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Adultery मेरी बहन प्रिया दी की चुदाई

hgupta112285

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हैलो फ्रेंड्स, मैं रोहन सिंह 24 का लखनऊ उत्तर प्रदेश से हूं। मेरे घर में मेरे मम्मी-पापा और मेरी बड़ी बहन रहती है। मेरे पापा मुंबई में बिल्डर है, इसलिए पापा ज्यादातर मुंबई अपने काम में ही बिजी रहते है। मेरी मम्मी कभी कुछ दिन यहां हमारे साथ तो कुछ दिन मुंबई पापा के यहां चली जाती है।

अब मैं आप लोगों को अपनी प्यारी बहन प्रिया दी के बारे में बता दूं, जिसका आप लोग बेसब्री से इंतज़ार कर रहे है। मेरी बहन का नाम प्रिया सिंह है। वो 26 साल की है। हाइट 5 फिट 3 इंच, गदराई, चर्बीदार मॉल है। मेरी बहन के लम्बे-लम्बे काले-काले घने बाल, बड़ी-बड़ी प्यारी-प्यारी आंखे, गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठ, टमाटर जैसे गुलु-गुलु गाल, छाती पर दो बड़े-बड़े तरबूज़, टाइट-टाइट नर्म-नर्म मुलायल-मुलायम तने हुए दूध के टैंक मानो सलामी दे रहे हो।

मेरी बहन की चूचियां 36″ की है। नीचे मस्त लचकदार 30″ की कमर। कमर के नीचे बाहर दो भागो में बाहर निकली हुई बड़ी-बड़ी गांड। फिर बहन की मोटी-मोटी गोरी-गोरी जांघें बहुत ही मस्त लगती है।

प्रिया दी की चूचियां और गांड उनकी खूबसूरती में चार चांद लगा देती है। जब प्रिया दी कॉलेज जाती या मार्केट जाती है, तो लोग उसकी चूचियां या गांड ही देखते है। जब दी अपनी कमर मटका कर चलती है, उसकी बड़ी-बड़ी गांड की फांक कभी ऊपर तो कभी नीचे देख कर सब का मन ख़ुश हो जाता है।

कॉलेज में लडके मेरी बहन को अलग-अलग नाम से बुलाते है। कोई दूध की टेंकर, या तो कोई बड़ी गांड वाली मॉल बुलाता है। बहुत सारे नाम है मेरी बहन के लोग प्यार से बुलाते है। हालांकि मैं और प्रिया दी एक ही कॉलेज में पढ़ते है। प्रिया दी मेरी सीनियर भी है, तो हम दोनों एक अच्छे फ्रेंड की तरह रहते है। प्रिया दी के कितने बॉयफ्रेंड है मुझे पता है। कभी-कभी मैं दी से पूछ लेता या तो प्रिया दी मुझे खुद भी बता देती है।

मेरे घर में किसी चीज की कमी नहीं है। हम लोग सिटी में रहते है, तो किसी प्रकार का रोक-टोक भी नहीं है। घूमना-फिरना, कपड़े पहनना, किसी भी प्रकार की रोक-टोक नहीं है। वैसे तो प्रिया दी के कई सारे बॉयफ्रेंड है, कॉलेज से लेकर सिटी के कई लड़के। कई तो पता नहीं कहां-कहां के है। मेरी बहन उन सभी को भी फसा रखी है।

मेरी बहन दिन भर फ़ोन पर किसी ना किसी से बात करती रहती है, और व्हाट्सप्प इंस्टाग्राम पर भी चैटिंग करती रहती है। कभी इस लड़के से बात करती, तो कभी उस लडके से।

जब बाहर के लोग प्रिया दी को गंदे-गंदे कमैंटस करते है, प्रिया दी बस मुस्कुरा देती है, उनको कुछ बोलती भी नहीं है। मुझे भी ये सब गंदे कमैंटस अपनी बहन के बारे में सुन कर अच्छा लगता है। मैं प्रिया दी की ब्रा और पैंटी चुरा कर उस पर मुठ मारता था। फिर वापस ले जाकर रख देता था। वैसे दी के पास बहुत सारी ब्रा-पैंटी है, क्योंकि उनके बॉयफ्रेंड लोग उनको गिफ्ट करते रहते है।

मेरी आदत हो गयी थी और मुझे मज़ा भी आता था प्रिया दी की ब्रा-पैंटी में मुठ मारने की। जब मुझे हिलाने का मन होता तो मैं चोरी से प्रिया दी के रूम में जाता था। वहां से उनकी ब्रा-पैंटी लेकर आता था, और मुठ मारता था।

लेकिन कुछ दिन बाद ही प्रिया दी को शक होने लगा। क्योंकि प्रिया दी की ब्रा-पैंटी पर कभी कभार मेरे मुठ के दाग लग जाते थे।

ऐसे ही एक दिन प्रिया मार्केट जाने के लिए घर से निकली। मैं सोचा कि दी मार्केट गयी, मैं उनकी ब्रा-पैंटी लाता हूं और मुठ मरूंगा। मैं तुरंत दी के रूम में गया, और वहां से उनकी ब्लैक कलर की ब्रा-पैंटी ली।फिर वही अपने लंड पर रख कर और पैंटी मुंह में डाल कर हिलाना शुरू कर दिया।

तभी प्रिया दी पीछे से बोली: ओह, तो तुम ही हो जो मेरी ब्रा-पैंटी पर दाग लगाते हो।

इतना सुनते ही मैं तो बहुत डर गया। पीछे देखा तो प्रिया दी थी। मैंने तुरंत प्रिया दी की ब्रा-पैंटी दूर फेंकी।

प्रिया: अरे क्यूं फेंक दी?

मैं: सॉरी दी गलती हो गयी मुझसे, पता नहीं कब कैसे मैंने कर दिया।

मुझे डर लग रहा था, कि अगर दी ये बात मम्मी और पापा को बता दी तो मेरा क्या हाल होगा। मैं ये सब सोच कर बहुत डर रहा था।

प्रिया दी: अरे भाई डर मत, शांत हो जा। मैं कुछ बोल रही हूं क्या तुम्हें?

फिर प्रिया दी मेरे पास आयी, मुझे बेड पर बैठाई, ‌और खुद बगल में बैठ गयी।

वो बोली: शांत हो जा, डरने की कोई बात नहीं होती है इस उम्र में ये सब करने पर। जवानी में नहीं करेगा तो कब करेगा?

मैं: सॉरी दी अब नहीं करूंगा। आप घर पर किसी को मत बोलना।

प्रिया दी (हसने लगी और बोली): पागल हूं मैं जो ये सब बात किसी को बोलूंगी?

मैं: दी आपको बुरा नहीं लगा ये सब देख कर?

प्रिया दी: नहीं भाई, इसमें बुरा लगने वाली क्या बात है? मुझे कई दिनों से शक था तू ये सब करता है, तो मैं तुझे पड़कना चाहती थी। आज तो मैं बस यूहीं मार्केट का बहाना की थी, और आज मैं तुझे पकड़ भी ली।

मैं: ये तो गलत है दी, ऐसे पकड़ना। आप मुझसे पूछ भी सकती थी। मैं आपको बता देता। आप अपने छोटे भाई को डरा दी

प्रिया दी: अच्छा और जो तू मुझसे पूछ कर ले जा सकता था, मैं तुझे कभी कोई भी चीज मना की आज तक? तू चोरी से मेरी ब्रा-पैंटी ले जाता था, तो मैं परेशान हो जाती थी कि मेरी ब्रा-पैंटी कौन ले गया। ऊपर से दाग तू बिना धोये ऐसे ही ब्रा-पैंटी लाकर रख देता था।

मैं: सॉरी दी अब पूछ कर ले जाऊंगा, और धो कर रख दूंगा।

प्रिया दी: कोई बात नहीं भाई, और सॉरी यॉर मैं तुझे डरा दी। तू जब चाहे जो भी ब्रा-पैंटी ले जाना चाहता है ले जा सकता है। और हां धोने की जरूरत नहीं है, ऐसे ही रख देना।

मैं: ठीक है दी।

ले जा रहा हूं आपकी ब्रा-पैंटी।

प्रिया दी: ठीक है भाई।

मैं: एक और अपनी ब्रा-पैंटी दे दो।

प्रिया दी‌ (मुस्कुरा कर बोली): लेलो कपबोर्ड में से, जो तुम्हे अच्छी लगे।

मैं जब कपबोर्ड खोला, उसमे ढेर सारी ब्रा-पैंटी थी। मैं उसमे से ब्लू कलर की पैंटी निकाला और कपबोर्ड बंद कर दिया।

मैं: आपके पास तो बहुत सारी ब्रा-पैंटी है।

प्रिया दी: हां भाई, बॉयफ्रेंड लोग देते रहते है।

हम दोनों साथ में जोर-जोर से हसने लगे।

मैं ब्लैक वाली और ब्लू वाली ब्रा-पैंटी दोनों ले लिया, और ब्लैक वाली पैंटी मुंह में डाल ली प्रिया दी के सामने।

प्रिया दी हसने लगी और बोली: रोहन तुम ऐसे बहुत प्यारे लग रहे हो।

फिर मैं अपने बाथरूम में आ गया। वहां 2 बार मुठ मारा ब्लैक ब्रा और ब्लू ब्रा पर।फिर मैं अपने बेड पर आकर सो गया। फिर दी को शाम को उनकी ब्रा-पैंटी वापस कर दिया। अब जब भी मेरा मन होता है, मैं दी के रूम में जाकर उनकी ब्रा-पैंटी ले आता हूं। कभी-कभी तो प्रिया दी मेरे रूम में खुद ही अपनी ब्रा-पैंटी लाकर मुझे देती है।

एक दिन कॉलेज में कुछ लडके बात कर रहे थे कि प्रिया को 3-4 लोग कॉलेज के पीछे वाले रूम में ले गए थे, क्योंकि उसमें कैमरा नहीं लगा। मैं जब उन लोगों की बात सुना, तो मैं चोरी कॉलेज के पीछे उसी रूम के बगल में पहुंच गया। वहां खिड़की से देखा, सच में 3 लडके थे जो कि दो कॉलेज के थे सलमान और असीफ़, एक कोई बाहरी था।

वो तीनों मिल कर प्रिया दी को प्यार कर रहे थे। प्रिया दी भी मज़े कर रही थी। बारी-बारी वो सब प्रिया दी की पैंटी के अंदर उनकी चूत में ऊंगली कर रहे थे,

और मेरी बहन की शर्ट के बटन खोल कर उनकी ब्रा को नीचे करके उनकी चूचियों को चूस रहे थे। असीफ़ दी की स्कर्ट उठा कर नीचे बैठ कर उनकी चूत चाटने लगा, और सलमान और जो बाहरी लड़का था, वो दोनों मिल कर मेरी बहन की एक-एक चूची चूस रहे थे। मेरी बहन की चूचियां इतनी बड़ी-बड़ी है कि दोनों यही सोच रहे थे कि प्रिया दी की चूचियां ही खा जायेंगे।

लेकिन दोनों कितनी भी कोशिश कर रहे थे, मेरे बहन की सिर्फ आधी चूचियां ही अपने मुंह में ले पा रहे थे। मैं खिड़की से ही बाहर देख रहा था। मुझे अच्छा लग रहा था ये सब देख कर। तभी प्रिया दी की नज़र मुझ पर पड़ी। मैं उनको देख रहा था, और वो मुझे। मैं हस कर वहां से भाग गया। प्रिया दी लगभग 15 मिनट बाद ही वहां से निकली। फिर हम कॉलेज से घर आये। मैं दी को अपनी बाइक पर ले आ रहा था। रास्ते में प्रिया दी मुझसे पूछी-

प्रिया दी: रोहन तू वहां हम लोगों को देख कर हंसा क्यूं?

मैं (मैं बाइक चला रहा था और बोला): दी घर चलो बताता हूं।

हम दोनों कुछ देर में घर पहुंच गए और फ्रेश हुए।

फिर मैं दी के रूम में गया। प्रिया दी किसी के साथ व्हाट्सप्प पर चैटिंग कर रही थी।

मैं वही बगल में बैठ गया।

प्रिया दी: तुमने बताया नहीं तुम हंस क्यूं रहे थे?

मैं: वो दोनों आपकी एक-एक चूची ही नहीं संभाल पा रहे थे। दोनों सोच रहे थे कि पूरी चूची अपने मुंह में भर लूं, लेकिन दोनों मिल कर आपकी आधी चूची भी मुंह में नहीं ले पा रहे थे, यही देख कर मुझे हंसी आ गयी।

प्रिया दी: ओह, ये बात (हंसते हुए)।

मैं: वैसे दी आप बहुत जल्दी आ गयी वहां से?

प्रिया दी: हां भाई, थोड़े बहुत मज़े करके हम लोग वापस आ गये। वहां सेफ नहीं है।

मैं: बेचारों को असली मज़ा तो मिल ही नहीं पाया।

प्रिया दी: बेचारे नहीं है वो सब। तेरी बहन को दो बार ले चुके है। वहां तो बस ऐसे थोड़े बहुत मज़े करने गए थे।

मैं: दी वो सलमान और असीफ़ तो कॉलेज के ही थे, और वो तीसरा वाला कौन था?

प्रिया दी: वो भाई सलमान का फ्रेंड था हैदर।

मैं: क्या बात है, ये तो खुद मज़े तो कर ही रहे है, साथ अपने दोस्तों को भी लाते है आपके साथ मज़े करने के लिए?

प्रिया दी और मैं साथ में हसने लगे।

प्रिया दी: भाई वो सब तेरी बहन के साथ मज़े करते है। तो तेरी बहन उन सभी के साथ मज़े ही करने जाती है।

मैं: आखिर बहन किसकी है।

फिर जोर से हसने लगे।

मैं: तब तो आज मेरी बहन के मज़े करने की डेट कन्फर्म हो गयी होगी असीफ़, सलमान, और हैदर के साथ?

प्रिया दी (मुस्कुरा कर बोली): हां अगले मंडे को। लेकिन असीफ़‌ और सलमान नहीं हैदर बुलाया। वो रहेगा और उसके कुछ दोस्त।

मैं: ओह, नया बंदा और उसके दोस्त।

कहां ले जायेगा दी हैदर आपको?

प्रिया दी: पता नहीं भाई। वो बोला तुम रेडी रहना मैं तुम्हे मार्केट में लेने आऊंगा।

फिर थोड़ी बहुत इधर-उधर की बातें हुई।

फिर मैं अपने रूम में आ गया। दो दिन बाद मंडे था। हम लोगों कॉलेज गए और वापस आये। प्रिया दी पार्लर गयी, वहां से आई और मम्मी से बोली आज उसके फ्रेंड के घर पार्टी थी, वहीं जाएगी और कल सुबह आएगी। मम्मी बोली ठीक है जाओ‌। फिर

प्रिया दी मेरे रूम में आयी। मैंने दी को देखा, क्या मॉल लग रही थी। टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहनी हुई थी। दी की बड़ी-बड़ी चूचियां, बड़ी-बड़ी गांड, गोरी चिकनी जांघे दूध सी गोरी क्या मॉल लग रही थी।

मैं बोला: प्रिया दी सच में आज बम लग रही हो।

प्रिया दी: थैंक्स मेरे प्यारे भाई।

सुन भाई, मुझे बाहर मार्केट तक छोड़ दे। वो वहीं मुझे लेने आएगा।

मैं बोला: ठीक है दी।

मैं बाइक पर दी को बैठा कर मार्केट में ले गया। सब दी की पीछे गांड देख रहे थे।

मैं मार्केट पहुंचा ही, तभी हैदर का फ़ोन आ गया। दी बताई वो यही आयी थी। तभी कुछ देर बाद ही एक फॉरच्यूनर आयी। उसमें 4 लोग बैठे थे। वो सब दी को ही देख रहे थे। हैदर ड्राइव के बगल वाली सीट पर ही बैठा था।

उसने पीछे एक आदमी से बोला: आमिर भाईजान, देखिये मॉल कैसी है।

पीछे वाली सीट पर एक आदमी लगभग 40 साल का रहा होगा, वो दी को घूर-घूर कर ऊपर से नीचे देखा और बोला-

आदमी: वाह हैदर, क्या मॉल है यॉर। आज रात इसको सोने नहीं देंगे।

मुझे और प्रिया दी को उसकी बात सुन कर हसीं आ गयी। हम दोनों हसने लगे।

पीछे वाले जो लोग बैठे आमिर और उसके साथ एक बंदा कोई और था।

उसने दी को बोला: आजा तू हमारी गोदी में।

प्रिया दी: भाई अब तुम जाओ, मैं कल सुबह फोन करूंगी।

मैं: ठीक है दी, आप जाओ। आज रात खूब ज़म कर मज़े करना आप इन चारों के साथ।

प्रिया दी: बिल्कुल मेरे भाई, लव यू।

मैं: लव यू दी।

आमिर ने गाड़ी का गेट खोला और दी को अपनी गोद में बिठा लिया, और किस करने लगा। उसके बगल वाला दी की चूचियां दबाने लगा।

हैदर ड्राइवर से बोला: जल्दी चलो।

हैदर भी पीछे मुड़ कर दी के साथ मस्ती करने लगा। तभी ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट की और ले गया।

मैं मार्केट में थोड़ा घूमा, फिर फिर घर चला गया।

मैं और मम्मी रात को खाना खाये, और सोने चले गए। मैं सोचा क्यूं ना दी के रूम में जाऊ। वहां जाकर दी के बेड पर अपनी ही बहन की ब्रा-पैंटी लेकर 3 बार मुठ मारी, और दी के ही बेड पर सो गया।

अगली सुबह प्रिया दी का कॉल आया सुबह 8 बजे

प्रिया दी:………………
 
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सुबह 8 बजे प्रिया दी का कॉल आया। मैं फ़ोन उठाया-

मैं: हैलो दी।

प्रिया दी: भाई कल मार्केट में जहां तू मुझे छोड़ कर गया था, वहीं आजा लेने। मैं अभी आ रही हूं।

मैं: ओके दी, मैं अभी आता हूं।

मैं भी बिस्तर से उठा, और जल्दी से मुंह धो कर गाड़ी लेकर मार्केट पहुंच गया, जहां कल प्रिया दी को हैदर अपने साथ ले गया था।

जब मैं वहां पहुंचा तो दी वहां नहीं आयी थी। मैं 2 मिनट वेट किया, तभी हैदर की गाड़ी मेरे बगल में ही रूकती है। सामने सलीम ड्राइव कर रहा था। बगल में हैदर बैठा था। पीछे वाली सीट पर क़ासिम प्रिया दी को अपनी गोद में बिठाए था, और उसके साथ मस्ती करने में लगा था।

फिर सलीम और हैदर भी दी की चूचियों के साथ खेलने लगे। मुझे गाड़ी के शीशे से दिख रहा था सब। करीब 5 मिनट तक वो लोग मेरी बहन के साथ मस्ती किये, फिर प्रिया दी गाड़ी से बाहर आयी।

हैदर: प्रिया टाइम मिलेगा तो जरूर कॉल करना। तुझे फिर हम लोग ले जायेंगे।

सलीम और क़ासिम भी बोले: हां प्रिया जरूर कॉल करना। तुम्हारे साथ बहुत मज़ा आया पूरी रात।

प्रिया दी: बिल्कुल यॉर, मुझे भी आप लोगों के साथ बहुत मज़ा आया।

फिर वो लोग गाड़ी लेकर निकल जाते है। मैं भी दी को बिठाता हूं, और घर निकल जाता हूं। थोड़ी ही देर में मैं दी को लेकर घर पहुंच जाता हूं। मैं गाड़ी को पार्किंग में लगाता हूं, फिर हम दोनों घर की तरफ जाने लगते है। प्रिया दी मेरे आगे चलती है, और मैं उनके पीछे जाता हूं। मैं देखता हूं प्रिया दी के चलने की स्टाइल थोड़ी बदल गयी थी‌।

मैं: क्या बात है दी, लगता है चारों ने जम कर चोदा है आपको। आपके तो चलने ‌का स्टाइल ही बदल गया है।

प्रिया दी (शरमाते हुए): नहीं भाई, ऐसी बात नहीं है। तुम मेरा मज़ा ना लो।

मैं: ओह तो चुदाई अच्छी नहीं हुई आपकी कल रात?

प्रिया दी: ऐसी बात नहीं है भाई। मैं ये नहीं बोली मेरी चुदाई अच्छे से नहीं हुई। चुदाई तो पूछो मत कैसे हुई तेरी बहन की।

मैं: अच्छा तो कैसे हुई चुदाई मेरी प्यारी बहन की?

प्रिया दी: भाई चारों ने मुझे पूरी रात सोने नहीं दिया। चारों तुम्हारी बहन को पूरी रात रंडी की तरह चोदे।

मैं: वॉव दी, तब तो आप पूरी रात मज़े की।

प्रिया दी: मज़े की बात मत कर भाई, मुझे बहुत मज़ा आया उन लोगों के साथ।

तब तक हम दोनों रूम में आ गये थे।

प्रिया दी: भाई मेरे लिए कॉफ़ी लाओ प्लीज, पूरी रात की थकी हूं।

मैं: बिल्कुल दी, आप आराम करो, मैं अभी आपके लिए कॉफ़ी लाता हूं।

मैं तुरंत कॉफ़ी लाने चला गया, किचन में कॉफ़ी बनाया, और दी के रूम में ले गया।

प्रिया दी बेड पर ड्रेस चेंज करके लेटी हुई थी।

मैं: दी आपकी कॉफ़ी।

प्रिया दी: ओह थैंक यू मेरे प्यारे भाई।

दी कॉफ़ी पीने लगी। मैं वही बैठ गया दी की क्लीवेज दिख रहा था। दी की चूचियां लाल हो गयी थी

प्रिया दी: क्या देख रहे हो भाई इतना ध्यान से?

मैं: दी आपकी चूचियां देख रहा था, पूरी लाल हो गयी है।

प्रिया दी (मेरे तरफ मुस्कुरा कर): भाई सब ने मिल कर तेरी बहन की चूचियों को खूब नोच-नोच के मसला है

मैं: आखिर मेरी बहन की चूचियां है भी तो नोच-नोच के मसलने लायक। इतनी बड़ी-बड़ी चूचियां है, किसी का भी मन होगा इसको मसलने के लिए।

फिर दोनों जोर-जोर से हसने लगे।

प्रिया दी: तुम भी ना भाई बहुत शरारती हो.

मैं: आखिर प्रिया सिंह का भाई हूं, तो शरारती तो रहूंगा ही।

प्रिया दी कॉफ़ी पीने के बाद: भाई अब मैं सोने जा रही हूं। मुझे बहुत तेज़ नींद आ रही है।

मैं: बिल्कुल दी, आप सो जाओ।

मैं फिर अपने रूम में आ गया। फिर मैं कॉलेज चला गया। कॉलेज से 2 बजे वापस आया तो देखा दी अभी सो रही थी। मैंने ड्रेस चेंज किया, फिर दी के रूम में गया, दी को उठाया और बोला-

मैं: दी चलो खाना खा लेते है।

प्रिया दी भी उठी और मेरे साथ खाना खाई। दी भी सुबह से खाना नहीं खाई थी, इसलिए उसको भी भूख लगी थी। हम दोनों खाना खाये, फिर हसीं मज़ाक हुआ। शाम को हम दोनों घूमने भी गए। वापस आये तो मैं और दी रूम में बैठ कर बात कर रहे थे कि मम्मी आ गयी।

मम्मी: प्रिया मैं कल मुंबई जा रही हूं तेरे पापा के यहां कुछ दिनों के लिए।

मैं: कल कितने बजे आपकी ट्रैन है मम्मी?

मम्मी: सुबह 7 बजे ही ट्रैन है बेटा।

प्रिया दी: कोई बात नहीं मम्मी, हम लोग कल सुबह जल्दी उठ कर आपको स्टेशन पहुंचा देंगे।

मम्मी: हम्म बेटा।

फिर मैं और दी मम्मी साथ में खाना खाये, और सो गए। क्यूंकी मम्मी को कल सुबह स्टेशन ले जाना था। कल सुबह 6 बजे दी मेरे रूम में आ गयी-

प्रिया दी: भाई उठ, मम्मी को स्टेशन छोड़ना है।

मैं भी उठा, फ्रैश हुआ, गाड़ी निकाली। फिर मैं दी और मम्मी को बैठा कर हम स्टेशन पहुंच गए। कुछ ही देर में ट्रैन आ गयी। मैं और दी सामान लेकर ट्रैन में रखे, और मम्मी को उनकी सीट पर बिठाया।

ट्रैन जाने के बाद मैं और दी घर वापस आये। हम दोनों नाश्ता किये। मैं हाल में ही बैठा था। दी अपने रूम में जाकर किसी लड़के से बात करने लगी। जब कॉलेज का टाइम हुआ तो मैं रेडी होने के लिया चला गया। जब रेडी हो गया, सोचा देखूं दी अभी रेडी हुई थी कि नहीं। जब मैं दी के रूम में गया, तो देखा दी अपनी क्लीवेज की पिक ले रही थी, और किसी को व्हाट्सप्प पर भेज रही थी।

मैं: दी कॉलेज चलोगी?

प्रिया दी‌ (अपनी क्लीवेज सही करते हुए): नहीं भाई, आज कॉलेज जाने का मन नहीं है। अच्छा हुआ तू आ गया,‌ तुझे मैं बुलाने ही वाली थी।

मैं: क्यूं क्या हुआ दी? बोलो क्या बात है?

प्रिया दी: भाई एक वीडियो बनानी है मेरी।

मैं: हां दी बिल्कुल बना दूंगा वीडियो। कैसी वीडियो बनानी है बताओ?

प्रिया दी: ये लो मेरी मोबाइल, मैं डांस करूंगी तुम वीडियो बनाना।

मैं: ठीक है दी, मैं आपके डांस का वीडियो बना देता हूं।

मैंने वीडियो बनानी स्टार्ट की। गाना था हाय रे गर्मी। प्रिया दी अपनी बड़ी-बड़ी गांड मटका-मटका कर अपनी क्लीवेज दिखा कर डांस करने लगी। प्रिया दी की आधी चूचियां दिख रही थी। बहन की इतनी बड़ी मटकती गांड देख कर मज़ा आ गया। 2 मिनट की ही वीडियो बनाई। फिर दी मुझसे मोबाइल ली, और अपने डांस का वीडियो देखने लगी।

प्रिया दी: भाई कैसा लगा मेरा?

मैं: बहुत हॉट डांस है दी।

फिर दी उस वीडियो को एक व्हाट्सप्प ग्रुप में भेजी। उस ग्रुप का नाम था पठान ग्रुप। वो वीडियो जाते ही लड़कों की तारीफे आना शुरू हो गयी। इब्राहिम पठान नाम के एक लड़के का मैसेज आया, “क्या गांड है प्रिया तेरी, तुझे ऐसे मटका-मटका कर चोदूंगा”। तभी अब्दुल का मैंसेज आया, “वाह प्रिया, तेरी चूचियों में डूब जाने का मन कर रहा है”। मानो मैसेज की लाइन लग गयी।

मैं: वाह दी, आपकी तो तारीफ करते-करते थक नहीं रहे है ये लोग।

प्रिया दी: मैं हूं ही तारीफ के काबिल भाई।

मैं: वो तो हो दी। दी इस ग्रुप में कितने लड़के होंगे?

प्रिया दी: ज्यादा नहीं है भाई, बस 58 लोग ही है।

मैं: तो ये वीडियो किसी और लोगों को भेज दिए तो?

प्रिया दी: अपने खास दोस्तों को ही भेजते है भाई। सब को नहीं भेजते है ये लोग।

मैं: और कोई काम है दी मेरे लिए?

प्रिया दी: नहीं बस यही काम था। थैंक यू सो मच भाई, लव यू।

मैं: लव यू टू दी। अच्छा दी अब मैं कॉलेज जा रहा हूं

प्रिया दी: ओके भाई, बाय।

मैं: बाय दी।

मैं कॉलेज चला गया।
 

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कॉलेज में पढ़ाई और मस्ती करने के बाद जब मैं वापस 2 बजे कॉलेज से घर आया, तो घर के बाहर गाड़ी खड़ी थी‌। मुझे लगा कौन आया होगा इस टाइम। मेरे पास घर की दूसरी चाबी थी। मैंने गेट खोला। फिर जब अंदर गया तो दी के रूम से कुछ लड़कों के आवाज़ें आ रही थी, और दी की अह्ह्ह्ह अह्ह्ह उममममममम आआईई की आवाज़ें घर में गूंज रही थी।

जब मैं बगल में गया, और वहां से दी रूम में देखा, तो दी के मुंह में लंड था। वो ताबड़-तोड़ दी के मुंह को चोद रहा था। मेरी बहन की चूचियां एक लड़का मसल-मसल के चूस रहा था। एक लड़का जिसका पहला मैसेज आया था इब्राहिम, वो दी की टांगे फैला कर जम कर शॉट पर शॉट लगा रहा था। और दो लड़के अपना नम्बर लगाए थे मेरी बहन को चोदने के लिए। उधर अब्दुल दी के मुंह में अपना लंड डाल कर चुसवाने लगा।

उन सबके लंड नुकीले-नुकीले, काले-काले, और मोटे-मोटे थे। मेरी बहन प्रिया दी उन नुकीले मोटे लंडो को लेकर बिस्तर पर मज़े कर रही थी। जब इब्राहिम दी को शॉट लगा रहा था, दी की चूचियां मानो फुटबॉल हो ऐसे उछल रही थी‌।

अब्दुल बोला: वज़ीर भाई, इसकी चूचियां चोदो।

वज़ीर दी की चूचियों के बीच अपना लंड डाल कर दी की चूचियां चोदने लगा। प्रिया दी के मुंह में एक लंड, चूची में एक लंड, और चूत में एक लंड था। एक लड़का चुत चोदने के लिए पीछे लगा था, दूसरा लंड चुसवाने के लिए अब्दुल के पीछे था। एक लड़का प्रिया दी की बगल चाट रहा था। ये नज़ारा देख कर मेरा दिल ख़ुश हो गया। मैंने मोबाइल निकाला और कुछ देर का वीडियो भी बनाया।

अकेले मेरी बहन 6 लोगों को संभाल रही थी। बिस्तर पर अकेली मेरी दी, और वो 6 लोग चारों तरफ से नोच रहे थे दी को। इब्राहिम चूत चोदने के बाद दी के मुंह में अपना लंड डाल दिया। अब आदिल ने दी के चूत में अपना लंड डाला और बोला, “देख रंडी, मैं तुझे कैसे चोदता हूं”।

फिर आदिल ने एक ही झटके में अपना पूरा लंड मेरी बहन की चूत में घुसा दिया। दी की तो पूरी आंखे खुल गयी। लेकिन इब्राहिम का लंड मुंह में था, तो बेचारी बस उम्म्म ईईईई करके रह गयी। फिर आदिल क्या ज़बरदस्त झटके मार रहा था। पूरा बेड हिल जा रहा था।

इब्राहिम बोला: वाह आदिल भाईजान, क्या मस्त चोद रहा है तू इस कुतिया को।

अब्दुल बोला: इब्राहिम अभी मेरा नंबर तो आने दे, फिर देख इस मादरचोद को कैसे चोदता हूं।

वज़ीर दी की चूचियां पकड़ कर उसको पूरा रगड़ रहा रहा था। फिर एक चूची अब्दुल दोनों हाथों से जोर-जोर रगड़ रहा था और दूसरी चूची वज़ीर। दोनों पूरी ताकत के साथ मेरी बहन की चूचियों को मसल रहे थे। दी की चूचियां लाल होना शुरू हो गयी थी। फिर आदिल ने दी को घुमा कर दी की एक टांग उठा दी। इब्राहिम ने दी की टांगे पकड़ लिया।

अब आदिल और जोर-जोर से झटके मार रहा था घपा-घप के। दी की चूत में लंड ऐसे घुस रहा था, मानो ड्रिलिंग मशीन छेद कर रही हो। तभी उनके साथ दूसरा लड़का मिर्ज़ा सुल्तान दी की गांड में अपना लंड घुसाना शुरू किया। दी की गांड टाइट थी। उसने अपना लंड पहले धीरे से घुसाया, फिर झटके मार के पूरा घुसा दिया।

दी सुल्तान की तरफ देख रही थी। दी के चेहरे पर मुस्कान थी। उसकी आंखों से ही पता चल रहा था कि वो बहुत खुश थी।

सुल्तान बोला: झटके मारुं?

रंडी दी इब्राहिम का लंड मुंह से निकाल कर बोली: इसमें पूछने वाली क्या बात है?

ये बात सुन कर उन लोगों के अंदर और जोश आ गया। फिर सुल्तान दी की गांड को चोदने लगा। आदिल दी की चूत चोद रहा था। दोनों ने अपनी-अपनी स्पीड बढ़ा दी।

अब पूरे घर में थप थप थप घच घच फट चुदाई की आवाज़ गूंजने लगी। साथ में एक प्यारी आवाज़ दी की आ रही थी। दी आह आह आह ओह ओह हम्म‌ कर रही थी। मुझे सुन कर कर सुकून मिल रहा था। मैं तो यही चाहता था ये सीन ऐसे ही चलता रहे।

करीब 25 मिनट तक ये मज़ेदार चुदाई हुई दी की। फिर अब्दुल दी की गांड में अपना लंड डाला, और वज़ीर ने दी के चूत में अपना लंड डाला। जब अब्दुल झटके मरना शुरू किया, तो प्रिया दी अपनी गांड पकड़ ली। अब्दुल ऐसे झटके मार रहा था, कि दी ऊपर उछले जा रही थी।

अब्दुल और वज़ीर दोनों आपस में ही मुकाबला करने लगे, कि कौन कितने तेज़ झटके मारता है। फिर वो दोनों दी को अपनी गोद में उठा लिए। फिर दोनों तरफ से दनादन झटके लगने स्टार्ट हो गए। अब दी के मुंह में लंड नहीं था। दी अब खुल कर मज़े कर रही थी। इब्राहिम और आदिल की चूचियों को चूसने लगे। मेरे लंड से पानी गिरने लगा ये सीन देख कर।

मैंने वहां से निकल कर चुपके से फिर से दरवाज़ा लॉक कर दिया, जिससे किसी को डिस्टर्ब ना हो। फिर मैं घर से निकला और अपने दोस्तों के साथ घूमने लगा। मैं शाम को 6 बजे घर आया तो देखा गाड़ी जा चुकी थी। अब मैं तुरंत घर में गया, अपना ड्रेस चेंज किया, और फिर दी के रूम में गया।

प्रिया दी: रोहन भाई कहां थे तुम? इतना लेट क्यूं आ रहे हो कॉलेज से आज?

मैं: दी मैं तो टाइम से ही आ गया था कॉलेज से।

वो 6 लोग आपको प्यार कर रहे थे, और आप भी उनके साथ मस्ती कर रही थी, तो मैंने डिस्टर्ब नहीं किया आप लोगों को, और मैं चला गया।

प्रिया दी: ओह्ह तुम आये थे। सॉरी भाई मैं तुम्हे बताना भूल गयी थी। मुझे बता देना चाहिए था तुम्हें।

मैं: कोई बात नहीं दी, वैसे दी अब्दुल और वज़ीर आपको गोदी में उठा कर चोद रहे थे। मेरा तो दिल ही खुश हो गया वो सीन देख कर।

प्रिया दी: हा भाई मस्त चोदा ना अब्दुल और वज़ीर दोनों ने मिल कर तेरी बहन को?

मैं: हां दी।

प्रिया दी: भाई मेरे लिए कोई नई बात नहीं है। मेरी चुदाई होती रहती है ऐसे अक्सर।

अब हम दोनों साथ में खाना खाते है। मैं उनको चुदाई की विडिओ भी दिखता हूं, जो मैंने दी की चुदाई के टाइम चोरी से बनाई थी।

प्रिया दी: वाह भाई मस्त है‌। मेरे व्हाट्सप्प पर भेजो।

मैं ( हसते हुए ): नहीं पहले 50₹ दो तब भभेजूंगा।

प्रिया दी: क्या अपनी ही बहन की चुदाई की वीडियो अपनी बहन के व्हाट्सप्प पर भेजने के लिए पैसे मांग रहे हो? ये गलत है भाई।

मैं: ऐसा नहीं है दी, मैं तो मज़ाक कर रहा था‌। देखो भेज दिया हूं।

प्रिया दी: थैंक यू भाई।

मैं: तब दी आज रात क्या प्लान है?

प्रिया दी:………..
 

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प्रिया दी: भाई आज रात तो मेरी फ्रेंड आस्था के बड़े भाई की शादी है। तो उसने मुझे और तुम्हें भी इनविटेशन भेजा है। तो हम दोनों को वही जाना है।

मैं: अच्छा है दी, वहीं आज रात खाना खा लेंगे। खाने की कोई टेंशन नहीं। वैसे कब चलेंगे?

प्रिया दी: भाई वहीं शाम 7 बजे। तू रेडी हो जाना जल्दी से।

मैं: ओह मैं जल्दी से रेडी हो जाऊंगा, 4 घंटे आप तैयार होती हो, और मुझे बोल रही हो जल्दी से तैयार हो जाना।

प्रिया दी: अच्छा देखना आज तेरे से जल्दी तैयार होकर दिखाउंगी।

मैं: ऐसा तो आज तक नहीं हुआ है, ना ही कभी होगा।

हम दोनों भाई बहन में ऐसे ही मज़ाक और बातें चल रही थी। शाम को 4 बज गए। फिर हम दोनों बाजार घूमने चले गए। दी को कुछ कपड़े भी खरीदने थे। मैं भी अपनी दाढ़ी शेविंग करा के सेट करा लिया। 5:30 बज गए।

प्रिया दी: भाई गोलगप्पे खिला दो।

मैं (मज़ाक में): दी आपके बड़े-बड़े गोलगप्पे ना जाने कितने लोग खा रहे है, और आप बाज़ार के छोटे-छोटे गोलगप्पे खा रही हो।

प्रिया दी ( मुस्कुरा कर ): भाई तेरी बहन के पास गोलगप्पे नहीं दूध की टंकी है, वो सब तेरी बहन का दूध पीते है।

हम दोनों हसने लगे।

मैं: सॉरी दी, आपकी दूध की टंकी को गोलगप्पा बोल दिया। चलो आ जाओ, गोलगप्पे खिला देता हूं आपको।

फिर मैं दी को गोलगप्पे खिलता हूं। वापस हम दोनों घर आते है। 6:10 हो गये थे‌।

मैं: दी चलो रेडी हो जाओ, 7 बजने ही वाले है।

प्रिया दी: हां भाई मैं जा रही हूं तैयार होने, तुम भी तैयार हो जाओ।

मैं भी तैयार होने चला गया। दी अपने रूम में चली गयी। मैं तो 7 बजे तक तैयार हो गया। फिर मैं दी को बुलाने उनके रूम में गया। दी अभी तैयार ही हो रही थी।

मैं: क्यूं दी, मैंने बोला था ना आप मुझसे पहले तैयार नहीं हो पाओगी। आप हार गयी ना।

प्रिया दी: अच्छा बाबा तुम जीत गए मैं हार गयी, ख़ुश?

मैं उनके बेड पर बैठ जाता हूं, और दी को देखता रहता हूं।

प्रिया दी: भाई शादी में क्या पहनूं सूट या साड़ी?

मैं: बैकलेस वाली ब्लाउस पर साड़ी पहनो, बहुत अच्छी लगोगी।

प्रिया दी: ओके भाई।

मैं: सुनो दी।

प्रिया दी: हां बोलो भाई।

मैं: दी ब्रा मत पहनना, बस ब्लाउज़।

प्रिया दी (मुस्कुरा कर): अच्छा तू रूम के बाहर जा, तभी तो साड़ी पहनूंगी।

मैं: मैं बाहर जाकर आपका वेट करूं। उसके लिए कुछ चार्ज लगेगा

प्रिया दी: हां पता है मुझे तुम्हे क्या चार्ज चाहिए।

मैं: तो दो अपनी पैंटी जो आज पहनी थी।

प्रिया दी: शैतान हो गए तुम भाई। अच्छा जाओ बाथरूम में है, लेलो।

मैं दौड़ते हुए दी के बाथरूम में गया। पैंटी साइड में टंगी हुई थी। मैं झट से उठा कर उसको सूंघने लगा। फिर मैं बाहर आया और दी के सामने उनकी पैंटी चाटने लगा।

प्रिया दी (हसते हुए): भाई मेरी पैंटी खा मत जाना।

मैं: मन तो यही कर रहा है दी‌‌। इसमें आपके पसीने और चूत की खुशबू इतनी प्यारी जो है।

प्रिया दी: अच्छा भाई, अब जा बाहर मुझे रेडी हो जाने दे।

मैं पैंटी लेकर बाहर आया उसको पूरा चाटने लगा‌।

आधे घंटे बाद प्रिया दी बाहर आयी और बोली: कैसी लग रही हूं भाई?

मैं तो बस अपनी बहन को देखता ही रह गया। क्या मॉल लग रही थी। प्रिया दी ने रेड कलर की साड़ी पहनी थी। उस पर हल्के-हल्के ब्लैक कलर के डिज़ाइन बने थे, और बैकलेस ब्लैक कलर की ब्लाउज़ थी। ऊपर दी की बड़ी-बड़ी चूचियां चार चांद लगा रही थी‌। मैं दी से बोला था कि वो ब्रा ना पहने, तो दी भी ब्रा नहीं पहनी थी, जिसके कारण ब्लाउज़ के ऊपर बड़े-बड़े चूचों के नज़ारे दिख रहे थे। मैं तो बस देखे ही जा रहा था। 5 मिनट बाद-

प्रिया दी: अरे बताओगे भी कैसी लग रही हूं? या बस अपनी बहन को आज आंखों से लूट लोगे?

मैं: सॉरी दी, आप ऐसी मॉल लग रही हो, कि मेरे पास तो कोई वर्ड ही नहीं है। शानदार आइटम लग रही हो आज तो।

प्रिया दी: ओह्ह थैंक यू सो मच भाई!

मैं: दी एक बार पीछे तो घूमो। पीछे से तो देखूं कैसी लग रही हो।

प्रिया दी: बिल्कुल भाई, लो देख कर बताओ कैसी लग रही हूं?

दी पीछे घूमी। वॉव क्या नज़ारा था। मेरी बहन की नंगी ग़दराई हुई पीठ। कमर के नीचे साड़ी पहनी थी दी। उसकी बड़ी-बड़ी गांड क्या ही बताऊं दोस्तों, मुंह में पानी आ गया। चौड़ी-चौड़ी गांड बहुत ही सुंदर लग रही थी।

मैं: दी बहुत प्यारी लग रही हो। आपकी बड़ी-बड़ी गांड, आपकी नंगी पीठ, किसी का भी मन यही होगा बस ये मॉल एक रात के लिए मिल जाए बस।

प्रिया दी: अच्छा जी मेरे प्यारे छोटे भाई। अब चला जाए या रात भर मेरी ही तारीफ करते रहोगे?

मैं: हां दी चलो ना। क्या करूं, आपको देखने का मन कर रहा है ऐसे ही।

प्रिया दी (मुस्कुरा कर): अच्छा बस भी करो चलो।

मैंने जब टाइम देखा तो 8:30 हो गये थे।

मैं: अरे दी लेट हो जायेगा। जल्दी चलो, वापस भी आना है।

मैं फिर तुरंत गाड़ी निकाला। दी घर का गेट बंद करके गाड़ी में बगल की सीट पर बैठी। मैं गाड़ी लेकर निकल गया।

मैं: थैंक्स दी।

प्रिया दी: थैंक्स किस बात के लिए भाई?

मैं: वो मैं आपसे बोला था कि आप ब्रा मत पहनना। आपने मेरी बात मान ली उसके लिए।

प्रिया दी: तो इसमें थैंक्स वाली क्या बात है? तू मेरा छोटा भाई है। जब इतना प्यार से बोला तो कैसे ना मानती तुम्हारी बात?

मैं बार-बार दी की चूचियां देख रहा था।

प्रिया दी: भाई गाड़ी सामने देख कर चला। मेरी चूचियां देखेगा तो ठोक देगा किसी को।

मैं: क्या करूं दी, आपकी चूचियां है ही ऐसी। कितना भी देखो, मन ही नहीं भरता है।

फिर हम दोनों 9:30 तक दी के फ्रेंड के घर आस्था के घर पहुंच गए। मैंने गाड़ी को पार्क किया। हम दोनों अंदर गए। वहां जब दी बाहर निकली, वहां सभी लोग दी की चूचियां, कोई गांड और उसकी पीठ को घूर-घूर कर देख रहे थे। इतनी बड़ी चूचियों वाली, और इतनी बड़ी गांड वाली मॉल तो बहुत कम मिलती है। फिर वहां दी अपने फ्रेंड से मिली। थोड़ी-बहुत बात-चीत करने के बाद हम दोनों खाना खाने आ गये। मैं और दी दोनों साथ में खाना खा रहे थे।

मैं: दी देखो ना आपकी चूचियों को सब लोग कैसे घूर-घूर देख कर मज़े ले रहे है।

प्रिया दी: देखने दे भाई, मुझे भी मज़ा आ रहा है। ऐसे ही सब घूरे मुझे। तूने अच्छा किया मुझे ब्रा पहनने से मना कर दिया। ब्लाउज़ के बाहर मेरे बड़ी क्लीवेज दिख रही है। वो सब देख कर ही सब पागल हो गए है। मैं और दी दोनों साथ में हस-हस कर मज़े लेकर खाना खा रहे थे। तभी एक लड़का आया हैंडसम, मस्त बॉडी, 6 फीट लम्बा, दाढ़ी वाला, लगभग 30-32 साल का रहा होगा‌। था तो सावला ही, लेकिन बहुत हैंडसम लग रहा था। मस्त चौड़ी बॉडी‌ थी। देखने से ही कोई बॉडीबिल्डर लग रहा था।

वो आते ही ज़ब दी को पीछे से देखा तो दी की गांड और पीठ को घूर-घूर कर देख रहा था। अपने होंठो को जीभ से चूस रहा था। मानो मेरी बहन को लॉलीपॉप की तरह चूस जाए।

मैं: दी एक बार पीछे देखो, वो लड़का आपको कैसे देख रहा है।

प्रिया दी (पीछे घूम कर उस लड़के को देखी): वॉव भाई, ये कौन हैंडसम है? मस्त बॉडी वाला लड़का है यॉर।

ज़ब वो लड़का सामने से देखा तो दी की चूचियां अब तो उसको पागल कर दी।

मैं: पता नहीं कौन है दी। मैं भी तो अभी देखा हूं। ज़ब से आया है वो आपको ही देखे जा रहा है।

प्रिया दी: यॉर भाई पता कर ना कहां का है ये लड़का। यॉर मुझे तो ये बहुत पसंद है। मॉल है ये भाई मॉल, लड़का नहीं।

मैं (मुस्कुराते हुए): अच्छा दी तो अब ये लड़का चाहिए आपको आज रात?

प्रिया दी: भाई ये भी पूछने वाली बात है।

मैं: तो दी आप पटा लो ना। आपके जाल में तो वो वैसे फसा हुआ है।

प्रिया दी उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा दी‌।

वो लड़का ख़ुश हो गया। वो भी स्माइल कर दिया। वो दी की गांड को लगातार देखे जा रहा था।

मैं: लगता है दी उसको आपकी गांड बहुत पसंद आ गयी है। आप एक बार उसको अपनी गांड की तरफ इशारा करो।

प्रिया दी अपनी गांड की तरफ देख कर उसकी तरफ देखी। लड़का दी को लाइन मारा। फिर वो भी हमारे साथ खाना खाने आ‌ गया, और हम तीनों खाना खाने लगे। फिर हम तीनों बात-चीत शुरू किये।

मैं: तो आपका नाम क्या है?

लड़का: मेरा नाम फैज़ल अंसारी है।

फैज़ल: हांजी, आपका नाम?

प्रिया दी: प्रिया सिंह।

मैं: मेरा नाम रोहन सिंह।

वो मेरी दी के तरफ देख बोला: मुझ तो आप जैसी लड़कियां बहुत पसंद है।

प्रिया दी (स्माइल): वैसे आप कहां से हो फैज़ल?

फैज़ल: हैदराबाद, ये मेरे फ्रेंड की शादी है।

मैं: अच्छा जी आप यहां लखनऊ में फ्रेंड की शादी में आये हो?

फैज़ल: हां यॉर, फ्रेंड की शादी में आया हूं।

मै कुछ बोलता तभी फैज़ल मुझसे बोलता है: मैं तुम्हारी बहन से अकेले में कुछ बात कर सकता हूं?

मैं: बिल्कुल, आप लोग बात करो।

प्रिया दी मेरी तरफ स्माइल की। मैं भी स्माइल करके वहां से थोड़ी दूर चला गया। लेकिन वहां डीजे बज रहा था, तो आवाज़ क्लियर नहीं हो रही थी। कुछ देर बाद फैज़ल दी को साइड में ले जाता है। मैं भी तुरंत बगल से जाकर देखने लगता हूं।

फैज़ल और दी एक-दूसरे को किस कर रहे थे। लेकिन कोई न कोई बार-बार आ-जा रहा था, तो प्रॉब्लम हो रही थी। वे दोनों सही से किस भी नहीं कर पा रहे थे। फैज़ल दी को मेरे पास लाया और बोला: रुको अभी आता हू़ं।

मैं: क्या हुआ दी, वो क्यूं चला गया?

प्रिया दी: भाई वो कही गया नहीं है। तेरी बहन को बज़ाने के लिए रूम का इंतज़ाम करने गया है।

मैं: वॉव दी, आपके तो मज़े ही मज़े। पसंद है आपको?

प्रिया दी: फैज़ल की बॉडी बहुत मस्त है यॉर। ये जिम में ट्रेनर है। वो मुझे बाहों में जकड़ लिया था किस करते टाइम बहुत सॉलिड बॉडी है। इसके साथ तो मज़ा ही आ जायेगा।

तभी कुछ देर बाद ही फैज़ल आ जाता है: यॉर रूम तो मिल ही नहीं रहा है। कोई रूम साला खाली ही नहीं है यहां तो।

प्रिया दी निराश हो जाती है। मैं दी की तरफ देखता हूं। धीरे से दी के पास जा कर बोलता हूं-

मैं: क्यूं ना दी फैज़ल को अपने घर ले चले?

प्रिया दी‌(एक प्यारी सी स्माइल के साथ): थैंक यू सो मच भाई, लव यू।

मैं: लव यू टू दी।

प्रिया दी: फैज़ल तुम आज हमारे घर पर चलो। आज रात वहां कोई नहीं है।

फैज़ल (ख़ुश हो जाता है): ओके डार्लिंग, आज तेरी चुदाई तेरे ही घर करूंगा।

तुम अपनी फ्रेंड आस्था से मिल कर आओ। मैं अपने फ्रेंड से मिल कर आता हूं। वो दोनों एक-दूसरे के फ्रेंड से मिलने चले गए। तब तक मैं गाड़ी पार्क से बाहर निकाल लिया। थोड़ी ही देर में वो दोनों आ जाते है।‌ फैज़ल दी को लेकर पीछे वाली सीट पर बैठ जाता है। मैं भी तुरंत गाड़ी वहां से निकाल देता हूं। प्रिया दी और फैज़ल दोनों किस करते है। फैज़ल मेरी बहन की गांड पर थप्पड़ मारता है।

प्रिया दी: आह्ह फैज़ल, थोड़ा आराम से ही मारो। तुम्हारे हाथ भी तो लोहे जैसे है।

फैज़ल: साली तेरी गांड भी तो पूरी मटकदार वाली है। ऊपर से इतनी बड़ी गांड है तो कैसे कंट्रोल करूं?

प्रिया दी: मुझे पता था कि तुम मेरी गांड को ही तब से घूर रहे हो।

फैज़ल: प्रिया मैं तो तेरी गांड, बूब्स, तेरी नंगी मुलायम पीठ, पूरा ऊपर से नीचे तक घूर रहा था साली।

फिर फैज़ल दी को अपनी गोद में बिठा कर दी के ब्लाउज़ के ऊपर से ही चूचियां दबाने लगता है, और नंगी पीठ पर किस करने लगा। फैज़ल दी के बूब्स इतना जोर-जोर मसलने लगा। प्रिया दी कराह रही थी। उनकी प्यारी आवाज़ सुन कर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। मैं गाड़ी के मिरर से सब पीछे देख कर मज़े कर रहा था।

प्रिया दी: भाई गाड़ी थोड़ी फ़ास्ट चलाओ ना।

फैज़ल: देख रहा है ना, तेरी बहन को अब कंट्रोल नहीं हो रहा है। चल अब गाड़ी फ़ास्ट चला।

मैं: ओके फैज़ल।

मैं गाड़ी फ़ास्ट चलाया, और 11 बजे रात को घर पर पहुंच गए। फिर मैं गाड़ी साइड लगा दिया। फिर मैं घर का गेट खोला।

मैं: दी आ जाओ चलो घर में।

फैज़ल दी को खिलौने की तरह गोद में उठा लिया। वो इतना लम्बा, इतनी मस्त सॉलिड बॉडी वाला, प्रिया दी उसकी गोद में एक छोटी से बच्ची की तरह लग रही थी। फैज़ल दी को चारों तरफ घुमा-घुमा कर चूम रहा था। दी भी उसके साथ मज़े कर रही थी। मैं अंदर गेट खोला। फैज़ल दी को हाल में ही सोफे पर लिटा कर उनकी पीठ चाटने लगा। प्रिया दी भी आंखे बंद करके मज़े कर रही थी।

मैं बस दी के रूम की तरफ इशारे में फैज़ल से बोला: रूम यही है।

फैज़ल दी को अपने कंधे पर एक ही हाथ से उठा लिया। फिर दी को बेड पर पटक दिया। फिर शैतान की तरह दी को नोचने लगा। फैज़ल दी की चिकनी बगलों को चाटने लगा। दी तो मदहोश होने लगी। फिर मेरी बहन की साड़ी निकाल दी। ब्लाउज़ तो एक ही हाथ से एक ही झटके में फाड़ कर ऊपर फैन पर लटका दिया।

फिर क्या, असली नज़ारा फैज़ल के सामने था। मेरी बहन प्रिया दी की बड़ी-बड़ी चूचियां हवा में उछल रही थी। फैज़ल तो पहले दो मिनट आंखे फाड़-फाड़ के देखता ही रह गया।

प्रिया दी: क्या हुआ, देखते ही रह जाओगे या इन्हे प्यार भी करोगे?

फैज़ल: साली रंडी, आज तो तेरी दोनों चूचियों को नोच-नोच कर खा जाऊंगा‌। ये दोनों साली बहुत उछल रही है।

फैज़ल भी दी की चूचियों पर टूट पड़ा। उसके दोनों मज़बूत हाथ मेरी बहन की चूचियां पूरी ताकत से मसलने लगे। मेरी बहन की तो आंखे भर आयी

प्रिया दी: प्लीज फैज़ल अह्ह्ह उम्मम अह्ह्ह आराम से प्लीज आराम से दबाओ न।।

थोड़ी ही देर में दी की दोनों चूचियां गर्म होकर लाल-लाल हो गयी। फिर एक लेफ्ट वाली चूची को फैज़ल अपने मुंह में भर कर पूरी ताकत से चूसने लगा, और एक हाथ से राइट वाली चूची दबाने लगा।

फैज़ल को देखने से ऐसा लगा जिस प्रकार वो मेरी बहन की चूचियां चूस-चूस कर दबा रहा था, मानों दी की चूचियों से वो अभी दूध निकाल देगा।

दोनों चूचियां दी की लाल हो गयी थी। फिर फैज़ल दी की राइट वाली चूची को अपने मुंह में ले लिया, और लेफ्ट वाली चूची को दबाने लगा।

कुछ देर चूसने के बाद फैज़ल दी की चूचियों के निप्पल के साथ खेलने लगा। वो दी के निप्पल को हल्का-हल्का अपने दांतो से काटने लगा। प्रिया दी भी हल्की-हल्की सिसकियां लेकर खूब मज़े कर रही थी

फैज़ल:………..
 
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प्रिया दी को फैज़ल पूरी रात 6 राउंड ज़म कर चोदा। जब सुबह हुई, 8 बजे तो मैं उठा।‌ जब दी के रूम में आया तो देखा फैज़ल अपने कपड़े पहन रहा था, और मेरी बहन बेड पर नंगी बिस्तर पर सोइ थी। बेचारी थक गयी थी पूरी रात चुद कर

फैज़ल: रोहन मुझे रेलवे स्टेशन छोड़ दे। मेरा टाइम हो गया है। अब मैं निकलूंगा।

मैं: ओके।

फैज़ल कपड़े पहन कर रेडी हो गया, और दी को किस किया। उसके बूब्स को दबाया। लेकिन दी इतनी गहरी नींद में सोइ हुई थी, कि उसको पता भी नहीं चला। फिर मैं फैज़ल को रेलवे स्टेशन छोड़ कर वापस घर आया। मेरे कॉलेज का टाइम भी हो गया था, तो मैं कॉलेज के लिए रेडी होने लगा।

जब मैं कॉलेज के जाने लगा, तो सोचा एक बार दी को बोल देता हूं‌ कि मैं कॉलेज जा रहा था।

मैं दी के रूम में उनको बोलने गया, तो देखा दी नंगी गांड ऊपर करके सो रही थी। फैज़ल ने ज़म कर गांड मारी थी। गांड के होल पे फैज़ल के लंड के पानी के दाग लगे हुए थे। प्रिया दी बहुत प्यारी लग रही थी‌।

मैं दी के पास गया दी को उठाने: दी उठो दी, मैं कॉलेज जा रहा हूं‌। दी उठो ना।

प्रिया दी की कुछ देरी बाद धीरे-धीरे आंखे खुली। फिर वो करवट लेकर दूसरी साइड घूम गई।‌ उनकी चूत और बड़े बूब्स मेरे सामने हिल रहे थे। दी की चूत से भी फैज़ल के लंड का पानी निकलने के दाग लगे हुए थे। मैं जब दी को उठाने के लिए उनको हिला रहा था, दी के बूब्स पूरे मज़े से हिल रहे थे। मुझे देख कर मज़ा आ रहा था। लेकिन 2 मिनट दी को उठाने के बाद दी उठ गयी। जब मुझे देखी तो चादर ओढ़ ली।

प्रिया दी (नींद में): हां भाई बोलो ना?

मैं: दी मैं कॉलेज जा रहा हूं।

प्रिया दी: फैज़ल कहां है?

मैं: आप तो इतनी गहरी नींद में सोइ थी। वो तो कब के चले गए। आपको किस किये, आपके बूब्स को भी प्यार किये, आपको पता ही नहीं चला।

प्रिया दी: भाई कैसे पता चलेगा? वो कितनी बेरहमी से मुझे पूरी रात चोदा मैं जानती हूं।

मैं: ओह पसंद तो आपको ही था दी, मज़े भी तो आप ही की।

प्रिया दी ( मुस्कुरा कर ): वो तो है भाई। मज़े तो बहुत की उसके साथ।

मैं: अच्छा दी मैं कॉलेज जा रहा हूं‌। टाइम हो गया है, आप अंदर से गेट बंद कर लो।

प्रिया दी: ओके भाई।

प्रिया दी वैसे ही चादर लपेटे मुझे बाहर तक छोड़ने आने लगी। मैं गेट पर गया, वहीं खड़ा हो गया, और दी को देखने लगा।

प्रिया दी: क्या हुआ, जाओ कॉलेज।

मैं: दी एक बार चादर हटाओ, आपको देख कर कॉलेज जाऊंगा।

प्रिया दी: नो भाई, तुम अब बहुत बदमाश हो गए हो।

मैं: ओके दी मत दिखाओ।

और मैं बाहर जाने लगा। मैं बाहर अपनी गाड़ी निकालने लगा। जब अपनी गाड़ी घुमा कर ले जाने लगा, तभी दी ने गेट से आवाज़ लगाई।

प्रिया दी: रोहन।

मैं दी के तरफ देखा, और दी गेट खोल कर अपनी चादर हटा दी। मेरी बहन पूरी नंगी थी मेरे सामने।

मैं: मुझे पता था दी आप मुझे निराश नहीं करोगी।

मेरा तो दिल खुश हो गया आपको देख कर।

प्रिया दी: तू ही तो मेरा प्यारा भाई है। तू जो बोले वो मैं कैसे मना कर सकती हूं?

मैं: दी गांड भी दिखाओ।

प्रिया दी पीछे घूम गयी और अपनी गांड पर हाथ रख कर उसको फैला कर दिखाई।

मैं: सच में दी आप बहुत प्यारी बहन हो। लव यू दी।

प्रिया दी: लव यू सो मच भाई।

मैं: अच्छा दी मैं जा रहा हूं‌, बाय।

प्रिया दी: बाय भाई।

दी गेट बंद करके अंदर चली गयी। मैं गाड़ी स्टार्ट किया, और कॉलेज चला गया। कॉलेज में पढ़ाई और दोस्तों के साथ मस्ती किया। बहुत अच्छा लगा ज़ब कॉलेज ख़त्म हुआ। तो मैं घर की तरफ निकल गया। मैं रास्ते में आ ही रहा था कि मुझे एक गाड़ी वाले ने रुकने का इशारा किया। मैं गाड़ी को साइड में लगाया। वो गाड़ी वाला भी रुका।

मैं देखा 2 गाड़ियां थी। वो दोनों गाड़ियां मेरे बगल में रुकी। उसमें से 6-7 लोग बाहर आये। उसके से एक सबका हेड लग रहा था। उसको सब भाई-भाई बोल रहे थे, कोई मालिक बोल रहा था। वो सब मेरे पास आये।

मैं: क्या हुआ, आप लोग कौन हो?

उन लोगों का जो हेड था, वो बोला: तू रोहन सिंह है, प्रिया सिंह का भाई?

मैं: हां मैं ही रोहन सिंह हूं। क्या हुआ?

जो हेड था वो बोला: मैं असलम खान हूं‌। रंडीखाने का मालिक हूं। लड़कियां खरीदता हूं, बेचता हूं‌, धंधा करवाता हूं।

मैं: तो मैं क्या करूं?

असलम: मुझे तेरी बहन के बारे में पता चला है। साली बहुत जबरदस्त मॉल है, और यॉर लोग भी है उसके।

मैं: तो तुमसे क्या मतलब? तू अपना काम कर।

तभी उनमें से 3-4 लोग बोले: साले माधरचोद, तेरी इतनी हिम्मत, भाई से तू करके बात करेगा!

मैं: सॉरी माफ कर दीजिये।

असलम: रे, छोड़ रे सब लोग इसको। सुन रोहन, तेरी बहन को हम लोग खरीदने आये है। जो क़ीमत होगी, हम लोग देंगे। तू बेचेगा अपनी बहन को?

मैं: नहीं, कभी नहीं। और हम लोगों के पास पैसों की कमी नहीं है जो ये सब करेंगे। और मैं अपनी बहन को पैसों के लिए कभी नहीं बेच सकता।

फिर असलम मुझे बोलता है: देख तेरी बहन तो वैसे भी बाहरी लड़कों के साथ चुदती है। तो क्यूं ना हमारे कोठे पर आकर चुदे। उसके बदले उसको पैसे भी मिलेंगे। वैसे तो वो फ्री में चुद रही है।

मैं भी सोचने लगा। वैसे तो ये सच ही बोल रहा है। लेकिन कोठा मेरी बहन के लिए, ये सही नहीं होगा।

असलम: क्या सोचने लगे?

मैं: कुछ नहीं, ये सब काम मेरी बहन नहीं करेगी बस।

असलम: ठीक है। अच्छा तू मेरा नंबर लेले। अपनी बहन से बोलना मुझसे एक बार बात कर लेगी।

मैं: देखिये मैं आपको बोला ना, मेरी बहन ये सब काम नहीं करेगी।

असलम: वो तो बाद की बात है। वो हमारे साथ काम करेगी या नहीं, तू बस एक मुझसे बात करा देना।

फिर असलम मुझे अपना नम्बर दिया। फिर वो सब दोनों गाड़ियों से निकल गए। मैं भी गाड़ी स्टार्ट किया, और घर पर आया। घर पहुंचा, और गेट पर रिंग बज़ाई। कुछ देर बाद ही दी आयी गेट खोली

प्रिया दी (मुझे देख कर ख़ुश हुई): आ गया मेरा भाई, आजा अंदर।

दी येलो कलर की टी-शर्ट और नीचे शॉर्ट्स पहनी थी। बहुत प्यारी लग रही थी।

मैं: नींद पूरा हो गयी दी आपकी? थकान कम हुई?

प्रिया दी: हां भाई अब तो थकान गायब हो गयी।

मैं ड्रेस चेंज किया। फ्रेश हो कर हॉल में सोफे पर बैठ कर असलम की बात सोचने लगा कि ये बात दी को कैसे बताऊं।

प्रिया दी: क्या सोच रहे हो भाई इतनी देर से?

मैं: अब मैं आपको कैसे बताऊं दी। मैं जब कॉलेज से आ रहा था तो मुझे रास्ते में कौन मिला।

प्रिया दी‌ (मेरी बात सुन कर मेरे बगल आकर बैठ गयी): क्या हुआ भाई? कौन थे वो लोग? क्या किये तेरे साथ? किसी ने मारा क्या तुझे?

मैं: नहीं दी, वो लोग मारे तो नहीं। अब मैं आपको कैसे बताऊं।

प्रिया दी: तू मुझे बता भाई जो बात है। अपनी बहन से तो तू सारी बातें शेयर करता है। बता ना क्या हुआ।

मैं: दी मैं कॉलेज से आ रहा था, तो 2 गाड़ी से कुछ लोग मुझे रुकवा दिए। फिर उसमे से एक असलम नाम का आदमी था, करीब 45 साल का रहा होगा।

फिर मैं सारी बात दी को बताया। ये भी बताया कि उसने अपना नम्बर भी दिया और बोला प्रिया से बोल देना मुझसे एक बार बात कर ले।

प्रिया दी: अच्छा भाई तू टेंशन ना ले।

मैं: दी क्या असलम से बात करना ठीक होगा?

प्रिया दी: जब वो इतना बोल रहा है, तो एक बार बात कर ही लेती हूं।

मैंने दी को नम्बर दिया। दी अपने ही मोबइल से कॉल को हैंड फ्री कर दी। रिंग जाने लगी।

असलम: हैलो कौन?

प्रिया दी: रोहन सिंह की बहन प्रिया सिंह बोल रही हूं।

असलम: ओह प्रिया, बहुत सुना हूं‌ तेरे बारे में। क्या मॉल है तू। चुदती भी बहुत मज़े से है। तेरे फिगर के बारे बहुत सुना हूं।

प्रिया दी: अच्छा तो मेरे भाई को क्यूं परेशान कर रहे थे रास्ते में?

असलम: अरे परेशान नहीं, वो तो तुम्हें खरीदने के लिए उससे पूछ रहा था।

प्रिया दी: देखो मेरे पास पैसों की कमी नहीं है, समझे?

असलम: अच्छा ठीक है। जो काम अपने घर में करती हो, वही काम हमारे कोठे पर आकर करो। यहां तुम्हारी जैसी लड़कियों की बहुत डिमांड है। यहां बहुत कस्टमर मिलेंगे तुम्हें।

प्रिया दी: तुम्हे ऐसा क्यूं लग रहा मुझे लड़कों की कमी है। मैं जितना चाहूं उतने लड़कों की लाइन लगा दूं, समझे।

असलम: वो मेरा मतलब नहीं था। मैं जानता हूं‌ तुम्हे चोदने के लिए लड़कों की लाइन लगी है। उसमे कोई शक नहीं।

प्रिया दी: आज के बाद मेरे भाई को परेशान मत करना, समझे।

असलम: ठीक है नहीं परेशान करूंगा। अच्छा एक बार हमसे मिल लो।

प्रिया दी: क्यूं, क्या काम है?

असलम: सबसे मिलती हो। हमसे एक बार मिल लो। तुमसे मिल कर बात करना चाहता हूं।

प्रिया दी मेरे तरफ देखती है।

मैं इशारे में पूछा: क्या करोगी दी, मिलोगी या मना कर दोगी?

प्रिया दी धीरे से बोली: एक बार मिल लेती हूं। देखती हूं‌ क्या बात करता है। मैं भी इशारे से दी को ओके बोल दिया।

प्रिया दी: अच्छा ठीक है आ जाओ।

दी उसको घर का एड्रेस देती है।

असलम: थैंक यू जान, आज रात को आऊंगा तुम्हारे घर।

प्रिया दी: ठीक है।

फिर दी फ़ोन कट कर देती है।
 
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मैं: दी आपसे मिलने आ रहा है वो, ठीक रहेगा ना?

प्रिया दी: हां भाई सब ठीक है, तू फालतू में टेंशन लेता है। अच्छा चल मार्केट घूम कर आते है।

मैं: हां दी चलो ना‌।

हम दोनों मार्केट जाते है, घूमते-फिरते है। 7 बजे शाम को वापस घर आते है।

प्रिया दी: यॉर भाई, 7 बज गए, पता नहीं कब तक आएगा असलम।

मैं: अब आने ही वाला होगा दी, टाइम तो हो रहा है।

प्रिया दी: भाई तब तक मैं फ्रेश हो जाती हूं।

मैं: हां दी, मैं भी‌ फ्रेश‌ हो कर आता हूं‌।

मैं चला गया फ्रेस होने। मैं वापस हॉल में आकर बैठा। तभी कुछ देर बाद दी भी आती है। प्रिया दी वन पीस पहनी होती है।‌वो बहुत हॉट लगती है। बड़े-बड़े बूब्स मस्त क्लीवेज के साथ बाहर झांक रहे थे। पीछे उठी हुई गांड क्या मॉल दिख रही थी दी।

मैं: वॉव दी बहुत हॉट लग रही हो!

प्रिया दी: थैंक्स भाई।

हम दोनों बैठ कर कॉलेज की बातें करते रहते है। तभी दी के फ़ोन पर असलम का कॉल आता है।

प्रिया दी: हां असलम बोलो।

असलम: डार्लिंग 5 मिनट में तुम्हारे घर पहुंचने वाला हूं। तुम घर पर ही हो ना?

प्रिया दी: हां, घर पर ही हूं। तुम आओ।

असलम फोन रख देता है।

मैं: क्या हुआ दी?

प्रिया दी: कुछ नहीं भाई, असलम का फोन था। बोल रहा है 5 मिनट में घर पहुंच जाऊंगा।

फिर हम लोग ऐसे ही बात करते है। तभी कुछ देर बाद हमारे घर के सामने 3 गाड़ियां रूकती है। उसमे से लगभग 12-13 लोग उतरते है। गेट का बेल बजता है। मैं गेट खोलता हूं। असलम सामने था। मैं उसे अंदर आने को बोलता हूं‌। वो सब अंदर आते है। उनके साथ एक औरत होती है 40 के ऊपर की थी, और 2 लड़कियां भी थी।

वो सब हॉल में आते है। मैं गेट बंद करके अंदर आता हूं‌। प्रिया दी भी वही हाल में होती है। असलम और बाकी सब दी को देखते ही रह जाते है।

असलम: वाह! जैसा सुना था उससे भी मस्त मॉल है ये।

बाकी सब तारीफ करने लगते है: हां भाईजान, बहुत दमदार मॉल है।

प्रिया दी‌ मुस्कुरा देती है। फिर असलम दी पास आता है, और मेरी बहन की गांड पर पर हाथ फेरता है।

वो बोलता है: देखो सविता, क्या मॉल है ना?

सविता थी जो उन लोगों के साथ आयी थी, 40 + ऐज थी उसकी।

सविता: हां मालिक, ये मॉल तो है बिलकुल सोना है। बहुत पैसे कमाएगी बिस्तर पर।

फिर वो दी को पास लाता है। असलम और सब दी के साथ मज़े करते है। मैं साइड में खड़ा होकर ये सब देखता हूं।

कोई दी के बूब्स को मसल रहा था, कोई गांड।

सब तारीफ कर रहे थे: वाह भाईजान, ये आ‌ गयी कोठे पर तो कस्टमर की लाइन लग जाएगी।

असलम: क्यूं जावेद, देख रहा हैं ना मस्त मॉल?

जावेद: भाई इसमें पूछने वाली क्या बात है। ऐसी बहुत कम मिलती है, और ऐसी लड़कियों की डिमांड बाजार में बहुत है।

प्रिया दी: अच्छा अब बैठोगे भी ये ऐसे ही मुझे इस भीड़ में खड़ा करके सबसे मसलवाते रहोगे?

असलम: जरूर बैठेंगे मेरी जान।

सविता एक सोफे पर बैठती है, दूसरे पर असलम। प्रिया दी दूसरी साइड बैठने जाती है।

तभी असलम बोला: प्रिया तुम मेरी गोद में बैठो यॉर। वहां क्यूं बैठ रही हो?

प्रिया दी मुस्कुरा कर असलम की‌ गोद में बैठ जाती है।

फिर सविता बोलती है: प्रिया क्या प्रॉब्लम है तुम्हे हमारे यहां आने में?

प्रिया दी: आंटी जी मैं कोई कोठे वाली नहीं हूं‌। वो तो मैं शौंक‌ से करती हूं अपने बॉयफ्रेंड या फ्रेंड लोगों के साथ, या जो कोई पसंद आ गया तो।

असलम: प्रिया तुम यहीं काम हमारे यहां तो कर सकती हो। वहां पैसे भी मिलेंगे।

प्रिया दी: असलम मेरे पास पैसों की कमी नहीं है। मेरे पास सब कुछ है।

असलम: ठीक है, तुम मत पैसे लेना। तुम बस एन्जॉय करना। बाकि पैसा हम लोग रख लेंगे।

सविता: प्रिया बेटी तुम अपनी जवानी ऐसे ही बर्बाद मत करो। ज़ब अपनी जवानी लुटवा ही रही हो, तो सही जगह चलो। वहां तुम्हें सब कुछ मिलेगा। रूम, खाना-पीना, बस एन्जॉय तुम करो जो यहां कर रही हो। वहीं काम हमारे यहां कर सकती हो।

ये सब बात होती ही रहती है। तभी उनमें से एक लड़की जो उन लोगों के साथ दो लड़कियां आयी होती है, उसमें से एक मेरे पास आकर बोलती है-

लड़की: तुम इसके भाई हो?

मैं: हां, और आप कौन हो!

लकड़ी: मैं स्वेता हूं। असलम जी के कोठे पर धंधा करती हूं।

मैं: अच्छा स्वेता कोई काम था?

पूजा: तुम अपनी बहन को बेचना चाहते हो?

मैं: अभी इसके बारे में सोचा नहीं हूं‌। क्या बताऊं यॉर।

स्वेता: अगर तुम अपनी बहन को बेचना चाहते हो, तो तुम इन लोगों के पास (असलम) के पास मत बेचना।

मैं: ऐसा क्यूं?

स्वेता: ये लोग सस्ते में तुम्हारी बहन को खरीद लेंगे। तुम्हारी बहन बहुत मस्त मॉल है। मुंह मांगी कीमत मिलेगी इसकी।

मैं: तो मैं किसको बेचूंगा?

स्वेता: तुम अपनी बहन की नीलामी करना, अच्छा रेट लगेगा।

मैं: मैं किसके पास ले जाकर नीलामी कराऊंगा?

स्वेता: मैं तुम्हे कई कोठे वालों का नम्बर दे रही हूं। तुम्हे बेचना होगा अपनी बहन को तो उन लोगों को बुला कर अपनी बहन दिखा कर नीलामी करा देना।

मैं स्वेता से 10 कोठे मालिक लोगों नम्बर लेता हूं।

मैं: थैंक्स स्वेता।

स्वेता: बहुत प्यारे भाई हो तुम। बहुत किस्मत वाली है तुम्हारी बहन, जो तुम्हारे जैसा भाई मिला।

तभी दी मुझे बुलाती है।

मैं: हां दी‌।

प्रिया दी: इन लोगों के लिए कुछ खाने-पीने के लिए लाओ।

असलम: अरें नहीं, तुम हो ना खाने की मॉल तो बाहर का क्या खाना?

बहुत देर तक बात-चीत होती है। वो सब मिल‌ कर दी को अपने कोठे पर बुलाना चाहते है। काफ़ी बात-चीत के बाद प्रिया दी बोली-

प्रिया दी: ठीक है, मुझे कुछ दिन का टाइम दो,‌ मैं सोच कर बताती हूं‌ आप लोगों को।

वो सब थोड़ा ख़ुश हुए: ठीक है।

सविता: प्रिया तुम अच्छे से सोच लो। लेकिन तुम्हें हमारे यहां जरूर आना चाहिए एक बार।

प्रिया दी: ठीक है आंटी जी, जल्दी ही बताउंगी।

सविता: तो ठीक है, अब हम लोग चलते है। 11 बज गए है, तुम लोग भी खाना खाओ और सो जाओ।

सविता: आ जाओ सब, जिसको मसलना है मसल ले अच्छे से।

सब 8-9 लोग थे। एक साथ दी को चारों तरफ से टूट पड़ते है। कोई चूमता है तो कोई बूब्स दबाता है। कोई नीचे से चूत गांड में ऊंगली करता है। प्रिया दी भी हसने लगती है‌ उन लोगों के बीच में। लगभग 10 मिनट दी को सब प्यार करते है।

सविता: छोड़ो सब उसको, चलो।

सब दी को छोड़ देते है। दी के गाल और बूब्स लाल हो गये थे, लेकिन दी खुश थी।

सविता: असलम ये प्रिया बेटी गैंग-बैंग वाली मॉल है।

असलम: सही बोली सविता, ये अकेले नहीं गैंग-बैंग में बहुत मज़ा देती है।

आमिर: सविता तुम तो मेरी मुंह की बात छीन ली। मैं भी यहीं बोलने वाला था।

असलम: हम लोग जा रहे है प्रिया। तुम जल्दी ही बताना, हम तुम्हे यहां से ले जायेंगे।

फिर वो सब चले गए।‌‌मैं गेट बंद किया।

प्रिया दी: चलो खाना खा लेते है।

मैं: हां दी, मुझे भी भूख लगी है।

हम दोनों खाना खाने लगते है।

मैं: दी क्या सोची हो। आप जाओगी इन लोगों के साथ रंडीखाने?

प्रिया दी‌( मुस्कुरा कर): अब क्या बताऊं भाई? मुझे तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है। मैं क्या बोलूं उन लोगों को?

मैं:…………………..
 
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मैं: दी अब आप क्या सोच रही हो? आप असलम के कोठे पर जाओगी या नहीं?

प्रिया दी ( मुस्कुराते हुए ): भाई मुझे तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है, असलम को हां बोलूं या ना।

मैं: कोई बात नहीं दी। आप सोच कर बताना। कोई ज़रुरी थोड़ी है। कल सुबह ही बताना है। जब आपका मन होगा तब आप उसको बता देना।

प्रिया: हां भाई सही बोले। आराम से सोच कर बताउंगी।

फिर हम दोनों खाना खाते है। फिर हाल में बैठ कर बाते करते है। रात को 12:30 बज गए होते है। मुझे नींद आने लगती है।

मैं: दी मुझे अब नींद आ रही है। मैं तो अब सोने जा रहा हूं।

प्रिया दी: हां भाई नींद तो मुझे भी आ रही है। चलो चलते है अब सोने।

मैं: बाय, गुड नाईट दी।

प्रिया दी: गुड‌ नाईट मेरे प्यारे भाई।

हम दोनों अपने अपने रूम आ जाते है। जब मैं अपने रूम में आया सोने के लिए, तभी मुझे याद आया कि असलम के साथ जो लोग आये थे, उसमे एक लड़की स्वेता ने मुझे बताया की तुम अपनी बहन असलम के पास डायरेक्ट ना बेचना। तुम अपनी बहन की नीलामी कराओ अच्छा पैसा कमाओगे। मैं तो ये बात दी को बताना भूल गया।

फिर मैं सोचा चलो अभी तो दी सोच कर बताएगी कि वो रंडी खाने जाना भी चाहती थी या नहीं।‌ जब उसका मन होगा तो मैं उसको ये स्वेता वाली बात जरूर बताऊंगा।

फिर मैं भी सो गया।

सुबह मेरी नींद 8:30 पर खुली। मैं रूम से बाहर आया और देखा प्रिया दी उठ गयी थी, और ब्रश कर रही थी।

मैं: क्या बात है दी, आज आप तो पहले उठ गयी। कही जाना है क्या आपको?

प्रिया दी: हां भाई।

मैं: कहां दी? आज कहां घूमने जा रही हो?

प्रिया दी: अरे भाई कही दूर नहीं, बस आज फ्रेंड लोगों के साथ यही घूमने की प्लानिंग हुई है। शाम तक आ‌ जाऊंगी।

मैं: अच्छा दी शाम को आ जाओगी या किसी के साथ…

प्रिया दी: तू भी ना भाई! नहीं, कही नहीं जाऊंगी। शाम को घर ही आऊंगी।

मैं: ओके दी कोई बात नहीं।

प्रिया दी: अच्छा सुनो भाई, खाना खा लेना टाइम पर, ठीक है?

मैं: ठीक है दी।

आप जाओ एन्जॉय करो‌।

फिर मैं रूम में आया और फ्रेश हुआ। तभी दी की आवाज आयी-

प्रिया दी: भाई मैं जा रही हूं। तुम गेट बंद कर लो।

मैं: हां दी आता हूं।

मैं गया गेट बंद करने। देखा प्रिया दी वाइट कलर की वन पीस ड्रेस पहनी हुई थी। मॉल की देवी लग रही थी। मस्त बड़ी-बड़ी चूचियों की क्लीवेज निकली हुई थी, मस्त मटकती हुई गांड। मैं तो दी को देखता रह गया।

प्रिया दी: क्या हुआ भाई, ऐसा क्या देख रहे हो?

मैं: मैं तो यही सोच रहा हूं आज तो मेरी बहन पक्का शाम को घर पर नहीं आएगी। पता नहीं कौन आज मेरी बहन को अपने बिस्तर पर ले जायेगा।

प्रिया दी (हसने लगी): भाई तुम भी ना!

मैं: सच में दी, बहुत मस्त मॉल लग रही हो।

प्रिया दी: देखते है भाई मैं घर आती हूं या शाम को किसी बिस्तर पर।

मैं: बिलकुल दी।

तभी प्रिया दी का मोबाइल का रिंग बजता है।

प्रिया दी: भाई अब मैं निकलती हूं मेरी फ्रेंड्स का कॉल रहा है। वो सब बाहर आ गयी है।

मैं: बिलकुल दी, जाओ आप।

मैंने गेट खोला। दी की फ्रेंड्स बाहर गाड़ी से पहुंच गयी थी। दी भी जल्दी से उनकी गाड़ी में बैठ कर निकल गयी। मैं दी के बाथरूम में गया। वहां दी की पैंटी को सूंघ कर उसको चाटने लगा। मुंह में डाल कर चूस ली। चूत का रस उस पर लगा हुआ था। मुंह में डालने से वो रस मुंह में आने लगा। बहुत स्वादिष्ट लगा मुझे।

10 मिनट तक दी की पैंटी को मुंह में डाल कर चूसा। फिर मैं दी के पैंटी को वही रख कर नहाने चला गया। नहाने के बाद मैंने नाश्ता किया। फिर टीवी देखने लगा। घर में अकेला था, तो मुझे भी बोरिंग हो रहा था।

तभी मुझे याद आया कि स्वेता जो असलम के साथ आयी थी, वो मुझे 10 कोठे के मालिकों का नम्बर दी थी। और वो बताई थी कि तुम इन लोगों से बात करके अपनी बहन की नीलामी कराना।

मैं सोचा घर पर बैठा बोर हो रहा हूं, आज यही काम कर लेता हूं। लेकिन मुझे इन सभी के बारे में कोई आईडिया नहीं था। मैं सोचा क्यूं ना स्वेता से हेल्प लेलूं। वो तो इन लोगों का जानती भी थी, और कोठे पर धंधा भी करती थी।

मैं स्वेता को कॉल किया। लेकिन स्वेता फोन रिसीव नहीं करती है। फिर मैं दो तीन-बार और किया, लेकिन स्वेता फोन रिसीव नहीं करती है। 20 मिनट बाद स्वेता का फोन आता है

स्वेता: हैलो कौन?

मैं: रोहन बोल रहा हूं।

स्वेता: कौन रोहन?

मैं: आप कल असलम के साथ आयी थी मेरे घर पर मेरी बहन को खरीदने के लिए।

स्वेता: अच्छा हां रोहन, बोलो क्या बात है? कोई जरुरी काम है?

मैं: नहीं जरुरी तो नहीं है क्यूं तुम बिजी हो?

स्वेता: हां रोहन अभी मैं कस्टमर लोगों के साथ हूं। मैं तुम्हे 1 घंटे बाद कॉल करती हूं।

मैं: ठीक है स्वेता।

मैं मोबइल में गेम खेलने लगता हूं।

1:30 घंटे बाद स्वेता का कॉल आता है।

स्वेता: हां बोलो रोहन क्या बात है?

मैं: स्वेता तुम जिन कोठे मालिकों का नंबर दी हो मेरी बहन की नीलामी कराने के लिए, मैं उनसे कैसे बात करूं? तुम मेरी मदद कर दो।

स्वेता: इसमें मदद क्या करनी है? तुम बात कर लो उनसे।

मैं: वो बात नहीं है। मुझे इसके बारे में कोई आईडिया नहीं है स्वेता,‌ कि‌ क्या बात करनी है। कैसे करनी है। तुम मेरे साथ चलोगी प्लीज स्वेता प्लीज?

मेरी बार-बार रिक्वेस्ट से स्वेता मान जाती है।

स्वेता: ठीक है रोहन। तुम आओ यही पर। मैं रेडी होकर तुम्हारे साथ चलती हूं।

मैं भी तुरंत वहां से निकल गया। असलम के कोठे के सामने वाली मार्केट में पहुंचा। 5 मिनट बाद स्वेता जीन्स टी-शर्ट पहन कर आयी। टी-शर्ट में से उसकी टाइट-टाइट चूचियां। जीन्स के बाहर निकली हुई गांड। एक नम्बर की सस्ती रंडी लग रही थी।

मैं: हेय स्वेता।

स्वेता: हेय रोहन कैसे हो?

मैं: मस्त हूं, तुम बताओ कैसी हो स्वेता?

स्वेता: मैं भी अच्छी हूं।

मैं: मस्त मॉल लग रही हो यॉर तुम तो। क्या मस्त फिगर है। तुम्हारी बुकिंग तो बहुत होती होगी स्वेता?

स्वेता: थैंक्स रोहन। हां मेरी बुकिंग तो होती है। लेकिन तुम्हारी बहन तो मुझसे भी मस्त मॉल है। मैं उसके सामने कुछ नहीं हूं।

तुम्हारी बहन प्रिया अगर कोठे पर आ गयी, तो उसके लिए कस्टमर लोग लाइन लगा लेंगे।

मैं: वो तो है स्वेता।

फिर हम दोनों साथ में हसने लगे।

मैं: अच्छा अब चले स्वेता?

स्वेता: बिलकुल।

मैं स्वेता को लेकर निकल गया रंडी खाने के मालिकों के पास अपनी बहन की नीलामी का न्योता देने। स्वेता मुझे रास्ता बता रही थी। पहले तो कुछ दूर जाने के बाद पहला रंडीखाना आया।

स्वेता: रुको रोहन, यहीं पर ये मीरा दी का कोठा है। आओ यहां पर भी बात कर लेते है।

मैं गाड़ी को साइड लगाया। फिर हम दोनों अंदर जाने लगे। एक लड़का खड़ा था।

स्वेता उससे पूछी: मीरा दी कहां है?

लड़का: तुम कौन हो? उनसे क्या काम है?

स्वेता: तुम बस मीरा दी से मेरा नाम बता दो। वो खुद ही बुलाएंगी।

लड़का: ठीक है, तुम दोनों यहीं रुको, मैं अभी बात करके आता हूं।

लड़का चला जाता है और कुछ देर बाद आता है।

लड़का: स्वेता जी आप लोग जाओ। दी बुला रही है।

इसके आगे क्या होता है, ये आपको अगले पार्ट में पता चलेगा।
 
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फिर मैं और स्वेता अंदर जाते है। एक बड़ा रूम होता है, और एक सोफे पर एक आंटी लगभग 44-45 साल की बैठी होती है। उसके आस-पास 6-7 बॉडीगार्ड होते है, और 3 लड़कियां होती है।

मीरा दी: अरे आओ स्वेता, कैसी हो?

स्वेता: अच्छी हूं दी, आप कैसे हो?

मीरा दी: मैं भी अच्छी हूं। आओ बैठो।

मैं और स्वेता बगल वाले सोफे पर बैठते है।

मीरा दी: बताओ क्या बात है स्वेता? कोई काम है?

स्वेता: हां दी काम है‌। (मेरी तरफ इशारा करती है) इसकी बहन प्रिया सिंह है। उसकी नीलामी करवानी है। तो आपको बताने आयी हूं।

मीरा दी: अच्छा तेरी बहन है। तेरा नाम क्या है?

मैं: जी दीदी मेरी बड़ी बहन है। मेरा नाम रोहन है।

मीरा दी: कोई फोटो लाया है अपनी बहन की?

मैं: हां दी।

मैं अपनी मोबाइल में दी की कई सारी पिक्स दिखाता हूं।

मीरा दी: वाह मॉल तो अच्छी है।

फिर वो अपने आस-पास जो लोग होते है उनको भी दिखाती है। वो सब बोलते है हां दी मॉल तो सोना है बिल्कुल, बहुत पैसे कमाएगी। साइज इसकी बहुत मस्त है। और साथ में जो तीनों लड़कियां होती है, वो सब भी बहुत तारीफ करती है

स्वेता: हां दी मॉल तो सोना है। इसका गदराया हुआ जिस्म मलाई है। कस्टमर लोग चाटते रह जायेंगे।

मीरा दी: ठीक है बताओ कब नीलामी होगी?

मैं: इसके बारे में सोचा भी नहीं कब डेट रखनी है (मैं स्वेता से धीरे से बोला: कब डेट रखूं बताओ?)

स्वेता: जब तुम्हे अच्छा लगे उस दिन रख लो डेट।

मैं: रक्षाबंधन के दिन रख दूं?

स्वेता (मुस्कुरा कर बोली): अरे हां यॉर, ये तो बहुत अच्छा दिन है। सही है, अच्छा गिफ्ट दोगे। प्रिया ख़ुश हो जाएगी।

मीरा: अरे क्या तुम लोग काना-फूसी कर रहे हो? डेट बताओ।

मैं: दी रक्षाबंधन के दिन 2 बजे से।

मीरा: अच्छा ठीक है।

फिर हम वहां कुछ बात-चीत करते है,‌ और फिर वहां से निकल जाते है दूसरे कोठे के मालिक के पास। लगभग 5 घंटे का रास्ता तय करने के बाद वहां पहुंचे।

मैं: यॉर स्वेता तुम तो बहुत दूर लेकर आ गयी।

स्वेता: हां रोहन दूर तो है। लेकिन ये कोठा बहुत बड़ा है। यहां कई कोठे के मालिक भी होंगे। यहां पर विदेशो से लड़कियां आती है, और यहां से विदेश भेजी जाती है।‌ और यहां आये है तो फिर और कही जाने की जरूरत नहीं है। यहां कई कोठे के मालिक आते है लड़कियां खरीदने। यहां उन लोगों से मिल कर तुम्हारी बहन के लिए भी बात हो जाएगी‌‌।

मैं: अच्छा तब तो ठीक है।

जब वहां पहुंचे, बहुत बड़ा एरिया था उसका। जगह-जगह पर उनके लोग खड़े थे। कुछ लोगों के हाथ में गन भी थी। बहुत भीड़ भी थी। एक से बढ़ कर एक लड़कियां और कस्टमर की लाइन लगी थी। बहुत सारी विदेशी लड़कियां भी थी।

कुछ अंदर जाने के बाद रास्ता बिल्कुल सकरा था। मैं गाड़ी को साइड लगा दिया। हम दोनों उतर गए। फिर पैदल जाने लगे। कुछ आगे जाने के बाद 5-6 लोग गन लेकर घेर लिए और पूछने लगे- अंदर कहां जा रहे हो? तुम लोग कौन हो?

स्वेता: मैं स्वेता हूं, मुझे जावेद जी से मिलना है।

बॉडीगार्ड: उनसे क्यूं मिलना है?

स्वेता: तुम बस इतना उनसे बोल दो स्वेता आपसे मिलना चाहती है।

बॉडीगार्ड: उसमें से एक ने दूसरे को इशारा किया तुम जाओ, और उसमे से एक वहां से अंदर गया।

बाकी सब हम लोगों को घेर कर खड़े थे।

लगभग 10 मिनट के बाद वो आया और बोला: हां जाने दो इन लोगों को

फिर वो सब हमारी चेकिंग करके अंदर जाने दिए।‌ जब मैं अंदर गया तो देखा हर जगह बॉडीगार्ड खड़े थे। कुछ दूर जाने के बाद एक बड़ा सा बंगला था। उसमें हम लोग गए। वहां कई लोग बैठे हुए थे, उनके बॉडीगार्ड भी थे।

स्वेता: देखो रोहन यहां बहुत सारे कोठे के मालिक है। ये सब यहां से लड़कियां खरीदने आते है, और बेचते भी है।

मैं: हां यॉर स्वेता, ये बहुत बड़ा है। यहां तो बहुत लोग है। यहां धंधा भी बहुत जम कर हो रहा है। पुलिस वाले नहीं आते क्या?

स्वेता (हंसते हुए): पुलिस, उन सब की औकात भी नहीं है यहां आकर बंद करा दे। पुलिस को लोग मार देंगे। पुलिस वाले डरते है यहां आने से। और जावेद कोई मामूली इंसान नहीं नहीं है जो इतना बड़ा काम कर रहा है।

मैं: वो तो है यॉर।

फिर हम अंदर गए। बीच में जावेद एक बड़ी चेयर पर बैठे थे। उनके बगल में दो गनर थे, और अपनी गोद में एक लड़की को बिठाये थे। उनके सामने दोनों तरफ कोठे के मालिक लोग बैठे थे। उनके भी बॉडीगार्ड साथ में थे। सब यही लड़कियों और धंधे की बात कर रहे थे।

जावेद ज़ब स्वेता को देखा: क्या बात है स्वेता, बहुत दिन बाद हमारी याद आयी?

स्वेता जावेद जी के पास जाकर उनको गले लगाई। बाकी लोग देख रहे थे।

जावेद‌ सबको बताते है: ये स्वेता है। एक टाइम मेरी सबसे पसंदीदा रखैल थी।

स्वेता मुस्कुराती है।‌

बाकी लोग तारीफ करते है: वाह, जावेद की काफ़ी अच्छी पसंद है। आपकी मॉल तो बहुत मस्त है ये स्वेता।

जावेद: मेरी पसंद ही ऐसी है, तभी तो मेरा धंधा सबसे अच्छा चलता है। मेरे यहां सबसे अच्छी मॉल मिलती है। हां स्वेता बताओ कैसे आना हुआ?

स्वेता‌ (मेरी तरफ इशारा करके बोलती है): जावेद जी ये रोहन है। इनकी बहन प्रिया की नीलामी करनी है। वहीं बताने आयी हूं।

जावेद: स्वेता अभी तो हमारे यहां लड़कियों की कमी नहीं है।

स्वेता: जावेद जी ऐसी लड़की आपको शायद ही मिले। आप अच्छा मौका गवा रहे है। आपको एक बार उसको जरूर देखना चाहिए।

जावेद: अच्छा ऐसी बात? ठीक है दिखाओ। मैं भी तो देखूं कैसी मॉल है।

स्वेता मेरी तरफ इशारा करती है। मैं उनके पास गया, और मोबइल में दी की पिक्स दिखाने लगा। जावेद मेरी बहन की पिक्स ज़ूम कर-कर देखने लगे।

जावेद: वाह यार स्वेता, इसको देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया मॉल तो बहुत शानदार है। क्या मॉल है। बड़ी-बड़ी चूचियां, वैसी ही बड़ी गांड, इसकी आंखे होंठ, वाह यॉर बताओ कब नीलामी होंगी?

मैं: रक्षाबंधन के दिन।

जावेद: ठीक है।

बाकी कोठे के मालिक: अरे जावेद जी हमको भी तो दिखाओ कैसी मॉल है। वो उन लोगों मेरा मोबाइल दे दिया। वो सब इकठ्ठे होकर मेरी बहन को देखने लगे।

“वाह यॉर, ये तो सोने के अंडे देने वाली मुर्गी है। बहुत पैसा कमाएगी बिस्तर पर”।

तो कोई बोल रहा है, “ये साली जिसके कोठे पर जाएगी, पैसे की ढेर लगा देगी। ये कोठे की शान बनेगी”

बहुत तारीफ हुई मेरी बहन की।

जावेद जी: आप अब इसे देख लिए। इसकी नीलामी होंगी रक्षाबंधन के दिन। सभी लोग आएंगे।

एक कोठे का मालिक: इसके लिए बुलाने की जरूरत नहीं। हम खुद जायेंगे इसको खरीदेंगे।

तो दूसरा बोला: तू क्या लेगा इसको। मैं दो गुना रेट में खरीदूंगा इसको।

सब आपस में ही कम्पिटीशन करने लगे मैं खरीदूंगा मैं खरीदूंगा।

मुझे भी अपनी बहन की तारीफ सुन कर बहुत अच्छा लगा।

इससे आगे क्या हुआ आपको अगले पार्ट में पता चलेगा। आप लोगों को मेरी की स्टोरी कैसी लगी आप लोग जरूर बताइयेगा।
 
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