• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Incest मैं पागल अपने बेटे के लिए

Slave (ग़ुलाम ) किस किस को बनाऊ

  • मेरी माँ को

  • बहनों को

  • सूरज की माँ को विथ फैमली

  • मसियो को

  • मामी को


Results are only viewable after voting.

Shivakalakar

Avatar
278
1,390
124
.
Aaj main ek story likhne ja raha hoon. Maine aaj tak bas kahaniyan padhi hain, kabhi khud nahi likhi. Main is forum pe kai saal se stories padh raha hoon. Mera man hua ki main bhi ek story likhoon. Main phone se type karta hoon toh updates regular nahi de paunga shayad. Mujhe incest stories padhne mein maza aata hai. Haan adultery bhi padhta hoon lekin usme hero ek hi hona chahiye, chudai ki had paar kar do. Mujhe ganda sex bahut pasand hai, bahut zyada ganda – jaise apna peshab pilana, muh mein thookna, mahilaon se apni gaand chatwana, naak mein jeebh daalna. Mujhe foot fetish bhi hai. Is story mein dukh-dard, emotion, humiliation, incest, bepanah pyar jo haden paar kar de – sab milega. Hero ek hi hoga. Yeh reality se arabon-kharabon door hai 👀


Toh chaliye shuru karte hain.
 
Last edited:

Bad boy12

Member
148
74
28
Update -1

कमरे में एक नौजवान लड़का पैर पसारे सो रहा है , सुबह के 7 बज चुके है खिड़की से धूप की किरने होती हुई लड़के के माथे को छू रही है , तभी एक बेहद खूबसूरत सी लड़की उस खिड़की के आगे खड़ी हो जाती है , बड़े ही प्यार से उस नौजवान का प्यारा चहेरा निहरने लगती है ( हाय मेरा बाबू कितनी गहरी नींद में सोया हुआ है , किसी कलमुही की नजर ना लगे । मेरा छोटा सा बेबी)

और वो उसके सिरहाने पास बैठ उसके माथे को प्यार से सहलाती है बाबू उठो सुबह हो गई मेरा बच्चा रात को पढ़ते पढ़ते ही सो गए क्या उठो उठो (यही है हमारा हीरो शिवम और ये लड़की है हमारे हीरो की बडी बहन पूजा

लड़का जब धीमे से आँखे खोलते है उबासी लेते हुए तो सामने एक प्यारी सी परी का चहेरा पता है अँगड़ाई लेते हुए गुड मॉर्निंग दीदी

दीदी -गुड मॉर्निंग बाबू , ऐसे रात-रात भर ना पढ़ा करो मैंने तुमसे कितनी दफ़ा बोला है फेर डार्क सर्कल्स हो जाएँगे फेर घूमना बैटमैन बन के 😁

हीरो को मैं लिखूँगा-

मैं - अरे दीदी आप भी 😅ना मैं बस अपने फ़ैमिली के लिए पढ़ रहा हूँ मुझे जल्द से जल्द जॉब लेनी है और घर को संभालना है ,पापा का आपको पता ही 😒

दीदी- हम्म तो अब मेरा बाबू बड़ा हो गया है -हा, अरे में तो कमा ही रही हूँ ना , पापा का भरोसा तो मुझे भी नहीं है, सारा दिन दारू के नशे में धुत रहते है ,थोड़ा बहुत कमाते भी है तो दारू और पता नहीं कहाँ उड़ा देते है

बेटू तुम चिंता ना करो मैं हूँ ना बेबी

मैं - हा दीदी

दीदी - 😘इधर गाल में कुछ लगा है जरा इधर करो तो ,और मेरे गाल में गीली पप्पी 💋 कर दी उनका थूक मेरे गाल को गिला कर गया

मैं -दीदी आप भी ना मैं छोटा बच्चा हूँ क्या 🥲

दीदी - तुम मेरे लिए छोटे बच्चे ही रहोगे समझे ना ,मेरा बच्चा और मुझे गले लगा लिया

(उनके बदन की ख़ुसूबू क्या बताऊ उनके बूब्स मेरे छाती से टच होने लगे मेरे लंड में झुरझुरी सी हुई मैं अपनी बहन या परिवार के किसी भी औरत के बारे में कभी भी ग़लत नजर से नहीं देखा है , मैं उनके लिए एक फ़रिस्ता एक मासूम भोला ज़िम्मेदार इंसान हूँ , परिवार की हर लड़की मुझे पाना चाहती है अकेले में मेरा नाम लेके मुझे इमेजिन कर चुत रगड़ती है ये अभी मुझे पता नहीं है लेकिन मुझे जल्द पता लगने वाला है की मेरे घर की औरतो और लड़कियों में किस कदर हवस भरी है मेरे ख़ातिर )

दीदी के लिए कई रिश्ते आए है लेकिन ना जाने क्यों हर बार दीदी कभी कोई या कभी कोई बहाना बना के उनको रिजेक्ट करती आई हैं ।

-

मैं दीदी के गले लगे दीदी को फील कर रहा था आह दीदी कितनी मुलायम चुच्चिया हाय दीदी की हाथ पैर बहुत मुलायम थे वो अपने पैरो में एक पायल जरूर पहनती है नेल पॉलिश रेड कलर की आय हाय मैं तो दीवाना हूँ अपनी घर की औरतों के पैरो का


IMG-2603
दीदी के पैर



वो अपने हाथो और पैरों का बड़ा ख्याल रखा करती है और दिन में दो बारी नहाती है (लेकिन वो किस हद तक घिनौने पन का सेक्स चाहती है ये मुझे बाद में पता लगा 😁)

दीदी - जल्दी से उठ जा नहीं अभी आती ही होगी तेरी नन्ही बंदरिया चल एक बात बता ये बंदरिया तेरे रूम में सुबह सुबह घुस जाती है और 1 घंटे तक तेरे रूम से क्यों नहीं निकलती वो भी इतनी सुबह सुबह मैं जब जब उससे पूछती हूँ तो वो टाल देती है कहती है भाई को जगाने में टाइम लगता है ,अब तू ही बता हम्म चल चल बता अब

मंजरा क्या है तुम दोनों का

मैं - अरे दीदी वो ना मेरे रूम में मेरे छाती में आके लेट जाती है और बोलती है की एक घंटे तक हिलना नहीं और मेरे फेस को चूमती रहती है

दीदी - ये क्या बात हुई mm (इस शिवानी की बच्ची को सबक सिखाना होगा मेरे माल में डाका डालती है कमीनी मैं बताती हूँ इस साली को छोटी बहन है तो क्या हुआ मेरे माल पे डाका डालेगी मैं किसी को नहीं छोड़ने वाली घर का कोई भी हो )

मैं - दीदी मैं चला फ्रेश होने (दीदी किचन में चली गई मेरे लिए। नस्ता बनाने

(वैसे बता दु मेरे घर में मुझे चूमना आम बात है )

मैं सीधा टट्टी करने बैठ गया मैं सोचने लगा काश कोई लड़की मेरे इशारों पे चले मुझे अपना मालिक माने मैं जो कहु वो करे तो कैसा होगा मैं अपने खयालों में खो गया था )

तभी मेरे कमरे में एंट्री होती है बंदरिया की यानी

मेरी छोटी बहन शिवानी की

मैं टट्टी कर रहा था तभी वो आई और मेरे लेट्रिन का गेट खटकाने लगी भैयाआ गेट खोलो

मैं - अरे पागल है क्या मैं ..मैं फ्रेश हो रहा हूँ

शिवानी - अरे आप खोलो ना मुझे कुछ नहीं पता मुझे आप सुबह बेड पे चाहिए बस

मैं - गुड़िया समझ मेरी बात को

शिवानी - मैंने नहीं सुनाना कुछ भी खोलो- खोलो गेट खोलो

मैं - जल्दी जल्दी फ्रेश हुआ और जैसे ही गेट खोला वो मेरे ऊपर चढ़ बैठी एक बंदरिया माफिक ऐसे चिपक गई जैसे बंदर का बच्चा चिपकता है

अरे मेरी लड़ो क्या हुआ

शिवानी - भैया प्ल्ज़ प्ल्ज़ चलो ना बेड में मुझे सुकून नहीं मिलता जब तक आपके उपर कुछ पाल ना बिता लू चलो ना

मैं - अरे बाबा चल रहा हूँ गधेड़ी

शिवानी - जाओ मैं आपसे बात नहीं करती आपने मुझे गधेड़ी कैसे कहा क्या मैं आपको गधेड़ी लगती हूँ 🥺

मैं - अरे मेरा बच्चा तू तो नाराज हो गया मेरा प्यारा सा बच्चा है तू

शिवानी - हीहीही 😁

वो मेरे से अभी तक चिपकी मेरे गोद में चढ़ी हुई थी मेरा लंड धीरे-धीरे उपर की ओर फन उठाने लगा था

सायद उसे भी ये फील हुआ लेकिन उसने इग्नोर किया और सीधा मेरे होटो में हमला कर दिया अपने प्यारे प्यारे गुलाबी मखमली लिप्स से अच्छा मैं ये बता दु की मेरे जितने भी घर की औरते है वो बड़ा साफ़ सफ़ाई का ख्याल रखती है

अपने बॉडी को मेंटेन रखती है हम ना ही गरीब है और ना ही जायदा खूब अमीर, हा इतना है की अच्छी लाइफ जी रहे कुछ लेने से पहले सोचना नहीं पडता क्युकी मम्मी भी कमाती है और दीदी भी और पापा , पापा का क्या हटाओ जो है वो है उनकी बात बाद में करेंगे

मैं - मैं उसको लेके बेड में जा गिरा वो मेरे उपर नागिन की तरह मेरे उपर चढ़ गई

शिवानी - भैया क्या आपको पता है मैं आपसे कितना कितना कितना प्यार करती हूँ

मैं - और में भी तो तेरे से बहुत जायदा प्यार करता हूँ गुड़िया

शिवानी - आप समझ नहीं रहे भैया मैं मैं क्या कहना चाह रही (भैया मैं आपको कैसे बताऊ की मैं आपसे कितना प्यार करती हूँ आपको कुछ होने से पहले मुझे हो जाये भाइया अगर आप मुझसे दूर हुए तो में ख़ुद को ख़त्म कर लूँगी )

मैं - गुड़िया तू क्या कहना चाह रही बोल मुझे ,समझा तो एक बारी , ना मैं समझ पाऊँ तो कहियो

शिवानी - वो छोड़ो भैया मुझे अपने बाहो में कस लो हम्म ऐसे ही एक दम टाइटली और कस के हा

मैं - अब ठीक है गुड़िया वो बोली अभी नहीं

तो मैं बोला फिर उसने कहा अपना फेस पहले मेरी तरफ़ करो

हम्म कर लिया ले उसने मेरे मेरे मुंह से मुंह जोड़ दिया , अरे गुड़िया ये क्या मैंने अपना फेस उसकी ओर से साइड में कर लिया गुड़िया अभी मैंने ब्रश नहीं किया

शिवानी - मैंने आपसे बोला क्या की करो ब्रश तब ही मैं किस करूँगी भैया आप जैसे भी हो मेरे हो अब मुंह खोलो जल्दी जल्दी

अरे गुड़िया अरे रुक तो उसने जबरजस्ती मेरा मुंह सामने अपनी तरफ़ घुमा लिया ऑर चूमने चूसने लगी उसका शरीर मेरे उपर था उसकी चूत मेरे लंड से टच हो रही थी (वैसे मैंने अपने लंड के बारे में नहीं बताया मेरा लंड 9.7 इंच का घटीले नस वाला है मैंने बचपन में एक बार जंगल की तरफ़ खेलते-खेलते चला गया वहाँ पे एक जड़ीबूटी मैंने अनजाने में खा ली तब से ही मेरे लंड में गठे पड गई)

उसके बूब्स जो अभी छोटे थे वो मेरे छाती में टच हो रहे थे

क्या फीलिंग थी ये वो मेरे मुंह में अपने लिप्स को डालने लगी मैंने भी अपना मुंह खोल दिया वो मेरे मुंह में इधर उधर जीभ घुमाने लगी मेरे दातो में अपने जीभ 👅 घुमा रही जैसे वो अपने ही जीभ से मेरे मुंह में कुल्ला कर देगी मेरे दात अपने जीभ से ही चमका देगी

मैं - वो इतनी वाइल्ड तरीके से किस कर रही थी क्या बताऊ कई बार तो उसने चूसते चूसते

मेंरा ख़ून भी निकाला है ख़ून 🩸 वो चाट जाती थी बोलती थी की आपका खून वेस्ट नहीं होने दे सकती मैंने उसे थोड़ा हटा के बोला गुड़िया तू अपने दातो से ही मेरा कुल्ला करवा देगी क्या

शिवानी - हा भैया आप रोज कुल्ला क्यों करते हो आप ना किया करो मैं हूँ ना आपको कुल्ला करने के लिए हीहीही 😋

मैं - तू कितनी गंदी बच्ची हो गई है गुड़िया

शिवानी - भैया मुझे आपका कुछ भी गंदा नहीं लगता मैं तो आपको खा ही जाऊ

मैं - गुड़िया ये तू मेरे साथ रोज क्यों करती है अपने बॉयफ्रेंड के साथ करियो

शिवानी - वो तुरंत मेरे छाती से और उठ के बैठ गई और चहरे से ऐसा लग रहा था की लाल मिर्ची 🌶️ खाई हो

मैं - बच्चा मेरा क्या हुआ कुछ गलत कह दिया क्या

शिवानी - …

मैं - अरे बोल ना गुड़िया क्या हुआ देख तू कुछ भी कर चाहे तो तो मार ले मुझे तू बात नहीं करेगी तो मैं अपनी जाअनन..

उसने अपने हाथ मेरे मुंह रख दिए

शिवानी - भैइया आपकी ऐसा बोलने की हिम्मत भी कैसे हुई हा , मैं मार जाऊ आपके मरने से पहले , भइया अपने अगर फेर कभी ऐसा बोला ना मेरा मारा हुआ मुंह देखोगे आप देख लेना और उसने कुछ नहीं बोला सीधा मेरे रूम से निकल कर अपने रूम में भाग गई

मैं -इधर मैं अपनी सोच में की क्या कर दिया मैंने ऐसा जो इसे इतना बुरा लग गया इसको

चलो मैं भी अब ब्रश कर लू अरे छोडो अब गुड़िया ने करवा तो दिया है 👅😋

मैं तयार होने लगा कॉलेज के लिए मैं कॉलेज कम ही जाता हूँ लेकिन आज असाइनमेंट की लास्ट डेट है इसलिए जा रहा हूँ मैंने सोचा जाने से पहले सोच की दोस्त को कॉल कर लेता हूँ

सूरज मेरा दोस्त जो बचपन से ही मेरे साथ रहा है लेकिन इसके शोक कुछ अलग है इसे गांड मरवाने में मजा अता है

ये अमीर परिवार से है इसके घर में पैसे की कोई कमी नहीं क्युकी बाप की फैक्ट्री है इसके ,इसका माँ बहुत सुंदर है मेरे ही माँ की तरह इसकी माँ मुझे छेड़ती रहती है इसके घर में माँ बहन और इसकी बुआ जिसकी शादी हुई थी लेकिन विधवा हो गई पति की एक्सीडेंट में डेथ हो गई परिवार वालो ने इसे मनहूस मान के निकाल दिया तब से अपने घर यानी सूरज के घर में है अब

माँ -सुमन

पिता - महेता लाल

बहन -ख़ुश्बू

बेटा -सूरज

बुआ - सुलोचना

मैंने सूरज को कॉल लगाई उसने उठाया

मैं - हा bsdk कहा गांड मारा रहा

सुरज - भाई मैं अभी में बेड में लेटा हुआ हूँ

मैं - गांडू उठ और और कॉलेज आ आज लास्ट डेट है असाइनमेंट की

सूरज- अरे मोरी मैया मेरा तो हुआ ही नहीं असाइनमेंट

मैं - तू गांड ही मरवाता रहियो मैंने मेरा बना लिया है लेकिन अर्चना ने बोला था की आपका असाइनमेंट में कर दूँगी तो उसने कर दिया तो वो वाला तू ले लिए अपना नाम डाल लियो

सूरज - सुक्रिया जहापनह

मैं - कोई ना तू ही तो है इकलौता मेरा गांडू दोस्त

सूरज- 😁😁

मैं कॉल कट किया और तयार होके नीचे आया वहाँ पे मेरा ही इंतज़ार हो रहा था मेरे बिना कोई खाना नहीं खाता है , मम्मी किसी को खाने दे तब ना मैं आ जाऊ तब ही कहने देती है किसिको , मैं डाइनिंग टेबल पर बैठा था की मम्मी अपनी टेबल से उठ गई और मेरे बगल में खड़ी हो गई और मुझे परोसने लगी मैंने पूछा गुड़िया कहाँ है दीदी बोली होगी अपने कमरे में तुम नास्ता करो वो कर लेगी वैसे भी स्कूल जाती नहीं (घर से ही पढ़ती है ) ज़्यदा ध्यान नहीं दिया नास्ता करने लगा तभी दीदी मुझे खाना अपने हाथों से खिलाने लगी और एक निवाला मम्मी ने भी बना के मेरे मुंह में डाल दिया मैं थोड़ा चबा गया लेकिन जैसे मुझे अहसास हुआ कि ये तो मम्मी ने खिलाया है

मैंने वही पे वो निवाला थूक दिया -

मैंने बहाना बना दिया की कंकड़ आ गया था लेकिन मम्मी समझ गायी थी और मम्मी की आँखो से आँसू बह निकले जो मेरे कंधे को भिगो दिया मैंने ये नोटिस कर लिया था ।सायद और किसी ने नहीं पापा तो वैसे भी हमेशा नसे में रहते है दीदी अपने नास्ता कर रही थी गुड़िया अपने रूम होगी बाकी और लोग अच्छा मैं बता दु की हम यहाँ शहर में रहते है और सब लोग गाव में रहते है यहाँ पर केवल मैं मम्मी पापा गुड़िया दीदी ही रहते है

मैं नस्ता कर कॉलेज के लिए निकल गया उधर घर में दो लोगो के आँखो से आँसू बह रहे थे एक गुड़िया जो की अपने रूम में लेटी अशू बहा रही थी एक मम्मी जो वही डाइनिंग टेबल के पास खड़ी थी दीदी ऑफिस निकल गई मम्मी ऑफिस नहीं जाती उन्होंने लीव ले रखी है पापा तो नसे में रहते है वो निकल गए बाहर




IMG-2606
शिवानी - अपने रूम में लेटे हुए आंसू बहा रही भैया आप क्यों नहीं समझते है मैं कैसे किसी को बॉयफ्रेंड बना लू मेरे जिस्म में हक सिर्फ आपका है भैया सिर्फ आपका अगर किसी ने इस जिस्म को छुआ भी तो , तो उसे जान से मार दूँगी और अपने आप को भी ख़त्म कर लूँगा क्युकी ये जिसमे गंदा हो जाएगा ना भैया मैं मेरे स्वामी को ऐसे गंदा जिस्म परोसूँगी क्या नहीं नहीं ये कभी नहीं होगा

IMG-2605
(शिवानी का कमरा पूरा मेरे तसवीरो से भरा हुआ है हर जगह मेरी जान मेरी जान लिखा हुआ है ख़ून से ,वो फिर अपने मुंह तकिया में दबा के रोने लगती है )
इधर मम्मी भी रो रही थी मम्मी वही डाइनिंग टेबल के पास खड़ी उस थूके हुए निवाले को घूर रही थी और आँसू बहा रही थी


IMG-2607
मम्मी
Nice story bro isme hero ek hi rakhna bro but hero ma se naraz kyu hai 🤔🤔
 

Bad boy12

Member
148
74
28
Update -3

अभी चलते है अपने हीरो की तरफ़ -
मैं अपने कॉलेज जाने के लिए निकल चुका था
सूरज के पास कार थी, उसने मुझे उठा लिया। रास्ते भर वही पुराने टॉपिक—कॉलेज, प्रोफेसर, और “आज कौन किसकी टाँग खींचेगा”।

कॉलेज गेट पर पहुँचते ही पूरी गैंग मिल गई—रिंकी, सीमा, अर्चना और दीपक।

मैं कार से उतरा ही था कि अर्चना सीधा गले लग गई।


अर्चना:“अरे वाह! बड़े दिनों बाद दर्शन दिए हैं जनाब ने।”



मैं:“यार मन ही नहीं करता आने का। घर बैठ के PW से पढ़ लेता हूँ, सब्सक्रिप्शन ले रखा है।”

सीमा (सीरियस मोड ऑन):“आपने असाइनमेंट पूरा कर लिया?”



अर्चना (फट से):“अरे हाँ! मैंने आपका असाइनमेंट पूरा कर दिया है।” 😳



मैं:“थैंक्स यार, लेकिन मैंने अपना बना लिया है। ये वाला सूरज को दे देना।”

अर्चना (सूरज को घूरते हुए):“हाँ हाँ, क्यों नहीं… दे देती हूँ इस बंदर को।” 😒
“लेकिन असाइनमेंट नहीं—”थप्पड़ 🙂↔️
सूरज:“अरे बस कर ना, नकचड़ी!”

(नोट: सूरज अर्चना को पसंद करता है,और अर्चना… मुझे 😌)
अर्चना:“अभी बताऊँ?” 😡

मैं:“अरे अरे! शांति रखो। कभी-कभी कॉलेज आता हूँ, और तुम लोग टॉम-एंड-जेरी बने रहते हो।”
इधर रिंकी और दीपक अपने ही ड्रामे में थे। BF-GF कम, सास-बहू ज़्यादा लगते थे।

सीमा:“ओय! तुम दोनों फिर लड़ लिए? चलो, क्लास का टाइम हो गया।”

रिंकी (गुस्से में):“इसे समझाओ यार! मैंने बोला था वो वाली लिपस्टिक लाना, ये ये वाली ले आया।”

दीपक (मासूम बनते हुए):“यार 19-20 का ही तो फर्क है।”

रिंकी:“अच्छा? आ जा, मैं बताती हूँ 19-20 का फर्क!”

मैं:“छोड़ यार दीपक, आज नहीं तो कल चैन से जी पाएगा।”

सूरज (खुश होते हुए):“आज इनाया मैम की क्लास है, मज़ा आएगा।”

अर्चना:“चुप कर, ज़्यादा एक्साइटेड मत हो।”
सूरज:“और तू ज़्यादा रानी मत बन।”

अर्चना:“🙄 हट, आगे से!”

हम सब क्लास में जाकर बैठ गए। बकचोदी फुल ऑन थी।
मैं बेंच पर चढ़ा हुआ ज्ञान दे रहा था—फ्री का मोटिवेशनल स्पीकर।
तभी अचानक पूरी क्लास डेड साइलेंट।
मैंने सोचा—
ये सब ऐसे अचानक संस्कारी कैसे हो गए?

मैं:“क्या हुआ बे? अचानक सन्नाटा क्यों?”

सूरज (धीमे से):“पीछे देख… इनाया मैम खड़ी हैं।”
मैं (अंदर से):“अब तो गया…” 😐
इनाया:“तुम ऊपर क्यों चढ़े हुए हो?”
मैं:“मैम वो… मैं… वो…”

इनाया:“कोई ‘वो-वो’ नहीं। नीचे उतरो और अपनी सीट पर बैठो।”

पूरी क्लास हँसी रोक के बैठी थी।

सीट अरेंजमेंट कुछ यूँ था—आगे रिंकी-दीपक, उसके पीछे अर्चना-सीमा, और सबसे पीछे मैं और सूरज।

हम दोनों पक्के बैक-बेंचर थे,लेकिन मज़े की बात ये थी कि मैं अक्सर फर्स्ट आ जाता था।

हमारा सेंटर कहीं जाता नहीं था,
थोड़ी-बहुत “मैनेजमेंट” हो ही जाती थी।

और सूरज?
मेरी कॉपी से चिपक कर ऐसे पास होता था जैसे उसका रिज़ल्ट मेरी मेहनत कासाइड-इफेक्ट हो। 😎

अब थोड़ा मेमके बारे में जान लेते है इनका नाम इनाया है इनके हसबैंड दुबई में रहते है साल में 1 महीने के लिए आते है इनका अभी तक कोई बच्चा नहीं है

आगे —
Nice
 

paand

Member
329
444
63
Update -1

कमरे में एक नौजवान लड़का पैर पसारे सो रहा है , सुबह के 7 बज चुके है खिड़की से धूप की किरने होती हुई लड़के के माथे को छू रही है , तभी एक बेहद खूबसूरत सी लड़की उस खिड़की के आगे खड़ी हो जाती है , बड़े ही प्यार से उस नौजवान का प्यारा चहेरा निहरने लगती है ( हाय मेरा बाबू कितनी गहरी नींद में सोया हुआ है , किसी कलमुही की नजर ना लगे । मेरा छोटा सा बेबी)

और वो उसके सिरहाने पास बैठ उसके माथे को प्यार से सहलाती है बाबू उठो सुबह हो गई मेरा बच्चा रात को पढ़ते पढ़ते ही सो गए क्या उठो उठो (यही है हमारा हीरो शिवम और ये लड़की है हमारे हीरो की बडी बहन पूजा

लड़का जब धीमे से आँखे खोलते है उबासी लेते हुए तो सामने एक प्यारी सी परी का चहेरा पता है अँगड़ाई लेते हुए गुड मॉर्निंग दीदी

दीदी -गुड मॉर्निंग बाबू , ऐसे रात-रात भर ना पढ़ा करो मैंने तुमसे कितनी दफ़ा बोला है फेर डार्क सर्कल्स हो जाएँगे फेर घूमना बैटमैन बन के 😁

हीरो को मैं लिखूँगा-

मैं - अरे दीदी आप भी 😅ना मैं बस अपने फ़ैमिली के लिए पढ़ रहा हूँ मुझे जल्द से जल्द जॉब लेनी है और घर को संभालना है ,पापा का आपको पता ही 😒

दीदी- हम्म तो अब मेरा बाबू बड़ा हो गया है -हा, अरे में तो कमा ही रही हूँ ना , पापा का भरोसा तो मुझे भी नहीं है, सारा दिन दारू के नशे में धुत रहते है ,थोड़ा बहुत कमाते भी है तो दारू और पता नहीं कहाँ उड़ा देते है

बेटू तुम चिंता ना करो मैं हूँ ना बेबी

मैं - हा दीदी

दीदी - 😘इधर गाल में कुछ लगा है जरा इधर करो तो ,और मेरे गाल में गीली पप्पी 💋 कर दी उनका थूक मेरे गाल को गिला कर गया

मैं -दीदी आप भी ना मैं छोटा बच्चा हूँ क्या 🥲

दीदी - तुम मेरे लिए छोटे बच्चे ही रहोगे समझे ना ,मेरा बच्चा और मुझे गले लगा लिया

(उनके बदन की ख़ुसूबू क्या बताऊ उनके बूब्स मेरे छाती से टच होने लगे मेरे लंड में झुरझुरी सी हुई मैं अपनी बहन या परिवार के किसी भी औरत के बारे में कभी भी ग़लत नजर से नहीं देखा है , मैं उनके लिए एक फ़रिस्ता एक मासूम भोला ज़िम्मेदार इंसान हूँ , परिवार की हर लड़की मुझे पाना चाहती है अकेले में मेरा नाम लेके मुझे इमेजिन कर चुत रगड़ती है ये अभी मुझे पता नहीं है लेकिन मुझे जल्द पता लगने वाला है की मेरे घर की औरतो और लड़कियों में किस कदर हवस भरी है मेरे ख़ातिर )

दीदी के लिए कई रिश्ते आए है लेकिन ना जाने क्यों हर बार दीदी कभी कोई या कभी कोई बहाना बना के उनको रिजेक्ट करती आई हैं ।

-

मैं दीदी के गले लगे दीदी को फील कर रहा था आह दीदी कितनी मुलायम चुच्चिया हाय दीदी की हाथ पैर बहुत मुलायम थे वो अपने पैरो में एक पायल जरूर पहनती है नेल पॉलिश रेड कलर की आय हाय मैं तो दीवाना हूँ अपनी घर की औरतों के पैरो का


IMG-2603
दीदी के पैर



वो अपने हाथो और पैरों का बड़ा ख्याल रखा करती है और दिन में दो बारी नहाती है (लेकिन वो किस हद तक घिनौने पन का सेक्स चाहती है ये मुझे बाद में पता लगा 😁)

दीदी - जल्दी से उठ जा नहीं अभी आती ही होगी तेरी नन्ही बंदरिया चल एक बात बता ये बंदरिया तेरे रूम में सुबह सुबह घुस जाती है और 1 घंटे तक तेरे रूम से क्यों नहीं निकलती वो भी इतनी सुबह सुबह मैं जब जब उससे पूछती हूँ तो वो टाल देती है कहती है भाई को जगाने में टाइम लगता है ,अब तू ही बता हम्म चल चल बता अब

मंजरा क्या है तुम दोनों का

मैं - अरे दीदी वो ना मेरे रूम में मेरे छाती में आके लेट जाती है और बोलती है की एक घंटे तक हिलना नहीं और मेरे फेस को चूमती रहती है

दीदी - ये क्या बात हुई mm (इस शिवानी की बच्ची को सबक सिखाना होगा मेरे माल में डाका डालती है कमीनी मैं बताती हूँ इस साली को छोटी बहन है तो क्या हुआ मेरे माल पे डाका डालेगी मैं किसी को नहीं छोड़ने वाली घर का कोई भी हो )

मैं - दीदी मैं चला फ्रेश होने (दीदी किचन में चली गई मेरे लिए। नस्ता बनाने

(वैसे बता दु मेरे घर में मुझे चूमना आम बात है )

मैं सीधा टट्टी करने बैठ गया मैं सोचने लगा काश कोई लड़की मेरे इशारों पे चले मुझे अपना मालिक माने मैं जो कहु वो करे तो कैसा होगा मैं अपने खयालों में खो गया था )

तभी मेरे कमरे में एंट्री होती है बंदरिया की यानी

मेरी छोटी बहन शिवानी की

मैं टट्टी कर रहा था तभी वो आई और मेरे लेट्रिन का गेट खटकाने लगी भैयाआ गेट खोलो

मैं - अरे पागल है क्या मैं ..मैं फ्रेश हो रहा हूँ

शिवानी - अरे आप खोलो ना मुझे कुछ नहीं पता मुझे आप सुबह बेड पे चाहिए बस

मैं - गुड़िया समझ मेरी बात को

शिवानी - मैंने नहीं सुनाना कुछ भी खोलो- खोलो गेट खोलो

मैं - जल्दी जल्दी फ्रेश हुआ और जैसे ही गेट खोला वो मेरे ऊपर चढ़ बैठी एक बंदरिया माफिक ऐसे चिपक गई जैसे बंदर का बच्चा चिपकता है

अरे मेरी लड़ो क्या हुआ

शिवानी - भैया प्ल्ज़ प्ल्ज़ चलो ना बेड में मुझे सुकून नहीं मिलता जब तक आपके उपर कुछ पाल ना बिता लू चलो ना

मैं - अरे बाबा चल रहा हूँ गधेड़ी

शिवानी - जाओ मैं आपसे बात नहीं करती आपने मुझे गधेड़ी कैसे कहा क्या मैं आपको गधेड़ी लगती हूँ 🥺

मैं - अरे मेरा बच्चा तू तो नाराज हो गया मेरा प्यारा सा बच्चा है तू

शिवानी - हीहीही 😁

वो मेरे से अभी तक चिपकी मेरे गोद में चढ़ी हुई थी मेरा लंड धीरे-धीरे उपर की ओर फन उठाने लगा था

सायद उसे भी ये फील हुआ लेकिन उसने इग्नोर किया और सीधा मेरे होटो में हमला कर दिया अपने प्यारे प्यारे गुलाबी मखमली लिप्स से अच्छा मैं ये बता दु की मेरे जितने भी घर की औरते है वो बड़ा साफ़ सफ़ाई का ख्याल रखती है

अपने बॉडी को मेंटेन रखती है हम ना ही गरीब है और ना ही जायदा खूब अमीर, हा इतना है की अच्छी लाइफ जी रहे कुछ लेने से पहले सोचना नहीं पडता क्युकी मम्मी भी कमाती है और दीदी भी और पापा , पापा का क्या हटाओ जो है वो है उनकी बात बाद में करेंगे

मैं - मैं उसको लेके बेड में जा गिरा वो मेरे उपर नागिन की तरह मेरे उपर चढ़ गई

शिवानी - भैया क्या आपको पता है मैं आपसे कितना कितना कितना प्यार करती हूँ

मैं - और में भी तो तेरे से बहुत जायदा प्यार करता हूँ गुड़िया

शिवानी - आप समझ नहीं रहे भैया मैं मैं क्या कहना चाह रही (भैया मैं आपको कैसे बताऊ की मैं आपसे कितना प्यार करती हूँ आपको कुछ होने से पहले मुझे हो जाये भाइया अगर आप मुझसे दूर हुए तो में ख़ुद को ख़त्म कर लूँगी )

मैं - गुड़िया तू क्या कहना चाह रही बोल मुझे ,समझा तो एक बारी , ना मैं समझ पाऊँ तो कहियो

शिवानी - वो छोड़ो भैया मुझे अपने बाहो में कस लो हम्म ऐसे ही एक दम टाइटली और कस के हा

मैं - अब ठीक है गुड़िया वो बोली अभी नहीं

तो मैं बोला फिर उसने कहा अपना फेस पहले मेरी तरफ़ करो

हम्म कर लिया ले उसने मेरे मेरे मुंह से मुंह जोड़ दिया , अरे गुड़िया ये क्या मैंने अपना फेस उसकी ओर से साइड में कर लिया गुड़िया अभी मैंने ब्रश नहीं किया

शिवानी - मैंने आपसे बोला क्या की करो ब्रश तब ही मैं किस करूँगी भैया आप जैसे भी हो मेरे हो अब मुंह खोलो जल्दी जल्दी

अरे गुड़िया अरे रुक तो उसने जबरजस्ती मेरा मुंह सामने अपनी तरफ़ घुमा लिया ऑर चूमने चूसने लगी उसका शरीर मेरे उपर था उसकी चूत मेरे लंड से टच हो रही थी (वैसे मैंने अपने लंड के बारे में नहीं बताया मेरा लंड 9.7 इंच का घटीले नस वाला है मैंने बचपन में एक बार जंगल की तरफ़ खेलते-खेलते चला गया वहाँ पे एक जड़ीबूटी मैंने अनजाने में खा ली तब से ही मेरे लंड में गठे पड गई)

उसके बूब्स जो अभी छोटे थे वो मेरे छाती में टच हो रहे थे

क्या फीलिंग थी ये वो मेरे मुंह में अपने लिप्स को डालने लगी मैंने भी अपना मुंह खोल दिया वो मेरे मुंह में इधर उधर जीभ घुमाने लगी मेरे दातो में अपने जीभ 👅 घुमा रही जैसे वो अपने ही जीभ से मेरे मुंह में कुल्ला कर देगी मेरे दात अपने जीभ से ही चमका देगी

मैं - वो इतनी वाइल्ड तरीके से किस कर रही थी क्या बताऊ कई बार तो उसने चूसते चूसते

मेंरा ख़ून भी निकाला है ख़ून 🩸 वो चाट जाती थी बोलती थी की आपका खून वेस्ट नहीं होने दे सकती मैंने उसे थोड़ा हटा के बोला गुड़िया तू अपने दातो से ही मेरा कुल्ला करवा देगी क्या

शिवानी - हा भैया आप रोज कुल्ला क्यों करते हो आप ना किया करो मैं हूँ ना आपको कुल्ला करने के लिए हीहीही 😋

मैं - तू कितनी गंदी बच्ची हो गई है गुड़िया

शिवानी - भैया मुझे आपका कुछ भी गंदा नहीं लगता मैं तो आपको खा ही जाऊ

मैं - गुड़िया ये तू मेरे साथ रोज क्यों करती है अपने बॉयफ्रेंड के साथ करियो

शिवानी - वो तुरंत मेरे छाती से और उठ के बैठ गई और चहरे से ऐसा लग रहा था की लाल मिर्ची 🌶️ खाई हो

मैं - बच्चा मेरा क्या हुआ कुछ गलत कह दिया क्या

शिवानी - …

मैं - अरे बोल ना गुड़िया क्या हुआ देख तू कुछ भी कर चाहे तो तो मार ले मुझे तू बात नहीं करेगी तो मैं अपनी जाअनन..

उसने अपने हाथ मेरे मुंह रख दिए

शिवानी - भैइया आपकी ऐसा बोलने की हिम्मत भी कैसे हुई हा , मैं मार जाऊ आपके मरने से पहले , भइया अपने अगर फेर कभी ऐसा बोला ना मेरा मारा हुआ मुंह देखोगे आप देख लेना और उसने कुछ नहीं बोला सीधा मेरे रूम से निकल कर अपने रूम में भाग गई

मैं -इधर मैं अपनी सोच में की क्या कर दिया मैंने ऐसा जो इसे इतना बुरा लग गया इसको

चलो मैं भी अब ब्रश कर लू अरे छोडो अब गुड़िया ने करवा तो दिया है 👅😋

मैं तयार होने लगा कॉलेज के लिए मैं कॉलेज कम ही जाता हूँ लेकिन आज असाइनमेंट की लास्ट डेट है इसलिए जा रहा हूँ मैंने सोचा जाने से पहले सोच की दोस्त को कॉल कर लेता हूँ

सूरज मेरा दोस्त जो बचपन से ही मेरे साथ रहा है लेकिन इसके शोक कुछ अलग है इसे गांड मरवाने में मजा अता है

ये अमीर परिवार से है इसके घर में पैसे की कोई कमी नहीं क्युकी बाप की फैक्ट्री है इसके ,इसका माँ बहुत सुंदर है मेरे ही माँ की तरह इसकी माँ मुझे छेड़ती रहती है इसके घर में माँ बहन और इसकी बुआ जिसकी शादी हुई थी लेकिन विधवा हो गई पति की एक्सीडेंट में डेथ हो गई परिवार वालो ने इसे मनहूस मान के निकाल दिया तब से अपने घर यानी सूरज के घर में है अब

माँ -सुमन

पिता - महेता लाल

बहन -ख़ुश्बू

बेटा -सूरज

बुआ - सुलोचना

मैंने सूरज को कॉल लगाई उसने उठाया

मैं - हा bsdk कहा गांड मारा रहा

सुरज - भाई मैं अभी में बेड में लेटा हुआ हूँ

मैं - गांडू उठ और और कॉलेज आ आज लास्ट डेट है असाइनमेंट की

सूरज- अरे मोरी मैया मेरा तो हुआ ही नहीं असाइनमेंट

मैं - तू गांड ही मरवाता रहियो मैंने मेरा बना लिया है लेकिन अर्चना ने बोला था की आपका असाइनमेंट में कर दूँगी तो उसने कर दिया तो वो वाला तू ले लिए अपना नाम डाल लियो

सूरज - सुक्रिया जहापनह

मैं - कोई ना तू ही तो है इकलौता मेरा गांडू दोस्त

सूरज- 😁😁

मैं कॉल कट किया और तयार होके नीचे आया वहाँ पे मेरा ही इंतज़ार हो रहा था मेरे बिना कोई खाना नहीं खाता है , मम्मी किसी को खाने दे तब ना मैं आ जाऊ तब ही कहने देती है किसिको , मैं डाइनिंग टेबल पर बैठा था की मम्मी अपनी टेबल से उठ गई और मेरे बगल में खड़ी हो गई और मुझे परोसने लगी मैंने पूछा गुड़िया कहाँ है दीदी बोली होगी अपने कमरे में तुम नास्ता करो वो कर लेगी वैसे भी स्कूल जाती नहीं (घर से ही पढ़ती है ) ज़्यदा ध्यान नहीं दिया नास्ता करने लगा तभी दीदी मुझे खाना अपने हाथों से खिलाने लगी और एक निवाला मम्मी ने भी बना के मेरे मुंह में डाल दिया मैं थोड़ा चबा गया लेकिन जैसे मुझे अहसास हुआ कि ये तो मम्मी ने खिलाया है

मैंने वही पे वो निवाला थूक दिया -

मैंने बहाना बना दिया की कंकड़ आ गया था लेकिन मम्मी समझ गायी थी और मम्मी की आँखो से आँसू बह निकले जो मेरे कंधे को भिगो दिया मैंने ये नोटिस कर लिया था ।सायद और किसी ने नहीं पापा तो वैसे भी हमेशा नसे में रहते है दीदी अपने नास्ता कर रही थी गुड़िया अपने रूम होगी बाकी और लोग अच्छा मैं बता दु की हम यहाँ शहर में रहते है और सब लोग गाव में रहते है यहाँ पर केवल मैं मम्मी पापा गुड़िया दीदी ही रहते है

मैं नस्ता कर कॉलेज के लिए निकल गया उधर घर में दो लोगो के आँखो से आँसू बह रहे थे एक गुड़िया जो की अपने रूम में लेटी अशू बहा रही थी एक मम्मी जो वही डाइनिंग टेबल के पास खड़ी थी दीदी ऑफिस निकल गई मम्मी ऑफिस नहीं जाती उन्होंने लीव ले रखी है पापा तो नसे में रहते है वो निकल गए बाहर




IMG-2606
शिवानी - अपने रूम में लेटे हुए आंसू बहा रही भैया आप क्यों नहीं समझते है मैं कैसे किसी को बॉयफ्रेंड बना लू मेरे जिस्म में हक सिर्फ आपका है भैया सिर्फ आपका अगर किसी ने इस जिस्म को छुआ भी तो , तो उसे जान से मार दूँगी और अपने आप को भी ख़त्म कर लूँगा क्युकी ये जिसमे गंदा हो जाएगा ना भैया मैं मेरे स्वामी को ऐसे गंदा जिस्म परोसूँगी क्या नहीं नहीं ये कभी नहीं होगा

IMG-2605
(शिवानी का कमरा पूरा मेरे तसवीरो से भरा हुआ है हर जगह मेरी जान मेरी जान लिखा हुआ है ख़ून से ,वो फिर अपने मुंह तकिया में दबा के रोने लगती है )
इधर मम्मी भी रो रही थी मम्मी वही डाइनिंग टेबल के पास खड़ी उस थूके हुए निवाले को घूर रही थी और आँसू बहा रही थी


IMG-2607
मम्मी
Bahut hee achha hai story and hero apni se itna rude se q kiya ab aage kya hota hai
 

Shivakalakar

Avatar
278
1,390
124
Update-4

Inaya ma’am ka lecture khatam hua, assignment jama hui, aur phir hum log canteen mein ja baithay. Wahan koi khas baat nahi hui — bas wahi faltu ki baatein, wahi hansi-thitholi, wahi waqt jo bina poochhe guzar jata hai. Shaam dhalne se pehle hi Suraj ki car mein baith gaya aur ghar ki taraf chal pada.
Raste mein Suraj steering par ungliyan thapthapate hue bola —
“Bhai, tumhe pata hai na kal kya hai?”

Maine khidki se bahar dekhte hue kaha — “Haan bhai, tera birthday hai kal.”

Suraj ki aankhon mein ek chamak aa gayi.
“Bhai tujhe main kya hi invite karun… tu toh meri jaan hai. Kal jaldi pahunch jaiyo — mummy tujhe yaad kar rahi thi.”

Maine halki-si hansi dabate hue kaha — “Haan-haan, kyun nahi — main aaunga kal. Lekin teri mummy ko meri yaad kyun aane lagi?” 😏

(Man mein jaanta tha — wo chhedengi zaroor. Aur unke papa waise bhi hamesha apni duniya mein vyast rehte hain.)

Suraj ne hanste hue bhauhen uthayi — “Ab mujhe kya pata. Lekin beta, ek kaam kar — kal didi se bach ke rahiyo. Wo tere pe gussa hai.”

“Main sambhal lunga unko,” maine kandhe uchkaaye. “Chal bhai, mera ghar to aa gaya. Kal milta hoon seedha tere ghar pe.”

“Chal aa jaiyo jaldi. Hmm okay bye.”

Maine darwaza khola aur utarte hue bola — “Ab ja na, bsdk.”

“Arre bhai, ja raha hoon!” Suraj hanste hue bola. “Gaaliyan kam diya kar yaar.” 😅

Car dheere se aage badh gayi.

Meri gali mein car nahi ghus sakti — thoda paidal chalna padta hai. Isliye bahar hi utar jata hoon. Wo rasta mujhe yaad hai — har paththar, har mod, har deewaar ka rang. Is gali mein bachpan ki har shaam dafan hai.

Ghar ka gate aaya. Maine kundi khatkayi.


Darwaza charmarata hua khula.
Mera haath abhi bhi kundi par tha.
Aur saamne…

Wahi thi.

Maa.

Wahi chehra — jise dekhkar mere man mein ek saath sau sawaal uthte the aur ek bhi jawab nahi milta tha. Unki aankhon mein kuch tha jo shabdon mein nahi aata — ek thakaan, ek intezaar, ek pyar jo apni hi janjeeron mein uljha hua tha.


Meri bhauhen halki-si sikud gayi.
Na nafrat… na gussa… bas ek thakaan. Ek purani, gehri, benaam-si thakaan.


Unke honthon par ek halki-si bholi muskaan thi — waisi jo tab aati hai jab dil dara hua ho, par dikhana na ho.


Unhe shayad pata tha ki darwaza khulega toh main hi hounga. Jaise wo wahi khadi thi — darwaze ke paas — mera intezaar karti hui.


Unki aankhon mein ek chamak aayi — khushi ki nahi, rahat ki. Jaise kisi lambe bhatkaav ke baad sahi mod mil gaya ho.


Main man mein —
“Yahi kyun…? Har baar yahi kyun saamne aa jati hain?
Maine toh khud se kaha tha — ab doori rakhunga. Ab nahi uljhunga. Ab nahi tootunga.”


Maa man mein —
“Aaj agar nahi boli… toh phir kabhi nahi bol paungi.
Use samjhana zaroori hai. Use pata hona chahiye ki main aisi kyun hoon — ye sab abhi se nahi hai, kai saalon se dheere-dheere hua hai.
Mujhe wo chahiye. Chahiye wo mujhe.
Main kitna tadapti hoon ki bas ek baar — bas ek baar hi sahi — pyar se bole. Kahan gaya wo mera beta jo mujhe dukhi dekhkar khud dukhi ho jata tha? Jab wo chhota tha, hum saath-saath lete rehte the — kitna masoom tha wo…
Abhi bhi kitna shaant, saral dikh raha hai. Lekin ye uski khamoshi… ye mujhe andar se khaaye ja rahi hai. Kachot rahi hai.”


Unke dil ki dhadkan shayad unke seene se bahar tak sunai de rahi thi.


Hum dono ke beech bas do kadam ki doori thi.
Par lag raha tha — jaise barson ka faasla ho.


Maa thoda-sa side hui — rasta dene ke liye.
Aur main bina kuch bole andar ki taraf badha.
Tabhi —


“Sunno…?”


Bas itna hi nikla unke muh se.
Adhoora. Thanda. Kaampata hua.
Jaise koi shabd gale tak aaya ho aur wahi atak gaya ho.


Unhone honth khole — phir band kar liye.
Jo kehna tha, wo shabdon ki shakal nahi le pa raha tha. Jaise kuch dard itne gehre hote hain ki zubaan unhe utha nahi pati.


Unke haath aapas mein uljhe hue the.
Nazrein kabhi mere chehre par jaati, kabhi zameen par gir jaati.


Maa man mein —
“Agar main sach bataun… toh shayad wo samajh jaaye.
Aur agar na samjha…?
Toh shayad hamesha ke liye kho dungi use.
Nahi nahi — hey bhagwan, main hi kyun? Main hi kyun abhaagi maa hoon jo apne bachche se kai saalon se pyar se baat karne ko taras rahi hai?
Agar usne meri baat aadhi suni aur kahin chala gaya… kahin kuch kar liya… toh main toh jeete-ji mar jaungi.
Bina praan ke koi jeeta hai bhala?”

Maine ek pal rukkar, bina koi bhaav chehre par laaye, bas itna kaha —
“Haan, boliye.”

Hawa halki-si chali.
Darwaza aadha khula tha, aadha band —
Theek waise hi jaise dono ke dil.


Maa ne ek kadam aage badhaya.
Phir ruk gayi.
Main peeche nahi hata… par aage bhi nahi aaya.


Koi chillaya nahi.
Koi roya nahi.
Bas do log the —
Ek jinki niyat saaf thi, sacchi thi — jinke andar ek pyar tha jo shayad duniya ki nazar mein samajh se pare tha, hadon se paar tha — par tha. Gehra tha. Saccha tha.
Aur doosra — main — jiski galatfahmi itni gehri thi ki uski jadey ab dil tak pahunch chuki thi.


Pata nahi maa ne kya socha.
Shayad himmat jawab de gayi. Shayad wo pal sahi nahi laga. Shayad meri us ek nazar mein unhone kuch padh liya jo maine kabhi kaha nahi tha.


Wo dheere se boli —
“Kapde change kar lo. Fresh ho lo. Main khana garam kiye deti hoon.”


Unki aankhen bhari hui thi — jaise hamesha rehti thi jab mujhse baat karti thi. Jaise unki aankhon mein ek poora samandar 🌊 qaid ho, jo bahar nikalne ke liye chatpataata rehta ho — aur har baar kuch boondein chupke se bahar aa hi jaati thi.
Abhi bhi waise hi hua.


Maine bina koi bhaav laaye — bina narmi, bina sakhti — bas itna kaha —
“Hmm.”
Aur apne kamre ki taraf chal diya.


Maa ne apni saadi ke pallu se aankhen saaf ki — wahi pallu jo hamesha unke kandhe par rehta tha, jisme unhone na jaane kitni baar apne aansu chhupaye the — aur khana garam karne chali gayi.


(Main kamre mein daakhil hua.
Aur wo wahan thi —
Bistar par leti hui.)


Aage——
 
Last edited:

Bad boy12

Member
148
74
28
Update-4
हम लोगो ने इनाया मैम का लेक्चर अटेंड किया फिर असाइनमेंट जमा करने के बाद हम लोग कैंटीन में बैठ के फालतू की बाते कर रहे थे ऐसे ही टाइम निकल गया और मैं घर की और सूरज के साथ कार में चल दिया रास्ते में सूरज

सूरज - भाई तुमको पता है ना कल क्या है

मैं - हा पता है ना भाई तेरा बर्थडे है कल

सूरज- भाई तुझे मैं क्या ही इन्वाइट करूँ तू तो मेरी जान है कल जल्दी पहुँच जाइयो मम्मी तुझे याद कर रही थी

मैं - हा-हा , क्यों नहीं ‘मैं आता हूँ कल ‘ लेकिन तेरी मम्मी मुझे क्यों याद करने लगी 😏(मुझे पता है फेर मुझे छेड़ेगी बाप तो वैसे ही बिजी इंसान है )

सूरज - अब मुझे क्या पता , बेटा तू कल बच के रहियो दीदी तेरे पे गुस्सा है

मैं - मैं संभाल लूंगा उनको , चल भाई मेरा घर तो आ गया कल मिलता हूँ सीधा तेरे घर पे

सूरज - चल आ जाइयो जल्दी hmm oky bye

मैं - अब जा ना bsdk

सूरज - अरे भाई जा रहा 😅हूँ गालिया कम दिया कर यार

सूरज कार लेके निकल गया (थोड़ा पैदल चलना पड़ता है क्युकी कार मेरे गाली में नहीं घुस सकती इसलिए बाहर ही उतर जाता हूँ )

मैंने घर का गेट खटकाया गेट जैसे ही खुला
दरवाज़ा चरमराता हुआ खुला।मेरे हाथ अभी भी कुंडी पर था, सामने वही थीं ।


IMG-2614माँ
वही चेहरा… जिसे देखकर मेरे मन में एक साथ सौ सवाल उठते थे और एक भी जवाब नहीं मिलता था।

उन्हें देखते ही मेरी भौंहें हल्की-सी सिकुड़ गईं। न नफरत… न गुस्सा… बस एक थकान।
उनकी प्यारी सी भोली सी हल्की मुस्कान

मम्मी एक पल को ठिठकी।

उन्ने उम्मीद थी कि दरवाज़ा खोलेंगी तो सामने मैं ही हूँगा जैसे वो दरवाज़े के पास ही मेरा इंतज़ार करती रही हो

उनकी आँखों में एक चमक सी आई—खुशी की नहीं, राहत की। जैसे किसी लंबे इंतज़ार के बाद सही इंसान दिख गया हो।

मैं मन में

“यही क्यों…? हर बार यही क्यों सामने आ जाती हैं ?

मैंने तो खुद से कहा था—अब दूरी रखूँगा।”

मम्मी मन में :

“आज अगर नहीं बोली तो फिर कभी नहीं बोल पाऊँगी।

उसे समझाना ज़रूरी है… उसे पता होना चाहिए कि मैं क्या करूँ मैं ऐसी ही हूँ ये जो भी है ये अभी से नहीं कई सालो से धीरे धीरे हुआ है , मुझे वो चाहिए , चाहिए वो मुझे ,मैं-मैं कितना तड़पती हूँ की बस एक बार -बस एक बार ही सही प्यार से बोले कहा गया वो मेरा बेटा जो मुझे दुखी देख के ख़ुद दुखी हो जाता था हम लोग साथ साथ लेटे रहते थे जब वो छोटा तो कितना मासूम सा था अभी कितना सांत सरल दिख रहा लेकिन ये उसकी ख़ामोसी मुझे अंदर से कचोट रही खाये जा रही है मुझे ”उनके दिल की धड़कन कानों तक आ रही थी।

हम दोनों के बीच बस दो क़दम की दूरी थी।पर लग रहा था जैसे बरसों का फासला हो।

मम्मी थोड़ा-सा साइड हुई , रास्ता देने के लिए

और मैं बिना कुछ बोले अंदर चला जाता हूँ तभी

“सुनो …?”

उनके मुँह से बस इतना ही निकला। अधूरा। ठंडा।

मम्मी ने होंठ खुले , फिर बंद कर लिए।

वो जो कहना चाहती थी, वो शब्दों में नहीं आ रहा था।



उसके हाथ आपस में उलझे हुए थे।

नज़रें कभी मेरे चेहरे पर जातीं, कभी ज़मीन पर गिर जातीं।

मम्मी मन में :

“अगर मैं सच बताऊँ तो शायद वो समझ जाए…और अगर न समझा… तो शायद हमेशा के लिए खो दूँगी ”नहीं नहीं हे भगवान मैं ही क्यों मैं ही क्यू अभागी माँ हूँ जो अपने बच्चे से कई सालों से प्यार से बात करने को तरस रही अगर उसने मेरी बात आधी सुनी तो और कहीं कुछ कर लिया तो कहीं चला गया मैं तो जीते जी मर जाऊँगी बिना प्राण के कोई जीता है भला



मैं मन में :

“वो अब भी वही सफ़ाई देने आई होंगी ।

पर उन्हें क्या पता… हर सफ़ाई मेरे भीतर कुछ और तोड़ देती है।”

मैं - (कैजुअल सा फेस )हा बोलिए

हवा हल्की-सी चली।

दरवाज़ा आधा खुला था, आधा बंद—ठीक वैसे ही जैसे दोनों के दिल।



मम्मी ने एक क़दम आगे बढ़ाया, फिर रुक गई।

मैं पीछे नहीं हटा… पर आगे भी नहीं आया।



कोई चिल्लाया नहीं।

कोई रोया नहीं।

बस दो लोग थे—

एक जिनकी (मम्मी )नीयत साफ़ और सच्ची है प्यार भरा है उनके अंदर , ये प्यार दुनिया की नजर में ग़लत ही सही लेकिन ये प्यार हदे पार कर देने वाला था ।

और दूसरा यानी मैं जिसकी गलतफ़हमी बहुत गहरी।

पता नहीं मम्मी ने क्या सोचा वो बोली की कपड़े चेंज कर फ्रेश हो लो मैं खाना गर्म किए देती हूँ (मम्मी की आँखे पानी से भरी थी जब जब वो मुझसे बात करती उनकी आँखो में पानी निकल पड़ता जैसे उनके आँखो में समंदर 🌊 भरा हो जो बाहर निकलने के फिराक में रहता है जैसे उसे उनकी आँखो में क़ैद कर दिया गया हो वो बार बार अपने कुछ बूंदे बाहर निकल देता है अभी भी वैसे ही कुछ हुआ )

मैं - मैंने बिना कोई एक्सप्रेशन दिए बस इतना बोला “हम्म “अपने कमरे की और चल दिया

मम्मी आँखो को अपनी साड़ी के पल्लू से साफ़ करती हुई खाना गर्म करने चली दी

(मम्मी घर में हमेशा सारी ही पहना करती है एक दम भारतीय नारी मम्मी ने अब सिंदूर लगाना छोड़ दिया था और गले में एक पतली सी चैन पहनती थी मम्मी ने अभी छुट्टी ले रखी थी ऑफिस से उनका घर में टाइमपास वही जैसे आम औरतों का होता है सीरियल्स देख के लाइक साथ निभाना साथिया, कुमकुम भाग्य वगैरा वगैरा)

मैं अपने कमरे में जैसे ही गया वह वो लेटी थी
Nice update bro flashback me ma beta ke sath kya hua hai 🤔🤔
 
Top