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रात की सर्दी गहरा रही थी और साथ ही अनुज के देह की थकान भी
राज के कमरे में फुसफुसाहट अभी भी जारी थी , थोड़ी बहुत हसने की और ज्यादा तर रागिनी की खनकती हंसी
अनुज को भूख लगी थी और चुपचाप किचन में चला गया
चार पांच मुठ्ठी मूंगदाल वाली नमकीन , 3 4 कुरकुरे बिस्किट चबाने के बाद वो पानी पी रहा था बॉटल से
तभी हाल में पायलों की खनक तेज हुई
जैसे जैसे पायलों की रुनझुन उसके कानो में तेज हो रही थी , एक बेचैनी एक हड़बड़ाहट अनुज के भीतर बढ़ रही थी और वो तेजी पानी बॉटल से सीधे गले में उतार रहा था
तभी एकदम से उसे अपने पीछे आहट महसूस हुई पलट कर देखा तो सामने उसकी मां रागिनी खड़ी थी , उसके ख्यालों की मल्लिका की तरह निर्वस्त्र , देह पर बस एक पैंटी , वही पैंटी जो उसने राज के पास जाने से पहले अपने कमरे में अनुज के सामने उतार फेंकी थी
अनुज अपना मुंह फुलाए आंखे बड़ी कर चौकन्नी निगाहों से अपनी नंगी मां को अपने सामने ऊपर से नीचे देख रहा था , उसकी बड़ी बड़ी रसीली नंगी छातियां , गोरा बदन, गुदाज मुलायम पेट , चौड़ी घुमावदार कमर , उठे हुए चर्बीदार कूल्हे और चिकनी गदराई जांघें और वो पैंटी जिसमें रागिनी की फूली हुई चूत साफ नजर आ रही थी
अनुज की नजर अपनी मां की पैंटी पर जम गई , सीईईई एक पल के लिए चुक गया , कमरे में होता तो मां की नंगी बुर के दर्शन हो जाते
देह अंदर से चूर चूर हुआ था लेकिन लंड वापस से लोवर में सलामी देने के लिए तैयार खड़ा था
रागिनी उसकी निगाहों का पीछा कर अपनी नंगी छातियो को हाथों से ढक लिया और मुस्कुरा कर : यहां क्या कर रहा है तू
: मै तो पानी पीने आया था और आप ?
रागिनी मुस्कुरा कर उसे देख रही थी और उसके नंगे तलुओं से सर्दी उसके पूरे बदन में फैल रही थी
: मै भी पानी लेने आई हूं
: तो लेलो !!
अनुज बोटल देकर आगे बढ़ा
दोनों की नजरे मिली , मानो दोनों कुछ चाहते थे
: क्या कर रहा है
: बस थोड़ा हग
: पागल आजा, मेरा बच्चा
रागिनी ने नंगे ही आगे बढ़ कर उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसकी नंगी चूचिया अनुज के सीने पर चिपक गई
अपनी मां की नंगी पीठ को सहलाने का मौका नहीं छोड़ने वाला था अनुज
: उम्मम तेरे हाथ बहुत ठंडे है बेटा
: और आप बहुत गर्म हो मम्मी ओह्ह्ह्ह , कितनी मुलायम हो आप
: उम्मम क्या कर रहा है पागल ओह्ह्ह छोड़ न
: सीईईई करने दो न मम्मी मुझे भी , मै भी बड़ा हो गया हूं
: अच्छा सच में अह्ह्ह्ह तो क्या अब तू मेरे चूतड़ों को सहलाएगा अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह बेटा
: मै तो इन्हें ऐसे फैलाऊंगा भी ओह्ह्ह्ह कितनी मोटी गाड़ है मम्मी आपकी बहुत सेक्सी
अनुज अपनी मां को हग कर अपने नंगे पंजे रागिनी के नंगे चूतड़ों को टहलाने लगा
: धत् बदमाश ऐसे गंदे गंदे बोलेगा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ये क्या है ?
: नुनु मेरा उम्ममम ( अनुज ने रागिनी की उंगलियों को अपने लंड के पास सरकते महसूस कर बोला )
: कितना टाइट है ओह्ह्ह्ह
: आपको और भइया को देख कर अह्ह्ह्ह सीईईईईई मम्मीइई ओह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है
: क्यों ?
: कबसे खड़ा है न इसीलिए
: चल झूठा , दरवाजा गीला किया तब भी छोटा नहीं हुआ तेरा उम्मम
: हीही ( अनुज शर्माने लगा जब रागिनी ने उसको चोरी पकड़ी)
: इसको नीचे कर थोड़ा आराम मिलेगा ( ये बोलकर रागिनी ने उसका लोवर नीचे सरकाते हुए बैठ गई और अनुज को एक उम्मीद सी उठने लगी )
: ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई उम्मम ( अनुज का लंड उसके अंडरवियर में अब फूल रहा था और रागिनी भी साफ साफ देख रही थी )
: कैसे सांस ले रहा है ये तो ( रागिनी ने उंगलियों से छू कर उसे अंडरवीयर के ऊपर से सहलाया )
: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह आराम से मम्मीइई ओह्ह्ह्ह
रागिनी के नंगे घुटने पर ठंडी फर्श की टाइल चुभ रही थी और उसका पूरा जिसम ठंडा पड़ रहा था , वो समझ रही थी कि उसका लाडला बहुत बेचैन है और उसे तत्काल आराम की जरूरत है
रागिनी उठ गई
: क्या हुआ ? ( टूटती निराशा में उम्मीद बांध कर वो बोला )
: चल !!
: कहा ?
रागिनी कुछ नहीं बोली और वैसे ही नंगी अनुज का हाथ पकड़ अपने कमरे की ओर बढ़ गई
अनुज का लोवर अभी भी उसके घुटनों में फंसा हुआ था , किसी तरह वो फंसता अटकता रागिनी की उंगलियों को थामे वो उसके कमरे तक आया
अपने आगे अपनी मां की नंगी थिरकती चूतड़ों को निहारते हुए
रागिनी कमरे आई और फिर कमरे का दरवाजा लगा दिया
: चल इसको निकाल कर लेट जा
अनुज को समझ नहीं आया कि आखिर उसकी मां ने उसको सोने के लिए कहा कि उसका इरादा कुछ और है
डर यही था कि आंखे बंद कर सो जाने का फरमान न हो जाए
रागिनी ने अनुज के टीशर्ट और लोवर निकाल कर सिर्फ अंडरवियर में होने की राह देखी और जब वो कम्बल के गया तो खुद भी उसके पास आ कर उसके बराबर में लेट गई करवट होकर
थोड़ी देर उसने अनुज को शांत और अपनी ओर घूरते देखा , फिर मुस्कुराई और अनुज की थोड़ा चिढ़ गया और भुनकने लगा
: उम्हू करो न
: क्या करूं ( रागिनी मुस्कुराई )
: सच में दर्द हो रहा है
: कहा ? यहां !! ( रागिनी ने हाथ आगे कर उसके अंडरवियर में बने बड़े से तंबू को सहला कर कहा )
: ओह्ह्ह्ह हा वही उसको बाहर निकाल दो
: तू न राज से भी बढ़ कर है , ओह्ह्ह देखो तो कितना टाइट कर रखा है । कितना बदमाश है तू दरवाजा खुलवाने के लिए कितना तिगड़म लगाया तूने उम्मम
: आह्ह्ह्ह सीई तो आपने बंद क्यों किया था
: मैने नहीं , राज ने किया था ओह्ह्ह देखो तो कैसे लाल हो रखा है सीईईई ओहो कबसे रगड़ रहा था तू इसे उम्मम ( रागिनी हौले हौले अनुज का लाल हुआ लंड आगे पीछे कर रही थी )
: जबसे आप गए तबसे , ओह्ह्ह्ह कितना मन था मेरा देखने का , दरवाजा बंद था तो सब कुछ सोचने लगा था
एक पल को रागिनी ठहरी और उसे भी जिज्ञासा हुई कि अनुज क्या सोच रहा था उसके बारे में : क्या सोच रहा था उम्मम बोल ( रागिनी ने उसका सुपाड़ा खोलते हुए बोली )
: ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई अह्ह्ह्ह सीईईईईई उफ्फफ उम्ममम
: बोल न , क्या सोच रहा था अनुज एक नजर रागिनी को देखा फिर मुस्कुराने लगा
: अच्छा सच सच बताना , भैया आपकी साड़ी हटा कर दूध पी रहा था न ( अनुज ने मासूमियत से पूछा )
: हम्ममम ( रागिनी मुस्कुरा कर बस हुंकारी भरी और अनुज का लंड उसके हथेली में फुदका )
: मुझे लगा ही था
: और क्या सोच रहा था
रागिनी के लंड को सहलाते हुए बोली
: फिर भैया की आवाज आ रही थी और उसे सुनकर लगा कि आप भैया का चूस रहे होगे
: हम्ममम तो गीला करना पड़ता है न ( रागिनी ने थोड़ा सा मौका दिया आगे आने का )
: हम्ममम फिर आपको देखा दरवाजे से आप भइया का मुंह में ले रहे थे और भैया आपका गाड़ छू रहा था
रागिनी अनुज को बोले जा रहे एक एक शब्द में उसके लंड की नसों की पंपिंग महसूस कर रही थी अपनी हथेली में
: हा तो दुकान पर तेरा भी तो किया था न ,
: हम्ममम लेकिन आपको देख कर मेरा भी मन किया कि मै भी अंदर आजाऊँ और आप मेरा भी चूसो साथ में
: क्या साथ में !!! पागल है क्या ?
: क्यों ? साथ में नहीं कर सकती हो ( मन ही मन अब अनुज के दिल में एक नई कल्पना ने अपनी जगह बना ली थी और उसे सोच कर उसका लंड फनकार मारने लगा )
: तू ज्यादा नहीं सोच रहा था ( रागिनी ने अनुज के लंड की बढ़ती मोटाई को अपने पंजों में महसूस किया )
: उम्मम तो क्या हुआ , आप कर लोगे मुझे पता है ? अह्ह्ह्ह सीईईईईई मम्मी सहलाओ न कस के
: दर्द होगा तो ?
: अब नहीं हो रहा है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह मम्मीइई आपका हाथ बहुत सॉफ्ट है उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई
रागिनी बस शांति से उसका लंड सहलाने लगी
: मम्मी ?
: हम्ममम !!
: बोलो न !
: क्या ?
: चूसोगे मेरा और भैया का साथ में ( अनुज के लंड की नसे अब फूल गई थी और खून मानो में उसके लंड में भर आया या , रागिनी उसके लंड की गर्मी महसूस कर रही थी )
उसके दिल की धड़कने तेज हो गई और उसके दिल में भी इच्छा होने लगी , अनुज के दिखाए सपने उसके जहन में घर करने लगे , उसने कस कर भींच लिया अनुज एक लंड और सहलाने लगी
: बोलो न मम्मीईईई ओह्ह्ह्ह प्लीज जल्दी ओह्ह्ह्ह
: लेकिन मैने कभी किया नहीं बेटा , राज ने कितनी बार मुझे तेरे पापा के बगल में चोदा है , लेकिन कभी मैने साथ में नहीं किया दोनों के
: ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई तो क्या हुआ एक बार ट्राई करो न प्लीज मेरे लिए ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह मम्मी प्लीज न
: उम्मम ठीक है
: ओह्ह्ह्ह कब करोगी मम्मीइई ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह बोलो न जल्दी उम्मम बताओ न जल्दी ओह्ह्ह्ह आएगा मेरा बोलो न मम्मी
: कल
: ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह आ रहा है ओह्ह्ह्ह हिलाओ उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह
एक बाद एक मोटी थक्केदार गाढ़ी पिचकारियां छूटने लगी और अनुज का लंड वीर्य उगलने लगा और झड़ता रहा अपने ही पेट और और रागिनी उसके लंड को निचोड़ती रही
एक ओर जहां रागिनी अगली सुबह दो लंड एक साथ लेने सपने संजो रही थी
वही दूसरी ओर शहर की सुनसान रातों में रज्जो उस सपने को हकीकत में बुनने जा रही थी
खुशबू का मोटा लंबा लंड उसकी गाड़ की सुराख को चौड़ी करता हुआ उसे करवट कर पेले जा रहा था
रज्जो की कामुक चीखे पूरे कमरे में गूंज रही थी
वही कमरे के दरवाजे पर खड़ी मुस्कान का लंड अकड़ कर फूल रहा था
रज्जो की नजर उस पर पड़ी और मुस्कुराकर उसने मुस्कान को अपनी ओर बुलाया
मुस्कान जल्दी ही अपने कपड़े निकाल कर अपनी पैंटी से अपना लंड बाहर निकालती हुई रज्जो के मुंह के पास खड़ी हो गई
रज्जो जो पीछे से अपनी गाड़ में खुशबू के करारे झटके खा रही थी वो मुंह खोलकर मुस्कान का सुपाड़ा मुंह में पकड़ने की कोशिश करने लगी तो मुस्कान ने खुद अपना लंड को उसके होठों तक ले गई , रेंज में आते ही रज्जो ने जीभ आगे बढ़ा कर उसके सुपाड़े को होठों में दबोच लिया
: ओह्ह्ह्ह सेठानी जी उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई
अब तो रज्जो को बहुत मस्कत की जरूरत नहीं थी , पीछे से खुशबू चिंघाड़ कर रज्जो की गाड़ में तगड़े झटके मार रहा था और रज्जो के मुंह में खुद ब खुद मुस्कान का लंड गले तक जाने
: ओह्ह्ह्ह यशस्स उम्ममम और डाल साली कुतीया का मुंह भर दे पूरा ओह्ह्ह्ह सीईईई साली क्या रसीली गद्देदार गाड़ है तेरी ओह्ह्ह बहनचोद उम्ममम खूब उछाल रही है ओह्ह्ह और अंदर डाल में मादरचोद
खुशबू ने मुस्कान को डाटा तो मुस्कान ने रज्जो का सर पकड़ कर उसके मुंह में पेलने लगी
: ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई और चूस सेठानी उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह पी जा उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह
मुस्कान रज्जो के मुंह में लगातार पेले जा रही थी
: रुक साली को इसके गाड़ का स्वाद चखाती हूं आजा मेरी रांड ले चूस इसे भी ओह्ह्ह्ह ले उफ्फ बहनचोद क्या माल है तू ओह्ह्ह्ह मेरी रंडी ले ओह्ह्ह्ह उम्ममम ऐसे ही ओह्ह्ह
नीचे रज्जो बड़े चाव से अपने चूतड़ों से निकले खुशबू के लंड को चूस रही थी और बारी बारी से मुस्कान को भी बराबर समय दे रही थी
वही ऊपर खुशबू ने मुस्कान के चूचे पकड़ कर उसके लिप्स चूसने लगी थी और दोनों का चुम्बन काफी तेज था
मुस्कान जिस आस से खुशबू को बुलाई थी उसके पूरे होने का समय आ गया था
उसने रज्जो के सामने आकर अपना लंड रज्जो की बुर में उतार दिया और पेलने लगी
एक बार फिर रज्जो की सिसकिया कमरे में उठने लगी
इधर खुशबू भी मुस्कान के पीछे होकर अपने सुपाड़े को लार से चमकाने लगी थी
उसके पंजे पर मुस्कान की तेजी से ऊपर नीचे होती चिकनी गाड़ पर चल रहे थे
और मुस्कान समझ गई कि असल बेला आ गई है , फिर वो हल्की हो गई , रज्जो को समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है , उसके बुर में तलहका मचा था , उसे लंड के घर्षण की जरूरत थी , उसने मुस्कान को जोश दिलाने के लिए उसकी झूलती चुचियों को पीने लगी और काटने लगी , मुस्कान मचल उठी लेकिन फिर वो स्थिर हो गई जब खुशबू ने ने थूक लेकर मुस्कान के गाड़ के सुराख को छुआ
मुस्कान का पूरा बदन गिनगिना उठा , उसके लंड की नसों में नई ऊर्जा उठने लगी थी, रज्जो को अपनी बुर की फांकों में वो फैलाव महसूस होने लगा
: अह्ह्ह्ह आराम से राजा उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई हाय हाय फाड़ देगी क्या उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ( ये सिसकी मुस्कान की थी जिसके कसे गाड़ की सुराख में खुशबू अपना मोटा सुपाड़ा घुसा चुकी थी )
: चुप बहनचोद ओह्ह्ह्ह बड़ी टाइट गाड़ है तेरी , किसी ने ली नहीं क्या उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई साली ओह्ह्ह्ह उम्ममम कितना ज्यादा कसा है ( खुशबू ने मुस्कान के गाड़ की गहराई नापने लगा )
जैसे जैसे खुशबू मुस्कान के गाड़ में चढ़ कर लंड अंदर घुसेड़ रही थी ,वैसे ही ठीक नीचे मुस्कान का लंड रज्जो की बुर में गहराई में जाने लगा
रज्जो और मुस्कान दोनों की आंखे बड़ी होने लगी , मुंह खुलने लगा और पहले कमरे में मुस्कान की कर्कश चीखे पूरे कमरे को हिलाने , फिर जब खुशबू ने पूरी ताकत से उसके गाड़ पर चढ़ कर हमचना शुरू किया तो मुस्कान का लंड और फूलता हुआ रज्जो की बुर की फांकों को चीरने लगा और जड़ में जाने लगा
अब सब खुशबू एक धक्के मारती , मुस्कान और रज्जो साथ में चीखते
।
: ओह्ह्ह सीईईई बहनचोद तुम दोनों की गाड़ मारूंगी आज ओह्ह्ह्ह चीखों रंडियों ओह्ह्ह्ह उम्ममम उम्मम
: अह्ह्ह्ह मेरे राजा मारो फाड़ दो मेरी गाड़ ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह रुकना मत मजा आ रहा है
: हा खुशबू पेल और कसके उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई अह्ह्ह्ह इसका मूसल मेरे चूत में भाले जैसा चल रहा है ओह्ह्ह्ह ऐसा मजा मैने कभी नहीं किया ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह मै तो ये देख कर ही झड़ रही हूं उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई रुकना मत पेलो ओह्ह्ह्ह
खुशबू भी ताबड़तोड़ पेलाई करने लगा
: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह पेलो राजा आयेगा मेरा भी ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई
: ओह्ह्ह मेरा भी आयेगा ओह्ह्ह भर दूंगी तेरी गाड़ अपने माल से ओह्ह्ह्ह फिर इस रंडी से चुसवाऊंगी ओह्ह्ह बोल बहनचोद चुसेगी
: अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह्ह लाओ जल्दी ओह्ह्ह्ह मै तो पूरी मलाई चाट जाऊ उम्मम मुझे भी चाहिए ओह्ह्ह
: लें बहनचोद ओह्ह्ह्ह गॉड उम्ममम
: ओह्ह्ह सीईईई आ मेरे राजा मै भी गई
: उम्मम मेरा तो दुबारा हो रहा है ओह्ह्ह्ह ( रज्जो बोली)
तीनों एक साथ इस रोमांचक चुदाई में झड़ रहे थे
रज्जो के साथ उसकी बुर में मुस्कान और मुस्कान की गाड़ में खुशबू
फिर तीनों वैसे ही नंगे चिपक कर थक कर सो गए
ये लोग तो सो गए लेकिन चमनपुरा में अभी भी अनुज के आंखों से नीद गायब थी
सुबह से चौथी बार झड़ने के बाद भी उसके भीतर की वासना आज बैठने का नाम नहीं ले रही थी ,देह में सुस्ती बढ़ने लगी थी लेकिन अपनी नंगी सोई हुई मां के पास सोने का ख्याल उसकी आंखों से नीद गायब किए हुए था ।
रागिनी उसकी ओर पीठ कर करवट लेकर चादर ओढ़े हुए नंगी ही वैसे पैंटी में सोई थी
अनुज की एक जांघ अभी भी उसके नंगे मुलायम गर्म चर्बीदार चूतड़ों पर टिकी थी और शायद वही वजह थी कि अनुज अभी भी अपने मा के जिस्म की नर्माहट महसूस कर रहा था , लेकिन लंड का बुरा हाल था ... इतनी खस्ता हालत उसकी कभी भी नहीं हुई , और इतना बार तो कभी पहले झड़ा भी ... शिवाय सोनल की शादी के बाद जब उसने अपने भैया के साथ मिल कर अपनी मौसी और बुआ को एक साथ
चोदा था सुबह ने 04 बजे तक , याद नहीं कितनी बार झड़ा रहा होगा अनुज ।
मन ही मन हिम्मत जुटा रहा था वो क्योंकि इससे बेहतर मौका अब उसे नहीं मिलने वाला था
कलेजा मजबूत कर उसने अपनी मां की ओर करवट हो लिया और सरक कर जांघों से जांघें सटा ली, पेट सीधा रागिनी की कमर पर और सीना पीठ पर , हाथ आगे कर पेट पर
रागिनी ने कुनमुना उसकी बाह अपनी ओर खींच ली, नतीजा अनुज का खड़ा टाइट लंड सीधा रागिनी के नंगी चूतड़ों के दरारों में चिपक गया नीचे की ओर मुंह किए
अनुज का लंड लोहे की तरह तप रहा था और रागिनी के जिस्म में भी आग दहक रही थी , जल्द ही दोनों के बदन की गर्मी बढ़ने लगी , दोनों के सटे हुए अंग में चिपचिपाहट होने लगी और लंड एकदम फड़फड़ाने लगा
: अनुज !! क्या कर रहा है सो जा अब
: सो ही तो रहा हूं
: फिर ये क्या है ? उम्मम मार खायेगा अब समझा
( कितना भी दुलार ले , खुल कर बातें कर ले , प्यार कर ले लेकिन अपनी मां होने जगह रागिनी ने अनुज के लिए कभी नहीं त्यागी , उसकी नादानियों पर अभी वो उसे डांट लगाने से परहेज नहीं कर रही थी )
: कुछ भी तो नहीं कर रहा हूं ( ये बोलकर अनुज ने अपने हाथ आगे कर रागिनी की नंगी चूचियों को हथेली में भर लिया और अपना लंड रागिनी के गाड़ की कसी दरारों में रगड़ने लगा )
: सीईईई ओह्ह्ह धत्त छोड़ , पीछे हट मार खायेगा अब तंग मत कर , कितना करेगा? सुबह से 04 बार हुआ न तेरा ? तबियत खराब हो जाएगा बेटा!! ( थोड़ी नाराज फिर एकदम से प्रेम और फिकर में बोली रागिनी )
: बस एक बार ऐसे ही डाल के सो जाऊंगा , पक्का
: धत्त नहीं
: क्यों पापा नहीं सोते है क्या डाल के
: हीही पागल है क्या तू , डाल के कौन सोता है
: मै सोऊंगा अब से , निकालो न इसे अह सीई ( अनुज रागिनी कच्छी खींचने लगा )
: नहीं अनुज मार खायेगा अब छोड़ उसे , देखो तो बदमाश को अह्ह्ह्ह नहीं रुक न ( रागिनी पूरी कोशिश नहीं कर रही थी , उसे तो अपने लाडले के स्टैमिना पर बड़ा गर्व था कि दुपहर से 04 बार झड़ने के बाद गजब का कड़कपन है उसके लंड में )
:बस निकल गया , पैर ऊपर करो
कर ली अनुज ने अपनी मनमानी और रागिनी ने खुद से अपनी टांगे उठा कर पैंटी निकाल दी और निकालते हुए अनुज के अपना लंड उसके गाड़ के सकरे दरखतों में पेल दिया
: ओह्ह्ह्ह सीई पागल सुखा है वहां कहा डाल रहा है ओह्ह्ह्ह , रुक !!! ( शायद रागिनी ने अपने गाड़ की सुराख की चमड़ी में खिंचाव महसूस किया था अनुज के लंड से और वो अनुज को डांट लगाई )
फिर रागिनी ने अपने मुंह से लार लेकर हाथ पीछे से गई और अनुज का सुपाड़ा पकड़ के उसे मिजने लगी
: ओह्ह्ह्ह यशस्स मम्मीइई ओह्ह्ह्ह उम्ममम
: अब जो करना है कर ( रागिनी ने अपने चूतड़ ऊपर कर अनुज के लंड के लिए अपने चूत की सही पोजीशन दे दी )
: थोड़ा खोलो न ( अनुज ने रागिनी जांघें चादर के अंदर की हाथ डाल कर थोड़ा चूत के फांकों के पास गैप बनाया ताकि उसका लंड सही जगह पहुंच सके )
: सीईईई ओह्ह्ह आराम से नाखून चुभ रहा है तेरा पागल उम्मम हा वही है अह्ह्ह्ह सीईईई नहीं आगे चला गया , थोड़ा पीछे से ऊपर हा हा उम्ममम धीरे नहीं तो मारूंगी अभी अह्ह्ह्ह मम्मीइई कितना टाइट है तेरा सीईईई ओह्ह्ह्ह
फाइनली अपनी मां की गाइडेंस में अनुज का सुपाड़े रागिनी के बुर के फांकों में नीचे से दाखिल हो गया था और वहा की पिघलती गर्मी उसे अपने सुपाड़े पर महसूस हो रही थी
: ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई ओह्ह्ह्ह कितना जल रहा है सीई ओह्ह्ह्ह
अनुज अपने हाथ टटोल कर आगे वापस से अपनी मां की नंगी चूचियों पर ले गया और लंड को थोड़ा दबाव देकर और अंदर ठेला
ऊपर चुचियों पर अनुज की उंगलियां तो नीचे बुर में आडा टेडा घुसता उसका लंड , सिसक पड़ी रागिनी
: उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह हल्के हल्के बेटा उम्ममम कितना अंदर ले जाएगा
: उम्मम पूरा ले जाऊंगा मम्मी ओह्ह्ह्ह कितनी गर्म और सॉफ्ट है आपकी बुर ओह्ह्ह्ह और आपकी गाड़ कितनी मुलायम है ओह्ह्ह्ह मजा आ रहा है मम्मी सच में उम्ममम और आपको ?
: उम्मम हा बेटा अह्ह्ह्ह्ह अच्छा लग रहा है ओह्ह्ह्ह तेरा लंड बहुत टाइट है और जल रहा है अंदर ओह्ह्ह्ह
: ढीला कर दूं ( अनुज अपने आगे वाले हाथों से अपनी मां की नंगी चूचियों को सहलाते घुलाते हुए कहा)
: उम्ममम सीईईई कर दे बेटा !! ओह्ह्ह कैसे करेगा अह्ह्ह्ह्ह सीईईई दादा ओह्ह्ह्ह उफ्फ आराम से
रागिनी ने कहने की देरी थी कि अनुज ने उसकी छातियों को पकड़ कर पीछे से करारे तेज झटके देकर अपनी मां की बुर में जगह बनाने लगा
: उन्ह्ह मम्मीई करने दो न ओह्ह्ह्ह कितना मस्त है बहुत टाइट है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह फक्क यू मम्मी मेरी सेक्सी मम्मा ओह्ह्ह्ह उम्ममम
: अह्ह्ह्ह हा बेटा कर ले उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह ओह्ह्ह उम्ममम ऐसे ही और अंदर कर न
: रुको ऐसे और अच्छे से जाएगा
अनुज ने चादर खींच कर ऊपर कर दी और अपनी मां की एक जांघ को उठा कर जगह बना दिया और लंड को पूरी गहराई में ले गया
: ओह्ह्ह्ह बेटा हा हा उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह ये तो सच में ओह्ह्ह्ह उम्ममम डाल चोद अब रुक मत उम्ममम खुजली हो रही है
: लो मम्मी मै हूं न मै दूर करूंगा आपकी बुर की खुजली ऐसे पेल कर ओह्ह्ह्ह लो मेरी मम्मी और लो उम्मम फक्क यूयू ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश यश उम्मम ओह्ह्ह्ह
: हा मेरे लाल और तेज ओह्ह्ह्ह सीई ओह्ह्ह्ह बेटा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई और और पेल अपनी मम्मी को उम्ममम तुझे पेलना था न अपनी मम्मी को उम्मम बोल न मेरा बच्चा
: ओह्ह्ह्ह हा मम्मी बहुत ज्यादा , कितने दिन से सोच रहा था ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह हाथ दुख रहा है उम्ममम
: तो ऊपर आजा बेटा , ऐसे
रंगीनी ने आगे होकर जगह बदली और पीठ के बदल जांघों को खोल कर सीधा हो गई और अनुज उसके सामने आकर अपना लंड उसकी बुर में सेट करते हुए सरसरा कर अंदर उतार दिया
: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह कितना बड़ा है तेरा बेटा उम्मम कितना मोटा भी
अनुज पूरे जोश में अपनी मां की बुर में लंड पेले जा रहा था और रागिनी की छातियां खूब हिल रही थी
: हा मम्मी आज बहुत टाइट है ओह्ह्ह्ह आपकी बुर ने और बड़ा कर दिया है ओह्ह्ह्ह मम्मी ओह्ह्ह्ह कितनी गीली हो रही है आपकी बुर मम्मीइई ओह्ह्ह्ह
: झड़ रही हूं बेटा उम्मम रुक मत तू चोद मुझे ओह्ह्ह्ह अंदर और कस के पेल , पूरा ऊपर आजा
रागिनी ने अनुज को अपने ऊपर खींच लिया ताकि अनुज अच्छे से अपनी कमर को पटक सके
सीखने का सिलसिला जारी था और अनुज तो पहले से ही उस्ताद थे चुदाई के पैंतरों में बस पहल करने से भागता था , लेकिन शायद आज ये डर भी खत्म हो जाएगा, ऐसा लग रहा था
वो अपनी मां की नंगी चूचियों को टूट पड़ा और उन्हें चूसते हुए तेजी ने नीचे उसके बुर में पेले जा रहा था
: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह बेटा चूस ले पी ले उम्ममम थक गया होगा न मेरा लाल उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई कितना तेज कर रहा है तू ओह्ह्ह्ह
: हा मम्मी मेरा भी आयेगा उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह
: अन्दर नहीं बेटा ओह्ह्ह जल्दी से बाहर कर ले
: फिर कहा निकलूं बोलो जल्दी ओह्ह्ह्ह आने वाला है उन्ह्ह्ह मम्मीईईईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम बोलो न
: वही बाहर निकाल दे
: ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई अह्ह्ह्ह आ रहा है उम्मम बहुत ज्यादा है ओह्ह्ह्ह
अनुज चिंघाड़ता हुआ अपनी मां के चूत के ऊपर ही झड़ने लगा
: हा बेटा आने से निकाल दे सब अपनी मां की बुर के ऊपर ओह्ह्ह्ह मेरा बच्चा ओह्ह्ह्ह कितना गर्म है तेरा पानी ओह्ह्ह्ह उम्ममम
उसके वीर्य की तेज पिचकारी रागिनी के मुंह और चूचों तक गई
: उम्मम मम्मीइई आई लव यू सो ओह्ह्ह्ह ( अनुज अपना लंड झाड़ते हुए बोला )
: मै भी , मेरा बच्चा आजा
रागिनी ने बड़े दुलार में उसे अपने पास बुलाया और अनुज उसके पास चला गया और रागिनी ने उसे अपने छातियों से चिपका लिया और उसके माथे को चूम ली
अनुज खुश था ... अनंत: उसने वो अंतिम दहलीज पार कर ली जो एक मा बेटे के बीच की पतली सी लकीर थी ... आज फिर से दोनों के बीच प्यार की एक नई ताजगी उठ रही थी ... भले ही रागिनी ने अनुज के लंड के अपनी चूत खोल दिए हो लेकिन अभी भी उसके दिल ने अनुज उसका लाडला बेटा ही रहेगा वो ऐसा सोच रही थी, जिसे वो कभी अपने आप से जुदा नहीं कर सकती थी अपने बेटे के रूप में .
जारी रहेगी
( अपडेट पसंद आया हो तो कर देना जो करना हो .... क्या बोलूं अब )
रात की सर्दी गहरा रही थी और साथ ही अनुज के देह की थकान भी
राज के कमरे में फुसफुसाहट अभी भी जारी थी , थोड़ी बहुत हसने की और ज्यादा तर रागिनी की खनकती हंसी
अनुज को भूख लगी थी और चुपचाप किचन में चला गया
चार पांच मुठ्ठी मूंगदाल वाली नमकीन , 3 4 कुरकुरे बिस्किट चबाने के बाद वो पानी पी रहा था बॉटल से
तभी हाल में पायलों की खनक तेज हुई
जैसे जैसे पायलों की रुनझुन उसके कानो में तेज हो रही थी , एक बेचैनी एक हड़बड़ाहट अनुज के भीतर बढ़ रही थी और वो तेजी पानी बॉटल से सीधे गले में उतार रहा था
तभी एकदम से उसे अपने पीछे आहट महसूस हुई पलट कर देखा तो सामने उसकी मां रागिनी खड़ी थी , उसके ख्यालों की मल्लिका की तरह निर्वस्त्र , देह पर बस एक पैंटी , वही पैंटी जो उसने राज के पास जाने से पहले अपने कमरे में अनुज के सामने उतार फेंकी थी
अनुज अपना मुंह फुलाए आंखे बड़ी कर चौकन्नी निगाहों से अपनी नंगी मां को अपने सामने ऊपर से नीचे देख रहा था , उसकी बड़ी बड़ी रसीली नंगी छातियां , गोरा बदन, गुदाज मुलायम पेट , चौड़ी घुमावदार कमर , उठे हुए चर्बीदार कूल्हे और चिकनी गदराई जांघें और वो पैंटी जिसमें रागिनी की फूली हुई चूत साफ नजर आ रही थी
अनुज की नजर अपनी मां की पैंटी पर जम गई , सीईईई एक पल के लिए चुक गया , कमरे में होता तो मां की नंगी बुर के दर्शन हो जाते
देह अंदर से चूर चूर हुआ था लेकिन लंड वापस से लोवर में सलामी देने के लिए तैयार खड़ा था
रागिनी उसकी निगाहों का पीछा कर अपनी नंगी छातियो को हाथों से ढक लिया और मुस्कुरा कर : यहां क्या कर रहा है तू
: मै तो पानी पीने आया था और आप ?
रागिनी मुस्कुरा कर उसे देख रही थी और उसके नंगे तलुओं से सर्दी उसके पूरे बदन में फैल रही थी
: मै भी पानी लेने आई हूं
: तो लेलो !!
अनुज बोटल देकर आगे बढ़ा
दोनों की नजरे मिली , मानो दोनों कुछ चाहते थे
: क्या कर रहा है
: बस थोड़ा हग
: पागल आजा, मेरा बच्चा
रागिनी ने नंगे ही आगे बढ़ कर उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसकी नंगी चूचिया अनुज के सीने पर चिपक गई
अपनी मां की नंगी पीठ को सहलाने का मौका नहीं छोड़ने वाला था अनुज
: उम्मम तेरे हाथ बहुत ठंडे है बेटा
: और आप बहुत गर्म हो मम्मी ओह्ह्ह्ह , कितनी मुलायम हो आप
: उम्मम क्या कर रहा है पागल ओह्ह्ह छोड़ न
: सीईईई करने दो न मम्मी मुझे भी , मै भी बड़ा हो गया हूं
: अच्छा सच में अह्ह्ह्ह तो क्या अब तू मेरे चूतड़ों को सहलाएगा अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह बेटा
: मै तो इन्हें ऐसे फैलाऊंगा भी ओह्ह्ह्ह कितनी मोटी गाड़ है मम्मी आपकी बहुत सेक्सी
अनुज अपनी मां को हग कर अपने नंगे पंजे रागिनी के नंगे चूतड़ों को टहलाने लगा
: धत् बदमाश ऐसे गंदे गंदे बोलेगा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ये क्या है ?
: नुनु मेरा उम्ममम ( अनुज ने रागिनी की उंगलियों को अपने लंड के पास सरकते महसूस कर बोला )
: कितना टाइट है ओह्ह्ह्ह
: आपको और भइया को देख कर अह्ह्ह्ह सीईईईईई मम्मीइई ओह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है
: क्यों ?
: कबसे खड़ा है न इसीलिए
: चल झूठा , दरवाजा गीला किया तब भी छोटा नहीं हुआ तेरा उम्मम
: हीही ( अनुज शर्माने लगा जब रागिनी ने उसको चोरी पकड़ी)
: इसको नीचे कर थोड़ा आराम मिलेगा ( ये बोलकर रागिनी ने उसका लोवर नीचे सरकाते हुए बैठ गई और अनुज को एक उम्मीद सी उठने लगी )
: ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई उम्मम ( अनुज का लंड उसके अंडरवियर में अब फूल रहा था और रागिनी भी साफ साफ देख रही थी )
: कैसे सांस ले रहा है ये तो ( रागिनी ने उंगलियों से छू कर उसे अंडरवीयर के ऊपर से सहलाया )
: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह आराम से मम्मीइई ओह्ह्ह्ह
रागिनी के नंगे घुटने पर ठंडी फर्श की टाइल चुभ रही थी और उसका पूरा जिसम ठंडा पड़ रहा था , वो समझ रही थी कि उसका लाडला बहुत बेचैन है और उसे तत्काल आराम की जरूरत है
रागिनी उठ गई
: क्या हुआ ? ( टूटती निराशा में उम्मीद बांध कर वो बोला )
: चल !!
: कहा ?
रागिनी कुछ नहीं बोली और वैसे ही नंगी अनुज का हाथ पकड़ अपने कमरे की ओर बढ़ गई
अनुज का लोवर अभी भी उसके घुटनों में फंसा हुआ था , किसी तरह वो फंसता अटकता रागिनी की उंगलियों को थामे वो उसके कमरे तक आया
अपने आगे अपनी मां की नंगी थिरकती चूतड़ों को निहारते हुए
रागिनी कमरे आई और फिर कमरे का दरवाजा लगा दिया
: चल इसको निकाल कर लेट जा
अनुज को समझ नहीं आया कि आखिर उसकी मां ने उसको सोने के लिए कहा कि उसका इरादा कुछ और है
डर यही था कि आंखे बंद कर सो जाने का फरमान न हो जाए
रागिनी ने अनुज के टीशर्ट और लोवर निकाल कर सिर्फ अंडरवियर में होने की राह देखी और जब वो कम्बल के गया तो खुद भी उसके पास आ कर उसके बराबर में लेट गई करवट होकर
थोड़ी देर उसने अनुज को शांत और अपनी ओर घूरते देखा , फिर मुस्कुराई और अनुज की थोड़ा चिढ़ गया और भुनकने लगा
: उम्हू करो न
: क्या करूं ( रागिनी मुस्कुराई )
: सच में दर्द हो रहा है
: कहा ? यहां !! ( रागिनी ने हाथ आगे कर उसके अंडरवियर में बने बड़े से तंबू को सहला कर कहा )
: ओह्ह्ह्ह हा वही उसको बाहर निकाल दो
: तू न राज से भी बढ़ कर है , ओह्ह्ह देखो तो कितना टाइट कर रखा है । कितना बदमाश है तू दरवाजा खुलवाने के लिए कितना तिगड़म लगाया तूने उम्मम
: आह्ह्ह्ह सीई तो आपने बंद क्यों किया था
: मैने नहीं , राज ने किया था ओह्ह्ह देखो तो कैसे लाल हो रखा है सीईईई ओहो कबसे रगड़ रहा था तू इसे उम्मम ( रागिनी हौले हौले अनुज का लाल हुआ लंड आगे पीछे कर रही थी )
: जबसे आप गए तबसे , ओह्ह्ह्ह कितना मन था मेरा देखने का , दरवाजा बंद था तो सब कुछ सोचने लगा था
एक पल को रागिनी ठहरी और उसे भी जिज्ञासा हुई कि अनुज क्या सोच रहा था उसके बारे में : क्या सोच रहा था उम्मम बोल ( रागिनी ने उसका सुपाड़ा खोलते हुए बोली )
: ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई अह्ह्ह्ह सीईईईईई उफ्फफ उम्ममम
: बोल न , क्या सोच रहा था अनुज एक नजर रागिनी को देखा फिर मुस्कुराने लगा
: अच्छा सच सच बताना , भैया आपकी साड़ी हटा कर दूध पी रहा था न ( अनुज ने मासूमियत से पूछा )
: हम्ममम ( रागिनी मुस्कुरा कर बस हुंकारी भरी और अनुज का लंड उसके हथेली में फुदका )
: मुझे लगा ही था
: और क्या सोच रहा था
रागिनी के लंड को सहलाते हुए बोली
: फिर भैया की आवाज आ रही थी और उसे सुनकर लगा कि आप भैया का चूस रहे होगे
: हम्ममम तो गीला करना पड़ता है न ( रागिनी ने थोड़ा सा मौका दिया आगे आने का )
: हम्ममम फिर आपको देखा दरवाजे से आप भइया का मुंह में ले रहे थे और भैया आपका गाड़ छू रहा था
रागिनी अनुज को बोले जा रहे एक एक शब्द में उसके लंड की नसों की पंपिंग महसूस कर रही थी अपनी हथेली में
: हा तो दुकान पर तेरा भी तो किया था न ,
: हम्ममम लेकिन आपको देख कर मेरा भी मन किया कि मै भी अंदर आजाऊँ और आप मेरा भी चूसो साथ में
: क्या साथ में !!! पागल है क्या ?
: क्यों ? साथ में नहीं कर सकती हो ( मन ही मन अब अनुज के दिल में एक नई कल्पना ने अपनी जगह बना ली थी और उसे सोच कर उसका लंड फनकार मारने लगा )
: तू ज्यादा नहीं सोच रहा था ( रागिनी ने अनुज के लंड की बढ़ती मोटाई को अपने पंजों में महसूस किया )
: उम्मम तो क्या हुआ , आप कर लोगे मुझे पता है ? अह्ह्ह्ह सीईईईईई मम्मी सहलाओ न कस के
: दर्द होगा तो ?
: अब नहीं हो रहा है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह मम्मीइई आपका हाथ बहुत सॉफ्ट है उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई
रागिनी बस शांति से उसका लंड सहलाने लगी
: मम्मी ?
: हम्ममम !!
: बोलो न !
: क्या ?
: चूसोगे मेरा और भैया का साथ में ( अनुज के लंड की नसे अब फूल गई थी और खून मानो में उसके लंड में भर आया या , रागिनी उसके लंड की गर्मी महसूस कर रही थी )
उसके दिल की धड़कने तेज हो गई और उसके दिल में भी इच्छा होने लगी , अनुज के दिखाए सपने उसके जहन में घर करने लगे , उसने कस कर भींच लिया अनुज एक लंड और सहलाने लगी
: बोलो न मम्मीईईई ओह्ह्ह्ह प्लीज जल्दी ओह्ह्ह्ह
: लेकिन मैने कभी किया नहीं बेटा , राज ने कितनी बार मुझे तेरे पापा के बगल में चोदा है , लेकिन कभी मैने साथ में नहीं किया दोनों के
: ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई तो क्या हुआ एक बार ट्राई करो न प्लीज मेरे लिए ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह मम्मी प्लीज न
: उम्मम ठीक है
: ओह्ह्ह्ह कब करोगी मम्मीइई ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह बोलो न जल्दी उम्मम बताओ न जल्दी ओह्ह्ह्ह आएगा मेरा बोलो न मम्मी
: कल
: ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह आ रहा है ओह्ह्ह्ह हिलाओ उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह
एक बाद एक मोटी थक्केदार गाढ़ी पिचकारियां छूटने लगी और अनुज का लंड वीर्य उगलने लगा और झड़ता रहा अपने ही पेट और और रागिनी उसके लंड को निचोड़ती रही
एक ओर जहां रागिनी अगली सुबह दो लंड एक साथ लेने सपने संजो रही थी
वही दूसरी ओर शहर की सुनसान रातों में रज्जो उस सपने को हकीकत में बुनने जा रही थी
खुशबू का मोटा लंबा लंड उसकी गाड़ की सुराख को चौड़ी करता हुआ उसे करवट कर पेले जा रहा था
रज्जो की कामुक चीखे पूरे कमरे में गूंज रही थी
वही कमरे के दरवाजे पर खड़ी मुस्कान का लंड अकड़ कर फूल रहा था
रज्जो की नजर उस पर पड़ी और मुस्कुराकर उसने मुस्कान को अपनी ओर बुलाया
मुस्कान जल्दी ही अपने कपड़े निकाल कर अपनी पैंटी से अपना लंड बाहर निकालती हुई रज्जो के मुंह के पास खड़ी हो गई
रज्जो जो पीछे से अपनी गाड़ में खुशबू के करारे झटके खा रही थी वो मुंह खोलकर मुस्कान का सुपाड़ा मुंह में पकड़ने की कोशिश करने लगी तो मुस्कान ने खुद अपना लंड को उसके होठों तक ले गई , रेंज में आते ही रज्जो ने जीभ आगे बढ़ा कर उसके सुपाड़े को होठों में दबोच लिया
: ओह्ह्ह्ह सेठानी जी उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई
अब तो रज्जो को बहुत मस्कत की जरूरत नहीं थी , पीछे से खुशबू चिंघाड़ कर रज्जो की गाड़ में तगड़े झटके मार रहा था और रज्जो के मुंह में खुद ब खुद मुस्कान का लंड गले तक जाने
: ओह्ह्ह्ह यशस्स उम्ममम और डाल साली कुतीया का मुंह भर दे पूरा ओह्ह्ह्ह सीईईई साली क्या रसीली गद्देदार गाड़ है तेरी ओह्ह्ह बहनचोद उम्ममम खूब उछाल रही है ओह्ह्ह और अंदर डाल में मादरचोद
खुशबू ने मुस्कान को डाटा तो मुस्कान ने रज्जो का सर पकड़ कर उसके मुंह में पेलने लगी
: ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई और चूस सेठानी उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह पी जा उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह
मुस्कान रज्जो के मुंह में लगातार पेले जा रही थी
: रुक साली को इसके गाड़ का स्वाद चखाती हूं आजा मेरी रांड ले चूस इसे भी ओह्ह्ह्ह ले उफ्फ बहनचोद क्या माल है तू ओह्ह्ह्ह मेरी रंडी ले ओह्ह्ह्ह उम्ममम ऐसे ही ओह्ह्ह
नीचे रज्जो बड़े चाव से अपने चूतड़ों से निकले खुशबू के लंड को चूस रही थी और बारी बारी से मुस्कान को भी बराबर समय दे रही थी
वही ऊपर खुशबू ने मुस्कान के चूचे पकड़ कर उसके लिप्स चूसने लगी थी और दोनों का चुम्बन काफी तेज था
मुस्कान जिस आस से खुशबू को बुलाई थी उसके पूरे होने का समय आ गया था
उसने रज्जो के सामने आकर अपना लंड रज्जो की बुर में उतार दिया और पेलने लगी
एक बार फिर रज्जो की सिसकिया कमरे में उठने लगी
इधर खुशबू भी मुस्कान के पीछे होकर अपने सुपाड़े को लार से चमकाने लगी थी
उसके पंजे पर मुस्कान की तेजी से ऊपर नीचे होती चिकनी गाड़ पर चल रहे थे
और मुस्कान समझ गई कि असल बेला आ गई है , फिर वो हल्की हो गई , रज्जो को समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है , उसके बुर में तलहका मचा था , उसे लंड के घर्षण की जरूरत थी , उसने मुस्कान को जोश दिलाने के लिए उसकी झूलती चुचियों को पीने लगी और काटने लगी , मुस्कान मचल उठी लेकिन फिर वो स्थिर हो गई जब खुशबू ने ने थूक लेकर मुस्कान के गाड़ के सुराख को छुआ
मुस्कान का पूरा बदन गिनगिना उठा , उसके लंड की नसों में नई ऊर्जा उठने लगी थी, रज्जो को अपनी बुर की फांकों में वो फैलाव महसूस होने लगा
: अह्ह्ह्ह आराम से राजा उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई हाय हाय फाड़ देगी क्या उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ( ये सिसकी मुस्कान की थी जिसके कसे गाड़ की सुराख में खुशबू अपना मोटा सुपाड़ा घुसा चुकी थी )
: चुप बहनचोद ओह्ह्ह्ह बड़ी टाइट गाड़ है तेरी , किसी ने ली नहीं क्या उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई साली ओह्ह्ह्ह उम्ममम कितना ज्यादा कसा है ( खुशबू ने मुस्कान के गाड़ की गहराई नापने लगा )
जैसे जैसे खुशबू मुस्कान के गाड़ में चढ़ कर लंड अंदर घुसेड़ रही थी ,वैसे ही ठीक नीचे मुस्कान का लंड रज्जो की बुर में गहराई में जाने लगा
रज्जो और मुस्कान दोनों की आंखे बड़ी होने लगी , मुंह खुलने लगा और पहले कमरे में मुस्कान की कर्कश चीखे पूरे कमरे को हिलाने , फिर जब खुशबू ने पूरी ताकत से उसके गाड़ पर चढ़ कर हमचना शुरू किया तो मुस्कान का लंड और फूलता हुआ रज्जो की बुर की फांकों को चीरने लगा और जड़ में जाने लगा
अब सब खुशबू एक धक्के मारती , मुस्कान और रज्जो साथ में चीखते
।
: ओह्ह्ह सीईईई बहनचोद तुम दोनों की गाड़ मारूंगी आज ओह्ह्ह्ह चीखों रंडियों ओह्ह्ह्ह उम्ममम उम्मम
: अह्ह्ह्ह मेरे राजा मारो फाड़ दो मेरी गाड़ ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह रुकना मत मजा आ रहा है
: हा खुशबू पेल और कसके उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई अह्ह्ह्ह इसका मूसल मेरे चूत में भाले जैसा चल रहा है ओह्ह्ह्ह ऐसा मजा मैने कभी नहीं किया ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह मै तो ये देख कर ही झड़ रही हूं उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई रुकना मत पेलो ओह्ह्ह्ह
खुशबू भी ताबड़तोड़ पेलाई करने लगा
: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह पेलो राजा आयेगा मेरा भी ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई
: ओह्ह्ह मेरा भी आयेगा ओह्ह्ह भर दूंगी तेरी गाड़ अपने माल से ओह्ह्ह्ह फिर इस रंडी से चुसवाऊंगी ओह्ह्ह बोल बहनचोद चुसेगी
: अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह्ह लाओ जल्दी ओह्ह्ह्ह मै तो पूरी मलाई चाट जाऊ उम्मम मुझे भी चाहिए ओह्ह्ह
: लें बहनचोद ओह्ह्ह्ह गॉड उम्ममम
: ओह्ह्ह सीईईई आ मेरे राजा मै भी गई
: उम्मम मेरा तो दुबारा हो रहा है ओह्ह्ह्ह ( रज्जो बोली)
तीनों एक साथ इस रोमांचक चुदाई में झड़ रहे थे
रज्जो के साथ उसकी बुर में मुस्कान और मुस्कान की गाड़ में खुशबू
फिर तीनों वैसे ही नंगे चिपक कर थक कर सो गए
ये लोग तो सो गए लेकिन चमनपुरा में अभी भी अनुज के आंखों से नीद गायब थी
सुबह से चौथी बार झड़ने के बाद भी उसके भीतर की वासना आज बैठने का नाम नहीं ले रही थी ,देह में सुस्ती बढ़ने लगी थी लेकिन अपनी नंगी सोई हुई मां के पास सोने का ख्याल उसकी आंखों से नीद गायब किए हुए था ।
रागिनी उसकी ओर पीठ कर करवट लेकर चादर ओढ़े हुए नंगी ही वैसे पैंटी में सोई थी
अनुज की एक जांघ अभी भी उसके नंगे मुलायम गर्म चर्बीदार चूतड़ों पर टिकी थी और शायद वही वजह थी कि अनुज अभी भी अपने मा के जिस्म की नर्माहट महसूस कर रहा था , लेकिन लंड का बुरा हाल था ... इतनी खस्ता हालत उसकी कभी भी नहीं हुई , और इतना बार तो कभी पहले झड़ा भी ... शिवाय सोनल की शादी के बाद जब उसने अपने भैया के साथ मिल कर अपनी मौसी और बुआ को एक साथ
चोदा था सुबह ने 04 बजे तक , याद नहीं कितनी बार झड़ा रहा होगा अनुज ।
मन ही मन हिम्मत जुटा रहा था वो क्योंकि इससे बेहतर मौका अब उसे नहीं मिलने वाला था
कलेजा मजबूत कर उसने अपनी मां की ओर करवट हो लिया और सरक कर जांघों से जांघें सटा ली, पेट सीधा रागिनी की कमर पर और सीना पीठ पर , हाथ आगे कर पेट पर
रागिनी ने कुनमुना उसकी बाह अपनी ओर खींच ली, नतीजा अनुज का खड़ा टाइट लंड सीधा रागिनी के नंगी चूतड़ों के दरारों में चिपक गया नीचे की ओर मुंह किए
अनुज का लंड लोहे की तरह तप रहा था और रागिनी के जिस्म में भी आग दहक रही थी , जल्द ही दोनों के बदन की गर्मी बढ़ने लगी , दोनों के सटे हुए अंग में चिपचिपाहट होने लगी और लंड एकदम फड़फड़ाने लगा
: अनुज !! क्या कर रहा है सो जा अब
: सो ही तो रहा हूं
: फिर ये क्या है ? उम्मम मार खायेगा अब समझा
( कितना भी दुलार ले , खुल कर बातें कर ले , प्यार कर ले लेकिन अपनी मां होने जगह रागिनी ने अनुज के लिए कभी नहीं त्यागी , उसकी नादानियों पर अभी वो उसे डांट लगाने से परहेज नहीं कर रही थी )
: कुछ भी तो नहीं कर रहा हूं ( ये बोलकर अनुज ने अपने हाथ आगे कर रागिनी की नंगी चूचियों को हथेली में भर लिया और अपना लंड रागिनी के गाड़ की कसी दरारों में रगड़ने लगा )
: सीईईई ओह्ह्ह धत्त छोड़ , पीछे हट मार खायेगा अब तंग मत कर , कितना करेगा? सुबह से 04 बार हुआ न तेरा ? तबियत खराब हो जाएगा बेटा!! ( थोड़ी नाराज फिर एकदम से प्रेम और फिकर में बोली रागिनी )
: बस एक बार ऐसे ही डाल के सो जाऊंगा , पक्का
: धत्त नहीं
: क्यों पापा नहीं सोते है क्या डाल के
: हीही पागल है क्या तू , डाल के कौन सोता है
: मै सोऊंगा अब से , निकालो न इसे अह सीई ( अनुज रागिनी कच्छी खींचने लगा )
: नहीं अनुज मार खायेगा अब छोड़ उसे , देखो तो बदमाश को अह्ह्ह्ह नहीं रुक न ( रागिनी पूरी कोशिश नहीं कर रही थी , उसे तो अपने लाडले के स्टैमिना पर बड़ा गर्व था कि दुपहर से 04 बार झड़ने के बाद गजब का कड़कपन है उसके लंड में )
:बस निकल गया , पैर ऊपर करो
कर ली अनुज ने अपनी मनमानी और रागिनी ने खुद से अपनी टांगे उठा कर पैंटी निकाल दी और निकालते हुए अनुज के अपना लंड उसके गाड़ के सकरे दरखतों में पेल दिया
: ओह्ह्ह्ह सीई पागल सुखा है वहां कहा डाल रहा है ओह्ह्ह्ह , रुक !!! ( शायद रागिनी ने अपने गाड़ की सुराख की चमड़ी में खिंचाव महसूस किया था अनुज के लंड से और वो अनुज को डांट लगाई )
फिर रागिनी ने अपने मुंह से लार लेकर हाथ पीछे से गई और अनुज का सुपाड़ा पकड़ के उसे मिजने लगी
: ओह्ह्ह्ह यशस्स मम्मीइई ओह्ह्ह्ह उम्ममम
: अब जो करना है कर ( रागिनी ने अपने चूतड़ ऊपर कर अनुज के लंड के लिए अपने चूत की सही पोजीशन दे दी )
: थोड़ा खोलो न ( अनुज ने रागिनी जांघें चादर के अंदर की हाथ डाल कर थोड़ा चूत के फांकों के पास गैप बनाया ताकि उसका लंड सही जगह पहुंच सके )
: सीईईई ओह्ह्ह आराम से नाखून चुभ रहा है तेरा पागल उम्मम हा वही है अह्ह्ह्ह सीईईई नहीं आगे चला गया , थोड़ा पीछे से ऊपर हा हा उम्ममम धीरे नहीं तो मारूंगी अभी अह्ह्ह्ह मम्मीइई कितना टाइट है तेरा सीईईई ओह्ह्ह्ह
फाइनली अपनी मां की गाइडेंस में अनुज का सुपाड़े रागिनी के बुर के फांकों में नीचे से दाखिल हो गया था और वहा की पिघलती गर्मी उसे अपने सुपाड़े पर महसूस हो रही थी
: ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई ओह्ह्ह्ह कितना जल रहा है सीई ओह्ह्ह्ह
अनुज अपने हाथ टटोल कर आगे वापस से अपनी मां की नंगी चूचियों पर ले गया और लंड को थोड़ा दबाव देकर और अंदर ठेला
ऊपर चुचियों पर अनुज की उंगलियां तो नीचे बुर में आडा टेडा घुसता उसका लंड , सिसक पड़ी रागिनी
: उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह हल्के हल्के बेटा उम्ममम कितना अंदर ले जाएगा
: उम्मम पूरा ले जाऊंगा मम्मी ओह्ह्ह्ह कितनी गर्म और सॉफ्ट है आपकी बुर ओह्ह्ह्ह और आपकी गाड़ कितनी मुलायम है ओह्ह्ह्ह मजा आ रहा है मम्मी सच में उम्ममम और आपको ?
: उम्मम हा बेटा अह्ह्ह्ह्ह अच्छा लग रहा है ओह्ह्ह्ह तेरा लंड बहुत टाइट है और जल रहा है अंदर ओह्ह्ह्ह
: ढीला कर दूं ( अनुज अपने आगे वाले हाथों से अपनी मां की नंगी चूचियों को सहलाते घुलाते हुए कहा)
: उम्ममम सीईईई कर दे बेटा !! ओह्ह्ह कैसे करेगा अह्ह्ह्ह्ह सीईईई दादा ओह्ह्ह्ह उफ्फ आराम से
रागिनी ने कहने की देरी थी कि अनुज ने उसकी छातियों को पकड़ कर पीछे से करारे तेज झटके देकर अपनी मां की बुर में जगह बनाने लगा
: उन्ह्ह मम्मीई करने दो न ओह्ह्ह्ह कितना मस्त है बहुत टाइट है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह फक्क यू मम्मी मेरी सेक्सी मम्मा ओह्ह्ह्ह उम्ममम
: अह्ह्ह्ह हा बेटा कर ले उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह ओह्ह्ह उम्ममम ऐसे ही और अंदर कर न
: रुको ऐसे और अच्छे से जाएगा
अनुज ने चादर खींच कर ऊपर कर दी और अपनी मां की एक जांघ को उठा कर जगह बना दिया और लंड को पूरी गहराई में ले गया
: ओह्ह्ह्ह बेटा हा हा उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह ये तो सच में ओह्ह्ह्ह उम्ममम डाल चोद अब रुक मत उम्ममम खुजली हो रही है
: लो मम्मी मै हूं न मै दूर करूंगा आपकी बुर की खुजली ऐसे पेल कर ओह्ह्ह्ह लो मेरी मम्मी और लो उम्मम फक्क यूयू ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश यश उम्मम ओह्ह्ह्ह
: हा मेरे लाल और तेज ओह्ह्ह्ह सीई ओह्ह्ह्ह बेटा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई और और पेल अपनी मम्मी को उम्ममम तुझे पेलना था न अपनी मम्मी को उम्मम बोल न मेरा बच्चा
: ओह्ह्ह्ह हा मम्मी बहुत ज्यादा , कितने दिन से सोच रहा था ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह हाथ दुख रहा है उम्ममम
: तो ऊपर आजा बेटा , ऐसे
रंगीनी ने आगे होकर जगह बदली और पीठ के बदल जांघों को खोल कर सीधा हो गई और अनुज उसके सामने आकर अपना लंड उसकी बुर में सेट करते हुए सरसरा कर अंदर उतार दिया
: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह कितना बड़ा है तेरा बेटा उम्मम कितना मोटा भी
अनुज पूरे जोश में अपनी मां की बुर में लंड पेले जा रहा था और रागिनी की छातियां खूब हिल रही थी
: हा मम्मी आज बहुत टाइट है ओह्ह्ह्ह आपकी बुर ने और बड़ा कर दिया है ओह्ह्ह्ह मम्मी ओह्ह्ह्ह कितनी गीली हो रही है आपकी बुर मम्मीइई ओह्ह्ह्ह
: झड़ रही हूं बेटा उम्मम रुक मत तू चोद मुझे ओह्ह्ह्ह अंदर और कस के पेल , पूरा ऊपर आजा
रागिनी ने अनुज को अपने ऊपर खींच लिया ताकि अनुज अच्छे से अपनी कमर को पटक सके
सीखने का सिलसिला जारी था और अनुज तो पहले से ही उस्ताद थे चुदाई के पैंतरों में बस पहल करने से भागता था , लेकिन शायद आज ये डर भी खत्म हो जाएगा, ऐसा लग रहा था
वो अपनी मां की नंगी चूचियों को टूट पड़ा और उन्हें चूसते हुए तेजी ने नीचे उसके बुर में पेले जा रहा था
: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह बेटा चूस ले पी ले उम्ममम थक गया होगा न मेरा लाल उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई कितना तेज कर रहा है तू ओह्ह्ह्ह
: हा मम्मी मेरा भी आयेगा उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह
: अन्दर नहीं बेटा ओह्ह्ह जल्दी से बाहर कर ले
: फिर कहा निकलूं बोलो जल्दी ओह्ह्ह्ह आने वाला है उन्ह्ह्ह मम्मीईईईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम बोलो न
: वही बाहर निकाल दे
: ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई अह्ह्ह्ह आ रहा है उम्मम बहुत ज्यादा है ओह्ह्ह्ह
अनुज चिंघाड़ता हुआ अपनी मां के चूत के ऊपर ही झड़ने लगा
: हा बेटा आने से निकाल दे सब अपनी मां की बुर के ऊपर ओह्ह्ह्ह मेरा बच्चा ओह्ह्ह्ह कितना गर्म है तेरा पानी ओह्ह्ह्ह उम्ममम
उसके वीर्य की तेज पिचकारी रागिनी के मुंह और चूचों तक गई
: उम्मम मम्मीइई आई लव यू सो ओह्ह्ह्ह ( अनुज अपना लंड झाड़ते हुए बोला )
: मै भी , मेरा बच्चा आजा
रागिनी ने बड़े दुलार में उसे अपने पास बुलाया और अनुज उसके पास चला गया और रागिनी ने उसे अपने छातियों से चिपका लिया और उसके माथे को चूम ली
अनुज खुश था ... अनंत: उसने वो अंतिम दहलीज पार कर ली जो एक मा बेटे के बीच की पतली सी लकीर थी ... आज फिर से दोनों के बीच प्यार की एक नई ताजगी उठ रही थी ... भले ही रागिनी ने अनुज के लंड के अपनी चूत खोल दिए हो लेकिन अभी भी उसके दिल ने अनुज उसका लाडला बेटा ही रहेगा वो ऐसा सोच रही थी, जिसे वो कभी अपने आप से जुदा नहीं कर सकती थी अपने बेटे के रूप में .
जारी रहेगी
( अपडेट पसंद आया हो तो कर देना जो करना हो .... क्या बोलूं अब )
रात की सर्दी गहरा रही थी और साथ ही अनुज के देह की थकान भी
राज के कमरे में फुसफुसाहट अभी भी जारी थी , थोड़ी बहुत हसने की और ज्यादा तर रागिनी की खनकती हंसी
अनुज को भूख लगी थी और चुपचाप किचन में चला गया
चार पांच मुठ्ठी मूंगदाल वाली नमकीन , 3 4 कुरकुरे बिस्किट चबाने के बाद वो पानी पी रहा था बॉटल से
तभी हाल में पायलों की खनक तेज हुई
जैसे जैसे पायलों की रुनझुन उसके कानो में तेज हो रही थी , एक बेचैनी एक हड़बड़ाहट अनुज के भीतर बढ़ रही थी और वो तेजी पानी बॉटल से सीधे गले में उतार रहा था
तभी एकदम से उसे अपने पीछे आहट महसूस हुई पलट कर देखा तो सामने उसकी मां रागिनी खड़ी थी , उसके ख्यालों की मल्लिका की तरह निर्वस्त्र , देह पर बस एक पैंटी , वही पैंटी जो उसने राज के पास जाने से पहले अपने कमरे में अनुज के सामने उतार फेंकी थी
अनुज अपना मुंह फुलाए आंखे बड़ी कर चौकन्नी निगाहों से अपनी नंगी मां को अपने सामने ऊपर से नीचे देख रहा था , उसकी बड़ी बड़ी रसीली नंगी छातियां , गोरा बदन, गुदाज मुलायम पेट , चौड़ी घुमावदार कमर , उठे हुए चर्बीदार कूल्हे और चिकनी गदराई जांघें और वो पैंटी जिसमें रागिनी की फूली हुई चूत साफ नजर आ रही थी
अनुज की नजर अपनी मां की पैंटी पर जम गई , सीईईई एक पल के लिए चुक गया , कमरे में होता तो मां की नंगी बुर के दर्शन हो जाते
देह अंदर से चूर चूर हुआ था लेकिन लंड वापस से लोवर में सलामी देने के लिए तैयार खड़ा था
रागिनी उसकी निगाहों का पीछा कर अपनी नंगी छातियो को हाथों से ढक लिया और मुस्कुरा कर : यहां क्या कर रहा है तू
: मै तो पानी पीने आया था और आप ?
रागिनी मुस्कुरा कर उसे देख रही थी और उसके नंगे तलुओं से सर्दी उसके पूरे बदन में फैल रही थी
: मै भी पानी लेने आई हूं
: तो लेलो !!
अनुज बोटल देकर आगे बढ़ा
दोनों की नजरे मिली , मानो दोनों कुछ चाहते थे
: क्या कर रहा है
: बस थोड़ा हग
: पागल आजा, मेरा बच्चा
रागिनी ने नंगे ही आगे बढ़ कर उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसकी नंगी चूचिया अनुज के सीने पर चिपक गई
अपनी मां की नंगी पीठ को सहलाने का मौका नहीं छोड़ने वाला था अनुज
: उम्मम तेरे हाथ बहुत ठंडे है बेटा
: और आप बहुत गर्म हो मम्मी ओह्ह्ह्ह , कितनी मुलायम हो आप
: उम्मम क्या कर रहा है पागल ओह्ह्ह छोड़ न
: सीईईई करने दो न मम्मी मुझे भी , मै भी बड़ा हो गया हूं
: अच्छा सच में अह्ह्ह्ह तो क्या अब तू मेरे चूतड़ों को सहलाएगा अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह बेटा
: मै तो इन्हें ऐसे फैलाऊंगा भी ओह्ह्ह्ह कितनी मोटी गाड़ है मम्मी आपकी बहुत सेक्सी
अनुज अपनी मां को हग कर अपने नंगे पंजे रागिनी के नंगे चूतड़ों को टहलाने लगा
: धत् बदमाश ऐसे गंदे गंदे बोलेगा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ये क्या है ?
: नुनु मेरा उम्ममम ( अनुज ने रागिनी की उंगलियों को अपने लंड के पास सरकते महसूस कर बोला )
: कितना टाइट है ओह्ह्ह्ह
: आपको और भइया को देख कर अह्ह्ह्ह सीईईईईई मम्मीइई ओह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है
: क्यों ?
: कबसे खड़ा है न इसीलिए
: चल झूठा , दरवाजा गीला किया तब भी छोटा नहीं हुआ तेरा उम्मम
: हीही ( अनुज शर्माने लगा जब रागिनी ने उसको चोरी पकड़ी)
: इसको नीचे कर थोड़ा आराम मिलेगा ( ये बोलकर रागिनी ने उसका लोवर नीचे सरकाते हुए बैठ गई और अनुज को एक उम्मीद सी उठने लगी )
: ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई उम्मम ( अनुज का लंड उसके अंडरवियर में अब फूल रहा था और रागिनी भी साफ साफ देख रही थी )
: कैसे सांस ले रहा है ये तो ( रागिनी ने उंगलियों से छू कर उसे अंडरवीयर के ऊपर से सहलाया )
: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह आराम से मम्मीइई ओह्ह्ह्ह
रागिनी के नंगे घुटने पर ठंडी फर्श की टाइल चुभ रही थी और उसका पूरा जिसम ठंडा पड़ रहा था , वो समझ रही थी कि उसका लाडला बहुत बेचैन है और उसे तत्काल आराम की जरूरत है
रागिनी उठ गई
: क्या हुआ ? ( टूटती निराशा में उम्मीद बांध कर वो बोला )
: चल !!
: कहा ?
रागिनी कुछ नहीं बोली और वैसे ही नंगी अनुज का हाथ पकड़ अपने कमरे की ओर बढ़ गई
अनुज का लोवर अभी भी उसके घुटनों में फंसा हुआ था , किसी तरह वो फंसता अटकता रागिनी की उंगलियों को थामे वो उसके कमरे तक आया
अपने आगे अपनी मां की नंगी थिरकती चूतड़ों को निहारते हुए
रागिनी कमरे आई और फिर कमरे का दरवाजा लगा दिया
: चल इसको निकाल कर लेट जा
अनुज को समझ नहीं आया कि आखिर उसकी मां ने उसको सोने के लिए कहा कि उसका इरादा कुछ और है
डर यही था कि आंखे बंद कर सो जाने का फरमान न हो जाए
रागिनी ने अनुज के टीशर्ट और लोवर निकाल कर सिर्फ अंडरवियर में होने की राह देखी और जब वो कम्बल के गया तो खुद भी उसके पास आ कर उसके बराबर में लेट गई करवट होकर
थोड़ी देर उसने अनुज को शांत और अपनी ओर घूरते देखा , फिर मुस्कुराई और अनुज की थोड़ा चिढ़ गया और भुनकने लगा
: उम्हू करो न
: क्या करूं ( रागिनी मुस्कुराई )
: सच में दर्द हो रहा है
: कहा ? यहां !! ( रागिनी ने हाथ आगे कर उसके अंडरवियर में बने बड़े से तंबू को सहला कर कहा )
: ओह्ह्ह्ह हा वही उसको बाहर निकाल दो
: तू न राज से भी बढ़ कर है , ओह्ह्ह देखो तो कितना टाइट कर रखा है । कितना बदमाश है तू दरवाजा खुलवाने के लिए कितना तिगड़म लगाया तूने उम्मम
: आह्ह्ह्ह सीई तो आपने बंद क्यों किया था
: मैने नहीं , राज ने किया था ओह्ह्ह देखो तो कैसे लाल हो रखा है सीईईई ओहो कबसे रगड़ रहा था तू इसे उम्मम ( रागिनी हौले हौले अनुज का लाल हुआ लंड आगे पीछे कर रही थी )
: जबसे आप गए तबसे , ओह्ह्ह्ह कितना मन था मेरा देखने का , दरवाजा बंद था तो सब कुछ सोचने लगा था
एक पल को रागिनी ठहरी और उसे भी जिज्ञासा हुई कि अनुज क्या सोच रहा था उसके बारे में : क्या सोच रहा था उम्मम बोल ( रागिनी ने उसका सुपाड़ा खोलते हुए बोली )
: ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई अह्ह्ह्ह सीईईईईई उफ्फफ उम्ममम
: बोल न , क्या सोच रहा था अनुज एक नजर रागिनी को देखा फिर मुस्कुराने लगा
: अच्छा सच सच बताना , भैया आपकी साड़ी हटा कर दूध पी रहा था न ( अनुज ने मासूमियत से पूछा )
: हम्ममम ( रागिनी मुस्कुरा कर बस हुंकारी भरी और अनुज का लंड उसके हथेली में फुदका )
: मुझे लगा ही था
: और क्या सोच रहा था
रागिनी के लंड को सहलाते हुए बोली
: फिर भैया की आवाज आ रही थी और उसे सुनकर लगा कि आप भैया का चूस रहे होगे
: हम्ममम तो गीला करना पड़ता है न ( रागिनी ने थोड़ा सा मौका दिया आगे आने का )
: हम्ममम फिर आपको देखा दरवाजे से आप भइया का मुंह में ले रहे थे और भैया आपका गाड़ छू रहा था
रागिनी अनुज को बोले जा रहे एक एक शब्द में उसके लंड की नसों की पंपिंग महसूस कर रही थी अपनी हथेली में
: हा तो दुकान पर तेरा भी तो किया था न ,
: हम्ममम लेकिन आपको देख कर मेरा भी मन किया कि मै भी अंदर आजाऊँ और आप मेरा भी चूसो साथ में
: क्या साथ में !!! पागल है क्या ?
: क्यों ? साथ में नहीं कर सकती हो ( मन ही मन अब अनुज के दिल में एक नई कल्पना ने अपनी जगह बना ली थी और उसे सोच कर उसका लंड फनकार मारने लगा )
: तू ज्यादा नहीं सोच रहा था ( रागिनी ने अनुज के लंड की बढ़ती मोटाई को अपने पंजों में महसूस किया )
: उम्मम तो क्या हुआ , आप कर लोगे मुझे पता है ? अह्ह्ह्ह सीईईईईई मम्मी सहलाओ न कस के
: दर्द होगा तो ?
: अब नहीं हो रहा है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह मम्मीइई आपका हाथ बहुत सॉफ्ट है उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई
रागिनी बस शांति से उसका लंड सहलाने लगी
: मम्मी ?
: हम्ममम !!
: बोलो न !
: क्या ?
: चूसोगे मेरा और भैया का साथ में ( अनुज के लंड की नसे अब फूल गई थी और खून मानो में उसके लंड में भर आया या , रागिनी उसके लंड की गर्मी महसूस कर रही थी )
उसके दिल की धड़कने तेज हो गई और उसके दिल में भी इच्छा होने लगी , अनुज के दिखाए सपने उसके जहन में घर करने लगे , उसने कस कर भींच लिया अनुज एक लंड और सहलाने लगी
: बोलो न मम्मीईईई ओह्ह्ह्ह प्लीज जल्दी ओह्ह्ह्ह
: लेकिन मैने कभी किया नहीं बेटा , राज ने कितनी बार मुझे तेरे पापा के बगल में चोदा है , लेकिन कभी मैने साथ में नहीं किया दोनों के
: ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई तो क्या हुआ एक बार ट्राई करो न प्लीज मेरे लिए ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह मम्मी प्लीज न
: उम्मम ठीक है
: ओह्ह्ह्ह कब करोगी मम्मीइई ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह बोलो न जल्दी उम्मम बताओ न जल्दी ओह्ह्ह्ह आएगा मेरा बोलो न मम्मी
: कल
: ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह आ रहा है ओह्ह्ह्ह हिलाओ उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह
एक बाद एक मोटी थक्केदार गाढ़ी पिचकारियां छूटने लगी और अनुज का लंड वीर्य उगलने लगा और झड़ता रहा अपने ही पेट और और रागिनी उसके लंड को निचोड़ती रही
एक ओर जहां रागिनी अगली सुबह दो लंड एक साथ लेने सपने संजो रही थी
वही दूसरी ओर शहर की सुनसान रातों में रज्जो उस सपने को हकीकत में बुनने जा रही थी
खुशबू का मोटा लंबा लंड उसकी गाड़ की सुराख को चौड़ी करता हुआ उसे करवट कर पेले जा रहा था
रज्जो की कामुक चीखे पूरे कमरे में गूंज रही थी
वही कमरे के दरवाजे पर खड़ी मुस्कान का लंड अकड़ कर फूल रहा था
रज्जो की नजर उस पर पड़ी और मुस्कुराकर उसने मुस्कान को अपनी ओर बुलाया
मुस्कान जल्दी ही अपने कपड़े निकाल कर अपनी पैंटी से अपना लंड बाहर निकालती हुई रज्जो के मुंह के पास खड़ी हो गई
रज्जो जो पीछे से अपनी गाड़ में खुशबू के करारे झटके खा रही थी वो मुंह खोलकर मुस्कान का सुपाड़ा मुंह में पकड़ने की कोशिश करने लगी तो मुस्कान ने खुद अपना लंड को उसके होठों तक ले गई , रेंज में आते ही रज्जो ने जीभ आगे बढ़ा कर उसके सुपाड़े को होठों में दबोच लिया
: ओह्ह्ह्ह सेठानी जी उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई
अब तो रज्जो को बहुत मस्कत की जरूरत नहीं थी , पीछे से खुशबू चिंघाड़ कर रज्जो की गाड़ में तगड़े झटके मार रहा था और रज्जो के मुंह में खुद ब खुद मुस्कान का लंड गले तक जाने
: ओह्ह्ह्ह यशस्स उम्ममम और डाल साली कुतीया का मुंह भर दे पूरा ओह्ह्ह्ह सीईईई साली क्या रसीली गद्देदार गाड़ है तेरी ओह्ह्ह बहनचोद उम्ममम खूब उछाल रही है ओह्ह्ह और अंदर डाल में मादरचोद
खुशबू ने मुस्कान को डाटा तो मुस्कान ने रज्जो का सर पकड़ कर उसके मुंह में पेलने लगी
: ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई और चूस सेठानी उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह पी जा उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह
मुस्कान रज्जो के मुंह में लगातार पेले जा रही थी
: रुक साली को इसके गाड़ का स्वाद चखाती हूं आजा मेरी रांड ले चूस इसे भी ओह्ह्ह्ह ले उफ्फ बहनचोद क्या माल है तू ओह्ह्ह्ह मेरी रंडी ले ओह्ह्ह्ह उम्ममम ऐसे ही ओह्ह्ह
नीचे रज्जो बड़े चाव से अपने चूतड़ों से निकले खुशबू के लंड को चूस रही थी और बारी बारी से मुस्कान को भी बराबर समय दे रही थी
वही ऊपर खुशबू ने मुस्कान के चूचे पकड़ कर उसके लिप्स चूसने लगी थी और दोनों का चुम्बन काफी तेज था
मुस्कान जिस आस से खुशबू को बुलाई थी उसके पूरे होने का समय आ गया था
उसने रज्जो के सामने आकर अपना लंड रज्जो की बुर में उतार दिया और पेलने लगी
एक बार फिर रज्जो की सिसकिया कमरे में उठने लगी
इधर खुशबू भी मुस्कान के पीछे होकर अपने सुपाड़े को लार से चमकाने लगी थी
उसके पंजे पर मुस्कान की तेजी से ऊपर नीचे होती चिकनी गाड़ पर चल रहे थे
और मुस्कान समझ गई कि असल बेला आ गई है , फिर वो हल्की हो गई , रज्जो को समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है , उसके बुर में तलहका मचा था , उसे लंड के घर्षण की जरूरत थी , उसने मुस्कान को जोश दिलाने के लिए उसकी झूलती चुचियों को पीने लगी और काटने लगी , मुस्कान मचल उठी लेकिन फिर वो स्थिर हो गई जब खुशबू ने ने थूक लेकर मुस्कान के गाड़ के सुराख को छुआ
मुस्कान का पूरा बदन गिनगिना उठा , उसके लंड की नसों में नई ऊर्जा उठने लगी थी, रज्जो को अपनी बुर की फांकों में वो फैलाव महसूस होने लगा
: अह्ह्ह्ह आराम से राजा उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई हाय हाय फाड़ देगी क्या उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ( ये सिसकी मुस्कान की थी जिसके कसे गाड़ की सुराख में खुशबू अपना मोटा सुपाड़ा घुसा चुकी थी )
: चुप बहनचोद ओह्ह्ह्ह बड़ी टाइट गाड़ है तेरी , किसी ने ली नहीं क्या उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई साली ओह्ह्ह्ह उम्ममम कितना ज्यादा कसा है ( खुशबू ने मुस्कान के गाड़ की गहराई नापने लगा )
जैसे जैसे खुशबू मुस्कान के गाड़ में चढ़ कर लंड अंदर घुसेड़ रही थी ,वैसे ही ठीक नीचे मुस्कान का लंड रज्जो की बुर में गहराई में जाने लगा
रज्जो और मुस्कान दोनों की आंखे बड़ी होने लगी , मुंह खुलने लगा और पहले कमरे में मुस्कान की कर्कश चीखे पूरे कमरे को हिलाने , फिर जब खुशबू ने पूरी ताकत से उसके गाड़ पर चढ़ कर हमचना शुरू किया तो मुस्कान का लंड और फूलता हुआ रज्जो की बुर की फांकों को चीरने लगा और जड़ में जाने लगा
अब सब खुशबू एक धक्के मारती , मुस्कान और रज्जो साथ में चीखते
।
: ओह्ह्ह सीईईई बहनचोद तुम दोनों की गाड़ मारूंगी आज ओह्ह्ह्ह चीखों रंडियों ओह्ह्ह्ह उम्ममम उम्मम
: अह्ह्ह्ह मेरे राजा मारो फाड़ दो मेरी गाड़ ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह रुकना मत मजा आ रहा है
: हा खुशबू पेल और कसके उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई अह्ह्ह्ह इसका मूसल मेरे चूत में भाले जैसा चल रहा है ओह्ह्ह्ह ऐसा मजा मैने कभी नहीं किया ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह मै तो ये देख कर ही झड़ रही हूं उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई रुकना मत पेलो ओह्ह्ह्ह
खुशबू भी ताबड़तोड़ पेलाई करने लगा
: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह पेलो राजा आयेगा मेरा भी ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई
: ओह्ह्ह मेरा भी आयेगा ओह्ह्ह भर दूंगी तेरी गाड़ अपने माल से ओह्ह्ह्ह फिर इस रंडी से चुसवाऊंगी ओह्ह्ह बोल बहनचोद चुसेगी
: अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह्ह लाओ जल्दी ओह्ह्ह्ह मै तो पूरी मलाई चाट जाऊ उम्मम मुझे भी चाहिए ओह्ह्ह
: लें बहनचोद ओह्ह्ह्ह गॉड उम्ममम
: ओह्ह्ह सीईईई आ मेरे राजा मै भी गई
: उम्मम मेरा तो दुबारा हो रहा है ओह्ह्ह्ह ( रज्जो बोली)
तीनों एक साथ इस रोमांचक चुदाई में झड़ रहे थे
रज्जो के साथ उसकी बुर में मुस्कान और मुस्कान की गाड़ में खुशबू
फिर तीनों वैसे ही नंगे चिपक कर थक कर सो गए
ये लोग तो सो गए लेकिन चमनपुरा में अभी भी अनुज के आंखों से नीद गायब थी
सुबह से चौथी बार झड़ने के बाद भी उसके भीतर की वासना आज बैठने का नाम नहीं ले रही थी ,देह में सुस्ती बढ़ने लगी थी लेकिन अपनी नंगी सोई हुई मां के पास सोने का ख्याल उसकी आंखों से नीद गायब किए हुए था ।
रागिनी उसकी ओर पीठ कर करवट लेकर चादर ओढ़े हुए नंगी ही वैसे पैंटी में सोई थी
अनुज की एक जांघ अभी भी उसके नंगे मुलायम गर्म चर्बीदार चूतड़ों पर टिकी थी और शायद वही वजह थी कि अनुज अभी भी अपने मा के जिस्म की नर्माहट महसूस कर रहा था , लेकिन लंड का बुरा हाल था ... इतनी खस्ता हालत उसकी कभी भी नहीं हुई , और इतना बार तो कभी पहले झड़ा भी ... शिवाय सोनल की शादी के बाद जब उसने अपने भैया के साथ मिल कर अपनी मौसी और बुआ को एक साथ
चोदा था सुबह ने 04 बजे तक , याद नहीं कितनी बार झड़ा रहा होगा अनुज ।
मन ही मन हिम्मत जुटा रहा था वो क्योंकि इससे बेहतर मौका अब उसे नहीं मिलने वाला था
कलेजा मजबूत कर उसने अपनी मां की ओर करवट हो लिया और सरक कर जांघों से जांघें सटा ली, पेट सीधा रागिनी की कमर पर और सीना पीठ पर , हाथ आगे कर पेट पर
रागिनी ने कुनमुना उसकी बाह अपनी ओर खींच ली, नतीजा अनुज का खड़ा टाइट लंड सीधा रागिनी के नंगी चूतड़ों के दरारों में चिपक गया नीचे की ओर मुंह किए
अनुज का लंड लोहे की तरह तप रहा था और रागिनी के जिस्म में भी आग दहक रही थी , जल्द ही दोनों के बदन की गर्मी बढ़ने लगी , दोनों के सटे हुए अंग में चिपचिपाहट होने लगी और लंड एकदम फड़फड़ाने लगा
: अनुज !! क्या कर रहा है सो जा अब
: सो ही तो रहा हूं
: फिर ये क्या है ? उम्मम मार खायेगा अब समझा
( कितना भी दुलार ले , खुल कर बातें कर ले , प्यार कर ले लेकिन अपनी मां होने जगह रागिनी ने अनुज के लिए कभी नहीं त्यागी , उसकी नादानियों पर अभी वो उसे डांट लगाने से परहेज नहीं कर रही थी )
: कुछ भी तो नहीं कर रहा हूं ( ये बोलकर अनुज ने अपने हाथ आगे कर रागिनी की नंगी चूचियों को हथेली में भर लिया और अपना लंड रागिनी के गाड़ की कसी दरारों में रगड़ने लगा )
: सीईईई ओह्ह्ह धत्त छोड़ , पीछे हट मार खायेगा अब तंग मत कर , कितना करेगा? सुबह से 04 बार हुआ न तेरा ? तबियत खराब हो जाएगा बेटा!! ( थोड़ी नाराज फिर एकदम से प्रेम और फिकर में बोली रागिनी )
: बस एक बार ऐसे ही डाल के सो जाऊंगा , पक्का
: धत्त नहीं
: क्यों पापा नहीं सोते है क्या डाल के
: हीही पागल है क्या तू , डाल के कौन सोता है
: मै सोऊंगा अब से , निकालो न इसे अह सीई ( अनुज रागिनी कच्छी खींचने लगा )
: नहीं अनुज मार खायेगा अब छोड़ उसे , देखो तो बदमाश को अह्ह्ह्ह नहीं रुक न ( रागिनी पूरी कोशिश नहीं कर रही थी , उसे तो अपने लाडले के स्टैमिना पर बड़ा गर्व था कि दुपहर से 04 बार झड़ने के बाद गजब का कड़कपन है उसके लंड में )
:बस निकल गया , पैर ऊपर करो
कर ली अनुज ने अपनी मनमानी और रागिनी ने खुद से अपनी टांगे उठा कर पैंटी निकाल दी और निकालते हुए अनुज के अपना लंड उसके गाड़ के सकरे दरखतों में पेल दिया
: ओह्ह्ह्ह सीई पागल सुखा है वहां कहा डाल रहा है ओह्ह्ह्ह , रुक !!! ( शायद रागिनी ने अपने गाड़ की सुराख की चमड़ी में खिंचाव महसूस किया था अनुज के लंड से और वो अनुज को डांट लगाई )
फिर रागिनी ने अपने मुंह से लार लेकर हाथ पीछे से गई और अनुज का सुपाड़ा पकड़ के उसे मिजने लगी
: ओह्ह्ह्ह यशस्स मम्मीइई ओह्ह्ह्ह उम्ममम
: अब जो करना है कर ( रागिनी ने अपने चूतड़ ऊपर कर अनुज के लंड के लिए अपने चूत की सही पोजीशन दे दी )
: थोड़ा खोलो न ( अनुज ने रागिनी जांघें चादर के अंदर की हाथ डाल कर थोड़ा चूत के फांकों के पास गैप बनाया ताकि उसका लंड सही जगह पहुंच सके )
: सीईईई ओह्ह्ह आराम से नाखून चुभ रहा है तेरा पागल उम्मम हा वही है अह्ह्ह्ह सीईईई नहीं आगे चला गया , थोड़ा पीछे से ऊपर हा हा उम्ममम धीरे नहीं तो मारूंगी अभी अह्ह्ह्ह मम्मीइई कितना टाइट है तेरा सीईईई ओह्ह्ह्ह
फाइनली अपनी मां की गाइडेंस में अनुज का सुपाड़े रागिनी के बुर के फांकों में नीचे से दाखिल हो गया था और वहा की पिघलती गर्मी उसे अपने सुपाड़े पर महसूस हो रही थी
: ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई ओह्ह्ह्ह कितना जल रहा है सीई ओह्ह्ह्ह
अनुज अपने हाथ टटोल कर आगे वापस से अपनी मां की नंगी चूचियों पर ले गया और लंड को थोड़ा दबाव देकर और अंदर ठेला
ऊपर चुचियों पर अनुज की उंगलियां तो नीचे बुर में आडा टेडा घुसता उसका लंड , सिसक पड़ी रागिनी
: उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह हल्के हल्के बेटा उम्ममम कितना अंदर ले जाएगा
: उम्मम पूरा ले जाऊंगा मम्मी ओह्ह्ह्ह कितनी गर्म और सॉफ्ट है आपकी बुर ओह्ह्ह्ह और आपकी गाड़ कितनी मुलायम है ओह्ह्ह्ह मजा आ रहा है मम्मी सच में उम्ममम और आपको ?
: उम्मम हा बेटा अह्ह्ह्ह्ह अच्छा लग रहा है ओह्ह्ह्ह तेरा लंड बहुत टाइट है और जल रहा है अंदर ओह्ह्ह्ह
: ढीला कर दूं ( अनुज अपने आगे वाले हाथों से अपनी मां की नंगी चूचियों को सहलाते घुलाते हुए कहा)
: उम्ममम सीईईई कर दे बेटा !! ओह्ह्ह कैसे करेगा अह्ह्ह्ह्ह सीईईई दादा ओह्ह्ह्ह उफ्फ आराम से
रागिनी ने कहने की देरी थी कि अनुज ने उसकी छातियों को पकड़ कर पीछे से करारे तेज झटके देकर अपनी मां की बुर में जगह बनाने लगा
: उन्ह्ह मम्मीई करने दो न ओह्ह्ह्ह कितना मस्त है बहुत टाइट है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह फक्क यू मम्मी मेरी सेक्सी मम्मा ओह्ह्ह्ह उम्ममम
: अह्ह्ह्ह हा बेटा कर ले उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह ओह्ह्ह उम्ममम ऐसे ही और अंदर कर न
: रुको ऐसे और अच्छे से जाएगा
अनुज ने चादर खींच कर ऊपर कर दी और अपनी मां की एक जांघ को उठा कर जगह बना दिया और लंड को पूरी गहराई में ले गया
: ओह्ह्ह्ह बेटा हा हा उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह ये तो सच में ओह्ह्ह्ह उम्ममम डाल चोद अब रुक मत उम्ममम खुजली हो रही है
: लो मम्मी मै हूं न मै दूर करूंगा आपकी बुर की खुजली ऐसे पेल कर ओह्ह्ह्ह लो मेरी मम्मी और लो उम्मम फक्क यूयू ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश यश उम्मम ओह्ह्ह्ह
: हा मेरे लाल और तेज ओह्ह्ह्ह सीई ओह्ह्ह्ह बेटा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई और और पेल अपनी मम्मी को उम्ममम तुझे पेलना था न अपनी मम्मी को उम्मम बोल न मेरा बच्चा
: ओह्ह्ह्ह हा मम्मी बहुत ज्यादा , कितने दिन से सोच रहा था ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह हाथ दुख रहा है उम्ममम
: तो ऊपर आजा बेटा , ऐसे
रंगीनी ने आगे होकर जगह बदली और पीठ के बदल जांघों को खोल कर सीधा हो गई और अनुज उसके सामने आकर अपना लंड उसकी बुर में सेट करते हुए सरसरा कर अंदर उतार दिया
: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह कितना बड़ा है तेरा बेटा उम्मम कितना मोटा भी
अनुज पूरे जोश में अपनी मां की बुर में लंड पेले जा रहा था और रागिनी की छातियां खूब हिल रही थी
: हा मम्मी आज बहुत टाइट है ओह्ह्ह्ह आपकी बुर ने और बड़ा कर दिया है ओह्ह्ह्ह मम्मी ओह्ह्ह्ह कितनी गीली हो रही है आपकी बुर मम्मीइई ओह्ह्ह्ह
: झड़ रही हूं बेटा उम्मम रुक मत तू चोद मुझे ओह्ह्ह्ह अंदर और कस के पेल , पूरा ऊपर आजा
रागिनी ने अनुज को अपने ऊपर खींच लिया ताकि अनुज अच्छे से अपनी कमर को पटक सके
सीखने का सिलसिला जारी था और अनुज तो पहले से ही उस्ताद थे चुदाई के पैंतरों में बस पहल करने से भागता था , लेकिन शायद आज ये डर भी खत्म हो जाएगा, ऐसा लग रहा था
वो अपनी मां की नंगी चूचियों को टूट पड़ा और उन्हें चूसते हुए तेजी ने नीचे उसके बुर में पेले जा रहा था
: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह बेटा चूस ले पी ले उम्ममम थक गया होगा न मेरा लाल उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई कितना तेज कर रहा है तू ओह्ह्ह्ह
: हा मम्मी मेरा भी आयेगा उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह
: अन्दर नहीं बेटा ओह्ह्ह जल्दी से बाहर कर ले
: फिर कहा निकलूं बोलो जल्दी ओह्ह्ह्ह आने वाला है उन्ह्ह्ह मम्मीईईईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम बोलो न
: वही बाहर निकाल दे
: ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई अह्ह्ह्ह आ रहा है उम्मम बहुत ज्यादा है ओह्ह्ह्ह
अनुज चिंघाड़ता हुआ अपनी मां के चूत के ऊपर ही झड़ने लगा
: हा बेटा आने से निकाल दे सब अपनी मां की बुर के ऊपर ओह्ह्ह्ह मेरा बच्चा ओह्ह्ह्ह कितना गर्म है तेरा पानी ओह्ह्ह्ह उम्ममम
उसके वीर्य की तेज पिचकारी रागिनी के मुंह और चूचों तक गई
: उम्मम मम्मीइई आई लव यू सो ओह्ह्ह्ह ( अनुज अपना लंड झाड़ते हुए बोला )
: मै भी , मेरा बच्चा आजा
रागिनी ने बड़े दुलार में उसे अपने पास बुलाया और अनुज उसके पास चला गया और रागिनी ने उसे अपने छातियों से चिपका लिया और उसके माथे को चूम ली
अनुज खुश था ... अनंत: उसने वो अंतिम दहलीज पार कर ली जो एक मा बेटे के बीच की पतली सी लकीर थी ... आज फिर से दोनों के बीच प्यार की एक नई ताजगी उठ रही थी ... भले ही रागिनी ने अनुज के लंड के अपनी चूत खोल दिए हो लेकिन अभी भी उसके दिल ने अनुज उसका लाडला बेटा ही रहेगा वो ऐसा सोच रही थी, जिसे वो कभी अपने आप से जुदा नहीं कर सकती थी अपने बेटे के रूप में .
जारी रहेगी
( अपडेट पसंद आया हो तो कर देना जो करना हो .... क्या बोलूं अब )
रात की सर्दी गहरा रही थी और साथ ही अनुज के देह की थकान भी
राज के कमरे में फुसफुसाहट अभी भी जारी थी , थोड़ी बहुत हसने की और ज्यादा तर रागिनी की खनकती हंसी
अनुज को भूख लगी थी और चुपचाप किचन में चला गया
चार पांच मुठ्ठी मूंगदाल वाली नमकीन , 3 4 कुरकुरे बिस्किट चबाने के बाद वो पानी पी रहा था बॉटल से
तभी हाल में पायलों की खनक तेज हुई
जैसे जैसे पायलों की रुनझुन उसके कानो में तेज हो रही थी , एक बेचैनी एक हड़बड़ाहट अनुज के भीतर बढ़ रही थी और वो तेजी पानी बॉटल से सीधे गले में उतार रहा था
तभी एकदम से उसे अपने पीछे आहट महसूस हुई पलट कर देखा तो सामने उसकी मां रागिनी खड़ी थी , उसके ख्यालों की मल्लिका की तरह निर्वस्त्र , देह पर बस एक पैंटी , वही पैंटी जो उसने राज के पास जाने से पहले अपने कमरे में अनुज के सामने उतार फेंकी थी
अनुज अपना मुंह फुलाए आंखे बड़ी कर चौकन्नी निगाहों से अपनी नंगी मां को अपने सामने ऊपर से नीचे देख रहा था , उसकी बड़ी बड़ी रसीली नंगी छातियां , गोरा बदन, गुदाज मुलायम पेट , चौड़ी घुमावदार कमर , उठे हुए चर्बीदार कूल्हे और चिकनी गदराई जांघें और वो पैंटी जिसमें रागिनी की फूली हुई चूत साफ नजर आ रही थी
अनुज की नजर अपनी मां की पैंटी पर जम गई , सीईईई एक पल के लिए चुक गया , कमरे में होता तो मां की नंगी बुर के दर्शन हो जाते
देह अंदर से चूर चूर हुआ था लेकिन लंड वापस से लोवर में सलामी देने के लिए तैयार खड़ा था
रागिनी उसकी निगाहों का पीछा कर अपनी नंगी छातियो को हाथों से ढक लिया और मुस्कुरा कर : यहां क्या कर रहा है तू
: मै तो पानी पीने आया था और आप ?
रागिनी मुस्कुरा कर उसे देख रही थी और उसके नंगे तलुओं से सर्दी उसके पूरे बदन में फैल रही थी
: मै भी पानी लेने आई हूं
: तो लेलो !!
अनुज बोटल देकर आगे बढ़ा
दोनों की नजरे मिली , मानो दोनों कुछ चाहते थे
: क्या कर रहा है
: बस थोड़ा हग
: पागल आजा, मेरा बच्चा
रागिनी ने नंगे ही आगे बढ़ कर उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसकी नंगी चूचिया अनुज के सीने पर चिपक गई
अपनी मां की नंगी पीठ को सहलाने का मौका नहीं छोड़ने वाला था अनुज
: उम्मम तेरे हाथ बहुत ठंडे है बेटा
: और आप बहुत गर्म हो मम्मी ओह्ह्ह्ह , कितनी मुलायम हो आप
: उम्मम क्या कर रहा है पागल ओह्ह्ह छोड़ न
: सीईईई करने दो न मम्मी मुझे भी , मै भी बड़ा हो गया हूं
: अच्छा सच में अह्ह्ह्ह तो क्या अब तू मेरे चूतड़ों को सहलाएगा अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह बेटा
: मै तो इन्हें ऐसे फैलाऊंगा भी ओह्ह्ह्ह कितनी मोटी गाड़ है मम्मी आपकी बहुत सेक्सी
अनुज अपनी मां को हग कर अपने नंगे पंजे रागिनी के नंगे चूतड़ों को टहलाने लगा
: धत् बदमाश ऐसे गंदे गंदे बोलेगा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ये क्या है ?
: नुनु मेरा उम्ममम ( अनुज ने रागिनी की उंगलियों को अपने लंड के पास सरकते महसूस कर बोला )
: कितना टाइट है ओह्ह्ह्ह
: आपको और भइया को देख कर अह्ह्ह्ह सीईईईईई मम्मीइई ओह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है
: क्यों ?
: कबसे खड़ा है न इसीलिए
: चल झूठा , दरवाजा गीला किया तब भी छोटा नहीं हुआ तेरा उम्मम
: हीही ( अनुज शर्माने लगा जब रागिनी ने उसको चोरी पकड़ी)
: इसको नीचे कर थोड़ा आराम मिलेगा ( ये बोलकर रागिनी ने उसका लोवर नीचे सरकाते हुए बैठ गई और अनुज को एक उम्मीद सी उठने लगी )
: ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई उम्मम ( अनुज का लंड उसके अंडरवियर में अब फूल रहा था और रागिनी भी साफ साफ देख रही थी )
: कैसे सांस ले रहा है ये तो ( रागिनी ने उंगलियों से छू कर उसे अंडरवीयर के ऊपर से सहलाया )
: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह आराम से मम्मीइई ओह्ह्ह्ह
रागिनी के नंगे घुटने पर ठंडी फर्श की टाइल चुभ रही थी और उसका पूरा जिसम ठंडा पड़ रहा था , वो समझ रही थी कि उसका लाडला बहुत बेचैन है और उसे तत्काल आराम की जरूरत है
रागिनी उठ गई
: क्या हुआ ? ( टूटती निराशा में उम्मीद बांध कर वो बोला )
: चल !!
: कहा ?
रागिनी कुछ नहीं बोली और वैसे ही नंगी अनुज का हाथ पकड़ अपने कमरे की ओर बढ़ गई
अनुज का लोवर अभी भी उसके घुटनों में फंसा हुआ था , किसी तरह वो फंसता अटकता रागिनी की उंगलियों को थामे वो उसके कमरे तक आया
अपने आगे अपनी मां की नंगी थिरकती चूतड़ों को निहारते हुए
रागिनी कमरे आई और फिर कमरे का दरवाजा लगा दिया
: चल इसको निकाल कर लेट जा
अनुज को समझ नहीं आया कि आखिर उसकी मां ने उसको सोने के लिए कहा कि उसका इरादा कुछ और है
डर यही था कि आंखे बंद कर सो जाने का फरमान न हो जाए
रागिनी ने अनुज के टीशर्ट और लोवर निकाल कर सिर्फ अंडरवियर में होने की राह देखी और जब वो कम्बल के गया तो खुद भी उसके पास आ कर उसके बराबर में लेट गई करवट होकर
थोड़ी देर उसने अनुज को शांत और अपनी ओर घूरते देखा , फिर मुस्कुराई और अनुज की थोड़ा चिढ़ गया और भुनकने लगा
: उम्हू करो न
: क्या करूं ( रागिनी मुस्कुराई )
: सच में दर्द हो रहा है
: कहा ? यहां !! ( रागिनी ने हाथ आगे कर उसके अंडरवियर में बने बड़े से तंबू को सहला कर कहा )
: ओह्ह्ह्ह हा वही उसको बाहर निकाल दो
: तू न राज से भी बढ़ कर है , ओह्ह्ह देखो तो कितना टाइट कर रखा है । कितना बदमाश है तू दरवाजा खुलवाने के लिए कितना तिगड़म लगाया तूने उम्मम
: आह्ह्ह्ह सीई तो आपने बंद क्यों किया था
: मैने नहीं , राज ने किया था ओह्ह्ह देखो तो कैसे लाल हो रखा है सीईईई ओहो कबसे रगड़ रहा था तू इसे उम्मम ( रागिनी हौले हौले अनुज का लाल हुआ लंड आगे पीछे कर रही थी )
: जबसे आप गए तबसे , ओह्ह्ह्ह कितना मन था मेरा देखने का , दरवाजा बंद था तो सब कुछ सोचने लगा था
एक पल को रागिनी ठहरी और उसे भी जिज्ञासा हुई कि अनुज क्या सोच रहा था उसके बारे में : क्या सोच रहा था उम्मम बोल ( रागिनी ने उसका सुपाड़ा खोलते हुए बोली )
: ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई अह्ह्ह्ह सीईईईईई उफ्फफ उम्ममम
: बोल न , क्या सोच रहा था अनुज एक नजर रागिनी को देखा फिर मुस्कुराने लगा
: अच्छा सच सच बताना , भैया आपकी साड़ी हटा कर दूध पी रहा था न ( अनुज ने मासूमियत से पूछा )
: हम्ममम ( रागिनी मुस्कुरा कर बस हुंकारी भरी और अनुज का लंड उसके हथेली में फुदका )
: मुझे लगा ही था
: और क्या सोच रहा था
रागिनी के लंड को सहलाते हुए बोली
: फिर भैया की आवाज आ रही थी और उसे सुनकर लगा कि आप भैया का चूस रहे होगे
: हम्ममम तो गीला करना पड़ता है न ( रागिनी ने थोड़ा सा मौका दिया आगे आने का )
: हम्ममम फिर आपको देखा दरवाजे से आप भइया का मुंह में ले रहे थे और भैया आपका गाड़ छू रहा था
रागिनी अनुज को बोले जा रहे एक एक शब्द में उसके लंड की नसों की पंपिंग महसूस कर रही थी अपनी हथेली में
: हा तो दुकान पर तेरा भी तो किया था न ,
: हम्ममम लेकिन आपको देख कर मेरा भी मन किया कि मै भी अंदर आजाऊँ और आप मेरा भी चूसो साथ में
: क्या साथ में !!! पागल है क्या ?
: क्यों ? साथ में नहीं कर सकती हो ( मन ही मन अब अनुज के दिल में एक नई कल्पना ने अपनी जगह बना ली थी और उसे सोच कर उसका लंड फनकार मारने लगा )
: तू ज्यादा नहीं सोच रहा था ( रागिनी ने अनुज के लंड की बढ़ती मोटाई को अपने पंजों में महसूस किया )
: उम्मम तो क्या हुआ , आप कर लोगे मुझे पता है ? अह्ह्ह्ह सीईईईईई मम्मी सहलाओ न कस के
: दर्द होगा तो ?
: अब नहीं हो रहा है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह मम्मीइई आपका हाथ बहुत सॉफ्ट है उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई
रागिनी बस शांति से उसका लंड सहलाने लगी
: मम्मी ?
: हम्ममम !!
: बोलो न !
: क्या ?
: चूसोगे मेरा और भैया का साथ में ( अनुज के लंड की नसे अब फूल गई थी और खून मानो में उसके लंड में भर आया या , रागिनी उसके लंड की गर्मी महसूस कर रही थी )
उसके दिल की धड़कने तेज हो गई और उसके दिल में भी इच्छा होने लगी , अनुज के दिखाए सपने उसके जहन में घर करने लगे , उसने कस कर भींच लिया अनुज एक लंड और सहलाने लगी
: बोलो न मम्मीईईई ओह्ह्ह्ह प्लीज जल्दी ओह्ह्ह्ह
: लेकिन मैने कभी किया नहीं बेटा , राज ने कितनी बार मुझे तेरे पापा के बगल में चोदा है , लेकिन कभी मैने साथ में नहीं किया दोनों के
: ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई तो क्या हुआ एक बार ट्राई करो न प्लीज मेरे लिए ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह मम्मी प्लीज न
: उम्मम ठीक है
: ओह्ह्ह्ह कब करोगी मम्मीइई ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह बोलो न जल्दी उम्मम बताओ न जल्दी ओह्ह्ह्ह आएगा मेरा बोलो न मम्मी
: कल
: ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह आ रहा है ओह्ह्ह्ह हिलाओ उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह
एक बाद एक मोटी थक्केदार गाढ़ी पिचकारियां छूटने लगी और अनुज का लंड वीर्य उगलने लगा और झड़ता रहा अपने ही पेट और और रागिनी उसके लंड को निचोड़ती रही
एक ओर जहां रागिनी अगली सुबह दो लंड एक साथ लेने सपने संजो रही थी
वही दूसरी ओर शहर की सुनसान रातों में रज्जो उस सपने को हकीकत में बुनने जा रही थी
खुशबू का मोटा लंबा लंड उसकी गाड़ की सुराख को चौड़ी करता हुआ उसे करवट कर पेले जा रहा था
रज्जो की कामुक चीखे पूरे कमरे में गूंज रही थी
वही कमरे के दरवाजे पर खड़ी मुस्कान का लंड अकड़ कर फूल रहा था
रज्जो की नजर उस पर पड़ी और मुस्कुराकर उसने मुस्कान को अपनी ओर बुलाया
मुस्कान जल्दी ही अपने कपड़े निकाल कर अपनी पैंटी से अपना लंड बाहर निकालती हुई रज्जो के मुंह के पास खड़ी हो गई
रज्जो जो पीछे से अपनी गाड़ में खुशबू के करारे झटके खा रही थी वो मुंह खोलकर मुस्कान का सुपाड़ा मुंह में पकड़ने की कोशिश करने लगी तो मुस्कान ने खुद अपना लंड को उसके होठों तक ले गई , रेंज में आते ही रज्जो ने जीभ आगे बढ़ा कर उसके सुपाड़े को होठों में दबोच लिया
: ओह्ह्ह्ह सेठानी जी उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई
अब तो रज्जो को बहुत मस्कत की जरूरत नहीं थी , पीछे से खुशबू चिंघाड़ कर रज्जो की गाड़ में तगड़े झटके मार रहा था और रज्जो के मुंह में खुद ब खुद मुस्कान का लंड गले तक जाने
: ओह्ह्ह्ह यशस्स उम्ममम और डाल साली कुतीया का मुंह भर दे पूरा ओह्ह्ह्ह सीईईई साली क्या रसीली गद्देदार गाड़ है तेरी ओह्ह्ह बहनचोद उम्ममम खूब उछाल रही है ओह्ह्ह और अंदर डाल में मादरचोद
खुशबू ने मुस्कान को डाटा तो मुस्कान ने रज्जो का सर पकड़ कर उसके मुंह में पेलने लगी
: ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई और चूस सेठानी उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह पी जा उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह
मुस्कान रज्जो के मुंह में लगातार पेले जा रही थी
: रुक साली को इसके गाड़ का स्वाद चखाती हूं आजा मेरी रांड ले चूस इसे भी ओह्ह्ह्ह ले उफ्फ बहनचोद क्या माल है तू ओह्ह्ह्ह मेरी रंडी ले ओह्ह्ह्ह उम्ममम ऐसे ही ओह्ह्ह
नीचे रज्जो बड़े चाव से अपने चूतड़ों से निकले खुशबू के लंड को चूस रही थी और बारी बारी से मुस्कान को भी बराबर समय दे रही थी
वही ऊपर खुशबू ने मुस्कान के चूचे पकड़ कर उसके लिप्स चूसने लगी थी और दोनों का चुम्बन काफी तेज था
मुस्कान जिस आस से खुशबू को बुलाई थी उसके पूरे होने का समय आ गया था
उसने रज्जो के सामने आकर अपना लंड रज्जो की बुर में उतार दिया और पेलने लगी
एक बार फिर रज्जो की सिसकिया कमरे में उठने लगी
इधर खुशबू भी मुस्कान के पीछे होकर अपने सुपाड़े को लार से चमकाने लगी थी
उसके पंजे पर मुस्कान की तेजी से ऊपर नीचे होती चिकनी गाड़ पर चल रहे थे
और मुस्कान समझ गई कि असल बेला आ गई है , फिर वो हल्की हो गई , रज्जो को समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है , उसके बुर में तलहका मचा था , उसे लंड के घर्षण की जरूरत थी , उसने मुस्कान को जोश दिलाने के लिए उसकी झूलती चुचियों को पीने लगी और काटने लगी , मुस्कान मचल उठी लेकिन फिर वो स्थिर हो गई जब खुशबू ने ने थूक लेकर मुस्कान के गाड़ के सुराख को छुआ
मुस्कान का पूरा बदन गिनगिना उठा , उसके लंड की नसों में नई ऊर्जा उठने लगी थी, रज्जो को अपनी बुर की फांकों में वो फैलाव महसूस होने लगा
: अह्ह्ह्ह आराम से राजा उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई हाय हाय फाड़ देगी क्या उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ( ये सिसकी मुस्कान की थी जिसके कसे गाड़ की सुराख में खुशबू अपना मोटा सुपाड़ा घुसा चुकी थी )
: चुप बहनचोद ओह्ह्ह्ह बड़ी टाइट गाड़ है तेरी , किसी ने ली नहीं क्या उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई साली ओह्ह्ह्ह उम्ममम कितना ज्यादा कसा है ( खुशबू ने मुस्कान के गाड़ की गहराई नापने लगा )
जैसे जैसे खुशबू मुस्कान के गाड़ में चढ़ कर लंड अंदर घुसेड़ रही थी ,वैसे ही ठीक नीचे मुस्कान का लंड रज्जो की बुर में गहराई में जाने लगा
रज्जो और मुस्कान दोनों की आंखे बड़ी होने लगी , मुंह खुलने लगा और पहले कमरे में मुस्कान की कर्कश चीखे पूरे कमरे को हिलाने , फिर जब खुशबू ने पूरी ताकत से उसके गाड़ पर चढ़ कर हमचना शुरू किया तो मुस्कान का लंड और फूलता हुआ रज्जो की बुर की फांकों को चीरने लगा और जड़ में जाने लगा
अब सब खुशबू एक धक्के मारती , मुस्कान और रज्जो साथ में चीखते
।
: ओह्ह्ह सीईईई बहनचोद तुम दोनों की गाड़ मारूंगी आज ओह्ह्ह्ह चीखों रंडियों ओह्ह्ह्ह उम्ममम उम्मम
: अह्ह्ह्ह मेरे राजा मारो फाड़ दो मेरी गाड़ ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह रुकना मत मजा आ रहा है
: हा खुशबू पेल और कसके उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई अह्ह्ह्ह इसका मूसल मेरे चूत में भाले जैसा चल रहा है ओह्ह्ह्ह ऐसा मजा मैने कभी नहीं किया ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह मै तो ये देख कर ही झड़ रही हूं उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई रुकना मत पेलो ओह्ह्ह्ह
खुशबू भी ताबड़तोड़ पेलाई करने लगा
: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह पेलो राजा आयेगा मेरा भी ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई
: ओह्ह्ह मेरा भी आयेगा ओह्ह्ह भर दूंगी तेरी गाड़ अपने माल से ओह्ह्ह्ह फिर इस रंडी से चुसवाऊंगी ओह्ह्ह बोल बहनचोद चुसेगी
: अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह्ह लाओ जल्दी ओह्ह्ह्ह मै तो पूरी मलाई चाट जाऊ उम्मम मुझे भी चाहिए ओह्ह्ह
: लें बहनचोद ओह्ह्ह्ह गॉड उम्ममम
: ओह्ह्ह सीईईई आ मेरे राजा मै भी गई
: उम्मम मेरा तो दुबारा हो रहा है ओह्ह्ह्ह ( रज्जो बोली)
तीनों एक साथ इस रोमांचक चुदाई में झड़ रहे थे
रज्जो के साथ उसकी बुर में मुस्कान और मुस्कान की गाड़ में खुशबू
फिर तीनों वैसे ही नंगे चिपक कर थक कर सो गए
ये लोग तो सो गए लेकिन चमनपुरा में अभी भी अनुज के आंखों से नीद गायब थी
सुबह से चौथी बार झड़ने के बाद भी उसके भीतर की वासना आज बैठने का नाम नहीं ले रही थी ,देह में सुस्ती बढ़ने लगी थी लेकिन अपनी नंगी सोई हुई मां के पास सोने का ख्याल उसकी आंखों से नीद गायब किए हुए था ।
रागिनी उसकी ओर पीठ कर करवट लेकर चादर ओढ़े हुए नंगी ही वैसे पैंटी में सोई थी
अनुज की एक जांघ अभी भी उसके नंगे मुलायम गर्म चर्बीदार चूतड़ों पर टिकी थी और शायद वही वजह थी कि अनुज अभी भी अपने मा के जिस्म की नर्माहट महसूस कर रहा था , लेकिन लंड का बुरा हाल था ... इतनी खस्ता हालत उसकी कभी भी नहीं हुई , और इतना बार तो कभी पहले झड़ा भी ... शिवाय सोनल की शादी के बाद जब उसने अपने भैया के साथ मिल कर अपनी मौसी और बुआ को एक साथ
चोदा था सुबह ने 04 बजे तक , याद नहीं कितनी बार झड़ा रहा होगा अनुज ।
मन ही मन हिम्मत जुटा रहा था वो क्योंकि इससे बेहतर मौका अब उसे नहीं मिलने वाला था
कलेजा मजबूत कर उसने अपनी मां की ओर करवट हो लिया और सरक कर जांघों से जांघें सटा ली, पेट सीधा रागिनी की कमर पर और सीना पीठ पर , हाथ आगे कर पेट पर
रागिनी ने कुनमुना उसकी बाह अपनी ओर खींच ली, नतीजा अनुज का खड़ा टाइट लंड सीधा रागिनी के नंगी चूतड़ों के दरारों में चिपक गया नीचे की ओर मुंह किए
अनुज का लंड लोहे की तरह तप रहा था और रागिनी के जिस्म में भी आग दहक रही थी , जल्द ही दोनों के बदन की गर्मी बढ़ने लगी , दोनों के सटे हुए अंग में चिपचिपाहट होने लगी और लंड एकदम फड़फड़ाने लगा
: अनुज !! क्या कर रहा है सो जा अब
: सो ही तो रहा हूं
: फिर ये क्या है ? उम्मम मार खायेगा अब समझा
( कितना भी दुलार ले , खुल कर बातें कर ले , प्यार कर ले लेकिन अपनी मां होने जगह रागिनी ने अनुज के लिए कभी नहीं त्यागी , उसकी नादानियों पर अभी वो उसे डांट लगाने से परहेज नहीं कर रही थी )
: कुछ भी तो नहीं कर रहा हूं ( ये बोलकर अनुज ने अपने हाथ आगे कर रागिनी की नंगी चूचियों को हथेली में भर लिया और अपना लंड रागिनी के गाड़ की कसी दरारों में रगड़ने लगा )
: सीईईई ओह्ह्ह धत्त छोड़ , पीछे हट मार खायेगा अब तंग मत कर , कितना करेगा? सुबह से 04 बार हुआ न तेरा ? तबियत खराब हो जाएगा बेटा!! ( थोड़ी नाराज फिर एकदम से प्रेम और फिकर में बोली रागिनी )
: बस एक बार ऐसे ही डाल के सो जाऊंगा , पक्का
: धत्त नहीं
: क्यों पापा नहीं सोते है क्या डाल के
: हीही पागल है क्या तू , डाल के कौन सोता है
: मै सोऊंगा अब से , निकालो न इसे अह सीई ( अनुज रागिनी कच्छी खींचने लगा )
: नहीं अनुज मार खायेगा अब छोड़ उसे , देखो तो बदमाश को अह्ह्ह्ह नहीं रुक न ( रागिनी पूरी कोशिश नहीं कर रही थी , उसे तो अपने लाडले के स्टैमिना पर बड़ा गर्व था कि दुपहर से 04 बार झड़ने के बाद गजब का कड़कपन है उसके लंड में )
:बस निकल गया , पैर ऊपर करो
कर ली अनुज ने अपनी मनमानी और रागिनी ने खुद से अपनी टांगे उठा कर पैंटी निकाल दी और निकालते हुए अनुज के अपना लंड उसके गाड़ के सकरे दरखतों में पेल दिया
: ओह्ह्ह्ह सीई पागल सुखा है वहां कहा डाल रहा है ओह्ह्ह्ह , रुक !!! ( शायद रागिनी ने अपने गाड़ की सुराख की चमड़ी में खिंचाव महसूस किया था अनुज के लंड से और वो अनुज को डांट लगाई )
फिर रागिनी ने अपने मुंह से लार लेकर हाथ पीछे से गई और अनुज का सुपाड़ा पकड़ के उसे मिजने लगी
: ओह्ह्ह्ह यशस्स मम्मीइई ओह्ह्ह्ह उम्ममम
: अब जो करना है कर ( रागिनी ने अपने चूतड़ ऊपर कर अनुज के लंड के लिए अपने चूत की सही पोजीशन दे दी )
: थोड़ा खोलो न ( अनुज ने रागिनी जांघें चादर के अंदर की हाथ डाल कर थोड़ा चूत के फांकों के पास गैप बनाया ताकि उसका लंड सही जगह पहुंच सके )
: सीईईई ओह्ह्ह आराम से नाखून चुभ रहा है तेरा पागल उम्मम हा वही है अह्ह्ह्ह सीईईई नहीं आगे चला गया , थोड़ा पीछे से ऊपर हा हा उम्ममम धीरे नहीं तो मारूंगी अभी अह्ह्ह्ह मम्मीइई कितना टाइट है तेरा सीईईई ओह्ह्ह्ह
फाइनली अपनी मां की गाइडेंस में अनुज का सुपाड़े रागिनी के बुर के फांकों में नीचे से दाखिल हो गया था और वहा की पिघलती गर्मी उसे अपने सुपाड़े पर महसूस हो रही थी
: ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई ओह्ह्ह्ह कितना जल रहा है सीई ओह्ह्ह्ह
अनुज अपने हाथ टटोल कर आगे वापस से अपनी मां की नंगी चूचियों पर ले गया और लंड को थोड़ा दबाव देकर और अंदर ठेला
ऊपर चुचियों पर अनुज की उंगलियां तो नीचे बुर में आडा टेडा घुसता उसका लंड , सिसक पड़ी रागिनी
: उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह हल्के हल्के बेटा उम्ममम कितना अंदर ले जाएगा
: उम्मम पूरा ले जाऊंगा मम्मी ओह्ह्ह्ह कितनी गर्म और सॉफ्ट है आपकी बुर ओह्ह्ह्ह और आपकी गाड़ कितनी मुलायम है ओह्ह्ह्ह मजा आ रहा है मम्मी सच में उम्ममम और आपको ?
: उम्मम हा बेटा अह्ह्ह्ह्ह अच्छा लग रहा है ओह्ह्ह्ह तेरा लंड बहुत टाइट है और जल रहा है अंदर ओह्ह्ह्ह
: ढीला कर दूं ( अनुज अपने आगे वाले हाथों से अपनी मां की नंगी चूचियों को सहलाते घुलाते हुए कहा)
: उम्ममम सीईईई कर दे बेटा !! ओह्ह्ह कैसे करेगा अह्ह्ह्ह्ह सीईईई दादा ओह्ह्ह्ह उफ्फ आराम से
रागिनी ने कहने की देरी थी कि अनुज ने उसकी छातियों को पकड़ कर पीछे से करारे तेज झटके देकर अपनी मां की बुर में जगह बनाने लगा
: उन्ह्ह मम्मीई करने दो न ओह्ह्ह्ह कितना मस्त है बहुत टाइट है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह फक्क यू मम्मी मेरी सेक्सी मम्मा ओह्ह्ह्ह उम्ममम
: अह्ह्ह्ह हा बेटा कर ले उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह ओह्ह्ह उम्ममम ऐसे ही और अंदर कर न
: रुको ऐसे और अच्छे से जाएगा
अनुज ने चादर खींच कर ऊपर कर दी और अपनी मां की एक जांघ को उठा कर जगह बना दिया और लंड को पूरी गहराई में ले गया
: ओह्ह्ह्ह बेटा हा हा उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह ये तो सच में ओह्ह्ह्ह उम्ममम डाल चोद अब रुक मत उम्ममम खुजली हो रही है
: लो मम्मी मै हूं न मै दूर करूंगा आपकी बुर की खुजली ऐसे पेल कर ओह्ह्ह्ह लो मेरी मम्मी और लो उम्मम फक्क यूयू ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश यश उम्मम ओह्ह्ह्ह
: हा मेरे लाल और तेज ओह्ह्ह्ह सीई ओह्ह्ह्ह बेटा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई और और पेल अपनी मम्मी को उम्ममम तुझे पेलना था न अपनी मम्मी को उम्मम बोल न मेरा बच्चा
: ओह्ह्ह्ह हा मम्मी बहुत ज्यादा , कितने दिन से सोच रहा था ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह हाथ दुख रहा है उम्ममम
: तो ऊपर आजा बेटा , ऐसे
रंगीनी ने आगे होकर जगह बदली और पीठ के बदल जांघों को खोल कर सीधा हो गई और अनुज उसके सामने आकर अपना लंड उसकी बुर में सेट करते हुए सरसरा कर अंदर उतार दिया
: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह कितना बड़ा है तेरा बेटा उम्मम कितना मोटा भी
अनुज पूरे जोश में अपनी मां की बुर में लंड पेले जा रहा था और रागिनी की छातियां खूब हिल रही थी
: हा मम्मी आज बहुत टाइट है ओह्ह्ह्ह आपकी बुर ने और बड़ा कर दिया है ओह्ह्ह्ह मम्मी ओह्ह्ह्ह कितनी गीली हो रही है आपकी बुर मम्मीइई ओह्ह्ह्ह
: झड़ रही हूं बेटा उम्मम रुक मत तू चोद मुझे ओह्ह्ह्ह अंदर और कस के पेल , पूरा ऊपर आजा
रागिनी ने अनुज को अपने ऊपर खींच लिया ताकि अनुज अच्छे से अपनी कमर को पटक सके
सीखने का सिलसिला जारी था और अनुज तो पहले से ही उस्ताद थे चुदाई के पैंतरों में बस पहल करने से भागता था , लेकिन शायद आज ये डर भी खत्म हो जाएगा, ऐसा लग रहा था
वो अपनी मां की नंगी चूचियों को टूट पड़ा और उन्हें चूसते हुए तेजी ने नीचे उसके बुर में पेले जा रहा था
: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह बेटा चूस ले पी ले उम्ममम थक गया होगा न मेरा लाल उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई कितना तेज कर रहा है तू ओह्ह्ह्ह
: हा मम्मी मेरा भी आयेगा उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह
: अन्दर नहीं बेटा ओह्ह्ह जल्दी से बाहर कर ले
: फिर कहा निकलूं बोलो जल्दी ओह्ह्ह्ह आने वाला है उन्ह्ह्ह मम्मीईईईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम बोलो न
: वही बाहर निकाल दे
: ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई अह्ह्ह्ह आ रहा है उम्मम बहुत ज्यादा है ओह्ह्ह्ह
अनुज चिंघाड़ता हुआ अपनी मां के चूत के ऊपर ही झड़ने लगा
: हा बेटा आने से निकाल दे सब अपनी मां की बुर के ऊपर ओह्ह्ह्ह मेरा बच्चा ओह्ह्ह्ह कितना गर्म है तेरा पानी ओह्ह्ह्ह उम्ममम
उसके वीर्य की तेज पिचकारी रागिनी के मुंह और चूचों तक गई
: उम्मम मम्मीइई आई लव यू सो ओह्ह्ह्ह ( अनुज अपना लंड झाड़ते हुए बोला )
: मै भी , मेरा बच्चा आजा
रागिनी ने बड़े दुलार में उसे अपने पास बुलाया और अनुज उसके पास चला गया और रागिनी ने उसे अपने छातियों से चिपका लिया और उसके माथे को चूम ली
अनुज खुश था ... अनंत: उसने वो अंतिम दहलीज पार कर ली जो एक मा बेटे के बीच की पतली सी लकीर थी ... आज फिर से दोनों के बीच प्यार की एक नई ताजगी उठ रही थी ... भले ही रागिनी ने अनुज के लंड के अपनी चूत खोल दिए हो लेकिन अभी भी उसके दिल ने अनुज उसका लाडला बेटा ही रहेगा वो ऐसा सोच रही थी, जिसे वो कभी अपने आप से जुदा नहीं कर सकती थी अपने बेटे के रूप में .
जारी रहेगी
( अपडेट पसंद आया हो तो कर देना जो करना हो .... क्या बोलूं अब )