

अद्भुत.. जबरदस्त..!! इस कथा-संसार को एक नए आयाम पर पहुँचा दिया आपने.. एक जटिल राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था के ध्वस्त होने का घोषणापत्र था यह..प्रत्येक पंक्ति को कई बार पढ़ा है, और हर बार नई परतें खुलती हैं..
मिसेज मोइत्रा के चरित्र में जो परिवर्तन दिखाया है, वह उस पूरी व्यवस्था का प्रतीकात्मक पतन है जिसे उन्होंने वर्षों खड़ा किया था.. "मिसेज मोइत्रा के मूत का चिराग जलता था" से लेकर आज उनकी अपनी बेटियों के सामने उनकी स्ट्रिपटीज होनी है, यह यात्रा अत्यंत सार्थक है.. कहानी ने एक ऐसी औरत को दिखाया है जो कभी ट्रांसफर और पोसिंग की मालिकिन थी, आज उसकी अपनी बेटियाँ उसके दामाद के सामने उसे चिढ़ा रही हैं.. उनके आपस के संवाद अकेले ही मिसेज मोइत्रा की सत्ता के ह्रास को दर्शाने के लिए पर्याप्त है.. वही औरत जो कभी दूसरों की किस्मतें लिखती थी, आज उसकी किस्मत उसके दामाद के हाथों लिखी जानी है..
अब निधि के चरित्र में एक नया आयाम जुड़ चुका है.. अब वह एक कुशल रणनीतिकार बन गई है.. उसका अड्डा एक कमांड और कंट्रोल सेंटर में तब्दील हो गया है, जहाँ से अब वह लाइव टेलीकास्ट भी कर रही है और साथ ही अमेरिकन मिलेट्री ग्रेड एंटी स्पाइवेयर का उपयोग भी कर रही है.. यह तकनीकी पक्ष कहानी को समकालीन बनाता है..
गाजर वाला अब ऐसी निगरानी तंत्र का प्रतीक बन गया है जो हर समय सक्रिय रहता है.. यहाँ हर कोई किसी न किसी रूप में निगरानी का शिकार और भागीदार है..
गीता और गाजर वाले के बीच का संवाद बेहद चालाकी से रचा गया है.. गीता उसे उलझाए रखती है, और जब वह कहती है "तेरी बहन की..." तो समझ आता है की वह गाली नहीं दे रही.. यह तो उस निगरानी तंत्र को धोखा देने की एक रणनीति है.. गीता जानबूझकर अपना आँचल सरका देती है ताकि गाजर वाले की आँख वहीँ चिपक जाए.. कैसे यौन इच्छा अच्छे से अच्छे निगरानी तंत्र को भी भटका सकती है, उसका सटीक उदाहरण
मंजू इस पूरे अभियान की वास्तविक सेनापति है.. उसका त्रिसूत्रीय प्रोग्राम एक राजनीतिक दस्तावेज की तरह है..
पहला सूत्र - बेटियों की पूरी जिम्मेदारी (सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक है)
दूसरा सूत्र - दामाद के सामने खुलकर यौन व्यवहार (पारिवारिक ढाँचे के विघटन का प्रतीक)
तीसरा सूत्र - बेटियों को यौन क्रियाकलापों में शामिल करना (पीढ़ियों के बीच की दीवार तोड़ने का प्रतीक)
मंजू का यह संवाद "अब हम दोनों जैसे आपस में बात करते हैं गाली देकर, खुले आम चुदाई की लंड और चूत की,... बस ऐसे ही उनके सामने भी" यौन शब्दावली सामान्य वार्तालाप का हिस्सा बन जाती है..
छुटकी और बड़की का चरित्र-चित्रण अत्यंत सूक्ष्म है.. एक ओर वे दर्जा नौ वाली स्कूली छात्राएँ हैं, दूसरी ओर वे अपनी माँ के सामने जीजू का औजार पकड़ने की बात कर रही हैं.. बड़की का यह संवाद "आप की आवाज सुन के ही आपके दामाद का पैंट टाइट हो गया है" यह एक आम नौवीं कक्षा की छात्रा का अपनी माँ से संवाद तो हो नहीं सकता, जब तक कि सभी सीमाएँ पहले ही तोड़ी न जा चुकी हों.. यहाँ पर आपने एक नई पीढ़ी का चित्रण किया है जो पुरानी पीढ़ी की तुलना में कहीं अधिक खुली और मुखर है..
गाजर की खीर अब एक व्यंजन कहाँ रही है..!! अब तो वह उस यौन इच्छा का प्रतीक बन चुकी है जो प्राकृतिक और कृत्रिम के बीच की रेखा को धुंधला कर रही है.. मिसेज मोइत्रा गाजर को अपने बिल में घुसेड़ रही हैं, और फिर उसी गाजर से बनी खीर अपने दामाद को खिला रही हैं.. अविश्वशनीय यौन संचरण की रचना कर दी आपने.. सासुमां का शारीरिक रस दामाद तक पहुँच गया..!!
आगे है एक और नया आयाम, जो कहता है की यौन क्रियाकलाप अब निजी नहीं रहे, वे रिकॉर्ड किए जा रहे हैं, संग्रहीत किए जा रहे हैं, और संभवतः भविष्य में उपयोग भी किए जाएँगे..
कहानी की बातें तो मैं करता ही रहूँगा और इसका कोई अंत नहीं.. किन्तु मुझे जो सबसे अधिक प्रभावशाली लगा वह थी आपकी भाषा.. यौन शब्दावली को जिस सहजता से आपने सामान्य वार्तालाप का हिस्सा बना दिया है.. बयान करना मुश्किल है.. कथा-साहित्य में देशज भाषा.. या फिर ठेठ भाषा का प्रयोग एक दोधारी तलवार की तरह होता है.. जहाँ अधिकांश लेखकों के यह प्रयोग अक्सर थोपे हुए या केवल यथार्थवाद का भ्रम पैदा करने के एक कृत्रिम प्रयास जैसे लगते है, वहीं आपके आख्यानों में इसकी बुनावट इतनी जैविक और प्रवाहपूर्ण है कि यह कथा-रस को और अधिक सघन कर देती है.. यह सहजता केवल शब्दों के ज्ञान से नहीं आती, बल्कि यह कथ्य और भाषा पर आपके उस विलक्षण नियंत्रण को रेखांकित करती है
अध्याय उस बिंदु पर समाप्त होता है जहाँ सब कुछ शुरू होने वाला है.. सारी तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं, सभी पात्र अपनी-अपनी जगह पर हैं, और अब केवल घटना घटित होने की प्रतीक्षा है..
कथा की इन जटिल परतों को इतनी महारत से साधने के लिए मेरी ओर से आपको हार्दिक बधाई.. आपकी इस रचनात्मक गहराई का मैं प्रशंसक रहा था और आगे भी रहूँगा..
अगली कड़ी की प्रतीक्षा रहेगी..