chapter 101
तो दिशा विजय बगीचे मे अंदर कोने मे चटाइ बिछाये लेते थे विजय का हाथ दिशा के दोनों चूचे पे था
दिशा विजय को देख - दबाइये देवर जी
विजय दिशा को देखता है फिर दोनों हाथ हटा के उठ के बैठ जाता है दिशा हैरान होती है और दिशा भी उठ के बैठ जाती h विजय को देखने लगती है
विजय नजरे नीचे किये - कोई फीलिंग नही आ रही ना मेरा दिल करना चाहता है ये गलत है भले ही आपकी मर्ज़ी हो फिर भी जिसपे हक भइया का है उसपे मेरा नही मस्ती बाते खुल के करने तक सही है
विजय दिशा को देख भाभी दोस्त की बीवी हो या भाई की बीवी हो भले मर्ज़ी हो लेकिन सोचना उस इंसान को है क्या वो अपने दोस्त की बीवी अपने भइया की बीवी के साथ करने के बाद अपने दोस्त भाई के सामने कैसे जायेगा
जो सही गलत ना सोच सिर्फ अपने दोस्त भाई की बीवी के साथ कर लेते है वो सच्चा दोस्त भाई हो ही नही सकता
दिशा विजय को देख - आपके भइया आपकी मा दीदी बीवी के साथ करते है उसका क्या
विजय मुस्कुराते हुवे - राजा है मेरे भइया मे उनका दास मा दीदी प्यार करते है उनसे भइया भी रीमा मे सब भैया के चाहने वाले है
दिशा - मेने कई बार देखा आप मुझे घूर के देखते थे देखिये अगर आपके मन मे है कुछ मेरे साथ करने की तो सच अभी कर सकते है मुझे चोद भी सकते है
विजय - बस भाभी बहोत हो गया आपसे ये उमीद नही थी आप तो मेरे पीछे ही पर गई है हा आपसे बाते मस्ती मजाक करके अच्छा लगता है लेकिन मे आपके लिये कभी बुरा नही सोचा ना सोच सकता हु हा मे आपको कई बार घूर के देखता था उसकी वजह ये थी आप बहोत खूबसूरत है बॉडी भी अच्छी है तो मे आपको देख ये सोचता था की रीमा भी किया शादी के आप आपकी जैसी और खूबसूरत बॉडी वाली बन जायेगी
दिशा हैरान होती है शोक भी
दिशा विजय का हाथ पकर - माफ करना देवर जी मे जानती थी आप बुरे नही है लेकिन जब आप मुझे घूर के देखते थे तो मुझे गलत लगा इस लिये मे आपका टेस्ट ले रही थी
दिशा की बात विजय सो शोक कर देती है
विजय - क्या भाभी आप मुझे इतना गिरा
दिशा विजय के गाल पे हाथ रख - माफ कर दीजिये एक और बरी वजह है इस लिये आपका टेस्ट लिया
विजय - एक और वजह वो क्या है
दिशा मिनिता आसा की कहानी बताती है
विजय पुरा शोक हैरान गुस्से से - क्या कहा उन दोनों कमीनो की इतनी हिम्मत की मेरी मा बरी मा पे हाथ डाला मे आज ही दोनों को जान से मार दूंगा
विजय गुस्से से उठने लगता है तो दिशा विजय का हाथ पकर - सांत होके बैठ जाइये आपके भइया ने अच्छे से सजा दे दी है
विजय दिशा की बात सुन बैठ जाता है लेकिन गुस्से मे रहता है
दिशा गहरी सास लेके - आपकी बरी मा मेरी मम्मी जी अपने देवर को बहोत मानती प्यार करती थी मम्मी जी को लगा उनका देवर बहोत अच्छा प्यारा है लेकिन धीरे धीरे चाचा जी की नियत बिगरने लगी गंदी बाते करने लगे फिर भी मम्मी जी मजाक मे ले देती देवर समझ पर एक दिन तो
बस यही जब सचाई मुझे आपके भइया ने बताई और आप मुझे घूर के देखते थे इस लिये आपका टेस्ट लिया माफ करना आपका दिल दुखाया मेने
विजय दिशा के हाथ पकर - कोई बात नही भाभी आप ने जो किया एकदम सही क्या आज के समय मे लोग अंदर से कितने गिरे है पता ही नही चलता
दिशा - आपके भइया किसी घटिया इंसान को अपना दोस्त भाई बनायेगे ही नही और ये मेने देख लिया
विजय - हु बाकी का पता नही लेकिन मे जीत जीत भइया के लिये जान दे सकते है
दिशा इमोसनल होके - हा जानती हु इस लिये मे बेफ़िकर रहती हु कियुंकी आप तीनों है उनके साथ
( दोस्तो मेरी बात पे ध्यान दे प्लेस )
दिशा कियु कर रही थी आपको पता चल गया जाहिर है आसा की कहानी जानने के बाद दिशा विजय को घूर के देखने के बाद दिशा टेस्ट लेती है
जब विजय दिशा की कहानी चल रही थी तो मे एक सस्पेंस बना रहा था मेरी स्टोरी मे कुछ होता है तो उसकी एक वजह होती है
मैन करेक्टर की मा बहन के साथ कोई कुछ करे जायदा तर लोगो को ये पसंद नही आती सेम मेरा भी है इस लिये 5 स्टोरी मे मेने वैसा ही लिखा की जो लोग चाहते है
लेकिन दोस्तो आप सभी को एक बात सझनी होगी हर चीज हमे अपने हिसाब से नही मिल सकती
जरा सोचिये आप के दिमाग मे एक अच्छी स्टोरी आई आपने सोचा स्टोरी बहोत अच्छी है लोगो के बीच लाना चाहिये फिर आप ने पूरे मन जोस से दिल से स्टोरी लिखी लोगो के बीच आये लेकिन 5 chapter बाद ही लोग कॉमेंट करके बोलने लगे, नही ऐसा मत करो ये गलत है ये नही होना चाहिये
अब आप ऐसे कॉमेंट पढ़ने के बाद किया उसी जोस जुनून दिल से आगे स्टोरी लिख पाओगे मेरा जवाब नही
कियुंकी आप ने जो स्टोरी बनाई सोची जैसा आप उतार ही नही पा रहे तो आपको वो मजा आयेगा ही नही
xforum पे कई कई अच्छी स्टोरी आधे पे बंद परी है उसकी वजह ये भी एक है कियुंकी Writer जीस तरह स्टोरी लाना चाहता है लोग लाने नही देते बस अपनी सोचते है Writer की नही
मेरी एक स्टोरी एसी वजह से बंद हो गई
xforum पे कई स्टोरी ऐसी है जिसमे मुझे भी कुछ चीजे बहोत अच्छी नही लगती लेकिन मे सिकायत नही करता जनता हु हर चीजे जो मे जिस तरह चाहता हु मिल नही सकता
कई स्टोरी मे सस्पेंस बना रहता है लेकिन लोग पहले से ही कॉमेंट मे ये गलत हो रहा है मत करो बोलने लग जाते है
जो स्टोरी मेरी बंद हुई उसमे सबसे जयादा सस्पेंस था जो दिख रहा था हो रहा था वैसा था नही लेकिन लोग इंतज़ार नही कर पाये
तब से मेने एक फैसला लिया मुझे जो लिखना है लिखुंगा किसी की नही सुनुंगा
मेरे दोस्तो जो मेरी स्टोरी शुरू से पढ़ते आ रहे है उन्हें पता है मे अपनी स्टोरी मे क्या रखता हु
ये सारी बाते मेने इस लिये बताई की आप Writer को समझ सको सब की अपनी एक वजह होती है स्टोरी लिखने ही जैसा भी लिखे आप उसे रोको मत नही मजे लो जब Writer को मजा ही नही आयेगा तो वो कियु इतने घंटे लगा के स्टोरी लिखेगा
स्टोरी मे कुछ अलग हट के होना भी चाहिये
मानता हु स्टोरी मे कई चीजे कहानी के हिसाब से होनी बहोत जरूरी है लेकिन जो कुछ लोग लिखते है लिखने दो
बाकी मेरी स्टोरी मे वैसा कुछ नही है ना पहले वाली स्टोरी मे था अगर आगे मेने कोई स्टोरी लिखी उसमे ऐसा कुछ लिखना सोचा तो लिख के रहुंगा
( 1 ) बैलगारी एक सफर - incest
( 2 ) तु मेरा हीरो - incest
( 3 ) किस्मत बदल दूंगा - adultury + incest + fantasy
ये तीन स्टोरी मेरे दिमाग मे जो मे इस स्टोरी के एंड होने के बाद लाने वाला हु तो बताओ आप लोग कोन सी स्टोरी उसके बाद लेके आउ जिसपे जायदा कॉमेंट होगे उस स्टोरी को शुरू करुगा
अब कहानी पे आते है
अभय अदिति गारी से जा रहे थे लेकिन अदिति खिरकी से बाहर देख रही थी लेकिन सर्म से चेहरा लाल था कियुंकी जो देखा अपने भाई को लंड सेहलाते वो सीन अदिति के आखो के समाने घूम रहा था
अदिति नजारा देखते हुवे मन मे - उफ भइया भी ना कही भी शुरू हो जाते है कहा फस गई अब तो मुझे कुछ कुछ होने लगा है अजीब बेचैनी अजीब फीलिंग जग रही है
अभय अदिति को एक नजर देखते हुवे मन मे - हद है यार
अभय गारी फिर साइड मे रोकता है दोनों तरफ खेत ही थे यानी खेतो के बीच रास्ता था
अदिति हैरान अभय को देख - भइया गारी कियु रोकी
अभय अदिति को देख अपने होठ पे हाथ रख मुस्कुराते हुवे -प्यास लगी है
अदिति अभय की बात समझ सर्म से लाल होके - तो पानी पिलो ना
अदिति पोटल अभय को देती है अदिति मजे ली रही थी अभय का
अभय अदिति को देख - अच्छा जी सब जानती हो मुझे किसकी प्यार लगी है चलो आँ जाओ मेरी गुरिया
अदिति के होठ भी सुखाने लगते है अदिति मन मे - उफ भइया के कहते ही मुझे भी प्यार लग गई
अदिति सर्माते हुवे सीट से उठ अभय के पास जाती है अभय अदिति को पकर अपनी गोद मे बैठा लेता है अदिति एकदम से सिहर जाती है सर्म से लाल होके अभय को देखने लगती है अभय एक हाथ अदिति के कमर पे रखता है तो अदिति कस के होठ दबा लेती है अभय एक हाथ अदिति के चेहरे पे रखता है

अभय अदिति की आखो मे देख - गुरिया प्यार लगी है होठ का रस पीना है अपनी गुरिया के रसीले होठ का
अदिति सर्माते हुवे अभय को देख - भाई मेने कभी भी रोका है
अभय धीरे से कान मे - नही लेकिन अभी तुम मेरी गोद मे बैठी हो तो बहोत कुछ फिल हो रहा है
अभय की बात सुन समझ अदिति सिहर जाती है तेज सासे लेने लगती है अदिति सर्म से धीरे से - आप बहोत गंदे है
अभय मुस्कुराते हुवे - बेसरम भी

अभय अदिति के होठ पे टूट परता है अदिति के अपनी गुरिया के होठ को चूस चूस के रस पीने लगता है अदिति अपने भाई को गोद मे बैठी किस करते हुवे मन मे - फिल उफ भइया फिल तो मुझे भी bah कुछ हो रहा है आह अलग ही जोस आग लग जाती है अब तो मेरे जिस्म मे
2 mina बाद
अदिति जल्दी से अपनी सीट पे जाते बैठ खिरकी से बाहर देखते हुवे सर्म से मन मे - अजीब था अब तो किस करते वक़्त मे होस खोने लगी हु अजीब नसा चढ़ जाता है अजीब चाहत फिल होती है
अभय अदिति को देखता है फिर मुस्कुराते गारी चालू कर निकल परता है 10 मिनट बाद
अभय अपना एक हाथ अदिति के दोनों गोरे चिकने जांघों के बीच रख सेहलाने लगता है लगता है अभय का हाथ अदिति के मोटे जांघों के बीच उपर नीचे हो रहा था अदिति एकदम से काप् जाती है जल्दी से अभय को देखती है लेकिन अभय रास्ते पे आगे देख रहा था

अदिति अपने जांघों के बीच बुर के पास अपने भाई का हाथ चलता देखती है तो सिहर जाती है तेज सासे लेने लगती है अदिति भी खिरकी से बाहर देखने लगती है लेकिन होठ दतों से दबा के अपनी सिसकिया रोकने लगती है अभय जांघों को सेहलते हुवे मन मे - उफ गुरिया के मोटे जांघे कितने सॉफ्ट चिकने है सेहलाने मे मजा आ रहा है लेकिन अंदर बुर की गर्मी मुझे साफ फिल हो रही है लगता है बहोत गर्मी है
अदिति मुठी कसे बाहर देखते होठ दबाये मन मे - नही नही आह मुश्किल हो रहा है सेहना मुझे कुछ हो रहा है मेरी बुर मे कुछ हो रहा है आह भइया मत करो ना उफ रुक जाइये पर मुझे बहोत अच्छा भी लग रहा है , अदिति की सिसकिया फुट परती है अदिति जोर से आह उफ सिसकिया करते सिसकिया लेती है

अभय एक नजर अदिति को देखता है फिर जांघों से हाथ हटा के अदिति के एक हाथ पे रख देता है अदिति अभय को बिना देखे अपने भाई के उंगली मे उंगली मिला के पकर लेती है अभय अदिति को देखता है जो बाहर देख रही थी लेकिन अभय समझ जाता है रास्ता साफ ही आगे बढ़ा जा सकता है
अभय - गुरिया तुम्हारे पैर दर्द कर रहे होगे मेरे जांघों के ऊपर अपने दोनों पैर रख के सीधा कर लो इतना लम्बा सफर पहली बार कर रही हो तो पैर बैठे बैठे दर्द कर रहे होगे

अदिति हैरान अभय को देखती है अभय अदिति को देख मुस्कुरा देता है अदिति लाल हो जाती है फिर सर्माते अपने दोनों चिकने गोरे पैर अभय के जांघों के ऊपर रख देती है और अपनी जांघों के बीच अपना एक हाथ रख लेती है कियुंकी मिनी स्कर्ट थी सब दिख जाता
अभय अदिति के गोरे सॉफ्ट चिकने पैर जांघों को देख मन मे - कितने गोरे सॉफ्ट चिकने पैर h और जांघों का के कहना ही क्या उफ अंदर सब कैसा होगा उफ मेरी गुरिया
अदिति अभय की तरफ देख नही रही थी आगे देख रही थी कियुंकी अदिति को सर्म आ रही थी अभय से नजरे मिलाने मे

अभय फिर एकदम से अदिति के मोटे गोरे जांघों के हाथ रख सेहलाने लगता है अपनी गुरिया के मस्त गोरे चिकने जांघों का मजा लेने लगता है लेकिन अभय की इस हरकत से अदिति फिर काप् सिहर जाती है जोर जोर से सासे लेने लगती है अदिति का दिल जोर से धक धक करने लगता है अपने भाई को इस तरह अपने जांघों को सेहलाते देख अदिति होठ को फिर दबा लेती है
अदिति मन मे - आह उफ भइया मेरी जांघों को सेहला रहे है उनका हाथ मेरी बुर के पास है उफ ये एहसास कैसा है मुझे बहोत अच्छा लग रहा है भइया को इस तरह मेरे जांघों को सेहलाने से मेरी बुर गीली होने लगी है
अभय मन मे - उफ बहोत मजा आ रहा है मेरी गुरिया की जांघों को सेहलने मे मस्त सॉफ्ट सॉफ्ट है लेकिन अब इतना ही काफी है
अभय हाथ हटा लेता है लेकिन अदिति जोर जोर से सासे लिये जा रही थी अदिति मन मे - आह अच्छा हुआ भइया रुक गये उफ
साम 4 बजे
आखिर अभय काजल के घर पहुँच जाता है गारी की आवाज सुन मिनिता ममता डोरते हुवे बाहर आती है तो अभय अदिति को देख बहोत खुश हो जाती है दोनों का दिल तो कर रहा था जल्दी से जाके अभय के गले लगने का लेकिन अदिति के होने से शर्मा रहे थे
अदिति भी समझ जाती है और जल्दी से मिनिता ममता के पैर छूके - आउंटी भाभी कैसी है आप दोनों
काजल अदिति को गले लगा के - उफ मेरी बच्ची तुम आई मुझे बहोत खुशी हु
ममता अदिति को गले लगा के - ननद जी आप आई मे भी बहोत खुश हु आप तो बहोत खूबसूरत है
अदिति सर्म के - आप भी , अदिति अंदर जाते हुवे , पता है मुझे जाके गले लग जाइये अपने बाबू से मे बीच मे नही आयुगी
काजल ममता सर्म से लाल हो जाते है अदिति के जाते ही दोनों एकदम से अभय के गले लग जाते है अभय भी दोनों को बाहों मे कस लेता है
ममता - आपको बहोत मिस क्या
काजल - मेने भी
अभय - मेने भी
अभय दोनों को एक एक करके किस करता है फिर सब अंदर जाते है आगन् मे रूमा बैठी थी अदिति भी थी
रूमा अभय को देख शर्मा जाती है लेकिन बहोत खुश भी होती है
अभय रूमा के पास जाके गले लग - दीदी कैसी है आप
रूमा अभय को बाहों के लिये - मे अच्छी हु तु हि दीदी को याद नही करता
अभय खटिये मे बैठ - बहोत याद करता हु दीदी देखो आ गया
रूमा - हा हा देख रही हु
काजल ममता भी बैठ जाते है
काजल - दीदी बाकी लोग कैसे है
अभय - सब अच्छे है फिट है
ममता - देवरानी जी का 4 महिना चल रहा है ना
अभय - जी अपने सही कहा भाभी
ममता अदिति को देख - इस बार गुरिया को कैसे लेके आ गये हु
अदिति मुस्कुराते हुवे - भाई का इरादा तो मुझे लाने का बिल्कुल नही था, अदिति अभय को देख मुस्कुराते हुवे , सही कहा ना
अभय खसाते हुवे - ऐसा नही है गुरिया
रूमा ममता काजल सब समझ रहे थे
बहोत सारी बाते होती है अभय आने की असली वजह भी सब को बता देता है
रात 9 खाना खाने के समय
आगन् मे सभी बैठे हुवे थे गगन बिनोद भी थे
गगन अभय को देख - तेरी बुआ तेरे आने से जितनी खुश होती है उतनी तो मेरे घर आने से भी नही होती बेटा अभय
काजल गगन को देख मुह बना के - शादी के बाद से ही एक चेहरा देखते आ रही हु तो मे वही सरा चेहरा देख खुश कियु हु
काजल की बात सुन सब जोर जोर से हसने लगते है
गगन - मेरी तो इज़त ही नही है
बिनोद अभय को देख - तेरी भाभी भी तुझे बहोत याद करती थी अब आया है तो रहेगा ना कुछ दिन
अभय - जी भैया कुछ दिन रहने वाला हु
गगन अदिति को देख - अदिति बेटा तुम तो बहोत खूबसूरत हो अपने भइया की की तरह
अदिति सर्म से - जी
काजल - कियु नही होगी मेरी भाभी के बच्चे है
गगन - समझ गया मेरी मा मेरा तो बोलना ही बेकर है
काजल - तो बोलो ही मत
फिर सब हसने लगते है
खाना पीना होने के बाद अभय का बिस्तर पीछे ही लगता है अदिति भी अभय के साथ लेती हुई थी
अभय अदिति के ऊपर आके कान मे धीरे से - जानती हो तुम आज रात तेरा भइया बुआ भाभी की लेने वाला है तो तुम रूमा दीदी के साथ सो जाना
अदिति खुले शब्द सुन सर्म से -जी भइया जानती हु
अभय धीरे से - देखना है तो देख सकती हो
अदिति सर्म से - छी गंदे भइया मुझे नही देखना
अभय - हु थोरा प्यार कर लू
अदिति धीरे से सर्म से - हु कर लीजिये
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अभय हा सुनते ही अदिति के नेक यानी गर्दन पे किस करने लगता है अदिति फुट परती है सिसकिया लेने लगती है अदिति - आह उफ भैया
अभय गर्दन पे चूमते हुवे - कैसा लग रहा है गुरिया बोलो ना
अदिति मदहोसी मे सिसकिया लेते हुवे - अच्छा लग रहा है आह भाई

अभय अदिति के होठ मुह मे लेके चूसने लगता है अदिति भी पूरे जोस मदहोसी मे किस करने लगती है किस करते हुवे अदिति मन मे - आह मुझे भी अब इस सब मे अजीब सा मजा आने लगता है

अभय जोस मे किस करते हुवे अदिति के बुर पे लंड दबाने लगता है तो अदिति बहोत जायदा शोक होती है काप् जाती है
अदिति - आह भैया रुक जाइये उफ मा मर गई भैया रुक जाइये प्लेस
अभय एकदम से होस मे आते हुवे अदिति को देख - माफ करना गुरिया
अभय अदिति के ऊपर से हट के दुखी बैठ जाता है अदिति उठ के बैठ अभय को देखती है फिर धीरे से कान मे - उदास मत होइये मेरे प्यारे भैया
अदिति अभय के होठ पे किस कर अरमते हुवे - मजे कीजिये मे चलती हु
अदिति आगन् मे खरी अपनी बुर पे हाथ रख - आह मेरी बुर क्या हो रहा है उफ समझ नही आता
वही अभय समझ गया था रास्ते मे अभी तक जो हुआ उसके बाद
अभय मन मे मुस्कुराते हुवे - यानी मेरी गुरिया चाहती है मे प्यार करू
अभय अपनी मा बाकी सब से थोरि देर बात करता है तो वही
काजल नंगी खरी नाइटी लिये हुवे थी गगन काजल का देख - उफ मेरी जान इस उमर मे भी तुम गजब की लगती हो
काजल नाइटी पहनते हुवे गगन को देख - क्या फायेदा आप से कुछ होता नही
गगन मुस्कुराते हुवे - मुझसे नही होता अभय बेटे से तो होता है ना
काजल मुस्कुराते हुवे - अभय बेटा एक नही कई कई औरत को एक साथ संभल सकता है समझ गये
गगन मुस्कुराते हुवे - अच्छा बहोत बरा है क्या
काजल मुस्कुराते हुवे - बहोत जायदा बरा मोटा है और घंटों तक करता है मेने बताया तो था अच्छे से
गगन - हु बहु भी हा
काजल - हा तो बहु मे आज दोनों को साथ मे लेगा मेरा बाबू
गगन - वाह अभय बेटा की तो निकल परी है पता नही कहा से किस्मत लिखवा के लेके आया है
काजल - सो जाइये मे चली
गगन मुस्कुराते हुवे - संभल के फरवा मत लेना
काजल मुस्कुराते हुवे - फार देगा तो क्या हो गया मे खुशी खुशी फरवा लुगी
बिनोद कमरा
बिनोद ममता को देख - तो तेरा बाबू आ गया पूरी रात चोदेगा
ममता सर्म से - आह आपने सही कहा आज तो पूरी रात मम्मी जी मेरी लेगे
ममता नाइटी पहन - अच्छा चलती हु
बिनोद - ठीक है जाओ मजे करो अपने बाबू के साथ
जो सोचा सही सोचा गगन बिनोद को पता चल चुका है सब कुछ लेकिन कब कैसे क्या हुआ उस के बाद अगले update के जानेंगे
अभय लेता था तभी काजल ममता आती है और अभय के दोनों तरफ लेत जाती है
अभय मुस्कुराते हुवे - आज तो पूरी रात बुर लूंगा फार दूंगा
ममता काजल जोस मे - फार् दो ना फिर हम रेडी है
बस फिर जल्दी से तीनों नंगे हो जाते है अभय भी पूरे जोस मे था ममता काजल भी महीने हो गये थे
अभय ममता काजल के पूरे बॉडी को चूमने लगता है किस करते लगता है सिसकिया की आवाज शुरू हो जाती है सास बहु की
अभय किस करता है दोनों के बुर का लंड पिता है और काजल ममता लंड का स्वाद लेते है
अभय फिर काजल को लेता के बिस्तर किनारे खरा होके बुर पे लंड घुसा के चुदाई करने लगता है साथ मे बगल मे लेती ममता की बुर के उंगली करने लगता है काजल दर्द मे मजे आह उफ करने लगती है तो वही बुर मे देवर का उंगली लेके ममता भी आह उफ करने लगती है

अभय खरे खरे जोर जोर से धक्के मार रहा था ममता एक टाँगे अभय के सीने पे रखी थी और काजल अपनी एक टाँगे उठाये ममता के पैर पे रखी हुई थी एक महीने की तरप दोनों सास बहु पूरी तरह टाँगे फैलाये नंगी लेती मिटा रही थी
काजल दर्द मजे मे - आह उफ मजा आ रहा है अभय बेटा उफ बहोत तरपी है मेरी बुर आह आज मिटा दे तरप मेरी बुर की निकाल दे पानी
अभय ममता की बुर मे उंगली करते धक्का मारते हुवे - निकाल दूंगा बुआ मेरी जान पूरी रात बाकी h
ममता मजे से टाँगे उठाये बुर मे उंगली लेते हुवे - आह देवर जी मेरी बुर मे भी डालिये बहोत तरप रही है
अभय ममता को देख - बस भाभी हो गया
काजल - आह उफ जोर से आने वाला है मा निकल गया बुर से पानी

अभय काजल के बुर से गिला लंड लेके ममता के ऊपर आके बुर के छेद पे रख एक धक्के मे घुसा देता है ममता दर्द मे - मर गई मम्मी जी
काजल बिस्तर पे लेती ममता के चूचे दबाते हुवे ममता को देख - उफ बहु तरप रही थी ना तेरी बुर ले घुस गया मोटा लम्बा मजे ले
ममता काजल को देख - आह मम्मी जी उफ मजे तो लुंगी ही आपकी बुर से तो पानी निकल गया मेरा बाकी है आह लेकिन आह मेरा भी आने वाला है देवर जी उफ मजा आ रहा है
चुदाई चलती रहती है आह उफ मा फट फच् आवाजे गुजति रहती है
रूमा अभय से बात करना चाहती थी लेकिन मोक्का नही मिला अदिति रूमा बाते करते सो जाते है
रात 1 बजे अदिति को पिसाब लगता है तो अदिति उठ के आगन् मे आती है लेकिन अदिति को धीरे से आह उफ की आवाज पीछे के कमरे मे आती सुनाई देती है
अदिति समझ जाती है चुदाई अभी भी चल रही है तो अदिति को अजीब बेचैनी होने लगती है
अदिति पिसाब करने जाने लगती है लेकिन पैर रुक जाते है दिल दिमाग जाके देखना चाहता था कैसे क्या हो रहा है
आखिर अदिति धीरे से एक जगह खरी दरवाजे के पास अंदर झाक के देखती है अदिति को अभय दिखाई देता है तो नँगा काजल के ऊपर लेता जोर जोर धक्के मार रहा था अभय की गांड उपर नीचे हो रही थी तो वही नीचे काजल टाँगे उठाये फैलाये लंड लेते हुवे आह उफ कर रही थी ममता बगल मे लेती तेज सासे ले रही थी
लेकिन अदिति को देखने जैसा मैन चीज दिखाई नही देता बस हल्का सा काजल के चूचे हिलते दिखाई देते है लेकिन इतना ही काफी था अदिति के लिये अदिति बहोत गर्म हो जाती है टांगों के बीच बालों से ढकी अदिति की बुर गीली होने लगती है
अदिति का हाथ कब बुर पे चला जाता है अदिति को पता भी नही चलता अदिति बुर सेहलने मसलने लगती है और अंदर देखती रहती है लेकिन इतने मे अदिति को मजा नही आ रहा था तो अदिति पैंट के अंदर पैंटी के अंदर हाथ दाल नंगे अपनी बुर पे रखती है फिर बीच की उंगली से बुर के फाके के बीच अंदर दाल उपर नीचे करने लगती है अदिति के होठ दातो से दबे हुवे थे
तभी अभय की नजर अदिति पे जाती है तो देखता है उसकी गुरिया अंदर हाथ दाल बुर मे उंगली कर रही है तो अभय का लंड और टाइट होके फुल जाता है धक्के और तेज हो जाते है
अभय नजरे नीचे कर लेता है ताकि अदिति को पता ना चले उसने उसे देख लिया है
अभय चुदाई करते हुवे मन मे - माफ करना गुरिया तुम्हारी बुर से पानी मे ही निकालूँगा तुम नही निकाल सकती
अभय थोरा तेज आवाज मे ताकि अदिति सुन सके - उफ पिसाब करने जाना है
इतना ही कहता है की अदिति होस मे आती है और अंदर से हाथ निकाल तेजी से भगाते हुवे जाके पिसाब करती है फिर कमरे मे बिस्तर पे लेत जाती है
अदिति मन मे - बच गई, अदिति बुर पे हाथ रख , कियु तु मुझे अब इतना परेसान करने लगी है ये मुझे क्या हो रहा है ये बेचैनी चाहत कैसी है वो मेरे भाई है उफ समझ नही आता मे किया करू
सुबह होती है
काजल अभय को देखते हुवे - आज तो मजा ही आ गया लेकिन उफ लेकिन हाय मेरी कमर, काजल बुर हाथ रख, उफ मेरी बुर मे ये जलन
ममता अपनी बुर को देख - आह मम्मी जी मजा तो रात बहोत आया ये तो है लेकिन आह बुर की हालत खराब है
काजल ममता नहाते है रूमा अदिति भी उठ जाते है गगन बिनोद काम पे चले जाते है लेकिन अभय सोता रहता है
9 बज गये थे अदिति जाती है अभय को जगाने अभय पैंट पहन सोया था कियुंकी उसे पता था अदिति आयेगी
अदिति अभय के पास बैठ अभय को देखते हुवे मन मे - कितने आराम से वो रहे है रात भर कांड करने के बाद
तभी एकदम से अभय अदिति को पकर बिस्तर पे लेता के अदिति के ऊपर आके मुस्कुराते हुवे - पकर लिया
अदिति हैरान होके - नही भइया आप ने चीटिंग की है
अभय मुस्कुराते हुवे - नही मेने नही की
अदिति मुह बना के - जगे थे लेकिन नाटक कर रहे थे ये चीटिंग ही है
अभय मुस्कुराते हुवे - अच्छा चलो मान की अब होठ का रस पीने दो

अभय फिर अदिति के होठ चूसने लगता है अदिति अभय को बाहों मे कसते हुवे मन मे - चूस लीजिये भाई जितना पीना है रस मेरे होठो का पी लीजिये अब तो आपको अपने होठो के रस पिलाने की आदत हो गई है
अभय किस करने के बाद अदिति को देख -मजा आ गया
अदिति सर्म से - गंदे भाई
अभय अदिति के ऊपर से नीचे खरा होके - हद है सब मुझे बेसरम ठरकी कहते है अब मेरी गुरिया मुझे गंदा भाई बोलती है
अदिति खरी होके अभय को जिब दिखा के - है आप गंदे भाई
अभय - रुक तुम्हे मे बताता हु
लेकिन अदिति भाग जाती है अभय बाथरूम जाता है नहाता है खाता है बाते करता है एसी मे 10 बज जाते है
अभय एक जगह खरा था और किसी को फोन करता है
अभय - अगर मे आपके पास आ गया अभी तो आप ढोरी पे किस करने देगी
औरत - सपने देखो बेसरम कही का मान ही नही सकती
अभय मुस्कुराते हुवे - आके देखो खुद उसी जगह पे मे खरा हु
औरत - झूठा अगर ऐसा है तो मे आती हु अभी
अभय मुस्कुराते हुवे - याद है ना ढोरी पे किस करने देना होगा
औरत शर्म से - हा हा ठीक है समझ गई
फोन कट
औरत कमरे मे आईने के पास खरी अच्छे से खुद को देखती है रेडी होती है फिर बाहर निकल अभय उसी जगह जहा अभय वो दूर हुवे थे
औरत चलते हुवे मन मे - हद है मे भला कियु उसके लिये रेडी हुई और कियु उसकी सर्ट मानी जबकि मुझे पता है वो उस जगह सच मे खरा होगा लेकिन उसके बाद भी उपर से मे उससे मिलने के लिये इतनी बेचैन कियु हो रही हु मेरे पैर इतने तेज कियु चल रहे है मे इतना खुश कियु हु
बेचारी उलझन मे सोचते सोचते रोड पे उसी जगह पहुँच जाती है सामने देखती है तो अभय खरा मुस्कुराते हुवे उसे ही देख रहा था
आज के लिये इतना ही
