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Fantasy लुइ के पन्ने!

Funlover

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माँ भी उसे दुलारती रही और बोली: “पता है जब मैं रमेश को ऊँगली पे लेके आई थी, (अगले पति का बच्चे) तब घर में मेरे ससुर और साँस दोनों ने मिलके मेरी चूत की पूजा की थी। बड़ा वाला मेरे ससुर का और छोटावाला तेरे ससुर का।“

****************

अब आगे.......




जानकी जानती थी की उसकी साँस छोटी ही उम्र में अपने ही बाप से चुद गई थी और बच्चा रह गया था, हालाकि बाद में बाप को उसका पति करार दिया था पर घरवालो ने उसकी शादी करा दी थी पंचायत में जुर्माना भर के। और वह बच्चा रमेश था, जानकी और उसकी साँस में केवल कुछ सालो का ही फर्क था। और वही बच्चा माँ की चूत से खेलता भी है और उसका पति के तौर पर रहता है। पंचायत से ही जानकी और उसकी साँस को रमेश की पत्निया करार कर दिया था जो की एक नियम था की कोई भी स्त्री जो दुहाती है वह विधवा नहीं हो सकती। घर में से किसी से भी शादी करार की जाती है। करार मतलब कोई शादी नहीं होती बस गाँव में बताया जाता है की अब वह दोनों पति पत्नी है। जानकी की शादी के बाद कुछ ही दिनों में और जानकी की ससुर से दिखाई रसम से पहले खेत में बैलगाड़ी की मरमत करते हुए गाडी उन पर गिर गई और वह वहि मर गए। और माँ को अब रमेश से बच्चा पैदा करना जरुरी था। यही गाँव के नियम है। उस नियम से चलते हुए रमेश अब माँ का पति है लेकिन वह पत्नी नहीं कह सकता सर माँ हिकः सकता है हालाकी बच्चे उसी से ही हो सकते है या तोमंजुरी से किसी और के। घर में शादी और माँ कोपतनी बनाया जा सके वैसे कोई नहीं था। वैसे जेठ है पर उनकी उन से नहीं बनती, कुछ हना कुछ टकराव रहता है तो वह गाँव के दुसरे छेड़े पर रहेते है। और तभी तो जानकी की भी दिखाई जेठ से नहीं हुई थी।


जानकी अब तुम्हे सोचना चाहिए, क्या मुझे उस से शादी करके मेरा पति बनाके तेरे ससुर के सामने चूत दिखाई के तौर पर तुझे दू और बच्चा पैदा कारावाऊ? जो की नियम के तौर पर होगा। या फिर अपने प्रेम को पाने के लिए गाय खुद ही अपना खेत उसे दे और बिज को पाले।“

“माँ अब आप दोनों जो चाहो वो करो, इस गाय के पैर फैलाने है तो खुद ही फैलाए। मुझे कोई दिक्कत नहीं होगी। मुझे तो आपका और उनका (रमेशजी) का साथ सहकार मिले तो मैं किसी के बच्चे पैदा कर लुंगी। आप दोनों और यह घर ही तो मेरा स्वर्ग है। आप दोनों जिस के कहेंगे उसके लंड का वीर्यदान ले लुंगी।“

जानकी ने माँ की ओर देखते हुए जोड़ा;

“लेकिन माँ मुझे डर भी बहोत लगता है जेठजी या ससुरजी के लंड का वीर्यदान हमारे गाँव की परम्परा के अनुसार है। उस वीर्यदान से किसी को कोई आपत्ति नहीं होती है क्यों की वह गाँव के और अपने समाज के है। उनका और गाय का हक बनता है की वह गर्भाधान करे। लेकिन यहाँ तो यह बाहरी परदेशी है एक आवारा पंछी. जमीन को जोत के उड़ जानेवाला पंछी। किसी और खेत में अपना वीर्य को मुतने के लिए। मैं ऐसे तैयार नहीं हूँ माजी।“

“अरे, बेटी मेरे सामने ही चुदवाउंगी बस फिर तो कोई डर नहीं रहेगा, अगर तू कहे तो गाँव में भी बोल दू की यह विदेशी जानकी का दूसरा पति है और जब तक बच्चा नहीं होगा रमेश के लिए मेरा खेत तैयार है।“

“बस माजी बस करो आप भी न! गाँव में सबको पता है की व्यवहारिक स्वरुप से उनको (रमेश) को आधिकारिक तौर से आप के खेत में पानी डालना उनकी फर्ज है। और वह बखूबी निभा भी रहे है। और मुझे इस से कोई ग्लानी भी नहीं है। अगर ऐसा ना होता तो गाँव के नियम तोड़े जाने का संभव बनता लेकिन ऐसा नहीं है। आप उनसे अपने खेत में पानी डलवाते रहे यह आपकी भी जिम्मेदारी है की उनका लंड भरा हुआ ना रहे। जब चाहे हमदोनों में से किसी को भी अपना बिज बो सकते है। वैसे आप बच्चे नहीं चाहती इसलिए आप “UUUU” (नोट: कोई भी ऐसी जदिबुट्टी की खोज ना करे, सब काल्पनिक है) जदिबुत्ति लेती है। ताकि आपको बच्चा न हो लेकिन आप भूल गई की उन्हों ने आपको फलित तो कर ही दिया था। मैं ही एक अभागन हूँ।“

“अपना दुखड़ा रो चुकी??? हम यहाँ मेरी और रमेश की बात नहीं करते, रमेश तो मेरा बच्चा है जब तक वह मुज में समा नहीं जाता, एक बार वह मुज में अपने लिंग से समाता है और बिज्दान करता है तब तक ही वह मेरा पति यानी की मालिक है। जैसे ही मेरा कुआ भर जाता है और वह अपने लिंग को बहार खींचता है वह मेरा बेटा है। उसकी बात ही नहीं कर रहे हम, बेटी। बात उस पंछी की हो रही है जिस से तुम डरती भी हो और प्रभावित भी हो। जा बेटी खुद को प्रफुल्लित रख के अपने पैर वहा फैला दे और अपनी भूख और प्यास मिटा दे। उस लंड से फलित हो जा बेटी।

“माँ.....जी.....” जानकी माँ से लिपट गई। और माँ ने उसकी साडी उठाई और गांड के दारार में ऊँगली फसती हुई बोली: जा बेटी चुद जा और लंड को खली कर के कोंख में डाल दे बेटी।“ जानकी ने भी उसी अदा में माँ की गांड को सह्लाया और कहा:

“माँ मैं आपका यह अहसान कभी नहीं भूलूंगी, आपने मुझे आज़ादी दे दी एक बच्चे के लिए। मुझे उस से प्रेम है लेकिन आपके बेटे से बहोत प्रेम है, मैं उन्हें कभी दुखी नहीं देखना चाहती।“

“मतलब की तू मेरी सौतन ही बनी रहेगी!!!” और दोनों खुल के हँस दी। एक दुसरे की गांड में ऊँगली पिरो के मस्ती करने लगी।

जानकी माँ के पैरो में पद गई और बोली: “बस माँ मेरे इस प्रेम के लिए एक बच्चा लूई के लंड से लेना चाहूंगी। मैं जानती हु की मैं उसे भा गई हूँ। वह मेरी गांड का दीवाना बन गया है। वह जान-बुज के मेरे पीछे चलता है ताकि वह मेरे गांड को देखता रहे। और मुझे पता न चले।“

“अगर कल चुदने का है तो आज ही चुद जा बेटी।“ और कुछ समय के लिए एक दुसरे की गांड ऊँगली से मारती रही।

जानकी ने कहा “मुझे तुम्हारी सौतन ही बना रहना है माँ, मुझे कभी जुदा मत करना, मैं तुम्हारे पैर पड़ती हूँ।“

“मेरी अच्छी सौतन।“ माँ ने उसकी ऊँगली गांड से निकाली और बहार की ओर चल दी। जानकी भी उसके पीछे चल दी। दोनों बरामदे आके बैठी।

“अब मुझे नहीं छोड़ेगी? मेर पास लंड नहीं है बेटी,जाके उसे उठा और अपने ससुर को जैसे मुंह दिखाई देती उसी तरह से उठा।“

“मतलब आप भी माँ?”

“नहीं बेटी, अगर मेरे नसीब में बच्चा है तो मेरे रमेश के लंड से ही होगा। लेकिन अगर तू नहीं गई तो मैं चली जाउंगी।“

जानकी हँस पड़ी और बोली चूत में दम है तो लूई को भी दो पत्निया मिल जायेगी मेरा को इविरोध नहीं होगा माँ। उसने माँ के पालो को निचे की ओर किया और रोज की तरह माँ को बोबले को खिंच के उसके दूध को चूसने लगी। मन ही मन वह बहोत खुश थी की उसे सब की सम्मति मिल गई टी अब वह घर में ही अपनी चूत दिखाई लूई को दे सकती है।

काफी समय माँ को चूसने के बाद अपना पेट भर दिया। यह रोज का था क्यों की माँ के थानों को भी दूध से भरे रखना था। और यह काम वही करती थी। उसने सोचा था की अगर ससुरजी होते तो रोज ही उनके लंड का रस पि के ही अपना पेट भरना था पर यहाँ दूध है।

जब वह माँ को दुहो के उठी तो उसके चहरे पर एक अजीब से प्रसन्नता थी। उसके शरीर में एक नौयौवना आ गई थी। जैसे वह कुँवारी हो और जिस प्रकार से वह अपने स्तनों को थानों में पलट कर बाप के सामने गई थी तब जो शर्म थी ऐसे ही अब थी। उसकी चाल में नजाकत आ गई थी। उसके कुल्हे अब अच्छे से थरथरा रहे थे। जैसे एक हिरनी अपने शरीर में कस्तूरी भर के अपने हिरन को आकर्षने के लिए इधर-उधर तड़पती घूम रही हो।



************


आज के लिए बस यही तक समय मिलने पर एक ओर एपिसोड लिख दूंगी।

आप के सहयोग की अपेक्षा सह।


फनलवर की ओर से....



।। जय भारत ।।
 

Ashiq Baba

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माँ भी उसे दुलारती रही और बोली: “पता है जब मैं रमेश को ऊँगली पे लेके आई थी, (अगले पति का बच्चे) तब घर में मेरे ससुर और साँस दोनों ने मिलके मेरी चूत की पूजा की थी। बड़ा वाला मेरे ससुर का और छोटावाला तेरे ससुर का।“

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अब आगे.......




जानकी जानती थी की उसकी साँस छोटी ही उम्र में अपने ही बाप से चुद गई थी और बच्चा रह गया था, हालाकि बाद में बाप को उसका पति करार दिया था पर घरवालो ने उसकी शादी करा दी थी पंचायत में जुर्माना भर के। और वह बच्चा रमेश था, जानकी और उसकी साँस में केवल कुछ सालो का ही फर्क था। और वही बच्चा माँ की चूत से खेलता भी है और उसका पति के तौर पर रहता है। पंचायत से ही जानकी और उसकी साँस को रमेश की पत्निया करार कर दिया था जो की एक नियम था की कोई भी स्त्री जो दुहाती है वह विधवा नहीं हो सकती। घर में से किसी से भी शादी करार की जाती है। करार मतलब कोई शादी नहीं होती बस गाँव में बताया जाता है की अब वह दोनों पति पत्नी है। जानकी की शादी के बाद कुछ ही दिनों में और जानकी की ससुर से दिखाई रसम से पहले खेत में बैलगाड़ी की मरमत करते हुए गाडी उन पर गिर गई और वह वहि मर गए। और माँ को अब रमेश से बच्चा पैदा करना जरुरी था। यही गाँव के नियम है। उस नियम से चलते हुए रमेश अब माँ का पति है लेकिन वह पत्नी नहीं कह सकता सर माँ हिकः सकता है हालाकी बच्चे उसी से ही हो सकते है या तोमंजुरी से किसी और के। घर में शादी और माँ कोपतनी बनाया जा सके वैसे कोई नहीं था। वैसे जेठ है पर उनकी उन से नहीं बनती, कुछ हना कुछ टकराव रहता है तो वह गाँव के दुसरे छेड़े पर रहेते है। और तभी तो जानकी की भी दिखाई जेठ से नहीं हुई थी।


जानकी अब तुम्हे सोचना चाहिए, क्या मुझे उस से शादी करके मेरा पति बनाके तेरे ससुर के सामने चूत दिखाई के तौर पर तुझे दू और बच्चा पैदा कारावाऊ? जो की नियम के तौर पर होगा। या फिर अपने प्रेम को पाने के लिए गाय खुद ही अपना खेत उसे दे और बिज को पाले।“

“माँ अब आप दोनों जो चाहो वो करो, इस गाय के पैर फैलाने है तो खुद ही फैलाए। मुझे कोई दिक्कत नहीं होगी। मुझे तो आपका और उनका (रमेशजी) का साथ सहकार मिले तो मैं किसी के बच्चे पैदा कर लुंगी। आप दोनों और यह घर ही तो मेरा स्वर्ग है। आप दोनों जिस के कहेंगे उसके लंड का वीर्यदान ले लुंगी।“

जानकी ने माँ की ओर देखते हुए जोड़ा;

“लेकिन माँ मुझे डर भी बहोत लगता है जेठजी या ससुरजी के लंड का वीर्यदान हमारे गाँव की परम्परा के अनुसार है। उस वीर्यदान से किसी को कोई आपत्ति नहीं होती है क्यों की वह गाँव के और अपने समाज के है। उनका और गाय का हक बनता है की वह गर्भाधान करे। लेकिन यहाँ तो यह बाहरी परदेशी है एक आवारा पंछी. जमीन को जोत के उड़ जानेवाला पंछी। किसी और खेत में अपना वीर्य को मुतने के लिए। मैं ऐसे तैयार नहीं हूँ माजी।“

“अरे, बेटी मेरे सामने ही चुदवाउंगी बस फिर तो कोई डर नहीं रहेगा, अगर तू कहे तो गाँव में भी बोल दू की यह विदेशी जानकी का दूसरा पति है और जब तक बच्चा नहीं होगा रमेश के लिए मेरा खेत तैयार है।“

“बस माजी बस करो आप भी न! गाँव में सबको पता है की व्यवहारिक स्वरुप से उनको (रमेश) को आधिकारिक तौर से आप के खेत में पानी डालना उनकी फर्ज है। और वह बखूबी निभा भी रहे है। और मुझे इस से कोई ग्लानी भी नहीं है। अगर ऐसा ना होता तो गाँव के नियम तोड़े जाने का संभव बनता लेकिन ऐसा नहीं है। आप उनसे अपने खेत में पानी डलवाते रहे यह आपकी भी जिम्मेदारी है की उनका लंड भरा हुआ ना रहे। जब चाहे हमदोनों में से किसी को भी अपना बिज बो सकते है। वैसे आप बच्चे नहीं चाहती इसलिए आप “UUUU” (नोट: कोई भी ऐसी जदिबुट्टी की खोज ना करे, सब काल्पनिक है) जदिबुत्ति लेती है। ताकि आपको बच्चा न हो लेकिन आप भूल गई की उन्हों ने आपको फलित तो कर ही दिया था। मैं ही एक अभागन हूँ।“

“अपना दुखड़ा रो चुकी??? हम यहाँ मेरी और रमेश की बात नहीं करते, रमेश तो मेरा बच्चा है जब तक वह मुज में समा नहीं जाता, एक बार वह मुज में अपने लिंग से समाता है और बिज्दान करता है तब तक ही वह मेरा पति यानी की मालिक है। जैसे ही मेरा कुआ भर जाता है और वह अपने लिंग को बहार खींचता है वह मेरा बेटा है। उसकी बात ही नहीं कर रहे हम, बेटी। बात उस पंछी की हो रही है जिस से तुम डरती भी हो और प्रभावित भी हो। जा बेटी खुद को प्रफुल्लित रख के अपने पैर वहा फैला दे और अपनी भूख और प्यास मिटा दे। उस लंड से फलित हो जा बेटी।

“माँ.....जी.....” जानकी माँ से लिपट गई। और माँ ने उसकी साडी उठाई और गांड के दारार में ऊँगली फसती हुई बोली: जा बेटी चुद जा और लंड को खली कर के कोंख में डाल दे बेटी।“ जानकी ने भी उसी अदा में माँ की गांड को सह्लाया और कहा:

“माँ मैं आपका यह अहसान कभी नहीं भूलूंगी, आपने मुझे आज़ादी दे दी एक बच्चे के लिए। मुझे उस से प्रेम है लेकिन आपके बेटे से बहोत प्रेम है, मैं उन्हें कभी दुखी नहीं देखना चाहती।“

“मतलब की तू मेरी सौतन ही बनी रहेगी!!!” और दोनों खुल के हँस दी। एक दुसरे की गांड में ऊँगली पिरो के मस्ती करने लगी।

जानकी माँ के पैरो में पद गई और बोली: “बस माँ मेरे इस प्रेम के लिए एक बच्चा लूई के लंड से लेना चाहूंगी। मैं जानती हु की मैं उसे भा गई हूँ। वह मेरी गांड का दीवाना बन गया है। वह जान-बुज के मेरे पीछे चलता है ताकि वह मेरे गांड को देखता रहे। और मुझे पता न चले।“

“अगर कल चुदने का है तो आज ही चुद जा बेटी।“ और कुछ समय के लिए एक दुसरे की गांड ऊँगली से मारती रही।

जानकी ने कहा “मुझे तुम्हारी सौतन ही बना रहना है माँ, मुझे कभी जुदा मत करना, मैं तुम्हारे पैर पड़ती हूँ।“

“मेरी अच्छी सौतन।“ माँ ने उसकी ऊँगली गांड से निकाली और बहार की ओर चल दी। जानकी भी उसके पीछे चल दी। दोनों बरामदे आके बैठी।

“अब मुझे नहीं छोड़ेगी? मेर पास लंड नहीं है बेटी,जाके उसे उठा और अपने ससुर को जैसे मुंह दिखाई देती उसी तरह से उठा।“

“मतलब आप भी माँ?”

“नहीं बेटी, अगर मेरे नसीब में बच्चा है तो मेरे रमेश के लंड से ही होगा। लेकिन अगर तू नहीं गई तो मैं चली जाउंगी।“

जानकी हँस पड़ी और बोली चूत में दम है तो लूई को भी दो पत्निया मिल जायेगी मेरा को इविरोध नहीं होगा माँ। उसने माँ के पालो को निचे की ओर किया और रोज की तरह माँ को बोबले को खिंच के उसके दूध को चूसने लगी। मन ही मन वह बहोत खुश थी की उसे सब की सम्मति मिल गई टी अब वह घर में ही अपनी चूत दिखाई लूई को दे सकती है।

काफी समय माँ को चूसने के बाद अपना पेट भर दिया। यह रोज का था क्यों की माँ के थानों को भी दूध से भरे रखना था। और यह काम वही करती थी। उसने सोचा था की अगर ससुरजी होते तो रोज ही उनके लंड का रस पि के ही अपना पेट भरना था पर यहाँ दूध है।

जब वह माँ को दुहो के उठी तो उसके चहरे पर एक अजीब से प्रसन्नता थी। उसके शरीर में एक नौयौवना आ गई थी। जैसे वह कुँवारी हो और जिस प्रकार से वह अपने स्तनों को थानों में पलट कर बाप के सामने गई थी तब जो शर्म थी ऐसे ही अब थी। उसकी चाल में नजाकत आ गई थी। उसके कुल्हे अब अच्छे से थरथरा रहे थे। जैसे एक हिरनी अपने शरीर में कस्तूरी भर के अपने हिरन को आकर्षने के लिए इधर-उधर तड़पती घूम रही हो।



************


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।। जय भारत ।।
बहुत ही शानदार एपिसोड लिखा है मजे ही आ गए । जहाँ जानकी की सासु को लेकर एक नया रहस्योद्घाटन किया है वह काफी इंटरेस्टिंग है । दो दो रहस्य खोले है आपने एक तो जानकी की सासु कम उम्र में ही अपने बाप से चुद कर गर्भवती हो गई और उसकी पत्नी बन गई मगर जुर्माना देके उसने दूसरी जगह शादी कर ली ।
हालाँकि यहाँ उसने गाँव समाज की परंपरानुसार एक अपने पति से तो दूसरा अपने ससुर से बच्चा पैदा किया है । मगर पति और ससुर की मौत के बाद अपने बड़े बेटे और जानकी के पति रमेश की पत्नी बनी हुई है यह दूसरा रहस्य है । मगर वह रमेश से बच्चा नही चाहती है उसके लिए गर्भनिरोधक जड़ी बूंटी का इस्तेमाल करती है। यहाँ ये देखना सुखद है कि जानकी की सासु यहाँ उसकी सौतन भी है सहेली भी है और मददगार सासु भी है जो उसे मन का करने के लिए हिम्मत दे रही है । सासु ने जानकी को राजी कर ही लिया है कि वह लुई से अपना प्रेम बर्ताव करके उससे फलित हो जाय ।
आपने अपनी परिकल्पना से जहाँ परम सुन्दरी में एक सहज सैक्स की प्रक्रिया करने वाले चोदू गाँव की रचना की है तो यहाँ एक ऐसे समाज गाँव की परिकल्पना को साकार किया है जहाँ बाहरी दुनिया के नियम कायदे कानून से अलग एक अत्यन्त पिछड़े समाज की बेसिक नियम जो हमे आदि पूर्वजों से मिले थे जब हम जंगली हुआ करते थे कि कोई रिश्ता नही है । सेक्स की पूर्ति के लिए बस मर्द और औरत का ही रिश्ता होता है चाहे औरत माँ हो बेटी हो बहु हो भतीजे की बहू हो कोई भी हो सहमति जरूरी है । अपनी कामपिपासा शांत करना कोई अपराध नही है यहाँ ।
 

Ashiq Baba

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बड़ी मुश्किल से बचा है यह कमेंट एक बार तो लिखते लिखते नेट की गड़बड़ी के चलते पेज आउट हो गया था । बड़ी मन्नत और मेहनत से दुबारा ज्यों का त्यों मिला तो फौरन कमेंट पोस्ट किया है । जब आप कहानी में डूब कर पढ़ते है और उसका मन लगा कर कमेंट करते है और वो बीच मे ही डिसमिस हो जाय तो बड़ा दुख होता है ।

मगर आपने सवा महीने पहले ये एपिसोड रच कर पोस्ट किया है और अभी तक किसी पाठक ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नही दी है तो आपको कितना गहरा दुख हुआ होगा ये मैं अच्छे से समझ सकता हूँ । आपकी निराशा का अंदाजा लगा सकता हुँ । क्षमा करें मैं इस अपडेट को पढ़ने में बहुत लेट हो गया । मगर ये अपडेट बहुत सुकून देने वाला है । आपका तहेदिल से बहुत बहुत धन्यवाद । कृपया अगला एपिसोड थोड़ा बड़ा और कामुकता से लबरेज लिखिए आखिर एक विदेशी लुई और देशी जानकी के मिलन को कुछ खास बना कर लिखिए । कृपया शब्दों और भाषा की मर्यादा को ध्यान ना देते हुए मर्यादा तोड़ कर लिखिए । मजा आना चाहिए और कहानी की लय नही बिगड़नी चाहिए । प्लीज़ प्लीज जल्दी अपडेट दीजिए आपसे विनती है ।
 
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माँ भी उसे दुलारती रही और बोली: “पता है जब मैं रमेश को ऊँगली पे लेके आई थी, (अगले पति का बच्चे) तब घर में मेरे ससुर और साँस दोनों ने मिलके मेरी चूत की पूजा की थी। बड़ा वाला मेरे ससुर का और छोटावाला तेरे ससुर का।“

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जानकी जानती थी की उसकी साँस छोटी ही उम्र में अपने ही बाप से चुद गई थी और बच्चा रह गया था, हालाकि बाद में बाप को उसका पति करार दिया था पर घरवालो ने उसकी शादी करा दी थी पंचायत में जुर्माना भर के। और वह बच्चा रमेश था, जानकी और उसकी साँस में केवल कुछ सालो का ही फर्क था। और वही बच्चा माँ की चूत से खेलता भी है और उसका पति के तौर पर रहता है। पंचायत से ही जानकी और उसकी साँस को रमेश की पत्निया करार कर दिया था जो की एक नियम था की कोई भी स्त्री जो दुहाती है वह विधवा नहीं हो सकती। घर में से किसी से भी शादी करार की जाती है। करार मतलब कोई शादी नहीं होती बस गाँव में बताया जाता है की अब वह दोनों पति पत्नी है। जानकी की शादी के बाद कुछ ही दिनों में और जानकी की ससुर से दिखाई रसम से पहले खेत में बैलगाड़ी की मरमत करते हुए गाडी उन पर गिर गई और वह वहि मर गए। और माँ को अब रमेश से बच्चा पैदा करना जरुरी था। यही गाँव के नियम है। उस नियम से चलते हुए रमेश अब माँ का पति है लेकिन वह पत्नी नहीं कह सकता सर माँ हिकः सकता है हालाकी बच्चे उसी से ही हो सकते है या तोमंजुरी से किसी और के। घर में शादी और माँ कोपतनी बनाया जा सके वैसे कोई नहीं था। वैसे जेठ है पर उनकी उन से नहीं बनती, कुछ हना कुछ टकराव रहता है तो वह गाँव के दुसरे छेड़े पर रहेते है। और तभी तो जानकी की भी दिखाई जेठ से नहीं हुई थी।


जानकी अब तुम्हे सोचना चाहिए, क्या मुझे उस से शादी करके मेरा पति बनाके तेरे ससुर के सामने चूत दिखाई के तौर पर तुझे दू और बच्चा पैदा कारावाऊ? जो की नियम के तौर पर होगा। या फिर अपने प्रेम को पाने के लिए गाय खुद ही अपना खेत उसे दे और बिज को पाले।“

“माँ अब आप दोनों जो चाहो वो करो, इस गाय के पैर फैलाने है तो खुद ही फैलाए। मुझे कोई दिक्कत नहीं होगी। मुझे तो आपका और उनका (रमेशजी) का साथ सहकार मिले तो मैं किसी के बच्चे पैदा कर लुंगी। आप दोनों और यह घर ही तो मेरा स्वर्ग है। आप दोनों जिस के कहेंगे उसके लंड का वीर्यदान ले लुंगी।“

जानकी ने माँ की ओर देखते हुए जोड़ा;

“लेकिन माँ मुझे डर भी बहोत लगता है जेठजी या ससुरजी के लंड का वीर्यदान हमारे गाँव की परम्परा के अनुसार है। उस वीर्यदान से किसी को कोई आपत्ति नहीं होती है क्यों की वह गाँव के और अपने समाज के है। उनका और गाय का हक बनता है की वह गर्भाधान करे। लेकिन यहाँ तो यह बाहरी परदेशी है एक आवारा पंछी. जमीन को जोत के उड़ जानेवाला पंछी। किसी और खेत में अपना वीर्य को मुतने के लिए। मैं ऐसे तैयार नहीं हूँ माजी।“

“अरे, बेटी मेरे सामने ही चुदवाउंगी बस फिर तो कोई डर नहीं रहेगा, अगर तू कहे तो गाँव में भी बोल दू की यह विदेशी जानकी का दूसरा पति है और जब तक बच्चा नहीं होगा रमेश के लिए मेरा खेत तैयार है।“

“बस माजी बस करो आप भी न! गाँव में सबको पता है की व्यवहारिक स्वरुप से उनको (रमेश) को आधिकारिक तौर से आप के खेत में पानी डालना उनकी फर्ज है। और वह बखूबी निभा भी रहे है। और मुझे इस से कोई ग्लानी भी नहीं है। अगर ऐसा ना होता तो गाँव के नियम तोड़े जाने का संभव बनता लेकिन ऐसा नहीं है। आप उनसे अपने खेत में पानी डलवाते रहे यह आपकी भी जिम्मेदारी है की उनका लंड भरा हुआ ना रहे। जब चाहे हमदोनों में से किसी को भी अपना बिज बो सकते है। वैसे आप बच्चे नहीं चाहती इसलिए आप “UUUU” (नोट: कोई भी ऐसी जदिबुट्टी की खोज ना करे, सब काल्पनिक है) जदिबुत्ति लेती है। ताकि आपको बच्चा न हो लेकिन आप भूल गई की उन्हों ने आपको फलित तो कर ही दिया था। मैं ही एक अभागन हूँ।“

“अपना दुखड़ा रो चुकी??? हम यहाँ मेरी और रमेश की बात नहीं करते, रमेश तो मेरा बच्चा है जब तक वह मुज में समा नहीं जाता, एक बार वह मुज में अपने लिंग से समाता है और बिज्दान करता है तब तक ही वह मेरा पति यानी की मालिक है। जैसे ही मेरा कुआ भर जाता है और वह अपने लिंग को बहार खींचता है वह मेरा बेटा है। उसकी बात ही नहीं कर रहे हम, बेटी। बात उस पंछी की हो रही है जिस से तुम डरती भी हो और प्रभावित भी हो। जा बेटी खुद को प्रफुल्लित रख के अपने पैर वहा फैला दे और अपनी भूख और प्यास मिटा दे। उस लंड से फलित हो जा बेटी।

“माँ.....जी.....” जानकी माँ से लिपट गई। और माँ ने उसकी साडी उठाई और गांड के दारार में ऊँगली फसती हुई बोली: जा बेटी चुद जा और लंड को खली कर के कोंख में डाल दे बेटी।“ जानकी ने भी उसी अदा में माँ की गांड को सह्लाया और कहा:

“माँ मैं आपका यह अहसान कभी नहीं भूलूंगी, आपने मुझे आज़ादी दे दी एक बच्चे के लिए। मुझे उस से प्रेम है लेकिन आपके बेटे से बहोत प्रेम है, मैं उन्हें कभी दुखी नहीं देखना चाहती।“

“मतलब की तू मेरी सौतन ही बनी रहेगी!!!” और दोनों खुल के हँस दी। एक दुसरे की गांड में ऊँगली पिरो के मस्ती करने लगी।

जानकी माँ के पैरो में पद गई और बोली: “बस माँ मेरे इस प्रेम के लिए एक बच्चा लूई के लंड से लेना चाहूंगी। मैं जानती हु की मैं उसे भा गई हूँ। वह मेरी गांड का दीवाना बन गया है। वह जान-बुज के मेरे पीछे चलता है ताकि वह मेरे गांड को देखता रहे। और मुझे पता न चले।“

“अगर कल चुदने का है तो आज ही चुद जा बेटी।“ और कुछ समय के लिए एक दुसरे की गांड ऊँगली से मारती रही।

जानकी ने कहा “मुझे तुम्हारी सौतन ही बना रहना है माँ, मुझे कभी जुदा मत करना, मैं तुम्हारे पैर पड़ती हूँ।“

“मेरी अच्छी सौतन।“ माँ ने उसकी ऊँगली गांड से निकाली और बहार की ओर चल दी। जानकी भी उसके पीछे चल दी। दोनों बरामदे आके बैठी।

“अब मुझे नहीं छोड़ेगी? मेर पास लंड नहीं है बेटी,जाके उसे उठा और अपने ससुर को जैसे मुंह दिखाई देती उसी तरह से उठा।“

“मतलब आप भी माँ?”

“नहीं बेटी, अगर मेरे नसीब में बच्चा है तो मेरे रमेश के लंड से ही होगा। लेकिन अगर तू नहीं गई तो मैं चली जाउंगी।“

जानकी हँस पड़ी और बोली चूत में दम है तो लूई को भी दो पत्निया मिल जायेगी मेरा को इविरोध नहीं होगा माँ। उसने माँ के पालो को निचे की ओर किया और रोज की तरह माँ को बोबले को खिंच के उसके दूध को चूसने लगी। मन ही मन वह बहोत खुश थी की उसे सब की सम्मति मिल गई टी अब वह घर में ही अपनी चूत दिखाई लूई को दे सकती है।

काफी समय माँ को चूसने के बाद अपना पेट भर दिया। यह रोज का था क्यों की माँ के थानों को भी दूध से भरे रखना था। और यह काम वही करती थी। उसने सोचा था की अगर ससुरजी होते तो रोज ही उनके लंड का रस पि के ही अपना पेट भरना था पर यहाँ दूध है।

जब वह माँ को दुहो के उठी तो उसके चहरे पर एक अजीब से प्रसन्नता थी। उसके शरीर में एक नौयौवना आ गई थी। जैसे वह कुँवारी हो और जिस प्रकार से वह अपने स्तनों को थानों में पलट कर बाप के सामने गई थी तब जो शर्म थी ऐसे ही अब थी। उसकी चाल में नजाकत आ गई थी। उसके कुल्हे अब अच्छे से थरथरा रहे थे। जैसे एक हिरनी अपने शरीर में कस्तूरी भर के अपने हिरन को आकर्षने के लिए इधर-उधर तड़पती घूम रही हो।



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आज के लिए बस यही तक समय मिलने पर एक ओर एपिसोड लिख दूंगी।

आप के सहयोग की अपेक्षा सह।


फनलवर की ओर से....




।। जय भारत ।।
एक बहुत ही अप्रतिम अद्भुत और विस्मयकारी उत्कृष्ट अपडेट है मजा आ गया
जानकी को लुई के गोरे लंड से चुदने के लिये अपनी सास कहो या सौतन से स्वीकृती मिल ही गयी और उसके कारण जानकी बडी ही खुश हैं
वैसे सास बहु की छेडखानी बहुत ही मस्त और मजेदार हैं
खैर देखते हैं आगे क्या होता है
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
 

Funlover

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बहुत ही शानदार एपिसोड लिखा है मजे ही आ गए । जहाँ जानकी की सासु को लेकर एक नया रहस्योद्घाटन किया है वह काफी इंटरेस्टिंग है । दो दो रहस्य खोले है आपने एक तो जानकी की सासु कम उम्र में ही अपने बाप से चुद कर गर्भवती हो गई और उसकी पत्नी बन गई मगर जुर्माना देके उसने दूसरी जगह शादी कर ली ।
हालाँकि यहाँ उसने गाँव समाज की परंपरानुसार एक अपने पति से तो दूसरा अपने ससुर से बच्चा पैदा किया है । मगर पति और ससुर की मौत के बाद अपने बड़े बेटे और जानकी के पति रमेश की पत्नी बनी हुई है यह दूसरा रहस्य है । मगर वह रमेश से बच्चा नही चाहती है उसके लिए गर्भनिरोधक जड़ी बूंटी का इस्तेमाल करती है। यहाँ ये देखना सुखद है कि जानकी की सासु यहाँ उसकी सौतन भी है सहेली भी है और मददगार सासु भी है जो उसे मन का करने के लिए हिम्मत दे रही है । सासु ने जानकी को राजी कर ही लिया है कि वह लुई से अपना प्रेम बर्ताव करके उससे फलित हो जाय ।
आपने अपनी परिकल्पना से जहाँ परम सुन्दरी में एक सहज सैक्स की प्रक्रिया करने वाले चोदू गाँव की रचना की है तो यहाँ एक ऐसे समाज गाँव की परिकल्पना को साकार किया है जहाँ बाहरी दुनिया के नियम कायदे कानून से अलग एक अत्यन्त पिछड़े समाज की बेसिक नियम जो हमे आदि पूर्वजों से मिले थे जब हम जंगली हुआ करते थे कि कोई रिश्ता नही है । सेक्स की पूर्ति के लिए बस मर्द और औरत का ही रिश्ता होता है चाहे औरत माँ हो बेटी हो बहु हो भतीजे की बहू हो कोई भी हो सहमति जरूरी है । अपनी कामपिपासा शांत करना कोई अपराध नही है यहाँ ।
आपका बहोत बहोत धन्यवाद

आपकी टिका टिपण्णी की काफी समय से अपेक्षा थी जो आज आपने पूरी की.....यह हर बार अपेक्षा रहगी दोस्तों सभी पाठको से.

जी आपको मेरी यह परिकल्पना पसंद आई मतलब की मेरा प्रयास सफल रहा. कुछ सालो पहले मैंने quest for fire फिल्म देखि थी जहा जिंदगी की नयी नयी शुरुआत हो रही थी तब की बात थी उस से प्रेरित थी मैं. हलाकि यह कहानी और उस कहानी में काफी फर्क है पर मैंने उस परिकल्पना को अपनी तरीके की कल्पना में सम्मिलित करने का प्रयास किया है. और वह यह थी की वह सेक्स की कोई बाधा नहीं थी मतलब की किसी को रिलेशन की कोई समज नहीं थी. वह जन्गालियत थी मतलब खाना ढूंढना खाना और प्रजनन था. खेर वह तो एक अलग कहानी थी पर यहाँ मैंने उसे थोडा सा समाया हुआ है.

आशा है की आप सब को पसंद आई होगी. आपकी कोमेंट से जाहिर है की आपको पसंद आई. बहोत अच्छा लगा.

शुक्रिया दोस्त...................
 

Funlover

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बड़ी मुश्किल से बचा है यह कमेंट एक बार तो लिखते लिखते नेट की गड़बड़ी के चलते पेज आउट हो गया था । बड़ी मन्नत और मेहनत से दुबारा ज्यों का त्यों मिला तो फौरन कमेंट पोस्ट किया है । जब आप कहानी में डूब कर पढ़ते है और उसका मन लगा कर कमेंट करते है और वो बीच मे ही डिसमिस हो जाय तो बड़ा दुख होता है ।

मगर आपने सवा महीने पहले ये एपिसोड रच कर पोस्ट किया है और अभी तक किसी पाठक ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नही दी है तो आपको कितना गहरा दुख हुआ होगा ये मैं अच्छे से समझ सकता हूँ । आपकी निराशा का अंदाजा लगा सकता हुँ । क्षमा करें मैं इस अपडेट को पढ़ने में बहुत लेट हो गया । मगर ये अपडेट बहुत सुकून देने वाला है । आपका तहेदिल से बहुत बहुत धन्यवाद । कृपया अगला एपिसोड थोड़ा बड़ा और कामुकता से लबरेज लिखिए आखिर एक विदेशी लुई और देशी जानकी के मिलन को कुछ खास बना कर लिखिए । कृपया शब्दों और भाषा की मर्यादा को ध्यान ना देते हुए मर्यादा तोड़ कर लिखिए । मजा आना चाहिए और कहानी की लय नही बिगड़नी चाहिए । प्लीज़ प्लीज जल्दी अपडेट दीजिए आपसे विनती है ।
जी बहोत बहोत धन्यवाद आपका

आपकी बात सही है की यह एपिसोड काफी समय पहले लिखा गया था लेकिन रिस्पोंस ना मिलने पर मैंने यह समजा की मेरा यह प्रयास बहोत लोगो को पसंद नहीं आया है

और मुझे अब इस कहानी को यहो छोड़ देना चाहिए और मैंने यही सोच के साथ यह कहानी पर ध्यान देना हटा दिया. जी निराशा तो बिलकुल होती है और खास कर जब की उस कार्य पर आपकी अपेक्षा कुछ ज्यादा ही हो.

मैं मानती हूँ की इस कल्पना ओ साकार करने के लिए मैंने काफी मेहनत की है जैसे मैंने कहा की एक फिल्म और कल्पना की कैसा यह अलिप्त गाँव होना चाहिए और उसी को केंद्रबिंदु बनाके आगे बढ़ रही थी.

अब खेद के साथ कह रही हूँ की यह कहानी में लास्स्त अपडेट के बाद मैंने कुछ भी नहीं लिखा है. मुझे यह कहानी फिर से नए तरीके से पढनी पड़ेगी ताकि मैं आगे लिख सकू. थोडा समय दीजिये मैं इस कहानी को थोडा रिवाइव करने के बाद आगे लिखूंगी यह पक्का वादा है.


परम-सुंदरी और यह कहानी में आसमान जमीं का दिफरंस है.... यह कहानी में थोडा जन्गालियत पुरानी परम्पराओं को कल्पना कर के प्रसंग बनाके लिखना पड़ रहा है और वह कहानी अपने आप चलने के लिए सक्षम है लिंक परम-सुंदरी की पकड़ में है.

फिर भी इस कोमेंट के जरिये सभी पाठको से क्षमा याचना.............

समय मिलने पर आगे लिखूंगी बस थोडा इंतज़ार की जरुरत है.............



शुक्रिया दोस्तों................

:sorry:

🙏
 

Funlover

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एक बहुत ही अप्रतिम अद्भुत और विस्मयकारी उत्कृष्ट अपडेट है मजा आ गया
जानकी को लुई के गोरे लंड से चुदने के लिये अपनी सास कहो या सौतन से स्वीकृती मिल ही गयी और उसके कारण जानकी बडी ही खुश हैं
वैसे सास बहु की छेडखानी बहुत ही मस्त और मजेदार हैं
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जी आपका बहोत बहोत शुक्रिया दोस्त

जी जानकी अब वैसे तो घर में फ्री है उसे सब की परमिशन मिली हुई है यहाँ तक की उसके पति ने ही उसे उत्साहित किया हुआ है. पर जानकी कुछ अलग है शायद देखते है आगे कैसे वह लूई के साथ अपने सबंध को आगे बढाती है, दूसरी तरफ लूई का भी तो जान ना है की वह जानकी के लिए कितना उत्साहित है और कितना आगे बढ़ सकता है, उसकी हिम्मत कहा तक खुल सकती है.


खेर देखेंगे आगे .....

जल्द ही अपडेट देने की कोशिश करुँगी दोस्त...............
 

Ashiq Baba

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जी बहोत बहोत धन्यवाद आपका

आपकी बात सही है की यह एपिसोड काफी समय पहले लिखा गया था लेकिन रिस्पोंस ना मिलने पर मैंने यह समजा की मेरा यह प्रयास बहोत लोगो को पसंद नहीं आया है

और मुझे अब इस कहानी को यहो छोड़ देना चाहिए और मैंने यही सोच के साथ यह कहानी पर ध्यान देना हटा दिया. जी निराशा तो बिलकुल होती है और खास कर जब की उस कार्य पर आपकी अपेक्षा कुछ ज्यादा ही हो.

मैं मानती हूँ की इस कल्पना ओ साकार करने के लिए मैंने काफी मेहनत की है जैसे मैंने कहा की एक फिल्म और कल्पना की कैसा यह अलिप्त गाँव होना चाहिए और उसी को केंद्रबिंदु बनाके आगे बढ़ रही थी.

अब खेद के साथ कह रही हूँ की यह कहानी में लास्स्त अपडेट के बाद मैंने कुछ भी नहीं लिखा है. मुझे यह कहानी फिर से नए तरीके से पढनी पड़ेगी ताकि मैं आगे लिख सकू. थोडा समय दीजिये मैं इस कहानी को थोडा रिवाइव करने के बाद आगे लिखूंगी यह पक्का वादा है.


परम-सुंदरी और यह कहानी में आसमान जमीं का दिफरंस है.... यह कहानी में थोडा जन्गालियत पुरानी परम्पराओं को कल्पना कर के प्रसंग बनाके लिखना पड़ रहा है और वह कहानी अपने आप चलने के लिए सक्षम है लिंक परम-सुंदरी की पकड़ में है.

फिर भी इस कोमेंट के जरिये सभी पाठको से क्षमा याचना.............

समय मिलने पर आगे लिखूंगी बस थोडा इंतज़ार की जरुरत है.............



शुक्रिया दोस्तों................

:sorry:

🙏
देखिए कोई जल्दबाजी नही है । आप समय मिलने और मूड बनने पर ही इस कहानी को लिखे । आखिर मशीनों से बनी फैक्ट्री मेड समान और हाथों से बना फाइन आर्ट में जमीन आसमान का फर्क होता है । यहं कहानी बहुत ही सादा और रूह में उतरने वाली है । पाठकों का रेस्पॉन्स नही मिलने पर आपकी निराशा समझ सकता हूँ मगर क्वालिटी को प्रमाण की जरूरत नही है । बह्यत समय तक मैंने भी बिना xforum पर रजीस्ट्रेशन किये कहानियां पढता था । मगर एक कहानी अभी भी चल रही है *मालती का कामुक संसार* उस कहानी को पढ़ना स्टार्ट करने के बाद मैंने रजिस्टर किया और कमेंट करना शुरू किया और दूसरी आपकी कहानी है जहाँ मैंने कमेंट किया । तो मेरे कहने का मतलब यह है कि आपके पाठक बहुत है बस कमेंट कम कर रहे है इससे निराश होने की जरूरत नहीं है । बस यूं समझे कि पढ़ तो रहे है मगर कमेंट नही कर रहे । आप तसल्ली से पढ़िए और फिर आराम से लिखिए । कहानी का मूल पकड़े हुए है तो लिखने में कोई दिक्कत नही होगी ।
 

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जानकी हँसी, उसकी आवाज़ मंदिर की घंटियों जैसी थी। "मैं चाहती थी कि आपको घर जैसा महसूस हो। स्तनापुर छोटा है, लेकिन हमारे दिल बड़े हैं। आपको कई सवाल पूछने होंगे, है ना? हम आपको सब कुछ दिखाएँगे।" उसने उसे अपनी छाती दबाकर अपनी क्लीवेज दिखाई।


अब आगे...............


शादी को एक साल हो गया था, फिर भी इस जोड़े के अभी तक कोई बच्चा नहीं था। फिर भी, जैसे-जैसे वे छायादार गलियों में चल रहे थे, लुई ने देखा कि कैसे बच्चे जानकी के पास झुंड में आ रहे थे। छोटे बच्चे उसकी उंगलियाँ पकड़े हुए थे; बड़े लड़के उसके चुटकुलों पर खिलखिलाते हुए उसके पास झुके हुए थे। उसके पास हर किसी के लिए कुछ न कुछ था—कोई चिढ़ाने वाला शब्द, कोई लोरी, किसी के कान पर हल्की सी झप्पी। वह खुलकर देती थी, और बच्चे उसकी खुशी को धूप की तरह सोख लेते थे।

रास्ते के एक मोड़ पर, लगभग छह साल का एक लड़का दौड़कर आया और उसकी कमर से चिपक गया, उसका चेहरा उसके कूल्हे से सटा हुआ था।

"अरे, तुम फिर से!" जानकी ने झुककर चिढ़ाते हुए कहा। "क्या मैंने तुम्हें आज सुबह खाना नहीं खिलाया? अब क्या शरारत करने आये हो?"

उसने उसे आसानी से उठा लिया, उसे अपने कूल्हे पर टिकाकर एक नीची पत्थर की दीवार पर बैठ गई। लुई उत्सुकता से देख रहा था कि कैसे उसने एक हाथ से अपना पल्लू ठीक किया, जिससे उसके भरे हुए, सुंदर स्तन का उभार दिखाई दे रहा था। उसका बड़ा और कोमल निप्पल, गर्मी से नरम पड़े सांवले रंग के एरिओला के बीच में था, और उस स्तन की सुन्दरता को बढ़ावा दे रहा था। बिना किसी हिचकिचाहट के, उसने लड़के को अपने पास खींच लिया। उसके होंठ सहज ही खुल गए, और वह उससे चिपक गया, उसके गाल गोल हो गए और वह दूध चूसते हुए पीने लगा।

आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी: एक धीमी, लयबद्ध खिंचाव, गीली और उद्देश्यपूर्ण। लड़के की पलकें फड़फड़ा रही थीं, उसके हाथ ढीले पड़ गए थे, उसकी साँसें पोषण की लय के साथ धीमी हो रही थीं। जानकी उसे बेहतर सहारा देने के लिए थोड़ा झुकी, अपनी हथेली से उसका सिर सहलाया, उंगलियाँ उसके घने बालों में फिरा रही थीं।
मैत्री और फनलवर की अनुवादित रचना है

"वे जानते हैं कि मेरे पास दूध है," उसने शांत, आत्मविश्वास से भरी मुस्कान के साथ लुई की ओर देखते हुए कहा। "भले ही मेरा अपना कभी बच्चा नहीं रहा। प्यार से भी दूध बनता है।"

लुई श्रद्धा और अविश्वास के बीच फँसा हुआ, जड़वत खड़ा था। उसने प्रतीकात्मक दूध पिलाने की रस्मों, सामुदायिक दूध पिलाने की रस्मों और विभिन्न महाद्वीपों की मातृ-कथाओं का अध्ययन किया था - लेकिन यह अलग था। यहाँ कोई रस्म नहीं थी, कोई प्रदर्शन नहीं। बस एक महिला खुले में, शांति से, बच्चे को दूध पिला रही थी।



Breast-feeding14

रमेश, लुई के विस्मय को भाँपकर, धीरे से हँसा। "हमारे गाँव में," उसने कहा, "दूध सबके लिए है, यही हमारे गाव की पहचान है।"

जानकी ने सिर हिलाया, अभी भी दूध पिला रही थी, उसकी आवाज़ कोमल और दृढ़ थी। "हम इसे बाँटते हैं। कहानियों की तरह। गर्मियों में आमों की तरह। लड़के मज़बूत होते हैं, और हम भी। तुम्हें हैरानी हो रही होगी, शायद। लेकिन तुम देखोगे - प्यार से दूध पिलाने में कोई शर्म नहीं है।"

उसका स्तन लड़के की चूसने की लय के साथ ऊपर-नीचे हो रहा था। जब उसका चूसना धीमा हुआ, तो उसने करवट बदली और बिना किसी झिझक के दूसरा निप्पल उसके सामने पेश किया। लड़का, अब लाल और भारी पलकों वाला, लालची परिचितता के साथ नए स्तन की ओर बढ़ा, होंठ उसके चारों ओर लिपटे हुए, जीभ सहज समन्वय के साथ चल रही थी। लुई ने सूक्ष्म बदलाव को नोटिस किया - यह स्तन तेज़ी से ढीला हुआ, और बच्चे का घूँटना तेज़ हो गया, उसके हाथ अब उसके पेट पर धीरे से थपथपा रहे थे। वह लड़के के जबड़े की हरकत, निप्पल पर जीभ की लयबद्ध गति और दूध को स्पंदनों के रूप में बाहर निकालने का तरीका भी देख सकता था। लूई इस बात से परिचित तो था और तभी वह यहाँ था, लेकिन अब वह विस्मित था। जो पढ़ा गया था, वह उसके सामने साक्षात् हो रहा था।

जानकी ने धीरे से साँस छोड़ी, अपने खाली हाथ से कनपटी से पसीना पोंछा। कोई छिपाव नहीं था, कोई माफ़ी नहीं थी - बस ज़िंदगी यही थी। लुई ने सिर हिलाया, उसकी साँस गले में अटक गई। इस क्रिया में - शांत, अघोषित, बिना किसी वर्जना के - उसने कुछ मौलिक देखा। अपनापन, सुकून, निरंतरता। लूई के मस्तिष्क में कोई एसा भाव नहीं था जिस से वह उन्माद हो सकता था। सब कुछ सामान्य।

कुछ समय बाद जानकी ने उस लड़के से अपने निप्पल को छुडाते हुए कहा: “बस, अब हो गया! अब जब भूख लगे आ जाना तब तक खेलो यहाँ।“ लड़का उठ खड़ा हुआ और अपने दोस्तों के पास चला गया। जानकी ने अपने नंगे स्तन को ब्लाउज में सही टिके से समा लिया और उठते हुए बोली, “चलो लूई जी घर चलते है, आपको भी भूख लगी होगी। थोडा नाश्ता कर लीजिये बाद में हम आराम से बात करेंगे और आपकी खोज को अंजाम देने की कोशिश करेंगे।“
आप मैत्री और फनलवर की रचना पढ़ रहे है

लूई के पास को इजवाब नहीं था। वह बस मुस्कुराके जानकी को आगे बढ़ने का हाथ से इशारा किया और सब चल पड़े। उस दिन, बाद में, जैसे-जैसे रोशनी धीमी हुई और परछाइयाँ लंबी होती गईं, वे मिट्टी की दीवारों और फूस की छत वाले एक साधारण घर में पहुँचे।

घर पहुचके तीनो ने जानकी के द्वारा बनाया गया नाश्ता किया और इधर-उधर की बाते हुई। कुछ गाव के बारे में तो कुछ लूई ने आने बारे में बता के एक दुसरे को जान ने के लिए आदान-प्रदान किया।


******


Ees episode ke baare me aapke opinions me pratiksha rahegi.
Achchi start li is story ki... not a usual one.... the plot and narration is really interesting... Louise is really intrigued by the way Janki is loving breastfeeding a kid of her village..

Acha laga.. aagey dekhte hain...
 

rhyme_boy

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घर पहुचके तीनो ने जानकी के द्वारा बनाया गया नाश्ता किया और इधर-उधर की बाते हुई। कुछ गाव के बारे में तो कुछ लूई ने आने बारे में बता के एक दुसरे को जान ने के लिए आदान-प्रदान किया।

****** यहाँ तक आपने पढ़ा।

अब आगे...............
“चलिए. आइये अब यहाँ बैठ जाइये इस पेड़ के निचे और बाते करते है।“जानकी ने अपनी वही खुबसूरत मुस्कान के साथ कहा। लुइ के पास ओर कोई चारा ही नही था।वह उठ के वही जो जानकी ने बताई थी वह खात पर जा के बैठ गया।


“हा, अब ठीक है, यहाँ हम आराम से बात कर सकते है। जानकी ने वही अपनी छोटी मुस्कान लुइ के मुह पर थोपते हुए कहा।

“जी, अब तो मैं यहाँ आगे अहू काफिछोता गाव है लेकिन बहोत रमणीय गाव है, यहाँ की आबोहवा भी अच्छी है।“ लुइ ने भी थोडा स्माइल के साथ अपनी बात कही।

“लुइ साब इस गाव की तो बात ही निराली है, यहाँ हम सभी प्यार से रहते है, कोई गिला शिकवा नहीं है सभी लोग आपस में एक दुसरे से हदे रहेते है।“ जानकी ने अपनी बात को जोड़ते हुए कहा: लेकिन लुइ साब हम आपके जितना पढ़े लिखे और समजदार तो नहीं है, इसलिए आपको भी हमारी भाषा समजनी और बोलनी पड़ेगी तभी तो आप अपनी खोज के लक्ष्य तक पहुच पायेंगे।“
मैत्री और नीता की अनुवादित रचना पढ़ रहे है

“देखिये जानकीजी मैं इस देशमे पहले भी आया हुआ हु और कुछ बाते और शब्द मुझे आते है। मुझे समजने में कोई प्रॉब्लम नहीं आती लेकिन हां बोलने में काफी दिक्कत हो सकती है। लेकिन हर चीज का उपाय होता है।“ लुइ ने जानकी की आँखों से आँखे मिलाते हुए कहा।

“उपाय? अब इसका क्या उपाय है? आप ही बताइए!” जानकी भी अब लुइ के बगल में आके बैठ गई। कुछ छोटे बच्चे उनके इर्दगिर्द घुमाते और खेलते नजर आते थे।

“आप जो हो जानकीजी!” लुइ ने बच्चो की तरफ नजर डालते हुए कहा।

मैं! क्या.....मैं....मैं क्या उपाय दे सकती हु यह तो आपको करना है हम तो अनपढ़ गंवार है, हमें क्या पता आपकी खोज और संशोधन के बारे में। जानकी ने यह हिंदी में कहा।
मैत्री और फनलवर की अनुवादित रचना है

आप मुझे समजाएगी ना की सामने वाला क्या कहना चाहता है। मतलब दुभाषिया। लुइ ने भी अपनी टूटी फूटी हिंदी में कहा।

“ओह्ह हाँ,हाँ, क्यों नहीं....मैं तो हु ही आपके साथ और रहूंगी मुझे रमेश ने बता के रखा है की जब तक आप यहाँ है आपको मुज से अलग नहीं करना है।“

“चलिए कुछ बाते मैं सामने से ही बता देती हूँ।“ जानकी ने अपने हाथ लुइ के हाथ के पास रखते हुए कहा।

“जी, आपसे सुन ने के लिए काफी इच्छुक हूँ। बताइए क्या बता देना चाहती है।“

देखिये लुइ साब सब से पहले तो आप मेरे नाम के पीछे से “जी”शब्द निकाल दीजिये, कुछ अजीब सा लगता है, हम इस गाव में सभी को नाम से पुकारते है। आप भी मुझे जानकी से पुकारा कीजिये। इसमें बातचीत में अपनापन महसूस होता है। वैसे भी आप की भाषा में फ्रेंड कहते है है न!”

“हाँ,हम लोग फ्रेंड यानी की दोस्त ही कहते है।क्या हम दोस्त बन सकते है?“ लूनी ने बच्चो की तरफ से नजर हटाके जानकी तरफ देखते हुए कहा।

“हाँ, हम दोस्त बन सकते है, बल्कि हम दोस्त ही तो है।“ और वह खिलखिलाट हँस दी। उसकी हँसी से लुइ थोडा सा असहज महसूस करने लगा क्योकि वह उस मुस्कान में जानकी बहोत ही दीप्तिमान लग रही थी। लेकिन उसकी यह मुस्कान में कोई स्वार्थ नहीं था।

“ठीक है चलो जानकी मुझे अब इस गाव के बारे में ओर भी बताओ, किस एयः सब शुरू हुआ!”

“क्या शुरू हुआ?” जानकी अभीभी भोली ही लग रही थी।

“यह ब्रिस्ट फीडिंग रिवाज!”

ओह्ह हाँ, सब से पहले यहाँ के कुछ शब्द जान लो लुइ साब। जानकी ने अपनी आँखे लुइ की आँखों से मिलाई।

“कौनसे शब्द जानकी? और हां मई भी साब नहीं हु सिर्फ लुइ हूँ। ओके?”

जानकी ने एक निर्दोष मुस्कान लुइ की तरफ फेंकी और बोली: “ओके”

जानकी ने थोडा अंतर बनाते हुए कहा: “यह जो आप ब्रिस्ट फीफिंग कहते है उसको मैं यह समजती हु की आप स्तनपान की बात करते हो राईट?”

“हाँ,मेरा वही मतलब था।“ लुइ अब थोडा जानकी के करीब अपने सिर को ले जाते हुए कहा।

“देखो लुइ, यहाँ ना तो स्तनान चलता है और नाही ब्रिस्टफीडिंग, यहाँ हम दुहाना कहते है।“ जानकी “दुहना”शब्द बोलते हुए थोड़ी शरमाई।

“और जिनको आप लोग स्तन कहते है या फिर बूब्स कहते है इसे यहाँ बोबले के नाम से जाना जाता है।“

“बोबले?” लुइ थोडा हँसा। “हम टिट्स भी कहते है।“
मैत्री और नीता की अनुवादित रचना है

“हाँ, यह यहाँ की भाषा में प्रचलित है,और दुहना मतलब यह है की स्तनों को चुसना और उस में से दूध निकालना या चुसना। जो आप ने देखा था।“

“दुहना,काफी अच्छा शब्द है लेकिन मेरे ख्याल से यह गाय में से धुध निकाल ने की प्रक्रिया को कहते है।“

“हम औरते भी तो एक प्रकार से गाय ही है, गाय भी दूध देती है और हम औरते भी। दोनों समान्तर ही तो है।“ जनाकि ने देखा की लुइ कुछ ज्यादा करीब आ गया है तो वह उठ खड़ी हुई और थोडा अंतर बना के फिर से बैठ गई।

“लेकिन एक बात बताओ जानकी, आप के तो बच्चे नहीं है फिर भी आप दूध से भेरे हुए हो ऐसा कैसे?”

“कौन कहता है की मेरे बच्चे नहीं है! गाव के सभी बच्चे मेरे ही तो है। सभी मर्द मेरे ही बच्चे तो है। जब वह मुझे दुहोते है तब वह सभी मेरे बच्चे ही है।“

हाँ यह सच है की आप ऐसा मानते है, या फिर यहाँ सब ऐसा मानते है।“ उसने थोडा हिचकिचाते हुए कहा “फिर भी!”



“मैंने पहले भी आपको बताया था की जरुरी नहीं माँ बन न दूध देने के लिए प्रेम से भी दूध आता है।“ जानकी ने अपने हाथ अपनी छाती पे ले जाते हुए कहा।

“मैं तुम्हारे साथ सहमत हु लेकिन विज्ञान कुछ अलग ही कहता है।

हाँ आपका विज्ञान अलग कहता है, लेकिन यहाँ दूसरा हि चलता है। जो अब तक आपने देखा। और जानकी ने अपने स्तनों को थोडा दबाया और उसके निपल ने दूध उगल दिया।

“देखो यह तुम्हारे सामने ही है ना, मैं अभी तक माँ नहीं बनी पर मेरे चुंची ने मेरा दूध बहाया ना।“

“हाँ, देखा तो था और वही तो समजना है की कौन सही, जो मैं देख रहा हूँ वो या फिर जो मैं पढ़ा हूँ वह!” उसकी नजर अब जानकी की नोकीली निपल पर पड़ी रही।

जानकी ने कोइ विरोध ना जताते हुए कहा: “दोनों अपनी जगह सही है लुइ।”

“पर कैसे?” लुइ अभी तक उस निपल्स को देख रहा था जहा से दूध टपकता था। उसके ब्लाउज को ख़राब कर रहा था।

ओके, सब से पहले तो यह समज लो की यहाँ बोबले मतलब स्तन, बूब्स है और चूंची मतलब निपल्स है, आई बात समज में!”

“हाँ समज गया, अब से ऐसा ही बोलने का प्रयास करूँगा।“

“और अब यह समजो की यहाँ हर औरत को दूध कैसे आता है। अब जानकी निखालस हो के लुइ के पास गई और बैठ गई।

“जब लड़की अपने उम्र में आती है। अब अपनी उम्र तो पता है ना।“

लुइ उसके सामने प्रश्नार्थ नजरो से देख रहा था।

“हे भगवान् अब इसका क्या करू?”

जब लड़की निचे से टपकना चालु होता है तब, समजे? अरे भाई, आपकी भाषा में कहू तो जब लड़की पहली बार पीरियड्स में आती है तब।“

“ओह्ह, आई सी.....माफ़ करना नहीं समज सका था।“

“ओके अब समजे,तो जब लड़की निचे से टपकती है तब घर में एक अच्छा माहोल बनता है, घरवाले अच्छी मिठाई बना के सब में बाटते है की वह लड़की अब तैयार है।फिर दूसरी बार सही समय पे टपकती है तो, यह पक्का किया जाता है की अब वह लड़की सही तरीके से अपने उम्र में आ गई है। घर की औरते अच्चा सा मुहूर्त देख के यहाँ जंगल से पैदा हुई XXXX जड़ीबुट्टी ले आते है या घर में ही होती है, उस लड़की के बोबले पर लगाना शुरू करते है। कुछ समय में ही उस लड़की के बोबले बड़े होना चालू हो जाता है। थोड़े समय के लिए यही प्रेक्टिस रहती है, शुरुआत में दिन में एक बार फिर दो बार फिर तीन बार तक लगाते है, जब तक उसके बोबले सही आकर में ना हो जाए। एक बार उसके बोबले और चुंची नोकीले हो जाते है फिर माँ उसकी चुन्ची को खिंच खिंच के आगे की तरफ ले आती है। और कुछ महीनो के बाद उसे YYYY जड़ीबुट्टी खिलाना चालू हो जाता है। और कुछ समय के बाद उसके स्तनों भरने चालू हो जाता है। और जब पक्का हो जाता है की उसके स्तन अब दूध भर रहे है तो घरवाले एक जश्न की तरह प्रांग मनाते है और लोगो को बताते है की उनकी लड़की अब दुहाने के लायक है। जब तक थोडा थोडा दूध बनता है तब उस लड़की को छोटे बच्चे को अपनी निपल देने का शुरू करते है। शुरुआत घर के बच्चो से होती है पर आमतौर पर गाव के सभी बच्चे, क्यों की यहाँ सब साथ ही तो खेलते बड़े होते है। कुछ बच्चे उसकी निपल्स को चूस चूस के बड़ी और दूध बनाने के सक्षम बना देते है। और एक समय आता है की वह एक दुधारू लड़की बन जाती है। और वह कसी भी मर्द को अपना निपल दे सकती है।और कही भी। गाव में कही भी बैठ के वह अपने आपको दुहा सकती है। बिना रोकटोक। यह मैंने बहोत संक्षिप्त में तुमको बताया। जैसे जैसे हम गाव में जाते रहेगे आपको यहसब देखने को मिल जाएगा।“

लुइ, इतना सुन कर, सिर्फ इतना बोल पाया, “ओह्ह माय गॉड।“
मैत्री और फनलवर की अनुवादित रचना है

बस इसीतरह की गाव की रित और रिवाजो की अदान-प्रदान होती रही।

********

बने रहिये और इस एपिसोड के बारे में आपके मंतव्य दीजिये................
Aapne sahi kaha.. new flavor hai.. normal fantasy story nahi hai.. alag hi hai.. and interesting and sexy concept hai...

acha laga padh kar
 
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