रात भर अंकित के कमरे में जो काम लीला चली थी उसे बारे में घर के किसी सदस्य को कानो कान खबर तक नहीं पड़ी थी और ना हीं किसी को जरा सा भी अंदेशा था कि उनके पीठ पीछे अंकित के कमरे में क्या हो रहा है,,,, अंकित के लिए यह याद कर रहा था थी और सही मायने में देखा जाए तो अंकित के लिए यह इसकी सुहागरात ही थी भले ही यह सुहागरात उसकी नानी के साथ थी लेकिन उसके जीवन का पहला संभोग रात जो की सुहागरात जैसा ही था,, अगर मर्द चरित्रवान हो तो उसके जीवन में उसकी पत्नी के साथ ही प्रथम रात के साथ ही उसके संभोग की शुरुआत होती है और अंकित के जीवन में अंकित के साथ ऐसा ही हुआ था,,, अंकित कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसे संभोग सुख सर्वप्रथम उसकी नानी से प्राप्त होगा,,, इसके लिए वह अपनी नानी को दिल से धन्यवाद दे रहा था क्योंकि वाकई में उसकी नानी ना होती तो शायद संभोग की शुरुआत ना जाने कब होती और उस पल की तड़प में वह पल-पल सुलग रहा था,,,।
अंकित अपने नानी के दैह लालित्य पर पूरी तरह से मोह गया था उसका आकर्षण अपने नानी की तरफ एकदम से बढ़ गया था वह कभी सपने में नहीं सोचा था कि नानी की उम्र की औरत इतनी मदहोश कर देने वाली और जवानी से भरी होती होगी,,, और सही मायने में देखा जाए तो वह अपनी नानी की उम्र की औरतों के प्रति बिल्कुल भी आकर्षित नहीं था और ना ही उन्हें इस उम्र में इतना लाजवाब हुस्न में पाया था,,, लेकिन उसकी नानी की बात ही कुछ और शुरू-शुरू में वह अपनी नानी के प्रति आकर्षित बिल्कुल भी नहीं हुआ था लेकिन उसकी नानी की बातें और उसका अंग प्रदर्शन देखकर अंकित का मोह भंग होने लगा था कि इस उम्र में औरतें लाजवाब नहीं होती,,, बल्कि अंकित ने अपनी नानी के बताने में एक बात का और ध्यान दिया था कि उसकी नानी की चूचियां और गांड दोनों उसकी मां से बड़ी-बड़ी थी। अंकित सुबह जब उठा तो रात भर जो कुछ भी हुआ था वह सारे दृश्य उसकी आंखों के सामने किसी फिल्म के दृश्य की तरह घूम रहे थे,,, बाथरूम में बैठा बैठा हुआ अपनी नानी के बारे में सोच रहा था और अपनी नानी के बारे में सोचते सोचते उसका लंड एक बार फिर से अंगड़ाई लेने लगा था,,, लेकिन इस बार उसने अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए अपने हाथों का उपयोग नहीं किया बल्कि अपनी भावनाओं पर काबू करके अपने आप को समझने की कोशिश किया कि आप हाथ से हिलाने का कोई फायदा नहीं है जब उसके पास इतनी खूबसूरत औरत है दिन में ना सही रात को एक बार फिर से वह वही खेल खेलेगा जिस खेल को खेलने में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी।
मन ही मन अंकित अपनी नानी को धन्यवाद देते हुए नतमस्तक प्रणाम भी कर रहा था क्योंकि उसके लिए तो उसके जीवन में आने वाली संभोग की साथी उसकी नानी ही थी जोर से शरीर सुख प्रदान की और सही मायने में देखा जाए तो एक तरह से वह उसकी शिक्षिका भी थी जो उसे संभोग की किताब के पन्नों को पलट पलट कर उसका अध्ययन कर रही थी,,, सामाजिक जीवन में भले ही उसकी मां शिक्षिका थीं लेकिन अंकित के लिए उसके जीवन किसी का उसकी नानी थी जो उसे एक औरत को खुश करने की कला सीखा रही थी उसमें पारंगत कर रही थी,, अपनी नानी को याद करके उसके बारे में सोच-सोच कर बार-बार अंकित का लंड खड़ा हो जा रहा था,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें बार-बार उसका मन मुठिया करने को करता था लेकिन,,, उसकी आंखों के सामने उसकी नानी का नंगा बदन नाचने लगता था इसलिए वह अपने आप पर काबू करके एकांत का इंतजार कर रहा था।
घर के सभी सदस्य नहा धोकर तैयार हो चुके थे और नाश्ता भी तैयार हो चुका था नाश्ता करते समय उसकी नानी बार-बार अंकित की तरफ देखकर मुस्कुरा दे रही थी और अंकित भी अपनी नानी की तरह मुस्कुराते रहा था लेकिन अंकित घबरा रहा था वह अपनी नानी से नजर मिलाने से कटरा रहा था उसे इस बात का डर था कि कहीं किसी को शक ना हो जाए,, लेकिन यह उसके मन का केवल भ्रम था ऐसा किसी को भी शंका होने वाला ही नहीं था कि अंकित अपनी नानी के साथ ही संभोग सुख प्राप्त किया है,,,, बात ही बात में अंकित की नानी अपनी बेटी सुगंधा से बोली,,,।
मैं तृप्ति को अपने साथ गांव ले जाना चाहती हूं ताकि गांव जाकर वह कुछ सीख सके,,,।
(अपनी मां की है बात सुनते ही सुगंधा मन ही मन बहुत खुश हुई,,, क्योंकि वह जानती थी की तृप्ति का गांव जाने का मतलब था कि उसके और उसके बेटे के लिए एकदम एकांत और यह खुशी वह अपने चेहरे पर जाहिर नहीं होने दी शुरू-शुरू में तृप्ति अपनी नानी के साथ गांव जाने से इनकार करने लगी लेकिन उसकी नानी के बहुत जोर देने पर आखिरकार उसे मानना ही पड़ा,,,, और वह गांव जाने के लिए तैयार हो गई उसके गांव जाने की तैयारी के रूप में उसकी नानी सबको बाजार लेकर गई ताकि तृप्ति के लिए कुछ खरीद सके और खाने पीने का सामान ले सके,,,,।
बाजार जाने के लिए सब तैयार हो चुके थे अंकित भी तैयार था लेकिन उसके मन में इस बात का मलाल था कि अगर बाजार न जाते तो इस समय वह अपने कमरे में नानी के साथ मजे लूट लेता,, क्योंकि जब से उसने अपनी नानी की बुर में अपना लंड डाला था तब से बार-बार उसे अपने लंड को बुर में डालने की इच्छा हो रही थी और उसकी यह इच्छा केवल उसकी नानी ही पूरी कर सकती थी लेकिन इस समय उसे भी अपनी नानी के साथ बाजार जाना पड़ा,,,, गांव जाने के लिए त्रप्ति भी नए कपड़े के लिए ही तैयार हुई थी वरना वह गांव जाने से इनकार कर रही थी,,, थोड़ी देर में तीनों बाजार पहुंच चुके थे वहां पर उसकी नानी ने तृप्ति के लिए उसके मनपसंद कपड़े खरीदे ,,, अपनी बेटी के लिए नई-नई साड़ी खरीदी और अंकित को भी नए कपड़े दिलाए यह उसकी मेहनत का नजराना था जो उसने रात भर अपनी रानी के साथ किया था,,, यह बात धीरे से उसकी नानी ने अंकित के कान में भी कही थी और अंकित मुस्कुरा दिया था,,, लेकिन अंकित की नानी ने उसके कान में क्या कहा यह बात तृप्ति और सुगंधा के लिए किसी पहेली से कम नहीं थी लेकिन इस बारे में उन दोनों ने अंकित से बिल्कुल भी बात नहीं की थी क्योंकि उन्हें इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि दोनों किस बारे में बात कर रहे हैं दोनों को ऐसा ही लगा की नानी और नाती का प्यार है,,, और वास्तव में यही था ,,,भी लेकिन वासना का प्यार,,,,।
रास्ते में खाने के लिए कुछ नाश्ता और फिर थोड़े बहुत फल फ्रूट लेकर शाम होते-होते चारों घर पहुंच चुके थे,,,, तृप्ति खुश थी उसकी नानी भी खुश थी,,, और सुगंधा और अंकित दोनों से ज्यादा खुश है क्योंकि तृप्ति के जाने के बाद दोनों को एकांत मिलने वाला था,,,, सुगंधा सब्जी काट रही थी और तृप्ति अपनी मां का हाथ बता रही थी अंकित और अंकित की नई भी वहीं पास में बैठकर आपस में बातें कर रहे थे और बात ही बात में उसकी नानी बोली,,,,।
देखना तृप्ति के लिए तो एक से एक रिश्ते आएंगे तृप्ति है ही इतनी खूबसूरत गांव पहुंचते ही देखना रिश्तो की लाइन लग जाएगी,,,(अपनी नानी की बात सुनकर तृप्ति एकदम से शर्मा गई और शरमाते हुए बोली,,,,)
क्या नानी आप भी अभी कोई उम्र है शादी करने की अभी तो मुझे पढ़ना है,,,।
चल रहने दे बहुत हो गई पढ़ाई सही समय पर शादी हो जाए तो अच्छा ही होता है और वैसे भी तु इतनी खूबसूरत है कि तेरे लिए रिश्ते तैयार ही होंगे,,,,(तृप्ति अपनी नानी की बात सुनकर मन ही मनपसंद भी हो रही थी क्योंकि एक तरह से उसकी नानी उसकी खूबसूरती की तारीफ भी कर रही थी जिसमें कोई दो राय नहीं थी वाकई में तृप्ति बहुत खूबसूरत थी,, सुगंध को भी अपनी मां की बात सही लग रही थी क्योंकि वह जानती थी कि वह कहां-कहां रिश्ते ढूंढने जाएगी अगर उसकी मां चाहेगी तो उसकी जल्दी शादी हो जाएगी और उसकी मां अच्छा ही रिश्ता ढूंढ कर लाएगी इसलिए हम मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,,, अंकित कुछ बोल नहीं रहा था वह सिर्फ सबको बात करते हुए देख रहा था उसके मन में कुछ और चल रहा था उसके मन में यही चल रहा था कि जल्दी से जल्दी खाना खाकर सब अपने-अपने कमरे में जाएं फिर वह एक बार फिर से अपनी नानी की चुदाई कर सके,,, इस सोच के साथ बार-बार उसका लंड लार टपका रहा था,,, और खड़ा भी हो जा रहा था,,, जिसे वह सबसे नजर बचाकर बार-बार व्यवस्थित करने की कोशिश भी कर रहा था लेकिन उसकी यह हरकत उसकी नानी देख ले रही थी और मंद मंद मुस्कुरा रही थी। वह अपने नाती की हालत को अच्छी तरह से समझ रही थी।
अनुभव से भरी हुई अंकित की रानी अच्छी तरह से अंकित के जज्बात को समझ रही थी उसकी नानी इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि कल रात को जो कुछ भी हुआ था वह अंकित के लिए पहली बार था इसलिए वह उस पल को जीने के लिए तड़प रहा है,,,, वैसे तो अंकित की हालत की तरह उसकी भी हालत थी वह भी रात को अंकित के साथ मजा लूटने के लिए उत्साहित थी उसके लंड की मोटाई और लंबाई अभी तक उसे अपनी बुर के अंदरूनी भागों पर रगड़ता हुआ महसूस हो रहा था,,, वह ऐहसास ही अजीब था,,, उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचकर अंकित की नानी को अच्छी तरह से मालूम था कि इस उम्र में पहले जैसी ऊर्जा और आनंद नहीं प्राप्त होता लेकिन बीती रात अंकित ने अपने मर्दाना अंग से जिस तरह से उसे रौंदा था वह बेहद काबिले तारीफ था,,,, इसलिए उसके गाने एक बार फिर से अपने नाती के लंड अपनी बुर में लेने के लिए तड़प रही थी।
खाना खाने के बाद सब लोग बैठकर टीवी देख रहे थे,,,, टीवी में जो फिल्म चल रही थी अंकित की नानी को वह फिल्म अच्छी लग रही थी इसलिए वह बैठकर देख रही थी लेकिन तृप्ति अपने कमरे में चली गई थी अंकित अपनी नानी के इंतजार में बैठा हुआ था सुगंधा जानती थी कि उसकी मां टीवी पर फिल्म देखने की शौकीन है इसलिए थोड़ा टाइम लग जाएगा और उसे भी नींद आने लगी थी इसलिए वह धीरे से उठकर बोली,,,,।

अब मैं जा रही हूं सोने,,,,(कितना कहकर सुगंध अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और धीरे से कमरे से बाहर निकाल कर घर के पीछे की तरफ पेशाब करने के लिए जाने लगी,,,, अंकित को भी नींद लग रही थी लेकिन वह अपनी नानी के इंतजार में जबरदस्ती बैठा हुआ था और जैसे ही उसकी मां कमरे से निकाल कर बाहर गई और पीछे की तरफ जाने लगी तो अंकित के दिल में कुछ-कुछ होने लगा वह जानता था कि उसकी मां पेशाब करने के लिए जा रही है लेकिन उसके नानी के होते हुए वह उठकर जा नहीं सकता,,,, लेकिन धीरे-धीरे सबके जाने के बाद अंकित की नानी को भी पेशाब लग रही थी इसलिए वह अभी धीरे से उठकर खड़ी हो गई और एक नजर अंकित की तरफ डाली ,,,अंकित उसे ही आशा भरी नजरों से देख रहा था उसकी नानी मुस्कुराई और कमरे से बाहर निकल गई और वह भी घर के पीछे की तरफ पेशाब करने के लिए जाने लगी उसे नहीं मालूम था कि घर के पीछे उसकी बेटी सुगंध भी पेशाब करने के लिए गई है ,,,,।
अंकित सब कुछ देख रहा था उसकी नानी और उसकी मां दोनों घर के पीछे की तरफ जा रही थी और वह जानता था कि इस समय दोनों पेशाब करने के लिए ही जा रही हैं और यह देखकर वह मन ही मन उत्तेजित होने लगा वह अपने मन में सोचने लगा कि एक साथ अपनी मां और अपनी नानी को पेशाब करते हुए देख कर कितना मजा आएगा दोनों की बड़ी-बड़ी गांड अद्भुत नजारा होगा और यही सोचकर वह भी धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया,,,, और घर के बाहर जाने की सोचने लगा,,,, एक तरफ उसके मन में उत्सुकता भी थी और दूसरी तरफ से इस बात का डर भी था कि कहीं दोनों में से किसी ने देख लिया तो गजब हो जाएगा,,, लेकिन फिर भी यहां पर उसे अपने डर को दूर करना था क्योंकि डर के दूर होने पर ही उसे एक अद्भुत नजारे के दर्शन हो सकते थे इसलिए वह अपने मन में से इस बात का डर निकाल कर धीरे से कमरे से बाहर निकला और धीरे-धीरे दबे पांव घर के पीछे की तरफ जाने लगा अंकित अच्छी तरह से जानता था की उसे क्या करना है,,,,,।
उसकी नानी घर के पीछे पहुंच चुकी थी और घर के पीछे पहुंचते ही उसने देखी कि उसकी बेटी सुगंध अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी नंगी गांड दिखाते हुए पेशाब कर रही थी इस नजारे को देख कर वह मुस्कुराई और धीरे से वह भी अपनी बेटी सुगंधा के बगल में खड़ी हो गई और अपनी साड़ी को धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठाते हुए बोली,,,,
इस तरह से यहां पेशाब करना ठीक नहीं है सुगंधा,,,,
क्यों मां,, घर में किस बात का डर यहां कौन देखने वाला है,,,,(पेशाब करते हुए अपनी बुर से सिटी की आवाज निकालते हुए सुगंधा बोली और यह नजारा पीछे दीवार से छिपकर अंकित देख रहा था और इस नजारे को देखकर उसके लंड की अकड़ बढ़ने लगी थी,,,,)
अरे पगली घर के अंदर घर का बाहर तो नहीं दिखेगा लेकिन घर के अंदर रहने वाला सदस्य तो देख ही लगा जैसे में तुझे पता भी नहीं चल यहां तक आ गई सो ऐसे में अंकित भी आ सकता है वह पूरी तरह से जवान हो चुका है और तुझे इस हालत में देखेगा तो उसके मन पर क्या बीतेगी,,,,!(ऐसा कहते हुए वह धीरे-धीरे अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठा दी थी उसकी नंगी गांड एकदम से झलकने लगी थी,,,, यह नजारा अंकित के लिए बेहद उत्तेजित कर देने वाला था इस नजरों को देखकर उसके मन में ढेर सारी धारणाएं बन रही थी वह अपनी नानी और अपनी मां के बारे में बहुत कुछ सोच रहा था,,,,, अपनी मां की बात सुनकर सुगंधा बोली,,,,)
क्या मां तुम भी मैं दिन दहाड़े थोड़ी यहां पेशाब करने आई हूं सिर्फ रात को ही आता हूं क्योंकि जानती हूं कि रात को वह यहां नहीं आता,,,,।
लेकिन किसी दिन आ ही गया तो क्या करोगी किसी दिन तुम्हारी नंगी गांड देख लेगा तो गजब हो जाएगा तुम नहीं जानती इस उम्र में लड़कों का क्या हाल होता है वह आकर्षण में इतने अंधे हो जाते हैं कि उन्हें कोई रिश्ता नहीं दिखता सिर्फ हर रिश्ते में एक औरत ही दिखतीहै,,,(ऐसा कहते हुए वह पेशाब करने के लिए नीचे बैठ गई और कुछ ही छोड़ बात उसकी बुर में से भी सीट की आवाज एकदम तेज आने लगी जो कि अंकित के कानों में एकदम साफ सुनाई दे रही थी उसके कानों में एक साथ दो-दो खूबसूरत जवानी से भरी हुई औरतों की पेशाब करने की आवाज गुंज रही थी,,, इस समय इस अद्भुत नजारे को देखकर वह कैसे अपनी उत्तेजना पर काबू किया हुआ था यह कहना बहुत मुश्किल था,।,,, अंकित की तो हालात पूरी तरह से खराब थी वाकई में इस नजारे के बारे में वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था एक साथ दो दो औरत को इस तरह से पेशाब करते हुए देख पाना वाकई में बहुत बड़ी किस्मत का काम था और इस समय ऐसा लग रहा था कि अंकित के सारे सितारे गर्दिश में थे वह किस्मत का धनी था तभी तो इस तरह का नजारा उसे अपनी आंखों के सामने दिखाई दे रहा था।

वैसे तो अंकित के उम्र का हर एक लड़का अपने ही घर में अपनी मां बहन भाभी चाची मासी को पेशाब करते हुए कभी ना कभी तो देखा ही होगा उसकी नंगी गांड देखकर उत्तेजित भी हुआ होगा लेकिन यह सहयोग उसके जीवन में या अंकित के जैसे उम्र के लड़के में शायद ही संयोग बना हो कि वह एक साथ अपनी मां को और अपनी नानी को एक साथ पेशाब करते हुए देखा हो और यह निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि अगर वह देखा भी होगा तो शायद अंकित की नानी के जैसे उसकी नानी तो बिल्कुल भी नहीं होगी जिसके बदन में अभी भी जवान कूट-कूट कर भरी हो जिसके नितंबों का आकर्षण इस उम्र में भी अद्भुत हो,,, बदन एकदम कसा हुआ हो खेत में काम कर करके जिसमें एकदम गठीला बन गया हो जिसके खूबसूरत चेहरे को उसके बदन को देखकर पता लगाना मुश्किल हो की उम्र कितनी है ऐसा संयोग वाकई में केवल अंकित के साथ ही बन रहा था,,, बड़ी उत्तेजित अवस्था में अंकित इस नजारे को देख रहा था और अपनी मां की बात सुनकर सुगंधा बोली,,,)
क्या मां तुम खामखा घबराती हो ऐसा कुछ भी नहीं होगा अपना अंकित ऐसा बिल्कुल भी नहीं है देखते नहीं हो कितना सीधा-साधा है औरतों से तो एकदम दूर ही भागता है,,,,,(सुगंधा जानबूझकर अपनी मां के सामने अपने बेटे के चरित्र को साफ सुथरा बताने की कोशिश कर रही थी जबकि हकीकत वह भी जानती थी अंकित के बारे में और अपनी बेटी के मुंह से अंकित की तारीफ सुनकर वह अपने मन में ही बोली,,,, बड़ा आया चरित्रवान कल रात को ऐसी चुदाई किया कि अभी तक मेरी बुर में दर्द हो रहा है बस इशारे की देरी है अगर यह भी इशारा कर देगी तो अंकित यह नहीं देखेगा कि यह मेरी मां है इस पर भी चढ़ जाएगा और चुदाई कर देगा,,,, इस पगली को कैसे समझाऊं दुनिया के रीतभात को यह नहीं जानती,,, दो जवान बच्चों की मन हो गई लेकिन फिर भी अभी भोली की भोली है,,,,,,, दोनों धीरे-धीरे अपनी बुर में से पेशाब की धार मार रहे थे और यह नजारा दीवार के पीछे छुप कर अंकित देखकर पेंट के ऊपर से ही अपने खड़े लंड को दबा रहा था,,,,। सुगंधा की बातें सुनकर वह बोली,,,,)
तू समझ नहीं पा रही है मैं क्या कहना चाह रही हूं,,,, इस तरह से खुले में मत पेशाब किया कर खास करके तब जब अंकित घर पर हो अंकित जवान हो चुका है इस बात को तु मानती है कि नहीं,,,।
हां इसमें कोई शक नहीं है जवान तो हो ही गया है,,,,(सुगंधा इस बात को कहते हुए पिछली बातों को याद करने लगी जब वह इसी तरह से पेशाब करने बैठी थी और वह ईस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा चोरी छिपे उसे देख रहा है,,,, सुगंधा की हालत इस समय क्या हो रही थी वही जानती थी और उसे वह वाली बात भी याद थी जब घर में चोर होने की आशंका से वह दोनों घर के पीछे की तरफ आए थे और किसी बिल्ली के होने की आशंका से थोड़ी देर बात करने के बाद सुगंध इसी जगह पर पेशाब करने के लिए बैठ गई थी और उसके पास में खड़ा होकर उसका बेटा पेशाब कर रहा था और उस समय उसके खड़े लंड को देखकर उसका बेटा कितना जवान हो गया है इस बात का एहसास सुगंधा को अच्छी तरह से हो गया था,,, और इस समय अपनी मां की बात सुनकर वह उसी क्षण को याद कर रही थी और सुगंध की बात सुनकर उसकी मां बोली,,,)
और तुझे यह भी मालूम होना चाहिए कि जब जवान हो गया है तो उसका लंड भी खड़ा होता होगा,,,,,,(वह एकदम से खुले शब्दों में सुगंधा से बोली तो सुगंधा भी हैरान होकर अपनी मां की तरफ देखने लगी और बोली,,,)
यह कैसी बातें कर रही हो मां,,,,।
मैं ठीक कर रही हूं तुझे समझने की कोशिश कर रही हूं दो बच्चों की मां है तुझे भी मर्दों के बारे में पता होना चाहिए तुझे भी पता होना चाहिए कि एक मर्द का लंड खड़ा होता है,,,, अरे पगली किसी दिन तेरा बेटा तुझे पेशाब करता हुआ तेरी नंगी गांड को देखा गया तो उसका भी लंड खड़ा हो जाएगा,,, वह यह नहीं सोचेगा कि सामने उसकी मां बैठकर पेशाब कर रही है सिर्फ उसे यही दिखेगा की कितनी खूबसूरत बड़ी-बड़ी गांड है बस एक मर्द को उत्तेजित होने के लिए इतना काफी है और उसे समय अगर उसका लंड खड़ा हो गया था तो क्या करेगी,,,, क्योंकि यह तो प्राकृतिक है इस तरह का नजारा देखकर मर्द का खड़ा होता ही है अभी भले ही अंकित इन सब के बारे में नहीं सोचता है लेकिन तुझे इस हालत में देखेगा तो उसके मन में भी अपने आप इस तरह के ख्याल आने लगेंगे और वह भी तेरी तरफ आकर्षित होने लगेगा,,,,,(वह थोड़ा तेज आवाज में उसे समझाने की कोशिश कर रही थी और दीवार के पीछे खड़े होकर छुप कर यह सब देख रहा अंकित अपनी नानी की तरह की बातें सुनकर और भी ज्यादा उत्तेजित होने लगा,,, और वह अपने मन में सोचने लगा कि उसकी नानी अपनी बेटी को कैसे संभाल कर रहने के बारे में समझ रही है और खुद रात भर मजा लूटी है,,,,।

अंकित की नानी अपनी बेटी को इसलिए समझ रही थी कि क्योंकि वह दुनिया देखी थी,,, वह जानती थी कि इस तरह के मामले ज्यादातर घर में ही होते हैं एक दूसरे से आकर्षण और फिर मर्यादा लांघ जाना,,, अपनी बेटी को समझाते हुए अपने बारे में सोच रही थी क्योंकि यहां आने से पहले और अंकित को देखने के बाद वह कभी सोची नहीं थी कि उसे अंकित के साथ शारीरिक संबंध बनाना पड़ जाएगा,,, लेकिन सोते समय जिस तरह का अनुभव उसे हुआ था उससे वह पूरी तरह से मजबूर हो गई थी अपने ही नाती के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए और वह अब अपने नाती अंकित को अच्छी तरह से समझ गई थी उसके मर्दाना अंग को उसकी ताकत को समझ गई थी उसे इस बात का डर था कि कहीं जिस तरह का अनुभव उसे हुआ है अगर ऐसा ही कुछ अनुभव सुगंध को हो गया तो दोनों के बीच मां बेटे का रिश्ता एकदम से खत्म हो जाएगा और एक मर्द और औरत का रिश्ता कायम हो जाएगा,,,, इसीलिए वह सुगंधा को समझा रही थी,,,, अपनी मां की बात के कहने का मतलब वह भी अच्छी तरह से समझ रही थी पेशाब करते हुए देखने पर लंड खड़े होने की स्थिति को वह बहुत बार देख भी चुकी थी और अनुभव भी कर चुकी थी उसकी मां को जिस बात का डर था वही तो सुगंधा चाहती थी लेकिन अपनी मां के सामने सीधी साधी और भोली बनने की कोशिश कर रही थी,,,,।

जब मां बेटी दोनों केबीच इस तरह की बात हो रही थी तब अंकित की नानी को ऐसा लगा कि पीछे कोई खड़ा है इसलिए वह बिना सर पीछे घुमाई बस नजर को तिरछा घूम कर पीछे की तरफ देखने की कोशिश की तो उसे जल्दी ही दीवार के पीछे खड़ा उसका नाती दिखाई दे गया और वह एकदम हैरान तो हुई लेकिन पल भर में ही इस बात से उत्तेजित होने लगी की अंकित इस समय अपनी मां और अपनी नई दोनों को पेशाब करते हुए देख रहा है दोनों की गांड उसे एकदम साफ दिखाई देती होगी इस बात का अहसास होते ही अंकित की नानी के टन वजन में उत्तेजना की लहर उठने लगी भले ही वह अपनी बेटी को इस तरह की हरकत ना करने की सलाह दे रही थी लेकिन वह खुद ऐसी सलाह मानने को तैयार नहीं थे क्योंकि वह जानती थी की असली मजा तो इन्हीं सब में है इसलिए वह अंकित की लालच और ज्यादा बढ़ाने के लिए अपने दोनों हाथों को अपनी नंगी गांड पर रखकर उसे होले होले सहलाने लगी और तीरछी नजर से अपनी बेटी की गांड की तरह देखने लगी उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसकी गांड की अपेक्षा उसकी बेटी की गांड उससे थोड़ी छोटी ही है और वह अच्छी तरह से जानती थी कि समय अंकित का आकर्षण उसकी बड़ी-बड़ी गांड के ऊपर ज्यादा होगा,,,,।

अंकित को इस तरह से चुप कर देखते हुए वह इतना भी समझ गई थी कि जितना सुगंधा उसे सीधा-साधा समझती है इतना सीधा-साधा वह बिल्कुल भी नहीं है उम्र के मुताबिक उसके अंदर भी औरतों के प्रति आकर्षण जागने लगा है,,, बीती रात को तो सबकुछ खुद ही उसे उकसाने के लिए और उत्तेजित करने के लिए की थी लेकिन आप उसे पता चल गया था की चोरी छिपे वह भी शायद यह सब देखता होगा वरना घर के पीछे वह क्यों आता,,, क्योंकि सुगंधा के कहे अनुसार वह इतनी रात को घर के पीछे आता ही नहीं है और इस समय वह दीवार के पीछे खड़ा है इसका मतलब साफ था कि उसे मालूम है कि उसकी मां और उसकी नानी दोनों पेशाब करने के लिए घर के पीछे आई है,,,, अंकित की नानी समझ गई थी कि अब उसे क्या करना है जिस तरह का रिश्ता उसने अंकित के साथ कायम कर ली थी अब अंकित के बारे में अपनी बेटी को कुछ भी बता पाना मुश्किल था उसके चरित्र के बारे में बता पाना और भी ज्यादा मुश्किल था क्योंकि वह जानती थी कि अगर उसके कहे अनुसार उसकी मां उसके जाने के बाद उसकी पूछताछ करेगी तो वह हो सकता है सब कुछ बता दे और ऐसे में उसकी खुद की बदनामी होने की संभावना बढ़ जा रही थी,,,, इसलिए वह बोली,,,,,)
चल कोई बात नहीं जैसी तेरी मर्जी मैं तो तुझे जीवन की सच्चाई के बारे में लोगों की हकीकत के बारे में आगे कर रही थी लेकिन मुझे लगता है कि अंकित पर तेरा कुछ ज्यादा ही भरोसा है और मैं भी भगवान से प्रार्थना करूंगी कि तेरा विश्वास बना रहे और अंकित ऐसी वैसी कोई हरकत ना करें अब चल पेशाब कर चुकी है रात भी हो चुकी है अब सोना चाहिए,,,,(इतना कहने के साथ ही वह धीरे से उठकर खड़ी होने लगी अभी भी वह अपनी साड़ी को कमर तक उठाएं हुए थी जिससे उसकी नंगी गांड एकदम चमक रही थी,,,, अपनी मां के साथ पेशाब करने के बाद सुगंध भी खड़ी हो गई और उसके हाथ में भी अभी भी साड़ी थी धीरे से वह साड़ी को नीचे गिरे और एक खूबसूरत नजरे पर पर्दा पड़ गया और उसकी नानी की धीरे से साड़ी को नीचे गिरा दी,,,, खड़ी होने के बाद भी वहां से वापस कमरे में जाने की जगह वहीं खड़ी होकर अंकित की नानी बात करने लगी वह एक तरह से अंकित को समय दे रही थी कि वह अपनी जगह से हट जाए चला जाए,,, क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि अंकित को उसकी मां देखें क्योंकि अपने बेटे पर से वह अपनी बेटी का विश्वास टूटने नहीं देना चाहती थी,,,, और ऐसा ही हुआ मौके की नजाकत को देखते हुए अंकित तुरंत अपने कमरे में आ गया और थोड़ी देर बात करने के बाद सुगंध अपने कमरे में चली गई और अंकित की नानी अंकित के कमरे में आ गई क्योंकि दरवाजा अंकित ने खुला छोड़ दिया था,,,।