जोरू का गुलाम भाग २५६ अब मेरी बारी पृष्ठ १६०७
अपडेट पोस्टेड, कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें
अपडेट पोस्टेड, कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें
Or iska pdfmeri likhi nahi hogi , ... agar aap story ka naam bata den to behtar hoga
meri likhi holi ki story ka naam
1. Holi men phat gayi
2. Sajan chale sasuraal holi men holi me
3, nanad ne kheli holi ( sequel of Nanad ki training )
4. Phagun ke din chaar
5, let us play holi
6. lala phir aayio kehlan holi
7. Holi ke rnag
8, Joru ka gullam
9. Maja loota holi men
10. maja pahli holi ka sauraal men
and some more ...and they are the stories which were either based on Holi or had some scenes of HOLI
पति -पत्नी के रोमांस का जैसा वर्णन इस कहानी में शायद बहुत ही कम कहानियों में होगा, एकदम घर की छोटी छोटी बातेंOr iska pdf
कम्मो
![]()
मैं सोच रही थी की नीचे पड़ोसन को जल्दी निपटा के ननदिया का रस लेने ऊपर आ जाउंगी , वो उठ के जा भी रही थीं की कम्मो ने उन्हें रोक लिया , किचेन से ही हाँक लगाई "
" अरे रुका चाय ला ला रही हूँ , तनी पापड़ भी छान दूँ ,... "
मेरी कुछ समझ में नहीं आया लेकिन चाय देते समय जब कम्मो ने घडी की ओर इशारा किया तो मैं समझी ,
गुड्डी रानी को जो भांग गुझिया ठंडाई में खिलाई पिलाई गयी थी , कम से कम २०- ३० मिनट तो लगता उसका असर चढ़ने में , इसलिए ,
फिर तो मैं भी , दो बार उन्होंने जाने को कहा लेकिन मैंने रोक दिया और पूरे ४० मिनट बाद ही उन्हें जाने दिया ,
जब मैं पहुंची तो गुड्डी की आँखों में गुलाबी डोरे थे ,
![]()
वो आई पैड पर मेरी उनकी ' लीला ' , में कैसे निहुर कर उसके भइया का लील रही थी ,
इसके पहले भी कई बार मैं उसे इनके मूसल की फोटो दिखा चुकी थी , एक बार तो पूरी सफ़ेद मलाई भी इनकी सीधे इनकी पिचकारी से मेरी ननदिया के मुंह में और उस छिनार ने गटक भी लिया था ,
वो खड़ी हो गयी , लेकिन मैं अपने हाथों में रंग छुपा के लायी थी , समझ दार तो वो थी ही , बस झट से उसने अपने गोरे गोरे गालों को छुपा लिया , लेकिन मैंने सिन्दूर की तरह रंग आराम से उसकी मांग मने भर दिया ,
" चल यार न तेरे भइया हैं न मेरे भइया तो दोनों की ओर से मैं कर देती हूँ सिन्दूर दान "
![]()
" एकदम और उसके बाद सुहाग रात ,... "
पीछे से कमरे में घुसती हुयी कम्मो बोली , उसके हाथ में रंगो से भरी गुलाल की प्लेट थी।
"पहले भौजी लोगन के साथ सुहागरात मना लो , फिर अपने भइया के साथ " मैंने उसे छेड़ा ,
" एकदम पहले अपने भइया के साथ फिर भौजी लोगन के भइया लोगन के साथ "
कम्मो क्यों मौका छोड़ती।
![]()
" अरे समझती क्या हो मेरी ननद को , अपने भइया का भी मन रखेगी , हम लोगन के भइया का भी , क्यों , अच्छा ये बता इत्ते चिक्कन चिक्कन गाल , आखिर कोई न कोई तो चूमेगा , रस लेगा, तो तेरे भइया क्यों नहीं ,... अच्छा ये बता तुझे अपने भैया अच्छे लगते हैं की नहीं। "
![]()
" एकदम बहुत अच्छे हैं , " तुनक के वो बोली , ... लेकिन उसी समय हलके से एक गाल चूम के मैंने चिढ़ाया ,
" तो फिर उनको दे दो न एक चुम्मी बेचारे बहुत तरसते हैं , इस गाल पर " और ये कहते हुए मैंने एक गाल चूम लिया।
और दूसरे गाल पर कम्मो ने अपनी मोहर लगा दी।
…."और ओकरे बाद यह मालपुवा का मजा हमर भैया लेंगे ". कम्मो ने बात आगे बढ़ाई।
"गालो के बाद तुम्हारे भैया इस रसीले होंठ पर नंबर लगायेंगे , " और अबकी मेरे होंठों ने उसके होंठों को दबोच लिया और साथ में मेरी जीभ उस कच्ची कली के होंठों के अंदर ,... "
![]()
और ऊपर से कम्मो और उसे उकसा रही थी , ... " अरे ननद रानी कउनो तो आखिर रस लेगा ही , तो आखिर हमरे देवर में कौन कमी है , उन्ही को दे दो न जोबन का दान , "
भांग का सुरूर उस टीनेजर पर चढ़ रहा था , और भांग में सबसे मजेदार बात ये होती थी की मस्ती चढ़ने के साथ साथ , मन जिधर मुड़ जाता है बस वही मन करने लगता है , मैं मान गयी कम्मो को ,
और अब नंबर था रंग गुलाल का , इस होली में सब की रगड़ाई हुयी थी सिवाय गुड्डी रानी के , मोहल्ले की ननदें , गुड्डी की सहेलिया, मेरे देवर कम्मो ने सबके कपडे उतारे थे तो अब ये क्यों बचती , ...
लेकिन जैसे मैं प्लेट में से गुलाल उठाने के लिए झुकी वो जोर से चीखी , ...
नहीं भाभी कपड़ा खराब हो जाएगा नयी ड्रेस है एक,दम
" तो कपड़ा उतार दो न , सही तो है "
कम्मो को तो और मौका मिल गया चिढ़ाने का , गुड्डी मुझे रोक रही थी , पर कम्मो ने एक झटके में उसके दुप्पट्टे की तरह स्टोल को खींच लिया ,
और जब तक वो समझे , उसके दोनों हाथ कम्मो के हाथ में , पीठ के पीछे और कम्मो ने जबरदस्त गाँठ बाँध दी थी , किसी हालत में छुड़ाने से छूटती नहीं।गुड्डी के जोबन , जबरदस्त , टॉप फाड़ते ,... अब मैं समझी बेचारी ने स्टोल दुपट्टे की तरह क्यों ओढ़ रखा था , होने भंवरों से नए आते उरोजों को छुपाने के लिए ,
शायद आप इसे किसी और कहानी से जोड़ के देख रहे हैं जो बहुत सम्भव है, क्योंकि इस से मिलते जुलते नाम वाली मेरी कई कहानिया हैंAapki ye kahani sayad pehle padhi hai.sayad 2014 ke ass pass kisi dusre forum pe.
इलसिए तो कह रही हूँ शुरू से पढ़िए सब पता चल जाएगाइसके पहले भी कई बार मैं उसे इनके मूसल की फोटो दिखा चुकी थी , एक बार तो पूरी सफ़ेद मलाई भी इनकी सीधे इनकी पिचकारी से मेरी ननदिया के मुंह में और उस छिनार ने गटक भी लिया था ,
Ye kab hua
जवाब उसने दिया जिसके हाथ में उसकी जवानी और जोबन का मुस्तकबिल था ,इंटरवल
![]()
एक बार फिर उसने पलंग से उतरने की कोशिश की तो जोर से चिल्ख उठी , मैंने सहारा दिया , मैं समझ रही थी उसकी हड़बड़ी ,
पहले उसने मजबूरी में जैसे अपने भइया की ओर देखा , जैसे उसका जाने का मन न कर रहा हो पर बहुत मज़बूरी हो , ... फिर मेरी ओर ,
अबकी मैंने उसे मेसेज नहीं दिखाया , बल्कि उसके घर फोन लगाया , ये बताते हुए की मैंने अपनी छोटी ननद को किडनैप कर लिया है और अब कल दिन में ही वापस करुँगी , असल में इस बारे में मेसेज पहले ही मैंने दे दिया था उसके यहाँ से ग्रीन सिग्नल भी मिल गया था ,
और हँसते हुए उधर से जवाब आया तेरी ननद है जो चाहे करो , ...
गुड्डी के चेहरे पर जैसे हजार वॉट का बल्ब जल गया हो , और उससे ज्यादा उनके चेहरे पर , ... मैंने अब मेसेज खोल कर अपनी ननद के आगे कर दिया ,
मुस्कराते हुए उसने मुझसे पूछा , मतलब
![]()
जवाब उसने दिया जिसके हाथ में उसकी जवानी और जोबन का मुस्तकबिल था ,
कम्मो ने ,
" मतलब ननद रानी ये इंटरवल है , ये सिर्फ ट्रेलर था फिल्म अभी बाकी है। "
![]()
मैंने अपनी ननद को गले लगा लिया और उसकी ओर से जवाब दिया ,
" मेरी ननद को समझती क्या हैं आप , डरती क्या है आप के देवर से ,... "
![]()
लेकिन तबतक जोर का हूटर बजा , और जो जो उसका मतलब नहीं समझते थे , कम्मो और गुड्डी रानी , जोर से उछल पड़े ,
लेकिन मैं और ये उसका मतलब समझते थे , ये दौड़ कर दीवाल पर टंगी अपनी शर्ट और टाई की ओर हूटर का मतलब था उनकी कांफ्रेंस कॉल , कई सात समुंदर पार देशो में यहाँ जब शाम ढलती है तो आफिस खुल जातें हैं , कहीं सुबह हो जाती है , ... और ये अलार्म उन्होंने सेट कर रखा था २० मिनट की वार्निंग का ,
मैंने और मुझसे पहले इनकी छोटी साली ने और सास ने कसम धरा रखी थी , जब होली में ये ससुराल में रहेंगे तो कोयो फोन वोन नहीं , मेरी माँ अपनी समधन की रगड़ाई का मौका क्यों छोड़तीं , बोलीं , " ई फ़ोन ,वोन अपनी महतारी के भोंसड़ी में छोड़ के आना समझे "
तो अपनी कम्पनी और बाकी सभी लोगों से उन दस दिनों के लिए तो उन्होंने पूरी छुट्टी ले रखी थी , पर यहाँ पर तो ,... हाँ बस २० मिनट की वार्निंग हम लोगों को सेट होने के लिए , ... कांफ्रेंस काल में मैं भी उन्हें छोड़ कर , कमरे में कोई आ जा नहीं सकता था , कमरे के एक कोने में टेबल और लैपटॉप उन्होंने सेट कर रखा था ,
तो बस मैंने कम्मो और ननद को नीचे चलने के लिए हांका , कम से कम दो घंटे की छुट्टी ,
गुड्डी ने बस पहला कदम रखा तो दर्द से दुहरी , अपनी जांघ के के पास कस के उसने पकड़ लिया , ... मुस्कराते हुए मैंने और कम्मो ने उसे दोनों ओर से सहारा दिया ,
मुझे अपनी सुहाग रात के बाद की सुबह आ गयी , जेठानी ने मुझे रात के नौ बजे इनके कमरे में छोड़ा था और साफ़ बोल के गयीं थी , सुबह नौ बजे तक के लिए , और ठीक नौ बजे मेरी दो नटखट ननदें आ गयीं थी , नीचे ले जाने के लिए , .... रात भर मूसल चला था , हलाकि मैंने बहुत सम्हला , पर हलकी सी चिलख , 'वहां ' उठ ही गयी , बस झट से मेरी दोनों ननदों ने दोनों ओर से सहारा दिया और लगी छेड़ने ,
![]()
बस जिस तरह से मैंने और कम्मो ने अपनी ननद को सहारा दिया था ,
लेकिन सीढ़ी पर से उतरते समय , गुड्डी के ' वहां ' जोर से चिलख उठी , ... और फिर मैंने और कम्मो ने ,
ननदें छोड़ती हैं क्या सुहागरात के बाद भौजाई को चिढ़ाने का कोई मौका जो मैं छोड़ती अपनी ननद को छेड़ने का ,
दर्द नहीं भी हो तो भी ननदें ये पूछने का मौका नहीं छोड़तीं , ' भाभी बहुत दर्द हुआ क्या भइया के साथ '
बेचारी नयी नवेली दुल्हन तो शर्मा के रह जाती है पर कोई जेठानी अपनी देवरानी की ओर से कुँवारी ननदों की रगड़ाई जरूर करने में लग जातीं ,
" अरे बोला देतीं हु अपने भाई को , तुम लोग भी ले लो दर्द का मजा , नहीं तो चार दिन बाद चौथी के के नेकी भौजी के भैया लोग आयंगे , ले लेना उनके साथ दर्द का मजा "
गुड्डी ने सीढ़ी से जैसे ही उतरना शुरू किया , बहुत जोर से चिलख उठी उसकी जाँघों के बीच ,
बेचारी ने जिस तरह से मेरी ओर देखा , लग रहा था साफ़ कह रही हो भाभी अब एक सीढ़ी नहीं उतर पाउंगी , बहुत दर्द हो रहा है ,
![]()
Wo to mouth to mouth thaइलसिए तो कह रही हूँ शुरू से पढ़िए सब पता चल जाएगा