- 58
- 78
- 19
हेलो दोस्तों यह मेरी पहली स्टोरी है। मैं पहली बार कोई स्टोरी लिख रहा हु ।
आसा करता हूं की आप लोगों को स्टोरी पसंद आए।
अब कहानी शुरु करते हैं।
पहले परिचय मेरी माँ से कराता हु। मेरी माँ का नाम संगीता है। उम्र 42 है । दिखने में बहुत ही खूबसूरत है।

एक दम माल है मेरी मां । मेरी मां जब भी बाजार जाती है तो सभी लोग मेरी मां को ही देखते है। या कहो की मेरी मां के बॉडी फिगर को देखते हैं। जो एक औरत की खूबसूरती का पहचान होती हैं।
और अब मेरा परिचय मेरा नाम रोहित है। उम्र 20 है। और मैं अपनी मां का दीवान हु। मगर अभी तक कुछ करा नहीं है। बस मां के सेक्सी फिगर को देख के daily मुट्ठी मारता हु। और अपने खयालों में ही मां के बारे सोच सोच के मुट्ठी मारता रहता हु।
हम लोग एक गांव मैं रहते हैं। मेरे घर में बस मैं और मां रहते हैं। पापा बाहर सहर में जॉब करते है तो वो कभी कभी आते है घर पर।
एक दिन:-
रात का वक्त था रात के 10 बज रहे थे। मैं अपने रूम में था और मोबाइल चला रहा था । तभी मेरे को मां के पायल की आवाज आती है जब वह चल रही थी तो पायल की आवाज मेरे कानों मैं पड़ती है तभी मैं समझ जाता हु कि मां खेत में शौच करने जा रही है। वह कैसे पता चलता है क्यों कि मेरी मां डेली इस टाइम खेत में हगने जाती है गांवों की औरतों के साथ में।
मेरे गांव में आज भी सभी औरतें खेतों हगने जाती है।
मैं जब देखता हु कि मां चली गई तो मैं भी उनके पीछे पीछे चल देता हु। मां खेत में जा के बैठ जाती हैं और मै एक पेड़ के पीछे छुप के देखता हु। बाकी गांव की औरतें अलग अलग जगहों पर बैठ के हगने लगती है। रात के वक़्त कुछ सही से दिख भी नहीं रहा था। तभी मां पेशाब करती है तो उस में से सीटई की आवाज आती है।
कुछ देर बाद मां उठ के अपनी साड़ी सही करती है और घर के लिए निकल जाती है और मैं भी छुप के से वह से निकल लेता हु।
और घर आके अपने बेड पर लेट के मां के बारे में कल्पना कर के मुट्ठी मारने लगता हु।
मैं:- आह आह आह मां उम्म shh ahhhh।
और अपने लंड को टाइट पकड़ के आगे पीछे करने लगता हु। और मां के बारे में गंदे गंदे विचार सोच के कुछ देर बाद मैं झड़ जाता हूं और उसके बाद सो जाता हूं।
Next day:
मां किचन में थी और खाना बना रही थी । तभी मैं मां के पीछे आ के खड़ा हो जाता हु। और मां के पीठ पे पसीना आई हुआ था जो की मां के ब्लाउज को गिला कर दिया था।

मैं: मां क्या बना रही हो।
मां: देख नहीं रहा कि रोटी बना रही हूं।
मैं: हा रोटी के साथ और क्या बना या है।
मां: आलू की सब्जी।
मैं: मां देखो न तुम्हें कितना पसीना आ चुका है।
मां: क्या करूं बेटा इतनी गर्मी जो है और ऊपर से या गैस की गर्मी पसीना तो होगा ही न।
मैं: रूको के काम करता हु मैं तुम्हें पंखा कर देता हु और तुम खाना बनाओ।
मां: अच्छा जी अब तू मुझे पंखा करेगा।
मैं: हा मां।
और मैं इतना कह के हाथ वाला पंखा ले के आता हु और मां को हवा देने लगता हु।
मैं: कैसा लग रहा है मां।
मां: अब सही लग रहा है।
मैं: एक काम करता हु आपके पसीना मैं अपने रुमाल से साफ कर देता हु।
मां: क्या तू रुमाल से साफ करेगा मेरा पसीना।
मैं: हा मां।
फिर मैं अपनी जेब में से रुमाल निकलता हूं और मां के पीठ पे जो पसीना आ रहा था उसे अपने रुमाल से साफ कर देता हु और उसके बाद मां के कमर पे आए पसीने को साफ करता हूं।
मां: मेरी कमर तक भी आ गया क्या पसीना।
मैं: हा मां।
अब मैं मां के आगे वाले हिस्से को पोंछ ता हु मां के नाभि को और उनके पेट को। जब मां रोटी बेल रही थी तो उनका शारीर आगे पीछे हो रहा था। फिर मैं सोचता हु कि क्या मैं मां की चुचियों के पास भी जो पसीना आ रहा था क्या मैं उसे पोंछ दूं।
मां: तू जब तक पसीना साफ करता रह गया और यहां रोटी भी बन गई।
मैं: हा।
मां: चल मै जा रही हु नहाने तू अपन खाना निकल के खा लेना।
मैं: ठीक है मां।
और पसीने से गिला हुआ रूमाल मैं अपने जेब में रख लेता हु।
मैं अभी मां के चूचियों के पास जाने वाला ही था जब तक मां रोटी बना चुकी थी। और मैं खाना निकल के खा लेता हु। और मां अपने रूम में चली जाती है।
फिर मां घर के पीछे बाथरूम था वहा चली जाती है। फिर मां अपनी कच्छी(पैन्टी) देखती जो अभी सुखा नहीं था। तो मां दुबारा अपने रूम मे आती हैं और जो मां ने अभी पैन्टी पहनी थी उसे उतार के अपने बेड पर रख देती और नहाने चली जाती है।
मैं सब जानता हूं कि मां दुबारा क्यों आईं है अपने रूम में। क्योंकि मैं ही मां की पैन्टी को सुबह गिला कर दिया था। जब मां नहाने चली जाती है तो मैं उनके रूम मैं जाता हु और देखता हु की मां ने अपनी ब्रा और पेन्टी बेड पर ही रखा है।

dedupe product feed text lines
फिर मैं ब्रा को उठा के सूंघने लगता हु। क्या मनमोहक खुशबू आ रही थी। और मैं मां की कच्छी(panty) उठाता हु तो देखता हु कि मां की पैन्टी अभी तोड़ी सी गीली थी तो मैं समझ जाता हु की मां जब खाना बना रही थी तो उनको पसीना ही रहा था । और तभी यह पैन्टी गीली हुई है।
मैं: आह मां आपकी पैन्टी से खुशबू बहुत मस्त आ रही है और आपका पसीना इस पैन्टी के खुशबू को और बड़ा दे रहा है।
जेब में रखी रूमाल को निकल के उसे भी सुंघने लगता हु। तभी मैं सोचता हु कि क्यों न मां को नहाते समय देखू और उनकी पैन्टी को सुंघू। फिर मैं एक रूम जाता हु जहां पुराने सामान रखे जाते हैं और उस रूम से घर के पीछे बाथरूम भी सही से दिखता हैं।
मैं उस रूम की खिड़की थोड़ा सा खोल ता हु और मेरे सामने का नजारा एकदम अद्भुत था।

मां अपनी पेटिकोट में नहा रही थी। और पेटिकोट गीली होने के कारण मां के बदन से चिपकी हुई थी और मां के चूतड उस पेटिकोट में साफ साफ दिख रहे थे। तभी मैं अपना पेंट उतरता हु और अपने लंड को पकड़ के मुठ्ठी मारने लगता हु और मां की पसीने वाली पैन्टी को अपनी नाक से लगा के सूंघने लगता हु।
मैं: आह मां तेरी panty से क्या खुशबू आ रही हैं आह आह आह।
आसा करता हूं की आप लोगों को स्टोरी पसंद आए।
अब कहानी शुरु करते हैं।
पहले परिचय मेरी माँ से कराता हु। मेरी माँ का नाम संगीता है। उम्र 42 है । दिखने में बहुत ही खूबसूरत है।

एक दम माल है मेरी मां । मेरी मां जब भी बाजार जाती है तो सभी लोग मेरी मां को ही देखते है। या कहो की मेरी मां के बॉडी फिगर को देखते हैं। जो एक औरत की खूबसूरती का पहचान होती हैं।
और अब मेरा परिचय मेरा नाम रोहित है। उम्र 20 है। और मैं अपनी मां का दीवान हु। मगर अभी तक कुछ करा नहीं है। बस मां के सेक्सी फिगर को देख के daily मुट्ठी मारता हु। और अपने खयालों में ही मां के बारे सोच सोच के मुट्ठी मारता रहता हु।
हम लोग एक गांव मैं रहते हैं। मेरे घर में बस मैं और मां रहते हैं। पापा बाहर सहर में जॉब करते है तो वो कभी कभी आते है घर पर।
एक दिन:-
रात का वक्त था रात के 10 बज रहे थे। मैं अपने रूम में था और मोबाइल चला रहा था । तभी मेरे को मां के पायल की आवाज आती है जब वह चल रही थी तो पायल की आवाज मेरे कानों मैं पड़ती है तभी मैं समझ जाता हु कि मां खेत में शौच करने जा रही है। वह कैसे पता चलता है क्यों कि मेरी मां डेली इस टाइम खेत में हगने जाती है गांवों की औरतों के साथ में।
मेरे गांव में आज भी सभी औरतें खेतों हगने जाती है।
मैं जब देखता हु कि मां चली गई तो मैं भी उनके पीछे पीछे चल देता हु। मां खेत में जा के बैठ जाती हैं और मै एक पेड़ के पीछे छुप के देखता हु। बाकी गांव की औरतें अलग अलग जगहों पर बैठ के हगने लगती है। रात के वक़्त कुछ सही से दिख भी नहीं रहा था। तभी मां पेशाब करती है तो उस में से सीटई की आवाज आती है।
कुछ देर बाद मां उठ के अपनी साड़ी सही करती है और घर के लिए निकल जाती है और मैं भी छुप के से वह से निकल लेता हु।
और घर आके अपने बेड पर लेट के मां के बारे में कल्पना कर के मुट्ठी मारने लगता हु।
मैं:- आह आह आह मां उम्म shh ahhhh।
और अपने लंड को टाइट पकड़ के आगे पीछे करने लगता हु। और मां के बारे में गंदे गंदे विचार सोच के कुछ देर बाद मैं झड़ जाता हूं और उसके बाद सो जाता हूं।
Next day:
मां किचन में थी और खाना बना रही थी । तभी मैं मां के पीछे आ के खड़ा हो जाता हु। और मां के पीठ पे पसीना आई हुआ था जो की मां के ब्लाउज को गिला कर दिया था।

मैं: मां क्या बना रही हो।
मां: देख नहीं रहा कि रोटी बना रही हूं।
मैं: हा रोटी के साथ और क्या बना या है।
मां: आलू की सब्जी।
मैं: मां देखो न तुम्हें कितना पसीना आ चुका है।
मां: क्या करूं बेटा इतनी गर्मी जो है और ऊपर से या गैस की गर्मी पसीना तो होगा ही न।
मैं: रूको के काम करता हु मैं तुम्हें पंखा कर देता हु और तुम खाना बनाओ।
मां: अच्छा जी अब तू मुझे पंखा करेगा।
मैं: हा मां।
और मैं इतना कह के हाथ वाला पंखा ले के आता हु और मां को हवा देने लगता हु।
मैं: कैसा लग रहा है मां।
मां: अब सही लग रहा है।
मैं: एक काम करता हु आपके पसीना मैं अपने रुमाल से साफ कर देता हु।
मां: क्या तू रुमाल से साफ करेगा मेरा पसीना।
मैं: हा मां।
फिर मैं अपनी जेब में से रुमाल निकलता हूं और मां के पीठ पे जो पसीना आ रहा था उसे अपने रुमाल से साफ कर देता हु और उसके बाद मां के कमर पे आए पसीने को साफ करता हूं।
मां: मेरी कमर तक भी आ गया क्या पसीना।
मैं: हा मां।
अब मैं मां के आगे वाले हिस्से को पोंछ ता हु मां के नाभि को और उनके पेट को। जब मां रोटी बेल रही थी तो उनका शारीर आगे पीछे हो रहा था। फिर मैं सोचता हु कि क्या मैं मां की चुचियों के पास भी जो पसीना आ रहा था क्या मैं उसे पोंछ दूं।
मां: तू जब तक पसीना साफ करता रह गया और यहां रोटी भी बन गई।
मैं: हा।
मां: चल मै जा रही हु नहाने तू अपन खाना निकल के खा लेना।
मैं: ठीक है मां।
और पसीने से गिला हुआ रूमाल मैं अपने जेब में रख लेता हु।
मैं अभी मां के चूचियों के पास जाने वाला ही था जब तक मां रोटी बना चुकी थी। और मैं खाना निकल के खा लेता हु। और मां अपने रूम में चली जाती है।
फिर मां घर के पीछे बाथरूम था वहा चली जाती है। फिर मां अपनी कच्छी(पैन्टी) देखती जो अभी सुखा नहीं था। तो मां दुबारा अपने रूम मे आती हैं और जो मां ने अभी पैन्टी पहनी थी उसे उतार के अपने बेड पर रख देती और नहाने चली जाती है।
मैं सब जानता हूं कि मां दुबारा क्यों आईं है अपने रूम में। क्योंकि मैं ही मां की पैन्टी को सुबह गिला कर दिया था। जब मां नहाने चली जाती है तो मैं उनके रूम मैं जाता हु और देखता हु की मां ने अपनी ब्रा और पेन्टी बेड पर ही रखा है।

dedupe product feed text lines
फिर मैं ब्रा को उठा के सूंघने लगता हु। क्या मनमोहक खुशबू आ रही थी। और मैं मां की कच्छी(panty) उठाता हु तो देखता हु कि मां की पैन्टी अभी तोड़ी सी गीली थी तो मैं समझ जाता हु की मां जब खाना बना रही थी तो उनको पसीना ही रहा था । और तभी यह पैन्टी गीली हुई है।
मैं: आह मां आपकी पैन्टी से खुशबू बहुत मस्त आ रही है और आपका पसीना इस पैन्टी के खुशबू को और बड़ा दे रहा है।
जेब में रखी रूमाल को निकल के उसे भी सुंघने लगता हु। तभी मैं सोचता हु कि क्यों न मां को नहाते समय देखू और उनकी पैन्टी को सुंघू। फिर मैं एक रूम जाता हु जहां पुराने सामान रखे जाते हैं और उस रूम से घर के पीछे बाथरूम भी सही से दिखता हैं।
मैं उस रूम की खिड़की थोड़ा सा खोल ता हु और मेरे सामने का नजारा एकदम अद्भुत था।

मां अपनी पेटिकोट में नहा रही थी। और पेटिकोट गीली होने के कारण मां के बदन से चिपकी हुई थी और मां के चूतड उस पेटिकोट में साफ साफ दिख रहे थे। तभी मैं अपना पेंट उतरता हु और अपने लंड को पकड़ के मुठ्ठी मारने लगता हु और मां की पसीने वाली पैन्टी को अपनी नाक से लगा के सूंघने लगता हु।
मैं: आह मां तेरी panty से क्या खुशबू आ रही हैं आह आह आह।