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Adultery पदमा-मेरी मम्मी: दामाद की खातिरदारी करने खातिर फैलाया अपना चूत

deo_mukesh

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एक गंभीर लेखक के तौर पर आज ये मेरी कहानी लिखने की तीसरी कोशिश है.
60 फीसदी रियल इवेंट और 40 फीसदी इमेजिनेशन का भरपूर संगम, एक मादक जिसम की मालकिन के कामुक जिंदगीनामे का ये नरेशन है.
जो कोई और नहीं बल्कि मेरी मम्मी पदमा है.
अभी मेरी मम्मी 52 साल की है. भरा हुआ गदराया बदन.
भरे हुए वक्ष/चुचों पर मटर के दानों के साइज़ का गोल नुकीला निप्पल, हलके भूरे रंग का अरोला. गहरी नाभि.


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आज मेरी मम्मी 52 साल की हैं, लेकिन उनका बदन अभी भी गदराया हुआ, भरा-पूरा और किसी भी इंसान जिसके पेट के निचे दो टट्टे और एक लुल्ली लटक रही है, वो मेरी मम्मी को देखकर उत्तेजित हो ही जाता है और उसका लुल्ली तुरंत खड़ा होकर लंड बन जाता है।
  • भरे हुए उन्नत उरोज(स्तन/वक्ष/चूची), जो सांस के साथ ऊपर-नीचे लहराते हैं,
  • और उन पर मटर के दानों जैसे गोल-नुकीले निप्पल्स,
  • हल्के भूरे रंग का अरोला जो उत्तेजना में और गहरा हो जाता है।
  • गहरी नाभि, जो पेट की सपाट चादर में एक गड्ढे की तरह लगती है।
लेकिन 2001 में, जब ये सब हुआ था, तब मम्मी पदमा सिर्फ 27 साल की जवान औरत थीं.
फुल जवानी की चरम सीमा पर, जहां पदमा का हर हिस्सा तना हुआ, मुलायम और कसा हुआ था। मम्मी का बदन गोरा-चिट्टा था, लेकिन वो गर्मी से थोड़ा सा सुनहरा चमकता था, जैसे रोजाना घर के काम और बाजार की धूप ने उसे एक नैचुरल ग्लो दे दिया हो।
कमर पतली लेकिन मजबूत, जहां से ऊपर भरे हुए स्तन शुरू होते थे – बड़े, गोल, भारी लेकिन बिल्कुल सख्त, जैसे कोई भी हाथ लगाए तो उछल पड़ें।

ब्लाउज के नीचे से मम्मी की चुचिया हमेशा ऊपर उठे हुए और उभरे रहते थे, साड़ी का पल्लू सरकने पर cleavage इतनी गहरी कि नजरें अटक जातीं।
निप्पल्स छोटे लेकिन नुकीले, मटर के दाने जितने, जो ठंड में या शरारत में तुरंत खड़े हो जाते – हल्के भूरे अरोला के बीच में वो गुलाबी-भूरे मिले हुए, संवेदनशील इतने कि हल्की सी हवा से भी सिहरन हो जाती।
पेट सपाट, लेकिन थोड़ा मुलायम – बच्चे के बाद भी टाइट, और नाभि इतनी गहरी कि उंगली अंदर डालने पर गर्माहट महसूस होती।
जांघें मोटी, गोरी, कसी हुई – चलते वक्त आपस में रगड़तीं, साड़ी की सिलवटें बनातीं, और जब वो झुककर काम करतीं तो जांघों का वो भराव साफ उभर आता।

गांड सबसे कमाल की – गोल, उभरी हुई, थिरकते हुए चुत्तड़, पीछे से देखकर लगता था कोई घोड़ी अपनी गाड़ मटका रही है और अब उसके ऊपर घोडा अपना लोड़ा लेकर चढ़ जायेगा. साड़ी में वो लहराती थी.

बाहें गोरी, मोटी लेकिन सुडौल, कंधे चौड़े – जब वो बाल बांधतीं तो बाजू की मांसपेशियां हल्की उभर आतीं। चेहरा – बड़ी-बड़ी आंखें, काजल लगी हुई, होंठ गुलाबी, रसीले और मोटे, मुस्कुराने पर गालों पर डिम्पल, और वो माथे पर छोटी सी बिंदी जो उनकी संस्कारी लुक को और गरम बनाती थी।

कुल मिलाकर, मेरी माँ 27 साल की पदमा एक ऐसी औरत थीं जिनकी बॉडी हर मर्द को पागल कर सकती थी – भरी हुई, कसी हुई, मुलायम लेकिन ताकतवर, और अंदर से जल रही हुई। आज जब याद करता हूं, तो लगता है कि उस उम्र में वो रंडी जैसी नहीं, बल्कि एक ऐसी जवान मादा थी जो हर समय नर से मिलन करने के लिए हीट पर ही चढ़ी रहती हो.

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sunoanuj

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बहुत ही शानदार विवरण दिया है ! लगता है कहानी भी उतनी ही शानदार होगी .

प्रतीक्षा है अगले भाग की !
 
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deo_mukesh

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बहुत ही शानदार विवरण दिया है ! लगता है कहानी भी उतनी ही शानदार होगी .

प्रतीक्षा है अगले भाग की !
कोशिश करूँगा की लिख सकूँ, मैं पहले ही साफ़ साफ़ बता देता हूँ की मुझमे कहानी लिखने या उसको सीरिज की तरह उपन्यास की तरह लिखने का हुनर नहीं है, पिछले ६ साल से कोशिश कर रहा हूँ, सेकड़ो स्तोइएस का ऐसा ही प्लाट मेरे डॉक् एडिटर में है, सो मेरी सबसे रिक्वेस्ट रहती है की जिन्हें भी मेरी कहानी का हिस्सा या प्लाट अच्छा लगता है वो कहानी को आगे बढ़ा सकते हैं.
 
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deo_mukesh

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अपडेट- 2
(नोट- जिस भी किसी कहानी लिखने के अनुभवी लेखक/लेखिका को मेरी ये कहानी या कहानी का प्लाट पसंद आये वो इस कहानी को नए सिरे से लिख या आगे बढ़ा सकते हैं मुझे बहुत ख़ुशी होगी. क्योंकि मुझे लिखना नहीं आता तो मैं ज्यादा सही से ये कहानी नहीं लिख पाउँगा)
मम्मी के मादक जिसम का Google Mapping !
दोस्तों, जैसा की हर जवान चुतधारी या लंडधारी जानता है की एक लंड जवान होते ही किसी भी "गदरायी माल" को आँखों से स्कैन करने का हुनर डवलप कर लेता है.
मम्मी के जिस्म में ऊपर माथे से लेकर पैर के अगुठो तक जवानी की गरमी का गरम भाप आता आस-पास के लोगो के अन्दर घुसकर पसीना और जहाँ जहाँ से जो रस निक सकता है वो रस निकाल देता था.
एक होंठ,
जो लगे देखने से की अब पिघल कर टपक जायेगा रस से भरा हुआ ये जूस क्या आप निचे जमीं आर गिर जाने दोगे ?
नहीं न ?
या गिर ही जाने दोगे तो कोई बात नहीं, मगर मैं इस बात का गवाह हूँ मेरी मम्मी को उससे उम्र में 30-30 साल बड़े बुड्धों को मैंने मम्मी का होंठ चूसते देखा है, तो जाहिर सी बात है आप कोई नपुंसक या कट्टर वाले ब्रह्मचारी ही होंगे!
क्योंकि ब्रह्मचारी तो विश्वामित्र भी बनने चले थे, मगर क्या हुआ ?
मेनका जैसी स्वर्ग की वेश्या (आज के समय के हिसाब से हाई प्रोफाइल रंडी 😜) को देखकर जब बाबा विश्वामित्र अपने lund को कण्ट्रोल ना कर सके तो फिर आप तो क्षणभंगुर मनुष्य मात्र हैं !
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तस्वीर: महीने में एक बार हफ्ते भर के लिए आश्रम जाकर बाबा "बापू जी" की सेवा करती मेरी मम्मी पदमा रति 28 से 30 की उमर में. गरम और कच्ची कली दोनों उमर का अद्भुत समागम
तो मम्मी के होंठ मोटे, गुलाबी-लाल मिले हुए थे – न ऊपर वाले पतले, न नीचे वाले पतले, बल्कि दोनों बराबर मोटे,
-जैसे की संतरे की दो रसीली फांके आपस में सटी हुई, जरा सी रगड़ लगी नहीं उन फांको को की उनसे रस का फव्वारा फुट पड़े.
-जैसे किसी ने ब्रश से हल्का सा गुलाबी रंग पोता हो।

जब वो मुस्कुरातीं तो होंठ थोड़े फैल जाते, और बीच में वो छोटी सी दरार दिखती – जहां से जीभ की नोक कभी-कभी झांक जाती। और मम्मी के जिस्म में नाभि के निचे की खाई में अपना चप्पू चलाने वाले होंठो के उस दरार में कभी अपनी जीभ घुसाकर मम्मी के शहद का पान करते तो कभी उन दरारों में अपना "चप्पू" भी चला लेते थे.

27 साल की उम्र में वो होंठ इतने मुलायम लगते थे कि बस छूने से ही सिहरन हो जाए। आज सोचता हूं तो लगता है, कितने लकी रहे होंगे वो लोग जिन्वोहोंने मेरी माँ के इन होंठो को ना सिर्फ चूमा, बल्कि चूसने, काटने और उनमें लंड घुसाने तक का मौका पाकर यहाँ इसी धरती पर जन्नत पा लिया. जब वो बात करतीं या चाय पीतीं तो होंठ हिलते, और वो गीले-गीले चमकते – जैसे कोई चुपके से उन्हें चाटकर गया हो। कोई मनचला जब मम्मी से डबल मीनिंग मजाक करता या उनको छेड़ता था इसपर मम्मी डरने, परेशां होने घबराने के बजाय शरमातीं, तो होंठ काट लेतीं – वो छोटी सी हरकत ही काफी थी किसी मर्द को पागल करने और बिना अपने लंड को हाथ लगाये, बिना किसी को चोदे- झड़ जाने के लिए
 
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