family love 420
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mast story hai(दोस्तो जैसे ये कहानी आगे जैसे आगे बढ़ेगी, मै सभी किरदारों के हिसाब से लिखता रहूंगा)
वो झुक गई.
उसके पीछे से आके मैने उसकी साड़ी को पेटीकोट के साथ ऊपर किया उसकी उसकी लाल पैंटी को निचे उसकी जांघो पर कर दिया, उसका ब्लाउज और ब्रा दोनो खोल दी।
उसकी गांड़ का भूरा छेद उसकी सांसों के साथ खुल बंद हो रहा था
उसके गोल कठोर मम्मे आजाद थे. वो दोनो किसी पहाड़ की छोटी चोटी की तरह थे, मुझे चैलेंज दे रहे थे.
मैने अपने दोनो हाथों से उसके गोल गोल कठोर मम्मे मसलने लगा जो नीचे की तरफ आधे पके कठोर आम की तरह लटक रहे थे।
उन दोनो चूचियों के निप्पल मुझे लाल आंखो से देख रहे थे मानो मुझे बोल रहे हो की हमारी मालकिन को ऐसे दीवार के सहारे झुकाया क्यों है,आज तो अच्छे से पेश आते और हम दोनो ने तुम्हार क्या बिगाड़ा था जो इतनी बेदर्दी से पीस रहे हों.
उसकी पेंटी उसकी मासल जांघो में फसी हुई थी, जिस वजह से वो अपने पैर नही खोल पा रही थी , उसकी चूत और गांड और ज्यादा कसी कसी हो गई थी.
Komal ने अपनी पेंटी निकालने को कोशिश की पर मैंने उसे मना कर दिया, आज तक जब भी मैने किसी की गांड मारी थी तो पैर फेलाने नहीं दिए थे पैर शिकुडे होने से गांड और चूत दोनो का छेद और ज्यादा टाइट हो जाता है।
इस आसन में पहले भी बहुत लड़कियों, भाभियों को चोद चुका था
एक हाथ से मै उसके जोबन मसल रहा था और दूसरे से चूत को सहलाने लगा.
चूत तो पहले हीं गीली हो रखी थी, थोड़ी देर में हीं वो पानी-पानी हो गई. मैने अपनी दो उँगलीयों से चूत को फैलाया और सुपाड़ा वहाँ सेंट कर दिया.
उसने अपनी आंखे बंद करली और जोर जोर से सांसें लेने लगीं
फिर मैने उसकी पतली कमर को पकड़ के कस के एक करारा धक्का मारा तो उसकी चूत को रगड़ता, पूरा सुपाड़ा अंदर चला गया.
आआआआआआआआ
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दर्द से वो तिलमिला उठी. एक धक्के में ही उसकी आंखो से आंसू आने लगे।
मैने एक और कस के धक्का लगाया लंड और चूत के अंदर गया और उसकी चूत से खून की एक धार निकली, मै ये देख कर खुश हुआ की मुझे सील पैक पत्नी मिली है, मेने तो सोचा था कोई मेरे जैसी खेली खाई मिलेगी।
मैने इस बार पुरी ताकत से धक्का मरा लंड आधा चूत में घुसा, और कोमल रोने लगी
आआआआआ माई रे
“देवर जी पुरी रात कस के लेना , तीन चार दिन ठीक से चल भी ना पाए, जब मायके वापिस जाय तो सबको पता चल जाना चाहिए की मेरा देवर शरीर से ही नही निचे से भी मोटा लंबा है”
पड़ोसन भाभी की ये बात मुझे याद आ गई।
मैने अपने लंड को वही रोक दिया और उसकी पीठ पर हाथ फिराने लगा, चूमने लगा , कुछ देर बाद जब उसका दर्द कम हुआ तो मैंने अपना लंड बाहर निकाल और आधे लंड से उसे चोदने लगा।
साथ में उसकी चूंचियों को मैने मसल-मसल उनकी औकात दिखा दी थी।
उसकी दर्द भरी चीखें अब आह में बदल चुकी थी, उसको भी चूदाई का मज़ा आने लगा था।
मैने अपने लंड को पुरा बाहर निकाला, मुझे पता था अब क्या होगा, मैने अपनी पुरी ताकत से धक्का लगाया लंड चूत को चीरता हुआ पुरा अंदर चला गया और कोमल की जोर दार चीख पुरे कमरे मे गूंज उठी , बाहर खड़ी पड़ोसन भाभी और दोनो बहनों ने भी वो चीख सुनी, उन्होने क्या पुरे घर में वो चीख सुनाई पड़ी थी।
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घर में मौजूद सभी ने वो चीख सुन ली
दो चार धक्के ऐसे मारने के बाद मेने उसकी चूचियों को कस-कस के रगड़ते, मसलते चुदाई शुरू कर दी.
जल्द हीं वो भी मस्ती में आ कभी अपनी चूत से मेरे मोटे हलब्बी लंड पे सिकोड़ देती,
कभी अपनी गांड़ मटका के मेरे धक्के का जवाब देती.
साथ-साथ कभी मै उसकी क्लिट, कभी निप्पल्स पिंच करता तो वो मस्ती में गिनगिना उठती.
उसकी गांड का भूरा छेद कुल बंद हो रहा बड़ा ही अच्छा लग रहा था।
मैने अपनी एक उँगली, अपने मुंह में लेकर अच्छी तरह गीली की , और उसकी गांड़ के छेद पे लगाया और कस के दबा के टिप अंदर घुसा दी.
वो पहली बार बोली
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वहां नही …अंदर नहीं......उँगली निकाल लो.....प्लीज़...”
पर आज में उसकी सुनने के मूड में नहीं था धीरे-धीरे मैने पूरी उँगली अंदर कर दी.
अब मैने चुदाई भी फुल स्पीड में शुरू कर दी थी. मेरा खूब लंबा मोटा मूसल पूरा बाहर आता और एक झटके में उसे मै पूरा अंदर पेल देता.
कभी मै अपने लंड को चूत के अंदर गोल-गोल घुमाता. उसकी सिसकियाँ कस-कस के निकल रही थी.
उँगली भी लंड के साथ उसकी गांड़ में अंदर-बाहर हो रही थी.
लंड जब बुर से बाहर निकलता तो मै टिप तक बाहर निकालता और फिर उँगली लंड के साथ हीं पूरी तरह अंदर घुस जाती.
वो अब इस धक्का पेल चुदाई में गांड़ में उँगली भूल हीं चुकी थी.
जब गांड़ से गप्प से उँगली बाहर निकाली तो उसे पता चला. सामने की टेबल पर कड़ुआ तेल रखा था
मैने उसे उठा के उसका मूंह सीधे उसकी गांड़ से लगा दिया तेल कुछ उसकी गांड में घुसा और कुछ उसकी चूत में घुसे मेरे लंड पर, कुछ उसकी चूत पर भी लगा और बहुत सारा निचे गिरा और जब तक वो कुछ समझती मैने अबकी दो उंगलियां उसकी गांड़ में घुसा दी.
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दर्द से वो चीख उठी. पर अबकी बिन रुके पूरी ताकत से मैने अपनी दोनो उगलियों को अंदर घुसा के हीं दम लिया.
“आ..निकालो ना.... क्या करते हो.? उधर नहीं...प्लीज़.... नीचे चाहे जित्ती बार करलो लो... ओह...”
वो चीखी.
लेकिन थोड़ी देर में चुदाई मैने इत्ती तेज कर दी कि उसकी हालत खराब हो गई. और खास तौर से जब मै उसकी क्लिट मसलता...,
वो भूल हीं चुकी थी कि जिस रफ़्तार से लंड उसकी बुर में अंदर-बाहर हो रहा था,
उसी तरह उसकी गांड़ में उँगली अंदर-बाहर हो रही थी.
वो जल्द हीं झड़ने के कगार पर पहुँच गई और उसका शरीर अकड़ने लगा और वो झड़ गई, उसके पैर कांपने लगे और वो जमीन पर धम से गिर गई।
लंड तो निकल चुका था पर गांड़ में उँगली अभी भी अंदर-बाहर हो रही थी. एक मीठा-मीठा दर्द उसे हो रहा था पर एक नए किस्म का मज़ा भी मिल रहा था.
मैने उसे कुतिया बनाया और उसका सर जमीन पे रखा उसके चूतड हवा में उठे हुए थे।
और जब कुछ देर बाद मैने उँगली निकाली तो तेल को अच्छे से उसकी गांड़ में लगाय.
अपने लंड में भी तेल लगा के मैने उसकी गांड़ के छेद पे लगा दिया और अपने दोनों ताकतवर हाथों से उसके चूतड़ को पकड़, कस के उसकी गांड़ का छेद फैला दिया.
मेरा मोटा सुपाड़ा उसकी गांड़ के दुबदुबाते भूरे छेद से सटा था. और जब तक वो संभलती, मैने उसकी पतली कमर पकड़ के कस के पूरी ताकत से तीन-चार धक्के लगाए....
“उईईई.....”
मैं दर्द से बड़े जोर से चिल्लाई
“कोमल की जुबानी”
देख बेटा वो जैसा चाहे जैसे करें उसे करने देना, कोई विरोध नहीं करना, आखिर तेरा पति है। हो सकता है कि वो किसी और को चाहता हो और हमने जबरदस्ती उसे किडनैप किया और तेरी शादी करवा दी, वो गुस्सा होगा , हो सकता है वो तुझे मारे भी तो बेटा उस समय अपनी इन दो छोटी बहनों और इस लाचार मां को याद करते हुए सह लेना बेटा
रोती हुई मेरी मां के ये शब्द रह रह के मुझे याद आ रहे थे।
मैंने अपने होंठ कस के काट लिये पर लग रहा था मैं दर्द से बेहोश हो जाऊँगी.
बिना रुके उन्होंने फिर कस के दो-तीन धक्के लगाये और मैं दर्द से बिलबिलाते हुए फिर चीखने लगी.
मैंने अपनी गांड़ सिकोड़ने की कोशिश की और गांड़ पटकने लगी पर तब तक उनका सुपाड़ा पूरी तरह मेरी गांड़ में घुस चुका था
और गांड़ के छल्ले ने उसे कस के पकड़ रखा था.
मैं खूब अपने चूतड़ हिला और पटक रही थी पर जल्द हीं मैंने समझ लिया कि वो अब मेरी गांड़ से निकलने वाला नहीं. अब ये मेरी गांड मारे बिना छोड़ेंगे नहीं
और उन्होंने भी अब कमर छोड़ मेरी चूचियाँ पकड़ ली थी और उसे कस कस के मसल रहे थे.
दर्द के मारे मेरी हालत खराब थी. पर थोड़ी देर में चूचियों के दर्द के आगे गांड़ का दर्द मैं भूल गई.
अब बिना लंड को और ढकेले, अब वो प्यार से कभी मेरी चूत सहलाते, कभी क्लिट को छेड़ते.
थोड़ी देर में मस्ती से मेरी हालत खराब हो गई. अब उन्होंने अपनी दो उंगलियां मेरी चूत में डाल दी
और कस-कस के लंड की तरह उसे चोदने लगे.
उन्होंने मेरी चूत के भीतर अपनी उँगली इस तरह से रगड़ी जैसे मेरे जी-प्वाइंट को छेड़ दिया हो और मैं पागल हो गई.
मेरी चूत कस-कस के काँप रही थी और मैं झड़ रही थी, रस छोड़ रही थी.
और मौके का फायदा उठा के उन्होंने मेरी चूचियाँ पकड़े-पकड़े कस-कस के धक्के लगाये
और पूरा लंड मेरी कोरी गांड़ में घुसेड़ दिया.
दर्द के मारे मेरी गांड़ फटी जा रही थी. कुछ देर रुक के उनका लंड पूरा बाहर आके मेरी गांड़ मार रहा था.
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घन्टे से भी ज्यादा गांड़ मारने के बाद वो झड़े. और उनकी उंगलियां मेरा चूत मंथन कर रही थी
और मैं भी साथ-साथ झड़ी.
"कैरी की जुबानी"
मैने आज तक बहुत गांड़ मारी थी पर आज कोमल की गांड मार के मज़ा आ गया।
एक तो उसकी गांड़ कोरी थी और दूसरा मैने उसे पैंटी पुरी नहीं खोलने दी थी , तो गांड का छेड़ बहुत ज्यादा टाइट लग रहा था
अच्छे से कस कस के उसकी गांड़ मारने के बाद मैने उसकी पेंटी मैने पूरी उतार दी और अपने दोनो हाथों से उसके चूतड़ों को फैलाया तो उसकी गांड़ का छेद अब कुछ खुला खुला लग रहा था।
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उसकी गुलाबी मोटी फांकों वाली चूत मुझे पागल कर रही थी।