ही इस सबके कर्ता धर्ता हैं तो फिर हमारी नज़रों के सामने उन्होंने कप्तान की लाश को कैसे ग़ायब किया होगा, शिप में लीकेज कैसे किया होगा?"
"इन वाहियात पॉइंट्स की बात मत करो यार।" नितिन ने बुरा सा मुंह बना लिया──"इनकी वजह से दिमाग़ अब तक चकरघिन्नी बना हुआ है। मुझे यकीन हो चुका है कि इसका जवाब हम खुद नहीं तलाश कर सकते बल्कि खूनी के बताने पर ही पता चलेगा। ख़ैर, इस वक्त अगर वैभव के खून वाले मामले पर सोचें तो नागेश और दिव्या ही खूनी समझ आते हैं।"
"वो कैसे?"
"ये तो मानते हो न कि वो दोनों एक दूसरे के खिलाफ़ नहीं जा सकते?"
"हां बिल्कुल।"
"ये भी कि दिव्या वही करेगी जो नागेश उसे करने को कहेगा?"
"हां संभव है।"
"तो क्या ये संभव नहीं है कि नागेश के कहने पर दिव्या ने वैभव का खून कर दिया हो?"
"उसने ऐसा कैसे किया होगा?" राजवीर के चेहरे पर हैरानी के साथ साथ सोचने वाले भाव भी उभर आए──"जबकि वैभव से थोड़ी ही दूरी पर नील बैठा था? एक पल के लिए ये मान किया जाए कि नागेश ने किसी के आने जाने पर जान बूझ कर अनभिज्ञता ज़ाहिर की लेकिन नील तो ऐसा नहीं करता न। मतलब वो तो स्पष्ट बता देता कि उसने दिव्या को ऐसा करते हुए देखा था।"
"यार ऐसा तो वो तब कहता जब सच में उसे कोई नज़र आता।" नितिन ने कहा──"अगर खूनी नागेश और दिव्या ही हैं तो वो भला ये कैसे भान करवा सकते थे कि उनमें से किसी को नील ऐसा कुछ करते देख ले?"
"तो फिर वैभव का खून किया कैसे गया होगा?"
"मुझे लगता है दोनों ने पहले ही प्लान बना लिया था।" नितिन ने कहा──"कप्तान और शेखर का खून उन्होंने चाकू से किया था लेकिन अब चाकू से उनके लिए खून करना आसान नहीं था। क्योंकि अब हम सब सतर्क हो चुके थे। इस लिए इस बार उन्होंने ज़हर से अपने शिकार को ख़त्म करने का प्लान बना लिया रहा होगा। नागेश ने दिव्या को समझाया रहा होगा कि अगर किसी दिन पहरा देने की ऐसी सिचुएशन बनती है तो उसे ही काम को अंजाम देना होगा। ऐसा ही हुआ, यानि पिछली रात ऐसी ही सिचुएशन बनी जिसमें नील और वैभव के साथ वो खुद पहरे पर था, जबकि दिव्या हम दोनों की तरह कमरे में। प्लान के अनुसार दिव्या को नील या वैभव में से किसी एक का खून करना था। पिछली रात जब उसने नील को नागेश के साथ बातें करते और वैभव को थोड़ी दूरी पर खंभे से पीठ टिकाए सोते देखा तो उसे लगा वैभव को ख़त्म करना ज़्यादा आसान है। अतः उसने अपने कमरे के अंदर ही दरवाज़े के पास खड़े हो कर ज़हर से बुझी सूई को किसी माध्यम से वैभव पर निशाना लगा कर फेंक दिया। सुई सीधा वैभव की गर्दन में चुभी और ज़हर उसके अंदर चला गया। सुई के चुभने पर यकीनन वैभव को थोड़ा बहुत दर्द हुआ होगा लेकिन क्योंकि वो गहरी नींद में था इस लिए वो जाग न सका और उधर ख़तरनाक ज़हर के असर से वो नींद में ही हमेशा के लिए सो गया। इधर दिव्या अपना काम कर के चुपचाप वापस दरवाज़ा बंद कर के सोने चली गई। उधर नागेश से बात करते नील को भनक तक न लगी होगी कि थोड़े समय में किसने क्या कांड कर दिया है। जबकि नागेश पहले से ही सब जानता था, आख़िर प्लान तो उसी का था। उसे तो अब बस इतना ही करना था कि जब नील को वैभव की मौत का पता चले तो वो भी उसके साथ वैसा ही बिहेव करे जैसा नील करे। अगर नील किसी बात की अनभिज्ञता ज़ाहिर करे तो वो भी यही करे।"
"इंट्रेस्टिंग।" राजवीर ने गहरी सांस ली──"वैभव के खूनी को और उसके प्लान को काफी अच्छे से एक्सप्लेन किया है तुमने। अब सवाल ये है कि क्या वास्तव में यही सच है?"
"क्या तुम्हें अब भी यकीन नहीं हो रहा?" नितिन के चेहरे पर हैरत के भाव उभर आए।
"मेरे यकीन कर लेने से क्या होगा?" राजवीर ने कहा──"इस तरह तो वो लोग भी हमारे बारे में ऐसी ही बातें और ऐसी ही संभावनाएं व्यक्त कर रहे होंगे। बातें बना लेने से और संभावनाएं व्यक्त कर लेने से कोई खूनी साबित नहीं हो जाएगा दोस्त। साबित तब होगा जब या तो खूनी रंगे हाथों पकड़ा जाए या फिर हमारे हाथ उसके खिलाफ़ कोई ठोस सबूत लगे। बाकी तुमने जो थ्योरी व्यक्त की है वैसी बात मेरे ज़हन में पहले ही आ चुकी थी। तभी तो सुबह उस टाइम मैंने सबको अपना अपना बैग चेक करवाने की बात कही थी और बैग चेक भी किए गए थे। मकसद यही था कि अगर वाकई में खूनी हम में से ही कोई है और उसने किसी माध्यम से वैभव को ज़हर दे कर मारा है तो उसके पास इस तरह का ज़हर अथवा औजार ज़रूर होगा। ये अलग बात है कि बैगों की तलाशी में भी हमें कुछ नहीं मिला था। ज़ाहिर है खूनी जो कोई भी था उसने अपने पास से वो जानलेवा हथियार गधे के सींग की तरह ग़ायब कर दिया था।"
"यानि नागेश और दिव्या पर तुम्हें भी शक हुआ था?"
"हां।" राजवीर ने कहा──"और सबूत के लिए ही बैग चेक करवाया था मगर नाकाम रहा।"
"एक बात तो 101% पक्की है कि वैभव का खूनी पिछली रात यहीं पर था।" नितिन ने कहा──"और ये भी पक्की बात है कि वो बाहर से वैभव का खून करने के लिए नहीं आया था। मतलब जो भी हुआ था यहीं पर हुआ था और उतने ही लोगों में से किसी ने किया था।"
"और आज जो नील ने किसी इंसान को देखा उसका क्या?"
"मुझे बिल्कुल भी यकीन नहीं है कि ऐसा कोई व्यक्ति उसे दिखा था।" नितिन ने जैसे स्पष्ट भाव से कहा──"या तो वो झूठ बोल रहा है या फिर सच में उसे वहम हुआ था। खुद सोचो कि खूनी अगर हम में से कोई और होता तो जब वो वैभव का खून करने किले के लिए अंदर इस हिस्से में आता तो क्या वो नील और नागेश को साफ साफ नहीं देखता? यकीनन दिखाई दे जाता राजवीर लेकिन ऐसा नहीं हुआ था। दोनों ने ऐसे किसी व्यक्ति की उस वक्त अनभिज्ञता ही ज़ाहिर की थी। मतलब साफ है कि बाहर का कोई नहीं था, बल्कि अंदर का ही था और वो नागेश और दिव्या ही हो सकते हैं, दैट्स इट।"
छोड़ो, जब तक हमारे हाथ कोई ठोस सबूत नहीं लगता तब तक कुछ नहीं हो सकता।" राजवीर ने गहरी सांस ली──"ख़ैर, चलो अब सोने चला जाए।"
दोनों एक दूसरे को गुड नाइट बोल कर अपने अपने कमरे में सोने चले गए।
To be continued...
Update ~ 15
दोपहर से शाम होते होते पांचों ने टापू का कई चक्कर लगा लिया मगर उन्हें वो इंसान कहीं न मिला जिसे नील ने देखा था।
सब बुरी तरह थक चुके थे।
हालत खस्ता हो चुकी थी।
दिव्या ने तो पहले ही हाथ खड़े कर दिए थे कि उससे अब और नहीं चला जाएगा इस लिए नागेश ही उसे सहारा दे कर चलता रहा था।
राजवीर के कहने पर सब किसी तरह समंदर के उस किनारे पर आ गए थे जिस तरफ पेट की भूख मिटाने के लिए केले, खजूर और नारियल के पेड़ थे।
समंदर किनारे रेतीली ज़मीन पर सब के सब ढेर से हो कर पड़ गए थे।
सबकी सांसें उखड़ी हुईं थी।
जाने कितनी ही देर तक सब आँखें बंद किए लेटे रहे।
"हमने बेकार में ही इतनी मेहनत की राजवीर।" नितिन एकाएक अपने पीछे एक पेड़ से पीठ टिका कर बोल पड़ा──"उस इंसान की हमें कहीं झलक तक नहीं मिली जिसे नील ने देखने का दावा किया था।"
"आश्चर्य की बात है कि इस छोटे से टापू का हमने कई बार चक्कर लगाया।" राजवीर भी उठ कर एक पेड़ से अपनी पीठ टिका कर बोला──"अपनी समझ में हमने ऐसी हर उस जगह का मुआयना किया जहां पर उसके होने की सम्भावना हो सकती थी लेकिन हाथ कुछ न लगा। समझ में नहीं आ रहा कि उसे ज़मीन खा गई या आसमान निगल गया?"
"हो सकता है कि मेरी बात नील को बुरी लगे।" नितिन ने रेत पर आँखें बंद किए पड़े नील को देखने के बाद कहा──"मगर अब तो यही लगता है कि नील को सुबह के वक्त सच में किसी इंसान के होने का वहम हुआ था।"
"इतनी खोजबीन के बाद भी किसी इंसान की झलक तक न मिलना तो यही ज़ाहिर करता है।" दिव्या हौले से उठ कर कमज़ोर सी आवाज़ में बोली──"मुझे भी अब यही लगता है कि नील को उस टाइम भ्रम हुआ था।"
"तुम लोग मानो या न मानो।" नील एक झटके में उठ कर तथा झुंझलाते हुए बोला──"मगर सच यही है कि मैंने अपनी आंखों से एक इंसान को झाड़ियों के पीछे खड़े देखा था। मुझे कोई वहम नहीं हुआ था। मैं पागल नहीं हूं जो ऐसा बोल कर तुम सबको परेशान करने का सोचूंगा।"
"अगर वो सच में तुम्हारा वहम नहीं था और तुमने किसी इंसान को ही देखा था।" राजवीर ने कहा──"तो फिर इतना खोजने के बाद भी हमें उसकी झलक तक क्यों नहीं मिली? हमने एक बार नहीं बल्कि तीन तीन बार पूरा टापू घूम लिया और हर उस जगह की तलाशी ली जहां पर उसके होने की उम्मीद थी मगर तुमने देखा न कि कोई भी इंसानी जीव नहीं दिखा हमें?"
"हां देखा मैंने।" नील बेबस भाव से बोला──"मैं खुद हैरान हूं कि ऐसा कैसे हो सकता है? लेकिन मैं क़सम खा कर कहता हूं कि मैंने सच में एक इंसान को देखा था। मुझे क़सम से कोई वहम नहीं हुआ था, प्लीज़ ट्रस्ट मी।"
"मैं ट्रस्ट करना चाहता हूं नील।" राजवीर ने कहा──"लेकिन तुम भी जानते हो कि अंधा ट्रस्ट भला कब तक कर सकता है कोई? हम जिस सिचुएशन में हैं उसमें हर बात का, हर चीज़ का सबूत चाहिए। हमने पूरे टापू का तीन बार चक्कर लगा किया मगर कोई फ़ायदा न हुआ। अरे! कम से कम हमें उसकी झलक ही मिल जाती तो ट्रस्ट करने का एक आधार होता हमारे पास।"
"सही कहा।" नितिन ने सिर हिलाया──"बिना किसी ठोस आधार के भला कब तक कोई किसी बात को सच मान के बैठा रहेगा?"
"अब क्या बोलूं मैं?" नील जैसे हताश हो गया──"जब तुम्हें मुझ पर...यानि अपने दोस्त पर ही यकीन नहीं है तो क्या बोलूं अब? तुम्हें जो ठीक लगे करो, तुम्हें जिस नतीजे पर पहुंचना है पहुंच जाओ।"
"इसमें नाराज़ होने वाली बात नहीं है भाई।" राजवीर ने कहा──"समझने की कोशिश करो। खुद सोचो कि ऐसे हालात में हम आख़िर यही तो सोचेंगे न। अगर तुम हमारी जगह होते तो क्या तुम भी यही नहीं सोचते?"
"मैं नाराज़ नहीं हो रहा राजवीर।" नील ने कहा──"मैं बस हताश हूं...इस लिए कि अपनी बात को साबित करने के लिए मेरे पास कोई सबूत नहीं है। काश! तुम लोगों की भी उस टाइम उस नामुराद पर नज़र पड़ गई होती तो ये नौबत ही नहीं आती।"
थोड़ी देर और इसी संबंध में बातें हुईं उसके बाद राजवीर के ये कहने पर सब उठ गए कि शाम होने वाली है इस लिए रात के खाने के लिए खाने का सामान जल्द से जल्द इकट्ठा कर लिया जाए।
[][][][][]
रात के साढ़े नौ बज रहे थे।
नील, नागेश और दिव्या किले के दूसरे हिस्से वाले कमरों में सोने जा चुके थे जबकि राजवीर और नितिन पहले वाले हिस्से में अभी भी आग के पास बैठे बातें कर रहे थे।
"क्या लगता है तुम्हें?" नितिन ने अपने सामने आग के उस पार एक चौकोर पत्थर पर बैठे राजवीर से कहा──"क्या सच में नील ने किसी इंसान को देखा रहा होगा या ऐसे किसी इंसान का ज़िक्र कर के उसने हमें उलझाने की कोशिश की है?"
"कुछ समझ नहीं आ रहा।" राजवीर ने एक सूखी लकड़ी आग में रखते हुए कहा──"दिमाग़ दो हिस्सों में बंट गया है। एक मन कहता है कि उसने सच में किसी इंसान को देखा होगा और दूसरा मन कहता है कहीं वो हम सबको उलझा तो नहीं रहा?"
"मतलब तुम्हें भी कहीं न कहीं ये लगता है कि वो हमें उलझाने की कोशिश कर रहा है?"
"हां।"
"ऐसा भला क्यों करेगा वो?"
"अगर वो खूनी है तो उसकी कोशिश हमें उलझाने की ही तो होगी।" राजवीर ने कहा──"मत भूलो कि पिछली रात जो कुछ हुआ है उसके चलते उस पर और नागेश पर ये इल्ज़ाम लगा कि उन दोनों की वजह से वैभव का खून हुआ। हमने खुल कर भले ही नहीं कहा लेकिन वो तो यही समझे होंगे कि वैभव की इस तरह हुई हत्या से हम उन्हें ही खूनी समझ बैठे होंगे। ऐसे में खूनी होने से खुद को बचाने के लिए वो ऐसी कोई तरकीब निकाल कर हमें ये समझाने की कोशिश तो करेंगे ही कि खूनी वो नहीं बल्कि कोई और ही है।"
"बात तो ठीक है तुम्हारी।" नितिन ने कहा──"लेकिन नील ही क्यों? मेरा मतलब है कि क्या नील ही खूनी हो सकता है जबकि मेरा शक नागेश पर ज़्यादा है।"
"नागेश पर क्यों?"
"क्योंकि वो अकेला नहीं है बल्कि उसके साथ उसकी होने वाली हमसफ़र दिव्या भी है।" नितिन ने जैसे स्पष्ट कहा──"जो उसके हर काम में बराबर की शरीक है। एक बात विशेष रूप से ध्यान देने वाली है कि अब तक जो कुछ भी हुआ है और जिसने भी किया है वो सब किसी एक के बस का तो हर्गिज़ नहीं हो सकता। यानि खूनी अकेला नहीं है बल्कि उसका एक और साथी उसके साथ है। अब अगर वाकई में खूनी हम में से ही कोई है तो वो नागेश ही हो सकता है जिसके पास उसका अपना एक साथी है।"
"समझ गया।" राजवीर ने कहा──"लेकिन सोचने वाली बात है कि अगर वो दोनों ही इस सबके कर्ता धर्ता हैं तो फिर हमारी नज़रों के सामने उन्होंने कप्तान की लाश को कैसे ग़ायब किया होगा, शिप में लीकेज कैसे किया होगा?"
"इन वाहियात पॉइंट्स की बात मत करो यार।" नितिन ने बुरा सा मुंह बना लिया──"इनकी वजह से दिमाग़ अब तक चकरघिन्नी बना हुआ है। मुझे यकीन हो चुका है कि इसका जवाब हम खुद नहीं तलाश कर सकते बल्कि खूनी के बताने पर ही पता चलेगा। ख़ैर, इस वक्त अगर वैभव के खून वाले मामले पर सोचें तो नागेश और दिव्या ही खूनी समझ आते हैं।"
"वो कैसे?"
"ये तो मानते हो न कि वो दोनों एक दूसरे के खिलाफ़ नहीं जा सकते?"
"हां बिल्कुल।"
"ये भी कि दिव्या वही करेगी जो नागेश उसे करने को कहेगा?"
"हां संभव है।"
"तो क्या ये संभव नहीं है कि नागेश के कहने पर दिव्या ने वैभव का खून कर दिया हो?"
"उसने ऐसा कैसे किया होगा?" राजवीर के चेहरे पर हैरानी के साथ साथ सोचने वाले भाव भी उभर आए──"जबकि वैभव से थोड़ी ही दूरी पर नील बैठा था? एक पल के लिए ये मान किया जाए कि नागेश ने किसी के आने जाने पर जान बूझ कर अनभिज्ञता ज़ाहिर की लेकिन नील तो ऐसा नहीं करता न। मतलब वो तो स्पष्ट बता देता कि उसने दिव्या को ऐसा करते हुए देखा था।"
"यार ऐसा तो वो तब कहता जब सच में उसे कोई नज़र आता।" नितिन ने कहा──"अगर खूनी नागेश और दिव्या ही हैं तो वो भला ये कैसे भान करवा सकते थे कि उनमें से किसी को नील ऐसा कुछ करते देख ले?"
"तो फिर वैभव का खून किया कैसे गया होगा?"
"मुझे लगता है दोनों ने पहले ही प्लान बना लिया था।" नितिन ने कहा──"कप्तान और शेखर का खून उन्होंने चाकू से किया था लेकिन अब चाकू से उनके लिए खून करना आसान नहीं था। क्योंकि अब हम सब सतर्क हो चुके थे। इस लिए इस बार उन्होंने ज़हर से अपने शिकार को ख़त्म करने का प्लान बना लिया रहा होगा। नागेश ने दिव्या को समझाया रहा होगा कि अगर किसी दिन पहरा देने की ऐसी सिचुएशन बनती है तो उसे ही काम को अंजाम देना होगा। ऐसा ही हुआ, यानि पिछली रात ऐसी ही सिचुएशन बनी जिसमें नील और वैभव के साथ वो खुद पहरे पर था, जबकि दिव्या हम दोनों की तरह कमरे में। प्लान के अनुसार दिव्या को नील या वैभव में से किसी एक का खून करना था। पिछली रात जब उसने नील को नागेश के साथ बातें करते और वैभव को थोड़ी दूरी पर खंभे से पीठ टिकाए सोते देखा तो उसे लगा वैभव को ख़त्म करना ज़्यादा आसान है। अतः उसने अपने कमरे के अंदर ही दरवाज़े के पास खड़े हो कर ज़हर से बुझी सूई को किसी माध्यम से वैभव पर निशाना लगा कर फेंक दिया। सुई सीधा वैभव की गर्दन में चुभी और ज़हर उसके अंदर चला गया। सुई के चुभने पर यकीनन वैभव को थोड़ा बहुत दर्द हुआ होगा लेकिन क्योंकि वो गहरी नींद में था इस लिए वो जाग न सका और उधर ख़तरनाक ज़हर के असर से वो नींद में ही हमेशा के लिए सो गया। इधर दिव्या अपना काम कर के चुपचाप वापस दरवाज़ा बंद कर के सोने चली गई। उधर नागेश से बात करते नील को भनक तक न लगी होगी कि थोड़े समय में किसने क्या कांड कर दिया है। जबकि नागेश पहले से ही सब जानता था, आख़िर प्लान तो उसी का था। उसे तो अब बस इतना ही करना था कि जब नील को वैभव की मौत का पता चले तो वो भी उसके साथ वैसा ही बिहेव करे जैसा नील करे। अगर नील किसी बात की अनभिज्ञता ज़ाहिर करे तो वो भी यही करे।"
"इंट्रेस्टिंग।" राजवीर ने गहरी सांस ली──"वैभव के खूनी को और उसके प्लान को काफी अच्छे से एक्सप्लेन किया है तुमने। अब सवाल ये है कि क्या वास्तव में यही सच है?"
"क्या तुम्हें अब भी यकीन नहीं हो रहा?" नितिन के चेहरे पर हैरत के भाव उभर आए।
"मेरे यकीन कर लेने से क्या होगा?" राजवीर ने कहा──"इस तरह तो वो लोग भी हमारे बारे में ऐसी ही बातें और ऐसी ही संभावनाएं व्यक्त कर रहे होंगे। बातें बना लेने से और संभावनाएं व्यक्त कर लेने से कोई खूनी साबित नहीं हो जाएगा दोस्त। साबित तब होगा जब या तो खूनी रंगे हाथों पकड़ा जाए या फिर हमारे हाथ उसके खिलाफ़ कोई ठोस सबूत लगे। बाकी तुमने जो थ्योरी व्यक्त की है वैसी बात मेरे ज़हन में पहले ही आ चुकी थी। तभी तो सुबह उस टाइम मैंने सबको अपना अपना बैग चेक करवाने की बात कही थी और बैग चेक भी किए गए थे। मकसद यही था कि अगर वाकई में खूनी हम में से ही कोई है और उसने किसी माध्यम से वैभव को ज़हर दे कर मारा है तो उसके पास इस तरह का ज़हर अथवा औजार ज़रूर होगा। ये अलग बात है कि बैगों की तलाशी में भी हमें कुछ नहीं मिला था। ज़ाहिर है खूनी जो कोई भी था उसने अपने पास से वो जानलेवा हथियार गधे के सींग की तरह ग़ायब कर दिया था।"
"यानि नागेश और दिव्या पर तुम्हें भी शक हुआ था?"
"हां।" राजवीर ने कहा──"और सबूत के लिए ही बैग चेक करवाया था मगर नाकाम रहा।"
"एक बात तो 101% पक्की है कि वैभव का खूनी पिछली रात यहीं पर था।" नितिन ने कहा──"और ये भी पक्की बात है कि वो बाहर से वैभव का खून करने के लिए नहीं आया था। मतलब जो भी हुआ था यहीं पर हुआ था और उतने ही लोगों में से किसी ने किया था।"
"और आज जो नील ने किसी इंसान को देखा उसका क्या?"
"मुझे बिल्कुल भी यकीन नहीं है कि ऐसा कोई व्यक्ति उसे दिखा था।" नितिन ने जैसे स्पष्ट भाव से कहा──"या तो वो झूठ बोल रहा है या फिर सच में उसे वहम हुआ था। खुद सोचो कि खूनी अगर हम में से कोई और होता तो जब वो वैभव का खून करने किले के लिए अंदर इस हिस्से में आता तो क्या वो नील और नागेश को साफ साफ नहीं देखता? यकीनन दिखाई दे जाता राजवीर लेकिन ऐसा नहीं हुआ था। दोनों ने ऐसे किसी व्यक्ति की उस वक्त अनभिज्ञता ही ज़ाहिर की थी। मतलब साफ है कि बाहर का कोई नहीं था, बल्कि अंदर का ही था और वो नागेश और दिव्या ही हो सकते हैं, दैट्स इट।"
छोड़ो, जब तक हमारे हाथ कोई ठोस सबूत नहीं लगता तब तक कुछ नहीं हो सकता।" राजवीर ने गहरी सांस ली──"ख़ैर, चलो अब सोने चला जाए।"
दोनों एक दूसरे को गुड नाइट बोल कर अपने अपने कमरे में सोने चले गए।
To be continued...








Nice and superb update....Update ~ 15
दोपहर से शाम होते होते पांचों ने टापू का कई चक्कर लगा लिया मगर उन्हें वो इंसान कहीं न मिला जिसे नील ने देखा था।
सब बुरी तरह थक चुके थे।
हालत खस्ता हो चुकी थी।
दिव्या ने तो पहले ही हाथ खड़े कर दिए थे कि उससे अब और नहीं चला जाएगा इस लिए नागेश ही उसे सहारा दे कर चलता रहा था।
राजवीर के कहने पर सब किसी तरह समंदर के उस किनारे पर आ गए थे जिस तरफ पेट की भूख मिटाने के लिए केले, खजूर और नारियल के पेड़ थे।
समंदर किनारे रेतीली ज़मीन पर सब के सब ढेर से हो कर पड़ गए थे।
सबकी सांसें उखड़ी हुईं थी।
जाने कितनी ही देर तक सब आँखें बंद किए लेटे रहे।
"हमने बेकार में ही इतनी मेहनत की राजवीर।" नितिन एकाएक अपने पीछे एक पेड़ से पीठ टिका कर बोल पड़ा──"उस इंसान की हमें कहीं झलक तक नहीं मिली जिसे नील ने देखने का दावा किया था।"
"आश्चर्य की बात है कि इस छोटे से टापू का हमने कई बार चक्कर लगाया।" राजवीर भी उठ कर एक पेड़ से अपनी पीठ टिका कर बोला──"अपनी समझ में हमने ऐसी हर उस जगह का मुआयना किया जहां पर उसके होने की सम्भावना हो सकती थी लेकिन हाथ कुछ न लगा। समझ में नहीं आ रहा कि उसे ज़मीन खा गई या आसमान निगल गया?"
"हो सकता है कि मेरी बात नील को बुरी लगे।" नितिन ने रेत पर आँखें बंद किए पड़े नील को देखने के बाद कहा──"मगर अब तो यही लगता है कि नील को सुबह के वक्त सच में किसी इंसान के होने का वहम हुआ था।"
"इतनी खोजबीन के बाद भी किसी इंसान की झलक तक न मिलना तो यही ज़ाहिर करता है।" दिव्या हौले से उठ कर कमज़ोर सी आवाज़ में बोली──"मुझे भी अब यही लगता है कि नील को उस टाइम भ्रम हुआ था।"
"तुम लोग मानो या न मानो।" नील एक झटके में उठ कर तथा झुंझलाते हुए बोला──"मगर सच यही है कि मैंने अपनी आंखों से एक इंसान को झाड़ियों के पीछे खड़े देखा था। मुझे कोई वहम नहीं हुआ था। मैं पागल नहीं हूं जो ऐसा बोल कर तुम सबको परेशान करने का सोचूंगा।"
"अगर वो सच में तुम्हारा वहम नहीं था और तुमने किसी इंसान को ही देखा था।" राजवीर ने कहा──"तो फिर इतना खोजने के बाद भी हमें उसकी झलक तक क्यों नहीं मिली? हमने एक बार नहीं बल्कि तीन तीन बार पूरा टापू घूम लिया और हर उस जगह की तलाशी ली जहां पर उसके होने की उम्मीद थी मगर तुमने देखा न कि कोई भी इंसानी जीव नहीं दिखा हमें?"
"हां देखा मैंने।" नील बेबस भाव से बोला──"मैं खुद हैरान हूं कि ऐसा कैसे हो सकता है? लेकिन मैं क़सम खा कर कहता हूं कि मैंने सच में एक इंसान को देखा था। मुझे क़सम से कोई वहम नहीं हुआ था, प्लीज़ ट्रस्ट मी।"
"मैं ट्रस्ट करना चाहता हूं नील।" राजवीर ने कहा──"लेकिन तुम भी जानते हो कि अंधा ट्रस्ट भला कब तक कर सकता है कोई? हम जिस सिचुएशन में हैं उसमें हर बात का, हर चीज़ का सबूत चाहिए। हमने पूरे टापू का तीन बार चक्कर लगा किया मगर कोई फ़ायदा न हुआ। अरे! कम से कम हमें उसकी झलक ही मिल जाती तो ट्रस्ट करने का एक आधार होता हमारे पास।"
"सही कहा।" नितिन ने सिर हिलाया──"बिना किसी ठोस आधार के भला कब तक कोई किसी बात को सच मान के बैठा रहेगा?"
"अब क्या बोलूं मैं?" नील जैसे हताश हो गया──"जब तुम्हें मुझ पर...यानि अपने दोस्त पर ही यकीन नहीं है तो क्या बोलूं अब? तुम्हें जो ठीक लगे करो, तुम्हें जिस नतीजे पर पहुंचना है पहुंच जाओ।"
"इसमें नाराज़ होने वाली बात नहीं है भाई।" राजवीर ने कहा──"समझने की कोशिश करो। खुद सोचो कि ऐसे हालात में हम आख़िर यही तो सोचेंगे न। अगर तुम हमारी जगह होते तो क्या तुम भी यही नहीं सोचते?"
"मैं नाराज़ नहीं हो रहा राजवीर।" नील ने कहा──"मैं बस हताश हूं...इस लिए कि अपनी बात को साबित करने के लिए मेरे पास कोई सबूत नहीं है। काश! तुम लोगों की भी उस टाइम उस नामुराद पर नज़र पड़ गई होती तो ये नौबत ही नहीं आती।"
थोड़ी देर और इसी संबंध में बातें हुईं उसके बाद राजवीर के ये कहने पर सब उठ गए कि शाम होने वाली है इस लिए रात के खाने के लिए खाने का सामान जल्द से जल्द इकट्ठा कर लिया जाए।
[][][][][]
रात के साढ़े नौ बज रहे थे।
नील, नागेश और दिव्या किले के दूसरे हिस्से वाले कमरों में सोने जा चुके थे जबकि राजवीर और नितिन पहले वाले हिस्से में अभी भी आग के पास बैठे बातें कर रहे थे।
"क्या लगता है तुम्हें?" नितिन ने अपने सामने आग के उस पार एक चौकोर पत्थर पर बैठे राजवीर से कहा──"क्या सच में नील ने किसी इंसान को देखा रहा होगा या ऐसे किसी इंसान का ज़िक्र कर के उसने हमें उलझाने की कोशिश की है?"
"कुछ समझ नहीं आ रहा।" राजवीर ने एक सूखी लकड़ी आग में रखते हुए कहा──"दिमाग़ दो हिस्सों में बंट गया है। एक मन कहता है कि उसने सच में किसी इंसान को देखा होगा और दूसरा मन कहता है कहीं वो हम सबको उलझा तो नहीं रहा?"
"मतलब तुम्हें भी कहीं न कहीं ये लगता है कि वो हमें उलझाने की कोशिश कर रहा है?"
"हां।"
"ऐसा भला क्यों करेगा वो?"
"अगर वो खूनी है तो उसकी कोशिश हमें उलझाने की ही तो होगी।" राजवीर ने कहा──"मत भूलो कि पिछली रात जो कुछ हुआ है उसके चलते उस पर और नागेश पर ये इल्ज़ाम लगा कि उन दोनों की वजह से वैभव का खून हुआ। हमने खुल कर भले ही नहीं कहा लेकिन वो तो यही समझे होंगे कि वैभव की इस तरह हुई हत्या से हम उन्हें ही खूनी समझ बैठे होंगे। ऐसे में खूनी होने से खुद को बचाने के लिए वो ऐसी कोई तरकीब निकाल कर हमें ये समझाने की कोशिश तो करेंगे ही कि खूनी वो नहीं बल्कि कोई और ही है।"
"बात तो ठीक है तुम्हारी।" नितिन ने कहा──"लेकिन नील ही क्यों? मेरा मतलब है कि क्या नील ही खूनी हो सकता है जबकि मेरा शक नागेश पर ज़्यादा है।"
"नागेश पर क्यों?"
"क्योंकि वो अकेला नहीं है बल्कि उसके साथ उसकी होने वाली हमसफ़र दिव्या भी है।" नितिन ने जैसे स्पष्ट कहा──"जो उसके हर काम में बराबर की शरीक है। एक बात विशेष रूप से ध्यान देने वाली है कि अब तक जो कुछ भी हुआ है और जिसने भी किया है वो सब किसी एक के बस का तो हर्गिज़ नहीं हो सकता। यानि खूनी अकेला नहीं है बल्कि उसका एक और साथी उसके साथ है। अब अगर वाकई में खूनी हम में से ही कोई है तो वो नागेश ही हो सकता है जिसके पास उसका अपना एक साथी है।"
"समझ गया।" राजवीर ने कहा──"लेकिन सोचने वाली बात है कि अगर वो दोनों ही इस सबके कर्ता धर्ता हैं तो फिर हमारी नज़रों के सामने उन्होंने कप्तान की लाश को कैसे ग़ायब किया होगा, शिप में लीकेज कैसे किया होगा?"
"इन वाहियात पॉइंट्स की बात मत करो यार।" नितिन ने बुरा सा मुंह बना लिया──"इनकी वजह से दिमाग़ अब तक चकरघिन्नी बना हुआ है। मुझे यकीन हो चुका है कि इसका जवाब हम खुद नहीं तलाश कर सकते बल्कि खूनी के बताने पर ही पता चलेगा। ख़ैर, इस वक्त अगर वैभव के खून वाले मामले पर सोचें तो नागेश और दिव्या ही खूनी समझ आते हैं।"
"वो कैसे?"
"ये तो मानते हो न कि वो दोनों एक दूसरे के खिलाफ़ नहीं जा सकते?"
"हां बिल्कुल।"
"ये भी कि दिव्या वही करेगी जो नागेश उसे करने को कहेगा?"
"हां संभव है।"
"तो क्या ये संभव नहीं है कि नागेश के कहने पर दिव्या ने वैभव का खून कर दिया हो?"
"उसने ऐसा कैसे किया होगा?" राजवीर के चेहरे पर हैरानी के साथ साथ सोचने वाले भाव भी उभर आए──"जबकि वैभव से थोड़ी ही दूरी पर नील बैठा था? एक पल के लिए ये मान किया जाए कि नागेश ने किसी के आने जाने पर जान बूझ कर अनभिज्ञता ज़ाहिर की लेकिन नील तो ऐसा नहीं करता न। मतलब वो तो स्पष्ट बता देता कि उसने दिव्या को ऐसा करते हुए देखा था।"
"यार ऐसा तो वो तब कहता जब सच में उसे कोई नज़र आता।" नितिन ने कहा──"अगर खूनी नागेश और दिव्या ही हैं तो वो भला ये कैसे भान करवा सकते थे कि उनमें से किसी को नील ऐसा कुछ करते देख ले?"
"तो फिर वैभव का खून किया कैसे गया होगा?"
"मुझे लगता है दोनों ने पहले ही प्लान बना लिया था।" नितिन ने कहा──"कप्तान और शेखर का खून उन्होंने चाकू से किया था लेकिन अब चाकू से उनके लिए खून करना आसान नहीं था। क्योंकि अब हम सब सतर्क हो चुके थे। इस लिए इस बार उन्होंने ज़हर से अपने शिकार को ख़त्म करने का प्लान बना लिया रहा होगा। नागेश ने दिव्या को समझाया रहा होगा कि अगर किसी दिन पहरा देने की ऐसी सिचुएशन बनती है तो उसे ही काम को अंजाम देना होगा। ऐसा ही हुआ, यानि पिछली रात ऐसी ही सिचुएशन बनी जिसमें नील और वैभव के साथ वो खुद पहरे पर था, जबकि दिव्या हम दोनों की तरह कमरे में। प्लान के अनुसार दिव्या को नील या वैभव में से किसी एक का खून करना था। पिछली रात जब उसने नील को नागेश के साथ बातें करते और वैभव को थोड़ी दूरी पर खंभे से पीठ टिकाए सोते देखा तो उसे लगा वैभव को ख़त्म करना ज़्यादा आसान है। अतः उसने अपने कमरे के अंदर ही दरवाज़े के पास खड़े हो कर ज़हर से बुझी सूई को किसी माध्यम से वैभव पर निशाना लगा कर फेंक दिया। सुई सीधा वैभव की गर्दन में चुभी और ज़हर उसके अंदर चला गया। सुई के चुभने पर यकीनन वैभव को थोड़ा बहुत दर्द हुआ होगा लेकिन क्योंकि वो गहरी नींद में था इस लिए वो जाग न सका और उधर ख़तरनाक ज़हर के असर से वो नींद में ही हमेशा के लिए सो गया। इधर दिव्या अपना काम कर के चुपचाप वापस दरवाज़ा बंद कर के सोने चली गई। उधर नागेश से बात करते नील को भनक तक न लगी होगी कि थोड़े समय में किसने क्या कांड कर दिया है। जबकि नागेश पहले से ही सब जानता था, आख़िर प्लान तो उसी का था। उसे तो अब बस इतना ही करना था कि जब नील को वैभव की मौत का पता चले तो वो भी उसके साथ वैसा ही बिहेव करे जैसा नील करे। अगर नील किसी बात की अनभिज्ञता ज़ाहिर करे तो वो भी यही करे।"
"इंट्रेस्टिंग।" राजवीर ने गहरी सांस ली──"वैभव के खूनी को और उसके प्लान को काफी अच्छे से एक्सप्लेन किया है तुमने। अब सवाल ये है कि क्या वास्तव में यही सच है?"
"क्या तुम्हें अब भी यकीन नहीं हो रहा?" नितिन के चेहरे पर हैरत के भाव उभर आए।
"मेरे यकीन कर लेने से क्या होगा?" राजवीर ने कहा──"इस तरह तो वो लोग भी हमारे बारे में ऐसी ही बातें और ऐसी ही संभावनाएं व्यक्त कर रहे होंगे। बातें बना लेने से और संभावनाएं व्यक्त कर लेने से कोई खूनी साबित नहीं हो जाएगा दोस्त। साबित तब होगा जब या तो खूनी रंगे हाथों पकड़ा जाए या फिर हमारे हाथ उसके खिलाफ़ कोई ठोस सबूत लगे। बाकी तुमने जो थ्योरी व्यक्त की है वैसी बात मेरे ज़हन में पहले ही आ चुकी थी। तभी तो सुबह उस टाइम मैंने सबको अपना अपना बैग चेक करवाने की बात कही थी और बैग चेक भी किए गए थे। मकसद यही था कि अगर वाकई में खूनी हम में से ही कोई है और उसने किसी माध्यम से वैभव को ज़हर दे कर मारा है तो उसके पास इस तरह का ज़हर अथवा औजार ज़रूर होगा। ये अलग बात है कि बैगों की तलाशी में भी हमें कुछ नहीं मिला था। ज़ाहिर है खूनी जो कोई भी था उसने अपने पास से वो जानलेवा हथियार गधे के सींग की तरह ग़ायब कर दिया था।"
"यानि नागेश और दिव्या पर तुम्हें भी शक हुआ था?"
"हां।" राजवीर ने कहा──"और सबूत के लिए ही बैग चेक करवाया था मगर नाकाम रहा।"
"एक बात तो 101% पक्की है कि वैभव का खूनी पिछली रात यहीं पर था।" नितिन ने कहा──"और ये भी पक्की बात है कि वो बाहर से वैभव का खून करने के लिए नहीं आया था। मतलब जो भी हुआ था यहीं पर हुआ था और उतने ही लोगों में से किसी ने किया था।"
"और आज जो नील ने किसी इंसान को देखा उसका क्या?"
"मुझे बिल्कुल भी यकीन नहीं है कि ऐसा कोई व्यक्ति उसे दिखा था।" नितिन ने जैसे स्पष्ट भाव से कहा──"या तो वो झूठ बोल रहा है या फिर सच में उसे वहम हुआ था। खुद सोचो कि खूनी अगर हम में से कोई और होता तो जब वो वैभव का खून करने किले के लिए अंदर इस हिस्से में आता तो क्या वो नील और नागेश को साफ साफ नहीं देखता? यकीनन दिखाई दे जाता राजवीर लेकिन ऐसा नहीं हुआ था। दोनों ने ऐसे किसी व्यक्ति की उस वक्त अनभिज्ञता ही ज़ाहिर की थी। मतलब साफ है कि बाहर का कोई नहीं था, बल्कि अंदर का ही था और वो नागेश और दिव्या ही हो सकते हैं, दैट्स इट।"
छोड़ो, जब तक हमारे हाथ कोई ठोस सबूत नहीं लगता तब तक कुछ नहीं हो सकता।" राजवीर ने गहरी सांस ली──"ख़ैर, चलो अब सोने चला जाए।"
दोनों एक दूसरे को गुड नाइट बोल कर अपने अपने कमरे में सोने चले गए।
To be continued...
Nice update....Update ~ 15
दोपहर से शाम होते होते पांचों ने टापू का कई चक्कर लगा लिया मगर उन्हें वो इंसान कहीं न मिला जिसे नील ने देखा था।
सब बुरी तरह थक चुके थे।
हालत खस्ता हो चुकी थी।
दिव्या ने तो पहले ही हाथ खड़े कर दिए थे कि उससे अब और नहीं चला जाएगा इस लिए नागेश ही उसे सहारा दे कर चलता रहा था।
राजवीर के कहने पर सब किसी तरह समंदर के उस किनारे पर आ गए थे जिस तरफ पेट की भूख मिटाने के लिए केले, खजूर और नारियल के पेड़ थे।
समंदर किनारे रेतीली ज़मीन पर सब के सब ढेर से हो कर पड़ गए थे।
सबकी सांसें उखड़ी हुईं थी।
जाने कितनी ही देर तक सब आँखें बंद किए लेटे रहे।
"हमने बेकार में ही इतनी मेहनत की राजवीर।" नितिन एकाएक अपने पीछे एक पेड़ से पीठ टिका कर बोल पड़ा──"उस इंसान की हमें कहीं झलक तक नहीं मिली जिसे नील ने देखने का दावा किया था।"
"आश्चर्य की बात है कि इस छोटे से टापू का हमने कई बार चक्कर लगाया।" राजवीर भी उठ कर एक पेड़ से अपनी पीठ टिका कर बोला──"अपनी समझ में हमने ऐसी हर उस जगह का मुआयना किया जहां पर उसके होने की सम्भावना हो सकती थी लेकिन हाथ कुछ न लगा। समझ में नहीं आ रहा कि उसे ज़मीन खा गई या आसमान निगल गया?"
"हो सकता है कि मेरी बात नील को बुरी लगे।" नितिन ने रेत पर आँखें बंद किए पड़े नील को देखने के बाद कहा──"मगर अब तो यही लगता है कि नील को सुबह के वक्त सच में किसी इंसान के होने का वहम हुआ था।"
"इतनी खोजबीन के बाद भी किसी इंसान की झलक तक न मिलना तो यही ज़ाहिर करता है।" दिव्या हौले से उठ कर कमज़ोर सी आवाज़ में बोली──"मुझे भी अब यही लगता है कि नील को उस टाइम भ्रम हुआ था।"
"तुम लोग मानो या न मानो।" नील एक झटके में उठ कर तथा झुंझलाते हुए बोला──"मगर सच यही है कि मैंने अपनी आंखों से एक इंसान को झाड़ियों के पीछे खड़े देखा था। मुझे कोई वहम नहीं हुआ था। मैं पागल नहीं हूं जो ऐसा बोल कर तुम सबको परेशान करने का सोचूंगा।"
"अगर वो सच में तुम्हारा वहम नहीं था और तुमने किसी इंसान को ही देखा था।" राजवीर ने कहा──"तो फिर इतना खोजने के बाद भी हमें उसकी झलक तक क्यों नहीं मिली? हमने एक बार नहीं बल्कि तीन तीन बार पूरा टापू घूम लिया और हर उस जगह की तलाशी ली जहां पर उसके होने की उम्मीद थी मगर तुमने देखा न कि कोई भी इंसानी जीव नहीं दिखा हमें?"
"हां देखा मैंने।" नील बेबस भाव से बोला──"मैं खुद हैरान हूं कि ऐसा कैसे हो सकता है? लेकिन मैं क़सम खा कर कहता हूं कि मैंने सच में एक इंसान को देखा था। मुझे क़सम से कोई वहम नहीं हुआ था, प्लीज़ ट्रस्ट मी।"
"मैं ट्रस्ट करना चाहता हूं नील।" राजवीर ने कहा──"लेकिन तुम भी जानते हो कि अंधा ट्रस्ट भला कब तक कर सकता है कोई? हम जिस सिचुएशन में हैं उसमें हर बात का, हर चीज़ का सबूत चाहिए। हमने पूरे टापू का तीन बार चक्कर लगा किया मगर कोई फ़ायदा न हुआ। अरे! कम से कम हमें उसकी झलक ही मिल जाती तो ट्रस्ट करने का एक आधार होता हमारे पास।"
"सही कहा।" नितिन ने सिर हिलाया──"बिना किसी ठोस आधार के भला कब तक कोई किसी बात को सच मान के बैठा रहेगा?"
"अब क्या बोलूं मैं?" नील जैसे हताश हो गया──"जब तुम्हें मुझ पर...यानि अपने दोस्त पर ही यकीन नहीं है तो क्या बोलूं अब? तुम्हें जो ठीक लगे करो, तुम्हें जिस नतीजे पर पहुंचना है पहुंच जाओ।"
"इसमें नाराज़ होने वाली बात नहीं है भाई।" राजवीर ने कहा──"समझने की कोशिश करो। खुद सोचो कि ऐसे हालात में हम आख़िर यही तो सोचेंगे न। अगर तुम हमारी जगह होते तो क्या तुम भी यही नहीं सोचते?"
"मैं नाराज़ नहीं हो रहा राजवीर।" नील ने कहा──"मैं बस हताश हूं...इस लिए कि अपनी बात को साबित करने के लिए मेरे पास कोई सबूत नहीं है। काश! तुम लोगों की भी उस टाइम उस नामुराद पर नज़र पड़ गई होती तो ये नौबत ही नहीं आती।"
थोड़ी देर और इसी संबंध में बातें हुईं उसके बाद राजवीर के ये कहने पर सब उठ गए कि शाम होने वाली है इस लिए रात के खाने के लिए खाने का सामान जल्द से जल्द इकट्ठा कर लिया जाए।
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रात के साढ़े नौ बज रहे थे।
नील, नागेश और दिव्या किले के दूसरे हिस्से वाले कमरों में सोने जा चुके थे जबकि राजवीर और नितिन पहले वाले हिस्से में अभी भी आग के पास बैठे बातें कर रहे थे।
"क्या लगता है तुम्हें?" नितिन ने अपने सामने आग के उस पार एक चौकोर पत्थर पर बैठे राजवीर से कहा──"क्या सच में नील ने किसी इंसान को देखा रहा होगा या ऐसे किसी इंसान का ज़िक्र कर के उसने हमें उलझाने की कोशिश की है?"
"कुछ समझ नहीं आ रहा।" राजवीर ने एक सूखी लकड़ी आग में रखते हुए कहा──"दिमाग़ दो हिस्सों में बंट गया है। एक मन कहता है कि उसने सच में किसी इंसान को देखा होगा और दूसरा मन कहता है कहीं वो हम सबको उलझा तो नहीं रहा?"
"मतलब तुम्हें भी कहीं न कहीं ये लगता है कि वो हमें उलझाने की कोशिश कर रहा है?"
"हां।"
"ऐसा भला क्यों करेगा वो?"
"अगर वो खूनी है तो उसकी कोशिश हमें उलझाने की ही तो होगी।" राजवीर ने कहा──"मत भूलो कि पिछली रात जो कुछ हुआ है उसके चलते उस पर और नागेश पर ये इल्ज़ाम लगा कि उन दोनों की वजह से वैभव का खून हुआ। हमने खुल कर भले ही नहीं कहा लेकिन वो तो यही समझे होंगे कि वैभव की इस तरह हुई हत्या से हम उन्हें ही खूनी समझ बैठे होंगे। ऐसे में खूनी होने से खुद को बचाने के लिए वो ऐसी कोई तरकीब निकाल कर हमें ये समझाने की कोशिश तो करेंगे ही कि खूनी वो नहीं बल्कि कोई और ही है।"
"बात तो ठीक है तुम्हारी।" नितिन ने कहा──"लेकिन नील ही क्यों? मेरा मतलब है कि क्या नील ही खूनी हो सकता है जबकि मेरा शक नागेश पर ज़्यादा है।"
"नागेश पर क्यों?"
"क्योंकि वो अकेला नहीं है बल्कि उसके साथ उसकी होने वाली हमसफ़र दिव्या भी है।" नितिन ने जैसे स्पष्ट कहा──"जो उसके हर काम में बराबर की शरीक है। एक बात विशेष रूप से ध्यान देने वाली है कि अब तक जो कुछ भी हुआ है और जिसने भी किया है वो सब किसी एक के बस का तो हर्गिज़ नहीं हो सकता। यानि खूनी अकेला नहीं है बल्कि उसका एक और साथी उसके साथ है। अब अगर वाकई में खूनी हम में से ही कोई है तो वो नागेश ही हो सकता है जिसके पास उसका अपना एक साथी है।"
"समझ गया।" राजवीर ने कहा──"लेकिन सोचने वाली बात है कि अगर वो दोनों ही इस सबके कर्ता धर्ता हैं तो फिर हमारी नज़रों के सामने उन्होंने कप्तान की लाश को कैसे ग़ायब किया होगा, शिप में लीकेज कैसे किया होगा?"
"इन वाहियात पॉइंट्स की बात मत करो यार।" नितिन ने बुरा सा मुंह बना लिया──"इनकी वजह से दिमाग़ अब तक चकरघिन्नी बना हुआ है। मुझे यकीन हो चुका है कि इसका जवाब हम खुद नहीं तलाश कर सकते बल्कि खूनी के बताने पर ही पता चलेगा। ख़ैर, इस वक्त अगर वैभव के खून वाले मामले पर सोचें तो नागेश और दिव्या ही खूनी समझ आते हैं।"
"वो कैसे?"
"ये तो मानते हो न कि वो दोनों एक दूसरे के खिलाफ़ नहीं जा सकते?"
"हां बिल्कुल।"
"ये भी कि दिव्या वही करेगी जो नागेश उसे करने को कहेगा?"
"हां संभव है।"
"तो क्या ये संभव नहीं है कि नागेश के कहने पर दिव्या ने वैभव का खून कर दिया हो?"
"उसने ऐसा कैसे किया होगा?" राजवीर के चेहरे पर हैरानी के साथ साथ सोचने वाले भाव भी उभर आए──"जबकि वैभव से थोड़ी ही दूरी पर नील बैठा था? एक पल के लिए ये मान किया जाए कि नागेश ने किसी के आने जाने पर जान बूझ कर अनभिज्ञता ज़ाहिर की लेकिन नील तो ऐसा नहीं करता न। मतलब वो तो स्पष्ट बता देता कि उसने दिव्या को ऐसा करते हुए देखा था।"
"यार ऐसा तो वो तब कहता जब सच में उसे कोई नज़र आता।" नितिन ने कहा──"अगर खूनी नागेश और दिव्या ही हैं तो वो भला ये कैसे भान करवा सकते थे कि उनमें से किसी को नील ऐसा कुछ करते देख ले?"
"तो फिर वैभव का खून किया कैसे गया होगा?"
"मुझे लगता है दोनों ने पहले ही प्लान बना लिया था।" नितिन ने कहा──"कप्तान और शेखर का खून उन्होंने चाकू से किया था लेकिन अब चाकू से उनके लिए खून करना आसान नहीं था। क्योंकि अब हम सब सतर्क हो चुके थे। इस लिए इस बार उन्होंने ज़हर से अपने शिकार को ख़त्म करने का प्लान बना लिया रहा होगा। नागेश ने दिव्या को समझाया रहा होगा कि अगर किसी दिन पहरा देने की ऐसी सिचुएशन बनती है तो उसे ही काम को अंजाम देना होगा। ऐसा ही हुआ, यानि पिछली रात ऐसी ही सिचुएशन बनी जिसमें नील और वैभव के साथ वो खुद पहरे पर था, जबकि दिव्या हम दोनों की तरह कमरे में। प्लान के अनुसार दिव्या को नील या वैभव में से किसी एक का खून करना था। पिछली रात जब उसने नील को नागेश के साथ बातें करते और वैभव को थोड़ी दूरी पर खंभे से पीठ टिकाए सोते देखा तो उसे लगा वैभव को ख़त्म करना ज़्यादा आसान है। अतः उसने अपने कमरे के अंदर ही दरवाज़े के पास खड़े हो कर ज़हर से बुझी सूई को किसी माध्यम से वैभव पर निशाना लगा कर फेंक दिया। सुई सीधा वैभव की गर्दन में चुभी और ज़हर उसके अंदर चला गया। सुई के चुभने पर यकीनन वैभव को थोड़ा बहुत दर्द हुआ होगा लेकिन क्योंकि वो गहरी नींद में था इस लिए वो जाग न सका और उधर ख़तरनाक ज़हर के असर से वो नींद में ही हमेशा के लिए सो गया। इधर दिव्या अपना काम कर के चुपचाप वापस दरवाज़ा बंद कर के सोने चली गई। उधर नागेश से बात करते नील को भनक तक न लगी होगी कि थोड़े समय में किसने क्या कांड कर दिया है। जबकि नागेश पहले से ही सब जानता था, आख़िर प्लान तो उसी का था। उसे तो अब बस इतना ही करना था कि जब नील को वैभव की मौत का पता चले तो वो भी उसके साथ वैसा ही बिहेव करे जैसा नील करे। अगर नील किसी बात की अनभिज्ञता ज़ाहिर करे तो वो भी यही करे।"
"इंट्रेस्टिंग।" राजवीर ने गहरी सांस ली──"वैभव के खूनी को और उसके प्लान को काफी अच्छे से एक्सप्लेन किया है तुमने। अब सवाल ये है कि क्या वास्तव में यही सच है?"
"क्या तुम्हें अब भी यकीन नहीं हो रहा?" नितिन के चेहरे पर हैरत के भाव उभर आए।
"मेरे यकीन कर लेने से क्या होगा?" राजवीर ने कहा──"इस तरह तो वो लोग भी हमारे बारे में ऐसी ही बातें और ऐसी ही संभावनाएं व्यक्त कर रहे होंगे। बातें बना लेने से और संभावनाएं व्यक्त कर लेने से कोई खूनी साबित नहीं हो जाएगा दोस्त। साबित तब होगा जब या तो खूनी रंगे हाथों पकड़ा जाए या फिर हमारे हाथ उसके खिलाफ़ कोई ठोस सबूत लगे। बाकी तुमने जो थ्योरी व्यक्त की है वैसी बात मेरे ज़हन में पहले ही आ चुकी थी। तभी तो सुबह उस टाइम मैंने सबको अपना अपना बैग चेक करवाने की बात कही थी और बैग चेक भी किए गए थे। मकसद यही था कि अगर वाकई में खूनी हम में से ही कोई है और उसने किसी माध्यम से वैभव को ज़हर दे कर मारा है तो उसके पास इस तरह का ज़हर अथवा औजार ज़रूर होगा। ये अलग बात है कि बैगों की तलाशी में भी हमें कुछ नहीं मिला था। ज़ाहिर है खूनी जो कोई भी था उसने अपने पास से वो जानलेवा हथियार गधे के सींग की तरह ग़ायब कर दिया था।"
"यानि नागेश और दिव्या पर तुम्हें भी शक हुआ था?"
"हां।" राजवीर ने कहा──"और सबूत के लिए ही बैग चेक करवाया था मगर नाकाम रहा।"
"एक बात तो 101% पक्की है कि वैभव का खूनी पिछली रात यहीं पर था।" नितिन ने कहा──"और ये भी पक्की बात है कि वो बाहर से वैभव का खून करने के लिए नहीं आया था। मतलब जो भी हुआ था यहीं पर हुआ था और उतने ही लोगों में से किसी ने किया था।"
"और आज जो नील ने किसी इंसान को देखा उसका क्या?"
"मुझे बिल्कुल भी यकीन नहीं है कि ऐसा कोई व्यक्ति उसे दिखा था।" नितिन ने जैसे स्पष्ट भाव से कहा──"या तो वो झूठ बोल रहा है या फिर सच में उसे वहम हुआ था। खुद सोचो कि खूनी अगर हम में से कोई और होता तो जब वो वैभव का खून करने किले के लिए अंदर इस हिस्से में आता तो क्या वो नील और नागेश को साफ साफ नहीं देखता? यकीनन दिखाई दे जाता राजवीर लेकिन ऐसा नहीं हुआ था। दोनों ने ऐसे किसी व्यक्ति की उस वक्त अनभिज्ञता ही ज़ाहिर की थी। मतलब साफ है कि बाहर का कोई नहीं था, बल्कि अंदर का ही था और वो नागेश और दिव्या ही हो सकते हैं, दैट्स इट।"
छोड़ो, जब तक हमारे हाथ कोई ठोस सबूत नहीं लगता तब तक कुछ नहीं हो सकता।" राजवीर ने गहरी सांस ली──"ख़ैर, चलो अब सोने चला जाए।"
दोनों एक दूसरे को गुड नाइट बोल कर अपने अपने कमरे में सोने चले गए।
To be continued...