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विशाल ने बेड के पास जा कर उसपर घोड़ी बनी सानिया के पीछे खड़ा हो गया। सानिया की ऐडियों में अब भी पैंटी और सलवार फंसी हुई थी। विशाल ने उन दोनों को खींच कर सानिया को नंगी कर दिया।
सानिया को विशाल के होने का एहसास हुआ तो होने वाला हमला भी याद आया। अपनी अम्मी से लिपटकर सानिया ने आंखे बंद कर ली।
सानिया ने सलमा की चुचियों को चूमते हुए, "
सलमान… सलमान…"
सलमा ने सानिया की पीठ के ऊपर से विशाल को देखा। विशाल की आंखों में गुस्सा देख सलमा ने दिल पर पत्थर रखकर विशाल को हां कर दिया।
विशाल ने एक पल के लिए सोचा कि वह इस मौके का फायदा उठाकर अपने सूखे लौड़े से सानिया की गांड़ खोल दे। पर सानिया की एक मासूमियत भरी सिसकी ने उसके अंदर के भेड़िए को रोक दिया।
विशाल ने सानिया के जवान दिल में पनपती आशिकी को पहचान कर झुकते हुए सानिया की पंखुड़ियों को चाटा। सानिया सलमान का नाम जपते हुए अटक गई तो विशाल मन ही मन मुसकाया। विशाल ने सानिया के निचले होठों को धीरे धीरे चाटते हुए गिला कर फैलाया। सानिया न चाहते हुए जवानी के झूले पर चढ़ गई और उसकी पंखुड़ियों ने फूलते हुए अंदर के शहद के भंडार का दरवाजा खोल दिया। विशाल ने अपनी जीभ से चूत के अंदर चाटा तो नीचे से ऊपर आते हुए विशाल की जीभ सानिया के अब फुले हुए जवानी के अंगूर को छू गई।
सानिया, "
पापा!!!… ई!!!… गंदा!!… नहीं!!!… रुक जाओ!!!… पापा!!!…"
सानिया सलमान को भूल गई देख विशाल सानिया की चूत में मुस्कुराया और इनाम के तौर पर अपनी जीभ से सानिया की जवानी में गोता लगाया। सानिया ने चीख कर अपनी अम्मी को पकड़ लिया।
सलमा, "
सुनो जी, अब बच्ची को और मत तड़पाओ। पेल दो इसे!!"
हरी झंडी मिलते ही विशाल का फौलादी दोस्त झूम उठा। विशाल ने अपने लौड़े के सुपाड़े को सानिया के छेद पर टिका दिया तो वह फिर से सलमान का नाम लेने लगी।
विशाल ने पेहचाना की सानिया के प्यार में शिद्दत नहीं मासूमियत है। सानिया पर टूटने वाले कहर को पहचान कर विशाल ने मुस्कुराकर सानिया की कमर को अपने हाथों में कस कर पकड़ा।
विशाल ने अपनी कमर को आगे की ओर तेज़ झटका देते हुए सानिया को पूरी जोर से अपनी ओर खींच लिया।
सानिया, "
सलमान!… सलमान!… सलमा… आ!!!… आ!!!… आह!!!… अम्मी!!!… बचाओ!!!… अम्मी!!!… आह!!!… अंम… मी!!… आऽह!!…"
विशाल ने सानिया की फैली पंखुड़ियों पर अपने लौड़े की injection लगी जड़ को दबाए रखा। सानिया की चीखें कुछ कम होने लगी तो विशाल को एहसास हुआ कि उसके गोटों पर से बहते हुए गरम तरल की बूंदे चादर को रंग रही हैं। खून के प्यासे शेर ने हुंकार भरी और विशाल ने अपने लौड़े को सुपाड़े तक बाहर खींच लिया।
भोली सानिया को लगा की उसकी चूत से बहती गर्मी विशाल का मर्दाना पानी है। सानिया,
"
अम्मी अंदर से कुछ बह रहा है। पापा का हो गया है तो उन्हे हटने को कहो। मुझे दर्द हुआ और अब मुझे और नही करना।"
सलमा, "
मेरी गुड़िया रानी, अंदर से तो तेरी झिल्ली का खून निकल रहा है। पापा का प्यार तुझे बहुत मजा देने पर ही अपना पानी छोडेगा।"
सानिया, "
क्या? और भी सहना होगा? नहीं अम्मी!!… और नही सहा जायेगा!!…"
सानिया ने अपनी कमर को आगे बढ़ाने की कोशिश की तो विशाल के मजबूत हाथों ने उसे अपने लौड़े पर खींच लिया। पूरा लौड़ा फिर से यौन कमरे में दाखिल हो गया तो सानिया की दुबारा चीख निकली।
सानिया अब एक लड़की या औरत नहीं बस एक जख्मी मादा थी जो वहशी मर्द से बचना चाहती थी। सानिया जोर लगाकर आगे बढ़ती तो विशाल अपनी कमर को पीछे करते हुए उसकी चूत में से अपने लौड़े को सुपाड़े तक बाहर निकलने देता। जब सानिया आखरी 1 इंच से छुटकारा पाने में लगी होती तब विशाल की मजबूत बाहें सानिया के रेशमी बदन को खींच कर आगे बढ़ती कमर पर ठोक देते।
सानिया दर्द में बिलबिलाती अपनी चूत में विशाल के लौड़े को भींच कर सिसकते हुए विशाल को मजे देती। सानिया अब सलमान को पूरी तरह भूल गई थी और विशाल के साथ जवानी का खेल खेलने में व्यस्त थी।
विशाल ने इसका फायदा उठाकर अपनी बाहों को सानिया की बगल में से डाल कर सानिया को उठा लिया। सानिया अब विशाल के लौड़े पर नाच रही थी।
सानिया ने मदद के लिए सलमा से गुहार लगाई, "
अम्मी!!… आह!!…"
सलमा ने आगे बढ़कर सानिया को बाएं हाथ से सहारा दिया और अपना दाहिने हाथ को आगे बढ़ाते हुए सानिया की जख्मी पंखुड़ियों के जोड़ पर फूले जवानी के अंगूर को सहलाया।
सानिया इस दोहरे वार से चीख पड़ी तो सलमा ने उसे चूम कर चुप कराया। विशाल ने मां बेटी को चूमने देते हुए सानिया के संतरों को मुट्ठी में भर कर निचोड़ा।
चूत में होते घमासान और अपनी अम्मी के चुम्मे ने सानिया को जवानी की खुशी के कगार पर पहुंचाया था। अपनी अम्मी से अपनी कोरी चूत को सहलाने की उत्तेजना और मम्मों के निचोड़े जाने के दर्द से कराह कर सानिया का बदन कांपने लगा।
सानिया की चूत से खून की छटा लिए काम रस फूट पड़ा और सानिया झड़ते हुए ढेर हो गई।
सानिया, "
अम्मी!!… मैं थक गई हूं!!… मेरा बदन… जैसे गल गया है!!… पापा को… रोको!!… और… नहीं!!…"
सलमा, "
मेरी बहादुर बच्ची, थोड़ी देर और। तय हुआ था मर्दाना पानी, जनाना पानी नहीं। तेरी आपा को भरने से अब पापा को थोड़ी देर लगेगी।"
सलमा ने सानिया को चूमते हुए विशाल के गोटों को सहलाया। विशाल ने सानिया को अपने लौड़े पर खींच कर उसकी कोख में अपना रस भर दिया।
सानिया, "
अम्मी!!… अम्मी!!!… अम्मी!!!!… मेरे अंदर आग लगी है!!… मेरा पेट जलने वाला है!!…"
सलमा ने हंसकर, "
उफ्फ… तुम भी ना बहुत ड्रामेबाज हो। अभी तो पापा ने तुम्हें अपनी गर्मी से भर कर तुम्हे बचाया है। चलो अब अच्छी बच्ची की तरह अपने पापा को शुक्रिया कहो!"
सलमा वहीं बेड पर पेट के बल पैर फैलाए लेट गई। सलमा की चूत में से खून से सना गाढ़ा सफेद घोल मोटी मोटी बूंदों में चादर पर छलकने लगा। सानिया ने शर्माकर पीछे देखते हुए कहा, "
Thank You, Papa!!"