Final part
बेडरूम में घुस कर मैंने फिर जल्दी से बंद किया दरवाजा
बोला अपनी बुलबुल को जल्दी से बाहों में मेरी आजा
फिर भरके अपनी बाँहों में हम एक दूजे को लगे चूमने ऐसे
जन्मो जन्मो से दो बिछड़े प्रेमी हुए फिरआज मिले हो जैसे

चूम रहा था मैं अंगअंग अपनी रेखा का गोद में उसे उठा के
लगा खोलने कपडे रेखा के धीरेसे बिस्तर पर उसे लिटा के
रेखा ने बड़े सलीके से अपनी झांटो की थी करी सफाई
इक चुचि पे मेरा नाम लिखा था जो मुझको दिया दिखाई

गोल गोल क्या चूचे उसकेऔर ऊपर से उनका मस्त उभार
पहले मसला फिर मुंह में भरकर चुची लगा मैं करने प्यार
पकड़ के रेखा के मोटे चूचो को मैंने पहले आपस में जोड़ा
उन चुचो की गहराई में फिर मैंने अपना रख दिया लौड़ा

नरम नरम से चूचो का मेरे लन पर स्पर्श था कितना प्यारा
बीच बीच में चाट रही थी रेखा पकड़ लन का मेरे सुपाड़ा
धीरे से वो बोली कान में मेरे तुझसे कहना थी एक बात
तोहफे में देने वाली हूं तुझको अपनी गांड आज की रात

कई दिनों से चूत है प्यासी तू पहले इसकी प्यास बुझा दे
फिर चाहे सुबह तक चोद चोद के तू ये मेरी गांड सुजा दे
उत्तार के मेरी चड्डी उसने झट से मेरा पकड़ लिया हथियार
लाल सुर्ख होठों से चाट के मेरे लन का करने लगी श्रृंगार

पंद्रह मिनट रेखा ने लन और टट्टो की अच्छे से करी चुसाई
मेरे लंबे लन पर रेखा ने बड़े प्यार से अपनी जीभ चलाई
कामरस से भीगी पैंटी मैंने टांगो से निकल दी बड़े करीने से
खुद को रोक ना पाया मैं टपकती चूत के रस को पीने से

मेरे सर को पकड़ के रेखा अपनी फुद्दी पर लगी दबाने
बड़े मजे से चुस्वाती फुद्दी मेरे बालो में उंगली लगी घुमाने
अंदर तक चाटके आज फुद्दी मेरी पी जा इसका रस सारा
बिना लिये अब तेरा मुसल लंड इसका होता नहीं गुजारा

भूल चुकी थी तन के सुख को और मार लिया था मन मेरा
वापस मिल गयी सारी खुशियाँ लिया है जब से लन तेरा
मुझे पता जब गरम हो लोहा मा रना चाहिए तभी हथौड़ा
बैठ के जांघों के बीच रेखा की चूत पर रख दिया लौड़ा

पहले रगड़ा हल्के से फिर जोर का धक्का एक लगाया
चुत को चीरता हुआ अपना लौड़ा जड़ तक मैंने पहुंचाया
शायद मेरे पहले धक्के में ही रेखा को तारे दिए दिखायी
हल्की चीख जो मारी थी उसने दीपक को भी दी सुनाई

सिसक के बोली रेखा हाय तेरा कितना तगड़ा है औज़ार
जाकर अंदर सीधा मेरी बच्चेदानी पे ये चोट रहा है मार
घुसेड़ चूत में अपना लौड़ा मैं जोर से धक्के लगा लगाने
फक मी बेबी फक मी हार्ड नीचे से रेखा भी लगी करहाने

चोट माररहा था लौड़ा फेला चूत की अंदरुनी दिवारो को
गांड ख़ूब उछल रही थी रेखा चादर के पकड़ किनारों को
कभी चोदा बना कर घोड़ी और दीवार से कभी सटा के
मम्मे खूब दबाये उसके जब चोदा लन पर उसे बिठा के

ताबाड़ तोड़ चुदाई से एसी कमरे मैं भी लगा पसीना बहने
मेरी सुखी चूतमें कर रस की बारिश रेखा लगी अब कहने
एक आखिरी लगा धक्का मैंने अपने टट्टे कर दिये खाली
पूरा सुख मिला था रेखा को कहती थी चेहरे की लाली
थोड़ी देर लगी हमदोनों को अपनी सांसों पर काबू पाने में
भारी भरकम गांड अपनी जान की अब थी मेरे निशाने पे
रेखा समझ गयी थी बकरे की अम्मा कितना खैर मनायेंगी
चूत तो फाड़ के रख दी पहले अब बारी गांड की आएगी

बना मासूम चेहरा वो बड़े प्यार से मुझसे करने लगी गुहार
धीरे से घुसाना तू मेरी गांड में बड़ा घातक है तेरा हथियार
मैंने भी समझाया रेखा को जानम तुम इतना मत घबराओ
बस बिस्तर पर बन कर चौपाया जांघों को खूब फेलाओ

के वाई जेली की ट्यूब मैंने रेखा की गांड में कर दी खाली
भीगो तेल के शीशी में मैंने एकउंगली गांड में उसकी डाली
चुहंक के बोली इक छोटी उंगली से ही दर्द हुआ है थोड़ा
क्या होगी मेरी गांड की हालत जब जाएगी ये मोटा लौड़ा

तुम अपनी गांड को रखना ढीला बोला उसको समझा के
खुद अपनी राह बना लेगा ये मेरा लौड़ा गांड में तेरी जा के
लंड का टोपा घुसते ही अंदर आंटी ने चीख जोर से मारी
बिना रुका ही मैंने भी लगा दी गांड में दूसरी शॉट करारी

खुल गया गांड का चाला अच्छे से और हो गया लौड़ा पार
आख़िर मैंने दोस्त की मम्मी की गांड भी ली आज मार
धीरे-धीरे खुल गई गांड और रेखा का दर्द हो गया थोड़ा
ढकेल के अपने चुतर पिछे को आंटी लगी थी लेने लौड़ा

थप्पर मार के गांड पर पूछा रेखा कि अब दर्द है तेरा कैसा
पहली बार गांड में लेकर मेरा लौड़ा महसूस हुआ है कैसा
रेखा बोली जब गांड फटी तो दर्द से बुरा हुआ था हाल
पर इसी मिट्ठे दर्द को पाने को तो मैं तड़पी हूं इतने साल
पूरी रात मैंने बारी बारी से रेखा की चूत और गांड बजाई
चूत सूज के बन गई पकौड़ा और रेखा भी देने लगी दुहाई

अब तो दीपक की आंखों के सामने ही डाल कमर में हाथ
अक्सर ले कर घुस जाता बेडरूम में रेखा को अपने साथ
शुरू शुरू थोडा शर्मति थी रेखापर मुझ से कुछ ना कहती
डु नाट डिस्टर्ब को दरवाजे पर उसकी कच्ची लटकी रहती
अगले साल दीपक चला गया करने के लिए उच्च पढ़ाई
रहनेलगा मैं दीपक के घर और रेखा की करता खूब चुदाई