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Incest तू लौट के आजा मेरे लाल

Raj Singh

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Abhay ki dusri ma yani uske Papa ki dusri family ko bhi add karna. Ye mera ek sujhav hai. Nice update
 

sexymom00

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chapter 114

कमला जब नाइटी मे अभय के कमरे मे आती है तो अभय कमला को देख सब भूल जाता है कमला शर्म से अभय के पास बैठ जाती है

अभय कमला को अपने गोद मे बैठा के चूचे दबाते हुवे - उफ आपकी मोती गांड बुर की गर्मी मुझे साफ फिल हो रही है ऑन्टी कब से आपकी बुर मे लंड नही गया है
कमला सिसकिया लेते हुवे - बेटा उफ धीरे दबा 2 साल होने को आये है
अभय - अच्छा बुर मे उंगली करती ही होगी
कमला थोरा सर्म से - उफ हा कभी कभी

अभय जोस मे भर जाता है कमला को बिस्तर पे लेता के किस करने लगता है पहले होठो का रस पिता है फिर गर्दन गाल सीने पे किस करते हुवे नीचे आने लगता है पहली बार कमला को उसके पति के जगह था हर अंग बॉडी पे अभय के होठो के प्यार का एहसास पाके कमला जोर जोर से सिसकिया ले रही थी इस तरह कभी भी जोगी ने कमला के हर अंग को बॉडी को प्यार नही किया था ये सब कमला का पहली बार नया एहसास था जो कमला को पागल मदहोस कर रहा था
कमरे मे कमला के कामुक् आह उफ सिसकिया की आवाज गुजने लगती है

अभय अच्छे से चुमने मे बाद कमला की नाइटी निकलाने लगता है तो कमला और जयदा सर्माने लगती है आज उसके पति के बाद अभय सब कुछ देखने करने वाला था

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अभय नाइटी निकाल देता है कमला पूरी नंगी अभय के सामने थी कमला सर्म से लाल हो गई थी वही अभय तो जोस मे पागल हो गया था कमला के नंगी बॉडी देख के कमला सच मे गजब लग रही थी भरा बदन बरे चूचे बुर फूली उभरी हुई
अभय अच्छे से उपर से नीचे तक देख - अन्टी उफ आपकी बॉडी कमाल की है इस उमर मे भी पूरी फिट आपके चूचे बुर तो और भी मस्त है
कमला सर्म से धीरे से - अभय बेटा तु सच केह रहा है
अभय कमला को देख - हा इस लिये तो इतना बेताब था आपकी चुदाई करने के लिये
कमला शर्म से - तो बेटा रुका कियु है डाल दे
कमला तो पूरी गर्म थी जोस मे लंड लेने के लिये

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अभय कमला के चूचे के पास आके एक चूचे पकर मसलते दबाते हुवे - उफ अन्टी बहोत बरे सॉफ्ट चूचे है आपके दबाने मे मजा आ रहा है
अभय कमला के चूचे निपल दबाते जोर से मसलने लगता है
कमला बिस्तर कस ले पकर आह उफ सिसकिया लेते हुवे - आह अभय बेटा मसल दे मेरे चूचे को उफ दर्द हो रहा है लेकिन अच्छा लग रहा है उफ मा अभय बेटा मसल दे
अभय चूचे दबाते मन मे - ऑन्टी तो बहोत गर्म हो गई है तरप रही है

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अभय फिर नीचे झुक के एक चूचे मुह मे लेके चूसने लगता है कमला सिसकिया लेते मदहोस होके अभय के सर पे हाथ रख - उफ बेटा चूस ले अपनी अन्टी के चूचे दूध नही है लेकिन चूस उफ मुझे बहोत अच्छा फिल हो रहा है बेटा उफ ये एहसास बहोत अच्छा है आह अभय बेटा
अभय चूचे चुस्टे हुवे मन मे - मजा आ रहा है इस चूचे को चूस के दूध पीके रूबी जीतू बरे हुवे अब मे चूस रहा हु ये सोच कर ही आह अन्टी
अभय मजे से दोनो चूचे दबाते चूस चूस ले लाल कर देता है
अभय कमला को देखता है जो जोर जोर से सासे ले रही थी अभय अब कमला ले टाँगों ले पास आके बैठ जाता है

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कमला अपनी टाँगे और फैला देती है अभय बरे गोर से कमला के बुर को देखते हुवे मन मे - उफ क्या मस्त फूली बुर है अन्टी की देख के साफ पता चल रहा है ऑन्टी ने जैसा कहा बुर मे उंगली करती है

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अभय धीरे से अपनी बीच वाली उंगली कमला के बुर के अंदर घुसा देता है वैसे ही कमला जोर से आह मा करती थी सिहर जाती है
अभय अंदर उंगली डाले मन मे - बहोत जयदा गर्म है टाइट भी फिल हो रहा है उफ मेरी उंगली जल रही है अन्टी के अंदर तो बहोत आग है
कमला अभय को देख मन मे - उफ उंगली डाल दी मेरी बुर मे उफ पति जी माफ करना लेकिन अब अभय बेटा आपकी बीवी की बुर मरेगा आह
अभय उंगली निकाल कमला को देख उंगली मुह मे लेके चूस लेता है ये देख कमला हैरान सर्म से लाल हो जाती है अभय मुस्कुराते हुवे - बहोत अच्छा स्वाद है आपकी बुर के रस का
कमला सर्म से पानी पानी हा जाती है

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अभय झुक जाता है और कमला के बुर को जिब से चाटने लगता है कमला एकदम से सिहर जाती है काप् जाती है पहली बार अपनी बुर मे जिब का एहसास कमला को पागल कर देता है अभय जिब से चाटने मुह मे लेके चूसने लगता है तो वही कमला बेहाल होके आह उफ सिसकिया लेते हुवे - उफ बेटा अभय ये कैसा मजा है बहोत जयदा मजा आ रहा है चूस बेटा मेरी बुर को अच्छे से चूस आह ये मजा तो गजब का है उफ मा मजा आ रहा है
अभय मन मे - स्वाद तो बहोत अच्छा है अन्टी की बुर के रस का
3 मिनट बाद ही कमला गांड कमर उठाते कपते हुवे - उफ अभय बेटा आने वाला है मे झरने वाली हु, कमला बिस्तर पकरे झरने लगती है
कमला मन मे - उफ इतनी जल्दी ऐसे तो मे कभी नही झरी
अभय कमला को देख मुस्कुराते हुवे - मजा आया
कमला सर्म से तेज सासे लेते हुवे - हा बहोत आया बेटा

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अभय कपड़े निकाल नँगा हो जाता है कमला की नजर अभय के खरे लंड मे जाती है तो बेचारी काप् जाती है सासे उपर नीचे होने लगती है
कमला डरते हुवे - अभय बेटा ये क्या है इतना बरा
अभय मुस्कुराते हुवे - तभी तो आपकी बुर के पुरा अंदर तक जायेगा
कमला डरते हुवे - जायेगा लेकिन दर्द भी बहोत होगा
अभय - दर्द मे मजा भी आयेगा अन्टी चलिये मुह मे लेके चूसिये
कमला हैरान अभय को देख - छि नही गंदा होता है
अभय - मजा आयेगा ये मजा नही मिला होगा अब मिलेगा
कमला अभय को देख सर्म से - ठीक है अभय बेटा आज मे तेरी हु

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अभय लेत जाता है और कमला लंड के पास आके झुक के लंड पकर मुह मे लेके चूसने लगती है कमाल मन मे - उफ कितना गंदा है, लेकिन थोरि देर बाद ही जो स्वाद मजा मिलता है कमला मजे से चूस चूस के स्वाद लेते हुवे मन मे, अजीब है अब तो बहोत मजा आ रहा है सोचा नही था लंड चूसने मे इतना मजा आयेगा लंड का स्वाद उफ अच्छा है
अभय मजे से लेता मजा लेते हुवे - उफ ऑन्टी मस्त चूस रही है आह मजा आ रहा है अच्छे से चुसो उफ
5 मिनट बाद

अभय कमला के टाँगो ले बीच बैठ लंड पकर बुर के फाको ले बीच घिसते हुवे - अब असली खेल सुरु
कमला सिसकिया लेते अभय को देख अपनी टाँगे पूरी उठा के पकर - आह डाल दे बेटा रहा नही जाता है उफ
कमला खुद बेताब थी टाँगे उठाये फैलाये पकरे लेती लंड लेने के लिये

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अभय लंड पकर छेद पे रख कमला को देख - बहोत जोस मे है आज निकाल दुगा गर्मी सारी
अभय एक धक्का फिर दूसरा पुरा लंड कमाल की बुर को चीरते हुवे पुरा अंदर तक चला जाता है कमला जोर से दर्द मे चीखने वाली थी लेकिन अभय जल्दी से कमला के ऊपर लेत किस करने लगता है कमला दर्द मे अभय को बाहों मे कस पैरो से पकर जकर् लेती है
कमला दर्द मे रो परी थी तरप रही थी अभय कुछ देर किस करते हुवे चूचे दबाते रहता है अभय मन मे - कितनी गर्म टाइट है अन्टी की बुर

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2 मिनट बाद अभय चुदाई करते हुवे - अब कैसा लग रहा है अन्टी
कमला अभय को पकरे दर्द मे - बहोत दर्द हो रहा है अभय बेटा
अभय चुदाई करते हुवे - अन्टी आपकी बहोत टाइट है गर्म भी मुझे तो बहोत जयदा मजा आ रहा है आप को भी आयेगा
अभय तेज तेज धक्के मारना सुरु करता है जिसकी वजह से कमला दर्द मे रोते हुवे - मर गई मा अभय बेटा जोर से मत कर दर्द हो रहा है रुक जा मेरे लाल
अभय तेज धक्के मारते हुवे - नही रुक सकता उफ मजा आ रहा है
फट फच् और दर्द भरी सिसकिया आवाज गुज रही थी कमरे मे
अभय फिर लंड निकाल - घोरी बन जाओ
कमला दर्द मे आसु लिये घोरी बन के रोते हुवे - धीरे करना प्लेस

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अभय कमला के गांड के ऊपर आके लंड बुर मे घुसा के चुदाई करने लगता है फट फच् की आवाज के साथ फिर कमला रोने लगती है दर्द मे रोते हुवे घोरी बनी कमला - उफ मा मर गई अभय बेटा समझ ना बहोत दर्द हो रहा है अंदर लग रहा है धीरे कर ना
अभय धक्के मारते कमला की गांड दबाते मसलते चुदाई करते हुवे - उफ मस्त गांड हो आपकी घोरी बना के चोदने का मजा ही अलग है धीरे नही ऑन्टी जोर से उफ गजब की बुर है मजा आ रहा है

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अभय फिर कमला को बिस्तर पे लेता टाँगे फैला के चुदाई करने लगता है कमला दर्द मे अभय को रोकते हुवे - मर गई अभय बेटा नही ले पऊगा जलन होने लगी है बहोत दर्द भी हो रहा है प्लेस
कमला रो रही थी लेकिन अभय चुदाई करते हुवे - ऑन्टी बस हो गया आह किया करू आप की बुर की गर्मी पागल कर दिया है मुझे
45 मिनट बाद चुदाई खतम होती

कमला अभय पसीने से भीगे अपने सासो को काबू करने मे लगे थे
5 मिनट बाद
अभय कमला को देख - ऑन्टी कैसा लगा मजा आया
कमला अभय को देखती है फिर अभय के सीने पे मारते हुवे - बेसरम कही की कितना दर्द हा रहा था लेकिन तुम रुके नही
अभय हस्ते हुवे कमला के ऊपर आके प्यार से - मानता हु लेकिन आप को मजा भी तो आया
कमला मन मे - सच है जो मजा आया केह नही सकती 45 मिनट चुदाई मेने सोचा नही था इतनी देर कोई मेरी बुर मारेगा लेकिन अभय बेटा सच मे मर्द है मेरी जैसी औरत की हालत खराब कर दी
अभय - कहा खो गई आप
कमला अभय को देख सर्म से - बेटा सच कहु सुकून मिल गया दर्द जलन बहोत हो रहा है लेकिन ऐसी चुदाई तेरे अंकल भी नही कर पाये
अभय अपना लंड पकर छेद पे रख - अच्छा
कमला छेद लंड फिल कर डरते अभय को देख - नही बेटा
लेकिन अभय एक जोर का धक्का मर देता है कमला दर्द मे रोते हुवे मर गई मा प्लेस अभय बेटा अब नही ले सकती
अभय धक्का मारते हुवे - एक राउंड और आपकी बुर इतनी गर्म टाइट है उफ मजा आ रहा है

सुबह होती है रात अभय दो राउंड कमला की चुदाई कर दिया था कमला नंगी उठती है दर्द जलन से आह करते हुवे कमला अभय को देख मन मे - रात हालत खराब कर दी इस लरके ने यकीन नही होता रात मे कर बार झरी लेकिन उफ मजा भी बहोत मजा

कमला नाइटी पहन नहाने चली जाती है रूबी अदिति जीतू जोगी सब उठ गये थे अभय लास्ट मे उठ कर नहाता है रूबी खाना बनाने लगती है जीतू अभय बाते कर रहे थे

अभय - जब घर रेडी है तो सिफ्ट कियु नही हो जाते
जीतू - भैया अब जाके सब रेडी हुआ है 2 दिन मे सिफ्ट कर लेगे
अभय - अच्छा है
जीतू अपनी मा को जाते देख मन मे - लगता है मा को चोद दिया भैया ने

रूबी अभय को देख - भैया भाभी को लेके कियु नही आये
अभय मुस्कुराते हुवे - गुरिया सब आयेगी जीतू की शादी मे
रूबी - हा आना ही पड़ेगा

सुबह का समय अभय के घर

आसा तारा दिशा हॉल मे बैठे कोफ़ी पी रहे थे लेकिन आसा कही खोई सोच मे डूबी थी तारा आसा को देख - कहा खोई हुई है आप

आसा होस मे आके तारा को देख - कही नही
तारा - दमाद जी की याद आ रही है हु
आसा - एक ही तो लाल है मेरा दूर जाता है तो दिल बैठ जाता है
दिशा आसा के पास बैठ - एक छोटा लाला आ रहा है मम्मी जी आपको खूब परेसान करेगा
आसा हस्ते हुवे - सही कहा दिशा बेटी बाप शैतान है तो बेटा या बेटी हो वो भी शैतान ही होगे
दिशा हस्ते हुवे - आपने सही कहा
तारा - नही बेटी हुई तो मेरी दिशा जैसी होगी बेटा हुआ तो दमाद जी जैसा
फिर सब हसने लगते है

किचन मे पूजा खाना बना रही थी बार बार पेट पे हाथ रख अपने आने वाले बच्चे से बात कर रही थी
पूजा - मेरा बच्चा तेरे पापा को तो पता भी नही है तेरे बरे मे आह किया होगा जब जीजा जी को पता चलेगा
दिशा अंदर आते हुवे - बस भी कर छोटी कुछ नही होगा
पूजा - दीदी आप है तो चिंता कैसी

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दिशा पूजा के पास जाके पूजा को पकर किस करने लगती है दोनो बहन मजे से एक दूसरे के होठों का रस चूस के पीने लगते है
पूजा नीचे हाथ ले जाने सारी के अंदर हाथ डाल दिशा के बुर मे एक उंगली घुसा देती है दिशा दर्द मजे मे - आह छोटी उफ
पूजा उंगली अंदर बाहर करने लगती है दिशा टाँगे फैला के सिसकिया लेते हुवे - उफ छोटी बस कर आह मा

पूजा उंगली निकाल दिशा को दिशा के - देखिये मेरी उंगली मे आपके बुर पानी लग गया

दिशा पूजा के कान पकर - बेसरम हो गई है अपने जीजा की तरह

सुबह 10 बजे जीतू के घर

अभय को फोन आता है पुष्पा का

अभय - बुआ गुस्सा है
पुष्पा - बेटा माफ कर दे कल तेरे पे गुस्सा हो गई लेकिन क्या करती तु मेरे भैया का बेटा मेरा भतीजा है मेरे बरे मे गंदा इस लिये गुस्सा आया समझ नही आता तु कैसे मेरे बरे मे गंदा सोच सकता है

अभय - बुआ आपको जानना है मे कियु आपको लेके ऐसा सोचा
पुष्पा हैरान होके - हा
अभय - बुआ कैद से बच के आने के एक महीने बाद एक दिन मे अपने दोस्त के घर गया उस दिन मे एकदम से अंदर कमरे मे चला गया तो देखा मेरा दोस्त अपनी सगी बुआ को चोद रहा था
अभय गंदे शब्द जान बुझ के केहता है ये कहानी भी अभय की बनाई है
पुष्पा हैरान पूरी शोक मे - क्या कहा
अभय - हा जो आपने सुना मे भी पुरा शोक था सब देख
पुष्पा - फिर क्या हुआ
अभय - दोनो ने मुझे देख लिया दोनो डर गये मुझसे कहा किसी को ना बताये मेरा दोस्त था तो कैसे किसी को बता देता
पुष्पा हैरान शोक मे - लेकिन बेटा ये कैसे मतलब दोनो के बीच
अभय - यही मेने भी सोचा फिर मेने पूछ लिया

बुआ - बेटा 10 दिन पहले मेरी कमर मे दर्द होने लगा तो मेने अपने भतीजे से कहा मलिस कर दे भैया भाभी सो गये थे उस रात जब हरिस् मेरी तेल से मलिस करते मुझे टच करने लगा तो मे गर्म हो गई मेरे पति कई साल से मेरी चुदाई नही करते मे तरप रही थी बस सब हो गया

अभय - बुआ लेकिन ये कमीना आपका भतीजा है फिर कैसे
बुआ - बेटा जानती हु जब सब हो गया तो मुझे भी लगा मे गलत कर बैठी लेकिन जो मजा सुकून मिला उसके बाद सोचा क्या ही गलत है मे बाहर किसी के साथ तो नही क्या ना मेरा भतीजा है घर की बात घर मे और मुझे भी बाकी जिंदगी तरप ke नही जीना था तो बस उसके बाद से हम रोज करते है
अभय झूठी कहानी सुना के - बुआ ये सब हुआ बस तभी से मेरे मन मे भी आया कास मेरी बुआ भी होती तब पता चला आप है मासी भी तो खुश हो गया जब आप को देखा तो देखता रह गया आप बहोत खूबसूरत कमाल की लग रही थी मेरे दोस्त की बुआ से कही जयदा

ये लाइन तारीफ वाला सुन पुष्पा को अच्छा लगता है
पुष्पा मन मे - तो ये बात है जाहिर है ऐसा कुछ देख अभय बेटे के मन मे गंदे विचार आयेगे ही
अभय - बुआ माफ कर दो
पुष्पा - कोई बात नही बेटा सच जान लिया मेने
अभय - बुआ कुछ पूछूँ
पुष्पा - हा बोलो
अभय - आपका मन नही होता मतलब फूफा करते है या नही
पुष्पा - बेटा नही करते उमर हो गई उनकी
अभय - तो आपका मन करता होगा ना
पुष्पा थोरा सर्म से - करता है लेकिन क्या ही कर सकती हु
अभय - बुआ इस लिये केह रहा हु जैसे मेरा दोस्त उसकी बुआ करते है हम करेगे आप जवान है तरप के जीना भी जीना है कोई घर की बाते घर मे कोई सक भी नही करेगा
पुष्पा - लेकिन बेटा गलत तो गलत है
अभय - बुआ दुनिया मे घर के अंदर सब होता है लेकिन ये बाते कांड राज ही रहती है
पुष्पा सोच मे पर जाती है सच ये है पुष्पा भी तरप के जी रही थी बुर मे उंगली करते हुवे
अभय - बोलिये ना बुआ मान जाओ मेरी प्यारी बुआ प्लेस
पुष्पा सर्म से - अच्छा बाबा ठीक है लेकिन किसी को पता ना चले
अभय खुश होके - सच मे बुआ
पुष्पा हस्ते हुवे सर्म से - हा देख बेटा ये गलत है लेकिन सच है मे तरप रही हु बस तु मुझे बीच मे मत छोर देना
अभय - आपकी कसम बुआ
पुष्पा सर्म से - हु
अभय धीरे से - तो आऊगा तो देगी ना अपनी बुर
पुष्पा सर्म से - छि गंदे
अभय - बोलिये ना
पुष्पा धीरे से सर्म से - दूगी
अभय - क्या खुल के बोलो
पुष्पा सर्म से - अपनी बुर अब खुश
अभय खुश होके - बहोत खुश
पुष्पा - बेटा रखती हु बाद मे बात करेगे
अभय - जी बुआ उम्मा मेरी प्यारी बुआ
पुष्पा हस्ते हुवे - बेसरम
फोन कट
अभय खुश होके -चलो कहानी काम कर गई बुआ की बुर भी रेडी है अरे याद आया मितल दीदी मे फोन नही क्या कर लेता हु

अभय - हैलो दीदी नाराज हो मुझसे
मितल -नही तो मे कियु नाराज होगी तुमसे
अभय - वो उस दिन को लेके
मितल थोरा शर्म से - नही तो नही हु नाराज
अभय - हु दीदी जनता हु आपको लेके सोचना गलत है लेकिन दीदी एक विस पूरी कर देना प्लेस
मितल - कोन सी
अभय - मुझे मेरी प्यारी दीदी की खूबसूरत नंगी बॉडी देखनी है
मितल सर्म से - छि गंदे बेसरम सोच के बताऊंगी साम को फोन करुगि abhi रखती हु तेरे जीजा घर पे है
अभय - ठीक है दीदी
फोन कट
तभी अदिति आते हुवे - भैया किससे बाते हो रही है
अभय अदिति को बाहों मे लेके - मितल दीदी से

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अभय बिना देरी अदिति को किस करने लगता है अदिति भी पुरा साथ देते हुवे मन मे - आप मेरे हो मेरा सब कुछ आपका मेरे प्यारे भैया जी भर ले चूस के पीजिये अपनी गुरिया का रस

किस के बाद अभय - मेरी गुरिया के होठ के रस का कोई जवाब नही
अदिति सर्म से - झूठे कई का रस पीते रहते है रात अन्टी का रस तो पिया ही ना
अभय मुस्कुराते हुवे - हा होठ बुर दोनो का लेकिन मेरी गुरिया के आगे सब फेल है
अदिति सर्म से - बेसरम भैया

तभी रूबी आते हुवे - दीदी भैया हम नये घर जा रहे है चलेंगे
अभय रूबी को देख - ठीक है गुरिया चलो

अभय फिर सब के साथ नये घर आता है फिर बाते करने लगता है सब से होने के बाद अभय एक कमरे मे लेता सोच मे गुम हो जाता है तभी रूबी आती है अभय रूबी को देख - आओ गुरिया
रूबी अभय के पास बैठ - भैया कैसा है घर
अभय - बहोत अच्छा है तुम तो और भी
रूबी सर्म से - आप भी ना
अभय बैठ रूबी को गोद मे बैठा के धीरे से - कुछ सोचा गुरिया
रूबी सिहर जाती है तेज सासे लेने लगती है
रूबी कपते हुवे - जी जी नही वो मे
अभय - माफ करना गुरिया मे जयदा फोर्स तो नही कर रहा
रूबी एकदम से नही तो भैया
अभय - हु तो एक काम करुगि अपने भैया का लंड एक बार मुह मे लोगी
रूबी हैरान शोक मे कपते हुवे - क्या
अभय रूबी के दोनो चूचे दबाते हुवे - बस एक बार
रूबी अपने चूचे मे अभय का हाथ दबाव फिल कर गर्म होने लगती है सिसकिया लेने लगती है रूबी सिसकिया लेते हुवे - आह भैया किसी को पता नही चलेगा ना
अभय - नही चलेगा बोलो लोगी
रूबी सिसकिया लेते हुवे - जी भैया मे तैयार हु

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अभय ये सुनते ही रूबी को किस करने लगता है रूबी भी पूरे मजे के साथ अभय का साथ देती है रूबी मन मे - उफ भाई तो मेरे होठ का रस मजे से पी रहे है उफ ये एहसास बहोत अच्छा सुकून वाला है

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अभय भी बिना देरी पैंट नीचे कर लेत के - तो जल्दी करो ना गुरिया
रूबी जैसे ही देखती h अभय का मोटा लम्बा लंड रूबी की सासे रुक जाती है बॉडी काप् जाती है रूबी मन मे - इतना मोटा लम्बा
अभय - देखो मत जल्दी मुह मे लो गुरिया रहा नही जाता
रूबी कपते हुवे लंड ले पास बैठ गोर से लंड देखने लगती है फिर लंड को हाथो पकर लेती है गर्म गर्म होता एहसास फिल करके सिहर जाती है बुर गीली होने लगती है

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रूबी अभय के लंड पकरे देखते हुवे मन मे - सच ये है मे कई बार मा को बाते करते सुन लिया था मे शोक हुई थी अभय भैया मेरी मा के बीच ये सब चल रहा है रात तो मेने आवाजे भी सुनी मा आह उफ सिसकिया लेते दर्द मे मजे से चुदवा रही थी
हा रूबी ने कमला अभय के बीच बाते सुन ली तब से रूबी के अंदर की जवानी जग गई कई और उसका मन भी होने लगा रूबी को पता था रात अभय उसकी मा के बीच क्या होने वाला है तो रूबी अदिति को सोता देख चुपके से आ गई थी सब सुनने रात चुदाई की आवाज कमला अभय की बाते सुन के तो रूबी और प्यासी हो गई थी
अभय रूबी को खोया देख - गुरिया करो ना जल्दी से
रूबी होस मे आके - जी भैया

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रूबी झुक ले मुह मे लेके लंड चूसने लगती हैं अभय मस्त हो जाता है रूबी लंड चुस्टे हुवे -पहली बार लंड देखा और चूस भी रही हु उफ मजा आ रहा है भैया का लंड बहोत मोटा है गर्म भी तभी रात मा इतना दर्द मे आह उफ सिसकिया ले रही थी
अभय मजे से - उफ गुरिया मजा आ गया करती रहो आह
रूबी लंड चुस्टे हुवे मन मे - उफ इतना मजा आता है लंड चूसने मे अब पता चला ये लंड का स्वाद भी बहोत मजेदार है पीके मजा आ रहा है
6 मिनट बाद
रूबी थक के - भैया मुह दर्द करने लगा है
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अभय उठ ले खरा होके लंड पकर तेजी से हिलाते हुवे - मुह खोल ले रखो गुरिया अपने भैया का मलाई पिलो बहोत मजा आयेगा
रूबी हैरान होती है लेकिन मुह खोल के देखने लगती है अभय तेजी से हाथ चलाते हुवे आह गुरिया करते पुरा माल रूबी के मुह मे निकाल देता है गर्म गर्म मुह मे माल लेके रूबी मस्त हो जाती है
अभय - पी जाओ
रूबी भी पुरा पी जाती है
रूबी मुह साफ कर मन मे - बहोत गर्म नमकीन था मजा भी आया पीके
रूबी सर्म से भाग जाती है अभय लंड अंदर कर मुस्कुराते हुवे - मान गया लंड तो मजे से चूसा मजा बहोत आया

दोपहर 2 बजे

अभय आराम कर रहा था अदिति भी कमरे मे आती हो और अभय के पास बैठ जाती है अभय उठ के बैठ अदिति के पीछे गर्दन पे किस करने लगता है अदिति जोर से सिसकिया लेती है

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अभय अदिति को बिस्तर पे लेता के गर्दन पे किस करने लगता है अदिति जोस मे अभय को पकरे - आह भैया प्यार करो मुझे जी पर के करो मे भी तरप रही हु उफ मा भैया आह
अभय अदिति ले अपनी गुरिया के तरप देख समझ रहा था लेकिन समय नही आया था अदिति का इस लिये अभय रुका था

source
अभय अदिति को किस करने लगता है अदिति भी पूरे जोस मे अभय को किस करने लगती है अभय हैरान होके मन मे - समझ सकता हु गुरिया सब देख सुन तेरे अंदर भी प्यास जग गई है लेकिन सब थोरा इंतज़ार और करले , अभय सोच ही रहा था की
अदिति जल्दी से अभय के पैंट खोल चड्डी नीचे कर अभय का लंड पकर लेती है अभय और हैरान होके अदिति को देखता रहता है

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लेकिन तब तक अदिति झुक के अभय का लंड मुह मे लेके मजे से चूसने चाटने लगती है अभय भी मजे लेने लगता है अभय अदिति को देख मन मे - जितनी जोस मे है मे हैरान हु लेकिन गुरिया को इतना जोस मे देख मुझे भी बहोत जयदा मजा आ रहा है
अदिति अपने भैया का लंड मजे से चूस चट के रस पिये जा रही थी
अभय बस गुरिया मेरी बरी अपने चूचे चुसाओ जरा

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अपने भैया की बात सुनते ही अदिति फट से बैठ अपनी टिसर्ट निकाल अभय को देख जोस मदहोसी मे - पी लो भाई दबा दबा के चूसना अपनी गुरिया के चूचे
अभय भी पूरे जोस मे अदिति के एक चूचे पकर दबा दबा के मुह मे लेके चूसने लगता है अदिति जोस मे दर्द मजे से सिसकिया लेते हुवे - आह भाई बहोत मजा आ रहा है अच्छे से दबा के चूसिये उफ भाई सब कुछ आपका है मेरी चूचे बुर बॉडी आत्मा सब कुछ आह
अभय भी जोस मे दबा दबा के मजे से चूचे चूस के पीते रहता है
3 मिनट बाद

अभय - बस गुरिया आगे फिर कभी
अदिति होस मे आती है फिर सर्म से अभय के सीने मे अपना चेहरा छुपा लेती है अभय मुस्कुराते हुवे प्यार से अदिति के सर सेहलाते हुवे - इसमें सर्माने वाली बात किया है तुम मेरी मे तेरा हु मुझे अच्छा लगा मेरी गुरिया अपना हक ले रही है देख के
अदिति सर्म से - सच मे भैया
अभय अदिति के चेहरे को पकर किस करते हुवे - हा गुरिया अब अपनी बुर देखा दो कैसी है मेरी गुरिया की बुर

अदिति सर्म से खुशी से - अभी दिखाती हु
अभय मन मे - पगली कितनी खुशी से देखा रही है
अदिति खरी होके अपनी पैंट नीचे कर लेती हैं अभय जैसे ही अपनी बहन की नंगी बुर देखता है देखता ही रह जाता है अभय का लंड पुरा टाइट हो जाता है

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अभय हैरान होके अदिति को देख - ये क्या जगल ऊगा के रखा है वो भी इतना घना बुर तो दिख ही नही रही है गुरिया
अदिति की मस्त सिल पैक बुर बरे काले घने बल से धके हुवे थे लेकिन सीन बहोत कमाल का था उफ अभय भी मस्त हो गया था
अदिति सर्म से - वो भाई साफ करती हु लेकिन फिर जल्दी से बाल आ जाते है
अभय अदिति के पास आके एक हाथ बुर पे रख बाल सेहलानें लगता है अदिति सिहर जाती है पहली बार अपने भाई का हाथ नंगे बुर पे फिल करके अदिति मदहोस होने लगती है
अभय अदिति के बुर के बाल सेहलाते हुवे अदिति को देख - बहोत बरे बाल है गुरिया साफ कर लेना, अभय मन मे बुर से तो आग निकल रहा है
अदिति सर्म से - जी भाई
अभय हाथ हटा के - पैंट पहन लो
अदिति पैंट पहन लेती है

अभय - गुरिया मे आज रात जीत के घर रुकुगा तुम रूबी के साथ रह जाना
अदिति - जी भैया

रात 7 बजे कमरे मे अभय कमला की चुदाई करते कुछ बाते बताता है फिर अदिति से मिल सीधा जीत के घर आता है

खाना खाने का वक़्त था अभय सब बैठे खाना खाने लगते है बाते भी चल रही थी

चमन अभय को देख - कियु रे अब टाइम मिला आने को वो भी गुलाबी बेटी मे फोन क्या तो आया

अभय - अंकल आप नाराज मत हो मे आज रात कल पुरा दिन यही रहुंगा
चमन - तब अच्छा है
गुलाबी - अरे पापा मे हु ना जायेगा तो टाँगे तोर दुगी
चमन हस्ते हुवे - एकदम बेटी
अभय जोती को देख - ऑन्टी आप कुछ नही बोलेगी सब मेरे टांग तोरने की बात कर रहे है
जोती मुस्कुराते हुवे - सही तो कहा गुलाबी ने
अभय हैरान फिर जीत की और देख - तु खुल बोलेगा
जीत खाते हुवे - माफ करना भाई दीदी सब के आगे मेरी नही चलती
गुलाबी मुस्कुराते हुवे - समझ गया ना जाने की कोसिस मत करना
अभय डरते हुवे - समझ गया

खाते मस्ती बाते करने के बाद अभय घर के बाहर आके सब की हाल चाल लेता है बाते करता है एंड मे आसा को फोन करता है

आसा कमरे मे बिस्तर पे लेती अभय का फोन देख सिहर जाती है और जानती है आज उसे क्या दिखाना होगा

आसा - हा लाला
अभय - मा वादा याद है ना अब दिखाओ
आसा - बेसरम कही का कैसी हो क्या कर रही हो मा पूछने के बजाये गंदी बाते सुरु कर दी
अभय - अच्छा बाबा मा कैसी हो क्या कर रही हो मेरी सेक्सी प्यारी मा
आसा हस परती है
आसा - अच्छी हु बिस्तर पे लेती हु
अभय - हा हो गया अब दिखा दो तरप रहा हु आपकी गांड नये पैंटी मे देखने के लिये मुझे पता है आप पहन के रेडी है दिखाने को
आसा हैरान होके मन मे - कितना बेसरम तेज है समझ गया पता है मे नई डिजाइन वाली पैंटी पहन रखा है

आसा थोरा सर्म से - लाला जल्दी देख लेना मे जयदा देर नही देखाने वाली
अभय - मा ऐसे कैसे मुझे हिलाना है आपकी गांड देख के
आसा सर्म से - अच्छा मेरी वीडियो फोटो जो ले लेता है उसका क्या देख ले हिला लेना
अभय हस्ते हुवे - आपको भी पता रहता है अच्छा बाबा अब इंतज़ार नही होता मे वीडियो कॉल करता हु
आसा सर्म से - ठीक है

अभय वीडियो कॉल करता है आसा फोन केमरा एक जगह सेट लरके अभय का देख सर्म से - जल्दी देख लेना
अभय बेताबी से - जी मा समझ गया

आसा सर्माते हुवे नाइटी निकालते हुवे मन मे - जो पैंटी पहनी है वो तो सिर्फ मेरी बुर गांड की छेद ही धक पति है उफ उसके अलावा तो सब नँगा दिखेगा ये लरका भी ना बहोत बिगर गया है

आसा नाइटी निकाल केमरे के सामने आके मस्त गांड उठा के घोरी बन जाती है अभय जब देखता है तो पहले अभय का लंड पूरे पैंट फरते हुवे पुरा टाइट होके खरा हो जाता है एक जोर का दर्द अभय को होता है अभय की आखे तो बस अपनी मा उसकी गांड पे थी आखे बिना पलके फपके गांड पे ठिकी थी मुह खुले थे वो नजारा अभय के सामने था जिसको देखने के लिये अभय बेताब था अब वो देख रहा था एक बेटा अपनी मा को जिस हालत मे घोरी बनी देख रहा था उस बेटे की हालत क्या होगी वो अभय ही जान सकता था

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नजारा कुछ ऐसा था आसा काले बिकनी पैंटी मे आगे हाथ बिस्तर पे सर झुकाये घुटने के बल घोरी बने झुकी हुई थी गांड पूरे उठाये हुवे नई डिजाइन की पैंटी होने के कारन घोरी बनने के कारन पैंटी पूरी तरह आसा के मस्त गोल गोल तरबूज जैसे गोरे गांड की दरार मे पूरे घुस गये थे गांड की छेद दिख नही रहे थे लेकिन हल्का बुर की उभार पैंटी मे दबी साफ दिख रही थी अब सीन ये था आसा की गांड पूरी कितनी बरी फैली गोल मटोल है देखा जा सकता था आसा घोरी जिस तरह बनी थी बॉडी की सपनेस् बनावट उपर से गोरा पर्फेट बदन कयामत पानी मे आग लगा लेने वाला सीन बन गया था और अभय ये नजारा देख अपनी मा की मस्त गांड देख पागल होके - क्या मस्त गांड है मेरी मा आपकी जैसा सोचा एकदम बरे गोल मटोल गोरे गोरे गांड उफ मा
फिर होता ये है अभय सेह नही पता और लंड झटके मारते पिचकारी चोर देता है

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आसा भी जल्दी से बैठ नाइटी पहन अभय को देख सर्म से - देख लिया ना अब खुश
अभय होस मे आके आसा को देख - हा देख लिया मा अभी भी मेरी आखो के सामने आप घोरी बनी पैंटी मे मस्त गांड दिख रहे है आपकी पैंटी आपकी मोती गोरे गांड की दरार मे घुसे मस्त दिख रहे थे टाइट पैंटी आपकी बुर को दबाये हुवा था जिस वजह से हल्का आपकी फूली बुर की उभार भी दिख रही थी उफ मा सच केह रहा हु आपकी गांड बहोत ही जयदा मस्त बरे बरे गोल मटोल तरबूज जैसे है आज मे अच्छे से पुरा देख पाया हु आपकी गांड वाकई बरी फैली हुई है मास गुडा से बरी मन कर रहा था दबा दबा मसल के जोर से चाटा मारने का

अभय की बात सुन आसा एकदम से सिहर जाती है लेकिन
इतनी सारी बाते सुन आसा बहोत जयदा सर्म से पानी पानी हा जाती है

आसा - चल बहोत हो गया सोजा
अभय हैरान होके - लेकिन
आसा - आज बहोत हो गया रखती हु
फोन कट

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अभय - हद है यार मा ऐसा कियु करती है , अभय फोन मे अपनी मा की घोरी बनी गांड देख मन मे - कई की गांड देखी मारी लेकिन मेरी मा की गांड के सामने कोई नही टिक सकता ये पतली पैंटी नही होती तो उफ कैसा नजारा होता

वही आसा सर्म से तकिये मे मुह छुपाये सर्म से - उफ सब देख लिया मेरी नंगी गांड मेरे लाल मे देख लिया पैंटी थी लेकिन फिर भी पूरी गांड तो दिख ही गई ना मेरी बेसरम नालायक पता नही किया सोच रहा होगा मेरी फोटो वीडियो देख के

आसा बेचारी को क्या पता अभय देख सोच ही रहा है उसकी गांड को देख

अभय खरा था जोती आते हुवे - चल अंदर सोना नही है
अभय जोती को देख - ऑन्टी और आपने जो कहा उसका क्या
जोती थोरा सर्म से - कल पक्का अभी जा जाके सो जाता

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अभय जोती को बाहों मे लेके किस करने लगता है तो जोती हैरान होती है लेकिन फिर पुरा साथ देती है दोनो मस्त एक दूसरे के होठ का रस पीने पिलने लगते है किस के बाद
जोती सर्म से - बेसरम चल
अभय मुस्कुराते हुवे - हु

जोती सोने चली जाती है अभय अपने कमरे मे आके चड्डी बदल लेत जाता है फिर फोन मे अपनी मा की गांड देख मन मे - मा भी गजब तरीके से गांड उठा के घोरी बनी है

तभी कमरे मे गुलाबी आती है नाइटी मे अभय गुलाबी को देख मन मे - आज रात आपकी बुर अच्छे से मारुंगा तरप रहा था अब वो समय आया है

15 मिनट बाद गुलाबी की दर्द भरी रोने और फट फच् की आवाजे गुजने लगती है

आज के लिये इतना ही ( आज का update कैसा लगा - 🙏🙏🙏
Bhut mast update ❤️ 💖
 

ajay bhai

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chapter 115

गुलाबी नंगी लेती हुई बुर पे हाथ रखे अभय को देख रही थी अभय तो गुलाबी की नंगी मस्त बॉडी देख पागल हो रहा था गुलाबी अभय को देख सर्म से - किया देख रहा है

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अभय गुलाबी के चूचे बुर देखते हुवे - अपनी प्यारी दीदी के नंगी बॉडी को दीदी सच मे आप की बॉडी बहोत मस्त है चूचे बरे गोरे है कमर भी मस्त है और आपकी बुर तो उफ रुका नही जा रहा
अभय गुलाबी के पास आके किस करने लगता है गुलाबी भी पूरी रेडी थी आज सब कुछ अभय को देने के लिये

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अभय किस करने के बाद गुलाबी के दोनो चूचे पकर ले जोर से दबाते हुवे एक चूचे मुह मे लेके चूसने लगता है गुलाबी मस्त होके सिसकिया लेने लगती है अभय दबाते निपल को चूचे को चूस रहा था
गुलाबी मदहोसी मे जोस मे - उफ अभय मेरे भाई चूस ले अच्छा लग रहा है उफ दबा जोर से अपनी दीदी के चूचे चूस पीले जितना पीना है
अभय चूचे चूसते हुवे मन मे - उफ मस्त चूचे है मजा आ रहा है

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चूचे दबाने चूसने के बाद अभय गुलाबी के बुर के पास सीधा बुर पे टूट परता है अभय मजे से जिब से गुलाबी की बुर को फाको के बीच चाटने चूसने लगता है गुलाबी बिस्तर पकरे सिसकिया लेते हुवे - उफ भाई बहोत मजा आ रहा है ऐसे ही चाट चूस अपनी दीदी की बुर को
अभय बुर का रस पीते हुवे मन मे - उफ बहोत गर्म है बुर का स्वाद भी बहोत अच्छा है चूस के रस पीने मे मजा आ रहा है
3 मिनट बाद गुलाबी - उफ मा आने वाला है , गुलाबी कपते हुवे झर जाती है

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अभय चड्डी निकलाते हुवे - दीदी मजा आया आपकी बुर का रस पीके बहोत गर्म है आपकी बुर
गुलाबी तेज सासे लेते हुवे सर्म - बेसरम कही का
अभय चड्डी निकाल लेत के - चलो मुह मे लेके चूसिये
गुलाबी अभय का लंड देख कपते हुवे मन मे - मर गई कितना मोटा लम्बा है
अभय - दीदी जल्दी मुह मे लो ना रहा नही जाता

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गुलाबी लंड के पास आके झुक के लंड पकर जिब से चमरे टोपे को चटती है फिर मुह मे लेके चूसने लगती है अभय मजे मे गुलाबी को देख - उफ दीदी आप तो माहिर है आह अच्छा लग रहा है चुस्टे रहिये आह बहोत अच्छा चूस रही है आप पुरा अंदर तक लो दीदी
गुलाबी लंड मजे से चुस्टे चाटने हुवे मन मे - पति का लेती थी लेकिन उफ अभय के लंड चूसने मे बहोत मजा आ रहा है लंड का स्वाद भी बहोत मस्त है उफ इतना मजा तो पति का लंड चूसने मे नही आता
6 मिनट बाद

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अभय गुलाबी के टाँगो के बीच बैठ जाता है लंड पकर बुर पे घिसते हुवे गुलाबी को देखता है फिर धीरे से अंदर घुसाने लगता है गुलाबी दर्द मे आह करती है अभय मन मे - बहोत टाइट गर्म है उफ
अभय एक धक्का मारता है फिर दूसरा गुलाबी बिस्तर पकरे जोर से दर्द मे चीख परती है दर्द मे रोने लगती है अभय गुलाबी को किस करते हुवे मन मे - टाइट है अंदर बहोत गर्म भी उफ अच्छा लग रहा है
3 मिनट बाद

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अभय चुदाई करने लगता है गुलाबी दर्द मे रोते हुवे - मर गई आह बहोत दर्द हो रहा है भाई
अभय गुलाबी के गर्दन मे किस करते चूचे दबाते गुलाबी को देख - बस दीदी हो गया बहोत अच्छा लग रहा आपकी बुर मारने मे उफ
गुलाबी हर धक्के के साथ अभय को देख टाँगे फैलाते रोती रहती है धीरे धीरे दर्द मे मजा आने लगता है

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अभय गुलाबी को घोरी बना के चुदाई करने लगता है फट फच् के साथ तेजी से लंड अंदर बाहर कर रहा था गुलाबी दर्द मे - भाई आह धीरे कर मर गई जोर से मत दर्द होता है आह उफ मा ये दर्द उफ
अभय तेजी से चुदाई करते हुवे - उफ दीदी घोरी मे चुदाई करने का मजा ही अलग है आह क्या मस्त मजा आ रहा है आपकी बुर मारने मे

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अभय फिर बिस्तर पे लेत जाता है गुलाबी भी समझ जाती है और अभय के ऊपर आके बुर मे लंड लेके आह करते बैठ जाती है अभय गुलाबी को बाहों मे ले लेता है और किस करने लगता गुलाबी गांड उपर नीचे करते हुवे लंड लेने लगती है
गुलाबी मन मे - उफ दर्द भी मजा भी बहोत आ रहा है उफ

38 मिनट बाद

अभय गुलाबी पसीने से भीगे कुछ मिनट लेते रहते है

अभय गुलाबी को देख - उफ दीदी मस्त मजा आया टाइट बुर है गर्म भी जीजा जी ठण्डा नही करते क्या
गुलाबी अभय को देख - बेसरम कही का करते तो तुझे अपनी बुर देती
अभय हस्ते हुवे - तभी भी मे लेके ही मानता
गुलाबी हस्ते हुवे - इसी लिये तो कहती हु तु बेसरम ठरकी है
अभय गुलाबी को बाहों मे लेके - दीदी मजा आया ना
गुलाबी सर्म से - हु बहोत लेकिन दर्द भी बहोत हुआ तेरा बहोत बरा है
अभय - एक बार और करे हु
गुलाबी अभय को देख फिर टाँगे फैला के सर्म से - भाई दर्द जलन है फिर भी डाल दे आह सेह लुगी
बस अभय भी घुसा लेता है फिर दूसरा राउंड सुरु हो जाता है

सुबह कमला के घर

अदिति बाथरूम मे बुर के बाल साफ करने मे लगी हुई थी और मन मे सोच रही थी
अदिति मन मे सर्म से - उफ बहोत सर्म आ रही है लेकिन बहोत बेताब भी हु भाई का लंड बहोत मोटा है लम्बा भी डर है मेरी इस मासूम बुर के अंदर कैसे जायेगा लेकिन भाभी कोमल दीदी सब ले सकती है तो मे कियु नही

अदिति सोचते हुवे अपनी बुर के बाल निकाल पूरी चिकनी कर देती है अब अदिति की बुर मस्त साफ गोरी दिख रही थी

रूबी खाना बनाते हुवे मन मे - पहली बार लंड देखा चूसा भी उफ बहोत मजा भी आया अभय भैया का लंड देख तो मेरी सासे रुक गई थी कितना गर्म टाइट था हाथ मुह मे भी नही आ रहा था लेकिन मे सोच रही हु बुर मे ये सोच मेरी बॉडी काप् रही है

कमला गाय को चारा देते हुवे मन मे - अभय बेटे के मस्त चुदाई के बाद मेरी बॉडी मे बहोत अच्छा फिल कर रही हु आह ऐसा फिल हो रहा है मे हवा मे उर रही हु सच मे अभय बेटे का लंड बहोत मोटा लम्बा है मेरी बुर के अंदर तक जाके उफ सोच के ही फिर बुर गीली होने लगी है

जीतू छत पे खरा रीना से बात करते हुवे - जान बहोत याद आ रही है भाई मे कहा है जल्दी हमारी शादी करवा देगे
रीना खुश होके - सच
जीतू मुस्कुराते हुवे - हु ये बताओ भाई का लेके के बाद मजा आया
रीना सर्म से - बहोत lek दर्द भी बहोत हुआ
जीतू हस्ते हुवे - भाई का बहोत बरा मोटा है मुझे पहले से ही पता था
रीना सर्म से - बताया कियु नही
जीतू मुस्कुराते हुवे - बता देता तो भी क्या ही हो जाता

पुष्पा के घर

पुष्पा भी गाय को चारा खिलाते हुवे मन मे - पता नही एकदम से क्या हो रहा है हम मिले कई साल बाद अब एक नया रिस्ता बनने वाला है अभय बेटे की कहानी सुन मेरा भी मन उफ सही तो कहा अभय बेटे ने घर की बात घर मे रहेगी मेरा मन बहोत करता है

सुसमा के घर

मीनाक्षी खाना बनाते हुवे मन मे - देवर जी से चुदने ले बाद बहोत याद आ रही है उनकी उफ अंदर जाते ही कितना दर्द मजा आता है आह असली चुदाई का मजा तो देवर जी मे ही दिया मुझे

सुसमा खास काटते हुवे मन मे - अभय बेटा कब आयेगा मेरी बुर तुझे याद कर रही है उफ सोचा नही था जिस लरके से मे मिली जो मेरा भांजा था मेरी छोटी का बेटा और उसी से चुद गई पर जो मजा अभय बेटे ने दिया आह

जोती के घर

गुलाबी उठ के नहा के खाना बनाते हुवे मन मे - उफ बैठा भी नही जा रहा कितना दर्द जलन हो रही है रात कितना जम के चोदा मुझे यकीन नही होता अभय के अंदर इतनी ताकत है

अभय नहा के कपड़े पहन बाहर आते आता है हॉल मे जीत जोती बैठे थे

जीत - गुड मोरिंग भैया
अभय - गुड मोरिंग जीत अन्टी
जोती - गुड मोरिंग बेटा
अभय जोती के पास बैठ जाता है
जोती - कुछ दिन रुकोगे ना
अभय - नही अन्टी मे कल तक रुकुगा मा से जयदा दिन दूर रह नही पता ना मा रह पाती है
जोती - हु जानती हु
अभय - जीत चल थोरा गाव घूम आते है
जीत - जी भैया चलिये

अभय सुबह सुबह गाव मे टहलने निकल परता है

सुबह 10 बजे सिला के घर

सिला मधु के साथ खेत की तरफ जाते हुवे मधु से - भाई बनाया फिर सैया बेसरम लरकी आगे क्या हु बोल
मधु सर्म से - अच्छा जैसे आप भैया का नही लेती
सिला - बेसरम मे कुवारी नही हु समझी
मधु थोरा उदास होके - मा भैया शादी सुधा है
सिला - तो क्या हुआ तेरी शादी मे करवा के रहूगी अभय बेटे से भले शादी ना करेगा तो उसी के साथ तुझे रहना है 2 या 4 बच्चे पैदा करके साथ रहना समझ गई
मधु हैरान होके - मा ये कैसे हो सकता है फिर सह जाती है
सिला - जिस दिन तु अभय बेटे को लेके आई बोली ये मेरे भाई है तो अभय बेटे को देख सोचा इतना हैंडसम लरके को तू भाई बना के लाई जबकि तुझे सैया बना के लाना चाहिये था लेकिन मे जानती थी उस समय तुझे भैया की सबसे जयदा जरूरत थी खैर तू अभय की बीवी बनके रहेगी शादी करे या ना करे फिर भी सब मुझपे छोर दे

मधु हैरान होके - भैया मानेंगे
सिला मुस्कुराते हुवे - कियु नही मनेगा टाँगे तोर दुगी मेरी बेटी की सील तोरी मजे से बुर मारी तो जिमेदारी उसकी ही है ना

यहा भी दिशा के बाद सिला ने अभय की फील्डिंग सेट कर दी थी
मधु तो बहोत खुश थी मधु भी अभय के साथ रहना चाहती थी

जोती के घर

अभय जीत गाव घूम के आते है खाना रेडी था खाते है फिर बाते करने लगते है

जीतू फिर अपने लोव से बाते करने चला जाता है अभय जोती को इसारे से कुछ केहता है फिर अभय कमरे मे आ जाता है कुछ मिनट बाद जोती आती है सर्म से डरी सहमी सी

जोती अभय के पास बैठ जाती है
अभय जोती को देख - ऑन्टी अपने जो कहा उसे पुरा करने का समय आ गया है

अभय की बात सुन जोती सिहर जाती है और अभय को देख - ठीक है लेकिन मुझे टच नही करोगे मे पूरे कपड़े नही निकालूँगी

अभय - ठीक है चलेगा

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जोती एक गहरी सासे लेती है फिर ब्लाउस का बटन खोल एक चूचे पकर बाहर निकाल देती है बहोत बरे गोरे चूचे थे जोती के निपल काले मस्त लग रहे थे अभय चूचे देख - ऑन्टी बहोत खूबसूरत गोरे बरे चूचे है आपके कसम से दिल कर रहा है दबाने चूसने का
अभय की बात से जोती सिहर शर्मा जाती है
जोती चूचे अंदर करके ब्लाउस पहन लेती है

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जोती फिर बिस्तर पे लेत सर्माते हुवे सारी पेटीकोट उपर करके टाँगे फैला देती है जोती की नंगी बुर अभय के सामने थी काले छोटे बाल मे जोती की बुर मस्त फूली गजब लग रही थी अभय बस देखता ही रह जाता है अभय मन मे - उफ ऑन्टी की बुर कितनी मस्त है यार
तभी जोती उठ के सारी नीचे लरके जाते हुवे - वादा पुरा हुआ

जोती चली जाती है अभय हैरान देखता रहता है
अभय मन मे - ना दबाने ना छूने का मोक्का मिला खैर

जोती सर्म से अपने कमरे मे आके बिस्तर पे लेत - कितना सर्मनाक था उफ ये लरका कितना बेसरम है

दोपहर 12 बजे अभय के घर

आसा बाकी सब बगीचे मे थे आसा सुसमा से बाते कर रही थी दिशा पूजा कोमल आपस मे लगे थे तारा मिनिता आपस मे

विजय रीमा चलते बाते कर रहे थे

विजय - जान अब होगी हमारी शादी खतरा तल गया हमारा रास्ता साफ है
रीमा सर्म से - हा आपने सही कहा भैया आते ही कुछ करेगे जरूर
विजय - हा वो तो है

अभय बिस्तर पे लेता हुआ मन मे - dp devil मारा गया अब कोई खतरा नही बुआ मासी वाला मेटर भी खतम हो गया है अब मे पूरी तरह से मा पे फोकस कर सकता हु

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अभय फोन मे आसा के फोटो को देखते हुवे - मा कितनी खूबसूरत प्यारी है मा मेरा इंतज़ार करिये आते ही मे आपके पीछे परने वाला हु आपको पूरी तरह से अपना बना के रहुंगा जनता हु अंदर से जिस्म की जरूरत आपको हमेसा तंग करती होगी लेकिन मे आपका बेटा उसकी कमी भी पूरी करेगा बस आने का इंतज़ार करिये

तभी अदिति कमरे मे आती है अभय हैरान होके - गुरिया तुम अकेले आई हो
अदिति अभय ले पास बैठ के - नही भाई जीतू भैया बाइक से लेके आये
अभय अदिति को पकर बाहों मे लेके - अच्छा जी ये बताओ साफ किया या नही
अदिति सर्म से - जी सुबह ही क्या है
अभय जोस मे पागल होके - दिखाओ ना
अदिति सर्म से - जी भाई

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अदिति पैंट पैंटी निकाल सीधे पैर किये लेती सर्म से अभय को देख - भाई देखिये अब साफ अच्छे से दिख रहा है ना आपकी गुरिया की बुर
अभय अपनी छोटी बहन की मस्त गोरी चिकनी सील पैक बुर देख खो ही गया था अभय होस मे आते हुवे बुर को देख - हा गुरिया अच्छे से साफ तरीके से सब दिख रहा है बहोत खूबसूरत बुर है तुम्हारी देखो तो तेरे बुर के फाके कैसे चिपके है आपस मे उफ गुरिया गजब की बुर है

अभय अदिति को देख - पहन लो गुरिया पैंट
अदिति उदास होके - बस इतना ही
अभय अदिति को उदास देख मुस्कुरा देता है और मन मे - हु कुछ करना होगा ताकि गुरिया की बॉडी सन्त रहे जितना देखा सुना उसके बाद अब तो हम एक है तो जाहिर है गुरिया जोस मे है जवानी प्यार मांग रही है

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अभय अदिति को देखता है फिर अदिति के बुर को दो उंगली से पकर दबाते हुवे फिल करने लगता है सॉफ्ट सॉफ्ट गुडे से भरी अदिति की गर्म बुर का एहसास पाके अभय जोस मे पागल हो जाता है वही अदिति बिस्तर कस के पकरे सिसकिया लेके मदहोसी मे तरपने लगती है बिस्तर पे मचल उठती है अदिति साफ फिल अच्छे से कर रही थी कैसे उसका भैया उसकी प्यारी बुर को आराम से प्यार से दबा मसल के फिल कर रहा है अदिति मन मे - आह बहोत अच्छा लग रहा है

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अभय अदिति को देख - टाँगे उपर उठाओ
अदिति सर्म खुशी से दोनो टाँगे उपर उठा देती है अभय एक उंगली से अदिति के बुर के फाके के बीच उपर नीचे करते हुवे उंगली करने लगता है अदिति एकदम से सिहर काप् जाती है जोर से आह उफ करके सिसकिया लेने लगती है तो अभय अपनी छोटी बहन की सील पैक बुर के फाके के बीच उंगली करते हुवे मन मे - कितनी गर्म है आग लगी है अंदर मे उफ कितना गिला है बुर मेरी गुरिया की मेरी उंगली जल रही है जैसे मे आग पे उंगली रखा हु
वही अदिति कस के बिस्तर पकरे मन मे - आह मर गई बर्दास्त नही हो रहा मेरी बुर के फाके के बीच भाई उंगली से आह जो कर रहे है मुझे बहोत जयदा अच्छा और आह अच्छा फिल हो रहा है

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अभय अदिति को देखता है तो तरप रही थी मचल रही थी अभय उंगली बुर से हटा के मुह मे लेके चूस लेता है वैसे ही अभय सिहर के - कितना मजेदार स्वाद है मेरी गुरिया के बुर के पानी के रस का
बस अभय एकदम से बुर पे टूट परता है अपनी बुर पे अभय का जिब चलते फिल करके अदिति भी जोस से बिस्तर पकर आह करती है
अभय मजे से जिब से बुर के फाके के बीच चाटने और रस पीने लगता है अभय मन मे - अपनी सगी बहन की बुर चाटने मे ऐसा मजा आता है उफ कितना मस्त स्वाद है मेरी गुरिया के बुर के रस का

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पहली बार वो भी अपने भाई से बुर चटवाने का एहसास मजा लेके अदिति भी मजे से गांड उठाते हुवे - उफ आह मा भाई बहोत जयदा मजा आ रहा है भाई चूसिये मेरी बुर को अच्छे से चूस के सारा रस निकाल पी जाइये उफ ये मजा लेने के लिये मे तरप रही थी अब जाके मुझे आह भैया और अंदर जिब डालके चाटो मेरी बुर को आह
2 मिनट के बाद ही अदिति गांड कमर उठाते कपते हुवे - आह मा भाई कुछ आने वाला है तेजी से निकलने वाला है , अदिति अभय का रस बुर पे जोर से दबा के - आह भाई भाई आ गया आ गया भाई..
अदिति झटके मारते गांड कमर उठाते पहला झरने का एहसास मजा सुकून लेती है बुर से निकला रस अभय मजे से चाट के चूस के पी जाता है

अभय अदिति को देखता है तो जोर जोर से सासे ले रही थी अभय के मुह पे अदिति के बुर का पानी लगा था अदिति जब देखती है तो सर्म से पानी पानी हो जाती है और अभय मुस्कुराते हुवे - कैसा लगा पहली बार झर के

अदिति तेज सासे लेते सर्म से - उफ भाई बता नही सकती बहोत जयदा मजा आया अब मुझे बहोत अच्छा फिल हो रहा है मन सन्त दिल खुश हो गया

अभय - हु जब बॉडी को जो चाहिये मिल जाता है तो ऐसा ही फिल होता है
अदिति सर्म से - हु
अदिति फिर पैंट पहन लेती है अभय अदिति को बाहों मे लेके - अपनी गुरिया की बुर का स्वाद लेके मुझे भी बहोत जायदा मजा आया मस्त रस था
अदिति सर्म से अभय को देख - सच
अभय मुस्कुराते हुवे - हा बाबा सच आखिर मेरी गुरिया की बुर का रस जो था
अदिति सर्म से - गंदे भैया
अभय हसने लगता है

साम तीन बजे

अभय छत पे नजारा देखते हुवे कुछ सोच रहा था तभी मितल की याद आती है अभय फोन करके - दीदी कैसी है
मितल - मे अच्छी हु क्या हो रहा है
अभय - बस छत से नाजारे देख रहा हु दीदी वो बिकनी मे फोटो भेजो ना जनता हु आपका वो सब मेरे साथ करना नही चाहती है लेकिन देख तो सकता हु
मितल - अच्छा जी बहोत तेज हो बेसरम भी नही भेजती
अभय उदास होके - प्लेस दीदी
मितल - हु एक वादा कर मुझे लेने आयेगा
अभय एकदम से - वादा लेकिन नँगा देखुंगा बोलो मंजूर
मितल - वाह रे बेसरम लेने आने का इतना बरा चार्ज
अभय हस्ते हुवे - फ्री मे कुछ नही करता
मितल - कमीना बेसरम
अभय हस्ते हुवे - बोलो मंजूर
मितल धीरे से सर्म से - ठीक है दिखा दुगी लेकिन उसके आगे कुछ नही
अभय खुश होके - चलेगा लेकिन अभी बिकनी वाला फोटो भेजो ना देखना है बिकनी मे आप कैसी लगती है
मितल सर्म से - अच्छा भेज देती हु अब मे रखती हु वैसे कब आयेगा
अभय - कल हो सके तो निकलूंगा
मितल - हु ठीक है
फोन कट
2 मिनट मे फोटो भी आ जाता है

अभय जब मितल के बिकनी वाला फोटो देखता है तो लंड झटके मारके खरा हो जाता है लाल गुलाबी बिकनी मे मितल गजब लग रही थी चूचे कैद उसके उभार देख अभय मन मे - उफ बरे है दीदी बिकनी मे गजब लग रही है उफ अब तो देखना ही होगा अंदर दीदी के चूचे कैसे है और बुर भी

तभी फोन बजता है अभय नंबर देख मुस्कुराते हुवे फोन उठा के

अभय - बुआ कैसी है आप
पुष्पा - अच्छी हु तेरी मा से बात कर रही थी भाभी केह रही थी लाला बिना मन नही लग रहा
अभय - जनता हु उनके बिना मेरा भी मन नही लगता वैसे क्या कर रही है आप
पुष्पा - कुछ नही लेती हु
अभय - बुर मे उंगली तो
पुष्पा एकदम जोर से सर्म से - छि बेसरम सर्म करले
अभय हस्ते हुवे - मे तो बेसरम ही हु बुआ रहा नही जा रहा जल्दी ही आऊगा
इतना सुनते ही पुष्पा सिहर काप् जाती है
पुष्पा धीरे से - हु
अभय - बुआ रोज उंगली करती है
पुष्पा - छि रोज नही जब जयदा मन करता है तब
अभय - हु अच्छा आप चड्डी पहनती है
पुष्पा - कितना बेसरम है नही पहनती अब इस उमर मे आके जयदा तर औरते नही पहनती
अभय - अच्छा इसका मतलब अभी आपने नही पहनी हु
पुष्पा सर्म से - हा सही कहा
अभय - बुआ बुर पे बाल तो होगे ही ना
पुष्पा सर्म से लाल होके हैरानी मे - तुझे कैसे पता
अभय हस्ते हुवे - फूफा आपको चोदते नही तो अंदाज़ा लगाया
पुष्पा - लाइफ मे ये होगा मेरा भतीजा इतनी गंदी बात करेगा मुझसे सोचा नही था बेशर्म
अभय हस्ते हुवे - और मेरी बुर के पीछे परेगा चोदने ले लिये ये केहना भूल गई
पुष्पा सर्म से पानी पानी होके - चुप बेसरम
अभय - बुआ बुर मे उंगली करो ना
पुष्पा हैरान सर्म से - क्या नही
अभय - प्लेस बुआ
पुष्पा सर्म से - अच्छा करती हु
पुष्पा सारी पेटीकोट उपर करके तांगे फैला के बुर मे एक उंगली डाल के धीरे से अंदर बाहर करते हुवे - आह अभय बेटा
अभय जोस गर्म होके लंड निकाल हिलाते हुवे - बुआ अंदर तक डालो उंगली
पुष्पा सिसकिया लेते हुवे - डाल रही हु आह
अभय लंड हिलाते हुवे - सोचिये मे उंगली कर रहा हु आपकी बुर मे
पुष्पा आखे बंद करके सोचती है वो तांगे फैलाये लेती हैं और अभय तेजी से बुर मे उंगली कर रहा है ये सोचते फिल करते ही बुर से पानी निकलने लगता हैं और अभय की कान मे फच् फच् अपनी बुआ की सिसकिया आह उफ की आवाज के साथ - अभय बेटा और जोर से उंगली करो मजा आ रहा है
ये सब सुन अभय की लंड की नशे फूलने लगती है तभी पुष्पा - आह अभय बेटा आने वाला है आह मा आ गया उफ निकल गया अभय बेटा आह मर गई
पुष्पा झर जाती है फोन पे भतीजे से गंदी बात करते झरने का जो मजा एहसास पुष्पा को हुआ वो फिल करके पुष्पा मस्त हो गई थी

पुष्पा आखे खोल देखती है बहोत सारा पानी बुर से निकला था पुष्पा सर्म से पानी पानी होके सब याद करके मन मे - उफ मे कैसे बोल रही थी अभय बेटे ने सब सुन लिया होगा क्या सोच रहा होगा

अभय लंड अंदर करके मुस्कुराते हुवे - बुआ मजा आया
पुष्पा सर्म से - बाद मे बात करती हु
फोन कट
अभय मन मे - आग तो बहोत है बुआ के अंदर

रात 8 बजे खाना पीना होने के बाद अभय कमरे मे लेता दिशा से बात कर रहा था

दिशा - हु तो आप सब की बुर मारके ही आएँगे फिर लास्ट मे मम्मी जी की लेने मे लग जायेंगे
अभय मुस्कुराते हुवे - बिल्कुल
दिशा - अच्छा है पर जल्दी आइये हमारा दिल भी बहोत करता है
अभय - अच्छा जी दोनों बहने आपस मे मजे कर लेती हो तो मेरी क्या जरूरत है
दिशा - ऐसा मत बोलिये लंड की जरूरत परती ही है
अभय - बेसरम बीवी
पूजा - जीजा जी जल्दी आना
अभय - कियु तुम्हारी दीदी बुर नही चुसा आज हु
दिशा - कितने बेसरम है आप
पूजा सर्म से - बहोत बेसरम हो आप
अभय - अच्छा बाबा कुछ दिनों मे आ जाउंगा रखता हु
फोन कट

अभय आसा को फोन करता है

आसा - कैसा है मेरा लाल खाना पीना हो गया तेरी गुरिया कहा है
अभय - गुरिया तो जीतू के घर है रूबी के साथ
आसा - अच्छा कब आयेगा
अभय मुस्कुराते हुवे - लंड चुसेगी हु
आसा सर्म से - छि बेसरम
अभय - मा किया पहनी हो
आसा - सारी अभी नाइटी पेहनुगी
अभय - मुझे आपको देखना है वीडियो कॉल करता हु
आसा - ना बाबा जरूरत कुछ दिखाने को कहेगा
अभय मुस्कुराते हुवे - बिल्कुल कहुंगा
वीडियो कॉल होता है

आसा अभय को देख - बोल
अभय - बहोत खूबसूरत लग रही है
आसा - हु मस्का मैन बात बोल किया है तेरे दिमाग मे हु
अभय - फोन रखो एक जगह अच्छे से दिखाओ अपने आप को पुरा
आसा - ठीक है बाबा
आसा फोन रख पीछे हट जाती है अभय - हु मजा नही आ रहा ब्लाउस निकाल दो
आसा ब्लाउस निकाल सारी सीने पे रख अभय खरी होके - अब ठीक है

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ग्रे सारी मे ब्लाउस बिना मैच बिकनी सारी मे आसा केहर धा रही थी गोरा पर्फेट बॉडी खूबसूरत औरत थी आसा बिकनी मे आधे चुचे की उभार बाहर निकले मस्त गजब लग रहे थे उपर से नीचे तक अभय अच्छे से देखते हुवे - कयामत मा आप केहर धा रही है हर बार देखता हु लेकिन मन नही भारत वैसे मा बिकनी मे आपके कूछ बाहर आने को बेताब दिख रहे है मुझे
आसा अभय को देख - बेसरम मेरे चुचे की चिंता मत कर वो अपनी जगह अच्छे से है
अभय मुस्कुराते हुवे - हु ठीक है अब पीछे का सीन दिखाइये जरा
आसा अभय की तरफ गांड पीठ करके अभय को देख - ठीक है

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अभय फिर देखने मे खो जाता है उफ गजब सीन था पीछे का उपर बिकनी का पत्ता मस्त आसा की चिकनी पीठ से चिपका हुआ था जैसे आसा की चिकनी पीठ चूम रहा हो नीचे आगे मस्त एंगल से चुचे के उभार खरे साफ दिख रहे थे बॉडी की बनावट मस्त थी पुरी फिट कमर आगे बीच मे धसे हुवे और गांड सारी से चिपकी साफ बड़े बड़े बाहर निकले अच्छे से दिख रहे थे आसा कैसे खरी थी बहोत कुछ दिख रहा था अभय - मा गांड तो मस्त दिख रही है कैसे बाहर निकली हुई है
आसा सर्म से - चुप कर मेरी गांड के पीछे ही परा रहता है नालायक
अभय हस्ते हुवे - जब मा की मस्त बरी गांड हो तो बेटा देखेगा ही अब बेड पे झुक के अच्छे से घोरी बन जाओ

आसा मन मे - पता नही मे कियु सब करते जा रही हु
आसा बेड के पास जाके बेड पे हाथ रख झुक जाती है जो सिन नजारा अभय के सामने आता है अभय का लंड झटके मरने लगता है

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आसा बेड के हाथ रखे गांड पीछे निकाले झुकी थी जिस वजह से और भी अच्छे से आसा की मस्त गांड सारी से चिपकी दिखने लगती है
अभय लंड मसलते हुवे - मा जिस तरह आप झुकी है अच्छे से आपकी गांड दिख रही है उफ फैली हुई दिल कर रहा है मसल दु दबा दु
आसा अभय को देख सर्म से - मार खायेगा

आसा खरी होके - बस हो गया जो देखना था देख लिया
अभय मुस्कुराते हुवे - अब सारी निकाल बिकनी पैंटी मे देखना है
आसा सर पकर - ये लरका भी ना क्या क्या करवाएगा और मे पता नही कियु करते जाती हु अच्छा लास्ट समझ गया
अभय - हु ठीक है
आसा सारी निकाल मस्त तरीके से बिस्तर पे लेत जाती है

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भाई साहब किया ही नजरा था आसा पेट के बल लेती हुई थी एक तरफ बिकनी आसा के चुचे गोरे पीठ से चिपकी थी तो दूसरी तरफ नीचे पैंटी आसा की गांड से चिपकी हुई थी पुरा बदन गोरा दूध जैसा था किया ही गजब अंदाज़ मे आसा लेती हुई थी गांड उपर उठे उफ पैंटी मे मस्त लग रहे थे एक बेटे के लिए ये सब देखना खवाब ही रह जाता है लेकिन जब आपकी मा आपके कहने पे वो करे जो आप चाहते है वो सब दिखाये जो आप देखना चाहते है तो वो बेटा कितना किस्मत वाला होगा और अभय वही था अभय की हालत ही खराब हो जाती है लंड तो गिला हो गया था पानी से
अभय कपते होठो से लंड पकरे - शब्द नही है कहने को मा बस आगे का अच्छे से अपने मस्त चुचे दिखा दो बस हो गया
आसा अभय को देख - लास्ट समझ गया फिर कुछ नही करुगी
अभय - हा हा जी
आसा फिर ऐसे लेटती है ताकि अभय को उससे चुचे अच्छे से दिख सके

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अब जो सिन अभय के सामने आता है अभय का लंड पानी छोर देता है अभय का मुह खुला रह जाता जाता है आसा पेट के बल अभय की तरफ फेस करके हाथो के सहारे लेती थी बिकनी के कैद भारी भरकम बरे गोरे चुचे आधे से जयदा अभय के समाने थे उफ एक बेटे के लिये मा को इस तरफ देखना किसी सपने से कम नही था आसा जैसे जिस तरह लेती थी कयामत लग रही थी
आसा अभय को देख मन मे - देखो तो कैसे बिना पलके झपकाये मेरे चुचे अपनी मा के चुचे देख रहा है जैसे खा जायेगा उफ सर्म से मर जाउंगी
आसा - हो गया
अभय होस मे आके - हा मा

आसा फिर नाइटी पहन लेती है
अभय - मा क्या गजब लग रही थी हर पोजिसन मे कयामत और लास्ट वाला तो मस्त था आपके चुचे तो आधे दिख रहे थे गोरे दूध जैसे मस्त गोल मटोल
आसा सर्म से मन मे - जब भी मेरी मेरी बॉडी की तारीफ करता है मुझे बहोत खुशी मिलती है बहोत अच्छा लगता है

आसा - बेटा अब रखती हु
अभय - मा आगे का अपना मैन गेट दिखाया ही नही जिसके अंदर से आया हु मे
आसा हैरान सर्म से - कितना बेसरम है आगे का गेट सपने मे देख लेना
अभय मुस्कुराते हुवे - अपने मे तो बहोत कुछ करता हु मे आपके गेट के साथ अंदर से बहार से भी

आसा अभय की बात सुन समझ हैरान शोक सर्म से लाल हो जाती हैं और
आसा फोन कट कर देती है

अभय पसीने साफ करते हुवे - मे खुद को मर्द समझता हु लेकिन मा के सामने झर जाता हु जबकि मेने तो अभी तक असली खजाना देखा ही नही

अभय चड्डी बदल बिस्तर पे लेत जाता है तभी गुलाबी आती है अभय अच्छे से बुर मारता है और गुलाबी चली जाती है

अभय मन मे - ऑन्टी आयेगी या नही
तभी जोति नाइटी मे आती है तो अभय खुश होके - मुझे पता था आप आयेगी
जोती अभय के पास बैठ - बेटा तुझे कहा तो एक बार करने डुगी पर ये बात किसी को पता ना चले
अभय जोती को बिस्तर पे लेता के जोती के ऊपर आके - किसी को पता नही चलेगा उंन्टी

अभय फिर जोती के लेने लग जाता है

आज के लिए इतना ही 🙏🙏🙏
 

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chapter 115

गुलाबी नंगी लेती हुई बुर पे हाथ रखे अभय को देख रही थी अभय तो गुलाबी की नंगी मस्त बॉडी देख पागल हो रहा था गुलाबी अभय को देख सर्म से - किया देख रहा है

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अभय गुलाबी के चूचे बुर देखते हुवे - अपनी प्यारी दीदी के नंगी बॉडी को दीदी सच मे आप की बॉडी बहोत मस्त है चूचे बरे गोरे है कमर भी मस्त है और आपकी बुर तो उफ रुका नही जा रहा
अभय गुलाबी के पास आके किस करने लगता है गुलाबी भी पूरी रेडी थी आज सब कुछ अभय को देने के लिये

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अभय किस करने के बाद गुलाबी के दोनो चूचे पकर ले जोर से दबाते हुवे एक चूचे मुह मे लेके चूसने लगता है गुलाबी मस्त होके सिसकिया लेने लगती है अभय दबाते निपल को चूचे को चूस रहा था
गुलाबी मदहोसी मे जोस मे - उफ अभय मेरे भाई चूस ले अच्छा लग रहा है उफ दबा जोर से अपनी दीदी के चूचे चूस पीले जितना पीना है
अभय चूचे चूसते हुवे मन मे - उफ मस्त चूचे है मजा आ रहा है

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चूचे दबाने चूसने के बाद अभय गुलाबी के बुर के पास सीधा बुर पे टूट परता है अभय मजे से जिब से गुलाबी की बुर को फाको के बीच चाटने चूसने लगता है गुलाबी बिस्तर पकरे सिसकिया लेते हुवे - उफ भाई बहोत मजा आ रहा है ऐसे ही चाट चूस अपनी दीदी की बुर को
अभय बुर का रस पीते हुवे मन मे - उफ बहोत गर्म है बुर का स्वाद भी बहोत अच्छा है चूस के रस पीने मे मजा आ रहा है
3 मिनट बाद गुलाबी - उफ मा आने वाला है , गुलाबी कपते हुवे झर जाती है

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अभय चड्डी निकलाते हुवे - दीदी मजा आया आपकी बुर का रस पीके बहोत गर्म है आपकी बुर
गुलाबी तेज सासे लेते हुवे सर्म - बेसरम कही का
अभय चड्डी निकाल लेत के - चलो मुह मे लेके चूसिये
गुलाबी अभय का लंड देख कपते हुवे मन मे - मर गई कितना मोटा लम्बा है
अभय - दीदी जल्दी मुह मे लो ना रहा नही जाता

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गुलाबी लंड के पास आके झुक के लंड पकर जिब से चमरे टोपे को चटती है फिर मुह मे लेके चूसने लगती है अभय मजे मे गुलाबी को देख - उफ दीदी आप तो माहिर है आह अच्छा लग रहा है चुस्टे रहिये आह बहोत अच्छा चूस रही है आप पुरा अंदर तक लो दीदी
गुलाबी लंड मजे से चुस्टे चाटने हुवे मन मे - पति का लेती थी लेकिन उफ अभय के लंड चूसने मे बहोत मजा आ रहा है लंड का स्वाद भी बहोत मस्त है उफ इतना मजा तो पति का लंड चूसने मे नही आता
6 मिनट बाद

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अभय गुलाबी के टाँगो के बीच बैठ जाता है लंड पकर बुर पे घिसते हुवे गुलाबी को देखता है फिर धीरे से अंदर घुसाने लगता है गुलाबी दर्द मे आह करती है अभय मन मे - बहोत टाइट गर्म है उफ
अभय एक धक्का मारता है फिर दूसरा गुलाबी बिस्तर पकरे जोर से दर्द मे चीख परती है दर्द मे रोने लगती है अभय गुलाबी को किस करते हुवे मन मे - टाइट है अंदर बहोत गर्म भी उफ अच्छा लग रहा है
3 मिनट बाद

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अभय चुदाई करने लगता है गुलाबी दर्द मे रोते हुवे - मर गई आह बहोत दर्द हो रहा है भाई
अभय गुलाबी के गर्दन मे किस करते चूचे दबाते गुलाबी को देख - बस दीदी हो गया बहोत अच्छा लग रहा आपकी बुर मारने मे उफ
गुलाबी हर धक्के के साथ अभय को देख टाँगे फैलाते रोती रहती है धीरे धीरे दर्द मे मजा आने लगता है

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अभय गुलाबी को घोरी बना के चुदाई करने लगता है फट फच् के साथ तेजी से लंड अंदर बाहर कर रहा था गुलाबी दर्द मे - भाई आह धीरे कर मर गई जोर से मत दर्द होता है आह उफ मा ये दर्द उफ
अभय तेजी से चुदाई करते हुवे - उफ दीदी घोरी मे चुदाई करने का मजा ही अलग है आह क्या मस्त मजा आ रहा है आपकी बुर मारने मे

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अभय फिर बिस्तर पे लेत जाता है गुलाबी भी समझ जाती है और अभय के ऊपर आके बुर मे लंड लेके आह करते बैठ जाती है अभय गुलाबी को बाहों मे ले लेता है और किस करने लगता गुलाबी गांड उपर नीचे करते हुवे लंड लेने लगती है
गुलाबी मन मे - उफ दर्द भी मजा भी बहोत आ रहा है उफ

38 मिनट बाद

अभय गुलाबी पसीने से भीगे कुछ मिनट लेते रहते है

अभय गुलाबी को देख - उफ दीदी मस्त मजा आया टाइट बुर है गर्म भी जीजा जी ठण्डा नही करते क्या
गुलाबी अभय को देख - बेसरम कही का करते तो तुझे अपनी बुर देती
अभय हस्ते हुवे - तभी भी मे लेके ही मानता
गुलाबी हस्ते हुवे - इसी लिये तो कहती हु तु बेसरम ठरकी है
अभय गुलाबी को बाहों मे लेके - दीदी मजा आया ना
गुलाबी सर्म से - हु बहोत लेकिन दर्द भी बहोत हुआ तेरा बहोत बरा है
अभय - एक बार और करे हु
गुलाबी अभय को देख फिर टाँगे फैला के सर्म से - भाई दर्द जलन है फिर भी डाल दे आह सेह लुगी
बस अभय भी घुसा लेता है फिर दूसरा राउंड सुरु हो जाता है

सुबह कमला के घर

अदिति बाथरूम मे बुर के बाल साफ करने मे लगी हुई थी और मन मे सोच रही थी
अदिति मन मे सर्म से - उफ बहोत सर्म आ रही है लेकिन बहोत बेताब भी हु भाई का लंड बहोत मोटा है लम्बा भी डर है मेरी इस मासूम बुर के अंदर कैसे जायेगा लेकिन भाभी कोमल दीदी सब ले सकती है तो मे कियु नही

अदिति सोचते हुवे अपनी बुर के बाल निकाल पूरी चिकनी कर देती है अब अदिति की बुर मस्त साफ गोरी दिख रही थी

रूबी खाना बनाते हुवे मन मे - पहली बार लंड देखा चूसा भी उफ बहोत मजा भी आया अभय भैया का लंड देख तो मेरी सासे रुक गई थी कितना गर्म टाइट था हाथ मुह मे भी नही आ रहा था लेकिन मे सोच रही हु बुर मे ये सोच मेरी बॉडी काप् रही है

कमला गाय को चारा देते हुवे मन मे - अभय बेटे के मस्त चुदाई के बाद मेरी बॉडी मे बहोत अच्छा फिल कर रही हु आह ऐसा फिल हो रहा है मे हवा मे उर रही हु सच मे अभय बेटे का लंड बहोत मोटा लम्बा है मेरी बुर के अंदर तक जाके उफ सोच के ही फिर बुर गीली होने लगी है

जीतू छत पे खरा रीना से बात करते हुवे - जान बहोत याद आ रही है भाई मे कहा है जल्दी हमारी शादी करवा देगे
रीना खुश होके - सच
जीतू मुस्कुराते हुवे - हु ये बताओ भाई का लेके के बाद मजा आया
रीना सर्म से - बहोत lek दर्द भी बहोत हुआ
जीतू हस्ते हुवे - भाई का बहोत बरा मोटा है मुझे पहले से ही पता था
रीना सर्म से - बताया कियु नही
जीतू मुस्कुराते हुवे - बता देता तो भी क्या ही हो जाता

पुष्पा के घर

पुष्पा भी गाय को चारा खिलाते हुवे मन मे - पता नही एकदम से क्या हो रहा है हम मिले कई साल बाद अब एक नया रिस्ता बनने वाला है अभय बेटे की कहानी सुन मेरा भी मन उफ सही तो कहा अभय बेटे ने घर की बात घर मे रहेगी मेरा मन बहोत करता है

सुसमा के घर

मीनाक्षी खाना बनाते हुवे मन मे - देवर जी से चुदने ले बाद बहोत याद आ रही है उनकी उफ अंदर जाते ही कितना दर्द मजा आता है आह असली चुदाई का मजा तो देवर जी मे ही दिया मुझे

सुसमा खास काटते हुवे मन मे - अभय बेटा कब आयेगा मेरी बुर तुझे याद कर रही है उफ सोचा नही था जिस लरके से मे मिली जो मेरा भांजा था मेरी छोटी का बेटा और उसी से चुद गई पर जो मजा अभय बेटे ने दिया आह

जोती के घर

गुलाबी उठ के नहा के खाना बनाते हुवे मन मे - उफ बैठा भी नही जा रहा कितना दर्द जलन हो रही है रात कितना जम के चोदा मुझे यकीन नही होता अभय के अंदर इतनी ताकत है

अभय नहा के कपड़े पहन बाहर आते आता है हॉल मे जीत जोती बैठे थे

जीत - गुड मोरिंग भैया
अभय - गुड मोरिंग जीत अन्टी
जोती - गुड मोरिंग बेटा
अभय जोती के पास बैठ जाता है
जोती - कुछ दिन रुकोगे ना
अभय - नही अन्टी मे कल तक रुकुगा मा से जयदा दिन दूर रह नही पता ना मा रह पाती है
जोती - हु जानती हु
अभय - जीत चल थोरा गाव घूम आते है
जीत - जी भैया चलिये

अभय सुबह सुबह गाव मे टहलने निकल परता है

सुबह 10 बजे सिला के घर

सिला मधु के साथ खेत की तरफ जाते हुवे मधु से - भाई बनाया फिर सैया बेसरम लरकी आगे क्या हु बोल
मधु सर्म से - अच्छा जैसे आप भैया का नही लेती
सिला - बेसरम मे कुवारी नही हु समझी
मधु थोरा उदास होके - मा भैया शादी सुधा है
सिला - तो क्या हुआ तेरी शादी मे करवा के रहूगी अभय बेटे से भले शादी ना करेगा तो उसी के साथ तुझे रहना है 2 या 4 बच्चे पैदा करके साथ रहना समझ गई
मधु हैरान होके - मा ये कैसे हो सकता है फिर सह जाती है
सिला - जिस दिन तु अभय बेटे को लेके आई बोली ये मेरे भाई है तो अभय बेटे को देख सोचा इतना हैंडसम लरके को तू भाई बना के लाई जबकि तुझे सैया बना के लाना चाहिये था लेकिन मे जानती थी उस समय तुझे भैया की सबसे जयदा जरूरत थी खैर तू अभय की बीवी बनके रहेगी शादी करे या ना करे फिर भी सब मुझपे छोर दे

मधु हैरान होके - भैया मानेंगे
सिला मुस्कुराते हुवे - कियु नही मनेगा टाँगे तोर दुगी मेरी बेटी की सील तोरी मजे से बुर मारी तो जिमेदारी उसकी ही है ना

यहा भी दिशा के बाद सिला ने अभय की फील्डिंग सेट कर दी थी
मधु तो बहोत खुश थी मधु भी अभय के साथ रहना चाहती थी

जोती के घर

अभय जीत गाव घूम के आते है खाना रेडी था खाते है फिर बाते करने लगते है

जीतू फिर अपने लोव से बाते करने चला जाता है अभय जोती को इसारे से कुछ केहता है फिर अभय कमरे मे आ जाता है कुछ मिनट बाद जोती आती है सर्म से डरी सहमी सी

जोती अभय के पास बैठ जाती है
अभय जोती को देख - ऑन्टी अपने जो कहा उसे पुरा करने का समय आ गया है

अभय की बात सुन जोती सिहर जाती है और अभय को देख - ठीक है लेकिन मुझे टच नही करोगे मे पूरे कपड़े नही निकालूँगी

अभय - ठीक है चलेगा

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जोती एक गहरी सासे लेती है फिर ब्लाउस का बटन खोल एक चूचे पकर बाहर निकाल देती है बहोत बरे गोरे चूचे थे जोती के निपल काले मस्त लग रहे थे अभय चूचे देख - ऑन्टी बहोत खूबसूरत गोरे बरे चूचे है आपके कसम से दिल कर रहा है दबाने चूसने का
अभय की बात से जोती सिहर शर्मा जाती है
जोती चूचे अंदर करके ब्लाउस पहन लेती है

730-1000
जोती फिर बिस्तर पे लेत सर्माते हुवे सारी पेटीकोट उपर करके टाँगे फैला देती है जोती की नंगी बुर अभय के सामने थी काले छोटे बाल मे जोती की बुर मस्त फूली गजब लग रही थी अभय बस देखता ही रह जाता है अभय मन मे - उफ ऑन्टी की बुर कितनी मस्त है यार
तभी जोती उठ के सारी नीचे लरके जाते हुवे - वादा पुरा हुआ

जोती चली जाती है अभय हैरान देखता रहता है
अभय मन मे - ना दबाने ना छूने का मोक्का मिला खैर

जोती सर्म से अपने कमरे मे आके बिस्तर पे लेत - कितना सर्मनाक था उफ ये लरका कितना बेसरम है

दोपहर 12 बजे अभय के घर

आसा बाकी सब बगीचे मे थे आसा सुसमा से बाते कर रही थी दिशा पूजा कोमल आपस मे लगे थे तारा मिनिता आपस मे

विजय रीमा चलते बाते कर रहे थे

विजय - जान अब होगी हमारी शादी खतरा तल गया हमारा रास्ता साफ है
रीमा सर्म से - हा आपने सही कहा भैया आते ही कुछ करेगे जरूर
विजय - हा वो तो है

अभय बिस्तर पे लेता हुआ मन मे - dp devil मारा गया अब कोई खतरा नही बुआ मासी वाला मेटर भी खतम हो गया है अब मे पूरी तरह से मा पे फोकस कर सकता हु

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अभय फोन मे आसा के फोटो को देखते हुवे - मा कितनी खूबसूरत प्यारी है मा मेरा इंतज़ार करिये आते ही मे आपके पीछे परने वाला हु आपको पूरी तरह से अपना बना के रहुंगा जनता हु अंदर से जिस्म की जरूरत आपको हमेसा तंग करती होगी लेकिन मे आपका बेटा उसकी कमी भी पूरी करेगा बस आने का इंतज़ार करिये

तभी अदिति कमरे मे आती है अभय हैरान होके - गुरिया तुम अकेले आई हो
अदिति अभय ले पास बैठ के - नही भाई जीतू भैया बाइक से लेके आये
अभय अदिति को पकर बाहों मे लेके - अच्छा जी ये बताओ साफ किया या नही
अदिति सर्म से - जी सुबह ही क्या है
अभय जोस मे पागल होके - दिखाओ ना
अदिति सर्म से - जी भाई

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अदिति पैंट पैंटी निकाल सीधे पैर किये लेती सर्म से अभय को देख - भाई देखिये अब साफ अच्छे से दिख रहा है ना आपकी गुरिया की बुर
अभय अपनी छोटी बहन की मस्त गोरी चिकनी सील पैक बुर देख खो ही गया था अभय होस मे आते हुवे बुर को देख - हा गुरिया अच्छे से साफ तरीके से सब दिख रहा है बहोत खूबसूरत बुर है तुम्हारी देखो तो तेरे बुर के फाके कैसे चिपके है आपस मे उफ गुरिया गजब की बुर है

अभय अदिति को देख - पहन लो गुरिया पैंट
अदिति उदास होके - बस इतना ही
अभय अदिति को उदास देख मुस्कुरा देता है और मन मे - हु कुछ करना होगा ताकि गुरिया की बॉडी सन्त रहे जितना देखा सुना उसके बाद अब तो हम एक है तो जाहिर है गुरिया जोस मे है जवानी प्यार मांग रही है

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अभय अदिति को देखता है फिर अदिति के बुर को दो उंगली से पकर दबाते हुवे फिल करने लगता है सॉफ्ट सॉफ्ट गुडे से भरी अदिति की गर्म बुर का एहसास पाके अभय जोस मे पागल हो जाता है वही अदिति बिस्तर कस के पकरे सिसकिया लेके मदहोसी मे तरपने लगती है बिस्तर पे मचल उठती है अदिति साफ फिल अच्छे से कर रही थी कैसे उसका भैया उसकी प्यारी बुर को आराम से प्यार से दबा मसल के फिल कर रहा है अदिति मन मे - आह बहोत अच्छा लग रहा है

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अभय अदिति को देख - टाँगे उपर उठाओ
अदिति सर्म खुशी से दोनो टाँगे उपर उठा देती है अभय एक उंगली से अदिति के बुर के फाके के बीच उपर नीचे करते हुवे उंगली करने लगता है अदिति एकदम से सिहर काप् जाती है जोर से आह उफ करके सिसकिया लेने लगती है तो अभय अपनी छोटी बहन की सील पैक बुर के फाके के बीच उंगली करते हुवे मन मे - कितनी गर्म है आग लगी है अंदर मे उफ कितना गिला है बुर मेरी गुरिया की मेरी उंगली जल रही है जैसे मे आग पे उंगली रखा हु
वही अदिति कस के बिस्तर पकरे मन मे - आह मर गई बर्दास्त नही हो रहा मेरी बुर के फाके के बीच भाई उंगली से आह जो कर रहे है मुझे बहोत जयदा अच्छा और आह अच्छा फिल हो रहा है

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अभय अदिति को देखता है तो तरप रही थी मचल रही थी अभय उंगली बुर से हटा के मुह मे लेके चूस लेता है वैसे ही अभय सिहर के - कितना मजेदार स्वाद है मेरी गुरिया के बुर के पानी के रस का
बस अभय एकदम से बुर पे टूट परता है अपनी बुर पे अभय का जिब चलते फिल करके अदिति भी जोस से बिस्तर पकर आह करती है
अभय मजे से जिब से बुर के फाके के बीच चाटने और रस पीने लगता है अभय मन मे - अपनी सगी बहन की बुर चाटने मे ऐसा मजा आता है उफ कितना मस्त स्वाद है मेरी गुरिया के बुर के रस का

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पहली बार वो भी अपने भाई से बुर चटवाने का एहसास मजा लेके अदिति भी मजे से गांड उठाते हुवे - उफ आह मा भाई बहोत जयदा मजा आ रहा है भाई चूसिये मेरी बुर को अच्छे से चूस के सारा रस निकाल पी जाइये उफ ये मजा लेने के लिये मे तरप रही थी अब जाके मुझे आह भैया और अंदर जिब डालके चाटो मेरी बुर को आह
2 मिनट के बाद ही अदिति गांड कमर उठाते कपते हुवे - आह मा भाई कुछ आने वाला है तेजी से निकलने वाला है , अदिति अभय का रस बुर पे जोर से दबा के - आह भाई भाई आ गया आ गया भाई..
अदिति झटके मारते गांड कमर उठाते पहला झरने का एहसास मजा सुकून लेती है बुर से निकला रस अभय मजे से चाट के चूस के पी जाता है

अभय अदिति को देखता है तो जोर जोर से सासे ले रही थी अभय के मुह पे अदिति के बुर का पानी लगा था अदिति जब देखती है तो सर्म से पानी पानी हो जाती है और अभय मुस्कुराते हुवे - कैसा लगा पहली बार झर के

अदिति तेज सासे लेते सर्म से - उफ भाई बता नही सकती बहोत जयदा मजा आया अब मुझे बहोत अच्छा फिल हो रहा है मन सन्त दिल खुश हो गया

अभय - हु जब बॉडी को जो चाहिये मिल जाता है तो ऐसा ही फिल होता है
अदिति सर्म से - हु
अदिति फिर पैंट पहन लेती है अभय अदिति को बाहों मे लेके - अपनी गुरिया की बुर का स्वाद लेके मुझे भी बहोत जायदा मजा आया मस्त रस था
अदिति सर्म से अभय को देख - सच
अभय मुस्कुराते हुवे - हा बाबा सच आखिर मेरी गुरिया की बुर का रस जो था
अदिति सर्म से - गंदे भैया
अभय हसने लगता है

साम तीन बजे

अभय छत पे नजारा देखते हुवे कुछ सोच रहा था तभी मितल की याद आती है अभय फोन करके - दीदी कैसी है
मितल - मे अच्छी हु क्या हो रहा है
अभय - बस छत से नाजारे देख रहा हु दीदी वो बिकनी मे फोटो भेजो ना जनता हु आपका वो सब मेरे साथ करना नही चाहती है लेकिन देख तो सकता हु
मितल - अच्छा जी बहोत तेज हो बेसरम भी नही भेजती
अभय उदास होके - प्लेस दीदी
मितल - हु एक वादा कर मुझे लेने आयेगा
अभय एकदम से - वादा लेकिन नँगा देखुंगा बोलो मंजूर
मितल - वाह रे बेसरम लेने आने का इतना बरा चार्ज
अभय हस्ते हुवे - फ्री मे कुछ नही करता
मितल - कमीना बेसरम
अभय हस्ते हुवे - बोलो मंजूर
मितल धीरे से सर्म से - ठीक है दिखा दुगी लेकिन उसके आगे कुछ नही
अभय खुश होके - चलेगा लेकिन अभी बिकनी वाला फोटो भेजो ना देखना है बिकनी मे आप कैसी लगती है
मितल सर्म से - अच्छा भेज देती हु अब मे रखती हु वैसे कब आयेगा
अभय - कल हो सके तो निकलूंगा
मितल - हु ठीक है
फोन कट
2 मिनट मे फोटो भी आ जाता है

अभय जब मितल के बिकनी वाला फोटो देखता है तो लंड झटके मारके खरा हो जाता है लाल गुलाबी बिकनी मे मितल गजब लग रही थी चूचे कैद उसके उभार देख अभय मन मे - उफ बरे है दीदी बिकनी मे गजब लग रही है उफ अब तो देखना ही होगा अंदर दीदी के चूचे कैसे है और बुर भी

तभी फोन बजता है अभय नंबर देख मुस्कुराते हुवे फोन उठा के

अभय - बुआ कैसी है आप
पुष्पा - अच्छी हु तेरी मा से बात कर रही थी भाभी केह रही थी लाला बिना मन नही लग रहा
अभय - जनता हु उनके बिना मेरा भी मन नही लगता वैसे क्या कर रही है आप
पुष्पा - कुछ नही लेती हु
अभय - बुर मे उंगली तो
पुष्पा एकदम जोर से सर्म से - छि बेसरम सर्म करले
अभय हस्ते हुवे - मे तो बेसरम ही हु बुआ रहा नही जा रहा जल्दी ही आऊगा
इतना सुनते ही पुष्पा सिहर काप् जाती है
पुष्पा धीरे से - हु
अभय - बुआ रोज उंगली करती है
पुष्पा - छि रोज नही जब जयदा मन करता है तब
अभय - हु अच्छा आप चड्डी पहनती है
पुष्पा - कितना बेसरम है नही पहनती अब इस उमर मे आके जयदा तर औरते नही पहनती
अभय - अच्छा इसका मतलब अभी आपने नही पहनी हु
पुष्पा सर्म से - हा सही कहा
अभय - बुआ बुर पे बाल तो होगे ही ना
पुष्पा सर्म से लाल होके हैरानी मे - तुझे कैसे पता
अभय हस्ते हुवे - फूफा आपको चोदते नही तो अंदाज़ा लगाया
पुष्पा - लाइफ मे ये होगा मेरा भतीजा इतनी गंदी बात करेगा मुझसे सोचा नही था बेशर्म
अभय हस्ते हुवे - और मेरी बुर के पीछे परेगा चोदने ले लिये ये केहना भूल गई
पुष्पा सर्म से पानी पानी होके - चुप बेसरम
अभय - बुआ बुर मे उंगली करो ना
पुष्पा हैरान सर्म से - क्या नही
अभय - प्लेस बुआ
पुष्पा सर्म से - अच्छा करती हु
पुष्पा सारी पेटीकोट उपर करके तांगे फैला के बुर मे एक उंगली डाल के धीरे से अंदर बाहर करते हुवे - आह अभय बेटा
अभय जोस गर्म होके लंड निकाल हिलाते हुवे - बुआ अंदर तक डालो उंगली
पुष्पा सिसकिया लेते हुवे - डाल रही हु आह
अभय लंड हिलाते हुवे - सोचिये मे उंगली कर रहा हु आपकी बुर मे
पुष्पा आखे बंद करके सोचती है वो तांगे फैलाये लेती हैं और अभय तेजी से बुर मे उंगली कर रहा है ये सोचते फिल करते ही बुर से पानी निकलने लगता हैं और अभय की कान मे फच् फच् अपनी बुआ की सिसकिया आह उफ की आवाज के साथ - अभय बेटा और जोर से उंगली करो मजा आ रहा है
ये सब सुन अभय की लंड की नशे फूलने लगती है तभी पुष्पा - आह अभय बेटा आने वाला है आह मा आ गया उफ निकल गया अभय बेटा आह मर गई
पुष्पा झर जाती है फोन पे भतीजे से गंदी बात करते झरने का जो मजा एहसास पुष्पा को हुआ वो फिल करके पुष्पा मस्त हो गई थी

पुष्पा आखे खोल देखती है बहोत सारा पानी बुर से निकला था पुष्पा सर्म से पानी पानी होके सब याद करके मन मे - उफ मे कैसे बोल रही थी अभय बेटे ने सब सुन लिया होगा क्या सोच रहा होगा

अभय लंड अंदर करके मुस्कुराते हुवे - बुआ मजा आया
पुष्पा सर्म से - बाद मे बात करती हु
फोन कट
अभय मन मे - आग तो बहोत है बुआ के अंदर

रात 8 बजे खाना पीना होने के बाद अभय कमरे मे लेता दिशा से बात कर रहा था

दिशा - हु तो आप सब की बुर मारके ही आएँगे फिर लास्ट मे मम्मी जी की लेने मे लग जायेंगे
अभय मुस्कुराते हुवे - बिल्कुल
दिशा - अच्छा है पर जल्दी आइये हमारा दिल भी बहोत करता है
अभय - अच्छा जी दोनों बहने आपस मे मजे कर लेती हो तो मेरी क्या जरूरत है
दिशा - ऐसा मत बोलिये लंड की जरूरत परती ही है
अभय - बेसरम बीवी
पूजा - जीजा जी जल्दी आना
अभय - कियु तुम्हारी दीदी बुर नही चुसा आज हु
दिशा - कितने बेसरम है आप
पूजा सर्म से - बहोत बेसरम हो आप
अभय - अच्छा बाबा कुछ दिनों मे आ जाउंगा रखता हु
फोन कट

अभय आसा को फोन करता है

आसा - कैसा है मेरा लाल खाना पीना हो गया तेरी गुरिया कहा है
अभय - गुरिया तो जीतू के घर है रूबी के साथ
आसा - अच्छा कब आयेगा
अभय मुस्कुराते हुवे - लंड चुसेगी हु
आसा सर्म से - छि बेसरम
अभय - मा किया पहनी हो
आसा - सारी अभी नाइटी पेहनुगी
अभय - मुझे आपको देखना है वीडियो कॉल करता हु
आसा - ना बाबा जरूरत कुछ दिखाने को कहेगा
अभय मुस्कुराते हुवे - बिल्कुल कहुंगा
वीडियो कॉल होता है

आसा अभय को देख - बोल
अभय - बहोत खूबसूरत लग रही है
आसा - हु मस्का मैन बात बोल किया है तेरे दिमाग मे हु
अभय - फोन रखो एक जगह अच्छे से दिखाओ अपने आप को पुरा
आसा - ठीक है बाबा
आसा फोन रख पीछे हट जाती है अभय - हु मजा नही आ रहा ब्लाउस निकाल दो
आसा ब्लाउस निकाल सारी सीने पे रख अभय खरी होके - अब ठीक है

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ग्रे सारी मे ब्लाउस बिना मैच बिकनी सारी मे आसा केहर धा रही थी गोरा पर्फेट बॉडी खूबसूरत औरत थी आसा बिकनी मे आधे चुचे की उभार बाहर निकले मस्त गजब लग रहे थे उपर से नीचे तक अभय अच्छे से देखते हुवे - कयामत मा आप केहर धा रही है हर बार देखता हु लेकिन मन नही भारत वैसे मा बिकनी मे आपके कूछ बाहर आने को बेताब दिख रहे है मुझे
आसा अभय को देख - बेसरम मेरे चुचे की चिंता मत कर वो अपनी जगह अच्छे से है
अभय मुस्कुराते हुवे - हु ठीक है अब पीछे का सीन दिखाइये जरा
आसा अभय की तरफ गांड पीठ करके अभय को देख - ठीक है

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अभय फिर देखने मे खो जाता है उफ गजब सीन था पीछे का उपर बिकनी का पत्ता मस्त आसा की चिकनी पीठ से चिपका हुआ था जैसे आसा की चिकनी पीठ चूम रहा हो नीचे आगे मस्त एंगल से चुचे के उभार खरे साफ दिख रहे थे बॉडी की बनावट मस्त थी पुरी फिट कमर आगे बीच मे धसे हुवे और गांड सारी से चिपकी साफ बड़े बड़े बाहर निकले अच्छे से दिख रहे थे आसा कैसे खरी थी बहोत कुछ दिख रहा था अभय - मा गांड तो मस्त दिख रही है कैसे बाहर निकली हुई है
आसा सर्म से - चुप कर मेरी गांड के पीछे ही परा रहता है नालायक
अभय हस्ते हुवे - जब मा की मस्त बरी गांड हो तो बेटा देखेगा ही अब बेड पे झुक के अच्छे से घोरी बन जाओ

आसा मन मे - पता नही मे कियु सब करते जा रही हु
आसा बेड के पास जाके बेड पे हाथ रख झुक जाती है जो सिन नजारा अभय के सामने आता है अभय का लंड झटके मरने लगता है

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आसा बेड के हाथ रखे गांड पीछे निकाले झुकी थी जिस वजह से और भी अच्छे से आसा की मस्त गांड सारी से चिपकी दिखने लगती है
अभय लंड मसलते हुवे - मा जिस तरह आप झुकी है अच्छे से आपकी गांड दिख रही है उफ फैली हुई दिल कर रहा है मसल दु दबा दु
आसा अभय को देख सर्म से - मार खायेगा

आसा खरी होके - बस हो गया जो देखना था देख लिया
अभय मुस्कुराते हुवे - अब सारी निकाल बिकनी पैंटी मे देखना है
आसा सर पकर - ये लरका भी ना क्या क्या करवाएगा और मे पता नही कियु करते जाती हु अच्छा लास्ट समझ गया
अभय - हु ठीक है
आसा सारी निकाल मस्त तरीके से बिस्तर पे लेत जाती है

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भाई साहब किया ही नजरा था आसा पेट के बल लेती हुई थी एक तरफ बिकनी आसा के चुचे गोरे पीठ से चिपकी थी तो दूसरी तरफ नीचे पैंटी आसा की गांड से चिपकी हुई थी पुरा बदन गोरा दूध जैसा था किया ही गजब अंदाज़ मे आसा लेती हुई थी गांड उपर उठे उफ पैंटी मे मस्त लग रहे थे एक बेटे के लिए ये सब देखना खवाब ही रह जाता है लेकिन जब आपकी मा आपके कहने पे वो करे जो आप चाहते है वो सब दिखाये जो आप देखना चाहते है तो वो बेटा कितना किस्मत वाला होगा और अभय वही था अभय की हालत ही खराब हो जाती है लंड तो गिला हो गया था पानी से
अभय कपते होठो से लंड पकरे - शब्द नही है कहने को मा बस आगे का अच्छे से अपने मस्त चुचे दिखा दो बस हो गया
आसा अभय को देख - लास्ट समझ गया फिर कुछ नही करुगी
अभय - हा हा जी
आसा फिर ऐसे लेटती है ताकि अभय को उससे चुचे अच्छे से दिख सके

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अब जो सिन अभय के सामने आता है अभय का लंड पानी छोर देता है अभय का मुह खुला रह जाता जाता है आसा पेट के बल अभय की तरफ फेस करके हाथो के सहारे लेती थी बिकनी के कैद भारी भरकम बरे गोरे चुचे आधे से जयदा अभय के समाने थे उफ एक बेटे के लिये मा को इस तरफ देखना किसी सपने से कम नही था आसा जैसे जिस तरह लेती थी कयामत लग रही थी
आसा अभय को देख मन मे - देखो तो कैसे बिना पलके झपकाये मेरे चुचे अपनी मा के चुचे देख रहा है जैसे खा जायेगा उफ सर्म से मर जाउंगी
आसा - हो गया
अभय होस मे आके - हा मा

आसा फिर नाइटी पहन लेती है
अभय - मा क्या गजब लग रही थी हर पोजिसन मे कयामत और लास्ट वाला तो मस्त था आपके चुचे तो आधे दिख रहे थे गोरे दूध जैसे मस्त गोल मटोल
आसा सर्म से मन मे - जब भी मेरी मेरी बॉडी की तारीफ करता है मुझे बहोत खुशी मिलती है बहोत अच्छा लगता है

आसा - बेटा अब रखती हु
अभय - मा आगे का अपना मैन गेट दिखाया ही नही जिसके अंदर से आया हु मे
आसा हैरान सर्म से - कितना बेसरम है आगे का गेट सपने मे देख लेना
अभय मुस्कुराते हुवे - अपने मे तो बहोत कुछ करता हु मे आपके गेट के साथ अंदर से बहार से भी

आसा अभय की बात सुन समझ हैरान शोक सर्म से लाल हो जाती हैं और
आसा फोन कट कर देती है

अभय पसीने साफ करते हुवे - मे खुद को मर्द समझता हु लेकिन मा के सामने झर जाता हु जबकि मेने तो अभी तक असली खजाना देखा ही नही

अभय चड्डी बदल बिस्तर पे लेत जाता है तभी गुलाबी आती है अभय अच्छे से बुर मारता है और गुलाबी चली जाती है

अभय मन मे - ऑन्टी आयेगी या नही
तभी जोति नाइटी मे आती है तो अभय खुश होके - मुझे पता था आप आयेगी
जोती अभय के पास बैठ - बेटा तुझे कहा तो एक बार करने डुगी पर ये बात किसी को पता ना चले
अभय जोती को बिस्तर पे लेता के जोती के ऊपर आके - किसी को पता नही चलेगा उंन्टी

अभय फिर जोती के लेने लग जाता है

आज के लिए इतना ही 🙏🙏🙏
Awesome update
 
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