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Incest मेरा चालबाज़ बेटा

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chapter 4

सुबह हो जाती है फिर वही रोज मर्रा के काम करने मे लग जाते है खाना खाते है और दिलीप अपने काम पे और आसा अपने खेत पे


( 20 दिन बाद )

दिलीप इस 20 दिनों मे अपनी मा से राजू बन रोज रात को बात करते रहा लेकिन दिलीप सिर्फ नॉर्मल हि बात करता था कोई एक शब्द भी दिलीप ने ऐसा नही बोला जिसे सुन सारिका को अजीब लगे

दिलीप 20 दिन तक खूब सारिका को राजू बन के बात कर हसाता रहा और दिलीप का के प्लान काम कर चुका था सारिका को अब राजू से बात करने की लत लग गई थी


रात 9 बजे

सारिका बिस्तर पे नाइटी पेहने हुवे लेती हुई थी वही दिलीप भी अपने कमरे मे बिस्तर लेता हुवा सोच रहा था

दिलीप - यहा तक तो सही चला अब मा को राजू से बात करने की लत लग गई है लेकिन अब थोरा आगे एक कदम बढ़ाना होगा अब मा से दिन मे भी बात करनी पड़ेगी तो मा और भी राजू के करीब आ जायेगी

दिलीप फोन निकाल कर सारिका अपनी मा को कॉल कर देता है

सारिका राजू के फोन देख मुस्कुराते हुवे फोन उठा लेती है

सारिका - किया बात है पूरे टाइम मे मेरे दोस्त का फोन आ जाता है

दिलीप - हस्ते हुवे मे भला अपने दोस्त को कैसे इंतज़ार करवा सकता हु और सच कहु तो मुझे भी आपसे आप करने का इंतज़ार रेहता है

सारिका - हस्ते हुवे ऐसा है किया
दिलीप - किया आप को मेरे फोन का इंतज़ार नही रेहता किया
सारिका मन मे - रेहता है अभी भी मे हाथ मे फोन लिये तुम्हारे फोन का ही इंतज़ार कर रही थी

सारिका - हा करती हु कियु नही करुगी हम दोस्त जो है
दिलीप - हा सही कहा ये बताइये आपने खाना खा लिया सब कुछ ठीक चला आज का दिन कैसा गया
सारिका बिस्तर पे लेती कानों मे फोन लगाये

सारिका - दिन कैसा जायेगा जैसे रोज जाता है
दिलीप - समझ सकता हु हम गरीब है तो हमारी लाइफ मे किया हि नया कुछ अच्छा होगा

सारिका - ये बात भी तुम ने सही कही तुम बताओ आज का दिन तुम्हारा कैसा गया

दिलीप - जैसा जायेगा जैसा रोज जाता है काम से घर घर से काम बस आप से बात करता हु तो अच्छा फिल होता और सब दर्द गम भूल जाता हु

सारिका - हस्ते हुवे अच्छा ये बात है मुझे भी अच्छा लगता है तुम से बात कर लेती हु तो अच्छा फिल होता है दिल हल्का हो जाता है

दिलीप - दोस्त इसी लिये तो होते है दोस्तो से बात कर टाइम पास भी हो जाता है

सारिका - हा ये बात तो है तुमने बात करने वक़्त टाइम का पता भी नही चलता

दिलीप - मुझे भी अच्छा सुनो ना
सारिका - बोलो ना
दिलीप - कल मेरी छुट्टी है तो कल दिन भर बाते करेगे आप किया केहती है

सारिका ये सुन उसे अंदर हि अंदर अच्छा लगता है ये जान की अब दिन मे भी बात कर सकती है अपने दोस्त से

सारिका - अच्छा ऐसा है तो अच्छी बात है मुझे भी खुशी होगी
दिलीप - हा तो आप फोन अपना हमेसा अपने आप रखियेगा ठीक है
सारिका - हस्ते हुवे ठीक हो बाबा अपने पास हि रखुंगी

दिलीप - ठीक है दोस्त तो टाइम हो गया है सोते है गुड नाइट
सारिका - गुड नाइट

फोन कट

दिलीप फोन को देख मुस्कुराते हुवे - अब कल दिन मे भी बाते होगी मे आपको इतना राजू का लत लगवा दुगा की आप बेसब्री से राजू के फोन के आने का इंतज़ार करेगी फिर मे फोन करना कम कर दुगा उसके बाद आप खुद बार बार फोन करेगी राजू से बात करने के लिये


वही सारिका बिस्तर पे लेती राजू के बारे मे सोच - कल दिन मे पेहली बार बात करुगी अपने दोस्त से

सारिका मुस्कुराते हुवे सो जाती है


( नोट सारिका के दिल मे मे राजू के लिये कोई फीलिंग नही है सारिका राजू को सिर्फ दोस्त ही मानती है एक अच्छा सच्चा दोस्त)

सुबह हो जाती है


सारिका दिलीप बैठ खाना खा रहे थे

दिलीप - मा पापा से बात हुई पापा कब आने वाले है
सारिका खाना खाते हुवे दिलीप को देख

सारिका - बेटा उन्होंने कहा है कुछ महीने को आ जायेंगे लेकिन कब किस दिन आयेगे ये उन्होंने नही बताया

दिलीप - अच्छा मुझे लगता है कुछ काम खतम करने होगे तभी आयेगे
सारिका - सायद हा सकता है वो खुद ही बाद मे बता देगे जो है सो

दिलीप - हा आपका केहना भी सही है

थोरि बाते करते हुवे खाना पीना हो जाता है

सारिका दिलीप के गालो पे किस करती है जो रोज का था दिलीप फिर काम पे निकल जाता है सारिका को दिखाने के लिये सच तो हमे पता है

दिलीप चलते हुवे उसी पीपल के पेर के नीचे बैठ जाता है

दिलीप फोन निकाल - चलो अभी मा खेतो के लिये निकले गी ( दिलीप फोन लगा देता है)


सारिका बकरी लेकर खेतो की तरफ निकल परी थी तभी सारिका का फोन बजता है सारिका फोन की रिंग सुन उसके चेहरे पे मुस्कान आ जाती है सारिका अपने ब्लाउस के अंदर से अपना फोन निकालती है

हा छोटा फोन था तो सारिका ने अपने ब्लाउस के अंदर अपनी बरी चुचे के बीच रखा हुवा था

सारिका फोन उठाते हुवे - हैलो
दिलीप - गुड मोर्निंग दोस्त
सारिका खेतो के डनेर पे चलते हुवे बाते करने लगती है

सारिका - हस्ते हुवे गुड मोर्निंग दोस्त
दिलीप - आप हस कियु रही है
सारिका - हस्ते हुवे कियुंकी ये गुड मोर्निंग ये सब में पेहली बार कर रही हु
दिलीप - ओ अच्छा मे समझ गया आपके समय मे फोन नही था ना
सारिका - हस्ते हुवे सही कहा
दिलीप - हस्ते हुवे इसी लिये आपको हसी आ गई
सारिका - हा लेकिन अच्छा भी लग रहा है
दिलीप - ये तो अच्छी बात है आप अभी खेतो मे होगी सही कहा ना
सारिका - हस्ते हुवे बिल्कुल सही मेने हि तो बताया था
दिलीप - हस्ते हुवे आप ने सही कहा
सारिका - तुम अभी कहा से बाते कर रहे तो मुझे गारी ही आवाज सुनाई दे रही है
दिलीप - मे अभी घर मे बाहर एक पेर के नीचे बैठ बाते कर रहा हु

सारिका - अच्छा लेकिन कोई तुम्हारे पास है तो नही ना
दिलीप - आप चिंता कियु कर रही है कोई नही है मुझे पता है आप किया सोच रही किसी को पता नही चलेगा
सारिका - मुस्कुराते हुवे तुम सच मे समझदार हो

( असल मे सारिका नही चाहती थी किसी को पता चले भले की सारिका राजू दोस्त है लेकिन किसी को पता चलेगा एक लरका ऑन्टी को दोस्त बनाया है तो गलत सोच सकते है

दिलीप - मुझे खुशी हुई आपसे तारीफ सुन कर
सारिका - हस्ते हुवे चलो अच्छा है तुम खुश हो अच्छा सुनो अब मुझे घास काटनी है बाद मे बात करेगे ठीक है
दिलीप - ठीक है जैसा आप कहे

फोन कट

सारिका फोन अपने ब्लाउस की अंदर रख घास काटने मे लग जाती है

वही अभय पीपल के नीचे बैठा हुवा फोन देख मुस्कुराते हुवे

दिलीप - मुझे अब पुरा दिन बाहर ही रेहना पड़ेगा लेकिन मा को पाने के लिये कुछ भी करुगा

सारिका का घास काटना हो जाता है तो सारिका बकरी घास लेकर घर आ जाती है मुह हाथ धोने के बाद सारिका बिस्तर पे लेट जाती है

दिलीप को अच्छे से पता था उसकी मा खेतो से कब आती है

दिलीप - मा घर पे आ गई होगी अब फोन करता हु

दिलीप फोन लगा देता है और फिर बाते सुरु हो जाती है

5 दिन दिलीप दिन रात सारिका यानी अपनी मा से खुब बाते करता है और सारिका का दिन रात मस्त तरीके से गुजरने लगता है पेहले बोर हो जाती थी लेकिन अब राजू के साथ बात कर मस्त टाइम पास हो रहा था

5 दिन अभय की छुट्टी थी उसके बाद अभय सच मे काम पे जाने लगता है तो अभय काम मे जाते वक़्त बात कर लेता था और काम के बीच मे टाइम निकाल पुरे दिन मे 3 बार 5 या 10 मिनट बात कर लेता था फिर काम से लोटते वक़्त दिलीप कोई मोक्का नही छोरता


( पूरे 50 दिन गुजर जाते है )

आज पूरे 50 दिन हो गये थे सारिका राजू के दोस्त बने बाते करते हुवे और इस 50 दिन मे भी नॉर्मल ही दिलीप ने बाते की लेकिन दिलीप जो चाहता था वैसा होता जा रहा था


(सुबह सूरज निकलने वाला था ) यानी सुबह होने वाली थी वही टाइम होता है गाव की सभी लेडिस् के उठने का ताकि सुबह होने से पेहले बाथरूम जाया जा सके

सारिका उठ कर फोन हाथ मे लेके घर के पीछे हल्का होने जाने लगती है घर से ठोरी दूर जाने के बाद सारिका राजू को फोन करती है

ये पेहली बार था जब सारिका ने खुद राजू को फोन किया था वो भी इतनी सुबह दिलीप सोया हुवा था फोन का रिंग सुन फोन देखता है तो दिलीप के चेहरे पे इस्माइल आ जाती है

दिलीप फोन उठाते हुवे - किया बात है आज मेरी दोस्त ने खुद मुझे फोन किया है
सारिका खेतो से होते हुवे चलते हुवे

सारिका मुस्कुराते हुवे - माफ करना इतनी सुबह फोन करने के लिये मेने तुम्हारी नींद खराब कर दी ना

दिलीप - बिल्कुल नही बल्कि मे बहोत खुश हु मेरी दोस्त ने मुझे खुद फोन किया

सारिका - तुम सच केह रहे हो
दिलीप - आप की कसम आप जब फोन करे रात 12 बजे 3 बजे जब भी फोन करेगी मुझे आप से बात करने मे बहोत खुशी होगी कसम से

सारिका को ये सुन अच्छा लगता है और बहोत खुश भी हो जाती है
दिलीप - आप घर से बाहर है ना
सारिका हैरानी से - तुम्हे कैसे पता
दिलीप - हस्ते हुवे अरे किरो की आवाज सुनाई दे रही है इस लिये

सारिका - अच्छा तो ऐसे पता लगा हा मे खेतो मे आई हु
दिलीप - मुस्कुराते हुवे अभी तो पूरी तरह से सुबह भी नही हुई आप खेतो मे इस वक़्त किया करने गई है

सारिका एकदम से रुक जाती है और सर्म से लाल हो जाती है

सारिका मन मे - मे अब किया जवाब दु मे तो फस गई

दिलीप बिस्तर ले लेता मन मे - अरे ये मेने किया पूछ लिया मुझे बात को घूमना होगा नही तो सुबह मा बाते नही करेगी

दिलीप - मुझे पता है आप नीलगाय को भगाने गई होगी किया है मे भी कई बार सुबह खेतो मे जाता हु लीलगाय को भगाने खेतो को बर्बाद कर देते है
सारिका को ये सुन सास मे सास आती
सारिका - तुम ने सही कहा इसी लिये आई थी
दिलीप - मुझे पता था
सारिका - हस्ते हुवे हा तुम सही हो अच्छा सुनो ठोरी देर बाद बाते करेगे
दिलीप - ठीक है समझ गया
फोन कट

सारिका एक झारी के पास सारी उठा के हल्का होने बैठे जाती है सारिका मन मे - बच गई मुझे तो लगा था उसे पता चल गया होगा मे हल्का होने आई हु नही तो मे उसे कैसे बताती मे किया करने आई थी

हल्का होने के बाद सारिका घर की तरफ जाते हुवे फिर राजू को फोन कर बाते करने लगती है


20 दिन और गुजर जाते है अब पूरे 70 दिन हो चुके थे


इस 20 दिन मे सारिका ही हमेसा खुद जब दिल करता था फोन कर राजू से बात कर लेती थी यहा तक की अब रात 2 बजे तक बाते होने लगी थी अब सारिका को राजू से बात किये बैगर रहा नही जाता था

सारिका अपने बेटे के जाल मे मे फस्ति जा रही थी

दूसरे दिन - रात 1 बजे


दिलीप सारिका के बीच बाते हो रही थी

दिलीप - अच्छा दोस्त एक बज गये है अब हमे सोना चाहिये

सारिका - कियु ठोरी देर और बाते करते है ना

दिलीप मन मे - मा तो अब राजू से बात करने मे बहोत मजा आ रहा है खुद फोन करती है देर रात बात करती है लगता है अब समय आ गया है मैन दाव खेलने का लेकिन कुछ दिन और रुकते हो

दिलीप - ठीक हो मे अपने दोस्त से पूरी रात बात कर सकता हुई
सारिका - हस्ते हुवे मे भी लेकिन तुम चिंता मत करो मुझे मुझे पता है काम पे तुम्हे जाना होता है बस कुछ मिनट बाते करते है

15 मिनट तक और बात होती है और फोन कट कर दोनों सो जाते है


सुबह हो जाती है


दिलीप साफ देख पा रहा था उसकी मा अब खुश खिलखिलाते हुवे रहने लगी है ये देख दिलीप को भी अच्छा लग रहा था और दिलीप का प्लान सही तरह से चल रहा था काम भी कर रहा था

अब बाते ऐसे हि चलती रेहती है सारिका की नींद कभी रात को भी टूट जाती तो सारिका राजू को फोन कर बाते करने लगती दिलीप भी अपना पुरा ध्यान रखता था ताकि मा को कुछ पता ना चले

अब तो सारिका सुबह हल्का होते टाइम खेतो मे हर वक़्त जब दिलीप के पास टाइम होता बाते होते रेहती

पूरे तीन महीने हो जाते है - सारिका राजू के दोस्ती के


दिलीप इस तीन महीने मे भी सारिका यानी अपनी मा से राजू बन बाते करते हुवे कोई गलत शब्द नही होता होता नॉर्मल हाल चाल इधर उधर की बाते करता था कियुंकी दिलीप जनता था उसकी मा इतनी आसानी से उसके जाल मे नही फसेगी उसके लिये सर्ब और समय लगेगा जो दिलीप दे रहा था


शाम 3 बजे

दिलीप सारिका के साथ बिस्तर पे लेता बाते कर रहा था

दिलीप सारिका को दिन देख - मा मे देख रहा हु कुछ महीने से आप बहोत खुश नजर आती है किया पापा आने वाले है किया इस लिये

सारिका दिलीप की बात सुन हैरान और डर भी जाती है अब किया जवाब दे दिलीप को दिलीप सारिका के चेहरे को देख समझ जाता है

दिलीप सारिका के गले गलते हुवे - मा आप ऐसे हि खुश रहा कीजिये हमेसा मुझे अच्छा लगेगा आप खुश देख मुझे खुशी मिलती है

सारिका भी दिलीप को अपने बाहों मे लेकर - मे खुश ही हु बेटा और हमेसा रहूगी

दिलीप - मे भी यही चाहता हु आप खुश रहे
सारिका - दिलीप के गाल पे किस करते हुवे हुवे मेरा प्यारा बचा
दिलीप सारिका के गाल पे किस करते हुवे - मेरी प्यारी मा

सारिका दिलीप फिर हसने लगते है

( 3 महीने 10 दिन बाद - रात 10 बजे)



सारिका - सुनो ना कल दिलीप के पापा आने वाले है तो
दिलीप - समझ गया ऑन्टी आप खुद जब टाइम मिलेगा तो करना

सारिका - मुस्कुराते हुवे सही कहा वैसे हम दोस्त है सिर्फ और रहेगे लेकिन तुम मेरे बेटे के उमर के दो और मे तुम्हारी मा की उमर की तो लोग गलत समझ सकते है

दिलीप - मुझे पता है आप चिंता मत करो जब तक अंकल रहेगे मेनेज कर लेगे
सारिका - हस्ते हुवे सही कहा

फिर दोनों मे 12 बजे तक बाते होती है फिर सो जाते है

दिलीप बिस्तर पे लेता मन मे - पापा आ रहे है तो कुछ दिन महीने मेनेज कर के चलना पड़ेगा

अगले दिन सुबह 11 बजे - दिलीप के पापा सारिका के पति आ जाते है जिसे देख सारिका दिलीप बहोत खुश थे


तीनों बैठे हुवे थे कमरे मे

जगदीश दिलीप से - बेटा कैसा है तु माफ करना बेटा तेरे पापा तुझे अच्छी लाइफ नही दे पा रहे

दिलीप - अरे पापा आप ऐसी बाते मत करो आप ने मेरे लिये बहोत कुछ किया है मे इसी मे खुश हु

जगदीश - वैसे तेरा काम कैसा चल रहा है
दिलीप - ठीक ठाक चल रहा है

जगदीश सारिका को देख - मे एक महीने रेह कर फिर चला जाउंगा कियु की कभी बहोत काम है वाह सायद दो बार फिर आना जाना परे

सारिका ये सुन खुश नही होती सारिका को सारिका बस चाहती थी उसका पति उसके साथ रहे सारिका को पता था अब उसके पति के अंदर वो दम नही है लेकिन सारिका चुदाई के लिये नही बल्कि अपने पति के साथ रेहना टाइम बिताना चाहती थी सारिका चाहती थी उसका पति उसके आखो के सामने रहे लेकिन सारिका भी जानती थी उनके पति उसके और दिलीप के लिये हि सब कर रहे है


दिलीप - ठीक है पापा चिंता मत कीजिये जल्दी हि मे कोई छोटा मोटा खुद का काम सुरु कर दुगा फिर आप को जाने नही दुगा

जगदीश दिलीप के कंधे पे हाथ रख - उस दिन का इंतज़ार रहेगा बेटा

दिलीप जाते हुवे - ठीक है मे जाता हु

दिलीप ये केह कमरे से निकल बाहर घूमने चला जाता है

जगदीश सारिका को देख - कैसी हो मेरी बुलबुल
सारिका मुह बना के - बुलबुल ठीक है
जगदीश सारिका को बाहों मे भर - नाराज मत हो मेरी जान

सारिका - मे नाराज नही हु

दोनो मिया बीवी मस्ती मजाक बाते करते है कई दिनों कि बाते थी सब कर देते है


रात 10 बजे

सारिका अपने पति को देख - सुनिये ना बहोत मन कर रहा है
जगदीश सारिका को देख - यार इस उमर मे भी तुम्हे चुदाई चाहिये
सारिका - गुस्से से आप के साप मे दम नही रहा इसका मतलब ये नही मेरी बिल मे दम नही है
जगदीश - गुस्सा मत करो यार तुम्हे पता है ना सब फिर भी

सारिका सारी उपर कर घोरी बनते हुवे - मुझे पता है आप जितनी देर कर सकते है करिये जगदीश हार मान कर सारिका के चूत मे लंड घुसा देता है सारिका आह उह्ह् इसी के लिये तरप् रही थी कई महीने बाद आपका साप मेरी बिल मे गया है आह उफ करते हुवे


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जगदीश चुदाई करते हुवे मन मे - चूत तो आग फेक रही है ऐसा लग रहा है मेरा लंड उसकी चूत की गर्मी से जल जायेगा चूत भी कितनी गीली है सारिका आह उफ हा मजा आ रहा है और तेज करिये ना बस 1 मिनट होता है जगदीश ठंडा पर जाता है

सारिका मन मार कर चुपचाप लेत जाती है
जगदीश - कहा था ना लेकिन तुम मानी नही
सारिका दूसरी तरफ मुह कर के - कोई बात नही सो जाइये
जगदीश सारिका को देखता है और लेत जाता है सारिका के लिये जगदीश को बुरा लग रहा था

सारिका मन मे - मे ये किया कर रही हु मेरी बेटी बच्चे बरे हो गये हो बेटी की सादी भी हो गई है उन्होंने मुझे प्यार दिया सब कुछ देने की खुश रखने पूरी कोसिस करते आये है आज भी मेरे दिलीप के लिये घर छोर अपने गाव छोर सेहर काम करने जाते है जो आसान नही होता मे खुद गर्ज़ हो रही हु मे सिर्फ अपने बारे मे सोच रही हु ऐसा मे कैसे कर सकती हु मुझे ऐसा नही करना चाहिये था उन्हें भी बुरा लगता होगा

सारिका भी अपने आप को समझा भुजा कर आखे बंद कर लेती है

दिलीप छेद से ये सब देख सुन रहा था दिलीप कमरे मे आके बिस्तर पे लेत कर मन मे - साला किस्मत हि खराब है सोचा था चुदाई देखने के लिये मिलेगी लेकिन नही मिली लेकिन ये मेरे लिये अच्छा भी है अगर पापा के अंदर दम होता तो पूरी तरह से मा को पाना नामुम्किम् था


एक एक दिन गुजरने लगते है सारिका सुबह खेतो मे जाके वक़्त घास लेने जाके वक़्त जब भी मोक्का मिलता था राजू से बात कर लिया करती थी

1 महीने बाद

जगदीश वापस चला जाता है फिर सारिका राजू के बीच पेहले जैसे दिन रात बाते होने लगती है

10 दिन बाद - रात 9 बजे

दिलीप बिस्तर पे लेता अब समय आ गया है असली प्लान को अंजाम देने का डर भी बहोत लग रहा है अगर मे फैल हुआ तो मेरी पुरी मेहनत बर्बाद हो जायेगी लेकिन ये तो मुझे करना हि पड़ेगा


तभी सारिका का फोन आ जाता है दिलीप फोन उठाता है

सारिका - किया कर रहे हो
दिलीप - हस्ते हुवे आप को याद कर रहा था
सारिका - हस्ते हुवे अच्छा खाना हो गया
दिलीप - हा हो गया आप ने खाना खा लिया
सारिका - हा अभी ही मा बेटे खाये है खाना
दिलीप - अच्छा है मुझे तो आप से बाते करने का इंतज़ार रेहता है
सारिका - हस्ते हुवे अच्छा मुझे भी
दिलीप - सच्ची या झुठ बोल रही है
सारिका - कसम से अब तो तुमसे बाते कर टाइम का पता भी नही चलता और मेरा हर दिन रात अच्छा जाता है
दिलीप - हस्ते हुवे केहना तो मुझे चाहिये था ये बाते अपनी मीठी आवाज सुन मेरा दिल झूम उठता हो
सारिका - किया तुम्हे मेरी आवाज मीठी प्यारी लगती है
दिलीप - कसम से और मुझे लगता है आप बहोत खूबसूरत भी होगी
सारिका - हस्ते हुवे कियु अगर खूबसूरत नही हुई तो दोस्ती तोर दोगे
दिलीप - आपने सोच भी कैसे लिया मरते दम तक मे ये दोस्ती नही तोरने वाला
सारिका को ये सुन बहोत अच्छा लगता है दिल को सुकून मिलता है

दिलीप - ऑन्टी लाइन पे ही रहियेगा ठीक है
सारिका - हस्ते हुवे कियु किया हुवा
दिलीप - सुसु आई है जा रहा हु करने
सारिका ये सुन सर्म से लाल हो जाती है

दिलीप जल्दी से वा बाहर आता है और अपना लंड निकाल सीधा पथर् पे निसाना लगाता है और फोन को पास रखता है ताकि मूतने की आवाज सारिका को सुनाई दे सके और ऐसा होगा भी है

सारिका को मूतने की आवाज साफ सुनाई दे रही थी सारिका ये सुन और सर्म से लाल होते हुवे मन मे - ये लरका भी उसे पता भी है मुझे सब सुनाई दे रहा है सायद पता होगा आवाज तेज आ रही हो लगता है सच मे जोर से लगी थी छि छि मे ये किया सोच रही हु

दिलीप पिसाब करने के बाद कमरे मे आके लेत जाता है और

दिलीप - हेल्लो आप लाइन पे है
सारिका सर्म को छुपाते हुवे सांत नॉर्मल आवाज मे
सारिका - हा मे लाइन पे हु
दिलीप - माफ करना बहोत जोर से आई थी
सारिका सर्म से - छि तो मुझे कियु बता रहे हो
दिलीप - अरे माफ करना आपको बुरा लगा तो सॉर्री आगे से ध्यान रखुंगा
सारिका - अरे नही कोई बात नही ( सारिका हस्ते हुवे) लेकिन सच मे तुम्हे जोर से लगी थी ( सारिका ये केह जोर जोर से हसने लगती है)

दिलीप सरमाने का नाटक करते हुवे सर्म वाली आवाज मे
दिलीप थोरा जोर से - किया आपको कैसे पता चला
सारिका हस्ते हुवे - फोन लेकर गये थे ना
दिलीप सर्माते हुवे - नही यार देखो मजाक मत उराव मेरा जोर से लगी थी मे तो भूल ही गया और फोन लेकर चला गया लेकिन अगली बार दुबारा ऐसा नही करुगा

सारिका हस्ते हुवे - अब किया फायेदा मेने तू सब
दिलीप- प्लेस ऐसा मत बोलो सर्म आ रही है
सारिका हस्ते हुवे- ठीक है बाबा नही बोलुगी
दिलीप - थैंक्स मेरे दोस्त लेकिन

ऐसे ही मस्ती मजाक करते हुवे बाते 1 बजे तक होती है

दिलीप - दोस्त मे आपको ऑन्टी बोलुगा चलेगा ना
सारिका - तुम जो बुला लो चलेगा
दिलीप -मे ऑन्टी ही बोलुगा तो ऑन्टी अब सोते है 1 बज गये है
सारिका - सही कहा टाइम का पता नही चलता है बाते करते हुवे
दिलीप - सही कहा गुड नाइट ऑन्टी
सारिका - गुड नाइट राजू बेटा

फोन कट

सारिका बिस्तर पे लेती हस्ते हुवे मन मे - पागल जब जोर से लगी थी तो रोकने की किया जरूरत थी जाना था ना अरे यार मुझे भी सुसु लग लग गई


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सारिका बाहर आती है एक जगह पे बैठ सुसु कर फिर जाके बिस्तर पे लेत आखे बंद कर लेती है


वही दिलीप खुशी से नाच रहा था कियुंकी उसका प्लान काम कर गया था असल मे दिलीप मूतने वाला सारिका को आवाज सुनाने वाला प्लान दिलीप ने पेहले ही बना लिया था

दिलीप मन मे - 4 महीने से जयादा दिन हो गये हमारी दोस्ती के और मेने इस बीच एक भी शब्द गलत नही बोला नॉर्मल बाते की कियुंकी पेहला मेरा प्लान था मा से दोस्ती करना उसके नजदीक जाना और दोस्ती को बहोत गेहरा करना इतना ही मा खुद राजू से बात किये बगैर रेह ना पाये और ये हो चुका है इसी लिये आज मेने उसके आगे का कदम उठाया है अब मा से थोरा उस टाइप बातो मे लेके जाना होगा लेकिन धीरे धीरे आज मेरा पेहला कदम सही गया मा हसी गुस्सा नही किया तो बस जैसे ही करते रेहना है

( आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏 )
Mast update.
 
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chapter 3

सुबह हो जाती है दिलीप अपना पेहला कदम रख दिया था अब आगे बढ़ने की बारी थी

सुबह होते ही दिलीप नहाने खाने के बाद

सारिका बर्तन को धोने के लिये रख रही थी

दिलीप मा को देख - मा मे काम पे जा रहा हु
सारिका दिलीप को देख - ठीक है बेटा आराम से करना ध्यान रखना अपने उपर जोर मत डालना

दिलीप जाते हुवे - समझ गया मा आप चिंता मत करो

दिलीप निकल पारा मजदूरी करने सारिका बर्तन साफ कर खेतो मे चली जाती है


दिलीप चलते हुवे जा रहा था मन मे सोचे जा रहा था

दिलीप - पेहला कदम तो रख दिया अब मुझे कैसे भी मा को अपना दोस्त बनाना होगा और धीरे धीरे आगे बढ़ना होगा कियुंकी का का करेक्टर जैसा है आसान नही होगा जल्दी बाज़ी की तो खेल खतम


( रात 9 )

दिलीप सारिका खाना खाने के बाद कुछ देर बाते करने के बाद अपने कमरे मे लेते हुवे थे

दिलीप बिस्तर पे लेता अपने फोन को देखे जा रहा था

दिलीप - आज मुझे मा से कैसे भी दोस्ती करनी होगी और उसके लिये मुझे उनके इमोसन् का फायेदा उठाना होगा माफ करना मा ये गलत है लो लेकिन मुझे करना हि होगा

दिलीप हिम्मत जूता कर फिर अपनी मा को फोन लगा देता है

सारिका नाइटी पेहने आखे बंद किये लेती हुई कुछ सोचे जा रही थी
तभी सारिका का फोन बजता है

सारिका नंबर देखते हुवे - अरे ये तो कल वाले लरके का नंबर है जिसका गलती से फोन लग गया था लेकिन फिर कैसे गलती हो गई

सारिका फोन उठा के
सारिका - बेटा मेने कहा था ना रोंग नंबर है फिर कैसे दुबारा गलती हो गई तुमसे हा

दिलीप बिस्तर पे बेटा डरा हुवा भी था दिलीप हिम्मत कर

दिलीप - ऑन्टी मुझे पता है लेकिन इस बार मेने गलती नही की मुझे आप की मीठी आवाज सुननी थी इस लिये फोन किया
सारिका पूरी तरह से हैरान हो जाती है
सारिका - तुम पागल को किया कैसी बाते कर रहे तो तुम हा
दिलीप - माफ करना ऑन्टी आपको अजीब लग रहा होगा लेकिन ये सच है आप की आवाज बहोत मीठी है
सारिका - मान गई मेरी आवाज मीठी है लेकिन तुम ऐसे ही किसी से बात नही कर सकते बेटा ना किसी अंजान से ऐसा केहना चाहिये
दिलीप - जानता हु ये गलत है तो कियु ना हम दोस्त बन जाये मेरा कोई दोस्त नही है

सारिका हैरान और हस्ते हुवे - बेटा मे तुम्हारी मा की उमर की हुई और तुम मुझे दोस्त बनाना चाहते हो

दिलीप - ऑन्टी तो किया हो गया दोस्ती उमर देख कर थोरी की जाती है
सारिका हस्ते हुवे - उमर देख कर ही की जाती है बेटा
दिलीप उदास दुखी आवाज मे - माफ करना ऑन्टी परेसान करने के लिये

सारिका दिलीप की दुखी आवाज सुन सारिका को भी बुरा फिल होता है ( एक बात सारिका का पता नही है जिस से वो बात कर रही है उसका बेटा है)
सारिका - तुम उदास कियु हो रहे हो तुम्हारे दोस्त है ना उन से बाते करो ना

दिलीप दुखी आवाज मे - दोस्त है लेकिन नाम के है

सारिका कंफ्यूज से - तुम्हारे केहना का किया मतलब है

दिलीप - ऑन्टी असल मे बात ये है मेरे कुछ दोस्त है लेकिन सभी मुझे अपना दोस्त मानते नही कही जाते है तो मुझे बुलाते नही एक दूसरे से सभी बहोत बाते करते है लेकिन मुझसे सब बहोत कम बाते करते है उनके साथ होकर भी ऐसा फिल होता है मे अकेला हु और मेरे पिट पीछे मेरा मजाक उराते है

सारिका पूरी कहानी सुन हैरान होती है और लरके के लिये बुरा फिल भी होता है

सारिका - बेटा ये तो बहोत बुरा है ऐसे दोस्त ना रेहना ही ठीक है
दिलीप बिस्तर पे लेता मन मे - सही है मा लाइन पे आ रही है

दिलीप - सही कहा ऑन्टी इस लिये मे अब उनके बाते नही करता
सारिका गेहरि सास छोरते हुवे - तो बेटा कोई नया दोस्त बना लो

दिलीप - कोसिस की ऑन्टी लेकिन नया दोस्त नही बना पाया
सारिका हैरानी से - लेकिन कियु
दिलीप - ऑन्टी आज के समय मे सच्चा दोस्त मिलना मुश्किल है मे गरीब घर से हु मेरे पास पैसे नही होते दोस्तो पे खर्च करने के लिये इस लिये मेरा कोई दोस्त भी नही बनता और जो अच्छे लरके है उसका दोस्त पेहले से है तो बस मे अकेला फिल करता हु

सारिका को और भी लरके के लिये बुरा फिल होने लगता है

सारिका - बेटा बहोत बुरा हुवा कोई बात नही कोसिस करते रेहना कोई ना कोई अच्छा दोस्त मिल जायेगा

दिलीप दुखी आवाज मे - नही ऑन्टी मेने कोसिस कर ली अब मुझसे नही होगा अकेला रेह लुगा लेकिन अगर आप दोस्त बन जाती हो

सारिका - देखो बेटा मे तुम्हारी दोस्त नही बन सकती मे तेरी मा की उमर की हु तुम मेरे बेटे के उमर के

दिलीप दुखी आवाज मे - समझ गया ऑन्टी माफ करना आपका सुक्रिया ऑन्टी मेरी बात सुनने के लिये अपने दिल की बात आप को बता कर बहोत अच्छा लगा

सारिका - कोई बात नही बेटा
दिलीप - गुड नाइट ऑन्टी अब मे आप को परेसान नही करुगा

फोन कट

सारिका फोन को साइड रख छत को देखते हुवे - बेचारा उसके साथ बहोत बुरा हुवा मेरे बेटे के साथ भी ऐसा ही कुछ है वो अकेला है जायदा दोस्त नही है कुछ ही दोस्त है गिने सुने तो मे बच्चे का दर्द समझ सकती हु लेकिन मे उसकी दोस्त नही बन सकती


दिलीप बिस्तर पे लेता फोन को देख - लग गये अब किया होगा मा ने तो मना कर दिया दोस्त बनने से सेट सेट पेहला प्लान ही फेल हो गया अब मुझे कोई दूसरा रास्ता देखना होगा

दिलीप बहोत परेसान हो गया था और दुखी भी अपने प्लान फेल हो गया था

( सुबह )

वही अपना रोज का सुबह काम करने के बाद सारिका दिलीप बैठ खाना खा रहे थे

दिलीप सारिका को देख - मा आप अकेले बहोत बोर हो जाती होगी ना

सारिका दिलीप को देख - किया करू बेटा बोर तो बहोत हो जाती हु टाइम पास ही नही होता तुम नही रेहते हो तू

दिलीप - मा तो अपने दोस्त के पास चली जाती बाते करती
सारिका मन मे - मेरे दोस्त भी कमीने है कैसी गन्दी बाते करती है मुझे नही पसंद नाम के दोस्त है कमीनी है सब
सारिका - नही होता चलेगा अकेली ही ठीक हु
दिलीप - मा अगर कोई दोस्त है दूर है आपसे तो भी चलेगा फोन पे बात कर लिया कीजिये आपका टाइम भी पास हो जायेगा और आपके दोस्त को भी अच्छा लगेगा

दिलीप की बात सारिका को सोचने पे मजबूर कर देती है

दिलीप मा को सोचता देख मन मे - मुझे पता है अकेला पन कैसा होता है आप को एक दोस्त की जरूरत है मा मेने ये आखरी कोसिस की है अगर बात नही बनती तो सच मे मुझे कोई दूसरा रास्ता ढुढ़ना पड़ेगा पता नही फिर कितना टाइम लगेगा

खाना पीना जो जाता है और दिलीप सारिका को बाय बोल काम पे निकल परता है सारिका भी खेतो मे चली जाती है


सारिका खेतो मे घास काटते हुवे मन मे - मुझे भी दोस्त की कमी खलती है और जो दोस्त है नाम के है लेकिन किया मुझे भी दोस्त बना लेना चाहिये लेकिन कैसे किसी बनाउ अपना दोस्त मे तो किसी को जानती भी नही

तभी सारिका को जोरों की पिसाब लगती है सारिका चारों तरफ देखती है कोई नही है तो एक जगह पे सारी उपर कर बैठ जाती है


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सारिका की फूली गरम चुत के छेद से जोरदार सिटी मारते हुवे पानी बाहर निकलने लगता है सारिका पिसाब करने के बाद खरी होकर फिर घास काटने मे लग जाती है


( साम 5 बजे )

दिलीप थका हारा घर आता है सारिका दिलीप को देख

सारिका - आ गया बेटा मेने पानी रख दिया है जाके नहा ले
दिलीप सारिका को देख - ठीक है मा

दिलीप जाके पेहले नहाता है फिर रेडी होता है

दिलीप सारिका के पास जाके - मा मे बाहर घूम कर आता हु
सारिका दिलीप को देख - ठीक है बेटा जा जल्दी आ जाना
दिलीप मुस्कुराते हुवे - मा एक किस्सी दो ना
सारिका हस्ते हुवे दिलीप के गालो पे किसी कर देती है

सारिका - मुस्कुराते हुवे अब टिक है
दिलीप मुस्कुराते हुवे - हा अब टिक है

दिलीप बाहर घूमने चला जाता है और सारिका बर्तन साफ करने मे लग जाती है


( रात 9 बजे )

खाना खाने के बाद सारिका बिस्तर पे लेती हुई कुछ सोच रही थी वही दिलीप भी अपने हाथो मे फोन लिये

दिलीप - प्लेस मा फोन करो प्लेस नही तो मेरा किया धरा मेहनत सब पानी मे बेह जायेगा

सारिका बिस्तर पे लेती अपने हाथो मे फोन लिये दिलीप के नये नंबर को देखते हुवे - मुझे भी एक दोस्त की जरूरत है लेकिन इस लरके को भी लेकिन ये तो मेरे बेटे के उमर का है और मे उसकी मा की उमर कि तो किया हम दोस्त बन सकते है खैर एक बार ट्राई करने के किया जाता है

सारिका बहोत सोचने के बाद हिम्मत कर फोन लगा देती है

दिलीप बेचैन अपनी मा के फोन करने का इंतज़ार कर रहा था तभी फोन का रिंग बजता है दिलीप नंबर देख खुशी से पागल होने लगता है दिलीप थोरी देख बाद फोन उठा के

दिलीप - ऑन्टी आपने कैसे फोन किया कही आप मुझसे गुस्सा तो नही है ना अभी तक

सारिका बिस्तर पे लेती - नही नही बेटा जैसा तुम सोच रहे हो वैसा कुछ नही है

सारिका थोरा हीच हीचका रही थी सारिका को समझ नही आ रहा था कैसे अपने बेटे के उमर के लरके से दोस्त बनने के बारे मे कहे

दिलीप बिस्तर पे लेता समझ जाता है मा की हालत खुद आगे बात बढ़ाता है

दिलीप - ऑन्टी मे आप से फिर पूछता हु किया आप मेरी दोस्त बनेगी प्लेस ऑन्टी मान जाइये ना प्लेस

सारिका मन मे - मे भी चाहती हु उसने खुद फिर कहा है तो देरी नही करनी चाहिये

सारिका - बेटा ठीक है मे तुम्हारी दोस्त बनुगी लेकिन हम बाते करेगे किया तुम तो तो एक मर्द के साथ मेर बेटे के उमर के हो

दिलीप - ऑन्टी मे समझ सकता हु रही बात हम किया बाते करेगे तो मे अपने पुरे दिन मे जो करा उसके बारे मे अपने बारे मे कल किया करुगा यही सब बाते करेगे और आप दिन मे किया करती है किया बनाया कैसा दिन गया अच्छा बुरा जो आप बताना चाहे मुझे एक दोस्त मे यही तो बाते करते है

सारिका मन मे - बात तो सही कही कोसिस करती हुई अगर बाद मे दिल नही किया तो मना कर दूगी और बात भी खतम

सारिका - ठीक है बेटा मे तैयार हु आज से हम दोस्त है

दिलीप बिस्तर पे लेता हुवा था सारिका की बात सुन बिस्तर से खरा होकर खुशी सी नाचने लगता है फिर अपने आप को सांत कर बिस्तर पे लेत

दिलीप - ऑन्टी किया आप सच केह रही कही आप मुझसे मजाक तो रही कर रही है ना
सारिका - मुस्कुराते हुवे सच्ची केह रही हु बेटा
दिलीप - खुशी से थैंक्स ऑन्टी आपका बहोत बहोत सुक्रिया मे बता नही सकता मे कितना खुश हु मुझे अब रोज अपने दोस्त की मीठी आवाज सुनने के लिये मिलेगी मे अपने दिल का हाल अपने दोस्त को बता सकता हु सच मे आज बहोत खुश हु मे ऑन्टी

सारिका दिलीप यानी अंजान की बात सुन खुश होता देख सारिका को भी बहोत अच्छा लगता है

दिलीप - ऑन्टी अब हम दोस्त बन गये है तो पेहले जान पहचान हो जाये मेरा नाम राजू हो आप का
सारिका बिस्तर पे करवट लेते हुवे - सारिका नाम है मेरा

दिलीप - सारिका बहोत खूबसूरत नाम है आपका
सारिका - थैंक्स तुम्हारा भी अच्छा नाम है राजू वैसे ये बताओ राजू घर मे कोन कोन है तुम्हारे
दिलीप - ऑन्टी मे मेरी मा पापा सेहर मे है और दो बहने है दोनों की सादी हो गई है तो तभी हम मा बेटे ही है आज अपने बारे मे बताइये ना

सारिका - मेरी एक बेटी बेटा है तुम्हारे अंकल तुम्हारे पापा की तरह सेहर गये है कमाने बेटी ससुराल मे है बस हम मा बेटे ही है घर मे

दिलीप - अच्छा सेम मेरे जैसा ही है बस मेरी मा की दो बेटी है

सारिका हस्ते हुवे - सही कहा
दिलीप - वैसे ऑन्टी आपका बेटा किया करता ही
सारिका - काम पे जाता है पढाई छोर कर
दिलीप - मेरा भी वही है मे भी पढाई छोर मजदूरी करता हु
सारिका - किया बताऊ बेटा गरीबी रुला देती है
दिलीप - मुझे लगता है भाई आपकी घर चलाने मे मदद करना चाहते है आपके लिये कुछ करना चाहते है
सारिका - सही कहा बेटा तूने मेरा बेटा मुझे बहोत प्यार करता है मे भी बहोत प्यार करती हु मेरा लाल है वो
दिलीप - समझ सकता हु हर मा को अपना प्यारा होता है मेरी मा भी मुझे बहोत प्यार करती है

सारिका - करेगी ही हर मा अपने बच्चे से बहोत प्यार करती है
दिलीप - सही कहा आप ने ऑन्टी वैसे आज आपने किया बनाया है
सारिका - दाल भात भुजिया
दिलीप - ये तो मेरी फेवरेट है
सारिका - हस्ते हुवे मेरे बेटे का भी

दिलीप बिस्तर पे लेता अब बस धीरे धीरे मा को आदत लगानी है

दिलीप - ठीक है ऑन्टी आपको नींद आ रही होगी सो जाइये कल बात करेगे आपसे बात कर सच मे बहोत अच्छा लगा यकीन मानिये आज मे आप मेरी बेस्ट फ्रेंड है थैंक्स ऑन्टी फिर से मुझे जैसे को अपना दोस्त बनाने के लिये

सारिका - ऐसा मत कहो बेटा मुझे भी अच्छा लगा तुमसे बात कर के
दिलीप - गुड नाईट मेरी प्यारी दोस्त
सारिका हस्ते हुवे - गुड नाईट मेरे प्यार दोस्त

दिलीप फोन कट कर देता है

दिलीप बिस्तर पे लेता जोर जोर से सासे लिये जा रहा था दिलीप अपने सीने पे हाथ रख - यकीन नही हो रहा मे कामयाब रहा मेने मा को दोस्त बना लिया

दिलीप की खुशी का कोई ठिकाना नही था

दिलीप - लेकिन मंजिल बहोत दूर है यहा तक तो सब सही चल रहा है आगे किया होगा पता नही मुझे अपने कदम फुक कर रखने होगे कियुंकी मेरी मा इतनी आसानी जाल मे नही फसेगी

वही सारिका अपने हाथ मे फोन रखे ( राजू यानी दिलीप) का नंबर देखते हुवे मन मे - पता नही कियु मुझे भी राजू से बात कर अच्छा लगा कब 30 मिनट गुजर गये बता भी नही चला

सारिका फोन रख फिर अपनी आखे बंद कर सो जाती है


सुबह हो जाती है

सुबह दिलीप उठ कर देखता है की उसकी मा के चेहरे के थोरी अलग खुशी दिखाई दे रही है दिलीप मुस्कुराते हुवे खेतो की तरफ निकल जाता है फिर आता है नहाता और रेडी होकर खाना खाने बैठ जाता है


सारिका दिलीप मा बेटे साथ मे बैठ खाना खा रहे है दिलीप चोरी छुपे सारिका को देखे जा रहा था

सारिका दिलीप को देखती है तो दिलीप जल्दी से खाने पे ध्यान देने लगता है

सारिका दिलीप को देख - बेटा काम कैसा चल रहा है
दिलीप - मा बहोत अच्छा चल रहा है
सारिका इमोसनल होते हुवे - तुझे इस उमर मे इस गर्मी मे मजदूरी करता देख बहोत दुख होता है बेटा तुम सायद हमसे नफरत करते होगे कहा गरीब घर मे पैदा हो गया

दिलीप सारिका को देख आसु साफ करते हुवे - आप ने ऐसा सोच भी कैसे लिया मे बहोत खुश हु गरीब घर म पैदा हुवा हुई लेकिन मुझे आप जैसी खूबसूरत प्यार करने वाली मा मिली है तो मुझे अपनी जिंदगी से कोई सिकवा नही है आप है ना मेरे साथ

सारिका - थैंक्स बेटा मे भी बहोत खुश हु तुम जैसा बेटा आके

खाना पीना हो जाता है सारिका आती है और दिलीप के गाल पे किस करते हुवे - जा बेटा और सावधानी से काम करना ठीक है
दिलीप - मुस्कुराते हुवे ठीक है मा

दिलीप फिर अपने काम पर निकल जाता है सारिका खेतो मे
ये रोज का था और एक गाव के गरीब की लाइफ ऐसे ही चलती है

दिलीप अपने काम पे जाते हुवे सोचते हुवे चल रहा था

दिलीप मन मे - मुझे मा के साथ नोर्मलि अच्छी बाते करते रेहना होगा मे कोई भी ऐसे शब्द नही बोल सकता जिसके मा को अजीब लगे कुछ गरबर् लगे भले कितने दिन महीने साल लगे चलेगा लेकिन गलती नही करनी है उसी के साथ कुछ फनी बाते भी करना होगा ताकि मा को मजा आये उनको अच्छा लगे

दिलीप आगे की प्लान बनाता हुवा अपने काम मे निकल परा था

सारिका खेतो मे आके बकरी को एक जगह बांध देती है और गाय के लिये चारा काटने लग जाती है 1 घंटे बाद सारिका थक कर एक जगह बैठा जाती है और आराम करने लगती है

सारिका तो तभी फिर ( राजू यानी दिलीप) के साथ रात को की गई बाते याद आने लगती है तो सारिका की हसी छुट जाती है

सारिका हस्ते हुवे - सोच कर ही बहोत हसी आ रही है इस उमर मे मेने अपने बेटे के उमर का एक दोस्त बनाया है लेकिन राजू से बात कर दिल हल्का हो जाता है लरका भी अच्छा है बाते भी अच्छी करता है

तभी सारिका को अपनी बकरी की आवाज सुनाई देती है सारिका सामने देखती तो सारिका की आखे फैल जाती है सरीर के रोये खरे हो जाते है

असल मे एक बकरा सारिका की बकरी की चुत चाट् रहा था और बकरे का लाल बरा लंड बाहर निकला हुवा था पूरा टाइट

सारिका सामने का सीन जो चल रहा था देख सारिका को कुछ कुछ होने लगता है सारिका की नजर तो बस अपनी बकरी बकरे पे थी दोनों जो कर रहे थे देख रही थी

बकरा बकरी की चुत चाटने के बाद बकरी के उपर आ जाता है और अपना लंड बकरी की चुत पे रख जोर का धक्का मार देता है बकरी दर्द मे मे मे करते हुवे आगे चली जाती है और बकरे का लंड निकल जाता है चुत से

सारिका को ये सीन देख ऐसा लगता है की कोई उसकी चुत लंड रख जोर का धक्का मार दिया हो सारिका की सासे तेज होने लगती है चुत गीली होने लगती है सारिका के दबाये गये अरमान फिर बाहर आ जाते है

सारिका गौर से फिर देखने लगती है बकरा उसकी बकरी के साथ किया कर रहा है बकरा फिर बकरी की चुत चाटने लगता है

सारिका की सासे फिर तेज होने लगती है सारिका अपनी बकरी को बकरे से चुत चटवाता देख मन मे - किया चुत भी चाटी जाती है

सारिका की चुत से पानी आने लगता है सारिका की टांगे अपने आप फैल जाती है सारिका देखती है बकरा फिर उसकी बकरी पे चढ़ गया है ये सीन देख सारिका पूरी टांगे फैला के अपनी चुत मे उंगली करने लगती है और सामने का सीन देख भी रही थी


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बकरा बकरी के चुत मे लंड फिर घुसा देता है लेकिन इस बार बकरी आगे नही जाती बस मे मे करने लगती है बकरा धक्का मारने लगता है और सारिका ये सीन देखते हुवे जोस मे अपनी चुत मे उंगली करने लगती है चुत गीली थी तो फच् फच् की आवाजे निकल रही थी सारिका - आह उह्ह् आने वाला है आ गया मे गई और सारिका झर जाती है


सारिका की चुत पानी से भीगी हुई थी हाथ की उंगली भी चुत की पानी से गीली थी सारिका जल्दी से अपनी सारी सही कर हाफते हुवे बैठ जाती है और अपनी बकरी की तरफ देखती है तो बकरा अपना काम कर आराम से जा रहा था

सारिका मन मे - हाय मेरी किस्मत चुत मे उंगली करना नही चाहती कियुंकी फिर लंड लेने का दिल करेगा लेकिन ऐसा सीन देख रोक नही पाई लेकिन चलो मेरी बकरी का काम हो गया कई दिन से मे मे कर रही थी


सारिका घास और बकरी को लेके घर आ जाती है

( रात 9 बजे )

खाना खाने के बाद रोज की तरह कुछ देर बाते फिर अपने अपने कमरे मे

दिलीप बिस्तर पे लेता हुवा था फोन लेके दिलीप को रहा नही जा रहा था कमाल की बात ये थी सारिका भी अपने हाथ मे फोन लिये हुवे लेती हुई थी

दिलीप फोन करता है सारिका ये देख मुस्कुराते हुवे फोन उठा लेती है

दिलीप - मेरी दोस्त कैसी है आप
सारिका - मुस्कुराते हुवे अच्छी हु तुम कैसे हो
दिलीप - मस्त हु कियुंकी आप जैसी दोस्त पाके
सारिका - हस्ते हुवे अच्छा ऐसी बात है किया
दिलीप - हस्ते हुवे सच्ची आप को ही याद कर रहा था
सारिका - मुझे कियु याद कर रहे थे
दिलीप - अरे आप मेरी दोस्त है तो याद करुगा ही ना
सारिका - हस्ते हुवे अच्छा समझ गई खाना खा लिया तुमने
दिलीप - जी खा लिया और खाते ही जल्दी कमरे मे आ गया
सारिका - हस्ते हुवे कियु
दिलीप - आप से बात जो करनी थी
सारिका - अच्छा
दिलीप - अपने खाना खा लिया
सारिका - हा खा लिया
दिलीप - और मेरे दोस्त का बेटा किया कर रहा है
सारिका - हस्ते हुवे कमरे मे फिल्म देख रहा होगा
दिलीप - किया करे टाइम पास करने के लिये फिल्म देखा परता है मुंड भी अच्छा हो जाता है
सारिका - ये तो है वैसे
दिलीप - आपको एक फनी बात बतानी है
सारिका - हस्ते हुवे वो किया है
दिलीप - हस्ते हुवे आज ना में घर आ रहा था तो मेने देखा खेतो मे कुछ बच्चे बकरी को परेसान कर रहे थे तो बकरी को गुस्सा आ गया फिर सभी बच्चो को मारने दोरि पता है उसके बाद किया हुवा ( दिलीप जोर जोर से हसने लगता है)

सारिका दिलीप को यानी राजू की हँसने की आवाज सुन हस्ते हुवे
सारिका - अरे खुद ही हसे जा रहे हो बताओ तू फिर किया हुवा
दिलीप हस्ते हुवे - बताता हु फिर बच्चे भागने लगे लेकिन एक बच्चा अपना ढीला पैट् पकर भाग रहा था भी बेचारा आगे जाके उसका पैंट ही नीचे गिर गया फिर वो बच्चा नंगु पंगु होगा गया ( दिलीप ये केह जोर जोर से हसने लगता है)

( नोट सारिका नही जानती जिस से वो बात कर रही है उसका अपना बेटा दिलीप है सारिका के लिये दिलीप राजू है )

सारिका राजू की सारी बात सुन सारिका को भी हसी आ जाती है सारिका जोर जोर से हसने लगती है सारिका कि हसने की आवाज दिलीप के कानों मे भी जाती है

तभी सारिका जल्दी से अपना मुह बंद कर के मन मे - मे तो भूल ही गई थी मेरा बेटा सुन लेगा तो किया सोचेगा)

लेकिन सारिका मुह बंद कर के भी हसे जा रही थी

दिलीप बिस्तर पे लेता मन मे - काम हो गया मेरी कहानी काम आई बस ऐसे ही बाते करते रेहना है ताकि मा को मेरी या कहे राजू से बात करने की लत लग जाये

सारिका अपने आप को सांत कर - तुम भी ना बेटा हस हस के मेरा पेट दर्द करने लगा

दिलीप - हस्ते हुवे मे किया करू मे खुद वो सीन देख बहोत हसा था और दूसरी मेरी मा ने कहा था जब मे छोटा था तो ऐसे ही ढीला पैंट पेहन कर चलता था तो कभी कभी मे मेरा पैट भी नीचे गिर जाता था और मे भी नंगु पंगु हो जाता था

सारिका को फिर हसी आ जाती है सारिका मुह बंद कर फिर हसने लगती हो दिलीप को सारिका की हसने कि आवाज फोन से सुनाई दे रहा था

सारिका - हस्ते हुवे बस भी करो अब मुझसे और हसा नही जायेगा

दिलीप मन मे - आपकी हसी सुन दिल को सुकून मिला मा मे टो आप को हमेसा हस्ता हुवा देखना चाहता हु

दिलीप - हस्ते हुवे आप हसी तो मुझे अच्छा लगा मेरी दोस्त हमेसा ऐसे ही हस्ती रहे

सारिका एकदम चुप हो जाती है सारिका को राजू की बात दिल को टच कर जाती है सारिका को अच्छा लग रहा था

सारिका - हस्ते हुवे तुम बहोत अच्छे दोस्त हो मेरे नही बेस्ट दोस्त हो तुम्हे पता है मेरा बेटा भी छोटा था तो उसके साथ भी ऐसा होता था

( असल मे सारिका ने एक दिन दिलीप को बताया था वही कहानी दिलीप ने अपनी मा को सुना दी)

दिलीप - थैंक्स आप ने मुझे बेस्ट दोस्त माना लेकिन अब हमे सो जाना चाहिये दोस्त

सारिका टाइम देखती है तो 12 बज गये थे सारिका पूरी हैरान हो जाती है सारिका मन मे - बता भी नही चला 12 तक बज गये

सारिका - तुम ने ठीक कहा दोस्त गुड नाईट
दिलीप - गुड नाईट मेरे प्यारे दोस्त

फोन कट


सारिका फोन रख बिस्तर पे लेती

सारिका - दोस्त होना अच्छा है पुराने पल याद आ गये जब मे जवान थी मेरे दोस्त थे लेकिन इतना मजा उनके साथ बात कर के भी नही आता था जितना राजू के साथ बात कर के आया राजू फनी है अच्छा लरका भी आज तो उसने बहोत हसाया याद नही इतना कम मे खुल कर हसी थी

दिलीप अपने कमरे मे लेता हुवा बहोत खुश हो रहा था सब अच्छा चल रहा था

दिलीप मन मे - बस ऐसे हि चलते रेहना है धीरे धीरे सावधानी से

दिलीप भी सोचते सोचते आखे बंद कर सो जाता है


आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏🙏
Shandaar update
Maza aagaya
 
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Please DO NOT use any nude pictures in your Avatar
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Very Nice
Shandaar
Gajab
Bahot badhiya
chapter 5


कृपया ध्यान दे जो लोग रोज update मागते है तो उन को मे यही केहना चाहुंगा आप को पता नही है किया मेरी एक और स्टोरी चल यही है ( तु लौट के आजा मेरे लाल) नाम से तो मुझे उसपे भी update देना होता है आज इसपे दिया तो कल उसपे दुगा दूसरी दोनो पे मे update रात 9 बजे देता हु कभी देरी हुई तो 10 बजे तक दे ही देता हु

चलिये सुरु करते है

सुबह उठ कर सभी अपने काम मे लगे हुवे थे लेकिन दिलीप चोरी छुपे अपनी मा को देख रहा था सारिका मुस्कुरा रही थी चेहरे के हसी भी थी कियुंकी सारिका रात जो सुसु वाला सीन याद कर रही थी

दिलीप मन मे मुस्कुराते हुवे - 4 महीने बेकार नही गये मुझे लगा था मा गुस्सा करेगी नाराज होगी लेकिन मा तो रात वाला सीन याद कर हस रही है यानी की अब आगे और बढ़ा जा सकता यस मेरा सुसु वाला आईडिया इतना काम करेगा सोचा नही था

खाना खाने के बाद दिलीप काम पे जाने वाला था

सारिका दिलीप के गालो पे किस करते हुवे - मेरा बेटा कितना मेहनत कर रहा है अच्छे से काम करना अपने आप को चोट मत लकवा देना

दिलीप सारिका को देख हस्ते हुवे - रोज यही बात केहती है मे कोई बच्चा ठोरी ना हू बरा हो गया हु मा
सारिका हस्ते हुवे - हा पता है लो लेकिन मा के लिये बेटा उसका बच्चा ही होता है

दिलीप सारिका के गाल पे किस करते हुवे - समझ गया बाबा अब मे जा रहा हु

दिलीप काम पे निकल जाता है दिलीप के जाते ही सारिका राजू को फोन करती है

दिलीप फोन देखते हुवे मुस्कुरा के - किया बात है मा रहा नही जा रहा मुझे भी यही चाहिये था

दिलीप फोन उठा कर बाते करने लगता है दिन मे दिलीप काम पे होता था तो 3 बार कुछ मिनट ही बाते होती थी


रात 10 बजे

सारिका राजू बाते कर रहे होते है अपने कमरे मे बिस्तर पे लेते

सारिका हस्ते हुवे - कियु आज जोर की नही लगी है किया
दिलीप हस्ते हुवे - लगी है लेकिन मे अब फोन लेकर नही जाउंगा
सारिका हस्ते हुवे - अरे कियु लेकर नही जाओगे
दिलीप - कियुंकी आप कल से मुझे कितना छेर रही है ये गलत है भाई जोर से किसी को भी लग सकती है
सारिका हस्ते हुवे - हा बाबा तुम ने सही कहा
दिलीप - ठीक है आप लाइन पे रहिये मे सुसु कर के आता हु
सारिका हस्ते हुवे - अरे फोन लेकर जाओ ना
दिलीप मुस्कुराते हुवे मन मे - आ रही है लाइन पे यही मोक्का है मा को आगे ले जाने का

दिलीप जल्दी से बाहर आता है और अपना लंड निकल फोन को पास कर के जोर दार धार पथर् पे मारते हुवे सुसु करने लगता है

सारिका पूरी तरह से हैरान सर्म से लाल हो जाती है सारिका ने मजाक मे दिलीप को कहा था लेकिन दिलीप मौके को जाने कैसे देता

सारिका दिलीप के सुसु की आवाज साफ सुने जा रही थी और सर्म से लाल होते हुवे मन मे - अरे ये पागल सच मे फोन लेकर चला गया मेने तो मजाक मे कहा था

दिलीप पिसाब करने के बाद बिस्तर पे लेट - हेल्लो
सारिका - बेसर्म मेने मजाक मे कहा था तुम सच मे चले गये फोन लेकर
दिलीप हस्ते हुवे - तो किया हो गया अगर मेरे सुसु करने कि आवाज आपको सुनाई दे रही थी तो फोन दूर कर देती नही सुनती आप

सारिका की बोलती बंद किया बोले समझ नही आ रहा था दिलीप समझ रहा था इस लिये बात को जल्दी से घुमा देता है

दिलीप - वैसे ऑन्टी सब्ज़ी बाकी समान बाहर लेने कोन जाता है आप या दिलीप भाई

सारिका - अरे दिलीप ही जाता है मे नही जाती
दिलीप हस्ते हुवे - मेरा भी सेम हैं मा मुझे ही भेजती है मा को बाहर निकलना पसंद नही
सारिका हस्ते हुवे - मेरा भी सेम मुझे भी बाहर निकलना पसंद नही
दिलीप हस्ते हुवे - तब तो आपकी मेरी मा की सोच एक जैसी है
सारिका हस्ते हुवे - सही कहा

1 बजे तक बाते होती है

दिलीप - ठीक है ऑन्टी अब मुझे गुड नाइट किस्सी दो मुझे अच्छी नींद आयेगी
सारिका हैरानी से - अरे आज किया हो गया तुम्हे जो किस मांग रहे हो ना
दिलीप - मा मुझे रोज रात को गुड नाइट किस देती है सुबह गुड मोरिनिंग किस भी देती है आप दे दोगी तो और मेरी रात गुड हो जाइये नही देना तो कोई बात नही

सारिका हस्ते हुवे - तुम भी ना अच्छा ठीक है ये लो उमा हो गया

दिलीप हस्ते हुवे - हा मेरे गाल मे आ गया आपका किस लाल लीबिस्टिक भी लग गई मेरे गाल पे

सारिका दिलीप कि बात सुन जोर जोर से हसने लगती है
सारिका हस्ते हुवे - तुम भी ना बहोत मजाकिया हो कसम से
दिलीप हस्ते हुवे - पता नही आप केहते है तो मान देता हो अच्छा मेरी तरफ से भी उमा पहुँच गया मेरा किस आपके गाल पे
सारिका फिर जोर जोर से हसने लगती है
सारिका हस्ते हुवे - बस भी करो आ गया तुम्हारा किस गुड नाइट
दिलीप - गुड नाइट

फोन कट

सारिका बिस्तर पे लेती हस्ते हुवे - पागल है बिल्कुल कैसी कैसी बाते करता है लेकिन उसकी बाते बहोत फनी होती है

दिलीप बिस्तर मे लेता बहोत खुश था कहे तू खुशी से पागल हो गया था

दिलीप खुश होते हुवे - यस मे अब मजिल के बहोत करीब जा रहा हुवे सोचा नही था यहा तक मे आ पाऊगा मा को मुझे और खोलना पड़ेगा धीरे धीरे

6 दिन बाद

इस 6 दिन मे हर रात दिलीप सारिका के बिना कहे फोन लेकर पिसाब करने चला जाता था और सारिका को पिसाब की आवाज सुनाता था सारिका कुछ बोल नही पाती थी लेकिन पिसाब कि आवाजे सर्म से लाल होते हुवे सुनती रेहती थी और दिलीप गुड नाइट किस को भी सामिल कर दिया था कियुंकी दिलीप धीरे धीरे सब कर रहा था

दिलीप पेहले अपनी मा को हर एक चीज की आदत लगा रहा था धीरे धीरे सारिका को खोल रहा था एक संस्कारी औरत को अपने जाल मे फसा कर नीचे अपने नीचे लाना आसान थोरि था दिलीप ये अच्छे से जनता था

7 दिन रात 11 बजे

दिलीप सारिका लगे हुवे थे


दिलीप - ऑन्टी आज तो मे नदी मे नहाने गया था मजा आ गया खोले मे नहाने का मजा ही अलग होता है

सारिका हस्ते हुवे - हा पता है मे भी पेहले दिलीप जब छोटा था जाती थी कपड़े धोने को नहा लिया करती थी

दिलीप - सच्ची मजा आता है ना नदी मे खुले जगह मे
सारिका - हा बहोत मजा आता ही लेकिन अब मेने जाना छोर दिया
दिलीप - अच्छा मेरी मा भी जाती थी मुझे लेके पेहले लेकिन अब नही जाती है
सारिका - समझ सकती हु उनको मे
दिलीप - अच्छा ऑन्टी आपने पास कितने गाय है
सारिका - एक ही है और दो बकरी है
दिलीप - अच्छा गाय दूध देती है
सारिका - हा एक प्यारे से बच्चे को जन्म दिया है
दिलीप - कितने दिन हो गये
सारिका - 7 महीने हो गये है
दिलीप - दूध बहोत देती होगी
सारिका - हा बहोत दूध देती है
दिलीप - मुझे तो दूध पीना बहोत पसंद है
सारिका हस्ते हुवे - मेरे बेटे को भी दूध बहोत पसंद है
दिलीप हस्ते हुवे - किया कमाल की बात है ना ऑन्टी मेरी मा आपकी सोच एक जैसी है और मेरी दिलीप भाई की एक जैसी
सारिका जोर जोर से हस्ते हुवे - ये बात तो सही कही तुम ने

दोनो ऐसे हि बाते करते रेहते है दिलीप इधर उधर् कि बाते भी करता रेहता था ताकि सारिका के माइंड को भूमाया जा सके बाते करते करते
2 बज जाते है

रात 2 बजे

दिलीप - ऑन्टी दो बज गये है सोना चाहिये
सारिका टाइम देखते हुवे - सही है बेटा
दिलीप - आप से बाते करते हुवे टाइम का पता भी नही चलता है
सारिका - हा ये बात तो तुम से सही कही
दिलीप - ठीक है ऑन्टी मेरा गुड नाइट किस
सारिका हस्ते हुवे - तुम भी ना ये लो उमा
दिलीप हस्ते हुवे खुशी से - किया बात है ऑन्टी आज तो आप ने होठो पे किस दे दिया मजा आ गया बहोत मिठा था ये किस

सारिका पूरी तरह से हैरान हस्ते हुवे - अरे पागल मेने गालो पे किस दिया है ना की होठो पे झूठे कही के
दिलीप हस्ते हुवे - नही ऑन्टी सच मे आपका किस मेरे होठो पे आके लगा मुझे फिल भी हुवा आपके प्यारे रसीले होठ
सारिका सर्म से लाल होते हुवे - कितने झूठे हो तुम
दिलीप - आपने मुझे होठो पे किस दिया है तो मे भी आपको होठो पे ही किस दुगा उमा गुड नाइट बाय

दिलीप जल्दी से फोन कट कर देता है

सारिका कुछ केहना चाहती थी लेकिन देखती है फोन कट हो चुका है
सारिका गुस्से से - कितना झूठा है मेने तो गालो पे किस दिया था पागल कोई ना कोई ऐसी बाते कर मुझे हसा ही देता ही ( सारिका अपने होठो पे हाथ रख ) उसने मुझे होठो पे किस दिया ये लरका भी ना बहोत बिगरता जा रहा है

सारिका को तभी कुछ याद आता है

सारिका - अरे आज तो राजू सुसु करने गया ही नही


हा दिलीप ने आज सुसु वाली कोई बात ही नही की ये भी दिलीप का एक प्लान था जैसे किसी को आप रोज सराब पिलाओ बाद मे आप उसे सराब दो ही ना तो उसकी हालत कैसी होगी वो खुद आपके पास आयेगा सराब के लिये दिलीप ने यही किया पेहले सारिका का सुसु की आवाज सुनने की आदत लगाई और फिर खुद पीछे हट गया कियुंकी दिलीप चाहता था सारिका खुद आगे आकर सुसु से लेकर कोई बात करे अगर दिलीप खुद आगे जाता रहा तो सारिका को कही ना कही सक या बुरा या गुस्सा हो सकती थी लेकिन सारिका खुद आगे आके बात करे ये दिलीप के लिये हरि झण्डी थी आगे बिना डरे बढ़ने की

वही दिलीप बिस्तर पे लेता अपने दिल पे हाथ रखे जोर जोर से सासे लिये जा रहा था

दिलीप - मे तो डर हि गया था कही मा गलत समझ गुस्सा ना करे लेकिन होठो पे किस वाला प्लान भी काम कर गया मा ने गुस्सा नही किया मेरी तो डर के बारे फट रही थी

सुबह हो जाती है

सारिका खेतो मे हल्का होने निकल परती और राजू को फोन लगा देती है

राजू फोन उठा के - गुड मोर्निंग ऑन्टी
सारिका - गुड मोर्निंग बेटा
दिलीप नाराज वाली आवाज मे - आपने मुझे गुड मोर्निंग किस नही दी
सारिका हस्ते हुवे - तुम भी ना उम्मा अब खुश
दिलीप खुश होते हुवे - बहोत खुश लेकिन किस तो गालो पे आया है

सारिका खेतो के बीच डनेर पे लग रही थी राजू की बात सुन सारिका पेट पकर जोर जोर से हंसने लगती है

दिलीप बिस्तर पे लेता मा को हस्ते हुवे खुशी से - यस यस मा ने गुस्सा नही किया इसका मतलब किसी मिलेगी

सारिका ठोरी देर बाद अपने आप को सांत कर

सारिका हस्ते हुवे - राजू बेटा तुम ना बिल्कुल पागल हो तुम्हारी बाते मुझे हंसने पे मजबूर कर देती है
दिलीप - मुझे नही पता ये सब मुझे किस्सी चाहिये होठो पे
सारिका जोर जोर से हस्ते हुवे - किया करू मे तेरा अच्छा बाबा ये लो उम्मा अब खुश
दिलीप - हा बहोत खुश आपका किस मेरे होठो पे आ गया है मिठा मिठा
सारिका हस्ते हुवे - बस भी करो अच्छा सुनो बाद मे बाते करेगे ठीक है
दिलीप- ठीक है

सारिका फिर हल्का होने बैठ जाती है और अभी जो हुवा उसे सोच हस्ते जा रही थी ( पागल ये पुरा)



दिन मे जैसे चलता था बाते होती थी वैसे होती रही


रात 11 बजे

सारिका राजू के बीच 10 बजे से बाते चल रही थी


सारिका - अच्छा आज फिर गये थे नदी मे नहाने
दिलीप - हा गया था जब दिल करता है चला जाता हु
सारिका - अच्छी बात है लेकिन गहराई मे मत जाना समझ गये
दिलीप - समझ गया ऑन्टी लेकिन मुझे तैरना आता है
सारिका - अच्छा ऐसा है मेरे बेटे को भी तैरना आता है
दिलीप हस्ते हुवे - सेम सेम हो गया
सारिका हस्ते हुवे - सही कहा

सारिका मन मे - किया मे सुसु की बात करू छि मे किया सोच रही हु लेकिन मे अपने आप को रोक नही पा रही हु

सारिका - सुनो ना तुम अब सुसु करने नही जाते किया ( सारिका ये केह बहोत शर्मा जाती है)

दिलीप बिस्तर पे लेता खुशी से नाचते हुवे - काम कर गया प्लान

दिलीप नॉर्मल तरीके से - जाता हु लेकिन फोन दूर रखता हु इस लिये आपको आवाज सुनाई नही देती

सारिका सर्म से लाल होते हुवे मन मे - किया वो रोज जाता है सुसु करने और सुसु करते हुवे बाते करता है लेकिन मुझे आवाज कियु नही सुनाता

सारिका - लेकिन आवाज मुझे कियु नही सुनाते ( सारिका को बहोत सर्म आ रही थी सारिका खुद नही समझ पा रही थी वो किया करे जा रही है

दिलीप - मुझे लगा सायद आपको अच्छा नही लगता होगा कही आप गुस्सा ना हो जाओ इस लिये

सारिका जल्दी से - अरे मे कियु गुस्सा होगी ( सारिका फिर सर्म से लाल हो जाती है)

दिलीप नॉर्मल आवाज मे कियुंकी दिलीप सारिका को ये एहसास नही होने देना चाहता था की वो बहोत खुश है

दिलीप - ठीक है ऑन्टी मुझे जोर से लगी है फोन कान मे लगा के रखना

दिलीप बाहर आके पिसाब करने लगता है और सारिका पिसाब की आवाज सुनने लगती है

सारिका मन मे - पता नही कियु अब मुझे अच्छा फिल हो रहा है

दिलीप पिसाब करने के बाद बिस्तर पे लेत कर

दिलीप - सुन किया ऑन्टी
सारिका - शर्मा के हा

रात 1 बज गये थे

दिलीप - ऑन्टी अब सोना चाहिये
सारिका - सही कहा ये लो गुड नाइट किस उम्मा
दिलीप खुश होते हुवे - किया बात है ऑन्टी आज अपने बिन मांगे होठो पे किस दे दिया थैंक्स
सारिका सरमाते हुवे - थैंक्स मत कहो और मुझे भी मेरा किस दो
दिलीप हस्ते हुवे - ये लीजिये उम्मा मिल गया
सारिका - हस्ते हुवे हा मिल गया
दिलीप - ठीक है ऑन्टी गुड नाइट
सारिका - गुड नाइट

दिलीप फोन कट कर फिर खुशी से नाचने लगता है

दिलीप - जैसा मेने सोचा सब वैसा जा रहा है


सुबह हो जाती है

सारिका हल्का होने जा रही थी दिलीप से बाते करते हुवे

दिलीप - ऑन्टी जोर से लगी है
सारिका हस्ते हुवे - कर लॉ लेकिन आवाज मुझे सुनाई देनी चाहिये
दिलीप हस्ते हुवे - समझ गया

दिलीप पिसाब करने लगता है और सारिका एक जगह खरी होकर आराम से सुनने लगती है

दिलीप - हो गया सुना ना आप ने
सारिका हस्ते हुवे - हा अच्छे से



5 दिन बाद

सारिका को दो चीजो की आदत दिलीप लगा चुका था पिसाब की आवाज सुनने का किस लेने देने का ये अब सारिका के लिये नॉर्मल बात हो गई थी दिलीप यही चाहता था


रात 10 बजे

दिलीप बिस्तर पे लेता - अब इससे आगे बढ़ने का समय आ गया है


दिलीप फोन लगा देता है सारिका दोनो मे फिर बाते होने लगती है

सारिका -तुम्हे ही याद कर रही थी
दिलीप- मे आपको याद कर रहा था खाना पीना हो गया
सारिका करवट बदल - हो गया तुम ने खा लिया
दिलीप - ऑन्टी ये बताइये किया आप को नदी मे नहाने जाने का दिल नही करता
सारिका हस्ते हुवे - सच कहु तो करता है
दिलीप - तो जाती कियु नही
सारिका - जाउंगी कभी

ऐसे ही बाते होती रेहती है और 1 बज जाते है

दिलीप बाहर मूतने आ गया था दिलीप फिर मूतने लगता है सारिका आवाज सुने जा रही थी

दिलीप फिर बिस्तर पे आके लेत जाता है

सारिका हस्ते हुवे - जोर से लगी थी ना
दिलीप हस्ते हुवे - हा बाते करते हुवे लग जाती है इसी बीच अब ऑन्टी सोने का टाइम हो गया है

सारिका - सही कहा ये लो गुड नाइट किस उम्मा
दिलीप - ऑन्टी आज हम अगल तरह से गुड नाइट बोलेंगे किस करेगे
सारिका हैरानी कंफ्यूज से - वो कैसे
दिलीप - आप गलत मत समझना गुस्सा भी मत करना आप को अच्छा लगेगा तो करेगे नही तो नही करेगे
सारिका सोचते हुवे - ठीक है बताओ

दिलीप - पेहले आप आखे बंद कर लीजिये
सारिका आखे बंद कर के - कर ली मेने
दिलीप - अब आप मेरे बारे मे सोचिये
सारिका राजू के बारे मे सोचते हुवे - हा सोच रही हु
दिलीप - ठीक है अब मे आपके गुलाबी होठो पे अपना होठो रखने वाला हु आप फिल करना ठीक है
सारिका की सासे तेज हो जाती है
सारिका - ठीक है
दिलीप - मेने अपना होठ आपके होठो पे रख दिया है फिल कीजिये मेरा होठ आपके होठो से सता है

सारिका आखे बंद कर फिल करने लगती हो तो सारिका हो फिल होता है जैसे राजू सच मे उसके होठो के होठ रखे हुवा है ये फिल कर सारिका के अंदर हलचल होने लगती है सासे और तेज हो जाती है

दिलीप - फिल हो रहा है मेरा होठ आपने होठो पे
सारिका तेज सासे लेते हुवे - हा फिल कर पा रही हु
दिलीप - अब मे आपके होठो को जिब को अपने मुह मे लेके चुसुगा आप भी वैसा ही सोचना फिल करना तो सुरु करे
सारिका और तेज सासे लेने लगती है सारिका के बरे गोल उजले चुसिया उपर नीचे होने लगते है

सारिका - ठीक है सुरु करो
दिलीप - ठीक है मे सुरु करता हु

सारिका आखे बंद कर फिल करने लगती है की राजू उसके होठो को अपने मुह मे लेके चूस रहा है तो सारिका भी वैसा ही करने लगती है फिर सुरु होता है दोनो के बीच एमेजिनसंन वाला किस 2 मिनट बाद


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दिलीप - ऑन्टी कैसा लगा
सारिका होस मे आती है सारिका के अंदर कुछ हो रहा था जिसे सारिका समझ नही पा रही थी ये गलत है या सही

दिलीप - ऑन्टी माफ करना आप को अच्छा नही लगा तो हम नही करेगे लेकिन गुस्सा मत होना

सारिका के मन मे आता तो ये गलत हो रहा है लेकिन दिल को अच्छा लग रहा था फिल खुश था इस लिये सारिका राजू से कुछ बोल नही पाती नही करना है

सारिका - अरे नही मुझे अच्छा लगा
दिलीप - कसम से केह रही है
सारिका हस्ते हुवे - कसम से बाबा

दिलीप जो बिस्तर पे लेता था खरा होकर खुशी से नाचने लगता है फिर बिस्तर पे आराम से लेत

दिलीप - मुझे लगा आपको अच्छा नही लगा
सारिका हस्ते हुवे - मुझे अजीब लगा सुरु मे लेकिन बाद मे अच्छा लगा
दिलीप - तो बताइये कैसा लगा गुड नाइट किस करने का नया तरीका मेरा मे हु ना कमाल का

सारिका हस्ते हुवे - हा बाबा मान गई तुम बहोत कमाल के हो

दिलीप ने ऐसी बात सारिका को हसाने के लिये माइड को अच्छा करने के लिये बोला था और ये काम कर गया सारिका ने खुद हरि झंडी फिर दे देगी

दिलीप - अच्छा ऑन्टी सोते है
सारिका - ठीक है बेटा

फोन कट

दिलीप बिस्तर पे लेता मन मे - अब मुझे मा को इस किस की इतनी आदत लगानी है की मा खुद कहे राजू बेटा चलो किस करते है


सारिका भी अभी जो किस वाला सीन हुवा उसे सोचे जा रही


6 दिन बाद रात 11 बजे


सारिका दिलीप की बाते चल रही थी 9 बजे से


सारिका - अच्छा तो आज ये सब हुवा
दिलीप - हा यही सब हुवा था
सारिका - सुनो ना चलो किस करते है वैसा वाला किस ( ये बोलने के लिये सारिका ने बहोत हिम्मत जुटाई थी)

सारिका मन मे - मे क्या कर रही हु मुझे समझ मे नही आ रहा लेकिन मुझे सब अच्छा लग रहा है मे अपने आप को रोक नही पाती

सारिका सर्म से लाल हुवे परी थी

दिलीप को यही तो चाहिये था की सारिका खुद कहे किस करने के लिये दिलीप खुशी से पागल हुवे जा रहा था

दिलीप नॉर्मल मे - जैसा आप कहे ऑन्टी तो आखे बंद कर लीजिये
सारिका - मेने पेहले ही कर ली है
दिलीप मुस्कुरा देता है
दिलीप - ठीक है सुरु करते है फिर दोनो के बीच किस होता है 2 मिनट बाद

दिलीप - मजा आया ऑन्टी
सारिका शर्मा के - हा
दिलीप - सच कहु ऑन्टी तो मुझे तो बहोत मजा आता है जब मे आखे बंद कर आपको किस कर रहा हु ये सोचता हु तो ऐसा लगता है सच मे ये हो रहा है मे आपके रसीले होठो को मुह मे लेके आपके जिब को मुह मे लेके आपके लार को जब चूस के पीठा हु तो किया बताऊं सेहद जैसा मिठा लगता है

राजू की बात सुन सारिका की सासे फिर तेज होने लगती है सारिका के चुचे उपर नीचे होने लगते है


दिलीप - ऑन्टी आप बताइये ना आपको कैसा लगा लगता है

सारिका सर्म से लाल होते हुवे - सच कहु तो मुझे भी ऐसा ही फिल होता है जैसे तुम मेरे जिब को होठो को मुह मे लेके चूस कर पी रहे हो और मे भी वैसे ही तुम्हारे होठो को जिब को मुह मे लेके चूस कर पी रही हु ये एहसास अजीब है लेकिन मुझे बहोत अच्छा लगता है


दिलीप मन मे - माफ करना मा आपको पता भी नही की आप किया कर रही है कियु कर रही है लेकिन मे यही चाहता था आपको मजा आये और आपका दिमाग ये कभी सोचे ही ना ये गलत है और कभी सोचा भी तो आप उसे मानने से इंकार कर दे आप मेरी मा है इस लिये मुझे अच्छे से पता है किया कैसे करना है इसी लिये तो मे पेहले आपको एक एक चीज का इतना आदत लगवाता हु ही आपको बहोत मजा आये ताकि आप सही गलत सोच ना पाये

दिलीप हस्ते हुवे - देखा मेरे दिमाग का कमाल
सारिका हस्ते हुवे - पागल अपनी तारीफ खुद कर रहे हो
दिलीप हस्ते हुवे - कियु ना करू मे हु ही कमाल का
सारिका हस्ते हुवे - अब बस भी करो

दोनो फिर 2 बजे तक बाते करते है और फिर किस वाला सीन करके सो जाते है


सुबह 9 बजे


दिलीप सारिका बैठ खाना खा रहे होते है लेकिन दिलीप सारिका को देख मुस्कुरा रहा होता है असल मे सारिका बहोत खुश दिखाई दे रही थी

दिलीप - मा कोई समान लाना हो तो बता दो काम से लोटते वक़्त लेकर आ जाउंगा

सारिका दिलीप को देख - अच्छा हुवा बेटा याद दिला दिया सब्ज़ी मे जो आता है हमेसा वही ले लेना और तेल नही है दाल भी ले ली लेना हरि मिर्ची धनिया इतना ही याद रहेगा ना

दिलीप हस्ते हुवे - मा आप भूल रही है हमेसा मे ही तो समान लाता हु
सारिका हस्ते हुवे - सही कहा मे तो सच मे भूल गई थी

दोनो मा बेटे बाते करते हुवे खाना खाते है फिर दिलीप काम मे जाने के लिये रेडी था

सारिका जिसका रोज का था दिलीप के गालो पे किस करते हुवे - ठीक है बेटा जा
दिलीप सारिका के गालो पे किस कर - ठीक है मा अब मे जाता हु


दिलीप के बाहर जाते ही सारिका राजू को फोन लगा देती है दिलीप मुस्कुराते हुवे फोन उठा के बाते करते हुवे जाने लगता है

सारिका - किया कर रहे हो
दिलीप - काम पे जा रहा हु पता तो है ना आप को
सारिका बिस्तर पे लेटते हुवे - पता था इसी लिये फोन किया सुनो ना किस वाला सीन करते है

दिलीप - ठीक है करते है
सारिका बिस्तर पे लेती आखे बंद किये फिल कर दोनो का किस सुरु होता है 2 मिनट बाद


दिलीप - ऑन्टी मजा आ गया आपके होठो का रस पीके
सारिका सर्माते हुवे - मुझे भी बहोत मजा आया
दिलीप - सच कहु तो आपके लार बहोत मिठा लगा
सारिका हस्ते हुवे - तुम भी ना कैसी बाते करते हो
दिलीप - किया आपको नही लगता मिठा
सारिका सर्म से लाल - हा लगता है मिठा


ऐसे ही बातो से दिलीप सारिका को पागल करते रेहता है औ सारिका बेचारी को पता भी नही वो किया कर रही है दिल के आगे मजबूर जो थी



रात 12 बजे

सारिका दिलीप 2 घंटे से बाते कर रहे थे अब बारी थी पिसाब की आवाज सुनाने की दिलीप बाहर आके पिसाब की आवाज सारिका को सुनाने लगता है सारिका मजे से आवाज सुने जा रही थी


पिसाब हो जाने के बाद दिलीप बिस्तर पे आके लेत जाता है

दिलीप - सुना ना अच्छे से
सारिका हस्ते हुवे - हा बाबा सुना अच्छे से

दिलीप मन मे - मा अपने पिसाब की आवाज बहोत सुन ली अब बारी है मेरी डर लग रहा है लेकिन करना पड़ेगा किसी ने कहा है डर के आगे मा की चूत है

दिलीप हिम्मत जुटा के

दिलीप हस्ते हुवे - ऑन्टी ये तो गलत है ना
सारिका हैरानी से - किया गलत है
दिलीप - मे सुरु से आप को पिसाब करने की आवाज सुनाते आ रहा हु लेकिन आप ने मुझे एक बार भी पिसाब करते नही सुनाया कम से कम एक बार तो आप पिसाब करने की आवाज सुना ही सकती है ना

दिलीप की बात सुन सारिका पूरी तरह से हैरान हो जाती है सारिका की आखे फैल जाती है सारिका गुस्से से लाल भी हो जाती है सारिका को यकीन नही हो रहा था उसने किया सुना राजू ने किया कहा

सारिका फुल गुस्से से - राजू तुमने किया कहा उसका तुझे अंदाज़ा भी है तुम मुझे ऐसा कैसे केह सकते हो मे तुम्हारी मा की उमर की हु तुम मुझे ये सब कहोगे मेने सोचा नही था छि मुझे लगा तुम अच्छे लरके हो लेकिन तुम मेरे बारे मे ये सोच रहे थे सारिका बहोत गुस्सा करती है राजू पे गुस्से मे बहोत कुछ सुना भी देती है

दिलीप डरते हुवे - ऑन्टी मेरी बात
सारिका - मुझे तुम्हारी कोई बात नही सुननी मे फोन रख रही हु

सारिका फोन कट कर देती है

दिलीप बिस्तर पे बैठा आराम से मन मे - आप जरूर रेडी होगी मा मेने ऐसे ही नही इतनी मेहनत की है प्लान बनाया है मान लो आप ने ये नही किया इतना सब होने के बाद भी तो इसका मतलब ये होगा मे आपको पा नही पाऊगा कभी भी

वही सारिका गुस्से से बिस्तर पे लेती - वो मुझे ऐसा कैसे केह सकता है अरे मे उसकी मा की उमर की हु मुझे ऐसा कुछ करने के लिये कहेगा सोचा नही था

आसा ऐसे ही राजू पे गुस्सा करते रेहती है 30 मिनट बाद जब सारिका पूरी तरह सांत होती है तब

सारिका मन मे - अरे ये मेने किया कर दिया उसने मुझे एक बार करने को कहा तो मे गुस्सा हो गई उसे इतना बुरा भला केह दिया मे उसे ज्ञान देने लगी जबकि मे खुद उसे अपनी पिसाब करने की आवाज सुनाने के लिये केहती थी और उसने कहा तो मे गुस्सा हो गई अगर ऐसा कुछ नही हुवा होता तो वो मुझे ये करने के लिये नही केहता मेने उसकी बात भी नही सुनी ये मेने किया कर दिया उसकी तो उसमे कोई गलती नही थी मुझे नही करना था तो आराम से मना भी कर सकती थी

सारिका खुद को गलत मनाने लग गई थी और ये बात दिलीप को पता था ऐसा कुछ होगा इसी लिये दिलीप ने पेहले सारिका को आदत लगवाई अपने पिसाब की आवाज सुनाने की ताकि जब बाद मे वो कहे सारिका को अपनी पिसाब की आवाज सुनाने के लिये तो सारिका उसपे इलज़ाम ना दाल सके उसे गलत ना समझ सके और ऐसा हुवा भी सारिका चाह का भी राजू को गलत नही तेहरा पाई उल्टा खुद गलत मान बैठी

सारिका राजू को फोन करती है दिलीप ये देख मुस्कुराते हुवे फोन उथाता है और अपना नाटक सुरु कर देता है

दिलीप रोते हुवे - ऑन्टी मुझे माफ कर दो मुझे पता नही था आप बुरा मान जायेगी मे ही बेवकूफ हु मुझे सोचना चाहिये था ऑन्टी प्लेस आप हमारी दोस्ती को मत तोरना प्लेस आप के दोस्त के आलावा मेरा कोई दोस्त नही है ( दिलीप रोते हुवे अपना नाटक जारी रखता है)

राजू को रोता देख उसकी बात सुन सारिका को बहोत बुरा लगता है सारिका खुद को कोसने लगती है की उसने अपने दोस्त को रूला दिया जबकि उसकी गलती नही थी उस दोस्त को जो उसे बेस्ट दोस्त मानता है उसे हासता है सारिका को सब सुरु से राजू कि मस्ती मजाक करना उसकी बाते सब याद आने लगती है

दिलीप अपने झूठे आसु साफ करते हुवे मन मे - सोच मा सोच लो सुरु से सब सोच लो हर एक पल हर एक बाते जो हमने सुरु से आज तक की मेने इतना मेहनत इस लिये ही तो किया है ताकि चाह कर भी आप हर एक पल हर बाते जो अपने की आज तक जो आप भूल ना पाये

सारिका - राजू बेटा चुप हो जाओ रोना बंद करो उसमे तुम्हारी कोई गलती नही है मे ही बेवकूफ थी तो सब चीजो को समझ नही पाई और तुमपे गुस्सा हो गई

दिलीप अपना नाटक जारी करते हुवे

दिलीप रोते हुवे - नही ऑन्टी इसमें आप की लगती नही है मेरी ही है आपको वो करने के लिये नही केहना चाहिये था

सारिका - नही बेटा तुम मुझे माफ कर तो तुम गलत नही थे मुझे गुस्सा नही होना चाहिये था मे आराम से मना भी कर सकती थी तुम रोना बंद करो मेरी कसम

दिलीप अपने झूठे आसु साफ करते हुवे - ठीक है
सारिका - माफ करना बेटा मेने तुम्हे रुला दिया लेकिन उसका इनाम मिलेगा तुझे

दिलीप समझ जाता है और मुस्कुराते हुवे - मिलना भी चाहिये मुझे इतनी मेहनत इसी लिये तो की है

दिलीप - नही ऑन्टी मुझे अब कोई इनाम नही चाहिये
सारिका शर्मा के - अरे मे तुझे अपनी आवाज सुनाउगी
दिलीप - नही ऑन्टी मुझे नही सुनना
सारिका हैरानी से - कियु
दिलीप - मे नही चाहता आप मुझे खुश करने के लिये करे मे आपकी दोस्ती से ही खुश हु

सारिका फिर दिलीप के बातो के जाल मे फस जाती है दिलीप सारिका को अपनी गलती का एहसास करवा रहा था

सारिका - नही बेटा मे अपने पुरे दिल से ( सारिका सर्म से लाल होते हुवे) मे अपने पिसाब की आवाज तुझे सुनाउगी
दिलीप खुश होते हुवे - सच्ची ऑन्टी
दिलीप की खुशी की आवाज सुन सारिका को अच्छा लगता है

सारिका - हा सच्ची अपना फोन कान मे लगाये रखना
दिलीप जी खुशी से - जी ऑन्टी

सारिका को बहोत सर्म आ रही थी लेकिन उसके करना ही था सारिका अपने कमरे से बाहर आती है वही दिलीप अपना लंड बाहर निकाल अपनी मा के पिसाब की आवाज सुन मुठ मारने के लिये तैयार था


आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏🙏
 
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chapter 6


( सारिका का बेटा दिलीप है और दिलीप अपनी मा के साथ राजू बन बाते कर रहा है सारिका को नही पता जिससे वो राजू समझ बात कर रही है वो उसका अपना सगा बेटा है - मे ये इस लिये बताया कियुंकी कुछ लोगो को समझ नही आ रहा तो समझ सके चल किया रहा है
🙏🙏

दिलीप अपने 10 इंच के लंड को बाहर निकाल अपने थूक से लंड को पुरा गिला कर मुठ मारते हुवे


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दिलीप - ऑन्टी सुरु करो ना
सारिका बाहर आके एक जगह खरी होके शर्मा के
सारिका - ठीक है सुरु करती हु
दिलीप मुठ मारते हुवे - ऑन्टी अपना फोन नजदीक रखना आवाज अच्छे से सुनाई देगी
सारिका सर्म से लाल होते हुवे - ठीक है

सारिका अपनी नाइटी उपर कर बैठ जाती है और अपने फोन को पकर अपनी चुत के पास कर के मुतना सुरु कर् देती है दिलीप के कान मे एक सिटी की आवाज जाती है सु सु सु सारिका ने तेज धार मारा था अपनी मा के मुतने की आवाज सुन दिलीप के लंड की नशे फुल जाती है दिलीप पुरे जोस से भर जाता है


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दिलीप अपनी मा के पिसाब की आवाज सुन पागल होने लगता है और तेज तेज हाथ चला के मुठ मारने लगता है दिलीप मुठ मारते हुवे मन मे - आह किया प्यारी आवाज है मा के पिसाब करने की सुन कर साफ पता चल रहा है बहोत तेज धार निकल रही है

सारिका वही सर्म से लाल फोन पकरे अपनी पिसाब करने की आवाज सुनाये जा रही थी 1 मिनट होते ही सारिका पिसाब कर उठ जाती है दिलीप को पिसाब की आवाज आना बंद हो जाता है तो दिलीप समझ जाता है दिलीप का पानी निकला था बाबा के दिया दवा का असर था नही तो दिलीप का अपनी मा के पिसाब करने की आवाज सुन उसका निकल गया होता

दिलीप अपने लंड को देख - कोई ना मेरे छोटे भाई जल्दी ही सीधा बिल मिलेगी तुझे

सारिका बिस्तर पे आके लेत जाती है

सारिका सर्म से लाल होते हुवे - हेल्लो सुन रहे हो
दिलीप - सुन रहा हु थैंक्स ऑन्टी आप बहोत अच्छी है
सारिका शर्मा के - अरे कोई बात नही
दिलीप - बरी बात है आपने मेरे लिये किया सच मे आप मेरी बेस्ट दोस्त है
सारिका हस्ते हुवे - इसी लिये तो किया कियुंकी तुम भी मेरे बेस्ट दोस्त हो

दिलीप फिर बात तो दूसरी तरफ ले जाने की सोचता है ताकि सारिका के मन मे गलत सही वाला सवाल ना आये इस लिये दिलीप नॉर्मल बाते करना सुरु कर देता है और सारिका भी सब भूल बातो मे खो जाती है

रात 2 बजे - फिर दोनो किस वाला सीन कर गुड नाइट बोल सो जाते है

2 दिन बाद

रोज की तरह सारिका दिलीप की बाते जैसे होती थी इन 2 दिनों मे होती रही दिलीप सारिका को पिसाब करने की आवाज भी सुनाता रेहता है लेकिन दिलीप सारिका से पिसाब करने की और आवाज सुनाने के लिये नही के केहता है

कियुंकी दिलीप फिर वही कर रहा था दिलीप चाहता था सारिका खुद बात करे ताकि दिलीप को पता चल सके सारिका करना चाहती है या नही ताकि दिलीप बिना डरे आगे बढ़ सके और ऐसा होता भी है


सारिका सोचती भी है की आखिर राजू ने उसे पिसाब करने की आवाज सुनाने के लिये एक बार भी कियु नही कहा


तीसरे दिन सुबह सारिका हल्का होने जा रही थी और दिलीप से बाते भी कर रही थी

सारिका शर्मा के - तुमने मुझे पिसाब की आवाज सुनाने के लिये एक बार भी नही कहा ऐसा कियु किया तुम मेरे पिसाब करने की आवाज सुनना नही चाहते

दिलीप कमरे मे बैठा हुवा बाते कर रहा था अपनी मा की बाते सुन दिलीप फिर नाचने लगता है कियुंकी उसका ये प्लान भी काम कर गया था दिलीप अपने नाटक मे आ जाता है

दिलीप - नही ऑन्टी ऐसा नही है सच कहु तो दिन मे कई बार मुझे आपके पिसाब करने की आवाज सुनने का दिल कर रहा था कई बार हिम्मत की आपको केहने की लेकिन डर लग रहा था आप गुस्सा हो जाओगी कही दोस्ती ना तोर दो इस लिये नही कहा

सारिका एक जगह रुक जाती है और दिलीप से

सारिका - मुझे पता है मेने तुमपे गुस्सा किया था इस लिये डरे हुवे हो लेकिन कसम से मे तुमपे गुस्सा नही करुगी तुम बोल सकते हो

दिलीप मुस्कुराते हुवे - जी ऑन्टी तो जब भी आप को पिसाब लगे मुझे सुनना
सारिका बहोत खुश होती है
सारिका शर्मा के -ठीक है अभी लगी है जोर की सुना देती हु
दिलीप - खुश होते हुवे थैंक्स ऑन्टी

सारिका - थैंक्स मत बोलो ठीक है मे करती हु
दिलीप - ऑन्टी फोन उस जगह पे पास रखना अच्छे से आवाज सुनाई देगी मुझे
सारिका समझ जाती है किस जगह की बात कर रहा है सारिका सर्म से पानी पानी हो जाती है
सारिका शर्मा के - ठीक है उसी जगह के पास रखुंगी
सारिका फिर सारी उठा के बैठ जाती है और फोन को बहोत अपने चुत के पास रख मूतने लगती है दिलीप को फिर अपनी मा के मूतने की साफ आवाज सुनाई देती है सु सु सु


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दिलीप अपनी मा के मुतने की आवाज सुन मन मे - आह मा कैसे तांगे फैला के अपनी फूली रसभरी चुत से चुत रही है आह वो सीन कितना कमाल का होगा ल लेकिन जल्द ही मे अपनी आखो के सामने मा को मूतने देखुंगा


सारिका का मुतना हो जाता है और सारिका खरी हो जाती है
सारिका शर्मा के - सुन लिया
दिलीप खुश होते हुवे - हा बहोत तेज सिटी जैसी आवाज आ रही थी
सारिका फिर सर्म से पानी पानी हो जाती है
सारिका - तुझे अच्छा लगा मेरे पिसाब करने की आवाज सुन कर
दिलीप - बता नही सकता मेरी जान बहोत अच्छा लगा
सारिका हैरानी से - ये जान मे तुम्हारी कब से बन गई
दिलीप डरते हुवे - वो वो ऑन्टी खुशी से निकल गया माफ कर दो
सारिका हस्ते हुवे - जान अच्छा है केह सकते हो मुझे

दिलीप हस्ते हुवे - लेकिन मुझे ऑन्टी हि केहना है अच्छा लगता है
सारिका हस्ते हुवे - जैसी तुम्हारी मर्ज़ी

दिलीप फिर इधर उधर की बाते करने लगता है


अब ये होता है की सारिका को जब भी पिसाब लगता सारिका राजू को खुद फोन कर अपने पिसाब की आवाज सुनाती और दिलीप मजे से अपनी मा के पिसाब करने की आवाज सुनता


5 दिन बाद पिसाब वाला सीन नॉर्मल हो चुका था अब बारी की उसके आगे जाने की

रात 12 बज रहे होते है दिलीप सारिका सोने वाले थे गुड नाईट वाला किस होने वाला था

दिलीप - ऑन्टी सुनो ना आज हम फिर अलग तरीके से किस करेगे
सारिका बिस्तर पे लेती करवट बदल के हस्ते हुवे
सारिका - अब कैसे करना है किस वो भी बता दो
दिलीप - पेहले ये बताओ आप रेडी है करने के लिये
सारिका हस्ते हुवे - रेडी हु बाबा तुम जरूर हट मे करोगे
दिलीप हस्ते हुवे - सही कहा ठीक है तो अपनी आखे बंद कर लीजिये
सारिका आखे बंद कर - हा कर ली
दिलीप - ठीक है आप कैसे लेती हुई है
सारिका - कमर के बल लेती हु
दिलीप - आप पीठ के बल अच्छे से लेत जाइये
सारिका पीठ के बल लेत कर - हा लेत गई
दिलीप - अब आखे बंद कर ये सोचिये की मे आपके उपर पुरा लेता हुवा हु

दिलीप की बात सुन सारिका हैरान हो जाती है सारिका को ये बहोत गलत लगता है लेकिन सारिका इतना आगे आ गई थी की उसे अब इस खेल मे मजा आने लगा था सारिका के दिमाग के कई बार ये जरूर आता था वो जो कर रही है गलत है लो लेकिन दिलीप ये जानता था ऐसा होगा एसी लिये दिलीप धीरे धीरे सारिका को सब की आदत लगवा दी सारिका से मस्ती मजाक कुछ अलग करते हुवे सारिका को इतना आगे लेकर आ गया यहा सारिका को गलत भी सही लगने लगा

सारिका - हा मे फिल कर पा रही हु तुम मेरे उपर पुरा लेते हुवे हो
दिलीप मुस्कुराते हुवे काम हो गया
दिलीप - ठीक है अब आप मेरे शरीर की को उसकी गर्मी को फिल करिये मे आपके सरीर को उसकी गर्मी को फिल कर रहा हु
सारिका फिल करती है राजू उसके उपर लेता है अपनी छाती अपने चुत पे पेट पे हर जगह राजू लेता फिल हो रहा है सारिका ये फिल कर उसकी सासे तेज होने लगती है सारिका के अंदर हलचल होने लगती हो
सारिका - हा फिल कर पा रही हु
दिलीप - अब आप अपना जिब बाहर निकाल दीजिये फिर मे उसको चुसुगा पियुगा
सारिका तेज सासे लेते हुवे - ठीक है निकाल रही हु
दिलीप - अब फिल कीजिये मे आपके जिब को चूस रहा हु पी रहा हु
सारिका फिल करने लगती है की उसका जिब राजू के मुह मे है और राजू उसके जिब को चूस चूस कर पी रहा था ये मेहसूस कर सारिका की चुत पेहली बार गीली होती है कियुंकी ये सीन आगे का था


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सारिका को मजा आने लगता है सारिका को लगता है सच मे राजू उसके उपर है और उसको किस कर रहा है सारिका उसका मजा लेने लगती है 2 मिनट बाद

दिलीप - मजा आया ऑन्टी
सारिका होस मे आते हुवे जोर जोर से सासे लेने लगती है
सारिका सर्म से लाल होके - हा बहोत मजा आया सच्ची मे
दिलीप खुश होते हुवे मन मे - अब मंजिल दूर नही
दिलीप - मुझे तो आपसे भी जायदा मजा आया आपके जिब को मुह मे लेके चूसने के बाद किया बताऊ बहोत मिठा लगा

सारिका शर्मा के - सच्ची मेरा जिब मुह मे लेके चूस कर मजा आया
दिलीप - साची ऑन्टी कसम से
सारिका शर्मा के - सुनो ना मुझे भी चुदना है
दिलीप मन मे - आग लग रही है धीरे धीरे
दिलीप - ठीक है मे लेता हु जिब निकाल कर आप मेरे उपर आके मेरे जिब को अपने मुह मे लेके चूसिये
सारिका शर्मा के - ठीक है

सारिका आखे बंद कर सोचती है बिस्तर पे राजू लेता है सारिका राजू के ऊपर आके राजू के जिब को चूस रही है मजे से


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सारिका अपने दिमाग मे ये सीन बना रही थी सारिका को रियल वाला मजा मिल रहा था सारिका मजे से राजू के जिब को लेके चुस्ती है 2 मिनट बाद

दिलीप - मजा आया
सारिका होस मे आते हुवे शर्मा के - बहोत मजा आया सच मे
दिलीप - अब हम रोज ऐसे हि किस करेगे किया केहती है
सारिका अंदर से बहोत खुश हो जाती है
सारिका - हा ऐसे हि करेगे
दिलीप - ठीक है गुड नाइट ऑन्टी
सारिका - गुड नाइट बेटा

फोन कट

सारिका बिस्तर पे लेत - ये लरका कहा से ऐसे बाते सोच लेता है और मुझसे करवाता है लेकिन सच कहु तू बहोत मजा आता है इतना मजा तो कभी किसी दोस्त के साथ बात कर के नही आया

दिलीप बिस्तर के लेता खुश होते हुवे - अब आगे जो होगा आपको अंदर से हिला देगा आपको फिल होगा आपको किस की जरूरत है और आप किस के लिये तरसी है आपने जिसे दबा के रखा है वो बाहर आ जायेगा


दोपहर 12 बजे - सारिका बिस्तर पे लेती हुई थी और दिलीप पीपल के पेर के नीचे बैठा हुवा था राजू ने सारिका को बताया था आज काम बंद है इस लिये


दिलीप - ऑन्टी आप को एक बात कई दिन से केहना चाहता था लेकिन केह नही पाया
सारिका - किया केहना था और कियु केह नही पाये
दिलीप - इस लिये कियुंकी आप मुझपे गुस्सा करोगी
सारिका सोचने लगती है राजू किया कहेगा कि मे उसपे गुस्सा करुगी लेकिन सारिका को जानना था राजू किया केहने वाला है
सारिका - देखो हम दोस्त है और दोस्त से कोई बात नही छुपाना चाहिये
दिलीप - ये बाप तो हो टिक है बताता हु बात 6 दिन पेहले की है
सारिका - किया 6 दिन की बात आज बता रहे हो
दिलीप - डर लग रहा था ना आपके गुस्से से
सारिका हस्ते हुवे - ठीक है बोलो
दिलीप - हा तो 6 दिन पेहले मे साम को घूमने निकला था तभी एक लरकी को आते हुवे मेने देखा और मेरी नजर उसके ( दिलीप रुक जाता है)
सारिका बेचैनी से - उसके किया बोलो भी
दिलीप - मेरी नजर उसके बरे बरे दोनो पे चले गये और तभी लरकी ने मुझे अपने बरे बरे को देखते देख लिया और मुझे कमीना केह कर चली गई

सारिका दिलीप की बात सुन हैरान हो जाती है
सारिका गुस्से से - हरकत कमीने वाली करोगे तो कमीना कहेगी हि
दिलीप - लेकिन मेने जान बुझ कर थोरि देखा नजर चली गई और मेरी फूटी किस्मत लरकी ने मुझे देख लिया उसी वक़्त मुझे किसी ने आज तक कमीना नही कहा था लेकिन उसके केह दिया हद है यार

सारिका को हसी आ जाती है सारिका हस्ते हुवे - ठीक किया तुम्हारे साथ
दिलीप - किया आप भी मेरे मजे ले रही है
सारिका हस्ते हुवे - अरे नही मे तो बस केह रही थी
दिलीप - लेकिन एक बात है लरकी के बरे बरे थे आपके उतने बरे नही होगे सच केह रहा हु

सारिका जल्दी बाज़ी मे बोल परती है - मेरे भी बहोत बरे बरे है

दिलीप अपनी मा की बात सुन मुस्कुरा देता है तो वही सारिका का एहसास होता है उसने जल्दी बाज़ी मे किया केह दिया सारिका ये सोच सर्म से पानी पानी हो जाती है

असल मे ये दिलीप की बनाई झूठी कहानी थी और दिलीप का ये एक प्लान भी था और दिलीप ने जैसा सोचा था वही हुवा

दिलीप नॉर्मल तरीके से - मे नही मानता आपके बरे है
सारिका - अरे हद है मे सच केह रही हु मेरे दोनो बहोत बरे बरे है


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सारिका अपने बरे बरे चुचे जो ब्लाउस मे कैद थे उसे देख कर बोल रही थी सारिका मन मे - हु मेरे बरे है उसका छोटा होगा

राजू लरकी के बरे केह रहा था जो सारिका को अच्छा नही लग रहा था और यही तो दिलीप का प्लान था जो काम कर गया

दिलीप जाहिर नही होने देता वो खुश है या उसे मजा आ रहा है

दिलीप नॉर्मल होके - अच्छा आपका कितना है साइज
सारिका गुस्से से - 34 है
दिलीप - तब तो आप के बरे है आप सच केह रही थी
सारिका - अब आये ना लाइन पे मे केह रही थी तो मान हि नही रहे थे
दिलीप - माफ कर दो बाबा मेरी गलती थी मानता हु
सारिका को अब अच्छा फिल होता है
सारिका - माफ किया

दिलीप फिर जान बुझ कर इस बात को आगे नही ले जाता और बात को बदल दूसरे टॉपिक पे बाते करने लगता है


3 दिन बाद - रात 1 बजे

किस वाला सीन हो गया था

दिलीप आज जाके चुचे वाली बात करने वाला था

दिलीप हस्ते हुवे - आप ने सही कहा था आपके बरे बरे है आपके उपर आके आपको किस कर रहा था तो मुझे आपके दोनो बरे बरे अपने सीने पे फिल हो रहा था

सारिका सर्म से पानी पानी होते हुवे - तुम भी ना पागल
दिलीप हस्ते हुवे - बहोत बुलायम टाइट भी है आपके
सारिका शर्मा के - वो है सो है तुम्हे अच्छा फिल हुवा
दिलीप - कसम से ऑन्टी आपके दोनो को फिल कर मजा आ गया
सारिका को पता नही कियु गलत के समझने की जगह अच्छा फिल होता है ये सुन कर अब तो यही होता आ रहा था सारिका के साथ कियुंकी उसका बेटा यानी दिलीप अपनी मा को कैसे जाल मे फसाना है पता था

सारिका शर्मा के - अच्छा समझ गई

5 दिन तक दिलीप चुचे को लेकर बात करते रेहता है लेकिन जायदा खुल कर नही करता था धीरे धीरे करता था ताकि सारिका को गलत फिल ना हो


6 दिन बाद रात 11 बजे


दिलीप - ऑन्टी आप रात को किया पेहन के सोती हो
सारिका - नाइटी कियु

ये सवाल दिलीप बहोत पेहले पूछना चाहता था लेकिन दिलीप जनता था जल्दी मे ये सवाल नही पूछा जा सकता इस लिये इतने इंतज़ार के बाद आज पूछ ही लिया और जैसा दिलीप ने सोचा था सारिका ने आराम से जवाब दे दिया

दिलीप - नही वो मेरी मा भी नाइटी पेहेन कर सोती है ना इस लिये पूछा आप किया पेहन कर सोती है

सारिका - हस्ते हुवे अच्छा ये बात है तुम बताओ तुम किया पेहन कर सोते हो

दिलीप खुश होते हुवे मन मे - मै यही तो आप के मुह से निकलवाना चाहता था

दिलीप - मे जैसे आज जायदा गर्मी नही है तो हाफ पतली पैंट और पतली टीसत्

सारिका हस्ते हुवे - और अगर बहोत बहोत गर्मी होती है तब
दिलीप हस्ते हुवे - तब पुरा नँगा सोता हु

सारिका ये सुनते ही सोक् हो जाती है और सर्म से लाल भी

सारिका - छी तुम पुरे नंगे सोते हो
दिलीप - अरे तो किया हो गया कमरे मे कोन आ जायेगा आप की बात सुन लगता है आप कभी बिना कपरो के नही सोई है

सारिका - सही कहा मे नही सोती

दिलीप बातो मे सारिका को फसाता जा रहा था और जो बोलवाना चाहता था सुनना चाहता था जानना चाहता था सारिका सब से अंजान की वो अपने बेटे के जाल मे फस्ती जा रही है

दिलीप हस्ते हुवे - अरे सो कर देखना सुकून मिल जायेगा
सारिका शर्मा के - मुझे नही सोना तुम ही सो नंगे पुंगे
दिलीप हस्ते हुवे - मे तो सोउंगा
सारिका - अच्छा सुनो मुझे सुसु लगी है

दिलीप - ऑन्टी आज एक विनती है आपसे
सारिका हस्ते हुवे - किया बात है आज पेहली बार विनती कर रहे हो अब मुझसे किया करवाना चाहते हो

दिलीप - मे चाहता हु आज आप पूरी नंगी होकर पिसाब करे और मुझे सुनाये

सारिका सोक होते हुवे -किया कहा तुम ने
दिलीप डरते हुवे - माफ करना रेहने दो आप गलती हो गई
सारिका हस्ते हुवे - मे तो मजाक कर रही थी तुम ने पेहली बार मुझसे विनती की है तो करना पड़ेगा ही

दिलीप खुश होते हुवे - थैंक्स ऑन्टी आप बेस्ट हो
सारिका हस्ते हुवे - ठीक ठीक है
दिलीप जोस मे आते हुवे - ठीक है ऑन्टी आप अपनी नाइटी उतार दीजिये
सारिका सर्म से लाल होते हुवे नाइटी उतार पूरी नंगी हो जाती है


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दिलीप - आप ने उतार दिया
सारिका शर्मा के - हा उतार दिया
दिलीप - किया आप पूरी नंगी है सच केह रही है ना आप
सारिका - तुम्हारी कसम
दिलीप - ठीक है अब जाके पिसाब की आवाज सुनाइये
सारिका शर्मा के- ठीक है

सारिका घर के पीछे आके नंगी एक जगह खरी हो जाती है वही दिलीप अपना लंड हिलाते हुवे मन मे - मा पूरी नंगी है यकिन नही हो रहा सोच कर हि मेरा लंड फट रहा था मा पूरी नंगी कैसी दिखती होती जो भी हो पूरी आग है मेरी मा हाय मजा आ गया

सारिका - सुनो मे पिसाब करने जा रही हु
दिलीप - ठीक है ऑन्टी

सारिका एक जगह पे पूरी नंगी बैठ कर मोबाइल चुत के पास करके पिसाब करने लगती है दिलीप आखे बंद कर अमेजिंग करने लगता है उसकी मा नंगी बैठ पिसाब करते हुवे कैसी दिखेगी


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सारिका मन मे पिसाब करते हुवे - सोचा नही था मे ऐसा कुछ करुगी लेकिन मुझे मजा बहोत आता है राजू जब मुझे कुछ करने के लिये केहता है तो हाय बहोत सर्म आ रही है

सारिका पिसाब करने के बाद अंदर आके नंगी बिस्तर पे लेत जाती है

सारिका शर्मा के - कैसा लगा मजा आया तुम्हे

दिलीप सारिका की बात सुन मन मे - मा ये समझने के बजाये की वो जो कर रही है गलत है लेकिन नही मा खुद पूछ रही है मजा आया इसका मतलब अब आ खुद चाहती है राजू उसे और नया नया कुछ करने के लिये कहे कियुंकी अब मा को इस खेल की पूरी दीवानी हो चुकी तो असल मतलब ये है मा मेरे जाल मे अब पूरी तरह फस चुकी है ये सोच खुशी के मारे पागलो की तरह नाचने लगता है


सारिका दिलीप को कुछ ना बोलता सुन
सारिका - हेल्लो बोलोगे भी
सारिका की आवाज सुन दिलीप नाचना बंद कर बिस्तर पे लेत अपना लंड हिलाते हुवे

दिलीप - ऑन्टी आज मे सब से जायदा खुश हु आप का सुक्रिया ऑन्टी मेने नही सोचा था मुझे आप जैसा कभी दोस्त मिलेगा मुझे आप से बात कर इतना सुकून अच्छा लगेगा आप से जितना बात करू दिल नही भरता दिल करता है दिन रात बाते करता रहु लेकिन कर नही सकता सोना भी होता है काम पे जाना भी होता है मे अब सोचता हु हो मुझे खुशी होती है की उस दिन अच्छा हुवा गलती से आप के पास फोन लग गया नही तो आप जैसा दोस्त मुझे नही मिलता आप से बातें कर आपकी मीठी आवाज सुन मेरा हर एक दिन रात कैसे गुजरता है पता भी नही चलता पेहले मे सोचता था मेरी लाइफ मे कुछ भी अच्छा नही है मे उदास रेहता था अकेला पन फिल करता था मुझे एक दोस्त चाहिये था जिस से मे बाते कर सकु अपनी दिल कि बात कर सकु और उपर वाले ने मुझे आप जैसा बेस्ट दोस्त दे दिया आप जब से मेरी दोस्त बनी मेरी लाइफ बदल गई उपर वाले का आप का सुक्रिया सुक्रिया दिल से


आप को किया लगता है दिलीप ने इतना सारिका की तारीफ कियु की कियु सारिका को इतना महत्व दिया कियुंकी दिलीप सारिका को एहसास दिलाना चाहता है की वो बेस्ट है और राजू उसे दोस्त के रूप मे पाके बहोत खुश है उसका एहसान मंद है ताकि सारिका पूरी तरफ से सब भूल राजू के जाल मे फसी है इसके बारे मे सोचे भी ना

सारिका दिलीप की सारी बात सुन कर

सारिका - सच कहु राजू तो मेरा भी पेहले यही हाल था कोई घर घर मे मेरे बेटे के अलावा कोई रही है बेटी मायके पति बाहर बेटा है तो उसके साथ थोरि बाते कर लेती हु लेकिन मे अपने बेटे से हर वक़्त बात तू नही कर सकती और मा बेटे के बीच कितना ही बाते होगी हर रिश्ते की लिमिट होती है उसी हिसाब से हम बात कर सकते है काम मे लगी रेहती हु तो समय का पता नही चलता था लेकिन कोई काम नही होता था बोर हो जाती थी अकेला पन मेहसूस होता था मुझे भी एक दोस्त की कमी मेहसूस होने लगी थी फिर तुम आये सब चेंज हो गया आज 6 महीने हो गये हमारी दोस्ती के और ये 6 महीने मेरे ऐसे गुजरे तुम से बात कर मुझे खुद पता नही चला तुम्हारी बाते तुम्हारी मस्ती सब मुझे बहोत पसंद है मे भी उपर वाले तुम्हारा सुक्रिया करती हु

दिलीप अपनी मा की बात सुन मन मे - जानता हु एसी लिये तो मे राजू बन आपसे बात कर रहा हु ताकि आप को पा सकु और एक मा बेटे के रिश्ते की जो दीवार है तोर सकु तभी मे आपको हर एक खुसिया दे सकता हु आप चिंता मत कीजिये जल्दी ही आपको ढेर सारा प्यार दुगा

दिलीप - हम दोनो का सेम हाल था इसी लिये हम इतने अच्छे दोस्त मन पाये
सारिका - सायद तुम सही केह रहे हो

दिलीप हस्ते हुवे - कियु ना हम आज दोनो नंगे एक दूसरे के बाहों मे सोये
सारिका सर्म से लाल होके - पागल लरका ये तुम किया बोल रहे हो
दिलीप - सच्ची मुझे आप के साथ आपके उपर नँगा सोना है
सारिका शर्मा के - ठीक है लेकिन कैसे
दिलीप - अपनी आखे बंद करो
सारिका - कर ली
दिलीप - आप. पूरी नंगी लेती हो ना
सारिका - हा बाबा पूरी नंगी हु
दिलीप - ठीक है अब सोचो मे आपके उपर नँगा आके लेत गया हु
सारिका आखे बंद कर सोचती है की राजू उसके उपर आके नँगा लेत गया है सारिका को सब सियल फिल हो रहा था राजू यानी दिलीप भी बिस्तर पे लेता आखे बंद कर यही सोच रहा था उसकी मा नंगी लेती है और वो अपनी मा के ऊपर लेत गया है

दिलीप - फिल हो रहा है
सारिका - हा हो रहा है जैसे तुम सच मे मेरे उपर नंगे लेते हो
दिलीप - ठीक है अब मे फोन कट करता हु
सारिका आखे बंद किये - ठीक है

दिलीप फोन कट कर देता है लेकिन दोनो आखे बंद किये ये सोच की दोनो नंगे साथ मे सोये है


आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏
Wow kya baat hai, amazing update bhai
 
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मैं काग़ज़ बेरंग.. तू रंगरेज़ मेरे अल्फ़ाज़ों का
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