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Romance मेरी काजल

sexyswati

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हाय , मैं स्वाती। ये मेरी और मेरी काजल के बिच घटे कुछ प्रसंग है , ये स्टोरी नहीं है , पर हर प्रसंग को आप शॉर्ट स्टोरी की तरह पढ़ सकते हो
 
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sexyswati

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मैं स्वाति हूँ… और ये मेरी कहानी है, मेरी काजल के साथ।

बारिश हो रही थी उस रात।
मैं अकेली कमरे में लेटी थी, मोमबत्ती की रोशनी में अपने ही खयालों में डूबी हुई।
फिर घंटी बजी… और मेरी जान आ गई।

काजल भीगी हुई दरवाज़े पर खड़ी थी।
कुर्ती उसके body से चिपकी हुई, बालों से पानी टपक रहा था।
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मैंने कुछ नहीं कहा। बस उसे अंदर खींचा, दरवाज़ा बंद किया और दीवार से सटा दिया।
पहला kiss मैंने ही लिया… गहरा, भूखा, जैसे महीनों की सारी प्यास एक पल में निकाल रही हूँ।
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“इतनी याद आई थी ना… आज तुझे छोडूंगी नहीं,”
मैंने उसके होंठों पर फुसफुसाया।
फिर मैंने उसके दोनों हाथ ऊपर किए और अपना मुँह उसकी बगल में घुसा दिया।
उसके वो गीले , घने बगल के बाल… मैंने गहरी साँस ली।
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“तेरी smell… मुझे मार डालती है,”
मैंने कराहते हुए कहा और जीभ से चाटने लगी।

काजल काँप उठी।
“स्वाति… हाँ… और जोर से…”

मैंने उसके कपड़े उतारे, अपने भी।
फिर उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गई।
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धीरे-धीरे kiss करते हुए नीचे आई… उसकी छाती पर, निप्पल्स पर, पेट पर…
और फिर उसकी जाँघों के बीच।
“स्वाति… please…” उसकी आवाज़ काँप रही थी।
मैंने मुस्कुरा कर कहा, “चुप… आज मैं तुझे रुलाऊँगी मज़े से।”
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और मैंने अपना मुँह उसकी सबसे गर्म जगह , उसकी चुत पर रख दिया।
जीभ से खेला, उँगलियाँ अंदर डालीं… कभी धीरे, कभी तेज़।
काजल की सिसकारियाँ बढ़ती गईं।
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मैंने अपनी बगल उसके मुँह के पास ला दी।
वो पागल होकर चाटने लगी।
“तेरे बाल… तेरी smell… मैं मर जाऊँगी…” वो बड़बड़ाई।
जब वो झड़ने वाली थी, मैंने और तेज़ कर दिया।
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और जब वो चीख कर आई… मैंने उसका पूरा स्वाद अपने मुँह में ले लिया।
फिर मैं ऊपर आई। उसने मुझे कस के hug किया।
मैंने उसके कान में कहा, “अब मेरी बारी है ना?”
उसने हँसते हुए मुझे नीचे लिटाया।
और फिर… उसने मुझे वैसा ही प्यार दिया जैसा मैंने उसे दिया था।
उसकी जीभ मेरी बगल में, मेरे body पर, मेरे अंदर…
मैं बस उसका नाम चिल्लाती रही।
जब हम दोनों थक कर एक-दूसरे से लिपट गए,
मैंने उससे कहा,
“काजल… तू मेरी है। सिर्फ़ मेरी।”
उसने मेरी बगल में मुँह छुपाया और फुसफुसाया,
“और तू मेरी। हमेशा।”
बाहर बारिश थम नहीं रही थी।
अंदर हमारी साँसें, हमारी खुशबू, हमारा प्यार… बस वही था।
ये मेरी कहानी है।
मेरी काजल के साथ।
और ये अभी खत्म नहीं हुई…
 

sexyswati

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ये वो रात थी जब काजल और मैं बाथरूम में पूरी तरह खो गए थे। तब मैंने पहली बार महसूस किया कि इंतज़ार भी चुदाई का हिस्सा होता है।

पानी गरम था, भाप इतनी कि हम एक-दूसरे को सिर्फ़ छू कर ही पहचान पा रहे थे।

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काजल दरवाज़े के पास खड़ी थी, सिर्फ़ एक पतली सफ़ेद कुर्ती में, भीगते ही वो पारदर्शी हो गई थी।
उसके निप्पल्स साफ़ दिख रहे थे, सख्त और गुलाबी।
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मैंने उसे बस देखा… एक सेकंड… दो सेकंड… दस सेकंड।
न कुछ कहा, न छुआ। सिर्फ़ देखती रही।
उसकी साँसें तेज़ होती गईं, छाती ऊपर-नीचे।
वो जानती थी कि मैं उसे तड़पा रही हूँ।
मैंने अपना टॉप धीरे-धीरे उतारा, फिर ब्रा।
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अपनी बगलें उसके सामने खोल दीं।
पानी उन पर से बह रहा था, बाल चिपके हुए, खुशबू उठ रही थी।
मैंने खुद अपनी बगल को सहलाया, उँगलियों से बाल खींचे, फिर जीभ निकाल कर खुद ही चाटने लगी।

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काजल की सिसकारी निकल गई, वो दीवार से सट कर खिसकने लगी।
फिर मैंने एक कदम आगे बढ़ाया।
पानी मेरे कंधों पर गिर रहा था, पर मैंने उसे अभी तक छुआ नहीं था।
मैं उसके इतने करीब पहुँची कि मेरी साँसें उसके गीले होंठों को छू रही थीं, पर kiss नहीं किया।
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मैंने उसे दीवार से सटाया, दोनों हाथ ऊपर उठाए और कस के पकड़ लिए।
मेरा मुँह उसकी बगल के ठीक सामने… बस एक मिलीमीटर दूर।
बस आँखों में आँखें डाल कर मैं फुसफुसाकर बोली......

“बोल… कितना चाहिए?”

काजल की साँसें फट रही थीं, “स्वाति… प्लीज़… चाट ना…”

मैंने हँस कर कहा, “गलत जवाब। फिर से बोल… कितना चाहिए?”

“बहुत… बहुत चाहिए… तेरी जीभ… तेरी साँसें… सब चाहिए…”

“कहाँ चाहिए?”

वो शरमा गई, होंठ काटते हुए बोली, “मेरी बगल में… मेरी चूत में… हर जगह…”

मैंने सिर्फ़ एक गर्म साँस छोड़ी उसके बालों पर।

वो चीखी, “आह… स्वाति… तू कमीनी है…”

“हाँ, कुतीया मैं कामिनी हु … अब बोल, ‘स्वाति, मेरी बगल चाटो’… पूरी लाइन बोल।”

वो रोने लगी, “स्वाति… स्वाति, मेरी बगल चाटो… प्लीज़… मैं मर रही हूँ…”

मैंने अभी भी सिर्फ़ जीभ का सिरा बाहर निकाला और एक बाल को हल्के से छुआ।
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वो काँप कर बोली, “और… और जोर से… पूरा मुँह डाल…”

“नहीं… पहले ये बोल, ‘स्वाति, मैं तेरी रंडी हूँ आज’…”

उसकी आँखों में आँसू थे, “स्वाति… मैं तेरी रंडी हूँ आज… बस अब चाट ना…”

तब जाकर मैंने अपना पूरा मुँह उसकी बगल में घुसाया।
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वो चीखी, “हाँ… ऐसे ही… मेरे बाल चूस… आह… स्वाति…”
मैंने बगल से निकाल कर नीचे सरकी।
मैं उसके सामने घुटनों पर बैठ गई, पर अभी भी नहीं छुआ।
मैंने सिर्फ़ साँसें छोड़ीं… उसकी जाँघों के बीच गर्म-गर्म हवा।
उसकी चूत पूरी खुली थी, फूल चुकी थी, लाल और गीली।
उसकी चूत से रस टपक रहा था, पानी में मिल कर फर्श पर गिर रहा था।
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वो काँप रही थी, टाँगें चौड़ी करने की कोशिश कर रही थी, पर मैंने रोक दिया।

“नहीं… अभी नहीं।”

उसकी चूत के ठीक सामने रुक गई।
काजल रोने लगी, “स्वाति… मैं मर जाऊँगी… प्लीज़… अंदर डाल ना…”
मैंने फिर वही खेल शुरू किया।

“बोल… क्या चाहिए यहाँ?”
“तेरी जीभ… तेरी उँगलियाँ… सब…”
“कितनी उँगलियाँ?”
“चार… नहीं… पूरी मुट्ठी… बस अंदर डाल ना…”

मैंने हँस कर कहा, “अभी नहीं… पहले ये बोल, ‘स्वाति, मेरी चूत फाड़ दो आज’…”

वो बिल्कुल टूट गई, “स्वाति… मेरी चूत फाड़ दो… मैं तेरी गुलाम हूँ… बस अब रहम कर…”

तब मैंने उसकी क्लिट को सिर्फ़ हवा से छुआ।

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वो चिल्लाई, “नहीं… सच में चाट… मैं सच में मर जाऊँगी…
मैंने बहुत धीरे से, सिर्फ़ जीभ का नरम सिरा उसकी क्लिट पर टच किया।
एक बार।
वो ज़ोर से चीखी, पूरा body हिल गया।
मैंने काजल की जाँघें चौड़ी कीं। उसकी चूत से गर्मी उठ रही थी, पानी के बावजूद उसका अपना रस मेरी नाक तक पहुँच रहा था।
मैंने जीभ निकाल कर एक लंबा चाटा मारा, नीचे से ऊपर तक।
उसका स्वाद… मीठा-नमकीन, जैसे कोई नशा।

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मैंने आख़िरी बार फुसफुसाया,
“अब चुप… और मेरे मुँह में आ जा।”
और फिर मैंने कोई रहम नहीं किया।
मेरा पूरा मुँह, चार उँगलियाँ, और सारी भूख एक साथ उस पर टूट पड़ी।
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वो बस मेरा नाम चीखती रही…
उसका रस मेरे मुँह में, मेरी नाक में, मेरी ठुड्डी पर।
वो बस “स्वाति… स्वाति…” चिल्लाती रही, जब तक ज़ोर से काँप कर मेरे मुँह में न झड़ गई।

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फिर मैंने उसके कान में कहा,
“अब तेरी बारी… और इस बार तू मुझे उतना ही तड़पाएगी, जितना मैंने तुझे तड़पाया।”
भाप में हमारी साँसें घुल रही थीं।
और खेल अभी शुरू हुआ था। ❤
 
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sexyswati

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काजल के होंठों का स्वाद मेरे लिए नशा है।
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उसके lips इतने नरम हैं कि जब मैं पहली बार छूती हूँ, तो जैसे कोई गर्म मक्खन मेरे होंठों पर पिघल रहा हो।
उसकी saliva हल्की-हल्की मीठी है, जैसे कोई गुप्त रस जो सिर्फ़ मेरे लिए बनाया गया हो।
मैं उसका निचला होंठ अपने दाँतों से हल्के से काटती हूँ, फिर जीभ से चाटती हूँ, और वो मेरे मुँह में अपना सारा रस डाल देती है।
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हम घंटों kiss करते हैं। सचमुच घंटों।
कभी धीरे-धीरे, जैसे समय रुक गया हो…कभी इतना गहरा कि मेरी जीभ उसके गले तक पहुँच जाए और उसकी जीभ मेरे गले में।
हमारी लार एक-दूसरे के मुँह में बहती रहती है, गर्म, चिपचिपी, और बिल्कुल हमारी।
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मैं उसकी जीभ को चूसती हूँ जैसे वो मेरी आख़िरी साँस हो।
वो मेरे होंठों को चूसती है जैसे वो कभी खत्म नहीं करना चाहती।
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हमारे बीच सिर्फ़ एक पतली सी लार की डोर रह जाती है जब हम एक सेकंड के लिए अलग होते हैं… और फिर फौरन फिर जुड़ जाते हैं।
कभी मैं उसकी जीभ को बाहर निकाल कर चूसती हूँ, पूरा मुँह उस पर।वो कराहती है,
“स्वाति… और चूस… मुझे पूरा खा जा…”और मैं सच में खा जाती हूँ।
उसका सारा स्वाद, सारी गर्मी, सारी लार… सब मेरे अंदर।
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हमारी kiss में कोई जल्दबाज़ी नहीं होती।
हम बस एक-दूसरे के मुँह में खोए रहते हैं।
कभी वो मेरे होंठों को चाटती है, कभी मैं उसके।
हमारी लार हमारे चेहरे पर, गले पर, छाती पर बहती रहती है… और हम फिर से चूम लेते हैं।
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मैं उससे कहती हूँ,
“तेरी लार पीना मेरे लिए पानी से ज़्यादा ज़रूरी है।”
वो हँसती है और अपना मुँह मेरे मुँह पर रख देती है…और हम फिर घंटों तक वही करते रहते हैं।
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काजल के होंठ, उसकी जीभ, उसकी लार…ये मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी है।
और मैं कभी इससे उबरना भी नहीं चाहती।
हम अभी भी kiss कर रहे हैं…और कर रहे रहेंगे…जब तक साँसें हैं। ❤
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काजल के बदन के पसीने की smell मेरे लिए नशा है, बिल्कुल अफीम।

जब वो मेरे पास आती है, थोड़ी सी दौड़ कर या बस गर्मी से, उसकी त्वचा पर पतली-पतली बूँदें चमकती हैं।
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मैं नाक उसके गले के पास ले जाती हूँ…
उसकी skin इतनी मुलायम है कि जब मेरी उँगलियाँ उस पर फिसलती हैं, तो लगता है जैसे रेशम पर पानी बह रहा हो।पर वो रेशम गर्म है, जिंदा है, हर जगह थोड़ा अलग।
उसकी गर्दन… वहाँ skin इतनी पतली और नरम है कि मेरी उँगलियाँ डूब जाती हैं, जैसे बादल में हाथ डाल दिया हो।मैं होंठ रखती हूँ और महसूस करती हूँ, नीचे उसकी नस धड़क रही है, तेज़-तेज़।
वहाँ से उठती वो गंध, नमकीन, हल्की खट्टी, थोड़ी सी मिट्टी जैसी, बिल्कुल काजल वाली।
मैं एक गहरी साँस लेती हूँ और मेरा दिमाग़ घूम जाता है।
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“काजल… तेरी sweat smell… मुझे पागल कर देती है,” मैं फुसफुसाती हूँ।
वो हँसती है और अपना गला मेरे मुँह के पास लाती है।
मैं जीभ निकाल कर उसकी गर्दन से एक लंबा चटकारा लेती हूँ, नमक, गर्मी, उसकी skin का स्वाद।
उसकी छाती के बीच वाली लकीर… वहाँ skin इतनी कोमल है कि बस हवा से भी सिहर उठती है।मैं उँगली से धीरे-धीरे खींचती हूँ, वो काँपती है और कराहती है,
“स्वाति… और धीरे… जल जाएगी…”
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फिर उसकी बगल… वो जगह जहाँ sweat सबसे ज़्यादा जमा होती है।
बाल गीले, चिपके हुए, smell इतनी तेज़ कि मेरी आँखें बंद हो जाती हैं।
ओह, उसकी बगल की skin सबसे नरम, सबसे गर्म, सबसे गीली।बालों के नीचे वो त्वचा इतनी कोमल है कि मेरी जीभ डूब जाती है।जब मैं चाटती हूँ तो वो skin मेरे होंठों से चिपक जाती है, फिर अलग होती है, फिर चिपक जाती है… जैसे मुझे छोड़ना ही नहीं चाहती।
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मैं अपना पूरा मुँह वहाँ दबा देती हूँ, साँस रोक कर smell लेती हूँ, फिर जीभ से चाटती हूँ।
हर चाटे में नया स्वाद, नई खुशबू।
फिर जब मैं उसकी बगल में जीभ डालती हूँ,वो थोड़ी गहरी हो जाती है…
“आह्ह्ह… स्वाति…”
उसकी आवाज़ काँपती है, जैसे कोई गीली रस्सी खींची जा रही हो।
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कभी वो मेरे ऊपर चढ़ती है, पसीने से तर, और अपना पूरा body मेरे चेहरे पर रगड़ती है।
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उसकी छाती, उसकी कमर, उसकी जाँघें… हर जगह से sweat की बूँदें मेरे होंठों पर गिरती हैं।
मैं चाटती हूँ, चूसती हूँ, smell लेती हूँ।
“तेरी sweat मेरे लिए perfume है,” मैं कहती हूँ।
वो कराहती है, “तो पी ले… सारा पी ले… मैं तेरे लिए और पसीना बहाऊँगी।”
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उसकी जाँघों का भीतरी हिस्सा… वहाँ skin इतनी पतली और संवेदनशील है कि मेरी साँस पड़ते ही goosebumps खड़े हो जाते हैं।मैं बस उँगली की नोक से छूती हूँ, फिर भी वो टाँगें सिकोड़ लेती है और बोले,
“स्वाति… मत छू वहाँ… पागल हो जाऊँगी…”
मैं अपना चेहरा उसकी जाँघों के बीच ले जाती हूँ और बस साँस लेती हूँ…लंबी, गहरी, बार-बार।
वो खुशबू मेरी नाक में, मेरे दिमाग़ में, मेरे पूरे शरीर में घुस जाती है।
मेरी चूत अपने आप गीली हो जाती है, सिर्फ़ उसकी smell से।

जब हम चुदाई करते हैं, sweat और ज़्यादा बहता है।
उसकी पीठ, उसकी जाँघें, उसकी बगलें… सब गीले।
मैं उसकी पीठ पर जीभ फेरती हूँ, नमक चखती हूँ, smell लेती हूँ।
वो मेरे मुँह में अपना पसीना रगड़ती है, और मैं और ज़ोर से चूसती हूँ।
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जब मैं उसकी चूत पर सिर्फ़ साँसें छोड़ती हूँ,वो बिल्कुल टूट कर बोलती है…
“प्लीज़… अंदर… ह्म्म्म्म… मत तड़पा…”
उसकी आवाज़ में रोना और हँसी दोनों घुले होते हैं।

और जब मैं सच में अंदर जाती हूँ, जीभ से, उँगलियों से,तो उसकी असली moans शुरू होती हैं…
“आह… आह… आह… स्वाति… हाँ… तेज़… तेज़…”
हर धक्के के साथ एक नई moan, तेज़, गहरी, गीली।
उसकी आवाज़ कमरे की दीवारों से टकरा कर वापस मेरे कानों में घुसती है।

जब वो झड़ने के करीब होती है,उसकी moans छोटी-छोटी हो जाती हैं, तेज़-तेज़…
“हा… हा… हा… हा… आ… आ… आ रही हूँ…”
और आख़िरी में एक लंबी, काँपती हुई चीख…“स्वा…ती…!”
उसकी sweat smell मेरे लिए kick है…
जितनी तेज़ smell, उतनी तेज़ मेरी भूख।
मैं उसकी sweat पीती हूँ जैसे कोई प्यासा पानी पीता है।
और हर बार वो मुझे और ज़्यादा पसीना देती है।
काजल की sweat smell…
ये मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी है।
और मैं इसमें डूबना चाहती हूँ…
हमेशा। ❤
 

Sushil@10

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काजल के बदन के पसीने की smell मेरे लिए नशा है, बिल्कुल अफीम।

जब वो मेरे पास आती है, थोड़ी सी दौड़ कर या बस गर्मी से, उसकी त्वचा पर पतली-पतली बूँदें चमकती हैं।
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मैं नाक उसके गले के पास ले जाती हूँ…
उसकी skin इतनी मुलायम है कि जब मेरी उँगलियाँ उस पर फिसलती हैं, तो लगता है जैसे रेशम पर पानी बह रहा हो।पर वो रेशम गर्म है, जिंदा है, हर जगह थोड़ा अलग।
उसकी गर्दन… वहाँ skin इतनी पतली और नरम है कि मेरी उँगलियाँ डूब जाती हैं, जैसे बादल में हाथ डाल दिया हो।मैं होंठ रखती हूँ और महसूस करती हूँ, नीचे उसकी नस धड़क रही है, तेज़-तेज़।
वहाँ से उठती वो गंध, नमकीन, हल्की खट्टी, थोड़ी सी मिट्टी जैसी, बिल्कुल काजल वाली।
मैं एक गहरी साँस लेती हूँ और मेरा दिमाग़ घूम जाता है।
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“काजल… तेरी sweat smell… मुझे पागल कर देती है,” मैं फुसफुसाती हूँ।
वो हँसती है और अपना गला मेरे मुँह के पास लाती है।
मैं जीभ निकाल कर उसकी गर्दन से एक लंबा चटकारा लेती हूँ, नमक, गर्मी, उसकी skin का स्वाद।
उसकी छाती के बीच वाली लकीर… वहाँ skin इतनी कोमल है कि बस हवा से भी सिहर उठती है।मैं उँगली से धीरे-धीरे खींचती हूँ, वो काँपती है और कराहती है,
“स्वाति… और धीरे… जल जाएगी…”
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फिर उसकी बगल… वो जगह जहाँ sweat सबसे ज़्यादा जमा होती है।
बाल गीले, चिपके हुए, smell इतनी तेज़ कि मेरी आँखें बंद हो जाती हैं।
ओह, उसकी बगल की skin सबसे नरम, सबसे गर्म, सबसे गीली।बालों के नीचे वो त्वचा इतनी कोमल है कि मेरी जीभ डूब जाती है।जब मैं चाटती हूँ तो वो skin मेरे होंठों से चिपक जाती है, फिर अलग होती है, फिर चिपक जाती है… जैसे मुझे छोड़ना ही नहीं चाहती।
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मैं अपना पूरा मुँह वहाँ दबा देती हूँ, साँस रोक कर smell लेती हूँ, फिर जीभ से चाटती हूँ।
हर चाटे में नया स्वाद, नई खुशबू।
फिर जब मैं उसकी बगल में जीभ डालती हूँ,वो थोड़ी गहरी हो जाती है…
“आह्ह्ह… स्वाति…”
उसकी आवाज़ काँपती है, जैसे कोई गीली रस्सी खींची जा रही हो।
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कभी वो मेरे ऊपर चढ़ती है, पसीने से तर, और अपना पूरा body मेरे चेहरे पर रगड़ती है।
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उसकी छाती, उसकी कमर, उसकी जाँघें… हर जगह से sweat की बूँदें मेरे होंठों पर गिरती हैं।
मैं चाटती हूँ, चूसती हूँ, smell लेती हूँ।
“तेरी sweat मेरे लिए perfume है,” मैं कहती हूँ।
वो कराहती है, “तो पी ले… सारा पी ले… मैं तेरे लिए और पसीना बहाऊँगी।”
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उसकी जाँघों का भीतरी हिस्सा… वहाँ skin इतनी पतली और संवेदनशील है कि मेरी साँस पड़ते ही goosebumps खड़े हो जाते हैं।मैं बस उँगली की नोक से छूती हूँ, फिर भी वो टाँगें सिकोड़ लेती है और बोले,
“स्वाति… मत छू वहाँ… पागल हो जाऊँगी…”
मैं अपना चेहरा उसकी जाँघों के बीच ले जाती हूँ और बस साँस लेती हूँ…लंबी, गहरी, बार-बार।
वो खुशबू मेरी नाक में, मेरे दिमाग़ में, मेरे पूरे शरीर में घुस जाती है।
मेरी चूत अपने आप गीली हो जाती है, सिर्फ़ उसकी smell से।

जब हम चुदाई करते हैं, sweat और ज़्यादा बहता है।
उसकी पीठ, उसकी जाँघें, उसकी बगलें… सब गीले।
मैं उसकी पीठ पर जीभ फेरती हूँ, नमक चखती हूँ, smell लेती हूँ।
वो मेरे मुँह में अपना पसीना रगड़ती है, और मैं और ज़ोर से चूसती हूँ।
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जब मैं उसकी चूत पर सिर्फ़ साँसें छोड़ती हूँ,वो बिल्कुल टूट कर बोलती है…
“प्लीज़… अंदर… ह्म्म्म्म… मत तड़पा…”
उसकी आवाज़ में रोना और हँसी दोनों घुले होते हैं।

और जब मैं सच में अंदर जाती हूँ, जीभ से, उँगलियों से,तो उसकी असली moans शुरू होती हैं…
“आह… आह… आह… स्वाति… हाँ… तेज़… तेज़…”
हर धक्के के साथ एक नई moan, तेज़, गहरी, गीली।
उसकी आवाज़ कमरे की दीवारों से टकरा कर वापस मेरे कानों में घुसती है।

जब वो झड़ने के करीब होती है,उसकी moans छोटी-छोटी हो जाती हैं, तेज़-तेज़…
“हा… हा… हा… हा… आ… आ… आ रही हूँ…”
और आख़िरी में एक लंबी, काँपती हुई चीख…“स्वा…ती…!”
उसकी sweat smell मेरे लिए kick है…
जितनी तेज़ smell, उतनी तेज़ मेरी भूख।
मैं उसकी sweat पीती हूँ जैसे कोई प्यासा पानी पीता है।
और हर बार वो मुझे और ज़्यादा पसीना देती है।
काजल की sweat smell…
ये मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी है।
और मैं इसमें डूबना चाहती हूँ…
हमेशा। ❤
Nice update and awesome story
 

Shetan

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काजल के बदन के पसीने की smell मेरे लिए नशा है, बिल्कुल अफीम।

जब वो मेरे पास आती है, थोड़ी सी दौड़ कर या बस गर्मी से, उसकी त्वचा पर पतली-पतली बूँदें चमकती हैं।
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मैं नाक उसके गले के पास ले जाती हूँ…
उसकी skin इतनी मुलायम है कि जब मेरी उँगलियाँ उस पर फिसलती हैं, तो लगता है जैसे रेशम पर पानी बह रहा हो।पर वो रेशम गर्म है, जिंदा है, हर जगह थोड़ा अलग।
उसकी गर्दन… वहाँ skin इतनी पतली और नरम है कि मेरी उँगलियाँ डूब जाती हैं, जैसे बादल में हाथ डाल दिया हो।मैं होंठ रखती हूँ और महसूस करती हूँ, नीचे उसकी नस धड़क रही है, तेज़-तेज़।
वहाँ से उठती वो गंध, नमकीन, हल्की खट्टी, थोड़ी सी मिट्टी जैसी, बिल्कुल काजल वाली।
मैं एक गहरी साँस लेती हूँ और मेरा दिमाग़ घूम जाता है।
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“काजल… तेरी sweat smell… मुझे पागल कर देती है,” मैं फुसफुसाती हूँ।
वो हँसती है और अपना गला मेरे मुँह के पास लाती है।
मैं जीभ निकाल कर उसकी गर्दन से एक लंबा चटकारा लेती हूँ, नमक, गर्मी, उसकी skin का स्वाद।
उसकी छाती के बीच वाली लकीर… वहाँ skin इतनी कोमल है कि बस हवा से भी सिहर उठती है।मैं उँगली से धीरे-धीरे खींचती हूँ, वो काँपती है और कराहती है,
“स्वाति… और धीरे… जल जाएगी…”
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फिर उसकी बगल… वो जगह जहाँ sweat सबसे ज़्यादा जमा होती है।
बाल गीले, चिपके हुए, smell इतनी तेज़ कि मेरी आँखें बंद हो जाती हैं।
ओह, उसकी बगल की skin सबसे नरम, सबसे गर्म, सबसे गीली।बालों के नीचे वो त्वचा इतनी कोमल है कि मेरी जीभ डूब जाती है।जब मैं चाटती हूँ तो वो skin मेरे होंठों से चिपक जाती है, फिर अलग होती है, फिर चिपक जाती है… जैसे मुझे छोड़ना ही नहीं चाहती।
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मैं अपना पूरा मुँह वहाँ दबा देती हूँ, साँस रोक कर smell लेती हूँ, फिर जीभ से चाटती हूँ।
हर चाटे में नया स्वाद, नई खुशबू।
फिर जब मैं उसकी बगल में जीभ डालती हूँ,वो थोड़ी गहरी हो जाती है…
“आह्ह्ह… स्वाति…”
उसकी आवाज़ काँपती है, जैसे कोई गीली रस्सी खींची जा रही हो।
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कभी वो मेरे ऊपर चढ़ती है, पसीने से तर, और अपना पूरा body मेरे चेहरे पर रगड़ती है।
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उसकी छाती, उसकी कमर, उसकी जाँघें… हर जगह से sweat की बूँदें मेरे होंठों पर गिरती हैं।
मैं चाटती हूँ, चूसती हूँ, smell लेती हूँ।
“तेरी sweat मेरे लिए perfume है,” मैं कहती हूँ।
वो कराहती है, “तो पी ले… सारा पी ले… मैं तेरे लिए और पसीना बहाऊँगी।”
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उसकी जाँघों का भीतरी हिस्सा… वहाँ skin इतनी पतली और संवेदनशील है कि मेरी साँस पड़ते ही goosebumps खड़े हो जाते हैं।मैं बस उँगली की नोक से छूती हूँ, फिर भी वो टाँगें सिकोड़ लेती है और बोले,
“स्वाति… मत छू वहाँ… पागल हो जाऊँगी…”
मैं अपना चेहरा उसकी जाँघों के बीच ले जाती हूँ और बस साँस लेती हूँ…लंबी, गहरी, बार-बार।
वो खुशबू मेरी नाक में, मेरे दिमाग़ में, मेरे पूरे शरीर में घुस जाती है।
मेरी चूत अपने आप गीली हो जाती है, सिर्फ़ उसकी smell से।

जब हम चुदाई करते हैं, sweat और ज़्यादा बहता है।
उसकी पीठ, उसकी जाँघें, उसकी बगलें… सब गीले।
मैं उसकी पीठ पर जीभ फेरती हूँ, नमक चखती हूँ, smell लेती हूँ।
वो मेरे मुँह में अपना पसीना रगड़ती है, और मैं और ज़ोर से चूसती हूँ।
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जब मैं उसकी चूत पर सिर्फ़ साँसें छोड़ती हूँ,वो बिल्कुल टूट कर बोलती है…
“प्लीज़… अंदर… ह्म्म्म्म… मत तड़पा…”
उसकी आवाज़ में रोना और हँसी दोनों घुले होते हैं।

और जब मैं सच में अंदर जाती हूँ, जीभ से, उँगलियों से,तो उसकी असली moans शुरू होती हैं…
“आह… आह… आह… स्वाति… हाँ… तेज़… तेज़…”
हर धक्के के साथ एक नई moan, तेज़, गहरी, गीली।
उसकी आवाज़ कमरे की दीवारों से टकरा कर वापस मेरे कानों में घुसती है।

जब वो झड़ने के करीब होती है,उसकी moans छोटी-छोटी हो जाती हैं, तेज़-तेज़…
“हा… हा… हा… हा… आ… आ… आ रही हूँ…”
और आख़िरी में एक लंबी, काँपती हुई चीख…“स्वा…ती…!”
उसकी sweat smell मेरे लिए kick है…
जितनी तेज़ smell, उतनी तेज़ मेरी भूख।
मैं उसकी sweat पीती हूँ जैसे कोई प्यासा पानी पीता है।
और हर बार वो मुझे और ज़्यादा पसीना देती है।
काजल की sweat smell…
ये मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी है।
और मैं इसमें डूबना चाहती हूँ…
हमेशा। ❤
बहोत ही जबरदस्त. अमेज़िंग... स्टोरी का इंतजार रहेगा.
 

sexyswati

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मैं स्वाति हूँ… और काजल का हल्का पसीना जब उसकी skin पर चमकता है, तो वो दृश्य मेरी साँसें रोक देता है।


कल शाम जब हम दोनों कमरे में थे, हवा गर्म थी, और हम थोड़ी देर से एक-दूसरे को छू रहे थे। काजल का शरीर हल्के-हल्के पसीने से तर हो गया था। उसकी गर्दन पर छोटी-छोटी बूँदें चमक रही थीं, जैसे कोई हीरे की तरह। मैंने अपना चेहरा उसके गले के पास ले जाकर smell ली – वो नमकीन, गर्म, और पूरी तरह arousing खुशबू।


मैंने उँगली से उसकी गर्दन पर एक बूँद उठाई और अपनी जीभ पर रख ली।“काजल… तेरा हल्का पसीना… चमकता हुआ… इतना sexy लग रहा है,” मैंने फुसफुसाया।वो मुस्कुराई और अपना सिर पीछे झुका लिया, ताकि वो चमक और ज़्यादा दिखे।


मैंने अपना मुँह उसकी cleavage पर ले जाकर देखा – वहाँ भी पसीने की पतली layer चमक रही थी, जैसे कोई तेल लगा हो।मैंने जीभ निकाल कर सबसे ऊपर से चाटना शुरू किया। वो चमकती बूँदें मेरी जीभ पर फैल गईं, salty और मीठी।“आह… स्वाति… हाँ… मेरे पसीने को चाट… वो चमक तेरी जीभ पर लग रही है,” काजल कराह रही थी।मैंने और गहरा घुसाया, cleavage की दीवारों पर जीभ फेरी, हर चमकती बूँद को पीते हुए। उसकी skin गर्म थी, पसीना और ज़्यादा निकल रहा था, और वो चमक और तेज़ हो गई।


फिर मैं नीचे आई, उसकी sexy thighs पर।उसकी भीतरी thighs पर हल्का पसीना चमक रहा था – छोटी-छोटी बूँदें, जैसे मोती।मैंने अपना चेहरा वहाँ रगड़ा, वो चमक मेरे गालों पर महसूस हुई।“तेरी thighs पर ये हल्का पसीना… चमकता हुआ… मुझे पागल कर रहा है,” मैंने कहा और जीभ से एक लंबा चाटा मारा।बूँदें मेरे मुँह में घुल गईं, गर्म और नमकीन। काजल की कमर ऊपर उछल गई।“स्वाति… हाँ… मेरी thighs चाट… वो चमक वाली बूँदें पी ले… आह… और जोर से…”


मैंने दोनों thighs पर जीभ फेरी, हर चमकती बूँद को चाटा, कभी हल्के से काटा। पसीना और उसकी arousal की smell मिलकर एक नशा बन गया था।वो काँप रही थी, thighs मेरे चेहरे पर दबा रही थी, और पसीना और ज़्यादा चमक रहा था।“स्वाति… मैं geeli हो गई हूँ… तेरी वजह से… ये पसीना… चमक… सब तेरे लिए…”


मैंने उसकी thighs के बीच अपना मुँह रखा, चाटते हुए, और वो चमकती skin को और ज़्यादा गीला कर दिया।जब वो झड़ने लगी, उसका पसीना और तेज़ चमकने लगा – जैसे पूरा शरीर glow कर रहा हो।वो चीखी, “स्वाति… आह… हाँ…!” और मेरे मुँह में आ गई।


फिर हम दोनों लेट गए, उसका हल्का पसीना अभी भी चमक रहा था।मैंने उसकी skin पर हाथ फेरा, वो चमक महसूस की, और कहा,“काजल… तेरा ये हल्का पसीना चमकता हुआ… मैं इसे देखकर ही फिर से भूखी हो जाती हूँ।”


और रात अभी बाकी थी… वो चमक अभी भी मेरे मन में है। ❤
 
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