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Thriller कातिल रात

Black

Prime
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#01

बारिश: (रात 8 बजे!)

इस बार दिल्ली की सर्दियों में बारिश अपना अलग ही स्यापा कर रही थी।
कहने वाले तो कहने लगे थे कि, दिल्ली भी बारिश के मामले में अब मुम्बई बनती जा रही है।
Usse bura haal hai Delhi ka
एक तो जनवरी के पहले सप्ताह की कड़ाके की सर्दी और उस पर ये बारिश का कहर।

मैं उसी सर्दी की मार से बचने के लिए इस वक़्त अपने फ्लैट में अपने बेड पर और अपनी ही रजाई में लिपट कर अपनी सर्दी को दूर भगाने का प्रयास कर रहा था।
Is yug mein rajai mein kon sota
अब आप भी सोच रहे होंगे की ये कौन अहमक इंसान है,जो बेवजह दिल्ली के मौसम का आँखों देख़ा हाल सुना रहा है।
Pm purush
:D






वैसे तो अभी तक आपने अपने इस सेवक को पहचान ही लिया होगा ,
Dhepa maarke tod dunga apni bakhan nahi karte story mein
लेकिन फिर भी मैं आपको बता दूं कि मैं “रोमेश!” दिल्ली में एक छोटा मोटा जासूसी का धंधा करता हूँ…न न मैं कोई राॅ का एजेंट नही हूँ,मैं तो एक प्राइवेट डिटेक्टिव हूँ, जो सिर्फ कत्ल के केस में ही अपनी टांग घुसाता है।
Kisi din koi aur ghusa jaaga aise kisi case
जासूसी के बाकी धंधो मसलन, शक धोखा, पीछा, तलाक जैसे सड़क छाप धंधों से मैं दूर ही रहता हूँ।
Isi mein toh scope hai
बन्दे को बचपन से ही जासूसी उपन्यास पढ़ने का शौक इस कदर था, की जिस उम्र में मुझें स्कूल की किताबें पढ़नी चाहिए थी,उस उम्र में मैं दिन रात जासूसी किस्से कहानिया पढ़ा करता था।
Yeh kaam bachapn mein hi karta ha
इसी वजह से अपुन का मन भी सिर्फ जासूसी में ही अपना मुकाम बनाने का करने लगा था।

वैसे तो आपका ये सेवक जासूसी में दिल्ली से लेकर मेरठ आगरा ,मुम्बई और राजस्थान तक अपने झंडे गाड़ चुका था ,और आज किसी परिचय का मोहताज नही था , लेकिन मेरी एक नकचढ़ी सेक्रेटरी है,जिसका नाम रागिनी है, वो बन्दे की इस काबलियत की जरा भी कदर नही करती है,
Usko.badal do ya phir sex ki goli khilake baja do
उसकी नजर में अपन आज भी घर की मुर्गी दाल बराबर है, लेकिन उसकी महिमा का बखान मैं बाद में करूँगा, इस वक़्त आपके इस जिल्ले-इलाही के फ्लैट को कोई बुरी तरह से पीट रहा था।
Koi londiya hogi hundred percent padhte hue hi comments kar raha hoon :smarty:
दरवाजा इतनी बेतरतीबी से पीटा जा रहा था कि, मानो कोई दरवाजा तोड़कर अंदर घुसना चाहता हो, मैं हड़बड़ाकर अपनी रजाई में से निकला और दराज में से अपनी पिस्टल निकालकर अपने बरमूडा में फँसाई और तेज कदमो दरवाजे की ओर बढ़ा और दरवाजे के पास जाकर ठिठक गया।

"कौन है,क्यो दरवाजा तोड़ने पर आमादा हो "मैंने बन्द दरवाजे के पीछे से ही बोला।

"दरवाजा खोलो ! मैं बहुत बड़ी मुसिबत में हूँ" ये किसी लड़की की घबराई हुई आवाज थी।
Musibat mein nahi hai musibat hi hai
अब एक तो लड़की और ऊपर से मुसीबतजदा, और ऊपर से गुहार भी उस इंसान से लगा रही थी,जो मुसीबतजदा लड़कियों का सबसे बड़ा खैरख्वाह था,:smarty: तो अब दरवाजा खोलना तो बनता था, सो मैंने दरवाजा खोला और फोरन से पेश्तर खोला।
Gand fategi gand fategi ab aahaa
दरवाजा खोलते ही मुझे यू लगा मानो कोई आंधी तूफान कमरे में घुस आया हो, वो लडकी डेढ़ सौ किलोमीटर की रफ्तार से कमरे में घुसी और सीधा मेरे बेड पर बैठ गई।
Badtameez ladki hai yeh
मै किंककर्तव्यमूढ़ सा बस उस
लड़की की ओर देखता रहा, उस मोहतरमा में एक बार भी मुझ से अंदर आने के लिए पूछना गवांरा नही समझा था।

"दरवाजा बंद करो न, ऐसे क्या देख रहे हो, कभी कोई लडकी नही देखी क्या" उस लड़की की आवाज जैसे ही मेरे कानो में पड़ी, मैंने हड़बड़ा कर दरवाजे को बन्द कर दिया।
Kyun kiya yahi se bhaga dete
दरवाजा बंद करते ही मेरी नजर उस लड़की पर पहली बार पूरी नजर पड़ी थी। लड़की उची लंबे कद
की बेइंतेहा खूबसूरत थी।
Figure :waiting:
उसके कटीले नैन नक्श पर उसका मक्खन में सिंदूर मिला रंग तो कयामत ही ढा रहा था।
Hat bc shadi shuda hai :sigh:
उसे ध्यान से देखते ही मेरे दिल की घण्टिया किसी मंदिर के घड़ियाल की तरह से बजने लगी थी।:love2:
Happ
पता नही साला ये अपनी उम्र का तकाजा था या अभी तक कुंवारा रहने का नतीजा था कि,आजकल अपुन को हर लड़की खूबसूरत लगती थी। :loveeyed2:
Sabko.lagti hai khaali hijdo ko nahi lagti
मुझे इस तरह से कुत्ते की तरह से अपनी तरफ घूरते हुए देखकर वो लड़की अब बेचैनी से अपना पहलू बदलने लगी थी।
Pehlu kya badli tang pe taang chadhake baithi thi ek bum dikh raha tha kya clear karo
"हो गया हो तो, अब इधर भी आ जाओ" उस लड़की को शायद ऐसी कुत्ती निग़ाहों का अच्छा खासा तजुर्बा था।
Delhi mein ladkiya ya toh chhedi jaati ya phir cho control
होता भी क्यो नही, जो जलवा उसकी खूबसूरती का था, उसके मद्देनजर तो जिसने भी डाली होगी मेरे जैसी कुत्ति नजर ही डाली होगी।
Har koi tharki nahi hota petticoat faadu
लेकिन आपके इस सेवक ने लड़की के बोलते ही अपनी इस छिछोरी हरकत पर ब्रेक लगाई,और चहलकदमी करता हुआ उसके सामने आकर खड़ा हो गया।
Sahi kiya
एक तो साला सर्दी का मौसम, ऊपर से कड़कड़ाती बरसात, और अब ये कहर बरपाती मेरे ही बेड पर बैठी हुई मोहतरमा, मेरी जगह कोई और होता तो अभी तक इस खूबसूरत बला के साथ पूरी रात की योजना अपने ख्यालों में बना चुका होता,
Delhi mein partical karta aur yeh chutiya aurat bina kisi plan ke kisi ke ghar mein itni raat ko ghusi isko nahi laga ki jiske Ghar mein ghusegi wohi pel dega
लेकिन अपनी नजर भले ही कितनी भी कुत्ती हो, दिल शीशे की तरह से साफ है।
Achha
"कौन हो तुम, और इतनी बरसात में मेरे पास क्यो आई हो" मै अब उसकी सुंदरता के खुमार से कुछ कुछ निकलते हुए बोला।
Shayri seekhne
"मेरी जान खतरे में है,मुझे कोई मारना चाहता है" उस लड़की की आवाज में फिर से घबराहट का पुट आ चुका था।

"लेकिन आपको मेरे बारे में किसने बताया कि मैं मुसीबतजदा हसीनाओं की मदद आधी रात को भी सिर के बल चल कर करता हूँ" मैं अब अपनी जासूस वाली फोम में आता जा रहा था
Kisi ne nahi bataya chutiya kaatne aati hai
"मैं आपको नही जानती, मेरे पीछे तो कुछ लोग लगे हुए थे, मैं तो उनसे बचने के लिए आपके फ्लैट का दरवाजा पीटने लगी थी" उन मोहतरमा ने जो बोला था, वो मेरे लिए अनपेक्षित था ।
Mere liye bhi hai Delhi mein koi gate Peete toh pehle usko dande se pela jaata
ऐसे कोई जबकि सर्दियो के दिनों में आठ बजते ही आधी रात का आलम लगने लगता है, क्यो किसी अंजान के घर मे ऐसे घुसेगा और न सिर्फ घुसेगा बल्कि आकर आराम से आकर बेड पर भी बैठ जाएगा।
Toh woh plan banake aaya
"आप हो कौन, और कौन लोग है जो आपकीं जान लेना चाहते है" मैंने एक स्वभाविक सवाल किया।

"मेरा नाम अनामिका है, मै यही आपके इलाके के सेक्टर ग्यारह में रहती हूँ, मैं इधर किसी काम से आई थी, लेकिन जब मैं घर वापिस जा रही थी, तो मैंने देखा कि चार लोग मेरा पीछा कर रहे थे, मैं उन्हें देख कर घबरा गई और भागने लगी, तभी आपके फ्लैट पर नजर पड़ी, आपकी लाइट भी जली हुई थी, तो आपके फ्लैट का दरवाजा पीटने लगी" अनामिका ने बोला।
Koi aur hota toh patak ke cheer haran kar deta petticoat faadu bas consent se faadte
"उन लोगो को आपने पहले भी कभी अपने पीछे आते हुए देखा है, या आज ही देखा था" मै अब उससे सवाल जवाब करने के मूड में आ गया था।

"उन लोगो को तो मैंने आज ही देखा था, लेकिन मुझे कई दिनों से लग रहा है कि कोई मेरा पीछा कर रहा है" अनामिका ने रहस्यमय तरीके से बोला।
Achha iska bhataar karwa raha hai shayad
"ऐसा लगने का कोई कारण भी तो होना चाहिए, क्या आपको किसी से अपनी जान का खतरा है" मैंने उसके जवाब में से ही सवाल ढूंढा।

"खतरा तो मेरी जान को बहुत है, मुझे नही पता कि मौत किस पल मेरा शिकार कर ले" अनामिका की आवाज से ही ये बोलते हुए उसका डर झलक रहा था।
Kitno ka klpd ki hai ee
"कौन लेना चाहता है तुम्हारी जान" मैंने फिर से उसी सवाल को घुमा फिरा कर पूछा।

"धीरज!पूरा नाम उसका धीरज खत्री है" अनामिका ने मुझे उस बन्दे का नाम बताया।

"आप धीरज को कैसे जानती है" मेरा ये पूछना स्वभाविक था।

"किसी समय वो मेरा बॉयफ्रेंड था, लेकिन जल्दी ही मुझे ये एहसास ही गया कि मैंने गलत आदमी से प्यार कर लिया है, उसके बाद मैंने उससे अपने रिलेशन ख़त्म कर लिये, और दूसरी जगह शादी कर ली, उसके बाद से वो बन्दा मेरी जान का दुश्मन बना हुआ है" अनामिका ने पूरी बात बताई।

"देखिए मैं एक डिटेक्टिव हूँ… मेरा पाला हर रोज ऐसे लोगो से ही पड़ता है, आप मेरा ये कार्ड रख लीजिए, और कल मेरे आफिस आकर मुझे सभी कुछ डिटेल में बताइये, हो सकता है, इसके बाद आपका बॉयफ्रेंड फिर कभी आपको परेशान न करे" मैंने उसको विश्वास दिलवाने वाले शब्दो मे बोला।

"अगर आपने सच मे मेरा उस आदमी से पीछा छुड़ा दिया तो, आपको आपके वजन के बराबर नोट से तोल दूँगी" अनामिका ने उत्साहित स्वर में बोला।
100 crore maangna
"लेकिन मैडम इतना बता दीजिए कि वो नोट दस के होंगे या दो हजार के होंगे" मैंने उसकी बात का झोल पकड़ते हुए बोला।
Smart boy
मेरी बात सुनकर वो नाजनीन न केवल मुस्कराई बल्कि खिलखिलाकर हँस भी पड़ी।

"आप बहुत हाजिर जवाब हो रोमेश साहब" अनामिका ने मेरा नाम मेरे विजिटिंग कार्ड पर पढ़ते हुए बोला।
Mujhe laga pehle se pata tha
"चलिये अब मैं आपको आपके घर छोड़ देता हूँ, वैसे भी रात अब गहरी होती जा रही है" मैंने अनामिका की तरफ देख कर बोला।

"काफी शरीफ आदमी मालूम पड़ते हो रोमेश साहब, वरना मौसम तो आशिकाना है" उस जालिम ने एकाएक ऐसी बात बोलकर मेरे दिल के तारों को झंकृत कर दिया।
Halui pakki chhiinaa control
"इस मौसम की वजह से ही तो बोल रहा हूँ, आपके कपडे गीले हो चुके है, घर आपका पास में ही है, मैं अपको घर छोड़ देता हूँ, ताकि आप इन गीले कपड़ो से छुटकारा पा सको" मैंने अनामिका की बात को एक नया मोड़ दिया।

"लेकिन मैं अभी घर नही जाना चाहती हूँ, मेरे पति भी आज घर पर नही है, और मुझे ऐसे हालात में डर भी बहुत लगेगा"

अनामिका अब सीधे सीधे मेरे गले पड़ रही थी। जबकि मेरी छटी इंद्री मुझे बार बार सचेत कर रही थी।
Police ko phone kar re
मुझे न जाने क्यो ये लडकी खुद को जो बता रही थी,वो नही लग रही थी।

लेकिन इस बार उसने जो बहाना बनाया था, उसने मुझे कुछ बोलने लायक नही छोड़ा था।

"लेकिन देवी जी, ये बन्दा यहां अकेला रहता है, कल को किसी को पता चलेगा तो आपकी बदनामी नही होगी" मैने वो बात बोली, जो आजकल के जमाने मे अपनी अहमियत खो चुकी थी।

मेरी इस बात को अनामिका की हँसी ने सही भी साबित कर दिया था।

"किस जमाने मे जी रहे हो रोमेश बाबू, आजकल किसके पास इतनी फुर्सत है कि कोई मेरी रातों का हिसाब रखें कि मैं अपनी रात कहाँ किसके साथ बिताकर आ रही हूँ.. यार अब ये फालतू की बाते बन्द करो, और अगर एक कप कॉफी पिला सकते हो तो पिला दो" अनामिका मेरे गले पड़ने में कामयाब हो चुकी थी।

मैं मरता क्या न करता के अंदाज में अपने किचन की ओर चल दिया।
Gand pe laat maarke nikaal petticoat faadu isko :buttkick:
कॉफी की जरूरत तो मुझे भी थी। इसलिए मैंने कॉफी के लिये कोई आना कानी नही की।

मैंने अपने बरमूडा से अपनी पिस्टस्ल को निकाल कर दराज में डाला और कॉफी बनाने के वास्ते किचन की ओर चल दिया।

मै कोई दस मिनट के बाद काफी बनाकर जब बैडरूम में पहुंचा तो अनामिका वहां नही थी।

मैंने इधर उधर नजर दौड़ाई, लेकिन वो कहीं नजर नही आई। मैंने बाथरूम की तरफ देखा, उसका दरवाजा भी बाहर से ही लॉक था।

मैने दरवाजे पर नजर डाली, दरवाजा इस वक़्त हल्का सा खुला हुआ था। मुझे तत्काल इस बात का ध्यान हो आया कि दरवाजा मैंने अनामिका के घर मे घुसते ही बन्द कर दिया था।

अब दरवाजा खुला होने का मतलब था कि चिड़िया फुर्र हो चुकी थी।

मैंने दोनो कॉफी के कप टेबल पर रखे, और अपने बेड पर धम्म से बैठ गया।

मेरी समझ मे नही आ रहा था की मेरे फ्लैट में आने का उसका मकसद क्या था, और वो जिस तरह से एकाएक गायब हुई है, उसके पीछे उसका उद्देश्य क्या था।

अचानक ही मेरे दिमाग मे एक बिजली सी कौंधी और मै अपनी जगह से उछल कर खड़ा हो गया।

मैंने तत्काल कमरे में अपनी नजर घुमाई। घर की सभी चीजें अपने स्थान पर यथावत थी।

फिर मैंने दराजो को खंगालना शुरू किया। दराज में नजर पड़ते ही मेरे होश फाख्ता हो चुके थे।

आपके इस सेवक की पिस्टल दराज से गायब थी।
Aur karo chhinrai
जारी रहेगा________✍️
Bahut achche se likha hai aapne mahaan writer ab isko padhenge regular 👏
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
44,002
79,958
304
Usse bura haal hai Delhi ka
:approve:
Is yug mein rajai mein kon sota
:smarty:
Pm purush
:buttkick:
Dhepa maarke tod dunga apni bakhan nahi karte story mein
:hide2:
Kisi din koi aur ghusa jaaga aise kisi case
Kar kar sakte man:dazed:
Isi mein toh scope hai
Yeh kaam bachapn mein hi karta ha
Baat to sahi hai waise, fir se start karu ka? 😁
And ju bhi chalu karo 😎
Usko.badal do ya phir sex ki goli khilake baja do
😳
Koi londiya hogi hundred percent padhte hue hi comments kar raha hoon :smarty:
:roflbow:Mahaan writer.
Musibat mein nahi hai musibat hi hai
100%:check:
Gand fategi gand fategi
:D
36,28,36:declare:
Hat bc shadi shuda hai :sigh:
:dazed:
:D
Sabko.lagti hai khaali hijdo ko nahi lagti
:check:
1Pehlu kya badli tang pe taang chadhake baithi thi ek bum dikh raha tha kya clear karo
:shhhh:Mann me laddu foot raha tha us samay, ye sab kon dekhta hai
Delhi mein ladkiya ya toh chhedi jaati ya phir cho control
:shag:
Har koi tharki nahi hota petticoat faadu
:roflbow:Ju se bada to koi nahi
Delhi mein partical karta aur yeh chutiya aurat bina kisi plan ke kisi ke ghar mein itni raat ko ghusi isko nahi laga ki jiske Ghar mein ghusegi wohi pel dega
Wo plan karke hi aaye thi dost.:approve:
Baaki usko pilne ka koi dar thodi tha, kheli khaayi hogi :D
Shayri seekhne
:D
Kisi ne nahi bataya chutiya kaatne aati hai
So to hai 😎
Mere liye bhi hai Delhi mein koi gate Peete toh pehle usko dande se pela jaata
Ju log lapet dete, isi liye apun kabhi gate nahi peet ta:hide2:
Toh woh plan banake aaya
yo 😎
Koi aur hota toh patak ke cheer haran kar deta petticoat faadu bas consent se faadte
Wahich, but usne petticoat jo nahi pahna tha :shhhh:
Kitno ka klpd ki hai ee
Apun shareef aadmi hai man :dazed:
Smart boy
:smarty:
Halui pakki chhiinaa control
:lol:
petticoat faadu isko :buttkick:
:dazed:Nahi kiya isi liye to bhugtega
Aur karo chhinrai
:shy:
Bahut achche se likha hai aapne mahaan writer ab isko padhenge regular 👏
Ju log se seekhta hai apun, bole to student hi hu abhi, teacher ahi ban na mujhe, vidyarthi ta imar seekhta hai.:declare:
Waise bohot saare review dekhe hain maine per aaj tak kabhi aisa review nahi padha. :lol:
Welcome kallu bhaiya, and thank you very much for your valuable review and support , sath bane rahiye :hug:
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
44,002
79,958
304
#19

"लालचंद जी कर दीजिए न हमारी मदद, बड़ी मेहरबानी होगी आपकी, आपके इस एहसान को जिंदगी भर नही भूलेंगे हम, उस राक्षस से हमारा पीछा छूट जाएगा, आपकी कृप्या से" सौम्या ने गजब तरीक़े से लालचन्द को अपने मोहपाश में फांस लिया था।

"ठीक है मैडम आप कैदी का नाम बताइये मै पहले उसका रिकॉर्ड चेक करके आता हूँ, फिर आता हूँ आपके पास, तब तक आप यही इंतजार कीजिये" लालचन्द के ये बोलते ही सौम्या ने उसे राजीव बंसल की पूरी डिटेल लिखवा दी।

डिटेल लेकर लालचन्द अंदर की तरफ जाकर हमारी नजरो से ओझल हो गया। लालचन्द के जाते ही सौम्या ने एक कुटिल मुस्कान के साथ मेरी तरफ देखा।

मै भी उसकी मुस्कान का मतलब समझ कर मुस्करा पड़ी थी।

कोई बीस मिनट के इंतजार के बाद लालचन्द अपने चेहरे पर हल्की सी मुस्कान बिखेरे हमारे पास आया।

"मैडम आप तो बहुत बड़ी हस्ती हो, और इतने बड़े काम को सिर्फ पांच हजार में करवाना चाहती हो" लालचन्द का लालच अब उसकी जुबान से टपक रहा था।

"काम हो जाएगा न" मैंने सौम्या की जगह जवाब दिया।

"सौ प्रतिशत हो जायेगा, लेकिन पांच नही पंद्रह हजार देने होंगे, क्यो कि पांच मुझे कंप्यूटर वाले लड़के को देने होंगे" लालचन्द ने ईमानदारी से अपने हिस्सेदार का भी नाम बताया।

"ठीक है दिए पंद्रह हजार, ये बताओ डिटेल कितनी देर में मिल जाएगी" मैंने एक पल की भी उसकी बात को मानने में देरी नही की।

"आप एक घन्टा कैंटीन में बैठिये, मैं डिटेल लेकर वही आता हूँ" लालचन्द ने चमकते हुए चेहरे के साथ कहा।

उसकी बात सुनकर हम उस कमरे से बाहर कैंटीन की ओर चल दिये। वैसे भी लंच टाइम होने वाला था।

एक घँटे से पहले ही लालचन्द हमारे सामने हाजिर हो चुका था और एक प्रिंट आउट उसने मेरे हाथ मे रख दिया था।

प्रिंट आउट को खोलकर एक सरसरी नजर से उसे देखा, और एक नाम पर नजर पड़ते ही मेरे होठो पर सहसा मुस्कान खिल उठी।

मैंने उस प्रिंट आउट को अपनी जेब के हवाले किया।

"मैडम पैसे आप उस कैंटीन वाले को दे दो" लालचन्द ने सेफ साइड खेलते हुए बोला। मुझे कैंटीन वाले को भी देने में कोई परेशानी नही थी।

मैंने काउंटर पर जाकर उस कैंटीन वाले को अपने खाने के पैसो के साथ ही अपने खाने के बिल का भी भुगतान किया और कैंटीन से बाहर आकर अपनी गाड़ी की ओर बढ़ गए।
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उधर चंदन का भी खून हो चुका था। ओर वो भी तब जब अपनी रागिनी मैडम ने उसे धर लिया था, ओर उसकी खातिरदरी करने के बाद उसे थाने लेकर जा रही थी।

रागिनी और सौम्या इस वक़्त दोनो ही लोकल पुलिस थाने में बैठे हुए थे। चंदन की लाश को पुलिस पोस्टमार्टम के लिए भिजवा चुकी थी।

सभी खाना पूर्ति करने के बाद रागिनी और सौम्या भी लोकल थाने के एसआई दिलबाग चौधरी के साथ थाने में आ चुकी थी।

"तो आप एक प्राइवेट डिटेक्टिव है और आप एक केस के सिलसिले में चंदन से पूछताछ करने के लिए उसके घर पर आई थी, और जब आप पूछताछ पूरी करने के बाद उन्हें उसे उस केस से संबंधित थाने में ले जा रहे थे, तब उसकी किसी अज्ञात बाइक सवार ने गोली मारकर हत्या कर दी" दिलबाग सिंह ने अपनी नजर दोनो के ऊपर जमाते हुए बोला।

"जी हुआ तो कुछ ऐसा ही है, वैसे भी चंदन काफी डरा हुआ सा था, की अगर उसने मुंह खोला तो उसके साथी ही उसे मार डालेंगे, और उसकी आशंका घर से निकलते ही सच भी हो गई" मैंने दिलबाग सिंह की बात का जवाब दिया।

"उस केस के बारे में मुझें डिटेल से बताओ, जिस केस में आप उससे पूछताछ करनें के लिये आई थी" दिलबाग सिंह ने बोला।

"ये सौम्या बंसल है, बंसल इंडस्ट्रीज़ की मालकिन है, तीन साल पहले से इनके पति राजीव बंसल अपने पिता और सौतेली माँ की हत्या के जुर्म में जेल में अपनी उम्रकैद की सजा काट रहे है, उसी राजीव बंसल ने धीरज बवानिया नाम के एक गैंगस्टर को इन्हे मारने के लिए, जेल में रहते हुए सुपारी दी थी, इन्हे मारने की प्लानिंग को सिरे चढ़ाने के लिये ही चंदन जो कि धीरज बवानिया के गिरोह में काम करता था, कई बार जेल में जाकर राजीव बंसल से पिछले छह महीने में जाकर मिला था, उसी सिलसिले में हम लोग चंदन से पूछताछ करने आये थे" मैंने दिलबाग सिंह को बताया।

"ये बात कुछ अजीब नही लगती की जिस महिला को मारने के लिए जिस गैंग ने सुपारी ली हुई है, तुम उस महिला को उसी गैंग के गुर्गों के पास लेकर घूम रही हो" दिलबाग सिंह ने सही बात पकड़ी थी।

"इन्हे साथ मे लेकर घूमना मेरी मजबूरी है, क्यो कि जिन लोगो ने इन्हें मारने की सुपारी ली है, वे लोग इनके आफिस और घर पर इनकी घात लगाए बैठे है, इस बारे में चंदन ने भी हमे बताया था, और इत्तेफाक से ये सुपारी वाली बात भी हमे चंदन ने ही बताई थी" मैंने सफाई दी।

"ओह्ह, इस बात की कोई शिकायत आपने पुलिस में दर्ज करवाई है" इस बार दिलबाग सिंह सौम्या से मुखातिब हुआ।

"जी ! मेरी जान को खतरे की आशंका है, इसकी एक सूचना मेरे घर और आफिस के लोकल थाने में दर्ज है, और मेरे पर्सनल सुरक्षाकर्मी भी मेरे साथ रहते है, लेकिन मुझें उनसे भी ज्यादा भरोसा इन पर है इसलिए मैं इनके साथ रहती हूँ, मैंने इन्हें अपने लिए हायर किया हुआ है" सौम्या ने वक़्त के मुताबिक जवाब दिया।

"इस वक़्त आपके सुरक्षाकर्मी आपके साथ नही है" दिलबाग सिंह पता नही क्यो बेफिजूल के सवाल किए जा रहा था।

"वे मुझे घर से लेकर आफिस तक एस्कॉर्ट करते है, अभी तीन दिन से मैं इनके साथ हूँ, इसलिये वे लोग घर पर ही ड्यूटी कर रहे है" सौम्या ने फिर से जवाब दिया।

"जनाब! हम चंदन के साथ उसकी हत्या के समय क्यो साथ मे थे, इसके बारे में आपको बता दिया हैं, बाकी चंदन आपके इलाके का एक हिस्ट्री शीटर बदमाश था, और जांच में ये बात भी साबित हो जाएगी कि वो गैंगस्टर धीरज बवानिया के गिरोह के लिए काम भी करता था, तो अब हमे जाने की इजाजत मिल सकती है, क्यो कि अभी तक मैडम की जान के ऊपर से खतरा टला नही है, जब वे लोग दिन दहाड़े अपने साथी को मार सकते है तो, मैडम पर या मुझ पर गोलिया चलाने में क्या देर लगायेगे" मैंने दिलबाग सिंह के सवालो से उकताकर बोला।

"ठीक है आप अपना बयान दर्ज करवाकर जा सकती है, आगे की जांच में जब भी आपकी जरूरत पड़ेगी, हमारे बुलावे पर आपको आना पड़ेगा" ये बोलकर दिलबाग सिंह ने अपने एक हवलदार को आवाज लगा कर बुलाया और हमारा बयान दर्ज करने के लिये बोला।

थाने से बाहर निकलने में हमे एक घँटे से भी ज्यादा का समय लग गया था। सौम्या सहमी हुई सी इधर उधर नजर दौड़ाती हुई गाड़ी की तरफ बढ रही थी। कुछ ही पल में हम दोनो गाड़ी में समा चुके थे।

"इतनी डरी सहमी हुई क्यो हो" मैंने सौम्या के चेहरे पर नजर डालते हुए कहा।

"तुम्हारी बात याद करके डर लग रहा हैं, तुमने बोला है न कि वो जब चंदन को इस तरह से दिनदहाड़े गोली मार सकते है तो, फिर मुझे भी तो मार सकते है" सौम्या ने डरे हुए स्वर में बोला।

"अरे यार! उन लोगो को कोई सपना आ रहा है कि इस तरह से तुम दिल्ली की किस सड़क पर ऐसे घूम रही हो, इसके लिए वे लोग तुम्हे तुम्हारे घर से तुम्हे वाच करते, लेकिन अगर हमारे पीछे कोई नही हैं, तो इसका मतलब है कि वे लोग अभी तक तुम्हारे आफिस पर ही नजर रखे हुए है" मैंने सौम्या को दिलासा देते हुए बोला।

"इस प्रकार से तो मैं कभी आफिस ही नही जा पाऊंगी" सौम्या की चिंता भी वाजिब थी।

"मतलब, गुरु से पहले मुझे तुम्हारी समस्या को हल करना पड़ेगा" मैंने सौम्या कि तरफ देखते हुए बोला।

"मतलब" सौम्या की समझ मे मेरी बात नही आई थी।

"मतलब! पहले तुम्हारी आगवानी के इंतजार में खड़े उन टपोरियों की आवभगत हमे जाकर करनी पड़ेगी, इससे पहले की वो तुम पर कहीं कोई हमला करें, हमे उन्हें पहले ही ठिकाने लगाना होगा" मैने उसे अपनी बात का मतलब समझाया।

"ये तरीका ही सही रहेगा, क्या पता उन लोगो के जरिये ही हम लोग धीरज बवानिया और फिर देविका और मेघना तक भी पहुंच जाए" सौम्या को मेरा प्लान पसंद आया था।

तभी मेरे फोन पर मेरे प्यारे खबरी का नंबर चमकने लगा। मैंने तत्काल खबरी के फोन को उठाया।

"संध्या की फैमिली तो अभी गांव में ही रहती है, लेकिन संध्या दो साल से दिल्ली में ही रहती है और वही रहकर कोई कोर्स कर रही थी" खबरी फोन उठाते ही बिना किसी भूमिका के मुद्दे की बात पर आ गया था।

"संध्या के उस गांव वाले आशिक के बारे में ही पता चला" मैने पूछा।

"संध्या के आशिक और अपने गुरु का नाम एक ही है, इस गांव के सरपंच के लड़के का नाम भी रोमेश ही है, लेकिन वो बन्दा अपने गुरु की तरह से ही दिलफेंक निकला और गांव में इश्क संध्या से लड़ाता रहा और फरार किसी और लड़की के साथ हो गया, उसी की याद में संध्या अपनी डायरी के पेज काले करती थी" खबरी ने जो बोला था, उसी बात का मुझे अंदेशा मुझे भी था।

"संध्या के घरवालों को पता चल चुका है क्या की संध्या का कत्ल हो चुका है" मैने खबरी से पूछा।

"जी ! उन्हें पता चल चुका है और उनके कुछ परिवार वाले दिल्ली गए हुए है" खबरी ने बताया।

"ठीक है, अब तुम चाहो तो वापिस आ सकते हो, लेकिन आने से पहले संध्या और उसके आशिक के बीच के इश्क का कुछ प्रूफ लेते आना, जिससे मैं उसकी डायरी में मौजूद गुरु के नाम की क्लेरिफिकेशन यहाँ की पुलिस को दे सकूं" ये बोलकर मैने फोन काट दिया और सौम्या को गाड़ी उसके आफिस की तरफ ले जाने के लिए बोल दिया।

"अभी छह बजने वाले हैं, क्या अभी तक धीरज बवानिया के गुर्गे तुम्हारा इंतजार कर रहे होंगे" मै सौम्या की ओर देखकर बोली।

"लेकिन जिस तरह से तुम जा रही हो, ऐसे तो वो देखते ही मुझे शूट कर देंगे" सौम्या ने मेरी ओर देखकर बोला।

"तुम चिंता मत करो, तुम्हे कुछ नही होगा, तुम फोन करके अपने आफिस में सिर्फ इतना बोलो की आज 8 बजे से पहले कोई जाएगा नही, तुम ऑफिस आ रही हो" मैंने सौम्या को बोला।

"उससे क्या होगा" सौम्या असमंजस से बोली।

"मैं इस आपरेशन को अकेली नही करना चाहती हूँ, मैं दिल्ली पुलिस के साथ इस आपरेशन को करूँगी, मैं अभी एसीपी शर्मा जी से बात करने वाली हूँ, इस पूरे आपरेशन की तैयारी में कम से कम दो घँटे का वक़्त चाहिए, तुम जो खबर अपने आफिस में दोगी, वो खबर उन गुर्गो तक भी जरूर पहुंचेगी" मैंने सौम्या को बोला।

"क्या सच मे, आफिस का ही कोई आदमी इस खबर को उन लोगो तक पहुंचा देगा" सौम्या ने परेशानी भरे स्वर में बोला।

"तुम्हारे आफिस के उस मुखबिर के बारे में हम बाद में पता लगा लेंगे, अभी तुम वक़्त बर्बाद मत करो, जो बोला है उतना काम करो" मैंने सौम्या को बोला।

सौम्या मेरी बात सुनते ही आफिस में फोन करने लगी थी।

इधर मैं शर्मा जी को फोन लगा चुकी थी। शर्मा जी ने मेरा फोन चार पांच बेल जाने के बाद उठाया था।

"कहो रागिनी ! कैसे याद किया! माफी चाहता हूँ कि मैं रोमेश की ज्यादा मदद नही कर पा रहा हूँ, लेकिन मैंने रोमेश से बात की थी, अगर वो निर्दोष है तो उसे कुछ नही होगा" शर्मा जी बिना कुछ कहे ही रोमेश के बारे में सफाई देने में जुट गए थे।

"सर! आप रोमेश की तरफ से बेफिक्र हो जाइये, रोमेश तो कल उस केस से फ्री हो जाएगा, मुझे अभी आपकी मदद एक गैंगस्टर के खिलाफ एक पुलिस आपरेशन के लिए चाहिए" मैने शर्मा जी को बोला।

"बोलो कौन सा गैंगस्टर है, और क्या मामला है" शर्मा जी ने गंभीरता से पूछा।

शर्मा जी के पूछते ही मैं सौम्या का पूरा मामला बताती चली गई, मैंने आज सुबह जेल से राजीव के मुलाकातियों से लिस्ट निकलवाने से लेकर धीरज बवानिया के गुर्गे चंदन की पूरी बात शर्मा जी को बता दी।

"मैं समझ गया रागिनी, मैं अभी डिपार्टमेंट में बात करके, स्पेशल ब्रांच से एक टीम वहां भेजता हूँ, उन लोगो की देखरेख में जो भी संभव हो वो तुम कर सकती हो, मैं अभी पंद्रह मिनट में कालबैक कर रहा हूँ" शर्मा जी ने मुझे आश्वासन दिया।

उसके बाद मैंने फोन काट दिया। तब तक सौम्या भी आफिस में अपने आने की खबर दे चुकी थी।


जारी रहेगा_____✍️
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Ye update kaafi mazedaar aur suspense-filled tha.
Soumya–Ragini–Romesh ki nok-jhok ne mood light rakha,
lekin Devika ka track story ko ekdum dark thriller mode me le gaya.

Devika ka Kumar se blackmail hona,
Kumar ki car chura lena,
Romesh ki pistol lekar bhaag jana,
aur car me khoon milna—
ye saari cheezein dikhati hain ki wo koi bada game khel rahi hai.

Romesh bhi dheere-dheere uske trap me fas raha hai,
shayad kisi purane dushman ki chaal ho.

Overall update grippy, fast-paced aur interesting tha.
Next update me toh blast pakka hai.

:congrats: start new story

Awesome update and lovely story

यार तुम्हे तो वाचक के स्थान पर लेखक होना चाहिए, देव प्रिय आगे से लोला और पीछे से डंडा डालके गपा गप करता रहेगा।

रिव्यू की शुरुआत की जाए

कहानी में पुराने हथकंडे खुलते जा रहे हैं, क्या हुआ, किस वजह से, क्या हो रहा धीरे-धीरे सामने आता जा रहा है।

मैंने आख़िरी रिव्यू में कहा था कि जो लाश मिली है, उनसे रोमीश का कनेक्शन कुछ न कुछ ज़रूर होगा, वरना मर्डर के इल्ज़ाम रोमीश पर इतना आसानी से नहीं जाता।

अब वह लड़की जिसकी लाश मिली, वह रोमीश की परिचित तो नहीं लगती है। उसके ही जिस भी डायरी सामने आई, वह भी लग तो फ़ेक रही है। सोचने में कहीं न कहीं कुछ तो मिसिंग लग रहा है कि किसने वह फ़ेक सबूत प्लांट किया।

जिस तरह अभी भगवान सिंह के सुर बदले लग रहे हैं, मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि दुश्मन खेमे की पहुँच आला अधिकारी तक है। क्योंकि पहले देवप्रिय, अब भगवान सिंह ये लोग किसी के दबाव में रोमीश को धरना चाहते हैं।

कुछ हद तक मेरा मानना है कि कुछ लोग रोमीश की पुलिस के ऊपर तक की पहुँच से जलते हैं। क्योंकि जो काम पुलिस का है, उसमें रोमीश नाम का प्राइवेट डिटेक्टिव आता है और केस सॉल्व कर देता है, जिससे स्वाभाविक है कि उच्च अधिकारी में पुलिस डिपार्टमेंट पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

मेरा एक कंसर्न है जिस तरह अपडेट के बीच में सीन टाइटल दिया गया है, उदाहरण: कुमार गौरव की लाश वह सस्पेंस खत्म कर देता है।

वैसे दिमाग में बात आई है कि जिस महिला की वजह से पूरा कांड हुआ, उसका तो ज़िक्र आया नहीं है। अशोक बंसल की आधी उम्र की लवर क्या सच में मर गई या वह अभी अंडरग्राउंड में ज़िंदा है। वैसे वह महिला 27–28 की होनी चाहिए। मुझे क्या लगता है, यह महिला हमें आगे देखने को मिलेगी, क्योंकि लेखक महोदय बड़ी चालाकी से उस महिला का विस्तार कम शब्दों में निपटा गए, तो इसलिए शक जायज़ है।

अब मुझे माजरा यह समझ नहीं आ रहा है कि रोमीश के ऊपर अगर कुमार की हत्या का इल्ज़ाम लगवाना है, तो वह कैसे लगेगा। क्योंकि रोमीश के अनुसार उसे कुमार ने अभी फ़ोन किया है, वह भी उस समय पुलिस स्टेशन में था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु समय बताया जाएगा और सीसीटीवी की मदद से रोमीश साबित कर देगा कि मैं तो पुलिस स्टेशन में था उस समय। साथ ही रोमीश की पिस्टल पुलिस कस्टडी में है। अगर कुमार की हत्या रोमीश की पिस्टल से की जाती है, तो डिपार्टमेंट पर सवाल उठेगा कि तुम्हारी कस्टडी से पिस्टल कैसे गायब हुई।

कुल मिलाकर बहुत कुछ हो रहा है।
अगले अपडेट का इंतज़ार

Raj_sharma

Waise ye wala Dialogue mast laga mujhe emoji ke sath 😂😂😂😂

कहानी को दिलचस्प बनाना आप के बाए हाथ का खेल है. कुमार गौरव की गाड़ी ले गई और रमेश की पिस्टल. चलो वो अनामिका दरसल मालिक्का है. यह तो पता चला. गौरव की गाड़ी तो मिल गई. अब पिस्टल कहा मिलेगी वह देखते है.

बात बिलकुल सही है. देवप्रिय अपना काम ठीक से करता तो रमेश बाबू को इतना लूफ्त उठाने की जरुरत नही होती. पर मस्त खरी खोटी सुनाई है.

कुमार की फोन खंगालने पर फट क्यों गई. कुछ बात हो सकती है. और फोटो मिली तो मलिका देविका बन गई. वाओ. ऊपर से दो करोड़ के फांदे मे जेल काट कर आई है. पर रमेश बाबू के करम कांड के गड़े मुर्दे उखाड़ गए.

अब यह सौम्या कोनसी तितली है जो रमेश बाबू की ऐसी दीवानी है. रागिनी जल तो रही है. एन्ड मे रमेश बाबू के अशली प्यार से जरूर मिलवा ही देना. बेचारे का घर तो बसे. वरना फिर कोई कॉफ़ी पिने आ जाएगी.

Nice. Mast Update. :applause:

कुमार गौरव वाला एंगल तो मैं भूल ही गया था.


अच्छा हुआ याद आ गया. एकबार फिर से पढ़ूँगा उस पार्ट को. पता नहीं ऐसा क्यों लग रहा है की गौरव की मौत वाला चक्कर असल में कुछ और ही है.. अगर गौरव का कोई डुप्लीकेट निकल गया तो मुझे कोई आश्चर्य नहीं होगा.

देखते हैं कहानी में नयी लड़की के आने से झोल और बढ़ेगा या कुछ सुलझेगा भी? रागिनी का स्टाइल बहुत अच्छा लगा मेरे को. हमारे डिटेक्टिव महोदय को कुछ सीखना चाहिए अपनी असिस्टेंट से... साला चोदू..! 😏

Nice update Bhai
Romesh ke to L lga diye dono ladkiyo ne ya Jo bhi iska mastermind h

Bhut hi badhiya update Bhai
Ragini ko tanya se kuch jankari to mili
Dhekte hai ab centeral jail se kya jankari milti hai

Nice update, case pechida hota nazar aa raha he

Bahut hi gazab ki update he Raj_sharma Bhai

Gangster ka bhi role aa gaya he story me

Kuch na kuch to bahut bada hone wala he..........

Keep rocking Bro

Update 1-18 padh liye... par lag raha hai thoda jaldi aa gaya aapke.thread par...

Jyada intezar or excitement hazam nahi hoti... pet me dal patli ho jaati he... soch soch ke pagal ho jata hu ki about kya hoga...


बहुते हि शानदार लिखे हैं सर्र जी... सुधीर कोहली द लकी बास्टर्ड याद आ गया...
अगले धमाकेदार अपडेट के इंतजार में...
जय जय

thankyou for the update !
Thriller genre ka nuksaan yeh hai ki itna sa update kam lagta hai kyuki haandi abhi dhang se garam bhi nahi hoti hai utar jaati hai ! Thoda late hi sahi par thoda bada update ho to kahani kuchh aage badhe !

Ranchandi avtaar padha kar maza aa gaya !

Bhut shandaar update
....aom

रागनी तो बजने की जगह बजा रही है 😉

Bahut hi mazedar updates. Suspense badha ke rakha he bilkul.

Aur Ragini se kya action karvaya he, ladko ne socha bhi unki aesi halat hogi...

Vese Romesh naam se aapki itni bhi kya dushmani har baar harbar fsva dete ho bechare ko😂😂😂... Issse pehle vali me bhi Romesh Vakil saab ki fielding set krdi thi..

jara JALDI.....JALDI bajao .... sarkar ....................... :wink2:

Nice update.....

Nice update....

Update - 18 :check:

Apan ne pahleich bola tha ki delhi ki galiyo me in hasinaao ko mat ghumaao, khair achha hua ragini darling ke andar Bruce Lee ki aatma ghus gayli thi warna lamba kaand ho jata :D

Is update me case se related kuch khaas pata nahi chala balki aur uljha hi diya. Ye chandan kaun hai aur iske pichhwade me kis vajah se khujli mach gayli thi jo aath chhapri log ko bina koi hathiyar diye ragini ko lapene bhej diya tha, hatt lauda..kya gunda banega re tu :buttkick:

Let's see jail me kya jankari milti hai :waiting: Amazing writing...keep it up men :thumbup:

Shaandar update

Besabari se intezaar rahega next update ka Raj_sharma bhai....

Usse bura haal hai Delhi ka

Is yug mein rajai mein kon sota

Pm purush

Update posted friends :declare:
 

parkas

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#19

"लालचंद जी कर दीजिए न हमारी मदद, बड़ी मेहरबानी होगी आपकी, आपके इस एहसान को जिंदगी भर नही भूलेंगे हम, उस राक्षस से हमारा पीछा छूट जाएगा, आपकी कृप्या से" सौम्या ने गजब तरीक़े से लालचन्द को अपने मोहपाश में फांस लिया था।

"ठीक है मैडम आप कैदी का नाम बताइये मै पहले उसका रिकॉर्ड चेक करके आता हूँ, फिर आता हूँ आपके पास, तब तक आप यही इंतजार कीजिये" लालचन्द के ये बोलते ही सौम्या ने उसे राजीव बंसल की पूरी डिटेल लिखवा दी।

डिटेल लेकर लालचन्द अंदर की तरफ जाकर हमारी नजरो से ओझल हो गया। लालचन्द के जाते ही सौम्या ने एक कुटिल मुस्कान के साथ मेरी तरफ देखा।

मै भी उसकी मुस्कान का मतलब समझ कर मुस्करा पड़ी थी।

कोई बीस मिनट के इंतजार के बाद लालचन्द अपने चेहरे पर हल्की सी मुस्कान बिखेरे हमारे पास आया।

"मैडम आप तो बहुत बड़ी हस्ती हो, और इतने बड़े काम को सिर्फ पांच हजार में करवाना चाहती हो" लालचन्द का लालच अब उसकी जुबान से टपक रहा था।

"काम हो जाएगा न" मैंने सौम्या की जगह जवाब दिया।

"सौ प्रतिशत हो जायेगा, लेकिन पांच नही पंद्रह हजार देने होंगे, क्यो कि पांच मुझे कंप्यूटर वाले लड़के को देने होंगे" लालचन्द ने ईमानदारी से अपने हिस्सेदार का भी नाम बताया।

"ठीक है दिए पंद्रह हजार, ये बताओ डिटेल कितनी देर में मिल जाएगी" मैंने एक पल की भी उसकी बात को मानने में देरी नही की।

"आप एक घन्टा कैंटीन में बैठिये, मैं डिटेल लेकर वही आता हूँ" लालचन्द ने चमकते हुए चेहरे के साथ कहा।

उसकी बात सुनकर हम उस कमरे से बाहर कैंटीन की ओर चल दिये। वैसे भी लंच टाइम होने वाला था।

एक घँटे से पहले ही लालचन्द हमारे सामने हाजिर हो चुका था और एक प्रिंट आउट उसने मेरे हाथ मे रख दिया था।

प्रिंट आउट को खोलकर एक सरसरी नजर से उसे देखा, और एक नाम पर नजर पड़ते ही मेरे होठो पर सहसा मुस्कान खिल उठी।

मैंने उस प्रिंट आउट को अपनी जेब के हवाले किया।

"मैडम पैसे आप उस कैंटीन वाले को दे दो" लालचन्द ने सेफ साइड खेलते हुए बोला। मुझे कैंटीन वाले को भी देने में कोई परेशानी नही थी।

मैंने काउंटर पर जाकर उस कैंटीन वाले को अपने खाने के पैसो के साथ ही अपने खाने के बिल का भी भुगतान किया और कैंटीन से बाहर आकर अपनी गाड़ी की ओर बढ़ गए।
-----------
उधर चंदन का भी खून हो चुका था। ओर वो भी तब जब अपनी रागिनी मैडम ने उसे धर लिया था, ओर उसकी खातिरदरी करने के बाद उसे थाने लेकर जा रही थी।

रागिनी और सौम्या इस वक़्त दोनो ही लोकल पुलिस थाने में बैठे हुए थे। चंदन की लाश को पुलिस पोस्टमार्टम के लिए भिजवा चुकी थी।

सभी खाना पूर्ति करने के बाद रागिनी और सौम्या भी लोकल थाने के एसआई दिलबाग चौधरी के साथ थाने में आ चुकी थी।

"तो आप एक प्राइवेट डिटेक्टिव है और आप एक केस के सिलसिले में चंदन से पूछताछ करने के लिए उसके घर पर आई थी, और जब आप पूछताछ पूरी करने के बाद उन्हें उसे उस केस से संबंधित थाने में ले जा रहे थे, तब उसकी किसी अज्ञात बाइक सवार ने गोली मारकर हत्या कर दी" दिलबाग सिंह ने अपनी नजर दोनो के ऊपर जमाते हुए बोला।

"जी हुआ तो कुछ ऐसा ही है, वैसे भी चंदन काफी डरा हुआ सा था, की अगर उसने मुंह खोला तो उसके साथी ही उसे मार डालेंगे, और उसकी आशंका घर से निकलते ही सच भी हो गई" मैंने दिलबाग सिंह की बात का जवाब दिया।

"उस केस के बारे में मुझें डिटेल से बताओ, जिस केस में आप उससे पूछताछ करनें के लिये आई थी" दिलबाग सिंह ने बोला।

"ये सौम्या बंसल है, बंसल इंडस्ट्रीज़ की मालकिन है, तीन साल पहले से इनके पति राजीव बंसल अपने पिता और सौतेली माँ की हत्या के जुर्म में जेल में अपनी उम्रकैद की सजा काट रहे है, उसी राजीव बंसल ने धीरज बवानिया नाम के एक गैंगस्टर को इन्हे मारने के लिए, जेल में रहते हुए सुपारी दी थी, इन्हे मारने की प्लानिंग को सिरे चढ़ाने के लिये ही चंदन जो कि धीरज बवानिया के गिरोह में काम करता था, कई बार जेल में जाकर राजीव बंसल से पिछले छह महीने में जाकर मिला था, उसी सिलसिले में हम लोग चंदन से पूछताछ करने आये थे" मैंने दिलबाग सिंह को बताया।

"ये बात कुछ अजीब नही लगती की जिस महिला को मारने के लिए जिस गैंग ने सुपारी ली हुई है, तुम उस महिला को उसी गैंग के गुर्गों के पास लेकर घूम रही हो" दिलबाग सिंह ने सही बात पकड़ी थी।

"इन्हे साथ मे लेकर घूमना मेरी मजबूरी है, क्यो कि जिन लोगो ने इन्हें मारने की सुपारी ली है, वे लोग इनके आफिस और घर पर इनकी घात लगाए बैठे है, इस बारे में चंदन ने भी हमे बताया था, और इत्तेफाक से ये सुपारी वाली बात भी हमे चंदन ने ही बताई थी" मैंने सफाई दी।

"ओह्ह, इस बात की कोई शिकायत आपने पुलिस में दर्ज करवाई है" इस बार दिलबाग सिंह सौम्या से मुखातिब हुआ।

"जी ! मेरी जान को खतरे की आशंका है, इसकी एक सूचना मेरे घर और आफिस के लोकल थाने में दर्ज है, और मेरे पर्सनल सुरक्षाकर्मी भी मेरे साथ रहते है, लेकिन मुझें उनसे भी ज्यादा भरोसा इन पर है इसलिए मैं इनके साथ रहती हूँ, मैंने इन्हें अपने लिए हायर किया हुआ है" सौम्या ने वक़्त के मुताबिक जवाब दिया।

"इस वक़्त आपके सुरक्षाकर्मी आपके साथ नही है" दिलबाग सिंह पता नही क्यो बेफिजूल के सवाल किए जा रहा था।

"वे मुझे घर से लेकर आफिस तक एस्कॉर्ट करते है, अभी तीन दिन से मैं इनके साथ हूँ, इसलिये वे लोग घर पर ही ड्यूटी कर रहे है" सौम्या ने फिर से जवाब दिया।

"जनाब! हम चंदन के साथ उसकी हत्या के समय क्यो साथ मे थे, इसके बारे में आपको बता दिया हैं, बाकी चंदन आपके इलाके का एक हिस्ट्री शीटर बदमाश था, और जांच में ये बात भी साबित हो जाएगी कि वो गैंगस्टर धीरज बवानिया के गिरोह के लिए काम भी करता था, तो अब हमे जाने की इजाजत मिल सकती है, क्यो कि अभी तक मैडम की जान के ऊपर से खतरा टला नही है, जब वे लोग दिन दहाड़े अपने साथी को मार सकते है तो, मैडम पर या मुझ पर गोलिया चलाने में क्या देर लगायेगे" मैंने दिलबाग सिंह के सवालो से उकताकर बोला।

"ठीक है आप अपना बयान दर्ज करवाकर जा सकती है, आगे की जांच में जब भी आपकी जरूरत पड़ेगी, हमारे बुलावे पर आपको आना पड़ेगा" ये बोलकर दिलबाग सिंह ने अपने एक हवलदार को आवाज लगा कर बुलाया और हमारा बयान दर्ज करने के लिये बोला।

थाने से बाहर निकलने में हमे एक घँटे से भी ज्यादा का समय लग गया था। सौम्या सहमी हुई सी इधर उधर नजर दौड़ाती हुई गाड़ी की तरफ बढ रही थी। कुछ ही पल में हम दोनो गाड़ी में समा चुके थे।

"इतनी डरी सहमी हुई क्यो हो" मैंने सौम्या के चेहरे पर नजर डालते हुए कहा।

"तुम्हारी बात याद करके डर लग रहा हैं, तुमने बोला है न कि वो जब चंदन को इस तरह से दिनदहाड़े गोली मार सकते है तो, फिर मुझे भी तो मार सकते है" सौम्या ने डरे हुए स्वर में बोला।

"अरे यार! उन लोगो को कोई सपना आ रहा है कि इस तरह से तुम दिल्ली की किस सड़क पर ऐसे घूम रही हो, इसके लिए वे लोग तुम्हे तुम्हारे घर से तुम्हे वाच करते, लेकिन अगर हमारे पीछे कोई नही हैं, तो इसका मतलब है कि वे लोग अभी तक तुम्हारे आफिस पर ही नजर रखे हुए है" मैंने सौम्या को दिलासा देते हुए बोला।

"इस प्रकार से तो मैं कभी आफिस ही नही जा पाऊंगी" सौम्या की चिंता भी वाजिब थी।

"मतलब, गुरु से पहले मुझे तुम्हारी समस्या को हल करना पड़ेगा" मैंने सौम्या कि तरफ देखते हुए बोला।

"मतलब" सौम्या की समझ मे मेरी बात नही आई थी।

"मतलब! पहले तुम्हारी आगवानी के इंतजार में खड़े उन टपोरियों की आवभगत हमे जाकर करनी पड़ेगी, इससे पहले की वो तुम पर कहीं कोई हमला करें, हमे उन्हें पहले ही ठिकाने लगाना होगा" मैने उसे अपनी बात का मतलब समझाया।

"ये तरीका ही सही रहेगा, क्या पता उन लोगो के जरिये ही हम लोग धीरज बवानिया और फिर देविका और मेघना तक भी पहुंच जाए" सौम्या को मेरा प्लान पसंद आया था।

तभी मेरे फोन पर मेरे प्यारे खबरी का नंबर चमकने लगा। मैंने तत्काल खबरी के फोन को उठाया।

"संध्या की फैमिली तो अभी गांव में ही रहती है, लेकिन संध्या दो साल से दिल्ली में ही रहती है और वही रहकर कोई कोर्स कर रही थी" खबरी फोन उठाते ही बिना किसी भूमिका के मुद्दे की बात पर आ गया था।

"संध्या के उस गांव वाले आशिक के बारे में ही पता चला" मैने पूछा।

"संध्या के आशिक और अपने गुरु का नाम एक ही है, इस गांव के सरपंच के लड़के का नाम भी रोमेश ही है, लेकिन वो बन्दा अपने गुरु की तरह से ही दिलफेंक निकला और गांव में इश्क संध्या से लड़ाता रहा और फरार किसी और लड़की के साथ हो गया, उसी की याद में संध्या अपनी डायरी के पेज काले करती थी" खबरी ने जो बोला था, उसी बात का मुझे अंदेशा मुझे भी था।

"संध्या के घरवालों को पता चल चुका है क्या की संध्या का कत्ल हो चुका है" मैने खबरी से पूछा।

"जी ! उन्हें पता चल चुका है और उनके कुछ परिवार वाले दिल्ली गए हुए है" खबरी ने बताया।

"ठीक है, अब तुम चाहो तो वापिस आ सकते हो, लेकिन आने से पहले संध्या और उसके आशिक के बीच के इश्क का कुछ प्रूफ लेते आना, जिससे मैं उसकी डायरी में मौजूद गुरु के नाम की क्लेरिफिकेशन यहाँ की पुलिस को दे सकूं" ये बोलकर मैने फोन काट दिया और सौम्या को गाड़ी उसके आफिस की तरफ ले जाने के लिए बोल दिया।

"अभी छह बजने वाले हैं, क्या अभी तक धीरज बवानिया के गुर्गे तुम्हारा इंतजार कर रहे होंगे" मै सौम्या की ओर देखकर बोली।

"लेकिन जिस तरह से तुम जा रही हो, ऐसे तो वो देखते ही मुझे शूट कर देंगे" सौम्या ने मेरी ओर देखकर बोला।

"तुम चिंता मत करो, तुम्हे कुछ नही होगा, तुम फोन करके अपने आफिस में सिर्फ इतना बोलो की आज 8 बजे से पहले कोई जाएगा नही, तुम ऑफिस आ रही हो" मैंने सौम्या को बोला।

"उससे क्या होगा" सौम्या असमंजस से बोली।

"मैं इस आपरेशन को अकेली नही करना चाहती हूँ, मैं दिल्ली पुलिस के साथ इस आपरेशन को करूँगी, मैं अभी एसीपी शर्मा जी से बात करने वाली हूँ, इस पूरे आपरेशन की तैयारी में कम से कम दो घँटे का वक़्त चाहिए, तुम जो खबर अपने आफिस में दोगी, वो खबर उन गुर्गो तक भी जरूर पहुंचेगी" मैंने सौम्या को बोला।

"क्या सच मे, आफिस का ही कोई आदमी इस खबर को उन लोगो तक पहुंचा देगा" सौम्या ने परेशानी भरे स्वर में बोला।

"तुम्हारे आफिस के उस मुखबिर के बारे में हम बाद में पता लगा लेंगे, अभी तुम वक़्त बर्बाद मत करो, जो बोला है उतना काम करो" मैंने सौम्या को बोला।

सौम्या मेरी बात सुनते ही आफिस में फोन करने लगी थी।

इधर मैं शर्मा जी को फोन लगा चुकी थी। शर्मा जी ने मेरा फोन चार पांच बेल जाने के बाद उठाया था।

"कहो रागिनी ! कैसे याद किया! माफी चाहता हूँ कि मैं रोमेश की ज्यादा मदद नही कर पा रहा हूँ, लेकिन मैंने रोमेश से बात की थी, अगर वो निर्दोष है तो उसे कुछ नही होगा" शर्मा जी बिना कुछ कहे ही रोमेश के बारे में सफाई देने में जुट गए थे।

"सर! आप रोमेश की तरफ से बेफिक्र हो जाइये, रोमेश तो कल उस केस से फ्री हो जाएगा, मुझे अभी आपकी मदद एक गैंगस्टर के खिलाफ एक पुलिस आपरेशन के लिए चाहिए" मैने शर्मा जी को बोला।

"बोलो कौन सा गैंगस्टर है, और क्या मामला है" शर्मा जी ने गंभीरता से पूछा।

शर्मा जी के पूछते ही मैं सौम्या का पूरा मामला बताती चली गई, मैंने आज सुबह जेल से राजीव के मुलाकातियों से लिस्ट निकलवाने से लेकर धीरज बवानिया के गुर्गे चंदन की पूरी बात शर्मा जी को बता दी।

"मैं समझ गया रागिनी, मैं अभी डिपार्टमेंट में बात करके, स्पेशल ब्रांच से एक टीम वहां भेजता हूँ, उन लोगो की देखरेख में जो भी संभव हो वो तुम कर सकती हो, मैं अभी पंद्रह मिनट में कालबैक कर रहा हूँ" शर्मा जी ने मुझे आश्वासन दिया।

उसके बाद मैंने फोन काट दिया। तब तक सौम्या भी आफिस में अपने आने की खबर दे चुकी थी।


जारी रहेगा_____✍️
Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and beautiful update....
 

DesiPriyaRai

Royal
3,962
3,662
144
#19

"लालचंद जी कर दीजिए न हमारी मदद, बड़ी मेहरबानी होगी आपकी, आपके इस एहसान को जिंदगी भर नही भूलेंगे हम, उस राक्षस से हमारा पीछा छूट जाएगा, आपकी कृप्या से" सौम्या ने गजब तरीक़े से लालचन्द को अपने मोहपाश में फांस लिया था।

"ठीक है मैडम आप कैदी का नाम बताइये मै पहले उसका रिकॉर्ड चेक करके आता हूँ, फिर आता हूँ आपके पास, तब तक आप यही इंतजार कीजिये" लालचन्द के ये बोलते ही सौम्या ने उसे राजीव बंसल की पूरी डिटेल लिखवा दी।

डिटेल लेकर लालचन्द अंदर की तरफ जाकर हमारी नजरो से ओझल हो गया। लालचन्द के जाते ही सौम्या ने एक कुटिल मुस्कान के साथ मेरी तरफ देखा।

मै भी उसकी मुस्कान का मतलब समझ कर मुस्करा पड़ी थी।

कोई बीस मिनट के इंतजार के बाद लालचन्द अपने चेहरे पर हल्की सी मुस्कान बिखेरे हमारे पास आया।

"मैडम आप तो बहुत बड़ी हस्ती हो, और इतने बड़े काम को सिर्फ पांच हजार में करवाना चाहती हो" लालचन्द का लालच अब उसकी जुबान से टपक रहा था।

"काम हो जाएगा न" मैंने सौम्या की जगह जवाब दिया।

"सौ प्रतिशत हो जायेगा, लेकिन पांच नही पंद्रह हजार देने होंगे, क्यो कि पांच मुझे कंप्यूटर वाले लड़के को देने होंगे" लालचन्द ने ईमानदारी से अपने हिस्सेदार का भी नाम बताया।

"ठीक है दिए पंद्रह हजार, ये बताओ डिटेल कितनी देर में मिल जाएगी" मैंने एक पल की भी उसकी बात को मानने में देरी नही की।

"आप एक घन्टा कैंटीन में बैठिये, मैं डिटेल लेकर वही आता हूँ" लालचन्द ने चमकते हुए चेहरे के साथ कहा।

उसकी बात सुनकर हम उस कमरे से बाहर कैंटीन की ओर चल दिये। वैसे भी लंच टाइम होने वाला था।

एक घँटे से पहले ही लालचन्द हमारे सामने हाजिर हो चुका था और एक प्रिंट आउट उसने मेरे हाथ मे रख दिया था।

प्रिंट आउट को खोलकर एक सरसरी नजर से उसे देखा, और एक नाम पर नजर पड़ते ही मेरे होठो पर सहसा मुस्कान खिल उठी।

मैंने उस प्रिंट आउट को अपनी जेब के हवाले किया।

"मैडम पैसे आप उस कैंटीन वाले को दे दो" लालचन्द ने सेफ साइड खेलते हुए बोला। मुझे कैंटीन वाले को भी देने में कोई परेशानी नही थी।

मैंने काउंटर पर जाकर उस कैंटीन वाले को अपने खाने के पैसो के साथ ही अपने खाने के बिल का भी भुगतान किया और कैंटीन से बाहर आकर अपनी गाड़ी की ओर बढ़ गए।
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उधर चंदन का भी खून हो चुका था। ओर वो भी तब जब अपनी रागिनी मैडम ने उसे धर लिया था, ओर उसकी खातिरदरी करने के बाद उसे थाने लेकर जा रही थी।

रागिनी और सौम्या इस वक़्त दोनो ही लोकल पुलिस थाने में बैठे हुए थे। चंदन की लाश को पुलिस पोस्टमार्टम के लिए भिजवा चुकी थी।

सभी खाना पूर्ति करने के बाद रागिनी और सौम्या भी लोकल थाने के एसआई दिलबाग चौधरी के साथ थाने में आ चुकी थी।

"तो आप एक प्राइवेट डिटेक्टिव है और आप एक केस के सिलसिले में चंदन से पूछताछ करने के लिए उसके घर पर आई थी, और जब आप पूछताछ पूरी करने के बाद उन्हें उसे उस केस से संबंधित थाने में ले जा रहे थे, तब उसकी किसी अज्ञात बाइक सवार ने गोली मारकर हत्या कर दी" दिलबाग सिंह ने अपनी नजर दोनो के ऊपर जमाते हुए बोला।

"जी हुआ तो कुछ ऐसा ही है, वैसे भी चंदन काफी डरा हुआ सा था, की अगर उसने मुंह खोला तो उसके साथी ही उसे मार डालेंगे, और उसकी आशंका घर से निकलते ही सच भी हो गई" मैंने दिलबाग सिंह की बात का जवाब दिया।

"उस केस के बारे में मुझें डिटेल से बताओ, जिस केस में आप उससे पूछताछ करनें के लिये आई थी" दिलबाग सिंह ने बोला।

"ये सौम्या बंसल है, बंसल इंडस्ट्रीज़ की मालकिन है, तीन साल पहले से इनके पति राजीव बंसल अपने पिता और सौतेली माँ की हत्या के जुर्म में जेल में अपनी उम्रकैद की सजा काट रहे है, उसी राजीव बंसल ने धीरज बवानिया नाम के एक गैंगस्टर को इन्हे मारने के लिए, जेल में रहते हुए सुपारी दी थी, इन्हे मारने की प्लानिंग को सिरे चढ़ाने के लिये ही चंदन जो कि धीरज बवानिया के गिरोह में काम करता था, कई बार जेल में जाकर राजीव बंसल से पिछले छह महीने में जाकर मिला था, उसी सिलसिले में हम लोग चंदन से पूछताछ करने आये थे" मैंने दिलबाग सिंह को बताया।

"ये बात कुछ अजीब नही लगती की जिस महिला को मारने के लिए जिस गैंग ने सुपारी ली हुई है, तुम उस महिला को उसी गैंग के गुर्गों के पास लेकर घूम रही हो" दिलबाग सिंह ने सही बात पकड़ी थी।

"इन्हे साथ मे लेकर घूमना मेरी मजबूरी है, क्यो कि जिन लोगो ने इन्हें मारने की सुपारी ली है, वे लोग इनके आफिस और घर पर इनकी घात लगाए बैठे है, इस बारे में चंदन ने भी हमे बताया था, और इत्तेफाक से ये सुपारी वाली बात भी हमे चंदन ने ही बताई थी" मैंने सफाई दी।

"ओह्ह, इस बात की कोई शिकायत आपने पुलिस में दर्ज करवाई है" इस बार दिलबाग सिंह सौम्या से मुखातिब हुआ।

"जी ! मेरी जान को खतरे की आशंका है, इसकी एक सूचना मेरे घर और आफिस के लोकल थाने में दर्ज है, और मेरे पर्सनल सुरक्षाकर्मी भी मेरे साथ रहते है, लेकिन मुझें उनसे भी ज्यादा भरोसा इन पर है इसलिए मैं इनके साथ रहती हूँ, मैंने इन्हें अपने लिए हायर किया हुआ है" सौम्या ने वक़्त के मुताबिक जवाब दिया।

"इस वक़्त आपके सुरक्षाकर्मी आपके साथ नही है" दिलबाग सिंह पता नही क्यो बेफिजूल के सवाल किए जा रहा था।

"वे मुझे घर से लेकर आफिस तक एस्कॉर्ट करते है, अभी तीन दिन से मैं इनके साथ हूँ, इसलिये वे लोग घर पर ही ड्यूटी कर रहे है" सौम्या ने फिर से जवाब दिया।

"जनाब! हम चंदन के साथ उसकी हत्या के समय क्यो साथ मे थे, इसके बारे में आपको बता दिया हैं, बाकी चंदन आपके इलाके का एक हिस्ट्री शीटर बदमाश था, और जांच में ये बात भी साबित हो जाएगी कि वो गैंगस्टर धीरज बवानिया के गिरोह के लिए काम भी करता था, तो अब हमे जाने की इजाजत मिल सकती है, क्यो कि अभी तक मैडम की जान के ऊपर से खतरा टला नही है, जब वे लोग दिन दहाड़े अपने साथी को मार सकते है तो, मैडम पर या मुझ पर गोलिया चलाने में क्या देर लगायेगे" मैंने दिलबाग सिंह के सवालो से उकताकर बोला।

"ठीक है आप अपना बयान दर्ज करवाकर जा सकती है, आगे की जांच में जब भी आपकी जरूरत पड़ेगी, हमारे बुलावे पर आपको आना पड़ेगा" ये बोलकर दिलबाग सिंह ने अपने एक हवलदार को आवाज लगा कर बुलाया और हमारा बयान दर्ज करने के लिये बोला।

थाने से बाहर निकलने में हमे एक घँटे से भी ज्यादा का समय लग गया था। सौम्या सहमी हुई सी इधर उधर नजर दौड़ाती हुई गाड़ी की तरफ बढ रही थी। कुछ ही पल में हम दोनो गाड़ी में समा चुके थे।

"इतनी डरी सहमी हुई क्यो हो" मैंने सौम्या के चेहरे पर नजर डालते हुए कहा।

"तुम्हारी बात याद करके डर लग रहा हैं, तुमने बोला है न कि वो जब चंदन को इस तरह से दिनदहाड़े गोली मार सकते है तो, फिर मुझे भी तो मार सकते है" सौम्या ने डरे हुए स्वर में बोला।

"अरे यार! उन लोगो को कोई सपना आ रहा है कि इस तरह से तुम दिल्ली की किस सड़क पर ऐसे घूम रही हो, इसके लिए वे लोग तुम्हे तुम्हारे घर से तुम्हे वाच करते, लेकिन अगर हमारे पीछे कोई नही हैं, तो इसका मतलब है कि वे लोग अभी तक तुम्हारे आफिस पर ही नजर रखे हुए है" मैंने सौम्या को दिलासा देते हुए बोला।

"इस प्रकार से तो मैं कभी आफिस ही नही जा पाऊंगी" सौम्या की चिंता भी वाजिब थी।

"मतलब, गुरु से पहले मुझे तुम्हारी समस्या को हल करना पड़ेगा" मैंने सौम्या कि तरफ देखते हुए बोला।

"मतलब" सौम्या की समझ मे मेरी बात नही आई थी।

"मतलब! पहले तुम्हारी आगवानी के इंतजार में खड़े उन टपोरियों की आवभगत हमे जाकर करनी पड़ेगी, इससे पहले की वो तुम पर कहीं कोई हमला करें, हमे उन्हें पहले ही ठिकाने लगाना होगा" मैने उसे अपनी बात का मतलब समझाया।

"ये तरीका ही सही रहेगा, क्या पता उन लोगो के जरिये ही हम लोग धीरज बवानिया और फिर देविका और मेघना तक भी पहुंच जाए" सौम्या को मेरा प्लान पसंद आया था।

तभी मेरे फोन पर मेरे प्यारे खबरी का नंबर चमकने लगा। मैंने तत्काल खबरी के फोन को उठाया।

"संध्या की फैमिली तो अभी गांव में ही रहती है, लेकिन संध्या दो साल से दिल्ली में ही रहती है और वही रहकर कोई कोर्स कर रही थी" खबरी फोन उठाते ही बिना किसी भूमिका के मुद्दे की बात पर आ गया था।

"संध्या के उस गांव वाले आशिक के बारे में ही पता चला" मैने पूछा।

"संध्या के आशिक और अपने गुरु का नाम एक ही है, इस गांव के सरपंच के लड़के का नाम भी रोमेश ही है, लेकिन वो बन्दा अपने गुरु की तरह से ही दिलफेंक निकला और गांव में इश्क संध्या से लड़ाता रहा और फरार किसी और लड़की के साथ हो गया, उसी की याद में संध्या अपनी डायरी के पेज काले करती थी" खबरी ने जो बोला था, उसी बात का मुझे अंदेशा मुझे भी था।

"संध्या के घरवालों को पता चल चुका है क्या की संध्या का कत्ल हो चुका है" मैने खबरी से पूछा।

"जी ! उन्हें पता चल चुका है और उनके कुछ परिवार वाले दिल्ली गए हुए है" खबरी ने बताया।

"ठीक है, अब तुम चाहो तो वापिस आ सकते हो, लेकिन आने से पहले संध्या और उसके आशिक के बीच के इश्क का कुछ प्रूफ लेते आना, जिससे मैं उसकी डायरी में मौजूद गुरु के नाम की क्लेरिफिकेशन यहाँ की पुलिस को दे सकूं" ये बोलकर मैने फोन काट दिया और सौम्या को गाड़ी उसके आफिस की तरफ ले जाने के लिए बोल दिया।

"अभी छह बजने वाले हैं, क्या अभी तक धीरज बवानिया के गुर्गे तुम्हारा इंतजार कर रहे होंगे" मै सौम्या की ओर देखकर बोली।

"लेकिन जिस तरह से तुम जा रही हो, ऐसे तो वो देखते ही मुझे शूट कर देंगे" सौम्या ने मेरी ओर देखकर बोला।

"तुम चिंता मत करो, तुम्हे कुछ नही होगा, तुम फोन करके अपने आफिस में सिर्फ इतना बोलो की आज 8 बजे से पहले कोई जाएगा नही, तुम ऑफिस आ रही हो" मैंने सौम्या को बोला।

"उससे क्या होगा" सौम्या असमंजस से बोली।

"मैं इस आपरेशन को अकेली नही करना चाहती हूँ, मैं दिल्ली पुलिस के साथ इस आपरेशन को करूँगी, मैं अभी एसीपी शर्मा जी से बात करने वाली हूँ, इस पूरे आपरेशन की तैयारी में कम से कम दो घँटे का वक़्त चाहिए, तुम जो खबर अपने आफिस में दोगी, वो खबर उन गुर्गो तक भी जरूर पहुंचेगी" मैंने सौम्या को बोला।

"क्या सच मे, आफिस का ही कोई आदमी इस खबर को उन लोगो तक पहुंचा देगा" सौम्या ने परेशानी भरे स्वर में बोला।

"तुम्हारे आफिस के उस मुखबिर के बारे में हम बाद में पता लगा लेंगे, अभी तुम वक़्त बर्बाद मत करो, जो बोला है उतना काम करो" मैंने सौम्या को बोला।

सौम्या मेरी बात सुनते ही आफिस में फोन करने लगी थी।

इधर मैं शर्मा जी को फोन लगा चुकी थी। शर्मा जी ने मेरा फोन चार पांच बेल जाने के बाद उठाया था।

"कहो रागिनी ! कैसे याद किया! माफी चाहता हूँ कि मैं रोमेश की ज्यादा मदद नही कर पा रहा हूँ, लेकिन मैंने रोमेश से बात की थी, अगर वो निर्दोष है तो उसे कुछ नही होगा" शर्मा जी बिना कुछ कहे ही रोमेश के बारे में सफाई देने में जुट गए थे।

"सर! आप रोमेश की तरफ से बेफिक्र हो जाइये, रोमेश तो कल उस केस से फ्री हो जाएगा, मुझे अभी आपकी मदद एक गैंगस्टर के खिलाफ एक पुलिस आपरेशन के लिए चाहिए" मैने शर्मा जी को बोला।

"बोलो कौन सा गैंगस्टर है, और क्या मामला है" शर्मा जी ने गंभीरता से पूछा।

शर्मा जी के पूछते ही मैं सौम्या का पूरा मामला बताती चली गई, मैंने आज सुबह जेल से राजीव के मुलाकातियों से लिस्ट निकलवाने से लेकर धीरज बवानिया के गुर्गे चंदन की पूरी बात शर्मा जी को बता दी।

"मैं समझ गया रागिनी, मैं अभी डिपार्टमेंट में बात करके, स्पेशल ब्रांच से एक टीम वहां भेजता हूँ, उन लोगो की देखरेख में जो भी संभव हो वो तुम कर सकती हो, मैं अभी पंद्रह मिनट में कालबैक कर रहा हूँ" शर्मा जी ने मुझे आश्वासन दिया।

उसके बाद मैंने फोन काट दिया। तब तक सौम्या भी आफिस में अपने आने की खबर दे चुकी थी।


जारी रहेगा_____✍️
Nice update...
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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