sunoanuj
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नई कहानी के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएँ ! एक जबरदस्त कहानी है!
अगले भाग की प्रतीक्षा रहेगी !
अगले भाग की प्रतीक्षा रहेगी !
Congratulations( तू लौट के आजा मेरे लाल )
ये कहानी एक ऐसे लरके की होने वाली है जिसको कीड्नैपर् जब वो लरका x साल का होता है तो कीड्नैप कर के ले जाते है और वो लरका अपने मा बेहन भाई से दूर चला जाता है या कहे दूर कर दिया जाता है लेकिन वो लरका उन कीड्नैपर् के चंगुल से अपने आप को बचा कर 4 साल बाद वापस आता है लेकिन कोन है कीड्नैपर् कियु ले गये थे इन 4 सालों मे उसके साथ किया हुआ था लरका कैसे उन सभी से बच निकलता है इन 4 सालों मे किया बदला है वो लरका घर जायेगा तो किया होगा किया करेगा आगे कैसा होगा उसके आगे का सफर ये तो स्टोरी पढ़ने के बाद ही पता चलेगा
स्टोरी मे एक्शन रोमांस इमोसन सेक्स सब होगा लेकिन सब सही समय पे ना कोई जल्दी ना पेहले मे इस स्टोरी मे हर एक चीज मे जितना हो सके फोकस करने वाला हु दो स्टोरी लिखी लेकिन मेने सिर्फ सेक्स पे फोकस किया लेकिन इस स्टोरी मे हर एक चीज हो लेकर चलुंगा
मे अपनी पूरी कोसिस करुगा स्टोरी को अच्छे से लिखने की ताकि आप लोगो को पसंद आये
introduction
( हीरो ) अभय सिन्हा - उमर 19 - साल - बहोत ही हैंडसम सिक्स पैक बॉडी दिमाग से तेज फुल तरेंड गन चाकू मर्सल आर्ट फाइटिंग मे स्पर्ट किसी को घर मे घुस कर मारना छोरी करना इसके लिये बहुत आसान है लेकिन ये सब उसको इतनी आसानी से नही मिला या कहे तो वो जो बना या है अपनी मर्ज़ी से नही
( हीरो ) की मा - आशा सिन्हा - उमर 41 - साल - बहुत ही खुबसूरत हॉट हाउस वाइफ दिल की साफ बहुत की संस्कारी अपने बच्चो पे जान लुटाने के लिये तैयार रहती है उपर से नीचे तक कयामत चलती है तो पीछे का हिस्सा हिलते बिना रेह नही सकता भरा बदन बरे चुचे जो साफ सारी के ऊपर से भी चुचे के उभार दिखाई दे जाते है गांड बाहर निकली हुई कोई भी लरका हो या बूढ़ा आशा को एक बार देखता है तो बस यही मुह से निकलता है कास एक बार मिल जाये
( हीरो ) के पिता - उमेस् सिन्हा - उमर 43 - साल - ये भाई साहब अपनी खुबसूरत बीवी को छोर किसी और के प्यार मे पागल होकर उसे लेकर ही भाग गया जब आशा के तीनो बच्चे छोटे थे केहते है ना अपने पेर का फल अच्छा नही लगता यही भाई का था अब आप समझ ही गये होगे इसका करेक्टर
( हीरो ) का भरा भाई - विनय सिन्हा - उमर 20 साल - दिल का बहुत अच्छा है बॉडी अच्छी है हैंडसम भी है हमारे हीरो से बहोत प्यार करता है लेकिन इसका रोल जायदा नही होगा जल्दी ही ये ऊपर चले जायेंगे
télécharger modifier image gratuit
हीरो - की भाभी - विनय की बीवी - दिशा सिन्हा - उमर 19 साल - अपने गाव की सब से खुबसूरत लरकी विनय को मिली लेकिन किस्मत ने विनय को उससे अलग कर दिया और दिशा आगे बिधवा हो जायेगी
( हीरो ) की लाडली या कहे सब की लाडली सबसे छोटी - अदिति सिन्हा - उमर 18 साल - बहुत ही खुबसूरत हॉट पूरी मा पे गई है 18 साल मे ही उपर नीचे आगे पीछे से किसी को भी घायल कर सकती ही पतली कमर सीना बाहर निकला हुवा पीछे का बम भी बाहर निकले हुवे कोई भी एक बार देख ले तो उसे पाना चाहेगा
तो ये रहे किरदार बाकी कई किरदार आयेगे तो पता चल जायेगा update की बात करे तो मेरा टाइम फिस्क है कल रात 9 से 10 बजे तक मे update दे दूंगा फिर एक दिन छोर उसी टाइम पे update देता रहुंगा
उमीद करता हु मे आप लोगो को ये स्टोरी पसंद आये
मिलते है![]()
Congratulations( तू लौट के आजा मेरे लाल )
ये कहानी एक ऐसे लरके की होने वाली है जिसको कीड्नैपर् जब वो लरका x साल का होता है तो कीड्नैप कर के ले जाते है और वो लरका अपने मा बेहन भाई से दूर चला जाता है या कहे दूर कर दिया जाता है लेकिन वो लरका उन कीड्नैपर् के चंगुल से अपने आप को बचा कर 4 साल बाद वापस आता है लेकिन कोन है कीड्नैपर् कियु ले गये थे इन 4 सालों मे उसके साथ किया हुआ था लरका कैसे उन सभी से बच निकलता है इन 4 सालों मे किया बदला है वो लरका घर जायेगा तो किया होगा किया करेगा आगे कैसा होगा उसके आगे का सफर ये तो स्टोरी पढ़ने के बाद ही पता चलेगा
स्टोरी मे एक्शन रोमांस इमोसन सेक्स सब होगा लेकिन सब सही समय पे ना कोई जल्दी ना पेहले मे इस स्टोरी मे हर एक चीज मे जितना हो सके फोकस करने वाला हु दो स्टोरी लिखी लेकिन मेने सिर्फ सेक्स पे फोकस किया लेकिन इस स्टोरी मे हर एक चीज हो लेकर चलुंगा
मे अपनी पूरी कोसिस करुगा स्टोरी को अच्छे से लिखने की ताकि आप लोगो को पसंद आये
introduction
( हीरो ) अभय सिन्हा - उमर 19 - साल - बहोत ही हैंडसम सिक्स पैक बॉडी दिमाग से तेज फुल तरेंड गन चाकू मर्सल आर्ट फाइटिंग मे स्पर्ट किसी को घर मे घुस कर मारना छोरी करना इसके लिये बहुत आसान है लेकिन ये सब उसको इतनी आसानी से नही मिला या कहे तो वो जो बना या है अपनी मर्ज़ी से नही
( हीरो ) की मा - आशा सिन्हा - उमर 41 - साल - बहुत ही खुबसूरत हॉट हाउस वाइफ दिल की साफ बहुत की संस्कारी अपने बच्चो पे जान लुटाने के लिये तैयार रहती है उपर से नीचे तक कयामत चलती है तो पीछे का हिस्सा हिलते बिना रेह नही सकता भरा बदन बरे चुचे जो साफ सारी के ऊपर से भी चुचे के उभार दिखाई दे जाते है गांड बाहर निकली हुई कोई भी लरका हो या बूढ़ा आशा को एक बार देखता है तो बस यही मुह से निकलता है कास एक बार मिल जाये
( हीरो ) के पिता - उमेस् सिन्हा - उमर 43 - साल - ये भाई साहब अपनी खुबसूरत बीवी को छोर किसी और के प्यार मे पागल होकर उसे लेकर ही भाग गया जब आशा के तीनो बच्चे छोटे थे केहते है ना अपने पेर का फल अच्छा नही लगता यही भाई का था अब आप समझ ही गये होगे इसका करेक्टर
( हीरो ) का भरा भाई - विनय सिन्हा - उमर 20 साल - दिल का बहुत अच्छा है बॉडी अच्छी है हैंडसम भी है हमारे हीरो से बहोत प्यार करता है लेकिन इसका रोल जायदा नही होगा जल्दी ही ये ऊपर चले जायेंगे
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हीरो - की भाभी - विनय की बीवी - दिशा सिन्हा - उमर 19 साल - अपने गाव की सब से खुबसूरत लरकी विनय को मिली लेकिन किस्मत ने विनय को उससे अलग कर दिया और दिशा आगे बिधवा हो जायेगी
( हीरो ) की लाडली या कहे सब की लाडली सबसे छोटी - अदिति सिन्हा - उमर 18 साल - बहुत ही खुबसूरत हॉट पूरी मा पे गई है 18 साल मे ही उपर नीचे आगे पीछे से किसी को भी घायल कर सकती ही पतली कमर सीना बाहर निकला हुवा पीछे का बम भी बाहर निकले हुवे कोई भी एक बार देख ले तो उसे पाना चाहेगा
तो ये रहे किरदार बाकी कई किरदार आयेगे तो पता चल जायेगा update की बात करे तो मेरा टाइम फिस्क है कल रात 9 से 10 बजे तक मे update दे दूंगा फिर एक दिन छोर उसी टाइम पे update देता रहुंगा
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Badhiya shaandar shuruwatchapter 1
PBA रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म नंबर 2 पे b11 ट्रेन pba स्टेशन से 24 घंटे की सफर कर ssa के लिये निकलने वाली थी अनासमेंट बार बार हो रही थी की pba ट्रेन 10 मिनट मे अपने मजिल् के लिये रवाना होगी कई सारे यात्री तो लेट हो चुके थे जल्दी जल्दी अपने बोगी मे चड रहे थे चारों तरफ सोर सराबा था
लेकिन खिरकी के सीट पे एक लरका जिसने जीन्स सर्ट पेहना था बैठे खिरकी के बाहर देखे जा रहा था लरका बहुत हैंडसम था हाथो मे एक घरी गले मे एक लोकेट था लरके को कोई सोर सराबा सुनाई नही दे रहा था ना ही उसे ये पता था कोन उसके सामने वाली और उसके सीट पे कोन बैठ रहा है कियुंकी लरका बाहर किसी चीजो पे फोकस कर कही खोया हुवा था उस लरके के चेहरे पे खुशी गम दोनों थे लेकिन कोई भी उस लरके के चेहरे को देख बता नही सकता था की वो लरका खुश है या दुखी है
10 मिनट हो चुके थे ट्रेन एक जोर दार होर्रन मार अपने मंजिल की तरफ निकल परती है लरके को अहसास होता है ट्रेन चल परी है फिर भी ना वो अपने आस पास कोन बैठा है देखता है लरका बस बाहर देखे जा रहा था जैसे उनको आस पास किया हो रहा है उससे उसे कोई मतलम ही ना हो लरका अपने होठो को ठोरा खोल बस इतना केहता है धीरे से मा मे आ रहा हु
4 साल पेहले - जब हमारा हीरो 15 साल का था
संडे का दिन था एक कमरे मे अभय आराम से सोया हुवा था बिंदास कमरे मे आसा आती है और अभय को आराम से सोता देख उसके चेहरे पे एक बरी इस्माइल् आ जाती है आसा अभय के पास जाके बालों को गालो को सहलाते हुवे धीरे से प्यार से उठ जा मेरे लाल सुबह हो चुकी है कब तक सोता रहेगा तेरी गुरिया भाई दोनों कब का उठ चुके है
अपनी मा की प्यारी मीठी आवाज जैसे ही अभय के कानों मे जाती है अभय की नींद टूट जाती है अभय अपनी आखे धीरे के खोलता है तो उसके सामने आसा का प्यारा खूबसूरत चेहरा दिखाई देता है अभय अपनी मा को देख प्यार से मा सुबह सुबह जब मे आपकी मीठी आवाजे और आपका प्यारा खूबसूरत चेहरा देखता हु ना तो मेरा पुरा दिन अच्छा जाता है
आसा अभय को प्यार से गालो पे किस करते हुवे मुस्कुराते हुवे अच्छा ऐसा है किया मेरे लाल अभय अंगराई लेते हुवे उठ कर बैठ मा को देखते हुवे हा और आपकी किस्सी जब रोज सुबह मिलती है तो पूरा दिन बन जाता है आसा हस्ते हुवे अभय के गालो पे प्यार से चाता मारते हुवे शैतान लाडला
तभी अंदर मे सबकी लाडली अदिति आती है कमर पे दोनों हाथो को रखे हुवे अभय को देख एक प्यारा सा चेहरा बनाते हुवे भाई जब आप मेरा चेहरा देखते है तो अभय अदिति की तरफ थोरि देर देखता है और फिर अजीब सा चेहरा बनाते हुवे अदिति को देख जब सुबह तेरा चेहरा देखता हु तो पूरा दिन बेकार जाता है
अपने भाई की बात सुनने के बाद अपनी बइजति होने के बाद अदिति रोना सुरु कर देती है अदिति अपने हाथो से आखो को मलते हुवे बच्चो वाली आवाज मे रोते हुवे किया मे इतनी बुरी दिखती हु जो आपने मुझे ऐसा कहा आसा अदिति अभय को देख अपना सर पकर खरी होते हुवे तुम दोनों का ये रोज का नाटक है एक दूसरे मे जान बस्ती है तुम दोनों की लेकिन नाटक करना बंद नही करोगो आसा जाते हुवे मुझे बहोत काम है आसा ये केह चली जाती है
अभय अदिति को देखते हुवे मुस्कुराते हुवे अदिति के पास जाता है अदिति रोना बंद कर अभय को देखती है अभय अदिति के गालो को पकर दबा देता है अदिति के होठ खुल जाते है उसी के साथ अदिति का चेहरा बहोत फनी भी बन जाता है अभय के फनी चेहरे को देखते हुवे गुरिया चेहरा जब सुबह देखता हु ना तो मेरे चेहरे पे पूरे दिन इस्माइल् रेहती है
अदिति अपने भाई को देखती है फिर अपने भाई के हाथो से अपने चेहरे को छुराते हुवे अभय को देख मुह बनाते हुवे अच्छा सची मे आप झुठ तो नही बोल रहे है ना अभय अदिति के गालो पे किस करते हुवे सच्ची मे अब मे जाता हु अभय मुस्कुराते हुवे बाहर निकल आता है
अभय कमरे से बाहर आता है तो विनय रेडी होकर अपने कमरे से बाहर निकल रहा था विनय की नजर अभय पे जाती है विनय अभय के पास आते हुवे कियु रे इतनी देर कोन सोता है और तुम खुद सुबह कियु नही उठते अभय अपने भाई को देख मुस्कुराते हुवे भाई मा की मीठी आवाज सुने बिना मेरी नींद नही टूटती है
तभी अदिति गुस्से से लाल पीली होते हुवे चिलाते हुवे बाहर आते हुवे अभय को देख भाई आज मे आपको नही छोरुगी ये केह अभय के पीछे पर जाती है अभय अदिति को पूरे गुस्से मे देख समझ जाता है और अभय तेजी से घर के बाहर भागते हुवे गुरिया तुम मुझे पकर नही पाओगी बाय बाय गुरिया
अदिति घर के बाहर तक आती है लेकिन देखती है अभय कही दिखाई नही दे रहा है अदिति गुस्से से आपने अच्छा नही किया भाई जायेंगे कहा जब घर आयेगे तो आपको देख लुंगी
अदिति गुस्से मे इस लिये थी जब अदिति आईने के सामने जाके अपने गालो को पकर दबाती है जैसे अभय ने किया था तो अदिति देखती है उसका चेहरा बहोत अजीब फनी बन गया था ये देख अदिति को समझ मे आ जाता है की उसके भाई के केहने का किया मतलम था की उसका चेहरा देख पूरे दिन उसके चेहरे पे इस्माइल् रेहती है बस बेचारी इसी लिये बहोत गुस्सा थी अभय पे
विनय दोनों की नौटंकी देख ये दोनों का पता नही किया होगा आगे आशा विनय के पास आते हुवे जो होगा नेकिन इन दोनों की वजह से ही घर मे चहल पहल रेहती है विनय मा को देख मुस्कुराते हुवे आप ने सही कहा मा विनय फिर घर से बाहर जाते हुवे ठीक है मा खेतो से होकर आता हु आसा अपने कमरे मे जाते हुवे ठीक है बेटा विनय फिर निकल परता है अदिति गुस्से से अंदर आते हुवे देख लुंगी
अब जानते है अभय का घर कैसा है घर की हालत कैसी है
अभय का घर पूरा घास फुस का है चार कमरे है बीच मे बहोत बरा आगन्
एक कमरा आगन् दूसरा कमरा
बाथरूम
चौथा कमरा आगे मैन दरवाजा तीसरा कमरा
अभय खेतो की तरफ जाता है और आते टाइम कुछ दोस्त मिल जाते है तो दोस्तो से बातें भी करने मे लग जाता है
(परजेंट )
तभी वो लरका अपने यादों से बाहर आ जाता है उस लरके को एहसास होता है ट्रेन रुक चुकी है लेकिन फिर भी वो लरका जैसे का तैसा ही रेहता था हा ये लरका ही हमारा हीरो अभय है जो 4 साल बाद अपने घर जा रहा है
अभय के बिल्कुल सामने खिरकी के सीट पे एक बहोत ही खूबसूरत लरकी बैठी हुई थी उस लरकी की नजर सुरु से ही अभय को ही देखे जा रही थी लरकी के मन मे कई सवाल उठ रहे थे अभय को देख कर लरकी के बगल के एक लरका बैठा था और उस लरके के बगल मे अंकल ऑन्टी
लरकी अभय को उपर से नीचे देख मन मे आखिर ये हैंडसम लरका है कोन उसके चेहरे मे खुशी है और गम भी मे सुरु से ही देख रही हु 5 घंटे हो गये है लेकिन फिर भी ये लरका ना हिलता है ना ही आस पास किसी को देख रहा है जैसे इनको किसी से कोई मतलब ही नही है ना ही आस पास किया हो रहा है मुझे तो लगता है इस लरके ने मुझे भी अभी तक नही देखा होगा
लरकी फिर अभय के कमरे बॉडी चेहरे बालों के स्टाइल को देख मन मे कुछ भी कहो ऐसा हैंडसम अच्छे बॉडी वाले लरके को आज तक नही देखा लरकी फिर अपने आप को उपर से नीचे तक देखते हुवे हु मेरे दोनों बड़े बरे है पतली कमर है पीछे का दोनों बम भी बरे है चेहरा भी बहोत खूबसूरत है बोले तो मे भी बहोत खूबसूरत हु लरकी फिर अभय को देख ये लरका जब मुझे देखेगा तो देखता ही रेह जायेगा लरकी फिर मुस्कुराने लगती है ( लरकी अपने मन मे ही कई कहानी बनाये अभय को देखे जा रही थी )
ट्रेन कोई स्टेशन पे नही रुकी थी सिंगनल ना मिलने के कारन बीच मे रुकी हुई थी दोनों साइड खेत और छोटे मोटे जंगल झारीया थी कुछ किसान दूर दूर देखो मे काम करते दिखाई दे रहे थे
अभय की नजर उन किसान मे जाती है तो अभय को अपने गाव की याद जोरों से आने लगती है अभय के चेहरे पे एएम्प्रेसन चेंज होने लगते है जो की लरकी देख देती है लरकी अभय कि नजरो का पीछा कर बाहर देखती है तो पाती है अभय किसान लोगो को खेतो मे काम करते हुवे देख रहा है लरकी अभय को देखते हुवे मन मे लगता है ये लरका किसी गाव से है और उसे अपनी गाव की याद आ रही है लेकिन ये लरका अकेला है कहा गया था कितने समय बाद जा रहा है अपने गाव समझ नहीं आ रहा है मुझे तो ये लरका ही पूरा अजीब लग रहा है
अभय सब से अंजान बाहर किसानों को देखे जा रहा था तभी अभय की नजर अपने पास वाली झरियों पे जाती है जो हिल रही थी तभी उस झारियो से 2 लोग निकलते है दोनों 30 या 32 साल के थे नॉर्मल कपड़े पेहने हुवे अभय अपनी आखे पूरा फोकस कर दोनों कोई उपर से नीचे तक देखता है उनकी हरकत देखने का नजरिया अभय को उन दोनों को देख बुरी फीलिंग आती अभय को कुछ गर्बर् लगता है उन दोनों मे दोनों को देख समझ अभय की आखे फैल जाती है और अभय का सरीर हिलता है लरकी अभय कि हर हरकत को देख रही थी
अभय देखता है दोनों लोग नॉर्मल बाते करते हुवे ट्रेन कि तरफ बढ़ने लगते है अभय ये देख अपना सरीर सीधा करते हुवे सामने देखता है तो अभय को वही लरकी देखाई देती है लरकी भी अभय के पूरे चेहरे को अच्छे से हैरान हो जाती है उसी के साथ अचानक अभय को अपने आप को देखता देख थोरा शर्मा भी रही थी लेकिन उससे सर्म दूर हो जाते है जल्दी ही
अभय लरकी से अपनी नजरे हटा के अपने चारों तरफ पेहली बार नजरे दोराता है अभय अपने बगल मे देखता है तो एक अंकल और उसके बाद ऑन्टी और एक लरका था
लरकी अभय को अपनी तरफ ना देखता देख उसको अपनी बेज़ती मेहसूस होती है लरकी अभय को देख गुस्से मे ये लरका अपने आप को समझता किया है किया मे खूबसूरत हॉट नही हु जो वो मुझे देख नही रहा अरे मेरे पीछे तो कई लरको के लाइन लगे रेहते है जरूर ये लरका मेरे सामने कुल बनने की कोसिस कर रहा है ताकि वो मुझे इम्प्रेस कर सके ( लरकी अपनी कहानी खुद बना रही खुद से बातें भी करने मे लगी थी )
अभय एक बरी अंगराई लेते हुवे अपने सरीर को हिलाते हुवे हल्का करता है तभी सभी को चिलाने की और आवाजे सुनाई देती है दोनों तरफ से जिसे सुन सभी आवाज की तरफ देखने लगते है लेकिन अभय अपनी आखे बंद कर सीट से सत् सो जाता है
दो लोग जिसे अभय ने देखा था वो दोनों ट्रेन के अंदर आके गन से डरा के लोगो से पैसे वसूल रहे थे और लोग डर के मारे अपनी जान बचाने के लिये पैसे जो सब दे रहे थे ( जान है तो जहान है)
लरकी के पास बैठा लरका लरकी से डरते हुवे दीदी ट्रेन मे दो लोग आके लूट पाट कर रहे है और दोनों के हाथो मे गन भी है लरकी ये सुन हैरान और डर भी जाती है लरकी डरते हुवे सीट से उठ जाके धीरे से मुंडी आगे कर देखती है तो दोनों लोग उनके पास जल्दी ही आने वाले थे लरकी डरते हुवे उसकी सीट पे बैठे अंकल ऑन्टी से मा पापा अब हम किया करेगे अंकल पीछे देखते हुवे बेटा तुम अपनी सीट पे बैठ जाओ जाके उन लोगो को सिर्फ पैसा चाहिये वो लोग लोगो को नहीं मारेगे अगर सब आराम से सब दे देगे तो लरकी अपनी सीट पे जाके बैठ जाती है और अभय को देख हैरानी से मन मे ट्रेन मे दो लोग आके लूट पाट कर रहे है उनके हाथो मे गन है सभी डरे हुवे है लेकिन इसे देखो जरा कैसे आराम से बैठा हुवा है लरकी अपने बाल जोर जोर से खुजाते हुवे आखिर इस लरके कि प्रॉब्लम किया है
ट्रेन मे दो लोग जो गन दिखा के लूट रहे थे दोनों लोग दोनों तरफ से लोगो को लूटते हुवे आगे बढ़ रहे थे ताकि कोई भी भाग ना पाये आखिर कर एक बंदा अभय के पास आ जाता है
लुटेरा 1 - सभी को गन दिखा मे तुम लोगो के पास जो भी जल्दी जल्दी सब निकाल के मुझे दे दो
लुटेरो ने अंदर आने से पेहले अपने चेहरे पे रुमाल बाँध लिया था
लरकी के पापा जल्दी से पैसे जोकि बहोत ज्यादा थे निकाल के लुटेरे को देते हुवे केहता है ये लो बहोत ज्यादा पैसे है अंकल अपनी बेटी बेटा बीवी को देख ये मेरे बच्चे बीवी है उनके पास कुछ नही है इन लोगो को कुछ मत करो प्लेस
लुटेरा - अंकल से पैसे लेते हुवे चलो ठीक है तुम समझदार हो लगता है तुमने सब पैसे तो दे दिये जोकि बहोत है लेकिन लुटेरा लरकी ऑन्टी को देख इनके गले मे कान नाक मे जो है वो
अंकल - अपनी बीवी बेटी से जल्दी से सब देदो निकाल के
अंकल मन मे जान बहोत कीमती है जैसे भी मे बहोत अमीर हु पैसों की कोई कमी नही है मेरे पास घर पहुच कर इससे मेहगे गेहने खरीद दुगा
ऑन्टी लरकी जल्दी से डरते हुवे नाक नाक गले मे सोने का जो था सब उस लुटेरे को दे देते है
लुटेरा - मुस्कुराते हुवे बहोत अच्छे बहोत अच्छे
लुटेरा फिर अभय के बगल मे जो लोग थे उनकी तरफ देखता है तो पेहले से ही सब के पास जो था निकाल के लुटेरे को दे देते है
लुटेरा - सभी को देख मुस्कुराते हुवे बहोत अच्छे बहोत अच्छे
लुटेरा फिर अभय की तरफ देखता है जो आराम से आखे बंद कर सो रहा था
लुटेरा - अभय को देख इस लरके को पता भी है किया हो रहा है उसके आप पास कुम्भ करण की औलाद लगता है
लरकी - लुटेरे को देख डरते हुवे देखिये उस लरके को छोर दीजिये वैसे भी उसके पास से आपको जायदा कुछ नही मिलेगा वो तो देखने मे गरीब भी लगता है
लुटेरा - लरकी को देख मुस्कुराते हुवे कियु छोर दु ये तुमहारा कुछ लगता है किया वैसे भी हमारा रूल है हम किसी को नही छोरते अमीर हो या गरीब लुटेरा अभय के ऊपर गन तान ओये लरके अपनी आखे खोल कर देख और जल्दी से माल निकाल जो तेरे पास है
अभय अपनी एक आखे खोल लुटेरे को देखता है और लुटेरा जब तक समझ पाता अभय लुटेरे के जिस हाथो मे गन था उस हाथो को पकर तेजी से अपनी तरफ करता है और चार पाच बार तेजी से लुटेरे के सीने पे वार करता है लुटेरे को अपने पास को बचाने का समय भी नही मिलता है ना ही की मुह से कोई आवाज निकल पाती है और लुटेरा बेहोस हो जाता है अभय लुटेरे को पकर आराम से नीचे लेता देता है और गन को लेकर अपने पास रख लेता है
लरकी अंकल जो लोगो ने देखा था सभी पूरी तरह से हैरान अभय को देखे जा रहे थे लेकिन अभय किसी पे ध्यान नही देता है और अपने सर्ट को सही करता है फिर आगे बढ़ पीछे झाक दूसरे लुटेरे को देखता है जो सभी को लूटते हुवे उसी तरफ आ रहा था दूसरे लुटेरे को पता भी नही था उसके साथी के साथ किया हुवा है अभय आराम से एक जगह साइड मे छुप जाता है
जैसे ही दूसरा लुटेरा अभय के पास आता है अभय पेहले उस लुटेरे के हाथो पे वार करता है गन नीचे गिर जाती है लुटेरा अपने हाथ को पकरे दर्द मे अभय को देखता है लेकिन अभय बिना टाइम बर्बाद किये लुटेरे के सीने पे जोर का मुक्का मारता है लुटेरा दर्द मे चिलाते हुवे नीचे बैठ जाता है अभय गन उठा लेता है फिर उस लुटेरे को पकर सीने पे मार उसे भी बेहोस कर देता है और उस लुटेरे को अपने सीट के पास लाके पेहले लुटेरे के पास लेता देता है
उस अभय के पास वाले सभी अभय को आखे फार देख रहे थे लेकिन अभय अपने काम मे लगा हुवा था अभय अपना बैग नीचे से निकाल खोलता है और अंदर से रस्सी निकल दोनों लुटेरो के हाथ पैर बांध देता है और बैग को बंद कर अंदर रख देता है उसके बाद आराम से अपनी सीट पे अपने पैर पे पैर रख बैठ जाता है जैसे उसके लिये ये सब कुछ था ही नही
लरकी अंकल अभी भी अभय को हैरानी से आखे फ़ारे देखे जा रहे थे
अभय - उन सब को घूर ऐसे किया देख रहे हो मे इंसान ही हु अभय लुटेरो को देख इनके पास तुम सब का समान है उसे लेलो और बाकी सभी को भी कहो ले जाये अपना जो भी है
लरकी लरकी तो अभय के हिम्मत एक्शन और पेहली बार बोलता देख अभय की आवाज देख उसे कुछ कुछ होने लगता है
अभय की बात सुन जल्दी से जिनका अपना जो था पैसे गेहने सब ले लेते है लरकी भी अपना सब जो था ले लेती है थोरि देर बाद सभी को अपना समान मिल गया था अभय जिस बोगी मे था उस बोगी के सभी को पता चल चुका था अभय के बारे मे और सभी अभय के बारे मे ही बात कर रहे थे
अंकल - अभय को देख बेटा तुमने इतनी आसानी से गन लेस दोनों लोगो को कैसे पकर लिया किया तुम्हे डर नही लग रहा था कही तुम्हे गर्बर् हो जाता तो जो लोग मार देते तुम्हे
अभय - अंकल को देखता है और नॉर्मल खिरकी से बाहर देखते हुवे डर सब को लगता है मुझे भी लेकिन मेने खैर समझ लीजिये मुझसे हो गया बस
अभय की की बात किसी को सही से समझ नही आती है लेकिन किसी के अंदर हिम्मत नही थी सच पूछने की
अंकल - अभय को देख थैंक्स बेटा सब के लिये
अभय - अंकल को देख नॉर्मल तरीके से कोई बात नही
अंकल - अभय को देख अपना एक कार्ड अभय को देते हुवे मेरा नाम है जितेन् रावत जितेन् फिर अपनी बीवी को देख ये है मेरी बीवी सेखा रावत जितेन् बेटे को देख ये है मेरा बेटा बिपिन और लरकी की तरफ देख ये है मेरी बेटी है पायल
अभय कार्ड लेकर देखता है फिर अपनी जेब मे रख देता है
अंकल - अभय को देख बेटा उस कार्ड मे मेरा नंबर है कभी भी मेरी जरूरत परी तो जरूर मुझे फोन करना तुम मुझे बहोत हिम्मत वाले और एक अच्छे लरके लगे बेटा अब कम से कम अपना नाम तो पता दो ताकि हमे पता तो रहे की हमारे समान पैसे और खतरनाक लुटेरो को बहादुरी से पकरे वाला कोन था
अभय - अपनी नजर घुमाते हुवे अभय अभय सिंह नाम है मेरा अभय फिर खिरकी से बाहर खेतो मे काम कर रहे किसानों को देखने लगता है
लरकी - अभय को देख मुस्कुराते हुवे मन मे अभय अभय सिन्हा तुमहारा नाम में कभी भी नही भुलुगी
पायल - अपने पापा को देख पापा इस लुटेरे का किया करेगे
जितेन् - बेटा अब तो सीधा अपने ये ट्रेन अपनी मंजिल के ही जाके रुकेगी तो वही इन दोनों को पुलिस के हवाले कर देगे
पायल - अच्छा समझ गई पायल फिर अभय को देख मन मे थोरा गुस्से मे मुझे थोरा देख लेगा तो किया बिगर जायेगा इसका यहा मेरी जवानी है देखने के लिये लेकिन नही उसे तो बाहर ही देखना है कमीना कुता
( पास्ट 4 साल पेहले )
अभय घर आता है और अंदर जाके चारो तरफ देखता है जब अभय को अदिति कही दिखाई नही देती तो आराम से धीरे से जल्दी से अपने कमरे मे चला जाता है
अभय - अपने कमरे मे आके अपने सीने पे हाथ रख जोर से सासे छोरते हुवे चलो बच गया मे
तभी अचानक अभय के उपर कोई खुद अपना है पीछे से अभय इस हमले से अंजान था अभय सीधा बिस्तर पे गिरता है और अभय के उपर थी अदिति जो गुस्से से अभय को देखे जा रही थी
अभय - अदिति को देख डरते हुवे गुरिया मेने तो तुम्हे देखा था तुम दिखी नही थी लेकिन अचानक तुम कैसे अंदर आ गई
अदिति - अभय को देख शैतानी हसी हस्ते हुवे कियुंकी मे पेहले से ही इस कमरे मे थी भाई
अभय - के पसीने आने लगते है अभय डरते हुवे अदिति को देख लेकिन मेने तो अंदर आते वक़्त कमरे मे तुम्हे नही देखा था
अदिति - मुस्कुराते हुवे अभय को देख मेने आपको आते हुवे देख लिया था और मे पेहले ही आके आपके कमरे के दरवाजे के पीछे छुप गई थी
अभय - अदिति को प्यार से तुम तो मेरी गुरिया हो ना तुम मेरे साथ कुछ नही करोगी ना
अदिति - मुस्कुराते हुवे अभय को देख नही मे भला अपने प्यारे बरे भाई के साथ कुछ कैसे कर सकती हु बस आप ही मेरा मजाक उरा सकते है कियु सही कहा ना
अदिति ये केह अभय के सीने पे मुक्के से मारना सुरु कर देती है अभय दर्द से आह लग गई जोर से अदिति मारना बंद कर के कितना नाटक करते है मेने तो धीरे से ही मारा है अभय अदिति को देख मुस्कुराते हुवे मुझे तू जोर से लगी
तभी आसा जोर से चिला के तुम दोनों का हो गया हो तो आके खाना खा लो आसा खाना लगाते हुवे जब देखो तब दोनों लरते रेहते है
मा की आवाज सुन अदिति अभय के उपर से नीचे उतर अपने कमर पे दोनों हाथ रख एतिटूट मे अपने भाई को देख दुबारा आगर आपने मेरा मजाक उराया तो छोरुगी नही
अभय डरते हुवे ठीक है गुरिया मे समझ गया
आशा खाना निकाल चुकी थी सभी आके बैठ खाना खाने लगते है
अभय मा के पास और अभय के पास अदिति फिर विनय
अभय - मा को देख मुह खोल आह करते हुवे मा मुझे खाना खिलाओ ना
अदिति - अभय की हरकत देख मा खिला दीजिये एक बच्चा आपको प्यार से केह रहा है बेचारा बच्चा खुद से खा भी नही सकता है
अभय - अदिति को घूर के देख गुरिया तुम मेरा मजाक उरा रही हो
अदिति - खाना कहते हुवे मुस्कुरा के सही समझे भाई
अभय - अदिति को देख देख लुगा तुम्हे
अदिति - हस्ते हुवे अभय को देख थोरि देर पेहले किया हुवा था भूल तू नही गये भाई
अभय अदिति तो देख मुह बना के याद है
आसा दोनों को देख तुम दोनों खाना खाते वक़्त तो खाना आराम से खाओ आसा फिर एक निवाला अभय के मुह मे डालते हुवे ले खाले अभय खाना खाते हुवे मा को देख आपके हाथो से खाना खाने के बाद खाने का स्वाद और बढ़ जाता है मा आसा अभय को देख मुस्कुरा देती है
अदिति - खाना खाते हुवे मुह बना के मा का लाडला बच्चा
विनय - अभय को देख सही कहा मा का लाडला ही है
अभय - विनय अदिति को देख हु तो आप लोगो को जलन हो रही है किया
विनय अदिति - खाना खाते हुवे हमे कियु होगी भला
अभय - अपनी मा को देख मुह खोल मा
आसा - मुस्कुराते हुवे एक निवाला अभय के मुह मे दाल देती है औद् अभय को देखते हुवे आज तो मा मा केह मेरे हाथो से बच्चो की तरह खाना खाता है लेकिन जिस जिन तेरी सादी होगी तो बीवी के हाथो से ही खायेगा मा के हाथो का खाना फिर अच्छा नही लगेगा
मा की बात सुन अभय अपनी मा के हाथो को पकर हाथो को चूमते हुवे मा का प्यार मा के हाथो से बने खाने का स्वाद लार दुलार अपने बच्चो के लिये फिकर अपने बच्चो के लिये सब कुछ सेह जाने वाली अपने बच्चो के लिये सब कुछ कर जाने वाली मा होती है और मा का मुकाबला इस दुनिया मे कोई नही कर सकता है मा मा होती है
अभय मा को प्यार से देख इस लिये मेरी दुनिया आप से है और रहेगी मा अगर आगे मेरी सादी होती है तो भी सब से पेहले मेरे लिये मेरी मा आगे रहेगी आपके बिना एक पल जीने के बारे मे सोच भी नही सकता
अभय की बात सुन आसा इमोसनल हो जाती है आसा अभय को अपने सीने से लगाते हुवे मेरे लिये भी तुम सब ही मेरी दुनिया हो आसा के आखो मे आसु आ गये थे अभय के आखो मे भी आसु थे
विनय अदिति भी ये देख इमोसनल हो जाते है और खुश भी
( रात 9 बजे )
एक कमरे मे अभय विनय अदिति तीनों भाई बेहन एक साथ बैठ पढाई करने मे लगे थे जोरों सोरों से कियुंकी तीनों को पता था की उसकी मा किस तरफ से उनको पालती आ रही है इस लिये सभी पढ लिख कर बरा आदमी बन अपनी मा को पूरी दुनिया की खुशी देना चाहते थे
तो वही आसा अपने कमरे मे आखे बंद किये हुवे लेती थी लेकिन सोई हुई नही थी आसा के दोनों पैर उपर उठें फैले हुवे थे उपर से आसा ने चड्डी नही पेहना था तो आसा का सब कुछ साफ दिख रहा था
बोले तो आसा की फूली मोटी चुत साफ दिख रही थी अगर कोई अंदर आ जाये तो उसको आसा का खजाना जो ऐसे ही बेकार हो रहा था दिख जाता
आसा आखे बंद किये लेती हुई अपने पुराने पल मे चली जाती है
एक कमरे मे आसा अपने पति के ऊपर थी और जोर जोर से अपने पति के लंड की सवारी किये जा रही थी आसा जोस मे थी पूरी
आसा को पूरा मजा चाहिये था इस लिये खुद अपनी चुत मे लंड जोर जोर से उपर नीचे गांड करते हुवे अपनी पति का लंड चुत की गहराई मे लिये जा रही थी
आसा एक संस्कारी सर्मिलि साफ दिल की औरत जरूर है लेकिन जब पति से प्यार लेने का वक़्त आता था तो पीछे नही हटती थी ना सरमाती थी
सब कुछ सही चल रहा था समय गुजरा आसा एक पेहले बेटे को जन्म दिया जिसका नाम आसा ने विनय रखा दूसरी बार भी आसा मा बनी और दूसरी बार भी आसा ने बेटे को जन्म दिया अभय तीसरी बार लरकी हुई जिसका नाम अदिति रखा गया
आसा बहोत खुश थी तीनों बच्चो को बहोत लाल दुलार से पालने पोसने लगी समय गुजरा विनय 12 साल को हो गया था तो वही अभय 11 अदिति 10 लेकिन यही वो समय था जब उमेस् सब को छोर अपने प्यार के साथ भाग गया
उसके बाद से ही आसा मे अपनी इक्छा जो मार अपना पूरा ध्यान बच्चो के देखभाल और उनके भविस्ये के लिये लगा दिया
आज चार साल हो चुचे है विनय 16 का अभय 15 का अदिति 14
आसा अपने ख्यालो से बहार आती है चेहरे पे दुख साफ दिख रहा था आसा करवट बदल आखे खोल के आप कियु चले गये जब मुझे और हमारे बच्चो को आपकी बहोत जरूरत थी
6 दिन बाद सनिवार् - दोपहर 11 बजे
स्कूल से आने के बाद खाना खाने के बाद विनय अदिति पढाई करने लग जाते है तो वही अभय अपने दोस्तो के साथ खेलने के लिये जाने लगता है आसा अभय को देख लेती है
आसा - अभय के पास आके फिर दोस्तो के पास जा रहे हो जल्दी आ आना
अभय - मा की बात सुन रुक कर पीछे देखता है तो आसा मुस्कुराते हुवे अभय को देखे जा रही थी
अभय मुस्कुराते हुवे आसा के पास जाके गले लगाते हुवे आपको पता ही है मेरी खूबसूरत मा मे जल्दी ही आ जायुगा अभय ये केह अपनी मा के गाल पे किस कर अलग हो जाता है
आसा - अभय के गालो पे किस करते हुवे मे जानती हु लेकिन किया करू तु पास नही रेहता है तो दिल घबराने लगता है
अभय - अपनी मा के हाथो को पकर हस्ते हुवे अरे मा मे मे कुछ देर खेलने की तो जा रहा हु जोकि मे रोज जाता हु फिर समय पे आ जाता हु आप को जानती ही है
आसा - अभय के सर सहलाते हुवे मुस्कुरा के जानती हु ठीक है जा और जल्दी आ जाना किसी से लराई मत करना
अभय - जाते हुवे मा आपको पता है ना मुझे लराइ करना बिल्कुल पसंद नही लराइ से मे तो दूर रेहता हु आप चिंता मत कीजिये ये केहते हुवे अभय घर से निकल परता है
आसा - अभय के जाते देखती है फिर अपने काम मे लग जाती है
दोपहर 12 बजे
अभय अपने दोस्तो के साथ घर से 10 मिनट की दूरी पे खेतो के बीच बहोत बरा पीपल का पेर था अभय वही छाव के नीचे अपने दोस्तो से बातें कर रहा था थोरि बातें खेलने के बाद अभय घर खेतो से होते हुवे जाने लगता है
अभय खेतो से होकर रोड पे आता है गाव के बीच से एक रास्ता ईट से बनाया गया था अभय उसी रास्ते से घर लौटने लगता है अभय चलते हुवे सरक पे जो छोटे पथर् परे थे उसे पैरो से मारते हुवे चल रहा था
तभी एक वेन आकर अभय के पास रुकती है अभय कुछ समझ कर पाता उससे पेहले एक बंदा तेजी से वेन से निकल अभय के मुह को रुमाल से दबा देता है अभय कुछ कर भी नही पाता और बेहोस हो जाता है एक बंदा वेन मे बैठा था वो जल्दी से दरवाजा खोलता है और दोनों अभय को पकर अंदर ले लेते है अंदर मे एक लरका और भी बेहोस परा था अभय को अंदर लेने के बाद वेन तेजी से आगे निकल परती है
आज के लिये इतना ही![]()
Payal ki koyi daal nahi gal Rahi h bechari Lekin ek aas h ki woh dono aas paas ke Gaon me rehte hchapter 2
साम 7 बजे
ट्रेन तेजी से अपनी मंजिल की तरफ जा रही थी अभय अभी भी अपनी यादों मे खोया हुवा था पायल अभी भी अभय को ही देखे जा रही थी पायल का भाई को भी पता था उसकी बेहन को अभय से प्यार हो गया है
बिपिन अपनी बेहन पायल के कान मे धीरे से दीदी ऐसे ही देखने से काम नही चलेगा कुछ बातें करो नही तो कल सुबह हम अपने मंजिल पे पहोच जायेंगे फिर आप हिलाती रेह जाना
बिपिन ने अपनी बेहन से जो बात कही को सिर्फ लरको को लिये थी ना की लरकी के लिये अपनी भाई की बात सुन समझ पायल गुस्से से बिपिन के कान को पकर मोर के बिपिन को देख तुमने किया कहा बिपिन को एहसास होता है की उससे गलती कर दी है बिपिन पायल को देख रोने वाली सूरत बना के दीदी मे तो नादान बच्चा हु मुह से निकल गया प्लेस माफ कर दो ना
पायल अपने पापा मम्मी को देखती है दोनों बातें करने मे लगे थे पायल इसी का मोक्का उठा के बिपिन के पेट पे दे मारती है बिपिन पेट पकरे दर्द मे मर गया पायल बिपिन को देख आगे से ध्यान देना नही तो टांगे भी तोर दुगी बिपिन पायल को देख दर्द भरी आवाज मे जी दीदी अब तो गलती से भी गलती नही करुगा पायल बिपिन को देख मुस्कुराते हुवे अच्छा है
पायल फिर अभय को मुस्कुराते हुवे देखने लगती है अभय अभी भी सब से अलग खिरकी से बाहर देख अपनी दुनिया मे गुम था
पायल अपनी दोनों मुठी को कस हिम्मत कर अभय को देख कर अभय को पुकारति है अभय
अभय अपनी यादो मे खोया जरूर था लेकिन उसकी नजरे कान बहोत तेज थे पायल की आवाज सुन अभय पायल की तरफ अपनी नजरे कर प्याल को देख किया है
पायल अभय को देख डर और शर्मा भी जाती है पायल मन मे डर मत पायल यही मोका है नही तो बाद मे पता नही हम मिले ना मिले
पायल ये सोच हिम्मत कर के अभय को देख वो वो मुझे ये पूछना था की आप कहा रेहते है पायल मन मे पेहली बार मुझे किसी लरके से पता पूछना पर रहा है और मेरी भी फट रही है अब समझ मे आया लरके कियु लरकियो से बातें करने मे दिल का हाल केहने मे डरते है उनकी कितनी फटती होगी समझ मे आ रहा है
अभय - पायल को देखता है फिर नॉर्मल तरीके से लालपुर गाव मे रेहता हु
पायल - अभय की बात सुन बहोत खुश हो जाती है पायल अभय को देख खुश होते हुवे किया सच्ची मे आप लालपुर के रेहने वाले है
अभय - अजीब चेहरा बना के जैसे पायल उसका दिमाग खा रही हो हा मे लालपुर का रेहने वाला हु फिर अभय खिरकी से बाहर नजारे देखने मे लग जाता है
पायल अभय को अजीब चेहरा बनाते हुवे उसका मुह बन जाता है पायल मन मे कितना भाव खा रहा है साली किस्मत भी मेरी ऐसी है वो लरका मुझे पसंद आया तो मुझपे ध्यान ही नही दे रहा है तभी पायल को किसी के हंसने की आवाज सुनाई देती है पायल देखती है तो बिपिन था जो अपने मुह पे हाथ रखे हसे जा रहा था
पायल अपने भाई को अपने उपर हस्ता देख पायल का गुस्सा आसमान छु जाता है पायल अपने भाई के आखो मे गुस्से से देख मेरे छोटे भाई को इतनी हसी कियु आ रही है
बिपिन - पायल को गुस्से मे देख उसकी फट जाती है बिपिन डरते हुवे कापति आवाज मे वो दीदी मे तो बस ऐसे हि हस रहा था
पायल - बिपिन कि आखो मे देख अपना मुक्का बिपिन को दिखाते हुवे बताता है या
बिपिन - पायल के मुक्के को हाथो से पकर पायल को देख डरते हुवे दीदी दीदी मे ऐसा मत करो बताता हु ना दरसल आप इतनी खूबसूरत हो कई लरके आपके आगे पीछे लगे रेहते थे मेने देखा भी है लेकिन आज बिपिन को फिर हसी आ जाती है बिपिन हसी रोक नही पाता और मुह पे हाथ रख हसने लगता है
पायल - अपने भाई को इस तरह से अपने उपर हस्ता देख और गुस्से से आ जाती है पायल एक जोरदार मुक्का बिपिन के पेट मे दे मारती है
बिपिन कि हसी गायब हो जाती है बिपिन पेट पकर मर गया बिपिन पायल को देख दर्द मे मै आपका छोटा प्यारा भाई हु कोई ढोल नही जब देखो तक मुझे बजाती रहती हो
पायल - अपने बालों को हवा मे उराते हुवे बिपिन को देख मेरे मजे लोगे को ऐसे ही पिटोगे समझ गये मेरे छोटे भाई पायल फिर अभय को देख एक ये है जो अपनी दुनिया मे खोया रेहता है अरे सामने उसके इतनी खूबसूरत हॉट लरकी बैठी है ये ना की देखे मजे ले पता नही कहा खोया है
( पास्ट )
अभय को किड्नेपर् तेजी से वेन से निकल जाते है और आसा विनय अदिति को पता भी नही था अभय के साथ किया हुवा है
आसा अभय के कमरे मे जाती है तो अभय नही था आसा फिर अदिति विनय के पास जाती है अदिति विनय अभी भी पढाई कर रहे थे
अदिति विनय अपनी मा को देखते है अंदर आते हुवे
विनय - आसा को देख किया हुवा मा आप परेसान लग रही हो
आसा - विनय को देख चिंता करते हुवे अदिति विनय को देख वो बेटा मेने अभय के कमरे मे जाके देखा लेकिन अभय अपने कमरे मे नही है मुझे लगा अभय तुम लोगो के साथ होगा लेकिन अभय यहा भी नही है बेटा पता नही कियु मेरा दिल घबरा रहा है अभय हमेसा समय का पक्का है उसे तो अभी तक आ जाना चाहिये था
दरसल अभय 12 बजे निकला था और अभी 2 बज रहे थे सभी को पता था अभय ज्यादा से ज्यादा 1 घंटे मे घर लौट आता है और यही वजह थी की आसा की बात सुन विनय अदिति को भी थोरि टेंसन होने लगती है
विनय खरा होके आसा को देख मा आप चिंता मत करो मे जाके देखता हु हो सकता है अभय को उसके दोस्तो से रोक लिया होगा मे जाकर उसे लेकर आता हु
आसा - विनय को देख परेसान होते हुवे ठीक है बेटा जाके उसे लेके आ जब अभय मुझसे जायदा देर दूर रेहता है तो मुझे घबराहट होने लगती है
विनय - जाते हुवे आप चिंता मत करो मा मे अभी गया और अभी अभय को लेके आया विनय फिर निकल जाता है अभय को लाने
अदिति - आसा के पास जाके अपनी मा को नीचे बैठा के आसा को देख मा तुम बेकार मे चिंता कर रही हो भाई कोई छोटा बचा नही है होगे अपने दोस्तो के साथ बड़े भाई गये है जल्दी ही उन्हें लेके आ जायेंगे
आसा - अदिति को देख तुमने सही कहा लेकिन किया करू अभय को एक घंटे मे एक बार चेहरा नही देखती हु तो दिल बेचैन होने लगता है
अदिति - आसा को सांत करते हुवे समझ गई मेरी मा जब भाई आ जायेंगे तो उसे अपनी पल्लू से बांध कर रख लेना ठीक है
आसा को अदिति की बात पे हसी आ जाती है
आसा - अदिति को हस्ते हुवे तुम भी ना
वही विनय को अच्छे से पता था अभय के दोस्त कोन कोन है और अभय कहा जाता है और अभी कहा होगा इस लिये विनय सीधा खेतो के बीच पीपल के पेर के पास जाके देखता है तो विनय को अभय के दो दोस्त बातें करते हुवे दिखाई देते है लेकिन विनय को अभय दिखाई नही देता
विनय दोनों के पास पहुँचता है दोनों दोस्त विनय को को देखते है
अभय के दोनों दोस्त एक का नाम टीनू दूसरे का नाम लखन
टीनू - विनय को देख अरे विनय भाई आप यहा कैसे
विनय चारों तरफ नजर दोराता है लेकिन कही आस पास विनय को अभय दिखाई नही देता विनय को भी अब अंदर ही अंदर घबराहट होने लगती है
विनय - टीनू को देख अरे मे अभय को बुलाने आया था अभी अभय घर नही आया है
विनय की बात सुन टीनू लखन दोनों हैरानी से विनय को देख किया कहा
विनय दोनों को इतना हैरान होता देख विनय को और घबराहट होने लगती है
विनय - दोनों को देख थोरे चिंता मे तुम दोनों इतने हैरान कियु हुवे
टीनू - विनय को देख भईया इस लिये कियुंकी अभय तो एक घंटे पेहले ही घर के लिये निकल गया था
लखन - विनय को देख हा टीनू सही केह रहा है विनय भईया आप को तो पता ही है अभय अपने टाइम का पक्का है सही समय पे हर चीज करता है अभय आया था और हमने बातें की थोरा खेले फिर अभय अपने टाइम पे घर निकल गया था
दोनों की बात सुन विनय की सासे फूलने लगती है विनय दोनों को देख घबराते हुवे अभय अभी तक घर नही आया है
टीनू लखन जो भी अब अभय की चींता होने लगती है
टीनू - खरा होते हुवे विनय को देख अगर अभय घर नही गया है तो अभी वो है कहा
लखन - खरा होते हुवे कही वो मुकेश या राकेश के घर तो नही गया है ना
विनय - दोनों को देख मुझे नही पता मुझे बहोत घबराहट हो रही है कही अभय को कुछ
टीनू - विनय को देख भईया ऐसी बातें कियु कर रहे है हम है ना आप अभय के बाकी दोस्तो के पास जाके देखो हम दोनों मुकेश राकेश के घर जाके देखते है
विनय - दोनों को देख ठीक है तुम दोनों का सुक्रिया
टीनू लखन विनय भाई अभय हमारा सबसे अच्छा दोस्त है तो उसके लिये हम कुछ भी करेगे फिर टीनू लखन अभय को ढूढने निकल परते है
विनय बाकी अभय के जो दोस्त थे इनके घर की तरफ निकल परता ह
विनय बहोत घबराया हुवा था बहोत टेशन मे था
विनय चलते हुवे मन मे मेरा भाई कभी भी इतनी देर घर से बाहर नही रेहता लेकिन आज 2 घंटे हो गये अभय को घर से निकले मेरे भाई कहा है तू देख मेरा दिल घबरा रहा है अगर तु मजाक कर रहा है हमसे लुका छुपी खेल रहा है तो ऐसा मत कर मेरे भाई घर आजा
( 30 मिनट बाद) अभय के घर पे
30 मिनट को चुके थे आसा की नजर बार बार दरवाजे की तरफ जा रही थी आसा इस उमीद मे बैठी बार बार दरवाजे की तरफ देख रही थी की विनय अभय को लेके आया की नही लेकिन ना विनय आया था ना अभय
आसा की चिंता बेचैनी घबराहट और बढ़ जाती है आसा के मन मे ना चाहते हुवे भी बुरे बुरे ख्याल आने लगते है
आसा - बेचैनी से अदिति को देख अदिति बेटा अभी तक विनय अभय को लेकर कियु नही आया है
अदिति अपनी मा की बातो को सुन अपनी मा को सांत करते हुवे दिलासा देते हुवे
अदिति - अरे मा मुझे लगता है विनय भाई अभय भाई दोनों बातें करते हुवे आ रहे होगे बस दोनों थोरि देर मे आ जायेंगे आप बेकार मे ही चिंता कर रही है
आसा - अदिति को देख किया करू बेटी दिल नही मान रहा
( 1 घंटे बाद )
विनय पुरे बेचैन घबराते हुवे अपने घर के पास पहुचता है तो देखता है उसकी मा बेहन दरवाजे के पास ही बाहर बैठे दोनों का इंतज़ार कर रही है
विनय - अपनी मा बेहन को देख नजरे नीचे किये हुवे घबराते हुवे मन मे मेने हर जगह अभय को ढूढ़ लिया लेकिन अभय मुझे कही भी नही मिला अब मे मा बेहन को किया जवाब दुगा कहा हे मेरे भाई प्लेस आजा देख तेरे इंतज़ार मे सब का किया हाल हो रखा है प्लेस उपर वाले मेरे भाई को कुछ नही हुवा हो उसे जल्दी घर भेज देना प्लेस
आसा अदिति दोनों की नजर विनय पे जाती है लेकिन दोनों विनय को अकेला आता देख फिर दोनों की बैचैनी बढ़ जाती है
विनय हतास उदास दुखी अपनी मा बेहन के पास जाके खरा हो जाता है
आसा - विनय को देख घबराते हुवे बेचैनी से विनय को देख बेटा तु अकेला आया है अभय कहा है आसा आस पास बेचैनी से अभय को ढूढने लगती है
अदिति - भी घबराते हुवे बेचैनी से भाई मा ने कुछ पूछा है भाई कहा है बोलिये ना मेरा जी बहोत घबरा रहा है प्लेस भाई
विनय - नजरे उपर कर अपनी मा बेहन को देख माफ करना मा चोटकी मेने हर जगह अभय को दुधा लेकिन अभय मुझे कही नही मिला
विनय की बात सुन आसा अदिति दोनों की एक पल के लिये सासे दिल की धारकन रुक जाती है
आसा विनय के पास जाके विनय के दोनों कंधे को पकर विनय को देख कापते होठो से तुमने क्या कहा फिर से बोल विनय अपनी मा को रोने वाले चेहरे के साथ मा मुझे अभय कही नही मिला
तभी सरक पे एक औरत भागते गिरते रोते हुवे चिलाते हुवे अपने बेटे को आवाज लगा के पुकार रही होती है अपने बेटे को ढूढ़ रही होती है
औरत की आवाज सुन आसा विनय अदिति तीनों उस औरत की तरफ देखते है औरत भागते हुवे चिलाते हुवे मेरे लाल कहा है तू देख बाहर आजा मुझे इतना कियु सताता है ये केहते हुवे औरत फिर नीचे आसा के सामने ही गिर परती है
औरत को घुटने पे चोट भी गई थी लेकिन उसे दर्द की परवाह नही थी उसे अपने बेटे को ढूधना था
आसा को रहा नही जाता है आसा औरत के पास जाके उस औरत को उठाते हुवे दीदी हुवा किया है किया आप अपने बेटे को ढूध रही है
औरत आसा के उमर की ही थी औरत का पूरा चेहरा आसु से भरा हुवा था
औरत - आसा को देख रोते हुवे मेरा लाल घर से बाहर केह कर गया था वो अपने दोस्तो के पास जा रहा है लेकिन 4 घंटे हो गये अभी तक घर नही लोटा है मेने अपने बेटे के सभी दोस्तो के घर जाके देखा पूछा लेकिन सभी केह रहे वो तो बहोत पेहले ही घर चला गया था लेकिन मेरा बेटा तो घर आया ही नही है
बस यही सुनना था की आसा की बची हुई हिम्मत जवाब दे जाती है आसा को चक्कर आने लगते है आसा नीचे गिरने लगती है तभी विनय ये देख चिलाते हुवे मा और जल्दी से जाके विनय मा को पकर लेता है आसा नीचे गिरने से बच जाती है लेकिन आसा बेहोस हो चुकी थी
औरत जो रो रही थी वो ये सब देख हैरान होते हुवे आसु वाले चेहरे से विनय को देख बेटा तुम्हारी मा बेहोस कियु हो गई है कुछ हुवा है किया विनय औरत को देख अंदर चलिये मे सब बताता हु
विनय अदिति को देखता है अदिति तो पथर् बनी खरी थी विनय अदिति को आवाज देते हुवे अदिति अदिति होस मे आयो मेरी मदद करो मा को अंदर ले जाने मे
विनय की बात सुन अदिति होस मे आती है और आखो मे आसु लिये जल्दी से जाके अपनी मा को पकर लेती है फिर दोनों मिलकर आसा को कमरे मे लाके बिस्तर पे सुला देते है फिर विनय पानी लाके आसा के चेहरे पे पानी छीरक्ता है तब जाके आसा होस मे आती है
आसा होस मे आते ही जोर जोर से रोते हुवे मेरा बेटा बेटा बेटा कहा है आसा पागलो की तरह अभय को पुकारने लगती है विनय अदिति दोनों के आखो से आसु नीचे तप तप गिर रहे थे विनय जल्दी से आसा को गले लगा के रोते हुवे सांत होजाओ मा अभी रोने का समय नही है हमे पता लगाना होगा अभय कहा है प्लेस मा आप सांत हो जाइये विनय की बात सुन आसा थोरा सात होती है लेकिन आसु रुकने का नाम नही ले रहे थे
औरत ये सब देख इतना समझ जाती है की यहा भी वही हुवा है तो औरत भी अपना सर पकरे जोर जोर से रोना सुरु कर देती है
विनय औरत को देखते हुवे प्लेस आप भी सांत हो जाइये अभी हमे जल्दी से पुलिस के पास जाना चाहिये विनय की बात सुन आसा औरत सांत हो जाते है उन्हें भी विनय की बात समझ मे आ जाती है
( परजेंट )
रात 10 बजे
ट्रेन मे बैठे सभी यात्री का ये समय खाने पीने का होता है तो कई लोग अपना खाना निकाल खाने मे लगे थे ट्रेन तेजी से अपनी मंजिल की तरफ बढ़ रही थी
पायल और उनके पापा भाई खाना निकाल रहे थे पायल की मा बिपिन को प्लेट मे खाना देते हुवे जा अभय बेटे को दे दे बिपिन मा को देख ठीक है मा तभी बिपिन के हाथो से प्लेट जायेब हो जाता है और गायेब करने वाली पायल थी
बिपिन पायल को देख मुस्कुराते हुवे वाह दीदी वाह आज पेहली बार देख हु एक लरकी लरके को पटाने मे लगी हुई है लेकिन लरका तो घास दाल ही नही रहा आज पता चला हम लरको को कितनी प्रॉब्लम होती है किसी लरकी से बात की सुरुवात करने मे दिल की बात केहने मे
पायल - बिपिन को गुस्से से देख ज्यादा चपर् चपर् मत कर नही तो तेरी दात् तोर दूंगी
बिपिन - अपने मुह को बचाते हुवे हा हा सच बातें करवी ही होती है
पायल घूर के बिपिन को देखती है तो बिपिन डर के दूसरी तरफ देखने लगता है
पायल - फिर अभय को प्यार से देखते हुवे अभय के पास जाके अभय को देख अभय जी ये लीजिये मा ने आपके लिये खाना दिया है खा लीजिये
पायल की आवाज सुन अभय पायल को देखता है पायल अभय के सामने खरी थी थोरा झुकी हुई थी अभय पायल के चेहरे को देख जब थोरा नीचे देखता है तो अभय को पायल के दो बड़े उजले चुचे झाकते हुवे पायल ये देख मुस्कुराते हुवे अब तो जरूर इसको कुछ कुछ होने लगेगा कोई भी लरका इस से बच नही सकता है लेकिन तभी फिर पायल के अरमा आसु मे बेह जाते है
दिपु जल्दी से खाने की प्लेट लेते हुवे धीरे से सुक्रिया करते हुवे खाना खाने लगता है पायल का फिर मोय मोय हो जाता है पायल अभय को देख इस मिटी का बना है ये पायल मुह फुला के अपनी सीट पे जाके बैठ जाती है और मुह फुलाये अभय को देखने लगती है
अभय को पता था की अगर वो खाना नही लेता तो सभी उसे जोर जबरदस्ती खाना खिला कर ही मानते इस लिये अभय ने बिना दिमाग पागल किये जल्दी से खाना ले लिया था
अभय एक हाथो से प्लेट पकर दूसरे हाथो से रोटी तोर खाये जा रहा था अभय 4 साल बाद घर का खाना खा रहा था अंदर मे अभय के कई इमोसन जाग रहे थे लेकिन अभय उसे बाहर आने नही देता
पायल मुह फुलाये अभय को देखे जा रही थी ये देख बिपिन खाने की एक प्लेट पायल को देते हुवे दीदी ये लीजिये और खाते हुवे जितना देखना है देखते रहिये पायल बिपिन को देख प्लेट लेते हुवे चल अपना काम कर बिपिन खाना खाते हुवे मेरी तो कोई इज़त ही नही है
अभय खाना खा लेता है तो पायल ये देख अरे और चाहिये तो अभय बीच मे रोकते हुवे पायल को देख नही मेरा हो गया थैंक्स खाना बहोत अच्छा था पायल मुस्कुराते हुवे अभय को देख चलिये आप कुछ तो बोले खाने के बहाने अभय पायल को देखता है फिर अपने उपर वाले सीट पे जाके लेत जाता है पायल अभय को देख अरे यार किया करू मे इसका बिपिन भी खाना खाने को बाद उपर वाले सीट पे जाके लेत जाता है
पायल भी थोरि देर बाद खाना खाके उपर बिपिन के आखो मे गुस्से से देखती है बिपिन पायल को देख हद है यार दीदी बिपिन बेचारा नीचे उतर आता है पायल मुस्कुराते हुवे बिपिन को देख मेरा अच्छा भाई पायल फिर उपर वाली सीट पे अभय की चेहरे की तरफ अपना चेहरा कर लेत जाती है और अभय को देखने लगती है अभय पायल की आखो मे देखता है पायल अभय की आखो मे
अभय - पायल को देख दिल तो कर रहा है यही घोरी बना के इसकी इतनी चुदाई करू की इसकी सारी गर्मी ही निकल जाये हद है यार पीछे ही पर गई है चिपकु कही की
अभय फिर दूसरी तरफ चेहरा कर आखे बंद कर लेता है पायल ये देख थोरा उदास हो जाती है
पायल - फिर मुस्कुराते हुवे कोई बात नही मेरे गाव के बगल वाले गाव मे ही तो रेहता पायल अभय को देख पीछा नही छोरुगी चुड़ैल की तरह पीछे परी रहूगी
पायल ये केह मुस्कुराते हुवे वो भी अपनी आखे बंद कर लेती है
( पास्ट )
( लालपुर पुलिस इस्टेशन )
लालपुर इस्टेशन की इन चार्ज इंस्पेक्टर नीतिका सिन्हा
नीतिका सिन्हा - उमर 35 - साल - इसके दो रूप है वर्दी बिना नीतिका बहोत ही संस्कारी मीठी बातें करने वाली अपने पति बच्चो का ख्याल रखने वाली एक हाउस वाइफ लेकिन वर्दी मे नीतिका कराइम् करने वालो के लिये मौत से कम नही है खास कर रेप मडर करने वालो को के लिये रेप मडर किडनैपिंग जैसे केस मे नीतिका पूरी जान लगा देती है अपनी पूरी इमानदार बहोत ही खूबसूरत हॉट दो बच्चे है
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बेटी - मीका सिन्हा - 16 साल - बेटा - जीत सिन्हा - 15 साल - बाकी आगे जैसे कहानी जायेगी आपको पता चलते जायेगा
विनय अपनी मा बेहन और उस औरत के साथ पुलिस इस्टेशन आती है अंदर जाते ही आसा और वो औरत रोते हुवे पुलिस वालो से गुहार लगाने लगती है
विनय - आसा को पकर मा सांत हो जाओ प्लेस रोने से कुछ नही होगा मुझे भी अपने भाई से बहोत प्यार है लेकिन अभी थोरा सांत रहिये
अदिति का भी बहोत ही बुरा हाल था अदिति बार बार अपने भाई को याद कर आसु बहाये जा रही थी
सोर सारबा सुन नीतिका बाहर आके देखती है तो आसा बाकी सभी को परेसन रोते हुवे बुरी हालत मे पाती है
नीतिका - सभी के पास जाके सभी को देख किया हुवा है आप लोग रो कियु रहे है कुछ हुवा है तो बताये हम है आपकी मदद करने के लिये
आसा - नीतिका के पैर पे गिरते हुवे मैडम मेरे बेटे को कैसे भी ढूढ़ कर वापस ला दीजिये प्लेस वो मेरा जिगर का टुकरा है आसा ये केहते हुवे जोर जोर से रोये जा रही थी
नीतिका - आसा को उठाते हुवे देखिये जो भी अंदर जाके बात करते है लेकिन पेहले आप सांत हो जाइये ठीक है
नीतिका फिर सभी को अंदर लेके जाती है ऑफिस मे फिर सभी को कुर्सी देती है सभी को बैठाती है पानी पीने के लिये देती है जब आसा सब सांत होते है तब नीतिका पूछना सुरु करती है
नीतिका - ठीक है बताइये बात किया है
विनय - मैडम मे बताता हु विनय सुरु से लेकर सब बता देता है
नीतिका - विनय की बात सुन औरत को देख आप सब एक साथ है
औरत - नीतिका को देख नही मेडम
औरत भी अपनी सारी कहानी बता देती है
सभी की बात सुनने के बाद नीतिका सभी को देख ये एक किडनैपिंग है
नीतिका की बात सुन आसा विनय अदिति औरत सब की हालत और बुरी हो जाती है
आसा - नीतिका को देख रोते हुवे मैडम लेकिन मेरे बेटे ने किसी का किया बिगरा है जो कोई मेरे बेटे का किडनैपिंग करेगा हम तो अमीर भी नही है
औरत - नीतिका को देख रोते हुवे सही कहा दीदी ने हम तो गरीब है और मेरा बचा तो अभी 15 साल का होने वाला था
नीतिका - सभी को देख कर बात ये है की हाल ही मे कई केस आये है किडनैपिंग के ये बाकी दूसरे गाव से भी बच्चे को किडनैपिंग किया गया है और मुझे लगता है ये किडनैपिंग कोई पैसे या बदला लेने के लिये नही किया गया है बल्कि कुछ और बात है
कई गाव से 15 या 17 के बच्चे को किडनैपिंग किया गया है वजह तो पता है और जो वजह हो सकती है वो सही है या गलत ये केह नही सकती हमारे उपर के सीनियर दूसरे गाव के इंस्पेक्टर हम सब मिल कर इसका पता लगाने वाले है चिंता मत कीजिये जल्दी ही हम उन किडनैपिंग करने वालो को पकर लेगे बच के जायेंगे कहा फिल्हाल आप लोग अपना नाम पता रिपोर्ट लिखवा दीजिये जैसे ही हमे कुछ पता चलेगा हम बता देगे
आसा औरत रोते हुवे प्लेस मैडम कैसे भी कर के हमारे बच्चो को डुंढ निकालिये
नीतिका - सभी को देख आप सभी चिंता मत कीजिये जमीन आसान एक कर दुगी मे सभी को डुंढने मे
आसा अपना रिपोट लिखवा देती है नाम बता सब
औरत का नाम - मिनिता सिन्हा - उमर 39 - बहोत ही खूबसूरत भरा हवा बदन
पति - भोला सिन्हा - उमर 41 साल -
बेटी कोमल सिन्हा - 19 साल - समझ लो उपर से नीचे तक मा पे गई है
बेटा - विजय सिन्हा - 18 साल - हैंडसम है लेकिन थोरा बेवकूफ भी इसी का किडनैपिंग हुवा है अभय के साथ
( याद रहे ये उमर पर्जेंट का है पास्ट मे सभी की उमर 4 साल घटा दो उतना होगा )
रिपोर्ट लिखवाने के बाद विनय अपनी मा बेहन मिनिता सभी दुखी अपने घर इस उमीद पे आते है की सायद पुलिस वाले इनके बेटे को डुंढ निकालेेंगे
सभी के जाते ही नीतिका अपने सर पे मुक्के से धीरे धीरे मारते हुवे आस पास मे भी बच्चे को किडनैप किया गया है एक साथ मे इतने बच्चे को कियु किया वजह होगी मेरे दिमाग मे तू कई वजह आ रही है लेकिन दिल केह रहा है कुछ और बात है
नीतिका बाहर आके अपने टीम को रेडी कर आ जाती है अभय के घर पुरे गाव मे ये बात फैल गई थी की फलाना के लरके को किडनैप कर लिया गया है बहोत सारे लोग पुलिस वाले किया कर रहे है देखने आये थे
नीतिका क्राइम सीन पे आके कुछ कुलू दुधने की कोसिस करती है ताकि आगे जाच करने मे आसानी हो लेकिन नीतिका को कुछ नही मिलता नीतिका पास पास के लोगो से भी पुचतास करती है लेकिन उसका भी कोई फायेदा नही होता
नीतिका बीच सरक पे खरी होकर चारों तरफ नजर दोराति है जब सामने देखती है आगे तो मैन रोड दिखाई देता है अभय के गाव से ईट की सरक सीधा मैन रोड से जाके मिलती थी नीतिका मैन रोड पे जाके देखती है तो नीतिका को एक cctv केमरा दिखाई देता है
नीतिका - अपने एक साथी से cctv केमरे को देखते हुवे जाव और 12 से 2 बजे के बीच का cctv फोटेग वीडियो निकलवा कर लाओ कोई गारी गुजरी है 12 से 2 के बीच
थोरि देर बाद नीतिका को फोटो वीडियो मिलती है जिसमे साफ साफ 12 से 2 के बीच एक वेन जाते हुवे दिखती है लेकिन उस वेन पे कोई नंबर नही था नीतिका को इतना यकीन हो जाता है इसी वेन मे अभय विजय को किडनैप कर के ले जाया गया है
निकिता - अपनी मुठी कसते हुवे कम से कम कुछ तो मिला सायद इससे हम उन लोगो के पास पहोच पाये
विनय भी वही था सब कुछ देख रहा था आखो मे आसु ते लेकिन वो भी कुछ कर नही सकता था रोने के अलावा
वही अभय को होस आता आ चुका था लेकिन अभय की आखे बंधी थी मुह पे टेप चिपका था हाथ पैर भी बंदे थे गारी तेजी से चल रही थी तो अभय को इतना तो पता चल जाता है की उसे कही ले जाया जा रहा है लेकिन कहा कियु किया करेगे उसके साथ ये सोच अभय डर से कापने लगता है मौत का डर सब को लगता है अभय को भी था अभय को सिर्फ कुछ लोगो की बात करने की आवाज और आस पास कई चलती गारियो की आवाज सुनाई से रही थी
एक एक दिन गुजरने लगते है 10 दिन हो जाते है लेकिन नीतिका को कुछ हाथ नही लगता नही कुछ पता चलता है आसा मिनिका की बची हुई आसा भी टूट कर चूर हो जाती है
आसा की हालत इस 10 दिनों के बहोत खराब हो जाती आसा खाना छोर चुकी थी रोज अभय के याद मे ना सो पाती थी ना खाना खा पाती थी वही हाल विनय अदिति का भी था
अदिति को अपने भाई के साथ बिताये पल याद आते ही जोर जोर से रोना सुरु कर देती थी अदिति भी बहोत खाना सही से ना खाने की वजह से कमजोर होती जा रही थी
विनय घर का बरा लरका था और संझदार भी विनय अपनी मा बेहन की हालत देख दोनों को कसम देखे खाना पीना पे ध्यान देने के लिये केहता है तब जाके आसा अदिति कुछ खाने लगते है
5 दिन बाद आसा की हालत बहोत खराब हो जाती है कमजोरी से विनय जल्दी से आसा को होस्पिटल लेके जाता है 4 दिन अच्छे से इलाज होने के बाद आसा टिक होती है डॉक्टर विनय को अपनी मा के खाने पीने और ज्यादा टेंसन ना लेने के लिये केहता है
विनय मा को लेकर घर आ जाता है साम के 3 बज रहे थे
विनय अपनी मा के पास बैठा था अदिति भी थी
विनय - आसा को देख मा ये किया है हा मे जानता हु आपको अभय के दूर जाने से कितना दर्द मे है में भी अपने भाई को बहोत याद करता हु मेरे मे भी रोज उसकी याद मे रोता हु उसे हर पल याद करता हु लेकिन उसी के साथ अपने उपर ध्यान भी देता हु खाना ना खाने से टेंसन लेने से अभय आ नही जायेगा मा समझिये हम भी है यहा पे मे अदिति हमारे बारे भी तो सोचिये आप ही हार मान जायेगी तो हमारा किया होगा मा
आसा बिस्तर पे दूसरी तरफ चेहरा कर लेत रोये जा रही थी
आसा - विनय की तरफ देख रोते हुवे मुझे अपने लाल की बहोत याद आती है बेटा रोज सुबह मे जाके उसे उठाती थी तो मुझसे केहता था मा आपकी मीठी आवाज सुने बिना मेरी नींद नही टूटती है आपका सुंदर चेहरा देख कर मेरा पुरा दिन अच्छा जाता है लेकिन लेकिन मेरा लाल अब कैसे कैसे वो सुबह उठता होगा कहा है कैसा है मुझे कुछ नही पता मुझे कुछ नही पता ( तु लौट के आजा मेरे लाल ) आसा फिर जोर जोर से रोने लगती है
आसा को रोता देख आसा की बात सुन अदिति विनय भी रोने लग जाते है
अदिति - रोते हुवे भाई आप कहा चले गये भाई अपनी गुरिया को छोर के आप के बिना एक पल जिया नही जाता भाई आप के साथ मस्ती करना आपके साथ लराइ करना बहोत याद आती है भाई प्लेस आ जाओ अपनी गुरिया को ऐसे मत रोलाओ आप मेरी आखो मे एक बूंद आसु नही देख पाते थे ना लेकिन आज आप ही अपनी गुरिया को बहोत रुला रहे हो भाई आजाओ भाई प्लेस कहा है आप आपकी गुरिया आपको पुकार रही है
विनय - आसा अदिति को चुप करवाते हुवे आसा को देख मा अदिति को देखो मुझे देखो अगर आप हिम्मत हार जायेगी तो हमारा किया होगा हम आपके बिना कैसे जियेंगे मा सोचिये कैसे जियेंगे आपके बिन
आसा को विनय की बात समझ मे आती है रोने से सब सही नही हो जायेगा आसा को समझ मे आता है जो चला गया चला गया लेकिन जो पास मे है अगर ऐसे ही करती रही तो उन्हें भी खो देगी
आसा - विनय को देख रोते हुवे ठीक है बेटा मे आज से अच्छे से अपने उपर ध्यान दूंगी तुम लोग भी अपने पढाई पे ध्यान देना ठीक है
विनय अपनी मा की बात सुन राहत मिलती है 5 दिन और गुजर जाती है आसा खाने पे ध्यान और अपने बच्चो यानी विनय अदिति पे ध्यान देने लगती है लेकिन जब कोई नही होता था तो अभय को याद कर जोर जोर से रोने लगती थी
आसा - अकेले कमरे मे बिस्तर पे लेते हुवे मेरे लाल तुझे मे कैसे भूल जाऊ कैसे तेरे बिना आराम से अपनी जिंदगी गुजारु तेरे बिना ये जिंदगी मुझे बहोत भारी लग रही है मेरे लाल तु जहा भी है अगर एक मा की पुकार सुन रहा है तो तुझे लौट के आना होगा अपनी मा के पास
दूर कही एक कमरे मे अभय सोया हुवा था तभी अभय जोर से मा पुकारते हुवे उठ कर बैठ जाता है अभय का चेहरा पसीने से गिला था अभय जोर जोर से सासे लेते हुवे मा मे आऊगा आपके पास लौट कर आपका लाल आपके पास जायेगा चाहे मुझे उसके लिये कुछ भी करना परे बस आप मेरा इंतज़ार कीजिये मा
विजय अभय को देख भाई आप ठीक तो है ना अभय विजय को देख हा मे ठीक हु
आज के लिये इतना ही![]()

