

Nice update and awesome storyकाजल के बदन के पसीने की smell मेरे लिए नशा है, बिल्कुल अफीम।
जब वो मेरे पास आती है, थोड़ी सी दौड़ कर या बस गर्मी से, उसकी त्वचा पर पतली-पतली बूँदें चमकती हैं।
![]()
![]()
![]()
मैं नाक उसके गले के पास ले जाती हूँ…
उसकी skin इतनी मुलायम है कि जब मेरी उँगलियाँ उस पर फिसलती हैं, तो लगता है जैसे रेशम पर पानी बह रहा हो।पर वो रेशम गर्म है, जिंदा है, हर जगह थोड़ा अलग।
उसकी गर्दन… वहाँ skin इतनी पतली और नरम है कि मेरी उँगलियाँ डूब जाती हैं, जैसे बादल में हाथ डाल दिया हो।मैं होंठ रखती हूँ और महसूस करती हूँ, नीचे उसकी नस धड़क रही है, तेज़-तेज़।
वहाँ से उठती वो गंध, नमकीन, हल्की खट्टी, थोड़ी सी मिट्टी जैसी, बिल्कुल काजल वाली।
मैं एक गहरी साँस लेती हूँ और मेरा दिमाग़ घूम जाता है।
![]()
![]()
“काजल… तेरी sweat smell… मुझे पागल कर देती है,” मैं फुसफुसाती हूँ।
वो हँसती है और अपना गला मेरे मुँह के पास लाती है।
मैं जीभ निकाल कर उसकी गर्दन से एक लंबा चटकारा लेती हूँ, नमक, गर्मी, उसकी skin का स्वाद।
उसकी छाती के बीच वाली लकीर… वहाँ skin इतनी कोमल है कि बस हवा से भी सिहर उठती है।मैं उँगली से धीरे-धीरे खींचती हूँ, वो काँपती है और कराहती है,
“स्वाति… और धीरे… जल जाएगी…”
![]()
![]()
![]()
फिर उसकी बगल… वो जगह जहाँ sweat सबसे ज़्यादा जमा होती है।
बाल गीले, चिपके हुए, smell इतनी तेज़ कि मेरी आँखें बंद हो जाती हैं।
ओह, उसकी बगल की skin सबसे नरम, सबसे गर्म, सबसे गीली।बालों के नीचे वो त्वचा इतनी कोमल है कि मेरी जीभ डूब जाती है।जब मैं चाटती हूँ तो वो skin मेरे होंठों से चिपक जाती है, फिर अलग होती है, फिर चिपक जाती है… जैसे मुझे छोड़ना ही नहीं चाहती।
![]()
![]()
मैं अपना पूरा मुँह वहाँ दबा देती हूँ, साँस रोक कर smell लेती हूँ, फिर जीभ से चाटती हूँ।
हर चाटे में नया स्वाद, नई खुशबू।
फिर जब मैं उसकी बगल में जीभ डालती हूँ,वो थोड़ी गहरी हो जाती है…
“आह्ह्ह… स्वाति…”
उसकी आवाज़ काँपती है, जैसे कोई गीली रस्सी खींची जा रही हो।
![]()
![]()
![]()
कभी वो मेरे ऊपर चढ़ती है, पसीने से तर, और अपना पूरा body मेरे चेहरे पर रगड़ती है।
![]()
![]()
![]()
उसकी छाती, उसकी कमर, उसकी जाँघें… हर जगह से sweat की बूँदें मेरे होंठों पर गिरती हैं।
मैं चाटती हूँ, चूसती हूँ, smell लेती हूँ।
“तेरी sweat मेरे लिए perfume है,” मैं कहती हूँ।
वो कराहती है, “तो पी ले… सारा पी ले… मैं तेरे लिए और पसीना बहाऊँगी।”
![]()
उसकी जाँघों का भीतरी हिस्सा… वहाँ skin इतनी पतली और संवेदनशील है कि मेरी साँस पड़ते ही goosebumps खड़े हो जाते हैं।मैं बस उँगली की नोक से छूती हूँ, फिर भी वो टाँगें सिकोड़ लेती है और बोले,
“स्वाति… मत छू वहाँ… पागल हो जाऊँगी…”
मैं अपना चेहरा उसकी जाँघों के बीच ले जाती हूँ और बस साँस लेती हूँ…लंबी, गहरी, बार-बार।
वो खुशबू मेरी नाक में, मेरे दिमाग़ में, मेरे पूरे शरीर में घुस जाती है।
मेरी चूत अपने आप गीली हो जाती है, सिर्फ़ उसकी smell से।
जब हम चुदाई करते हैं, sweat और ज़्यादा बहता है।
उसकी पीठ, उसकी जाँघें, उसकी बगलें… सब गीले।
मैं उसकी पीठ पर जीभ फेरती हूँ, नमक चखती हूँ, smell लेती हूँ।
वो मेरे मुँह में अपना पसीना रगड़ती है, और मैं और ज़ोर से चूसती हूँ।
![]()
जब मैं उसकी चूत पर सिर्फ़ साँसें छोड़ती हूँ,वो बिल्कुल टूट कर बोलती है…
“प्लीज़… अंदर… ह्म्म्म्म… मत तड़पा…”
उसकी आवाज़ में रोना और हँसी दोनों घुले होते हैं।
और जब मैं सच में अंदर जाती हूँ, जीभ से, उँगलियों से,तो उसकी असली moans शुरू होती हैं…
“आह… आह… आह… स्वाति… हाँ… तेज़… तेज़…”
हर धक्के के साथ एक नई moan, तेज़, गहरी, गीली।
उसकी आवाज़ कमरे की दीवारों से टकरा कर वापस मेरे कानों में घुसती है।
जब वो झड़ने के करीब होती है,उसकी moans छोटी-छोटी हो जाती हैं, तेज़-तेज़…
“हा… हा… हा… हा… आ… आ… आ रही हूँ…”
और आख़िरी में एक लंबी, काँपती हुई चीख…“स्वा…ती…!”
उसकी sweat smell मेरे लिए kick है…
जितनी तेज़ smell, उतनी तेज़ मेरी भूख।
मैं उसकी sweat पीती हूँ जैसे कोई प्यासा पानी पीता है।
और हर बार वो मुझे और ज़्यादा पसीना देती है।
काजल की sweat smell…
ये मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी है।
और मैं इसमें डूबना चाहती हूँ…
हमेशा। ❤
बहोत ही जबरदस्त. अमेज़िंग... स्टोरी का इंतजार रहेगा.काजल के बदन के पसीने की smell मेरे लिए नशा है, बिल्कुल अफीम।
जब वो मेरे पास आती है, थोड़ी सी दौड़ कर या बस गर्मी से, उसकी त्वचा पर पतली-पतली बूँदें चमकती हैं।
![]()
![]()
![]()
मैं नाक उसके गले के पास ले जाती हूँ…
उसकी skin इतनी मुलायम है कि जब मेरी उँगलियाँ उस पर फिसलती हैं, तो लगता है जैसे रेशम पर पानी बह रहा हो।पर वो रेशम गर्म है, जिंदा है, हर जगह थोड़ा अलग।
उसकी गर्दन… वहाँ skin इतनी पतली और नरम है कि मेरी उँगलियाँ डूब जाती हैं, जैसे बादल में हाथ डाल दिया हो।मैं होंठ रखती हूँ और महसूस करती हूँ, नीचे उसकी नस धड़क रही है, तेज़-तेज़।
वहाँ से उठती वो गंध, नमकीन, हल्की खट्टी, थोड़ी सी मिट्टी जैसी, बिल्कुल काजल वाली।
मैं एक गहरी साँस लेती हूँ और मेरा दिमाग़ घूम जाता है।
![]()
![]()
“काजल… तेरी sweat smell… मुझे पागल कर देती है,” मैं फुसफुसाती हूँ।
वो हँसती है और अपना गला मेरे मुँह के पास लाती है।
मैं जीभ निकाल कर उसकी गर्दन से एक लंबा चटकारा लेती हूँ, नमक, गर्मी, उसकी skin का स्वाद।
उसकी छाती के बीच वाली लकीर… वहाँ skin इतनी कोमल है कि बस हवा से भी सिहर उठती है।मैं उँगली से धीरे-धीरे खींचती हूँ, वो काँपती है और कराहती है,
“स्वाति… और धीरे… जल जाएगी…”
![]()
![]()
![]()
फिर उसकी बगल… वो जगह जहाँ sweat सबसे ज़्यादा जमा होती है।
बाल गीले, चिपके हुए, smell इतनी तेज़ कि मेरी आँखें बंद हो जाती हैं।
ओह, उसकी बगल की skin सबसे नरम, सबसे गर्म, सबसे गीली।बालों के नीचे वो त्वचा इतनी कोमल है कि मेरी जीभ डूब जाती है।जब मैं चाटती हूँ तो वो skin मेरे होंठों से चिपक जाती है, फिर अलग होती है, फिर चिपक जाती है… जैसे मुझे छोड़ना ही नहीं चाहती।
![]()
![]()
मैं अपना पूरा मुँह वहाँ दबा देती हूँ, साँस रोक कर smell लेती हूँ, फिर जीभ से चाटती हूँ।
हर चाटे में नया स्वाद, नई खुशबू।
फिर जब मैं उसकी बगल में जीभ डालती हूँ,वो थोड़ी गहरी हो जाती है…
“आह्ह्ह… स्वाति…”
उसकी आवाज़ काँपती है, जैसे कोई गीली रस्सी खींची जा रही हो।
![]()
![]()
![]()
कभी वो मेरे ऊपर चढ़ती है, पसीने से तर, और अपना पूरा body मेरे चेहरे पर रगड़ती है।
![]()
![]()
![]()
उसकी छाती, उसकी कमर, उसकी जाँघें… हर जगह से sweat की बूँदें मेरे होंठों पर गिरती हैं।
मैं चाटती हूँ, चूसती हूँ, smell लेती हूँ।
“तेरी sweat मेरे लिए perfume है,” मैं कहती हूँ।
वो कराहती है, “तो पी ले… सारा पी ले… मैं तेरे लिए और पसीना बहाऊँगी।”
![]()
उसकी जाँघों का भीतरी हिस्सा… वहाँ skin इतनी पतली और संवेदनशील है कि मेरी साँस पड़ते ही goosebumps खड़े हो जाते हैं।मैं बस उँगली की नोक से छूती हूँ, फिर भी वो टाँगें सिकोड़ लेती है और बोले,
“स्वाति… मत छू वहाँ… पागल हो जाऊँगी…”
मैं अपना चेहरा उसकी जाँघों के बीच ले जाती हूँ और बस साँस लेती हूँ…लंबी, गहरी, बार-बार।
वो खुशबू मेरी नाक में, मेरे दिमाग़ में, मेरे पूरे शरीर में घुस जाती है।
मेरी चूत अपने आप गीली हो जाती है, सिर्फ़ उसकी smell से।
जब हम चुदाई करते हैं, sweat और ज़्यादा बहता है।
उसकी पीठ, उसकी जाँघें, उसकी बगलें… सब गीले।
मैं उसकी पीठ पर जीभ फेरती हूँ, नमक चखती हूँ, smell लेती हूँ।
वो मेरे मुँह में अपना पसीना रगड़ती है, और मैं और ज़ोर से चूसती हूँ।
![]()
जब मैं उसकी चूत पर सिर्फ़ साँसें छोड़ती हूँ,वो बिल्कुल टूट कर बोलती है…
“प्लीज़… अंदर… ह्म्म्म्म… मत तड़पा…”
उसकी आवाज़ में रोना और हँसी दोनों घुले होते हैं।
और जब मैं सच में अंदर जाती हूँ, जीभ से, उँगलियों से,तो उसकी असली moans शुरू होती हैं…
“आह… आह… आह… स्वाति… हाँ… तेज़… तेज़…”
हर धक्के के साथ एक नई moan, तेज़, गहरी, गीली।
उसकी आवाज़ कमरे की दीवारों से टकरा कर वापस मेरे कानों में घुसती है।
जब वो झड़ने के करीब होती है,उसकी moans छोटी-छोटी हो जाती हैं, तेज़-तेज़…
“हा… हा… हा… हा… आ… आ… आ रही हूँ…”
और आख़िरी में एक लंबी, काँपती हुई चीख…“स्वा…ती…!”
उसकी sweat smell मेरे लिए kick है…
जितनी तेज़ smell, उतनी तेज़ मेरी भूख।
मैं उसकी sweat पीती हूँ जैसे कोई प्यासा पानी पीता है।
और हर बार वो मुझे और ज़्यादा पसीना देती है।
काजल की sweat smell…
ये मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी है।
और मैं इसमें डूबना चाहती हूँ…
हमेशा। ❤
ye koi badi story nahi dear, ye to bas meri Kajal ke chote chote intimate pal hai , meri aur Kajal ki feelings haiबहोत ही जबरदस्त. अमेज़िंग... स्टोरी का इंतजार रहेगा.