chapter 114
कमला जब नाइटी मे अभय के कमरे मे आती है तो अभय कमला को देख सब भूल जाता है कमला शर्म से अभय के पास बैठ जाती है
अभय कमला को अपने गोद मे बैठा के चूचे दबाते हुवे - उफ आपकी मोती गांड बुर की गर्मी मुझे साफ फिल हो रही है ऑन्टी कब से आपकी बुर मे लंड नही गया है
कमला सिसकिया लेते हुवे - बेटा उफ धीरे दबा 2 साल होने को आये है
अभय - अच्छा बुर मे उंगली करती ही होगी
कमला थोरा सर्म से - उफ हा कभी कभी
अभय जोस मे भर जाता है कमला को बिस्तर पे लेता के किस करने लगता है पहले होठो का रस पिता है फिर गर्दन गाल सीने पे किस करते हुवे नीचे आने लगता है पहली बार कमला को उसके पति के जगह था हर अंग बॉडी पे अभय के होठो के प्यार का एहसास पाके कमला जोर जोर से सिसकिया ले रही थी इस तरह कभी भी जोगी ने कमला के हर अंग को बॉडी को प्यार नही किया था ये सब कमला का पहली बार नया एहसास था जो कमला को पागल मदहोस कर रहा था
कमरे मे कमला के कामुक् आह उफ सिसकिया की आवाज गुजने लगती है
अभय अच्छे से चुमने मे बाद कमला की नाइटी निकलाने लगता है तो कमला और जयदा सर्माने लगती है आज उसके पति के बाद अभय सब कुछ देखने करने वाला था

अभय नाइटी निकाल देता है कमला पूरी नंगी अभय के सामने थी कमला सर्म से लाल हो गई थी वही अभय तो जोस मे पागल हो गया था कमला के नंगी बॉडी देख के कमला सच मे गजब लग रही थी भरा बदन बरे चूचे बुर फूली उभरी हुई
अभय अच्छे से उपर से नीचे तक देख - अन्टी उफ आपकी बॉडी कमाल की है इस उमर मे भी पूरी फिट आपके चूचे बुर तो और भी मस्त है
कमला सर्म से धीरे से - अभय बेटा तु सच केह रहा है
अभय कमला को देख - हा इस लिये तो इतना बेताब था आपकी चुदाई करने के लिये
कमला शर्म से - तो बेटा रुका कियु है डाल दे
कमला तो पूरी गर्म थी जोस मे लंड लेने के लिये

अभय कमला के चूचे के पास आके एक चूचे पकर मसलते दबाते हुवे - उफ अन्टी बहोत बरे सॉफ्ट चूचे है आपके दबाने मे मजा आ रहा है
अभय कमला के चूचे निपल दबाते जोर से मसलने लगता है
कमला बिस्तर कस ले पकर आह उफ सिसकिया लेते हुवे - आह अभय बेटा मसल दे मेरे चूचे को उफ दर्द हो रहा है लेकिन अच्छा लग रहा है उफ मा अभय बेटा मसल दे
अभय चूचे दबाते मन मे - ऑन्टी तो बहोत गर्म हो गई है तरप रही है

अभय फिर नीचे झुक के एक चूचे मुह मे लेके चूसने लगता है कमला सिसकिया लेते मदहोस होके अभय के सर पे हाथ रख - उफ बेटा चूस ले अपनी अन्टी के चूचे दूध नही है लेकिन चूस उफ मुझे बहोत अच्छा फिल हो रहा है बेटा उफ ये एहसास बहोत अच्छा है आह अभय बेटा
अभय चूचे चुस्टे हुवे मन मे - मजा आ रहा है इस चूचे को चूस के दूध पीके रूबी जीतू बरे हुवे अब मे चूस रहा हु ये सोच कर ही आह अन्टी
अभय मजे से दोनो चूचे दबाते चूस चूस ले लाल कर देता है
अभय कमला को देखता है जो जोर जोर से सासे ले रही थी अभय अब कमला ले टाँगों ले पास आके बैठ जाता है

कमला अपनी टाँगे और फैला देती है अभय बरे गोर से कमला के बुर को देखते हुवे मन मे - उफ क्या मस्त फूली बुर है अन्टी की देख के साफ पता चल रहा है ऑन्टी ने जैसा कहा बुर मे उंगली करती है

अभय धीरे से अपनी बीच वाली उंगली कमला के बुर के अंदर घुसा देता है वैसे ही कमला जोर से आह मा करती थी सिहर जाती है
अभय अंदर उंगली डाले मन मे - बहोत जयदा गर्म है टाइट भी फिल हो रहा है उफ मेरी उंगली जल रही है अन्टी के अंदर तो बहोत आग है
कमला अभय को देख मन मे - उफ उंगली डाल दी मेरी बुर मे उफ पति जी माफ करना लेकिन अब अभय बेटा आपकी बीवी की बुर मरेगा आह
अभय उंगली निकाल कमला को देख उंगली मुह मे लेके चूस लेता है ये देख कमला हैरान सर्म से लाल हो जाती है अभय मुस्कुराते हुवे - बहोत अच्छा स्वाद है आपकी बुर के रस का
कमला सर्म से पानी पानी हा जाती है

अभय झुक जाता है और कमला के बुर को जिब से चाटने लगता है कमला एकदम से सिहर जाती है काप् जाती है पहली बार अपनी बुर मे जिब का एहसास कमला को पागल कर देता है अभय जिब से चाटने मुह मे लेके चूसने लगता है तो वही कमला बेहाल होके आह उफ सिसकिया लेते हुवे - उफ बेटा अभय ये कैसा मजा है बहोत जयदा मजा आ रहा है चूस बेटा मेरी बुर को अच्छे से चूस आह ये मजा तो गजब का है उफ मा मजा आ रहा है
अभय मन मे - स्वाद तो बहोत अच्छा है अन्टी की बुर के रस का
3 मिनट बाद ही कमला गांड कमर उठाते कपते हुवे - उफ अभय बेटा आने वाला है मे झरने वाली हु, कमला बिस्तर पकरे झरने लगती है
कमला मन मे - उफ इतनी जल्दी ऐसे तो मे कभी नही झरी
अभय कमला को देख मुस्कुराते हुवे - मजा आया
कमला सर्म से तेज सासे लेते हुवे - हा बहोत आया बेटा

अभय कपड़े निकाल नँगा हो जाता है कमला की नजर अभय के खरे लंड मे जाती है तो बेचारी काप् जाती है सासे उपर नीचे होने लगती है
कमला डरते हुवे - अभय बेटा ये क्या है इतना बरा
अभय मुस्कुराते हुवे - तभी तो आपकी बुर के पुरा अंदर तक जायेगा
कमला डरते हुवे - जायेगा लेकिन दर्द भी बहोत होगा
अभय - दर्द मे मजा भी आयेगा अन्टी चलिये मुह मे लेके चूसिये
कमला हैरान अभय को देख - छि नही गंदा होता है
अभय - मजा आयेगा ये मजा नही मिला होगा अब मिलेगा
कमला अभय को देख सर्म से - ठीक है अभय बेटा आज मे तेरी हु

अभय लेत जाता है और कमला लंड के पास आके झुक के लंड पकर मुह मे लेके चूसने लगती है कमाल मन मे - उफ कितना गंदा है, लेकिन थोरि देर बाद ही जो स्वाद मजा मिलता है कमला मजे से चूस चूस के स्वाद लेते हुवे मन मे, अजीब है अब तो बहोत मजा आ रहा है सोचा नही था लंड चूसने मे इतना मजा आयेगा लंड का स्वाद उफ अच्छा है
अभय मजे से लेता मजा लेते हुवे - उफ ऑन्टी मस्त चूस रही है आह मजा आ रहा है अच्छे से चुसो उफ
5 मिनट बाद
अभय कमला के टाँगो ले बीच बैठ लंड पकर बुर के फाको ले बीच घिसते हुवे - अब असली खेल सुरु
कमला सिसकिया लेते अभय को देख अपनी टाँगे पूरी उठा के पकर - आह डाल दे बेटा रहा नही जाता है उफ
कमला खुद बेताब थी टाँगे उठाये फैलाये पकरे लेती लंड लेने के लिये

अभय लंड पकर छेद पे रख कमला को देख - बहोत जोस मे है आज निकाल दुगा गर्मी सारी
अभय एक धक्का फिर दूसरा पुरा लंड कमाल की बुर को चीरते हुवे पुरा अंदर तक चला जाता है कमला जोर से दर्द मे चीखने वाली थी लेकिन अभय जल्दी से कमला के ऊपर लेत किस करने लगता है कमला दर्द मे अभय को बाहों मे कस पैरो से पकर जकर् लेती है
कमला दर्द मे रो परी थी तरप रही थी अभय कुछ देर किस करते हुवे चूचे दबाते रहता है अभय मन मे - कितनी गर्म टाइट है अन्टी की बुर
case converter
2 मिनट बाद अभय चुदाई करते हुवे - अब कैसा लग रहा है अन्टी
कमला अभय को पकरे दर्द मे - बहोत दर्द हो रहा है अभय बेटा
अभय चुदाई करते हुवे - अन्टी आपकी बहोत टाइट है गर्म भी मुझे तो बहोत जयदा मजा आ रहा है आप को भी आयेगा
अभय तेज तेज धक्के मारना सुरु करता है जिसकी वजह से कमला दर्द मे रोते हुवे - मर गई मा अभय बेटा जोर से मत कर दर्द हो रहा है रुक जा मेरे लाल
अभय तेज धक्के मारते हुवे - नही रुक सकता उफ मजा आ रहा है
फट फच् और दर्द भरी सिसकिया आवाज गुज रही थी कमरे मे
अभय फिर लंड निकाल - घोरी बन जाओ
कमला दर्द मे आसु लिये घोरी बन के रोते हुवे - धीरे करना प्लेस

अभय कमला के गांड के ऊपर आके लंड बुर मे घुसा के चुदाई करने लगता है फट फच् की आवाज के साथ फिर कमला रोने लगती है दर्द मे रोते हुवे घोरी बनी कमला - उफ मा मर गई अभय बेटा समझ ना बहोत दर्द हो रहा है अंदर लग रहा है धीरे कर ना
अभय धक्के मारते कमला की गांड दबाते मसलते चुदाई करते हुवे - उफ मस्त गांड हो आपकी घोरी बना के चोदने का मजा ही अलग है धीरे नही ऑन्टी जोर से उफ गजब की बुर है मजा आ रहा है

अभय फिर कमला को बिस्तर पे लेता टाँगे फैला के चुदाई करने लगता है कमला दर्द मे अभय को रोकते हुवे - मर गई अभय बेटा नही ले पऊगा जलन होने लगी है बहोत दर्द भी हो रहा है प्लेस
कमला रो रही थी लेकिन अभय चुदाई करते हुवे - ऑन्टी बस हो गया आह किया करू आप की बुर की गर्मी पागल कर दिया है मुझे
45 मिनट बाद चुदाई खतम होती
कमला अभय पसीने से भीगे अपने सासो को काबू करने मे लगे थे
5 मिनट बाद
अभय कमला को देख - ऑन्टी कैसा लगा मजा आया
कमला अभय को देखती है फिर अभय के सीने पे मारते हुवे - बेसरम कही की कितना दर्द हा रहा था लेकिन तुम रुके नही
अभय हस्ते हुवे कमला के ऊपर आके प्यार से - मानता हु लेकिन आप को मजा भी तो आया
कमला मन मे - सच है जो मजा आया केह नही सकती 45 मिनट चुदाई मेने सोचा नही था इतनी देर कोई मेरी बुर मारेगा लेकिन अभय बेटा सच मे मर्द है मेरी जैसी औरत की हालत खराब कर दी
अभय - कहा खो गई आप
कमला अभय को देख सर्म से - बेटा सच कहु सुकून मिल गया दर्द जलन बहोत हो रहा है लेकिन ऐसी चुदाई तेरे अंकल भी नही कर पाये
अभय अपना लंड पकर छेद पे रख - अच्छा
कमला छेद लंड फिल कर डरते अभय को देख - नही बेटा
लेकिन अभय एक जोर का धक्का मर देता है कमला दर्द मे रोते हुवे मर गई मा प्लेस अभय बेटा अब नही ले सकती
अभय धक्का मारते हुवे - एक राउंड और आपकी बुर इतनी गर्म टाइट है उफ मजा आ रहा है
सुबह होती है रात अभय दो राउंड कमला की चुदाई कर दिया था कमला नंगी उठती है दर्द जलन से आह करते हुवे कमला अभय को देख मन मे - रात हालत खराब कर दी इस लरके ने यकीन नही होता रात मे कर बार झरी लेकिन उफ मजा भी बहोत मजा
कमला नाइटी पहन नहाने चली जाती है रूबी अदिति जीतू जोगी सब उठ गये थे अभय लास्ट मे उठ कर नहाता है रूबी खाना बनाने लगती है जीतू अभय बाते कर रहे थे
अभय - जब घर रेडी है तो सिफ्ट कियु नही हो जाते
जीतू - भैया अब जाके सब रेडी हुआ है 2 दिन मे सिफ्ट कर लेगे
अभय - अच्छा है
जीतू अपनी मा को जाते देख मन मे - लगता है मा को चोद दिया भैया ने
रूबी अभय को देख - भैया भाभी को लेके कियु नही आये
अभय मुस्कुराते हुवे - गुरिया सब आयेगी जीतू की शादी मे
रूबी - हा आना ही पड़ेगा
सुबह का समय अभय के घर
आसा तारा दिशा हॉल मे बैठे कोफ़ी पी रहे थे लेकिन आसा कही खोई सोच मे डूबी थी तारा आसा को देख - कहा खोई हुई है आप
आसा होस मे आके तारा को देख - कही नही
तारा - दमाद जी की याद आ रही है हु
आसा - एक ही तो लाल है मेरा दूर जाता है तो दिल बैठ जाता है
दिशा आसा के पास बैठ - एक छोटा लाला आ रहा है मम्मी जी आपको खूब परेसान करेगा
आसा हस्ते हुवे - सही कहा दिशा बेटी बाप शैतान है तो बेटा या बेटी हो वो भी शैतान ही होगे
दिशा हस्ते हुवे - आपने सही कहा
तारा - नही बेटी हुई तो मेरी दिशा जैसी होगी बेटा हुआ तो दमाद जी जैसा
फिर सब हसने लगते है
किचन मे पूजा खाना बना रही थी बार बार पेट पे हाथ रख अपने आने वाले बच्चे से बात कर रही थी
पूजा - मेरा बच्चा तेरे पापा को तो पता भी नही है तेरे बरे मे आह किया होगा जब जीजा जी को पता चलेगा
दिशा अंदर आते हुवे - बस भी कर छोटी कुछ नही होगा
पूजा - दीदी आप है तो चिंता कैसी

दिशा पूजा के पास जाके पूजा को पकर किस करने लगती है दोनो बहन मजे से एक दूसरे के होठों का रस चूस के पीने लगते है
पूजा नीचे हाथ ले जाने सारी के अंदर हाथ डाल दिशा के बुर मे एक उंगली घुसा देती है दिशा दर्द मजे मे - आह छोटी उफ
पूजा उंगली अंदर बाहर करने लगती है दिशा टाँगे फैला के सिसकिया लेते हुवे - उफ छोटी बस कर आह मा
पूजा उंगली निकाल दिशा को दिशा के - देखिये मेरी उंगली मे आपके बुर पानी लग गया
दिशा पूजा के कान पकर - बेसरम हो गई है अपने जीजा की तरह
सुबह 10 बजे जीतू के घर
अभय को फोन आता है पुष्पा का
अभय - बुआ गुस्सा है
पुष्पा - बेटा माफ कर दे कल तेरे पे गुस्सा हो गई लेकिन क्या करती तु मेरे भैया का बेटा मेरा भतीजा है मेरे बरे मे गंदा इस लिये गुस्सा आया समझ नही आता तु कैसे मेरे बरे मे गंदा सोच सकता है
अभय - बुआ आपको जानना है मे कियु आपको लेके ऐसा सोचा
पुष्पा हैरान होके - हा
अभय - बुआ कैद से बच के आने के एक महीने बाद एक दिन मे अपने दोस्त के घर गया उस दिन मे एकदम से अंदर कमरे मे चला गया तो देखा मेरा दोस्त अपनी सगी बुआ को चोद रहा था
अभय गंदे शब्द जान बुझ के केहता है ये कहानी भी अभय की बनाई है
पुष्पा हैरान पूरी शोक मे - क्या कहा
अभय - हा जो आपने सुना मे भी पुरा शोक था सब देख
पुष्पा - फिर क्या हुआ
अभय - दोनो ने मुझे देख लिया दोनो डर गये मुझसे कहा किसी को ना बताये मेरा दोस्त था तो कैसे किसी को बता देता
पुष्पा हैरान शोक मे - लेकिन बेटा ये कैसे मतलब दोनो के बीच
अभय - यही मेने भी सोचा फिर मेने पूछ लिया
बुआ - बेटा 10 दिन पहले मेरी कमर मे दर्द होने लगा तो मेने अपने भतीजे से कहा मलिस कर दे भैया भाभी सो गये थे उस रात जब हरिस् मेरी तेल से मलिस करते मुझे टच करने लगा तो मे गर्म हो गई मेरे पति कई साल से मेरी चुदाई नही करते मे तरप रही थी बस सब हो गया
अभय - बुआ लेकिन ये कमीना आपका भतीजा है फिर कैसे
बुआ - बेटा जानती हु जब सब हो गया तो मुझे भी लगा मे गलत कर बैठी लेकिन जो मजा सुकून मिला उसके बाद सोचा क्या ही गलत है मे बाहर किसी के साथ तो नही क्या ना मेरा भतीजा है घर की बात घर मे और मुझे भी बाकी जिंदगी तरप ke नही जीना था तो बस उसके बाद से हम रोज करते है
अभय झूठी कहानी सुना के - बुआ ये सब हुआ बस तभी से मेरे मन मे भी आया कास मेरी बुआ भी होती तब पता चला आप है मासी भी तो खुश हो गया जब आप को देखा तो देखता रह गया आप बहोत खूबसूरत कमाल की लग रही थी मेरे दोस्त की बुआ से कही जयदा
ये लाइन तारीफ वाला सुन पुष्पा को अच्छा लगता है
पुष्पा मन मे - तो ये बात है जाहिर है ऐसा कुछ देख अभय बेटे के मन मे गंदे विचार आयेगे ही
अभय - बुआ माफ कर दो
पुष्पा - कोई बात नही बेटा सच जान लिया मेने
अभय - बुआ कुछ पूछूँ
पुष्पा - हा बोलो
अभय - आपका मन नही होता मतलब फूफा करते है या नही
पुष्पा - बेटा नही करते उमर हो गई उनकी
अभय - तो आपका मन करता होगा ना
पुष्पा थोरा सर्म से - करता है लेकिन क्या ही कर सकती हु
अभय - बुआ इस लिये केह रहा हु जैसे मेरा दोस्त उसकी बुआ करते है हम करेगे आप जवान है तरप के जीना भी जीना है कोई घर की बाते घर मे कोई सक भी नही करेगा
पुष्पा - लेकिन बेटा गलत तो गलत है
अभय - बुआ दुनिया मे घर के अंदर सब होता है लेकिन ये बाते कांड राज ही रहती है
पुष्पा सोच मे पर जाती है सच ये है पुष्पा भी तरप के जी रही थी बुर मे उंगली करते हुवे
अभय - बोलिये ना बुआ मान जाओ मेरी प्यारी बुआ प्लेस
पुष्पा सर्म से - अच्छा बाबा ठीक है लेकिन किसी को पता ना चले
अभय खुश होके - सच मे बुआ
पुष्पा हस्ते हुवे सर्म से - हा देख बेटा ये गलत है लेकिन सच है मे तरप रही हु बस तु मुझे बीच मे मत छोर देना
अभय - आपकी कसम बुआ
पुष्पा सर्म से - हु
अभय धीरे से - तो आऊगा तो देगी ना अपनी बुर
पुष्पा सर्म से - छि गंदे
अभय - बोलिये ना
पुष्पा धीरे से सर्म से - दूगी
अभय - क्या खुल के बोलो
पुष्पा सर्म से - अपनी बुर अब खुश
अभय खुश होके - बहोत खुश
पुष्पा - बेटा रखती हु बाद मे बात करेगे
अभय - जी बुआ उम्मा मेरी प्यारी बुआ
पुष्पा हस्ते हुवे - बेसरम
फोन कट
अभय खुश होके -चलो कहानी काम कर गई बुआ की बुर भी रेडी है अरे याद आया मितल दीदी मे फोन नही क्या कर लेता हु
अभय - हैलो दीदी नाराज हो मुझसे
मितल -नही तो मे कियु नाराज होगी तुमसे
अभय - वो उस दिन को लेके
मितल थोरा शर्म से - नही तो नही हु नाराज
अभय - हु दीदी जनता हु आपको लेके सोचना गलत है लेकिन दीदी एक विस पूरी कर देना प्लेस
मितल - कोन सी
अभय - मुझे मेरी प्यारी दीदी की खूबसूरत नंगी बॉडी देखनी है
मितल सर्म से - छि गंदे बेसरम सोच के बताऊंगी साम को फोन करुगि abhi रखती हु तेरे जीजा घर पे है
अभय - ठीक है दीदी
फोन कट
तभी अदिति आते हुवे - भैया किससे बाते हो रही है
अभय अदिति को बाहों मे लेके - मितल दीदी से

अभय बिना देरी अदिति को किस करने लगता है अदिति भी पुरा साथ देते हुवे मन मे - आप मेरे हो मेरा सब कुछ आपका मेरे प्यारे भैया जी भर ले चूस के पीजिये अपनी गुरिया का रस
किस के बाद अभय - मेरी गुरिया के होठ के रस का कोई जवाब नही
अदिति सर्म से - झूठे कई का रस पीते रहते है रात अन्टी का रस तो पिया ही ना
अभय मुस्कुराते हुवे - हा होठ बुर दोनो का लेकिन मेरी गुरिया के आगे सब फेल है
अदिति सर्म से - बेसरम भैया
तभी रूबी आते हुवे - दीदी भैया हम नये घर जा रहे है चलेंगे
अभय रूबी को देख - ठीक है गुरिया चलो
अभय फिर सब के साथ नये घर आता है फिर बाते करने लगता है सब से होने के बाद अभय एक कमरे मे लेता सोच मे गुम हो जाता है तभी रूबी आती है अभय रूबी को देख - आओ गुरिया
रूबी अभय के पास बैठ - भैया कैसा है घर
अभय - बहोत अच्छा है तुम तो और भी
रूबी सर्म से - आप भी ना
अभय बैठ रूबी को गोद मे बैठा के धीरे से - कुछ सोचा गुरिया
रूबी सिहर जाती है तेज सासे लेने लगती है
रूबी कपते हुवे - जी जी नही वो मे
अभय - माफ करना गुरिया मे जयदा फोर्स तो नही कर रहा
रूबी एकदम से नही तो भैया
अभय - हु तो एक काम करुगि अपने भैया का लंड एक बार मुह मे लोगी
रूबी हैरान शोक मे कपते हुवे - क्या
अभय रूबी के दोनो चूचे दबाते हुवे - बस एक बार
रूबी अपने चूचे मे अभय का हाथ दबाव फिल कर गर्म होने लगती है सिसकिया लेने लगती है रूबी सिसकिया लेते हुवे - आह भैया किसी को पता नही चलेगा ना
अभय - नही चलेगा बोलो लोगी
रूबी सिसकिया लेते हुवे - जी भैया मे तैयार हु

अभय ये सुनते ही रूबी को किस करने लगता है रूबी भी पूरे मजे के साथ अभय का साथ देती है रूबी मन मे - उफ भाई तो मेरे होठ का रस मजे से पी रहे है उफ ये एहसास बहोत अच्छा सुकून वाला है
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अभय भी बिना देरी पैंट नीचे कर लेत के - तो जल्दी करो ना गुरिया
रूबी जैसे ही देखती h अभय का मोटा लम्बा लंड रूबी की सासे रुक जाती है बॉडी काप् जाती है रूबी मन मे - इतना मोटा लम्बा
अभय - देखो मत जल्दी मुह मे लो गुरिया रहा नही जाता
रूबी कपते हुवे लंड ले पास बैठ गोर से लंड देखने लगती है फिर लंड को हाथो पकर लेती है गर्म गर्म होता एहसास फिल करके सिहर जाती है बुर गीली होने लगती है

रूबी अभय के लंड पकरे देखते हुवे मन मे - सच ये है मे कई बार मा को बाते करते सुन लिया था मे शोक हुई थी अभय भैया मेरी मा के बीच ये सब चल रहा है रात तो मेने आवाजे भी सुनी मा आह उफ सिसकिया लेते दर्द मे मजे से चुदवा रही थी
हा रूबी ने कमला अभय के बीच बाते सुन ली तब से रूबी के अंदर की जवानी जग गई कई और उसका मन भी होने लगा रूबी को पता था रात अभय उसकी मा के बीच क्या होने वाला है तो रूबी अदिति को सोता देख चुपके से आ गई थी सब सुनने रात चुदाई की आवाज कमला अभय की बाते सुन के तो रूबी और प्यासी हो गई थी
अभय रूबी को खोया देख - गुरिया करो ना जल्दी से
रूबी होस मे आके - जी भैया

रूबी झुक ले मुह मे लेके लंड चूसने लगती हैं अभय मस्त हो जाता है रूबी लंड चुस्टे हुवे -पहली बार लंड देखा और चूस भी रही हु उफ मजा आ रहा है भैया का लंड बहोत मोटा है गर्म भी तभी रात मा इतना दर्द मे आह उफ सिसकिया ले रही थी
अभय मजे से - उफ गुरिया मजा आ गया करती रहो आह
रूबी लंड चुस्टे हुवे मन मे - उफ इतना मजा आता है लंड चूसने मे अब पता चला ये लंड का स्वाद भी बहोत मजेदार है पीके मजा आ रहा है
6 मिनट बाद
रूबी थक के - भैया मुह दर्द करने लगा है
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अभय उठ ले खरा होके लंड पकर तेजी से हिलाते हुवे - मुह खोल ले रखो गुरिया अपने भैया का मलाई पिलो बहोत मजा आयेगा
रूबी हैरान होती है लेकिन मुह खोल के देखने लगती है अभय तेजी से हाथ चलाते हुवे आह गुरिया करते पुरा माल रूबी के मुह मे निकाल देता है गर्म गर्म मुह मे माल लेके रूबी मस्त हो जाती है
अभय - पी जाओ
रूबी भी पुरा पी जाती है
रूबी मुह साफ कर मन मे - बहोत गर्म नमकीन था मजा भी आया पीके
रूबी सर्म से भाग जाती है अभय लंड अंदर कर मुस्कुराते हुवे - मान गया लंड तो मजे से चूसा मजा बहोत आया
दोपहर 2 बजे
अभय आराम कर रहा था अदिति भी कमरे मे आती हो और अभय के पास बैठ जाती है अभय उठ के बैठ अदिति के पीछे गर्दन पे किस करने लगता है अदिति जोर से सिसकिया लेती है

अभय अदिति को बिस्तर पे लेता के गर्दन पे किस करने लगता है अदिति जोस मे अभय को पकरे - आह भैया प्यार करो मुझे जी पर के करो मे भी तरप रही हु उफ मा भैया आह
अभय अदिति ले अपनी गुरिया के तरप देख समझ रहा था लेकिन समय नही आया था अदिति का इस लिये अभय रुका था

अभय अदिति को किस करने लगता है अदिति भी पूरे जोस मे अभय को किस करने लगती है अभय हैरान होके मन मे - समझ सकता हु गुरिया सब देख सुन तेरे अंदर भी प्यास जग गई है लेकिन सब थोरा इंतज़ार और करले , अभय सोच ही रहा था की
अदिति जल्दी से अभय के पैंट खोल चड्डी नीचे कर अभय का लंड पकर लेती है अभय और हैरान होके अदिति को देखता रहता है

लेकिन तब तक अदिति झुक के अभय का लंड मुह मे लेके मजे से चूसने चाटने लगती है अभय भी मजे लेने लगता है अभय अदिति को देख मन मे - जितनी जोस मे है मे हैरान हु लेकिन गुरिया को इतना जोस मे देख मुझे भी बहोत जयदा मजा आ रहा है
अदिति अपने भैया का लंड मजे से चूस चट के रस पिये जा रही थी
अभय बस गुरिया मेरी बरी अपने चूचे चुसाओ जरा

अपने भैया की बात सुनते ही अदिति फट से बैठ अपनी टिसर्ट निकाल अभय को देख जोस मदहोसी मे - पी लो भाई दबा दबा के चूसना अपनी गुरिया के चूचे
अभय भी पूरे जोस मे अदिति के एक चूचे पकर दबा दबा के मुह मे लेके चूसने लगता है अदिति जोस मे दर्द मजे से सिसकिया लेते हुवे - आह भाई बहोत मजा आ रहा है अच्छे से दबा के चूसिये उफ भाई सब कुछ आपका है मेरी चूचे बुर बॉडी आत्मा सब कुछ आह
अभय भी जोस मे दबा दबा के मजे से चूचे चूस के पीते रहता है
3 मिनट बाद
अभय - बस गुरिया आगे फिर कभी
अदिति होस मे आती है फिर सर्म से अभय के सीने मे अपना चेहरा छुपा लेती है अभय मुस्कुराते हुवे प्यार से अदिति के सर सेहलाते हुवे - इसमें सर्माने वाली बात किया है तुम मेरी मे तेरा हु मुझे अच्छा लगा मेरी गुरिया अपना हक ले रही है देख के
अदिति सर्म से - सच मे भैया
अभय अदिति के चेहरे को पकर किस करते हुवे - हा गुरिया अब अपनी बुर देखा दो कैसी है मेरी गुरिया की बुर
अदिति सर्म से खुशी से - अभी दिखाती हु
अभय मन मे - पगली कितनी खुशी से देखा रही है
अदिति खरी होके अपनी पैंट नीचे कर लेती हैं अभय जैसे ही अपनी बहन की नंगी बुर देखता है देखता ही रह जाता है अभय का लंड पुरा टाइट हो जाता है

अभय हैरान होके अदिति को देख - ये क्या जगल ऊगा के रखा है वो भी इतना घना बुर तो दिख ही नही रही है गुरिया
अदिति की मस्त सिल पैक बुर बरे काले घने बल से धके हुवे थे लेकिन सीन बहोत कमाल का था उफ अभय भी मस्त हो गया था
अदिति सर्म से - वो भाई साफ करती हु लेकिन फिर जल्दी से बाल आ जाते है
अभय अदिति के पास आके एक हाथ बुर पे रख बाल सेहलानें लगता है अदिति सिहर जाती है पहली बार अपने भाई का हाथ नंगे बुर पे फिल करके अदिति मदहोस होने लगती है
अभय अदिति के बुर के बाल सेहलाते हुवे अदिति को देख - बहोत बरे बाल है गुरिया साफ कर लेना, अभय मन मे बुर से तो आग निकल रहा है
अदिति सर्म से - जी भाई
अभय हाथ हटा के - पैंट पहन लो
अदिति पैंट पहन लेती है
अभय - गुरिया मे आज रात जीत के घर रुकुगा तुम रूबी के साथ रह जाना
अदिति - जी भैया
रात 7 बजे कमरे मे अभय कमला की चुदाई करते कुछ बाते बताता है फिर अदिति से मिल सीधा जीत के घर आता है
खाना खाने का वक़्त था अभय सब बैठे खाना खाने लगते है बाते भी चल रही थी
चमन अभय को देख - कियु रे अब टाइम मिला आने को वो भी गुलाबी बेटी मे फोन क्या तो आया
अभय - अंकल आप नाराज मत हो मे आज रात कल पुरा दिन यही रहुंगा
चमन - तब अच्छा है
गुलाबी - अरे पापा मे हु ना जायेगा तो टाँगे तोर दुगी
चमन हस्ते हुवे - एकदम बेटी
अभय जोती को देख - ऑन्टी आप कुछ नही बोलेगी सब मेरे टांग तोरने की बात कर रहे है
जोती मुस्कुराते हुवे - सही तो कहा गुलाबी ने
अभय हैरान फिर जीत की और देख - तु खुल बोलेगा
जीत खाते हुवे - माफ करना भाई दीदी सब के आगे मेरी नही चलती
गुलाबी मुस्कुराते हुवे - समझ गया ना जाने की कोसिस मत करना
अभय डरते हुवे - समझ गया
खाते मस्ती बाते करने के बाद अभय घर के बाहर आके सब की हाल चाल लेता है बाते करता है एंड मे आसा को फोन करता है
आसा कमरे मे बिस्तर पे लेती अभय का फोन देख सिहर जाती है और जानती है आज उसे क्या दिखाना होगा
आसा - हा लाला
अभय - मा वादा याद है ना अब दिखाओ
आसा - बेसरम कही का कैसी हो क्या कर रही हो मा पूछने के बजाये गंदी बाते सुरु कर दी
अभय - अच्छा बाबा मा कैसी हो क्या कर रही हो मेरी सेक्सी प्यारी मा
आसा हस परती है
आसा - अच्छी हु बिस्तर पे लेती हु
अभय - हा हो गया अब दिखा दो तरप रहा हु आपकी गांड नये पैंटी मे देखने के लिये मुझे पता है आप पहन के रेडी है दिखाने को
आसा हैरान होके मन मे - कितना बेसरम तेज है समझ गया पता है मे नई डिजाइन वाली पैंटी पहन रखा है
आसा थोरा सर्म से - लाला जल्दी देख लेना मे जयदा देर नही देखाने वाली
अभय - मा ऐसे कैसे मुझे हिलाना है आपकी गांड देख के
आसा सर्म से - अच्छा मेरी वीडियो फोटो जो ले लेता है उसका क्या देख ले हिला लेना
अभय हस्ते हुवे - आपको भी पता रहता है अच्छा बाबा अब इंतज़ार नही होता मे वीडियो कॉल करता हु
आसा सर्म से - ठीक है
अभय वीडियो कॉल करता है आसा फोन केमरा एक जगह सेट लरके अभय का देख सर्म से - जल्दी देख लेना
अभय बेताबी से - जी मा समझ गया
आसा सर्माते हुवे नाइटी निकालते हुवे मन मे - जो पैंटी पहनी है वो तो सिर्फ मेरी बुर गांड की छेद ही धक पति है उफ उसके अलावा तो सब नँगा दिखेगा ये लरका भी ना बहोत बिगर गया है
आसा नाइटी निकाल केमरे के सामने आके मस्त गांड उठा के घोरी बन जाती है अभय जब देखता है तो पहले अभय का लंड पूरे पैंट फरते हुवे पुरा टाइट होके खरा हो जाता है एक जोर का दर्द अभय को होता है अभय की आखे तो बस अपनी मा उसकी गांड पे थी आखे बिना पलके फपके गांड पे ठिकी थी मुह खुले थे वो नजारा अभय के सामने था जिसको देखने के लिये अभय बेताब था अब वो देख रहा था एक बेटा अपनी मा को जिस हालत मे घोरी बनी देख रहा था उस बेटे की हालत क्या होगी वो अभय ही जान सकता था

नजारा कुछ ऐसा था आसा काले बिकनी पैंटी मे आगे हाथ बिस्तर पे सर झुकाये घुटने के बल घोरी बने झुकी हुई थी गांड पूरे उठाये हुवे नई डिजाइन की पैंटी होने के कारन घोरी बनने के कारन पैंटी पूरी तरह आसा के मस्त गोल गोल तरबूज जैसे गोरे गांड की दरार मे पूरे घुस गये थे गांड की छेद दिख नही रहे थे लेकिन हल्का बुर की उभार पैंटी मे दबी साफ दिख रही थी अब सीन ये था आसा की गांड पूरी कितनी बरी फैली गोल मटोल है देखा जा सकता था आसा घोरी जिस तरह बनी थी बॉडी की सपनेस् बनावट उपर से गोरा पर्फेट बदन कयामत पानी मे आग लगा लेने वाला सीन बन गया था और अभय ये नजारा देख अपनी मा की मस्त गांड देख पागल होके - क्या मस्त गांड है मेरी मा आपकी जैसा सोचा एकदम बरे गोल मटोल गोरे गोरे गांड उफ मा
फिर होता ये है अभय सेह नही पता और लंड झटके मारते पिचकारी चोर देता है

आसा भी जल्दी से बैठ नाइटी पहन अभय को देख सर्म से - देख लिया ना अब खुश
अभय होस मे आके आसा को देख - हा देख लिया मा अभी भी मेरी आखो के सामने आप घोरी बनी पैंटी मे मस्त गांड दिख रहे है आपकी पैंटी आपकी मोती गोरे गांड की दरार मे घुसे मस्त दिख रहे थे टाइट पैंटी आपकी बुर को दबाये हुवा था जिस वजह से हल्का आपकी फूली बुर की उभार भी दिख रही थी उफ मा सच केह रहा हु आपकी गांड बहोत ही जयदा मस्त बरे बरे गोल मटोल तरबूज जैसे है आज मे अच्छे से पुरा देख पाया हु आपकी गांड वाकई बरी फैली हुई है मास गुडा से बरी मन कर रहा था दबा दबा मसल के जोर से चाटा मारने का
अभय की बात सुन आसा एकदम से सिहर जाती है लेकिन
इतनी सारी बाते सुन आसा बहोत जयदा सर्म से पानी पानी हा जाती है
आसा - चल बहोत हो गया सोजा
अभय हैरान होके - लेकिन
आसा - आज बहोत हो गया रखती हु
फोन कट

अभय - हद है यार मा ऐसा कियु करती है , अभय फोन मे अपनी मा की घोरी बनी गांड देख मन मे - कई की गांड देखी मारी लेकिन मेरी मा की गांड के सामने कोई नही टिक सकता ये पतली पैंटी नही होती तो उफ कैसा नजारा होता
वही आसा सर्म से तकिये मे मुह छुपाये सर्म से - उफ सब देख लिया मेरी नंगी गांड मेरे लाल मे देख लिया पैंटी थी लेकिन फिर भी पूरी गांड तो दिख ही गई ना मेरी बेसरम नालायक पता नही किया सोच रहा होगा मेरी फोटो वीडियो देख के
आसा बेचारी को क्या पता अभय देख सोच ही रहा है उसकी गांड को देख
अभय खरा था जोती आते हुवे - चल अंदर सोना नही है
अभय जोती को देख - ऑन्टी और आपने जो कहा उसका क्या
जोती थोरा सर्म से - कल पक्का अभी जा जाके सो जाता
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अभय जोती को बाहों मे लेके किस करने लगता है तो जोती हैरान होती है लेकिन फिर पुरा साथ देती है दोनो मस्त एक दूसरे के होठ का रस पीने पिलने लगते है किस के बाद
जोती सर्म से - बेसरम चल
अभय मुस्कुराते हुवे - हु
जोती सोने चली जाती है अभय अपने कमरे मे आके चड्डी बदल लेत जाता है फिर फोन मे अपनी मा की गांड देख मन मे - मा भी गजब तरीके से गांड उठा के घोरी बनी है
तभी कमरे मे गुलाबी आती है नाइटी मे अभय गुलाबी को देख मन मे - आज रात आपकी बुर अच्छे से मारुंगा तरप रहा था अब वो समय आया है
15 मिनट बाद गुलाबी की दर्द भरी रोने और फट फच् की आवाजे गुजने लगती है
आज के लिये इतना ही ( आज का update कैसा लगा -

