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Incest छोटी – छोटी कहानियां {Hindi Stories Collection}

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मेरी प्यारी बहन

भाग – 5 [नया बंधन]

रात को आरोही को गले लगाए ना जाने कब मेरी आंख लग गई। सुबह मेरी नींद मेरे चेहरे पर कुछ गीले एहसास से टूटी। जब मैंने आंखें खोली तो पाया के आरोही मेरे सर के पास खड़ी थी। वो शायद नहाकर आई थी, क्योंकि इस वक्त उसके बाल गीले थे। उसने अपने बालों को मेरे चेहरे पर डाला हुआ था और मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी। पर जैसे ही उसे एहसास हुआ के मैं उठ चुका हूं और उसे ही अपलक निहार रहा हूं तो उसकी मुस्कान लज्जा में बदल गई। उसने अपनी नज़रें झुका ली और पलट कर जाने लगी पर मैंने तभी उसका हाथ पकड़ लिया और उसे खींचकर अपने ऊपर गिरा लिया।

गीले बालों में वो कुछ अधिक ही हसीन लग रही थी और उसे देख कर मेरे दिल में नया सा एहसास उबाल मार रहा था। वो मेरे ऊपर गिरी हुई थी और शर्म से अपना सर मेरे सीने में दबाए हुए थी। मैंने उसके चेहरे पर आ रहे बालों को उसके कान के पीछे किया और फिर अपने दोनो हाथों से उसकी कमर को थाम लिया। वहां सहलाते हुए मैने कहा,

मैं : आज तो बड़ी ही अच्छी सुबह हुई है। काश ऐसे ही मुझे रोज़ सुबह इस परी का चेहरा देखने को मिले।

मेरे द्वारा अपनी तारीफ पर वो हल्की सी शर्मा गई पर फिर मेरे गाल पर किस करके बोली,

आरोही : मैं रोज़ ऐसे ही जगाऊंगी अपने राजकुमार को।

मैं : तो हम मैडम के राजकुमार हैं!

आरोही : हम्म्म... मेरे सपनों के राजकुमार।

उसकी नादानी भरी बात पर मैं मुस्कुराने लगा और वो मेरे सीने पर सहलाते हुए मुझे देखने लगी। पर तभी मैंने उसकी कमर को हल्का सा झटका देकर उसे ऊपर की तरफ खींच लिया। अब हम दोनो के चेहरे एक दूसरे के सामने थे और मैं उसकी गर्म सांसें अपने चेहरे पर महसूस कर पा रहा था। मैने अपनी एक उंगली से उसके गाल को सहलाया और फिर उसके होंठों पर उसे फिराने लगा। मेरी इस हरकत से उसका शरीर कांपने लगा था। तभी मैने उसके चेहरे को नीचे की तरफ झुकाया, आगे क्या होने वाला था शायद वो समझ गई थी और उसके होंठ फड़फड़ाने लगे थे।

मैने हल्के से अपने होंठों को उसके होंठों पर स्पर्श कर दिया। ये एक पल का मिलन काफी था मुझे एक अलग ही दुनिया में पहुंचाने के लिए। बस तभी मैंने उसके उपरी होंठ को अपने होंठों में भर लिया और हल्के से चूस लिया। उसकी आंखें मदहोशी से बंद हो चली थी। मैंने उसकी कुर्ती के अंदर हाथ डाले और उसकी नग्न कमर पर फिराने लगा। इधर मैं लगातार उसके लबों का रसपान कर रहा था। उसका निचला होंठ कुछ अधिक स्वादिष्ट सा लग रहा था मुझे, तभी मैंने उसकी ज़ुबान को अपने होंठों में कैद कर लिया और उसे चूसने लगा। अचानक ही शायद उसे अपनी हालत को अंदाज़ा हुआ और वो एक झटके में बिस्तर से उठ खड़ी हुई।

उसकी सांसें किसी रेलगाड़ी की तरह चल रही थी और वो पलटकर कमरे से बाहर जाने लगी। पर आज मेरा मन उसे खुद के करीब रखने का था, बेहद करीब। मैं उठा और भागकर उसे पीछे से अपनी बाहों में जकड़ लिया।

मैं : नही आरोही आज नही, आज तू मेरे पास रहेगी।

मैने इतना कहकर उसके कान की लौ को अपने होंठों में भर लिया और चूसने लगा। तभी उसकी एक घुटी सी सिसकी निकली – “आह्ह्ह”। मैने अगला हमला उसकी गर्दन पर किया और एक बार नीचे से ऊपर तक उसके गले पर ज़ुबान फेर दी। मैं उसके शरीर के बढ़ते तापमान को अच्छे से महसूस कर पा रहा था। तभी मुझे चौंकाते हुए वो पलटी और मेरे चेहरे को दोनो हाथों में थामकर मेरे होंठों पर हमला कर दिया। उसने मेरे ऊपर वाले होंठ को काट लिया। बस फिर तो वो बेकाबू सी हो गई थी और लगभग मेरे होंठों को चबाने लगी। मुझे दर्द तो हो रहा था पर मैं उसे रोकना नहीं चाहता था।

तभी मेरे होंठों से खून रिसने लगा जिसके कारण वो मुझसे अलग हुई। मेरे होंठ थोड़े सूज गए थे और कटे हुए लग रहे थे। वो ये देख कर डर सी गई और अपने मुंह पर दोनो हाथ रख लिए। अगले ही पल उसने अपने कान पकड़ लिए और आंखों में पानी के कतरे लिए मुझे देख कर बोली,

आरोही : भईयू, सॉरी... मैने जान बूझ के नही... गलती से। प्लीज़ मुझसे नाराज़ मत होना...

मैने उसे गले लगा लिया और बोला,

मैं : मैं तुझसे कभी नाराज़ नही हो सकता मेरी जंगली बिल्ली, तेरा दिया हर दर्द मुझे कुबूल है।

मेरी इस बात का शायद बहुत गहरा असर हुआ था उसपर। वो मुझे एक टक देखने लगी और फिर मेरे होंठों पर हल्के से उंगली फेरी। जलन से मेरी आंखें बंद हो गई। फिर मुझे हैरान करते हुए उसने अपनी जीभ निकाली और उसे मेरे होंठों पर घुमाने लगी जैसे मलहम लगा रही हो। वो प्यार से मेरे बालों को सहलाते हुए ये कर रही थी। मैने उसे खुद से अलग किया तो वो मुझे सवालिया नजरों से देखने लगी। पर तभी मैं नीचे बैठ गया और उसकी कुर्ती को हल्का सा ऊपर उठा दिया। उसकी आंखें मेरी इस हरकत से चौड़ी हो गई थी।

मैने एक बार उसकी आंखों में देखा और फिर उसके पेट पर एक चुम्बन जड़ दिया। बिल्कुल मक्खन सी मुलायम त्वचा थी उसकी। मेरी नजर जब उसकी गहरी नाभि पर पड़ी तो मेरा दिमाग मदहोश होने लगा। मैं उसके मोह पाश में बंधा एक दम से उसकी नाभि को चूमने लगा।

आरोही : भईयूयूयूयूयू...

तभी मैंने अपनी जीभ उसकी नाभि में डाल दी और उसकी लगभग एक चीख ही निकल गई। उसने मेरे बालों को कस कर पकड़ लिया और मेरा मुंह अपने पेट पर दबाने लगी। काफी देर बाद मैं अलग हुआ और उसे देख कर बोला,

मैं : तू तो बहुत मीठी है मेरी गुड़िया।

वो एक दम शर्माती हुई कमरे से भाग गई। मैं बस उसे जाते देख कर मुस्कुराने लगा। पर मैंने अपने मन में एक विचार को लेकर निश्चय कर लिया था। मैने किसी को फोन लगाया और कुछ देर तक एक बारे में बात की। उसके बाद मैं नित्य क्रिया में लग गया। खैर, नहा धोकर जब मैं तैयार हो चुका था, तब मैं बाहर आरोही के पास पहुंचा। वो रसोई में खड़ी थी और नाश्ता बनाने में लगी थी। उसके बालों की एक लट उसके चेहरे पर आ रही थी और वो परेशान होकर बार – बार उसे सही करने की कोशिश कर रही थी। पर उसके हाथ आटा गूथने के कारण साफ नही थे इसीलिए वो ठीक तरह से नही कर पा रही थी।

मैं मुस्कुराकर उसके पास जाकर खड़ा हो गया और शेल्फ से टेक लगाकर उसे निहारने लगा। उसने एक नजर मुझपर डाली और स्वयं ही एक बेहद ही प्यारी स्माइल उसके होंठों पर आ गई। फिर वो दोबारा से अपने काम में लग गई। पर अबकी बार जैसे ही उसके बाल उसके चेहरे पर आए मैने दोनो हाथों से उसके बालों को पीछे करके जूड़ा बना दिया। अकसर बचपन में मैं ही उसके बाल बनाया करता था और शायद वही याद करके मेरे दिल में गुदगुदी होने लगी।

मैं : आरोही चल जल्दी से नाश्ता करते हैं फिर हमे कहीं जाना है।

आरोही : कहां भईयू?

मैं : जब चलेंगे तब पता चल जाएगा मेरी गुड़िया। अब तैयार हो जा फटाफट और हां लहंगा पहन लियो।

आरोही : लहंगा! कुछ खास है क्या आज?

मैं : खास... बहुत खास। तू बस सवाल मत कर और तैयार होने चल।

खैर, इसके बाद हमने नाश्ता किया और मैने आरोही को तैयार होने का बोल दिया और खुद बाहर चला गया किसी से मिलने। जब मैं कुछ दो घंटे बाद घर लौटा तो पाया आरोही हॉल में सोफे पर बैठी थी। मैं उसे देख कर अपनी ही जगह पर जम सा गया। बिना पलक झपकाए मैं उसे देखे जा रहा था। और ये लाजमी भी था, आरोही ने इस वक्त एक हल्के गुलाबी रंग का लहंगा पहना हुआ था। उसे मेक–अप वगेरह का तो शुरू से ही कोई शौक नही था और मेरे मुताबिक तो उसे जरूरत भी नहीं थी। आखिर वो पहले से ही एक परी जो थी। खैर, उसने लहंगे से मेल खाता हुआ ही हार, बालियां और बाकी जेवर पहने हुए थे। सबसे खास मुझे लग रही थी उसके नाम में पहनी वो नथ। वो भी मुझे देख कर अपनी जगह से खड़ी हो चुकी थी और जैसे मैं मूर्खों की तरह उसे देख रहा था, वो भी मुझे ही देखे जा रही थी।

मैं बाहर से ही तैयार होकर आया था और मैने फिल्हाल एक शेरवानी टाइप परिधान पहना हुआ था। मैं मंत्रमुग्ध सा होकर उसके पास पहुंच गया और उसके दोनो गालों को थामकर एक चुम्बन उसके माथे पर अंकित कर दिया। ये चुम्बन मेरे उसके लिए प्रेम से सराबोर था, जिसे वो भी भली भांति समझ रही थी। नतीजतन उसके होंठों पर एक मुस्कान आ गई। खैर, उसने मुझसे पूछा भी के हम कहां जा रहे हैं पर मैने उसे इंतजार करने को कहा। जब हम बाहर आए तो एक टैक्सी मैने पहले ही मंगवा ली थी। हम उसमें बैठे और एक तरफ निकल पड़े। टैक्सी ड्राइवर एक काफी उम्र के बुज़ुर्ग से व्यक्ति थे और हम देख कर मुस्कुरा रहे थे। उनका ऐसा करना भी लाज़मी था क्योंकि मैं और आरोही वहां बस एक दूसरे का हाथ थामे अपने प्रेमी को निहार रहे थे।

जब टैक्सी अपने गंतव्य पर पहुंचने वाली थी तो मैंने आरोही को आंखों पर एक पट्टी बांध दी। उसने एक बार फिर से सवाल किया पर मैने उसे बस कुछ देर सब्र करने को कह दिया। अब तक वो काफी अधीर हो चुकी थी जान ने के लिए की मैं उसे लेकर कहां जा रहा था। टैक्सी ड्राइवर भी अब तक सब समझ चुका था। खैर, टैक्सी एक मंदिर के बाहर रुकी और मैं आरोही को लेकर अंदर चला गया। जब रास्ते में सीढियां आई तो मैंने उसे अपनी गोद में उठा लिया था। अंदर पहुंचकर मैने पुजारी जी को प्रणाम किया और फिर आरोही की आंखों से पट्टी हटा दी। जैसे ही उसने आस पास के हालात का जायज़ा लिया वो सारा मामला समझ गई और भीगी आंखों से मेरी तरफ देखने लगी। मैं बस उसे देख कर मुस्कुरा रहा था। वो एक झटके से मुझसे लिपट गई और अश्रु बहाने लगी। मैं उसके सर पर हाथ फेरकर उसे शांत कर रहा था।

आरोही : आप मुझसे सचमें शादी करोगे?

मैं : तुझे अभी भी कोई शक है!

अचानक ही वो मुझसे अलग हुई और मेरे हाथों को पकड़कर बोली,

आरोही : थैंक यू... थैंक यू... थैंक यू... आज आपने मुझे मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी खुशी दी है। थैंक यू।

पंडित जी : चलो बेटा अब जल्दी करो, मुहूर्त निकला जा रहा है।

हम दोनों ने एक बार एक – दूसरे की तरफ देखा और फिर अपनी जगह पर बैठ गए। जब बारी कन्यादान की आती तो मुझे वो पल याद आ गया जब हर्षित के साथ आरोही की शादी हुई थी। कितना दर्द, कितनी पीड़ा मेरे कलेजे में हुई थी, मैं ही जानता था। मेरी आंखें उस पल को याद करके डबडबा गई। आरोही भी शायद समझ रही थी, उसने मेरा हाथ थामकर मुझे एक मूक दिलासा दिया के अब वो हमेशा के लिए मेरी ही है। खैर, फिर मंगलसूत्र, सिन्दूर और सात फेरे... हम दोनों आज एक पुराने रिश्ते से ऊपर उठकर एक नए बंधन में बंध चुके थे। ये बंधन मेरे लिए बहुत खास था। मैं तय कर चुका था के अब आरोही की जिंदगी में मैं हर खुशी भर दूंगा। उसे किसी भी चीज की कमी नहीं होने दूंगा। उसे इतना प्यार दूंगा के वो पिछले सारे दर्द भूल जाएगी। हमने पंडित जी का आशीर्वाद लिया,

पंडित जी : सदा सुहागन रहो बेटी, तुम दोनो की जोड़ी सदा बनी रहे।

आरोही के माथे पर आज फिर सिंदूर लग चुका था, आज फिर उसके गले में मंगलसूत्र था, आज फिर वो एक सुहागन लग रही थी। उसका ये रूप जो मैने जेल से आकर देखा था, इस रूप में वो मुझे अप्सरा समान ही लग रही थी। पर आज उसका ये सिन्दूर, मंगलसूत्र और सब कुछ मेरे नाम का था, सिर्फ मेरे नाम का। आज से हम शायद एक नए और पवित्र बंधन में बंध गए थे और एक आशियाना जिसका ख्वाब मैने देखा था वो आज सचमुच पूरा होने जा रहा था।

Evil Spirit Bhai,

Bahut hi behtareen update diya hai aapne

Ab agle update ke liye zyada mat wait karwana !

Thanks !!
 
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मेरी प्यारी बहन
भाग – 4 [मुकम्मल इश्क़]

मैं आरोही को आंखें फाड़े देख रहा था और वो मुझे एक कुटिल मुस्कान के साथ। इधर सेल्सगर्ल भी उसकी बात पर मुस्कुराने लगी थी। तभी आरोही ने मेरा हाथ पकड़ा और उन दोनो सेट्स को साथ लेकर ट्रायल रूम की तरफ बढ़ गई। कुछ ही पलों में हम दोनो उस छोटे से ट्रायल रूम के भीतर थे। अब आरोही के चेहरे पर शर्म के भाव आने लगे थे। वो तब तो मुझसे बदला लेने और जोश – जोश के भाव में ये सब कर गई पर अब उसे समझ नही आ रहा था के आगे क्या करना है। मैं भी उसकी मनोदशा को समझ पा रहा था पर पता नही क्यों आज मुझे उसे सताने में बहुत मज़ा आ रहा था।

मैं उसके करीब खिसका और उस से चिपक कर खड़ा हो गया। मैंने अपने एक हाथ की उंगलियों को उसके बाएं गाल पर फेरा, फिर उसके होंठों पर उंगलियों को फिराने लगा। उसकी सांसें बेतहाशा बढ़ चुकी थी और मुझे अपने चेहरे पर वो महसूस भी हो रही थी। फिर मैंने दोनो हाथों से उसकी कमर को थामा और एक झटके के साथ उसे खुद से चिपका सा लिया। वो अपनी मासूम सी आंखों से मुझे देखने लगी। मैंने उसके चेहरे पर झुक कर उसके कान में कहा,

मैं : चल अब जल्दी से इन्हे ट्राई कर ले। साइज ठीक है या नहीं।

वो मेरी बात पर हैरान हो गई और मुंह नीचे करके शर्माने लगी। पर तभी मैंने उसे दीवार से चिपका दिया और उसकी गर्दन पर एक बार हाथ फेरा। उसकी आंखें बंद हो चली थी। मैं उसकी जैकेट की ज़िप को पकड़ा और उसे नीचे खिसका दिया। अगले ही पल उसकी जैकेट को मैं उसके शरीर से अलग करके पास रखे टेबल पर गिर चुका था। नीचे उसने एक टी – शर्ट पहनी हुई थी। तभी,

आरोही : भईयू आप उधर मुंह कर लो ना मैं ट्राई कर लेती हूं इन्हे।

मैंने उसे मुस्कुराकर देखा और उसकी तरफ पीठ करके मुड़ गया। फिर मुझे कपड़े के सरसराने की आवाज आई और कुछ पलों बाद,

आरोही : भईयू ये हुक लगा दो प्लीज़।

मैं उसकी आवाज़ सुनकर मुड़ा तो मेरी आंखें चौंधियां गईं। आरोही की पीठ मेरी तरफ थी। और उसकी पीठ पूरी तरह नग्न थी। केवल ब्रा की दोनो पट्टियां पीछे लटकी हुई थी। मैने अपने कांपते हाथों से उन पट्टियों को थामा और उसके हुक को लगा दिया। पर इस बीच एक दो बार मेरी उंगलियों ने उसकी पीठ को छू लिया था। उसकी त्वचा बेहद ही मुलायम और कोमल थी। जिसके एहसास ने मुझे हिला दिया था। मेरे स्पर्श से उसके बदन में भी हलचल मैने साफ महसूस की थी।

तभी मैं ना जाने किस अदृश्य शक्ति के जाल में फंसकर उसकी पीठ पर उंगलियां घुमाने लगा। उसकी सांसों का शोर मुझे साफ सुनाई दे रहा था। मैने उसकी ब्रा की पट्टी में उंगली फंसाई और उसे धीरे से खींचकर छोड़ दिया।

आरोही : आह्ह्हह... भईयू...

अगले ही पल मैने अपने होंठ उसके नंगे कंधे पर रख दिए। मैं जोंक की तरह उस से चिपक गया और अपने हाथ उसके नंगे पेट पर लपेट दिए। उसने भी अपने हाथ मेरे हाथों के ऊपर रख दिए। मैंने उसके कंधे को कुछ देर चूमा और फिर अपनी जीभ को उसकी गर्दन पर फिरा दिया।

आरोही : ओह्ह्ह्ह... ईशशशशश्श...

मैंने उसके पेट को छोड़ा और एक दम से उसे पलटा दिया। उसके पलटते ही मेरी आंखें फटी की फटी रह गई। उसके शरीर पर मात्र एक ब्रा और एक जींस थी। मेरा मुंह खुल चुका था और में बेसुध सा उसकी खूबसूरती को निहारने में लगा था। वो मेरी हालत देख कर शरमा सी गई। तभी मैंने उसे दीवार के साथ लगा दिया और एक हाथ से उसकी कमर को सहलाते हुए दूसरे हाथ को उसके गाल पर फेरकर बोला,

मैं : तू तो बहुत ही ज्यादा खूबसूरत है आरोही। तू इस दुनिया की सबसे सुंदर लड़की है।

वो शर्माकर मुझसे लिपट गई और मैने भी उसकी मखमली पीठ पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। तभी,

आरोही : भईयू प्लीज़ रहने दो ना हमे बहुत देर हो गई है अंदर आए हुए। वो सेल्सगर्ल क्या सोचेगी?

मैं : वो तो हमें पति – पत्नी समझ रही थी। तो वही सोचेगी जो पति – पत्नी ऐसे मौके पर करते हैं।

आरोही : भईयूयूयू... आप बहुत बदमाशी करने लगे हो आजकल। प्लीज़ छोड़ दो ना। क्यों सता रहे हो अपनी आरोही को।

उसके कहे वो शब्द “अपनी आरोही” सीधे मेरे दिल पर जाकर लगे। मैं उस से अलग हुआ और उसके चेहरे को देखने लगा। मेरी आंखों में नमी सी आ गई थी। उसे लगा में नाराज़ हो गया हूं इसीलिए वो एक बार फिर मुझसे चिपक गई।

आरोही : भईयू नाराज़ मत होइए ना। आप...

मैंने उसे खुद से अलग किया और उसके चेहरे को थामकर बोला,

मैं : मैं नाराज़ नहीं हूं गुडिया और तुझसे नाराज़ होकर मैं जाऊंगा कहां। वो तो तूने कहा ना “अपनी आरोही” तो...

वो मुस्कुराकर बोली,

आरोही : हां तो गलत क्या कहा, आरोही सिर्फ आपकी ही तो है और आपको ही अपनी इस गुड़िया का ध्यान रखना है।

मैं उसकी बात पर मुस्कुराकर रह गया और फिर पलट कर खड़ा हो गया। उसने वो सभी सेट्स को ट्राई किया और फिर हम बाहर आ गए। वो सेल्सगर्ल हमे देख कर मुस्कुरा रही थी और आरोही भी उसकी मुस्कान का मतलब समझ रही थी। खैर, हम इस सबके बाद घर लौट आए।

रात के वक्त आरोही मेरी बाहों में समाई बिस्तर पर लेटी थी। हम कुछ देर तक बातें करते रहे फिर हम नींद आ गई। रात के किसी पहर मैं उसका नाम चिल्लाते हुए उठे। आरोही ने हड़बड़ा कर उठते हुए लाइट जला दी। मैने एक दम से उसे गले लगा लिया।

मैं : प्लीज़ प्लीज़ मुझे छोड़कर मत जाओ आरोही। प्लीज़ मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता।

आरोही : क्या हुआ भईयू, क्या हुआ...

मैं : आरोही प्लीज़ कभी मुझे छोड़कर नहीं जाना, मैं मर जाऊंगा आरोही, मैं मर जाऊंगा।

वो समझ गई के मैने कोई बुरा सपना देखा है, उसने मेरे सर को अपनी छाती में दबा लिया और मेरे बालों में उंगलियां फिराने लगी। मैं भी एक छोटे बच्चे के जैसे उससे लिपटा हुआ था। एक सपना ही तो देखा था मैंने अभी के आरोही मुझसे नाराज होकर मुझे छोड़कर मुझसे दूर जा रही थी। कैसी भावना थी वो, मानो कोई मेरे सीने को चीर कर मेरा दिल निकाल रहा हो। अचानक ही आरोही से लिपटे हुए मुझे एहसास हुआ के मेरा सर उसकी नर्म गोलाईयों पर दबा हुआ था। उसके बदन की वो सुगंध, उसके नजदीक होने का एहसास मेरी कैफीयत को एक रूहानी सुकून दे रहा था।

मैं उस से अलग हुआ और उसके चेहरे को निहारने लगा, उसके बाल हल्के से बिखरे हुए थे। मुझे ये उसकी खूबसूरती की तौहीन लगी। मैने हाथ बढ़ाकर उसके बालों को सलीके से उसके कानों के पीछे कर दिया। और उसके सर को अपने सर से मिला लिया। मैं एक टक उसकी आंखों में झांक रहा था।

मैं : आरोही तू मुझसे कितना प्यार करती है?

आरोही : जितना आप मुझसे करते हो उससे भी ज्यादा।

मैं : तू कभी मुझसे दूर तो नही जाएगी ना?

आरोही : कभी नही, कभी भी नही। मेरे सब कुछ आप ही हो, सिर्फ आप।

मैं : आरोही जो कुछ भी हमारे बीच पिछले दिनों हुआ है वो भाई – बहन में नही होता, ये बात मैं जानता हूं पर आरोही जब तू मेरे करीब होती है तो मैं खुद पर काबू नही रख पाता। मेरा मन करता है के तुझे खुद में समा लूं, तुझे बहुत प्यार करूं, बहुत ज्यादा।

मैंने उसके गाल को सहलाते हुए ये सारी बातें कही जिनपर प्रतिक्रिया के तौर पर वो बस मुस्कुराने लगी।

मैं उसके बालों में उंगलियां फिराते हुए आगे बोला,

मैं : और आज से नही आरोही बचपन से ही तेरे नजदीक होने पर ही मुझे वो एहसास होता आया है। जब... जब तेरी शादी हुई तो मुझे लगा के मेरी जिंदगी खत्म हो गई है। मैं झूठ नही बोलूंगा गुड़िया, मैं जेल में आत्महत्या भी करना चाहता था...

वो मेरे इस खुलासे पर एक दम से तड़प सी गई,
बहुत गज़ब लिखा है यार
 

Ek number

Well-Known Member
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मेरी प्यारी बहन

भाग – 5 [नया बंधन]

रात को आरोही को गले लगाए ना जाने कब मेरी आंख लग गई। सुबह मेरी नींद मेरे चेहरे पर कुछ गीले एहसास से टूटी। जब मैंने आंखें खोली तो पाया के आरोही मेरे सर के पास खड़ी थी। वो शायद नहाकर आई थी, क्योंकि इस वक्त उसके बाल गीले थे। उसने अपने बालों को मेरे चेहरे पर डाला हुआ था और मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी। पर जैसे ही उसे एहसास हुआ के मैं उठ चुका हूं और उसे ही अपलक निहार रहा हूं तो उसकी मुस्कान लज्जा में बदल गई। उसने अपनी नज़रें झुका ली और पलट कर जाने लगी पर मैंने तभी उसका हाथ पकड़ लिया और उसे खींचकर अपने ऊपर गिरा लिया।

गीले बालों में वो कुछ अधिक ही हसीन लग रही थी और उसे देख कर मेरे दिल में नया सा एहसास उबाल मार रहा था। वो मेरे ऊपर गिरी हुई थी और शर्म से अपना सर मेरे सीने में दबाए हुए थी। मैंने उसके चेहरे पर आ रहे बालों को उसके कान के पीछे किया और फिर अपने दोनो हाथों से उसकी कमर को थाम लिया। वहां सहलाते हुए मैने कहा,

मैं : आज तो बड़ी ही अच्छी सुबह हुई है। काश ऐसे ही मुझे रोज़ सुबह इस परी का चेहरा देखने को मिले।

मेरे द्वारा अपनी तारीफ पर वो हल्की सी शर्मा गई पर फिर मेरे गाल पर किस करके बोली,

आरोही : मैं रोज़ ऐसे ही जगाऊंगी अपने राजकुमार को।

मैं : तो हम मैडम के राजकुमार हैं!

आरोही : हम्म्म... मेरे सपनों के राजकुमार।

उसकी नादानी भरी बात पर मैं मुस्कुराने लगा और वो मेरे सीने पर सहलाते हुए मुझे देखने लगी। पर तभी मैंने उसकी कमर को हल्का सा झटका देकर उसे ऊपर की तरफ खींच लिया। अब हम दोनो के चेहरे एक दूसरे के सामने थे और मैं उसकी गर्म सांसें अपने चेहरे पर महसूस कर पा रहा था। मैने अपनी एक उंगली से उसके गाल को सहलाया और फिर उसके होंठों पर उसे फिराने लगा। मेरी इस हरकत से उसका शरीर कांपने लगा था। तभी मैने उसके चेहरे को नीचे की तरफ झुकाया, आगे क्या होने वाला था शायद वो समझ गई थी और उसके होंठ फड़फड़ाने लगे थे।

मैने हल्के से अपने होंठों को उसके होंठों पर स्पर्श कर दिया। ये एक पल का मिलन काफी था मुझे एक अलग ही दुनिया में पहुंचाने के लिए। बस तभी मैंने उसके उपरी होंठ को अपने होंठों में भर लिया और हल्के से चूस लिया। उसकी आंखें मदहोशी से बंद हो चली थी। मैंने उसकी कुर्ती के अंदर हाथ डाले और उसकी नग्न कमर पर फिराने लगा। इधर मैं लगातार उसके लबों का रसपान कर रहा था। उसका निचला होंठ कुछ अधिक स्वादिष्ट सा लग रहा था मुझे, तभी मैंने उसकी ज़ुबान को अपने होंठों में कैद कर लिया और उसे चूसने लगा। अचानक ही शायद उसे अपनी हालत को अंदाज़ा हुआ और वो एक झटके में बिस्तर से उठ खड़ी हुई।

उसकी सांसें किसी रेलगाड़ी की तरह चल रही थी और वो पलटकर कमरे से बाहर जाने लगी। पर आज मेरा मन उसे खुद के करीब रखने का था, बेहद करीब। मैं उठा और भागकर उसे पीछे से अपनी बाहों में जकड़ लिया।

मैं : नही आरोही आज नही, आज तू मेरे पास रहेगी।

मैने इतना कहकर उसके कान की लौ को अपने होंठों में भर लिया और चूसने लगा। तभी उसकी एक घुटी सी सिसकी निकली – “आह्ह्ह”। मैने अगला हमला उसकी गर्दन पर किया और एक बार नीचे से ऊपर तक उसके गले पर ज़ुबान फेर दी। मैं उसके शरीर के बढ़ते तापमान को अच्छे से महसूस कर पा रहा था। तभी मुझे चौंकाते हुए वो पलटी और मेरे चेहरे को दोनो हाथों में थामकर मेरे होंठों पर हमला कर दिया। उसने मेरे ऊपर वाले होंठ को काट लिया। बस फिर तो वो बेकाबू सी हो गई थी और लगभग मेरे होंठों को चबाने लगी। मुझे दर्द तो हो रहा था पर मैं उसे रोकना नहीं चाहता था।

तभी मेरे होंठों से खून रिसने लगा जिसके कारण वो मुझसे अलग हुई। मेरे होंठ थोड़े सूज गए थे और कटे हुए लग रहे थे। वो ये देख कर डर सी गई और अपने मुंह पर दोनो हाथ रख लिए। अगले ही पल उसने अपने कान पकड़ लिए और आंखों में पानी के कतरे लिए मुझे देख कर बोली,

आरोही : भईयू, सॉरी... मैने जान बूझ के नही... गलती से। प्लीज़ मुझसे नाराज़ मत होना...

मैने उसे गले लगा लिया और बोला,

मैं : मैं तुझसे कभी नाराज़ नही हो सकता मेरी जंगली बिल्ली, तेरा दिया हर दर्द मुझे कुबूल है।

मेरी इस बात का शायद बहुत गहरा असर हुआ था उसपर। वो मुझे एक टक देखने लगी और फिर मेरे होंठों पर हल्के से उंगली फेरी। जलन से मेरी आंखें बंद हो गई। फिर मुझे हैरान करते हुए उसने अपनी जीभ निकाली और उसे मेरे होंठों पर घुमाने लगी जैसे मलहम लगा रही हो। वो प्यार से मेरे बालों को सहलाते हुए ये कर रही थी। मैने उसे खुद से अलग किया तो वो मुझे सवालिया नजरों से देखने लगी। पर तभी मैं नीचे बैठ गया और उसकी कुर्ती को हल्का सा ऊपर उठा दिया। उसकी आंखें मेरी इस हरकत से चौड़ी हो गई थी।

मैने एक बार उसकी आंखों में देखा और फिर उसके पेट पर एक चुम्बन जड़ दिया। बिल्कुल मक्खन सी मुलायम त्वचा थी उसकी। मेरी नजर जब उसकी गहरी नाभि पर पड़ी तो मेरा दिमाग मदहोश होने लगा। मैं उसके मोह पाश में बंधा एक दम से उसकी नाभि को चूमने लगा।

आरोही : भईयूयूयूयूयू...

तभी मैंने अपनी जीभ उसकी नाभि में डाल दी और उसकी लगभग एक चीख ही निकल गई। उसने मेरे बालों को कस कर पकड़ लिया और मेरा मुंह अपने पेट पर दबाने लगी। काफी देर बाद मैं अलग हुआ और उसे देख कर बोला,

मैं : तू तो बहुत मीठी है मेरी गुड़िया।

वो एक दम शर्माती हुई कमरे से भाग गई। मैं बस उसे जाते देख कर मुस्कुराने लगा। पर मैंने अपने मन में एक विचार को लेकर निश्चय कर लिया था। मैने किसी को फोन लगाया और कुछ देर तक एक बारे में बात की। उसके बाद मैं नित्य क्रिया में लग गया। खैर, नहा धोकर जब मैं तैयार हो चुका था, तब मैं बाहर आरोही के पास पहुंचा। वो रसोई में खड़ी थी और नाश्ता बनाने में लगी थी। उसके बालों की एक लट उसके चेहरे पर आ रही थी और वो परेशान होकर बार – बार उसे सही करने की कोशिश कर रही थी। पर उसके हाथ आटा गूथने के कारण साफ नही थे इसीलिए वो ठीक तरह से नही कर पा रही थी।

मैं मुस्कुराकर उसके पास जाकर खड़ा हो गया और शेल्फ से टेक लगाकर उसे निहारने लगा। उसने एक नजर मुझपर डाली और स्वयं ही एक बेहद ही प्यारी स्माइल उसके होंठों पर आ गई। फिर वो दोबारा से अपने काम में लग गई। पर अबकी बार जैसे ही उसके बाल उसके चेहरे पर आए मैने दोनो हाथों से उसके बालों को पीछे करके जूड़ा बना दिया। अकसर बचपन में मैं ही उसके बाल बनाया करता था और शायद वही याद करके मेरे दिल में गुदगुदी होने लगी।

मैं : आरोही चल जल्दी से नाश्ता करते हैं फिर हमे कहीं जाना है।

आरोही : कहां भईयू?

मैं : जब चलेंगे तब पता चल जाएगा मेरी गुड़िया। अब तैयार हो जा फटाफट और हां लहंगा पहन लियो।

आरोही : लहंगा! कुछ खास है क्या आज?

मैं : खास... बहुत खास। तू बस सवाल मत कर और तैयार होने चल।

खैर, इसके बाद हमने नाश्ता किया और मैने आरोही को तैयार होने का बोल दिया और खुद बाहर चला गया किसी से मिलने। जब मैं कुछ दो घंटे बाद घर लौटा तो पाया आरोही हॉल में सोफे पर बैठी थी। मैं उसे देख कर अपनी ही जगह पर जम सा गया। बिना पलक झपकाए मैं उसे देखे जा रहा था। और ये लाजमी भी था, आरोही ने इस वक्त एक हल्के गुलाबी रंग का लहंगा पहना हुआ था। उसे मेक–अप वगेरह का तो शुरू से ही कोई शौक नही था और मेरे मुताबिक तो उसे जरूरत भी नहीं थी। आखिर वो पहले से ही एक परी जो थी। खैर, उसने लहंगे से मेल खाता हुआ ही हार, बालियां और बाकी जेवर पहने हुए थे। सबसे खास मुझे लग रही थी उसके नाम में पहनी वो नथ। वो भी मुझे देख कर अपनी जगह से खड़ी हो चुकी थी और जैसे मैं मूर्खों की तरह उसे देख रहा था, वो भी मुझे ही देखे जा रही थी।

मैं बाहर से ही तैयार होकर आया था और मैने फिल्हाल एक शेरवानी टाइप परिधान पहना हुआ था। मैं मंत्रमुग्ध सा होकर उसके पास पहुंच गया और उसके दोनो गालों को थामकर एक चुम्बन उसके माथे पर अंकित कर दिया। ये चुम्बन मेरे उसके लिए प्रेम से सराबोर था, जिसे वो भी भली भांति समझ रही थी। नतीजतन उसके होंठों पर एक मुस्कान आ गई। खैर, उसने मुझसे पूछा भी के हम कहां जा रहे हैं पर मैने उसे इंतजार करने को कहा। जब हम बाहर आए तो एक टैक्सी मैने पहले ही मंगवा ली थी। हम उसमें बैठे और एक तरफ निकल पड़े। टैक्सी ड्राइवर एक काफी उम्र के बुज़ुर्ग से व्यक्ति थे और हम देख कर मुस्कुरा रहे थे। उनका ऐसा करना भी लाज़मी था क्योंकि मैं और आरोही वहां बस एक दूसरे का हाथ थामे अपने प्रेमी को निहार रहे थे।

जब टैक्सी अपने गंतव्य पर पहुंचने वाली थी तो मैंने आरोही को आंखों पर एक पट्टी बांध दी। उसने एक बार फिर से सवाल किया पर मैने उसे बस कुछ देर सब्र करने को कह दिया। अब तक वो काफी अधीर हो चुकी थी जान ने के लिए की मैं उसे लेकर कहां जा रहा था। टैक्सी ड्राइवर भी अब तक सब समझ चुका था। खैर, टैक्सी एक मंदिर के बाहर रुकी और मैं आरोही को लेकर अंदर चला गया। जब रास्ते में सीढियां आई तो मैंने उसे अपनी गोद में उठा लिया था। अंदर पहुंचकर मैने पुजारी जी को प्रणाम किया और फिर आरोही की आंखों से पट्टी हटा दी। जैसे ही उसने आस पास के हालात का जायज़ा लिया वो सारा मामला समझ गई और भीगी आंखों से मेरी तरफ देखने लगी। मैं बस उसे देख कर मुस्कुरा रहा था। वो एक झटके से मुझसे लिपट गई और अश्रु बहाने लगी। मैं उसके सर पर हाथ फेरकर उसे शांत कर रहा था।

आरोही : आप मुझसे सचमें शादी करोगे?

मैं : तुझे अभी भी कोई शक है!

अचानक ही वो मुझसे अलग हुई और मेरे हाथों को पकड़कर बोली,

आरोही : थैंक यू... थैंक यू... थैंक यू... आज आपने मुझे मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी खुशी दी है। थैंक यू।

पंडित जी : चलो बेटा अब जल्दी करो, मुहूर्त निकला जा रहा है।

हम दोनों ने एक बार एक – दूसरे की तरफ देखा और फिर अपनी जगह पर बैठ गए। जब बारी कन्यादान की आती तो मुझे वो पल याद आ गया जब हर्षित के साथ आरोही की शादी हुई थी। कितना दर्द, कितनी पीड़ा मेरे कलेजे में हुई थी, मैं ही जानता था। मेरी आंखें उस पल को याद करके डबडबा गई। आरोही भी शायद समझ रही थी, उसने मेरा हाथ थामकर मुझे एक मूक दिलासा दिया के अब वो हमेशा के लिए मेरी ही है। खैर, फिर मंगलसूत्र, सिन्दूर और सात फेरे... हम दोनों आज एक पुराने रिश्ते से ऊपर उठकर एक नए बंधन में बंध चुके थे। ये बंधन मेरे लिए बहुत खास था। मैं तय कर चुका था के अब आरोही की जिंदगी में मैं हर खुशी भर दूंगा। उसे किसी भी चीज की कमी नहीं होने दूंगा। उसे इतना प्यार दूंगा के वो पिछले सारे दर्द भूल जाएगी। हमने पंडित जी का आशीर्वाद लिया,

पंडित जी : सदा सुहागन रहो बेटी, तुम दोनो की जोड़ी सदा बनी रहे।

आरोही के माथे पर आज फिर सिंदूर लग चुका था, आज फिर उसके गले में मंगलसूत्र था, आज फिर वो एक सुहागन लग रही थी। उसका ये रूप जो मैने जेल से आकर देखा था, इस रूप में वो मुझे अप्सरा समान ही लग रही थी। पर आज उसका ये सिन्दूर, मंगलसूत्र और सब कुछ मेरे नाम का था, सिर्फ मेरे नाम का। आज से हम शायद एक नए और पवित्र बंधन में बंध गए थे और एक आशियाना जिसका ख्वाब मैने देखा था वो आज सचमुच पूरा होने जा रहा था।
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Sirajali

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मेरी प्यारी बहन

भाग – 5 [नया बंधन]

रात को आरोही को गले लगाए ना जाने कब मेरी आंख लग गई। सुबह मेरी नींद मेरे चेहरे पर कुछ गीले एहसास से टूटी। जब मैंने आंखें खोली तो पाया के आरोही मेरे सर के पास खड़ी थी। वो शायद नहाकर आई थी, क्योंकि इस वक्त उसके बाल गीले थे। उसने अपने बालों को मेरे चेहरे पर डाला हुआ था और मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी। पर जैसे ही उसे एहसास हुआ के मैं उठ चुका हूं और उसे ही अपलक निहार रहा हूं तो उसकी मुस्कान लज्जा में बदल गई। उसने अपनी नज़रें झुका ली और पलट कर जाने लगी पर मैंने तभी उसका हाथ पकड़ लिया और उसे खींचकर अपने ऊपर गिरा लिया।

गीले बालों में वो कुछ अधिक ही हसीन लग रही थी और उसे देख कर मेरे दिल में नया सा एहसास उबाल मार रहा था। वो मेरे ऊपर गिरी हुई थी और शर्म से अपना सर मेरे सीने में दबाए हुए थी। मैंने उसके चेहरे पर आ रहे बालों को उसके कान के पीछे किया और फिर अपने दोनो हाथों से उसकी कमर को थाम लिया। वहां सहलाते हुए मैने कहा,

मैं : आज तो बड़ी ही अच्छी सुबह हुई है। काश ऐसे ही मुझे रोज़ सुबह इस परी का चेहरा देखने को मिले।

मेरे द्वारा अपनी तारीफ पर वो हल्की सी शर्मा गई पर फिर मेरे गाल पर किस करके बोली,

आरोही : मैं रोज़ ऐसे ही जगाऊंगी अपने राजकुमार को।

मैं : तो हम मैडम के राजकुमार हैं!

आरोही : हम्म्म... मेरे सपनों के राजकुमार।

उसकी नादानी भरी बात पर मैं मुस्कुराने लगा और वो मेरे सीने पर सहलाते हुए मुझे देखने लगी। पर तभी मैंने उसकी कमर को हल्का सा झटका देकर उसे ऊपर की तरफ खींच लिया। अब हम दोनो के चेहरे एक दूसरे के सामने थे और मैं उसकी गर्म सांसें अपने चेहरे पर महसूस कर पा रहा था। मैने अपनी एक उंगली से उसके गाल को सहलाया और फिर उसके होंठों पर उसे फिराने लगा। मेरी इस हरकत से उसका शरीर कांपने लगा था। तभी मैने उसके चेहरे को नीचे की तरफ झुकाया, आगे क्या होने वाला था शायद वो समझ गई थी और उसके होंठ फड़फड़ाने लगे थे।

मैने हल्के से अपने होंठों को उसके होंठों पर स्पर्श कर दिया। ये एक पल का मिलन काफी था मुझे एक अलग ही दुनिया में पहुंचाने के लिए। बस तभी मैंने उसके उपरी होंठ को अपने होंठों में भर लिया और हल्के से चूस लिया। उसकी आंखें मदहोशी से बंद हो चली थी। मैंने उसकी कुर्ती के अंदर हाथ डाले और उसकी नग्न कमर पर फिराने लगा। इधर मैं लगातार उसके लबों का रसपान कर रहा था। उसका निचला होंठ कुछ अधिक स्वादिष्ट सा लग रहा था मुझे, तभी मैंने उसकी ज़ुबान को अपने होंठों में कैद कर लिया और उसे चूसने लगा। अचानक ही शायद उसे अपनी हालत को अंदाज़ा हुआ और वो एक झटके में बिस्तर से उठ खड़ी हुई।

उसकी सांसें किसी रेलगाड़ी की तरह चल रही थी और वो पलटकर कमरे से बाहर जाने लगी। पर आज मेरा मन उसे खुद के करीब रखने का था, बेहद करीब। मैं उठा और भागकर उसे पीछे से अपनी बाहों में जकड़ लिया।

मैं : नही आरोही आज नही, आज तू मेरे पास रहेगी।

मैने इतना कहकर उसके कान की लौ को अपने होंठों में भर लिया और चूसने लगा। तभी उसकी एक घुटी सी सिसकी निकली – “आह्ह्ह”। मैने अगला हमला उसकी गर्दन पर किया और एक बार नीचे से ऊपर तक उसके गले पर ज़ुबान फेर दी। मैं उसके शरीर के बढ़ते तापमान को अच्छे से महसूस कर पा रहा था। तभी मुझे चौंकाते हुए वो पलटी और मेरे चेहरे को दोनो हाथों में थामकर मेरे होंठों पर हमला कर दिया। उसने मेरे ऊपर वाले होंठ को काट लिया। बस फिर तो वो बेकाबू सी हो गई थी और लगभग मेरे होंठों को चबाने लगी। मुझे दर्द तो हो रहा था पर मैं उसे रोकना नहीं चाहता था।

तभी मेरे होंठों से खून रिसने लगा जिसके कारण वो मुझसे अलग हुई। मेरे होंठ थोड़े सूज गए थे और कटे हुए लग रहे थे। वो ये देख कर डर सी गई और अपने मुंह पर दोनो हाथ रख लिए। अगले ही पल उसने अपने कान पकड़ लिए और आंखों में पानी के कतरे लिए मुझे देख कर बोली,

आरोही : भईयू, सॉरी... मैने जान बूझ के नही... गलती से। प्लीज़ मुझसे नाराज़ मत होना...

मैने उसे गले लगा लिया और बोला,

मैं : मैं तुझसे कभी नाराज़ नही हो सकता मेरी जंगली बिल्ली, तेरा दिया हर दर्द मुझे कुबूल है।

मेरी इस बात का शायद बहुत गहरा असर हुआ था उसपर। वो मुझे एक टक देखने लगी और फिर मेरे होंठों पर हल्के से उंगली फेरी। जलन से मेरी आंखें बंद हो गई। फिर मुझे हैरान करते हुए उसने अपनी जीभ निकाली और उसे मेरे होंठों पर घुमाने लगी जैसे मलहम लगा रही हो। वो प्यार से मेरे बालों को सहलाते हुए ये कर रही थी। मैने उसे खुद से अलग किया तो वो मुझे सवालिया नजरों से देखने लगी। पर तभी मैं नीचे बैठ गया और उसकी कुर्ती को हल्का सा ऊपर उठा दिया। उसकी आंखें मेरी इस हरकत से चौड़ी हो गई थी।

मैने एक बार उसकी आंखों में देखा और फिर उसके पेट पर एक चुम्बन जड़ दिया। बिल्कुल मक्खन सी मुलायम त्वचा थी उसकी। मेरी नजर जब उसकी गहरी नाभि पर पड़ी तो मेरा दिमाग मदहोश होने लगा। मैं उसके मोह पाश में बंधा एक दम से उसकी नाभि को चूमने लगा।

आरोही : भईयूयूयूयूयू...

तभी मैंने अपनी जीभ उसकी नाभि में डाल दी और उसकी लगभग एक चीख ही निकल गई। उसने मेरे बालों को कस कर पकड़ लिया और मेरा मुंह अपने पेट पर दबाने लगी। काफी देर बाद मैं अलग हुआ और उसे देख कर बोला,

मैं : तू तो बहुत मीठी है मेरी गुड़िया।

वो एक दम शर्माती हुई कमरे से भाग गई। मैं बस उसे जाते देख कर मुस्कुराने लगा। पर मैंने अपने मन में एक विचार को लेकर निश्चय कर लिया था। मैने किसी को फोन लगाया और कुछ देर तक एक बारे में बात की। उसके बाद मैं नित्य क्रिया में लग गया। खैर, नहा धोकर जब मैं तैयार हो चुका था, तब मैं बाहर आरोही के पास पहुंचा। वो रसोई में खड़ी थी और नाश्ता बनाने में लगी थी। उसके बालों की एक लट उसके चेहरे पर आ रही थी और वो परेशान होकर बार – बार उसे सही करने की कोशिश कर रही थी। पर उसके हाथ आटा गूथने के कारण साफ नही थे इसीलिए वो ठीक तरह से नही कर पा रही थी।

मैं मुस्कुराकर उसके पास जाकर खड़ा हो गया और शेल्फ से टेक लगाकर उसे निहारने लगा। उसने एक नजर मुझपर डाली और स्वयं ही एक बेहद ही प्यारी स्माइल उसके होंठों पर आ गई। फिर वो दोबारा से अपने काम में लग गई। पर अबकी बार जैसे ही उसके बाल उसके चेहरे पर आए मैने दोनो हाथों से उसके बालों को पीछे करके जूड़ा बना दिया। अकसर बचपन में मैं ही उसके बाल बनाया करता था और शायद वही याद करके मेरे दिल में गुदगुदी होने लगी।

मैं : आरोही चल जल्दी से नाश्ता करते हैं फिर हमे कहीं जाना है।

आरोही : कहां भईयू?

मैं : जब चलेंगे तब पता चल जाएगा मेरी गुड़िया। अब तैयार हो जा फटाफट और हां लहंगा पहन लियो।

आरोही : लहंगा! कुछ खास है क्या आज?

मैं : खास... बहुत खास। तू बस सवाल मत कर और तैयार होने चल।

खैर, इसके बाद हमने नाश्ता किया और मैने आरोही को तैयार होने का बोल दिया और खुद बाहर चला गया किसी से मिलने। जब मैं कुछ दो घंटे बाद घर लौटा तो पाया आरोही हॉल में सोफे पर बैठी थी। मैं उसे देख कर अपनी ही जगह पर जम सा गया। बिना पलक झपकाए मैं उसे देखे जा रहा था। और ये लाजमी भी था, आरोही ने इस वक्त एक हल्के गुलाबी रंग का लहंगा पहना हुआ था। उसे मेक–अप वगेरह का तो शुरू से ही कोई शौक नही था और मेरे मुताबिक तो उसे जरूरत भी नहीं थी। आखिर वो पहले से ही एक परी जो थी। खैर, उसने लहंगे से मेल खाता हुआ ही हार, बालियां और बाकी जेवर पहने हुए थे। सबसे खास मुझे लग रही थी उसके नाम में पहनी वो नथ। वो भी मुझे देख कर अपनी जगह से खड़ी हो चुकी थी और जैसे मैं मूर्खों की तरह उसे देख रहा था, वो भी मुझे ही देखे जा रही थी।

मैं बाहर से ही तैयार होकर आया था और मैने फिल्हाल एक शेरवानी टाइप परिधान पहना हुआ था। मैं मंत्रमुग्ध सा होकर उसके पास पहुंच गया और उसके दोनो गालों को थामकर एक चुम्बन उसके माथे पर अंकित कर दिया। ये चुम्बन मेरे उसके लिए प्रेम से सराबोर था, जिसे वो भी भली भांति समझ रही थी। नतीजतन उसके होंठों पर एक मुस्कान आ गई। खैर, उसने मुझसे पूछा भी के हम कहां जा रहे हैं पर मैने उसे इंतजार करने को कहा। जब हम बाहर आए तो एक टैक्सी मैने पहले ही मंगवा ली थी। हम उसमें बैठे और एक तरफ निकल पड़े। टैक्सी ड्राइवर एक काफी उम्र के बुज़ुर्ग से व्यक्ति थे और हम देख कर मुस्कुरा रहे थे। उनका ऐसा करना भी लाज़मी था क्योंकि मैं और आरोही वहां बस एक दूसरे का हाथ थामे अपने प्रेमी को निहार रहे थे।

जब टैक्सी अपने गंतव्य पर पहुंचने वाली थी तो मैंने आरोही को आंखों पर एक पट्टी बांध दी। उसने एक बार फिर से सवाल किया पर मैने उसे बस कुछ देर सब्र करने को कह दिया। अब तक वो काफी अधीर हो चुकी थी जान ने के लिए की मैं उसे लेकर कहां जा रहा था। टैक्सी ड्राइवर भी अब तक सब समझ चुका था। खैर, टैक्सी एक मंदिर के बाहर रुकी और मैं आरोही को लेकर अंदर चला गया। जब रास्ते में सीढियां आई तो मैंने उसे अपनी गोद में उठा लिया था। अंदर पहुंचकर मैने पुजारी जी को प्रणाम किया और फिर आरोही की आंखों से पट्टी हटा दी। जैसे ही उसने आस पास के हालात का जायज़ा लिया वो सारा मामला समझ गई और भीगी आंखों से मेरी तरफ देखने लगी। मैं बस उसे देख कर मुस्कुरा रहा था। वो एक झटके से मुझसे लिपट गई और अश्रु बहाने लगी। मैं उसके सर पर हाथ फेरकर उसे शांत कर रहा था।

आरोही : आप मुझसे सचमें शादी करोगे?

मैं : तुझे अभी भी कोई शक है!

अचानक ही वो मुझसे अलग हुई और मेरे हाथों को पकड़कर बोली,

आरोही : थैंक यू... थैंक यू... थैंक यू... आज आपने मुझे मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी खुशी दी है। थैंक यू।

पंडित जी : चलो बेटा अब जल्दी करो, मुहूर्त निकला जा रहा है।

हम दोनों ने एक बार एक – दूसरे की तरफ देखा और फिर अपनी जगह पर बैठ गए। जब बारी कन्यादान की आती तो मुझे वो पल याद आ गया जब हर्षित के साथ आरोही की शादी हुई थी। कितना दर्द, कितनी पीड़ा मेरे कलेजे में हुई थी, मैं ही जानता था। मेरी आंखें उस पल को याद करके डबडबा गई। आरोही भी शायद समझ रही थी, उसने मेरा हाथ थामकर मुझे एक मूक दिलासा दिया के अब वो हमेशा के लिए मेरी ही है। खैर, फिर मंगलसूत्र, सिन्दूर और सात फेरे... हम दोनों आज एक पुराने रिश्ते से ऊपर उठकर एक नए बंधन में बंध चुके थे। ये बंधन मेरे लिए बहुत खास था। मैं तय कर चुका था के अब आरोही की जिंदगी में मैं हर खुशी भर दूंगा। उसे किसी भी चीज की कमी नहीं होने दूंगा। उसे इतना प्यार दूंगा के वो पिछले सारे दर्द भूल जाएगी। हमने पंडित जी का आशीर्वाद लिया,

पंडित जी : सदा सुहागन रहो बेटी, तुम दोनो की जोड़ी सदा बनी रहे।

आरोही के माथे पर आज फिर सिंदूर लग चुका था, आज फिर उसके गले में मंगलसूत्र था, आज फिर वो एक सुहागन लग रही थी। उसका ये रूप जो मैने जेल से आकर देखा था, इस रूप में वो मुझे अप्सरा समान ही लग रही थी। पर आज उसका ये सिन्दूर, मंगलसूत्र और सब कुछ मेरे नाम का था, सिर्फ मेरे नाम का। आज से हम शायद एक नए और पवित्र बंधन में बंध गए थे और एक आशियाना जिसका ख्वाब मैने देखा था वो आज सचमुच पूरा होने जा रहा था।
bhai.... prem agar saccha ho duniya ki koi takat usko milne se nahi rok sakti .. aapki kalam ke jaadu se ... aapke likhne ki kala se .. kahani me char chaand lag gaye hain ... aap sach mein ek acche lekhak hain .. aap kahani likhne ke liye jin shabdon ka paryog karte hain wo shabd seedhe dil me utar jaate hain .............................. pyar aur emotions se bharpur update
 

Zatchx

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मेरी प्यारी बहन

भाग – 5 [नया बंधन]

रात को आरोही को गले लगाए ना जाने कब मेरी आंख लग गई। सुबह मेरी नींद मेरे चेहरे पर कुछ गीले एहसास से टूटी। जब मैंने आंखें खोली तो पाया के आरोही मेरे सर के पास खड़ी थी। वो शायद नहाकर आई थी, क्योंकि इस वक्त उसके बाल गीले थे। उसने अपने बालों को मेरे चेहरे पर डाला हुआ था और मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी। पर जैसे ही उसे एहसास हुआ के मैं उठ चुका हूं और उसे ही अपलक निहार रहा हूं तो उसकी मुस्कान लज्जा में बदल गई। उसने अपनी नज़रें झुका ली और पलट कर जाने लगी पर मैंने तभी उसका हाथ पकड़ लिया और उसे खींचकर अपने ऊपर गिरा लिया।

गीले बालों में वो कुछ अधिक ही हसीन लग रही थी और उसे देख कर मेरे दिल में नया सा एहसास उबाल मार रहा था। वो मेरे ऊपर गिरी हुई थी और शर्म से अपना सर मेरे सीने में दबाए हुए थी। मैंने उसके चेहरे पर आ रहे बालों को उसके कान के पीछे किया और फिर अपने दोनो हाथों से उसकी कमर को थाम लिया। वहां सहलाते हुए मैने कहा,

मैं : आज तो बड़ी ही अच्छी सुबह हुई है। काश ऐसे ही मुझे रोज़ सुबह इस परी का चेहरा देखने को मिले।

मेरे द्वारा अपनी तारीफ पर वो हल्की सी शर्मा गई पर फिर मेरे गाल पर किस करके बोली,

आरोही : मैं रोज़ ऐसे ही जगाऊंगी अपने राजकुमार को।

मैं : तो हम मैडम के राजकुमार हैं!

आरोही : हम्म्म... मेरे सपनों के राजकुमार।

उसकी नादानी भरी बात पर मैं मुस्कुराने लगा और वो मेरे सीने पर सहलाते हुए मुझे देखने लगी। पर तभी मैंने उसकी कमर को हल्का सा झटका देकर उसे ऊपर की तरफ खींच लिया। अब हम दोनो के चेहरे एक दूसरे के सामने थे और मैं उसकी गर्म सांसें अपने चेहरे पर महसूस कर पा रहा था। मैने अपनी एक उंगली से उसके गाल को सहलाया और फिर उसके होंठों पर उसे फिराने लगा। मेरी इस हरकत से उसका शरीर कांपने लगा था। तभी मैने उसके चेहरे को नीचे की तरफ झुकाया, आगे क्या होने वाला था शायद वो समझ गई थी और उसके होंठ फड़फड़ाने लगे थे।

मैने हल्के से अपने होंठों को उसके होंठों पर स्पर्श कर दिया। ये एक पल का मिलन काफी था मुझे एक अलग ही दुनिया में पहुंचाने के लिए। बस तभी मैंने उसके उपरी होंठ को अपने होंठों में भर लिया और हल्के से चूस लिया। उसकी आंखें मदहोशी से बंद हो चली थी। मैंने उसकी कुर्ती के अंदर हाथ डाले और उसकी नग्न कमर पर फिराने लगा। इधर मैं लगातार उसके लबों का रसपान कर रहा था। उसका निचला होंठ कुछ अधिक स्वादिष्ट सा लग रहा था मुझे, तभी मैंने उसकी ज़ुबान को अपने होंठों में कैद कर लिया और उसे चूसने लगा। अचानक ही शायद उसे अपनी हालत को अंदाज़ा हुआ और वो एक झटके में बिस्तर से उठ खड़ी हुई।

उसकी सांसें किसी रेलगाड़ी की तरह चल रही थी और वो पलटकर कमरे से बाहर जाने लगी। पर आज मेरा मन उसे खुद के करीब रखने का था, बेहद करीब। मैं उठा और भागकर उसे पीछे से अपनी बाहों में जकड़ लिया।

मैं : नही आरोही आज नही, आज तू मेरे पास रहेगी।

मैने इतना कहकर उसके कान की लौ को अपने होंठों में भर लिया और चूसने लगा। तभी उसकी एक घुटी सी सिसकी निकली – “आह्ह्ह”। मैने अगला हमला उसकी गर्दन पर किया और एक बार नीचे से ऊपर तक उसके गले पर ज़ुबान फेर दी। मैं उसके शरीर के बढ़ते तापमान को अच्छे से महसूस कर पा रहा था। तभी मुझे चौंकाते हुए वो पलटी और मेरे चेहरे को दोनो हाथों में थामकर मेरे होंठों पर हमला कर दिया। उसने मेरे ऊपर वाले होंठ को काट लिया। बस फिर तो वो बेकाबू सी हो गई थी और लगभग मेरे होंठों को चबाने लगी। मुझे दर्द तो हो रहा था पर मैं उसे रोकना नहीं चाहता था।

तभी मेरे होंठों से खून रिसने लगा जिसके कारण वो मुझसे अलग हुई। मेरे होंठ थोड़े सूज गए थे और कटे हुए लग रहे थे। वो ये देख कर डर सी गई और अपने मुंह पर दोनो हाथ रख लिए। अगले ही पल उसने अपने कान पकड़ लिए और आंखों में पानी के कतरे लिए मुझे देख कर बोली,

आरोही : भईयू, सॉरी... मैने जान बूझ के नही... गलती से। प्लीज़ मुझसे नाराज़ मत होना...

मैने उसे गले लगा लिया और बोला,

मैं : मैं तुझसे कभी नाराज़ नही हो सकता मेरी जंगली बिल्ली, तेरा दिया हर दर्द मुझे कुबूल है।

मेरी इस बात का शायद बहुत गहरा असर हुआ था उसपर। वो मुझे एक टक देखने लगी और फिर मेरे होंठों पर हल्के से उंगली फेरी। जलन से मेरी आंखें बंद हो गई। फिर मुझे हैरान करते हुए उसने अपनी जीभ निकाली और उसे मेरे होंठों पर घुमाने लगी जैसे मलहम लगा रही हो। वो प्यार से मेरे बालों को सहलाते हुए ये कर रही थी। मैने उसे खुद से अलग किया तो वो मुझे सवालिया नजरों से देखने लगी। पर तभी मैं नीचे बैठ गया और उसकी कुर्ती को हल्का सा ऊपर उठा दिया। उसकी आंखें मेरी इस हरकत से चौड़ी हो गई थी।

मैने एक बार उसकी आंखों में देखा और फिर उसके पेट पर एक चुम्बन जड़ दिया। बिल्कुल मक्खन सी मुलायम त्वचा थी उसकी। मेरी नजर जब उसकी गहरी नाभि पर पड़ी तो मेरा दिमाग मदहोश होने लगा। मैं उसके मोह पाश में बंधा एक दम से उसकी नाभि को चूमने लगा।

आरोही : भईयूयूयूयूयू...

तभी मैंने अपनी जीभ उसकी नाभि में डाल दी और उसकी लगभग एक चीख ही निकल गई। उसने मेरे बालों को कस कर पकड़ लिया और मेरा मुंह अपने पेट पर दबाने लगी। काफी देर बाद मैं अलग हुआ और उसे देख कर बोला,

मैं : तू तो बहुत मीठी है मेरी गुड़िया।

वो एक दम शर्माती हुई कमरे से भाग गई। मैं बस उसे जाते देख कर मुस्कुराने लगा। पर मैंने अपने मन में एक विचार को लेकर निश्चय कर लिया था। मैने किसी को फोन लगाया और कुछ देर तक एक बारे में बात की। उसके बाद मैं नित्य क्रिया में लग गया। खैर, नहा धोकर जब मैं तैयार हो चुका था, तब मैं बाहर आरोही के पास पहुंचा। वो रसोई में खड़ी थी और नाश्ता बनाने में लगी थी। उसके बालों की एक लट उसके चेहरे पर आ रही थी और वो परेशान होकर बार – बार उसे सही करने की कोशिश कर रही थी। पर उसके हाथ आटा गूथने के कारण साफ नही थे इसीलिए वो ठीक तरह से नही कर पा रही थी।

मैं मुस्कुराकर उसके पास जाकर खड़ा हो गया और शेल्फ से टेक लगाकर उसे निहारने लगा। उसने एक नजर मुझपर डाली और स्वयं ही एक बेहद ही प्यारी स्माइल उसके होंठों पर आ गई। फिर वो दोबारा से अपने काम में लग गई। पर अबकी बार जैसे ही उसके बाल उसके चेहरे पर आए मैने दोनो हाथों से उसके बालों को पीछे करके जूड़ा बना दिया। अकसर बचपन में मैं ही उसके बाल बनाया करता था और शायद वही याद करके मेरे दिल में गुदगुदी होने लगी।

मैं : आरोही चल जल्दी से नाश्ता करते हैं फिर हमे कहीं जाना है।

आरोही : कहां भईयू?

मैं : जब चलेंगे तब पता चल जाएगा मेरी गुड़िया। अब तैयार हो जा फटाफट और हां लहंगा पहन लियो।

आरोही : लहंगा! कुछ खास है क्या आज?

मैं : खास... बहुत खास। तू बस सवाल मत कर और तैयार होने चल।

खैर, इसके बाद हमने नाश्ता किया और मैने आरोही को तैयार होने का बोल दिया और खुद बाहर चला गया किसी से मिलने। जब मैं कुछ दो घंटे बाद घर लौटा तो पाया आरोही हॉल में सोफे पर बैठी थी। मैं उसे देख कर अपनी ही जगह पर जम सा गया। बिना पलक झपकाए मैं उसे देखे जा रहा था। और ये लाजमी भी था, आरोही ने इस वक्त एक हल्के गुलाबी रंग का लहंगा पहना हुआ था। उसे मेक–अप वगेरह का तो शुरू से ही कोई शौक नही था और मेरे मुताबिक तो उसे जरूरत भी नहीं थी। आखिर वो पहले से ही एक परी जो थी। खैर, उसने लहंगे से मेल खाता हुआ ही हार, बालियां और बाकी जेवर पहने हुए थे। सबसे खास मुझे लग रही थी उसके नाम में पहनी वो नथ। वो भी मुझे देख कर अपनी जगह से खड़ी हो चुकी थी और जैसे मैं मूर्खों की तरह उसे देख रहा था, वो भी मुझे ही देखे जा रही थी।

मैं बाहर से ही तैयार होकर आया था और मैने फिल्हाल एक शेरवानी टाइप परिधान पहना हुआ था। मैं मंत्रमुग्ध सा होकर उसके पास पहुंच गया और उसके दोनो गालों को थामकर एक चुम्बन उसके माथे पर अंकित कर दिया। ये चुम्बन मेरे उसके लिए प्रेम से सराबोर था, जिसे वो भी भली भांति समझ रही थी। नतीजतन उसके होंठों पर एक मुस्कान आ गई। खैर, उसने मुझसे पूछा भी के हम कहां जा रहे हैं पर मैने उसे इंतजार करने को कहा। जब हम बाहर आए तो एक टैक्सी मैने पहले ही मंगवा ली थी। हम उसमें बैठे और एक तरफ निकल पड़े। टैक्सी ड्राइवर एक काफी उम्र के बुज़ुर्ग से व्यक्ति थे और हम देख कर मुस्कुरा रहे थे। उनका ऐसा करना भी लाज़मी था क्योंकि मैं और आरोही वहां बस एक दूसरे का हाथ थामे अपने प्रेमी को निहार रहे थे।

जब टैक्सी अपने गंतव्य पर पहुंचने वाली थी तो मैंने आरोही को आंखों पर एक पट्टी बांध दी। उसने एक बार फिर से सवाल किया पर मैने उसे बस कुछ देर सब्र करने को कह दिया। अब तक वो काफी अधीर हो चुकी थी जान ने के लिए की मैं उसे लेकर कहां जा रहा था। टैक्सी ड्राइवर भी अब तक सब समझ चुका था। खैर, टैक्सी एक मंदिर के बाहर रुकी और मैं आरोही को लेकर अंदर चला गया। जब रास्ते में सीढियां आई तो मैंने उसे अपनी गोद में उठा लिया था। अंदर पहुंचकर मैने पुजारी जी को प्रणाम किया और फिर आरोही की आंखों से पट्टी हटा दी। जैसे ही उसने आस पास के हालात का जायज़ा लिया वो सारा मामला समझ गई और भीगी आंखों से मेरी तरफ देखने लगी। मैं बस उसे देख कर मुस्कुरा रहा था। वो एक झटके से मुझसे लिपट गई और अश्रु बहाने लगी। मैं उसके सर पर हाथ फेरकर उसे शांत कर रहा था।

आरोही : आप मुझसे सचमें शादी करोगे?

मैं : तुझे अभी भी कोई शक है!

अचानक ही वो मुझसे अलग हुई और मेरे हाथों को पकड़कर बोली,

आरोही : थैंक यू... थैंक यू... थैंक यू... आज आपने मुझे मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी खुशी दी है। थैंक यू।

पंडित जी : चलो बेटा अब जल्दी करो, मुहूर्त निकला जा रहा है।

हम दोनों ने एक बार एक – दूसरे की तरफ देखा और फिर अपनी जगह पर बैठ गए। जब बारी कन्यादान की आती तो मुझे वो पल याद आ गया जब हर्षित के साथ आरोही की शादी हुई थी। कितना दर्द, कितनी पीड़ा मेरे कलेजे में हुई थी, मैं ही जानता था। मेरी आंखें उस पल को याद करके डबडबा गई। आरोही भी शायद समझ रही थी, उसने मेरा हाथ थामकर मुझे एक मूक दिलासा दिया के अब वो हमेशा के लिए मेरी ही है। खैर, फिर मंगलसूत्र, सिन्दूर और सात फेरे... हम दोनों आज एक पुराने रिश्ते से ऊपर उठकर एक नए बंधन में बंध चुके थे। ये बंधन मेरे लिए बहुत खास था। मैं तय कर चुका था के अब आरोही की जिंदगी में मैं हर खुशी भर दूंगा। उसे किसी भी चीज की कमी नहीं होने दूंगा। उसे इतना प्यार दूंगा के वो पिछले सारे दर्द भूल जाएगी। हमने पंडित जी का आशीर्वाद लिया,

पंडित जी : सदा सुहागन रहो बेटी, तुम दोनो की जोड़ी सदा बनी रहे।

आरोही के माथे पर आज फिर सिंदूर लग चुका था, आज फिर उसके गले में मंगलसूत्र था, आज फिर वो एक सुहागन लग रही थी। उसका ये रूप जो मैने जेल से आकर देखा था, इस रूप में वो मुझे अप्सरा समान ही लग रही थी। पर आज उसका ये सिन्दूर, मंगलसूत्र और सब कुछ मेरे नाम का था, सिर्फ मेरे नाम का। आज से हम शायद एक नए और पवित्र बंधन में बंध गए थे और एक आशियाना जिसका ख्वाब मैने देखा था वो आज सचमुच पूरा होने जा रहा थ
Awesome update bhai✌️
 
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vmvish

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ये छोटी कहानी कितने महीने में खतम होगी
normal_boy bhai

Abhi toh kahani just shuru hui hai, aur aap already iske khatam hone ke bare me puchh rahe ho !!

🤣🤣🤣
 
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