किसी बात से मै किसी से खफा हू,
जिंदा हू मै, मगर जिंदगी से ख़फ़ा हू......
मेरे हमदम मेरे दोस्त....... मुझे नही पता अपना दर्द, तकलीफ, वियोग वेदना, यहाँ लिखने का अधिकार है कि नही, लेकिन खुद को रोक नही पा रहा हूँ... इसलिए लिख रहा हूँ... आपको दोस्त माना है और दोस्त के कांधे पर सर रख कर रोना चाहता हूँ। किसी अपने खास शक्स का अचानक से छोड़ कर जाने का दर्द बहुत ही जानलेवा होता है... ये मुझे अब समझ आ रहा है।
मेरी एक दोस्त जिसने मुझे एक नई जिंदगी दी थी, मेरे डिप्रेशन के सबसे बुरे हालातों में मुझे अपनी बातों से motivate कर दोबारा से जीने का साहस दिया.... वो मेरी दोस्त मुझे इस जिंदगी के सफर में एकदम से साथ छोड़ कर चली गई। मुझे गम इस बात का है कि आखिरी वक्त में, मै उससे माफी भी नही मांग पाया, उस बात की माफी जो गलतिया मैने हर बार की थी.... उसने मुझे जब जब अपनी तकलीफे, दर्द, पीड़ा बताई मैने उसकी बातों को हँस कर टाल दिया। कभी भी नही सोचा था कि वो उसका दर्द नासूर बन गया था और 1 अगस्त के शाम 4:15 पर उसने मुझे " अपना ख्याल रखना " केहकर अलविदा कह दिया। मै बहुत बुरा इंसा हू... मै खुद को माफ नहीं कर पा रहा हूँ.... मेरे दोस्त मनु भाई आपको आपके रब, खुदा, ईश्वर का वास्ता आप ऐसा मशविरा, सलाह, तरीका, मंत्र, तंत्र, यंत्र, दुआ, दवा, इलाज बता दो जिससे मै अपनी दोस्त को दोबारा से देख सकूँ...... ? ??
""ऐ मेरे दोस्त लौट कर आजा
बिन तेरे ये जिंदगी अधूरी है.....
आ कर तू देख मेरी हालत को
बिन तेरे ये जिंदगी अधूरी है""
विरह की वेदना (जुदाई का दर्द) में कुछ भी लिखने पढ़ने का मन तो नही है मगर आप जैसे दोस्त को नही खोना चाहता हूँ इसलिए अब आता हू कहानी के update पर.... मनु भाई मेरे दोस्त आप बहुत ही खुश नसीब है... जितने प्यार और जज्बातो के साथ आप लिख रहे है.... उससे दुगुने प्यार और जज्बातो के साथ आपके रीडर कहानी को पढ़ रहे है..... आपके इतने बारीकी से लिखे गए एक एक शब्द के जबाब में रीडर भी उतनी ही बारीकी से प्रतिक्रिया दे रहे है।
इस update में एक रीडर.YouAlreadyKnowMe ने बैक टू बैक दो review लिखे दोनों ही रिव्यू लाजबाब थे... लेकिन उनके टिप्पड़ी पर अन्य रीडर का reaction देखकर मै सोच में पड़ गया... मेरे मन में जो ख्याल आया वो हास्य का विषय मानकर ही पढ़ा जाये......... उपहास का नही बस इतनी सी गुजारिश है
सम्मानीय संजू vr जी एक ऐसे शक्स है जो अपने कीमती शब्दों को किसी भी कहानी के update पर जरूरत के हिसाब से ही खर्च करते है, बहुत बहुत बहुत कम ही अन्य रीडर की गयी टिप्पड़ी पर किसी तरह से तीखा टिप्पड़ी करते है..... लेकिन इस बार उनकी उन रीडर की लिखी गई प्रतिक्रिया पर उनकी जबाबी प्रतिक्रिया के शब्दों में मुझे कुछ अलग अलग से शब्द नजर आये जैसे संजू जी कहना चाह रहे हो.... " जाने कितने दिनों के बाद गली में आज चाँद निकला "




ठीक इसी तरह Riki 007 जी ने उन रीडर को ससम्मान पाँव लागे भौजी से जबाबी प्रतिक्रिया की शुरुआत की.....!
मै YouAlreadyKnowMe को ज्यादा तो नही जानता हूँ हाँ उनकी एक बेहतरीन अधूरी रचना " मै नही हू वेबफा " के अधूरे छूटे पन्ने जरूर पढ़े है, जो शायद लिखते लिखते वो लिखना भूल गयी और शायद वफा के रास्तों पर भटक सी गयी थी..... । मैने आपको पहले ही बताया है कि मै साइलेंट रीडर ही रहा हूँ और बहुत कम कहानियों पर कुछ लिखता हूँ, जिसकी वजह शायद मेरे "कतई
जहर" भरे शब्द हो सकते है.
उन्ही के कॉमेंट में लिखा गया है कि आप एक कुँवारे बाप है, अर्थात किसी और की बच्ची को आप पाल रहे है..... वैसे तो ये बहुत साहस का कार्य है। लेकिन "हमारी समाज में लड़की को कुंवारी माँ और लड़के को किसी और के बच्चे को अपना नाम देने पर शर्म की नजरों से देखा जाता है " वैसे ऐसे आपके कितने राज है जो मुझे छोड़ कर सारी दुनिया को पता है... PM में बताइये कभी.... बस
वो बंधन वाली कहानी पढ़ने की मत कहना



अब आखिर में आता हू इस update पर... कीर्ति के जीवन में पढ़ना, पढ़ाना, कमाना, पैसे बचाना, पैसे छिपाना, फैशन भरे कपड़ो में रंग रूप बदलना... हर घटना का विवरण बेहद उम्दा और सराहनीय है। कीर्ति के माँ बाप के संस्कारों और कीर्ति की सोच चर्चा का विषय यहाँ रीडर के द्वारा लिखी गई है... उसी क्रम में, मै अपनी बात सत्य घटना के साथ आगे लिखता हूँ......
कीर्ति की तरह ही बहुत सारी मिडिल क्लास फैमिली की कुंवारी जवानी में उफान मारती लड़किया अपनी उच्च इच्छाओ को पूरा करने के लिए private स्कूल और घरों में टूशन पढ़ाती है। और ठीक कीर्ति की तरह वो सब करती है जो update में लिखा गया है। लेकिन कोरोना के बाद दो साल स्कूल और टूशन बंद हो गये, online पढाई शुरु हो गयी, स्कूल वालों ने हरामी पन किया और बहुत सारी ऐसे कुंवारी मैडम बेरोजगार हो गयी..... हाथों में फोन महंगे थे लेकिन सस्ते रीचार्य की औकात नहीं रही... पहले पढ़ाती थी तो कमाती थी। हालात बेकार होते गये..... तब उन मैडमो ने इसका slotion निकाला वो था लाइव पढाई की जगह लाइव चुसाई दिखाना.... बस तब से ही ये superchat लाइव, dsc girl live का क्रेज शुरु हुआ है।
ये संपूर्ण ज्ञान मैने 1137 टोकन और 119 घंटे खर्चा कर एक स्कूल की ex. कुंवारी मैडम से superchat लाइव पर बात करते हुए अर्जित किया है....!


लिखते रहिये

धन्यवाद