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chapter 1

सुबह का समय था 45 साल का एक अंकल लेकिन देखने मे पुरा हट्टा कट्ठा फिट आदमी कंधे पे कुदाल रखे धोती कुर्ता पहने घर के बाहर खरा खरा था खेत मे काम करते करते अच्छी बॉडी खुद बन गई थी
रामपाल दिल का बहोत अच्छा है बहोत मेहनती भी रामपाल घर से जयदा अपने खेतो मे रहना पसंद करता है जैसे उसके लिये सब कुछ उसका खेत ही हो और ये सच भी है एक किसान के किये उसका खेत ही सब कुछ होता है
रामपाल की बीवी बीमारी से 15 साल पहले ही चल बसी तब से और भी जयदा रामपाल खेतो मे रहने लगा रामपाल को खेतो मे काम करते रहना या वक़्त बिताना जयदा पसंद है कहे तो रामपाल को खेतो मे सुकून सांति मिलती है
रामपाल घर के दरवाजे की तरफ देखते हुवे तेज आवाज मे - बहु मे खेत मे जा रहा हु बता नही कोन कमीने है जो मेरे मक्के तोर ले जाते है मुझे तब तक मक्के पूरी तरह तोरने लायक नही हो जाते मुझे दिन रात रखवाली करनी परेगी
अंदर से एक बहोत ही खूबसूरत कयामत औरत सर पे घुघट डाले बाहर आती है और रामपाल के सामने खरी हो जाती है

ये है रामपाल की बहु नाम है माधुरी 20 की है नाम के जैसे ही माधुरी खूबसूरत उसके हुस्न को देख कोई भी घायल हो जाये देखता रह जाये उपर से नीचे तक भरी हुई है चुचे गांड कमर गोरा बदन सब पर्फेट कोई कमी नही है 18 के होते ही शादी कर दी गई माधुरी का पति मनोज है
रामपाल की एक बेटी है जिसका नाम है संगीता शादी सुधा है
रामपाल मनोज माधुरी छोटा परिवार है संगीता तो अपने ससुराल रहती है बीच मे आती रहती है
माधुरी रामपाल को घुघट के अंदर से देखते हुवे - पापा जी होगे गाव के लरके जो मक्के तोर के पका के खाने के लिये ले जाते होगे
रामपाल माधुरी को देखते हुवे - जनता हु बहु लेकिन उन कमीनो को मेरे ही मक्के दिखते है उपर से जंगली सुगर तोते अलग मक्के को बर्बाद करने मे लगे है
माधुरी हस्ते हुवे - समझ गई पापा जी वैसे भी आपको तो जयदा खेत मे रहना ही पसंद है जाइये मे 1 बजे खेत मे खाना लेके आ जाउंगी
रामपाल माधुरी को देखते हुवे - जाने से पहले पता है ना बहु
माधुरी चारों तरफ देख मुस्कुराते हुवे घुघट हटा के रामपाल को देख हस्ते हुवे - अच्छे से पता है आप मेरा चेहरा देखे बिना घर से बाहर कही नही जाते

रामपाल अपनी बहु माधुरी के फेस चेहरे को देखता गोरा चिठ्ठा फेस होठो पे मुस्कान आखे मे कतीलाना अंदाज़ गुलाबी होठ उफ मानो होठो से रस टपक रहा हो माधुरी जिस मुस्कुराहट कातिल अंदाज़ मे मुस्कुराते हुवे रामपाल को देख रही थी रामपाल कही खो जाता है
माधुरी मुस्कुराते हुवे - कहा खो गये पापा जी
रामपाल मुस्कुराते हुवे - ठीक है बहु बस यही केहना था अच्छा चलता हु
रामपाल जाने लगता है माधुरी रामपाल को बातें देखते हुवे मन मे - पापा जी कितने अच्छे है आपके जैसे ससुर मिलना किस्मत की बात है सासु जी के जाने के बाद से कैसे जी रहे है आप मे फिल कर पाती हु
बता दु रामपाल माधुरी को अपनी बेटी मानता है बहोत प्यार करता है माधुरी रामपाल ससुर बहु के बीच जो रिस्ता है दोस्ताना टाइप का है गाव के जयदा तर घर की बहु ससुर से बात तभी करती है जब जरूरी हो या ससुर भी तभी अपनी बहु से बातें करता है जब जरूरी हो
लेकिन माधुरी रामपाल दोनों बहु ससुर बहोत बातें करते है मस्ती करते है सुरु मे माधुरी जब आई तो माधुरी रामपाल के बीच कम बातें होती लेकिन धीरे धीरे दोनों ससुर बहु खुल के बातें करने लगे मस्ती भी
माधुरी सुरु से ही चंचल मस्ती करने वाली लरकी रही है जब रामपाल ने माधुरी की चंचल रूप को देखा तो रामपाल को अच्छा लगा रामपाल खुद चाहता था माधुरी खुल के जिये बातें करे ना की घर मे बंद रेह कर रह जाये
रामपाल अपनी बीवी को धोके दर्द याद मे जीते आ रहा था लेकिन माधुरी के आने के बाद रामपाल की लाइफ मे बदलाव खुसिया आ गई
जहा रामपाल पहले अकेला अकेला फिल करता था अब रामपाल के पास बहु थी माधुरी जिसके बातें कर रामपाल को भी बहोत अच्छा फिल होता
घर मे अकेली माधुरी को भी रामपाल के साथ मस्ती बातें करने मे अच्छा लगने लगा माधुरी बहोत किस्मत वाली खुद को मानती थी जहा नई नवेली दुल्हन को बाहर निकलना मना था या निकलने नही दिया जाता था वही रामपाल ने माधुरी को पुरा छुट दे दिया और इसी लिये माधुरी रामपाल की इज़त करती है अपने आप को किस्मत वाली समझती है
माधुरी को छुट मिली थी लेकिन उसके बावजूद माधुरी सिर्फ रामपाल को खाना खेत मे देने जाती जितना दिल करे बातें करती और सीधा घुघट डाले किसी से बात किये बिना घर लौट आती
रामपाल भी माधुरी को बहु बेटी के रूप पे पाके किस्मत वाला मानता है दोनों ससुर बहु मे खुद जमती है
मनोज पैसे कमाने के लिये सेहर मे रहता है अच्छी जॉब है 6 महीने मे घर आता रहता है

रामपाल कुदाल लिये अपने खेत चलते हुवे आता है जो घर से 15 मिनट की दूरी पे था रामपाल एक नजर देखो पे मारता है फिर जोर चिल्लाता है तो खेत मे से कई तोते उड़ते हुवे दिखाई देते है

रामपाल अपने मचान के पास जाता है
खेत के बीच एक उठा मचान रामपाल ने बना के रखा था ऊपर छत भी थी कियुंकी रामपाल का यही ठिकाना था जायदा तर रामपाल इसी मचान पे अपना समय गुजारता है
खेत मे फसल हो या ना हो
रामपाल कंधे से गमछा लेके सर पे अच्छे से बाँध लेता है फिर खेत के डनेर को देखते जाता है जहा डनेर टूटी होती रामपाल कुदाल से मिट्टी कट सही कर देता पूरी खेत घूमने डनेर सही करने के बाद रामपाल मचान के पास आता है नीचे एक बरे बब्बे मे पानी था पहले मुह हाथ धोता है फिर मचान के ऊपर बैठ पुरे खेत को उपर से नीचे तक देखने लगता है
कुछ देर बाद लेत के आराम करके लगता है और रामपाल अपने मन मे - 2 साल हो गये शादी के अभी तक तो नन्हा मेहमान आ जाना चाहिये था सुने घर मे बच्चे की किलकारी गुज जानी चाहिये थी चलो देर सवेर ही अभी तक मुझे खुशखबरी मिल जानी चाहिये थी वो भी नही मिला बेटा बहु अभी बच्चे जान बूझ के नही कर रहे या कुछ और वजह है हु हो सकता है देर स्वेर् कियुंकी कभी कभी बच्चे होने मे कुछ साल निकल जाते है
रामपाल चाहता था घर मे किलकारी गुजे सुना घर बच्चे के चहल पहल से भर जाये रामपाल दादा बनाना चाहता था अपने पोते को गोद मे खिलाना चाहता था
रामपाल अपने बगल देख बिस्तर पे हाथ रख - मेरा पोता पोती जब होगे वो बरे होगे तो मेरे साथ आयेगे हम दादा पोता पोती इस मचान पे खुब मस्ती करेगे लेकिन पता नही ये सपना कब सच होगा
वही घर पे कमरे मे लेती माधुरी दुखी मन से - कियु मे मा नही बन पा रही कियु 2 साल शादी के हो गये अभी तक तो मुझे पेग्नेंट हो जाना चाहिये था मुझे फिल होता है पापा जी को देख वो चाहते है जल्दी से घर मे बेबी आये मे भी चाहती हु पापा जी को एक प्यारी पोती या पोता दु ताकि पापा जी अपने पोते पोती के साथ खेल सके मे भी मा बनने का सुख पाना चाहती हु
माधुरी सोचते सोचते सो जाती है

माधुरी पीठ के बल जिस तरह लेती सो रही थी उफ बहोत गजब कयामत लग रही थी दोनों चुचे के उभार ब्लाउस मे साफ दिख रहे थे चिकनी कमर पेट गहरी ढोरी जिसे देख किसी का भी मन करेगा माधुरी के गहरी ढोरी मे उंगली करने चूमने चाटने का
ससुर बहु एक जैसा सोच रहे थे साफ था दोनों एक दूसरे को अच्छे से समझते थे
दोपहर 1 बजे
माधुरी सोके उठ कर रेडी होके खाना लेके घुघट् डालके सीधा खेत की तरफ निकल परती है
सुरु मे सब बहोत बातें करते माधुरी रामपाल को लेके लेकिन रामपाल माधुरी को कोई फरक नही परा अब कोई कुछ नही बोलता
रामपाल भी एक नींद लेके मुह हाथ धोके बैठा रास्ते की तरफ देखते हुवे - बहु खाना लेके आते ही होगी
तभी रामपाल को दूर माधुरी खाना लेके आते दिखाई दे जाती है
कृपया धयान दे
दोस्तो मेने तीन स्टोरी सुरु कर दी आप लोग सोच रहे होगे मे पागल तो नही हो गया पर ऐसा नही है मे पहले फ्री था अब नही हु
तीन स्टोरी मेने इस किये सुरु की ताकि देख सकु कोन सी स्टोरी लोगो को जयदा पसंद आती है कोन सी स्टोरी जयदा लोग पढ़ते है प्यार देते है मे उसी स्टोरी को आगे लेके जाउंगा एंड तक मे मे ऐसे ही किसी स्टोरी को लेके नही जाने वाला जिसपे जयदा प्यार ना मिले लोगो को पसंद ना आये स्टोरी की कमी थोरि ही है मेरे पास
तो समझ गये होगे तीनो स्टोरी इस लिये सुरु की अब देखुंगा तीनो मे जिस स्टोरी को जयदा लोग पसंद करेगे प्यार मिलेगा उसी पे update आयेगा वही कहानी आगे बढ़ेगी
इस पे दोनों स्टोरी से जयदा प्यार मिला तो इसी को लेके जाउंगा upgate छोटा है जोकी मेने जानबूझ कर रखा नही तो मेरा update बरा रहता है ये टेस्ट मे है इस लिये मिलते है




सुबह का समय था 45 साल का एक अंकल लेकिन देखने मे पुरा हट्टा कट्ठा फिट आदमी कंधे पे कुदाल रखे धोती कुर्ता पहने घर के बाहर खरा खरा था खेत मे काम करते करते अच्छी बॉडी खुद बन गई थी
रामपाल दिल का बहोत अच्छा है बहोत मेहनती भी रामपाल घर से जयदा अपने खेतो मे रहना पसंद करता है जैसे उसके लिये सब कुछ उसका खेत ही हो और ये सच भी है एक किसान के किये उसका खेत ही सब कुछ होता है
रामपाल की बीवी बीमारी से 15 साल पहले ही चल बसी तब से और भी जयदा रामपाल खेतो मे रहने लगा रामपाल को खेतो मे काम करते रहना या वक़्त बिताना जयदा पसंद है कहे तो रामपाल को खेतो मे सुकून सांति मिलती है
रामपाल घर के दरवाजे की तरफ देखते हुवे तेज आवाज मे - बहु मे खेत मे जा रहा हु बता नही कोन कमीने है जो मेरे मक्के तोर ले जाते है मुझे तब तक मक्के पूरी तरह तोरने लायक नही हो जाते मुझे दिन रात रखवाली करनी परेगी
अंदर से एक बहोत ही खूबसूरत कयामत औरत सर पे घुघट डाले बाहर आती है और रामपाल के सामने खरी हो जाती है

ये है रामपाल की बहु नाम है माधुरी 20 की है नाम के जैसे ही माधुरी खूबसूरत उसके हुस्न को देख कोई भी घायल हो जाये देखता रह जाये उपर से नीचे तक भरी हुई है चुचे गांड कमर गोरा बदन सब पर्फेट कोई कमी नही है 18 के होते ही शादी कर दी गई माधुरी का पति मनोज है
रामपाल की एक बेटी है जिसका नाम है संगीता शादी सुधा है
रामपाल मनोज माधुरी छोटा परिवार है संगीता तो अपने ससुराल रहती है बीच मे आती रहती है
माधुरी रामपाल को घुघट के अंदर से देखते हुवे - पापा जी होगे गाव के लरके जो मक्के तोर के पका के खाने के लिये ले जाते होगे
रामपाल माधुरी को देखते हुवे - जनता हु बहु लेकिन उन कमीनो को मेरे ही मक्के दिखते है उपर से जंगली सुगर तोते अलग मक्के को बर्बाद करने मे लगे है
माधुरी हस्ते हुवे - समझ गई पापा जी वैसे भी आपको तो जयदा खेत मे रहना ही पसंद है जाइये मे 1 बजे खेत मे खाना लेके आ जाउंगी
रामपाल माधुरी को देखते हुवे - जाने से पहले पता है ना बहु
माधुरी चारों तरफ देख मुस्कुराते हुवे घुघट हटा के रामपाल को देख हस्ते हुवे - अच्छे से पता है आप मेरा चेहरा देखे बिना घर से बाहर कही नही जाते

रामपाल अपनी बहु माधुरी के फेस चेहरे को देखता गोरा चिठ्ठा फेस होठो पे मुस्कान आखे मे कतीलाना अंदाज़ गुलाबी होठ उफ मानो होठो से रस टपक रहा हो माधुरी जिस मुस्कुराहट कातिल अंदाज़ मे मुस्कुराते हुवे रामपाल को देख रही थी रामपाल कही खो जाता है
माधुरी मुस्कुराते हुवे - कहा खो गये पापा जी
रामपाल मुस्कुराते हुवे - ठीक है बहु बस यही केहना था अच्छा चलता हु
रामपाल जाने लगता है माधुरी रामपाल को बातें देखते हुवे मन मे - पापा जी कितने अच्छे है आपके जैसे ससुर मिलना किस्मत की बात है सासु जी के जाने के बाद से कैसे जी रहे है आप मे फिल कर पाती हु
बता दु रामपाल माधुरी को अपनी बेटी मानता है बहोत प्यार करता है माधुरी रामपाल ससुर बहु के बीच जो रिस्ता है दोस्ताना टाइप का है गाव के जयदा तर घर की बहु ससुर से बात तभी करती है जब जरूरी हो या ससुर भी तभी अपनी बहु से बातें करता है जब जरूरी हो
लेकिन माधुरी रामपाल दोनों बहु ससुर बहोत बातें करते है मस्ती करते है सुरु मे माधुरी जब आई तो माधुरी रामपाल के बीच कम बातें होती लेकिन धीरे धीरे दोनों ससुर बहु खुल के बातें करने लगे मस्ती भी
माधुरी सुरु से ही चंचल मस्ती करने वाली लरकी रही है जब रामपाल ने माधुरी की चंचल रूप को देखा तो रामपाल को अच्छा लगा रामपाल खुद चाहता था माधुरी खुल के जिये बातें करे ना की घर मे बंद रेह कर रह जाये
रामपाल अपनी बीवी को धोके दर्द याद मे जीते आ रहा था लेकिन माधुरी के आने के बाद रामपाल की लाइफ मे बदलाव खुसिया आ गई
जहा रामपाल पहले अकेला अकेला फिल करता था अब रामपाल के पास बहु थी माधुरी जिसके बातें कर रामपाल को भी बहोत अच्छा फिल होता
घर मे अकेली माधुरी को भी रामपाल के साथ मस्ती बातें करने मे अच्छा लगने लगा माधुरी बहोत किस्मत वाली खुद को मानती थी जहा नई नवेली दुल्हन को बाहर निकलना मना था या निकलने नही दिया जाता था वही रामपाल ने माधुरी को पुरा छुट दे दिया और इसी लिये माधुरी रामपाल की इज़त करती है अपने आप को किस्मत वाली समझती है
माधुरी को छुट मिली थी लेकिन उसके बावजूद माधुरी सिर्फ रामपाल को खाना खेत मे देने जाती जितना दिल करे बातें करती और सीधा घुघट डाले किसी से बात किये बिना घर लौट आती
रामपाल भी माधुरी को बहु बेटी के रूप पे पाके किस्मत वाला मानता है दोनों ससुर बहु मे खुद जमती है
मनोज पैसे कमाने के लिये सेहर मे रहता है अच्छी जॉब है 6 महीने मे घर आता रहता है

रामपाल कुदाल लिये अपने खेत चलते हुवे आता है जो घर से 15 मिनट की दूरी पे था रामपाल एक नजर देखो पे मारता है फिर जोर चिल्लाता है तो खेत मे से कई तोते उड़ते हुवे दिखाई देते है

रामपाल अपने मचान के पास जाता है
खेत के बीच एक उठा मचान रामपाल ने बना के रखा था ऊपर छत भी थी कियुंकी रामपाल का यही ठिकाना था जायदा तर रामपाल इसी मचान पे अपना समय गुजारता है
खेत मे फसल हो या ना हो
रामपाल कंधे से गमछा लेके सर पे अच्छे से बाँध लेता है फिर खेत के डनेर को देखते जाता है जहा डनेर टूटी होती रामपाल कुदाल से मिट्टी कट सही कर देता पूरी खेत घूमने डनेर सही करने के बाद रामपाल मचान के पास आता है नीचे एक बरे बब्बे मे पानी था पहले मुह हाथ धोता है फिर मचान के ऊपर बैठ पुरे खेत को उपर से नीचे तक देखने लगता है
कुछ देर बाद लेत के आराम करके लगता है और रामपाल अपने मन मे - 2 साल हो गये शादी के अभी तक तो नन्हा मेहमान आ जाना चाहिये था सुने घर मे बच्चे की किलकारी गुज जानी चाहिये थी चलो देर सवेर ही अभी तक मुझे खुशखबरी मिल जानी चाहिये थी वो भी नही मिला बेटा बहु अभी बच्चे जान बूझ के नही कर रहे या कुछ और वजह है हु हो सकता है देर स्वेर् कियुंकी कभी कभी बच्चे होने मे कुछ साल निकल जाते है
रामपाल चाहता था घर मे किलकारी गुजे सुना घर बच्चे के चहल पहल से भर जाये रामपाल दादा बनाना चाहता था अपने पोते को गोद मे खिलाना चाहता था
रामपाल अपने बगल देख बिस्तर पे हाथ रख - मेरा पोता पोती जब होगे वो बरे होगे तो मेरे साथ आयेगे हम दादा पोता पोती इस मचान पे खुब मस्ती करेगे लेकिन पता नही ये सपना कब सच होगा
वही घर पे कमरे मे लेती माधुरी दुखी मन से - कियु मे मा नही बन पा रही कियु 2 साल शादी के हो गये अभी तक तो मुझे पेग्नेंट हो जाना चाहिये था मुझे फिल होता है पापा जी को देख वो चाहते है जल्दी से घर मे बेबी आये मे भी चाहती हु पापा जी को एक प्यारी पोती या पोता दु ताकि पापा जी अपने पोते पोती के साथ खेल सके मे भी मा बनने का सुख पाना चाहती हु
माधुरी सोचते सोचते सो जाती है

माधुरी पीठ के बल जिस तरह लेती सो रही थी उफ बहोत गजब कयामत लग रही थी दोनों चुचे के उभार ब्लाउस मे साफ दिख रहे थे चिकनी कमर पेट गहरी ढोरी जिसे देख किसी का भी मन करेगा माधुरी के गहरी ढोरी मे उंगली करने चूमने चाटने का
ससुर बहु एक जैसा सोच रहे थे साफ था दोनों एक दूसरे को अच्छे से समझते थे
दोपहर 1 बजे
माधुरी सोके उठ कर रेडी होके खाना लेके घुघट् डालके सीधा खेत की तरफ निकल परती है
सुरु मे सब बहोत बातें करते माधुरी रामपाल को लेके लेकिन रामपाल माधुरी को कोई फरक नही परा अब कोई कुछ नही बोलता
रामपाल भी एक नींद लेके मुह हाथ धोके बैठा रास्ते की तरफ देखते हुवे - बहु खाना लेके आते ही होगी
तभी रामपाल को दूर माधुरी खाना लेके आते दिखाई दे जाती है
कृपया धयान दे
दोस्तो मेने तीन स्टोरी सुरु कर दी आप लोग सोच रहे होगे मे पागल तो नही हो गया पर ऐसा नही है मे पहले फ्री था अब नही हु
तीन स्टोरी मेने इस किये सुरु की ताकि देख सकु कोन सी स्टोरी लोगो को जयदा पसंद आती है कोन सी स्टोरी जयदा लोग पढ़ते है प्यार देते है मे उसी स्टोरी को आगे लेके जाउंगा एंड तक मे मे ऐसे ही किसी स्टोरी को लेके नही जाने वाला जिसपे जयदा प्यार ना मिले लोगो को पसंद ना आये स्टोरी की कमी थोरि ही है मेरे पास
तो समझ गये होगे तीनो स्टोरी इस लिये सुरु की अब देखुंगा तीनो मे जिस स्टोरी को जयदा लोग पसंद करेगे प्यार मिलेगा उसी पे update आयेगा वही कहानी आगे बढ़ेगी
इस पे दोनों स्टोरी से जयदा प्यार मिला तो इसी को लेके जाउंगा upgate छोटा है जोकी मेने जानबूझ कर रखा नही तो मेरा update बरा रहता है ये टेस्ट मे है इस लिये मिलते है
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