Ho gaya na KLPD ab dono baap beti apne Lund aur bur par hath rakh Kar Sona raat me are ha baap to apni Bibi ki bur me gusayega Lund lekin beti ki bur ka Kya hoga fir wahi baugan ya kheera hi ghusayegiअगले दिन सुबह हम लोग उठे और अपनी दिनचर्या से निवृत हुए.
नाश्ता वगैरह करने के बाद मैं और पापा सोफे पर बैठे हुए टीवी देख रहे थे.
मैं अपने वही शार्ट स्कर्ट और टी शर्ट में थी. जब से मम्मी गयी थी मैंने ब्रा और पैंटी पहनना तो लगभग छोड़ ही दिया था.
क्योंकि मेरी कोशिश थी कि किसी भी तरह मम्मी के आने से पहले पहले पापा से चुदवा लूँ. ताकि फिर यह सिलसिला चलता रहे.
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मुझे मालूम था की मम्मी को भी चुदाई बहुत पसंद है तो जब वो आ जाएँगी तो पापा को चुदाई के लिए तरसना नहीं पड़ेगा तो हो सकता है कि फिर पापा मेरी तरफ उतना ध्यान न भी दें.
मैंने पापा को थोड़ा छेड़ने का सोचा और पूछा
मैं :- पापा चाय पिएंगे या दूध ला दूँ?
पापा:- नहीं बेटी ! अभी तो नाश्ते के साथ चाय पी थी तो अभी कोई इच्छा नहीं है.
मैं :- तो पापा दूध ले लीजिये (यह कहते हुए मैंने अपनी छाती थोड़ी आगे को कर दी जैसे बोल रही हूँ कि यह दूध ले लो)
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पर पापा का ध्यान तो टीवी पर था तो उन्होंने गौर नहीं किया और मना कर दिया.
मैं :- पापा क्या बात है. आप को मेरा दूध पसंद नहीं है क्या?
(यह कह कर मैंने फिर से अपने मुम्मे आगे को किये तो अब पापा की नज़र मेरे मुम्मों पर पड़ी. वो समझ गए. )
पापा अपने लन्ड को अपनी लुंगी के ऊपर से ही सहलाते हुए बोले
पापा:- सुमन! मुझे तो तुम्हारा ही दूध पसंद है. तुम्हारा दूध भला कैसे मना कर सकता हूँ मैं. मैं तो खुद तेरा दूध पीने की सोच रहा था.
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पापा के सीधा ही बोल देने से मैं शर्मा गयी. तो पापा बात को थोड़ा संभालते हुए बोले.
पापा:- सुमन! तू कहे तो अभी तेरा दूध पी लेता हूँ. जा तू किचन से ले आ.
मैं :- पापा! दूध आप को गर्म पसंद है या ठंडा?
पापा:- अरे बेटी! दूध तो मुझे ताजा ही पसंद है. यदि ताजा दूध पीने को मिल जाये तो क्या बात है. बचपन में मैं गावं में गाय के थनो से ताजा ही दूध पीता था. वो भी क्या दिन थे जब मुंह लगा कर सीधे दूध चूस चूस कर पीता था. बस अब तो वो यादें ही रह गयी हैं. बहुत मन करता है कि कोई मौका मिले तो थन को मुंह में ले कर और खूब चूस चूस कर दूध पिउन. पर कोई मौका ही नहीं बनता।
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(पापा ने यह बात मेरी छाती को देखते और अपने लौड़े को पूरी बेशर्मी से सहलाते हुए कही. उनका लण्ड हमारी बातों से खड़ा होने लग गया था. उनकी लुंगी में उसका उभार साफ़ दिख रहा था. जिस को देख कर मेरी चूत में भी गीलापन आने लगा था.)
पापा को मैं फिर छेड़ते हुए बोली
मैं:- पापा! अब इतना ताजा दूध, कि आप सीधे ही अपना मुंह लगा कर चूस पाएं, मैं कहाँ से लाऊ? मेरे पास तो फ्रिज का ही दूध है.
पापा:- अरे बेटी इंसान चाहे तो क्या प्रबंध नहीं हो सकता. तू चाहे तो मेरी इच्छा पूरी कर सकती है. मैं ताजा दूध पी सकता हूँ.
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(मुझे समझ नहीं आ रहा था की बात को कैसे घुमाऊं क्योंकि पापा तो शायद अभी मेरी चूची चूसने का सोचे बैठे थे, इधर ब्रा न पहनी होने के कारण मेरे निप्पल जो पापा की सेक्सी बातें सुन कर टाइट हो गए थे, साफ़ साफ़ दिख रहे थे पापा को , जिन्हे देख कर पापा का लण्ड और भी कसता जा रहा था. )
मैं:- पापा! अब मैं ताजा दूध कहाँ से लाऊँ? बाजार जान पड़ेगा. चलो ऐसा करते हैं की बाजार चलते हैं. मेरा भी कई दिन से कुल्फी या चॉकोबार खाने का मन हो रहा है. आप भी चॉकोबार खा लेना।
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पापा:- नहीं सुमन! चॉकोबार भी भला कोई खाने की चीज है. यह तो अच्छी तरह से चूसने वाली चीज है. यदि चॉकोबार को अच्छी तरह चूसा जाये तो ही उसका असली मजा आता है,
(यह बात बोलते बोलते पापा ने फिर से अपना लंड सेहला दिया. मैं तुरंत समझ गयी कि पापा किस चॉकोबार को चूसने की बात कर रहे है. मैं तो गनगना गयी की आज पापा पूरे मूड में हैं. हर बार बात को घुमा कर वहीँ ले आते हैं. लगता है आज मेरी चूत का उद्घाटन समारोह कर ही देंगे पापा. यही बात सोच कर मेरी चूत पानी छोड़ने लगी. मैं तो खुद यही चाह रही थी, सोचा आज तो कुछ हो ही जाए। तो बात को आगे बढ़ाते हुए बोली )
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मैं:- पापा! मेरा मतलब भी चॉकोबार को चूसने का ही था. भला चॉकोबार को कोई चूसे बिना उसका मजा कैसे ले सकता है. आप मुझे चॉकोबार दे, मैं उसे खूब अच्छी तरह से चूस कर मजा लूंगी. पर आप क्या लेंगे?
पापा:- सुमन! मुझे कुल्फी या चॉकोबार नहीं बल्कि मुझे तो आइसक्रीम ही पसंद है. आइसक्रीम में जीभ डाल कर चाट चाट कर उसे खाने में जो मजा है वो किसी और चीज में कहाँ?
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(यह कहते हुए पापा की नजरें मेरी चूत की तरफ थी. मैं भी जवान थी तो समझ गयी की पापा किस आइसक्रीम को चाटने की बात कर रहे हैं. मैं तो न जाने कब से अपनी यह आइसक्रीम पापा को चटवाने को तैयार थी. तो मुस्कुराते हुए बोली.)
मैं:- पापा! आप आइसक्रीम को कैसे चाटेंगे?
पापा:- बेटी! मैं तो आइसक्रीम की कटोरी में पूरी जीभ डाल कर उसे अच्छी तरह से इधर उधर घुमा कर, आइसक्रीम का मजा लेता हूँ. जब तक मैं पूरी जीभ आइसक्रीम में नहीं डाल लेता, मुझे आइसक्रीम चाटने में मजा नहीं आता. तुम मुझे आइसक्रीम दे दो फिर देखना तेरे पापा कैसे अच्छे से आइसक्रीम चाटते हैं.
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(इन दो अर्थी बातों से हम दोनों बाप बेटी की वासना खूब बढ़ गयी थी, मैं भी मुस्कुराते बोली)
मैं:- पापा! ठीक है फिर, आप मुझे चॉकोबार चूसने को देंगे और मैं आपको आइसक्रीम चाटने को दूँगी.
पापा:- सुमन! तुम एक चीज और देखना। मैं न चॉकोबार को तुम्हारी आइसक्रीम में पूरा डाल कर तुम्हे दूंगा. फिर तुम जब उसे चूसोगी तो तुम्हे चॉकोबार के साथ साथ तुम्हे अपनी आइसक्रीम का भी मजा आएगा. जब चॉकोबार पर आइसक्रीम लगी होगी तो फिर उसे चूस कर देखना. ठीक है?
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(मैं समझ गयी कि पापा मेरी चूत में लण्ड घुसा कर उसपर मेरी चूत का रस लगा कर मुझे चुसवाने का सोचे बैठे है. इतनी सीधी पर दो अर्थी बात से मेरी चूत में तो घमासान होने लगा. पापा का भी लौड़ा खूब सख्त हो गया था. मुझे लगा कि पापा अभी ही मुझे चोद देंगे. तो मैं बात को थोड़ा टालते बोली )
मैं:- ठीक है पापा। मैं जरा कपडे बदल कर आती हूँ. फिर हम बाज़ार चलते हैं. चॉकोबार और आइसक्रीम ले आते हैं.
यह कह कर मैं अपने कमरे में चली गयी. मैं असल में ब्रा पैंटी पहनना चाहती थी ताकि जब पापा मुझे खुद अपने हाथों से नंगी करेंगे और मेरी ब्रा और कच्छी अपने हाथों से उतारेंगे तो कितना मजा आएगा. यह सोच कर मैंने के लम्बी की स्कर्ट पहन ली और नीचे ब्रा और पैंटी भी पहन ली। यह कपडे तो मैंने पापा से अधिक मजा लेने के लिए पहने थे, पर यह भगवान् ने मुझे बचा लिया. यह सब क्या था. यह आपको मैं अभी बताती हूँ.
मैं आ कर सोफे पर पापा के साथ सट कर बैठ गयी.
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मैं कुछ बोलने ही वाली थी कि बाहर की घंटी बजी. मेरा तो ग़ुस्से से बुरा हाल हो गया. यह साला इस टाइम कौन आ गया.
पापा मुझे बोले
पापा :- बेटी! जा जरा दरवाजा खोल कर देख तो कौन है?
मैं गुस्से में भुनभुनाती हुई दरवाजे के पास गयी और ज्योंही दरवाजा खोला तो जैसे एकदम मेरे तो सर पर एटमबम ही गिर गया.
बाहर दरवाजे पर मम्मी और नानी खड़े थे.
जीवन में पहली बार मुझे अपनी माँ को देख कर बहुत बुरा लगा. मम्मी तो मुझे बिलकुल अपनी सौतन या दुश्मन लग रही थी,
मैं हकला कर बोली
मैं :- मम्मी! आप ? आप अचानक से कैसे. बताया भी नहीं.
तब तक पापा भी उठ कर दरवाजे पर आ गए थे. पर वे सयाने थे उन्होंने अपनी भावनाएं अपने चेहरे पर नहीं आने दीं, जबकि ग़ुस्सा तो उन्हें भी बहुत आया था. उधर मम्मी मेरा उड़ा हुआ मुंह देख कर बोली
मम्मी:- अरे सुमन! क्या हुआ मुझे देख कर ख़ुशी नहीं हुई. मैं तो तेरी नानी को भी साथ लायी हूँ. मुझे लगा की तेरी पढ़ाई खराब हो रही होगी. खाना बनाने में दिक्कत होगी और मैं तुम को सरप्राइज देने के लिए अचानक आ गयी,
मैंने बात को संभाला और मुस्कुराते हुए बोली
मैं :- मम्मी! मुझे तो आपको और नानी को देख कर बहुत अच्छा लगा है. वो तो मैं आपके एकदम आने और सरप्राइज देने से हैरान हो गयी थी.
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(इधर मैं मन ही मन भगवान् का लाख लाख शुक्र मना रही थी की एक मिनट पहले ही मैंने अपनी वो छोटी सी स्कर्ट बदल कर यह लम्बी स्कर्ट पहल ली थी और पैंटी भी पहन ली थी. वरना तो अभी हम बाप बेटी का भांडा ही फुट जाता.पापा का भी लण्ड मम्मी को देख कर सिकुड़ गया था और ढीला हो चूका था. )
खैर यह माँ का घर था तो मैं उन्हें अंदर आने से तो रोक नहीं सकती थी, तो एक साइड हो कर माँ और नानी को सोफे पर बिठाया और पानी ला कर दिया.
चॉकोबार चूसने और आइसक्रीम चाटने का तो प्रोग्राम ही चौपट हो गया था. पर हम बाप बेटी कर भी क्या सकते थे.
Ho gaya na KLPD ab dono baap beti apne Lund aur bur par hath rakh Kar Sona raat me are ha baap to apni Bibi ki bur me gusayega Lund lekin beti ki bur ka Kya hoga fir wahi baigan ya kheera hi ghusayegiअगले दिन सुबह हम लोग उठे और अपनी दिनचर्या से निवृत हुए.
नाश्ता वगैरह करने के बाद मैं और पापा सोफे पर बैठे हुए टीवी देख रहे थे.
मैं अपने वही शार्ट स्कर्ट और टी शर्ट में थी. जब से मम्मी गयी थी मैंने ब्रा और पैंटी पहनना तो लगभग छोड़ ही दिया था.
क्योंकि मेरी कोशिश थी कि किसी भी तरह मम्मी के आने से पहले पहले पापा से चुदवा लूँ. ताकि फिर यह सिलसिला चलता रहे.
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मुझे मालूम था की मम्मी को भी चुदाई बहुत पसंद है तो जब वो आ जाएँगी तो पापा को चुदाई के लिए तरसना नहीं पड़ेगा तो हो सकता है कि फिर पापा मेरी तरफ उतना ध्यान न भी दें.
मैंने पापा को थोड़ा छेड़ने का सोचा और पूछा
मैं :- पापा चाय पिएंगे या दूध ला दूँ?
पापा:- नहीं बेटी ! अभी तो नाश्ते के साथ चाय पी थी तो अभी कोई इच्छा नहीं है.
मैं :- तो पापा दूध ले लीजिये (यह कहते हुए मैंने अपनी छाती थोड़ी आगे को कर दी जैसे बोल रही हूँ कि यह दूध ले लो)
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पर पापा का ध्यान तो टीवी पर था तो उन्होंने गौर नहीं किया और मना कर दिया.
मैं :- पापा क्या बात है. आप को मेरा दूध पसंद नहीं है क्या?
(यह कह कर मैंने फिर से अपने मुम्मे आगे को किये तो अब पापा की नज़र मेरे मुम्मों पर पड़ी. वो समझ गए. )
पापा अपने लन्ड को अपनी लुंगी के ऊपर से ही सहलाते हुए बोले
पापा:- सुमन! मुझे तो तुम्हारा ही दूध पसंद है. तुम्हारा दूध भला कैसे मना कर सकता हूँ मैं. मैं तो खुद तेरा दूध पीने की सोच रहा था.
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पापा के सीधा ही बोल देने से मैं शर्मा गयी. तो पापा बात को थोड़ा संभालते हुए बोले.
पापा:- सुमन! तू कहे तो अभी तेरा दूध पी लेता हूँ. जा तू किचन से ले आ.
मैं :- पापा! दूध आप को गर्म पसंद है या ठंडा?
पापा:- अरे बेटी! दूध तो मुझे ताजा ही पसंद है. यदि ताजा दूध पीने को मिल जाये तो क्या बात है. बचपन में मैं गावं में गाय के थनो से ताजा ही दूध पीता था. वो भी क्या दिन थे जब मुंह लगा कर सीधे दूध चूस चूस कर पीता था. बस अब तो वो यादें ही रह गयी हैं. बहुत मन करता है कि कोई मौका मिले तो थन को मुंह में ले कर और खूब चूस चूस कर दूध पिउन. पर कोई मौका ही नहीं बनता।
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(पापा ने यह बात मेरी छाती को देखते और अपने लौड़े को पूरी बेशर्मी से सहलाते हुए कही. उनका लण्ड हमारी बातों से खड़ा होने लग गया था. उनकी लुंगी में उसका उभार साफ़ दिख रहा था. जिस को देख कर मेरी चूत में भी गीलापन आने लगा था.)
पापा को मैं फिर छेड़ते हुए बोली
मैं:- पापा! अब इतना ताजा दूध, कि आप सीधे ही अपना मुंह लगा कर चूस पाएं, मैं कहाँ से लाऊ? मेरे पास तो फ्रिज का ही दूध है.
पापा:- अरे बेटी इंसान चाहे तो क्या प्रबंध नहीं हो सकता. तू चाहे तो मेरी इच्छा पूरी कर सकती है. मैं ताजा दूध पी सकता हूँ.
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(मुझे समझ नहीं आ रहा था की बात को कैसे घुमाऊं क्योंकि पापा तो शायद अभी मेरी चूची चूसने का सोचे बैठे थे, इधर ब्रा न पहनी होने के कारण मेरे निप्पल जो पापा की सेक्सी बातें सुन कर टाइट हो गए थे, साफ़ साफ़ दिख रहे थे पापा को , जिन्हे देख कर पापा का लण्ड और भी कसता जा रहा था. )
मैं:- पापा! अब मैं ताजा दूध कहाँ से लाऊँ? बाजार जान पड़ेगा. चलो ऐसा करते हैं की बाजार चलते हैं. मेरा भी कई दिन से कुल्फी या चॉकोबार खाने का मन हो रहा है. आप भी चॉकोबार खा लेना।
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पापा:- नहीं सुमन! चॉकोबार भी भला कोई खाने की चीज है. यह तो अच्छी तरह से चूसने वाली चीज है. यदि चॉकोबार को अच्छी तरह चूसा जाये तो ही उसका असली मजा आता है,
(यह बात बोलते बोलते पापा ने फिर से अपना लंड सेहला दिया. मैं तुरंत समझ गयी कि पापा किस चॉकोबार को चूसने की बात कर रहे है. मैं तो गनगना गयी की आज पापा पूरे मूड में हैं. हर बार बात को घुमा कर वहीँ ले आते हैं. लगता है आज मेरी चूत का उद्घाटन समारोह कर ही देंगे पापा. यही बात सोच कर मेरी चूत पानी छोड़ने लगी. मैं तो खुद यही चाह रही थी, सोचा आज तो कुछ हो ही जाए। तो बात को आगे बढ़ाते हुए बोली )
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मैं:- पापा! मेरा मतलब भी चॉकोबार को चूसने का ही था. भला चॉकोबार को कोई चूसे बिना उसका मजा कैसे ले सकता है. आप मुझे चॉकोबार दे, मैं उसे खूब अच्छी तरह से चूस कर मजा लूंगी. पर आप क्या लेंगे?
पापा:- सुमन! मुझे कुल्फी या चॉकोबार नहीं बल्कि मुझे तो आइसक्रीम ही पसंद है. आइसक्रीम में जीभ डाल कर चाट चाट कर उसे खाने में जो मजा है वो किसी और चीज में कहाँ?
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(यह कहते हुए पापा की नजरें मेरी चूत की तरफ थी. मैं भी जवान थी तो समझ गयी की पापा किस आइसक्रीम को चाटने की बात कर रहे हैं. मैं तो न जाने कब से अपनी यह आइसक्रीम पापा को चटवाने को तैयार थी. तो मुस्कुराते हुए बोली.)
मैं:- पापा! आप आइसक्रीम को कैसे चाटेंगे?
पापा:- बेटी! मैं तो आइसक्रीम की कटोरी में पूरी जीभ डाल कर उसे अच्छी तरह से इधर उधर घुमा कर, आइसक्रीम का मजा लेता हूँ. जब तक मैं पूरी जीभ आइसक्रीम में नहीं डाल लेता, मुझे आइसक्रीम चाटने में मजा नहीं आता. तुम मुझे आइसक्रीम दे दो फिर देखना तेरे पापा कैसे अच्छे से आइसक्रीम चाटते हैं.
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(इन दो अर्थी बातों से हम दोनों बाप बेटी की वासना खूब बढ़ गयी थी, मैं भी मुस्कुराते बोली)
मैं:- पापा! ठीक है फिर, आप मुझे चॉकोबार चूसने को देंगे और मैं आपको आइसक्रीम चाटने को दूँगी.
पापा:- सुमन! तुम एक चीज और देखना। मैं न चॉकोबार को तुम्हारी आइसक्रीम में पूरा डाल कर तुम्हे दूंगा. फिर तुम जब उसे चूसोगी तो तुम्हे चॉकोबार के साथ साथ तुम्हे अपनी आइसक्रीम का भी मजा आएगा. जब चॉकोबार पर आइसक्रीम लगी होगी तो फिर उसे चूस कर देखना. ठीक है?
![]()
(मैं समझ गयी कि पापा मेरी चूत में लण्ड घुसा कर उसपर मेरी चूत का रस लगा कर मुझे चुसवाने का सोचे बैठे है. इतनी सीधी पर दो अर्थी बात से मेरी चूत में तो घमासान होने लगा. पापा का भी लौड़ा खूब सख्त हो गया था. मुझे लगा कि पापा अभी ही मुझे चोद देंगे. तो मैं बात को थोड़ा टालते बोली )
मैं:- ठीक है पापा। मैं जरा कपडे बदल कर आती हूँ. फिर हम बाज़ार चलते हैं. चॉकोबार और आइसक्रीम ले आते हैं.
यह कह कर मैं अपने कमरे में चली गयी. मैं असल में ब्रा पैंटी पहनना चाहती थी ताकि जब पापा मुझे खुद अपने हाथों से नंगी करेंगे और मेरी ब्रा और कच्छी अपने हाथों से उतारेंगे तो कितना मजा आएगा. यह सोच कर मैंने के लम्बी की स्कर्ट पहन ली और नीचे ब्रा और पैंटी भी पहन ली। यह कपडे तो मैंने पापा से अधिक मजा लेने के लिए पहने थे, पर यह भगवान् ने मुझे बचा लिया. यह सब क्या था. यह आपको मैं अभी बताती हूँ.
मैं आ कर सोफे पर पापा के साथ सट कर बैठ गयी.
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मैं कुछ बोलने ही वाली थी कि बाहर की घंटी बजी. मेरा तो ग़ुस्से से बुरा हाल हो गया. यह साला इस टाइम कौन आ गया.
पापा मुझे बोले
पापा :- बेटी! जा जरा दरवाजा खोल कर देख तो कौन है?
मैं गुस्से में भुनभुनाती हुई दरवाजे के पास गयी और ज्योंही दरवाजा खोला तो जैसे एकदम मेरे तो सर पर एटमबम ही गिर गया.
बाहर दरवाजे पर मम्मी और नानी खड़े थे.
जीवन में पहली बार मुझे अपनी माँ को देख कर बहुत बुरा लगा. मम्मी तो मुझे बिलकुल अपनी सौतन या दुश्मन लग रही थी,
मैं हकला कर बोली
मैं :- मम्मी! आप ? आप अचानक से कैसे. बताया भी नहीं.
तब तक पापा भी उठ कर दरवाजे पर आ गए थे. पर वे सयाने थे उन्होंने अपनी भावनाएं अपने चेहरे पर नहीं आने दीं, जबकि ग़ुस्सा तो उन्हें भी बहुत आया था. उधर मम्मी मेरा उड़ा हुआ मुंह देख कर बोली
मम्मी:- अरे सुमन! क्या हुआ मुझे देख कर ख़ुशी नहीं हुई. मैं तो तेरी नानी को भी साथ लायी हूँ. मुझे लगा की तेरी पढ़ाई खराब हो रही होगी. खाना बनाने में दिक्कत होगी और मैं तुम को सरप्राइज देने के लिए अचानक आ गयी,
मैंने बात को संभाला और मुस्कुराते हुए बोली
मैं :- मम्मी! मुझे तो आपको और नानी को देख कर बहुत अच्छा लगा है. वो तो मैं आपके एकदम आने और सरप्राइज देने से हैरान हो गयी थी.
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(इधर मैं मन ही मन भगवान् का लाख लाख शुक्र मना रही थी की एक मिनट पहले ही मैंने अपनी वो छोटी सी स्कर्ट बदल कर यह लम्बी स्कर्ट पहल ली थी और पैंटी भी पहन ली थी. वरना तो अभी हम बाप बेटी का भांडा ही फुट जाता.पापा का भी लण्ड मम्मी को देख कर सिकुड़ गया था और ढीला हो चूका था. )
खैर यह माँ का घर था तो मैं उन्हें अंदर आने से तो रोक नहीं सकती थी, तो एक साइड हो कर माँ और नानी को सोफे पर बिठाया और पानी ला कर दिया.
चॉकोबार चूसने और आइसक्रीम चाटने का तो प्रोग्राम ही चौपट हो गया था. पर हम बाप बेटी कर भी क्या सकते थे.