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कुछ ही देर बाद में रेलवे स्टेशन के एक सुनसान इलाके पर खडी थी। मुझसे थोडी थोडी दूरी पर कुछ और लडकियाँ भी खडी हुईँ थी। मैं जानती थी कि वो सब कॉलगर्ल हैं। चूँकि मैं पहले भी वहाँ आ चुकी थी। इसलिए मुझे अच्छी तरह से पता था कि मुझे कस्टमर को लेकर कहाँ जाना है। कुछ ही देर में मेरे पास दो लडके आ गए। रेट तय करने के बाद हम लोग रेलवे यार्ड की तरफ चले।
मैं उनको उसी ट्रेन के डिब्बे में ले गई, जिसमें पहले भी चुदवा चुकी थी। अंदर जाते ही वो दोनों लडके एक साथ मुझपर टूठ पडे और जल्द ही मेरी चुदाई शुरू हो गई। मैं कुतिया बनी हुई थी और एक लड़का पीछे से मेरी चूदाई कर रहा था। जबकि मैं दूसरे लडके का लण्ड चूसकर उसे मजे दे रही थी। करीब 20 मिनट बाद ही दोनों लडके झर गए और मुझे पैसे देकर वहाँ से चले गए। उन दोनों लडकों को सेटिस्फाई करने बाद मैं फिर से अपनी जगह पर आकर खडी हो गई।
इस बार भी मुझे ज्यादा इंतजार नहीं करना पडा और मुझे फिर से नया ग्राहक मिल गया। इस तरह करते करते मैं सुबह के 4 बजे तक करीब 7-8 लोगों से चुदवा चुकी थी। जिस कारण अब मैं काफी थक गई थी और अपने होटल रूम में बापिस जाकर रेस्ट करने का डिसाईड कर चुकी थी। जैसे भी मेरा आखिरी कस्टमर मुझे चोदकर गया तो मैंने जल्दी से अपने कपडे पहने और जैसे ही उस डिब्बे से बाहर निकली तो 4 भिखारी जिन्होंने फटे पुराने कपडे पहने हुए थे और देखने में काफी गंदे दिखाई दे रहे थे। वो बाहर मिल गये।
शायद वो रेलवे स्टेशन के बाहर भीख माँगते थे और काफी देर से मुझे अलग अलग लोगों के साथ वहाँ आते जाते देख रहे थे। उन चारों की उम्र करीब 50-60 के आस पास होगी। मुझे उन्हें देखकर काफी ज्यादा घिन आ रही थी। इसलिए मैं चुपचाप वहाँ से जाने लगी। लेकिन तभी उन्होंने मुझे पकड लिया और मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करने लगे। मैं उन चारों से चुदवाना नहीं चाहती थी। इसलिए मैं काफी देर तक उनसे छूटने की कोशिश करती रही।
पर वो चार थे और मैं अकेली, इसलिए मैं उनका कुछ नहीं कर पाई। लेकिन जब बो चारों मुझे जबरदस्ती उसी डिब्बे में ले गए और मेरे कपडे उतारने की कोशिश करने लगे, तो मैंने सोचा कि अगर ज्यादा विरोध किया तो ये चारों मेरे कपडे फाड देंगे। जिसके बाद मैं होटल बापिस नहीं जा पाऊंगी। इसलिए मैंने खुद ही चुपचाप अपने कपडे उतार दिए। जिसके बाद तो वो चारों भूखे भेडियों की तरह एक साथ मुझ पर टूट पडे। मैंने उनका काफी विरोध किया पर वो नहीं माने। तभी उनमें से एक भिखारी ने मुझे कुतिया बनाकर मेरी चूत में अपना लण्ड घुसा दिया और मेरी चुदाई करने लगा।
अब मैं कुछ नहीं कर सकती थी। एक दो बार मैंने उससे अलग होने की कोशिश की तो उसने मेरी गाँड पर थप्पड लगाने शुरू कर दिए, जिस कारण मैंने उससे अलग होने की कोशिश बंद कर दी। तभी अचानक एक भिखारी ने अपना लण्ड मेरे मुँह की तरफ कर दिया। उसके लण्ड से बहुत गंदी स्मैल आ रही थी। इसलिए मैंने अपना मूँह दूसरी तरफ कर दिया, तो वो गुस्से में मेरे गालों पर थप्पड मारने लगा और उसके साथ साथ मेरी चुदाई करने बाला भिखारी भी मेरी गांड पर थप्पड मारने लगा। जिस कारण मुझे काफी दर्द हो रहा था।
इसलिए मजबूरी में मैने उस भिखारी का लण्ड अपने मूँह में लिया और चूसने लगी। मुझे ऐसा लग रहा था कि वे चारों मिलकर मेरा गैंग रेप कर रहे हैं। लेकिन मैं शोर मचाकर किसी को अपनी मदद के लिए ना तो बुला सकती थी और ना ही बाद में किसी को इस बारे में कुछ बता सकती थी। क्योंकि स्टेशन के आस पास के लोग मुझे एक रण्डी के रूप में अच्छी तरह से पहचानने लगे थे, और अगर कोई रण्डी कहे कि उसके साथ रेप हुआ है तो कोई भी उसकी बात पर यकीन नहीं करेगा।
उल्टा शोर मचाने से और भी ज्यादा लोगों के वहाँ आने का डर था, जो शायद मुझे बचाने की जगह मेरे साथ मजे करना चाहें। अब मुझे अपनी इस स्थिती पर बहुत गंदा फील हो रहा था और रोना भी आ रहा था। वो भिखारी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाऐ और 10-15 मिनट में ही उन्होंने अपना पानी छोड दिया। उनके अलग होते ही बाकी के दोनों भिखारी भी मेरे ऊपर सबार हो गए और मेरी चुदाई करने लगे। ये दोनों भी ज्यादा देर तक नहीं टिके और जल्द ही ठण्डे होकर वहाँ से चले गए।
मैं कुछ देर तक वहीँ बैठी अपनी स्थिती के बारे में सोचती रही। मुझे अपनी हालत पर बहुत रोना आ रहा था। तभी अचानक मेरी नजर वहाँ पास में पडे एक थैले पर गई। जो मैंने उन भिखारियों में से एक के पास देखा था। पता नहीं उस वक्त मुझे क्या सूझा जो मैंने उस थैले को उठाया और खोलकर देखा तो उसमें 5 लडकों बाले बॉलेट और 2 लेडिज पर्स रखे हुए थे। मैंने एक एक करके सभी को चैक किया, तो उनके अंदर काफी ज्यादा पैसा रखा हुआ था। साथ ही साथ लेडीज पर्श में कुछ सोने के गहने भी रखे हुए थे। उन्हें देखकर मैंने मन ही मन सोचा
“अरे पागल क्यों रो रही है। जब तू इतने लोगों से चुदवा चुकी है तो इन भिखारियों से चुदने में क्या बुराई है। इसे तू रेप की तरह मत देख, बस यह सोच की वो तेरे कस्टमर थे और तुझे रेप करने की एक्टिंग करनी थी। अब तू जिस धंधे में मजे ले रही है, उसमें कई अलग अलग प्रकार के लोग मिलेंगे। तो तू बुरा मानने की जगह बस मजे कर। बैसे भी गलती से ही सही वो भिखारी तुझे पैसे तो देकर ही गए है और उन लोगों से कई गुना ज्यादा देकर गए हैं, जिनसे तूने अपनी मर्जी से चुदाई करवाई है।”
यह सब सोचते ही मेरे अंदर आ रही गंदी सी फीलिंग खत्म हो गई और मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आ गई। मैंने जल्दी से वो सारे पैसे और गहने अपने पर्श में रखे और फिर अपने कपडे पहनकर वहाँ से निकल गई। इस बार मेरी किस्मत अच्छी थी कि मुझे कोई और नहीं मिला और ना ही वो भिखारी अपना थैला ढूँडते हुए वहाँ आये। मैं उस रेलवे यार्ड से निकलकर सीधे अपने होटल की तरफ बड गई। अपने रूम में जाकर मैं सबसे बाथरूम में जाकर फ्रैस हुई, और गर्म-गर्म पानी से नहाया।
गर्म गर्म पानी से अपने बदन को अच्छी तरह साफ करने के बाद मैं कपडे पहनकर बाथरूम से बाहर आ गई और फिर अपना लैपटॉप चैक करने लगी। गगन के मोबाईल का डाटा अभी भी पूरा ट्रांशफर नहीं हुआ था। इसलिए मैंने एक नजर घडी पर डाली सुबह के 5 बज चुके थे। इसलिए मैंने अपना लैपटॉप बापिस रखा और कंबल ओड कर सो गई। दोपहर करीब 11 बजे जब मेरी आँख खुली तो मैंने सबसे पहले रूम सर्विस पर कॉल किया। पिछले चार दिनों में मेरे काफी कपडे गंदे हो गए थे। जिन्हें लाऊंड्री में भिजवाना था। मेरे कॉल करने कुछ ही देर बाद रूम सर्विस बाला आ गया।
उसने सबसे पहले कमरे की और बाथरूम की अच्छे से सफाई। इस दौरान वो नजरें बाचाकर बार बार मुझे ही देखे जा रहा था। मैं पिछले चार दिन से उस आदमी को नोटिस कर रही थी। वो 23-24 साल का एक लडका था। जो देखने में तो काफी हैंडसम था, साथ ही साथ उसका शरीर भी अच्छा खासा गठीला था। मुझे तो वो कहीं से भी कोई रूम सर्विस बाला नहीं लग रहा था। पर फिर भी रूम सर्विस के लिए मेरे पास हर बार यही लडका आता था।
जबकि होटल में कई सारे स्टाफ मेम्बर थे। लेकिन पहले दिन जबसे इसने मुझे मात्र कैमिसोल और पैंटी में देखा था। तब से मेरे रूम में हर काम के लिए केवल यही आता था और नजरें बचाकर मेरे शरीर को निहारता रहता था। आज भी मैंने बाकी दिनों की तरह मात्र एक कैमिसोल और पेंटी पहनी हुई थी। तो मैंने मन ही मन सोचा क्यों ना थोडा इसके साथ मस्ती करूँ। इसलिए मैं उससे बोली
निशा- ये मिस्टर क्या नाम है तुम्हारा
वो लडका थोडा हडबडाकर बोला
“ज जी रघु“
उस लडके की बात सुनकर मैंने अपनी एक आईब्रो ऊपर करते हुए उसका नाम दोहराया
निशा- रघु हुम्म…
मेरे यूँ उसे देखने से रघू को लगा कि मुझे उसकी बात पर यकीन नहीं हो रहा है। इसलिे वो एक बार फिर हकलता हुए बोला
रघु- म मतलब राघवेन्द्र शर्मा… असल में रघु मेरा निकनेम है।
निशा- तो मिस्टर राघवेन्द्र उर्फ रघु मैं इतने दिनों से देख रहीं हूँ कि तुम जब भी यहाँ आते हो तो बस मुझे ही देखते रहते हो और हर बार तुम्हीं क्यों आते हो। बाकी का स्टॉफ भी तो है ना यहाँ
रघु- व वो असल में आपके रूम की सारी जिम्मेदारी मेरी है
निशा- और मुझे चुपके चुपके देखने का क्या मतलब है
मेरी बात सुनकर उसके चेहरे पर ऐसे भाव थे, जैसे मैंने उसकी कोई चोरी पकड ली हो। इसलिए वो हडबडाते हुए बोला
रघु- न नहीं तो… व वो आपको कोई गलत फहमी हो गई होगी
रघु की बात सुनकर मुझे हंसी आ रही थी। इसलिए मैं विस्तर से उठकर एक दम उसके पास चली गई और बोली
निशा- अच्छा तो यह बात है। मुझे तो लगा था शायद मैं तुम्हें पसंद हूँ। इसलिए तुम मुझे ऐसे चुपके चुपके देखते रहते हो। बैसे अगर ऐसा कुछ है तो बता सकते हो। मैं बुरा नहीं मानूंगी और ना ही किसी से कहूँगी
मेरी बात सुनकर शायद रघु को थोडी हिम्मत मिली। इसलिए वो बोला
रघु- अ आप सच में बहुत खूबसूरत हो... बिल्कुल किसी हीरोइन जैसी। तो पसंद तो सबको ही आओगी ना
निशा- और तुम्हें
रघु- मुझे भी मैम साहब
निशा- मैम साहब नहीं… मेरा नाम सपना नाम है
रघु- ज जी सपना मैम
निशा- अरे इतना डर क्यों रहे हो। मैं कोई खा थोडी ही जाऊँगी। बैसे एक बात बताओ मुझे देखकर तुम्हारे मन में क्या ख्याल आता है।
मेरी बात सुनकर रघु एकबार फिर हडबडाते हुए बोला
रघु- वो वो कुछ नहीं… कुछ भी तो नहीं….
रघु की बात सुनकर मैं उसके एकदम पास पहुँच गई और उसके एक हाथ को अपनी कमर पर ऱखते हुए बोली
निशा- सच मैं.... क्या मुझे छूने का मन नहीं करता तुम्हारा
मैं इस वक्त अपनी कमर पर रघु का हाथ कांपता हुआ महसूस कर रही थी। मुझे लगा कि उसे और हिम्मत की आवश्यक्ता है इसलिए मैंने उसका दूसरा हाथ भी अपनी कमर पर रख दिया। जिसके बाद बो कांपती आवाज में बोला
रघु- ज जी हाँ सपना जी… मुझे आपको छूने का बहुत मन करता है
निशा- और
रघु- और आपको किस करने का भी मन करता है
रघु की बाद सुनकर मैंने अपने होंठ एकदम उसके होंठों के पास कर दिये और फिर बोली
निशा- और
रघु- और आपको बहुत सारा प्यार करने का मन भी करता है
निशा- कैसे प्यार करने का मन करता है
मेरे उसके इतने करीब जाने से वो पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और उसके अंदर का डर पूरी तरह से दूर हो चुका है। एक तरह से वो पूरी तरह से भूल चुका था कि वो कहाँ है और क्या करने आया है। इसलिए वो बिना किसी डर के वोला
रघु- आपको अपनी बाहों में भरकर चूमने का मन करता है। आपके पूरे बदन को चूमने और सहलाने का मन करता है
निशा- और
रघु- और आपके साथ सब कुछ करने का मन करता है
निशा- सब कुछ क्या
रघु- वो वो स सेक्स करने का मन करता है
निशा- मेरी अब तक शादी नहीं हुई है और ना ही कोई बॉयफ्रेंड है। तुम मुझे पहली नजर में ही पसंद पसंद आ गए थे। तभी तो मैं हर रोज केबल तुम्हारे लिए ऐसे कपडे पहनती हूँ। ताकि तुम मुझसे अपने प्यार का इजहार करो और मुझे ढेर सारा प्यार करो
मेरी बात सुनकर रघु तो जैसे खुशी से पागल ही हो गया। उसे तो उम्मीद ही नहीं थी कि मैं उसे ऐसा ऑफर भी दे सकती हूँ। हालाँकि मेरा ऐसा कुछ भी करने का कोई इरादा नहीं था। मैं तो बस उसके मजे ले रही थी और उसे थोडा खुश करना चाहती थी। ताकि अगर मुझे किसी काम की जरूरत पडे, तो वो मेरी हेल्प कर सके। बैसे तो मेरी मदद करने के लिए रवि और असलम थे, पर पता नहीं क्यों मुझे लग रहा था कि रघु भी बहुत काम का आदमी हो सकता है। मेरी बात सुनकर रघु खुश होते हुए बोला
रघु- तो क्या आप सच में मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी
निशा- अगर तुम मुझे प्रपोज करो तो मैं इस बारे में सोच सकती हूँ
मेरी बात सुनकर रघु ने तुरंत मेरे होंठो पर एक लाईट किस किया और बोला
रघु- अ आई लव यू सपना जी
रघु की इस हरकत पर मैं हंसते हुए बोली
निशा- धत् ऐसे भला कौन प्रपोज करता है।
मेरी बात सुनकर रघु थोडा उदास होते हुए बोला
रघु- तो फिर कैसे करते हैं
निशा- ओफ्हो तुम्हें तो कुछ भी नहीं पता, चलो मैं ही बताती हूँ। सबसे पहले अपने घुटनों के बल बैठो और कोई गिफ्ट मुझे देकर आई लव यू बोलो
मेरी बात सुनकर रघु कुछ देर सोचता रहा और फिर मुझे छोडकर बाहर जाने लगा तो मैंने उसे टोका
निशा- अरे कहाँ जा रहे हो। मुझे कोई गिफ्ट नहीं चाहिए तुम तो बस ऐसे ही मुझे प्रपोज कर दो
पर उसने मेरी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और बोला
रघु- एक मिनट सपना जी…. मैं बस अभी आया
इतना बोलकर वो कमरे से बाहर चला गया और सच में वो कुछ ही देर में बापिस भी आ गया। पर काफी लम्बी लम्बी सांसे ले रहा था। जिसे देखकर मैं समझ गई कि वो पक्का वो भागता हुआ गया था और भागता हुआ ही बापिस आया है। कुछ देर लम्बी लम्बी सांसे लेने के बाद जब वो थोडा रिलेक्स हुआ तो वो मेरे पास आया और अपने घुटनों के बल बैठकर एक गोल्ड की चेन, जिसमें एक डायमण्ड पेंडेंट भी लगा हुआ था, वो मुझे देते हुए बोला
रघु- आई लव यू सपना जी
मैंने वो चेन अपने हाथों में लेकर चैक की, तो वो मुझे असली गोल्ड की लग रही थी। उसे देखकर मैं हैरानी से बोली
निशा- ये कहाँ से लाए तुम
रघु- वो वो कुछ दिन पहले एक कस्टमर अपने रूम में छोड गई थी। इसलिए मैंने अपने पास संभालकर रखी हुई थी।
रघू की बात सुनकर मैं गुस्से में उसे घूरते हुए बोली
निशा- सच सच बताओ कहीं तुमने चोरी बगैरह तो नहीं की है ना
मेरे सबाल पर रघु तुरंत अपने एक हाथ से अपने गले को पिंच करते हुए बोला
रघु- अपनी अम्मा की कसम खाता हूँ सपना जी… मैंने कोई चोरी नहीं की है
रघू की बात सुनकर मुझे उसपर पूरा यकीन हो गया था। पर मैं उससे वो चेन नहीं ले सकती थी। क्योंकि वो काफी कीमती लग रही थी और जैसी हालत रघु की थी, उस हिसाब से मुझे पूरा यकीन था कि उसे इस वक्त पैसों की काफी जरूरत होगी। इसलिए मैं वो चेन उसे बापिस करते हुए बोली
निशा- नहीं रघू… मैं ये नहीं ले सकती हूँ। यह बहुत मंहगी लगती है। इसलिए यह तुम्हारे बहुत काम आयेगी
मेरी बात सुनकर रघु बोला
रघु- मैंम सहाब इस दुनिया में मेरा अब कोई नहीं है। गरीब आदमी हूँ, खाने पीने का सारा जुगाड होटल से हो जाता है। तो मैं भला इसका क्या करूँगा। बैसे भी अगर मैं इसे कहीं बेचने गया तो पक्का लोग मुझे चोर समझेंगे। इससे अच्छा है कि यह मैं आपको ही दे दूँ। अब आप सच में मुझे पसंद करती हैं या मेरे साथ केबल मजाक कर रहीं हैं। मैं नहीं जानता, पर मैं आपको पक्का बहुत ज्यादा प्यार करने लगा हूँ। प्लीज मना मत करना।
रघु की बात सुनकर मुझे उस पर दया आ गई, इसलिए मैंने उससे वो चेन ले ली। फिर उसके कंधे पकडकर उसे खड़ा होने का इशारा किया। उसके खड़ा होते ही मैंने उससे आई लव यू टू कहकर किस कर लिया।
कुछ ही देर बाद में रेलवे स्टेशन के एक सुनसान इलाके पर खडी थी। मुझसे थोडी थोडी दूरी पर कुछ और लडकियाँ भी खडी हुईँ थी। मैं जानती थी कि वो सब कॉलगर्ल हैं। चूँकि मैं पहले भी वहाँ आ चुकी थी। इसलिए मुझे अच्छी तरह से पता था कि मुझे कस्टमर को लेकर कहाँ जाना है। कुछ ही देर में मेरे पास दो लडके आ गए। रेट तय करने के बाद हम लोग रेलवे यार्ड की तरफ चले।
मैं उनको उसी ट्रेन के डिब्बे में ले गई, जिसमें पहले भी चुदवा चुकी थी। अंदर जाते ही वो दोनों लडके एक साथ मुझपर टूठ पडे और जल्द ही मेरी चुदाई शुरू हो गई। मैं कुतिया बनी हुई थी और एक लड़का पीछे से मेरी चूदाई कर रहा था। जबकि मैं दूसरे लडके का लण्ड चूसकर उसे मजे दे रही थी। करीब 20 मिनट बाद ही दोनों लडके झर गए और मुझे पैसे देकर वहाँ से चले गए। उन दोनों लडकों को सेटिस्फाई करने बाद मैं फिर से अपनी जगह पर आकर खडी हो गई।
इस बार भी मुझे ज्यादा इंतजार नहीं करना पडा और मुझे फिर से नया ग्राहक मिल गया। इस तरह करते करते मैं सुबह के 4 बजे तक करीब 7-8 लोगों से चुदवा चुकी थी। जिस कारण अब मैं काफी थक गई थी और अपने होटल रूम में बापिस जाकर रेस्ट करने का डिसाईड कर चुकी थी। जैसे भी मेरा आखिरी कस्टमर मुझे चोदकर गया तो मैंने जल्दी से अपने कपडे पहने और जैसे ही उस डिब्बे से बाहर निकली तो 4 भिखारी जिन्होंने फटे पुराने कपडे पहने हुए थे और देखने में काफी गंदे दिखाई दे रहे थे। वो बाहर मिल गये।
शायद वो रेलवे स्टेशन के बाहर भीख माँगते थे और काफी देर से मुझे अलग अलग लोगों के साथ वहाँ आते जाते देख रहे थे। उन चारों की उम्र करीब 50-60 के आस पास होगी। मुझे उन्हें देखकर काफी ज्यादा घिन आ रही थी। इसलिए मैं चुपचाप वहाँ से जाने लगी। लेकिन तभी उन्होंने मुझे पकड लिया और मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करने लगे। मैं उन चारों से चुदवाना नहीं चाहती थी। इसलिए मैं काफी देर तक उनसे छूटने की कोशिश करती रही।
पर वो चार थे और मैं अकेली, इसलिए मैं उनका कुछ नहीं कर पाई। लेकिन जब बो चारों मुझे जबरदस्ती उसी डिब्बे में ले गए और मेरे कपडे उतारने की कोशिश करने लगे, तो मैंने सोचा कि अगर ज्यादा विरोध किया तो ये चारों मेरे कपडे फाड देंगे। जिसके बाद मैं होटल बापिस नहीं जा पाऊंगी। इसलिए मैंने खुद ही चुपचाप अपने कपडे उतार दिए। जिसके बाद तो वो चारों भूखे भेडियों की तरह एक साथ मुझ पर टूट पडे। मैंने उनका काफी विरोध किया पर वो नहीं माने। तभी उनमें से एक भिखारी ने मुझे कुतिया बनाकर मेरी चूत में अपना लण्ड घुसा दिया और मेरी चुदाई करने लगा।
अब मैं कुछ नहीं कर सकती थी। एक दो बार मैंने उससे अलग होने की कोशिश की तो उसने मेरी गाँड पर थप्पड लगाने शुरू कर दिए, जिस कारण मैंने उससे अलग होने की कोशिश बंद कर दी। तभी अचानक एक भिखारी ने अपना लण्ड मेरे मुँह की तरफ कर दिया। उसके लण्ड से बहुत गंदी स्मैल आ रही थी। इसलिए मैंने अपना मूँह दूसरी तरफ कर दिया, तो वो गुस्से में मेरे गालों पर थप्पड मारने लगा और उसके साथ साथ मेरी चुदाई करने बाला भिखारी भी मेरी गांड पर थप्पड मारने लगा। जिस कारण मुझे काफी दर्द हो रहा था।
इसलिए मजबूरी में मैने उस भिखारी का लण्ड अपने मूँह में लिया और चूसने लगी। मुझे ऐसा लग रहा था कि वे चारों मिलकर मेरा गैंग रेप कर रहे हैं। लेकिन मैं शोर मचाकर किसी को अपनी मदद के लिए ना तो बुला सकती थी और ना ही बाद में किसी को इस बारे में कुछ बता सकती थी। क्योंकि स्टेशन के आस पास के लोग मुझे एक रण्डी के रूप में अच्छी तरह से पहचानने लगे थे, और अगर कोई रण्डी कहे कि उसके साथ रेप हुआ है तो कोई भी उसकी बात पर यकीन नहीं करेगा।
उल्टा शोर मचाने से और भी ज्यादा लोगों के वहाँ आने का डर था, जो शायद मुझे बचाने की जगह मेरे साथ मजे करना चाहें। अब मुझे अपनी इस स्थिती पर बहुत गंदा फील हो रहा था और रोना भी आ रहा था। वो भिखारी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाऐ और 10-15 मिनट में ही उन्होंने अपना पानी छोड दिया। उनके अलग होते ही बाकी के दोनों भिखारी भी मेरे ऊपर सबार हो गए और मेरी चुदाई करने लगे। ये दोनों भी ज्यादा देर तक नहीं टिके और जल्द ही ठण्डे होकर वहाँ से चले गए।
मैं कुछ देर तक वहीँ बैठी अपनी स्थिती के बारे में सोचती रही। मुझे अपनी हालत पर बहुत रोना आ रहा था। तभी अचानक मेरी नजर वहाँ पास में पडे एक थैले पर गई। जो मैंने उन भिखारियों में से एक के पास देखा था। पता नहीं उस वक्त मुझे क्या सूझा जो मैंने उस थैले को उठाया और खोलकर देखा तो उसमें 5 लडकों बाले बॉलेट और 2 लेडिज पर्स रखे हुए थे। मैंने एक एक करके सभी को चैक किया, तो उनके अंदर काफी ज्यादा पैसा रखा हुआ था। साथ ही साथ लेडीज पर्श में कुछ सोने के गहने भी रखे हुए थे। उन्हें देखकर मैंने मन ही मन सोचा
“अरे पागल क्यों रो रही है। जब तू इतने लोगों से चुदवा चुकी है तो इन भिखारियों से चुदने में क्या बुराई है। इसे तू रेप की तरह मत देख, बस यह सोच की वो तेरे कस्टमर थे और तुझे रेप करने की एक्टिंग करनी थी। अब तू जिस धंधे में मजे ले रही है, उसमें कई अलग अलग प्रकार के लोग मिलेंगे। तो तू बुरा मानने की जगह बस मजे कर। बैसे भी गलती से ही सही वो भिखारी तुझे पैसे तो देकर ही गए है और उन लोगों से कई गुना ज्यादा देकर गए हैं, जिनसे तूने अपनी मर्जी से चुदाई करवाई है।”
यह सब सोचते ही मेरे अंदर आ रही गंदी सी फीलिंग खत्म हो गई और मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आ गई। मैंने जल्दी से वो सारे पैसे और गहने अपने पर्श में रखे और फिर अपने कपडे पहनकर वहाँ से निकल गई। इस बार मेरी किस्मत अच्छी थी कि मुझे कोई और नहीं मिला और ना ही वो भिखारी अपना थैला ढूँडते हुए वहाँ आये। मैं उस रेलवे यार्ड से निकलकर सीधे अपने होटल की तरफ बड गई। अपने रूम में जाकर मैं सबसे बाथरूम में जाकर फ्रैस हुई, और गर्म-गर्म पानी से नहाया।
गर्म गर्म पानी से अपने बदन को अच्छी तरह साफ करने के बाद मैं कपडे पहनकर बाथरूम से बाहर आ गई और फिर अपना लैपटॉप चैक करने लगी। गगन के मोबाईल का डाटा अभी भी पूरा ट्रांशफर नहीं हुआ था। इसलिए मैंने एक नजर घडी पर डाली सुबह के 5 बज चुके थे। इसलिए मैंने अपना लैपटॉप बापिस रखा और कंबल ओड कर सो गई। दोपहर करीब 11 बजे जब मेरी आँख खुली तो मैंने सबसे पहले रूम सर्विस पर कॉल किया। पिछले चार दिनों में मेरे काफी कपडे गंदे हो गए थे। जिन्हें लाऊंड्री में भिजवाना था। मेरे कॉल करने कुछ ही देर बाद रूम सर्विस बाला आ गया।
उसने सबसे पहले कमरे की और बाथरूम की अच्छे से सफाई। इस दौरान वो नजरें बाचाकर बार बार मुझे ही देखे जा रहा था। मैं पिछले चार दिन से उस आदमी को नोटिस कर रही थी। वो 23-24 साल का एक लडका था। जो देखने में तो काफी हैंडसम था, साथ ही साथ उसका शरीर भी अच्छा खासा गठीला था। मुझे तो वो कहीं से भी कोई रूम सर्विस बाला नहीं लग रहा था। पर फिर भी रूम सर्विस के लिए मेरे पास हर बार यही लडका आता था।
जबकि होटल में कई सारे स्टाफ मेम्बर थे। लेकिन पहले दिन जबसे इसने मुझे मात्र कैमिसोल और पैंटी में देखा था। तब से मेरे रूम में हर काम के लिए केवल यही आता था और नजरें बचाकर मेरे शरीर को निहारता रहता था। आज भी मैंने बाकी दिनों की तरह मात्र एक कैमिसोल और पेंटी पहनी हुई थी। तो मैंने मन ही मन सोचा क्यों ना थोडा इसके साथ मस्ती करूँ। इसलिए मैं उससे बोली
निशा- ये मिस्टर क्या नाम है तुम्हारा
वो लडका थोडा हडबडाकर बोला
“ज जी रघु“
उस लडके की बात सुनकर मैंने अपनी एक आईब्रो ऊपर करते हुए उसका नाम दोहराया
निशा- रघु हुम्म…
मेरे यूँ उसे देखने से रघू को लगा कि मुझे उसकी बात पर यकीन नहीं हो रहा है। इसलिे वो एक बार फिर हकलता हुए बोला
रघु- म मतलब राघवेन्द्र शर्मा… असल में रघु मेरा निकनेम है।
निशा- तो मिस्टर राघवेन्द्र उर्फ रघु मैं इतने दिनों से देख रहीं हूँ कि तुम जब भी यहाँ आते हो तो बस मुझे ही देखते रहते हो और हर बार तुम्हीं क्यों आते हो। बाकी का स्टॉफ भी तो है ना यहाँ
रघु- व वो असल में आपके रूम की सारी जिम्मेदारी मेरी है
निशा- और मुझे चुपके चुपके देखने का क्या मतलब है
मेरी बात सुनकर उसके चेहरे पर ऐसे भाव थे, जैसे मैंने उसकी कोई चोरी पकड ली हो। इसलिए वो हडबडाते हुए बोला
रघु- न नहीं तो… व वो आपको कोई गलत फहमी हो गई होगी
रघु की बात सुनकर मुझे हंसी आ रही थी। इसलिए मैं विस्तर से उठकर एक दम उसके पास चली गई और बोली
निशा- अच्छा तो यह बात है। मुझे तो लगा था शायद मैं तुम्हें पसंद हूँ। इसलिए तुम मुझे ऐसे चुपके चुपके देखते रहते हो। बैसे अगर ऐसा कुछ है तो बता सकते हो। मैं बुरा नहीं मानूंगी और ना ही किसी से कहूँगी
मेरी बात सुनकर शायद रघु को थोडी हिम्मत मिली। इसलिए वो बोला
रघु- अ आप सच में बहुत खूबसूरत हो... बिल्कुल किसी हीरोइन जैसी। तो पसंद तो सबको ही आओगी ना
निशा- और तुम्हें
रघु- मुझे भी मैम साहब
निशा- मैम साहब नहीं… मेरा नाम सपना नाम है
रघु- ज जी सपना मैम
निशा- अरे इतना डर क्यों रहे हो। मैं कोई खा थोडी ही जाऊँगी। बैसे एक बात बताओ मुझे देखकर तुम्हारे मन में क्या ख्याल आता है।
मेरी बात सुनकर रघु एकबार फिर हडबडाते हुए बोला
रघु- वो वो कुछ नहीं… कुछ भी तो नहीं….
रघु की बात सुनकर मैं उसके एकदम पास पहुँच गई और उसके एक हाथ को अपनी कमर पर ऱखते हुए बोली
निशा- सच मैं.... क्या मुझे छूने का मन नहीं करता तुम्हारा
मैं इस वक्त अपनी कमर पर रघु का हाथ कांपता हुआ महसूस कर रही थी। मुझे लगा कि उसे और हिम्मत की आवश्यक्ता है इसलिए मैंने उसका दूसरा हाथ भी अपनी कमर पर रख दिया। जिसके बाद बो कांपती आवाज में बोला
रघु- ज जी हाँ सपना जी… मुझे आपको छूने का बहुत मन करता है
निशा- और
रघु- और आपको किस करने का भी मन करता है
रघु की बाद सुनकर मैंने अपने होंठ एकदम उसके होंठों के पास कर दिये और फिर बोली
निशा- और
रघु- और आपको बहुत सारा प्यार करने का मन भी करता है
निशा- कैसे प्यार करने का मन करता है
मेरे उसके इतने करीब जाने से वो पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और उसके अंदर का डर पूरी तरह से दूर हो चुका है। एक तरह से वो पूरी तरह से भूल चुका था कि वो कहाँ है और क्या करने आया है। इसलिए वो बिना किसी डर के वोला
रघु- आपको अपनी बाहों में भरकर चूमने का मन करता है। आपके पूरे बदन को चूमने और सहलाने का मन करता है
निशा- और
रघु- और आपके साथ सब कुछ करने का मन करता है
निशा- सब कुछ क्या
रघु- वो वो स सेक्स करने का मन करता है
निशा- मेरी अब तक शादी नहीं हुई है और ना ही कोई बॉयफ्रेंड है। तुम मुझे पहली नजर में ही पसंद पसंद आ गए थे। तभी तो मैं हर रोज केबल तुम्हारे लिए ऐसे कपडे पहनती हूँ। ताकि तुम मुझसे अपने प्यार का इजहार करो और मुझे ढेर सारा प्यार करो
मेरी बात सुनकर रघु तो जैसे खुशी से पागल ही हो गया। उसे तो उम्मीद ही नहीं थी कि मैं उसे ऐसा ऑफर भी दे सकती हूँ। हालाँकि मेरा ऐसा कुछ भी करने का कोई इरादा नहीं था। मैं तो बस उसके मजे ले रही थी और उसे थोडा खुश करना चाहती थी। ताकि अगर मुझे किसी काम की जरूरत पडे, तो वो मेरी हेल्प कर सके। बैसे तो मेरी मदद करने के लिए रवि और असलम थे, पर पता नहीं क्यों मुझे लग रहा था कि रघु भी बहुत काम का आदमी हो सकता है। मेरी बात सुनकर रघु खुश होते हुए बोला
रघु- तो क्या आप सच में मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी
निशा- अगर तुम मुझे प्रपोज करो तो मैं इस बारे में सोच सकती हूँ
मेरी बात सुनकर रघु ने तुरंत मेरे होंठो पर एक लाईट किस किया और बोला
रघु- अ आई लव यू सपना जी
रघु की इस हरकत पर मैं हंसते हुए बोली
निशा- धत् ऐसे भला कौन प्रपोज करता है।
मेरी बात सुनकर रघु थोडा उदास होते हुए बोला
रघु- तो फिर कैसे करते हैं
निशा- ओफ्हो तुम्हें तो कुछ भी नहीं पता, चलो मैं ही बताती हूँ। सबसे पहले अपने घुटनों के बल बैठो और कोई गिफ्ट मुझे देकर आई लव यू बोलो
मेरी बात सुनकर रघु कुछ देर सोचता रहा और फिर मुझे छोडकर बाहर जाने लगा तो मैंने उसे टोका
निशा- अरे कहाँ जा रहे हो। मुझे कोई गिफ्ट नहीं चाहिए तुम तो बस ऐसे ही मुझे प्रपोज कर दो
पर उसने मेरी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और बोला
रघु- एक मिनट सपना जी…. मैं बस अभी आया
इतना बोलकर वो कमरे से बाहर चला गया और सच में वो कुछ ही देर में बापिस भी आ गया। पर काफी लम्बी लम्बी सांसे ले रहा था। जिसे देखकर मैं समझ गई कि वो पक्का वो भागता हुआ गया था और भागता हुआ ही बापिस आया है। कुछ देर लम्बी लम्बी सांसे लेने के बाद जब वो थोडा रिलेक्स हुआ तो वो मेरे पास आया और अपने घुटनों के बल बैठकर एक गोल्ड की चेन, जिसमें एक डायमण्ड पेंडेंट भी लगा हुआ था, वो मुझे देते हुए बोला
रघु- आई लव यू सपना जी
मैंने वो चेन अपने हाथों में लेकर चैक की, तो वो मुझे असली गोल्ड की लग रही थी। उसे देखकर मैं हैरानी से बोली
निशा- ये कहाँ से लाए तुम
रघु- वो वो कुछ दिन पहले एक कस्टमर अपने रूम में छोड गई थी। इसलिए मैंने अपने पास संभालकर रखी हुई थी।
रघू की बात सुनकर मैं गुस्से में उसे घूरते हुए बोली
निशा- सच सच बताओ कहीं तुमने चोरी बगैरह तो नहीं की है ना
मेरे सबाल पर रघु तुरंत अपने एक हाथ से अपने गले को पिंच करते हुए बोला
रघु- अपनी अम्मा की कसम खाता हूँ सपना जी… मैंने कोई चोरी नहीं की है
रघू की बात सुनकर मुझे उसपर पूरा यकीन हो गया था। पर मैं उससे वो चेन नहीं ले सकती थी। क्योंकि वो काफी कीमती लग रही थी और जैसी हालत रघु की थी, उस हिसाब से मुझे पूरा यकीन था कि उसे इस वक्त पैसों की काफी जरूरत होगी। इसलिए मैं वो चेन उसे बापिस करते हुए बोली
निशा- नहीं रघू… मैं ये नहीं ले सकती हूँ। यह बहुत मंहगी लगती है। इसलिए यह तुम्हारे बहुत काम आयेगी
मेरी बात सुनकर रघु बोला
रघु- मैंम सहाब इस दुनिया में मेरा अब कोई नहीं है। गरीब आदमी हूँ, खाने पीने का सारा जुगाड होटल से हो जाता है। तो मैं भला इसका क्या करूँगा। बैसे भी अगर मैं इसे कहीं बेचने गया तो पक्का लोग मुझे चोर समझेंगे। इससे अच्छा है कि यह मैं आपको ही दे दूँ। अब आप सच में मुझे पसंद करती हैं या मेरे साथ केबल मजाक कर रहीं हैं। मैं नहीं जानता, पर मैं आपको पक्का बहुत ज्यादा प्यार करने लगा हूँ। प्लीज मना मत करना।
रघु की बात सुनकर मुझे उस पर दया आ गई, इसलिए मैंने उससे वो चेन ले ली। फिर उसके कंधे पकडकर उसे खड़ा होने का इशारा किया। उसके खड़ा होते ही मैंने उससे आई लव यू टू कहकर किस कर लिया।
कुछ ही देर बाद में रेलवे स्टेशन के एक सुनसान इलाके पर खडी थी। मुझसे थोडी थोडी दूरी पर कुछ और लडकियाँ भी खडी हुईँ थी। मैं जानती थी कि वो सब कॉलगर्ल हैं। चूँकि मैं पहले भी वहाँ आ चुकी थी। इसलिए मुझे अच्छी तरह से पता था कि मुझे कस्टमर को लेकर कहाँ जाना है। कुछ ही देर में मेरे पास दो लडके आ गए। रेट तय करने के बाद हम लोग रेलवे यार्ड की तरफ चले।
मैं उनको उसी ट्रेन के डिब्बे में ले गई, जिसमें पहले भी चुदवा चुकी थी। अंदर जाते ही वो दोनों लडके एक साथ मुझपर टूठ पडे और जल्द ही मेरी चुदाई शुरू हो गई। मैं कुतिया बनी हुई थी और एक लड़का पीछे से मेरी चूदाई कर रहा था। जबकि मैं दूसरे लडके का लण्ड चूसकर उसे मजे दे रही थी। करीब 20 मिनट बाद ही दोनों लडके झर गए और मुझे पैसे देकर वहाँ से चले गए। उन दोनों लडकों को सेटिस्फाई करने बाद मैं फिर से अपनी जगह पर आकर खडी हो गई।
इस बार भी मुझे ज्यादा इंतजार नहीं करना पडा और मुझे फिर से नया ग्राहक मिल गया। इस तरह करते करते मैं सुबह के 4 बजे तक करीब 7-8 लोगों से चुदवा चुकी थी। जिस कारण अब मैं काफी थक गई थी और अपने होटल रूम में बापिस जाकर रेस्ट करने का डिसाईड कर चुकी थी। जैसे भी मेरा आखिरी कस्टमर मुझे चोदकर गया तो मैंने जल्दी से अपने कपडे पहने और जैसे ही उस डिब्बे से बाहर निकली तो 4 भिखारी जिन्होंने फटे पुराने कपडे पहने हुए थे और देखने में काफी गंदे दिखाई दे रहे थे। वो बाहर मिल गये।
शायद वो रेलवे स्टेशन के बाहर भीख माँगते थे और काफी देर से मुझे अलग अलग लोगों के साथ वहाँ आते जाते देख रहे थे। उन चारों की उम्र करीब 50-60 के आस पास होगी। मुझे उन्हें देखकर काफी ज्यादा घिन आ रही थी। इसलिए मैं चुपचाप वहाँ से जाने लगी। लेकिन तभी उन्होंने मुझे पकड लिया और मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करने लगे। मैं उन चारों से चुदवाना नहीं चाहती थी। इसलिए मैं काफी देर तक उनसे छूटने की कोशिश करती रही।
पर वो चार थे और मैं अकेली, इसलिए मैं उनका कुछ नहीं कर पाई। लेकिन जब बो चारों मुझे जबरदस्ती उसी डिब्बे में ले गए और मेरे कपडे उतारने की कोशिश करने लगे, तो मैंने सोचा कि अगर ज्यादा विरोध किया तो ये चारों मेरे कपडे फाड देंगे। जिसके बाद मैं होटल बापिस नहीं जा पाऊंगी। इसलिए मैंने खुद ही चुपचाप अपने कपडे उतार दिए। जिसके बाद तो वो चारों भूखे भेडियों की तरह एक साथ मुझ पर टूट पडे। मैंने उनका काफी विरोध किया पर वो नहीं माने। तभी उनमें से एक भिखारी ने मुझे कुतिया बनाकर मेरी चूत में अपना लण्ड घुसा दिया और मेरी चुदाई करने लगा।
अब मैं कुछ नहीं कर सकती थी। एक दो बार मैंने उससे अलग होने की कोशिश की तो उसने मेरी गाँड पर थप्पड लगाने शुरू कर दिए, जिस कारण मैंने उससे अलग होने की कोशिश बंद कर दी। तभी अचानक एक भिखारी ने अपना लण्ड मेरे मुँह की तरफ कर दिया। उसके लण्ड से बहुत गंदी स्मैल आ रही थी। इसलिए मैंने अपना मूँह दूसरी तरफ कर दिया, तो वो गुस्से में मेरे गालों पर थप्पड मारने लगा और उसके साथ साथ मेरी चुदाई करने बाला भिखारी भी मेरी गांड पर थप्पड मारने लगा। जिस कारण मुझे काफी दर्द हो रहा था।
इसलिए मजबूरी में मैने उस भिखारी का लण्ड अपने मूँह में लिया और चूसने लगी। मुझे ऐसा लग रहा था कि वे चारों मिलकर मेरा गैंग रेप कर रहे हैं। लेकिन मैं शोर मचाकर किसी को अपनी मदद के लिए ना तो बुला सकती थी और ना ही बाद में किसी को इस बारे में कुछ बता सकती थी। क्योंकि स्टेशन के आस पास के लोग मुझे एक रण्डी के रूप में अच्छी तरह से पहचानने लगे थे, और अगर कोई रण्डी कहे कि उसके साथ रेप हुआ है तो कोई भी उसकी बात पर यकीन नहीं करेगा।
उल्टा शोर मचाने से और भी ज्यादा लोगों के वहाँ आने का डर था, जो शायद मुझे बचाने की जगह मेरे साथ मजे करना चाहें। अब मुझे अपनी इस स्थिती पर बहुत गंदा फील हो रहा था और रोना भी आ रहा था। वो भिखारी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाऐ और 10-15 मिनट में ही उन्होंने अपना पानी छोड दिया। उनके अलग होते ही बाकी के दोनों भिखारी भी मेरे ऊपर सबार हो गए और मेरी चुदाई करने लगे। ये दोनों भी ज्यादा देर तक नहीं टिके और जल्द ही ठण्डे होकर वहाँ से चले गए।
मैं कुछ देर तक वहीँ बैठी अपनी स्थिती के बारे में सोचती रही। मुझे अपनी हालत पर बहुत रोना आ रहा था। तभी अचानक मेरी नजर वहाँ पास में पडे एक थैले पर गई। जो मैंने उन भिखारियों में से एक के पास देखा था। पता नहीं उस वक्त मुझे क्या सूझा जो मैंने उस थैले को उठाया और खोलकर देखा तो उसमें 5 लडकों बाले बॉलेट और 2 लेडिज पर्स रखे हुए थे। मैंने एक एक करके सभी को चैक किया, तो उनके अंदर काफी ज्यादा पैसा रखा हुआ था। साथ ही साथ लेडीज पर्श में कुछ सोने के गहने भी रखे हुए थे। उन्हें देखकर मैंने मन ही मन सोचा
“अरे पागल क्यों रो रही है। जब तू इतने लोगों से चुदवा चुकी है तो इन भिखारियों से चुदने में क्या बुराई है। इसे तू रेप की तरह मत देख, बस यह सोच की वो तेरे कस्टमर थे और तुझे रेप करने की एक्टिंग करनी थी। अब तू जिस धंधे में मजे ले रही है, उसमें कई अलग अलग प्रकार के लोग मिलेंगे। तो तू बुरा मानने की जगह बस मजे कर। बैसे भी गलती से ही सही वो भिखारी तुझे पैसे तो देकर ही गए है और उन लोगों से कई गुना ज्यादा देकर गए हैं, जिनसे तूने अपनी मर्जी से चुदाई करवाई है।”
यह सब सोचते ही मेरे अंदर आ रही गंदी सी फीलिंग खत्म हो गई और मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आ गई। मैंने जल्दी से वो सारे पैसे और गहने अपने पर्श में रखे और फिर अपने कपडे पहनकर वहाँ से निकल गई। इस बार मेरी किस्मत अच्छी थी कि मुझे कोई और नहीं मिला और ना ही वो भिखारी अपना थैला ढूँडते हुए वहाँ आये। मैं उस रेलवे यार्ड से निकलकर सीधे अपने होटल की तरफ बड गई। अपने रूम में जाकर मैं सबसे बाथरूम में जाकर फ्रैस हुई, और गर्म-गर्म पानी से नहाया।
गर्म गर्म पानी से अपने बदन को अच्छी तरह साफ करने के बाद मैं कपडे पहनकर बाथरूम से बाहर आ गई और फिर अपना लैपटॉप चैक करने लगी। गगन के मोबाईल का डाटा अभी भी पूरा ट्रांशफर नहीं हुआ था। इसलिए मैंने एक नजर घडी पर डाली सुबह के 5 बज चुके थे। इसलिए मैंने अपना लैपटॉप बापिस रखा और कंबल ओड कर सो गई। दोपहर करीब 11 बजे जब मेरी आँख खुली तो मैंने सबसे पहले रूम सर्विस पर कॉल किया। पिछले चार दिनों में मेरे काफी कपडे गंदे हो गए थे। जिन्हें लाऊंड्री में भिजवाना था। मेरे कॉल करने कुछ ही देर बाद रूम सर्विस बाला आ गया।
उसने सबसे पहले कमरे की और बाथरूम की अच्छे से सफाई। इस दौरान वो नजरें बाचाकर बार बार मुझे ही देखे जा रहा था। मैं पिछले चार दिन से उस आदमी को नोटिस कर रही थी। वो 23-24 साल का एक लडका था। जो देखने में तो काफी हैंडसम था, साथ ही साथ उसका शरीर भी अच्छा खासा गठीला था। मुझे तो वो कहीं से भी कोई रूम सर्विस बाला नहीं लग रहा था। पर फिर भी रूम सर्विस के लिए मेरे पास हर बार यही लडका आता था।
जबकि होटल में कई सारे स्टाफ मेम्बर थे। लेकिन पहले दिन जबसे इसने मुझे मात्र कैमिसोल और पैंटी में देखा था। तब से मेरे रूम में हर काम के लिए केवल यही आता था और नजरें बचाकर मेरे शरीर को निहारता रहता था। आज भी मैंने बाकी दिनों की तरह मात्र एक कैमिसोल और पेंटी पहनी हुई थी। तो मैंने मन ही मन सोचा क्यों ना थोडा इसके साथ मस्ती करूँ। इसलिए मैं उससे बोली
निशा- ये मिस्टर क्या नाम है तुम्हारा
वो लडका थोडा हडबडाकर बोला
“ज जी रघु“
उस लडके की बात सुनकर मैंने अपनी एक आईब्रो ऊपर करते हुए उसका नाम दोहराया
निशा- रघु हुम्म…
मेरे यूँ उसे देखने से रघू को लगा कि मुझे उसकी बात पर यकीन नहीं हो रहा है। इसलिे वो एक बार फिर हकलता हुए बोला
रघु- म मतलब राघवेन्द्र शर्मा… असल में रघु मेरा निकनेम है।
निशा- तो मिस्टर राघवेन्द्र उर्फ रघु मैं इतने दिनों से देख रहीं हूँ कि तुम जब भी यहाँ आते हो तो बस मुझे ही देखते रहते हो और हर बार तुम्हीं क्यों आते हो। बाकी का स्टॉफ भी तो है ना यहाँ
रघु- व वो असल में आपके रूम की सारी जिम्मेदारी मेरी है
निशा- और मुझे चुपके चुपके देखने का क्या मतलब है
मेरी बात सुनकर उसके चेहरे पर ऐसे भाव थे, जैसे मैंने उसकी कोई चोरी पकड ली हो। इसलिए वो हडबडाते हुए बोला
रघु- न नहीं तो… व वो आपको कोई गलत फहमी हो गई होगी
रघु की बात सुनकर मुझे हंसी आ रही थी। इसलिए मैं विस्तर से उठकर एक दम उसके पास चली गई और बोली
निशा- अच्छा तो यह बात है। मुझे तो लगा था शायद मैं तुम्हें पसंद हूँ। इसलिए तुम मुझे ऐसे चुपके चुपके देखते रहते हो। बैसे अगर ऐसा कुछ है तो बता सकते हो। मैं बुरा नहीं मानूंगी और ना ही किसी से कहूँगी
मेरी बात सुनकर शायद रघु को थोडी हिम्मत मिली। इसलिए वो बोला
रघु- अ आप सच में बहुत खूबसूरत हो... बिल्कुल किसी हीरोइन जैसी। तो पसंद तो सबको ही आओगी ना
निशा- और तुम्हें
रघु- मुझे भी मैम साहब
निशा- मैम साहब नहीं… मेरा नाम सपना नाम है
रघु- ज जी सपना मैम
निशा- अरे इतना डर क्यों रहे हो। मैं कोई खा थोडी ही जाऊँगी। बैसे एक बात बताओ मुझे देखकर तुम्हारे मन में क्या ख्याल आता है।
मेरी बात सुनकर रघु एकबार फिर हडबडाते हुए बोला
रघु- वो वो कुछ नहीं… कुछ भी तो नहीं….
रघु की बात सुनकर मैं उसके एकदम पास पहुँच गई और उसके एक हाथ को अपनी कमर पर ऱखते हुए बोली
निशा- सच मैं.... क्या मुझे छूने का मन नहीं करता तुम्हारा
मैं इस वक्त अपनी कमर पर रघु का हाथ कांपता हुआ महसूस कर रही थी। मुझे लगा कि उसे और हिम्मत की आवश्यक्ता है इसलिए मैंने उसका दूसरा हाथ भी अपनी कमर पर रख दिया। जिसके बाद बो कांपती आवाज में बोला
रघु- ज जी हाँ सपना जी… मुझे आपको छूने का बहुत मन करता है
निशा- और
रघु- और आपको किस करने का भी मन करता है
रघु की बाद सुनकर मैंने अपने होंठ एकदम उसके होंठों के पास कर दिये और फिर बोली
निशा- और
रघु- और आपको बहुत सारा प्यार करने का मन भी करता है
निशा- कैसे प्यार करने का मन करता है
मेरे उसके इतने करीब जाने से वो पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और उसके अंदर का डर पूरी तरह से दूर हो चुका है। एक तरह से वो पूरी तरह से भूल चुका था कि वो कहाँ है और क्या करने आया है। इसलिए वो बिना किसी डर के वोला
रघु- आपको अपनी बाहों में भरकर चूमने का मन करता है। आपके पूरे बदन को चूमने और सहलाने का मन करता है
निशा- और
रघु- और आपके साथ सब कुछ करने का मन करता है
निशा- सब कुछ क्या
रघु- वो वो स सेक्स करने का मन करता है
निशा- मेरी अब तक शादी नहीं हुई है और ना ही कोई बॉयफ्रेंड है। तुम मुझे पहली नजर में ही पसंद पसंद आ गए थे। तभी तो मैं हर रोज केबल तुम्हारे लिए ऐसे कपडे पहनती हूँ। ताकि तुम मुझसे अपने प्यार का इजहार करो और मुझे ढेर सारा प्यार करो
मेरी बात सुनकर रघु तो जैसे खुशी से पागल ही हो गया। उसे तो उम्मीद ही नहीं थी कि मैं उसे ऐसा ऑफर भी दे सकती हूँ। हालाँकि मेरा ऐसा कुछ भी करने का कोई इरादा नहीं था। मैं तो बस उसके मजे ले रही थी और उसे थोडा खुश करना चाहती थी। ताकि अगर मुझे किसी काम की जरूरत पडे, तो वो मेरी हेल्प कर सके। बैसे तो मेरी मदद करने के लिए रवि और असलम थे, पर पता नहीं क्यों मुझे लग रहा था कि रघु भी बहुत काम का आदमी हो सकता है। मेरी बात सुनकर रघु खुश होते हुए बोला
रघु- तो क्या आप सच में मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी
निशा- अगर तुम मुझे प्रपोज करो तो मैं इस बारे में सोच सकती हूँ
मेरी बात सुनकर रघु ने तुरंत मेरे होंठो पर एक लाईट किस किया और बोला
रघु- अ आई लव यू सपना जी
रघु की इस हरकत पर मैं हंसते हुए बोली
निशा- धत् ऐसे भला कौन प्रपोज करता है।
मेरी बात सुनकर रघु थोडा उदास होते हुए बोला
रघु- तो फिर कैसे करते हैं
निशा- ओफ्हो तुम्हें तो कुछ भी नहीं पता, चलो मैं ही बताती हूँ। सबसे पहले अपने घुटनों के बल बैठो और कोई गिफ्ट मुझे देकर आई लव यू बोलो
मेरी बात सुनकर रघु कुछ देर सोचता रहा और फिर मुझे छोडकर बाहर जाने लगा तो मैंने उसे टोका
निशा- अरे कहाँ जा रहे हो। मुझे कोई गिफ्ट नहीं चाहिए तुम तो बस ऐसे ही मुझे प्रपोज कर दो
पर उसने मेरी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और बोला
रघु- एक मिनट सपना जी…. मैं बस अभी आया
इतना बोलकर वो कमरे से बाहर चला गया और सच में वो कुछ ही देर में बापिस भी आ गया। पर काफी लम्बी लम्बी सांसे ले रहा था। जिसे देखकर मैं समझ गई कि वो पक्का वो भागता हुआ गया था और भागता हुआ ही बापिस आया है। कुछ देर लम्बी लम्बी सांसे लेने के बाद जब वो थोडा रिलेक्स हुआ तो वो मेरे पास आया और अपने घुटनों के बल बैठकर एक गोल्ड की चेन, जिसमें एक डायमण्ड पेंडेंट भी लगा हुआ था, वो मुझे देते हुए बोला
रघु- आई लव यू सपना जी
मैंने वो चेन अपने हाथों में लेकर चैक की, तो वो मुझे असली गोल्ड की लग रही थी। उसे देखकर मैं हैरानी से बोली
निशा- ये कहाँ से लाए तुम
रघु- वो वो कुछ दिन पहले एक कस्टमर अपने रूम में छोड गई थी। इसलिए मैंने अपने पास संभालकर रखी हुई थी।
रघू की बात सुनकर मैं गुस्से में उसे घूरते हुए बोली
निशा- सच सच बताओ कहीं तुमने चोरी बगैरह तो नहीं की है ना
मेरे सबाल पर रघु तुरंत अपने एक हाथ से अपने गले को पिंच करते हुए बोला
रघु- अपनी अम्मा की कसम खाता हूँ सपना जी… मैंने कोई चोरी नहीं की है
रघू की बात सुनकर मुझे उसपर पूरा यकीन हो गया था। पर मैं उससे वो चेन नहीं ले सकती थी। क्योंकि वो काफी कीमती लग रही थी और जैसी हालत रघु की थी, उस हिसाब से मुझे पूरा यकीन था कि उसे इस वक्त पैसों की काफी जरूरत होगी। इसलिए मैं वो चेन उसे बापिस करते हुए बोली
निशा- नहीं रघू… मैं ये नहीं ले सकती हूँ। यह बहुत मंहगी लगती है। इसलिए यह तुम्हारे बहुत काम आयेगी
मेरी बात सुनकर रघु बोला
रघु- मैंम सहाब इस दुनिया में मेरा अब कोई नहीं है। गरीब आदमी हूँ, खाने पीने का सारा जुगाड होटल से हो जाता है। तो मैं भला इसका क्या करूँगा। बैसे भी अगर मैं इसे कहीं बेचने गया तो पक्का लोग मुझे चोर समझेंगे। इससे अच्छा है कि यह मैं आपको ही दे दूँ। अब आप सच में मुझे पसंद करती हैं या मेरे साथ केबल मजाक कर रहीं हैं। मैं नहीं जानता, पर मैं आपको पक्का बहुत ज्यादा प्यार करने लगा हूँ। प्लीज मना मत करना।
रघु की बात सुनकर मुझे उस पर दया आ गई, इसलिए मैंने उससे वो चेन ले ली। फिर उसके कंधे पकडकर उसे खड़ा होने का इशारा किया। उसके खड़ा होते ही मैंने उससे आई लव यू टू कहकर किस कर लिया।
कुछ ही देर बाद में रेलवे स्टेशन के एक सुनसान इलाके पर खडी थी। मुझसे थोडी थोडी दूरी पर कुछ और लडकियाँ भी खडी हुईँ थी। मैं जानती थी कि वो सब कॉलगर्ल हैं। चूँकि मैं पहले भी वहाँ आ चुकी थी। इसलिए मुझे अच्छी तरह से पता था कि मुझे कस्टमर को लेकर कहाँ जाना है। कुछ ही देर में मेरे पास दो लडके आ गए। रेट तय करने के बाद हम लोग रेलवे यार्ड की तरफ चले।
मैं उनको उसी ट्रेन के डिब्बे में ले गई, जिसमें पहले भी चुदवा चुकी थी। अंदर जाते ही वो दोनों लडके एक साथ मुझपर टूठ पडे और जल्द ही मेरी चुदाई शुरू हो गई। मैं कुतिया बनी हुई थी और एक लड़का पीछे से मेरी चूदाई कर रहा था। जबकि मैं दूसरे लडके का लण्ड चूसकर उसे मजे दे रही थी। करीब 20 मिनट बाद ही दोनों लडके झर गए और मुझे पैसे देकर वहाँ से चले गए। उन दोनों लडकों को सेटिस्फाई करने बाद मैं फिर से अपनी जगह पर आकर खडी हो गई।
इस बार भी मुझे ज्यादा इंतजार नहीं करना पडा और मुझे फिर से नया ग्राहक मिल गया। इस तरह करते करते मैं सुबह के 4 बजे तक करीब 7-8 लोगों से चुदवा चुकी थी। जिस कारण अब मैं काफी थक गई थी और अपने होटल रूम में बापिस जाकर रेस्ट करने का डिसाईड कर चुकी थी। जैसे भी मेरा आखिरी कस्टमर मुझे चोदकर गया तो मैंने जल्दी से अपने कपडे पहने और जैसे ही उस डिब्बे से बाहर निकली तो 4 भिखारी जिन्होंने फटे पुराने कपडे पहने हुए थे और देखने में काफी गंदे दिखाई दे रहे थे। वो बाहर मिल गये।
शायद वो रेलवे स्टेशन के बाहर भीख माँगते थे और काफी देर से मुझे अलग अलग लोगों के साथ वहाँ आते जाते देख रहे थे। उन चारों की उम्र करीब 50-60 के आस पास होगी। मुझे उन्हें देखकर काफी ज्यादा घिन आ रही थी। इसलिए मैं चुपचाप वहाँ से जाने लगी। लेकिन तभी उन्होंने मुझे पकड लिया और मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करने लगे। मैं उन चारों से चुदवाना नहीं चाहती थी। इसलिए मैं काफी देर तक उनसे छूटने की कोशिश करती रही।
पर वो चार थे और मैं अकेली, इसलिए मैं उनका कुछ नहीं कर पाई। लेकिन जब बो चारों मुझे जबरदस्ती उसी डिब्बे में ले गए और मेरे कपडे उतारने की कोशिश करने लगे, तो मैंने सोचा कि अगर ज्यादा विरोध किया तो ये चारों मेरे कपडे फाड देंगे। जिसके बाद मैं होटल बापिस नहीं जा पाऊंगी। इसलिए मैंने खुद ही चुपचाप अपने कपडे उतार दिए। जिसके बाद तो वो चारों भूखे भेडियों की तरह एक साथ मुझ पर टूट पडे। मैंने उनका काफी विरोध किया पर वो नहीं माने। तभी उनमें से एक भिखारी ने मुझे कुतिया बनाकर मेरी चूत में अपना लण्ड घुसा दिया और मेरी चुदाई करने लगा।
अब मैं कुछ नहीं कर सकती थी। एक दो बार मैंने उससे अलग होने की कोशिश की तो उसने मेरी गाँड पर थप्पड लगाने शुरू कर दिए, जिस कारण मैंने उससे अलग होने की कोशिश बंद कर दी। तभी अचानक एक भिखारी ने अपना लण्ड मेरे मुँह की तरफ कर दिया। उसके लण्ड से बहुत गंदी स्मैल आ रही थी। इसलिए मैंने अपना मूँह दूसरी तरफ कर दिया, तो वो गुस्से में मेरे गालों पर थप्पड मारने लगा और उसके साथ साथ मेरी चुदाई करने बाला भिखारी भी मेरी गांड पर थप्पड मारने लगा। जिस कारण मुझे काफी दर्द हो रहा था।
इसलिए मजबूरी में मैने उस भिखारी का लण्ड अपने मूँह में लिया और चूसने लगी। मुझे ऐसा लग रहा था कि वे चारों मिलकर मेरा गैंग रेप कर रहे हैं। लेकिन मैं शोर मचाकर किसी को अपनी मदद के लिए ना तो बुला सकती थी और ना ही बाद में किसी को इस बारे में कुछ बता सकती थी। क्योंकि स्टेशन के आस पास के लोग मुझे एक रण्डी के रूप में अच्छी तरह से पहचानने लगे थे, और अगर कोई रण्डी कहे कि उसके साथ रेप हुआ है तो कोई भी उसकी बात पर यकीन नहीं करेगा।
उल्टा शोर मचाने से और भी ज्यादा लोगों के वहाँ आने का डर था, जो शायद मुझे बचाने की जगह मेरे साथ मजे करना चाहें। अब मुझे अपनी इस स्थिती पर बहुत गंदा फील हो रहा था और रोना भी आ रहा था। वो भिखारी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाऐ और 10-15 मिनट में ही उन्होंने अपना पानी छोड दिया। उनके अलग होते ही बाकी के दोनों भिखारी भी मेरे ऊपर सबार हो गए और मेरी चुदाई करने लगे। ये दोनों भी ज्यादा देर तक नहीं टिके और जल्द ही ठण्डे होकर वहाँ से चले गए।
मैं कुछ देर तक वहीँ बैठी अपनी स्थिती के बारे में सोचती रही। मुझे अपनी हालत पर बहुत रोना आ रहा था। तभी अचानक मेरी नजर वहाँ पास में पडे एक थैले पर गई। जो मैंने उन भिखारियों में से एक के पास देखा था। पता नहीं उस वक्त मुझे क्या सूझा जो मैंने उस थैले को उठाया और खोलकर देखा तो उसमें 5 लडकों बाले बॉलेट और 2 लेडिज पर्स रखे हुए थे। मैंने एक एक करके सभी को चैक किया, तो उनके अंदर काफी ज्यादा पैसा रखा हुआ था। साथ ही साथ लेडीज पर्श में कुछ सोने के गहने भी रखे हुए थे। उन्हें देखकर मैंने मन ही मन सोचा
“अरे पागल क्यों रो रही है। जब तू इतने लोगों से चुदवा चुकी है तो इन भिखारियों से चुदने में क्या बुराई है। इसे तू रेप की तरह मत देख, बस यह सोच की वो तेरे कस्टमर थे और तुझे रेप करने की एक्टिंग करनी थी। अब तू जिस धंधे में मजे ले रही है, उसमें कई अलग अलग प्रकार के लोग मिलेंगे। तो तू बुरा मानने की जगह बस मजे कर। बैसे भी गलती से ही सही वो भिखारी तुझे पैसे तो देकर ही गए है और उन लोगों से कई गुना ज्यादा देकर गए हैं, जिनसे तूने अपनी मर्जी से चुदाई करवाई है।”
यह सब सोचते ही मेरे अंदर आ रही गंदी सी फीलिंग खत्म हो गई और मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आ गई। मैंने जल्दी से वो सारे पैसे और गहने अपने पर्श में रखे और फिर अपने कपडे पहनकर वहाँ से निकल गई। इस बार मेरी किस्मत अच्छी थी कि मुझे कोई और नहीं मिला और ना ही वो भिखारी अपना थैला ढूँडते हुए वहाँ आये। मैं उस रेलवे यार्ड से निकलकर सीधे अपने होटल की तरफ बड गई। अपने रूम में जाकर मैं सबसे बाथरूम में जाकर फ्रैस हुई, और गर्म-गर्म पानी से नहाया।
गर्म गर्म पानी से अपने बदन को अच्छी तरह साफ करने के बाद मैं कपडे पहनकर बाथरूम से बाहर आ गई और फिर अपना लैपटॉप चैक करने लगी। गगन के मोबाईल का डाटा अभी भी पूरा ट्रांशफर नहीं हुआ था। इसलिए मैंने एक नजर घडी पर डाली सुबह के 5 बज चुके थे। इसलिए मैंने अपना लैपटॉप बापिस रखा और कंबल ओड कर सो गई। दोपहर करीब 11 बजे जब मेरी आँख खुली तो मैंने सबसे पहले रूम सर्विस पर कॉल किया। पिछले चार दिनों में मेरे काफी कपडे गंदे हो गए थे। जिन्हें लाऊंड्री में भिजवाना था। मेरे कॉल करने कुछ ही देर बाद रूम सर्विस बाला आ गया।
उसने सबसे पहले कमरे की और बाथरूम की अच्छे से सफाई। इस दौरान वो नजरें बाचाकर बार बार मुझे ही देखे जा रहा था। मैं पिछले चार दिन से उस आदमी को नोटिस कर रही थी। वो 23-24 साल का एक लडका था। जो देखने में तो काफी हैंडसम था, साथ ही साथ उसका शरीर भी अच्छा खासा गठीला था। मुझे तो वो कहीं से भी कोई रूम सर्विस बाला नहीं लग रहा था। पर फिर भी रूम सर्विस के लिए मेरे पास हर बार यही लडका आता था।
जबकि होटल में कई सारे स्टाफ मेम्बर थे। लेकिन पहले दिन जबसे इसने मुझे मात्र कैमिसोल और पैंटी में देखा था। तब से मेरे रूम में हर काम के लिए केवल यही आता था और नजरें बचाकर मेरे शरीर को निहारता रहता था। आज भी मैंने बाकी दिनों की तरह मात्र एक कैमिसोल और पेंटी पहनी हुई थी। तो मैंने मन ही मन सोचा क्यों ना थोडा इसके साथ मस्ती करूँ। इसलिए मैं उससे बोली
निशा- ये मिस्टर क्या नाम है तुम्हारा
वो लडका थोडा हडबडाकर बोला
“ज जी रघु“
उस लडके की बात सुनकर मैंने अपनी एक आईब्रो ऊपर करते हुए उसका नाम दोहराया
निशा- रघु हुम्म…
मेरे यूँ उसे देखने से रघू को लगा कि मुझे उसकी बात पर यकीन नहीं हो रहा है। इसलिे वो एक बार फिर हकलता हुए बोला
रघु- म मतलब राघवेन्द्र शर्मा… असल में रघु मेरा निकनेम है।
निशा- तो मिस्टर राघवेन्द्र उर्फ रघु मैं इतने दिनों से देख रहीं हूँ कि तुम जब भी यहाँ आते हो तो बस मुझे ही देखते रहते हो और हर बार तुम्हीं क्यों आते हो। बाकी का स्टॉफ भी तो है ना यहाँ
रघु- व वो असल में आपके रूम की सारी जिम्मेदारी मेरी है
निशा- और मुझे चुपके चुपके देखने का क्या मतलब है
मेरी बात सुनकर उसके चेहरे पर ऐसे भाव थे, जैसे मैंने उसकी कोई चोरी पकड ली हो। इसलिए वो हडबडाते हुए बोला
रघु- न नहीं तो… व वो आपको कोई गलत फहमी हो गई होगी
रघु की बात सुनकर मुझे हंसी आ रही थी। इसलिए मैं विस्तर से उठकर एक दम उसके पास चली गई और बोली
निशा- अच्छा तो यह बात है। मुझे तो लगा था शायद मैं तुम्हें पसंद हूँ। इसलिए तुम मुझे ऐसे चुपके चुपके देखते रहते हो। बैसे अगर ऐसा कुछ है तो बता सकते हो। मैं बुरा नहीं मानूंगी और ना ही किसी से कहूँगी
मेरी बात सुनकर शायद रघु को थोडी हिम्मत मिली। इसलिए वो बोला
रघु- अ आप सच में बहुत खूबसूरत हो... बिल्कुल किसी हीरोइन जैसी। तो पसंद तो सबको ही आओगी ना
निशा- और तुम्हें
रघु- मुझे भी मैम साहब
निशा- मैम साहब नहीं… मेरा नाम सपना नाम है
रघु- ज जी सपना मैम
निशा- अरे इतना डर क्यों रहे हो। मैं कोई खा थोडी ही जाऊँगी। बैसे एक बात बताओ मुझे देखकर तुम्हारे मन में क्या ख्याल आता है।
मेरी बात सुनकर रघु एकबार फिर हडबडाते हुए बोला
रघु- वो वो कुछ नहीं… कुछ भी तो नहीं….
रघु की बात सुनकर मैं उसके एकदम पास पहुँच गई और उसके एक हाथ को अपनी कमर पर ऱखते हुए बोली
निशा- सच मैं.... क्या मुझे छूने का मन नहीं करता तुम्हारा
मैं इस वक्त अपनी कमर पर रघु का हाथ कांपता हुआ महसूस कर रही थी। मुझे लगा कि उसे और हिम्मत की आवश्यक्ता है इसलिए मैंने उसका दूसरा हाथ भी अपनी कमर पर रख दिया। जिसके बाद बो कांपती आवाज में बोला
रघु- ज जी हाँ सपना जी… मुझे आपको छूने का बहुत मन करता है
निशा- और
रघु- और आपको किस करने का भी मन करता है
रघु की बाद सुनकर मैंने अपने होंठ एकदम उसके होंठों के पास कर दिये और फिर बोली
निशा- और
रघु- और आपको बहुत सारा प्यार करने का मन भी करता है
निशा- कैसे प्यार करने का मन करता है
मेरे उसके इतने करीब जाने से वो पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और उसके अंदर का डर पूरी तरह से दूर हो चुका है। एक तरह से वो पूरी तरह से भूल चुका था कि वो कहाँ है और क्या करने आया है। इसलिए वो बिना किसी डर के वोला
रघु- आपको अपनी बाहों में भरकर चूमने का मन करता है। आपके पूरे बदन को चूमने और सहलाने का मन करता है
निशा- और
रघु- और आपके साथ सब कुछ करने का मन करता है
निशा- सब कुछ क्या
रघु- वो वो स सेक्स करने का मन करता है
निशा- मेरी अब तक शादी नहीं हुई है और ना ही कोई बॉयफ्रेंड है। तुम मुझे पहली नजर में ही पसंद पसंद आ गए थे। तभी तो मैं हर रोज केबल तुम्हारे लिए ऐसे कपडे पहनती हूँ। ताकि तुम मुझसे अपने प्यार का इजहार करो और मुझे ढेर सारा प्यार करो
मेरी बात सुनकर रघु तो जैसे खुशी से पागल ही हो गया। उसे तो उम्मीद ही नहीं थी कि मैं उसे ऐसा ऑफर भी दे सकती हूँ। हालाँकि मेरा ऐसा कुछ भी करने का कोई इरादा नहीं था। मैं तो बस उसके मजे ले रही थी और उसे थोडा खुश करना चाहती थी। ताकि अगर मुझे किसी काम की जरूरत पडे, तो वो मेरी हेल्प कर सके। बैसे तो मेरी मदद करने के लिए रवि और असलम थे, पर पता नहीं क्यों मुझे लग रहा था कि रघु भी बहुत काम का आदमी हो सकता है। मेरी बात सुनकर रघु खुश होते हुए बोला
रघु- तो क्या आप सच में मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी
निशा- अगर तुम मुझे प्रपोज करो तो मैं इस बारे में सोच सकती हूँ
मेरी बात सुनकर रघु ने तुरंत मेरे होंठो पर एक लाईट किस किया और बोला
रघु- अ आई लव यू सपना जी
रघु की इस हरकत पर मैं हंसते हुए बोली
निशा- धत् ऐसे भला कौन प्रपोज करता है।
मेरी बात सुनकर रघु थोडा उदास होते हुए बोला
रघु- तो फिर कैसे करते हैं
निशा- ओफ्हो तुम्हें तो कुछ भी नहीं पता, चलो मैं ही बताती हूँ। सबसे पहले अपने घुटनों के बल बैठो और कोई गिफ्ट मुझे देकर आई लव यू बोलो
मेरी बात सुनकर रघु कुछ देर सोचता रहा और फिर मुझे छोडकर बाहर जाने लगा तो मैंने उसे टोका
निशा- अरे कहाँ जा रहे हो। मुझे कोई गिफ्ट नहीं चाहिए तुम तो बस ऐसे ही मुझे प्रपोज कर दो
पर उसने मेरी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और बोला
रघु- एक मिनट सपना जी…. मैं बस अभी आया
इतना बोलकर वो कमरे से बाहर चला गया और सच में वो कुछ ही देर में बापिस भी आ गया। पर काफी लम्बी लम्बी सांसे ले रहा था। जिसे देखकर मैं समझ गई कि वो पक्का वो भागता हुआ गया था और भागता हुआ ही बापिस आया है। कुछ देर लम्बी लम्बी सांसे लेने के बाद जब वो थोडा रिलेक्स हुआ तो वो मेरे पास आया और अपने घुटनों के बल बैठकर एक गोल्ड की चेन, जिसमें एक डायमण्ड पेंडेंट भी लगा हुआ था, वो मुझे देते हुए बोला
रघु- आई लव यू सपना जी
मैंने वो चेन अपने हाथों में लेकर चैक की, तो वो मुझे असली गोल्ड की लग रही थी। उसे देखकर मैं हैरानी से बोली
निशा- ये कहाँ से लाए तुम
रघु- वो वो कुछ दिन पहले एक कस्टमर अपने रूम में छोड गई थी। इसलिए मैंने अपने पास संभालकर रखी हुई थी।
रघू की बात सुनकर मैं गुस्से में उसे घूरते हुए बोली
निशा- सच सच बताओ कहीं तुमने चोरी बगैरह तो नहीं की है ना
मेरे सबाल पर रघु तुरंत अपने एक हाथ से अपने गले को पिंच करते हुए बोला
रघु- अपनी अम्मा की कसम खाता हूँ सपना जी… मैंने कोई चोरी नहीं की है
रघू की बात सुनकर मुझे उसपर पूरा यकीन हो गया था। पर मैं उससे वो चेन नहीं ले सकती थी। क्योंकि वो काफी कीमती लग रही थी और जैसी हालत रघु की थी, उस हिसाब से मुझे पूरा यकीन था कि उसे इस वक्त पैसों की काफी जरूरत होगी। इसलिए मैं वो चेन उसे बापिस करते हुए बोली
निशा- नहीं रघू… मैं ये नहीं ले सकती हूँ। यह बहुत मंहगी लगती है। इसलिए यह तुम्हारे बहुत काम आयेगी
मेरी बात सुनकर रघु बोला
रघु- मैंम सहाब इस दुनिया में मेरा अब कोई नहीं है। गरीब आदमी हूँ, खाने पीने का सारा जुगाड होटल से हो जाता है। तो मैं भला इसका क्या करूँगा। बैसे भी अगर मैं इसे कहीं बेचने गया तो पक्का लोग मुझे चोर समझेंगे। इससे अच्छा है कि यह मैं आपको ही दे दूँ। अब आप सच में मुझे पसंद करती हैं या मेरे साथ केबल मजाक कर रहीं हैं। मैं नहीं जानता, पर मैं आपको पक्का बहुत ज्यादा प्यार करने लगा हूँ। प्लीज मना मत करना।
रघु की बात सुनकर मुझे उस पर दया आ गई, इसलिए मैंने उससे वो चेन ले ली। फिर उसके कंधे पकडकर उसे खड़ा होने का इशारा किया। उसके खड़ा होते ही मैंने उससे आई लव यू टू कहकर किस कर लिया।
Update 018 -
जैसे ही मैंने रघु को किस किया तो उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मुझे चुमने लगा और मेरे पूरे शरीर को अपने हाथों से सहलाने लगा। मुझे इसमें काफी मजा आ रहा था। इसलिए मैं भी उसका पूरा साथ दे रही थी। उसने मेरे कैमिसोल को ऊपर करके मेरे बूब्स को चुमना और मेरे निप्पलस को चूसना शुरू कर दिया था। जिस कारण मेरे अंदर वासना बडने लगी। पर मैं अभी चुदवाने के बिल्कुल मूड में नहीं थी। इसलिए बोली
निशा- नहीं रघु अभी नहीं…. यह सब हम बाद में करेंगे
रघु- बस कुछ देर सपना जी… पक्का मैं आपको बस चूमूँगा और सहलाऊँगा, बाकि कुछ भी नहीं करूँगा। तब तक तो बिल्कुल भी नहीं, जब तक आप खुद नहीं कहेंगी।
रघु की बात सुनकर मैंने उसे नहीं रोका। जिसके बाद रघु ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरी पेंटी नीचे खिसकाकर मेरी चूत चाटने लगा। मेरी चूत तो पहले से ही पानी छोड रही थी। कुछ देर उसके चाटने के बाद ही मैं झर गई। जिसके बाद रघु मुझसे अलग हो गया और जाने लगा तो मैंने उसका हाथ पकडकर रोक दिया। मुझसे प्यार करने के चक्कर में रघु भी कुछ ज्यादा ही एक्साईटेड हो गया था। जिस कारण उसका लण्ड पेंट के बाहर से भी साफ साफ दिखाई दे रहा था। मैंने अपने एक हाथ से उसके लण्ड को पकडा और बोली
निशा- ऐसे बाहर जाओगे तो सब को पता चल जाऐगा कि कमरे में कुछ गडबड हुई है। और तुम्हारा भी मन काम में नहीं लगेगा। रुको मैं इसे शांत करने में तुम्हारी हेल्प करती हूँ।
इतना बोलकर मैंने उसे दीवार से सटाकर खड़ा किया और उसके पेंट खोलकर उसका तना हुआ लण्ड बाहर निकला लिया। जो काफी बड़ा और मोटा था। इसके बाद मैं घुटनों के बल नीचे बैठ गई और उसे ब्लोजॉब देने लगी। रघु तो जैसे मजे के सातवें आसमान में पहूँच गया था। काफी देर तक उसको ब्लोजॉब देन का बाद अखिरकार वो भी झर गया। मैं उसका सारा पानी निगल गई और उसका लण्ड चाट चाट कर साफ कर दिया। अब तक मैं कई बार और कई लोगों को ब्लोजॉब दे चुकी थी। जिस कारण मुझे भी यह काम अच्छा लगने लगा था और बीर्य का टेस्ट भी मुझे अब अच्छा लगने लगा था। जब मैंने अपना काम कर दिया तो खडी हो गई। जिसके बाद ऱघु बोला
रघु- थैंक्स सपना जी... आज तक मुझे इतना मजा किसी ने नहीं दिया है और अभी तक तो हमने ज्यादा कुछ किया ही नहीं है।
रघू की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली
निशा- कोई बात नहीं… हम जल्द ही वो सब भी करेंगे। तुम अपना नम्बर दे दो मुझे।
मेरी बात सुनकर रघु ने अपना मोबाईल नम्बर मुझे दे दिया और मेरा नम्बर भी अपने मोबाईल में सेब कर लिया। उसके बाद मैंने उसे अपने कपडे धुलबाने के लिए लाऊंड्री बाले को देने के लिए कहा। तो वो खुशी खुशी मेरे कपडे लेकर चला गया। रघु के जाने के बाद मैंने भी अपने कपडे चेंज किए और ऑटो पकडकर पुलिस हेटक्वाटर पहूँच गई। वहाँ जाकर मुझे अली ट्रेलर की दुकान ढूँडने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। क्योंकि उसका काम केवल पुलिस यूनिफार्म सिलने का ही था। उसके पास जाकर मैंने उससे कहा
निशा- मुझे असलम ने आपके पास भेजा है
असलम का नाम सुनकर उसने मुझे एक गहरी नजर से देखा और फिर बोला
अली- अंदर बाले केविन में चलो मैं आता हूँ
असलम की बात सुनकर मैं चुपचाप उसकी दुकान के अंदर बाले केविन में चली गई। थोडी ही देर बाद अली भी अंदर आ गया और बोला
अली- अपने कपडे निकालो
अली की बात सुनकर मैं हैरानी से उसे देखने लगी और फिर बोली
निशा- क्या.... पर क्यों
अली- चिंता मत करो मैं कुछ नहीं करूँगा। मुझे बस तुम्हारा नाप लेना है। परफेक्ट फिटिंग के लिए
बैसे तो इतने सारे लोगों के सामने नंगे होने के बाद अब मुझे किसी के भी सामने कपडे उतारने में कोई शर्म नहीं रह गई थी। पर पुलिस हैडक्वाटर के पास एक 50-60 साल के आदमी के सामने कपडे उतारने में मुझे कुछ अजीब लग रहा था। पर फिर भी मैंने बिना किसी झिझक के आपने कपडे उतार दिए। मैं जैसे ही अपनी ब्रा और पेंटी उतारने लगी तो उसने मुझे रोकते हुए कहा
अली- इन्हें उतारने की जरूरत नहीं है
अली की बात सुनकर मैं रुक गई और चुपचाप खडी हो गई। जिसके बाद अली मेरा नाप लेने लगा। नाप लेने के बहाने बो मेरे पूरे शरीर को अच्छी तरह छूकर महसूस भी कर रहा था। मुझे अब इसमें मजा अने लगा था। जब अली ने अच्छी तरह से मेरा नाप ले लिया तो वो मुझे कपडे पहने की बोलकर बाहर आ गया। जिसके बाद मैंने जल्दी से अपने कपडे पहने और बाहर आ गई। मेरे बाहर आते ही उसने मेरा नाम पूछा तो मैंने उसे अपना नाम उसे बता दिया फिर उसने मेरा नाम बिल बुक में लिखा और बोला
अली- कम्प्लीट ड्रेस चाहिए या केबल यूनिफार्म
अली की बात सुनकर मैं थोडा कन्फ्यूज होते हुए बोली
निशा- मैं कुछ समझी नहीं
अली- मेरा मतलब है कि यूनिफार्म के साथ स्टार, नेमप्लेट बगैरह भी लगेगें, इसके अलावा पुलिस कैप, बैल्ट और शू भी साथ होंगे। तो अपको सब कम्पलीट करवाना है या केबल यूनिफार्म ही सिलवाना है।
अली की बात सुनकर मैंने सोचा कि बाकी का सामान कहां से खरीदती फिरूँगी, इसलिए मैंने कहा
निशा- कम्पलीट चाहिए
मेरी बात सुनकर अली बोला
अली- तो फिर अपने शू का नम्बर बता दो
जिसके बाद मैंने उसे अपने शू का नम्बर भी उसे बता दिया, जो उसने एक डायरी में नोट कर लिया और एक बिल मुझे देते हुए बोला
अली- शाम को 5 बजे के बाद ले जाना
मैं हैरानी से उसकी तरफ देखते हुए बोली
निशा- इतनी जल्दी
अली- अगर तुम एक लड़का होती तो मैं 1 घंटे में दे सकता था। लेकिन तुम्हारी यूनिफार्म में मुझे थोडी ज्यादा मेहनत करनी पडेगी।
अली की बात सुनकर मैंने एक नजर बिल पर डाली तो उसमें पेंमेंट के साथ नीचे लिखा हुआ था पेड बाय असलम भाई। मैं समझ गई कि इस बिल का पेमेंट असलम ही करेगा। तो मुझे कोई चिंता नहीं थी। इसलिए मैं वहाँ से सीधे अपने होटल रूम में आ गई। जिसके बाद मैंने अपना लैपटॉप चैक किया तो उसमें सारा डाटा ट्रांशफर हो चुका था। अभी मैं उसे देखने ही बाली थी कि तभी मेरा पर्सनल मोबाईल फोन रिंग होने लगा। जब मैं अपना पर्सनल मोबाईल चेक किया, तो उसमें मेरे बॉस का फोन आ रहा था। मैंने जैसे ही उनका फोन रिशीव किया तो दूसरी तरफ से आबाज आई
बॉस- कहाँ बिजी हो गई थी मिस निशा, आपने अब तक वहाँ की कोई रिपोर्ट भी नहीं भेजी है
निशा- सॉरी सर मैं बस आपको कॉल करने ही बाली थी।
बॉस- क्या रहा। प्राब्लम सॉल्ब हुई या नहीं
निशा- हाँ सर हो गई है। साथ साथ मैंने यहाँ के सर्वर और बाकि सिस्टम के हार्डवेयर भी अपग्रेड करवा दिए हैं। ताकि आगे चलकर कोई प्राब्लम ना आऐ
बॉस- गुड तो फिर कब बापिस आ रही हो
निशा- सर मैं सोच रही थी की एक दो दिन यहाँ अच्छी तरह से आब्जर्व कर लूँ तो ठीक रहेगा। क्योंकि अगर मेरे बापिस आने के बाद फिर से कोई प्राब्लम आई, तो फिर किसी ना किसी यहाँ आना पडेगा। बैसे भी मेरे टूर के हिसाब से 3 दिन अभी बाकी हैं।
मेरी बात सुनकर बॉस खुश होते हुए बोले
बॉस- गुड डिसीजन, लेकिन अब तुम 3 दिन बाद बापिस नहीं आ सकती हो
बॉस की बात सुनकर मैं थोडा हैरान होते हुए बोली
निशा- मतलब
बॉस- मतलब अभी तुम्हें 1-2 हफ्ता और वहाँ रूकना पडेगा
निशा- लेकिन क्यों सर
बॉस- एम.पी. में ही 2-3 लोकेशन और हैं, जहाँ पर कुछ प्राब्लम्स आ रहीं हैं। इसलिए मैं चाहता हूँ कि जब तुम वहाँ हो, तो उन्हें भी तुम हैण्डल कर लो, और हाँ तुम्हें 2-3 दिन के लिए इंदौर भी जाना पडेगा। वहाँ हमारी नई ब्रांच का काम चल रहा है। मैं चाहता हूँ कि तुम वहाँ जाकर एक बार बिजिट कर लो और अचछी तरह से ऑडिट करके वहाँ की प्रोग्रेस रिपोर्ट भी हमें भेज देना।
निशा- लेकिन सर
बॉस- क्यों क्या हुआ.. कोई प्रॉब्लम है क्या
निशा- नहीं नहीं प्राब्लम तो कुछ नहीं है… मैं तो बस सोच रही थी कि अपना यह टूर पूरा करके मैं कुछ दिनों की छुट्टियाँ ले लूँ। आप तो जानते ही हैं कि मैंने इस साल एक भी छुट्टी नहीं ली है।
मेरी बात सुनकर बॉस मुझे समझाते हुए बोले
बॉस- ओफ्हो निशा… तुम ऐ कैसी बच्चों जैसी बातें कर रही हो। यहाँ मैं तुम्हें प्रमोट करने के बारे में सोच रहा हूँ और तुम छुट्टियों की चिंता कर रही हो। बैसे भी तुम्हारे हसबैंड तो आउट ऑफ इण्डिया है। फिर छुट्टियाँ किसके साथ सैलीब्रेट करोगी। हसबैंड के आने के बाद ले लेना छुट्टियाँ, मैं मना नहीं करूँगा। बैसे भी मैंने इस बार तुम्हारा नाम इम्प्लॉई ऑफ द ईयर के लिए पैनल के पास भेजा है।
बॉस की बात सुनकर मैंने कहा
निशा- थैंक्यू सो मच सर… लेकिन मुझे बाकई में कुछ दिनों के रेस्ट की आवश्यक्ता है।
बॉस- निशा तुम मेरी बात समझ क्यों नहीं रही हो। अच्छा कितने दिनों का रेस्ट चाहिए
निशा- सर वो वो मैं 1 महिने का प्लान कर रही थी। पर अगर आप 2 हफ्ता भी दे दें तो मैं मैनेज कर लूँगी
बॉस- लेकिन इतने दिनों के लिए छुट्टी लेने की क्या जरूरत है, वो तो मैं ऐसे ही मैनेज करवा दूँगा
निशा- मतलब
बॉस- देखो तुम अभी 2-3 दिन लगभग फ्री हो और मैं तुम्हारे नये टास्ट के हिसाब से 2 हफ्ते का टूर बडाने के बारे में सोच ही रहा था। बैसे तो मैं जानता हूँ कि इन सभी कामों को करने के लिए तुम्हारे लिए 1 हफ्ता ही काफी है। क्योंकि तुम कुछ ज्यादा ही वर्कोहॉलिक हो। पर अब मैं तुम्हारा टूर इस पूरे महिने के लिए फिक्स कर देता हूँ। आज 2 नबंबर है, तुम्हारे पास पूरे 28 दिन हैं, सारे टास्क कम्पलीट करने के लिए। इससे तुम्हारे वर्क रिपोर्ट में कोई लीव भी एड नहीं होगी। जिस कारण इम्पलॉई ऑफ द इयर की लिस्ट में इस साल पहली बार कोई लड़की टॉप पर होगी और तुम अपने सारे काम जल्दी से फिनिस करके छुटियों के मजे भी ले लेना। बैसे एम.पी. में बहुत सारी जगह हैं घूमने फिरने के लिए। तो बोलो मंजूर है
मुझे अपने बॉस का यह आईडिया पसंद आ गया था। बैसे भी मैं छुटियाँ लेकर बापिस भोपल आकर इजॉय करने का प्लान कर रही थी। जिसका मौका बॉस ने पहले से ही मुझे दे दिया था। बैसे भी मैं यहाँ 28 अक्टूबर को आई थी और आज 2 नबंबर है। 4 को मैं बापिस जाने बाली थी। उसकी जगह अब मुझे 30 को बापिस जाना है। यानि अब भी पूरे 28 दिन हैं मेरे पास मजे करने के लिए और फिर मुझे तो मजे बस रात में करने करने हैं। इसलिए दिन में मैं अपने बाकी काम आसानी निपटा लूँगी। बैसे भी टूर पर होने के कारण रेगुलर ऑफिश की तरह वर्क प्लेस पर जाने के लिए कोई टाईम बाऊंडेसन भी नहीं होता है। इसलिए मैंने तुरंत बॉस से कहा
निशा- जी सर… जैसा आपको ठीक लगे। मैं रेडी हूँ
मेरी बात सुनकर बॉस खुश होते हुए बोले
बॉस- तो फिर ठीक है… मैं तुम्हारे होटल की बुकिंग इस पूरे महिने के लिए बड़ा रहा हूँ। बाकी आने जाने का तुम अपने हिसाब से मैनेज कर लेना और बिल अकाउन्टेंड के पास जमा कर देना। तुम्हें टी.ए. एण्ड डी.ए. सैलरी के साथ रिफंड हो जाऐगा।
बॉस की बात सुनकर मैं खुश होते हुए बोली
निशा- जी सर
बास- तो फिर ठीक है… तुम्हें वहां पर कौन कौन से काम करने हैं, मैं उनकी डिटेल तुम्हें मेल कर देता हूँ। तुम अपने हिसाब से मैनेज करके मुझे रिपोर्ट भेज देना।
निशा- जी सर
इसके बाद बॉस ने फोन कट कर दिया। जिसके बाद मैं अपनी आँखें बंद करके आगे का प्लान बनाने लगी। आज सुबह मेरे साथ उन भिखारियों ने जो कुछ किया था, उससे मैं थोडा डर गई थी। इसलिए मैंने दोबारा रेलवे स्टेशन पर जाने क प्लान पूरी तरह से कैंसिल कर दिया था। बैसे भी असलम तो मुझे क्लाईंट देने ही बाला था और मेरे कुछ दूसरे क्लाईंटस ने भी मेरा नम्बर ले लिया था। जो मुझे कम से कम 1-2 बार कॉल जरूर करेंगे। इसके अलाबा रवि और रघु भी लाईन में लगे हुए थे। जिनके साथ तो मैं अब कभी भी मजे ले सकती थी।
मैं अभी यह सब सोच ही रही थी कि तभी मुझे गगन के मोबाईल के डाटा के बारे में याद आया, तो मैं उसे चैक करने लगी। गगन के मोबाईल में कई सारी लडकियों के पोर्न बीडियो थे, जो उसने उन्हें ड्रग देकर बनाए थे। वो सारी लडकियों मुझे कॉलेज स्टूडेंट लग रहीं थी। उन्हीं बीडियो में से एक बीडियो रश्मि का भी था। इसके अलाबा उसमें कई लडकियों के न्यूड फोटो भी थे। इन सबको अच्छी तरह से चैक करने के बाद मैने सोचा कि क्यों ना रवि से इस सब लडकियों के बारे में जानकारी ली जाऐ। इसलिए मैंने बिना देर किए रवि को कॉल कर के होटल में बुला लिया। उसे आने में अभी समय लगने बाला था। इसलिए मैंने अपना बीडियों दूसरे फोल्डर में ट्रांशफर करके प्ले कर दिया।
मैं असल में सेक्स के दौरान अपने फेश रियेक्सन देखना चाहती थी। पर कुछ देर ही बीडियो देखने के बाद मैं उत्तेजित हो गई और मेरा मन चुदने का करने लगा। तो मैंने डिसाईड किया कि आज तो रवि से अपना उद्घाटन करवा ही लेती हूँ। बाकी जो होगा देखा जाऐगा। पर अगले ही पल मुझे याद आया कि आज तो मुझे यहाँ के डी.जी.पी. के यहाँ जाना है। इसलिए अगर अभी रवि से चुदवा लिया तो रात तक मेरी चूत फिर से पूरी तरह से टाईट नहीं हो पायेगी।
जिस कारण मैंने आज रवि से चुदने का प्लान कैंसिल कर दिया और बस थोडी बहुत मस्ती करके, घूमने फिरने का प्रोग्राम मन ही मन सेट कर लिया।
कुछ ही देर बाद में रेलवे स्टेशन के एक सुनसान इलाके पर खडी थी। मुझसे थोडी थोडी दूरी पर कुछ और लडकियाँ भी खडी हुईँ थी। मैं जानती थी कि वो सब कॉलगर्ल हैं। चूँकि मैं पहले भी वहाँ आ चुकी थी। इसलिए मुझे अच्छी तरह से पता था कि मुझे कस्टमर को लेकर कहाँ जाना है। कुछ ही देर में मेरे पास दो लडके आ गए। रेट तय करने के बाद हम लोग रेलवे यार्ड की तरफ चले।
मैं उनको उसी ट्रेन के डिब्बे में ले गई, जिसमें पहले भी चुदवा चुकी थी। अंदर जाते ही वो दोनों लडके एक साथ मुझपर टूठ पडे और जल्द ही मेरी चुदाई शुरू हो गई। मैं कुतिया बनी हुई थी और एक लड़का पीछे से मेरी चूदाई कर रहा था। जबकि मैं दूसरे लडके का लण्ड चूसकर उसे मजे दे रही थी। करीब 20 मिनट बाद ही दोनों लडके झर गए और मुझे पैसे देकर वहाँ से चले गए। उन दोनों लडकों को सेटिस्फाई करने बाद मैं फिर से अपनी जगह पर आकर खडी हो गई।
इस बार भी मुझे ज्यादा इंतजार नहीं करना पडा और मुझे फिर से नया ग्राहक मिल गया। इस तरह करते करते मैं सुबह के 4 बजे तक करीब 7-8 लोगों से चुदवा चुकी थी। जिस कारण अब मैं काफी थक गई थी और अपने होटल रूम में बापिस जाकर रेस्ट करने का डिसाईड कर चुकी थी। जैसे भी मेरा आखिरी कस्टमर मुझे चोदकर गया तो मैंने जल्दी से अपने कपडे पहने और जैसे ही उस डिब्बे से बाहर निकली तो 4 भिखारी जिन्होंने फटे पुराने कपडे पहने हुए थे और देखने में काफी गंदे दिखाई दे रहे थे। वो बाहर मिल गये।
शायद वो रेलवे स्टेशन के बाहर भीख माँगते थे और काफी देर से मुझे अलग अलग लोगों के साथ वहाँ आते जाते देख रहे थे। उन चारों की उम्र करीब 50-60 के आस पास होगी। मुझे उन्हें देखकर काफी ज्यादा घिन आ रही थी। इसलिए मैं चुपचाप वहाँ से जाने लगी। लेकिन तभी उन्होंने मुझे पकड लिया और मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करने लगे। मैं उन चारों से चुदवाना नहीं चाहती थी। इसलिए मैं काफी देर तक उनसे छूटने की कोशिश करती रही।
पर वो चार थे और मैं अकेली, इसलिए मैं उनका कुछ नहीं कर पाई। लेकिन जब बो चारों मुझे जबरदस्ती उसी डिब्बे में ले गए और मेरे कपडे उतारने की कोशिश करने लगे, तो मैंने सोचा कि अगर ज्यादा विरोध किया तो ये चारों मेरे कपडे फाड देंगे। जिसके बाद मैं होटल बापिस नहीं जा पाऊंगी। इसलिए मैंने खुद ही चुपचाप अपने कपडे उतार दिए। जिसके बाद तो वो चारों भूखे भेडियों की तरह एक साथ मुझ पर टूट पडे। मैंने उनका काफी विरोध किया पर वो नहीं माने। तभी उनमें से एक भिखारी ने मुझे कुतिया बनाकर मेरी चूत में अपना लण्ड घुसा दिया और मेरी चुदाई करने लगा।
अब मैं कुछ नहीं कर सकती थी। एक दो बार मैंने उससे अलग होने की कोशिश की तो उसने मेरी गाँड पर थप्पड लगाने शुरू कर दिए, जिस कारण मैंने उससे अलग होने की कोशिश बंद कर दी। तभी अचानक एक भिखारी ने अपना लण्ड मेरे मुँह की तरफ कर दिया। उसके लण्ड से बहुत गंदी स्मैल आ रही थी। इसलिए मैंने अपना मूँह दूसरी तरफ कर दिया, तो वो गुस्से में मेरे गालों पर थप्पड मारने लगा और उसके साथ साथ मेरी चुदाई करने बाला भिखारी भी मेरी गांड पर थप्पड मारने लगा। जिस कारण मुझे काफी दर्द हो रहा था।
इसलिए मजबूरी में मैने उस भिखारी का लण्ड अपने मूँह में लिया और चूसने लगी। मुझे ऐसा लग रहा था कि वे चारों मिलकर मेरा गैंग रेप कर रहे हैं। लेकिन मैं शोर मचाकर किसी को अपनी मदद के लिए ना तो बुला सकती थी और ना ही बाद में किसी को इस बारे में कुछ बता सकती थी। क्योंकि स्टेशन के आस पास के लोग मुझे एक रण्डी के रूप में अच्छी तरह से पहचानने लगे थे, और अगर कोई रण्डी कहे कि उसके साथ रेप हुआ है तो कोई भी उसकी बात पर यकीन नहीं करेगा।
उल्टा शोर मचाने से और भी ज्यादा लोगों के वहाँ आने का डर था, जो शायद मुझे बचाने की जगह मेरे साथ मजे करना चाहें। अब मुझे अपनी इस स्थिती पर बहुत गंदा फील हो रहा था और रोना भी आ रहा था। वो भिखारी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाऐ और 10-15 मिनट में ही उन्होंने अपना पानी छोड दिया। उनके अलग होते ही बाकी के दोनों भिखारी भी मेरे ऊपर सबार हो गए और मेरी चुदाई करने लगे। ये दोनों भी ज्यादा देर तक नहीं टिके और जल्द ही ठण्डे होकर वहाँ से चले गए।
मैं कुछ देर तक वहीँ बैठी अपनी स्थिती के बारे में सोचती रही। मुझे अपनी हालत पर बहुत रोना आ रहा था। तभी अचानक मेरी नजर वहाँ पास में पडे एक थैले पर गई। जो मैंने उन भिखारियों में से एक के पास देखा था। पता नहीं उस वक्त मुझे क्या सूझा जो मैंने उस थैले को उठाया और खोलकर देखा तो उसमें 5 लडकों बाले बॉलेट और 2 लेडिज पर्स रखे हुए थे। मैंने एक एक करके सभी को चैक किया, तो उनके अंदर काफी ज्यादा पैसा रखा हुआ था। साथ ही साथ लेडीज पर्श में कुछ सोने के गहने भी रखे हुए थे। उन्हें देखकर मैंने मन ही मन सोचा
“अरे पागल क्यों रो रही है। जब तू इतने लोगों से चुदवा चुकी है तो इन भिखारियों से चुदने में क्या बुराई है। इसे तू रेप की तरह मत देख, बस यह सोच की वो तेरे कस्टमर थे और तुझे रेप करने की एक्टिंग करनी थी। अब तू जिस धंधे में मजे ले रही है, उसमें कई अलग अलग प्रकार के लोग मिलेंगे। तो तू बुरा मानने की जगह बस मजे कर। बैसे भी गलती से ही सही वो भिखारी तुझे पैसे तो देकर ही गए है और उन लोगों से कई गुना ज्यादा देकर गए हैं, जिनसे तूने अपनी मर्जी से चुदाई करवाई है।”
यह सब सोचते ही मेरे अंदर आ रही गंदी सी फीलिंग खत्म हो गई और मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आ गई। मैंने जल्दी से वो सारे पैसे और गहने अपने पर्श में रखे और फिर अपने कपडे पहनकर वहाँ से निकल गई। इस बार मेरी किस्मत अच्छी थी कि मुझे कोई और नहीं मिला और ना ही वो भिखारी अपना थैला ढूँडते हुए वहाँ आये। मैं उस रेलवे यार्ड से निकलकर सीधे अपने होटल की तरफ बड गई। अपने रूम में जाकर मैं सबसे बाथरूम में जाकर फ्रैस हुई, और गर्म-गर्म पानी से नहाया।
गर्म गर्म पानी से अपने बदन को अच्छी तरह साफ करने के बाद मैं कपडे पहनकर बाथरूम से बाहर आ गई और फिर अपना लैपटॉप चैक करने लगी। गगन के मोबाईल का डाटा अभी भी पूरा ट्रांशफर नहीं हुआ था। इसलिए मैंने एक नजर घडी पर डाली सुबह के 5 बज चुके थे। इसलिए मैंने अपना लैपटॉप बापिस रखा और कंबल ओड कर सो गई। दोपहर करीब 11 बजे जब मेरी आँख खुली तो मैंने सबसे पहले रूम सर्विस पर कॉल किया। पिछले चार दिनों में मेरे काफी कपडे गंदे हो गए थे। जिन्हें लाऊंड्री में भिजवाना था। मेरे कॉल करने कुछ ही देर बाद रूम सर्विस बाला आ गया।
उसने सबसे पहले कमरे की और बाथरूम की अच्छे से सफाई। इस दौरान वो नजरें बाचाकर बार बार मुझे ही देखे जा रहा था। मैं पिछले चार दिन से उस आदमी को नोटिस कर रही थी। वो 23-24 साल का एक लडका था। जो देखने में तो काफी हैंडसम था, साथ ही साथ उसका शरीर भी अच्छा खासा गठीला था। मुझे तो वो कहीं से भी कोई रूम सर्विस बाला नहीं लग रहा था। पर फिर भी रूम सर्विस के लिए मेरे पास हर बार यही लडका आता था।
जबकि होटल में कई सारे स्टाफ मेम्बर थे। लेकिन पहले दिन जबसे इसने मुझे मात्र कैमिसोल और पैंटी में देखा था। तब से मेरे रूम में हर काम के लिए केवल यही आता था और नजरें बचाकर मेरे शरीर को निहारता रहता था। आज भी मैंने बाकी दिनों की तरह मात्र एक कैमिसोल और पेंटी पहनी हुई थी। तो मैंने मन ही मन सोचा क्यों ना थोडा इसके साथ मस्ती करूँ। इसलिए मैं उससे बोली
निशा- ये मिस्टर क्या नाम है तुम्हारा
वो लडका थोडा हडबडाकर बोला
“ज जी रघु“
उस लडके की बात सुनकर मैंने अपनी एक आईब्रो ऊपर करते हुए उसका नाम दोहराया
निशा- रघु हुम्म…
मेरे यूँ उसे देखने से रघू को लगा कि मुझे उसकी बात पर यकीन नहीं हो रहा है। इसलिे वो एक बार फिर हकलता हुए बोला
रघु- म मतलब राघवेन्द्र शर्मा… असल में रघु मेरा निकनेम है।
निशा- तो मिस्टर राघवेन्द्र उर्फ रघु मैं इतने दिनों से देख रहीं हूँ कि तुम जब भी यहाँ आते हो तो बस मुझे ही देखते रहते हो और हर बार तुम्हीं क्यों आते हो। बाकी का स्टॉफ भी तो है ना यहाँ
रघु- व वो असल में आपके रूम की सारी जिम्मेदारी मेरी है
निशा- और मुझे चुपके चुपके देखने का क्या मतलब है
मेरी बात सुनकर उसके चेहरे पर ऐसे भाव थे, जैसे मैंने उसकी कोई चोरी पकड ली हो। इसलिए वो हडबडाते हुए बोला
रघु- न नहीं तो… व वो आपको कोई गलत फहमी हो गई होगी
रघु की बात सुनकर मुझे हंसी आ रही थी। इसलिए मैं विस्तर से उठकर एक दम उसके पास चली गई और बोली
निशा- अच्छा तो यह बात है। मुझे तो लगा था शायद मैं तुम्हें पसंद हूँ। इसलिए तुम मुझे ऐसे चुपके चुपके देखते रहते हो। बैसे अगर ऐसा कुछ है तो बता सकते हो। मैं बुरा नहीं मानूंगी और ना ही किसी से कहूँगी
मेरी बात सुनकर शायद रघु को थोडी हिम्मत मिली। इसलिए वो बोला
रघु- अ आप सच में बहुत खूबसूरत हो... बिल्कुल किसी हीरोइन जैसी। तो पसंद तो सबको ही आओगी ना
निशा- और तुम्हें
रघु- मुझे भी मैम साहब
निशा- मैम साहब नहीं… मेरा नाम सपना नाम है
रघु- ज जी सपना मैम
निशा- अरे इतना डर क्यों रहे हो। मैं कोई खा थोडी ही जाऊँगी। बैसे एक बात बताओ मुझे देखकर तुम्हारे मन में क्या ख्याल आता है।
मेरी बात सुनकर रघु एकबार फिर हडबडाते हुए बोला
रघु- वो वो कुछ नहीं… कुछ भी तो नहीं….
रघु की बात सुनकर मैं उसके एकदम पास पहुँच गई और उसके एक हाथ को अपनी कमर पर ऱखते हुए बोली
निशा- सच मैं.... क्या मुझे छूने का मन नहीं करता तुम्हारा
मैं इस वक्त अपनी कमर पर रघु का हाथ कांपता हुआ महसूस कर रही थी। मुझे लगा कि उसे और हिम्मत की आवश्यक्ता है इसलिए मैंने उसका दूसरा हाथ भी अपनी कमर पर रख दिया। जिसके बाद बो कांपती आवाज में बोला
रघु- ज जी हाँ सपना जी… मुझे आपको छूने का बहुत मन करता है
निशा- और
रघु- और आपको किस करने का भी मन करता है
रघु की बाद सुनकर मैंने अपने होंठ एकदम उसके होंठों के पास कर दिये और फिर बोली
निशा- और
रघु- और आपको बहुत सारा प्यार करने का मन भी करता है
निशा- कैसे प्यार करने का मन करता है
मेरे उसके इतने करीब जाने से वो पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और उसके अंदर का डर पूरी तरह से दूर हो चुका है। एक तरह से वो पूरी तरह से भूल चुका था कि वो कहाँ है और क्या करने आया है। इसलिए वो बिना किसी डर के वोला
रघु- आपको अपनी बाहों में भरकर चूमने का मन करता है। आपके पूरे बदन को चूमने और सहलाने का मन करता है
निशा- और
रघु- और आपके साथ सब कुछ करने का मन करता है
निशा- सब कुछ क्या
रघु- वो वो स सेक्स करने का मन करता है
निशा- मेरी अब तक शादी नहीं हुई है और ना ही कोई बॉयफ्रेंड है। तुम मुझे पहली नजर में ही पसंद पसंद आ गए थे। तभी तो मैं हर रोज केबल तुम्हारे लिए ऐसे कपडे पहनती हूँ। ताकि तुम मुझसे अपने प्यार का इजहार करो और मुझे ढेर सारा प्यार करो
मेरी बात सुनकर रघु तो जैसे खुशी से पागल ही हो गया। उसे तो उम्मीद ही नहीं थी कि मैं उसे ऐसा ऑफर भी दे सकती हूँ। हालाँकि मेरा ऐसा कुछ भी करने का कोई इरादा नहीं था। मैं तो बस उसके मजे ले रही थी और उसे थोडा खुश करना चाहती थी। ताकि अगर मुझे किसी काम की जरूरत पडे, तो वो मेरी हेल्प कर सके। बैसे तो मेरी मदद करने के लिए रवि और असलम थे, पर पता नहीं क्यों मुझे लग रहा था कि रघु भी बहुत काम का आदमी हो सकता है। मेरी बात सुनकर रघु खुश होते हुए बोला
रघु- तो क्या आप सच में मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी
निशा- अगर तुम मुझे प्रपोज करो तो मैं इस बारे में सोच सकती हूँ
मेरी बात सुनकर रघु ने तुरंत मेरे होंठो पर एक लाईट किस किया और बोला
रघु- अ आई लव यू सपना जी
रघु की इस हरकत पर मैं हंसते हुए बोली
निशा- धत् ऐसे भला कौन प्रपोज करता है।
मेरी बात सुनकर रघु थोडा उदास होते हुए बोला
रघु- तो फिर कैसे करते हैं
निशा- ओफ्हो तुम्हें तो कुछ भी नहीं पता, चलो मैं ही बताती हूँ। सबसे पहले अपने घुटनों के बल बैठो और कोई गिफ्ट मुझे देकर आई लव यू बोलो
मेरी बात सुनकर रघु कुछ देर सोचता रहा और फिर मुझे छोडकर बाहर जाने लगा तो मैंने उसे टोका
निशा- अरे कहाँ जा रहे हो। मुझे कोई गिफ्ट नहीं चाहिए तुम तो बस ऐसे ही मुझे प्रपोज कर दो
पर उसने मेरी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और बोला
रघु- एक मिनट सपना जी…. मैं बस अभी आया
इतना बोलकर वो कमरे से बाहर चला गया और सच में वो कुछ ही देर में बापिस भी आ गया। पर काफी लम्बी लम्बी सांसे ले रहा था। जिसे देखकर मैं समझ गई कि वो पक्का वो भागता हुआ गया था और भागता हुआ ही बापिस आया है। कुछ देर लम्बी लम्बी सांसे लेने के बाद जब वो थोडा रिलेक्स हुआ तो वो मेरे पास आया और अपने घुटनों के बल बैठकर एक गोल्ड की चेन, जिसमें एक डायमण्ड पेंडेंट भी लगा हुआ था, वो मुझे देते हुए बोला
रघु- आई लव यू सपना जी
मैंने वो चेन अपने हाथों में लेकर चैक की, तो वो मुझे असली गोल्ड की लग रही थी। उसे देखकर मैं हैरानी से बोली
निशा- ये कहाँ से लाए तुम
रघु- वो वो कुछ दिन पहले एक कस्टमर अपने रूम में छोड गई थी। इसलिए मैंने अपने पास संभालकर रखी हुई थी।
रघू की बात सुनकर मैं गुस्से में उसे घूरते हुए बोली
निशा- सच सच बताओ कहीं तुमने चोरी बगैरह तो नहीं की है ना
मेरे सबाल पर रघु तुरंत अपने एक हाथ से अपने गले को पिंच करते हुए बोला
रघु- अपनी अम्मा की कसम खाता हूँ सपना जी… मैंने कोई चोरी नहीं की है
रघू की बात सुनकर मुझे उसपर पूरा यकीन हो गया था। पर मैं उससे वो चेन नहीं ले सकती थी। क्योंकि वो काफी कीमती लग रही थी और जैसी हालत रघु की थी, उस हिसाब से मुझे पूरा यकीन था कि उसे इस वक्त पैसों की काफी जरूरत होगी। इसलिए मैं वो चेन उसे बापिस करते हुए बोली
निशा- नहीं रघू… मैं ये नहीं ले सकती हूँ। यह बहुत मंहगी लगती है। इसलिए यह तुम्हारे बहुत काम आयेगी
मेरी बात सुनकर रघु बोला
रघु- मैंम सहाब इस दुनिया में मेरा अब कोई नहीं है। गरीब आदमी हूँ, खाने पीने का सारा जुगाड होटल से हो जाता है। तो मैं भला इसका क्या करूँगा। बैसे भी अगर मैं इसे कहीं बेचने गया तो पक्का लोग मुझे चोर समझेंगे। इससे अच्छा है कि यह मैं आपको ही दे दूँ। अब आप सच में मुझे पसंद करती हैं या मेरे साथ केबल मजाक कर रहीं हैं। मैं नहीं जानता, पर मैं आपको पक्का बहुत ज्यादा प्यार करने लगा हूँ। प्लीज मना मत करना।
रघु की बात सुनकर मुझे उस पर दया आ गई, इसलिए मैंने उससे वो चेन ले ली। फिर उसके कंधे पकडकर उसे खड़ा होने का इशारा किया। उसके खड़ा होते ही मैंने उससे आई लव यू टू कहकर किस कर लिया।
जैसे ही मैंने रघु को किस किया तो उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मुझे चुमने लगा और मेरे पूरे शरीर को अपने हाथों से सहलाने लगा। मुझे इसमें काफी मजा आ रहा था। इसलिए मैं भी उसका पूरा साथ दे रही थी। उसने मेरे कैमिसोल को ऊपर करके मेरे बूब्स को चुमना और मेरे निप्पलस को चूसना शुरू कर दिया था। जिस कारण मेरे अंदर वासना बडने लगी। पर मैं अभी चुदवाने के बिल्कुल मूड में नहीं थी। इसलिए बोली
निशा- नहीं रघु अभी नहीं…. यह सब हम बाद में करेंगे
रघु- बस कुछ देर सपना जी… पक्का मैं आपको बस चूमूँगा और सहलाऊँगा, बाकि कुछ भी नहीं करूँगा। तब तक तो बिल्कुल भी नहीं, जब तक आप खुद नहीं कहेंगी।
रघु की बात सुनकर मैंने उसे नहीं रोका। जिसके बाद रघु ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरी पेंटी नीचे खिसकाकर मेरी चूत चाटने लगा। मेरी चूत तो पहले से ही पानी छोड रही थी। कुछ देर उसके चाटने के बाद ही मैं झर गई। जिसके बाद रघु मुझसे अलग हो गया और जाने लगा तो मैंने उसका हाथ पकडकर रोक दिया। मुझसे प्यार करने के चक्कर में रघु भी कुछ ज्यादा ही एक्साईटेड हो गया था। जिस कारण उसका लण्ड पेंट के बाहर से भी साफ साफ दिखाई दे रहा था। मैंने अपने एक हाथ से उसके लण्ड को पकडा और बोली
निशा- ऐसे बाहर जाओगे तो सब को पता चल जाऐगा कि कमरे में कुछ गडबड हुई है। और तुम्हारा भी मन काम में नहीं लगेगा। रुको मैं इसे शांत करने में तुम्हारी हेल्प करती हूँ।
इतना बोलकर मैंने उसे दीवार से सटाकर खड़ा किया और उसके पेंट खोलकर उसका तना हुआ लण्ड बाहर निकला लिया। जो काफी बड़ा और मोटा था। इसके बाद मैं घुटनों के बल नीचे बैठ गई और उसे ब्लोजॉब देने लगी। रघु तो जैसे मजे के सातवें आसमान में पहूँच गया था। काफी देर तक उसको ब्लोजॉब देन का बाद अखिरकार वो भी झर गया। मैं उसका सारा पानी निगल गई और उसका लण्ड चाट चाट कर साफ कर दिया। अब तक मैं कई बार और कई लोगों को ब्लोजॉब दे चुकी थी। जिस कारण मुझे भी यह काम अच्छा लगने लगा था और बीर्य का टेस्ट भी मुझे अब अच्छा लगने लगा था। जब मैंने अपना काम कर दिया तो खडी हो गई। जिसके बाद ऱघु बोला
रघु- थैंक्स सपना जी... आज तक मुझे इतना मजा किसी ने नहीं दिया है और अभी तक तो हमने ज्यादा कुछ किया ही नहीं है।
रघू की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली
निशा- कोई बात नहीं… हम जल्द ही वो सब भी करेंगे। तुम अपना नम्बर दे दो मुझे।
मेरी बात सुनकर रघु ने अपना मोबाईल नम्बर मुझे दे दिया और मेरा नम्बर भी अपने मोबाईल में सेब कर लिया। उसके बाद मैंने उसे अपने कपडे धुलबाने के लिए लाऊंड्री बाले को देने के लिए कहा। तो वो खुशी खुशी मेरे कपडे लेकर चला गया। रघु के जाने के बाद मैंने भी अपने कपडे चेंज किए और ऑटो पकडकर पुलिस हेटक्वाटर पहूँच गई। वहाँ जाकर मुझे अली ट्रेलर की दुकान ढूँडने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। क्योंकि उसका काम केवल पुलिस यूनिफार्म सिलने का ही था। उसके पास जाकर मैंने उससे कहा
निशा- मुझे असलम ने आपके पास भेजा है
असलम का नाम सुनकर उसने मुझे एक गहरी नजर से देखा और फिर बोला
अली- अंदर बाले केविन में चलो मैं आता हूँ
असलम की बात सुनकर मैं चुपचाप उसकी दुकान के अंदर बाले केविन में चली गई। थोडी ही देर बाद अली भी अंदर आ गया और बोला
अली- अपने कपडे निकालो
अली की बात सुनकर मैं हैरानी से उसे देखने लगी और फिर बोली
निशा- क्या.... पर क्यों
अली- चिंता मत करो मैं कुछ नहीं करूँगा। मुझे बस तुम्हारा नाप लेना है। परफेक्ट फिटिंग के लिए
बैसे तो इतने सारे लोगों के सामने नंगे होने के बाद अब मुझे किसी के भी सामने कपडे उतारने में कोई शर्म नहीं रह गई थी। पर पुलिस हैडक्वाटर के पास एक 50-60 साल के आदमी के सामने कपडे उतारने में मुझे कुछ अजीब लग रहा था। पर फिर भी मैंने बिना किसी झिझक के आपने कपडे उतार दिए। मैं जैसे ही अपनी ब्रा और पेंटी उतारने लगी तो उसने मुझे रोकते हुए कहा
अली- इन्हें उतारने की जरूरत नहीं है
अली की बात सुनकर मैं रुक गई और चुपचाप खडी हो गई। जिसके बाद अली मेरा नाप लेने लगा। नाप लेने के बहाने बो मेरे पूरे शरीर को अच्छी तरह छूकर महसूस भी कर रहा था। मुझे अब इसमें मजा अने लगा था। जब अली ने अच्छी तरह से मेरा नाप ले लिया तो वो मुझे कपडे पहने की बोलकर बाहर आ गया। जिसके बाद मैंने जल्दी से अपने कपडे पहने और बाहर आ गई। मेरे बाहर आते ही उसने मेरा नाम पूछा तो मैंने उसे अपना नाम उसे बता दिया फिर उसने मेरा नाम बिल बुक में लिखा और बोला
अली- कम्प्लीट ड्रेस चाहिए या केबल यूनिफार्म
अली की बात सुनकर मैं थोडा कन्फ्यूज होते हुए बोली
निशा- मैं कुछ समझी नहीं
अली- मेरा मतलब है कि यूनिफार्म के साथ स्टार, नेमप्लेट बगैरह भी लगेगें, इसके अलावा पुलिस कैप, बैल्ट और शू भी साथ होंगे। तो अपको सब कम्पलीट करवाना है या केबल यूनिफार्म ही सिलवाना है।
अली की बात सुनकर मैंने सोचा कि बाकी का सामान कहां से खरीदती फिरूँगी, इसलिए मैंने कहा
निशा- कम्पलीट चाहिए
मेरी बात सुनकर अली बोला
अली- तो फिर अपने शू का नम्बर बता दो
जिसके बाद मैंने उसे अपने शू का नम्बर भी उसे बता दिया, जो उसने एक डायरी में नोट कर लिया और एक बिल मुझे देते हुए बोला
अली- शाम को 5 बजे के बाद ले जाना
मैं हैरानी से उसकी तरफ देखते हुए बोली
निशा- इतनी जल्दी
अली- अगर तुम एक लड़का होती तो मैं 1 घंटे में दे सकता था। लेकिन तुम्हारी यूनिफार्म में मुझे थोडी ज्यादा मेहनत करनी पडेगी।
अली की बात सुनकर मैंने एक नजर बिल पर डाली तो उसमें पेंमेंट के साथ नीचे लिखा हुआ था पेड बाय असलम भाई। मैं समझ गई कि इस बिल का पेमेंट असलम ही करेगा। तो मुझे कोई चिंता नहीं थी। इसलिए मैं वहाँ से सीधे अपने होटल रूम में आ गई। जिसके बाद मैंने अपना लैपटॉप चैक किया तो उसमें सारा डाटा ट्रांशफर हो चुका था। अभी मैं उसे देखने ही बाली थी कि तभी मेरा पर्सनल मोबाईल फोन रिंग होने लगा। जब मैं अपना पर्सनल मोबाईल चेक किया, तो उसमें मेरे बॉस का फोन आ रहा था। मैंने जैसे ही उनका फोन रिशीव किया तो दूसरी तरफ से आबाज आई
बॉस- कहाँ बिजी हो गई थी मिस निशा, आपने अब तक वहाँ की कोई रिपोर्ट भी नहीं भेजी है
निशा- सॉरी सर मैं बस आपको कॉल करने ही बाली थी।
बॉस- क्या रहा। प्राब्लम सॉल्ब हुई या नहीं
निशा- हाँ सर हो गई है। साथ साथ मैंने यहाँ के सर्वर और बाकि सिस्टम के हार्डवेयर भी अपग्रेड करवा दिए हैं। ताकि आगे चलकर कोई प्राब्लम ना आऐ
बॉस- गुड तो फिर कब बापिस आ रही हो
निशा- सर मैं सोच रही थी की एक दो दिन यहाँ अच्छी तरह से आब्जर्व कर लूँ तो ठीक रहेगा। क्योंकि अगर मेरे बापिस आने के बाद फिर से कोई प्राब्लम आई, तो फिर किसी ना किसी यहाँ आना पडेगा। बैसे भी मेरे टूर के हिसाब से 3 दिन अभी बाकी हैं।
मेरी बात सुनकर बॉस खुश होते हुए बोले
बॉस- गुड डिसीजन, लेकिन अब तुम 3 दिन बाद बापिस नहीं आ सकती हो
बॉस की बात सुनकर मैं थोडा हैरान होते हुए बोली
निशा- मतलब
बॉस- मतलब अभी तुम्हें 1-2 हफ्ता और वहाँ रूकना पडेगा
निशा- लेकिन क्यों सर
बॉस- एम.पी. में ही 2-3 लोकेशन और हैं, जहाँ पर कुछ प्राब्लम्स आ रहीं हैं। इसलिए मैं चाहता हूँ कि जब तुम वहाँ हो, तो उन्हें भी तुम हैण्डल कर लो, और हाँ तुम्हें 2-3 दिन के लिए इंदौर भी जाना पडेगा। वहाँ हमारी नई ब्रांच का काम चल रहा है। मैं चाहता हूँ कि तुम वहाँ जाकर एक बार बिजिट कर लो और अचछी तरह से ऑडिट करके वहाँ की प्रोग्रेस रिपोर्ट भी हमें भेज देना।
निशा- लेकिन सर
बॉस- क्यों क्या हुआ.. कोई प्रॉब्लम है क्या
निशा- नहीं नहीं प्राब्लम तो कुछ नहीं है… मैं तो बस सोच रही थी कि अपना यह टूर पूरा करके मैं कुछ दिनों की छुट्टियाँ ले लूँ। आप तो जानते ही हैं कि मैंने इस साल एक भी छुट्टी नहीं ली है।
मेरी बात सुनकर बॉस मुझे समझाते हुए बोले
बॉस- ओफ्हो निशा… तुम ऐ कैसी बच्चों जैसी बातें कर रही हो। यहाँ मैं तुम्हें प्रमोट करने के बारे में सोच रहा हूँ और तुम छुट्टियों की चिंता कर रही हो। बैसे भी तुम्हारे हसबैंड तो आउट ऑफ इण्डिया है। फिर छुट्टियाँ किसके साथ सैलीब्रेट करोगी। हसबैंड के आने के बाद ले लेना छुट्टियाँ, मैं मना नहीं करूँगा। बैसे भी मैंने इस बार तुम्हारा नाम इम्प्लॉई ऑफ द ईयर के लिए पैनल के पास भेजा है।
बॉस की बात सुनकर मैंने कहा
निशा- थैंक्यू सो मच सर… लेकिन मुझे बाकई में कुछ दिनों के रेस्ट की आवश्यक्ता है।
बॉस- निशा तुम मेरी बात समझ क्यों नहीं रही हो। अच्छा कितने दिनों का रेस्ट चाहिए
निशा- सर वो वो मैं 1 महिने का प्लान कर रही थी। पर अगर आप 2 हफ्ता भी दे दें तो मैं मैनेज कर लूँगी
बॉस- लेकिन इतने दिनों के लिए छुट्टी लेने की क्या जरूरत है, वो तो मैं ऐसे ही मैनेज करवा दूँगा
निशा- मतलब
बॉस- देखो तुम अभी 2-3 दिन लगभग फ्री हो और मैं तुम्हारे नये टास्ट के हिसाब से 2 हफ्ते का टूर बडाने के बारे में सोच ही रहा था। बैसे तो मैं जानता हूँ कि इन सभी कामों को करने के लिए तुम्हारे लिए 1 हफ्ता ही काफी है। क्योंकि तुम कुछ ज्यादा ही वर्कोहॉलिक हो। पर अब मैं तुम्हारा टूर इस पूरे महिने के लिए फिक्स कर देता हूँ। आज 2 नबंबर है, तुम्हारे पास पूरे 28 दिन हैं, सारे टास्क कम्पलीट करने के लिए। इससे तुम्हारे वर्क रिपोर्ट में कोई लीव भी एड नहीं होगी। जिस कारण इम्पलॉई ऑफ द इयर की लिस्ट में इस साल पहली बार कोई लड़की टॉप पर होगी और तुम अपने सारे काम जल्दी से फिनिस करके छुटियों के मजे भी ले लेना। बैसे एम.पी. में बहुत सारी जगह हैं घूमने फिरने के लिए। तो बोलो मंजूर है
मुझे अपने बॉस का यह आईडिया पसंद आ गया था। बैसे भी मैं छुटियाँ लेकर बापिस भोपल आकर इजॉय करने का प्लान कर रही थी। जिसका मौका बॉस ने पहले से ही मुझे दे दिया था। बैसे भी मैं यहाँ 28 अक्टूबर को आई थी और आज 2 नबंबर है। 4 को मैं बापिस जाने बाली थी। उसकी जगह अब मुझे 30 को बापिस जाना है। यानि अब भी पूरे 28 दिन हैं मेरे पास मजे करने के लिए और फिर मुझे तो मजे बस रात में करने करने हैं। इसलिए दिन में मैं अपने बाकी काम आसानी निपटा लूँगी। बैसे भी टूर पर होने के कारण रेगुलर ऑफिश की तरह वर्क प्लेस पर जाने के लिए कोई टाईम बाऊंडेसन भी नहीं होता है। इसलिए मैंने तुरंत बॉस से कहा
निशा- जी सर… जैसा आपको ठीक लगे। मैं रेडी हूँ
मेरी बात सुनकर बॉस खुश होते हुए बोले
बॉस- तो फिर ठीक है… मैं तुम्हारे होटल की बुकिंग इस पूरे महिने के लिए बड़ा रहा हूँ। बाकी आने जाने का तुम अपने हिसाब से मैनेज कर लेना और बिल अकाउन्टेंड के पास जमा कर देना। तुम्हें टी.ए. एण्ड डी.ए. सैलरी के साथ रिफंड हो जाऐगा।
बॉस की बात सुनकर मैं खुश होते हुए बोली
निशा- जी सर
बास- तो फिर ठीक है… तुम्हें वहां पर कौन कौन से काम करने हैं, मैं उनकी डिटेल तुम्हें मेल कर देता हूँ। तुम अपने हिसाब से मैनेज करके मुझे रिपोर्ट भेज देना।
निशा- जी सर
इसके बाद बॉस ने फोन कट कर दिया। जिसके बाद मैं अपनी आँखें बंद करके आगे का प्लान बनाने लगी। आज सुबह मेरे साथ उन भिखारियों ने जो कुछ किया था, उससे मैं थोडा डर गई थी। इसलिए मैंने दोबारा रेलवे स्टेशन पर जाने क प्लान पूरी तरह से कैंसिल कर दिया था। बैसे भी असलम तो मुझे क्लाईंट देने ही बाला था और मेरे कुछ दूसरे क्लाईंटस ने भी मेरा नम्बर ले लिया था। जो मुझे कम से कम 1-2 बार कॉल जरूर करेंगे। इसके अलाबा रवि और रघु भी लाईन में लगे हुए थे। जिनके साथ तो मैं अब कभी भी मजे ले सकती थी।
मैं अभी यह सब सोच ही रही थी कि तभी मुझे गगन के मोबाईल के डाटा के बारे में याद आया, तो मैं उसे चैक करने लगी। गगन के मोबाईल में कई सारी लडकियों के पोर्न बीडियो थे, जो उसने उन्हें ड्रग देकर बनाए थे। वो सारी लडकियों मुझे कॉलेज स्टूडेंट लग रहीं थी। उन्हीं बीडियो में से एक बीडियो रश्मि का भी था। इसके अलाबा उसमें कई लडकियों के न्यूड फोटो भी थे। इन सबको अच्छी तरह से चैक करने के बाद मैने सोचा कि क्यों ना रवि से इस सब लडकियों के बारे में जानकारी ली जाऐ। इसलिए मैंने बिना देर किए रवि को कॉल कर के होटल में बुला लिया। उसे आने में अभी समय लगने बाला था। इसलिए मैंने अपना बीडियों दूसरे फोल्डर में ट्रांशफर करके प्ले कर दिया।
मैं असल में सेक्स के दौरान अपने फेश रियेक्सन देखना चाहती थी। पर कुछ देर ही बीडियो देखने के बाद मैं उत्तेजित हो गई और मेरा मन चुदने का करने लगा। तो मैंने डिसाईड किया कि आज तो रवि से अपना उद्घाटन करवा ही लेती हूँ। बाकी जो होगा देखा जाऐगा। पर अगले ही पल मुझे याद आया कि आज तो मुझे यहाँ के डी.जी.पी. के यहाँ जाना है। इसलिए अगर अभी रवि से चुदवा लिया तो रात तक मेरी चूत फिर से पूरी तरह से टाईट नहीं हो पायेगी।
जिस कारण मैंने आज रवि से चुदने का प्लान कैंसिल कर दिया और बस थोडी बहुत मस्ती करके, घूमने फिरने का प्रोग्राम मन ही मन सेट कर लिया।
जैसे ही मैंने रघु को किस किया तो उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मुझे चुमने लगा और मेरे पूरे शरीर को अपने हाथों से सहलाने लगा। मुझे इसमें काफी मजा आ रहा था। इसलिए मैं भी उसका पूरा साथ दे रही थी। उसने मेरे कैमिसोल को ऊपर करके मेरे बूब्स को चुमना और मेरे निप्पलस को चूसना शुरू कर दिया था। जिस कारण मेरे अंदर वासना बडने लगी। पर मैं अभी चुदवाने के बिल्कुल मूड में नहीं थी। इसलिए बोली
निशा- नहीं रघु अभी नहीं…. यह सब हम बाद में करेंगे
रघु- बस कुछ देर सपना जी… पक्का मैं आपको बस चूमूँगा और सहलाऊँगा, बाकि कुछ भी नहीं करूँगा। तब तक तो बिल्कुल भी नहीं, जब तक आप खुद नहीं कहेंगी।
रघु की बात सुनकर मैंने उसे नहीं रोका। जिसके बाद रघु ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरी पेंटी नीचे खिसकाकर मेरी चूत चाटने लगा। मेरी चूत तो पहले से ही पानी छोड रही थी। कुछ देर उसके चाटने के बाद ही मैं झर गई। जिसके बाद रघु मुझसे अलग हो गया और जाने लगा तो मैंने उसका हाथ पकडकर रोक दिया। मुझसे प्यार करने के चक्कर में रघु भी कुछ ज्यादा ही एक्साईटेड हो गया था। जिस कारण उसका लण्ड पेंट के बाहर से भी साफ साफ दिखाई दे रहा था। मैंने अपने एक हाथ से उसके लण्ड को पकडा और बोली
निशा- ऐसे बाहर जाओगे तो सब को पता चल जाऐगा कि कमरे में कुछ गडबड हुई है। और तुम्हारा भी मन काम में नहीं लगेगा। रुको मैं इसे शांत करने में तुम्हारी हेल्प करती हूँ।
इतना बोलकर मैंने उसे दीवार से सटाकर खड़ा किया और उसके पेंट खोलकर उसका तना हुआ लण्ड बाहर निकला लिया। जो काफी बड़ा और मोटा था। इसके बाद मैं घुटनों के बल नीचे बैठ गई और उसे ब्लोजॉब देने लगी। रघु तो जैसे मजे के सातवें आसमान में पहूँच गया था। काफी देर तक उसको ब्लोजॉब देन का बाद अखिरकार वो भी झर गया। मैं उसका सारा पानी निगल गई और उसका लण्ड चाट चाट कर साफ कर दिया। अब तक मैं कई बार और कई लोगों को ब्लोजॉब दे चुकी थी। जिस कारण मुझे भी यह काम अच्छा लगने लगा था और बीर्य का टेस्ट भी मुझे अब अच्छा लगने लगा था। जब मैंने अपना काम कर दिया तो खडी हो गई। जिसके बाद ऱघु बोला
रघु- थैंक्स सपना जी... आज तक मुझे इतना मजा किसी ने नहीं दिया है और अभी तक तो हमने ज्यादा कुछ किया ही नहीं है।
रघू की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली
निशा- कोई बात नहीं… हम जल्द ही वो सब भी करेंगे। तुम अपना नम्बर दे दो मुझे।
मेरी बात सुनकर रघु ने अपना मोबाईल नम्बर मुझे दे दिया और मेरा नम्बर भी अपने मोबाईल में सेब कर लिया। उसके बाद मैंने उसे अपने कपडे धुलबाने के लिए लाऊंड्री बाले को देने के लिए कहा। तो वो खुशी खुशी मेरे कपडे लेकर चला गया। रघु के जाने के बाद मैंने भी अपने कपडे चेंज किए और ऑटो पकडकर पुलिस हेटक्वाटर पहूँच गई। वहाँ जाकर मुझे अली ट्रेलर की दुकान ढूँडने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। क्योंकि उसका काम केवल पुलिस यूनिफार्म सिलने का ही था। उसके पास जाकर मैंने उससे कहा
निशा- मुझे असलम ने आपके पास भेजा है
असलम का नाम सुनकर उसने मुझे एक गहरी नजर से देखा और फिर बोला
अली- अंदर बाले केविन में चलो मैं आता हूँ
असलम की बात सुनकर मैं चुपचाप उसकी दुकान के अंदर बाले केविन में चली गई। थोडी ही देर बाद अली भी अंदर आ गया और बोला
अली- अपने कपडे निकालो
अली की बात सुनकर मैं हैरानी से उसे देखने लगी और फिर बोली
निशा- क्या.... पर क्यों
अली- चिंता मत करो मैं कुछ नहीं करूँगा। मुझे बस तुम्हारा नाप लेना है। परफेक्ट फिटिंग के लिए
बैसे तो इतने सारे लोगों के सामने नंगे होने के बाद अब मुझे किसी के भी सामने कपडे उतारने में कोई शर्म नहीं रह गई थी। पर पुलिस हैडक्वाटर के पास एक 50-60 साल के आदमी के सामने कपडे उतारने में मुझे कुछ अजीब लग रहा था। पर फिर भी मैंने बिना किसी झिझक के आपने कपडे उतार दिए। मैं जैसे ही अपनी ब्रा और पेंटी उतारने लगी तो उसने मुझे रोकते हुए कहा
अली- इन्हें उतारने की जरूरत नहीं है
अली की बात सुनकर मैं रुक गई और चुपचाप खडी हो गई। जिसके बाद अली मेरा नाप लेने लगा। नाप लेने के बहाने बो मेरे पूरे शरीर को अच्छी तरह छूकर महसूस भी कर रहा था। मुझे अब इसमें मजा अने लगा था। जब अली ने अच्छी तरह से मेरा नाप ले लिया तो वो मुझे कपडे पहने की बोलकर बाहर आ गया। जिसके बाद मैंने जल्दी से अपने कपडे पहने और बाहर आ गई। मेरे बाहर आते ही उसने मेरा नाम पूछा तो मैंने उसे अपना नाम उसे बता दिया फिर उसने मेरा नाम बिल बुक में लिखा और बोला
अली- कम्प्लीट ड्रेस चाहिए या केबल यूनिफार्म
अली की बात सुनकर मैं थोडा कन्फ्यूज होते हुए बोली
निशा- मैं कुछ समझी नहीं
अली- मेरा मतलब है कि यूनिफार्म के साथ स्टार, नेमप्लेट बगैरह भी लगेगें, इसके अलावा पुलिस कैप, बैल्ट और शू भी साथ होंगे। तो अपको सब कम्पलीट करवाना है या केबल यूनिफार्म ही सिलवाना है।
अली की बात सुनकर मैंने सोचा कि बाकी का सामान कहां से खरीदती फिरूँगी, इसलिए मैंने कहा
निशा- कम्पलीट चाहिए
मेरी बात सुनकर अली बोला
अली- तो फिर अपने शू का नम्बर बता दो
जिसके बाद मैंने उसे अपने शू का नम्बर भी उसे बता दिया, जो उसने एक डायरी में नोट कर लिया और एक बिल मुझे देते हुए बोला
अली- शाम को 5 बजे के बाद ले जाना
मैं हैरानी से उसकी तरफ देखते हुए बोली
निशा- इतनी जल्दी
अली- अगर तुम एक लड़का होती तो मैं 1 घंटे में दे सकता था। लेकिन तुम्हारी यूनिफार्म में मुझे थोडी ज्यादा मेहनत करनी पडेगी।
अली की बात सुनकर मैंने एक नजर बिल पर डाली तो उसमें पेंमेंट के साथ नीचे लिखा हुआ था पेड बाय असलम भाई। मैं समझ गई कि इस बिल का पेमेंट असलम ही करेगा। तो मुझे कोई चिंता नहीं थी। इसलिए मैं वहाँ से सीधे अपने होटल रूम में आ गई। जिसके बाद मैंने अपना लैपटॉप चैक किया तो उसमें सारा डाटा ट्रांशफर हो चुका था। अभी मैं उसे देखने ही बाली थी कि तभी मेरा पर्सनल मोबाईल फोन रिंग होने लगा। जब मैं अपना पर्सनल मोबाईल चेक किया, तो उसमें मेरे बॉस का फोन आ रहा था। मैंने जैसे ही उनका फोन रिशीव किया तो दूसरी तरफ से आबाज आई
बॉस- कहाँ बिजी हो गई थी मिस निशा, आपने अब तक वहाँ की कोई रिपोर्ट भी नहीं भेजी है
निशा- सॉरी सर मैं बस आपको कॉल करने ही बाली थी।
बॉस- क्या रहा। प्राब्लम सॉल्ब हुई या नहीं
निशा- हाँ सर हो गई है। साथ साथ मैंने यहाँ के सर्वर और बाकि सिस्टम के हार्डवेयर भी अपग्रेड करवा दिए हैं। ताकि आगे चलकर कोई प्राब्लम ना आऐ
बॉस- गुड तो फिर कब बापिस आ रही हो
निशा- सर मैं सोच रही थी की एक दो दिन यहाँ अच्छी तरह से आब्जर्व कर लूँ तो ठीक रहेगा। क्योंकि अगर मेरे बापिस आने के बाद फिर से कोई प्राब्लम आई, तो फिर किसी ना किसी यहाँ आना पडेगा। बैसे भी मेरे टूर के हिसाब से 3 दिन अभी बाकी हैं।
मेरी बात सुनकर बॉस खुश होते हुए बोले
बॉस- गुड डिसीजन, लेकिन अब तुम 3 दिन बाद बापिस नहीं आ सकती हो
बॉस की बात सुनकर मैं थोडा हैरान होते हुए बोली
निशा- मतलब
बॉस- मतलब अभी तुम्हें 1-2 हफ्ता और वहाँ रूकना पडेगा
निशा- लेकिन क्यों सर
बॉस- एम.पी. में ही 2-3 लोकेशन और हैं, जहाँ पर कुछ प्राब्लम्स आ रहीं हैं। इसलिए मैं चाहता हूँ कि जब तुम वहाँ हो, तो उन्हें भी तुम हैण्डल कर लो, और हाँ तुम्हें 2-3 दिन के लिए इंदौर भी जाना पडेगा। वहाँ हमारी नई ब्रांच का काम चल रहा है। मैं चाहता हूँ कि तुम वहाँ जाकर एक बार बिजिट कर लो और अचछी तरह से ऑडिट करके वहाँ की प्रोग्रेस रिपोर्ट भी हमें भेज देना।
निशा- लेकिन सर
बॉस- क्यों क्या हुआ.. कोई प्रॉब्लम है क्या
निशा- नहीं नहीं प्राब्लम तो कुछ नहीं है… मैं तो बस सोच रही थी कि अपना यह टूर पूरा करके मैं कुछ दिनों की छुट्टियाँ ले लूँ। आप तो जानते ही हैं कि मैंने इस साल एक भी छुट्टी नहीं ली है।
मेरी बात सुनकर बॉस मुझे समझाते हुए बोले
बॉस- ओफ्हो निशा… तुम ऐ कैसी बच्चों जैसी बातें कर रही हो। यहाँ मैं तुम्हें प्रमोट करने के बारे में सोच रहा हूँ और तुम छुट्टियों की चिंता कर रही हो। बैसे भी तुम्हारे हसबैंड तो आउट ऑफ इण्डिया है। फिर छुट्टियाँ किसके साथ सैलीब्रेट करोगी। हसबैंड के आने के बाद ले लेना छुट्टियाँ, मैं मना नहीं करूँगा। बैसे भी मैंने इस बार तुम्हारा नाम इम्प्लॉई ऑफ द ईयर के लिए पैनल के पास भेजा है।
बॉस की बात सुनकर मैंने कहा
निशा- थैंक्यू सो मच सर… लेकिन मुझे बाकई में कुछ दिनों के रेस्ट की आवश्यक्ता है।
बॉस- निशा तुम मेरी बात समझ क्यों नहीं रही हो। अच्छा कितने दिनों का रेस्ट चाहिए
निशा- सर वो वो मैं 1 महिने का प्लान कर रही थी। पर अगर आप 2 हफ्ता भी दे दें तो मैं मैनेज कर लूँगी
बॉस- लेकिन इतने दिनों के लिए छुट्टी लेने की क्या जरूरत है, वो तो मैं ऐसे ही मैनेज करवा दूँगा
निशा- मतलब
बॉस- देखो तुम अभी 2-3 दिन लगभग फ्री हो और मैं तुम्हारे नये टास्ट के हिसाब से 2 हफ्ते का टूर बडाने के बारे में सोच ही रहा था। बैसे तो मैं जानता हूँ कि इन सभी कामों को करने के लिए तुम्हारे लिए 1 हफ्ता ही काफी है। क्योंकि तुम कुछ ज्यादा ही वर्कोहॉलिक हो। पर अब मैं तुम्हारा टूर इस पूरे महिने के लिए फिक्स कर देता हूँ। आज 2 नबंबर है, तुम्हारे पास पूरे 28 दिन हैं, सारे टास्क कम्पलीट करने के लिए। इससे तुम्हारे वर्क रिपोर्ट में कोई लीव भी एड नहीं होगी। जिस कारण इम्पलॉई ऑफ द इयर की लिस्ट में इस साल पहली बार कोई लड़की टॉप पर होगी और तुम अपने सारे काम जल्दी से फिनिस करके छुटियों के मजे भी ले लेना। बैसे एम.पी. में बहुत सारी जगह हैं घूमने फिरने के लिए। तो बोलो मंजूर है
मुझे अपने बॉस का यह आईडिया पसंद आ गया था। बैसे भी मैं छुटियाँ लेकर बापिस भोपल आकर इजॉय करने का प्लान कर रही थी। जिसका मौका बॉस ने पहले से ही मुझे दे दिया था। बैसे भी मैं यहाँ 28 अक्टूबर को आई थी और आज 2 नबंबर है। 4 को मैं बापिस जाने बाली थी। उसकी जगह अब मुझे 30 को बापिस जाना है। यानि अब भी पूरे 28 दिन हैं मेरे पास मजे करने के लिए और फिर मुझे तो मजे बस रात में करने करने हैं। इसलिए दिन में मैं अपने बाकी काम आसानी निपटा लूँगी। बैसे भी टूर पर होने के कारण रेगुलर ऑफिश की तरह वर्क प्लेस पर जाने के लिए कोई टाईम बाऊंडेसन भी नहीं होता है। इसलिए मैंने तुरंत बॉस से कहा
निशा- जी सर… जैसा आपको ठीक लगे। मैं रेडी हूँ
मेरी बात सुनकर बॉस खुश होते हुए बोले
बॉस- तो फिर ठीक है… मैं तुम्हारे होटल की बुकिंग इस पूरे महिने के लिए बड़ा रहा हूँ। बाकी आने जाने का तुम अपने हिसाब से मैनेज कर लेना और बिल अकाउन्टेंड के पास जमा कर देना। तुम्हें टी.ए. एण्ड डी.ए. सैलरी के साथ रिफंड हो जाऐगा।
बॉस की बात सुनकर मैं खुश होते हुए बोली
निशा- जी सर
बास- तो फिर ठीक है… तुम्हें वहां पर कौन कौन से काम करने हैं, मैं उनकी डिटेल तुम्हें मेल कर देता हूँ। तुम अपने हिसाब से मैनेज करके मुझे रिपोर्ट भेज देना।
निशा- जी सर
इसके बाद बॉस ने फोन कट कर दिया। जिसके बाद मैं अपनी आँखें बंद करके आगे का प्लान बनाने लगी। आज सुबह मेरे साथ उन भिखारियों ने जो कुछ किया था, उससे मैं थोडा डर गई थी। इसलिए मैंने दोबारा रेलवे स्टेशन पर जाने क प्लान पूरी तरह से कैंसिल कर दिया था। बैसे भी असलम तो मुझे क्लाईंट देने ही बाला था और मेरे कुछ दूसरे क्लाईंटस ने भी मेरा नम्बर ले लिया था। जो मुझे कम से कम 1-2 बार कॉल जरूर करेंगे। इसके अलाबा रवि और रघु भी लाईन में लगे हुए थे। जिनके साथ तो मैं अब कभी भी मजे ले सकती थी।
मैं अभी यह सब सोच ही रही थी कि तभी मुझे गगन के मोबाईल के डाटा के बारे में याद आया, तो मैं उसे चैक करने लगी। गगन के मोबाईल में कई सारी लडकियों के पोर्न बीडियो थे, जो उसने उन्हें ड्रग देकर बनाए थे। वो सारी लडकियों मुझे कॉलेज स्टूडेंट लग रहीं थी। उन्हीं बीडियो में से एक बीडियो रश्मि का भी था। इसके अलाबा उसमें कई लडकियों के न्यूड फोटो भी थे। इन सबको अच्छी तरह से चैक करने के बाद मैने सोचा कि क्यों ना रवि से इस सब लडकियों के बारे में जानकारी ली जाऐ। इसलिए मैंने बिना देर किए रवि को कॉल कर के होटल में बुला लिया। उसे आने में अभी समय लगने बाला था। इसलिए मैंने अपना बीडियों दूसरे फोल्डर में ट्रांशफर करके प्ले कर दिया।
मैं असल में सेक्स के दौरान अपने फेश रियेक्सन देखना चाहती थी। पर कुछ देर ही बीडियो देखने के बाद मैं उत्तेजित हो गई और मेरा मन चुदने का करने लगा। तो मैंने डिसाईड किया कि आज तो रवि से अपना उद्घाटन करवा ही लेती हूँ। बाकी जो होगा देखा जाऐगा। पर अगले ही पल मुझे याद आया कि आज तो मुझे यहाँ के डी.जी.पी. के यहाँ जाना है। इसलिए अगर अभी रवि से चुदवा लिया तो रात तक मेरी चूत फिर से पूरी तरह से टाईट नहीं हो पायेगी।
जिस कारण मैंने आज रवि से चुदने का प्लान कैंसिल कर दिया और बस थोडी बहुत मस्ती करके, घूमने फिरने का प्रोग्राम मन ही मन सेट कर लिया।