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Horror किस्से अनहोनियों के

Shetan

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Shetan agla Update kab de rahi.. :bat:
पहले साईको कविता लिख लू. कुछ 10 अपडेटजितना बचा है.
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Chalakmanus

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Update 1

कोमल चौधरी वैसे तो अहमदाबाद की रहने वाली थी. पर उसका परिवार यूपी आगरा के पास का था. बाप दादा अहमदाबाद आकर बस गए. कोमल ने अपनी लौ की पढ़ाई अहमदाबाद से ही की थी. कोमल के पिता नरेंद्र चौधरी का देहांत हो चूका था. उसकी माँ जयश्री चौधरी के आलावा उसकी 2 बहने भी थी. दूसरी अपनी माँ के साथ रहकर ही आरोनोटिक इंजीनियरिंग कर रही थी. कोमल के पति पलकेंस एक बिज़नेसमेन थे. दोनों अहमदाबाद मे ही रहे रहे थे.

कोमल जहा 28 साल की थी. वही पलकेंस 29 साल का नौजवान था. कोमल का कोई भाई नहीं था. इस लिए कोमल अपनी मायके के पास की ही कॉलोनी मे अपना घर खरीद रखा था. ताकि अपनी माँ की जरुरत पड़ने पर मदद कर सके. कोमल अहमदाबाद मे ही वकीलात कर रही थी. आगरा मे अपनी चचेरी बहन की शादी के लिए कोमल अहमदाबाद से आगरा निकल पड़ी. फ्लाइट मे बैठे बैठे वो हॉरर स्टोरी पढ़ रही थी. कोमल को भूतिया किस्से पढ़ना बहोत पसंद था. वो जानती थी की अपने गाउ जाते ही उसे दाई माँ से बहोत सारे भूतिया किस्से सुन ने को जरूर मिलेंगे. कोमल का परिवार पहले से ही आगरा पहोच चूका था.

उसके पति पलकेंस विदेश मे होने के कारण शादी मे शामिल नहीं हो सकते थे. आगरा एयरपोर्ट पर कोमल को रिसीव करने के लिए उसके चाचा आए हुए थे.आगरा एयरपोर्ट से निकलते ही कोमल अपने चाचा के साथ अपने गाउ ह्रदया पहोच गई. जो आगरा से 40 किलोमीटर दूर था. वो अपने चाचा नारायण चोधरी, अपनी चाची रूपा. अपने चचेरे भई सनी और खास अपनी चचेरी बहन नेहा से मिली. सब बहोत खुश थे. कोमल के चाचा पेशे से किसान थे. चाची उसकी माँ की तरह ही हाउसवाइफ थी. सनी कॉलेज 1st ईयर मे था.

नेहा की ग्रेजुशन कम्प्लीट हो चुकी थी. नेहा की शादी मे शामिल होने के लिए कोमल और उसका परिवार आगरा आए हुए थे. कोमल परिवार मे सब से मिली. सब बहोत खुश थे. पर उसे सबसे खास जिस से मिलना था. वो थी गाउ की दाई माँ. दाई माँ का नाम तो उस वक्त कोई नहीं जनता था. उम्र से बहोत बूढी दाई माँ को सब दाई माँ के नाम से ही जानते थे. इनकी उम्र तकिरीबन 70 पार कर चुकी थी. सब नोरमल होते ही कोमल ने नेहा से पूछ ही लिया.


कोमल : नेहा दाई माँ केसी हे???


नेहा : (स्माइल) हम्म्म्म... मे सोच ही रही थी. तू आते ही उनका पूछेगी. पर वो यहाँ हे नहीं. पास के गाउ गई हे. वो परसो शादी मे ही लोटेगी.


कोमल ने बस स्माइल ही की. पर उसका मन दाई माँ से मिलने को मचल रहा था. कोमल शादी की बची हुई सारी रस्मो मे शामिल हुई. महेंदी संगीत सब के बाद शादी का दिन भी आ गया. जिसका कोमल को बेसब्री से इंतजार था. शादी का नहीं. बल्कि दाई माँ का. शादी शुरू हो गई. पर कोमल को कही भी दाई माँ नहीं दिखी. कोमल निराश हो गई. सायद दाई माँ आई ही नहीं. ऐसा सोचते वो बस नेहा के फेरे देखने लगी. मंडप मे पंडित के आलावा अपने होने वाले जीजा और नेहा को फेरे लेते देखते हुए मुर्ज़ाए चहेरे से बस उनपर फूल फेक रही थी. तभी अचानक कोमल की नजर सीधा दाई माँ से ही टकराई. शादी का मंडप घर के आंगन मे ही था.

और आंगन मे ही नीम के पेड़ के सहारे दाई माँ बैठी हुई गौर से नेहा को फेरे लेती हुई देख रही थी. कोमल दाई माँ से बहोत प्यार करती थी. वो अपने आप को रोक ही नहीं पाई. और सीधा दाई माँ के पास पहोच गई.


कोमल : लो दाई माँ. मुझे आए 2 दिन हो गए. और आप अब दिख रही हो.


दाई माँ अपनी जगह से खड़ी हुई. और कोमल के कानो के पास अपना मुँह लेजाकर बड़ी धीमे से बोली.


दाई माँ : ससस... दो मिनट डट जा लाली. तोए एक खेल दिखाऊ.
(दो मिनट रुक जा. तुझे एक खेल दिखाती हु.)


दाई माँ धीरे धीरे मंडप के एकदम करीब चली गई. बिलकुल नेहा और उसके होने वाले पति के करीब. दाई माँ के फेस पर स्माइल थी. जैसे नेहा के लिए प्यार उमड़ रहा हो. फेरे लेते नेहा और दाई माँ दोनों की नजरें भी मिली. जैसे ही फेरे लेते नेहा दाई माँ के पास से गुजरी. दाई माँ ने नेहा पर ज़पटा मारा. सारे हैरान हो गए. नेहा के सर का पल्लू लटक कर निचे गिर गया. दाई माँ ने नेहा के पीछे से बाल ही पकड़ लिए. नेहा दर्द से जैसे मचल गई हो.


नेहा : अह्ह्ह ससस.... दाई माँ ससस... ये क्या कर रही हो.. ससस... छोडो मुझे... अह्ह्ह... ससससस दर्द हो रहा है.


सभी देखते रहे गए. किसी को मामला समझ ही नहीं आया. कोमल भी ये सब देख रही थी.


दाई माँ : अरे.... ऐसे कैसे छोड़ दाऊ बाबडचोदी(देहाती गाली ). तू जे बता. को हे तू... कहा से आई है.
(अरे ऐसे कैसे छोड़ दू हरामजादी. तू ये बता कौन है तू?? कहा से आई है)


सभी हैरान तब रहे गए. जब गाउ की बेटी दुल्हनिया नेहा की आवाज मे बदलाव हुआ.


नेहा : अह्ह्ह... ससससस तुम क्या बोल रही हो दाई माँ. (बदली आवाज) छोड़... छोड़ साली बुढ़िया छोड़.


सभी हैरान रहे गए. कइयों के तो रोंगटे खड़े हो गए. सब को समझ आ गया की नेहा मे कोई और है. दाई माँ ने तुरंत आदेश दिया.


दाई माँ : जल्दी अगरबत्ती पजारों(जलाओ) सुई लाओ कोई पेनी.
(जल्दी कोई अगरबत्ती जलाओ. सुई लाओ कोई तीखी)


नेहा बदली हुई आवाज मे छट पटती रही. लेकिन पीछे से दाई माँ ने उसे छोड़ा नहीं.


नेहा : (बदली आवाज) छोड़ साली बुढ़िया. तू मुझे जानती नहीं है.


दाई माँ ने कस के नेहा के बाल खींचे.


दाई माँ : री बाबडचोदी तू मोए(मुझे) ना जाने. पर तू को हे. जे तो तू खुद ही बताबेगी.
(रे हरामजादी. तू मुजे नहीं जानती. पर तू कौन है. ये तो तू खुद ही बताएगी.)


जैसे गाउ के लोग ये सब पहले भी देख चुके हो. जहा दाई माँ हो. वहां ऐसे केस आते ही रहते थे. गाउ वालों को पता ही होता था ऐसे वख्त पर करना क्या हे. गाउ की एक औरत जिसकी उम्र कोमल की मम्मी जयश्री से ज्यादा ही लग रही थी. वो आगे आई और नेहा की खुली बाह पर जलती हुई अगरबत्ती चिपका देती हे. नेहा दर्द से हल्का सा छट पटाई. और अपनी खुद की आवाज मे रोते हुए मिन्नतें करने लगी.


नेहा : अह्ह्ह... ससससस दर्द हो रहा हे. ये आप लोग मेरे साथ क्या कर रहे हो.


दाई माँ भी CID अफसर की तरह जोश मे हो. चोर को पकड़ के ही मानेगी.


दाई माँ : हे या ऐसे ना मानेगी. लगा सुई.
(ये ऐसे नहीं मानेगी.)


उस औरत ने तुरंत ही सुई चुबई.


नेहा : (बदली आवाज) ससस अह्ह्ह... बताती हु. बताती हु.

दाई माँ : हलका मुश्कुराते) हम्म्म्म... मे सब जानू. तेरे जैसी छिनार को मुँह कब खुलेगो. चल बोल अब.
(मै सब जानती हु. तेरे जैसी छिनार का मुँह कब खुलेगा. चल अब बोल)

नेहा : अहह अहह जी हरदी(हल्दी) पोत(लगाकर) के मरेठन(समशान) मे डोल(घूम)रई. मोए(मुझे) जा की खसबू(खुसबू) बढ़िया लगी. तो मे आय गई.
(ये हल्दी पोती हुई शमशान मे घूम रही थी. मुझे इसकी खुसबू बढ़िया लगी. तो मे आ गई.)


दाई माँ और सारे लोग समझ गए की हल्दी लगाने के बाद बाहर घूमने से ये सब हुआ हे. शादी के वक्त हल्दी लगाने का रिवाज़ होता हे. जिस से त्वचा मे निखार आता हे. और भी बहोत से साइंटीफिक कारण हे. लेकिन यही बुरी आत्माओ को अकर्षित भी करता हे. यही कारण हे की दूल्हे को तो तलवार या कटार दी जाती हे. वही दुल्हन को तो बाहर निकालने ही नहीं दिया जाता. 21 साल की नेहा वैसे तो आगरा मे पढ़ी थी. उसकी बोली भी साफ सूत्री हिंदी ही थी.
लेकिन जब उसके शरीर मे किसी बुरी आत्मा ने वास कर लिया तो नेहा एकदम देहाती ब्रज भाषा बोलने लगी. दरसल नेहा का रिस्ता उसी की पसंद के लड़के से हो रहा था. नई नई शादी. नया नया प्रेम. दरअसल सगाई से पहले से ही दोनों प्रेमी जोड़े एक दूसरे से लम्बे लम्बे वक्त तक बाते कर रहे थे. ना दिन दीखता ना रात. प्रेम मे ये भी होश नहीं होता की कहा खड़े हे. खाना पीना सब का कोई होश नहीं.
सभी जानते हे. ऐसे वक्त और आज का जमाना. नेहा की हल्दी की रसम के वक्त बार बार उसके मोबाइल पर कॉल आ रहा था. पर वो उठा नहीं पा रही थी. पर जब हल्दी का कार्यक्रम ख़तम हुआ. नेहा ने तुरंत अपना मोबाइल उठा लिया. उसके होने वाले पति के तक़रीबन 10 से ज्यादा मिस कॉल थे. नेहा ने तुरंत ही कॉल बैक किया. होने वाले पति से माफ़ी मांगी. फिर मिट्ठी मिट्ठी बाते करने लगी. बाते करते हुए वो टहलने लगी. उसकी बाते कोई और ना सुने इस लिए वो टहलते हुए छुपने भी लगी. घर के पीछे एक रास्ता खेतो की तरफ जाता था. शादी की वजह से कोई खेतो मे नहीं जा रहा था.
नेहा अपने होने वाले पति से बाते करती हुई घर के पीछे ही थी. वो उसी रास्ते पर धीरे धीरे चलने लगी. घर मे किसी को मालूम नहीं था की नेहा घर के पीछे से आगे चल पड़ी हे. चलते हुए नेहा को ये ध्यान ही नहीं था की वो काफ़ी आगे निकल गई हे. बिच मे शमशानघट भी था. नेहा मुश्कुराती हुई बाते करते वही खड़ी हो गई. ध्यान तो उसका अपने होने वाली मिट्ठी रशीली बातो पर था.
पर वक्त से पहले मर जाने वाली एक बुरी आत्मा का ध्यान नेहा की खुशबु से खींचने लगा. नई नवेली कावारी दुल्हन. जिसपर से हल्दी और चन्दन की खुसबू आ रही हो. वो आत्मा नेहा से दूर नहीं रहे पाई. उस दोपहर वो आत्मा नेहा पर सवार हो गई. जिसका नेहा को खुद भी पता नहीं चला. फोन की बैटरी डिस हुई तब नेहा जैसे होश मे आई हो. इन बातो को शहर मे पढ़ने वाली नेहा मानती तो नहीं थी. मगर माँ बाप की डांट का डर जरूर था. नेहा तुरंत ही वहां से तेज़ कदम चलते हुए घर पहोच गई. शादी का माहौल. अच्छा बढ़िया खाना नेहा को ज्यादा पसंद ना हो.

लेकिन उस आत्मा को जरूर पसंद आ रहा था. खास कर नए नए कपडे श्रृंगार से आत्मा को बहोत ख़ुशी मिल रही थी. अगर आत्मा किसी कावारी लड़की की हो. तो उसे सात फेरे लेकर शादी करने का मन भी बहोत होता हे. वो आत्मा एक कावारी लड़की की ही थी. उस आत्मा का इरादा भी शादी करने का ही होने लगा था. पर एन्ड वक्त पर दाई माँ ने चोर पकड़ लिया.


दाई माँ : हाआआ.... तोए खुशबु बढ़िया लगी तो का जिंदगी बर्बाद करेंगी याकि??? तू जे बता अब तू गई क्यों ना??? डटी क्यों भई हे. का नाम हे तेरो???.
(तुझे इसकी खुसबू बढ़िया लगी तो क्या इस की जिंदगी बर्बाद करेंगी क्या?? तो फिर तू गई क्यों नहीं?? रुकी क्यों है. और तेरा नाम क्या है??)


सभी उन दोनों के आस पास इखट्टा हो गए. नेहा के माँ बाप भी. दूल्हा और उसके माँ बाप भी सभी. लेकिन कोई ऑब्जेक्शन नहीं. ऐसे किस्से कोमल के सामने हो. तो वो भला कैसे चली जाती. जहा दूसरी कावारी लड़किया भाग कर अपने परिवार के पास दुबक गई. वही कोमल तो खुद ही उनके पास पहोच गई. वो इस भूतिये किस्से को बिना डरे करीब से देख रही थी.


नेहा : (गुरराना) आआ... मे खिल्लो.... मोए कोउ बचाने ना आयो. मर दओ मोए डुबोके.... अब मे काउ ना जा रई. मे तो ब्याह करुँगी... आआ... ब्याह करुँगी... अअअ...
(मै खिल्लो हु. मुझे कोई बचाने नहीं आया. मार दिया मुझे डुबोकर. अब मे कही नहीं जाउंगी. मै तो शादी करुँगी)


खिल्लो पास के ही गाउ की रहने वाली लड़की थी. जो तालाब मे नहाते वक्त डूब के मर गई थी. दो गाउ के बिच एक ही ताकब था. किल्लो 4 साल पहले डूब के मर गई. दोपहर का वक्त था. और उस वक्त वो अकेली थी. उसे तैरते नहीं आता था. पर वो सीखना चाहती थी. अकेले सिखने के चक्कर उसका नादानी भरा कदम. उसकी जान ले बैठा. वो डूब के मर गई. किसी को पता नहीं चला. एक चारवाह जब शाम अपने पशु को पानी पिलाने लाया. तब जाकर गाउ मे सब को पता चला की गाउ की एक कवारी लड़की की मौत हो गई. वैसे तो आत्मा ने किसी को परेशान नहीं किया.
पर कवारी दुल्हन की खुसबू ने उसके मन मे दुल्हन बन ने की तमन्ना जगा दी. पकड़े जाने पर आत्मा अपनी मौत का जिम्मेदार भी सब को बताने लगी. दाई माँ ने बारी बारी सब को देखा. कोमल के चाचा और चाची को भी. दूल्हा तो घबराया हुआ लग रहा था. पर हेरात की बात ये थी की ना वो मंडप से हिला. और ना ही उसके माँ बाप. अमूमन ऐसे वक्त पर लोग रिश्ता तोड़ देते हे. लेकिन वो कोई सज्जन परिवार होगा. जो स्तिति ठीक होने का इंतजार कर रहे थे.


दाई माँ : देख री खिल्लो. तू मारी जमे जी छोरीकिउ गलती ना हे. और नाउ कोई ओरनकी. जाए छोड़ के तू चली जा. वरना तू मोए जानती ना है.
(देख री खिल्लो. तू मारी इसमें लड़की की गलती नहीं है. और नहीं किसी ओरोकी. इसे छोड़ के तू चली जा. वरना तू मुजे जानती नहीं है.)


दाई माँ ने खिलो को समझाया की तेरी मौत का कोई भी जिम्मार नहीं हे. वो नेहा के शरीर को छोड़ कर चली जाए. वरना वो उसे छोड़ेगी नहीं. मगर खिल्लो मन ने को राजी ही नहीं थी. वो गुरराती हुई दाई माँ को ही धमकाने लगी.


नेहा(खिल्लो) : हाआआआ... कई ना जा रई मे हाआआआ... का कर लेगी तू हाआआ...
(मै नहीं जा रही. तू क्या कर लेगी??)


खिल्लो को दाई माँ को लालकरना भरी पड़ गया.


दाई माँ : जे ऐसे ना माने. पकड़ो सब ज्याए.
(ये ऐसे नहीं मानेगी. पकड़ो सब इसे)


दाई माँ के कहते ही नेहा के पापा. दूल्हे के पापा और गाउ के कुछ आदमियों ने दोनों तरफ से नेहा को कश के पकड़ा. दाई माँ ने तो सिर्फ पीछे से सर के बाल ही पकडे थे. मगर इतने आदमी मिलकर भी नेहा जैसी दुबली पतली लड़की संभाल ही नहीं पा रहे थे. जैसे उसमे हाथी की ताकत आ गई हो. पर कोई भी नेहा को छोड़ नहीं रहा था. दाई माँ अपनी करवाई मे जुट गई. जैसे ये स्टिंग ऑपरेशन करने की उसने पहले ही तैयारी कर रखी हो.

एक 18,19 साल का लड़का एक ज़ोला लेकर भागते हुए आया. और दाई माँ को वो झोला दे देता हे. दाई माँ ने निचे बैठ कर सामान निकालना शुरू किया. एक छोटीसी हांडी. एक हरा निम्बू. निम्बू मे 7,8 सुईया घुसी हुई थी. लाल कपड़ा. कोई जानवर की हड्डी. एक इन्शानि हड्डी. कोमल ये सब अपनी ही आँखों से देख रही थी. वो भी भीड़ के आगे आ गइ. वहां के कई मर्द कोमल को पीछे करने की कोसिस करते. पर दाई माँ के एक आँखों के हिसारो से ही कोमल को बाद मे किसी ने छेड़ा नहीं. दाई माँ ने अपनी विधि चालू की. मंत्रो का जाप करने लगी. वो जितना जाप करती. नेहा उतनी ही हिलने दुलने लगती. दाई माँ ने हुकम किया.


दाई माँ : रे कोई चिमटा मँगाओ गरम कर के.
(कोई चिमटा मांगवाओ गरम कर के )


चिमटे का नाम सुनकर तो खिल्लो मानो पागल ही हो गई हो. नेहा तो किसी के संभाले नहीं संभल रही थी. वो बुरी तरीके से हिलने डुलने लगी. दाई माँ को धमकी भी देने लगी.


नेहा(खिल्लो) : (चिल्ला कर) री.... बुढ़िया छोड़ दे मोए. जे छोरी तो अब ना बचेगी. ब्याह तो मे कर के ही रहूंगी.
(बुढ़िया छोड़ दे मुझे. ये लड़की तो अब नहीं बचेगी. शादी तो मै कर के ही रहूंगी.)


पर तब तक एक जवान औरत घूँघट मे आई. और चिमटा दाई माँ की तरफ कर दिया. उस औरत के हाथ कांप रहे थे. दाई माँ को भी डर लगा कही उस औरत के कापते हाथो की वजह से कही वो ना जल जाए.


दाई माँ : री मोए पजारेगी का.
(रे मुझे जलाएगी क्या...)


दाई माँ ने उस औरत को तना मारा और फिर नेहा की तरफ देखने लगी. कोमल भी दाई माँ के पास साइड मे घुटने टेक कर बैठ गई. सभी उन्हें घेर चुके थे. कोई बैठा हुआ था. तो कोई खड़े होकर तमासा देख रहा था.


दाई माँ : हा री खिल्लो. तो बोल. तू जा रही या नही .


दाई माँ ने नेहा के बदन मे घुसी खिल्लो की आत्मा को साफ सीधे लेबजो मे चुनौती दे दी. ज्यादा हिलने डुलने से नेहा का मेकअप तो ख़राब हो ही गया था. बाल भी खुल कर बिखर गए थे. वो सिर्फ गुस्से मे धीरे धीरे ना मे ही अपना सर हिलती हे. बिखरे बालो मे जब अपनी गर्दन झटक झटक चिल्ला रही थी. तब उसके दूल्हे को भी डर लगने लगा. जिसे फोन पर बाते करते वो नेहा की तारीफ करते नहीं थक रहा था. आज वही नेहा उसे खौफनाक लग रही थी.


नेहा(खिल्लो) : (चिल्लाते हुए) नाआआआ.... मे काउ ना जा रहीईई...
(नहीं..... मै कही नहीं जा रही)


दाई माँ ने हांडी को आगे किया. कुछ मंतर पढ़ कर उस हांडी को देखा. जो गरम चिमटा उसके हाथो मे था. उसे नेहा के हाथ पर चिपका दिया. नेहा जोर से चिल्लाई. इतना जोर से की जिन्होंने नेहा को पकड़ नहीं रखा था. उन्होंने तो अपने कानो पर हाथ तक रख दिए.


दाई माँ : बोल तू जा रही या नहीं.


गरम चिमटे से हाथ जल गया. नेहा के अंदर की खिल्लो तड़प उठी. पर दर्द जेलने के बाद भी नेहा का सर ना मे ही हिला.


दाई माँ : तू ऐसे ना मानेगी.


दाई माँ ने तैयारी सायद पहले से करवा रखी थी. दाई माँ ने भीड़ मे से जैसे किसी को देखने की कोसिस की हो.


दाई माँ : रे पप्पू ले आ धांस(मिर्ची का धुँआ).


जो पहले दाई माँ का थैला लाया था. वही लड़का भागते हुए आया. एक थाली मे गोबर के उपले जालाकर उसपे सबूत लाल मीर्चा डाला हुआ पप्पू के हाथो मे था. पास लाते ही सभी चिंकने लगे. पर बेल्ला के अंदर की खिल्लो जोर से चिखी.


नेहा(खिल्लो) : (चिल्ला कर) डट जा.... डट जा री बुढ़िया... मे जा रही हु.. डट जा....
(रुक जा बुढ़िया रुक जा. मै जा रही हु. रुक जा.)


वो मिर्च वाले धुँए से खिल्लो को ऐसा डर लगा की खिल्लो जाने को तैयार हो गई. दाई माँ भी ज़ूमती हुई मुश्कुराई.


दाई माँ : हम्म्म्म... अब आई तू लेन(लाइन) पे. तू जे बता. चाइये का तोए????
(हम्म्म्म.... अब तू लाइन पे आई. तू ये बता तुझे चाहिए क्या???)

नेहा(खिल्लो) : मोए राबड़ी खाबाओ. और मोए दुल्हन को जोड़ा देओ. मे कबउ वापस ना आउ.
(मुझे राबड़ी खिलाओ. और मुझे दुल्हन का जोड़ा दो. मै कभी वापस नहीं आउंगी.)


कोमल को हसीं भी आई. भुत की डिमांड पर. उसे राबड़ी खानी थी. और दुल्हन का जोड़ा समेत सारा सामान चाहिए था. दाई माँ जोर से चीलाई.


दाई माँ : (चिल्ला कर जबरदस्त गुस्सा ) री बात सुन ले बाबड़चोदी. तू मरि बिना ब्याह भए. तोए सिर्फ श्रृंगार मिलेगो. शादी को जोड़ा नई. हा राबड़ी तू जीतती कहेगी तोए पीबा दंगे. बोल मंजूर हे का????
(बात सुन ले हरामजादी. तेरी मौत हुई बिना शादी के. तो तुझे सिर्फ श्रृंगार मिलेगा.
शादी का जोड़ा नहीं. हा राबड़ी तू जितना बोलेगी. उतना पीला देंगे.)


कोमल दाई माँ को एक प्रेत आत्मा से डील करते देख रही थी. दाई माँ कोई मामूली सयानी नहीं थी. वो जानती थी. अगर उस आत्मा ने सात फेरे लेकर शादी कर ली. तो पति पत्नी दोनों के जोड़े को जीवन भर तंग करेंगी. अगर उसे शादी का जोड़ा दे दिया तब वो पीछे पड़ जाएगी की ब्याह करवाओ. वो हर जवारे कड़के को परेशान करेंगी. इसी किए सिर्फ मेकउप का ही सामान उसे देने को राजी हुई. गर्दन हिलाती नेहा के अंदर की खिल्लो ने तुरंत ही हामी भर दी.


नेहा(खिल्लो) : (गुरराना) हम्म्म्म... मंजूर..


चढ़ावे के लिए रेडिमेंट श्रृंगार बाजारों मे मिलता ही हे. ज्यादातर ये सब पूजा के चढ़ावे मे काम आता हे. दाई माँ ऐसा एक छोटा सा पैकेट अपने झोले मे रखती है. उसे निकाल कर तुरंत ही निचे रख दिया.


दाई माँ : जे ले... आय गो तेरो श्रृंगार...
(ये ले. आ गया तेरा श्रृंगार...)


नेहा के अंदर की खिल्लो जैसे ही लेने गई. दाई माँ ने गरम चिमटा उसके हाथ पे चिपका दिया. वो दर्द से चीख उठी.


नेहा(खिल्लो) : आअह्ह्ह.... ससस...


दाई माँ : डट जा. ऐसे तोए कछु ना मिलेगो. तोए खूब खिबा पीबा(खिला पीला) के भेजींगे.
(रुक जा. तुझे ऐसे कुछ नहीं मिलेगा. तुझे खिला पीला के भेजेंगे)


नेहा के सामने एक कटोरी राबड़ी की आ गई. उसे कोमल भी देख रही थी. और उसका होने वाला दूल्हा भी. नेहा ने कटोरी उठाई और एक ही जाटके मे पी गई. हैरान तो सभी रहे गए. उसके सामने दूसरी फिर तीसरी चौथी करते करते 10 कटोरी राबड़ी पीला दे दी गई. दूल्हा तो हैरान था. उसकी होने वाली बीवी 10 कटोरी राबड़ी पी जाए तो हैरान तो वो होगा ही. पर जब नेहा ने ग्यारवी कटोरी उठाई दाई माँ ने हाथ पे तुरंत चिमटा चिपका दिया.


नेहा(खिल्लो) : अह्ह्ह... ससससस... री बुढ़िया खाबे ना देगी का.
(रे बुढ़िया खाने नहीं देगी क्या...)

दाई माँ : बस कर अब. भोत(बहोत) खा लो तूने. अब ले ले श्रृंगार तेरो.
(बस कर अब. बहोत खा लिया तूने. अब ले ले श्रृंगार तेरा.)


दाई माँ को ये पता चल गया की आत्मा परेशान करने के लिए खा ही खा करेंगी. इस लिए उसे रोक दिया. श्रृंगार का वो पैकेट जान बुचकर दाई माँ ने उस छोटी सी हांडी मे डाला. जैसे ही नेहा बेहोश हुई. दाई माँ तुरंत समझ गई की आत्मा हांडी मे आ चुकी हे. दाई माँ ने तुरंत ही लाल कपडे से हांडी ढक दी. हांडी उठाते उसका मुँह एक धागे से भांधने लगी. बांधते हुए सर ऊपर किया और कोमल के चाचा को देखा.


दाई माँ : ललिये होश मे लाओ. और फेरा जल्दी करवाओ. लाली को बखत ढीक ना हे.
(बेटी को होश मे लाओ. और जल्दी शादी करवाओ)


दाई माँ ने हांडी मे खिल्लो की आत्मा तो पकड़ ली. लेकिन वो जानती थी की एक आत्मा अंदर हे तो दूसरी आत्माए भी आस पास भटक रही होंगी. नेहा को मंडप से निचे उतरा तो और आत्मा घुस जाएगी. अगर पता ना चला और दूसरी आत्मा ने नेहा के शरीर मे आकर शादी कर ली तो बहोत बड़ा अनर्थ हो जाएगा. जितनी जल्दी उसके फेरे होकर शादी हो जाए वही अच्छा हे. नेहा को तो होश मे लाकर उसकी शादी कर दी गई. दूल्हा और उसका परिवार सज्जन ही होगा.
जो ऐसे वक्त मे भगा नहीं. और ना ही शादी तोड़ी. नेहा के फेरे तो होने लगे. दाई माँ उस हांडी को लेकर अपनी झोपड़ी की तरफ जाने लगी. तभी नेहा भगति हुई दाई माँ के पास आई. दाई माँ भी उसे देख कर खड़ी हो गई.


कोमल : (स्माइल हाफना एक्साटमेंट) दाई माँ......


दाई माँ ने भी बड़े प्यार से कोमल को देखा. जैसे अपनी शादीशुदा बेटी को देख रही हो.


दाई माँ : (स्माइल भावुक) री बावरी देख तो लाओ तूने. अब का सुनेगी. मे आज ना मिलु काउते. तोए मे कल मिलूंगी.
(बावरी देख तो लिया तूने. अब क्या सुनेगी. मै आज नहीं मिल सकती. तुझे मे कल मिलूंगी.)


बोल कर दाई माँ चल पड़ी. दाई माँ जानती थी की कोमल उस से बहोत प्यार करती हे. उसे भुत प्रेतो से डर नहीं लगता. पर कही कुछ उच नीच हो गई तो कोमल के साथ कुछ गकत ना हो जाए. वो कोमल को बस किस्से सुनाने तक ही सिमित रखना चाहती थी.
Bus sayad meri talash puri ho gayi.aaishi hi story dudh raha tha horror plus erotic.

Achha laga padh ke
 
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Update 3

बलबीर और कोमल दोनों ही सोच मे पड़ गए. दाई माँ कैसे बता सकती है की वहां जो भी साया(आत्मा) थी. वो अक्षिडाँट से नहीं मरा होगा. उसकी बाली दी होंगी. कोमल ने तो तपाक से पूछ ही लिया.



कोमल : दाई माँ. ये कैसे पता लगा की वो एक्सीडेंट मे मरी होंगी या फिर बाली... मतलब मे समझी नहीं. बाली.....


दाई माँ शांत हो गई. कुछ पल वो कुछ नहीं बोली. पर जब दाई माँ ने इन विषयो पर अपने ज्ञान का पिटारा खोला तो दोनों ही हेरत मे पड़ गए.


दाई माँ : जे नई नई सड़के बनावे है..... नए नए पुल बनावे है.... तो जे ठेकादार हेना... चाहे कछु हे जाए... जे खुद पढ़े लिखें हे. पर जे बाली दे दे हे.


दाई माँ का कहने का मतलब था की बड़े बड़े बिल्डर कॉन्ट्रेक्टर कितने भी पढ़े लिखें हो. ये अंधश्रद्धा मे मानते हे. ये लोग ऐसा कोई कॉन्ट्रैक्सशन करते वक्त तांत्रिको से पूजा वगेरा करवाते हैं. और बाली दिलवाते हैं. जो गेरकानूनी और क्राइम होता हैं.


कोमल : पर इस से क्या होता है दाई माँ????


दाई माँ : जे कोई नई बड़ी चीज बनी. सडक हे गई. पुल हे गया. बांध हे गया. जे सच हे की जे सब खून मांगे. ऐसे मे तुमनेउ देखा होगा की कई जगहों पे खूब एक्सीडेंट हे जाते. पर जे सब गलत लकीरन की वजह से हेतोए.


दाई माँ का कहना था की कई जगाह नया रोड बनता हे. नया ब्रिज बनता हे. या नया डेम्प बनता हे. ऐसी जगाह पर मौत होती हे. ये जगाह खून मानती हे. पर ये सब का कारण गलत वस्तुशास्त्र होता हे. कोमल भी कुछ अपना एक्सॉयशंस सब के सामने पेश करती है.


कोमल : हा दाई माँ. ये बात तो सच है की कई जगाह ऐसी है. जहा बार बार एक्सीडेंट होते ही रहते है.


दाई माँ : जे जगाह गन्दी होती है. मतलब की ऐसी जगाह मौत को खिंचती है. तू हमेशा याद रखना री छोरी. हमेशा मौत मौत को खींचती है. जे कोई मारे भए आदमी की लाश तुम गाड़ी मे ले जाओ तब देखना. गाड़ी भरी है जाबेगी. गाड़ी खुद ही दूसरी गाड़ी की तरफ मुड़बे की कोसिस करेंगी.


दाई माँ का कहने का मतलब यही था की कोई जगाह का वास्तु ही ख़राब होता है. वहां नकारात्मक ऊर्जा होती है. जो मौत करवाती है. और एक मौत दूसरी मौत को खिंचती है. इसी लिए लाश लेजाने वाला वाहन खुद ही एक्सीडेंट होने की कोसिस करता है. सायद बलबीर को ऐसा एक्सपीरियंस हुआ होगा. वो बोल पड़ा. क्यों की गांव के ही कोई थे. जो दिल्ली मे नौकरी कर रहे थे. जिनका दिल्ली मे ही देहांत हो गया.


बलबीर : हा माई. जे तो सच है. मे जब बनवारी चाचा को दिल्ली से ला रहा था. तब ऐसा खूब हुआ. छोटी गाड़ी थी. कितना भगाउ. गाड़ी तेज़ चल ही नहीं रही थी. और कोई सामने से गाड़ी आए तब मेरी गाड़ी अपने आप ही उसमे घुसने की कोसिस करती. स्टेरिंग तो खूब भरी हो गया था.


कोमल को भी आदत थी. कई बार वो मुंबई से खुद कार चलाकर अहमदाबाद तक आ जाती. वो सडक पर ऐसी चीजों का ख्याल रखेगी. पर बली का सिस्टम उसे समझ नहीं आया.


कोमल : तो दाई माँ. ये बली का क्या चक्कर होता है.


दाई माँ एक बार फिर हलका सा मुश्कुराई. पर इस बार की मुश्कान मे ख़ुशी नहीं थी. जैसे अफ़सोस जाहिर हो रहा हो.


दाई माँ : (अफ़सोस) कितनेऊ पढ़ लिख जाओ. लोगन को डर है. काउ कुछ ख़राब ना हे जाए. लोगन ने अपने स्वार्थ मे दुसरान की जान ले लई. जे नयो नयो पुल बनाबे. नई सडक बनाबे. अब जे बर्बाद ना हे जा मारे काला जादू कर्वबए. अब बा मे चाइये बली. तो कोउ गरीब बिन के चकर मे फस जाए. कोउ भिखारी होय. कोउ गरीब होय. ज्या काउए बहला फुसला ले. कोई इंसान. या कवारी लड़की. या बालक. अलग अलग बली हेउतोए.

दाई माँ का कहने का मतलब ये था की बड़े बड़े कॉन्ट्रैक्टर कुछ कंस्ट्रक्शन करते हे. तब उन्हें डर होता हे की उनका कुछ फेल ना हो जाए. नुकशान ना हो जाए. इस लिए काला जादू की पूजा करवाते है. जिसमे बली की जरुरत होती है. कोई इंसान, कवारी लड़की/लड़का, या छोटे बच्चे इन सब की अलग अलग डिमांड पर बली होती है. जिसके कोई बहला फुसलाकार या मज़बूरी मे, या जरदस्ती फस जाते है. कोमल को क्राइम पढ़ने की भी आदत थी. अपने कानूनी किताबों मे और निजी जीवन मे ऐसे कई केस वो देख चुकी थी. क्योंकि कोमल एक वकील थी. बहोत सी ऐसी चीजों को कोमल देख भी चुकी थी.

कुछ पल के लिए माहौल शांत हो गया. दाई माँ ने सर हिलाकर बलबीर से बीड़ी माचिस माँगा. बलबीर ने भी हाथ आगे बढ़ा दिया. पर दाई माँ ने उसमे से तीन बीड़ी निकली. और एक साथ जब तीन बीड़ी जलाई तब कोमल समझ गई ki दाई माँ ने तीसरी बीड़ी किसके लिए जलाई. गांव और बड़ो की मर्यादा के चलते कोमल मुश्कुराती थोडा शर्माती दए बाए देखने लगी. पर जब दाई माँ ने बीड़ी का हाथ आगे बढ़ाया तो कोमल ने तुरंत ले लिया.

दए बाए देख देख कर कोमल ने भी बीड़ी पी. सिगरेट से थोडा टेस्ट भले अलग लगा. पर तलब तो मिट गई. कुछ पल शांत होने के बाद इस बार कोमल ने बलबीर की तरफ देखा.


कोमल : क्या और कोई ऐसा डरवाना किस्सा हुआ तुम्हारी जिंदगी मे????


बलबीर ने अपने हाथ मे जो बीड़ी बूझ गई थी. उसे फेका. अपने पाऊ को मोड़ कर थोडा पीछे हुआ. जैसे थोडा सोच कर बोल रहा हो.


बलबीर : अभी कुछ 6 महीने पहले ही हुआ. वो तो इतना भयानक था की उस से ज्यादा बुरा मेने अपनी जिंदगी मे कभी नहीं देखा.


दाई माँ भी हैरानी से बलबीर की तरफ देखने लगी. क्यों की ज्यादातर तो ऐसा कुछ होता तो बलबीर उसे बता देता. पिछला किस्सा भी बलबीर ने बताया हुआ था. सिर्फ कोमल के लिए दाई माँ वो किस्सा दोबारा सुन रही थी.


दाई माँ : का भओ??? (क्या हुआ??)


बलबीर : ये किस्सा बीकानेर के पास हुआ था. बीकानेर के अंदर ही अनाज मंडी मे मेरी गाड़ी खड़ी थी. माल उनलोड हो रहा था.

तब तो अपना मुन्ना भी गाड़ी चलना सिख गया था. मै मुन्ना के भुरोसे गाड़ी छोड़ कर मंडी से बाहर निकाल गया. सोचा चाय पीलू. मंडी के बाहर की तरफ ही दुकान थी. वहां रंडिया भी बहोत घूमती है. ज़्यादातर ट्रक वाले के चलते ही वहां आती है. खुलेआम घूमती है. कोई कुछ नहीं बोलता. वैसे तो मे कभी गलत काम नहीं करता. पर एक लड़की पर मेरी नजर गई. वो रोड पर सबसे अलग खड़ी थी. बड़ी सुन्दर थी. रोड के खम्बे के सहारे खड़ी थी. वो मुझे देखने से ही रंडी तो नहीं लग रही थी.

क्यों की उसने बहोत ही बढ़िया कपडे पहेन रखे थे. उसने सोने के जेवर भी पहेन रखे थे. मुझे वो देखने से ही अशली लग रहे थे. वो अकेली खड़ी थी. मोटरसाइकिल पर तो कई मनचले आए. पर कोई उसके पास नहीं जा रहा था. जब की जितनी लड़किया घूम रही थी. उन लड़कियों मे वो सब से सुन्दर थी. बल्कि ये कहु की उस से सुन्दर लड़की तो मेने आज तक नहीं देखि. मेरा भी दिल किया की एक बार जाकर उस से बात करू. भले ही मै गलत काम ना करू. पर मै उसूलो का पक्का हु.

उस लड़की के बाल भी खुले थे. और इतने बड़े की कुलहो के भी निचे तक थे. मै उस लड़की को लगातार देखता रहा. मै सोचता रहे गया की वो वहां क्यों खड़ी है. क्यों की वहां रंडिया खड़ी रहती है. और उसके पास कोई जा क्यों नहीं रहा. उस से कोई पूछने भी नहीं जा रहा था. तभी एक लड़का मोटरसाइकिल पर आया. और उसके पास आकर खड़ा हो गया. वो लड़की भी थोडा आगे उसके करीब हुई. दोनों पता नहीं क्या बात कर रहे होंगे. वो लड़की उस लड़के के पूछे बैठ गई.

वो लड़की बाए तरफ पाऊ लटकाए अपने दोनों हाथो को उस लड़के के कंधो पर रखे बैठ गई. वो मोटरसाइकिल चली गई. तभी मै भी अंदर मंडी मै चले गया. मेरी गाड़ी खाली हो चुकी थी. मुन्ना बिल्टी देख रहा था. मै इसके पास गया.


मुन्ना : दद्दा अभी निकाल जाते है. जल्दी जयपुर पहोच जाएंगे.


मुझे उसकी बात सही लगी. मेने गाड़ी चलाने को उसे कहा.


मै : चल ठीक है. निकाल गाड़ी.


उसने गाड़ी निकली. मै साइड मै बैठ गया. रोटी हम आगे कोई ढाबे पर खाने वाले थे. बोतल मेने ले रखी थी. चालू गाड़ी मे ही मेने पेग बना ना शुरू किया. पर सामने मुझे वही मोटरसाइकिल दिखी. मै हेरत मे पड़ गया. वो मोटरसाइकिल बहोत धीरे चल रही थी. हाईवे पर तो अंधेरा ही होता है. सिर्फ गाड़ियों की लाइट ही होती है. हमारी गाड़ी की लाइट से मुझे उनकी मोटरसाइकिल दिख गई. मुझे वो लड़का तो नहीं दिख रहा था.

बस उस लड़की की पिठ ही दिख रही थी. वही उसके लम्बे बाल. मुन्ना को मेरे हाथ से गिलास लेना था. इस लिए हमरी गाड़ी की पीकप भी थोड़ी धीरे हो गई.

Aapki ek story padhi thi.chudel ki prem kahani sayad.part 1 achhi lagi.par part 2 thodi boring lagne lagi.kahani thodi complicated ho gayi thi.kuch achhe se samajh nahi aa raha tha.


Ye achhi lag rahi hai.par sayad horror hi hai
 
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Bus sayad meri talash puri ho gayi.aaishi hi story dudh raha tha horror plus erotic.

Achha laga padh ke
अगर आप इरोटिक हॉरर स्टोरी की तलाश मे आए हो तो यह हॉरर रियल किस्सों पर आधारित स्टोरी है. पर यह इरोटिक नही है. इस किस्से के बाद हॉरर और तंत्रा मंत्र लेवल ज्यादा हाई हो जाएगा.

अगर हॉरर इरोटिक पढ़ना चाहते हो तो यह पढ़ो. जिसमे इरोटिक लेवल कई गुनाह ज्यादा जबरदस्त है. एक नई दुनिया. Saya

 
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Aapki ek story padhi thi.chudel ki prem kahani sayad.part 1 achhi lagi.par part 2 thodi boring lagne lagi.kahani thodi complicated ho gayi thi.kuch achhe se samajh nahi aa raha tha.


Ye achhi lag rahi hai.par sayad horror hi hai
पार्ट 2 धीरे धीरे रंग मे आने वाली स्टोरी है. आगे लेवल उसमे भी धीरे धीरे बढ़ता है.

मेरी एक और स्टोरी आने वाली है. साईको कविता. जो बहोत जबरदस्त रोमांटिक और इरोटिक होंगी. बस कुछ ही दिनों मे.
 
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कोमल ने सोच लिया था की इस सब्जेक्ट पर वो कुछ लिखेगी. जब की वो बहोत अच्छी वकील थी. ऐसे तो कोमल की स्पेशल्टी क्राइम केसीस मे थी. लेकिन प्रॉपर्टी डीलिंग मे भी वो बहोत पैसा कमा रही थी. ऐसे तो कोई गरीब के खिलाफ कोई केस नहीं लढा.

पर गरीबो के लिए भी नहीं लढा. हराम का पैसा भी खूब कमाया. पर इसी चक्कर मे वो शुकुन नहीं मिला. पलकेंस से भी उसका चक्कर एक केस से ही शुरू हुआ था. उसकी अहमदाबाद मे एक मकान की डील फसी हुई थी.


कोमल ने उसे कामयाबी दिला दी. दोनों को एक दूसरे के लिए एक्ट्रेकशन हुआ. जिसे दोनों प्यार समझ बैठे. शादी के कुछ साल तो अच्छे बीते. पर बाद मे दोनों एक दूसरे को वक्त ही नहीं दे पाते. नतीजा झगड़े और कलेश से दोनों बस नाम के पति पत्नी रहे गए. दोनों मे लम्बे अरसे से sex भी नहीं हुआ.

कोमल को प्यार और मर्द दोनों से ही नफ़रत होने लगी थी. एक तो पिता ना होने के कारण जो प्रॉब्लमस उसने और उसकी माँ ने झेली. उसके बाद तो लोगो से भरोसा ही उठ गया.

इसी चक्कर मे कोमल अपने आप को स्ट्रांग बनती गई. वो जितनी खुबशुरत थी. उतनी ही ख़तनक वकील भी थी. पर कोमल को हॉरर टॉपिक पहले से ही पसंद आते थे. एक बार उसने सोचा था की वो कोई हॉरर स्टोरी की स्क्रिप्ट लिखेगी.

लेकिन अपनी वकीलात के चलते वो ऐसा कर ही नाही पाई. कोमल बदलने लगी. हलाकि वो ऐसी थी नहीं. जैसा वो अपने आप को दुनिया को दिखा रही थी. पर बलबीर से मिलने के बाद. उसकी हालत देखने के बाद. वो अपने अंदर अपने आप को तलाश ने लगी थी. बलबीर ने उसे एक और रोमांचक और डरावना किस्सा सुनाया.


बलबीर : तू दीपू को जानती है???


कोमल : अममममम.... कौन दीपू???


बलबीर : अरे दीपक. अपने सरपंच जी का बेटा. अपने सतपाल चाचा का लड़का....


कोमल : (एक्सक्टेड स्माइल) हा हा वही जो तेरे साथ आता था.


दीपक बलबीर का अच्छा दोस्त था. पर वो स्कूल मे पढता था. उसने कॉलेज की भी पूरी पढ़ाई की थी. बस बलबीर ही अनपढ़ रहा.


बलबीर : हा बस वही. पिछले साल वो मरते मरते बच्चा है.


कोमल को हैरानी हुई.


कोमल : कैसे??? क्या नशा नशा करने लगा क्या???


बलबीर : अरे वो तो बीड़ी भी ना पिता. वो पूना मे नौकरी करता है. पिछले साल उसकी शादी थी. तो वो आया. उसका रिस्ता तो पहले से ही पक्का हो रखा था. बसेड़ी गाउ मे.


कोमल : तो क्या उसका भी नेहा जैसा हाल हुआ क्या???


बलबीर : नहीं उसके जैसा तो नहीं पर थोडा वैसा ही. उसकी शादी तो बहोत बढ़िया हुई. खूब धूम धाम से की. पर उसके बाद हुआ वो बड़ा ही अजीब था.


कोमल : तो क्या उसकी बीवी के साथ हुआ?? केसी है उसकी बीवी??? अच्छी तो मिली है ना???


बलबीर : अरे बाबा सुन तो सही. उसकी बीवी बहोत अच्छी है. सुन्दर भी है. वो अपनी बीवी को मोटरसाइकिल से ही उसके मायके छोड़ने गया.


कोमल : क्यों छोड़ने गया??? उसकी बनती नहीं है क्या???


बलबीर : (नार्मल गुस्सा) तू ठीक से बोलने तो दे नहीं रही. वो नई दुल्हन अपने मायके जाएगी नहीं क्या.


कोमल को अपनी गलती का एहसास हुआ. वो हस पड़ी.


कोमल : (स्माइल) अच्छा अच्छा सॉरी सॉरी.


बलबीर : तो दीपक एक दिन अपने ससुराल मे रुका भी. उसने अपनी बीवी से वादा लिया की 2 दिन से ज्यादा वो नहीं रुकेगी. नई नई शादी हुई तो कहा रुका जाता है.


कोमल शर्मा गई. वो मुश्कुराते हुए निचे देखने लगी. बलबीर के फेस पर भी स्माइल आ गई. उसने बोलना जारी रखा.


बलबीर : तो वो दूसरे दिन अपनी बीवी को छोड़ कर अपने घर के लिए निकाल पड़ा. पर वो गाउ से जैसे ही निकला. उसकी बीवी गाउ के बाहर के नुक्कड़ पर ही खड़ी मिली. अपना शूटकेश लेकर. बलबीर हैरान रहे गया. वो अभी तो अपनी बीवी को उसके मायके वाले घर मे छोड़ कर आया. वो इतनी जल्दी गाउ के बाहर कैसे आ गई. उसने तुरंत अपनी बीवी के पास मोटरसाइकिल रोकी. उसकी बीवी का नाम मीना है.


दीपक : (सॉक) मीना. तू इतनी जल्दी यहाँ कैसे???


मीना उसकी आँखों मे देखने लगी.


मीना : (स्माइल) मुझे तुम्हारे बिना अच्छा नहीं लगेगा. मै भी तुम्हारे साथ ही चलूंगी.


कोमल : (स्माइल) वाह... साला इसे बोलते है प्यार.


कोमल के फेस पर स्माइल आ गई. स्माइल बलबीर के फेस पर भी स्माइल आई.


बलबीर : (स्माइल) आगे तो सुन. वो उसे बैठकर वापस अपने घर ले आया. बहोत प्यार मस्ती सब कुछ बढ़िया ही रहा. मीना उसका बहोत बढ़िया ख्याल रख रही थी. तभी बलबीर उसी शाम मेरे पास आया. मुझे अपना फ़ोन दिया.


दीपक : यार इसे आगरा ले जा. ठीक करवा ला.


मेने भी उस से फोन ले लिया. सोचा नई नई शादी है. कहा बेचारी को छोड़ कर आगरा जाएगा. आने और जाने मे शाम हो जाएगी. मेने फोन ले लिया. और दूसरे दिन आगरा निकाल गया. फ़ोन ठीक करवाने. वहां गया. उसका फ़ोन ठीक करवाया. वापस आ रहा था. तब मुझे भाभी का फोन आया. मीना भाभी का.


कोमल : आगे बोलो ना. रुक क्यों गए???


बलबीर : भाभी ने बोला. उनका फोन क्यों नहीं लग रहा. वो मुझे लेने आ रहे हेना???


कोमल : लेने कहा से लेने???


बलबीर : भाभी के मायके से.


कोमल : (सॉक) क्या??? पर वो तो दीपक के साथ ही थी ना???


बलबीर : यही तो बात है. मे आगरा से वापस घर आया. दीपक से मिला. मेने उसे ऐसे बताया. तब उसे भरोसा नहीं हुआ.


दीपक : क्या बात कर रहा है यार. तेरी भाभी तो यही है. घर पर ही. वो क्यों कॉल करेंगी.


मै : मै सच कहे रहा हु. भाभी बोल रही थी की पापा का भी फ़ोन नहीं लग रहा है. मै झूठ क्यों बोलूंगा यार.


दीपक तुरंत अंदर घर मे गया. उसने मीना भाभी को आवाज दी. पर वो घर मे थी ही नहीं. दीपक ने तुरंत मीना भाभी को कॉल किया. उनसे बाते की. उसका चहेरा उतरा हुआ था.


कोमल : तो वो कौन थी. जो दीपक के साथ थी???


बलबीर : आगे तो सुन. दीपक को कुछ पता नहीं चला. पता तो हमें भी नहीं चला. वो कौन थी. जो दीपक के साथ इसकी बीवी बनाकर रहे रही थी.


कोमल : तो क्या उसने दीपक को कोई नुकशान नहीं पहोंचाया???


बलबीर : नहीं. वो उसके साथ 2 दिन रही. उसके साथ खाया, पिया, प्यार किया. पर ऐसा कुछ गलत हुआ ही नहीं. ये बात हमने किसी को नहीं बताई. दीपक उसी रात अपनी बीवी के मायके जाना चाहता था. पर सतपाल चाचा और मेने जाने नहीं दिया. दूसरे दिन वो मीना भाभी को घर ले आया.


कोमल : चलो कोई नुकशान नहीं पहोंचाया. ये अच्छी बात है. तो फिर कोई बादमे तो प्रॉब्लम नहीं हुई ना???

बलबीर : वो गई नहीं थी. वो वही उनके घर मे ही थी. दीपक वो हादसा भूल गया. कुछ दिन तो बढ़िया चले. पर कुछ ही दिनों बाद. दीपक दिन मे ही अपने कमरे मे मीना भाभी से प्यार कर रहा था. वो बिस्तर पर मीना भाभी को छोड़ कर जैसे बाहर निकला. भाभी उसके सामने चाय लेकर खड़ी थी.


मीना : उठ गए. लो चाय पीओ. मै तुम्हे जगाने ही आ रही थी.


दीपक की हालत ख़राब हो गई. वो अभी तो वो भाभी के साथ बिस्तर पर मतलब...


कोमल : हा बोलो बोलो. मतलब वो भाभी से sex किया. और उसे बिस्तर पर छोड़ के बाहर निकला तो मीना भाभी उसे सामने मिली. मतलब वो मीना भाभी के रूप मे उनके घर मे थी. वो दीपक के साथ sex भी कर रही थी. पर किसी को कोई नुकशान नहीं किया. पर फिर उसने किसी को नुकशान नहीं पहोंचाया ये अच्छी बात है. तो क्या उस से दीपक ने पीछा छुड़ाने की कोसिस नहीं की???


बलबीर : दीपक डर गया. वो किसी को बताए तो कैसे. वो फिर मुझे भी नहीं बताता. पर वो डरने लगा. एक बार जब वो उसके पास आई. वो समझ गया की वो उसकी बीवी नहीं है. उसने दीपक से कहा की वो उसे अच्छा लगता है. वो उसके पास ही रहेगी. किसी को पता नहीं चलेगा. बस वो उसे भी प्यार करें.


कोमल : वाह... भुत को भी इंसान से प्यार हो गया. तो किसी को पता नहीं चला क्या.


बलबीर : दीपक को भी उसकी आदत पड़ने लगी थी. उसका अपनी बीवी से झगड़ा होने लगा. उसकी ग्राहसती ख़राब होने लगी. पर किस्सा वक्त से पहले पकड़ा गया.
Ye achha tha guru.ye kahani maine bhi bachpan main suni thi.

Maza aa gaya
 
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Ye achha tha guru.ye kahani maine bhi bachpan main suni thi.

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ऐसे बहोत से रियल केस हो चुके है. मेने यह स्टोरी रियल्टी पर ही लिखी है.
 
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कोमल पलकेश से तलाख ले चुकी थी. उसकी माँ जयश्री ने बहोत समझाया. पर कोमल पे कोई असर नहीं हुआ. माँ बार बार एक ही बात बोलती रहती थी. की कारण क्या है. वो समझा बुज़ा कर टाल देती. लेकिन कोमल को अब अकेले रहने की आदत हो गई. इस लिए वो उसी फ्लेट मे अकेली रहती.


8 मंथस से वो अकेली ही थी. 8 महीना बीत जाने के बावजूद भी बलबीर का call नहीं आया. कोमल को ऐसा नहीं था की बलबीर की याद नहीं आई. वो उसके साथ हुए सेक्स को भूल ही नहीं पाई. पर अपने केस की वजह से इन बातो को नजर अंदाज़ करने लगी थी. पर एक दोपहर अचानक एक call आया. वो call बलबीर का था.


कोमल : हेलो...


बलबीर : हेलो. मै बोल रहा हु. बलबीर.


कोमल के फेस पर एकदम से स्माइल आ गई.


कोमल : (एक्ससिटेड स्माइल) तुम्हे अब मेरी याद आई. आठ महीने बाद. बोलो कब आ रहे हो यहाँ???


बलबीर : मै यहाँ आ चूका हु. अहमदाबाद मे.


कोमल की तो मानो खुशियों का ठिकाना ही नहीं रहा. वो एक साथ कई सारे सवालों की बरसात बलबीर पर कर देती है.


कोमल : (एक्ससिटेड स्माइल) यहाँ अहमदाबाद मे?? कब?? और अभी तुम हो कहा??? और आए तो मुजे पहले फ़ोन क्यों नहीं किया. अभी कहा हो???


बलबीर : (स्माइल) अरे अरे रुको तो. बस अभी ही पहोंचा हु. रेलवे स्टेशन पर ही हु.


कोमल : (एक्ससिटेड स्माइल)तुम वही रुको. मै तुम्हे लेने आ रही हु.


कोमल तुरंत ही अपनी कार लेकर रेलवे स्टेशन निकाल गई. जब वो बलबीर से मिली तो तुरंत उसने बलबीर को बांहो मे भर लिया. बाद मे देखा तो उसके दोनों बच्चे भी थे. कोमल ने उन दोनों बच्चों को भी प्यार किया. उन्हें चूमा भी गले लगाया. ये सब करते उसके अंदर की ममता जाग गई. वो उन तीनो को अपने घर ले आई. उसका फ्लेट तीसरी मंजिल पर था.


कोमल : (एक्ससिटेड स्माइल) : अरे आओ ना अंदर वहां क्यों खड़े हो गए.


पर अंदर आते बलबीर को कुछ अलगसा महसूस हुआ. कुछ घुटन सी महसूस होने लगी. वो बच्चों को लेकर बाहर हो गया. बच्चों का भी मुँह उतर गया. कोमल ये सब देख कर सॉक हो गई.


कोमल : क्या हुआ??? बाहर क्यों चले गए??? अंदर आओना. ये मेरा ही घर है.


पर बलबीर कुछ बोलने के बजाय घुटनो पर बैठते हुए दोनों बच्चों को बांहो मे भर लेता है. दोनों के सर पर हाथ रख कर अपनी आंखे बंद कर लेता है. वो कुछ बड़बड़ा रहा था. जैसे कोई मन्त्र जाप कर रहा हो. कोमल समझ नहीं पाई. और उन्हें देखती रही. बलबीर खड़ा हुआ. और दोनों बच्चों के हाथ पकड़ कर खड़ा हो गया. वो उस फ्लेट के बाहर ही था.


बलबीर : माफ करना कोमल. अगर हमें यहाँ रहना है तो मै इन बच्चों के साथ यहाँ नहीं रहे सकता. ये घर मुजे कुछ ठीक नहीं लग रहा.


कोमल सोच मे पड़ गई. ऐसा क्या उसे महसूस हुआ. जो वो ऐसा बोल रहा है.


कोमल : तुम क्या बोल रहे हो. मुजे कुछ समझ नहीं आ रहा. मै यहाँ 7 सालो से रहे रही हु. मुजे तो सब ठीक लग रहा है.


बलबीर : सायद तुम्हे ना लग रहा हो. पर अंदर आते ही मुजे घुटन सी महसूस होने लगी. सर भरी हो गया. मै खुद की बात होती तो समझोता कर लेता. पर मेरे बच्चे छोटे है. उन्हें यहाँ....


बलबीर बोल कर चुप हो गया. पर कोमल को अब भी समझ नहीं आया. इतनी दूर से वो यहाँ आया. और पता नहीं क्या कारण होगा. वो यहाँ से ऐसे ही चले जाएगा. ऐसे खयाल कोमल के मन मे आने लगे.


कोमल : अच्छा चलो. मै तुम्हे मम्मी के पास ले चलती हु.


कोमल बलबीर और उसके दोनों बच्चों को लेकर अपनी माँ के घर लेकर गई. वहां कोमल की मम्मी और उसकी छोटी बहन को बहोत अच्छा लगा. उन दोनों का दिल बच्चों से लग गया. रास्ते मे ही डिसाइड हो गया था की बलबीर के बच्चे अब वही रहेंगे.

उनका स्कूल मे दाखिला करवाना है. ये सब जब कोमल की मम्मी जयश्री को बताया तो वो ज्यादा खुश हुई. कोमल ने बताया की बलबीर को वो नौकरी दिलवाने वाली है. पर उसने ये नहीं बताया की कोमल उसे अपना ही ड्राइवर रखने वाली है.

बच्चों को छोड़ कर वो दोनों वहां से निकाल गए. अब तक कोमल ने ही कार ड्राइव की और अब भी वही ड्राइव कर रही थी. पर सारा प्लान उसने बलबीर को नहीं बताया.


बलबीर : तुमने ये नहीं बताया की मै कहा रहूँगा???


कोमल थोड़ासा मुश्कुराई. उसकी मुश्कान मे शारारत थी.


कोमल : क्यों मेरे साथ वहां मेरे फ्लेट मे रहने मे तुम्हे क्या दिक्कत है. वैसे भी मे अकेली रहती हु वहां.


बलबीर : क्यों तुम्हारा पति???


कोमल : हम अब साथ नहीं है.


बलबीर : साथ नहीं मतलब???


कोमल : (लम्बी सांसे) हम्म्म्म... डाइवोर्स तलाक...


बलबीर कुछ नहीं बोला.


कोमल : क्यों खामोश हो गए. कुछ पूछना है तो पूछो.


बलबीर : मुजे ये सही नहीं लग रहा है कोमल.


कोमल ने बलबीर को चुप करवा दिया. उसे डांट दिया. पर किसी प्रेमिका या बीवी की तरह नहीं. कोसी बॉस की तरह.


कोमल : सब सही है बलबीर. तुम चुप रहो. तुम मेरे ही साथ रहोगे. और तुम मेरी ही कार चलाओगे. मै तुम्हे नौकरी दे रही हु. अब मै ही तुम्हारी बॉस हु समझे.


बलबीर को बुरा लगा. पर वो कुछ कहे नहीं सका. उसने महसूस किया की कोमल मे थोडा बदलाव है.
वो लोग वापस वही फ्लेट पर आ गए. इस बार भी बलबीर को अच्छा तो नहीं लग रहा था. कोमल अंदर आते ही डोर क्लोज करती है.

और बलबीर पर टूट पड़ी. सीधा उसे बांहो मे लेकर होठो से होंठ जोड़ दिये. लम्बी सांसे लेते आंखे बंद. वो पागलो की तरह बलबीर को किश कर रही थी. वैसे तो बलबीर भी उसे रोकना चाहता था. पर पता नहीं क्यों वो अपने आप को रोक नहीं पा रहा था. वो दोनों नंगे भी हो गए और बेड पर भी पहोच गए. बलबीर लगातार बड़ी जोरो से धक्के लगा रहा था.



कोमल : (आंखे बंद मदहोश) अह्ह्ह्हह.... ससससस...


दोनों लीन हो गए. और सब कुछ भूल गए. पर जो काम वो पूरा करने की कोसिस कर रहे थे. वो पूरा ना हो पाया. कोमल के मोबाइल पर रिंग बजने लगी.


कोमल : अह्ह्ह ससससस... अब इस वक्त कौन चुतिया मुजे call कर रहा है.


कोमल ने हाथ बढाकर बलबीर के निचे ही रहे फोन खिंचा. और देखा. Call पलकेश का था. वो तलाक के बाद एक भी call नहीं कर रहा था. और ना ही कोमल ने भी किया.


कोमल : इस चूतिये को अब मेरी याद आई है.... कुछ बोलना मत.


कोमल ने call पिक किया.


कोमल : हा पलकेंस बोलो???


पलकेश का नाम सुनते ही बलबीर समझ गया की वो उसका पति है. जिस से कोमल ने तलाक ले लिया था. पर पलकेश की आवाज सुनकर कोमल के होश जरूर उड़ गए.


पलकेश : हेलो कोमल. क्या तुम ठीक हो???


कोमल ने महसूस किया की पलकेश की आवाज के साथ एक और आवाज का इको हो रहा था. और दूसरी आवाज किसी अन नॉन की थी. जैसे की


हेलो कोमल. हेलो कोमल( अन नॉन वॉइस). क्या तुम ठीक हो??? क्या तुम ठीक हो(अन नॉन वॉइस)???


कोमल को गड़बड़ लगी. पर मामला समझने से पहले वो कोई रियेक्ट नहीं करती.


कोमल : (सॉक) हा मै ठीक हु.


पसकेश : पर मै ठीक नहीं हु. पर मै ठीक नहीं हु(अन नॉनवॉइस) क्या तुम यहाँ आ सकती हो??? क्या तुम यहाँ आ सकती हो(अन नॉन वॉइस)???


कोमल पलकेश की दोहरी आवाज में एक डर भी महसूस कर रही थी.


कोमल : क्या हो गया तुम्हे. तुम ठीक तो हो.


पलकेश रोने लगा. उसके साथ में जो दूसरी आवाज थी. वो भी वैसे ही रोते हुए पलकेश के आवाज की कॉपी कर रही थी.


पलकेश : (रोते हुए) नहीं मै ठीक नहीं हु. नहीं मै ठीक नहीं हु(अन नॉन वॉइस). तुम प्लीज जल्दी यहाँ आ जाओ. तुम प्लीज जल्दी यहाँ आ जाओ(अन नॉन वॉइस). वो तुमसे बात करना चाहता है. वो तुमसे बात करना चाहता है(अन नॉन वॉइस).


कोमल सॉक हो गई.


कोमल : (सॉक ) कौन बात करना चाहता है???

पलकेश : (रोते हुए) तुम प्लीज यहाँ आ जाओ प्लीज. तुम प्लीज यहाँ आ जाओ प्लीज(अन नॉन वॉइस) मेरी मदद करो...
मेरी मदद करो...(अन नॉन वॉइस)

तभी अपने आप फ़ोन कट गया. कोमल पलकेश के लिए परेशान हो गई. चाहे भले ही उसने पलकेश से तलाख ले लिया था. वो उसकी मदद करने के लिए तैयार हो गई. उसने तुरंत मोबाइल पर चेक किया की फ्लाइट अवलेबल है या नहीं.

पर उसे फ्लाइट ही नहीं मिली. जो थी वो फुल थी. तक़रीबन ट्रैन से भी 12 से 14 घंटे का रन था. अगर वो ट्रैन से जाती तो. उसमे भी रिजर्वेशन मिलना मुश्किल हो गया. बलबीर का भी मूड चेंज हो गया. वो भी उठ कर बैठ गया. कोमल ने बलबीर की तरफ देखा.


कोमल : क्या तुम मुजे कार से मुंबई तक पहोंचा सकते हो???



बलबीर ने अपने कीपैड वाले मोबाइल में देखा. दोपहर के 4 बज रहे थे. कोमल कुछ मांगे. और बलबीर ना दे. ऐसा तो ना मुमकिन है. बलबीर ने हा मे गर्दन हिलाई. वो दोनों शाम के 6 बजे तक मुंबई के लिए बाय रोड निकाल गए.
Horror main aapke aas pass bhi koi nahi hai.

Ek story padhi thi jismain ek kamre main bhai or behen ko maar deta hai koi.wo bhi achhi thi par complete nahi thi.

Par aapki story to kamal ki hai.
 
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