जब सुप्रिया ने प्रिया को राजेश के कमरे से बाहर निकलते देखी। वह सोच में पड़ गई, आख़िर इतनी रात को राजेश के कमरे में दीदी क्यू गई थी।
दरसल सुप्रिया की बड़ी लड़की को पेशाब लगी थी। उसको पेशाब कराने के लिए वह उठी थी। लड़की को आंगन के मोरी के पास ही पेशाब करने बिठा दी और उसके पीछे खड़ी थी। तभी उसे दरवाज़ा खुलने का आहट सुनाई पढ़ी, उसका ध्यान उस ओर गया।
जब प्रिया राजेश के कमरे से निकल कर अपने कमरे में गई।
लड़की के पेशाब कर लेने के बाद, उसे लेकर कमरे में चली गईं। बेड पर लेट कर वह यही सोचने लगी की आख़िर इतनी रात को दीदी राजेश के कमरे में क्यों गई थी।
फिर सोंची हो सकता है राजेश को किसी चीज की जरूरत पड़ी होगी। वह यही सोचते सोचते सो गई।
इधर सत्जन सिंह प्रतिदिन की तरह सुबह उठ कर घर के आंगन में कसरत करने लगा।
स्घर के सभी महिलाएं उठ चुके थे।
सत्जन सिंह _अरे ये भांजा अभी तक उठा नही क्या, वो तो आज मेरे साथ कुश्ती लड़ने वाला था। अभी तक उठा नही।
सुप्रिया वही खड़ी थी।
अरे सुप्रिया बेटा देखो तो, यू भांजा, कल तो बड़ी बड़ी बाते कर रहा था मुझे कुश्ती में हरा देगा।
भूल गया क्या? जरा याद तो दिलाओ उसे। बॉडी तो बड़ी अच्छी बना रखी है। इतनी देर तक सोता है तो कसरत कितना समय करता है।
सुप्रिया _पिता जी मै अभी राजेश को बुला कर लाती हूं।
सुप्रिया राजेश के कमरे के पास गई। रात में कमरा अंदर से बंद नहीं किया था।
सुप्रिया को रात में प्रिया राजेश के कमरे में क्यू गई थी यह जानने की जिज्ञासा थी वह बिना दरवाज़ा खटखटाए अंदर घुस गई।
जब वह अंदर गई तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।
राजेश बिलकुल नंगा था। उसका लंद भी सुबह सुबह प्रतिदिन की तरह खड़ा हुआ था।
सुप्रिया, की नजर जब राजेश के लंद पर पड़ी तो, उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।
बाप re कितना बडा है।
ये तो नंगा ही लेटा है। इसका मतलब दीदी रात में राजेश से चुदने आई थी। हे भगवान।
तभी राजेश ने करवट लिया।
सुप्रिया घबरा गई।
वह कमरे से बाहर निकल गई।
फिर दरवाज़ा खटखटाया ।
राजेश का नींद खुल गया।
राजेश ने देखा वह रात में नंगा ही सो गया था।
वह तेजी से उठा और अपना कपड़ा पहनने लगा।
सुप्रिया _अरे कितने देर तक सोता रहेगा उठो।
बाहर से बोली।
राजेश _कोन आ गई,मै आ रहा हूं। राजेश ने आवाज दिया।
राजेश ने कपड़े पहन कर दरवाज़ा के पास गया, दरवाज़ा तो पहले ही खुला huwa था।
राजेश _अरे दीदी तुम।
सुप्रिया _पिता जी ने भेजा है तुम्हे बुलाने, कह रहा था कि कितने देर तक सोता रहेगा।
राजेश _ओह मामा जी उठ गए क्या?
सुप्रिया _वो कसरत कर रहे हैं? तुम्हारा वेट कर रहे हैं कुश्ती लड़ने के लिए। सुप्रिया हसने लगी।
पर मुझे नही लगता तुम कुश्ती में पिता जी को हरा पाओगे।
राजेश _क्यू?
सुप्रिया _रात भर कुश्ती लड़कर थक जो गए होगे, धीर से फुसफुसाते हुवे बोली।
राजेश _दीदी, आपने क्या कहा?
सुप्रिया _अरे कुछ नहीं मैन ये कहा, तुम्हारी सकल तो ऐसी लग रही है जैसे तुम रात भर जगे हो, किसी के साथ कुश्ती लड़े हो। अब सुबह सुबह पिता जी के साथ मुझे नहीं लगता तुम, कुश्ती लड़ पाओगे।
राजेश _, दीदी, तुमने अभी मेरा पावर देखा कहा है। जिस दीन देखोगी न मेरा फैन बन जावोगी।
सुप्रिया _अच्छा मै भी देखना चाहूंगी कितना पावर है तुझमें।
राजेश _अच्छा दी तुम चलो, मै फ्रेस होकर आता हूं।
सुप्रिया _जल्दी आना।
राजेश फ्रेश होने बाथरूम चला गया।
वहा से सीधे आंगन में पहुंचा जहां, सत्जन सिंह कसरत कर रहा था।
सतजन सिंह _आ गया बरखू दार,
राजेश _नमस्ते मामा जी।
सत्जन सिंह _उठने लेट हो गए, नौजवान। चल पहन ले लंगोट और उतर जा मैदान में। दिखाओ सबको कितनी ताकत है तुम्हारी भुजाओं में ।
राजेश _मामा जी, मैने कभी लंगोट पहना नही।
चड्डा चलेगा, वैसे भी लंगोट में मुझे शर्म आयेगी।
घर के लोग मुझे देख कर हसेंगे।
सत्जन सिंह _अरे यार तू मर्द होकर लड़कियों की तरह शर्मा रहा है। अगर कुश्ती लड़ना है तो लंगोट तो पहनना पढ़ेगा बेटा।
सतपाल पहना दो भांजा को लंगोट।
सतपाल _आओ राजेश।
राजेश को सतपाल सिंह एक कमरे में ले गया। और उसे लंगोट पहना दिया।
राजेश लंगोट पहन कर बाहर निकलने में शरमा रहा था।
वह शर्माते हुवे आंगन में पहुंचा।
घर की सभी महिलाए, राजेश को लंगोट में देखकर मुंह छिपाकर हसने लगीं।
सुप्रिया _बॉडी तो बहुत अच्छी है, देखते है ताकत है की नही, वैसे लंगोट में बिल्कुल बंदर लग रहा है।
सुप्रिया की बात सुनकर, सभी हसने लगे।
राजेश _मामा जी सभी मेरा मजाक उड़ा रहे हैं।
सतजन सिंह _अरे यार, मर्द को औरतों की बातो पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
चल आ जा मैदान पे, हो जाए दो दो हाथ।
सतपाल सिंह रेफ्री बन गया।
राजेश _मामा जी देखते है इस उम्र में भी आपके पास कितना ताकत है। आप तैयार हो जाइए, मुझ्से हारने के लिए।
सतपाल सिंह _ये हुई मर्दों वाली बात चल आ जा मैदान पे।
राजेश मैदान पे आ गया।
सभी लोग दोनो की कुश्ती देखने लगे।
कभी राजेश आगे बढ़ता, कभी सत्जन सिंह तभी सत्जन सिंह ने अपना चाल चला। और घुमाके राजेश को चीत कर दिया।
सतपाल सिंह ने सिटी बजाया।
राजेश हार गया।
सत्जन सिंह,_बरखुदार तुम तो कमजोर निकले एक ही बार में चीत हो गया।
सभी लोग सत्जन सिंह के लिए ताली बजाने लगे।
सुप्रिया _, क्यू बड़ी बड़ी बाते कर रहा था। एक ही बार में चीत हो गया। बेचारा।
सुप्रिया chidane लगी।
सतजन सिंह _बरखु दार कुश्ती में सिर्फ ताकत नहीं, दीमाक की भी जरूरत पड़ती है।
राजेश _मां मां जी एक बार और मौका दो, अबकी बार हरा दूंगा।
शुप्रिया _रहने दे और कितनी बेजजती कराएगी अपनी।
सतजन सिंह _अरे आजा, कर ले अपनी ईच्छा पूरी।
राजेश फिर मैदान में आ गया।
दोनो के बीच फिर कुश्ती शुरू हो गया।
कुछ ही देर में राजेश फिर चित हो गया।
सभी लोग मुंह छिपा कर हसने लगे।
राजेश फिर से एक और मौका मांगा। पर राजेश सत्जन सिंह को हरा न सका।
सुनिता _बस बस अब रहने दे, अपने मामा जी को तू हरा नही पाएगा।
राजेश _मामा मैंने आपसे हार मान लिया।
सत्जन सिंह _बरखु दार, जानते हो तुम क्यू हार रहे। तुम इस लिए हार रहे हो की, तुम सामने वाले को चीत करने पे ज्यादा ध्यान दे रहे थे, जबकि पहलवान को अपनी सुरक्षा पर पहले ध्यान देना है और जब सामने वाले थकने लगे तो मौका देखकर उस पर अटैक करना है।
चलो मैं तुम्हे सिखाता हूं।
सत्जन सिंह ने राजेश को कुछ तकनीक सिखाए।
सावित्री _अब बस भी करो जी, आज घर में कार्यक्रम है। कुछ देर में मेहमानों की आने की सिलसिला शुरू हो जाएगा।
तैयारी भी करनी है। वैसे भी राजेश कुश्ती सीखकर करेगा क्या? उसे तो कलेक्टर बनना है। कुश्ती थोड़ी लड़नी है।
सतपाल सिंह _तुम्हारी मामी ठीक कह रहा है भांजा। इतना पर्याप्त है तेरे लिए। वैसे भी गांव में कल कुश्ती प्रतियोगिता होनी है। पहलवानों को कुश्ती लड़ता देख, बहुत कुछ तुम्हे सीखने को मिलेगा। तुम भी चलना,कुश्ती देखने।
राजेश _ज़रूर मामा जी।
इसकेे बाद घर के सभी लोग नहा धोकर तैयार हो गए। घर के कार्यक्रम की तैयारी में लग गए।
कुछ देर बाद सुप्रिया के पति गांव पहुंचा।
सुप्रिया _राजेश ये है तुम्हारे जीजू।
राजेश _नमस्ते जीजू, ये क्या जीजू आप अभी आ रहे हो, घर का दामाद हो, तैयारी की जिम्मेदारी तो घर की दामाद की होती है ना, और आप ही पीछे रह गए।
जीजा जी _अरे यार क्या करे? सरकारी नौकरी है। बड़ी मुस्किल से एक दिन की छूटी मिली है।
वैसे शादी के समय तुझे देखा था। तू छोटा था। अब तो एकदम जवान और स्मार्ट हो गया है यार।
वैसे क्या कर रहा है अभी।
सुप्रिया _राजेश, आई ए एस का इंटरव्यू देकर कुछ दिन पहले ही आया है दिल्ली से।
जीजा जी _ओह ये तो बड़ी अच्छी बात है, बहुत बहुत शुभकामनाएं भई हमारे तरफ से, इंटर व्यू में तुम ज़रूर सफल हो।
राजेश _शुक्रिया जीजू।
धीरे धीरे सभी मेहमानों का आना शुरू हो गया।
सत्जन सिंह _कोई पंडित जी को फोन करो भाई, सारे मेहमान आ गए। आने में और कितना समय लगेगा।
सतपाल सिंह ने पंडित जी को फोन किया।
पंडित जी ने कहा की बस कुछ ही देर में वह पहुंचने वाला है।
कुछ ही देर में पंडित जी पहुंच गया।
पंडित जी ने पूजा पाठ शुरू किया।
पूजा पाठ संपन्न होने के बाद, मुन्ने का कुंडली देखा।
पंडित जी _मुखिया जी, मुन्ने का नाम अ अक्षर से निकल रहा है। क्या नाम रखना है मुन्ने का।
सत्जन सिंह _मुन्ने का नाम रखने का अधिकार तो उसके माता पिता का है। वही बताएंगे।
सतपाल सिंह _ये क्या भईया, आप घर के बड़े है, मुन्ने का नाम रखने का अधिकार तो आप का ही है।
राजेश _हां मामा जी, छोटे मामा जी सही बोल रहे है। कोई अच्छा सा नाम सुझाइए मुन्ने का।
सत्जन सिंह _तुम लोगो की यही ईच्छा है तो आज से मुना अर्जुन के नाम से पुकारा जायेगा।
सभी लोग ताली बजाने लगे।
राजेश _वाह मामा जी बहुत अच्छा नाम सुझाया है आपने।
उसके बाद सभी मेहमानों को भोजन कराया गया।
शाम होते होते आस पास के मेहमान तो अपने अपने घर जानें लगे। दूर से आए मेहमान रात वही रुक गए।
सुबह होते ही शेष बचे मेहमान भी, अपने अपने घर के लिए निकल गए।
सुप्रिया का पति भी, एक ही दिन की छूटी लेकर आया था वह भी चला गया।
शाम को 4बजे गांव में कुश्ती प्रतियोगिता आयोजित किया गया था।
विजेता पहलवान को 2लाख रुपए इनाम रखा गया था। आस पास एवम दूर दूर से भी पहलवान कुश्ती प्रतियोगिता में भाग लेने आए थे।
सतजन सिंह खुद एक पहलवान था। गांव का मुखिया भी था।
उसी के अध्यक्षता में यह प्रतियोगिता आयोजित किया गया था।
सतपाल सिंह _भईया, लड़के लोग बुलाने आए थे। प्रतियोगिता की सारी तैयारी हो चुकी है।
सत्जन सिंह _चलो हम चलते है। घर के सभी पुरुष सदस्य, कुश्ती देखने के लिए जाने की तैयारी करने लगे।
सुप्रिया _पिता जी, मुझे भी देखनी है कुश्ती। सुनिता बुआ चलो न हम भी चलते है।
सुनिता _भईया, क्या हम भी देखने जा सकते है।
सतजन _अगर तुम लोगो की ईच्छा हो तो, जा सकती हो।
शुप्रियां, और सुनिता बच्चों को लेकर कुश्ती देखने के लिए जाने की तैयार करने लगी।
सभी लोग तैयार हो कर साथ में, प्रतियोगित स्थल पहुंचे।
प्रतियोगिता स्थल पर महिलाओं बच्चों और पुरुषो की बहुत भीड़ थी।
पास के गांव वाले मुखिया का नाम नाथू सिंह था।
वह भी अपना पहलवान लेकर आया huwa था।
पिछले बार नाथू सिंह और सत्जन सिंह के लड़को के बीच ही अंतिम मुकाबला huws था। जिसमे सत्जन सिंह के लड़के विजेता बने थे।
नाथू राम इस बार सतजन सिंह के लड़को को कुश्ती में हराकर, उसे नीचा दिखाना चाहता था। पिछले बार वह बहुत अपमानित महसूस किया था। उसका बदला लेना चाहता था। इस बार एक से बढ़ कर एक पहलवान लेकर आया huwa था। एक तो उसका बेटा था शेरा जो काफी खूंखार लग रहा था।
नाथू सिंह माइक लेते हुए कहा,,,
सत्जन सिंह इस बार मेरे लड़को को कोई हरा नही पाएगा।
विजेता मेरे लड़के ही बनेंगे।
सतजन सिंह _रहने दो सत्जन सिंह, पिछले बार भी तुमने यही कहा था। पर देखा न तुमने मेरे लड़को ने तुम्हारे पहलवानों की क्या दुर्गति की।
नाथू सिंह _सब याद है मुझे सतजन सिंह, इस बार मेरे लड़के पिछले अपमान का बदला लेने आए है। वो देखो मेरा बेटा सेरा।
अगर कोई मेरे बेटे शेरा का तुम्हरे लड़के हरा देंगे तो मैं अपना मूछ मुड़ा दूंगा।
अब तुम बोलो अगर मेरे लड़के तुम्हरे पहलवानों को हरा देंगे, तो क्या तुम अपना मूछ मुड़वाओगे।
सतजन _देखो नाथू सिंह खेल को खेल भावना की तरह लो। इसमें किसी किसी को अपमानित करने का इरादा नहीं होना चाइए।
नाथू सिंह,_सत्जन सिंह इसका मतलब तुमने अभी से हार मान लिया। हा हां हा
सत्जन सिंह डरपोक है।
सत्जन सिंह _नाथू सिंह, सतजन सिंह डरपोक नही है। ठीक है मुझे तुम्हारी शर्त मंजूर है अगर मेरे लड़के हारे तो मैं अपना मूछ मुड़वा दूंगा।
सतपाल सिंह _भईया ये आप क्या कह रहे है?
सतजन सिंह _छोटे, सामने वाले ने मुझे चैलेंज दिया है। मै पीछे नहीं हट सकता।
सतपाल सिंह _पर भइया इस बार उसके पहलवान कुछ ज्यादा ही मजबूत लग रहे है।
नाथू सिंह _अब आएगा खेल का असली मजा।
मैं तो सतजन सिंह का मूछ अपने हाथो से साफ करूंगा। नाथू सिंह के छोटे भाई ने कहा,हा हा हा,, उसके साथी लोग हसने लगे।
इसके बाद मंच पर नारियल तोड़ा गया। सतजन सिंह ने खेल प्रारंभ करने का आदेश दिया।
नाथू सिंह _ये है मेरा बेटा शेरा, सतजन सिंह अपने पहलवानों को भेजो। मेरा शेरा अकेला ही काफी है सबसे निपटने के लिए।
सतजन सिंह ने अन्य गांव से आए हुए सभी पहलवानों को पहले मौका दिया, शेरा को हराने के लिए।
शेरा बहुत ताकत वर और चालक था।
उसने सभी पहलवानों को एक एक कर चीत कर दिया और सभी की हालत खराब कर दी।
उसकी ताकत देखकर गांव वाले चिंतित होने लगें। उधर नाथू सिंह के साथी बहुत उत्साहित थे। शेरा शेरा शेरा,,,,
करके शोर मचा रहे थे।
नाथू सिंह _सतजन सिंह, शेरा ने तो अन्य गांव से आए सभी पहलवानों को हरा दिया है, अब तुम अपने पहलवानों को भेजो,, हा हा हा हा,,
सत्जन सिंह के आदेश पर, उसके लड़के एक एक करके मैदान में शेरा से भिड़ने के लिए उतरे, शेरा नेको हराने के लिए बहुत कोशिश किया। लेकिन शेरा ने सभी को चीत कर , सबकी हालत खराब कर दी।
गांव के सभी लोग दुखी हो गए।
नाथू सिंह _हा हा हां हा,,,
सतजन सिंह, और कोई बचा है क्या? तुम्हारे पहलवान, तुम्हारे पहलवान तो सब नामर्द निकले, किसी ने शेरा को हरा नही पाया।
हा हा हा हा,,,
सतजन सिंह, शर्त के मुताबिक अपनी मूंछ हमे दे दो,,,
छोटे जाओ सत्जन सिंह का मूंछ लेकर आओ।
ठीक है भईया,, हां हा हा,,,,
नाथू सिंग का छोटा भाई छुरा लेकर सतजन सिंह के पास आ गया।
हा हां हा हा, सतजन सिंह यह मूछ मुझे dede , सुनिता सुप्रिया, शेखर सतपाल सिंह को कुछ समझ नही आ रहा था , क्या करे? सतजन सिंह का ही नहीं पूरे गांव वाले अपमानित महसूस करने लगें थे।
सतजन सिंह अपनी आंखें बन्द कर लिया।
इधर नाथू सिंह का भाई छुरा लेकर, हाथ आगे बढ़ा रहा ही था की, राजेश ने हाथ रोक लिया।
राजेश _, मामा की मान सम्मान को मिट्टी में मिलाने से पहले, मुझसे निपटना होगा।
राजेश ने एक जोर का मुक्का मारा नाथु सिंह के भाई का, चकरा कर वही गिर गया।
नाथु सिंह _अरे छोर तू कौन होता है। रोकने वाला। अगर इतनी ही ताकत है तो शेरा से क्यू नही लड़ लेता।
राजेश,_, हां हां लडूंगा मैं, पर मेरे होते हुवे मामा जी के इज्जत पर आंच नहीं आने दूंगा।
नाथु सिंह _तो उतर जा मैदान पर।
सतजन सिंह _राजेश, तू नही लड़ पाएगा उस शेरा से, मत जा, कर लेने दो नाथु सिंह को अपनी ईच्छा पूरी।
राजेश _नही मामा जी मै ऐसा होने नहीं दूंगा।
इधर शेखर सुनिता और सतपाल को कुछ समझ नहीं आ रहा था। क्या करे? एक तरफ तो खानदान की इज्जत दूसरी ओर बेटा।
राजेश _मामा जी मुझे आशीर्वाद दो।
सतजन सिंह न चाहते हुवे भी राजेश की जिद पर मजबूर होकर, विजई होने का आशीर्वाद दिया।
राजेश मैदान पर कुश्ती के अखाड़े में उतर गया।
गांवों वाले खामोश थे पता नही क्या होगा।
नाथु सिंह के आदमी शेरा शेरा सोर मचा रहे थे।
सुनिता आंखें बन्द कर भगवान से प्रार्थना कर रही थी।
राजेश और शेरा का घमासान युद्ध शुरू huwa। कभी शेरा भारी पड़ता तो कभी राजेश। राजेश का खेल देखकर गांव वालों में भी जोस आ गया।
वे भी राजेश राजेश चिल्लाने लगे।
धीरे धीर शेरा थकने लगा। राजेश ने चीखतेहुए , अपना पूरा ताकत लगाया और शेरा को अपने कंधो में उठा लिया। सभी लोग आश्चर्य से देखने लगे।
राजेश ने शेरा को घुमा कर जमीन पर पटक दिया।
कुछ छन के लिए शेरा बेहोश हो गया।
शेरा हार चुका था।
सभी लोग राजेश राजेश शोर मचाने लगे।
सुप्रिया _बुआ आंखें खोलो, राजेश जीत गया।
सुनिता ने जब देखा राजेश जीत गया है उसकी आंखो में आंसू भर आए।
शेरा के हारने के बाद नाथु ने अपने दूसरे पहलवान को मैदान में उतार दिया।
बांकि पहलवानों में शेरा जैसी ताकत नहीं था। राजेश ने एक एक करके सभी पहलवानों को धूल चटवा दिए।
गांव वालों ने राजेश को कंधो में उठा लिया। चारो तरफ राजेश राजेश गूंजने लगा।
नाथु सिंह मुंह छिपाने लगा।
सतपाल ने उसे पकड़ लिया।
नाथु सिंह कहा छिप रहा है। छुरा लाओ re इसका मूछ मुड़ना है।
सतजन सिंह _छोटे छोड़ दो उसको, खेल को खेल भावना की तरह ही खेलना चाहिए। किसी की मान सम्मान को ठेस पहुंचाना खेल भावना नहीं। नाथु सिंह ने सतजन सिंह से माफी मांगा।
राजेश को मंच पर ले जाया गाया।
सत्जन सिंह ने उसे फूलों की हार पहना कर गले से लगा लिया।
सतजन सिंह _यार तूने तो कमाल कर दिया।
सुनिता की आंखों से आंसू बह रहे थे।
राजेश ने अपने पिता और छोटे मामा का पैर छूकर आशीर्वाद लिया, दोनो ने उसे गले से लगा लिया।
अंत में वह अपनी मां के पास गया।
सुनिता रो रही थी।
राजेश _मां तुम रो क्यू रही हो?
सुनिता _ये तो खुशी के आंसू है पगले। तूने अपने मामा की मान मर्यादा को बचा लिया बेटा मुझे तुम पर गर्व है। सुनिता राजेश को अपनी बाहों में भर लिया।
उसके बाद राजेश को गांव के का एक चक्कर घुमाया गया। सभी नाच रहे थे राजेश की जयकार लगा रहे थे।
इधर घर का नौकर घर आकर घटना की सारी जानकारी, सावित्री और सुमित्रा को दी।
वे पूजा की थाली सजाकर राह देखने लगे।
गांव भ्रमण के बाद, जुलूस सत्जन सिंह का घर पहुंचा।
सावित्री, सुमित्रा और प्रिया पूजा की थाली लेकर, दरवाजे पर खड़ी थी।
सावित्री ने सत्जन सिंह की आरती उतरना चाही।
सतजन सिंह _, मेरी नही राजेश की आरती पहले उतारो। योद्धा यही है।
सावित्री ने राजेश की आरती उतारी राजेश ने अपने मामी से आशिर्वाद लिया।
सभी की आरती उतारने के बाद। सतजन सिंह नेगांव वालो से हाथ जोड़कर शुक्रिया कहते हुए अपने अपने घर जानें को कहा। गांव वाले अपने अपने घर चलें गए।
इधर राजेश कुश्ती लड़ते लड़ते काफी थक चुका था।
वह लंगड़ा रहा था। उसे शरीर में काफी दर्द हो रहा था।
सत्जन सिंह राजेश को उसके कमरे में ले जाया गया।
प्रिया उसकी उपचार करने लगी।
राजेश के कपड़े उतार दिया गया। वह सिर्फ उंडर वियर में था।
गीले कपड़े से उसके पूरे शरीर को पोछा गया।
फिर उसके शरीर को गर्म सरसो के तेल से मालिश किया गया। सभी महिलाए राजेश की सेवा में लगी थी।
प्रिया ने राजेश को कुछ दर्द निवारक गोली दिया।
कुछ देर बाद राजेश बेहतर महसूस करने लगा।
रात्रि भोजन के समय सुनिता ने राजेश के कमरे में ही अपने हाथो से उसे भोजन कराया।
सतजन सिंह ने राजेश के पास जाकर पुछा?
तू ठीक तो है न मेरा शेर,
राजेश _हा मामा जी मै बिल्कुल ठीक हूं।
सतजन सिंह ने सभी को भोजन करने के लिए कहा।
सभी लोग भोजन करने लगें।
सतजन सिंह _देखो राजेश को उसके कमरे में रात में अकेला छोड़ना ठीक नहीं। तुम में से कोई एक रात में राजेश के कमरे में ही सो जाना। उसे किसी चीज की जरूरत पड़ी तो।
सुनिता _मै सो जाऊंगी, आज राजेश के कमरे में।
सतजन सिंह _हाये ठीक रहेगा।
सभी लोग रात में राजेश का हाल चाल पूछकर। अपने अपने कमरे में सोने को चले गए।
कमरे में सुनिता, प्रिया रुकी हुई थी। तभी सुमित्रा राजेश के लिए दुध लेकर आई।
प्रिया _चाची, राजेश को गाय की जगह मां की दुध की जरूरत है इससे उसके शरीर को ज्यादा लाभ होगा।
सुमित्रा _क्यू नही, दीदी इजाजत दे तो अपनी दुध पीला दू।
सुनिता _पीला दो न तो, अगर मेरा बेटा को मां की दुध से ज्यादा लाभ मिलेगा तो मैं भला मना क्यों करूंगी।
पहले दरवाज़ा बंद कर दो कोई आ न जाए।
प्रिया ने दरवाज़ा बन्द कर दिया।
सुमित्रा ने अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया। और चूचे बाहर निकाल दिया।
सुनिता _राजेश बेटा अपनी मामी की दुध पिलो इससे तुम्हे जल्दी आराम मिलेगा।
राजेश ने सुमित्रा की चुचियों को पकड़ लिया और फिर मसल मसल कर बारी बारी से चूसना शुरू कर दिया।
सुनिता _अरे प्रिया तुम्हारा भी तो दुध, आता है न। राजेश को सुमित्रा का दुध कम न पड़ जाए तू भी पिला दे अपनी दुध।
प्रिया _जी बुवा।
प्रिया ने भी अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया। राजेश अब बारी से दोनो की चूचे मसल मसल कर चूसने लगा दुध गटक गटक कर पीने लगा।
तभी प्रिया ने देखा राजेश के अंडरवियर काफी ऊपर उठ गया है, उसका लंद खड़ा हो गया है। वह मुस्कुराने लगी।
प्रिया _बुवा देखो तो राजेश का घोड़ा तो इसके घायल होने के बाद भी दौड़ने को तैयार है।
सुनिता _तुम जैसे घोड़ी की चूचे देखेगा तो होगा ही। तीनो महिलाए हसने लगी।
प्रिया _बुआ राजेश का अंडर वियर उतार दो , राजेश को दर्द कर रहा होगा।
सुनिता ने राजेश का अंडर वियर, उतार दिया उसका मोटा और लम्बा लिंग हवा में में लहराने लगा।
तीनों औरते देखकर मुस्कुराने लगी। प्रिया _बुवा, सेक्स भी दर्द निवारक होता है। आदमी सेक्स के समय अपना सारा दर्द भूल जाता है।
सेक्स से मर्द को दर्द से जल्दी राहत मिलता है। हमे राजेश को सेक्स सुख भी देना चाहिए।
सुनिता राजेश के लंद को सहलाने लगी, फिर अपने मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दी।
इधर राजेश दोनो औरतों का चूची पी रहा था।
सुनिता उसका लंद चूस रही थी।
तीनों औरते राजेश का लंद देखकर और चूची मसलने से गर्म हो चुकी थी।
सुनिता ने अपनी सारे कपड़े उतार फेकी। वह राजेश के लंद को chut में रख कर बैठ गई, फिर हल्के हल्के उछल उछल कर राजेश को सेक्स का मजा देने लगी और खुद मजा लेने लगी। कुछ देर बाद जब वह झड़ गई तो, सुमित्रा नंगी हो गई और राजेश के लंद पर उछल उछल कर उसे सेक्स सुख देने लगी और खुद मजा लेने लगी। इस तरह तीनो महिलाए बारी बारी से राजेश केलंद का सवारी कर चुदने लगी। राजेश को भी तीनो महिलाओं को चोदने में बड़ा मजा आ रहा था। वह अपना सारा दर्द भूल गया, अब वह तीनो महिलाओं को अलग अलग आसनों जमकर चोदने लगा, खुद भी मजा लेने लगा और औरतों को भी मजा देने लगा। कमरे में चारों की सिसकारी गूंज रही थी,, आह उह आह उह आह। उह। आह। उह। आह उह आह, उह,,,,,
करीब दो घंटे तक तीनो औरतों को जमकर बजाया।
उसके बाद तीनों को अपनी वीर्य से नहला दिया।
राजेश थक चुका था। वह गहरी नींद में सो गया।
सुमिता और प्रिया दोनो अपने कपड़े पहन कर अपने अपने कमरे में चली गईं। सुनिता राजेश से लिपट कर उसके बाजू में सो गया।
सुबह सुनिता जल्दी उठ कर नहाकर पूजा पाठ की और घर के काम में सहयोग करने लगी।
इधर सतजन सिंह उठ कर राजेश केकी हाल चाल पुछने उसके कमरे में गया।
सतपाल और शेखर भी वहां पहुंचा।
सतजन सिंह _, अब कैसी तबियत है यार तेरी।
राजेश _, मै बिल्कुल ठीक हूं, मामा जी। कल रात मां मामी और प्रिया दी ने बहुत अच्छी सेवा की।
सुमित्रा भी वहा खड़ी थी वह शर्मा गई।
सत्जन सिंह _यार तुमने तो कल कमाल ही कर दिया, हमारी घर की मान मर्यादा को बचा लिया।
राजेश _ये तो मेरा फर्ज था मामा जी।
सतजन सिंह _यार तू इतना ताकत वर है, फिर तुम कल सुबह मुझसे कुश्ती में कैसे हार गए।
राजेश _भला मै अपने मामा जी से कैसे जीत सकता हूं।
सभी लोग हसने लगे।
सतजन सिंह _यार तूने मेरा दिल जीत लिया। हम सबको तुम पर गर्व है।
राजेश _मामा जी मुझे आपसे कुछ चाहिए।
सतजन सिंह _अरे बोल भांजे क्या चाहिए तुम्हे, तुम्हरे लिए तो मेरी जान भी हाजिर है।
राजेश _मामा जी एक बार आप प्रिया दीदी को माफ कर दो, वो आपसे बहुत प्यार करती है।
सज्जन सिंह _, राजेश, क्या तुम्हे लगता है मैं प्रिया से प्यार नहीं करता। ऐसा एक दिन भी नही रहा होगा जब मैं प्रिया को याद नही किया होऊंगा।
शायद, अपनी झूठी शान को बचाने के चक्कर में कभी, उससे मिलने की कोशिश नही किया।
पर आज तुमने मेरी आंखें खोल दिया है। अब चाहे कोई कुछ भी कहे, मुझे किसी की परवाह नही।
सज्जन सिंह ने प्रिया को पुकारा, प्रिया वही खड़ी थी।
प्रिया _पिता जी।
सज्जन सिंह _मुझे माफ कर दो बेटी।
प्रिया _नही पिता जी माफी तो मुझे मांगनी चाइए, मैने आपक दिल दुखाया।
दोनो एक दूसरे से गले लग कर रोने लगे।
Bhut sandar update h bhai
Har baar ki tarah ek or behtareen update waiting for nextजब सुप्रिया ने प्रिया को राजेश के कमरे से बाहर निकलते देखी। वह सोच में पड़ गई, आख़िर इतनी रात को राजेश के कमरे में दीदी क्यू गई थी।
दरसल सुप्रिया की बड़ी लड़की को पेशाब लगी थी। उसको पेशाब कराने के लिए वह उठी थी। लड़की को आंगन के मोरी के पास ही पेशाब करने बिठा दी और उसके पीछे खड़ी थी। तभी उसे दरवाज़ा खुलने का आहट सुनाई पढ़ी, उसका ध्यान उस ओर गया।
जब प्रिया राजेश के कमरे से निकल कर अपने कमरे में गई।
लड़की के पेशाब कर लेने के बाद, उसे लेकर कमरे में चली गईं। बेड पर लेट कर वह यही सोचने लगी की आख़िर इतनी रात को दीदी राजेश के कमरे में क्यों गई थी।
फिर सोंची हो सकता है राजेश को किसी चीज की जरूरत पड़ी होगी। वह यही सोचते सोचते सो गई।
इधर सत्जन सिंह प्रतिदिन की तरह सुबह उठ कर घर के आंगन में कसरत करने लगा।
स्घर के सभी महिलाएं उठ चुके थे।
सत्जन सिंह _अरे ये भांजा अभी तक उठा नही क्या, वो तो आज मेरे साथ कुश्ती लड़ने वाला था। अभी तक उठा नही।
सुप्रिया वही खड़ी थी।
अरे सुप्रिया बेटा देखो तो, यू भांजा, कल तो बड़ी बड़ी बाते कर रहा था मुझे कुश्ती में हरा देगा।
भूल गया क्या? जरा याद तो दिलाओ उसे। बॉडी तो बड़ी अच्छी बना रखी है। इतनी देर तक सोता है तो कसरत कितना समय करता है।
सुप्रिया _पिता जी मै अभी राजेश को बुला कर लाती हूं।
सुप्रिया राजेश के कमरे के पास गई। रात में कमरा अंदर से बंद नहीं किया था।
सुप्रिया को रात में प्रिया राजेश के कमरे में क्यू गई थी यह जानने की जिज्ञासा थी वह बिना दरवाज़ा खटखटाए अंदर घुस गई।
जब वह अंदर गई तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।
राजेश बिलकुल नंगा था। उसका लंद भी सुबह सुबह प्रतिदिन की तरह खड़ा हुआ था।
सुप्रिया, की नजर जब राजेश के लंद पर पड़ी तो, उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।
बाप re कितना बडा है।
ये तो नंगा ही लेटा है। इसका मतलब दीदी रात में राजेश से चुदने आई थी। हे भगवान।
तभी राजेश ने करवट लिया।
सुप्रिया घबरा गई।
वह कमरे से बाहर निकल गई।
फिर दरवाज़ा खटखटाया ।
राजेश का नींद खुल गया।
राजेश ने देखा वह रात में नंगा ही सो गया था।
वह तेजी से उठा और अपना कपड़ा पहनने लगा।
सुप्रिया _अरे कितने देर तक सोता रहेगा उठो।
बाहर से बोली।
राजेश _कोन आ गई,मै आ रहा हूं। राजेश ने आवाज दिया।
राजेश ने कपड़े पहन कर दरवाज़ा के पास गया, दरवाज़ा तो पहले ही खुला huwa था।
राजेश _अरे दीदी तुम।
सुप्रिया _पिता जी ने भेजा है तुम्हे बुलाने, कह रहा था कि कितने देर तक सोता रहेगा।
राजेश _ओह मामा जी उठ गए क्या?
सुप्रिया _वो कसरत कर रहे हैं? तुम्हारा वेट कर रहे हैं कुश्ती लड़ने के लिए। सुप्रिया हसने लगी।
पर मुझे नही लगता तुम कुश्ती में पिता जी को हरा पाओगे।
राजेश _क्यू?
सुप्रिया _रात भर कुश्ती लड़कर थक जो गए होगे, धीर से फुसफुसाते हुवे बोली।
राजेश _दीदी, आपने क्या कहा?
सुप्रिया _अरे कुछ नहीं मैन ये कहा, तुम्हारी सकल तो ऐसी लग रही है जैसे तुम रात भर जगे हो, किसी के साथ कुश्ती लड़े हो। अब सुबह सुबह पिता जी के साथ मुझे नहीं लगता तुम, कुश्ती लड़ पाओगे।
राजेश _, दीदी, तुमने अभी मेरा पावर देखा कहा है। जिस दीन देखोगी न मेरा फैन बन जावोगी।
सुप्रिया _अच्छा मै भी देखना चाहूंगी कितना पावर है तुझमें।
राजेश _अच्छा दी तुम चलो, मै फ्रेस होकर आता हूं।
सुप्रिया _जल्दी आना।
राजेश फ्रेश होने बाथरूम चला गया।
वहा से सीधे आंगन में पहुंचा जहां, सत्जन सिंह कसरत कर रहा था।
सतजन सिंह _आ गया बरखू दार,
राजेश _नमस्ते मामा जी।
सत्जन सिंह _उठने लेट हो गए, नौजवान। चल पहन ले लंगोट और उतर जा मैदान में। दिखाओ सबको कितनी ताकत है तुम्हारी भुजाओं में ।
राजेश _मामा जी, मैने कभी लंगोट पहना नही।
चड्डा चलेगा, वैसे भी लंगोट में मुझे शर्म आयेगी।
घर के लोग मुझे देख कर हसेंगे।
सत्जन सिंह _अरे यार तू मर्द होकर लड़कियों की तरह शर्मा रहा है। अगर कुश्ती लड़ना है तो लंगोट तो पहनना पढ़ेगा बेटा।
सतपाल पहना दो भांजा को लंगोट।
सतपाल _आओ राजेश।
राजेश को सतपाल सिंह एक कमरे में ले गया। और उसे लंगोट पहना दिया।
राजेश लंगोट पहन कर बाहर निकलने में शरमा रहा था।
वह शर्माते हुवे आंगन में पहुंचा।
घर की सभी महिलाए, राजेश को लंगोट में देखकर मुंह छिपाकर हसने लगीं।
सुप्रिया _बॉडी तो बहुत अच्छी है, देखते है ताकत है की नही, वैसे लंगोट में बिल्कुल बंदर लग रहा है।
सुप्रिया की बात सुनकर, सभी हसने लगे।
राजेश _मामा जी सभी मेरा मजाक उड़ा रहे हैं।
सतजन सिंह _अरे यार, मर्द को औरतों की बातो पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
चल आ जा मैदान पे, हो जाए दो दो हाथ।
सतपाल सिंह रेफ्री बन गया।
राजेश _मामा जी देखते है इस उम्र में भी आपके पास कितना ताकत है। आप तैयार हो जाइए, मुझ्से हारने के लिए।
सतपाल सिंह _ये हुई मर्दों वाली बात चल आ जा मैदान पे।
राजेश मैदान पे आ गया।
सभी लोग दोनो की कुश्ती देखने लगे।
कभी राजेश आगे बढ़ता, कभी सत्जन सिंह तभी सत्जन सिंह ने अपना चाल चला। और घुमाके राजेश को चीत कर दिया।
सतपाल सिंह ने सिटी बजाया।
राजेश हार गया।
सत्जन सिंह,_बरखुदार तुम तो कमजोर निकले एक ही बार में चीत हो गया।
सभी लोग सत्जन सिंह के लिए ताली बजाने लगे।
सुप्रिया _, क्यू बड़ी बड़ी बाते कर रहा था। एक ही बार में चीत हो गया। बेचारा।
सुप्रिया chidane लगी।
सतजन सिंह _बरखु दार कुश्ती में सिर्फ ताकत नहीं, दीमाक की भी जरूरत पड़ती है।
राजेश _मां मां जी एक बार और मौका दो, अबकी बार हरा दूंगा।
शुप्रिया _रहने दे और कितनी बेजजती कराएगी अपनी।
सतजन सिंह _अरे आजा, कर ले अपनी ईच्छा पूरी।
राजेश फिर मैदान में आ गया।
दोनो के बीच फिर कुश्ती शुरू हो गया।
कुछ ही देर में राजेश फिर चित हो गया।
सभी लोग मुंह छिपा कर हसने लगे।
राजेश फिर से एक और मौका मांगा। पर राजेश सत्जन सिंह को हरा न सका।
सुनिता _बस बस अब रहने दे, अपने मामा जी को तू हरा नही पाएगा।
राजेश _मामा मैंने आपसे हार मान लिया।
सत्जन सिंह _बरखु दार, जानते हो तुम क्यू हार रहे। तुम इस लिए हार रहे हो की, तुम सामने वाले को चीत करने पे ज्यादा ध्यान दे रहे थे, जबकि पहलवान को अपनी सुरक्षा पर पहले ध्यान देना है और जब सामने वाले थकने लगे तो मौका देखकर उस पर अटैक करना है।
चलो मैं तुम्हे सिखाता हूं।
सत्जन सिंह ने राजेश को कुछ तकनीक सिखाए।
सावित्री _अब बस भी करो जी, आज घर में कार्यक्रम है। कुछ देर में मेहमानों की आने की सिलसिला शुरू हो जाएगा।
तैयारी भी करनी है। वैसे भी राजेश कुश्ती सीखकर करेगा क्या? उसे तो कलेक्टर बनना है। कुश्ती थोड़ी लड़नी है।
सतपाल सिंह _तुम्हारी मामी ठीक कह रहा है भांजा। इतना पर्याप्त है तेरे लिए। वैसे भी गांव में कल कुश्ती प्रतियोगिता होनी है। पहलवानों को कुश्ती लड़ता देख, बहुत कुछ तुम्हे सीखने को मिलेगा। तुम भी चलना,कुश्ती देखने।
राजेश _ज़रूर मामा जी।
इसकेे बाद घर के सभी लोग नहा धोकर तैयार हो गए। घर के कार्यक्रम की तैयारी में लग गए।
कुछ देर बाद सुप्रिया के पति गांव पहुंचा।
सुप्रिया _राजेश ये है तुम्हारे जीजू।
राजेश _नमस्ते जीजू, ये क्या जीजू आप अभी आ रहे हो, घर का दामाद हो, तैयारी की जिम्मेदारी तो घर की दामाद की होती है ना, और आप ही पीछे रह गए।
जीजा जी _अरे यार क्या करे? सरकारी नौकरी है। बड़ी मुस्किल से एक दिन की छूटी मिली है।
वैसे शादी के समय तुझे देखा था। तू छोटा था। अब तो एकदम जवान और स्मार्ट हो गया है यार।
वैसे क्या कर रहा है अभी।
सुप्रिया _राजेश, आई ए एस का इंटरव्यू देकर कुछ दिन पहले ही आया है दिल्ली से।
जीजा जी _ओह ये तो बड़ी अच्छी बात है, बहुत बहुत शुभकामनाएं भई हमारे तरफ से, इंटर व्यू में तुम ज़रूर सफल हो।
राजेश _शुक्रिया जीजू।
धीरे धीरे सभी मेहमानों का आना शुरू हो गया।
सत्जन सिंह _कोई पंडित जी को फोन करो भाई, सारे मेहमान आ गए। आने में और कितना समय लगेगा।
सतपाल सिंह ने पंडित जी को फोन किया।
पंडित जी ने कहा की बस कुछ ही देर में वह पहुंचने वाला है।
कुछ ही देर में पंडित जी पहुंच गया।
पंडित जी ने पूजा पाठ शुरू किया।
पूजा पाठ संपन्न होने के बाद, मुन्ने का कुंडली देखा।
पंडित जी _मुखिया जी, मुन्ने का नाम अ अक्षर से निकल रहा है। क्या नाम रखना है मुन्ने का।
सत्जन सिंह _मुन्ने का नाम रखने का अधिकार तो उसके माता पिता का है। वही बताएंगे।
सतपाल सिंह _ये क्या भईया, आप घर के बड़े है, मुन्ने का नाम रखने का अधिकार तो आप का ही है।
राजेश _हां मामा जी, छोटे मामा जी सही बोल रहे है। कोई अच्छा सा नाम सुझाइए मुन्ने का।
सत्जन सिंह _तुम लोगो की यही ईच्छा है तो आज से मुना अर्जुन के नाम से पुकारा जायेगा।
सभी लोग ताली बजाने लगे।
राजेश _वाह मामा जी बहुत अच्छा नाम सुझाया है आपने।
उसके बाद सभी मेहमानों को भोजन कराया गया।
शाम होते होते आस पास के मेहमान तो अपने अपने घर जानें लगे। दूर से आए मेहमान रात वही रुक गए।
सुबह होते ही शेष बचे मेहमान भी, अपने अपने घर के लिए निकल गए।
सुप्रिया का पति भी, एक ही दिन की छूटी लेकर आया था वह भी चला गया।
शाम को 4बजे गांव में कुश्ती प्रतियोगिता आयोजित किया गया था।
विजेता पहलवान को 2लाख रुपए इनाम रखा गया था। आस पास एवम दूर दूर से भी पहलवान कुश्ती प्रतियोगिता में भाग लेने आए थे।
सतजन सिंह खुद एक पहलवान था। गांव का मुखिया भी था।
उसी के अध्यक्षता में यह प्रतियोगिता आयोजित किया गया था।
सतपाल सिंह _भईया, लड़के लोग बुलाने आए थे। प्रतियोगिता की सारी तैयारी हो चुकी है।
सत्जन सिंह _चलो हम चलते है। घर के सभी पुरुष सदस्य, कुश्ती देखने के लिए जाने की तैयारी करने लगे।
सुप्रिया _पिता जी, मुझे भी देखनी है कुश्ती। सुनिता बुआ चलो न हम भी चलते है।
सुनिता _भईया, क्या हम भी देखने जा सकते है।
सतजन _अगर तुम लोगो की ईच्छा हो तो, जा सकती हो।
शुप्रियां, और सुनिता बच्चों को लेकर कुश्ती देखने के लिए जाने की तैयार करने लगी।
सभी लोग तैयार हो कर साथ में, प्रतियोगित स्थल पहुंचे।
प्रतियोगिता स्थल पर महिलाओं बच्चों और पुरुषो की बहुत भीड़ थी।
पास के गांव वाले मुखिया का नाम नाथू सिंह था।
वह भी अपना पहलवान लेकर आया huwa था।
पिछले बार नाथू सिंह और सत्जन सिंह के लड़को के बीच ही अंतिम मुकाबला huws था। जिसमे सत्जन सिंह के लड़के विजेता बने थे।
नाथू राम इस बार सतजन सिंह के लड़को को कुश्ती में हराकर, उसे नीचा दिखाना चाहता था। पिछले बार वह बहुत अपमानित महसूस किया था। उसका बदला लेना चाहता था। इस बार एक से बढ़ कर एक पहलवान लेकर आया huwa था। एक तो उसका बेटा था शेरा जो काफी खूंखार लग रहा था।
नाथू सिंह माइक लेते हुए कहा,,,
सत्जन सिंह इस बार मेरे लड़को को कोई हरा नही पाएगा।
विजेता मेरे लड़के ही बनेंगे।
सतजन सिंह _रहने दो सत्जन सिंह, पिछले बार भी तुमने यही कहा था। पर देखा न तुमने मेरे लड़को ने तुम्हारे पहलवानों की क्या दुर्गति की।
नाथू सिंह _सब याद है मुझे सतजन सिंह, इस बार मेरे लड़के पिछले अपमान का बदला लेने आए है। वो देखो मेरा बेटा सेरा।
अगर कोई मेरे बेटे शेरा का तुम्हरे लड़के हरा देंगे तो मैं अपना मूछ मुड़ा दूंगा।
अब तुम बोलो अगर मेरे लड़के तुम्हरे पहलवानों को हरा देंगे, तो क्या तुम अपना मूछ मुड़वाओगे।
सतजन _देखो नाथू सिंह खेल को खेल भावना की तरह लो। इसमें किसी किसी को अपमानित करने का इरादा नहीं होना चाइए।
नाथू सिंह,_सत्जन सिंह इसका मतलब तुमने अभी से हार मान लिया। हा हां हा
सत्जन सिंह डरपोक है।
सत्जन सिंह _नाथू सिंह, सतजन सिंह डरपोक नही है। ठीक है मुझे तुम्हारी शर्त मंजूर है अगर मेरे लड़के हारे तो मैं अपना मूछ मुड़वा दूंगा।
सतपाल सिंह _भईया ये आप क्या कह रहे है?
सतजन सिंह _छोटे, सामने वाले ने मुझे चैलेंज दिया है। मै पीछे नहीं हट सकता।
सतपाल सिंह _पर भइया इस बार उसके पहलवान कुछ ज्यादा ही मजबूत लग रहे है।
नाथू सिंह _अब आएगा खेल का असली मजा।
मैं तो सतजन सिंह का मूछ अपने हाथो से साफ करूंगा। नाथू सिंह के छोटे भाई ने कहा,हा हा हा,, उसके साथी लोग हसने लगे।
इसके बाद मंच पर नारियल तोड़ा गया। सतजन सिंह ने खेल प्रारंभ करने का आदेश दिया।
नाथू सिंह _ये है मेरा बेटा शेरा, सतजन सिंह अपने पहलवानों को भेजो। मेरा शेरा अकेला ही काफी है सबसे निपटने के लिए।
सतजन सिंह ने अन्य गांव से आए हुए सभी पहलवानों को पहले मौका दिया, शेरा को हराने के लिए।
शेरा बहुत ताकत वर और चालक था।
उसने सभी पहलवानों को एक एक कर चीत कर दिया और सभी की हालत खराब कर दी।
उसकी ताकत देखकर गांव वाले चिंतित होने लगें। उधर नाथू सिंह के साथी बहुत उत्साहित थे। शेरा शेरा शेरा,,,,
करके शोर मचा रहे थे।
नाथू सिंह _सतजन सिंह, शेरा ने तो अन्य गांव से आए सभी पहलवानों को हरा दिया है, अब तुम अपने पहलवानों को भेजो,, हा हा हा हा,,
सत्जन सिंह के आदेश पर, उसके लड़के एक एक करके मैदान में शेरा से भिड़ने के लिए उतरे, शेरा नेको हराने के लिए बहुत कोशिश किया। लेकिन शेरा ने सभी को चीत कर , सबकी हालत खराब कर दी।
गांव के सभी लोग दुखी हो गए।
नाथू सिंह _हा हा हां हा,,,
सतजन सिंह, और कोई बचा है क्या? तुम्हारे पहलवान, तुम्हारे पहलवान तो सब नामर्द निकले, किसी ने शेरा को हरा नही पाया।
हा हा हा हा,,,
सतजन सिंह, शर्त के मुताबिक अपनी मूंछ हमे दे दो,,,
छोटे जाओ सत्जन सिंह का मूंछ लेकर आओ।
ठीक है भईया,, हां हा हा,,,,
नाथू सिंग का छोटा भाई छुरा लेकर सतजन सिंह के पास आ गया।
हा हां हा हा, सतजन सिंह यह मूछ मुझे dede , सुनिता सुप्रिया, शेखर सतपाल सिंह को कुछ समझ नही आ रहा था , क्या करे? सतजन सिंह का ही नहीं पूरे गांव वाले अपमानित महसूस करने लगें थे।
सतजन सिंह अपनी आंखें बन्द कर लिया।
इधर नाथू सिंह का भाई छुरा लेकर, हाथ आगे बढ़ा रहा ही था की, राजेश ने हाथ रोक लिया।
राजेश _, मामा की मान सम्मान को मिट्टी में मिलाने से पहले, मुझसे निपटना होगा।
राजेश ने एक जोर का मुक्का मारा नाथु सिंह के भाई का, चकरा कर वही गिर गया।
नाथु सिंह _अरे छोर तू कौन होता है। रोकने वाला। अगर इतनी ही ताकत है तो शेरा से क्यू नही लड़ लेता।
राजेश,_, हां हां लडूंगा मैं, पर मेरे होते हुवे मामा जी के इज्जत पर आंच नहीं आने दूंगा।
नाथु सिंह _तो उतर जा मैदान पर।
सतजन सिंह _राजेश, तू नही लड़ पाएगा उस शेरा से, मत जा, कर लेने दो नाथु सिंह को अपनी ईच्छा पूरी।
राजेश _नही मामा जी मै ऐसा होने नहीं दूंगा।
इधर शेखर सुनिता और सतपाल को कुछ समझ नहीं आ रहा था। क्या करे? एक तरफ तो खानदान की इज्जत दूसरी ओर बेटा।
राजेश _मामा जी मुझे आशीर्वाद दो।
सतजन सिंह न चाहते हुवे भी राजेश की जिद पर मजबूर होकर, विजई होने का आशीर्वाद दिया।
राजेश मैदान पर कुश्ती के अखाड़े में उतर गया।
गांवों वाले खामोश थे पता नही क्या होगा।
नाथु सिंह के आदमी शेरा शेरा सोर मचा रहे थे।
सुनिता आंखें बन्द कर भगवान से प्रार्थना कर रही थी।
राजेश और शेरा का घमासान युद्ध शुरू huwa। कभी शेरा भारी पड़ता तो कभी राजेश। राजेश का खेल देखकर गांव वालों में भी जोस आ गया।
वे भी राजेश राजेश चिल्लाने लगे।
धीरे धीर शेरा थकने लगा। राजेश ने चीखतेहुए , अपना पूरा ताकत लगाया और शेरा को अपने कंधो में उठा लिया। सभी लोग आश्चर्य से देखने लगे।
राजेश ने शेरा को घुमा कर जमीन पर पटक दिया।
कुछ छन के लिए शेरा बेहोश हो गया।
शेरा हार चुका था।
सभी लोग राजेश राजेश शोर मचाने लगे।
सुप्रिया _बुआ आंखें खोलो, राजेश जीत गया।
सुनिता ने जब देखा राजेश जीत गया है उसकी आंखो में आंसू भर आए।
शेरा के हारने के बाद नाथु ने अपने दूसरे पहलवान को मैदान में उतार दिया।
बांकि पहलवानों में शेरा जैसी ताकत नहीं था। राजेश ने एक एक करके सभी पहलवानों को धूल चटवा दिए।
गांव वालों ने राजेश को कंधो में उठा लिया। चारो तरफ राजेश राजेश गूंजने लगा।
नाथु सिंह मुंह छिपाने लगा।
सतपाल ने उसे पकड़ लिया।
नाथु सिंह कहा छिप रहा है। छुरा लाओ re इसका मूछ मुड़ना है।
सतजन सिंह _छोटे छोड़ दो उसको, खेल को खेल भावना की तरह ही खेलना चाहिए। किसी की मान सम्मान को ठेस पहुंचाना खेल भावना नहीं। नाथु सिंह ने सतजन सिंह से माफी मांगा।
राजेश को मंच पर ले जाया गाया।
सत्जन सिंह ने उसे फूलों की हार पहना कर गले से लगा लिया।
सतजन सिंह _यार तूने तो कमाल कर दिया।
सुनिता की आंखों से आंसू बह रहे थे।
राजेश ने अपने पिता और छोटे मामा का पैर छूकर आशीर्वाद लिया, दोनो ने उसे गले से लगा लिया।
अंत में वह अपनी मां के पास गया।
सुनिता रो रही थी।
राजेश _मां तुम रो क्यू रही हो?
सुनिता _ये तो खुशी के आंसू है पगले। तूने अपने मामा की मान मर्यादा को बचा लिया बेटा मुझे तुम पर गर्व है। सुनिता राजेश को अपनी बाहों में भर लिया।
उसके बाद राजेश को गांव के का एक चक्कर घुमाया गया। सभी नाच रहे थे राजेश की जयकार लगा रहे थे।
इधर घर का नौकर घर आकर घटना की सारी जानकारी, सावित्री और सुमित्रा को दी।
वे पूजा की थाली सजाकर राह देखने लगे।
गांव भ्रमण के बाद, जुलूस सत्जन सिंह का घर पहुंचा।
सावित्री, सुमित्रा और प्रिया पूजा की थाली लेकर, दरवाजे पर खड़ी थी।
सावित्री ने सत्जन सिंह की आरती उतरना चाही।
सतजन सिंह _, मेरी नही राजेश की आरती पहले उतारो। योद्धा यही है।
सावित्री ने राजेश की आरती उतारी राजेश ने अपने मामी से आशिर्वाद लिया।
सभी की आरती उतारने के बाद। सतजन सिंह नेगांव वालो से हाथ जोड़कर शुक्रिया कहते हुए अपने अपने घर जानें को कहा। गांव वाले अपने अपने घर चलें गए।
इधर राजेश कुश्ती लड़ते लड़ते काफी थक चुका था।
वह लंगड़ा रहा था। उसे शरीर में काफी दर्द हो रहा था।
सत्जन सिंह राजेश को उसके कमरे में ले जाया गया।
प्रिया उसकी उपचार करने लगी।
राजेश के कपड़े उतार दिया गया। वह सिर्फ उंडर वियर में था।
गीले कपड़े से उसके पूरे शरीर को पोछा गया।
फिर उसके शरीर को गर्म सरसो के तेल से मालिश किया गया। सभी महिलाए राजेश की सेवा में लगी थी।
प्रिया ने राजेश को कुछ दर्द निवारक गोली दिया।
कुछ देर बाद राजेश बेहतर महसूस करने लगा।
रात्रि भोजन के समय सुनिता ने राजेश के कमरे में ही अपने हाथो से उसे भोजन कराया।
सतजन सिंह ने राजेश के पास जाकर पुछा?
तू ठीक तो है न मेरा शेर,
राजेश _हा मामा जी मै बिल्कुल ठीक हूं।
सतजन सिंह ने सभी को भोजन करने के लिए कहा।
सभी लोग भोजन करने लगें।
सतजन सिंह _देखो राजेश को उसके कमरे में रात में अकेला छोड़ना ठीक नहीं। तुम में से कोई एक रात में राजेश के कमरे में ही सो जाना। उसे किसी चीज की जरूरत पड़ी तो।
सुनिता _मै सो जाऊंगी, आज राजेश के कमरे में।
सतजन सिंह _हाये ठीक रहेगा।
सभी लोग रात में राजेश का हाल चाल पूछकर। अपने अपने कमरे में सोने को चले गए।
कमरे में सुनिता, प्रिया रुकी हुई थी। तभी सुमित्रा राजेश के लिए दुध लेकर आई।
प्रिया _चाची, राजेश को गाय की जगह मां की दुध की जरूरत है इससे उसके शरीर को ज्यादा लाभ होगा।
सुमित्रा _क्यू नही, दीदी इजाजत दे तो अपनी दुध पीला दू।
सुनिता _पीला दो न तो, अगर मेरा बेटा को मां की दुध से ज्यादा लाभ मिलेगा तो मैं भला मना क्यों करूंगी।
पहले दरवाज़ा बंद कर दो कोई आ न जाए।
प्रिया ने दरवाज़ा बन्द कर दिया।
सुमित्रा ने अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया। और चूचे बाहर निकाल दिया।
सुनिता _राजेश बेटा अपनी मामी की दुध पिलो इससे तुम्हे जल्दी आराम मिलेगा।
राजेश ने सुमित्रा की चुचियों को पकड़ लिया और फिर मसल मसल कर बारी बारी से चूसना शुरू कर दिया।
सुनिता _अरे प्रिया तुम्हारा भी तो दुध, आता है न। राजेश को सुमित्रा का दुध कम न पड़ जाए तू भी पिला दे अपनी दुध।
प्रिया _जी बुवा।
प्रिया ने भी अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया। राजेश अब बारी से दोनो की चूचे मसल मसल कर चूसने लगा दुध गटक गटक कर पीने लगा।
तभी प्रिया ने देखा राजेश के अंडरवियर काफी ऊपर उठ गया है, उसका लंद खड़ा हो गया है। वह मुस्कुराने लगी।
प्रिया _बुवा देखो तो राजेश का घोड़ा तो इसके घायल होने के बाद भी दौड़ने को तैयार है।
सुनिता _तुम जैसे घोड़ी की चूचे देखेगा तो होगा ही। तीनो महिलाए हसने लगी।
प्रिया _बुआ राजेश का अंडर वियर उतार दो , राजेश को दर्द कर रहा होगा।
सुनिता ने राजेश का अंडर वियर, उतार दिया उसका मोटा और लम्बा लिंग हवा में में लहराने लगा।
तीनों औरते देखकर मुस्कुराने लगी। प्रिया _बुवा, सेक्स भी दर्द निवारक होता है। आदमी सेक्स के समय अपना सारा दर्द भूल जाता है।
सेक्स से मर्द को दर्द से जल्दी राहत मिलता है। हमे राजेश को सेक्स सुख भी देना चाहिए।
सुनिता राजेश के लंद को सहलाने लगी, फिर अपने मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दी।
इधर राजेश दोनो औरतों का चूची पी रहा था।
सुनिता उसका लंद चूस रही थी।
तीनों औरते राजेश का लंद देखकर और चूची मसलने से गर्म हो चुकी थी।
सुनिता ने अपनी सारे कपड़े उतार फेकी। वह राजेश के लंद को chut में रख कर बैठ गई, फिर हल्के हल्के उछल उछल कर राजेश को सेक्स का मजा देने लगी और खुद मजा लेने लगी। कुछ देर बाद जब वह झड़ गई तो, सुमित्रा नंगी हो गई और राजेश के लंद पर उछल उछल कर उसे सेक्स सुख देने लगी और खुद मजा लेने लगी। इस तरह तीनो महिलाए बारी बारी से राजेश केलंद का सवारी कर चुदने लगी। राजेश को भी तीनो महिलाओं को चोदने में बड़ा मजा आ रहा था। वह अपना सारा दर्द भूल गया, अब वह तीनो महिलाओं को अलग अलग आसनों जमकर चोदने लगा, खुद भी मजा लेने लगा और औरतों को भी मजा देने लगा। कमरे में चारों की सिसकारी गूंज रही थी,, आह उह आह उह आह। उह। आह। उह। आह उह आह, उह,,,,,
करीब दो घंटे तक तीनो औरतों को जमकर बजाया।
उसके बाद तीनों को अपनी वीर्य से नहला दिया।
राजेश थक चुका था। वह गहरी नींद में सो गया।
सुमिता और प्रिया दोनो अपने कपड़े पहन कर अपने अपने कमरे में चली गईं। सुनिता राजेश से लिपट कर उसके बाजू में सो गया।
सुबह सुनिता जल्दी उठ कर नहाकर पूजा पाठ की और घर के काम में सहयोग करने लगी।
इधर सतजन सिंह उठ कर राजेश केकी हाल चाल पुछने उसके कमरे में गया।
सतपाल और शेखर भी वहां पहुंचा।
सतजन सिंह _, अब कैसी तबियत है यार तेरी।
राजेश _, मै बिल्कुल ठीक हूं, मामा जी। कल रात मां मामी और प्रिया दी ने बहुत अच्छी सेवा की।
सुमित्रा भी वहा खड़ी थी वह शर्मा गई।
सत्जन सिंह _यार तुमने तो कल कमाल ही कर दिया, हमारी घर की मान मर्यादा को बचा लिया।
राजेश _ये तो मेरा फर्ज था मामा जी।
सतजन सिंह _यार तू इतना ताकत वर है, फिर तुम कल सुबह मुझसे कुश्ती में कैसे हार गए।
राजेश _भला मै अपने मामा जी से कैसे जीत सकता हूं।
सभी लोग हसने लगे।
सतजन सिंह _यार तूने मेरा दिल जीत लिया। हम सबको तुम पर गर्व है।
राजेश _मामा जी मुझे आपसे कुछ चाहिए।
सतजन सिंह _अरे बोल भांजे क्या चाहिए तुम्हे, तुम्हरे लिए तो मेरी जान भी हाजिर है।
राजेश _मामा जी एक बार आप प्रिया दीदी को माफ कर दो, वो आपसे बहुत प्यार करती है।
सज्जन सिंह _, राजेश, क्या तुम्हे लगता है मैं प्रिया से प्यार नहीं करता। ऐसा एक दिन भी नही रहा होगा जब मैं प्रिया को याद नही किया होऊंगा।
शायद, अपनी झूठी शान को बचाने के चक्कर में कभी, उससे मिलने की कोशिश नही किया।
पर आज तुमने मेरी आंखें खोल दिया है। अब चाहे कोई कुछ भी कहे, मुझे किसी की परवाह नही।
सज्जन सिंह ने प्रिया को पुकारा, प्रिया वही खड़ी थी।
प्रिया _पिता जी।
सज्जन सिंह _मुझे माफ कर दो बेटी।
प्रिया _नही पिता जी माफी तो मुझे मांगनी चाइए, मैने आपक दिल दुखाया।
दोनो एक दूसरे से गले लग कर रोने लगे।
Great awesome awesome awesomeजब सुप्रिया ने प्रिया को राजेश के कमरे से बाहर निकलते देखी। वह सोच में पड़ गई, आख़िर इतनी रात को राजेश के कमरे में दीदी क्यू गई थी।
दरसल सुप्रिया की बड़ी लड़की को पेशाब लगी थी। उसको पेशाब कराने के लिए वह उठी थी। लड़की को आंगन के मोरी के पास ही पेशाब करने बिठा दी और उसके पीछे खड़ी थी। तभी उसे दरवाज़ा खुलने का आहट सुनाई पढ़ी, उसका ध्यान उस ओर गया।
जब प्रिया राजेश के कमरे से निकल कर अपने कमरे में गई।
लड़की के पेशाब कर लेने के बाद, उसे लेकर कमरे में चली गईं। बेड पर लेट कर वह यही सोचने लगी की आख़िर इतनी रात को दीदी राजेश के कमरे में क्यों गई थी।
फिर सोंची हो सकता है राजेश को किसी चीज की जरूरत पड़ी होगी। वह यही सोचते सोचते सो गई।
इधर सत्जन सिंह प्रतिदिन की तरह सुबह उठ कर घर के आंगन में कसरत करने लगा।
स्घर के सभी महिलाएं उठ चुके थे।
सत्जन सिंह _अरे ये भांजा अभी तक उठा नही क्या, वो तो आज मेरे साथ कुश्ती लड़ने वाला था। अभी तक उठा नही।
सुप्रिया वही खड़ी थी।
अरे सुप्रिया बेटा देखो तो, यू भांजा, कल तो बड़ी बड़ी बाते कर रहा था मुझे कुश्ती में हरा देगा।
भूल गया क्या? जरा याद तो दिलाओ उसे। बॉडी तो बड़ी अच्छी बना रखी है। इतनी देर तक सोता है तो कसरत कितना समय करता है।
सुप्रिया _पिता जी मै अभी राजेश को बुला कर लाती हूं।
सुप्रिया राजेश के कमरे के पास गई। रात में कमरा अंदर से बंद नहीं किया था।
सुप्रिया को रात में प्रिया राजेश के कमरे में क्यू गई थी यह जानने की जिज्ञासा थी वह बिना दरवाज़ा खटखटाए अंदर घुस गई।
जब वह अंदर गई तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।
राजेश बिलकुल नंगा था। उसका लंद भी सुबह सुबह प्रतिदिन की तरह खड़ा हुआ था।
सुप्रिया, की नजर जब राजेश के लंद पर पड़ी तो, उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।
बाप re कितना बडा है।
ये तो नंगा ही लेटा है। इसका मतलब दीदी रात में राजेश से चुदने आई थी। हे भगवान।
तभी राजेश ने करवट लिया।
सुप्रिया घबरा गई।
वह कमरे से बाहर निकल गई।
फिर दरवाज़ा खटखटाया ।
राजेश का नींद खुल गया।
राजेश ने देखा वह रात में नंगा ही सो गया था।
वह तेजी से उठा और अपना कपड़ा पहनने लगा।
सुप्रिया _अरे कितने देर तक सोता रहेगा उठो।
बाहर से बोली।
राजेश _कोन आ गई,मै आ रहा हूं। राजेश ने आवाज दिया।
राजेश ने कपड़े पहन कर दरवाज़ा के पास गया, दरवाज़ा तो पहले ही खुला huwa था।
राजेश _अरे दीदी तुम।
सुप्रिया _पिता जी ने भेजा है तुम्हे बुलाने, कह रहा था कि कितने देर तक सोता रहेगा।
राजेश _ओह मामा जी उठ गए क्या?
सुप्रिया _वो कसरत कर रहे हैं? तुम्हारा वेट कर रहे हैं कुश्ती लड़ने के लिए। सुप्रिया हसने लगी।
पर मुझे नही लगता तुम कुश्ती में पिता जी को हरा पाओगे।
राजेश _क्यू?
सुप्रिया _रात भर कुश्ती लड़कर थक जो गए होगे, धीर से फुसफुसाते हुवे बोली।
राजेश _दीदी, आपने क्या कहा?
सुप्रिया _अरे कुछ नहीं मैन ये कहा, तुम्हारी सकल तो ऐसी लग रही है जैसे तुम रात भर जगे हो, किसी के साथ कुश्ती लड़े हो। अब सुबह सुबह पिता जी के साथ मुझे नहीं लगता तुम, कुश्ती लड़ पाओगे।
राजेश _, दीदी, तुमने अभी मेरा पावर देखा कहा है। जिस दीन देखोगी न मेरा फैन बन जावोगी।
सुप्रिया _अच्छा मै भी देखना चाहूंगी कितना पावर है तुझमें।
राजेश _अच्छा दी तुम चलो, मै फ्रेस होकर आता हूं।
सुप्रिया _जल्दी आना।
राजेश फ्रेश होने बाथरूम चला गया।
वहा से सीधे आंगन में पहुंचा जहां, सत्जन सिंह कसरत कर रहा था।
सतजन सिंह _आ गया बरखू दार,
राजेश _नमस्ते मामा जी।
सत्जन सिंह _उठने लेट हो गए, नौजवान। चल पहन ले लंगोट और उतर जा मैदान में। दिखाओ सबको कितनी ताकत है तुम्हारी भुजाओं में ।
राजेश _मामा जी, मैने कभी लंगोट पहना नही।
चड्डा चलेगा, वैसे भी लंगोट में मुझे शर्म आयेगी।
घर के लोग मुझे देख कर हसेंगे।
सत्जन सिंह _अरे यार तू मर्द होकर लड़कियों की तरह शर्मा रहा है। अगर कुश्ती लड़ना है तो लंगोट तो पहनना पढ़ेगा बेटा।
सतपाल पहना दो भांजा को लंगोट।
सतपाल _आओ राजेश।
राजेश को सतपाल सिंह एक कमरे में ले गया। और उसे लंगोट पहना दिया।
राजेश लंगोट पहन कर बाहर निकलने में शरमा रहा था।
वह शर्माते हुवे आंगन में पहुंचा।
घर की सभी महिलाए, राजेश को लंगोट में देखकर मुंह छिपाकर हसने लगीं।
सुप्रिया _बॉडी तो बहुत अच्छी है, देखते है ताकत है की नही, वैसे लंगोट में बिल्कुल बंदर लग रहा है।
सुप्रिया की बात सुनकर, सभी हसने लगे।
राजेश _मामा जी सभी मेरा मजाक उड़ा रहे हैं।
सतजन सिंह _अरे यार, मर्द को औरतों की बातो पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
चल आ जा मैदान पे, हो जाए दो दो हाथ।
सतपाल सिंह रेफ्री बन गया।
राजेश _मामा जी देखते है इस उम्र में भी आपके पास कितना ताकत है। आप तैयार हो जाइए, मुझ्से हारने के लिए।
सतपाल सिंह _ये हुई मर्दों वाली बात चल आ जा मैदान पे।
राजेश मैदान पे आ गया।
सभी लोग दोनो की कुश्ती देखने लगे।
कभी राजेश आगे बढ़ता, कभी सत्जन सिंह तभी सत्जन सिंह ने अपना चाल चला। और घुमाके राजेश को चीत कर दिया।
सतपाल सिंह ने सिटी बजाया।
राजेश हार गया।
सत्जन सिंह,_बरखुदार तुम तो कमजोर निकले एक ही बार में चीत हो गया।
सभी लोग सत्जन सिंह के लिए ताली बजाने लगे।
सुप्रिया _, क्यू बड़ी बड़ी बाते कर रहा था। एक ही बार में चीत हो गया। बेचारा।
सुप्रिया chidane लगी।
सतजन सिंह _बरखु दार कुश्ती में सिर्फ ताकत नहीं, दीमाक की भी जरूरत पड़ती है।
राजेश _मां मां जी एक बार और मौका दो, अबकी बार हरा दूंगा।
शुप्रिया _रहने दे और कितनी बेजजती कराएगी अपनी।
सतजन सिंह _अरे आजा, कर ले अपनी ईच्छा पूरी।
राजेश फिर मैदान में आ गया।
दोनो के बीच फिर कुश्ती शुरू हो गया।
कुछ ही देर में राजेश फिर चित हो गया।
सभी लोग मुंह छिपा कर हसने लगे।
राजेश फिर से एक और मौका मांगा। पर राजेश सत्जन सिंह को हरा न सका।
सुनिता _बस बस अब रहने दे, अपने मामा जी को तू हरा नही पाएगा।
राजेश _मामा मैंने आपसे हार मान लिया।
सत्जन सिंह _बरखु दार, जानते हो तुम क्यू हार रहे। तुम इस लिए हार रहे हो की, तुम सामने वाले को चीत करने पे ज्यादा ध्यान दे रहे थे, जबकि पहलवान को अपनी सुरक्षा पर पहले ध्यान देना है और जब सामने वाले थकने लगे तो मौका देखकर उस पर अटैक करना है।
चलो मैं तुम्हे सिखाता हूं।
सत्जन सिंह ने राजेश को कुछ तकनीक सिखाए।
सावित्री _अब बस भी करो जी, आज घर में कार्यक्रम है। कुछ देर में मेहमानों की आने की सिलसिला शुरू हो जाएगा।
तैयारी भी करनी है। वैसे भी राजेश कुश्ती सीखकर करेगा क्या? उसे तो कलेक्टर बनना है। कुश्ती थोड़ी लड़नी है।
सतपाल सिंह _तुम्हारी मामी ठीक कह रहा है भांजा। इतना पर्याप्त है तेरे लिए। वैसे भी गांव में कल कुश्ती प्रतियोगिता होनी है। पहलवानों को कुश्ती लड़ता देख, बहुत कुछ तुम्हे सीखने को मिलेगा। तुम भी चलना,कुश्ती देखने।
राजेश _ज़रूर मामा जी।
इसकेे बाद घर के सभी लोग नहा धोकर तैयार हो गए। घर के कार्यक्रम की तैयारी में लग गए।
कुछ देर बाद सुप्रिया के पति गांव पहुंचा।
सुप्रिया _राजेश ये है तुम्हारे जीजू।
राजेश _नमस्ते जीजू, ये क्या जीजू आप अभी आ रहे हो, घर का दामाद हो, तैयारी की जिम्मेदारी तो घर की दामाद की होती है ना, और आप ही पीछे रह गए।
जीजा जी _अरे यार क्या करे? सरकारी नौकरी है। बड़ी मुस्किल से एक दिन की छूटी मिली है।
वैसे शादी के समय तुझे देखा था। तू छोटा था। अब तो एकदम जवान और स्मार्ट हो गया है यार।
वैसे क्या कर रहा है अभी।
सुप्रिया _राजेश, आई ए एस का इंटरव्यू देकर कुछ दिन पहले ही आया है दिल्ली से।
जीजा जी _ओह ये तो बड़ी अच्छी बात है, बहुत बहुत शुभकामनाएं भई हमारे तरफ से, इंटर व्यू में तुम ज़रूर सफल हो।
राजेश _शुक्रिया जीजू।
धीरे धीरे सभी मेहमानों का आना शुरू हो गया।
सत्जन सिंह _कोई पंडित जी को फोन करो भाई, सारे मेहमान आ गए। आने में और कितना समय लगेगा।
सतपाल सिंह ने पंडित जी को फोन किया।
पंडित जी ने कहा की बस कुछ ही देर में वह पहुंचने वाला है।
कुछ ही देर में पंडित जी पहुंच गया।
पंडित जी ने पूजा पाठ शुरू किया।
पूजा पाठ संपन्न होने के बाद, मुन्ने का कुंडली देखा।
पंडित जी _मुखिया जी, मुन्ने का नाम अ अक्षर से निकल रहा है। क्या नाम रखना है मुन्ने का।
सत्जन सिंह _मुन्ने का नाम रखने का अधिकार तो उसके माता पिता का है। वही बताएंगे।
सतपाल सिंह _ये क्या भईया, आप घर के बड़े है, मुन्ने का नाम रखने का अधिकार तो आप का ही है।
राजेश _हां मामा जी, छोटे मामा जी सही बोल रहे है। कोई अच्छा सा नाम सुझाइए मुन्ने का।
सत्जन सिंह _तुम लोगो की यही ईच्छा है तो आज से मुना अर्जुन के नाम से पुकारा जायेगा।
सभी लोग ताली बजाने लगे।
राजेश _वाह मामा जी बहुत अच्छा नाम सुझाया है आपने।
उसके बाद सभी मेहमानों को भोजन कराया गया।
शाम होते होते आस पास के मेहमान तो अपने अपने घर जानें लगे। दूर से आए मेहमान रात वही रुक गए।
सुबह होते ही शेष बचे मेहमान भी, अपने अपने घर के लिए निकल गए।
सुप्रिया का पति भी, एक ही दिन की छूटी लेकर आया था वह भी चला गया।
शाम को 4बजे गांव में कुश्ती प्रतियोगिता आयोजित किया गया था।
विजेता पहलवान को 2लाख रुपए इनाम रखा गया था। आस पास एवम दूर दूर से भी पहलवान कुश्ती प्रतियोगिता में भाग लेने आए थे।
सतजन सिंह खुद एक पहलवान था। गांव का मुखिया भी था।
उसी के अध्यक्षता में यह प्रतियोगिता आयोजित किया गया था।
सतपाल सिंह _भईया, लड़के लोग बुलाने आए थे। प्रतियोगिता की सारी तैयारी हो चुकी है।
सत्जन सिंह _चलो हम चलते है। घर के सभी पुरुष सदस्य, कुश्ती देखने के लिए जाने की तैयारी करने लगे।
सुप्रिया _पिता जी, मुझे भी देखनी है कुश्ती। सुनिता बुआ चलो न हम भी चलते है।
सुनिता _भईया, क्या हम भी देखने जा सकते है।
सतजन _अगर तुम लोगो की ईच्छा हो तो, जा सकती हो।
शुप्रियां, और सुनिता बच्चों को लेकर कुश्ती देखने के लिए जाने की तैयार करने लगी।
सभी लोग तैयार हो कर साथ में, प्रतियोगित स्थल पहुंचे।
प्रतियोगिता स्थल पर महिलाओं बच्चों और पुरुषो की बहुत भीड़ थी।
पास के गांव वाले मुखिया का नाम नाथू सिंह था।
वह भी अपना पहलवान लेकर आया huwa था।
पिछले बार नाथू सिंह और सत्जन सिंह के लड़को के बीच ही अंतिम मुकाबला huws था। जिसमे सत्जन सिंह के लड़के विजेता बने थे।
नाथू राम इस बार सतजन सिंह के लड़को को कुश्ती में हराकर, उसे नीचा दिखाना चाहता था। पिछले बार वह बहुत अपमानित महसूस किया था। उसका बदला लेना चाहता था। इस बार एक से बढ़ कर एक पहलवान लेकर आया huwa था। एक तो उसका बेटा था शेरा जो काफी खूंखार लग रहा था।
नाथू सिंह माइक लेते हुए कहा,,,
सत्जन सिंह इस बार मेरे लड़को को कोई हरा नही पाएगा।
विजेता मेरे लड़के ही बनेंगे।
सतजन सिंह _रहने दो सत्जन सिंह, पिछले बार भी तुमने यही कहा था। पर देखा न तुमने मेरे लड़को ने तुम्हारे पहलवानों की क्या दुर्गति की।
नाथू सिंह _सब याद है मुझे सतजन सिंह, इस बार मेरे लड़के पिछले अपमान का बदला लेने आए है। वो देखो मेरा बेटा सेरा।
अगर कोई मेरे बेटे शेरा का तुम्हरे लड़के हरा देंगे तो मैं अपना मूछ मुड़ा दूंगा।
अब तुम बोलो अगर मेरे लड़के तुम्हरे पहलवानों को हरा देंगे, तो क्या तुम अपना मूछ मुड़वाओगे।
सतजन _देखो नाथू सिंह खेल को खेल भावना की तरह लो। इसमें किसी किसी को अपमानित करने का इरादा नहीं होना चाइए।
नाथू सिंह,_सत्जन सिंह इसका मतलब तुमने अभी से हार मान लिया। हा हां हा
सत्जन सिंह डरपोक है।
सत्जन सिंह _नाथू सिंह, सतजन सिंह डरपोक नही है। ठीक है मुझे तुम्हारी शर्त मंजूर है अगर मेरे लड़के हारे तो मैं अपना मूछ मुड़वा दूंगा।
सतपाल सिंह _भईया ये आप क्या कह रहे है?
सतजन सिंह _छोटे, सामने वाले ने मुझे चैलेंज दिया है। मै पीछे नहीं हट सकता।
सतपाल सिंह _पर भइया इस बार उसके पहलवान कुछ ज्यादा ही मजबूत लग रहे है।
नाथू सिंह _अब आएगा खेल का असली मजा।
मैं तो सतजन सिंह का मूछ अपने हाथो से साफ करूंगा। नाथू सिंह के छोटे भाई ने कहा,हा हा हा,, उसके साथी लोग हसने लगे।
इसके बाद मंच पर नारियल तोड़ा गया। सतजन सिंह ने खेल प्रारंभ करने का आदेश दिया।
नाथू सिंह _ये है मेरा बेटा शेरा, सतजन सिंह अपने पहलवानों को भेजो। मेरा शेरा अकेला ही काफी है सबसे निपटने के लिए।
सतजन सिंह ने अन्य गांव से आए हुए सभी पहलवानों को पहले मौका दिया, शेरा को हराने के लिए।
शेरा बहुत ताकत वर और चालक था।
उसने सभी पहलवानों को एक एक कर चीत कर दिया और सभी की हालत खराब कर दी।
उसकी ताकत देखकर गांव वाले चिंतित होने लगें। उधर नाथू सिंह के साथी बहुत उत्साहित थे। शेरा शेरा शेरा,,,,
करके शोर मचा रहे थे।
नाथू सिंह _सतजन सिंह, शेरा ने तो अन्य गांव से आए सभी पहलवानों को हरा दिया है, अब तुम अपने पहलवानों को भेजो,, हा हा हा हा,,
सत्जन सिंह के आदेश पर, उसके लड़के एक एक करके मैदान में शेरा से भिड़ने के लिए उतरे, शेरा नेको हराने के लिए बहुत कोशिश किया। लेकिन शेरा ने सभी को चीत कर , सबकी हालत खराब कर दी।
गांव के सभी लोग दुखी हो गए।
नाथू सिंह _हा हा हां हा,,,
सतजन सिंह, और कोई बचा है क्या? तुम्हारे पहलवान, तुम्हारे पहलवान तो सब नामर्द निकले, किसी ने शेरा को हरा नही पाया।
हा हा हा हा,,,
सतजन सिंह, शर्त के मुताबिक अपनी मूंछ हमे दे दो,,,
छोटे जाओ सत्जन सिंह का मूंछ लेकर आओ।
ठीक है भईया,, हां हा हा,,,,
नाथू सिंग का छोटा भाई छुरा लेकर सतजन सिंह के पास आ गया।
हा हां हा हा, सतजन सिंह यह मूछ मुझे dede , सुनिता सुप्रिया, शेखर सतपाल सिंह को कुछ समझ नही आ रहा था , क्या करे? सतजन सिंह का ही नहीं पूरे गांव वाले अपमानित महसूस करने लगें थे।
सतजन सिंह अपनी आंखें बन्द कर लिया।
इधर नाथू सिंह का भाई छुरा लेकर, हाथ आगे बढ़ा रहा ही था की, राजेश ने हाथ रोक लिया।
राजेश _, मामा की मान सम्मान को मिट्टी में मिलाने से पहले, मुझसे निपटना होगा।
राजेश ने एक जोर का मुक्का मारा नाथु सिंह के भाई का, चकरा कर वही गिर गया।
नाथु सिंह _अरे छोर तू कौन होता है। रोकने वाला। अगर इतनी ही ताकत है तो शेरा से क्यू नही लड़ लेता।
राजेश,_, हां हां लडूंगा मैं, पर मेरे होते हुवे मामा जी के इज्जत पर आंच नहीं आने दूंगा।
नाथु सिंह _तो उतर जा मैदान पर।
सतजन सिंह _राजेश, तू नही लड़ पाएगा उस शेरा से, मत जा, कर लेने दो नाथु सिंह को अपनी ईच्छा पूरी।
राजेश _नही मामा जी मै ऐसा होने नहीं दूंगा।
इधर शेखर सुनिता और सतपाल को कुछ समझ नहीं आ रहा था। क्या करे? एक तरफ तो खानदान की इज्जत दूसरी ओर बेटा।
राजेश _मामा जी मुझे आशीर्वाद दो।
सतजन सिंह न चाहते हुवे भी राजेश की जिद पर मजबूर होकर, विजई होने का आशीर्वाद दिया।
राजेश मैदान पर कुश्ती के अखाड़े में उतर गया।
गांवों वाले खामोश थे पता नही क्या होगा।
नाथु सिंह के आदमी शेरा शेरा सोर मचा रहे थे।
सुनिता आंखें बन्द कर भगवान से प्रार्थना कर रही थी।
राजेश और शेरा का घमासान युद्ध शुरू huwa। कभी शेरा भारी पड़ता तो कभी राजेश। राजेश का खेल देखकर गांव वालों में भी जोस आ गया।
वे भी राजेश राजेश चिल्लाने लगे।
धीरे धीर शेरा थकने लगा। राजेश ने चीखतेहुए , अपना पूरा ताकत लगाया और शेरा को अपने कंधो में उठा लिया। सभी लोग आश्चर्य से देखने लगे।
राजेश ने शेरा को घुमा कर जमीन पर पटक दिया।
कुछ छन के लिए शेरा बेहोश हो गया।
शेरा हार चुका था।
सभी लोग राजेश राजेश शोर मचाने लगे।
सुप्रिया _बुआ आंखें खोलो, राजेश जीत गया।
सुनिता ने जब देखा राजेश जीत गया है उसकी आंखो में आंसू भर आए।
शेरा के हारने के बाद नाथु ने अपने दूसरे पहलवान को मैदान में उतार दिया।
बांकि पहलवानों में शेरा जैसी ताकत नहीं था। राजेश ने एक एक करके सभी पहलवानों को धूल चटवा दिए।
गांव वालों ने राजेश को कंधो में उठा लिया। चारो तरफ राजेश राजेश गूंजने लगा।
नाथु सिंह मुंह छिपाने लगा।
सतपाल ने उसे पकड़ लिया।
नाथु सिंह कहा छिप रहा है। छुरा लाओ re इसका मूछ मुड़ना है।
सतजन सिंह _छोटे छोड़ दो उसको, खेल को खेल भावना की तरह ही खेलना चाहिए। किसी की मान सम्मान को ठेस पहुंचाना खेल भावना नहीं। नाथु सिंह ने सतजन सिंह से माफी मांगा।
राजेश को मंच पर ले जाया गाया।
सत्जन सिंह ने उसे फूलों की हार पहना कर गले से लगा लिया।
सतजन सिंह _यार तूने तो कमाल कर दिया।
सुनिता की आंखों से आंसू बह रहे थे।
राजेश ने अपने पिता और छोटे मामा का पैर छूकर आशीर्वाद लिया, दोनो ने उसे गले से लगा लिया।
अंत में वह अपनी मां के पास गया।
सुनिता रो रही थी।
राजेश _मां तुम रो क्यू रही हो?
सुनिता _ये तो खुशी के आंसू है पगले। तूने अपने मामा की मान मर्यादा को बचा लिया बेटा मुझे तुम पर गर्व है। सुनिता राजेश को अपनी बाहों में भर लिया।
उसके बाद राजेश को गांव के का एक चक्कर घुमाया गया। सभी नाच रहे थे राजेश की जयकार लगा रहे थे।
इधर घर का नौकर घर आकर घटना की सारी जानकारी, सावित्री और सुमित्रा को दी।
वे पूजा की थाली सजाकर राह देखने लगे।
गांव भ्रमण के बाद, जुलूस सत्जन सिंह का घर पहुंचा।
सावित्री, सुमित्रा और प्रिया पूजा की थाली लेकर, दरवाजे पर खड़ी थी।
सावित्री ने सत्जन सिंह की आरती उतरना चाही।
सतजन सिंह _, मेरी नही राजेश की आरती पहले उतारो। योद्धा यही है।
सावित्री ने राजेश की आरती उतारी राजेश ने अपने मामी से आशिर्वाद लिया।
सभी की आरती उतारने के बाद। सतजन सिंह नेगांव वालो से हाथ जोड़कर शुक्रिया कहते हुए अपने अपने घर जानें को कहा। गांव वाले अपने अपने घर चलें गए।
इधर राजेश कुश्ती लड़ते लड़ते काफी थक चुका था।
वह लंगड़ा रहा था। उसे शरीर में काफी दर्द हो रहा था।
सत्जन सिंह राजेश को उसके कमरे में ले जाया गया।
प्रिया उसकी उपचार करने लगी।
राजेश के कपड़े उतार दिया गया। वह सिर्फ उंडर वियर में था।
गीले कपड़े से उसके पूरे शरीर को पोछा गया।
फिर उसके शरीर को गर्म सरसो के तेल से मालिश किया गया। सभी महिलाए राजेश की सेवा में लगी थी।
प्रिया ने राजेश को कुछ दर्द निवारक गोली दिया।
कुछ देर बाद राजेश बेहतर महसूस करने लगा।
रात्रि भोजन के समय सुनिता ने राजेश के कमरे में ही अपने हाथो से उसे भोजन कराया।
सतजन सिंह ने राजेश के पास जाकर पुछा?
तू ठीक तो है न मेरा शेर,
राजेश _हा मामा जी मै बिल्कुल ठीक हूं।
सतजन सिंह ने सभी को भोजन करने के लिए कहा।
सभी लोग भोजन करने लगें।
सतजन सिंह _देखो राजेश को उसके कमरे में रात में अकेला छोड़ना ठीक नहीं। तुम में से कोई एक रात में राजेश के कमरे में ही सो जाना। उसे किसी चीज की जरूरत पड़ी तो।
सुनिता _मै सो जाऊंगी, आज राजेश के कमरे में।
सतजन सिंह _हाये ठीक रहेगा।
सभी लोग रात में राजेश का हाल चाल पूछकर। अपने अपने कमरे में सोने को चले गए।
कमरे में सुनिता, प्रिया रुकी हुई थी। तभी सुमित्रा राजेश के लिए दुध लेकर आई।
प्रिया _चाची, राजेश को गाय की जगह मां की दुध की जरूरत है इससे उसके शरीर को ज्यादा लाभ होगा।
सुमित्रा _क्यू नही, दीदी इजाजत दे तो अपनी दुध पीला दू।
सुनिता _पीला दो न तो, अगर मेरा बेटा को मां की दुध से ज्यादा लाभ मिलेगा तो मैं भला मना क्यों करूंगी।
पहले दरवाज़ा बंद कर दो कोई आ न जाए।
प्रिया ने दरवाज़ा बन्द कर दिया।
सुमित्रा ने अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया। और चूचे बाहर निकाल दिया।
सुनिता _राजेश बेटा अपनी मामी की दुध पिलो इससे तुम्हे जल्दी आराम मिलेगा।
राजेश ने सुमित्रा की चुचियों को पकड़ लिया और फिर मसल मसल कर बारी बारी से चूसना शुरू कर दिया।
सुनिता _अरे प्रिया तुम्हारा भी तो दुध, आता है न। राजेश को सुमित्रा का दुध कम न पड़ जाए तू भी पिला दे अपनी दुध।
प्रिया _जी बुवा।
प्रिया ने भी अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया। राजेश अब बारी से दोनो की चूचे मसल मसल कर चूसने लगा दुध गटक गटक कर पीने लगा।
तभी प्रिया ने देखा राजेश के अंडरवियर काफी ऊपर उठ गया है, उसका लंद खड़ा हो गया है। वह मुस्कुराने लगी।
प्रिया _बुवा देखो तो राजेश का घोड़ा तो इसके घायल होने के बाद भी दौड़ने को तैयार है।
सुनिता _तुम जैसे घोड़ी की चूचे देखेगा तो होगा ही। तीनो महिलाए हसने लगी।
प्रिया _बुआ राजेश का अंडर वियर उतार दो , राजेश को दर्द कर रहा होगा।
सुनिता ने राजेश का अंडर वियर, उतार दिया उसका मोटा और लम्बा लिंग हवा में में लहराने लगा।
तीनों औरते देखकर मुस्कुराने लगी। प्रिया _बुवा, सेक्स भी दर्द निवारक होता है। आदमी सेक्स के समय अपना सारा दर्द भूल जाता है।
सेक्स से मर्द को दर्द से जल्दी राहत मिलता है। हमे राजेश को सेक्स सुख भी देना चाहिए।
सुनिता राजेश के लंद को सहलाने लगी, फिर अपने मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दी।
इधर राजेश दोनो औरतों का चूची पी रहा था।
सुनिता उसका लंद चूस रही थी।
तीनों औरते राजेश का लंद देखकर और चूची मसलने से गर्म हो चुकी थी।
सुनिता ने अपनी सारे कपड़े उतार फेकी। वह राजेश के लंद को chut में रख कर बैठ गई, फिर हल्के हल्के उछल उछल कर राजेश को सेक्स का मजा देने लगी और खुद मजा लेने लगी। कुछ देर बाद जब वह झड़ गई तो, सुमित्रा नंगी हो गई और राजेश के लंद पर उछल उछल कर उसे सेक्स सुख देने लगी और खुद मजा लेने लगी। इस तरह तीनो महिलाए बारी बारी से राजेश केलंद का सवारी कर चुदने लगी। राजेश को भी तीनो महिलाओं को चोदने में बड़ा मजा आ रहा था। वह अपना सारा दर्द भूल गया, अब वह तीनो महिलाओं को अलग अलग आसनों जमकर चोदने लगा, खुद भी मजा लेने लगा और औरतों को भी मजा देने लगा। कमरे में चारों की सिसकारी गूंज रही थी,, आह उह आह उह आह। उह। आह। उह। आह उह आह, उह,,,,,
करीब दो घंटे तक तीनो औरतों को जमकर बजाया।
उसके बाद तीनों को अपनी वीर्य से नहला दिया।
राजेश थक चुका था। वह गहरी नींद में सो गया।
सुमिता और प्रिया दोनो अपने कपड़े पहन कर अपने अपने कमरे में चली गईं। सुनिता राजेश से लिपट कर उसके बाजू में सो गया।
सुबह सुनिता जल्दी उठ कर नहाकर पूजा पाठ की और घर के काम में सहयोग करने लगी।
इधर सतजन सिंह उठ कर राजेश केकी हाल चाल पुछने उसके कमरे में गया।
सतपाल और शेखर भी वहां पहुंचा।
सतजन सिंह _, अब कैसी तबियत है यार तेरी।
राजेश _, मै बिल्कुल ठीक हूं, मामा जी। कल रात मां मामी और प्रिया दी ने बहुत अच्छी सेवा की।
सुमित्रा भी वहा खड़ी थी वह शर्मा गई।
सत्जन सिंह _यार तुमने तो कल कमाल ही कर दिया, हमारी घर की मान मर्यादा को बचा लिया।
राजेश _ये तो मेरा फर्ज था मामा जी।
सतजन सिंह _यार तू इतना ताकत वर है, फिर तुम कल सुबह मुझसे कुश्ती में कैसे हार गए।
राजेश _भला मै अपने मामा जी से कैसे जीत सकता हूं।
सभी लोग हसने लगे।
सतजन सिंह _यार तूने मेरा दिल जीत लिया। हम सबको तुम पर गर्व है।
राजेश _मामा जी मुझे आपसे कुछ चाहिए।
सतजन सिंह _अरे बोल भांजे क्या चाहिए तुम्हे, तुम्हरे लिए तो मेरी जान भी हाजिर है।
राजेश _मामा जी एक बार आप प्रिया दीदी को माफ कर दो, वो आपसे बहुत प्यार करती है।
सज्जन सिंह _, राजेश, क्या तुम्हे लगता है मैं प्रिया से प्यार नहीं करता। ऐसा एक दिन भी नही रहा होगा जब मैं प्रिया को याद नही किया होऊंगा।
शायद, अपनी झूठी शान को बचाने के चक्कर में कभी, उससे मिलने की कोशिश नही किया।
पर आज तुमने मेरी आंखें खोल दिया है। अब चाहे कोई कुछ भी कहे, मुझे किसी की परवाह नही।
सज्जन सिंह ने प्रिया को पुकारा, प्रिया वही खड़ी थी।
प्रिया _पिता जी।
सज्जन सिंह _मुझे माफ कर दो बेटी।
प्रिया _नही पिता जी माफी तो मुझे मांगनी चाइए, मैने आपक दिल दुखाया।
दोनो एक दूसरे से गले लग कर रोने लगे।
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update keep writing majedar
बहुत ही बेहतरीन और कामुक नजारा है। कृपया राजेश की माँ सुनीता को राजेश को ऐसे चुदवावो ताकि सुनीता खुद दो तीन बार हवसी में पेट से होने को तरसे और पेट से भी हो जाए पर दोष बापके नाम करदो और नल्ला बाप भी ये समझे की उसका बीज हो और खुदके नल्लेपन पे गर्व कर। खुदाई, जुताई और बीज राजेशका हो और खेत उसके बापका और उसकी माँ बेटे के बीजका फसल उगाये अपने उपजाऊ खेत मेंजब सुप्रिया ने प्रिया को राजेश के कमरे से बाहर निकलते देखी। वह सोच में पड़ गई, आख़िर इतनी रात को राजेश के कमरे में दीदी क्यू गई थी।
दरसल सुप्रिया की बड़ी लड़की को पेशाब लगी थी। उसको पेशाब कराने के लिए वह उठी थी। लड़की को आंगन के मोरी के पास ही पेशाब करने बिठा दी और उसके पीछे खड़ी थी। तभी उसे दरवाज़ा खुलने का आहट सुनाई पढ़ी, उसका ध्यान उस ओर गया।
जब प्रिया राजेश के कमरे से निकल कर अपने कमरे में गई।
लड़की के पेशाब कर लेने के बाद, उसे लेकर कमरे में चली गईं। बेड पर लेट कर वह यही सोचने लगी की आख़िर इतनी रात को दीदी राजेश के कमरे में क्यों गई थी।
फिर सोंची हो सकता है राजेश को किसी चीज की जरूरत पड़ी होगी। वह यही सोचते सोचते सो गई।
इधर सत्जन सिंह प्रतिदिन की तरह सुबह उठ कर घर के आंगन में कसरत करने लगा।
स्घर के सभी महिलाएं उठ चुके थे।
सत्जन सिंह _अरे ये भांजा अभी तक उठा नही क्या, वो तो आज मेरे साथ कुश्ती लड़ने वाला था। अभी तक उठा नही।
सुप्रिया वही खड़ी थी।
अरे सुप्रिया बेटा देखो तो, यू भांजा, कल तो बड़ी बड़ी बाते कर रहा था मुझे कुश्ती में हरा देगा।
भूल गया क्या? जरा याद तो दिलाओ उसे। बॉडी तो बड़ी अच्छी बना रखी है। इतनी देर तक सोता है तो कसरत कितना समय करता है।
सुप्रिया _पिता जी मै अभी राजेश को बुला कर लाती हूं।
सुप्रिया राजेश के कमरे के पास गई। रात में कमरा अंदर से बंद नहीं किया था।
सुप्रिया को रात में प्रिया राजेश के कमरे में क्यू गई थी यह जानने की जिज्ञासा थी वह बिना दरवाज़ा खटखटाए अंदर घुस गई।
जब वह अंदर गई तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।
राजेश बिलकुल नंगा था। उसका लंद भी सुबह सुबह प्रतिदिन की तरह खड़ा हुआ था।
सुप्रिया, की नजर जब राजेश के लंद पर पड़ी तो, उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।
बाप re कितना बडा है।
ये तो नंगा ही लेटा है। इसका मतलब दीदी रात में राजेश से चुदने आई थी। हे भगवान।
तभी राजेश ने करवट लिया।
सुप्रिया घबरा गई।
वह कमरे से बाहर निकल गई।
फिर दरवाज़ा खटखटाया ।
राजेश का नींद खुल गया।
राजेश ने देखा वह रात में नंगा ही सो गया था।
वह तेजी से उठा और अपना कपड़ा पहनने लगा।
सुप्रिया _अरे कितने देर तक सोता रहेगा उठो।
बाहर से बोली।
राजेश _कोन आ गई,मै आ रहा हूं। राजेश ने आवाज दिया।
राजेश ने कपड़े पहन कर दरवाज़ा के पास गया, दरवाज़ा तो पहले ही खुला huwa था।
राजेश _अरे दीदी तुम।
सुप्रिया _पिता जी ने भेजा है तुम्हे बुलाने, कह रहा था कि कितने देर तक सोता रहेगा।
राजेश _ओह मामा जी उठ गए क्या?
सुप्रिया _वो कसरत कर रहे हैं? तुम्हारा वेट कर रहे हैं कुश्ती लड़ने के लिए। सुप्रिया हसने लगी।
पर मुझे नही लगता तुम कुश्ती में पिता जी को हरा पाओगे।
राजेश _क्यू?
सुप्रिया _रात भर कुश्ती लड़कर थक जो गए होगे, धीर से फुसफुसाते हुवे बोली।
राजेश _दीदी, आपने क्या कहा?
सुप्रिया _अरे कुछ नहीं मैन ये कहा, तुम्हारी सकल तो ऐसी लग रही है जैसे तुम रात भर जगे हो, किसी के साथ कुश्ती लड़े हो। अब सुबह सुबह पिता जी के साथ मुझे नहीं लगता तुम, कुश्ती लड़ पाओगे।
राजेश _, दीदी, तुमने अभी मेरा पावर देखा कहा है। जिस दीन देखोगी न मेरा फैन बन जावोगी।
सुप्रिया _अच्छा मै भी देखना चाहूंगी कितना पावर है तुझमें।
राजेश _अच्छा दी तुम चलो, मै फ्रेस होकर आता हूं।
सुप्रिया _जल्दी आना।
राजेश फ्रेश होने बाथरूम चला गया।
वहा से सीधे आंगन में पहुंचा जहां, सत्जन सिंह कसरत कर रहा था।
सतजन सिंह _आ गया बरखू दार,
राजेश _नमस्ते मामा जी।
सत्जन सिंह _उठने लेट हो गए, नौजवान। चल पहन ले लंगोट और उतर जा मैदान में। दिखाओ सबको कितनी ताकत है तुम्हारी भुजाओं में ।
राजेश _मामा जी, मैने कभी लंगोट पहना नही।
चड्डा चलेगा, वैसे भी लंगोट में मुझे शर्म आयेगी।
घर के लोग मुझे देख कर हसेंगे।
सत्जन सिंह _अरे यार तू मर्द होकर लड़कियों की तरह शर्मा रहा है। अगर कुश्ती लड़ना है तो लंगोट तो पहनना पढ़ेगा बेटा।
सतपाल पहना दो भांजा को लंगोट।
सतपाल _आओ राजेश।
राजेश को सतपाल सिंह एक कमरे में ले गया। और उसे लंगोट पहना दिया।
राजेश लंगोट पहन कर बाहर निकलने में शरमा रहा था।
वह शर्माते हुवे आंगन में पहुंचा।
घर की सभी महिलाए, राजेश को लंगोट में देखकर मुंह छिपाकर हसने लगीं।
सुप्रिया _बॉडी तो बहुत अच्छी है, देखते है ताकत है की नही, वैसे लंगोट में बिल्कुल बंदर लग रहा है।
सुप्रिया की बात सुनकर, सभी हसने लगे।
राजेश _मामा जी सभी मेरा मजाक उड़ा रहे हैं।
सतजन सिंह _अरे यार, मर्द को औरतों की बातो पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
चल आ जा मैदान पे, हो जाए दो दो हाथ।
सतपाल सिंह रेफ्री बन गया।
राजेश _मामा जी देखते है इस उम्र में भी आपके पास कितना ताकत है। आप तैयार हो जाइए, मुझ्से हारने के लिए।
सतपाल सिंह _ये हुई मर्दों वाली बात चल आ जा मैदान पे।
राजेश मैदान पे आ गया।
सभी लोग दोनो की कुश्ती देखने लगे।
कभी राजेश आगे बढ़ता, कभी सत्जन सिंह तभी सत्जन सिंह ने अपना चाल चला। और घुमाके राजेश को चीत कर दिया।
सतपाल सिंह ने सिटी बजाया।
राजेश हार गया।
सत्जन सिंह,_बरखुदार तुम तो कमजोर निकले एक ही बार में चीत हो गया।
सभी लोग सत्जन सिंह के लिए ताली बजाने लगे।
सुप्रिया _, क्यू बड़ी बड़ी बाते कर रहा था। एक ही बार में चीत हो गया। बेचारा।
सुप्रिया chidane लगी।
सतजन सिंह _बरखु दार कुश्ती में सिर्फ ताकत नहीं, दीमाक की भी जरूरत पड़ती है।
राजेश _मां मां जी एक बार और मौका दो, अबकी बार हरा दूंगा।
शुप्रिया _रहने दे और कितनी बेजजती कराएगी अपनी।
सतजन सिंह _अरे आजा, कर ले अपनी ईच्छा पूरी।
राजेश फिर मैदान में आ गया।
दोनो के बीच फिर कुश्ती शुरू हो गया।
कुछ ही देर में राजेश फिर चित हो गया।
सभी लोग मुंह छिपा कर हसने लगे।
राजेश फिर से एक और मौका मांगा। पर राजेश सत्जन सिंह को हरा न सका।
सुनिता _बस बस अब रहने दे, अपने मामा जी को तू हरा नही पाएगा।
राजेश _मामा मैंने आपसे हार मान लिया।
सत्जन सिंह _बरखु दार, जानते हो तुम क्यू हार रहे। तुम इस लिए हार रहे हो की, तुम सामने वाले को चीत करने पे ज्यादा ध्यान दे रहे थे, जबकि पहलवान को अपनी सुरक्षा पर पहले ध्यान देना है और जब सामने वाले थकने लगे तो मौका देखकर उस पर अटैक करना है।
चलो मैं तुम्हे सिखाता हूं।
सत्जन सिंह ने राजेश को कुछ तकनीक सिखाए।
सावित्री _अब बस भी करो जी, आज घर में कार्यक्रम है। कुछ देर में मेहमानों की आने की सिलसिला शुरू हो जाएगा।
तैयारी भी करनी है। वैसे भी राजेश कुश्ती सीखकर करेगा क्या? उसे तो कलेक्टर बनना है। कुश्ती थोड़ी लड़नी है।
सतपाल सिंह _तुम्हारी मामी ठीक कह रहा है भांजा। इतना पर्याप्त है तेरे लिए। वैसे भी गांव में कल कुश्ती प्रतियोगिता होनी है। पहलवानों को कुश्ती लड़ता देख, बहुत कुछ तुम्हे सीखने को मिलेगा। तुम भी चलना,कुश्ती देखने।
राजेश _ज़रूर मामा जी।
इसकेे बाद घर के सभी लोग नहा धोकर तैयार हो गए। घर के कार्यक्रम की तैयारी में लग गए।
कुछ देर बाद सुप्रिया के पति गांव पहुंचा।
सुप्रिया _राजेश ये है तुम्हारे जीजू।
राजेश _नमस्ते जीजू, ये क्या जीजू आप अभी आ रहे हो, घर का दामाद हो, तैयारी की जिम्मेदारी तो घर की दामाद की होती है ना, और आप ही पीछे रह गए।
जीजा जी _अरे यार क्या करे? सरकारी नौकरी है। बड़ी मुस्किल से एक दिन की छूटी मिली है।
वैसे शादी के समय तुझे देखा था। तू छोटा था। अब तो एकदम जवान और स्मार्ट हो गया है यार।
वैसे क्या कर रहा है अभी।
सुप्रिया _राजेश, आई ए एस का इंटरव्यू देकर कुछ दिन पहले ही आया है दिल्ली से।
जीजा जी _ओह ये तो बड़ी अच्छी बात है, बहुत बहुत शुभकामनाएं भई हमारे तरफ से, इंटर व्यू में तुम ज़रूर सफल हो।
राजेश _शुक्रिया जीजू।
धीरे धीरे सभी मेहमानों का आना शुरू हो गया।
सत्जन सिंह _कोई पंडित जी को फोन करो भाई, सारे मेहमान आ गए। आने में और कितना समय लगेगा।
सतपाल सिंह ने पंडित जी को फोन किया।
पंडित जी ने कहा की बस कुछ ही देर में वह पहुंचने वाला है।
कुछ ही देर में पंडित जी पहुंच गया।
पंडित जी ने पूजा पाठ शुरू किया।
पूजा पाठ संपन्न होने के बाद, मुन्ने का कुंडली देखा।
पंडित जी _मुखिया जी, मुन्ने का नाम अ अक्षर से निकल रहा है। क्या नाम रखना है मुन्ने का।
सत्जन सिंह _मुन्ने का नाम रखने का अधिकार तो उसके माता पिता का है। वही बताएंगे।
सतपाल सिंह _ये क्या भईया, आप घर के बड़े है, मुन्ने का नाम रखने का अधिकार तो आप का ही है।
राजेश _हां मामा जी, छोटे मामा जी सही बोल रहे है। कोई अच्छा सा नाम सुझाइए मुन्ने का।
सत्जन सिंह _तुम लोगो की यही ईच्छा है तो आज से मुना अर्जुन के नाम से पुकारा जायेगा।
सभी लोग ताली बजाने लगे।
राजेश _वाह मामा जी बहुत अच्छा नाम सुझाया है आपने।
उसके बाद सभी मेहमानों को भोजन कराया गया।
शाम होते होते आस पास के मेहमान तो अपने अपने घर जानें लगे। दूर से आए मेहमान रात वही रुक गए।
सुबह होते ही शेष बचे मेहमान भी, अपने अपने घर के लिए निकल गए।
सुप्रिया का पति भी, एक ही दिन की छूटी लेकर आया था वह भी चला गया।
शाम को 4बजे गांव में कुश्ती प्रतियोगिता आयोजित किया गया था।
विजेता पहलवान को 2लाख रुपए इनाम रखा गया था। आस पास एवम दूर दूर से भी पहलवान कुश्ती प्रतियोगिता में भाग लेने आए थे।
सतजन सिंह खुद एक पहलवान था। गांव का मुखिया भी था।
उसी के अध्यक्षता में यह प्रतियोगिता आयोजित किया गया था।
सतपाल सिंह _भईया, लड़के लोग बुलाने आए थे। प्रतियोगिता की सारी तैयारी हो चुकी है।
सत्जन सिंह _चलो हम चलते है। घर के सभी पुरुष सदस्य, कुश्ती देखने के लिए जाने की तैयारी करने लगे।
सुप्रिया _पिता जी, मुझे भी देखनी है कुश्ती। सुनिता बुआ चलो न हम भी चलते है।
सुनिता _भईया, क्या हम भी देखने जा सकते है।
सतजन _अगर तुम लोगो की ईच्छा हो तो, जा सकती हो।
शुप्रियां, और सुनिता बच्चों को लेकर कुश्ती देखने के लिए जाने की तैयार करने लगी।
सभी लोग तैयार हो कर साथ में, प्रतियोगित स्थल पहुंचे।
प्रतियोगिता स्थल पर महिलाओं बच्चों और पुरुषो की बहुत भीड़ थी।
पास के गांव वाले मुखिया का नाम नाथू सिंह था।
वह भी अपना पहलवान लेकर आया huwa था।
पिछले बार नाथू सिंह और सत्जन सिंह के लड़को के बीच ही अंतिम मुकाबला huws था। जिसमे सत्जन सिंह के लड़के विजेता बने थे।
नाथू राम इस बार सतजन सिंह के लड़को को कुश्ती में हराकर, उसे नीचा दिखाना चाहता था। पिछले बार वह बहुत अपमानित महसूस किया था। उसका बदला लेना चाहता था। इस बार एक से बढ़ कर एक पहलवान लेकर आया huwa था। एक तो उसका बेटा था शेरा जो काफी खूंखार लग रहा था।
नाथू सिंह माइक लेते हुए कहा,,,
सत्जन सिंह इस बार मेरे लड़को को कोई हरा नही पाएगा।
विजेता मेरे लड़के ही बनेंगे।
सतजन सिंह _रहने दो सत्जन सिंह, पिछले बार भी तुमने यही कहा था। पर देखा न तुमने मेरे लड़को ने तुम्हारे पहलवानों की क्या दुर्गति की।
नाथू सिंह _सब याद है मुझे सतजन सिंह, इस बार मेरे लड़के पिछले अपमान का बदला लेने आए है। वो देखो मेरा बेटा सेरा।
अगर कोई मेरे बेटे शेरा का तुम्हरे लड़के हरा देंगे तो मैं अपना मूछ मुड़ा दूंगा।
अब तुम बोलो अगर मेरे लड़के तुम्हरे पहलवानों को हरा देंगे, तो क्या तुम अपना मूछ मुड़वाओगे।
सतजन _देखो नाथू सिंह खेल को खेल भावना की तरह लो। इसमें किसी किसी को अपमानित करने का इरादा नहीं होना चाइए।
नाथू सिंह,_सत्जन सिंह इसका मतलब तुमने अभी से हार मान लिया। हा हां हा
सत्जन सिंह डरपोक है।
सत्जन सिंह _नाथू सिंह, सतजन सिंह डरपोक नही है। ठीक है मुझे तुम्हारी शर्त मंजूर है अगर मेरे लड़के हारे तो मैं अपना मूछ मुड़वा दूंगा।
सतपाल सिंह _भईया ये आप क्या कह रहे है?
सतजन सिंह _छोटे, सामने वाले ने मुझे चैलेंज दिया है। मै पीछे नहीं हट सकता।
सतपाल सिंह _पर भइया इस बार उसके पहलवान कुछ ज्यादा ही मजबूत लग रहे है।
नाथू सिंह _अब आएगा खेल का असली मजा।
मैं तो सतजन सिंह का मूछ अपने हाथो से साफ करूंगा। नाथू सिंह के छोटे भाई ने कहा,हा हा हा,, उसके साथी लोग हसने लगे।
इसके बाद मंच पर नारियल तोड़ा गया। सतजन सिंह ने खेल प्रारंभ करने का आदेश दिया।
नाथू सिंह _ये है मेरा बेटा शेरा, सतजन सिंह अपने पहलवानों को भेजो। मेरा शेरा अकेला ही काफी है सबसे निपटने के लिए।
सतजन सिंह ने अन्य गांव से आए हुए सभी पहलवानों को पहले मौका दिया, शेरा को हराने के लिए।
शेरा बहुत ताकत वर और चालक था।
उसने सभी पहलवानों को एक एक कर चीत कर दिया और सभी की हालत खराब कर दी।
उसकी ताकत देखकर गांव वाले चिंतित होने लगें। उधर नाथू सिंह के साथी बहुत उत्साहित थे। शेरा शेरा शेरा,,,,
करके शोर मचा रहे थे।
नाथू सिंह _सतजन सिंह, शेरा ने तो अन्य गांव से आए सभी पहलवानों को हरा दिया है, अब तुम अपने पहलवानों को भेजो,, हा हा हा हा,,
सत्जन सिंह के आदेश पर, उसके लड़के एक एक करके मैदान में शेरा से भिड़ने के लिए उतरे, शेरा नेको हराने के लिए बहुत कोशिश किया। लेकिन शेरा ने सभी को चीत कर , सबकी हालत खराब कर दी।
गांव के सभी लोग दुखी हो गए।
नाथू सिंह _हा हा हां हा,,,
सतजन सिंह, और कोई बचा है क्या? तुम्हारे पहलवान, तुम्हारे पहलवान तो सब नामर्द निकले, किसी ने शेरा को हरा नही पाया।
हा हा हा हा,,,
सतजन सिंह, शर्त के मुताबिक अपनी मूंछ हमे दे दो,,,
छोटे जाओ सत्जन सिंह का मूंछ लेकर आओ।
ठीक है भईया,, हां हा हा,,,,
नाथू सिंग का छोटा भाई छुरा लेकर सतजन सिंह के पास आ गया।
हा हां हा हा, सतजन सिंह यह मूछ मुझे dede , सुनिता सुप्रिया, शेखर सतपाल सिंह को कुछ समझ नही आ रहा था , क्या करे? सतजन सिंह का ही नहीं पूरे गांव वाले अपमानित महसूस करने लगें थे।
सतजन सिंह अपनी आंखें बन्द कर लिया।
इधर नाथू सिंह का भाई छुरा लेकर, हाथ आगे बढ़ा रहा ही था की, राजेश ने हाथ रोक लिया।
राजेश _, मामा की मान सम्मान को मिट्टी में मिलाने से पहले, मुझसे निपटना होगा।
राजेश ने एक जोर का मुक्का मारा नाथु सिंह के भाई का, चकरा कर वही गिर गया।
नाथु सिंह _अरे छोर तू कौन होता है। रोकने वाला। अगर इतनी ही ताकत है तो शेरा से क्यू नही लड़ लेता।
राजेश,_, हां हां लडूंगा मैं, पर मेरे होते हुवे मामा जी के इज्जत पर आंच नहीं आने दूंगा।
नाथु सिंह _तो उतर जा मैदान पर।
सतजन सिंह _राजेश, तू नही लड़ पाएगा उस शेरा से, मत जा, कर लेने दो नाथु सिंह को अपनी ईच्छा पूरी।
राजेश _नही मामा जी मै ऐसा होने नहीं दूंगा।
इधर शेखर सुनिता और सतपाल को कुछ समझ नहीं आ रहा था। क्या करे? एक तरफ तो खानदान की इज्जत दूसरी ओर बेटा।
राजेश _मामा जी मुझे आशीर्वाद दो।
सतजन सिंह न चाहते हुवे भी राजेश की जिद पर मजबूर होकर, विजई होने का आशीर्वाद दिया।
राजेश मैदान पर कुश्ती के अखाड़े में उतर गया।
गांवों वाले खामोश थे पता नही क्या होगा।
नाथु सिंह के आदमी शेरा शेरा सोर मचा रहे थे।
सुनिता आंखें बन्द कर भगवान से प्रार्थना कर रही थी।
राजेश और शेरा का घमासान युद्ध शुरू huwa। कभी शेरा भारी पड़ता तो कभी राजेश। राजेश का खेल देखकर गांव वालों में भी जोस आ गया।
वे भी राजेश राजेश चिल्लाने लगे।
धीरे धीर शेरा थकने लगा। राजेश ने चीखतेहुए , अपना पूरा ताकत लगाया और शेरा को अपने कंधो में उठा लिया। सभी लोग आश्चर्य से देखने लगे।
राजेश ने शेरा को घुमा कर जमीन पर पटक दिया।
कुछ छन के लिए शेरा बेहोश हो गया।
शेरा हार चुका था।
सभी लोग राजेश राजेश शोर मचाने लगे।
सुप्रिया _बुआ आंखें खोलो, राजेश जीत गया।
सुनिता ने जब देखा राजेश जीत गया है उसकी आंखो में आंसू भर आए।
शेरा के हारने के बाद नाथु ने अपने दूसरे पहलवान को मैदान में उतार दिया।
बांकि पहलवानों में शेरा जैसी ताकत नहीं था। राजेश ने एक एक करके सभी पहलवानों को धूल चटवा दिए।
गांव वालों ने राजेश को कंधो में उठा लिया। चारो तरफ राजेश राजेश गूंजने लगा।
नाथु सिंह मुंह छिपाने लगा।
सतपाल ने उसे पकड़ लिया।
नाथु सिंह कहा छिप रहा है। छुरा लाओ re इसका मूछ मुड़ना है।
सतजन सिंह _छोटे छोड़ दो उसको, खेल को खेल भावना की तरह ही खेलना चाहिए। किसी की मान सम्मान को ठेस पहुंचाना खेल भावना नहीं। नाथु सिंह ने सतजन सिंह से माफी मांगा।
राजेश को मंच पर ले जाया गाया।
सत्जन सिंह ने उसे फूलों की हार पहना कर गले से लगा लिया।
सतजन सिंह _यार तूने तो कमाल कर दिया।
सुनिता की आंखों से आंसू बह रहे थे।
राजेश ने अपने पिता और छोटे मामा का पैर छूकर आशीर्वाद लिया, दोनो ने उसे गले से लगा लिया।
अंत में वह अपनी मां के पास गया।
सुनिता रो रही थी।
राजेश _मां तुम रो क्यू रही हो?
सुनिता _ये तो खुशी के आंसू है पगले। तूने अपने मामा की मान मर्यादा को बचा लिया बेटा मुझे तुम पर गर्व है। सुनिता राजेश को अपनी बाहों में भर लिया।
उसके बाद राजेश को गांव के का एक चक्कर घुमाया गया। सभी नाच रहे थे राजेश की जयकार लगा रहे थे।
इधर घर का नौकर घर आकर घटना की सारी जानकारी, सावित्री और सुमित्रा को दी।
वे पूजा की थाली सजाकर राह देखने लगे।
गांव भ्रमण के बाद, जुलूस सत्जन सिंह का घर पहुंचा।
सावित्री, सुमित्रा और प्रिया पूजा की थाली लेकर, दरवाजे पर खड़ी थी।
सावित्री ने सत्जन सिंह की आरती उतरना चाही।
सतजन सिंह _, मेरी नही राजेश की आरती पहले उतारो। योद्धा यही है।
सावित्री ने राजेश की आरती उतारी राजेश ने अपने मामी से आशिर्वाद लिया।
सभी की आरती उतारने के बाद। सतजन सिंह नेगांव वालो से हाथ जोड़कर शुक्रिया कहते हुए अपने अपने घर जानें को कहा। गांव वाले अपने अपने घर चलें गए।
इधर राजेश कुश्ती लड़ते लड़ते काफी थक चुका था।
वह लंगड़ा रहा था। उसे शरीर में काफी दर्द हो रहा था।
सत्जन सिंह राजेश को उसके कमरे में ले जाया गया।
प्रिया उसकी उपचार करने लगी।
राजेश के कपड़े उतार दिया गया। वह सिर्फ उंडर वियर में था।
गीले कपड़े से उसके पूरे शरीर को पोछा गया।
फिर उसके शरीर को गर्म सरसो के तेल से मालिश किया गया। सभी महिलाए राजेश की सेवा में लगी थी।
प्रिया ने राजेश को कुछ दर्द निवारक गोली दिया।
कुछ देर बाद राजेश बेहतर महसूस करने लगा।
रात्रि भोजन के समय सुनिता ने राजेश के कमरे में ही अपने हाथो से उसे भोजन कराया।
सतजन सिंह ने राजेश के पास जाकर पुछा?
तू ठीक तो है न मेरा शेर,
राजेश _हा मामा जी मै बिल्कुल ठीक हूं।
सतजन सिंह ने सभी को भोजन करने के लिए कहा।
सभी लोग भोजन करने लगें।
सतजन सिंह _देखो राजेश को उसके कमरे में रात में अकेला छोड़ना ठीक नहीं। तुम में से कोई एक रात में राजेश के कमरे में ही सो जाना। उसे किसी चीज की जरूरत पड़ी तो।
सुनिता _मै सो जाऊंगी, आज राजेश के कमरे में।
सतजन सिंह _हाये ठीक रहेगा।
सभी लोग रात में राजेश का हाल चाल पूछकर। अपने अपने कमरे में सोने को चले गए।
कमरे में सुनिता, प्रिया रुकी हुई थी। तभी सुमित्रा राजेश के लिए दुध लेकर आई।
प्रिया _चाची, राजेश को गाय की जगह मां की दुध की जरूरत है इससे उसके शरीर को ज्यादा लाभ होगा।
सुमित्रा _क्यू नही, दीदी इजाजत दे तो अपनी दुध पीला दू।
सुनिता _पीला दो न तो, अगर मेरा बेटा को मां की दुध से ज्यादा लाभ मिलेगा तो मैं भला मना क्यों करूंगी।
पहले दरवाज़ा बंद कर दो कोई आ न जाए।
प्रिया ने दरवाज़ा बन्द कर दिया।
सुमित्रा ने अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया। और चूचे बाहर निकाल दिया।
सुनिता _राजेश बेटा अपनी मामी की दुध पिलो इससे तुम्हे जल्दी आराम मिलेगा।
राजेश ने सुमित्रा की चुचियों को पकड़ लिया और फिर मसल मसल कर बारी बारी से चूसना शुरू कर दिया।
सुनिता _अरे प्रिया तुम्हारा भी तो दुध, आता है न। राजेश को सुमित्रा का दुध कम न पड़ जाए तू भी पिला दे अपनी दुध।
प्रिया _जी बुवा।
प्रिया ने भी अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया। राजेश अब बारी से दोनो की चूचे मसल मसल कर चूसने लगा दुध गटक गटक कर पीने लगा।
तभी प्रिया ने देखा राजेश के अंडरवियर काफी ऊपर उठ गया है, उसका लंद खड़ा हो गया है। वह मुस्कुराने लगी।
प्रिया _बुवा देखो तो राजेश का घोड़ा तो इसके घायल होने के बाद भी दौड़ने को तैयार है।
सुनिता _तुम जैसे घोड़ी की चूचे देखेगा तो होगा ही। तीनो महिलाए हसने लगी।
प्रिया _बुआ राजेश का अंडर वियर उतार दो , राजेश को दर्द कर रहा होगा।
सुनिता ने राजेश का अंडर वियर, उतार दिया उसका मोटा और लम्बा लिंग हवा में में लहराने लगा।
तीनों औरते देखकर मुस्कुराने लगी। प्रिया _बुवा, सेक्स भी दर्द निवारक होता है। आदमी सेक्स के समय अपना सारा दर्द भूल जाता है।
सेक्स से मर्द को दर्द से जल्दी राहत मिलता है। हमे राजेश को सेक्स सुख भी देना चाहिए।
सुनिता राजेश के लंद को सहलाने लगी, फिर अपने मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दी।
इधर राजेश दोनो औरतों का चूची पी रहा था।
सुनिता उसका लंद चूस रही थी।
तीनों औरते राजेश का लंद देखकर और चूची मसलने से गर्म हो चुकी थी।
सुनिता ने अपनी सारे कपड़े उतार फेकी। वह राजेश के लंद को chut में रख कर बैठ गई, फिर हल्के हल्के उछल उछल कर राजेश को सेक्स का मजा देने लगी और खुद मजा लेने लगी। कुछ देर बाद जब वह झड़ गई तो, सुमित्रा नंगी हो गई और राजेश के लंद पर उछल उछल कर उसे सेक्स सुख देने लगी और खुद मजा लेने लगी। इस तरह तीनो महिलाए बारी बारी से राजेश केलंद का सवारी कर चुदने लगी। राजेश को भी तीनो महिलाओं को चोदने में बड़ा मजा आ रहा था। वह अपना सारा दर्द भूल गया, अब वह तीनो महिलाओं को अलग अलग आसनों जमकर चोदने लगा, खुद भी मजा लेने लगा और औरतों को भी मजा देने लगा। कमरे में चारों की सिसकारी गूंज रही थी,, आह उह आह उह आह। उह। आह। उह। आह उह आह, उह,,,,,
करीब दो घंटे तक तीनो औरतों को जमकर बजाया।
उसके बाद तीनों को अपनी वीर्य से नहला दिया।
राजेश थक चुका था। वह गहरी नींद में सो गया।
सुमिता और प्रिया दोनो अपने कपड़े पहन कर अपने अपने कमरे में चली गईं। सुनिता राजेश से लिपट कर उसके बाजू में सो गया।
सुबह सुनिता जल्दी उठ कर नहाकर पूजा पाठ की और घर के काम में सहयोग करने लगी।
इधर सतजन सिंह उठ कर राजेश केकी हाल चाल पुछने उसके कमरे में गया।
सतपाल और शेखर भी वहां पहुंचा।
सतजन सिंह _, अब कैसी तबियत है यार तेरी।
राजेश _, मै बिल्कुल ठीक हूं, मामा जी। कल रात मां मामी और प्रिया दी ने बहुत अच्छी सेवा की।
सुमित्रा भी वहा खड़ी थी वह शर्मा गई।
सत्जन सिंह _यार तुमने तो कल कमाल ही कर दिया, हमारी घर की मान मर्यादा को बचा लिया।
राजेश _ये तो मेरा फर्ज था मामा जी।
सतजन सिंह _यार तू इतना ताकत वर है, फिर तुम कल सुबह मुझसे कुश्ती में कैसे हार गए।
राजेश _भला मै अपने मामा जी से कैसे जीत सकता हूं।
सभी लोग हसने लगे।
सतजन सिंह _यार तूने मेरा दिल जीत लिया। हम सबको तुम पर गर्व है।
राजेश _मामा जी मुझे आपसे कुछ चाहिए।
सतजन सिंह _अरे बोल भांजे क्या चाहिए तुम्हे, तुम्हरे लिए तो मेरी जान भी हाजिर है।
राजेश _मामा जी एक बार आप प्रिया दीदी को माफ कर दो, वो आपसे बहुत प्यार करती है।
सज्जन सिंह _, राजेश, क्या तुम्हे लगता है मैं प्रिया से प्यार नहीं करता। ऐसा एक दिन भी नही रहा होगा जब मैं प्रिया को याद नही किया होऊंगा।
शायद, अपनी झूठी शान को बचाने के चक्कर में कभी, उससे मिलने की कोशिश नही किया।
पर आज तुमने मेरी आंखें खोल दिया है। अब चाहे कोई कुछ भी कहे, मुझे किसी की परवाह नही।
सज्जन सिंह ने प्रिया को पुकारा, प्रिया वही खड़ी थी।
प्रिया _पिता जी।
सज्जन सिंह _मुझे माफ कर दो बेटी।
प्रिया _नही पिता जी माफी तो मुझे मांगनी चाइए, मैने आपक दिल दुखाया।
दोनो एक दूसरे से गले लग कर रोने लगे।