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Apan ki ghazlo ka namuna ju apan ki story Dark Love me dekh sakte hoSayri gazal apun ki thread se lelo,

Apan ki ghazlo ka namuna ju apan ki story Dark Love me dekh sakte hoSayri gazal apun ki thread se lelo,

Fokar not man, sab manage ho jayega,but pahla focus family pe karoShayri ghazal apan khud hi likh leta hai, bole to badka wala shayar hai apan, but baat wahi hai time aur mood, pahle apan job nahi karta tha aur ghar ki koi responsibility bhi nahi thi to apan free mind se sab likh leta tha but ab dimag me duniya bhar ka tention ghus gayla hai is liye thoda uneasy ho gaya hai![]()
AvasyaApan ki ghazlo ka namuna ju apan ki story Dark Love me dekh sakte ho![]()

Mostly wahi kar raha apan, aur abhi to aur bhi manage karna mushkil ho jayega kyoki shadi ke bandhan me bandhne wala hai apanFokar not man, sab manage ho jayega,but pahla focus family pe karo![]()
Apan ki stories me jaha kahi bhi poetry dikhegi wo sab apan ki likhi hui hi hogi, Real life me apan kai jagah mushayre me ja chuka hai, and trust me sabne yahi bola mind blowing ghazal likhte ho, Ab time ki kami ki vajah se likhna band kar diya hai but ab tak apan ne 300+ ghazals likh chuka haiAvasya![]()

Bahut hi shaandar update diya hai Raj_sharma bhai....#18
मेरी बात सुनकर सौम्या ने सहमति में अपनी गर्दन हिलाई और गाड़ी को आगे बढ़ा दिया।
अभी गाड़ी कुछ ही मीटर आगे बढ़ी थी कि एक साथ दो गाड़िया ठीक हमारे सामने आकर रुकी और उसमे से तकरीबन सात आठ लोग उतरकर हमारी गाड़ी की ओर बढ़े।
इतने लोगो को अपनी गाड़ी की तरफ आते हुए देखकर सौम्या के चेहरे पर भय के चिन्ह साफ देखे जा
सकते थे। लेकिन मेरी पिस्टल पर मेरी उंगलियां कस चुकी थी।
उनमे से एक लड़के ने आकर हमारी गाड़ी के शीशे पर खटखट की। सौम्या अभी भी भयभीत नजरो से उन लड़कों की ओर देख रही थी।
मैंने सौम्या की ड्राइविंग सीट पर ही बैठे रहने का इशारा किया और खुद दरवाजा खोलकर गाड़ी से बाहर आ गई।
"क्या तकलीफ है" मैंने उस लड़के की आँखों मे आँखे डाल कर पूछा।
"इतनी खूबसूरत लडकिया कभी इस इलाके में देखी नही थी, इसलिए रोकने का दिल कर गया" उसने बदतमीजी से मेरी तरफ अपने हाथ को बढ़ाकर मुझे छूने की कोशिश की, लेकिन मैं पलक झपकते ही उसकी पहुंच से दूर हो गई।
"सच बोलो ! किसके कहने पर हमे रोका है, नही तो एक भी बन्दा अपने पैरों पर वापिस नही जाएगा" मैंने उनकी तरफ देखते हुए बोला तो वो सब बाहुबली दांत चियार कर हँसने लगे थे।
शायद एक लड़की के मुंह से ऐसे शब्द उन शोहदों ने पहली बार सुने थे, लेकिन मुझे वे लोग शोहदे नही लग रहे थे, शोहदे दो गाड़ियों में इस तरह से लड़कियों को छेड़ने के लिये नही निकलते है।
आसानी से वे लोग मुझे बताने वाले लग नही रहे थे। उनसे कुछ उगलवाने के लिए उनकी खाल में भूसा भरना जरूरी था।
"बहुत हँसी आ रही हैं, मैने कोई जोक सुनाया था क्या" ये बोलकर मेरा एक पाँव हवा में लहराया और उस छपरी को अपने साथ लपेटते हुए सामने वाली दीवार से चिपका दिया।
इस वक़्त वो बन्दा दीवार से चिपका हुआ था और मेरा पाँव उसकी गर्दन पर था। ये मेरा पसंदीदा दांव था, लेकिन दिल्ली जैसे शहर में आजमाने का मौका कम ही मिलता था।
अपने साथी की ऐसी हालत हो जाने का तो बाकी लोगो को सपने में भी गुमान नही था।
तभी दो लड़कों ने एक साथ मुझ पर अपने हाथों के मुक्के बनाकर मेरी ओर चलाये, मेरी पाँव की फ्लाइंग किक अब उस बन्दे की गर्दन का त्याग करके उन दोनो लड़को की ओर घूमी, और यकीन मानिये पूरे डेढ़ सौ किलोमीटर की रफ्तार से वो किक उन दोनों को एक साथ अपने साथ बहाकर ले गई।
वो सभी छिछोरे मेरी तरफ ऐसे देख रहे थे की मानो उनकी जिंदगी में कोई जलजला आ गया हो, अब एक साथ उन पांचों लड़को ने मुझें घेर लिया था, लेकिन तब तक सौम्या भी अपनी गाड़ी से बाहर निकल आई थी, और अपने बैग से अपनी पिस्टल निकाल कर उन लड़कों पर तान चुकी थी।
"सौम्या अभी इन्हें गोली मत मारना, ये साले सिर्फ लातो में ही अभी ढेर हो जायेगे" मेरे ये बोलते ही जैसे वहां कोई बिजली कौंधी हो।
मैंने अपने हाथ मे अपनी पॉकेट से निकाल कर पेन ले लिया था, और इस वक़्त मेरे पांव ही नही मेरे हाथ भी सिर्फ घुमते हुए नजर आ रहे थे, लेकिन उन्हें कोई देख नही पा रहा था, महज तीन मिनट में उन लोगो के चेहरों पर अनगनित निशान उस पेन से कटने की वजह से बन गए थे और वे सभी अपने चेहरों को अपने हाथों से छुपाए हुए दर्द से कराहते हुए जमीन पर लोट लगा रहे थे।
तभी मैंने उनमे से एक बन्दे को उसकी गिरेबान पकड़ कर उठाया और अपनी दो उंगलियों को उसकी आँखों के पास लहराया।
"अब दो सेकेण्ड में बता की किसके कहने पर यहां आए थे, नही तो तेरी दोनो आंखे अभी हमेशा के लिए बुझ जायेगी और तू अंधा होकर घूमेगा" मैंने बर्फ से भी सर्द स्वर में उसे बोला। तब तक सौम्या भी मेरे करीब आकर खड़ी हो चुकी थी।
"हमारे पास तो चंदन भाई का फोन आया था, की इस मकान में कोई भी आये तो उन्हें पकड़ कर उनसे पूछताछ करना कि वो यहां क्यो आये है" उस लड़के की अंधा होने के नाम से ही उसके पिछवाड़े से हवा निकल चुकी थी, इसलिए वो बिना रुके बोल रहा था।
"ये चंदन कौन है" मैंने उससे अगला सवाल किया।
"नांगलोई में रहता है जी, नजफगढ़ रोड पर एक कॉलोनी है, उसमे रहता है" उस लड़के ने फिर जवाब दिया।
"उसका पता ठिकाना बोल और वो नंबर बता जिस नंबर से उसका फोन आया था" उसने फोरन से पेश्तर मेरे इस सवाल का भी जवाब दिया।
"लेकिन इन लोगो को ऐसे छोड़कर जाएंगे तो ये पहले से ही उस चंदन को खबर कर देंगे" सौम्या मेरी ओर देखकर बोली।
"इस बात का जवाब मै गाड़ी में बैठकर दूँगी, अभी हम जिस काम के लिए जा रहे थे, वो काम ज्यादा जरूरी है, इन टटपुंजियो से तो कभी भी निबट लेंगे" मैने सौम्या को जवाब दिया।
"हॉं तो भाई लोगो ! तुम लोगो की इतनी सेवा ही काफी है या अभी और सेवा पानी करूँ तुम्हारी" मैं एक बार फिर से उन सभी की ओर मुखातिब हुई।
वे सभी इस तरह से बेदम पड़े थे, की बिना पानी पिलाये वे लोग होश में नही आने वाले थे।
"तुम्हारी गाड़ियों में पानी तो होगा न, इन्हे लाकर पिला दे, नही तो रागिनी के हाथ से मार ख़ाया हुआ इंसान चार घँटे से पहले होश में नही आता" मैंने उस लड़के को बोला, जो मेरे सवालो का जवाब दे रहा था, उसके बाद मैं गाड़ी की ओर बढ़ गई।
सौम्या भी फोरन से पेश्तर मेरे पीछे लपकी।
"अब जवाब दो ! इन लोगो को ऐसे ही क्यो छोड़ दिया" सौम्या ने एक बार फिर से ड्राइविंग सीट सम्हालते हुए पूछा।
"अगर ये हरामखोर एक दो होते तो इन्हे बांधकर डिक्की में भी डाल लेते, लेकिन इन आठ लोगो को एक साथ कैसे सम्हालते, इसलिए उनको यही छोड़ना ठीक लगा, अब ये अपने बाप को बोलेंगे की एक लड़की ने उनकी क्या हालत की है तो, अब वो फिर से ऐसी टुच्ची हरकत करनें से बाज आएंगे, दूसरी बात या तो देविका के मकान की निगरानी की जा रही है, या फिर हमारा पीछा किया जा रहा है, अब मैं सेंट्रल जेल के रास्ते तक ये देखना चाहती हूँ कि हमारे पीछे कौन आ रहा है" मैने एक साथ सारे कारण सौम्या को समझा दिए थे।
सौम्या मुरीद नजरो से मेरी ओर देखते हुए मुस्करा दी।
"तुम्हारे हाथ पांव ही नही बल्कि दिमाग भी तेज चलता है" सौम्या ने मुरीद स्वर में ही बोला।
"एक बात समझ नही आई कि ये साले कैसे बदमाश थे, जिनके पास न हथियार थे, न कुछ" सौम्या एक बार फिर से बोली।
"साइक्लोजिकल उन्होंने सोचा होगा कि दो लड़कियां ही तो है, आठ लड़के तो दो लड़कियों को चुटकियों में काबू कर लेंगे, इसलिए या तो वे हथियार लाये नही होंगे, और अगर लाये भी होंगे तो उन्हें मार खाते हुए साँस लेने की फुरसत तो मिल नही रही थी, हथियार निकालने की कहाँ से मिलती"
मेरी बात सुनते ही सौम्या की एक जोरदार खिलखिलाती हुई हँसी उस गाड़ी में गूँजी। लेकिन मेरी नजर अपने साइड मिरर में अपने पीछे आती हुई गाड़ी को ही ढूंढने की कोशिश कर रही थी।
सेंट्रल जेल तक पहुंचने में तकरीबन एक घन्टा लग गया था। राजीव बंसल के मुलाकातियों का डाटा निकलवाने के मेरे पास दो तरीक़े थे, एक तरीका था एक बार फिर से मैं एसीपी शर्मा जी को परेशान करती, जो कि मुझें इस बार गवांरा नही हुआ।
दूसरा रास्ता था कि मैं मुलाकाती कक्ष में जाकर गुरू की स्टाइल में कुछ चक्कर चलाऊँ और अपना काम निकाल लूं। इस समय मुझे गुरु की स्टाइल में इस काम को अंजाम देना सही लगा।
मैं सौम्या के साथ जेल के उस मुलाकाती कक्ष में पहुंची। वहाँ इस वक़्त उस दिन के मुलाकातियों का
तांता लगा हुआ था।
मेरी नजर किसी ऐसे काम के बन्दे को ढूंढ रही थी, जो मेरे काम को दिलचस्पी लेकर कर दे।
तभी एक सिपाही एक रजिस्टर को हाथ में थामे हुए मेरी बगल में से गुजरा। मैं पता नही क्या सोचकर उस सिपाही के पीछे चल पड़ी।
वो सिपाही कुछ लोगो के पास जाकर खड़ा हुआ, उन लोगो मे से एक बन्दे ने उस सिपाही का हाथ अपने हाथ मे पकड़ा और उसकी हथेली में एक नोट फंसाकर उसकी हथेली को बन्द करने लगा।
वो सिपाही गर्दन भले ही न में हिला रहा हो, लेकिन उसकी मुट्ठी लगातार उस नोट को भींचने में लगी हुई थी।
जिस प्रकार के बन्दे को मैं तलाश रही थी, वो मेरी नजर के सामने था, थोड़ी सी न नुकर का ड्रामा करके उस सिपाही ने उस नोट को अपनी जेब के हवाले किया और उन लोगो को कुछ बोलकर वापिस हमारी और ही आने लगा था।
जैसे ही वो मेरे पास से गुजरा, मैने उसकी पट्टिका पर लिखा हुआ नाम पढ़ा। जिस पर मोटे अक्षर में लालचंद लिखा हुआ था।
"लालचंद जी" उसका नाम पढ़ते ही मैने उसे आवाज लगा दी थी। जैसे ही उसके नाम की आवाज उसके कानों में पड़ी, उसके कदम जहाँ के तहाँ रुक गए।
उसने पलट कर हमारी और देखा, मैंने उसके देखते ही एक मतलबी मुस्कान उसकी तरफ फेंकी। उसने भी अपने पांव उलटे खिंचने में पल भर की भी देरी नही लगाई।
"जी मैडम!आपने ही मुझे पुकारा था" लालचंद ने अपने स्वर में मिश्री घोलते हुए कहा, जिसकी आमतौर पर पुलिसियो से अपेक्षा नही की जाती थी, क्यो कि वर्दी पहनते ही एक आम पुलिसिये की चाल में और आवाज में एक अजीब सा अक्खड़पन आ जाता है।
लेकिन इस वक़्त मेरा उस मिश्री जैसी आवाज का जवाब अपने स्वर में गुड़ की देशी मिठास घोलकर देना जरूरी थी।
"जी ! आपसे एक काम है, दो मिनट के लिए आपसे बात कर सकते है" मैने लालचंद को बोला।
"जी बोलये मैडम, मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ" लालचंद अभी तक मिश्री की डली ही बना हुआ था।
"कही बैठकर बात हो सकती है क्या आपसे" मैंने अब दो मिनट से ज्यादा का कार्यक्रम उसे समझाया।
"मैडम मैं अभी पांच मिनट में एक आर्डर की कॉपी अपने साहब को देकर अभी हाजिर होता हूँ, फिर बात करते है" लालचंद ये बोलकर वहां रुका नही क्यो की अभी शायद उसी आर्डर के पहिये उन लोगो ने लगाए थे, जिनके पास से अभी नोट अपनी जेब मे डालकर आया था।
हमे कोई दस मिनट के बाद लालचंद ने ले जाकर एक कमरे में बैठा दिया और खुद भी एक कुर्सी खींचकर हमारे पास ही बैठ गया।
"बोलिये मैडम, क्या काम है आपको" लालचंद ने पूछा।
"एक उम्र कैदी की पिछले दो साल की जानकारी चाहिये कि उससे किस किस ने जेल में आकर मुलाकात की" मैंने बिना कोई भूमिका बनाये हुए ही सीधा बोला।
"आप कौन हो मैडम, ऐसा काम करने के लिए हमे आज पहली बार किसी ने बोला है" लालचंद ने असमंजस से मेरी ओर देखा।
"काम भले ही किसी ने पहली बार बोला है, लेकिन काम इतना मुश्किल भी नही है, तुम्हे बस दो साल के रजिस्टर ही चेक करने होंगे" मैंने लालचंद को बोला।
"अब रजिस्टर नही चेक करना पड़ता, सब कम्प्यूटर में चेक करना पड़ता है" लालचंद ने बिना पूछे ही बताया।
"ये तो और भी आसान है लालचंद जी, और इस आसान से काम के मै आपको पांच हजार रु दे सकती हूँ" मैंने उसके आगे चुग्गा फेंका।
"लेकिन आपने अभी तक नही बताया कि आप हो कौन" लालचंद को फिर से अपना पुराना सवाल याद आ गया था।
"मैं एक प्राइवेट डिटेक्टिव हूँ, मुझे एक केस के सिलसिले में उस कैदी की डिटेल चाहिए" मैंने अपना वास्तविक परिचय दिया।
"केस क्या है" लालचंद को पूरी कहानी जाननी थी।
"यार तुम आम खाओ न, गुठलियां गिनने के चक्कर में क्यो पड़े हो" मैंने इस बार उसे हल्का सा हड़काया।
"मैंने अगर ये काम किया तो, जिंदगी में पहली बार ऐसा काम करूँगा, मैं ये जानना चाहता हूँ कि इस काम से मेरी नौकरी को तो कोई खतरा नही हैं" लालचंद को अपनी नौकरी के बारे में फिक्रमंद होना भी लाजिमी था।
"ये जो मैडम मेरे साथ बैठी है, इनके पति है वे, जिनकी डिटेल हमे निकलवानी है, वो एक मर्डर के केस में उम्रकैद की सजा पा चुके है, मैडम उनसे तलाक लेकर अपना घर फिर से बसाना चाहती है, अब तुम्ही बताओ एक क़ातिल की बीवी बनकर कैसे रहेगी ये मैडम समाज मे, क्या इसे अपनी जिंदगी जीने का अधिकार नही है, क्या इसे अपनी नई दुनिया बसाने का अधिकार नही है" मैंने एक भावपूर्ण कहानी उसे सुनाई।
मेरे बोलने के दौरान वो एकटक सौम्या की ओर ही देख रहा था, तभी सौम्या ने उसके हाथ पर अपना हाथ रखा।
जारी रहेगा_____![]()
Are apun socha ju ka kaam ho chuka hoga?Mostly wahi kar raha apan, aur abhi to aur bhi manage karna mushkil ho jayega kyoki shadi ke bandhan me bandhne wala hai apan![]()
Tum to sach me chupe Rustam nikle bhopa swamiApan ki stories me jaha kahi bhi poetry dikhegi wo sab apan ki likhi hui hi hogi, Real life me apan kai jagah mushayre me ja chuka hai, and trust me sabne yahi bola mind blowing ghazal likhte ho, Ab time ki kami ki vajah se likhna band kar diya hai but ab tak apan ne 300+ ghazals likh chuka hai![]()

Thank you very much for your valuable review and support parkas bhaiBahut hi shaandar update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and lovely update....

यहाँ तक की कहानी अच्छी है.
सारे करैक्टर भी अच्छे दिखाए गए हैं.
वैसे, कहानी का मेन करैक्टर, यानी की 'रोमेश' हिंदी के प्रसिद्ध रहस्य - रोमाँच लेखक श्री सुरेंद्र मोहन पाठक द्वारा रचित डिटेक्टिव जर्नलिस्ट 'सुनील' से heavily Inspired और उसी तरह तराशा हुआ लग रहा है.
कोई ना, अपेक्षा तो यही है की सुनील की तरह ही ये भी गहरे अँधेरे में भी राह तलाश लेगा.
इस कहानी के लिए ढेर सारी शुभकामनाएँ... ऐसा कहानी लिखो की पढ़ते ही दिल गार्डन - गार्डन हो जाए.![]()
thankyou for the update !#18
मेरी बात सुनकर सौम्या ने सहमति में अपनी गर्दन हिलाई और गाड़ी को आगे बढ़ा दिया।
मेरे बोलने के दौरान वो एकटक सौम्या की ओर ही देख रहा था, तभी सौम्या ने उसके हाथ पर अपना हाथ रखा।
जारी रहेगा_____![]()