प्रिय रोनी भैया
एक अच्छे लेखक होकर भी अपने कहानी का रायता फैला दिया है।
कामुकता को खींचना बहुत अच्छा है लेकिन उसकी रबर बनाना और रबर को भी इतना खींचना की वो टूट जाए ।
एक चरम पर कामुकता का भी अंत होता है।
कामुकता वो अच्छी लगती है जब तक हमारी चूत गीली रहे और लड़के का लण्ङ खड़ा रहे।
बाकी आप समझदार हैं।
शुभेच्छु