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Adultery घर में दफन राज(इंसेस्ट; एडल्टरी ; कॉकोल्ड)

क्या आप लोग मोनी दीदी के फ्लैशबैक जानना चाहोगे किसने पहली बार मोनी को कली से फूल बनाया

  • टीचर ने

  • या किसी घर के आदमी ने

  • मोनू को आप लोग बस हिलाते हुए छुप के देखना चाहते हैं या वो भी कुछ करे

  • मोनू को आप लोग बस हिलाते हुए छुप कर देखना चाहते

  • क्या मोनू की मम्मी का सीक्रेट थ्रीसम हो जिसके बारे में मोनू को नहीं बताएगा अशोक मामा

  • क्या अशोक मामा मोनू को सब खेल दिखायेगा या अब उसके पीठ पीछे उसकी मम्मी की चोदाई करेगा


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amarAkbarAnthony

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Sab se pehle yeh aapka story hain aapko jaise atcha lage waise isko likhe but mera sujhab hain pehle bandana or ashok ki story thode aage khije baki ka character bad main introduce kariye jaise story ki demand ho
 
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Rsingh

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Sab se pehle yeh aapka story hain aapko jaise atcha lage waise isko likhe but mera sujhab hain pehle bandana or ashok ki story thode aage khije baki ka character bad main introduce kariye jaise story ki demand ho
वंदना और अशोक की कहानी तो आगे बढ़ेगी जरूर लेकिन बात यहह कि।।

क्या अशोक यहां पर मोनू कोधोखा देगा क्योंकि क्योंकि वंदना उसके हाथों में आ गईह । क्योंकि मोनू के होते हुए अशोक वंदनाको अपने हिसाब से gande trike से रगड़ नहीं पाता था।।


अशोक आगे जाकर के वंदना को अपने हिसाब से मैनिपुलेट करके वंदना के साथ में इस कदर वह भावनात्मक रूप से वंदना को अपनेहथों में ले लेगा


यहां शारीरिक मानसिक और भावनात्मक तीनों तरीके से अशोक के हाथ में आ गई होगीवदना। वंदना एक औरत है और अशोक को मालूम है कि एक घरेलू औरत के अंदर की छुपी हुई raand को कैसे बाहर निकाला जाता है।।


और जब मोनू को पता चलेगा तो क्या वह अशोक से बदला लेनेके लिए कुछ प्लान करेगा जैसे कि अशोक बंदना जोड़ी तोड़ने के लिए इसके बारे में अशोक और वंदना को कोई खबर नहीं हगी
 
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amarAkbarAnthony

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वंदना और अशोक की कहानी तो आगे बढ़ेगी जरूर लेकिन बात यहह कि।।

क्या अशोक यहां पर मोनू कोधोखा देगा क्योंकि क्योंकि वंदना उसके हाथों में आ गईह । क्योंकि मोनू के होते हुए अशोक वंदनाको अपने हिसाब से gande trike से रगड़ नहीं पाता था।।


अशोक आगे जाकर के वंदना को अपने हिसाब से मैनिपुलेट करके वंदना के साथ में इस कदर वह भावनात्मक रूप से वंदना को अपनेहथों में ले लेगा


यहां शारीरिक मानसिक और भावनात्मक तीनों तरीके से अशोक के हाथ में आ गई होगीवदना। वंदना एक औरत है और अशोक को मालूम है कि एक घरेलू औरत के अंदर की छुपी हुई raand को कैसे बाहर निकाला जाता है।।


और जब मोनू को पता चलेगा तो क्या वह अशोक से बदला लेनेके लिए कुछ प्लान करेगा जैसे कि अशोक बंदना जोड़ी तोड़ने के लिए इसके बारे में अशोक और वंदना को कोई खबर नहीं हगी
👍 ok
 

Rsingh

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थोड़ी देर में मैं फास्ट फूड खाकर के घर की तरफ निकल रहा होता हूं मैं घर की तरफ निकलते हुए धीरे-धीरे रास्ते की तरफ चल रहा होता हूं लेकिन मेरे मोहल्ले की तरफ जा रहा होता है। थोड़े ही देर में मैं घर पहुंच जाता हूं घर पहुंचने के बाद में दरवाजे पर आवाज लगता हूं तो मम्मी दरवाजा खोल देती है और दरवाजा खोलने के बाद वापस मम्मी तुरंत अंदर से दरवाजा भी लॉक कर लेती है।

मैं अभी भी देखता हूं तो अशोक मामा की बाइक कहीं भी नहीं दिख रही होती है मुझे लग रहा होता है कि वह शायद कहीं बाहर गए हुए हैं। मैंने सोचा कि एक बार मम्मी से पूछूं लेकिन फिर सोचा कि क्या पूछना उचित होगा। क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि उनको किसी भी तरीके का शक हो लेकिन बेचैनी तो मेरे अंदर भी क्योंकि पिछले कुछ दिनों जो मैंने उनके और अशोक मामा के बीच की जोरदार ठुकाई देखी थी उसको देखने के लिए मेरा दिल बहुत बेचैन हो रहा था मगर अचानक सब कुछ बंद हो जाने से मैं अपने आप को काबू नहीं कर पा रहा था और मुझे डर था कहीं इस बेचैनी में मैं कहीं कुछ ऐसा बेवकूफी वाला कदम न नहीं उठा लो जिससे मम्मी को शक हो जाए। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं ना ही मुझे पूछने में बन रहा था और ना ही न पचने में बन रहा था दोनों ही परिस्थितियों में मेरे अंदर में बेचैनी उत्पन्न हो रही थी।

माहौल को देखते हुए मैं चुपचाप रहना ही उचित समझा मैं घर के अंदर आने के बाद मम्मी के कमरे में जाकर के टीवी खोलकर टीवी देखना शुरू कर देता हूं । टीवी पर भी कुछ अच्छा ए नहीं रहा होता है मैं इधर-उधर चैनल बदल रहा होता हूं तभी द मम्मी हॉलीवुड की फिल्म चल रही होती है मैं रुक करके चैनल के ऊपर फिल्म देखना शुरू कर देता हूं फास्ट फूड खाने की वजह से वह भी थोड़ा ज्यादा खाने की वजह से और सीधा बिस्तर में आकर के लेट के फिल्म देखने की वजह से कभी मेरी आंखों में नींद समा गई मुझे मालूम ही नहीं चला और मैं गहरी नींद में चला गया।।


वहीं दूसरी तरफ वंदना मोनू के नजदीक आते हुए जैसे मानो की उसे चेक कर रही हो और जब वह चेक करती है तो मोनू सच में गहरी नींद में होता है वंदना धीरे से टीवी का रिमोट लेकर के टीवी को बंद कर देती है और कमरे की बत्ती बुझा देती सर्दी की रात में मा नींद की आगोश में चला गया होता है और वंदना अच्छे से मोनू को चेक करने के बाद कमरे में पूरी तरीके से खामोशी छाई हुई होती है दीवार घड़ी के चिक चिक चलने की आवाज आ रही होती है। अब मोनू पूरी तरीके से नींद की गिरफ्त में होता।। वंदना होली से मुस्कुराते हुए अंधेरे कमरे में अपने कपड़े को खोलते हुए अपनी ब्रा पैंटी सब उतार करके पूरी तरीके से नंगी हो जाती है और अपने ब्रा और पैंटी को अपने लॉकर में रखते हुए अपने लॉकर से एक मैक्सी निकाल लेती है और अपने नंगे जिस्म के ऊपर सिर्फ एक मैक्सी पहन लेती है। अपने ड्रेसिंग टेबल की तरफ अगले ही पल कदम बढ़ाते हुए वंदना अपनी ड्रेसिंग से लिपस्टिक निकाल कर अपने होठों पर अच्छे से लिपस्टिक लगा लेती है और थोड़ी परफ्यूम लगा एक बार फिर से वह मोनू को चेक कर लेती है और जब वह कंफर्म हो जाती है कि मोनू सच में गहरी नींद की आगोश में चला गया है।

वंदना धीरे-धीरे पायल के छम छम के साथ में निकल करके कमरे से रात की खामोशी में धीरे से एक कमरे की तरफ बढ़ चलती है और जैसे ही कमरे के दरवाजे के ऊपर हाथ रखती है दरवाजा अंदर से खुला होता है। दरवाजा जैसे ही खुलता है वंदना के होठों पर एक कुटिल सी मुस्कान आ जाती है । अंदर कमरे में बिस्तर के ऊपर लेटा हुआ शख्स कोई और नहीं बल्कि अशोक था अशोक को कहीं ना कहीं इस बात का आभास हो गया था कि शायद वंदना अपने बेटे के बिस्तर के ऊपर होने की वजह से सही से खुल नहीं पा रही थी और कहीं ना कहीं अशोक को मोनू कबाब में हड्डी सा लग रहा था इसलिए उसने एक योजना बनाई और वह अपनी बाइक को मोनू के पापा के गेराज में जहां परउनकी कार रहती है वहां पर अंदर में लगता है और जिसकी चाबी वंदना के पास में होती है और मोनू को पिछले कुछ दिनों से खबर नहीं होती है कि अशोक मामा घर में ही होते हैं बस उसकी बाइक उसे नहीं दिखती है।।


अशोक: मैं मुस्कुराता हुआ वंदना को ऊपर से नीचे तक देखते हुए सो गया है वह चेक कर ली होना अच्छे से मैं वंदना को ऊपर से नीचे तक देख रहा होता हूं। मैं वंदना को इशारा करता हूं कैमरे का दरवाजा लगाने का और वंदना मेरे इशारे को समझते हुए कैमरे को अंदर से बंद कर लेती है। अब तो यहां ठीक है अब तो तुम्हें कोई दिक्कत नहीं होगी हम दोनों के अलावा यहां कोई नहीं है मैं मुस्कुराता हुआ वंदना को यह बात बोलता।।


क्या बात है काफी थकी हुई लग रही हो लगता है घर का कुछ ज्यादा ही काम करना पड़ रहा है आजकल तुमको तभी मैं वंदना को देखकर मुस्कुराते हुए इशारा करता हूं कपड़े खोलने का और मेरे इशारों मात्र से ही वंदना मेरी तरफ मुस्कुराते हुए देख एक ही पल में अपनी मैक्सी को उतार के नीचे गिरा देती है जिसे देखते हुए मुझे इस बात का अंदाजा हो गया था कि अब वंदना अच्छे से मेरे साथ में खुलेगी मैं वंदना को ऊपर से नीचे तक देख रहा हूं पूरे खुले बाल उसके और उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों के बीच में लटकता हुआ मंगलसूत्र और मांग में सिंदूर और मोटी जांघों के नीचे बालों में छुपी हुई चर्बी नुमा फुली बुर वंदना के दोनों पैरों के नीचे में उसकी मैक्सी गोल बनकर गिरी हुई होती है।। और वंदना ऐसे ही खड़ी होती है जैसे मानो कि मुझे अच्छे से देखने के लिए दे रही है अप
ने हुस्न को।
 

dreamsecrets

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थोड़ी देर में मैं फास्ट फूड खाकर के घर की तरफ निकल रहा होता हूं मैं घर की तरफ निकलते हुए धीरे-धीरे रास्ते की तरफ चल रहा होता हूं लेकिन मेरे मोहल्ले की तरफ जा रहा होता है। थोड़े ही देर में मैं घर पहुंच जाता हूं घर पहुंचने के बाद में दरवाजे पर आवाज लगता हूं तो मम्मी दरवाजा खोल देती है और दरवाजा खोलने के बाद वापस मम्मी तुरंत अंदर से दरवाजा भी लॉक कर लेती है।

मैं अभी भी देखता हूं तो अशोक मामा की बाइक कहीं भी नहीं दिख रही होती है मुझे लग रहा होता है कि वह शायद कहीं बाहर गए हुए हैं। मैंने सोचा कि एक बार मम्मी से पूछूं लेकिन फिर सोचा कि क्या पूछना उचित होगा। क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि उनको किसी भी तरीके का शक हो लेकिन बेचैनी तो मेरे अंदर भी क्योंकि पिछले कुछ दिनों जो मैंने उनके और अशोक मामा के बीच की जोरदार ठुकाई देखी थी उसको देखने के लिए मेरा दिल बहुत बेचैन हो रहा था मगर अचानक सब कुछ बंद हो जाने से मैं अपने आप को काबू नहीं कर पा रहा था और मुझे डर था कहीं इस बेचैनी में मैं कहीं कुछ ऐसा बेवकूफी वाला कदम न नहीं उठा लो जिससे मम्मी को शक हो जाए। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं ना ही मुझे पूछने में बन रहा था और ना ही न पचने में बन रहा था दोनों ही परिस्थितियों में मेरे अंदर में बेचैनी उत्पन्न हो रही थी।

माहौल को देखते हुए मैं चुपचाप रहना ही उचित समझा मैं घर के अंदर आने के बाद मम्मी के कमरे में जाकर के टीवी खोलकर टीवी देखना शुरू कर देता हूं । टीवी पर भी कुछ अच्छा ए नहीं रहा होता है मैं इधर-उधर चैनल बदल रहा होता हूं तभी द मम्मी हॉलीवुड की फिल्म चल रही होती है मैं रुक करके चैनल के ऊपर फिल्म देखना शुरू कर देता हूं फास्ट फूड खाने की वजह से वह भी थोड़ा ज्यादा खाने की वजह से और सीधा बिस्तर में आकर के लेट के फिल्म देखने की वजह से कभी मेरी आंखों में नींद समा गई मुझे मालूम ही नहीं चला और मैं गहरी नींद में चला गया।।


वहीं दूसरी तरफ वंदना मोनू के नजदीक आते हुए जैसे मानो की उसे चेक कर रही हो और जब वह चेक करती है तो मोनू सच में गहरी नींद में होता है वंदना धीरे से टीवी का रिमोट लेकर के टीवी को बंद कर देती है और कमरे की बत्ती बुझा देती सर्दी की रात में मा नींद की आगोश में चला गया होता है और वंदना अच्छे से मोनू को चेक करने के बाद कमरे में पूरी तरीके से खामोशी छाई हुई होती है दीवार घड़ी के चिक चिक चलने की आवाज आ रही होती है। अब मोनू पूरी तरीके से नींद की गिरफ्त में होता।। वंदना होली से मुस्कुराते हुए अंधेरे कमरे में अपने कपड़े को खोलते हुए अपनी ब्रा पैंटी सब उतार करके पूरी तरीके से नंगी हो जाती है और अपने ब्रा और पैंटी को अपने लॉकर में रखते हुए अपने लॉकर से एक मैक्सी निकाल लेती है और अपने नंगे जिस्म के ऊपर सिर्फ एक मैक्सी पहन लेती है। अपने ड्रेसिंग टेबल की तरफ अगले ही पल कदम बढ़ाते हुए वंदना अपनी ड्रेसिंग से लिपस्टिक निकाल कर अपने होठों पर अच्छे से लिपस्टिक लगा लेती है और थोड़ी परफ्यूम लगा एक बार फिर से वह मोनू को चेक कर लेती है और जब वह कंफर्म हो जाती है कि मोनू सच में गहरी नींद की आगोश में चला गया है।

वंदना धीरे-धीरे पायल के छम छम के साथ में निकल करके कमरे से रात की खामोशी में धीरे से एक कमरे की तरफ बढ़ चलती है और जैसे ही कमरे के दरवाजे के ऊपर हाथ रखती है दरवाजा अंदर से खुला होता है। दरवाजा जैसे ही खुलता है वंदना के होठों पर एक कुटिल सी मुस्कान आ जाती है । अंदर कमरे में बिस्तर के ऊपर लेटा हुआ शख्स कोई और नहीं बल्कि अशोक था अशोक को कहीं ना कहीं इस बात का आभास हो गया था कि शायद वंदना अपने बेटे के बिस्तर के ऊपर होने की वजह से सही से खुल नहीं पा रही थी और कहीं ना कहीं अशोक को मोनू कबाब में हड्डी सा लग रहा था इसलिए उसने एक योजना बनाई और वह अपनी बाइक को मोनू के पापा के गेराज में जहां परउनकी कार रहती है वहां पर अंदर में लगता है और जिसकी चाबी वंदना के पास में होती है और मोनू को पिछले कुछ दिनों से खबर नहीं होती है कि अशोक मामा घर में ही होते हैं बस उसकी बाइक उसे नहीं दिखती है।।


अशोक: मैं मुस्कुराता हुआ वंदना को ऊपर से नीचे तक देखते हुए सो गया है वह चेक कर ली होना अच्छे से मैं वंदना को ऊपर से नीचे तक देख रहा होता हूं। मैं वंदना को इशारा करता हूं कैमरे का दरवाजा लगाने का और वंदना मेरे इशारे को समझते हुए कैमरे को अंदर से बंद कर लेती है। अब तो यहां ठीक है अब तो तुम्हें कोई दिक्कत नहीं होगी हम दोनों के अलावा यहां कोई नहीं है मैं मुस्कुराता हुआ वंदना को यह बात बोलता।।


क्या बात है काफी थकी हुई लग रही हो लगता है घर का कुछ ज्यादा ही काम करना पड़ रहा है आजकल तुमको तभी मैं वंदना को देखकर मुस्कुराते हुए इशारा करता हूं कपड़े खोलने का और मेरे इशारों मात्र से ही वंदना मेरी तरफ मुस्कुराते हुए देख एक ही पल में अपनी मैक्सी को उतार के नीचे गिरा देती है जिसे देखते हुए मुझे इस बात का अंदाजा हो गया था कि अब वंदना अच्छे से मेरे साथ में खुलेगी मैं वंदना को ऊपर से नीचे तक देख रहा हूं पूरे खुले बाल उसके और उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों के बीच में लटकता हुआ मंगलसूत्र और मांग में सिंदूर और मोटी जांघों के नीचे बालों में छुपी हुई चर्बी नुमा फुली बुर वंदना के दोनों पैरों के नीचे में उसकी मैक्सी गोल बनकर गिरी हुई होती है।। और वंदना ऐसे ही खड़ी होती है जैसे मानो कि मुझे अच्छे से देखने के लिए दे रही है अप
ने हुस्न को।
Bhai nice update and good to see you back after long time, suggestion and request is vandana (maa) ko monu (beta) ke saamne bhi kholke enjoy karwao aur vandana bold roop saamne leke aao jisme woh khulke beta me saamne cigarette peete hue achese chudai ka maza leti hai ❤️
 

Rsingh

Member
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Bhai nice update and good to see you back after long time, suggestion and request is vandana (maa) ko monu (beta) ke saamne bhi kholke enjoy karwao aur vandana bold roop saamne leke aao jisme woh khulke beta me saamne cigarette peete hue achese chudai ka maza leti hai ❤️
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