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Incest तू लौट के आजा मेरे लाल

sunoanuj

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( Chapter. 100 - आसा अभय स्पेसल )

कमरे मे पूरी सांति थी लेकिन माहौल कमरा पुरा गर्म था मा बेटे के बीच आज कहानी कुछ कदम आगे जाने वाली थी

एक औरत जिसका पति छोर चला गया जिसने कई बुरे मुश्किल वक़्त देखे जिसके अंदर एक बीमारी थी तीन बार इज़त लूटते लूटते बची तब उस औरत ने अपनी बीमारी पे पुरा काबू पाया लेकिन अपने बेटे के सामने उसका काबू मेहनत काम करना बंद कर देता था

कियु कियुंकी सामने कोई गैर नही उसका बेटा था हा बेटा जिसने उसे जन्म दिया पाला पोसा मा बेटे के बीच अगर एक औरत मर्द का रिस्ता प्यार बनने लगे तो वो चाहत प्यार फीलिंग एहसास जोस बेकरारी बेचैनी तरप् 10 गुना जायदा बढ़ जाती है कियु कियुंकी रिस्ता मा बेटे का होता है यही रिस्ता जोस सभी को कई गुना हाई कर देता है


एक बेटे जनता है सामने उसकी मा है एक मा जानती है सामने उसका बेटा है तो अंदर जो आग एहसास जगती है शब्द मे कहा नही जा सकता रिस्तो मे औरत मर्द वाला प्यार बहोत पॉवर फुल एहसास चाहत को पैदा कर देता है


अभय आसा एक दूसरे की आखो मे देख रहे थे एक खामोसी लेकिन आखे एक दूसरे से कुछ केह रही थी बाते कर रही थी अभय आसा के खूबसूरत चेहरे को देखते हुवे - दुनिया की सब से खूबसूरत औरत हो आप बहोत सेक्सी हॉट
आसा तेज सासे लेती है और अभय को देख - अच्छा

अभय आसा के हाथ पकर् खरा करता है फिर थोरा नीचे झुक अभय दोनों हाथ आसा के पीछे गांड के नीचे मोती जान्धे को पकर एकदम से आसा को अभय पुरा उपर अपनी बाहों मे उठा लेता है अभय का हाथ आसा के गांड के एकदम नीचे था सच तो ये है आसा की मोती बाहर निकली गांड ही अभय के बाहें को पे टिकी हुई थी जिसकी वजह से आसा नीचे नही अपनी जगह बेटे के बाहों मे थी

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अभय अपनी मा को उठाये था आसा हैरान नही हुई आसा को पता था उसका बेटा बहोत मजबूत स्ट्रांग है अभय आसा को देखता है आसा अभय को देखती है दोनों मा बेटे के आखो मे एक चाहत नसा था
आसा अभय को देखते हुवे मदहोसी कामुक् आवाज मे - क्या देख रहा है
अभय आसा को देखते हुवे प्यार से - अपनी खूबसूरत मा को

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अभय आसा को देखते हुवे नीचे धीरे से उतारने लगता है अभय की बाहों अभी भी आसा को कसे हुई थी आसा के आगे की बॉडी चूचे अभय के सीने से रगर खाते आसा नीचे आ रही थी तो पीछे आसा की गांड अभय की हाथो से रगर खाते नीचे आती है अभय ने अपनी मा के चूचे गांड का मजा अच्छे से नीचे अपनी मा को लाते ले लिया था और आसा अच्छे से जानती थी आसा ने भी अपनी गांड पे अभय के दोनों हाथो का दबाव अच्छे से फिल किया था

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आसा को नीचे उतराते ही अभय अपनी मा के गोरे चिकने कमर को पकर अपना लंड आसा के बुर पे सता के आसा को पकरें किस करने लगता है अभय किस करने के साथ अपना लंड का दबाव अपनी मा की बुर पे दे रहा था आसा पूरे मदहोसी मे थी जो हो रहा था जो उसका बेटा कर रहा था आसा करने दे रही थी बल्कि पुरा साथ भी दे रही थी
दोनों मा बेटे एक दूसरे का होठ चूसने मे लग जाते है और कमरे मे गर्मी बढ़ती जाती है .

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अभय अपनी मा से चिपका ही रहता है बीच मे जरा सा भी गेप नही रहने दे रहा था पुरा चिपका अपनी मा की बॉडी के हर पार्थ बॉडी की गर्मी खुशबु सब कुछ फिल करते किस करता रहता है जब किस पुरा होता है अभय आसा के कमर पे हाथ सेहलाते अपना लंड आसा के जान्धे से घिसते हुवे पुरा चिपके चिपके ही आसा के पीछे आ जाता है

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अभय पीछे आके फिर अपनी मा के कमर पकरे गर्दन कंधे पे किस करने लगता है अब आसा खुद को रोक नही पाती और आसा के मुह से जोर से कामुक् सिसकिया निकलने लगती है
आसा मदहोस जोस तरप् के साथ कसमसाते हुवे - उफ मा लाला मेरे बेटे अपनी अपनी मा को पागल कर देगा क्या उफ
अभय पीछे अपनी मा के गांड पे लंड घिसते हुवे कमर पकरें गर्दन कंधे पे किस करते हुवे - आज पूरी रात हमारी है मेरी है जी भर प्यार करुगा

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आसा अपने बेटे को इस तरह पकरें पीठ चूमने फिल कर झुक जाती है अपनी मस्त गांड अपने बेटे के लंड से चिपका देती है अभय अभय भी अपना लंड अपनी मा के गांड पे सताये ब्लाउस के बीच नंगे पीठ को चूमते हुवे एक हाथ धीरे से अपनी मा के चूचे पे रख देता है आसा अपने बेटे के हर हरकत को देख अच्छे से फिल करके - उफ बेटा, कहते मचल तरप् के सिसकिया आहे भर रही थी

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आसा जैसे ही सीधी होने लगती है अभय धीरे से अपनी मा के चूचे दबाने लगता है आसा जोर से आह मा करती है और सिसकिया लेके हुवे - उफ बेटा रुक जा आह मे सेह नही पाउंगी मेरे लाल रुक जा
आसा की हालत खराब होते जा रही थी
अभय तो खोया था जैसे आज पुरा रस चूस ही जायेगा

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अभय एकदम से फिर आगे आता है और अपनी मा के कमर को पकरें हुवे नेक पे किस करता है फिर धीरे नीचे चूचे पे किस करते नीचे आता है आसा भी मदहोसी मे सिसकिया लेते हुवे अपने बेटे को पकरें आह भरते हुवे अपने बेटे की बाहों मे झुलने लगती है आसा जब अपने आप को नीचे झुकाती है तो आसा के मस्त बरे गोल चूचे अजब के ब्लाउस मे कैद झाकते हुवे दिखने लगते है आसा फिर सीधा खरी हो जाती है

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आसा जैसे ही खरी होती है अभय फिर आसा के ब्लाउस के ऊपर से ही चूचे पे किस करते नीचे अभय अपनी मा के कमर पेट पे हाथ फेरते किस करते हुवे नीचे आने लगता है पेट से कमर से मोटे जान्धे सेहलते किस करते पुरा नीचे आ जाता है हर अंग को अभय बड़े मजे से चुम रहा था फिल कर रहा था प्यार कर रहा था तो वही आसा पूरी तरप् मचल के सिसकिया लेते हुवे - आह मा मुझे कुछ हो रहा है लाला
कमरे मे आसा की कामुक् गर्म सिसकिया गुज रही थी कमरा पुरा गर्म था मा बेटे के प्यार की वजह से

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आसा सेह नही पाती और एकदम से अभय से दूर भागते हुवे बेड की तरफ जाती है आसा बहोत जायदा शर्मा गई थी तेज तेज सासे ले रही थी आसा जल्दी से भागते हुवे बेड के कोने को पकर लेती है आसा थोरि झुकी हुई थी सीने से सारी नीचे गिर चुका था आसा जोर जोर से सासे ले रही थी और गोरे दोनों चूचे लटके ब्लाउस मे साफ दिख रहे थे आसा के सासे लेने की वजह से दोनों चूचे भी मस्त हिल रहे थे और अभय पीछे खरा सब देख रहा था अजीब तेज एहसास जोस से आज अभय भरा हुआ था आज अभय अच्छे से स्वाद लेना चाहता था अपनी मा का

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आसा जिस तरह झुकी हुई थी आसा की मस्त गांड अभय की तरह बाहर निकली हुई थी अभय धीरे से अपनी मा की तरफ बढ़ने लगता है आसा तिरसी नजर से पीछे अभय को देख तेज सासे लेते हुवे मन मे - आसा खुद को रोक तुम झर नही सकती रोक अपनी बुर को पानी निकालने से, असल मे आसा की पैंटी पूरी गीली होके चिप चिपि हो गई थी बुर अभय के हर हरकत चुने से पानी बहाते जा रही थी

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अभय अपनी मा के पीछे आके अपना हाथ आसा की गांड पे रख सेहलाते हुवे उपर पीठ पे लेके जाता है और झुक के अपनी मा के पीठ को चूमने लगता है साथ मे झुकी अपनी मा के गांड पे अपना लंड सता देता है इस हरकत से आसा और तेज सासे लेने लगती है जोर से सिसकिया लेते तरपने मचलने लगती है अपने बेटे के हर टच हरकत को फिल कर रही थी अभय के पकर हरकत का असर सबसे जायदा आसा की बुर पे हो रहा था जिसका नतीजा आसा की बुर और पानी बहाने लगती है आसा सिसकिया लेते हुवे - आह उफ अभय बेटा
अभय - दिल कर रहा है आज पुरा आपको खा जाऊ मा
आसा मदहोसी मे सिसकिया लेते हुवे - मे खाने की आह उफ चीज हु
अभय किस करते हुवे - हा खाने प्यार करने की

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अभय फिर एकदम से अपनी मा को खरा करता है अभय पीछे खरा अभी भी अपना लंड अपनी मा की गांड पे सताये हुवे था आसा की मस्त कमर गोरे पेट अजब दिख रहे थे अभय अपना एक हाथ अपनी मा के मोटे जान्धे पे रख धीरे से सेहलाते हुवे उपर चूचे पे ले जाने लगता है अपने बेटे की हरकत और हाथ को चूचे की तरफ आते फिल कर आसा सिहर् जाती है तेज सासे सिसकिया लेने लगती है पूरी मदहोस मे आसा मचल रही थी

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अभय उपर दोनों हाथ अपनी मा के दोनों चूचे पे रख दबा के पकर लेता है साथ मे गर्दन मे किस करने लगता है अपने दोनों चूचे पे अपने बेटे का हाथ फिल करके आसा पूरी काप् जाती है आसा अभय के हाथ पे हाथ रख - आह मेरे लाल तेरा हाथ गलत जगह उफ मा हटा के आह लाला
अभय पुरा जोस से भरा किस करते हुवे - नही मा आज नही फिल करने दीजिये मुझे आपके चूचे को बहोत बरे है आपके मे जाने वाला हु कई दिन बाद आऊगा लेकिन जाने से पे पहले आह मा उफ बहोत मजा आ रहा है मा झुक जाइये
आसा अपने लाल के कहते ही मस्त झुक जाती है

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आसा झुकी हुई थी मोटे गांड आसा के अभय के तरफ थे अभय आसा के चूचे के पास एक हाथ रखे दूसरा कमर के रखे हुवे अपनी मा के गोरे पीठ को चूमते हुवे नीचे आते हुवे गांड के ऊपर भी किस करने लगता है इस हरकत से आसा की बुर पे जोर से दबाव बनता है और बुर और पानी बहाने लगती है आसा कापते हुवे सिसकिया लेते हुवे झुकी मन मे - आह मा मर गई मर गई मुझे मेरे पूरे बॉडी को इस तरह अभय के पापा ने कभी प्यार नही किया लेकिन आज मेरा बेटा जिसे मेने जन्म दिया वही मेरे पूरे अंग को अपनी मा को इस तरह प्यार कर रहा है मेरी बुर पूरी गीली हो गई है पैंटी से पानी निकल जान्धे पे रिस रही है आज सब से जायदा पानी मेरी बुर बहा रही है और आह उफ मे रोक नही पा रही लाला के जिस तरह मेरे अंग को छु रहा है चूम रहा है उफ ये एहसास फीलिंग जोस सुकून मजा मुझे मिल रहा h आह मा मे सब्दो मे बता नही पाउंगी कोई इस तरह भी पूरी बॉडी को प्यार करता है क्या मे तो इतना जानती हु बुर मे लंड डाल तो बस हो गया लेकिन जब से लाला मुझे प्यार करने लगा मेरी बॉडी को तब से आह लाला

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अभय फिर आसा के सारी को पकर खीचने लगता है आसा कमर गांड मतकाते हुवे अभय को मदहोस जोस नशे मे देख - लाला आज कर रहा है आज अपनी मा पे दया नही करेगा आह लाला मेरे बेटे
अभय आसा को देख सारी खीचते हुवे - नही मा आज मे आपका अच्छे से स्वाद लेके रहुंगा
आसा अभय को देखते हुवे मदहोसी मे - उफ लाला मा हु तेरी
अभय मुस्कुराते हुवे - एसी लिये तो और जायदा प्यार आता है

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अभय बाते करते आसा को देखते हुवे पूरी सारी कमर से निकाल देता है आसा पेटीकोट ब्लाउस मे आ जाती है उफ आसा के मस्त भरी बॉडी दूध जैसा बदन कमर पेट देख अभय का लंड और झटके मार पानी निकालने लगता है सेम मा बेटे की हालत थी पूरी तरह दोनों नही झरे थे कियुंकी आसा अभय दोनों अपने आप को रोके हुवे थे ताकि पूरी तरह झर ना सके लेकिन फिर भी बूंद बूंद पानी निकल रहा था जिसकी वजह से अभय का लंड आसा की बुर गीली हो गई थी

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आसा पेटीकोट ब्लाउस मे अभय की देखते हुवे शर्मा के - लाला सर्म नही आती अपनी मा के साथ ऐसा करते हुवे सर्म कर पैदा किया है तुझे मेने बेटा है तू मेरा और तु है की लगा परा है
अभय आसा को देखते हुवे समझ जाता है उसकी मा केह तो रही है लेकिन अंदर से खुद पूरे मजे ले रही है
अभय मुस्कुराते हुवे आसा को देख - मा को प्यार कम बेटे का हक है वही मे कर रहा हु आपको प्यार किया मे गलत कर रहा हु
आसा अभय को देखती रहती है लेकिन एक शब्द भी नही कहती
अभय भी हा समझ आगे बढ़ता है तो आसा की सासे फिर तेज होने लगती है सिहर जाती है कप् जाती है मचल जाती है

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अभय नीचे झुक अपनी मा की एक टाँगे पकर उठा के आसा के सीने गर्दन मे किस करते हुवे - आप जैसी खूबसूरत हॉट मा हो तो बेटा प्यार करेगा ही उफ मा आपकी बॉडी की गर्मी बदन की खुशबु मुझे पागल कर रही है
आसा अभय से चिपकते हुवे - आह उफ मा लाला कर ले प्यार मेरे बच्चे जितना करना है कर ले अपनी मा को उफ प्यार लेकिन आह आगे मत जाना उफ

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आसा एकदम से आगे घूम अपनी गांड अभय की तरफ लंड पे सता के अभय से चिपक के खरी होके - आह लाला मुझे कुछ हो रहा है
अभय अपने हाथ आसा के पीठ से सेहलाते हुवे किस करते हुवे - जनता हु आपकी बुर गीली हो गई है आपकी बुर तरप् रही है
आसा मदहोसी मे मचलते सिसकिया लेते हुवे - आह लाला जानते हुवे भी कियु अपनी मा की बुर से पानी निकालने मे तुला है बेह जायेगी
अभय लंड गांड के सताये पीठ सेहलाते हुवे - मा उफ बेह जाने दीजिये
आसा कामुक् आवाज मे - नही लाला ये नही आह मा हो सकता उफ मेरी बुर तेरी मा की बुर पानी नही निकाल सकती आह समझ लाला मेरे बेटे उफ

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अभय एकदम से आसा को अपनी तरफ पलट के दोनों हाथ अपनी मा के बरे गोल मोटे गांड पे पेटीकोट के ऊपर से ही रख दबाते नेक पे किस करते हुवे - अच्छा तो मुझे जो करना है करने दीजिये
आसा गांड पे बेटे का हाथ फिल कर के - आह मर गई बेटा जोर से मत दबा अपनी मा के गांड को धीरे दबा के उफ
अभय गांड दबाते किस करते हुवे - मा सच कहना मजा आ रहा है ना
आसा मदहोसी मे कामुक् आवाज मे - हा बहोत मजा आ रहा है लाला लेकिन मे पागल ना हो जाऊ

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अभय किस करते हुवे नीचे आने लगता है लेकिन साथ मे गांड से हाथ नही हटाता गांड जोर से दबाते हुवे आसा के गोरे चिकने पेट को चूमने लगता है आसा की पूरी बॉडी जोर से कपने लगती है अभय भी ये फिल कर हैरान होता है तभी आसा तेजी से अभय से दूर होके भागते हुवे बाथरूम मे घुस जाती है अभय हैरान देखता रहता है फिर बेड पे आके बैठ जोर से सासे लेने लगता है अभय के चेहरे पे पसीना था बॉडी पूरी गर्म हो गई थी


आसा बाथरूम मे जल्दी से आके बुर पे दोनों हाथ रख दोनों जांघे पूरी जोर से सता के थोरा झुक के - नही नही आसा तु झर नही सकती बेटे के साथ के वजह से तो बिल्कुल नही तेरी बनाई दीवार टूट जाएगी रोक ले आसा अपने बुर की पानी को

आसा एक औरत जिसका पति पूरी जवानी मे छोर चला गया तब से आज तक आसा बुर मे उंगली भी नही करती थी जिस वजह से अंदर बहोत सारा पानी भरा हुआ था जो अभय की हरकत से आसा की बुर के छेद के दरवाजे को धक्का मारके बाहर निकलने की कोसिस कर रहा था लेकिन आसा बुर को पकरें जन्धों से दबाये उस रास्ते को पूरी ताकत से बंद किये रहती है 2 मिनट बाद सब सांत हो जाता है जो पानी बुर के छेद के पास आ गया था वापस अपनी जगह चला जाता है

आसा धर्म से नीचे लेत पसीने से भीगी जोर जोर से सासे लेते हुवे मन मे - आज तो बहोत जायदा ही आगे चले गये उफ मेरी हालत इतना खराब मेरे लाला कर देगा सोचा नही था अब तो मुझे ऐसा लगने लगा है लाला कोई खिलाडी है किसी भी औरत को खुश कर सकता है

आसा को कोन बताये उसका बेटा खिलाडी ही है और कई कुवारी शादी सुधा औरत की ली है अब वो सब उसके बेटे की दीवानी है

अभय बिस्तर पे लेत अपने हाथ को देख मुस्कुराते हुवे - आज तु उस जगह गया उसे टच किया फिल किया जिसके लिये तु तरप् रहा था उफ मा के चूचे गांड दबाने मे जो मजा आया आह मेरा लंड आज जितना टाइट है जो दर्द हो रहा है पहले कभी नही हुआ
अभय अपने लंड को दबाये रखता है

5 मिनट बाद

आसा लेती हुई थी जब नॉर्मल हो गई आसा बैठ जाती है टाँगे आगे तो पीछे हाथ ले जाके पैंटी को पकर नीचे गांड उठा के करते हुवे जांघों के थोरा नीचे लाके देखती है तो पैंटी पूरी गीली हो गई थी

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आसा पैंटी अपनी गीली पैंटी को देखते हुवे बहोत जायदा सर्म से लाल हो जाती है आसा - कितना कमीना है बुर से पानी निकाल ही दिया मेरे बेसरम बेटे है आह आज तो लाला ने जिस तरह मेरे पूरे बॉडी को प्यार किया चूमा सब फिल करके अलग ही मजा आया ये मजा पति के साथ चुदाई समय जो आता था उससे कही जायदा था

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आसा अभी उंगली गीली बुर पे रखती है फिर सामने करके देखती है तो आसा की सारी उंगली पे बुर का गाढ़ा उजला पानी लगा था आसा और जयादा सर्म से पानी पानी हो जाती है आसा अपनी उंगली देख मन मे - उफ लाला तूने क्या कर दिया मेरी बुर का पानी उफ

आसा फिर पेटीकोट के अच्छे से बुर को फाके के बीच से साफ करती है फिर खरी होती है पैंटी बाथरूम मे ही छोर कमरे मे आती है
अभय लेता आसा को देख मुस्कुराते हुवे - किया हुआ सुसु जोर से आ गई थी किया

आसा सर्म से लाल अभय को देखते हुवे - हा आ गई थी तुझे क्या
अभय मुस्कुराते हुवे - ये कियु नही कहती सुसु नही कुछ और आ रहा था

अभय बिस्तर से उतर अलमारी से एक पेकेट निकाल आसा को देते हुवे - इसमें नई पैंटी बिकनी है जो मे लाया हु, अभय आसा को देख मुस्कुराते हुवे, आपने कहा था अब बारी है आपकी मुझे पहन के दिखाने की

आसा की सासे फिर तेज होने लगती है चूचे उपर नीचे होने लगते है आसा पेकेट लेके अभय को देख कपते होठ से शर्म से - ठीक है लेकिन बिकनी मे सिर्फ

अभय मुस्कुराते हुवे - हा बिकनी मे ही आऊगा तो पैंटी बिकनी दोनों मे देखुंगा

अभय फिर दूसरी तरह मूर आखे बंद करके - बिकनी जब पेहन लेना तो ऐसे ही दिखा मत देना कोई मस्त कामुक् सुपर सेक्सी पोस् मे दिखाना

आसा अभय को देख मुह बना के - बरा आया अपनी बीवी को कियु नही केहता मा के पीछे लगा रहता है बेसरम
अभय मुस्कुराते हुवे - कियुंकी आप मेरी जान सब है बहोत प्यार करता हु आपसे

अभय की बात सुन आसा पूरी सांत हो जाती है चेहरे पे खुशी मुस्कुराहत आ जाती है

आसा ब्लाउस के बटन खोल के ब्लाउस निकाल बिस्तर पे रख देती है आसा के नंगे चूचे अब आजाद थे दोनों दूध जैसे चूचे खरे थे

आसा पेकेट खोल बिकनी देखती है फिर पैंटी उसके बाद अभय को देख - बेसरम लरके ये किया लाया है तूने जान बुझ के ऐसी बिकनी पैंटी लाई है ना तूने

अभय मुस्कुराते हुवे - मुक्का मिला था कैसे जाने देता हु बताओ आप
आसा सर्म से - बेसरम कही का

आसा बिकनी पहन आईने के सामने खरी होके देख मन मे - उफ ये बिकनी तो बहोत अच्छी है लेकिन जयादा ही सब दिख रहा है बेसरम जान बुझ के लाया है ताकि मेरे जायदा से जायदा चूचे देख सके कितना चालक है

आसा फिर सोचने लगती है किस पोस् मे बिकनी अपने बेटे को दिखाया जाये वही अभय आखे बंद किये खरा मन मे - मा जो भी पोस् देगी यकीनन मेरे होस उरा देगे


आसा कुछ देर सोचने के बाद मुस्कुराते हुवे बेड पे जाती है फिर एक कयामत कामुक् से भरपूर पोस् लेके सर्म - से देख ले जल्दी मुझे बहोत जायदा सर्म आ रही है आसा की बात सुन अभय आखे खोल पीछे मूर अपनी मा को देखता है तो अभय की आखे बाहर मुह पूरे खुले और लंड झटके मारते मारने लगते है


आसा बेड पे पैर आगे किये दोनों हाथ पीछे बेड पे टीकाये सर गर्दन नीचे किये थी जिसकी वजह से आसा के बाल नीचे झूल रहे थे सीना आगे जिसकी वजह से काले बिकनी मे कैद आसा के बरे दूध जैसे गोल मटोल चूचे और भी जायदा कयामत जबरदस्त दिख रहे थे

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बिकनी मे भी आसा के पूरे चूचे आ नही रहे थे बिकनी के कोप पलेट के बीच भी छोटे छोटे छेद थे अब ये साफ देख कर पता चल रहा था की आसा के चूचे सच मे बहोत गोरे बरे गोल साइज के है और पूरे टाइट भी है अभय तो बेचारा खरा देखता ही रह जाता है
अभय होस मे आता है और धीरे से आसा के और पास एकदम पास जाके खरा हो जाता है जिसकी वजह से सीन और भी अजब का अभय को दिखता है

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आसा आखे बंद किये सर गर्दन नीचे सीना आके किये जिस तरह पोस् मे थी और अभय पास मे खरा देखता है तो पुरा सीन साफ बहोत अच्छे से दिखने लगता है गोरे दूध जैसे दो बरे बरे गोल मटोल चूचे जो आधे तो बिकनी से बाहर थे अभय ऐसा नजारा देख सेह नही पता और अभय का लंड झटके मारते हुवे झर जाता है
अभय अपनी का के चूचे देखते हुवे कपते होठो से - मा आज जो आपने दिखाया जो देख रहा हु कई दिन तक ये नजारा मेरे आखो के सामने आता रहेगा आपके चूचे अब साफ देख केह सकता हु जैसा मेने सोचा इस उमर मे भी पूरे टाइट तन के खरे है जबकि इस उमर मे कई औरत के ढीले झूल जाते है आपके चूचे बरे होने के साथ पूरे गोल मटोल पर्फेट साइज के है दूध जैसे गोरे आपकी पूरी बॉडी भी

आसा अभय की बात सुन अंदर ही अंदर अपने बेटे के मुह से अपने चूचे बॉडी की तारीफ सुन खुश होके मन मे - मेरी बॉडी की तारीफ प्यार तु ही अच्छे से करता है मेरे लाला नही तो तेरे पापा तो सीधा बुर मे घुस के चुदना ही जानते थे

तभी अभय एकदम से आसा को बिस्तर पे लेता के आसा के ऊपर आके पागलो की तरफ किस करने लगता है आसा बहोत हैरान होती है सर्म से लाल हो जाती है लेकिन फिर सन्त बेटे का साथ देने लगती है

आसा बिकनी मे लेती हुई अभय आसा के ऊपर लेता दोनों पागलो की तरह एक दूसरे के होठ चूस रहे थे उफ आसा के चूचे पसीने से भीगे उपर नीचे हो रहे थे आसा मन मे किस करते हुवे - आह मा बेटा मुझे बिकनी पहना के अपनी मा को लेता के होठ का रस चूस रहा है उफ फिर मे मदहोस होने लगी हु लेकिन सच कहु बहोत जायदा मजा आ रहा है मुझे आह मेरे लाल चूस ले अपनी मा के होठ पीले रस
3 मिनट बाद

आसा सर्म से जल्दी से नाइटी पहन देती है

अभय कमरे से बाहर जाते हुवे - आता हु मा

आसा मुस्कुराते हुवे मन मे - हु तो निकल गया बेचारे का

आसा हसने लगती है

अभय आता है फिर दोनों मा बेटे बिस्तर पे लेत जाते है अभय आसा के एक टाँगे उठा के अपने उपर रख अपना लंड बुर से चिपका के आसा को बाहों मे कस के पुरा चिपका लेता है अब मा बेटे की बॉडी पूरी चिपकी हुई थी एक दूसरे से बीच हवा भी ना जाये

अभय एक चादर लेके उपर डाल लेता है दोनों मा बेटे चादर के अंदर चिपके लेते हुवे थे दोनों की तेज गर्म सासे एक दूसरे से टकरा रही थी कियुंकी चेहरा भी एकदम पास था अंदर अंधेरा था तो दोनों एक दूसरे को देख नही सकते थे

अभय - मा आज बहोत मजा आया आपको प्यार करके
आसा सर्म से - तुझे आया मेरी हालत खराब हो गई थी और ये तेरा हाथ कहा जा रहा था हा बोल बेसरम
अभय मुस्कुराते हुवे - आपके चूचे गांड पे पूरी बॉडी पे बस बुर पे नही गया
आसा अभय के कान पकर - बेसरम मेरी बुर पे तेरा हाथ जाता ना तो बहोत मारती समझ गया
अभय दर्द मे - समझ गया मा अब छोरो
आसा मुस्कुराते हुवे - हु
अभय - मा आपकी बॉडी बुर आज बहोत ही जायदा गर्म है
आसा मन मे - लो खुद गर्म करके बोल रहा है
आसा - चुप सो जाता बहोत रात हो गई है
अभय धीरे से कान मे - मा दो बार मेरे लंड पे अपनी बुर घिसो ना
आसा सर्म से धीरे से - नही लाला सर्म आती है
अभय धीरे से - मा आपकी बुर कहा है किस से चिपकी है
आसा शर्मा के धीरे से - तुम्हारे लंड से चिपकी है
आसा मन मे सर्म से लाल - अब तो लंड भी खुल के बोलने लगा है
अभय धीरे से - तो बस घिसना ही तो है तरहा रहा है मेरा लंड रो रहा है केह रहा है इतने पास मस्त फूली बुर होके भी कुछ कर नही पा रहा
अभय की बात सुन आसा जोस मदहोस से भर जाती है और एक हाथ अभय के कमर पे रख धीरे से - ठीक है रोने नही दूंगी

आसा गांड आगे करते हुवे अभय के लंड पे अपनी बुर को जोर से घिसते हुवे - आह लाला उफ मा अब कैसा लग रहा है
अभय आसा को जोर से पकर चिपका के - उफ मा बहोत मजा आ रहा है आह मा उफ ये सपना आज आह मा मेरी मा पुरा हो गया

आसा फिर घिसना बंद कर देती है लेकिन अभय से चिपकी अपनी बुर को अभय से लंड से चिपका के ही रखती है

आसा जोर जोर से सासे लेते हुवे मन मे - आह बेटे का लंड बुर के घिस के फिल कर मे तो फिर झरने वाली थी लेकिन बच गई

आसा - आज बहोत हो गया अब सोते है
अभय आसा के होठ पे किस करते हुवे - जी मा
फिर दोनों एक दूसरे की बाहों मे सो जाते है

नोट - अभय जब गया तो गीली चड्डी निकाल टाइट चड्डी पहन के आया जब आसा अपनी बुर अभय के लंड पे घिस रही थी तो मोटा फिल तो होता है लेकिन कितना बरा लम्बा है फिल नही होता वजह अभय का लंड चड्डी से दबा नीचे मरा लेता दबा था

अभय अभी अपनी मा को ये फिल नही करवाना चाहता थी की उसका लंड कितना बरा है वजह अभय एक समय का इंतज़ार कर रहा था

तभी अभय को एक आवाज सुनाई देती है जोर से - भइया

तेज आbवाज सुन अभय एकदम से होस मे आता है और चारों तरफ देखता है तो खुद को गारी मे और बाहर अदिति खरी देखाई देती है लेकिन अदिति सर्म से दूसरी तरफ चेहरा किये हुई थी तभी अभय को एहसास होता है उसका हाथ लंड पे है हा पैंट के ऊपर से ही अभय लंड पकरें मसल रहा था अपनी मा की बिकनी वाली फोटो देख तभी अदिति भी पिसाब कर आ गई और अभय को देख लिया

अभय एकदम से लंड से हाथ हटा के जल्दी से फोन बंद कर अदिति को देख सर्म से - माफ करना गुरिया

अदिति अंदर बैठ अभय को बिना देखे सर्म से - चले भइया
अभय गारी चालू कर सर्म से - हा हा चलते है

अभय मन में - सीट क्या हो गया गुरिया किया सोच रही होगी
अदिति मन मे बाहर देखते हुवे सर्म से - छी भइया गारी मे ही उफ भइया भी ना लेकिन भइया को करते देख उफ मुझे कुछ होने लगा है


बिना एक दूसरे को देखे बाते किये कुछ मिनट तक सन्त सफर जारी रहता है तभी एक छोटा चोक आता आता है

अभय अदिति को देख - गुरिया कुछ खा ले
अदिति - जी

अभय गारी लगा के दोनों एक होटल मे जाके बैठ ओदर् करके खाने खाने लगते h


अभय के घर

सिला मधु आ गई थी आसा सिला को देख - मिल गई फुरत् तुझे
सिला आसा के गले लगते हुवे - माफ करना दीदी आगे से गलती नही होगी रोज आउंगी

आसा - हा हा लाला के कहने पे आई हो नही तो तुम आती ही नही

मधु हस्ते हुवे - बरी मा आपने बिल्कुल नही कहा
सिला घुर के मधु को देखती है मधु चुप हो जाती है

आसा मधु को देख - अच्छा तु बता ना अपनी तु भी तो एक बार आई फिर किया हा

मधु कान पकर आसा को देख - माफ कर दो बरी मा आगे से नही होगा गलती

आसा मधु को गले लगा के - अच्छा है

फिर बाते शुरू हो जाती है


वही दिशा विजय बेस से निकल बगीचे से होते चल रहे थे विजय मन म - बच गया भाभी को पता नही चला माहौल कितना खराब है

दिशा विजय को देख - चले मजे करते है हु
विजय सर्म से - भाभी फिर आप शुरू हो गई
दिशा रुक विजय को देख - आपके भले के लिये केह रही हु
विजय हैरान कंफ्यूज - कैसे

दिशा - आपके भइया के जीतने भी दीवानी है एक दिन सब को एक दूसरे के बारे मे पता चल जायेगा मम्मी जी को भी तो उसके बाद घर का माहौल चेंज हो जायेगा कई आपके भइया की दीवानी आते जाते रहेगी आपके भइया तो गले रहेगे हर किसी के साथ लेकिन उस माहौल मे आप रह नही पायेंगे अगर ऐसे ही सर्माते रहे

भैया की तरह बनिये वो जिस तरह खुल के लाइफ जीते है आप भी जिये रीमा के अलावा भी कोई दूसरी पता लीजिये रीमा बुरा नही मानेगी दूसरी मे आपकी छोटी भाभी भी है हा हमारे बीच वो सब नही हो सकता ना आपके भइया के दीवानी किसी और के साथ चुदाई कर सकती है हा कुछ करेगी लेकिन आपके भइया के मर्ज़ी होगी उसकी भी

इस लिये खुल के मजे लीजिये लाइफ मे काम जरूरी है लेकिन मस्ती मजा भी नही तो आप भीर मे अकेले रह जायेंगे

दिशा की हर एक बात सही थी विजय सर्माता रहा तो इस माहौल मे जो आने वाला है रह नही पायेगा

विजय सोचते हुवे - भाभी मे समझ रहा हु मे भी आप सब के साथ रहना अपनी लाइफ मे मजे करना चाहता हु ठीक है भाभी मे भी मजे करुगा
दिशा - मजे नही प्यार इज़त भी साथ मे होना जरूरी है जैसे आपके भइया है

विजय समझ गया

दिशा विजय के पास आके अपने दोनों चूचे विजय के सीने पे दबा के विजय को देख मुस्कुराते हुवे - तो चले देखती हु मेरे देवर जी आज कुछ करते है या भाग जाते है

विजय सर्म से - नही आज तो अपना हक जितना आपने दिया है लेके ही रहुंगा मुझे भी भइया की तरह

दिशा हस्ते हुवे - ठरकी बनना है बेसरम भी
विजय हस्ते हुवे - हा तभी तो भइया के इतने दीवानी है

दिशा को चले
विजय - हु

दोनों देवर भाभी अंदर बगीचे के जाने लगते है

वही अभय अदिति नास्ता पीना कर गारी मे बैठ निकल परते है

दिशा विजय अंदर बगीचे मे आके वही चटाई बिछा के लेत जाती है और विजय को देख - आइये बैठिये थोरि बाते टाइम पास थोरा मजे करते है

विजय भी दिशा के पास लेत पेरो को देखने लगता है

दिशा - किया सोच रहे है
विजय - शुरू से लेकर अब तक ही लाइफ मे हो हुआ उसे
दिशा - जानती हु लेकिन भूल जाइये आगे बढिये
विजय दिशा की तरफ पलट के - जी भाभी
दिशा मुस्कुराते हुवे - हु तो क्या करना चाहेंगे चूचे दबाना
विजय सर्म से - हा लेकिन भाभी रीमा के मस्त है बॉडी भी लेकिन आपके जैसी उसकी बॉडी कब होगी

दिशा मुस्कुराते हुवे - अब हो जायेगी शादी या सेक्स के बाद ही लरकी के बॉडी मे बदलाव आते है
विजय - अच्छा
दिशा - बाते हो गई करना है या नही में हक दे रही हु लेना ना लेना तो आपके उपर है
विजय दिशा के चूचे देख हाथ आगे ले जाते दिशा के दोनों चूचे पे रख देता है


आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏🙏🙏
बहुत ही जबरदस्त अपडेट है !
 

ajay bhai

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chapter 101

तो दिशा विजय बगीचे मे अंदर कोने मे चटाइ बिछाये लेते थे विजय का हाथ दिशा के दोनों चूचे पे था

दिशा विजय को देख - दबाइये देवर जी
विजय दिशा को देखता है फिर दोनों हाथ हटा के उठ के बैठ जाता है दिशा हैरान होती है और दिशा भी उठ के बैठ जाती h विजय को देखने लगती है

विजय नजरे नीचे किये - कोई फीलिंग नही आ रही ना मेरा दिल करना चाहता है ये गलत है भले ही आपकी मर्ज़ी हो फिर भी जिसपे हक भइया का है उसपे मेरा नही मस्ती बाते खुल के करने तक सही है

विजय दिशा को देख भाभी दोस्त की बीवी हो या भाई की बीवी हो भले मर्ज़ी हो लेकिन सोचना उस इंसान को है क्या वो अपने दोस्त की बीवी अपने भइया की बीवी के साथ करने के बाद अपने दोस्त भाई के सामने कैसे जायेगा

जो सही गलत ना सोच सिर्फ अपने दोस्त भाई की बीवी के साथ कर लेते है वो सच्चा दोस्त भाई हो ही नही सकता

दिशा विजय को देख - आपके भइया आपकी मा दीदी बीवी के साथ करते है उसका क्या
विजय मुस्कुराते हुवे - राजा है मेरे भइया मे उनका दास मा दीदी प्यार करते है उनसे भइया भी रीमा मे सब भैया के चाहने वाले है

दिशा - मेने कई बार देखा आप मुझे घूर के देखते थे देखिये अगर आपके मन मे है कुछ मेरे साथ करने की तो सच अभी कर सकते है मुझे चोद भी सकते है

विजय - बस भाभी बहोत हो गया आपसे ये उमीद नही थी आप तो मेरे पीछे ही पर गई है हा आपसे बाते मस्ती मजाक करके अच्छा लगता है लेकिन मे आपके लिये कभी बुरा नही सोचा ना सोच सकता हु हा मे आपको कई बार घूर के देखता था उसकी वजह ये थी आप बहोत खूबसूरत है बॉडी भी अच्छी है तो मे आपको देख ये सोचता था की रीमा भी किया शादी के आप आपकी जैसी और खूबसूरत बॉडी वाली बन जायेगी

दिशा हैरान होती है शोक भी

दिशा विजय का हाथ पकर - माफ करना देवर जी मे जानती थी आप बुरे नही है लेकिन जब आप मुझे घूर के देखते थे तो मुझे गलत लगा इस लिये मे आपका टेस्ट ले रही थी

दिशा की बात विजय सो शोक कर देती है
विजय - क्या भाभी आप मुझे इतना गिरा
दिशा विजय के गाल पे हाथ रख - माफ कर दीजिये एक और बरी वजह है इस लिये आपका टेस्ट लिया

विजय - एक और वजह वो क्या है
दिशा मिनिता आसा की कहानी बताती है

विजय पुरा शोक हैरान गुस्से से - क्या कहा उन दोनों कमीनो की इतनी हिम्मत की मेरी मा बरी मा पे हाथ डाला मे आज ही दोनों को जान से मार दूंगा
विजय गुस्से से उठने लगता है तो दिशा विजय का हाथ पकर - सांत होके बैठ जाइये आपके भइया ने अच्छे से सजा दे दी है

विजय दिशा की बात सुन बैठ जाता है लेकिन गुस्से मे रहता है

दिशा गहरी सास लेके - आपकी बरी मा मेरी मम्मी जी अपने देवर को बहोत मानती प्यार करती थी मम्मी जी को लगा उनका देवर बहोत अच्छा प्यारा है लेकिन धीरे धीरे चाचा जी की नियत बिगरने लगी गंदी बाते करने लगे फिर भी मम्मी जी मजाक मे ले देती देवर समझ पर एक दिन तो
बस यही जब सचाई मुझे आपके भइया ने बताई और आप मुझे घूर के देखते थे इस लिये आपका टेस्ट लिया माफ करना आपका दिल दुखाया मेने

विजय दिशा के हाथ पकर - कोई बात नही भाभी आप ने जो किया एकदम सही क्या आज के समय मे लोग अंदर से कितने गिरे है पता ही नही चलता

दिशा - आपके भइया किसी घटिया इंसान को अपना दोस्त भाई बनायेगे ही नही और ये मेने देख लिया

विजय - हु बाकी का पता नही लेकिन मे जीत जीत भइया के लिये जान दे सकते है
दिशा इमोसनल होके - हा जानती हु इस लिये मे बेफ़िकर रहती हु कियुंकी आप तीनों है उनके साथ


( दोस्तो मेरी बात पे ध्यान दे प्लेस )

दिशा कियु कर रही थी आपको पता चल गया जाहिर है आसा की कहानी जानने के बाद दिशा विजय को घूर के देखने के बाद दिशा टेस्ट लेती है

जब विजय दिशा की कहानी चल रही थी तो मे एक सस्पेंस बना रहा था मेरी स्टोरी मे कुछ होता है तो उसकी एक वजह होती है

मैन करेक्टर की मा बहन के साथ कोई कुछ करे जायदा तर लोगो को ये पसंद नही आती सेम मेरा भी है इस लिये 5 स्टोरी मे मेने वैसा ही लिखा की जो लोग चाहते है

लेकिन दोस्तो आप सभी को एक बात सझनी होगी हर चीज हमे अपने हिसाब से नही मिल सकती

जरा सोचिये आप के दिमाग मे एक अच्छी स्टोरी आई आपने सोचा स्टोरी बहोत अच्छी है लोगो के बीच लाना चाहिये फिर आप ने पूरे मन जोस से दिल से स्टोरी लिखी लोगो के बीच आये लेकिन 5 chapter बाद ही लोग कॉमेंट करके बोलने लगे, नही ऐसा मत करो ये गलत है ये नही होना चाहिये

अब आप ऐसे कॉमेंट पढ़ने के बाद किया उसी जोस जुनून दिल से आगे स्टोरी लिख पाओगे मेरा जवाब नही

कियुंकी आप ने जो स्टोरी बनाई सोची जैसा आप उतार ही नही पा रहे तो आपको वो मजा आयेगा ही नही

xforum पे कई कई अच्छी स्टोरी आधे पे बंद परी है उसकी वजह ये भी एक है कियुंकी Writer जीस तरह स्टोरी लाना चाहता है लोग लाने नही देते बस अपनी सोचते है Writer की नही

मेरी एक स्टोरी एसी वजह से बंद हो गई

xforum पे कई स्टोरी ऐसी है जिसमे मुझे भी कुछ चीजे बहोत अच्छी नही लगती लेकिन मे सिकायत नही करता जनता हु हर चीजे जो मे जिस तरह चाहता हु मिल नही सकता

कई स्टोरी मे सस्पेंस बना रहता है लेकिन लोग पहले से ही कॉमेंट मे ये गलत हो रहा है मत करो बोलने लग जाते है
जो स्टोरी मेरी बंद हुई उसमे सबसे जयादा सस्पेंस था जो दिख रहा था हो रहा था वैसा था नही लेकिन लोग इंतज़ार नही कर पाये

तब से मेने एक फैसला लिया मुझे जो लिखना है लिखुंगा किसी की नही सुनुंगा

मेरे दोस्तो जो मेरी स्टोरी शुरू से पढ़ते आ रहे है उन्हें पता है मे अपनी स्टोरी मे क्या रखता हु

ये सारी बाते मेने इस लिये बताई की आप Writer को समझ सको सब की अपनी एक वजह होती है स्टोरी लिखने ही जैसा भी लिखे आप उसे रोको मत नही मजे लो जब Writer को मजा ही नही आयेगा तो वो कियु इतने घंटे लगा के स्टोरी लिखेगा

स्टोरी मे कुछ अलग हट के होना भी चाहिये

मानता हु स्टोरी मे कई चीजे कहानी के हिसाब से होनी बहोत जरूरी है लेकिन जो कुछ लोग लिखते है लिखने दो


बाकी मेरी स्टोरी मे वैसा कुछ नही है ना पहले वाली स्टोरी मे था अगर आगे मेने कोई स्टोरी लिखी उसमे ऐसा कुछ लिखना सोचा तो लिख के रहुंगा

( 1 ) बैलगारी एक सफर - incest
( 2 ) तु मेरा हीरो - incest
( 3 ) किस्मत बदल दूंगा - adultury + incest + fantasy

ये तीन स्टोरी मेरे दिमाग मे जो मे इस स्टोरी के एंड होने के बाद लाने वाला हु तो बताओ आप लोग कोन सी स्टोरी उसके बाद लेके आउ जिसपे जायदा कॉमेंट होगे उस स्टोरी को शुरू करुगा

अब कहानी पे आते है

अभय अदिति गारी से जा रहे थे लेकिन अदिति खिरकी से बाहर देख रही थी लेकिन सर्म से चेहरा लाल था कियुंकी जो देखा अपने भाई को लंड सेहलाते वो सीन अदिति के आखो के समाने घूम रहा था

अदिति नजारा देखते हुवे मन मे - उफ भइया भी ना कही भी शुरू हो जाते है कहा फस गई अब तो मुझे कुछ कुछ होने लगा है अजीब बेचैनी अजीब फीलिंग जग रही है

अभय अदिति को एक नजर देखते हुवे मन मे - हद है यार

अभय गारी फिर साइड मे रोकता है दोनों तरफ खेत ही थे यानी खेतो के बीच रास्ता था

अदिति हैरान अभय को देख - भइया गारी कियु रोकी
अभय अदिति को देख अपने होठ पे हाथ रख मुस्कुराते हुवे -प्यास लगी है
अदिति अभय की बात समझ सर्म से लाल होके - तो पानी पिलो ना
अदिति पोटल अभय को देती है अदिति मजे ली रही थी अभय का
अभय अदिति को देख - अच्छा जी सब जानती हो मुझे किसकी प्यार लगी है चलो आँ जाओ मेरी गुरिया

अदिति के होठ भी सुखाने लगते है अदिति मन मे - उफ भइया के कहते ही मुझे भी प्यार लग गई

अदिति सर्माते हुवे सीट से उठ अभय के पास जाती है अभय अदिति को पकर अपनी गोद मे बैठा लेता है अदिति एकदम से सिहर जाती है सर्म से लाल होके अभय को देखने लगती है अभय एक हाथ अदिति के कमर पे रखता है तो अदिति कस के होठ दबा लेती है अभय एक हाथ अदिति के चेहरे पे रखता है

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अभय अदिति की आखो मे देख - गुरिया प्यार लगी है होठ का रस पीना है अपनी गुरिया के रसीले होठ का
अदिति सर्माते हुवे अभय को देख - भाई मेने कभी भी रोका है
अभय धीरे से कान मे - नही लेकिन अभी तुम मेरी गोद मे बैठी हो तो बहोत कुछ फिल हो रहा है
अभय की बात सुन समझ अदिति सिहर जाती है तेज सासे लेने लगती है अदिति सर्म से धीरे से - आप बहोत गंदे है
अभय मुस्कुराते हुवे - बेसरम भी

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अभय अदिति के होठ पे टूट परता है अदिति के अपनी गुरिया के होठ को चूस चूस के रस पीने लगता है अदिति अपने भाई को गोद मे बैठी किस करते हुवे मन मे - फिल उफ भइया फिल तो मुझे भी bah कुछ हो रहा है आह अलग ही जोस आग लग जाती है अब तो मेरे जिस्म मे
2 mina बाद

अदिति जल्दी से अपनी सीट पे जाते बैठ खिरकी से बाहर देखते हुवे सर्म से मन मे - अजीब था अब तो किस करते वक़्त मे होस खोने लगी हु अजीब नसा चढ़ जाता है अजीब चाहत फिल होती है

अभय अदिति को देखता है फिर मुस्कुराते गारी चालू कर निकल परता है 10 मिनट बाद

अभय अपना एक हाथ अदिति के दोनों गोरे चिकने जांघों के बीच रख सेहलाने लगता है लगता है अभय का हाथ अदिति के मोटे जांघों के बीच उपर नीचे हो रहा था अदिति एकदम से काप् जाती है जल्दी से अभय को देखती है लेकिन अभय रास्ते पे आगे देख रहा था

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अदिति अपने जांघों के बीच बुर के पास अपने भाई का हाथ चलता देखती है तो सिहर जाती है तेज सासे लेने लगती है अदिति भी खिरकी से बाहर देखने लगती है लेकिन होठ दतों से दबा के अपनी सिसकिया रोकने लगती है अभय जांघों को सेहलते हुवे मन मे - उफ गुरिया के मोटे जांघे कितने सॉफ्ट चिकने है सेहलाने मे मजा आ रहा है लेकिन अंदर बुर की गर्मी मुझे साफ फिल हो रही है लगता है बहोत गर्मी है
अदिति मुठी कसे बाहर देखते होठ दबाये मन मे - नही नही आह मुश्किल हो रहा है सेहना मुझे कुछ हो रहा है मेरी बुर मे कुछ हो रहा है आह भइया मत करो ना उफ रुक जाइये पर मुझे बहोत अच्छा भी लग रहा है , अदिति की सिसकिया फुट परती है अदिति जोर से आह उफ सिसकिया करते सिसकिया लेती है

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अभय एक नजर अदिति को देखता है फिर जांघों से हाथ हटा के अदिति के एक हाथ पे रख देता है अदिति अभय को बिना देखे अपने भाई के उंगली मे उंगली मिला के पकर लेती है अभय अदिति को देखता है जो बाहर देख रही थी लेकिन अभय समझ जाता है रास्ता साफ ही आगे बढ़ा जा सकता है

अभय - गुरिया तुम्हारे पैर दर्द कर रहे होगे मेरे जांघों के ऊपर अपने दोनों पैर रख के सीधा कर लो इतना लम्बा सफर पहली बार कर रही हो तो पैर बैठे बैठे दर्द कर रहे होगे

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अदिति हैरान अभय को देखती है अभय अदिति को देख मुस्कुरा देता है अदिति लाल हो जाती है फिर सर्माते अपने दोनों चिकने गोरे पैर अभय के जांघों के ऊपर रख देती है और अपनी जांघों के बीच अपना एक हाथ रख लेती है कियुंकी मिनी स्कर्ट थी सब दिख जाता
अभय अदिति के गोरे सॉफ्ट चिकने पैर जांघों को देख मन मे - कितने गोरे सॉफ्ट चिकने पैर h और जांघों का के कहना ही क्या उफ अंदर सब कैसा होगा उफ मेरी गुरिया
अदिति अभय की तरफ देख नही रही थी आगे देख रही थी कियुंकी अदिति को सर्म आ रही थी अभय से नजरे मिलाने मे

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अभय फिर एकदम से अदिति के मोटे गोरे जांघों के हाथ रख सेहलाने लगता है अपनी गुरिया के मस्त गोरे चिकने जांघों का मजा लेने लगता है लेकिन अभय की इस हरकत से अदिति फिर काप् सिहर जाती है जोर जोर से सासे लेने लगती है अदिति का दिल जोर से धक धक करने लगता है अपने भाई को इस तरह अपने जांघों को सेहलाते देख अदिति होठ को फिर दबा लेती है
अदिति मन मे - आह उफ भइया मेरी जांघों को सेहला रहे है उनका हाथ मेरी बुर के पास है उफ ये एहसास कैसा है मुझे बहोत अच्छा लग रहा है भइया को इस तरह मेरे जांघों को सेहलाने से मेरी बुर गीली होने लगी है
अभय मन मे - उफ बहोत मजा आ रहा है मेरी गुरिया की जांघों को सेहलने मे मस्त सॉफ्ट सॉफ्ट है लेकिन अब इतना ही काफी है

अभय हाथ हटा लेता है लेकिन अदिति जोर जोर से सासे लिये जा रही थी अदिति मन मे - आह अच्छा हुआ भइया रुक गये उफ

साम 4 बजे

आखिर अभय काजल के घर पहुँच जाता है गारी की आवाज सुन मिनिता ममता डोरते हुवे बाहर आती है तो अभय अदिति को देख बहोत खुश हो जाती है दोनों का दिल तो कर रहा था जल्दी से जाके अभय के गले लगने का लेकिन अदिति के होने से शर्मा रहे थे

अदिति भी समझ जाती है और जल्दी से मिनिता ममता के पैर छूके - आउंटी भाभी कैसी है आप दोनों

काजल अदिति को गले लगा के - उफ मेरी बच्ची तुम आई मुझे बहोत खुशी हु
ममता अदिति को गले लगा के - ननद जी आप आई मे भी बहोत खुश हु आप तो बहोत खूबसूरत है
अदिति सर्म के - आप भी , अदिति अंदर जाते हुवे , पता है मुझे जाके गले लग जाइये अपने बाबू से मे बीच मे नही आयुगी

काजल ममता सर्म से लाल हो जाते है अदिति के जाते ही दोनों एकदम से अभय के गले लग जाते है अभय भी दोनों को बाहों मे कस लेता है

ममता - आपको बहोत मिस क्या
काजल - मेने भी
अभय - मेने भी

अभय दोनों को एक एक करके किस करता है फिर सब अंदर जाते है आगन् मे रूमा बैठी थी अदिति भी थी

रूमा अभय को देख शर्मा जाती है लेकिन बहोत खुश भी होती है

अभय रूमा के पास जाके गले लग - दीदी कैसी है आप
रूमा अभय को बाहों के लिये - मे अच्छी हु तु हि दीदी को याद नही करता

अभय खटिये मे बैठ - बहोत याद करता हु दीदी देखो आ गया
रूमा - हा हा देख रही हु

काजल ममता भी बैठ जाते है

काजल - दीदी बाकी लोग कैसे है
अभय - सब अच्छे है फिट है
ममता - देवरानी जी का 4 महिना चल रहा है ना
अभय - जी अपने सही कहा भाभी
ममता अदिति को देख - इस बार गुरिया को कैसे लेके आ गये हु
अदिति मुस्कुराते हुवे - भाई का इरादा तो मुझे लाने का बिल्कुल नही था, अदिति अभय को देख मुस्कुराते हुवे , सही कहा ना
अभय खसाते हुवे - ऐसा नही है गुरिया
रूमा ममता काजल सब समझ रहे थे

बहोत सारी बाते होती है अभय आने की असली वजह भी सब को बता देता है


रात 9 खाना खाने के समय

आगन् मे सभी बैठे हुवे थे गगन बिनोद भी थे

गगन अभय को देख - तेरी बुआ तेरे आने से जितनी खुश होती है उतनी तो मेरे घर आने से भी नही होती बेटा अभय

काजल गगन को देख मुह बना के - शादी के बाद से ही एक चेहरा देखते आ रही हु तो मे वही सरा चेहरा देख खुश कियु हु

काजल की बात सुन सब जोर जोर से हसने लगते है

गगन - मेरी तो इज़त ही नही है

बिनोद अभय को देख - तेरी भाभी भी तुझे बहोत याद करती थी अब आया है तो रहेगा ना कुछ दिन
अभय - जी भैया कुछ दिन रहने वाला हु

गगन अदिति को देख - अदिति बेटा तुम तो बहोत खूबसूरत हो अपने भइया की की तरह

अदिति सर्म से - जी
काजल - कियु नही होगी मेरी भाभी के बच्चे है
गगन - समझ गया मेरी मा मेरा तो बोलना ही बेकर है
काजल - तो बोलो ही मत
फिर सब हसने लगते है

खाना पीना होने के बाद अभय का बिस्तर पीछे ही लगता है अदिति भी अभय के साथ लेती हुई थी

अभय अदिति के ऊपर आके कान मे धीरे से - जानती हो तुम आज रात तेरा भइया बुआ भाभी की लेने वाला है तो तुम रूमा दीदी के साथ सो जाना

अदिति खुले शब्द सुन सर्म से -जी भइया जानती हु
अभय धीरे से - देखना है तो देख सकती हो
अदिति सर्म से - छी गंदे भइया मुझे नही देखना
अभय - हु थोरा प्यार कर लू
अदिति धीरे से सर्म से - हु कर लीजिये

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अभय हा सुनते ही अदिति के नेक यानी गर्दन पे किस करने लगता है अदिति फुट परती है सिसकिया लेने लगती है अदिति - आह उफ भैया
अभय गर्दन पे चूमते हुवे - कैसा लग रहा है गुरिया बोलो ना
अदिति मदहोसी मे सिसकिया लेते हुवे - अच्छा लग रहा है आह भाई

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अभय अदिति के होठ मुह मे लेके चूसने लगता है अदिति भी पूरे जोस मदहोसी मे किस करने लगती है किस करते हुवे अदिति मन मे - आह मुझे भी अब इस सब मे अजीब सा मजा आने लगता है

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अभय जोस मे किस करते हुवे अदिति के बुर पे लंड दबाने लगता है तो अदिति बहोत जायदा शोक होती है काप् जाती है
अदिति - आह भैया रुक जाइये उफ मा मर गई भैया रुक जाइये प्लेस
अभय एकदम से होस मे आते हुवे अदिति को देख - माफ करना गुरिया
अभय अदिति के ऊपर से हट के दुखी बैठ जाता है अदिति उठ के बैठ अभय को देखती है फिर धीरे से कान मे - उदास मत होइये मेरे प्यारे भैया

अदिति अभय के होठ पे किस कर अरमते हुवे - मजे कीजिये मे चलती हु

अदिति आगन् मे खरी अपनी बुर पे हाथ रख - आह मेरी बुर क्या हो रहा है उफ समझ नही आता

वही अभय समझ गया था रास्ते मे अभी तक जो हुआ उसके बाद

अभय मन मे मुस्कुराते हुवे - यानी मेरी गुरिया चाहती है मे प्यार करू

अभय अपनी मा बाकी सब से थोरि देर बात करता है तो वही


काजल नंगी खरी नाइटी लिये हुवे थी गगन काजल का देख - उफ मेरी जान इस उमर मे भी तुम गजब की लगती हो

काजल नाइटी पहनते हुवे गगन को देख - क्या फायेदा आप से कुछ होता नही
गगन मुस्कुराते हुवे - मुझसे नही होता अभय बेटे से तो होता है ना
काजल मुस्कुराते हुवे - अभय बेटा एक नही कई कई औरत को एक साथ संभल सकता है समझ गये
गगन मुस्कुराते हुवे - अच्छा बहोत बरा है क्या
काजल मुस्कुराते हुवे - बहोत जायदा बरा मोटा है और घंटों तक करता है मेने बताया तो था अच्छे से


गगन - हु बहु भी हा
काजल - हा तो बहु मे आज दोनों को साथ मे लेगा मेरा बाबू
गगन - वाह अभय बेटा की तो निकल परी है पता नही कहा से किस्मत लिखवा के लेके आया है

काजल - सो जाइये मे चली
गगन मुस्कुराते हुवे - संभल के फरवा मत लेना
काजल मुस्कुराते हुवे - फार देगा तो क्या हो गया मे खुशी खुशी फरवा लुगी

बिनोद कमरा

बिनोद ममता को देख - तो तेरा बाबू आ गया पूरी रात चोदेगा
ममता सर्म से - आह आपने सही कहा आज तो पूरी रात मम्मी जी मेरी लेगे

ममता नाइटी पहन - अच्छा चलती हु
बिनोद - ठीक है जाओ मजे करो अपने बाबू के साथ


जो सोचा सही सोचा गगन बिनोद को पता चल चुका है सब कुछ लेकिन कब कैसे क्या हुआ उस के बाद अगले update के जानेंगे


अभय लेता था तभी काजल ममता आती है और अभय के दोनों तरफ लेत जाती है

अभय मुस्कुराते हुवे - आज तो पूरी रात बुर लूंगा फार दूंगा
ममता काजल जोस मे - फार् दो ना फिर हम रेडी है


बस फिर जल्दी से तीनों नंगे हो जाते है अभय भी पूरे जोस मे था ममता काजल भी महीने हो गये थे

अभय ममता काजल के पूरे बॉडी को चूमने लगता है किस करते लगता है सिसकिया की आवाज शुरू हो जाती है सास बहु की

अभय किस करता है दोनों के बुर का लंड पिता है और काजल ममता लंड का स्वाद लेते है

अभय फिर काजल को लेता के बिस्तर किनारे खरा होके बुर पे लंड घुसा के चुदाई करने लगता है साथ मे बगल मे लेती ममता की बुर के उंगली करने लगता है काजल दर्द मे मजे आह उफ करने लगती है तो वही बुर मे देवर का उंगली लेके ममता भी आह उफ करने लगती है

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अभय खरे खरे जोर जोर से धक्के मार रहा था ममता एक टाँगे अभय के सीने पे रखी थी और काजल अपनी एक टाँगे उठाये ममता के पैर पे रखी हुई थी एक महीने की तरप दोनों सास बहु पूरी तरह टाँगे फैलाये नंगी लेती मिटा रही थी
काजल दर्द मजे मे - आह उफ मजा आ रहा है अभय बेटा उफ बहोत तरपी है मेरी बुर आह आज मिटा दे तरप मेरी बुर की निकाल दे पानी
अभय ममता की बुर मे उंगली करते धक्का मारते हुवे - निकाल दूंगा बुआ मेरी जान पूरी रात बाकी h
ममता मजे से टाँगे उठाये बुर मे उंगली लेते हुवे - आह देवर जी मेरी बुर मे भी डालिये बहोत तरप रही है
अभय ममता को देख - बस भाभी हो गया
काजल - आह उफ जोर से आने वाला है मा निकल गया बुर से पानी

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अभय काजल के बुर से गिला लंड लेके ममता के ऊपर आके बुर के छेद पे रख एक धक्के मे घुसा देता है ममता दर्द मे - मर गई मम्मी जी
काजल बिस्तर पे लेती ममता के चूचे दबाते हुवे ममता को देख - उफ बहु तरप रही थी ना तेरी बुर ले घुस गया मोटा लम्बा मजे ले
ममता काजल को देख - आह मम्मी जी उफ मजे तो लुंगी ही आपकी बुर से तो पानी निकल गया मेरा बाकी है आह लेकिन आह मेरा भी आने वाला है देवर जी उफ मजा आ रहा है


चुदाई चलती रहती है आह उफ मा फट फच् आवाजे गुजति रहती है
रूमा अभय से बात करना चाहती थी लेकिन मोक्का नही मिला अदिति रूमा बाते करते सो जाते है

रात 1 बजे अदिति को पिसाब लगता है तो अदिति उठ के आगन् मे आती है लेकिन अदिति को धीरे से आह उफ की आवाज पीछे के कमरे मे आती सुनाई देती है

अदिति समझ जाती है चुदाई अभी भी चल रही है तो अदिति को अजीब बेचैनी होने लगती है

अदिति पिसाब करने जाने लगती है लेकिन पैर रुक जाते है दिल दिमाग जाके देखना चाहता था कैसे क्या हो रहा है

आखिर अदिति धीरे से एक जगह खरी दरवाजे के पास अंदर झाक के देखती है अदिति को अभय दिखाई देता है तो नँगा काजल के ऊपर लेता जोर जोर धक्के मार रहा था अभय की गांड उपर नीचे हो रही थी तो वही नीचे काजल टाँगे उठाये फैलाये लंड लेते हुवे आह उफ कर रही थी ममता बगल मे लेती तेज सासे ले रही थी

लेकिन अदिति को देखने जैसा मैन चीज दिखाई नही देता बस हल्का सा काजल के चूचे हिलते दिखाई देते है लेकिन इतना ही काफी था अदिति के लिये अदिति बहोत गर्म हो जाती है टांगों के बीच बालों से ढकी अदिति की बुर गीली होने लगती है

अदिति का हाथ कब बुर पे चला जाता है अदिति को पता भी नही चलता अदिति बुर सेहलने मसलने लगती है और अंदर देखती रहती है लेकिन इतने मे अदिति को मजा नही आ रहा था तो अदिति पैंट के अंदर पैंटी के अंदर हाथ दाल नंगे अपनी बुर पे रखती है फिर बीच की उंगली से बुर के फाके के बीच अंदर दाल उपर नीचे करने लगती है अदिति के होठ दातो से दबे हुवे थे

तभी अभय की नजर अदिति पे जाती है तो देखता है उसकी गुरिया अंदर हाथ दाल बुर मे उंगली कर रही है तो अभय का लंड और टाइट होके फुल जाता है धक्के और तेज हो जाते है

अभय नजरे नीचे कर लेता है ताकि अदिति को पता ना चले उसने उसे देख लिया है

अभय चुदाई करते हुवे मन मे - माफ करना गुरिया तुम्हारी बुर से पानी मे ही निकालूँगा तुम नही निकाल सकती

अभय थोरा तेज आवाज मे ताकि अदिति सुन सके - उफ पिसाब करने जाना है

इतना ही कहता है की अदिति होस मे आती है और अंदर से हाथ निकाल तेजी से भगाते हुवे जाके पिसाब करती है फिर कमरे मे बिस्तर पे लेत जाती है

अदिति मन मे - बच गई, अदिति बुर पे हाथ रख , कियु तु मुझे अब इतना परेसान करने लगी है ये मुझे क्या हो रहा है ये बेचैनी चाहत कैसी है वो मेरे भाई है उफ समझ नही आता मे किया करू

सुबह होती है

काजल अभय को देखते हुवे - आज तो मजा ही आ गया लेकिन उफ लेकिन हाय मेरी कमर, काजल बुर हाथ रख, उफ मेरी बुर मे ये जलन
ममता अपनी बुर को देख - आह मम्मी जी मजा तो रात बहोत आया ये तो है लेकिन आह बुर की हालत खराब है

काजल ममता नहाते है रूमा अदिति भी उठ जाते है गगन बिनोद काम पे चले जाते है लेकिन अभय सोता रहता है

9 बज गये थे अदिति जाती है अभय को जगाने अभय पैंट पहन सोया था कियुंकी उसे पता था अदिति आयेगी

अदिति अभय के पास बैठ अभय को देखते हुवे मन मे - कितने आराम से वो रहे है रात भर कांड करने के बाद

तभी एकदम से अभय अदिति को पकर बिस्तर पे लेता के अदिति के ऊपर आके मुस्कुराते हुवे - पकर लिया
अदिति हैरान होके - नही भइया आप ने चीटिंग की है
अभय मुस्कुराते हुवे - नही मेने नही की
अदिति मुह बना के - जगे थे लेकिन नाटक कर रहे थे ये चीटिंग ही है
अभय मुस्कुराते हुवे - अच्छा चलो मान की अब होठ का रस पीने दो

make out bed
अभय फिर अदिति के होठ चूसने लगता है अदिति अभय को बाहों मे कसते हुवे मन मे - चूस लीजिये भाई जितना पीना है रस मेरे होठो का पी लीजिये अब तो आपको अपने होठो के रस पिलाने की आदत हो गई है

अभय किस करने के बाद अदिति को देख -मजा आ गया
अदिति सर्म से - गंदे भाई
अभय अदिति के ऊपर से नीचे खरा होके - हद है सब मुझे बेसरम ठरकी कहते है अब मेरी गुरिया मुझे गंदा भाई बोलती है

अदिति खरी होके अभय को जिब दिखा के - है आप गंदे भाई
अभय - रुक तुम्हे मे बताता हु

लेकिन अदिति भाग जाती है अभय बाथरूम जाता है नहाता है खाता है बाते करता है एसी मे 10 बज जाते है

अभय एक जगह खरा था और किसी को फोन करता है

अभय - अगर मे आपके पास आ गया अभी तो आप ढोरी पे किस करने देगी

औरत - सपने देखो बेसरम कही का मान ही नही सकती
अभय मुस्कुराते हुवे - आके देखो खुद उसी जगह पे मे खरा हु
औरत - झूठा अगर ऐसा है तो मे आती हु अभी
अभय मुस्कुराते हुवे - याद है ना ढोरी पे किस करने देना होगा
औरत शर्म से - हा हा ठीक है समझ गई

फोन कट

औरत कमरे मे आईने के पास खरी अच्छे से खुद को देखती है रेडी होती है फिर बाहर निकल अभय उसी जगह जहा अभय वो दूर हुवे थे

औरत चलते हुवे मन मे - हद है मे भला कियु उसके लिये रेडी हुई और कियु उसकी सर्ट मानी जबकि मुझे पता है वो उस जगह सच मे खरा होगा लेकिन उसके बाद भी उपर से मे उससे मिलने के लिये इतनी बेचैन कियु हो रही हु मेरे पैर इतने तेज कियु चल रहे है मे इतना खुश कियु हु

बेचारी उलझन मे सोचते सोचते रोड पे उसी जगह पहुँच जाती है सामने देखती है तो अभय खरा मुस्कुराते हुवे उसे ही देख रहा था

आज के लिये इतना ही 🙏🙏
 

Ek number

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chapter 101

तो दिशा विजय बगीचे मे अंदर कोने मे चटाइ बिछाये लेते थे विजय का हाथ दिशा के दोनों चूचे पे था

दिशा विजय को देख - दबाइये देवर जी
विजय दिशा को देखता है फिर दोनों हाथ हटा के उठ के बैठ जाता है दिशा हैरान होती है और दिशा भी उठ के बैठ जाती h विजय को देखने लगती है

विजय नजरे नीचे किये - कोई फीलिंग नही आ रही ना मेरा दिल करना चाहता है ये गलत है भले ही आपकी मर्ज़ी हो फिर भी जिसपे हक भइया का है उसपे मेरा नही मस्ती बाते खुल के करने तक सही है

विजय दिशा को देख भाभी दोस्त की बीवी हो या भाई की बीवी हो भले मर्ज़ी हो लेकिन सोचना उस इंसान को है क्या वो अपने दोस्त की बीवी अपने भइया की बीवी के साथ करने के बाद अपने दोस्त भाई के सामने कैसे जायेगा

जो सही गलत ना सोच सिर्फ अपने दोस्त भाई की बीवी के साथ कर लेते है वो सच्चा दोस्त भाई हो ही नही सकता

दिशा विजय को देख - आपके भइया आपकी मा दीदी बीवी के साथ करते है उसका क्या
विजय मुस्कुराते हुवे - राजा है मेरे भइया मे उनका दास मा दीदी प्यार करते है उनसे भइया भी रीमा मे सब भैया के चाहने वाले है

दिशा - मेने कई बार देखा आप मुझे घूर के देखते थे देखिये अगर आपके मन मे है कुछ मेरे साथ करने की तो सच अभी कर सकते है मुझे चोद भी सकते है

विजय - बस भाभी बहोत हो गया आपसे ये उमीद नही थी आप तो मेरे पीछे ही पर गई है हा आपसे बाते मस्ती मजाक करके अच्छा लगता है लेकिन मे आपके लिये कभी बुरा नही सोचा ना सोच सकता हु हा मे आपको कई बार घूर के देखता था उसकी वजह ये थी आप बहोत खूबसूरत है बॉडी भी अच्छी है तो मे आपको देख ये सोचता था की रीमा भी किया शादी के आप आपकी जैसी और खूबसूरत बॉडी वाली बन जायेगी

दिशा हैरान होती है शोक भी

दिशा विजय का हाथ पकर - माफ करना देवर जी मे जानती थी आप बुरे नही है लेकिन जब आप मुझे घूर के देखते थे तो मुझे गलत लगा इस लिये मे आपका टेस्ट ले रही थी

दिशा की बात विजय सो शोक कर देती है
विजय - क्या भाभी आप मुझे इतना गिरा
दिशा विजय के गाल पे हाथ रख - माफ कर दीजिये एक और बरी वजह है इस लिये आपका टेस्ट लिया

विजय - एक और वजह वो क्या है
दिशा मिनिता आसा की कहानी बताती है

विजय पुरा शोक हैरान गुस्से से - क्या कहा उन दोनों कमीनो की इतनी हिम्मत की मेरी मा बरी मा पे हाथ डाला मे आज ही दोनों को जान से मार दूंगा
विजय गुस्से से उठने लगता है तो दिशा विजय का हाथ पकर - सांत होके बैठ जाइये आपके भइया ने अच्छे से सजा दे दी है

विजय दिशा की बात सुन बैठ जाता है लेकिन गुस्से मे रहता है

दिशा गहरी सास लेके - आपकी बरी मा मेरी मम्मी जी अपने देवर को बहोत मानती प्यार करती थी मम्मी जी को लगा उनका देवर बहोत अच्छा प्यारा है लेकिन धीरे धीरे चाचा जी की नियत बिगरने लगी गंदी बाते करने लगे फिर भी मम्मी जी मजाक मे ले देती देवर समझ पर एक दिन तो
बस यही जब सचाई मुझे आपके भइया ने बताई और आप मुझे घूर के देखते थे इस लिये आपका टेस्ट लिया माफ करना आपका दिल दुखाया मेने

विजय दिशा के हाथ पकर - कोई बात नही भाभी आप ने जो किया एकदम सही क्या आज के समय मे लोग अंदर से कितने गिरे है पता ही नही चलता

दिशा - आपके भइया किसी घटिया इंसान को अपना दोस्त भाई बनायेगे ही नही और ये मेने देख लिया

विजय - हु बाकी का पता नही लेकिन मे जीत जीत भइया के लिये जान दे सकते है
दिशा इमोसनल होके - हा जानती हु इस लिये मे बेफ़िकर रहती हु कियुंकी आप तीनों है उनके साथ


( दोस्तो मेरी बात पे ध्यान दे प्लेस )

दिशा कियु कर रही थी आपको पता चल गया जाहिर है आसा की कहानी जानने के बाद दिशा विजय को घूर के देखने के बाद दिशा टेस्ट लेती है

जब विजय दिशा की कहानी चल रही थी तो मे एक सस्पेंस बना रहा था मेरी स्टोरी मे कुछ होता है तो उसकी एक वजह होती है

मैन करेक्टर की मा बहन के साथ कोई कुछ करे जायदा तर लोगो को ये पसंद नही आती सेम मेरा भी है इस लिये 5 स्टोरी मे मेने वैसा ही लिखा की जो लोग चाहते है

लेकिन दोस्तो आप सभी को एक बात सझनी होगी हर चीज हमे अपने हिसाब से नही मिल सकती

जरा सोचिये आप के दिमाग मे एक अच्छी स्टोरी आई आपने सोचा स्टोरी बहोत अच्छी है लोगो के बीच लाना चाहिये फिर आप ने पूरे मन जोस से दिल से स्टोरी लिखी लोगो के बीच आये लेकिन 5 chapter बाद ही लोग कॉमेंट करके बोलने लगे, नही ऐसा मत करो ये गलत है ये नही होना चाहिये

अब आप ऐसे कॉमेंट पढ़ने के बाद किया उसी जोस जुनून दिल से आगे स्टोरी लिख पाओगे मेरा जवाब नही

कियुंकी आप ने जो स्टोरी बनाई सोची जैसा आप उतार ही नही पा रहे तो आपको वो मजा आयेगा ही नही

xforum पे कई कई अच्छी स्टोरी आधे पे बंद परी है उसकी वजह ये भी एक है कियुंकी Writer जीस तरह स्टोरी लाना चाहता है लोग लाने नही देते बस अपनी सोचते है Writer की नही

मेरी एक स्टोरी एसी वजह से बंद हो गई

xforum पे कई स्टोरी ऐसी है जिसमे मुझे भी कुछ चीजे बहोत अच्छी नही लगती लेकिन मे सिकायत नही करता जनता हु हर चीजे जो मे जिस तरह चाहता हु मिल नही सकता

कई स्टोरी मे सस्पेंस बना रहता है लेकिन लोग पहले से ही कॉमेंट मे ये गलत हो रहा है मत करो बोलने लग जाते है
जो स्टोरी मेरी बंद हुई उसमे सबसे जयादा सस्पेंस था जो दिख रहा था हो रहा था वैसा था नही लेकिन लोग इंतज़ार नही कर पाये

तब से मेने एक फैसला लिया मुझे जो लिखना है लिखुंगा किसी की नही सुनुंगा

मेरे दोस्तो जो मेरी स्टोरी शुरू से पढ़ते आ रहे है उन्हें पता है मे अपनी स्टोरी मे क्या रखता हु

ये सारी बाते मेने इस लिये बताई की आप Writer को समझ सको सब की अपनी एक वजह होती है स्टोरी लिखने ही जैसा भी लिखे आप उसे रोको मत नही मजे लो जब Writer को मजा ही नही आयेगा तो वो कियु इतने घंटे लगा के स्टोरी लिखेगा

स्टोरी मे कुछ अलग हट के होना भी चाहिये

मानता हु स्टोरी मे कई चीजे कहानी के हिसाब से होनी बहोत जरूरी है लेकिन जो कुछ लोग लिखते है लिखने दो


बाकी मेरी स्टोरी मे वैसा कुछ नही है ना पहले वाली स्टोरी मे था अगर आगे मेने कोई स्टोरी लिखी उसमे ऐसा कुछ लिखना सोचा तो लिख के रहुंगा

( 1 ) बैलगारी एक सफर - incest
( 2 ) तु मेरा हीरो - incest
( 3 ) किस्मत बदल दूंगा - adultury + incest + fantasy

ये तीन स्टोरी मेरे दिमाग मे जो मे इस स्टोरी के एंड होने के बाद लाने वाला हु तो बताओ आप लोग कोन सी स्टोरी उसके बाद लेके आउ जिसपे जायदा कॉमेंट होगे उस स्टोरी को शुरू करुगा

अब कहानी पे आते है

अभय अदिति गारी से जा रहे थे लेकिन अदिति खिरकी से बाहर देख रही थी लेकिन सर्म से चेहरा लाल था कियुंकी जो देखा अपने भाई को लंड सेहलाते वो सीन अदिति के आखो के समाने घूम रहा था

अदिति नजारा देखते हुवे मन मे - उफ भइया भी ना कही भी शुरू हो जाते है कहा फस गई अब तो मुझे कुछ कुछ होने लगा है अजीब बेचैनी अजीब फीलिंग जग रही है

अभय अदिति को एक नजर देखते हुवे मन मे - हद है यार

अभय गारी फिर साइड मे रोकता है दोनों तरफ खेत ही थे यानी खेतो के बीच रास्ता था

अदिति हैरान अभय को देख - भइया गारी कियु रोकी
अभय अदिति को देख अपने होठ पे हाथ रख मुस्कुराते हुवे -प्यास लगी है
अदिति अभय की बात समझ सर्म से लाल होके - तो पानी पिलो ना
अदिति पोटल अभय को देती है अदिति मजे ली रही थी अभय का
अभय अदिति को देख - अच्छा जी सब जानती हो मुझे किसकी प्यार लगी है चलो आँ जाओ मेरी गुरिया

अदिति के होठ भी सुखाने लगते है अदिति मन मे - उफ भइया के कहते ही मुझे भी प्यार लग गई

अदिति सर्माते हुवे सीट से उठ अभय के पास जाती है अभय अदिति को पकर अपनी गोद मे बैठा लेता है अदिति एकदम से सिहर जाती है सर्म से लाल होके अभय को देखने लगती है अभय एक हाथ अदिति के कमर पे रखता है तो अदिति कस के होठ दबा लेती है अभय एक हाथ अदिति के चेहरे पे रखता है

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अभय अदिति की आखो मे देख - गुरिया प्यार लगी है होठ का रस पीना है अपनी गुरिया के रसीले होठ का
अदिति सर्माते हुवे अभय को देख - भाई मेने कभी भी रोका है
अभय धीरे से कान मे - नही लेकिन अभी तुम मेरी गोद मे बैठी हो तो बहोत कुछ फिल हो रहा है
अभय की बात सुन समझ अदिति सिहर जाती है तेज सासे लेने लगती है अदिति सर्म से धीरे से - आप बहोत गंदे है
अभय मुस्कुराते हुवे - बेसरम भी

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अभय अदिति के होठ पे टूट परता है अदिति के अपनी गुरिया के होठ को चूस चूस के रस पीने लगता है अदिति अपने भाई को गोद मे बैठी किस करते हुवे मन मे - फिल उफ भइया फिल तो मुझे भी bah कुछ हो रहा है आह अलग ही जोस आग लग जाती है अब तो मेरे जिस्म मे
2 mina बाद

अदिति जल्दी से अपनी सीट पे जाते बैठ खिरकी से बाहर देखते हुवे सर्म से मन मे - अजीब था अब तो किस करते वक़्त मे होस खोने लगी हु अजीब नसा चढ़ जाता है अजीब चाहत फिल होती है

अभय अदिति को देखता है फिर मुस्कुराते गारी चालू कर निकल परता है 10 मिनट बाद

अभय अपना एक हाथ अदिति के दोनों गोरे चिकने जांघों के बीच रख सेहलाने लगता है लगता है अभय का हाथ अदिति के मोटे जांघों के बीच उपर नीचे हो रहा था अदिति एकदम से काप् जाती है जल्दी से अभय को देखती है लेकिन अभय रास्ते पे आगे देख रहा था

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अदिति अपने जांघों के बीच बुर के पास अपने भाई का हाथ चलता देखती है तो सिहर जाती है तेज सासे लेने लगती है अदिति भी खिरकी से बाहर देखने लगती है लेकिन होठ दतों से दबा के अपनी सिसकिया रोकने लगती है अभय जांघों को सेहलते हुवे मन मे - उफ गुरिया के मोटे जांघे कितने सॉफ्ट चिकने है सेहलाने मे मजा आ रहा है लेकिन अंदर बुर की गर्मी मुझे साफ फिल हो रही है लगता है बहोत गर्मी है
अदिति मुठी कसे बाहर देखते होठ दबाये मन मे - नही नही आह मुश्किल हो रहा है सेहना मुझे कुछ हो रहा है मेरी बुर मे कुछ हो रहा है आह भइया मत करो ना उफ रुक जाइये पर मुझे बहोत अच्छा भी लग रहा है , अदिति की सिसकिया फुट परती है अदिति जोर से आह उफ सिसकिया करते सिसकिया लेती है

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अभय एक नजर अदिति को देखता है फिर जांघों से हाथ हटा के अदिति के एक हाथ पे रख देता है अदिति अभय को बिना देखे अपने भाई के उंगली मे उंगली मिला के पकर लेती है अभय अदिति को देखता है जो बाहर देख रही थी लेकिन अभय समझ जाता है रास्ता साफ ही आगे बढ़ा जा सकता है

अभय - गुरिया तुम्हारे पैर दर्द कर रहे होगे मेरे जांघों के ऊपर अपने दोनों पैर रख के सीधा कर लो इतना लम्बा सफर पहली बार कर रही हो तो पैर बैठे बैठे दर्द कर रहे होगे

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अदिति हैरान अभय को देखती है अभय अदिति को देख मुस्कुरा देता है अदिति लाल हो जाती है फिर सर्माते अपने दोनों चिकने गोरे पैर अभय के जांघों के ऊपर रख देती है और अपनी जांघों के बीच अपना एक हाथ रख लेती है कियुंकी मिनी स्कर्ट थी सब दिख जाता
अभय अदिति के गोरे सॉफ्ट चिकने पैर जांघों को देख मन मे - कितने गोरे सॉफ्ट चिकने पैर h और जांघों का के कहना ही क्या उफ अंदर सब कैसा होगा उफ मेरी गुरिया
अदिति अभय की तरफ देख नही रही थी आगे देख रही थी कियुंकी अदिति को सर्म आ रही थी अभय से नजरे मिलाने मे

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अभय फिर एकदम से अदिति के मोटे गोरे जांघों के हाथ रख सेहलाने लगता है अपनी गुरिया के मस्त गोरे चिकने जांघों का मजा लेने लगता है लेकिन अभय की इस हरकत से अदिति फिर काप् सिहर जाती है जोर जोर से सासे लेने लगती है अदिति का दिल जोर से धक धक करने लगता है अपने भाई को इस तरह अपने जांघों को सेहलाते देख अदिति होठ को फिर दबा लेती है
अदिति मन मे - आह उफ भइया मेरी जांघों को सेहला रहे है उनका हाथ मेरी बुर के पास है उफ ये एहसास कैसा है मुझे बहोत अच्छा लग रहा है भइया को इस तरह मेरे जांघों को सेहलाने से मेरी बुर गीली होने लगी है
अभय मन मे - उफ बहोत मजा आ रहा है मेरी गुरिया की जांघों को सेहलने मे मस्त सॉफ्ट सॉफ्ट है लेकिन अब इतना ही काफी है

अभय हाथ हटा लेता है लेकिन अदिति जोर जोर से सासे लिये जा रही थी अदिति मन मे - आह अच्छा हुआ भइया रुक गये उफ

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आखिर अभय काजल के घर पहुँच जाता है गारी की आवाज सुन मिनिता ममता डोरते हुवे बाहर आती है तो अभय अदिति को देख बहोत खुश हो जाती है दोनों का दिल तो कर रहा था जल्दी से जाके अभय के गले लगने का लेकिन अदिति के होने से शर्मा रहे थे

अदिति भी समझ जाती है और जल्दी से मिनिता ममता के पैर छूके - आउंटी भाभी कैसी है आप दोनों

काजल अदिति को गले लगा के - उफ मेरी बच्ची तुम आई मुझे बहोत खुशी हु
ममता अदिति को गले लगा के - ननद जी आप आई मे भी बहोत खुश हु आप तो बहोत खूबसूरत है
अदिति सर्म के - आप भी , अदिति अंदर जाते हुवे , पता है मुझे जाके गले लग जाइये अपने बाबू से मे बीच मे नही आयुगी

काजल ममता सर्म से लाल हो जाते है अदिति के जाते ही दोनों एकदम से अभय के गले लग जाते है अभय भी दोनों को बाहों मे कस लेता है

ममता - आपको बहोत मिस क्या
काजल - मेने भी
अभय - मेने भी

अभय दोनों को एक एक करके किस करता है फिर सब अंदर जाते है आगन् मे रूमा बैठी थी अदिति भी थी

रूमा अभय को देख शर्मा जाती है लेकिन बहोत खुश भी होती है

अभय रूमा के पास जाके गले लग - दीदी कैसी है आप
रूमा अभय को बाहों के लिये - मे अच्छी हु तु हि दीदी को याद नही करता

अभय खटिये मे बैठ - बहोत याद करता हु दीदी देखो आ गया
रूमा - हा हा देख रही हु

काजल ममता भी बैठ जाते है

काजल - दीदी बाकी लोग कैसे है
अभय - सब अच्छे है फिट है
ममता - देवरानी जी का 4 महिना चल रहा है ना
अभय - जी अपने सही कहा भाभी
ममता अदिति को देख - इस बार गुरिया को कैसे लेके आ गये हु
अदिति मुस्कुराते हुवे - भाई का इरादा तो मुझे लाने का बिल्कुल नही था, अदिति अभय को देख मुस्कुराते हुवे , सही कहा ना
अभय खसाते हुवे - ऐसा नही है गुरिया
रूमा ममता काजल सब समझ रहे थे

बहोत सारी बाते होती है अभय आने की असली वजह भी सब को बता देता है


रात 9 खाना खाने के समय

आगन् मे सभी बैठे हुवे थे गगन बिनोद भी थे

गगन अभय को देख - तेरी बुआ तेरे आने से जितनी खुश होती है उतनी तो मेरे घर आने से भी नही होती बेटा अभय

काजल गगन को देख मुह बना के - शादी के बाद से ही एक चेहरा देखते आ रही हु तो मे वही सरा चेहरा देख खुश कियु हु

काजल की बात सुन सब जोर जोर से हसने लगते है

गगन - मेरी तो इज़त ही नही है

बिनोद अभय को देख - तेरी भाभी भी तुझे बहोत याद करती थी अब आया है तो रहेगा ना कुछ दिन
अभय - जी भैया कुछ दिन रहने वाला हु

गगन अदिति को देख - अदिति बेटा तुम तो बहोत खूबसूरत हो अपने भइया की की तरह

अदिति सर्म से - जी
काजल - कियु नही होगी मेरी भाभी के बच्चे है
गगन - समझ गया मेरी मा मेरा तो बोलना ही बेकर है
काजल - तो बोलो ही मत
फिर सब हसने लगते है

खाना पीना होने के बाद अभय का बिस्तर पीछे ही लगता है अदिति भी अभय के साथ लेती हुई थी

अभय अदिति के ऊपर आके कान मे धीरे से - जानती हो तुम आज रात तेरा भइया बुआ भाभी की लेने वाला है तो तुम रूमा दीदी के साथ सो जाना

अदिति खुले शब्द सुन सर्म से -जी भइया जानती हु
अभय धीरे से - देखना है तो देख सकती हो
अदिति सर्म से - छी गंदे भइया मुझे नही देखना
अभय - हु थोरा प्यार कर लू
अदिति धीरे से सर्म से - हु कर लीजिये

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अभय हा सुनते ही अदिति के नेक यानी गर्दन पे किस करने लगता है अदिति फुट परती है सिसकिया लेने लगती है अदिति - आह उफ भैया
अभय गर्दन पे चूमते हुवे - कैसा लग रहा है गुरिया बोलो ना
अदिति मदहोसी मे सिसकिया लेते हुवे - अच्छा लग रहा है आह भाई

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अभय अदिति के होठ मुह मे लेके चूसने लगता है अदिति भी पूरे जोस मदहोसी मे किस करने लगती है किस करते हुवे अदिति मन मे - आह मुझे भी अब इस सब मे अजीब सा मजा आने लगता है

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अभय जोस मे किस करते हुवे अदिति के बुर पे लंड दबाने लगता है तो अदिति बहोत जायदा शोक होती है काप् जाती है
अदिति - आह भैया रुक जाइये उफ मा मर गई भैया रुक जाइये प्लेस
अभय एकदम से होस मे आते हुवे अदिति को देख - माफ करना गुरिया
अभय अदिति के ऊपर से हट के दुखी बैठ जाता है अदिति उठ के बैठ अभय को देखती है फिर धीरे से कान मे - उदास मत होइये मेरे प्यारे भैया

अदिति अभय के होठ पे किस कर अरमते हुवे - मजे कीजिये मे चलती हु

अदिति आगन् मे खरी अपनी बुर पे हाथ रख - आह मेरी बुर क्या हो रहा है उफ समझ नही आता

वही अभय समझ गया था रास्ते मे अभी तक जो हुआ उसके बाद

अभय मन मे मुस्कुराते हुवे - यानी मेरी गुरिया चाहती है मे प्यार करू

अभय अपनी मा बाकी सब से थोरि देर बात करता है तो वही


काजल नंगी खरी नाइटी लिये हुवे थी गगन काजल का देख - उफ मेरी जान इस उमर मे भी तुम गजब की लगती हो

काजल नाइटी पहनते हुवे गगन को देख - क्या फायेदा आप से कुछ होता नही
गगन मुस्कुराते हुवे - मुझसे नही होता अभय बेटे से तो होता है ना
काजल मुस्कुराते हुवे - अभय बेटा एक नही कई कई औरत को एक साथ संभल सकता है समझ गये
गगन मुस्कुराते हुवे - अच्छा बहोत बरा है क्या
काजल मुस्कुराते हुवे - बहोत जायदा बरा मोटा है और घंटों तक करता है मेने बताया तो था अच्छे से


गगन - हु बहु भी हा
काजल - हा तो बहु मे आज दोनों को साथ मे लेगा मेरा बाबू
गगन - वाह अभय बेटा की तो निकल परी है पता नही कहा से किस्मत लिखवा के लेके आया है

काजल - सो जाइये मे चली
गगन मुस्कुराते हुवे - संभल के फरवा मत लेना
काजल मुस्कुराते हुवे - फार देगा तो क्या हो गया मे खुशी खुशी फरवा लुगी

बिनोद कमरा

बिनोद ममता को देख - तो तेरा बाबू आ गया पूरी रात चोदेगा
ममता सर्म से - आह आपने सही कहा आज तो पूरी रात मम्मी जी मेरी लेगे

ममता नाइटी पहन - अच्छा चलती हु
बिनोद - ठीक है जाओ मजे करो अपने बाबू के साथ


जो सोचा सही सोचा गगन बिनोद को पता चल चुका है सब कुछ लेकिन कब कैसे क्या हुआ उस के बाद अगले update के जानेंगे


अभय लेता था तभी काजल ममता आती है और अभय के दोनों तरफ लेत जाती है

अभय मुस्कुराते हुवे - आज तो पूरी रात बुर लूंगा फार दूंगा
ममता काजल जोस मे - फार् दो ना फिर हम रेडी है


बस फिर जल्दी से तीनों नंगे हो जाते है अभय भी पूरे जोस मे था ममता काजल भी महीने हो गये थे

अभय ममता काजल के पूरे बॉडी को चूमने लगता है किस करते लगता है सिसकिया की आवाज शुरू हो जाती है सास बहु की

अभय किस करता है दोनों के बुर का लंड पिता है और काजल ममता लंड का स्वाद लेते है

अभय फिर काजल को लेता के बिस्तर किनारे खरा होके बुर पे लंड घुसा के चुदाई करने लगता है साथ मे बगल मे लेती ममता की बुर के उंगली करने लगता है काजल दर्द मे मजे आह उफ करने लगती है तो वही बुर मे देवर का उंगली लेके ममता भी आह उफ करने लगती है

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अभय खरे खरे जोर जोर से धक्के मार रहा था ममता एक टाँगे अभय के सीने पे रखी थी और काजल अपनी एक टाँगे उठाये ममता के पैर पे रखी हुई थी एक महीने की तरप दोनों सास बहु पूरी तरह टाँगे फैलाये नंगी लेती मिटा रही थी
काजल दर्द मजे मे - आह उफ मजा आ रहा है अभय बेटा उफ बहोत तरपी है मेरी बुर आह आज मिटा दे तरप मेरी बुर की निकाल दे पानी
अभय ममता की बुर मे उंगली करते धक्का मारते हुवे - निकाल दूंगा बुआ मेरी जान पूरी रात बाकी h
ममता मजे से टाँगे उठाये बुर मे उंगली लेते हुवे - आह देवर जी मेरी बुर मे भी डालिये बहोत तरप रही है
अभय ममता को देख - बस भाभी हो गया
काजल - आह उफ जोर से आने वाला है मा निकल गया बुर से पानी

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अभय काजल के बुर से गिला लंड लेके ममता के ऊपर आके बुर के छेद पे रख एक धक्के मे घुसा देता है ममता दर्द मे - मर गई मम्मी जी
काजल बिस्तर पे लेती ममता के चूचे दबाते हुवे ममता को देख - उफ बहु तरप रही थी ना तेरी बुर ले घुस गया मोटा लम्बा मजे ले
ममता काजल को देख - आह मम्मी जी उफ मजे तो लुंगी ही आपकी बुर से तो पानी निकल गया मेरा बाकी है आह लेकिन आह मेरा भी आने वाला है देवर जी उफ मजा आ रहा है


चुदाई चलती रहती है आह उफ मा फट फच् आवाजे गुजति रहती है
रूमा अभय से बात करना चाहती थी लेकिन मोक्का नही मिला अदिति रूमा बाते करते सो जाते है

रात 1 बजे अदिति को पिसाब लगता है तो अदिति उठ के आगन् मे आती है लेकिन अदिति को धीरे से आह उफ की आवाज पीछे के कमरे मे आती सुनाई देती है

अदिति समझ जाती है चुदाई अभी भी चल रही है तो अदिति को अजीब बेचैनी होने लगती है

अदिति पिसाब करने जाने लगती है लेकिन पैर रुक जाते है दिल दिमाग जाके देखना चाहता था कैसे क्या हो रहा है

आखिर अदिति धीरे से एक जगह खरी दरवाजे के पास अंदर झाक के देखती है अदिति को अभय दिखाई देता है तो नँगा काजल के ऊपर लेता जोर जोर धक्के मार रहा था अभय की गांड उपर नीचे हो रही थी तो वही नीचे काजल टाँगे उठाये फैलाये लंड लेते हुवे आह उफ कर रही थी ममता बगल मे लेती तेज सासे ले रही थी

लेकिन अदिति को देखने जैसा मैन चीज दिखाई नही देता बस हल्का सा काजल के चूचे हिलते दिखाई देते है लेकिन इतना ही काफी था अदिति के लिये अदिति बहोत गर्म हो जाती है टांगों के बीच बालों से ढकी अदिति की बुर गीली होने लगती है

अदिति का हाथ कब बुर पे चला जाता है अदिति को पता भी नही चलता अदिति बुर सेहलने मसलने लगती है और अंदर देखती रहती है लेकिन इतने मे अदिति को मजा नही आ रहा था तो अदिति पैंट के अंदर पैंटी के अंदर हाथ दाल नंगे अपनी बुर पे रखती है फिर बीच की उंगली से बुर के फाके के बीच अंदर दाल उपर नीचे करने लगती है अदिति के होठ दातो से दबे हुवे थे

तभी अभय की नजर अदिति पे जाती है तो देखता है उसकी गुरिया अंदर हाथ दाल बुर मे उंगली कर रही है तो अभय का लंड और टाइट होके फुल जाता है धक्के और तेज हो जाते है

अभय नजरे नीचे कर लेता है ताकि अदिति को पता ना चले उसने उसे देख लिया है

अभय चुदाई करते हुवे मन मे - माफ करना गुरिया तुम्हारी बुर से पानी मे ही निकालूँगा तुम नही निकाल सकती

अभय थोरा तेज आवाज मे ताकि अदिति सुन सके - उफ पिसाब करने जाना है

इतना ही कहता है की अदिति होस मे आती है और अंदर से हाथ निकाल तेजी से भगाते हुवे जाके पिसाब करती है फिर कमरे मे बिस्तर पे लेत जाती है

अदिति मन मे - बच गई, अदिति बुर पे हाथ रख , कियु तु मुझे अब इतना परेसान करने लगी है ये मुझे क्या हो रहा है ये बेचैनी चाहत कैसी है वो मेरे भाई है उफ समझ नही आता मे किया करू

सुबह होती है

काजल अभय को देखते हुवे - आज तो मजा ही आ गया लेकिन उफ लेकिन हाय मेरी कमर, काजल बुर हाथ रख, उफ मेरी बुर मे ये जलन
ममता अपनी बुर को देख - आह मम्मी जी मजा तो रात बहोत आया ये तो है लेकिन आह बुर की हालत खराब है

काजल ममता नहाते है रूमा अदिति भी उठ जाते है गगन बिनोद काम पे चले जाते है लेकिन अभय सोता रहता है

9 बज गये थे अदिति जाती है अभय को जगाने अभय पैंट पहन सोया था कियुंकी उसे पता था अदिति आयेगी

अदिति अभय के पास बैठ अभय को देखते हुवे मन मे - कितने आराम से वो रहे है रात भर कांड करने के बाद

तभी एकदम से अभय अदिति को पकर बिस्तर पे लेता के अदिति के ऊपर आके मुस्कुराते हुवे - पकर लिया
अदिति हैरान होके - नही भइया आप ने चीटिंग की है
अभय मुस्कुराते हुवे - नही मेने नही की
अदिति मुह बना के - जगे थे लेकिन नाटक कर रहे थे ये चीटिंग ही है
अभय मुस्कुराते हुवे - अच्छा चलो मान की अब होठ का रस पीने दो

make out bed
अभय फिर अदिति के होठ चूसने लगता है अदिति अभय को बाहों मे कसते हुवे मन मे - चूस लीजिये भाई जितना पीना है रस मेरे होठो का पी लीजिये अब तो आपको अपने होठो के रस पिलाने की आदत हो गई है

अभय किस करने के बाद अदिति को देख -मजा आ गया
अदिति सर्म से - गंदे भाई
अभय अदिति के ऊपर से नीचे खरा होके - हद है सब मुझे बेसरम ठरकी कहते है अब मेरी गुरिया मुझे गंदा भाई बोलती है

अदिति खरी होके अभय को जिब दिखा के - है आप गंदे भाई
अभय - रुक तुम्हे मे बताता हु

लेकिन अदिति भाग जाती है अभय बाथरूम जाता है नहाता है खाता है बाते करता है एसी मे 10 बज जाते है

अभय एक जगह खरा था और किसी को फोन करता है

अभय - अगर मे आपके पास आ गया अभी तो आप ढोरी पे किस करने देगी

औरत - सपने देखो बेसरम कही का मान ही नही सकती
अभय मुस्कुराते हुवे - आके देखो खुद उसी जगह पे मे खरा हु
औरत - झूठा अगर ऐसा है तो मे आती हु अभी
अभय मुस्कुराते हुवे - याद है ना ढोरी पे किस करने देना होगा
औरत शर्म से - हा हा ठीक है समझ गई

फोन कट

औरत कमरे मे आईने के पास खरी अच्छे से खुद को देखती है रेडी होती है फिर बाहर निकल अभय उसी जगह जहा अभय वो दूर हुवे थे

औरत चलते हुवे मन मे - हद है मे भला कियु उसके लिये रेडी हुई और कियु उसकी सर्ट मानी जबकि मुझे पता है वो उस जगह सच मे खरा होगा लेकिन उसके बाद भी उपर से मे उससे मिलने के लिये इतनी बेचैन कियु हो रही हु मेरे पैर इतने तेज कियु चल रहे है मे इतना खुश कियु हु

बेचारी उलझन मे सोचते सोचते रोड पे उसी जगह पहुँच जाती है सामने देखती है तो अभय खरा मुस्कुराते हुवे उसे ही देख रहा था

आज के लिये इतना ही 🙏🙏
Behtreen update

Disha vijay ka kya suspense hai dekhte hai ,waise dono ka seen ban jata to maza aa jata.
Aap ko sahi lage wahi likho . Reader ka kya hai Sabi अलग अलग सोच hai.
 
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